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  • केबीसी 18 के मंच पर पहुंचीं गायिका सुनिधि चौहान, अमिताभ बच्चन संग बातचीत का प्रोमो हुआ वायरल

    केबीसी 18 के मंच पर पहुंचीं गायिका सुनिधि चौहान, अमिताभ बच्चन संग बातचीत का प्रोमो हुआ वायरल

    नई दिल्ली ।टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति के 18वें सीजन में इन दिनों प्रतियोगियों के ज्ञान के साथ-साथ कई मशहूर हस्तियों का मनोरंजन भी देखने को मिल रहा है। शो के आगामी एपिसोड के एक नए प्रोमो ने इंटरनेट पर लोगों का ध्यान खींचा है। इस प्रोमो में हिंदी सिनेमा की जानी-मानी पार्श्व गायिका सुनिधि चौहान हॉट सीट पर बैठी नजर आ रही हैं। शो के दौरान अमिताभ बच्चन और सुनिधि चौहान के बीच हुई बातचीत और हंसी-मजाक के पलों को दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं।

    सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन और ओटीटी प्लेटफॉर्म द्वारा जारी किए गए इस प्रोमो में सुनिधि चौहान अमिताभ बच्चन के सामने बैठकर अपनी खुशी जाहिर करती दिख रही हैं। कार्यक्रम के दौरान सुनिधि ने अपनी गायकी का हुनर दिखाते हुए वर्ष 2006 में आई फिल्म डॉन का प्रसिद्ध गीत ‘ये मेरा दिल’ भी प्रस्तुत किया। उनकी इस शानदार परफॉर्मेंस ने मंच का माहौल संगीतमय बना दिया। अमिताभ बच्चन ने भी उनकी गायकी की जमकर सराहना की और तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।

    गेम शो में बातचीत के दौरान सुनिधि चौहान ने अमिताभ बच्चन की तारीफ करते हुए कहा कि वे उन्हें अलग-अलग रूपों में देखते आए हैं और वे उनके लिए एक सांता क्लॉज़ की तरह हैं। इसी क्रम में उन्होंने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि अमिताभ बच्चन उनका पहला क्रश हुआ करते थे। सुनिधि की इस बात पर बिग बी ने बेहद चुटीले अंदाज में प्रतिक्रिया दी और मुस्कुराते हुए कहा कि यह बात उन्हें अब पता चल रही है, जबकि इसे पहले बताया जाना चाहिए था। अमिताभ के इस जवाब से सुनिधि शरमा गईं और मंच पर मौजूद दर्शक हंस पड़े।

    इस विशेष एपिसोड के प्रोमो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रशंसकों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। संगीत और अभिनय जगत के इन दो दिग्गजों को एक साथ मंच साझा करते देख दर्शक बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं। कई लोगों ने सुनिधि चौहान की प्राकृतिक गायकी शैली की तारीफ की तो कई प्रशंसकों ने इस पूरे एपिसोड को देखने के लिए अपनी उत्सुकता जाहिर की है।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के केबीसी प्रशंसकों के बीच इस नए सीजन को लेकर जबरदस्त क्रेज बना हुआ है। हाल ही में शुरू हुए इस 18वें सीजन में पहले भी कई बड़े बॉलीवुड सितारे अपनी फिल्मों के प्रचार और सामाजिक उद्देश्यों के लिए शिरकत कर चुके हैं। सुनिधि चौहान और अमिताभ बच्चन के बीच की यह खास बॉन्डिंग इस एपिसोड के प्रसारण को लेकर दर्शकों का रोमांच और बढ़ा रही है।

  • भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को मिली नई रफ्तार, समुद्री सुरक्षा और तकनीक साझा करने पर बनी सहमति

    भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को मिली नई रफ्तार, समुद्री सुरक्षा और तकनीक साझा करने पर बनी सहमति

    नई दिल्ली । हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में भारत और जापान ने अपने रक्षा व रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाने का निर्णय लिया है। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच आयोजित उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के दौरान समुद्री सुरक्षा, अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास और सैन्य युद्धाभ्यास को बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर सहमति बनी है। यह वार्ता दोनों देशों के बीच ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    बैठक के दौरान दोनों देशों के रक्षा प्रतिनिधियों ने समुद्री क्षेत्र में सहयोग को व्यापक रूप से विस्तारित करने पर विशेष जोर दिया। इसके तहत दोनों देशों की नौसेनाओं के जहाजों के आपसी दौरों, संयुक्त अभ्यासों, और जहाजों के रखरखाव व मरम्मत सुविधाओं में एक-दूसरे का सहयोग करने पर सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त, समुद्र में बारूदी सुरंगों से निपटने और जहाजों के निर्माण में जापानी तकनीक तथा भारत की विनिर्माण क्षमताओं के संयुक्त इस्तेमाल की रणनीतिक योजना बनाई गई है।

    वार्ता में भविष्य के सैन्य ढांचे को ध्यान में रखते हुए विशेष अभियान बलों के बीच तालमेल बढ़ाने और रक्षा प्रौद्योगिकियों से जुड़ी लंबित परियोजनाओं को गति देने पर भी जोर दिया गया। भारत में बनने वाले इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड के संदर्भ में भी दोनों देशों के रक्षा बल आपस में तकनीकी व रणनीतिक सहयोग जारी रखेंगे। दोनों देशों का मानना है कि यह साझेदारी हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में निष्पक्ष व्यापारिक आवाजाही और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए एक मजबूत स्तंभ की तरह कार्य करेगी।

    वार्ता के दौरान भारत ने क्षेत्रीय सुरक्षा और तकनीक के हस्तांतरण से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी अपना स्पष्ट रुख रखा। भारतीय पक्ष ने जापानी समकक्ष के समक्ष संवेदनशील रक्षा तकनीकों के तीसरे देशों में प्रसार से जुड़े खतरों की ओर ध्यान आकर्षित कराया। पूर्व के ऐतिहासिक संदर्भों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों का हवाला देते हुए भारत ने यह बात रेखांकित की कि किस प्रकार तकनीक का अनधिकृत साझाकरण क्षेत्रीय शांति के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। जापानी प्रतिनिधिमंडल ने इस विषय की संवेदनशीलता को स्वीकार करते हुए सुरक्षा पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया।

    जापानी रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री से भी शिष्टाचार मुलाकात की, जहां द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक दृष्टिकोण से और आगे ले जाने पर विस्तृत चर्चा हुई। मध्य प्रदेश सहित देश भर के रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भारत और जापान के बीच मजबूत होती यह साझेदारी न केवल दोनों राष्ट्रों की सैन्य क्षमताओं को नई दिशा देगी, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की गारंटी के रूप में भी उभरेगी।

    दोनों देशों के बीच हुए ये समझौते स्पष्ट करते हैं कि आने वाले समय में रक्षा, अनुसंधान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रक्षा तकनीकों में दोनों मित्र राष्ट्र एक-दूसरे के प्रमुख सहयोगी बनकर कार्य करेंगे।

  • उच्च शिक्षा या नौकरी के बावजूद परिवार की देखभाल करने वाली महिला 'गृहिणी', कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला

    उच्च शिक्षा या नौकरी के बावजूद परिवार की देखभाल करने वाली महिला 'गृहिणी', कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला

    नई दिल्ली ।कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक सड़क हादसे से जुड़े मुआवजे के मामले की सुनवाई करते हुए ‘गृहिणी’ और ‘होममेकर’ शब्द की परिभाषा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यापक टिप्पणी की है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई महिला अपने घर पर परिवार के सदस्यों की सेवा और देखभाल करती है, तो उसे कानूनी व सामाजिक रूप से ‘गृहिणी’ ही माना जाएगा। इसके लिए महिला का अनपढ़ होना या केवल घर के कामों तक सीमित रहना बिल्कुल आवश्यक नहीं है, भले ही उसके पास उच्च शैक्षणिक डिग्री हो या वह कोई नौकरी करती हो।

    न्यायमूर्ति चिल्लाकुर सुमलता की एकल पीठ ने यह टिप्पणी कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम से जुड़े एक दुर्घटना मुआवजे के मामले पर सुनवाई के दौरान की। इस मामले में बायोटेक्नोलॉजी में स्नातकोत्तर एक महिला वर्ष 2013 में बस दुर्घटना के दौरान घायल हो गई थी। पीड़िता ने दुर्घटना के कारण हुए आर्थिक नुकसान और अपनी कार्यक्षमता प्रभावित होने का हवाला देते हुए मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी। वहीं परिवहन निगम का तर्क था कि महिला की उच्च शिक्षा को देखते हुए उसे केवल एक सामान्य गृहिणी मानकर मुआवजा तय नहीं किया जा सकता।

    उच्च न्यायालय ने परिवहन निगम की इस दलील को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि कोई महिला कितनी भी पढ़ी-लिखी हो या उसके पास डॉक्टरेट जैसी उच्च उपाधि ही क्यों न हो, यदि वह घर पर अपने परिवार की भलाई के लिए योगदान दे रही है, तो वह गृहिणी की श्रेणी में आती है। पीठ ने माना कि एक पेशेवर या कामकाजी महिला भी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए गृहिणी की भूमिका निभाती है और उसके इस योगदान को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने गृहिणी शब्द के अर्थ को और अधिक विस्तार देते हुए कहा कि जो व्यक्ति बिना थके परिवार के लिए मेहनत करता है, अपने आराम का त्याग करता है और एक खुशहाल घर का आधार बनता है, वह होममेकर है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि यह अवधारणा केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कोई भी व्यक्ति जो घर चलाने और परिवार के पोषण में योगदान देता है, वह इस परिभाषा के दायरे में आता है।

    इस मामले में अदालत ने महिला के चिकित्सकीय स्थिति और उपचार की अवधि का आकलन करते हुए माना कि चोटों के कारण पीड़िता को कम से कम तीन महीने तक पूर्ण विश्राम करना पड़ा। इस दौरान वह अपने परिवार की सेवा करने में असमर्थ रही, जो कि एक प्रत्यक्ष क्षति है। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए पीड़िता की काल्पनिक आय तय की और निचली अदालत द्वारा निर्धारित राशि के अतिरिक्त 1,96,800 रुपये का बढ़ा हुआ मुआवजा देने का आदेश जारी किया।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के कानूनी विशेषज्ञों और आम नागरिकों के बीच उच्च न्यायालय के इस फैसले की काफी सराहना हो रही है। इस निर्णय को महिलाओं द्वारा घर और परिवार के प्रति दिए जाने वाले अमूल्य और अनपेक्षित योगदान को कानूनी रूप से मान्यता देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

  • खंडवा कलेक्ट्रेट में डॉग मास्क पहनकर प्रदर्शन करने वाले युवक को सता रहा अपनी जान का खतरा

    खंडवा कलेक्ट्रेट में डॉग मास्क पहनकर प्रदर्शन करने वाले युवक को सता रहा अपनी जान का खतरा

    मध्य प्रदेश: के खंडवा जिले में नगर निगम द्वारा संचालित श्वान बधियाकरण कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अनोखा प्रदर्शन करने वाले एक युवक ने अब अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान डॉग मास्क पहनकर पहुंचे इस युवक का वीडियो इंटरनेट और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ था। प्रदर्शन के इस चर्चित तरीके के बाद अब पीड़ित युवक अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा होने की बात कह रहा है।

    पूरा मामला खंडवा नगर निगम में कथित तौर पर हुए लाखों रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। आरोप है कि श्वान बधियाकरण केंद्र के संचालन और आवारा कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। इसी मुद्दे की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए विपक्षी जनप्रतिनिधि उस युवक को कलेक्ट्रेट में अधिकारियों की टेबल तक ले गए थे। हालांकि इस मामले पर नगर निगम प्रशासन ने अपना स्पष्टीकरण जारी करते हुए सभी आरोपों को खारिज किया है और ई-टेंडरिंग के जरिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होने का दावा किया है।

    प्रदर्शन के बाद से युवक इस कदर भयभीत है कि वह अपना चेहरा और पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहता। युवक का मानना है कि जिन लोगों के खिलाफ यह आवाज उठाई गई है, वे उसे या उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि उसे इस बात का भरोसा भी है कि इस अनोखे कदम के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले का संज्ञान लिया जाएगा, निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

    इस अनूठे प्रदर्शन को लेकर स्थानीय राजनीति भी गरमा गई है। सत्ता पक्ष ने इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का जरिया करार दिया है, जबकि अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसे आधुनिक दौर यानी ‘जेन-जी’ शैली का विरोध प्रदर्शन बताते हुए इसका बचाव किया है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला पूरे देश में चर्चा और बहस का केंद्र बन गया है, जिसमें आवारा कुत्तों की समस्या और पशु अधिकारों को लेकर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार जिले में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। खंडवा के शासकीय अस्पताल के रेबीज नियंत्रण विभाग के मुताबिक बीते महीनों में सैकड़ों मामले दर्ज किए गए हैं, हालांकि सरकारी रेबीज नियंत्रण कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के चलते पिछले कुछ वर्षों में किसी भी मरीज की जान जाने की खबर नहीं है और पीड़ितों को समय पर इलाज उपलब्ध कराया गया है।

    खंडवा में हुए इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नागरिकों की सुरक्षा के सवाल को एक बार फिर सामने ला खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और प्रदर्शनकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।

  • 'वंदे मातरम' पर शर्मिला टैगोर के बयान पर भड़कीं कंगना रनौत, कहा- कला और कविता पर विचार सीमित न रखें

    'वंदे मातरम' पर शर्मिला टैगोर के बयान पर भड़कीं कंगना रनौत, कहा- कला और कविता पर विचार सीमित न रखें


    नई दिल्ली । 
    राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के गायन और उसके छंदों को लेकर शुरू हुई बहस में अब मनोरंजन जगत की दो प्रमुख हस्तियों के अलग-अलग विचार सामने आए हैं। वरिष्ठ अभिनेत्री शर्मिला टैगोर द्वारा ‘वंदे मातरम’ के छंदों को लेकर दिए गए बयान के बाद अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने उस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इस विषय को लेकर दोनों कलाकारों की अलग-अलग सोच के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर नई चर्चा छिड़ गई है।

    पूरे विवाद की शुरुआत शर्मिला टैगोर के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों को पर्याप्त और सर्वसमावेशी बताया था। उन्होंने कहा था कि शुरुआती दो छंदों के बाद के हिस्सों में जिन प्रतीकों और अभिव्यक्तियों का प्रयोग किया गया है, वे केवल एक ही ईश्वर में विश्वास रखने वाले लोगों या विभिन्न धर्मावलंबियों के लिए कहना थोड़ा असहज या मुश्किल हो सकता है। उनके अनुसार, देश की विविधता को ध्यान में रखते हुए प्रथम दो छंदों को गाना अधिक व्यावहारिक है।

    शर्मिला टैगोर की इस टिप्पणी पर असहमति जताते हुए कंगना रनौत ने अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि एक कलाकार के रूप में कला और कविता को देखने का नजरिया इतना सीमित नहीं होना चाहिए। किसी भी रचना या कविता में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द और प्रतीक रूपक की तरह होते हैं, जिनका उद्देश्य मनचाही भावना का संचार करना होता है। ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना और देशवासियों को प्रेरित करने वाली भावना है।

    कंगना रनौत ने अपनी बात रखते हुए कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह राष्ट्रगीत देश की आंतरिक शक्ति को जगाने का संदेश देता है। उन्होंने संकीर्ण सोच से बाहर निकलने का सुझाव देते हुए कहा कि किसी भी कलात्मक अभिव्यक्ति को हिंदू या मुस्लिम दृष्टिकोण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यदि कोई विचारधारा या धर्म किसी एक ही स्वरूप या अभिव्यक्ति तक सीमित है, तो यह उसका व्यक्तिगत या सीमित विषय हो सकता है, लेकिन इसे व्यापक राष्ट्रीय भावना पर लागू नहीं किया जा सकता।

    विभिन्न हिस्सों में इस विषय पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक ओर जहां कुछ लोग शर्मिला टैगोर के सुझाव को सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाला विचार मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग कंगना रनौत के इस पक्ष का समर्थन कर रहे हैं कि राष्ट्रीय गीत की मूल आत्मा और स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक संदर्भ के साथ कोई समझौता या उसका सीमित आंकलन नहीं होना चाहिए।

    सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विषयों पर अक्सर इस प्रकार के अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं। ‘वंदे मातरम’ के छंदों को लेकर शुरू हुआ यह संवाद अब कलात्मक स्वतंत्रता, धार्मिक मान्यताओं और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़ी व्यापक बहस का रूप ले चुका है, जिस पर विभिन्न क्षेत्रों के लोग अपनी राय दे रहे हैं।

  • अक्षय खन्ना फिर मचाएंगे तहलका, रहमान डकैत के बाद अब 'महाकाली' में निभाएंगे असुर गुरु शुक्राचार्य का किरदार

    अक्षय खन्ना फिर मचाएंगे तहलका, रहमान डकैत के बाद अब 'महाकाली' में निभाएंगे असुर गुरु शुक्राचार्य का किरदार

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में अपनी बहुमुखी और सशक्त अभिनय क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता अक्षय खन्ना एक बार फिर से एक नए और चुनौतीपूर्ण अवतार में दर्शकों के सामने आने की तैयारी कर रहे हैं। हाल के समय में कई बड़ी फिल्मों और सीरीज़ में अपनी बेहतरीन अदाकारी से वाहवाही बटोरने के बाद अब वे पौराणिक और काल्पनिक सिनेमा के एक बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने जा रहे हैं। अपनी पिछली चर्चित भूमिकाओं में अलग-अलग रंगों को पेश करने के बाद अभिनेता का यह नया रूप दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता पैदा कर रहा है।

    हाल ही में प्रदर्शित हुई फिल्म धुरंधर में रहमान डकैत के नकारात्मक और जटिल किरदार को निभाकर अक्षय खन्ना ने आलोचकों और दर्शकों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इस फिल्म में उनके द्वारा निभाए गए चरित्र की बारीकियों और संवाद अदायगी की काफी सराहना हुई थी। अब वे प्रशांत वर्मा सिनेमैटिक यूनिवर्स की आगामी बड़ी फिल्म महाकाली में पौराणिक चरित्र असुर गुरु शुक्राचार्य की भूमिका में दिखाई देंगे। इस फिल्म से जुड़ा उनका पहला लुक और झलक 24 अगस्त को सार्वजनिक रूप से जारी किए जाने की संभावना है।

    अक्षय खन्ना के फिल्मी सफर पर नजर डालें तो वे लगातार अलग-अलग प्रकार की भूमिकाओं का चयन करते रहे हैं। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म छावा में मुगल सम्राट औरंगजेब का गंभीर और प्रभावशाली किरदार हो या फिर कोर्टरूम ड्रामा फिल्म सेक्शन 375 में एक तीक्ष्ण बुद्धि वाले वकील तरुण सलूजा की भूमिका, उन्होंने हर बार अपनी अदाकारी से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है। इसके अलावा हाल ही में आई वेब सीरीज इक्का में भी उनके नकारात्मक चरित्र शौर्यमान गौर को काफी सराहा गया था।

    सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की भूमिकाओं में समान रूप से सहज दिखने वाले इस अभिनेता ने अपने करियर की शुरुआत से ही कई यादगार फिल्में दी हैं। थ्रिलर शैली की फिल्म हमराज में चालाक प्रेमी करण मल्होत्रा का रोल हो या फिर सुपरहिट फिल्म दृश्यम 2 में आईजी तरुण अहलावत का सख्त पुलिस अधिकारी वाला किरदार, अक्षय खन्ना ने हर बार कहानी में एक अलग तनाव और रोमांच पैदा किया है। इसके अतिरिक्त दिल चाहता है, ताल और रेस जैसी सुपरहिट फिल्मों में निभाए गए उनके किरदारों को आज भी भारतीय सिनेमा के बेहतरीन प्रदर्शनों में गिना जाता है।

    फिल्म प्रेमियों के बीच अक्षय खन्ना की आने वाली फिल्मों को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। महाकाली में असुर गुरु शुक्राचार्य जैसे महत्वपूर्ण पौराणिक चरित्र को वे किस तरह पर्दे पर जीवंत करते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि अपनी अनूठी संवाद शैली और चेहरे के भावों से गंभीर से गंभीर किरदार में जान फूंकने की उनकी कला इस नई फिल्म को भी एक खास ऊंचाई पर ले जाने में मददगार साबित होगी।

  • विदेशी पिचों पर सचिन या कोहली कौन बेहतर? एबी डिविलियर्स की राय ने बढ़ाई चर्चा, आंकड़ों में किसका पलड़ा भारी

    विदेशी पिचों पर सचिन या कोहली कौन बेहतर? एबी डिविलियर्स की राय ने बढ़ाई चर्चा, आंकड़ों में किसका पलड़ा भारी

    नई दिल्ली । सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली भारतीय क्रिकेट के ऐसे दो नाम हैं जिनकी तुलना अक्सर होती रही है। दोनों ने अलग-अलग दौर में भारतीय बल्लेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और दुनिया के मुश्किल क्रिकेटिंग हालात में अपनी काबिलियत साबित की। अब दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान एबी डिविलियर्स ने दोनों दिग्गजों की विदेशी परिस्थितियों में सफलता को लेकर अपनी राय रखी है। डिविलियर्स की टिप्पणी के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि सचिन और विराट में आखिर बेहतर बल्लेबाज कौन था।

    डिविलियर्स ने सचिन तेंदुलकर की उपलब्धियों को कमतर आंकने के बजाय यह कहा कि सचिन ने भारतीय बल्लेबाजों के लिए एक रास्ता तैयार किया था। उनके मुताबिक सचिन उन शुरुआती भारतीय बल्लेबाजों में थे जिन्होंने यह विश्वास पैदा किया कि उपमहाद्वीप से आने वाला बल्लेबाज तेज गेंदबाजों की उछाल और सीम वाली परिस्थितियों में भी सफल हो सकता है। हालांकि डिविलियर्स का मानना है कि विराट कोहली ने इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए उसे एक अलग स्तर तक पहुंचाया।

    डिविलियर्स की बात का सबसे चर्चित हिस्सा यही रहा कि उन्होंने विराट कोहली को विदेशी परिस्थितियों में सचिन से अधिक मजबूत बताया। उनकी राय के मुताबिक कोहली ने विदेशों में भारतीय बल्लेबाजी के आत्मविश्वास को और बढ़ाया और टीम इंडिया को विदेशी मैदानों पर एक मजबूत टेस्ट टीम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस बयान ने सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में सचिन बनाम विराट की पुरानी बहस को फिर हवा दे दी है।

    हालांकि अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई देती है। सचिन तेंदुलकर ने 200 टेस्ट मैचों में 15,921 रन बनाए और टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने हुए हैं। उनके टेस्ट करियर का बड़ा हिस्सा विदेशी मैदानों पर भी सफल रहा। आंकड़ों के अनुसार सचिन ने दक्षिण अफ्रीका इंग्लैंड न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में 63 टेस्ट खेलकर 51.30 की औसत से 5,387 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 17 शतक और 23 अर्धशतक लगाए।

    वहीं विराट कोहली ने 123 टेस्ट मैचों में 9,230 रन बनाए। भारत के बाहर खेले गए 66 टेस्ट में उनके नाम 4,774 रन दर्ज हैं। चार प्रमुख विदेशी देशों दक्षिण अफ्रीका इंग्लैंड न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में कोहली ने 46 टेस्ट मैचों में 42.08 की औसत से 3,661 रन बनाए। उनके नाम इन परिस्थितियों में 12 शतक और 14 अर्धशतक रहे। यानी कुल विदेशी आंकड़ों में सचिन का पलड़ा मजबूत नजर आता है जबकि डिविलियर्स ने कोहली के प्रभाव और उनके दौर में भारतीय टीम की मानसिकता में आए बदलाव को अधिक महत्व दिया।

    डिविलियर्स ने मौजूदा भारतीय बल्लेबाजों का भी जिक्र किया और कहा कि सचिन और विराट ने अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए मिसाल कायम की। केएल राहुल और देवदत्त पडिक्कल जैसे बल्लेबाजों को उन्होंने इसी परंपरा का हिस्सा बताया। हालांकि राहुल की विदेशी टेस्ट बल्लेबाजी पर उन्होंने सुधार की गुंजाइश भी बताई। डिविलियर्स के मुताबिक राहुल की तकनीक शानदार है लेकिन विदेशों में उनके औसत से ज्यादा की उम्मीद की जाती है। उन्होंने सलाह दी कि राहुल जब क्रीज पर जम जाएं तो अपनी पारियों को बड़े स्कोर में बदलें और शतक के बाद भी बल्लेबाजी जारी रखते हुए 150 से 180 रन जैसे बड़े स्कोर बनाने की कोशिश करें।

    दरअसल सचिन और विराट की तुलना सिर्फ आंकड़ों से पूरी तरह तय नहीं हो सकती। सचिन ने ऐसे दौर में भारतीय क्रिकेट को विश्व मंच पर स्थापित किया जब विदेशी परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजों के सामने कई तरह की चुनौतियां थीं। विराट ने उसी आधार को आगे बढ़ाते हुए फिटनेस आक्रामकता और विदेशी जीत की मानसिकता को नई पहचान दी। इसलिए डिविलियर्स का बयान किसी एक खिलाड़ी को पूरी तरह महान साबित करने के बजाय दोनों की विरासत और उनके प्रभाव के अलग-अलग पहलुओं को सामने रखता है। यही वजह है कि सचिन बनाम विराट की बहस शायद क्रिकेट प्रशंसकों के बीच कभी खत्म नहीं होने वाली।

  • राखी सावंत संग बातचीत में सुनीता आहूजा ने खोले पारिवारिक राज, कोमल रानी स्वर्णकार के नाम पर मचा घमासान

    राखी सावंत संग बातचीत में सुनीता आहूजा ने खोले पारिवारिक राज, कोमल रानी स्वर्णकार के नाम पर मचा घमासान

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के बीच चल रहे पारिवारिक विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। हाल ही में सुनीता आहूजा और अभिनेत्री राखी सावंत के बीच हुई बातचीत के सार्वजनिक होने के बाद मनोरंजन जगत में हलचल तेज हो गई है। इस बातचीत के दौरान सुनीता ने दावा किया है कि यदि उन्होंने अपनी तलाक की अर्जी वापस नहीं ली होती तो गोविंदा अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार से शादी करने की योजना बना रहे थे।

    सुनीता आहूजा के इस सनसनीखेज दावे के सामने आने के बाद नवोदित अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार अचानक सुर्खियों में आ गई हैं। उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाली कोमल रानी स्वर्णकार फिल्म इंडस्ट्री में नई कलाकार के तौर पर कदम रख रही हैं। गोविंदा ने कुछ समय पहले ही अपनी आने वाली फिल्म रूपा के लिए कोमल को मुख्य अभिनेत्री के रूप में मीडिया के सामने पेश किया था। इसके अलावा यह भी चर्चा है कि वह अभिनेता के निर्माण में बन रही एक अन्य फिल्म दुनियादारी में भी नजर आ सकती हैं।

    पारिवारिक विवाद की शुरुआत पहले भी देखने को मिली थी जब सुनीता आहूजा ने एक साक्षात्कार में कुछ तीखी टिप्पणियां की थीं। उस समय उन्होंने किसी का नाम लिए बिना नाराजगी जताई थी। हालांकि बाद में जब गोविंदा सार्वजनिक रूप से अपनी नई फिल्म की सह-कलाकार के साथ नजर आने लगे तो सोशल मीडिया पर इन बयानों को कोमल रानी से जोड़कर देखा जाने लगा। अब राखी सावंत के साथ हुई बातचीत में सीधे तौर पर नाम सामने आने से यह मामला अधिक गरमा गया है।

    सुनीता आहूजा का कहना है कि वह लंबे समय से पारिवारिक स्थिति को लेकर चुप थीं, लेकिन अपने अधिकारों और सम्मान की अनदेखी होने पर उन्होंने अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शादी के विचार तक बात पहुंच चुकी थी। मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में बॉलीवुड के इस चर्चित परिवार के प्रशंसकों के बीच इस नए घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

    दूसरी ओर इस पूरे मामले और निजी जिंदगी से जुड़े आरोपों पर अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उन्होंने मीडिया के समक्ष इस विषय पर चुप्पी साध रखी है। वहीं गोविंदा ने पूर्व में अपनी सह-कलाकार का बचाव करते हुए सुनीता के आरोपों का खंडन किया था और अपना पक्ष रखा था।

    गौरतलब है कि गोविंदा और सुनीता आहूजा की शादी को लगभग 39 वर्ष हो चुके हैं और उनके दो बच्चे भी हैं। कुछ समय पूर्व कोर्ट परिसर के बाहर सुनीता आहूजा की मौजूदगी के बाद से दोनों के रिश्ते में दरार और कानूनी अलगाव की खबरें सामने आई थीं, हालांकि बाद में अर्जी वापस लेने की बात कही गई थी। फिलहाल इस नए खुलासे ने गोविंदा के निजी और व्यावसायिक जीवन से जुड़े विवाद को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

  • ई20 ईंधन दौर में माइलेज बढ़ाने के लिए किआ की बड़ी योजना, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक एसयूवी करेगी लॉन्च

    ई20 ईंधन दौर में माइलेज बढ़ाने के लिए किआ की बड़ी योजना, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक एसयूवी करेगी लॉन्च


    नई दिल्ली । 
    भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में ई20 पेट्रोल के बढ़ते चलन के बीच वाहन निर्माताओं ने गाड़ियों के माइलेज को बेहतर बनाने के लिए रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। ईंधन की बदलती संरचना के कारण उपभोक्ताओं को मिलने वाले माइलेज पर पड़ रहे प्रभाव को ध्यान में रखते हुए वाहन कंपनियां अब हाइब्रिड तकनीकों पर बड़ा दांव लगा रही हैं। इसी क्रम में किआ मोटर्स ने भारतीय बाजार के लिए अपनी भविष्य की योजनाओं की घोषणा की है, जिसके तहत कंपनी अपनी लोकप्रिय कारों को हाइब्रिड पावरट्रेन के साथ उतारने की तैयारी कर रही है।

    कंपनी के वार्षिक वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दौरान किआ के शीर्ष नेतृत्व ने भारतीय बाजार में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार की पुष्टि की। कंपनी की योजना के अनुसार आने वाले वर्षों में किआ सोनेट और कारेन्स को हाइब्रिड इंजन विकल्प के साथ बाजार में पेश किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कंपनी भारतीय ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक स्थानीय रूप से विकसित बी-सेगमेंट इलेक्ट्रिक एसयूवी लाने पर भी काम कर रही है।

    कंपनी के रणनीति रोडमैप के तहत वर्ष 2027 से भारतीय बाजार में उपलब्ध लोकप्रिय मॉडलों जैसे सोनेट, कारेन्स और सेल्टॉस के लिए हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल विकल्प चरणबद्ध तरीके से पेश किए जाएंगे। सोनेट कंपनी के सबसे किफायती मॉडलों में से एक है, इसलिए इसके हाइब्रिड संस्करण को मजबूत पावरट्रेन के साथ तैयार किया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2028 या 2029 तक इस किफायती एसयूवी को हाइब्रिड तकनीक से लैस करके ग्राहकों के लिए पेश करना है।

    नई पीढ़ी की सोनेट को उन्नत के1 प्लेटफॉर्म पर तैयार किए जाने की संभावना है। यह नया प्लेटफॉर्म न केवल हाइब्रिड पावरट्रेन को सपोर्ट करने में सक्षम है, बल्कि इसमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स आर्किटेक्चर, ओवर-द-एयर अपडेट और रिमोट डायग्नोस्टिक्स जैसी तकनीकें भी शामिल हैं। इसके अलावा इस प्लेटफॉर्म की मदद से वाहन के केबिन के भीतर रियर सीट स्पेस और आराम को भी बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है, जो भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है।

    हाइब्रिड तकनीक के आने से मध्य प्रदेश समेत देश के विभिन्न राज्यों के शहरी और ग्रामीण इलाकों में यात्रा करने वाले वाहन चालकों को बेहतर ईंधन दक्षता मिलेगी। मौजूदा समय में किआ कारेन्स विभिन्न ईंधन विकल्पों जैसे पेट्रोल, टर्बो पेट्रोल, डीजल और ऑल-इलेक्ट्रिक में उपलब्ध है, जिसे आने वाले समय में हाइब्रिड अवतार देकर और अधिक कुशल बनाने की योजना है। ऑटो विशेषज्ञ मानते हैं कि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड पावरट्रेन से न केवल माइलेज में बढ़ोतरी होगी बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी देखने को मिलेगी।

    ई20 पेट्रोल की उपस्थिति में पारंपरिक इंजनों की माइलेज क्षमता पर पड़ रहे असर को देखते हुए हाइब्रिड वाहन भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए एक व्यावहारिक विकल्प साबित हो सकते हैं। किआ द्वारा उठाए गए इन कदमों से स्पष्ट है कि कंपनी भारतीय बाजार में पर्यावरण अनुकूल और लागत प्रभावी ड्राइविंग अनुभव प्रदान करने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है।

  • बंटवारा 1947 के फ्लॉप होने पर बोले राजकुमार संतोषी, सनी देओल को मुस्लिम किरदार देने के पीछे थी खास वजह

    बंटवारा 1947 के फ्लॉप होने पर बोले राजकुमार संतोषी, सनी देओल को मुस्लिम किरदार देने के पीछे थी खास वजह

    नई दिल्ली । सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी ने बॉलीवुड को कई यादगार फिल्में दी हैं और इसी वजह से जब दोनों लंबे समय बाद एक साथ फिल्म बंटवारा 1947 लेकर आए तो दर्शकों की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई थीं। फिल्म में सनी देओल पहली बार एक अलग तरह के किरदार में नजर आए हैं। उन्होंने मुस्लिम शख्स सिकंदर मिर्जा की भूमिका निभाई है जो कहानी के दौरान कट्टरपंथ के खिलाफ खड़ा होता है। हालांकि फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर उस स्तर की सफलता नहीं मिल पाई जिसकी उम्मीद की जा रही थी। इसके बाद यह सवाल भी उठने लगा कि क्या सनी देओल को मुस्लिम किरदार में पेश करना फिल्म की दर्शक अपील पर भारी पड़ा। अब निर्देशक राजकुमार संतोषी ने इस सवाल पर खुलकर अपनी बात रखी है।

    राजकुमार संतोषी के मुताबिक फिल्म की कास्टिंग करते समय इस पहलू पर विचार जरूर किया गया था लेकिन सनी देओल को मुस्लिम किरदार में लेने का फैसला किसी मजबूरी के तहत नहीं बल्कि पूरी तरह रचनात्मक सोच के साथ किया गया था। उनका मानना था कि सनी इस भूमिका को बेहद प्रभावी तरीके से निभा सकते हैं। निर्देशक ने बताया कि सिकंदर मिर्जा का किरदार सिर्फ एक धर्म विशेष की पहचान तक सीमित नहीं है बल्कि वह कहानी में एक महत्वपूर्ण विचार और संघर्ष को सामने रखता है। किरदार कट्टरपंथ का विरोध करता है और दुश्मन के इलाके में जाकर लड़ाई लड़ने वाला व्यक्ति है। यही वजह थी कि संतोषी इस भूमिका में सनी देओल की छवि और उनकी अभिनय क्षमता का अलग इस्तेमाल करना चाहते थे।

    निर्देशक ने यह भी बताया कि सनी देओल के साथ उनकी पुरानी दोस्ती और पेशेवर रिश्ते ने इस कास्टिंग को आसान बनाया। दोनों की जोड़ी पहले घायल दामिनी और घातक जैसी सफल फिल्मों में दर्शकों का मनोरंजन कर चुकी है। संतोषी का कहना है कि सनी एक बेहद प्रभावशाली अभिनेता हैं और वह किसी भी किरदार को अपनी शैली में विश्वसनीय बनाने की क्षमता रखते हैं। इसलिए सिकंदर मिर्जा की भूमिका के लिए उन्हें चुनना एक सोचा समझा फैसला था।

    राजकुमार संतोषी ने यह भी खुलासा किया कि वह और सनी देओल काफी समय से दोबारा साथ काम करने की योजना बना रहे थे। करीब 2008 में भी दोनों ने एक फिल्म पर साथ काम करने की योजना बनाई थी। संतोषी ने बताया कि जब उन्होंने उस समय अपनी कहानी सनी को सुनाई थी तो अभिनेता को भी विषय पसंद आया था। निर्देशक उस प्रोजेक्ट को बड़े स्तर की मुख्यधारा की फिल्म बनाना चाहते थे और उनका मानना था कि सनी देओल की लोकप्रियता के जरिए कहानी ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंच सकती है। इसी सोच का असर बाद में बंटवारा 1947 की कास्टिंग में भी दिखाई दिया।

    फिल्म की कहानी बंटवारे के दौर की पृष्ठभूमि से जुड़ी है और इसमें उस समय के सामाजिक तथा मानवीय संघर्षों को सामने लाने की कोशिश की गई है। सनी देओल का किरदार इसी माहौल में अलग नजरिया पेश करता है। हालांकि सिनेमाघरों में फिल्म का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म ने भारत में करीब 33.60 करोड़ रुपये और दुनियाभर में लगभग 47.62 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। इसके बाद फिल्म की कमाई और इसकी कास्टिंग को लेकर चर्चा तेज हुई।

    हालांकि राजकुमार संतोषी ने साफ कर दिया है कि सनी देओल को मुस्लिम किरदार देना फिल्म की कमजोरी नहीं बल्कि उनकी रचनात्मक पसंद थी। उनके अनुसार सनी के लिए भी यह भूमिका एक अलग अभिनय चुनौती थी और अभिनेता इस किरदार को लेकर काफी उत्साहित थे। ऐसे में फिल्म की कमाई कम रहने के बावजूद निर्देशक अपनी कास्टिंग के फैसले को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं।