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  • दुनिया के लिए नजीर बना ताइवान… आरक्षण ने बदली संसद की तस्वीर…. 42% सीटों पर महिलाएं काबिज

    दुनिया के लिए नजीर बना ताइवान… आरक्षण ने बदली संसद की तस्वीर…. 42% सीटों पर महिलाएं काबिज


    ली युआन।
    भारत (India) में संसद से लेकर विधानसभाओं तक महिलाओं के उचित प्रतिनिधित्व के लिए चल रही सियासत के बीच ताइवान (Taiwan) दुनियाभर के लिए नजीर बनकर सामने आया है। जिस ताइवान (Taiwan) को दुनिया अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर चिप (State-art Semiconductor Chip) के सबसे बड़े निर्माता के नजरिये से देखती है, उसी 2.3 करोड़ की आबादी वाले द्वीप ने लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी के लिए और लैंगिक भेदभाव खत्म करने के लिए दुनिया का सबसे लंबा अभियान चलाया है।

    करीब 80 साल पहले शुरू की गई आरक्षण व्यवस्था का नतीजा यह निकला कि आज ताइवान की संसद में 42% सीटों पर महिलाएं काबिज हैं। यह पूरे एशिया में सबसे अधिक है और यूरोपीय देशों के बराबर है। यही नहीं, ताइवान 2016 में त्साइ इंग-वेन के रूप में अपनी पहली महिला राष्ट्रपति चुन चुका है और दो बार महिलाओं को उप-राष्ट्रपति भी बना चुका है। इस उपाय ने ऐसा रास्ता तैयार किया कि आज बड़ी संख्या में महिलाएं सामान्य चुनावी मुकाबलों में भी अपनी जगह बना रही हैं।

    खास बात यह है कि ताइवान ने 2008 में एकल-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों में लैंगिक कोटा समाप्त कर दिया। इसके बाद भी संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ता रहा। ताइवान का यह प्रयोग साबित करता है कि जब महिलाओं को कानूनी सुरक्षा (कोटा) के जरिए शुरुआती मंच दिया जाता है, तो समय के साथ वे अपनी काबिलियत के दम पर उस बैसाखी को बेअसर कर देती हैं और बराबरी के मैदान में अपनी योग्यता का परचम लहराती हैं।


    1946 से बदलाव की नींव, 5-10% आरक्षण से शुरू हुआ सफर

    ताइवान ने महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए आरक्षित सीटों और चुनावी कोटा का इस्तेमाल दूसरे कई देशों से पहले शुरू किया था। जरूरत पड़ने पर समय-समय पर इसमें बदलाव भी करता रहा।

    चीन गणराज्य ने 1946 के संविधान में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की थीं। 1949 में जब नेशनलिस्ट सरकार ताइवान स्थानांतरित हुई, तो तानाशाही दौर के बावजूद स्थानीय चुनावों में 5 से 10% कोटा लागू रखा गया।


    2002 का क्रांतिकारी नियम :

    यदि किसी जिला परिषद सीट से 4 या उससे अधिक सदस्य चुने जाते हैं, तो कम से कम 1 सीट महिला उम्मीदवार को मिलेगी। इससे राजनीतिक दलों में महिला उम्मीदवारों को टिकट देने की होड़ मच गई। ताइवान की 113 सदस्यीय संसद में 47 महिलाएं हैं। वर्ष 1992 के आसपास संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी थी। इसके बाद इसमें लगातार वृद्धि हुई।


    जीत के लिए आरक्षित सीटों की जरूरत खत्म

    नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी की प्रो. चांग-लिंग हुआंग कहती हैं, लोग तर्क देते हैं कि चुनाव का मकसद केवल सबसे बेहतर और सबसे सक्षम व्यक्ति को चुनना होना चाहिए। ताइवान का अनुभव बताता है कि लैंगिक आरक्षण ही वह माध्यम है, जो किसी समाज को वास्तव में सबसे बेहतर और सबसे सक्षम लोगों को चुनने का मौका देता है। 2002 में 31 जिलों में कोटे का इस्तेमाल करना पड़ा था, वहीं 2022 में केवल 4 जिलों में ही इसकी जरूरत पड़ी, यानी महिलाएं आसानी से पुरुषों को हरा रही हैं।

  • AI इफेक्ट….TCS-इन्फोसिस समेत 6 कंपनियों में 3% घटा वर्कफोर्स… एक वर्ष में कम हुए 24,422 कर्मचारी

    AI इफेक्ट….TCS-इन्फोसिस समेत 6 कंपनियों में 3% घटा वर्कफोर्स… एक वर्ष में कम हुए 24,422 कर्मचारी


    नई दिल्ली ।
    भारत (India) की टॉप 6 आईटी और इंजीनियरिंग कंपनियों (IT and Engineering Companies) में पिछले एक साल के भीतर कुल 24,422 कर्मचारी कम हुए हैं। स्टाफिंग फर्म एक्सफेनो (Staffing firm Xpheno) के मुताबिक, इनमें पुराने कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की रफ्तार नई नियुक्तियों से ज्यादा तेज है, जिससे कुल कर्मचारियों की संख्यामें भारी कमी आई है।

    यह गिरावट भारत की टीसीएस, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, विप्रो, टेक महिंद्रा, और एलटीआई माइंडट्री कंपनियों में देखी गई है। पिछले एक साल में इन कंपनियों से कुल 92,000 कर्मचारियों ने एग्जिट किया। कंपनियों ने खाली पदों को पूरी तरह नहीं भरा और केवल 68,000 नए कर्मचारी ही नियुक्त किए। इसके चलते अक्तूबर 2025 के 8,22,144 कर्मचारियों के मुकाबले अक्तूबर 2026 में इन कंपनियों का कुल वर्कफोर्स लगभग 3% घटकर 7,97,722 रह गया है।


    नौकरियां घटने की दो मुख्य वजहें

    एक्सपर्ट्स और स्टाफिंग फर्मों के अनुसार, इसके पीछे एआई मुख्य वजह है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एप्लीकेशन मेंटेनेंस, मैनुअल टेस्टिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट जैसी पारंपरिक आईटी भूमिकाओं को एआई खुद संभाल रहा है। इनमें नई भर्तियां बहुत कम हो रही हैं। दूसरी वजह यह है कि कमजोर वैश्विक विकास के माहौल में कंपनियां अपने उन कर्मचारियों की संख्या को कम कर रही हैं जो किसी एक्टिव क्लाइंट प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं हैं। इससे कंपनियों की आमदनी पर तो असर नहीं पड़ रहा लेकिन खर्चे जरूर घट रहे हैं।


    5,000 को निकालेगा बार्कलेज सालाना बचेंगे 12,323 करोड़

    बार्कलेज बैंक अपने खर्चों को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर लगभग 5,000 नौकरियों की कटौती करने जा रहा है। बैंक की तीसरी तिमाही के मिले-जुले नतीजों और ट्रेडिंग रेवेन्यू (व्यापारिक कमाई) में आई गिरावट के बाद, बैंक ने लागत कम करने के लिए एआई और ऑटोमेशन के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाने का फैसला किया है।

    बैंक जिनको निकालेगा, उनमें मुख्य रूप से बैक-ऑफिस, सपोर्ट और मिडिल-मैनेजमेंट रोल्स से जुड़े कर्मचारी शामिल होंगे। बैंक बड़े पैमाने पर एआई-आधारित तकनीकों को लागू कर रहा है ताकि कम लागत में रूटीन और डेटा से जुड़े काम निपटाए जा सकें। इस छंटनी से बार्कलेज सालाना 12,323 करोड़ रुपये (1.3 बिलियन डॉलर) की बचत करेगा।

    एआई आधारित छंटनी का भारत पर सीधा असर होगा, क्योंकि भारत इस ब्रिटिश बैंक का दूसरा सबसे बड़ा वैश्विक केंद्र है। दरअसल एआई कोड लिखने और बुनियादी टेक कार्यों को तेजी से निपटा रहा है, इसलिए बैंक को अब कम डेवलपर्स की जरूरत है।

  • बांग्लादेशी स्पिनर का ODI करियर खतरे में… डेब्यू मैच में ही फंसा…संदिग्ध बालिंग एक्शन की जांच शुरू

    बांग्लादेशी स्पिनर का ODI करियर खतरे में… डेब्यू मैच में ही फंसा…संदिग्ध बालिंग एक्शन की जांच शुरू


    शारजाह।
    बांग्लादेश (Bangladesh) के ऑफ स्पिनर अलिस अल इस्लाम (Aliss Al Islam) का वनडे करियर शुरू होते ही मुश्किलों में घिर गया है. अफगानिस्तान (Afghanistan) के खिलाफ ओडीआई डेब्यू (ODI Debut) करने वाले अलिस की गेंदबाजी एक्शन को संदिग्ध बताया गया है. अब इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (International Cricket Council- ICC) के मानकों के तहत उनके बॉलिंग एक्शन की स्वतंत्र जांच होगी।

    29 वर्षीय अलिस अल इस्लाम ने 21 अक्टूबर को शारजाह में ओडीआई डेब्यू किया था. अफगानिस्तान के विरुद्ध इस मुकाबले में उन्होंने 8.3 ओवर्स की गेंदबाजी में 47 रन खर्च किए, लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिला. मैच अधिकारियों ने उनकी गेंदबाजी एक्शन की वैधता पर चिंता जताई, जिसके बाद आईसीसी ने जांच की प्रक्रिया शुरू की है।


    कहां होगी एक्शन की जांच?

    अलिस अल इस्लाम के बॉलिंग एक्शन का आकलन आईसीसी से मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र में किया जाएगा. इस जांच से पता चलेगा कि गेंदबाजी करते समय उनकी कोहनी सीधी होने की सीमा निर्धारित नियमों के भीतर है या नहीं. आईसीसी के नियमों के अनुसार, गेंद छोड़ने की प्रक्रिया में कोहनी का विस्तार 15 डिग्री से अधिक नहीं होना चाहिए।

    हालांकि, संदिग्ध एक्शन की शिकायत होने का मतलब यह नहीं है कि गेंदबाज दोषी साबित हो गया है. अंतिम फैसला स्वतंत्र जांच के नतीजों के आधार पर होगा. आकलन पूरा होने तक अलिस अल इस्लाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में गेंदबाजी जारी रख सकते हैं।

    अलिस अल इस्लाम घरेलू क्रिकेट में अपनी रहस्यमयी स्पिन और कैरम बॉल के लिए जाने जाते हैं. बांग्लादेश प्रीमियर लीग (BPL) में उन्होंने 35 मैचों में 39 विकेट लिए हैं. वहीं, लिस्ट-ए क्रिकेट में उनके नाम पर 20 मैचों में 35 विकेट दर्ज हैं. इस फॉर्मेट में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 21 रन देकर 6 विकेट रहा है।

    अलिस अल इस्लाम नेआइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में श्रीलंका के खिलाफ मुकाबले के दौरान अपना टी20 इंटरनेशनल डेब्यू भी किया था. ओडीआई में डेब्यू के बाद एक्शन पर उठे सवाल अब उनके अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए अहम हो गए हैं।

  • ताइवान में तूफान चांपी से जनजीवन ठप…. 931 उड़ानें रद्द, स्कूलों से लेकर शेयर बाजार तक बंद

    ताइवान में तूफान चांपी से जनजीवन ठप…. 931 उड़ानें रद्द, स्कूलों से लेकर शेयर बाजार तक बंद


    ताइपे।
    ताइवान (Taiwan) में तूफान चांपी (Cyclone Champi) के खतरे को देखते हुए शुक्रवार को लगभग पूरे द्वीप पर जनजीवन ठप हो गया। तूफान कमजोर जरूर पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद ताइवान पर सीधे टकराने का खतरा बना हुआ है। तेज हवाओं (Strong Winds) और मूसलाधार बारिश (Torrential Rain) की आशंका के बीच अधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाए हैं। अब तक तूफान के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि 94 लोग घायल हुए हैं। सरकार के मुताबिक, पहाड़ी इलाकों से करीब 1,300 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

    तूफान के चलते हवाई यातायात पर व्यापक असर पड़ा है। ताइवान के परिवहन मंत्रालय के अनुसार, शुक्रवार को सभी 262 घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गईं। इसके अलावा 669 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी रद्द करनी पड़ीं। हालांकि, उत्तर से दक्षिण को जोड़ने वाली हाई-स्पीड रेल सेवा सामान्य रूप से चल रही थी। राजधानी ताइपे में बारिश के बीच मेट्रो समेत सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी जारी रहीं, लेकिन उनमें कटौती की गई।

    तूफान के खतरे को देखते हुए ताइवान के वित्तीय बाजार भी शुक्रवार को बंद रहे। चीन के तट के पास स्थित ताइवान के नियंत्रण वाले किनमेन द्वीप समूह में ही स्कूल और कार्यालय सामान्य रूप से खुले रहने थे।


    191 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहीं हवाएं

    ताइवान के केंद्रीय मौसम प्रशासन के मुताबिक, तूफान चांपी के केंद्र के आसपास हवा के झोंकों की रफ्तार करीब 191 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रही थी। यह तूफान एक समय सुपर टाइफून की श्रेणी में था और इस साल प्रशांत महासागर में आए सबसे शक्तिशाली तूफानों में शामिल रहा है।

    मौसम विभाग के अनुसार, तूफान ताइवान के दक्षिणी छोर से करीब 320 किलोमीटर पूर्व में था। अनुमान है कि यह ताइवान के पूर्वोत्तर तट के पास से गुजरने के बाद उत्तर की ओर मुड़ेगा और चीन के तट की दिशा में बढ़ते हुए अंततः दक्षिणी जापान की ओर चला जाएगा।

    हालांकि, ताइवान के मौसम विभाग के पूर्वानुमानकर्ता लियू पेई-तेंग ने कहा कि तूफान के सीधे ताइवान से टकराने की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता। अगर यह आगे बढ़ने के बजाय एक जगह ठहरता है, चक्कर लगाता है या अपना रास्ता बदलता है, तो इसके ताइवान में दस्तक देने की संभावना बनी रहेगी।


    तूफान का दायरा बड़ा, दो दिन तक रह सकता है असर

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, चांपी का दायरा करीब 320 किलोमीटर है। इसका विस्तार इतना बड़ा है कि यह ताइवान के ज्यादातर हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि तूफान का असर करीब दो दिनों तक रह सकता है।

    लियू पेई-तेंग ने कहा कि हाल के वर्षों के बड़े तूफानों की तुलना में चांपी का हवा का दायरा काफी व्यापक है। अगर इसकी गति धीमी पड़ती है, तो ताइवान में तेज हवाओं का असर लंबे समय तक बना रह सकता है।


    तटीय इलाकों में अलर्ट, पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश का अनुमान

    ताइवान के तटीय कस्बों में मोबाइल फोन के जरिए अलर्ट भेजे गए। लोगों को 150 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार वाले हवा के झोंकों के प्रति आगाह करते हुए तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। ताइपे के आसपास समेत उत्तरी पहाड़ी इलाकों में करीब एक मीटर तक बारिश होने का अनुमान जताया गया है।

    पूर्वोत्तर ताइवान के यिलान काउंटी में तेज हवाओं और भारी बारिश का असर बढ़ने लगा था। यहां अधिकारियों ने लोगों को सुरक्षित रखने के लिए रेत से भरी बोरियां बांटीं। साथ ही, उभयचर वाहनों और हवा भरकर इस्तेमाल की जाने वाली बचाव नौकाओं को तैयार रखा गया।

    सुआओ बंदरगाह कस्बे के प्रमुख ली मिंग-चेन ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सेना की मदद ली जाएगी। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और आपदा राहत कार्यों के लिए उभयचर वाहनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।


    जापान के ओकिनावा की ओर भी बढ़ सकता है तूफान

    पूर्वानुमान के मुताबिक, चांपी सबसे पहले जापान के ओकिनावा प्रांत के सबसे पश्चिमी आबादी वाले द्वीप योनागुनी के ऊपर से गुजर सकता है। इसके बाद तूफान के आगे बढ़ने की दिशा पर नजर रखी जा रही है।

    ताइवान में आमतौर पर तूफानों से निपटने की अच्छी तैयारी रहती है, जिससे जनहानि सीमित रखने में मदद मिलती है। हालांकि, ऐसे तूफान गर्मियों में ज्यादा आम हैं, लेकिन शरद ऋतु में भी इनका असर देखने को मिल सकता है।

  • संयुक्त राष्ट्र में भारत की दोटूक, सुरक्षा परिषद में सुधार क्यों अटका, पाकिस्तान समेत कुछ देशों पर उठाए सवाल

    संयुक्त राष्ट्र में भारत की दोटूक, सुरक्षा परिषद में सुधार क्यों अटका, पाकिस्तान समेत कुछ देशों पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर भारत ने एक बार फिर मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि करीब 80 साल पहले हुए द्वितीय विश्व युद्ध के परिणामों के आधार पर आज की दुनिया का भविष्य तय नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सुरक्षा परिषद की संरचना ऐसी होनी चाहिए जिसमें दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों और देशों का उचित प्रतिनिधित्व हो। भारत ने इस मुद्दे पर सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट मसौदा तैयार करने समयसीमा तय करने और बातचीत की दिशा निर्धारित करने की मांग की है।

    पी. हरीश ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय करीब 25 लाख भारतीयों ने युद्ध में हिस्सा लिया था और लगभग 90 हजार भारतीय सैन्य सेवा के दौरान मारे गए थे। उन्होंने बंगाल के भीषण अकाल का भी जिक्र किया और कहा कि औपनिवेशिक युद्ध नीतियों से जुड़ी परिस्थितियों के बीच 40 लाख से अधिक लोगों की जान गई थी। उनके मुताबिक इतिहास के इन पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। भारत का तर्क है कि वैश्विक संस्थाओं की मौजूदा व्यवस्था में उन देशों और लोगों के योगदान को भी महत्व मिलना चाहिए जिन्होंने युद्ध के दौरान भारी कीमत चुकाई थी।

    भारत की आपत्ति संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों को मिले विशेष अधिकारों और मौजूदा प्रतिनिधित्व व्यवस्था को लेकर है। वर्ष 1945 में स्थापित संयुक्त राष्ट्र की व्यवस्था में पांच स्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार दिया गया था। इस अधिकार के तहत कोई स्थायी सदस्य सुरक्षा परिषद के कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को रोक सकता है। भारत का मानना है कि दशकों पुरानी व्यवस्था को वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बदलने की जरूरत है। हरीश ने कहा कि पुराने युद्ध में जीत के आधार पर बने विशेषाधिकार ऐसी सुरक्षा परिषद की वैधता से जुड़े सवालों का जवाब नहीं दे सकते जिसमें दुनिया का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।

    सुरक्षा परिषद में सुधार की बातचीत को लेकर भारत ने कुछ देशों के समूह पर भी आपत्ति जताई है। पी. हरीश के अनुसार इटली के नेतृत्व वाला यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस समूह सुधार प्रक्रिया में आगे बढ़ने के लिए जरूरी मसौदा तैयार करने की दिशा में बाधा डाल रहा है। पाकिस्तान भी इस समूह का सदस्य है। इस समूह का रुख सुरक्षा परिषद के विस्तार और स्थायी सदस्यता के विभिन्न प्रस्तावों को लेकर भारत की मांग से अलग है। भारत चाहता है कि सुधार पर चर्चा को अनिश्चितकाल तक खींचने के बजाय उसे ठोस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाए।

    भारत की मुख्य आपत्ति इस बात पर है कि मसौदा तैयार करने से पहले ही आम सहमति की शर्त पर जोर दिया जा रहा है। हरीश का कहना है कि बहुपक्षीय वार्ताओं में सामान्य तौर पर पहले एक लिखित मसौदा तैयार किया जाता है और फिर उस पर बातचीत के जरिए मतभेदों को दूर करने की कोशिश होती है। भारत सवाल उठा रहा है कि सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए होने वाली अंतर सरकारी वार्ता की प्रक्रिया दूसरी बहुपक्षीय वार्ताओं से अलग क्यों होनी चाहिए।

    भारत ने मांग की है कि सुधार प्रक्रिया के लिए लिखित मसौदा सामने लाया जाए और बातचीत की समयसीमा तथा दिशा स्पष्ट की जाए। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के विस्तार और अपने लिए स्थायी सीट की मांग करता रहा है। उसका कहना है कि आज की वैश्विक व्यवस्था में एशिया अफ्रीका और लैटिन अमेरिका सहित विभिन्न क्षेत्रों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में आगे की बातचीत और देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिशें इस मुद्दे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगी।

  • 600 करोड़ पार पहुंची ‘जेलर 2’ की वर्ल्डवाइड कमाई, रजनीकांत के आगे फीकी पड़ी ‘रणबाली’ और ‘नई नवेली’

    600 करोड़ पार पहुंची ‘जेलर 2’ की वर्ल्डवाइड कमाई, रजनीकांत के आगे फीकी पड़ी ‘रणबाली’ और ‘नई नवेली’


    नई दिल्ली। बॉक्स ऑफिस पर इन दिनों रजनीकांत की फिल्म जेलर 2 का दबदबा देखने को मिल रहा है। सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस फिल्म ने दुनियाभर में कमाई के मामले में 600 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। शानदार एक्शन और रजनीकांत के दमदार अंदाज के चलते फिल्म को दर्शकों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। हालांकि रिलीज के आठवें दिन इसकी कमाई में गिरावट दर्ज की गई है लेकिन इसके बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सबसे आगे बनी हुई है। दूसरी ओर विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की रणबाली की रफ्तार धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। वहीं यामी गौतम की हॉरर कॉमेडी नई नवेली और राजकुमार राव की प्रहार भी सिनेमाघरों में अपनी जगह बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं।

    रजनीकांत की जेलर 2 ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर भी मजबूत प्रदर्शन किया है। फिल्म को रिलीज हुए आठ दिन हो चुके हैं और इस दौरान इसने लगातार अच्छी कमाई की है। हालांकि आठवें दिन दर्शकों की संख्या और कमाई में कुछ गिरावट देखने को मिली। गुरुवार को फिल्म ने 17.15 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इसके साथ ही भारत में इसका कुल कलेक्शन 334.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं दुनियाभर में फिल्म की कमाई 606.05 करोड़ रुपये हो चुकी है। इस आंकड़े के साथ जेलर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ साबित कर दी है। फिल्म की कमाई को देखते हुए इसकी आगे की कारोबारी संभावनाओं पर भी नजर बनी हुई है।

    विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की फिल्म रणबाली को भी दर्शकों से शुरुआत में अच्छा प्रतिसाद मिला था लेकिन अब इसकी कमाई की रफ्तार धीमी होती दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि जेलर 2 की मजबूत मौजूदगी का असर भी इसके कारोबार पर पड़ रहा है। रणबाली ने बुधवार को 5.50 करोड़ रुपये कमाए थे जबकि गुरुवार को इसका कलेक्शन घटकर 3.15 करोड़ रुपये रह गया। सात दिनों में फिल्म की कुल कमाई 45.20 करोड़ रुपये हो गई है। आने वाले दिनों में फिल्म का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि दर्शकों के बीच इसकी लोकप्रियता कितनी बनी रहती है।

    यामी गौतम की हॉरर कॉमेडी फिल्म नई नवेली ने भी सिनेमाघरों में अपना पहला सप्ताह पूरा कर लिया है। फिल्म का प्रदर्शन बहुत बड़ा धमाका करने वाला नहीं रहा लेकिन यह लगातार कमाई कर रही है। बुधवार को इसने दो करोड़ रुपये का कारोबार किया था जबकि गुरुवार को इसकी कमाई 1.50 करोड़ रुपये रही। इसके साथ ही फिल्म का कुल कलेक्शन 22.15 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अब फिल्म के सामने अपनी कमाई को स्थिर बनाए रखने की चुनौती है।

    राजकुमार राव वामिका गब्बी और जयदीप अहलावत की फिल्म प्रहार का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन भी शुरुआती सप्ताह में औसत रहा है। फिल्म को रिलीज हुए एक सप्ताह हो चुका है लेकिन इसकी कमाई में कोई बड़ा उछाल देखने को नहीं मिला। बुधवार को फिल्म ने 1.50 करोड़ रुपये कमाए थे जबकि गुरुवार को यह आंकड़ा घटकर 1.20 करोड़ रुपये रह गया। इसके साथ फिल्म का कुल कलेक्शन 17.15 करोड़ रुपये हो गया है।

    कुल मिलाकर मौजूदा बॉक्स ऑफिस मुकाबले में जेलर 2 सबसे आगे नजर आ रही है। दुनियाभर में 600 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई ने इसे बड़ी सफलता दिलाई है जबकि रणबाली नई नवेली और प्रहार के लिए आने वाले दिन अहम साबित हो सकते हैं। अब देखना होगा कि क्या ये फिल्में अपनी कमाई में तेजी ला पाती हैं या रजनीकांत की फिल्म का दबदबा आगे भी कायम रहता है।

  • बेटी के लिए पिता ने लिया कर्ज, विदेश में मिली मौत, स्वीटी अख्तर की फांसी से सदमे में परिवार

    बेटी के लिए पिता ने लिया कर्ज, विदेश में मिली मौत, स्वीटी अख्तर की फांसी से सदमे में परिवार


    नई दिल्ली। बांग्लादेश की रहने वाली स्वीटी अख्तर की कहानी संघर्ष और दर्द से भरी है। अपनी नौ साल की बेटी का भविष्य बेहतर बनाने और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए वह सऊदी अरब गई थी। उसे उम्मीद थी कि विदेश में नौकरी करके वह अपनी बेटी को अच्छी जिंदगी दे सकेगी और परिवार को गरीबी से बाहर निकाल पाएगी। लेकिन जिस सपने को पूरा करने के लिए उसने अपना घर छोड़ा था वही सपना उसकी जिंदगी का सबसे दर्दनाक अध्याय बन गया। सऊदी अरब में काम करने वाली स्वीटी को व्यभिचार के आरोपों में मौत की सजा दे दी गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि फांसी से ठीक एक दिन पहले उसकी अपने पिता से बातचीत हुई थी लेकिन उस दौरान उसने परिवार को अपनी सजा के बारे में कुछ नहीं बताया था।

    स्वीटी अख्तर मध्य बांग्लादेश के तंगाइल जिले के मिर्जापुर उपजिला के नगर छावली गांव की रहने वाली थी। उसके पिता फजल मिया दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और मां का नाम जोहोरा बेगम है। पांच बहनों में सबसे छोटी स्वीटी की जिंदगी बचपन से ही मुश्किलों से घिरी रही। जब वह आठवीं कक्षा में पढ़ रही थी तभी उसकी शादी कर दी गई थी। पहली शादी टूटने के बाद वह अपनी बेटी को लेकर मायके लौट आई। परिवार के दबाव में उसने दूसरी शादी की लेकिन दूसरा पति भी उसे छोड़कर चला गया। लगातार टूटते रिश्तों और आर्थिक परेशानियों ने उसे विदेश में नौकरी तलाशने के लिए मजबूर कर दिया।

    परिवार ने स्वीटी को सऊदी अरब भेजने के लिए करीब डेढ़ लाख टका का कर्ज लिया था। मार्च 2023 में वह एक पंजीकृत भर्ती एजेंसी के माध्यम से सऊदी अरब पहुंची और मक्का की ग्रैंड मस्जिद में सफाईकर्मी के तौर पर काम करने लगी। शुरुआती पांच से छह महीनों तक वह घर पैसे भेजती रही। इससे परिवार को उम्मीद जगी कि अब उनकी परेशानियां कम होंगी और बेटी का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा। लेकिन कुछ समय बाद पैसे आने बंद हो गए। परिवार को बाद में पता चला कि स्वीटी को जेल में बंद कर दिया गया है।

    मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक स्वीटी को 2 अगस्त 2023 को व्यभिचार के आरोपों में हिरासत में लिया गया था। उसके साथ काम करने वाले बांग्लादेशी नागरिक नाजरुल इस्लाम अब्दुल बासिर को भी गिरफ्तार किया गया था। स्वीटी को जेद्दा की महिला जेल में रखा गया। हालांकि उसने अपने पिता को गिरफ्तारी की अलग वजह बताई थी। उसके परिवार को आशंका थी कि उसे गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है। इन आरोपों और मामले की परिस्थितियों को लेकर परिवार के पास पूरी जानकारी नहीं थी।

    जेल में रहने के दौरान स्वीटी कभी हर सप्ताह तो कभी एक महीने के अंतराल पर अपने घर फोन करती थी। परिवार को मालूम था कि वह जेल में है लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि मामला इतना गंभीर हो चुका है। उसके पिता के मुताबिक 13 अक्टूबर को मगरिब की नमाज के बाद उनकी बेटी से आखिरी बार बात हुई थी। बातचीत के दौरान स्वीटी ने न तो मुकदमे का जिक्र किया और न ही मौत की सजा की आशंका जताई। परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द जेल से बाहर आ जाएगी।

    14 अक्टूबर को सऊदी अरब में स्वीटी अख्तर और नाजरुल इस्लाम को फांसी दिए जाने की घोषणा हुई। परिवार को इसकी जानकारी सीधे अधिकारियों से नहीं मिली बल्कि एक फेसबुक वीडियो के जरिए मौत की खबर सामने आई। बांग्लादेश के राजनयिक मिशन ने भी कहा था कि उसे फांसी से पहले इसकी सूचना नहीं दी गई। बाद में बांग्लादेश ने न्यायिक फैसलों की प्रतियां और मामले से जुड़ी जानकारी मांगी।

    स्वीटी की मां अपनी बेटी का शव बांग्लादेश वापस लाने की गुहार लगा रही हैं ताकि वह आखिरी बार उसका चेहरा देख सकें। जिस परिवार ने कर्ज लेकर उसे बेहतर जिंदगी की उम्मीद में विदेश भेजा था वह अब गहरे सदमे में है। पीछे छूट गई उसकी छोटी बेटी और परिवार के लिए यह घटना ऐसा दर्द बन गई है जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।

  • सर्दियों में AC कवर करने से पहले जरूर करें ये 3 काम, वरना हजारों रुपये की मरम्मत पड़ सकती है भारी

    सर्दियों में AC कवर करने से पहले जरूर करें ये 3 काम, वरना हजारों रुपये की मरम्मत पड़ सकती है भारी

    नई दिल्ली । सर्दियों का मौसम शुरू होते ही घरों में एयर कंडीशनर का इस्तेमाल कम हो जाता है। कई लोग एसी की इनडोर यूनिट को कवर करके रख देते हैं, लेकिन बाहर लगी आउटडोर यूनिट की सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते। लंबे समय तक बंद रहने के दौरान आउटडोर यूनिट पर धूल, धुआं, स्मॉग और सुबह की ओस का असर पड़ सकता है। इससे उपकरण के अलग-अलग हिस्सों को नुकसान पहुंचने और अगले गर्मी के मौसम में मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च होने की आशंका रहती है। ऐसे में सर्दियों के दौरान एसी को सुरक्षित रखने के लिए सही तरीके से कवर करना जरूरी है।

    एसी की आउटडोर यूनिट आमतौर पर बालकनी, छत या घर के बाहर ऐसी जगह लगी होती है, जहां वह मौसम के सीधे संपर्क में रहती है। इस्तेमाल बंद होने के बाद इस यूनिट में जमा धूल और नमी परेशानी पैदा कर सकती है। नमी के साथ गंदगी लंबे समय तक बनी रहने से कॉपर पाइप, पंखे के ब्लेड और बाहरी बॉडी पर जंग लगने का खतरा बढ़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में पानी या नमी विद्युत उपकरणों तक पहुंचने से भी खराबी आ सकती है।

    एसी की मरम्मत का खर्च खराबी के प्रकार पर निर्भर करता है। एक सामान्य 1.5 टन स्प्लिट एसी की कॉइल की सफाई और डीस्केलिंग पर लगभग 1,500 से 3,000 रुपये खर्च हो सकते हैं। आउटडोर फैन की मोटर बदलवाने में 1,800 से 4,500 रुपये तक लग सकते हैं। वहीं, इन्वर्टर एसी का पीसीबी खराब होने पर मरम्मत या बदलाव का खर्च 3,500 से 8,500 रुपये तक पहुंच सकता है।

    यदि कंडेंसर कॉइल बदलने की जरूरत पड़े, तो लगभग 4,500 से 9,000 रुपये खर्च हो सकते हैं। कंप्रेसर खराब होने की स्थिति में यह खर्च 10,000 से 22,000 रुपये तक जा सकता है। हालांकि, वास्तविक कीमत एसी के ब्रांड, मॉडल, खराबी और सर्विस की दरों के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए मौसम बदलने पर उपकरण की देखभाल करना उपयोगी साबित हो सकता है।

    सर्दियों में एसी कवर करने से पहले सबसे जरूरी है कि केवल इनडोर यूनिट पर ध्यान न दिया जाए। बाहर लगी आउटडोर यूनिट को भी सुरक्षित रखना चाहिए। इसके लिए एसी की क्षमता और आकार के अनुरूप कवर चुनें। छोटा या ढीला कवर ठीक से फिट नहीं होगा, जिससे धूल और गंदगी अंदर पहुंच सकती है। कवर ऐसा होना चाहिए जिसका कपड़ा पानी को रोकने में सक्षम हो और जिसे इलास्टिक या बांधने वाली डोरी से सुरक्षित किया जा सके।

    दूसरा जरूरी काम यूनिट को पूरी तरह सुखाना है। कवर लगाने से पहले एसी की बाहरी सतह को सूखे कपड़े से साफ कर लें। यदि यूनिट पर नमी मौजूद है, तो उसे सूखने का पर्याप्त समय दें। संभव हो तो सर्दियों में लंबे समय तक एसी बंद रखने से पहले उसकी सर्विस करा लें। सर्विस के बाद यूनिट को अच्छी तरह सूखने देना चाहिए, ताकि कवर के भीतर नमी फंसी न रहे।

    तीसरी सावधानी बिजली की आपूर्ति से जुड़ी है। कवर लगाने के बाद एसी का स्विच बंद करके उसका प्लग निकाल दें, यदि वह प्लग के जरिए जुड़ा है। कवर को इस तरह लगाएं कि नीचे की ओर हवा की थोड़ी आवाजाही बनी रहे। इससे यूनिट के भीतर नमी जमा होने की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है। कवर को पूरी तरह वायुरुद्ध तरीके से बंद करने से बचना चाहिए।

    बाजार में सामान्य एसी कवर लगभग 250 रुपये से मिल सकते हैं, जबकि कुछ ब्रांडेड विकल्पों की कीमत करीब 325 रुपये बताई गई है। कवर खरीदते समय केवल कीमत के बजाय उसकी फिटिंग, कपड़े की गुणवत्ता और पानी से बचाव की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। सही आकार का कवर और नियमित देखभाल एसी को सर्दियों के दौरान बेहतर स्थिति में रखने में मदद कर सकते हैं।

  • 10 साल तक मैच्योर FD का पैसा नहीं निकाला, तो क्या होगा? जानें RBI के नियम

    10 साल तक मैच्योर FD का पैसा नहीं निकाला, तो क्या होगा? जानें RBI के नियम


    नई दिल्ली। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) नौकरीपेशा लोगों और आम निवेशकों के बीच निवेश का लोकप्रिय विकल्प है। इसमें तय अवधि के लिए पैसा जमा करने पर निर्धारित शर्तों के अनुसार ब्याज मिलता है। लेकिन कई बार बैंक का नोटिफिकेशन छूट जाने या जानकारी के अभाव में लोग FD की मैच्योरिटी के बाद भी रकम नहीं निकालते। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 10 साल तक पैसा नहीं निकालने पर रकम डूब जाती है या उस पर ब्याज मिलता रहता है?

    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, FD की मैच्योरिटी के बाद रकम का भुगतान, रिन्यूअल और ब्याज बैंक में दर्ज निर्देशों और लागू शर्तों पर निर्भर करता है। अगर रकम 10 साल तक अनक्लेम्ड रहती है, तो उसे डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस (DEA) फंड में ट्रांसफर किया जा सकता है। हालांकि, इससे जमाकर्ता का पैसा वापस पाने का अधिकार खत्म नहीं होता।

    FD मैच्योर होने के बाद क्या होता है?

    FD की अवधि पूरी होने पर बैंक जमाकर्ता को रकम का भुगतान करता है या पहले से दिए गए निर्देशों के अनुसार डिपॉजिट को रिन्यू कर सकता है। आम तौर पर तीन स्थितियां बनती हैं।

    1. ऑटो-रिन्यूअल: अगर FD खोलते समय ऑटो-रिन्यूअल का विकल्प चुना गया है, तो बैंक तय निर्देशों और शर्तों के अनुसार FD को आगे बढ़ा सकता है।

    2. बैंक खाते में रकम ट्रांसफर: अगर मैच्योरिटी पर भुगतान का निर्देश दिया गया है, तो बैंक अपनी प्रक्रिया के अनुसार रकम जमाकर्ता के रजिस्टर्ड बैंक खाते में भेज सकता है।

    3. मैच्योरिटी के बाद ब्याज: अगर मैच्योरिटी की रकम का भुगतान नहीं हुआ है, तो उस पर लागू नियमों के अनुसार ब्याज मिल सकता है। कई मामलों में यह ब्याज बचत खाते की दर या मैच्योर हो चुकी FD की अनुबंधित दर में से जो कम हो, उसके आधार पर तय होता है। इसलिए मैच्योरिटी के बाद पुरानी FD की पूरी ब्याज दर मिलते रहने की गारंटी नहीं है।

    10 साल तक पैसा नहीं निकाला, तो DEA फंड में होगा ट्रांसफर?

    अगर FD की मैच्योरिटी के बाद रकम 10 साल तक अनक्लेम्ड रहती है, तो वह RBI के नियमों के तहत अनक्लेम्ड डिपॉजिट की श्रेणी में आ सकती है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बैंक ऐसी रकम को डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस (DEA) फंड में ट्रांसफर करता है।

    यह फंड RBI के अंतर्गत संचालित होता है और इसका उद्देश्य जमाकर्ताओं में जागरूकता बढ़ाने के साथ अनक्लेम्ड डिपॉजिट से संबंधित व्यवस्था को संभालना है।

    ध्यान रखें, DEA फंड में रकम ट्रांसफर होने का मतलब यह नहीं है कि आपका पैसा डूब गया। जमाकर्ता या उसके कानूनी उत्तराधिकारी का रकम पर दावा करने का अधिकार बना रहता है। इसके लिए संबंधित बैंक से संपर्क कर निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

    जमाकर्ता की मृत्यु होने पर कौन कर सकता है क्लेम?

    अगर FD के जमाकर्ता की मृत्यु हो चुकी है और उसकी रकम अनक्लेम्ड है, तो नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी बैंक में दावा कर सकता है। बैंक की आवश्यकताओं के अनुसार मृत्यु प्रमाण पत्र, पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य जरूरी कागजात जमा करने पड़ सकते हैं।

    बैंक दस्तावेजों और दावे का सत्यापन करने के बाद लागू नियमों के अनुसार रकम का भुगतान करता है। इसलिए परिवार के सदस्यों को अपनी FD, बैंक खातों और नॉमिनी से संबंधित जानकारी व्यवस्थित रखनी चाहिए।

    FD रिन्यू कराने से पहले इन 4 बातों का रखें ध्यान

    1. ब्याज दर की तुलना करें: नई FD कराने से पहले बैंक की मौजूदा ब्याज दरों की तुलना पुरानी FD की दर से करें। नई FD पर मिलने वाला ब्याज अलग हो सकता है।

    2. अवधि का चुनाव करें: अपनी भविष्य की जरूरतों और खर्चों को ध्यान में रखकर FD की अवधि तय करें। लंबी अवधि के लिए पैसा जमा करने से पहले यह आकलन कर लें कि रकम की जरूरत कब पड़ सकती है।

    3. समय से पहले FD तोड़ने की शर्तें समझें: मैच्योरिटी से पहले FD बंद कराने पर लागू पेनाल्टी या ब्याज में कटौती की जानकारी जरूर लें।

    4. जरूरत के लिए पैसा उपलब्ध रखें: अगर निकट भविष्य में रकम की जरूरत हो सकती है, तो पूरा पैसा लंबी अवधि की FD में रखने के बजाय बचत खाते या अलग-अलग मैच्योरिटी वाली FD में बांटने पर विचार कर सकते हैं।

    FD की मैच्योरिटी तारीख और बैंक में दर्ज निर्देशों की समय-समय पर जांच करते रहें। इससे रकम के भुगतान या रिन्यूअल में होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। FD के भुगतान, ब्याज और क्लेम से जुड़े नियम बैंक तथा संबंधित योजना की शर्तों के अनुसार अलग हो सकते हैं। कोई कदम उठाने से पहले अपने बैंक से लागू नियमों की पुष्टि करें।

  • अयोध्या में दीपोत्सव को भव्य बनाने की तैयारी शुरू, 56 घाटों पर जलेंगे 30 लाख दीये

    अयोध्या में दीपोत्सव को भव्य बनाने की तैयारी शुरू, 56 घाटों पर जलेंगे 30 लाख दीये


    नई दिल्ली। अयोध्या में 10वें दीपोत्सव को भव्य बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार सरयू नदी के किनारे स्थित 56 घाटों को 30 लाख दीयों से रोशन करने का लक्ष्य रखा गया है। घाटों की सफाई के बाद दीये रखने के लिए मार्किंग का काम शुरू हो चुका है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन के साथ तैयारियों की औपचारिक शुरुआत होगी।

    दीपोत्सव की तैयारियों का समन्वय डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय कर रहा है। विश्वविद्यालय ने 30 लाख दीये जलाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 33 लाख दीये मंगवाए हैं। परिवहन और रखरखाव के दौरान दीयों के टूटने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त दीयों की व्यवस्था की गई है।

    शुक्रवार सुबह 7:30 बजे होगा भूमि पूजन

    दीपोत्सव की तैयारियों के लिए शुक्रवार सुबह 7:30 बजे घाट नंबर 10 पर भूमि पूजन किया जाएगा। इसमें डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति बिजेंद्र सिंह सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। भूमि पूजन के साथ घाटों पर दीयों की व्यवस्था और अन्य तैयारियों में तेजी आएगी।

    55 से बढ़ाकर 56 घाटों पर होगी दीयों की व्यवस्था

    इस बार दीपोत्सव के लिए 56 घाटों को शामिल किया गया है। इनमें विस्तारित राम की पैड़ी, चौधरी चरण सिंह घाट और भजन संध्या स्थल भी शामिल हैं। इससे पहले दीयों की व्यवस्था 55 घाटों पर की जाती थी।

    दीयों को निर्धारित संख्या और एक समान क्रम में लगाने के लिए ब्लॉक आधारित लेआउट तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, घाटों पर मार्किंग का काम तीन से चार दिनों में पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद दीये रखने और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    35 हजार स्वयंसेवक संभालेंगे व्यवस्था

    दीये लगाने और उन्हें जलाने के लिए करीब 35 हजार स्वयंसेवकों को तैनात किया जाएगा। इनमें 30 डिग्री कॉलेज, 40 इंटरमीडिएट कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसर के विद्यार्थी शामिल होंगे। स्वयंसेवकों को अलग-अलग घाटों के हिसाब से जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। इसके लिए उनका प्रशिक्षण भी चल रहा है।

    स्वयंसेवकों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। उन्हें क्यूआर कोड, फोटो, संपर्क विवरण और तैनाती स्थल की जानकारी वाले पहचान पत्र दिए जाएंगे।

    दीयों की आपूर्ति, घाटों के प्रबंधन, स्वयंसेवकों की तैनाती और कार्यक्रम की सुरक्षा सहित सभी व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने के लिए विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन मिलकर काम कर रहे हैं। इस बार 56 घाटों पर 30 लाख दीये जलाने का लक्ष्य दीपोत्सव को भव्य स्वरूप देने की तैयारी का अहम हिस्सा है।