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  • बिहार हादसे पर देश के शीर्ष नेताओं का दुख, नालंदा भगदड़ ने झकझोरा

    बिहार हादसे पर देश के शीर्ष नेताओं का दुख, नालंदा भगदड़ ने झकझोरा


    नई दिल्ली Nalanda जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र स्थित शीतला माता मंदिर में मंगलवार को हुए दर्दनाक भगदड़ हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। पूजा-अर्चना के दौरान अचानक भीड़ बेकाबू हो गई, जिससे मची भगदड़ में 8 श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि 8 से 10 लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और मातम का माहौल है।

    राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने जताया गहरा शोक

    इस दुखद घटना पर Droupadi Murmu ने गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नालंदा में मंदिर भगदड़ में श्रद्धालुओं की मौत का समाचार अत्यंत दुखद है और शोक संतप्त परिवारों के प्रति उनकी संवेदनाएं हैं। साथ ही उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। वहीं, C. P. Radhakrishnan ने भी हादसे पर दुख जताते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की।

    🇮🇳 प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की मदद की घोषणा

    इससे पहले Narendra Modi ने भी हादसे पर गहरा दुख जताया और मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये तथा घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
    वहीं, Nitish Kumar ने मृतकों के परिवारों को 6 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया।

    कैसे हुआ हादसा?

    जानकारी के अनुसार, मंदिर में पूजा के दौरान अचानक अत्यधिक भीड़ जमा हो गई। भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण स्थिति तेजी से बिगड़ गई और भगदड़ मच गई। लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ।

    राहत और बचाव कार्य जारी

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में लाने और पीड़ितों की हर संभव मदद करने में जुटा है।

    लापरवाही पर कार्रवाई

    हादसे के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कर्तव्यहीनता के आरोप में दीपनगर थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है ताकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सके।

    सबक और सतर्कता की जरूरत

    यह हादसा एक बार फिर भीड़ प्रबंधन की कमजोरियों को उजागर करता है। धार्मिक आयोजनों में भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम बेहद जरूरी हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

  • KP ओली को गिरफ्तार करके फंस गए पीएम बालेन? नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस

    KP ओली को गिरफ्तार करके फंस गए पीएम बालेन? नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस


    काठमांडू। नेपाल में पूर्व प्रधानमंत्री के पी ओली की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। उनके समर्थक अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन कर रिहाई की मांग कर रहे हैं। इसी बीच नेपाल सुपीम कोर्ट ने सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए गिरफ्तारी पर स्पष्टीकरण मांगा है और जवाब के लिए तीन दिन का समय दिया है।
    यह आदेश ओली की ओली की पत्नी राधिका शाक्य द्वारा दायर याचिका पर आया। याचिका में गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए तुरंत रिहाई की मांग की गई थी। हालांकि जस्टिस मेघराज पोखरेल की एकल पीठ ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। इससे पहले स्वास्थ्य कारणों से जूझ रहे ओली ने काठमांडू जिला अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी दी, जहां उनकी हिरासत पांच दिन और बढ़ा दी गई।

    दरअसल ‘जेनजी आंदोलन’ के दौरान हुई 76 लोगों की मौत की जांच के लिए गठित Gauri Bahadur Karki Commission ने अपनी रिपोर्ट में कई नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए थे। नई सरकार ने पहली ही कैबिनेट बैठक में आयोग की सिफारिशें लागू कर दीं, जिसके बाद कार्रवाई तेज हुई। रिपोर्ट में कहा गया कि आंदोलन के दौरान हिंसा की जानकारी न होने का दावा “आपराधिक लापरवाही” की श्रेणी में आ सकता है।

    गौरतलब है कि सितंबर 2025 में सोशल मीडिया प्रतिबंध के बाद नेपाल में व्यापक विरोध शुरू हुआ था, जो बाद में देशव्यापी आंदोलन में बदल गया। इस दौरान सरकारी कार्यालयों में आगजनी और संसद भवन को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आईं। राजनीतिक संकट के बाद अंतरिम व्यवस्था बनी और चुनाव कराए गए, जिसके बाद नई सरकार का गठन हुआ।

    अब ओली की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर नेपाल की राजनीति गरमा गई है और अदालत के नोटिस से सरकार पर दबाव बढ़ गया है।

  • पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए टेनिस दिग्गज लिएंडर पेस

    पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए टेनिस दिग्गज लिएंडर पेस

    नई दिल्ली. भारतीय टेनिस के दिग्गज खिलाड़ी लिएंडर पेस ने भाजपा का दामन थाम लिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले उनका यह कदम राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बन गया है। पेस, जो भारत के सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा नेता सुकांता मजुमादर भी मौजूद रहे। पेस का पार्टी में शामिल होना पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। फिलहाल पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गर्म होता जा रहा है और सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।
    किरण रिजिजू ने लिएंडर को लेकर क्या कहा?
    इस मौके पर रिजिजू ने कहा, ‘लिएंडर पेस का भाजपा परिवार में शामिल होना ऐतिहासिक है।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 वर्षों में खेल और खिलाड़ियों को लगातार बढ़ावा दिया है।’ वहीं लिएंडर ने इसे अपने जीवन का सबसे खास दिन बताया। उन्होंने कहा, ‘यह मेरे जीवन का बहुत बड़ा दिन है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह जी और नितिन नबीन जी का धन्यवाद करना चाहता हूं। यह मेरे लिए खेल और युवाओं की सेवा करने का बड़ा अवसर है।’

    ‘अब युवाओं के लिए काम करूंगा’
    लिएंडर पेस ने भारत के लिए ओलंपिक पदक और कई ग्रैंड स्लैम जीते हैं और अब राजनीति के मैदान में अपनी नई पारी खेलने जा रहे हैं। उनका भाजपा से जुड़ना यह दिखाता है कि पार्टी खेल जगत के बड़े चेहरों को अपने साथ जोड़कर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। पेस ने अपने करियर को याद करते हुए कहा कि अब वह नई जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने 40 साल देश के लिए खेला है, अब समय है युवाओं की सेवा करने का।’ लिएंडर पेस ने केंद्र सरकार की खेल योजनाओं की भी सराहना की।

    उन्होंने कहा, ‘खेलो इंडिया मूवमेंट और टॉप्स स्कीम बहुत शानदार पहल हैं। मैंने देखा है कि किरेन रिजिजू जी ने टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के लिए कितनी मेहनत की। प्रधानमंत्री जी ने उन्हें जो रोल दिया था, उसे बखूबी निभाया।’

    बंगाल में खेल सुविधाओं की कमी पर बोले पेस
    पेस ने बंगाल में खेल सुविधाओं की कमी पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, ‘ भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। हमें अगले 20-25 वर्षों में स्पोर्ट्स एजुकेशन पर ध्यान देना चाहिए। 1986 में पश्चिम बंगाल में खेल का ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था। आज भी बंगाल में इंडोर टेनिस कोर्ट की कमी है। बंगाल, तमिलनाडु और बिहार बेहतर कर सकते हैं, लेकिन हमें युवाओं को खेल शिक्षा के जरिए प्रेरित और सशक्त बनाने पर ध्यान देना होगा। मेरा सपना है कि भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए बराबरी के अवसर वाली स्कॉलरशिप प्रोग्राम शुरू किया जाए।’

    बंगाल चुनाव से पहले बड़ा संदेश
    भाजपा को उम्मीद है कि पेस की लोकप्रियता से खासकर युवा और खेल प्रेमी वोटर्स पर सकारात्मक असर पड़ेगा। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि पेस चुनाव लड़ेंगे या नहीं, लेकिन यह तय माना जा रहा है कि वह चुनाव प्रचार में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनकी छवि और अनुभव पार्टी के लिए एक मजबूत चेहरा साबित हो सकते हैं।

    लिएंडर के पिता का पिछले साल हुआ था निधन
    लिएंडर पेस का जन्म 17 जून 1973 को कोलकाता में हुआ था। उनके दिवंगत पिता वेस पेस ने 1972 म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था और उनकी मां जेनिफर पेस ने 1980 एशियन बास्केटबॉल टीम की अगुआई कर अपना लोहा मनवाया था। लिएंडर के पिता वेस पेस का पिछले साल ही 80 साल की उम्र में निधन हुआ था।

    अटलांटा ओलंपिक में लिएंडर ने जीता था कांस्य
    लिएंडर ने 1996 में अटलांटा ओलंपिक में पुरुष टेनिस के एकल वर्ग में ब्राजील के फर्नांडो मेलिगेनी को मात देकर कांस्य पदक अपने नाम किया था। साथ ही वह केडी जाधव के बाद पहले भारतीय खिलाड़ी बने, जिन्होंने व्यक्तिगत ओलंपिक मेडल जीता। उनकी सफलताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उन्हें 1996-97 में खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया था। इसके अलावा वह 1990 में अर्जुन अवॉर्ड, 2001 में पद्म श्री अवॉर्ड और जनवरी 2014 में पद्म भूषण अवॉर्ड से भी नवाजे जा चुके हैं।

    पुरुष और मिक्स्ड डबल्स के महारथी हैं लिएंडर
    वैसे तो पेस ने पुरुष एकल में कोई ग्रैंडस्लैम नहीं जीता, लेकिन पुरुष युगल में उनके नाम आठ ग्रैंडस्लैम ट्रॉफीज हैं। लिएंडर ने 2012 में एकमात्र ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीता था। इसके अलावा वह 1999, 2001 और 2009 में फ्रेंच ओपन, 1999 में विंबलडन और 2006, 2009 और 2013 में यूएस ओपन का खिताब भी जीत चुके हैं। वह मिक्स्ड डबल्स में 10 ग्रैंडस्लैम खिताब जीत चुके हैं। इनमें तीन ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब (2003, 2010, 2015), एक फ्रेंच ओपन खिताब (2016), चार विंबलडन खिताब (1999, 2003, 2010 और 2015) और दो यूएस ओपन खिताब (2008 और 2015) शामिल हैं।

  • मजदूर के बेटे से IPL स्टार तक बृजेश शर्मा ने डेब्यू मैच में मचाया धमाका संघर्ष और जुनून की फिल्मी कहानी

    मजदूर के बेटे से IPL स्टार तक बृजेश शर्मा ने डेब्यू मैच में मचाया धमाका संघर्ष और जुनून की फिल्मी कहानी

    नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में एक नया नाम तेजी से सुर्खियों में उभरा है और वह है बृजेश शर्मा राजस्थान रॉयल्स के लिए डेब्यू करने वाले इस तेज गेंदबाज ने अपने पहले ही मैच में ऐसा प्रदर्शन किया कि हर कोई उनकी चर्चा करने लगा। Indian Premier League 2026 के इस मुकाबले में Rajasthan Royals और Chennai Super Kings आमने सामने थे जहां राजस्थान ने शानदार जीत दर्ज की लेकिन इस जीत के साथ एक नई कहानी भी जन्म ले चुकी थी।

    Udhampur के रहने वाले 27 वर्षीय बृजेश शर्मा एक अनकैप्ड राइट आर्म पेसर हैं जिनका क्रिकेट सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। खास बात यह है कि आईपीएल में चुने जाने से पहले उन्होंने प्रोफेशनल क्रिकेट तक नहीं खेली थी। इसके बावजूद राजस्थान रॉयल्स ने उन पर भरोसा जताया और ऑक्शन में उन्हें उनके बेस प्राइस 30 लाख रुपये में अपनी टीम में शामिल किया। यह फैसला अब पूरी तरह सही साबित होता नजर आ रहा है।

    गुवाहाटी में खेले गए इस मैच में राजस्थान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया और कप्तान Riyan Parag के इस निर्णय को बृजेश शर्मा ने सही साबित कर दिखाया। उन्होंने तीन ओवर में सिर्फ 17 रन दिए और एक महत्वपूर्ण विकेट भी हासिल किया। उनकी सधी हुई लाइन लेंथ और आत्मविश्वास से भरी गेंदबाजी ने चेन्नई के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। डेब्यू मैच में इतना संयम और नियंत्रण दिखाना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी बात मानी जाती है।

    बृजेश का यह सफर आसान नहीं रहा। वह पहले जम्मू कश्मीर की स्टेट टीम का हिस्सा थे लेकिन बाद में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। यह उनके करियर का कठिन दौर था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। खुद को साबित करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत जारी रखी और दिल्ली के यूनिक स्पोर्ट्स क्लब में कोच दीपक पुनिया के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग शुरू की। इस दौरान उन्होंने खेल के प्रति अनुशासन और बड़े स्तर की क्रिकेट की समझ विकसित की जिसने उनके करियर को नई दिशा दी।

    उनकी प्रतिभा की झलक 2025 की बंगाल प्रो टी20 लीग में देखने को मिली जहां उन्होंने मालदा स्मैशर्स की ओर से खेलते हुए सात मैचों में 11 विकेट झटके और टूर्नामेंट के टॉप गेंदबाजों में शामिल रहे। यही प्रदर्शन उनके लिए आईपीएल का दरवाजा खोलने में मददगार साबित हुआ।

    बृजेश शर्मा का पारिवारिक बैकग्राउंड भी बेहद साधारण है। उनके पिता मजदूरी करते हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया। बृजेश ने खुद स्वीकार किया कि उनके संघर्ष के दिनों में परिवार और दोस्तों ने आर्थिक और मानसिक रूप से उनका भरपूर साथ दिया। यही समर्थन उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना।

    अगर मैच की बात करें तो चेन्नई सुपर किंग्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 127 रन बनाए थे जिसे राजस्थान रॉयल्स ने आसानी से हासिल कर लिया। इस जीत में जहां बल्लेबाजों का योगदान रहा वहीं बृजेश शर्मा की गेंदबाजी ने टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई।

    बृजेश शर्मा की कहानी यह साबित करती है कि अगर मेहनत और जुनून सच्चा हो तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। एक अनजान खिलाड़ी से आईपीएल स्टार बनने तक का उनका सफर आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है।

  • इजरायल के पास परमाणु हथियार, तो ईरान क्यों नहीं?

    इजरायल के पास परमाणु हथियार, तो ईरान क्यों नहीं?


    तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह सवाल फिर चर्चा में है कि जब के पास परमाणु हथियार होने की बात कही जाती है, तो को इन्हें हासिल करने से क्यों रोका जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका कारण अंतरराष्ट्रीय कानून की संरचना और देशों की संधियों में भागीदारी से जुड़ा है।
    विशेषज्ञ बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानून में परमाणु हथियार रखने पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है। केवल वे देश ही बाध्य होते हैं, जिन्होंने संबंधित संधियों को स्वीकार किया है। इसी संदर्भ में Nuclear Non-Proliferation Treaty यानी एनपीटी को अहम माना जाता है, जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देना है

    इस संधि के तहत दुनिया को परमाणु हथियार संपन्न और गैर-परमाणु देशों में बांटा गया। 1 जनवरी 1967 से पहले परमाणु परीक्षण करने वाले देशों अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन—को परमाणु संपन्न माना गया, जबकि अन्य देशों ने ऐसे हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता जताई।

    ईरान 1970 से एनपीटी का सदस्य है, इसलिए वह गैर-परमाणु देश की श्रेणी में आता है और उसे परमाणु हथियार विकसित न करने की शर्तों का पालन करना होता है। साथ ही उसका परमाणु कार्यक्रम International Atomic Energy Agency की निगरानी में रहता है।

    इसके विपरीत, इजरायल एनपीटी का सदस्य नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, कोई भी देश उस संधि से बाध्य नहीं होता जिसका वह हिस्सा नहीं है। इसी वजह से इजरायल पर एनपीटी के नियम लागू नहीं होते।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यही कारण है कि दोनों देशों की कानूनी स्थिति अलग दिखाई देती है।

    इजरायल के अलावा India, Pakistan और North Korea जैसे देश भी एनपीटी के बाहर रहते हुए परमाणु क्षमता रखते हैं।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में परमाणु हथियारों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। केवल वे देश ही बाध्य होते हैं, जिन्होंने एनपीटी या 2017 की परमाणु हथियार निषेध संधि जैसे समझौतों को स्वीकार किया है। इस तरह ईरान और इजरायल के बीच अंतर किसी दोहरे मापदंड से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कानून की सहमति-आधारित व्यवस्था को दर्शाता है।

  • अमेरिका के लिए स्पेन ने सैन्य विमानों के लिए बंद किया एयरस्पेस

    अमेरिका के लिए स्पेन ने सैन्य विमानों के लिए बंद किया एयरस्पेस

    वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच स्पेन ने बड़ा फैसला लेते हुए अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। इस कदम के बाद अमेरिका अब अपने सैन्य अभियानों के लिए स्पेन के आसमान या वहां के सैन्य ठिकानों का उपयोग नहीं कर पाएगा। इसे ईरान से जुड़े हालात के बीच अमेरिका के लिए रणनीतिक झटका माना जा रहा है।
    स्पेन की रक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा कि उनका देश ईरान (Iran) के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं बनेगा। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी विमानों को न तो एयरस्पेस मिलेगा और न ही सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी। इस बयान से संकेत मिला है कि स्पेन इस पूरे संघर्ष से दूरी बनाए रखना चाहता है।

    इस फैसले का सीधा असर अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अब अमेरिकी विमानों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने होंगे, जिससे उड़ान का समय बढ़ेगा और संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। हालांकि स्पेन ने मानवीय और आपातकालीन उड़ानों को छूट दी है, लेकिन सैन्य मिशनों पर यह प्रतिबंध अहम माना जा रहा है।

    स्पेन सरकार का कहना है कि वह ऐसे किसी भी युद्ध का समर्थन नहीं करती जो अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हो। इसी आधार पर उसने यह निर्णय लिया है। स्पेन के नेताओं का मानना है कि इस तरह के संघर्ष से वैश्विक तनाव बढ़ता है और शांति प्रयास प्रभावित होते हैं।
    विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से अमेरिका और स्पेन के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। दोनों देशों के बीच पहले भी इस मुद्दे पर मतभेद रहे हैं, और अब एयरस्पेस बंद करने के फैसले से यह दूरी और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
  • युवाओं के लिए सुनहरा अवसर, BBMB भर्ती में आवेदन की आखिरी तारीख नजदीक

    युवाओं के लिए सुनहरा अवसर, BBMB भर्ती में आवेदन की आखिरी तारीख नजदीक


    नई दिल्ली सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। Bhakra Beas Management Board (बीबीएमबी) ने हिंदी ट्रांसलेटर के पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती के तहत कुल 6 पद भरे जाएंगे, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 19 अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथि

    बीबीएमबी की इस भर्ती के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन मोड में स्वीकार किए जा रहे हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते अपना आवेदन पूरा कर लें। आवेदन की अंतिम तिथि 19 अप्रैल तय की गई है, जिसके बाद कोई फॉर्म स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    योग्यता और पात्रता मानदंड

    हिंदी ट्रांसलेटर पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से संबंधित विषय में कम से कम ग्रेजुएशन की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही, अभ्यर्थियों के पास निर्धारित अनुभव और अन्य जरूरी पात्रता शर्तें भी पूरी होनी चाहिए।

    आयु सीमा में छूट का प्रावधान

    इस भर्ती के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 37 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 19 अप्रैल के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

    चयन प्रक्रिया कैसी होगी?

    उम्मीदवारों का चयन तीन चरणों में किया जाएगा—लिखित परीक्षा, ट्रेड टेस्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन। इन सभी चरणों में सफल होने वाले उम्मीदवारों को ही अंतिम रूप से नियुक्ति दी जाएगी।

    सैलरी और आवेदन शुल्क

    चयनित उम्मीदवारों को प्रति माह 35,400 रुपए से लेकर 1,12,400 रुपए तक का वेतन दिया जाएगा, जो सरकारी मानकों के अनुसार आकर्षक माना जा रहा है।
    वहीं, आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 1,000 रुपए फीस देनी होगी, जबकि एससी, एसटी और पीडब्ल्यूबीडी वर्ग के लिए यह शुल्क 500 रुपए निर्धारित किया गया है।

    ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले Bhakra Beas Management Board की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
    इसके बाद होमपेज पर दिए गए भर्ती लिंक पर क्लिक करें और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करें। लॉगिन करने के बाद आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी सही-सही भरें। जरूरी दस्तावेज निर्धारित फॉर्मेट में अपलोड करें और ऑनलाइन शुल्क का भुगतान करें। अंत में फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।

    युवाओं के लिए बेहतरीन अवसर

    यह भर्ती उन युवाओं के लिए खास मौका है, जो हिंदी भाषा में दक्षता रखते हैं और सरकारी क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। सीमित पदों के बावजूद अच्छी सैलरी और स्थिर नौकरी इसे और आकर्षक बनाती है।

  • एक्शन हीरो की असली कमजोरी सामने टाइगर श्रॉफ को उड़ान से डर नींद तक हो रही खराब

    एक्शन हीरो की असली कमजोरी सामने टाइगर श्रॉफ को उड़ान से डर नींद तक हो रही खराब


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के एक्शन स्टार टाइगर श्रॉफ जिन्हें बड़े पर्दे पर खतरनाक स्टंट और जबरदस्त फिटनेस के लिए जाना जाता है हाल ही में अपनी एक निजी समस्या को लेकर चर्चा में आ गए हैं। पर्दे पर हर मुश्किल को आसानी से पार करते नजर आने वाले टाइगर ने खुलासा किया है कि वह असल जिंदगी में एक ऐसे डर से जूझ रहे हैं जो उन्हें अंदर तक परेशान कर देता है। यह डर है एयरोफोबिया यानी हवाई जहाज में उड़ान भरने का डर। उन्होंने बताया कि इस समस्या से निजात पाने के लिए अब वह प्रोफेशनल थेरेपी लेने पर विचार कर रहे हैं।

    टाइगर ने एक बातचीत के दौरान बताया कि कुछ साल पहले उन्हें एक फ्लाइट में बेहद खराब टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था। उस अनुभव ने उनके मन पर गहरा असर डाला और तभी से उनके अंदर उड़ान को लेकर डर बैठ गया। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें पूरी तरह से असहाय महसूस हुआ क्योंकि स्थिति पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था। यही वजह है कि अब जब भी उन्हें फ्लाइट से यात्रा करनी होती है तो दो दिन पहले से ही बेचैनी और घबराहट शुरू हो जाती है।

    उन्होंने यह भी बताया कि पायलट अक्सर उन्हें समझाते हैं कि टर्बुलेंस कोई बड़ी बात नहीं होती और यह सड़क पर लगने वाले हल्के झटकों की तरह ही होता है लेकिन उनके दिमाग को यह बात स्वीकार नहीं होती। टाइगर का कहना है कि उन्हें हर चीज पर नियंत्रण रखना पसंद है लेकिन फ्लाइट के दौरान वह खुद को पूरी तरह बेबस महसूस करते हैं और यही उनकी चिंता का सबसे बड़ा कारण है।

    सिर्फ एयरोफोबिया ही नहीं टाइगर ने अपनी एक और समस्या का जिक्र किया। उन्होंने माना कि वह कई बार छोटी छोटी बातों को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचने लगते हैं और इससे वह काफी कंफ्यूजन में पड़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें अपने दिनभर के काम तय करने में भी काफी मुश्किल होती है क्योंकि वह हर चीज को लेकर ज्यादा सोचने लगते हैं। यह स्थिति उनके लिए मानसिक रूप से थकाने वाली हो जाती है।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो टाइगर श्रॉफ ने हीरोपंती वॉर और बागी जैसी फिल्मों के जरिए खुद को एक सफल एक्शन हीरो के रूप में स्थापित किया है लेकिन उनकी हालिया फिल्म बागी 4 बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। भारी बजट में बनी इस फिल्म का कलेक्शन निराशाजनक रहा और इसे फ्लॉप माना गया। हालांकि टाइगर अपनी फिटनेस और एक्शन स्टाइल के कारण फैंस के बीच अब भी काफी लोकप्रिय हैं।

    टाइगर का यह खुलासा इस बात की ओर इशारा करता है कि चमक दमक से भरी फिल्मी दुनिया के सितारे भी मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों से अछूते नहीं हैं। एयरोफोबिया एक आम लेकिन गंभीर समस्या हो सकती है जिसमें व्यक्ति को उड़ान के दौरान अत्यधिक डर और घबराहट महसूस होती है। विशेषज्ञों के अनुसार सही काउंसलिंग और थेरेपी से इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है।

    टाइगर का अपने डर को खुले तौर पर स्वीकार करना कई लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है क्योंकि यह दिखाता है कि मदद लेना कमजोरी नहीं बल्कि समझदारी का कदम है। अब देखना दिलचस्प होगा कि वह इस डर पर कैसे काबू पाते हैं और आगे अपनी जिंदगी और करियर में किस तरह आगे बढ़ते हैं।

  • अमेरिका ने ईरान के इस्फहान पर बंकर बस्टर बम से किया हमला

    अमेरिका ने ईरान के इस्फहान पर बंकर बस्टर बम से किया हमला

    वाशिंगटन। अमेरिका ने ईरान के इस्फहान शहर पर 2000 किलो के बंकर बस्टर बम से हमला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला एक हथियार डिपो पर किया गया। इस हमले के चलते इस्फहान के आसमान में आग और धुएं का विशाल गुबार देखा गया। इस हमले का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें धमाके के चलते खौफनाक मंजर दिखाई दिया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर इस वीडियो को पोस्ट किया है।
    वाल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि हमले में बड़ी संख्या में विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया। जिस जगह को निशाना बनाया गया, वह एक भूमिगत ढांचा था, जिसके लिए बंकर बस्टर बम का इस्तेमाल किया गया।
    इस्फहान ईरान का एक सैन्य सेंटर है और ईरान के परमाणु ठिकाने भी इस शहर के करीब ही स्थित हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर हमले की वीडियो साझा की है। हालांकि अभी तक इस हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस्फहान की रणनीतिक अहमियत भी है और दावा किया जाता है कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम का बड़ा हिस्सा, जो करीब 540 किलो है, इस्फहान के भूमिगत ठिकानों में ही रखा है।
  • नारलाई मंदिर में साथ दिखे मलाइका और हर्ष निजी पल बिताने पहुंचीं एक्ट्रेस फैंस की भीड़ ने घेरा

    नारलाई मंदिर में साथ दिखे मलाइका और हर्ष निजी पल बिताने पहुंचीं एक्ट्रेस फैंस की भीड़ ने घेरा


    नई दिल्ली । बॉलीवुड एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में आ गई हैं। हाल ही में उन्हें राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र के नारलाई गांव में स्थित आदिनाथ जैन मंदिर में कथित बॉयफ्रेंड हर्ष मेहता के साथ देखा गया। मलाइका यहां लाइमलाइट से दूर सुकून के कुछ पल बिताने पहुंची थीं लेकिन उनकी मौजूदगी की खबर फैलते ही वहां मौजूद लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और देखते ही देखते उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।

    इस दौरान मलाइका बेहद सादगी भरे अंदाज में नजर आईं। उन्होंने सफेद कुर्ती और ट्राउजर पहन रखा था और पूरे विधि विधान के साथ मंदिर में पूजा अर्चना की। उनके साथ हर कदम पर हर्ष मेहता मौजूद रहे और दोनों के बीच की सहज बॉन्डिंग ने एक बार फिर लोगों का ध्यान खींच लिया। मंदिर परिसर में मौजूद फैंस मलाइका की एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आए और कई लोगों ने उनके साथ सेल्फी लेने की कोशिश की। मलाइका ने भी अपने फैंस को निराश नहीं किया और मुस्कुराते हुए उनसे बातचीत की और तस्वीरें खिंचवाईं।

    भीड़ बढ़ती देख मंदिर प्रशासन को व्यवस्था संभालनी पड़ी ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। हालांकि पूरे घटनाक्रम के दौरान मलाइका काफी शांत और खुश नजर आईं। बताया जा रहा है कि वह इन दिनों राजस्थान की एक हेरिटेज प्रॉपर्टी में छुट्टियां मना रही हैं और इसी दौरान उन्होंने मंदिर दर्शन का कार्यक्रम बनाया।

    मलाइका और हर्ष मेहता के रिश्ते को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार चर्चाएं हो रही हैं। दोनों को पहली बार तब साथ देखा गया था जब वे मुंबई में एनरिक इग्लेसियस के कॉन्सर्ट में पहुंचे थे। हालांकि दोनों ने उस समय साथ में एंट्री नहीं ली थी लेकिन उनकी मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा था। इसके बाद खबरें सामने आईं कि दोनों ने वेलेंटाइन वीक के दौरान इटली में साथ समय बिताया। इन खबरों ने उनके रिश्ते को लेकर अटकलों को और तेज कर दिया।

    हालांकि अब तक मलाइका या हर्ष की ओर से इस रिश्ते को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मलाइका ने हाल ही में अपनी पर्सनल लाइफ पर हो रही चर्चाओं को लेकर प्रतिक्रिया भी दी थी। उन्होंने कहा था कि इस तरह की अफवाहें कभी कभी परेशान जरूर करती हैं लेकिन वह इन्हें ज्यादा गंभीरता से नहीं लेतीं। उन्होंने यह भी बताया कि वह अक्सर अपने बेटे अरहान खान के साथ इन खबरों को पढ़कर हंसती हैं और आगे बढ़ जाती हैं।

    मलाइका ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती हैं और पब्लिक की जिज्ञासा के अनुसार अपने फैसले नहीं लेंगी। बावजूद इसके उनकी हर सार्वजनिक उपस्थिति फैंस के बीच उत्सुकता पैदा कर देती है। राजस्थान के इस मंदिर दौरे ने एक बार फिर उनके रिश्ते को लेकर चर्चाओं को हवा दे दी है और फैंस अब भी इस बारे में सच्चाई जानने के लिए उत्साहित हैं।