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  • मिस्र का ऐतिहासिक सफर जारी ईरान का आखिरी मिनट का गोल रद्द दोनों टीमों के लिए अहम रहा मुकाबला

    मिस्र का ऐतिहासिक सफर जारी ईरान का आखिरी मिनट का गोल रद्द दोनों टीमों के लिए अहम रहा मुकाबला

     
    नई दिल्ली  । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप जी में मिस्र और ईरान के बीच खेला गया मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ लेकिन यह ड्रॉ दोनों टीमों के लिए अलग-अलग मायने लेकर आया। इस नतीजे के साथ मिस्र ने विश्व कप इतिहास में पहली बार राउंड ऑफ 32 में जगह बनाकर नया इतिहास रच दिया जबकि ईरान की नॉकआउट दौर में पहुंचने की उम्मीदें भी अभी कायम हैं। ग्रुप चरण समाप्त होने के बाद मिस्र दूसरे स्थान पर रहा जबकि ईरान तीसरे स्थान पर पहुंचा। टूर्नामेंट के प्रारूप के अनुसार तीसरे स्थान पर रहने वाली सर्वश्रेष्ठ आठ टीमें भी अगले दौर में पहुंचेंगी और फिलहाल ईरान इस सूची में छठे स्थान पर बना हुआ है।

    मुकाबले की शुरुआत मिस्र के शानदार प्रदर्शन से हुई। टीम ने पहले ही मिनटों से आक्रामक खेल दिखाया और पांचवें मिनट में महमूद साबेर ने बेहतरीन गोल कर मिस्र को 1-0 की बढ़त दिला दी। शुरुआती झटके के बावजूद ईरान ने जल्द ही वापसी करते हुए 14वें मिनट में रमिन रेजाइएन के गोल की बदौलत स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इसके बाद दोनों टीमों ने लगातार आक्रमण किए लेकिन पहले हाफ में कोई भी टीम बढ़त हासिल नहीं कर सकी और मुकाबला बराबरी पर पहुंच गया।

    दूसरे हाफ में मिस्र ने अपनी रणनीति बदलते हुए रक्षात्मक खेल अपनाया। टीम का फोकस ड्रॉ बचाकर अगले दौर में जगह पक्की करने पर रहा। दूसरी ओर ईरान ने गेंद पर अधिक नियंत्रण बनाए रखा और लगातार मिस्र के गोल पर दबाव बनाया। कई अच्छे मौके मिलने के बावजूद ईरानी खिलाड़ी गोल करने में सफल नहीं हो सके। मिस्र की मजबूत रक्षापंक्ति और गोलकीपर ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए ईरान को बढ़त लेने से रोके रखा।

    मुकाबले के अंतिम क्षण बेहद रोमांचक रहे। पहले मेहदी तारेमी का शानदार हेडर क्रॉसबार से टकरा गया जिससे ईरान बढ़त लेने से चूक गया। इसके बाद स्टॉपेज टाइम के तीसरे मिनट में शोजा खलीलजादेह ने गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाकर ईरानी खेमे में खुशी की लहर दौड़ा दी। खिलाड़ी और टीम स्टाफ जीत का जश्न मनाने मैदान में पहुंच गए लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। वीडियो असिस्टेंट रेफरी ने गोल की समीक्षा की और खलीलजादेह को ऑफसाइड करार देते हुए गोल रद्द कर दिया। इसके साथ ही मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ।

    इस ड्रॉ ने मिस्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि सुनिश्चित कर दी क्योंकि टीम पहली बार विश्व कप के नॉकआउट चरण में पहुंचने में सफल रही। वहीं ईरान को अब अन्य ग्रुपों के परिणामों का इंतजार रहेगा ताकि वह सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में शामिल होकर राउंड ऑफ 32 का टिकट हासिल कर सके।

  • हिंद महासागर से दक्षिण-पूर्व एशिया तक भारत का बढ़ा रणनीतिक प्रभाव, थाईलैंड पहुंचा भारतीय नौसैनिक बेड़ा

    हिंद महासागर से दक्षिण-पूर्व एशिया तक भारत का बढ़ा रणनीतिक प्रभाव, थाईलैंड पहुंचा भारतीय नौसैनिक बेड़ा


    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को और मजबूत करते हुए पूर्वी बेड़े के तीन प्रमुख युद्धपोत आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति को ऑपरेशनल तैनाती के तहत थाईलैंड के सत्ताहिप बंदरगाह भेजा है। इस महत्वपूर्ण पोर्ट कॉल का उद्देश्य भारत और थाईलैंड के बीच समुद्री सहयोग को नई गति देना, रक्षा संबंधों को मजबूत बनाना और दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल को और बेहतर करना है।

    पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल आलोक आनंद के नेतृत्व में पहुंचे भारतीय नौसैनिक दल का रॉयल थाई नेवी ने गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मित्र देशों के साथ बढ़ते रणनीतिक सहयोग का अहम हिस्सा मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे समुद्री संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए इस दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    थाईलैंड प्रवास के दौरान भारतीय और थाई नौसेना के बीच कई पेशेवर गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें क्रॉस डेक विजिट, ऑपरेशनल चर्चा, सामरिक अनुभवों का आदान-प्रदान, खेल प्रतियोगिताएं और सामुदायिक कार्यक्रम शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना, संयुक्त अभियानों की क्षमता मजबूत करना और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और प्रभावी बनाना है।

    यह पोर्ट कॉल भारतीय नौसेना की स्वदेशी क्षमता को भी दुनिया के सामने प्रदर्शित करता है। आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति अत्याधुनिक तकनीक, स्वदेशी डिजाइन और आधुनिक निर्माण प्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इनके जरिए भारत यह संदेश भी दे रहा है कि वह रक्षा उत्पादन और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक विश्वसनीय तथा सक्षम साझेदार के रूप में तेजी से उभर रहा है।

    इससे पहले भारतीय नौसेना के यही युद्धपोत वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी की तीन दिवसीय सफल यात्रा पूरी कर चुके हैं। 22 से 24 जून 2026 के बीच हुए इस दौरे में भारतीय और वियतनाम पीपुल्स नेवी के बीच कई महत्वपूर्ण पेशेवर संवाद, सामरिक अभ्यास और उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की गई थीं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और रक्षा सहयोग को लेकर अपने साझा दृष्टिकोण को और मजबूत किया।

    वियतनाम यात्रा के दौरान दोनों नौसेनाओं ने ऑपरेशनल अनुभव साझा किए और समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर समन्वय पर चर्चा की। वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई बैठकों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षित समुद्री मार्ग और साझा रणनीतिक हितों को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

    भारतीय नौसेना की लगातार बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा, मुक्त और सुरक्षित समुद्री मार्गों तथा मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। थाईलैंड और वियतनाम जैसे रणनीतिक साझेदारों के साथ बढ़ता नौसैनिक सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देगा बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा को भी नई दिशा प्रदान करेगा।

  • शर्मिष्ठा मुखर्जी का खुलासा, प्रणब मुखर्जी ने 2014 के जनादेश को बताया था भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक मोड़

    शर्मिष्ठा मुखर्जी का खुलासा, प्रणब मुखर्जी ने 2014 के जनादेश को बताया था भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक मोड़


    नई दिल्ली । पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी और पूर्व कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने एक लेख में अपने दिवंगत पिता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रसंग साझा करते हुए दावा किया है कि प्रणब मुखर्जी का मानना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में जनता से प्रत्यक्ष जनादेश प्राप्त हुआ। उनके अनुसार वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था जिसने चुनावी राजनीति की दिशा बदल दी।

    शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलने पहुंचे थे। बातचीत के दौरान प्रणब मुखर्जी ने मोदी से चुनाव परिणाम का विश्लेषण पूछा। मोदी ने कहा कि लगभग तीन दशकों बाद किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ है। इस पर प्रणब मुखर्जी ने उनसे पूछा कि इसके अलावा और क्या विशेष बात रही। जब मोदी ने कोई उत्तर नहीं दिया तो उन्होंने स्वयं कहा कि यह पहला अवसर था जब देश की जनता ने औपचारिक रूप से घोषित प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में किसी नेता को स्पष्ट जनादेश दिया।

    लेख में दावा किया गया है कि प्रणब मुखर्जी का मानना था कि इससे पहले देश के प्रधानमंत्री या तो चुनाव के बाद पार्टी द्वारा चुने जाते थे या फिर गठबंधन की परिस्थितियों में सर्वसम्मति से तय किए जाते थे। जवाहरलाल नेहरू से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह तक किसी भी प्रधानमंत्री को चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में जनता से प्रत्यक्ष समर्थन नहीं मिला था। वर्ष 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी को पहले ही प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था और मतदाताओं ने उसी नेतृत्व को ध्यान में रखकर मतदान किया।

    शर्मिष्ठा मुखर्जी ने यह भी लिखा कि उनके पिता का मानना था कि वर्ष 2014 का चुनाव भारतीय संसदीय लोकतंत्र में एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत था जहां मतदाताओं ने लगभग राष्ट्रपति प्रणाली जैसी शैली में एक व्यक्ति के नेतृत्व पर भरोसा जताया। उन्होंने उल्लेख किया कि नरेंद्र मोदी उस समय राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे और पहली बार सांसद बनकर सीधे प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।

    लेख में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का भी उल्लेख किया गया है। शर्मिष्ठा ने लिखा कि डॉ. सिंह को कांग्रेस नेतृत्व ने प्रधानमंत्री चुना था जबकि पी. वी. नरसिम्हा राव और एच. डी. देवेगौड़ा भी प्रधानमंत्री बनने के समय संसद के सदस्य नहीं थे। उनके अनुसार वर्ष 2014 का जनादेश इन सभी उदाहरणों से अलग था क्योंकि उसमें मतदाताओं ने सीधे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया।

    शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भारतीय जनता पार्टी की चुनावी सफलता के पीछे मजबूत संगठन, जमीनी स्तर पर निरंतर काम, विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पहुंच, रणनीतिक सुधार और प्रभावी नेतृत्व को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने लिखा कि इन सभी कारकों ने भाजपा को लगातार चुनाव जीतने वाली राजनीतिक ताकत बना दिया है।

    उन्होंने अपने पश्चिम बंगाल के अनुभव का भी उल्लेख करते हुए कहा कि विधानसभा चुनावों के दौरान कई मतदाता यह कहते थे कि वे भाजपा नहीं बल्कि मोदी को वोट दे रहे हैं। जब उन्हें याद दिलाया जाता था कि यह विधानसभा चुनाव है तो उनका जवाब होता था कि दोनों एक ही बात हैं। इससे स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री मोदी का व्यक्तिगत प्रभाव पार्टी की राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

    लेख के अंत में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजादी के बाद भारत के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में शामिल हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि लोकतंत्र में उनकी नीतियों पर मतभेद स्वाभाविक हैं लेकिन उनके जनसंपर्क, नेतृत्व क्षमता और जनता के साथ मजबूत जुड़ाव को नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि जनता से मिले इस व्यापक जनादेश के अनुरूप देश को आगे बढ़ाने की दिशा में यह नेतृत्व अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेगा।

  • महाकाल मंदिर में अलौकिक भस्म आरती रजत मुकुट त्रिशूल डमरू और रुद्राक्ष माला से निखरा बाबा का श्रृंगार

    महाकाल मंदिर में अलौकिक भस्म आरती रजत मुकुट त्रिशूल डमरू और रुद्राक्ष माला से निखरा बाबा का श्रृंगार


    मध्यप्रदेश । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल के दिव्य और अलौकिक दर्शन हुए। प्रातः चार बजे मंदिर के पट खुलते ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद गर्भगृह में विराजित सभी देवी देवताओं का विधि विधान से पूजन संपन्न हुआ। पंडे पुजारियों ने भगवान महाकाल का दूध दही घी शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया। प्रथम घंटा बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया और पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बन गया।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का भव्य राजा स्वरूप श्रृंगार किया गया। उन्हें रजत ॐ बिल्वपत्र युक्त मुकुट धारण कराया गया। रुद्राक्ष की माला रजत मुंडमाल और सुगंधित पुष्पमालाओं से बाबा का दिव्य श्रृंगार किया गया। मस्तक पर त्रिपुंड अंकित किया गया तथा त्रिशूल डमरू और शेषनाग से अलंकृत रजत मुकुट से उनका स्वरूप और भी आकर्षक दिखाई दिया।

    पूजन के दौरान भगवान गणेश माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय की भी विधिवत आराधना की गई। इसके बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का नैवेद्य अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

    भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर महाकाल के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर सुख समृद्धि और मंगल की कामना की। हर दिन की तरह शनिवार की भस्म आरती भी अत्यंत श्रद्धा आस्था और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुई जिसने भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।

  • पर्यावरण से गवर्नेंस तक हर मोर्चे पर मजबूत अदाणी पोर्ट्स, ESG स्कोर बढ़ने से वैश्विक भरोसे को मिली मजबूती

    पर्यावरण से गवर्नेंस तक हर मोर्चे पर मजबूत अदाणी पोर्ट्स, ESG स्कोर बढ़ने से वैश्विक भरोसे को मिली मजबूती


    नई दिल्ली । देश की अग्रणी पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स कंपनी अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड ने पर्यावरण, सामाजिक जिम्मेदारी और कॉरपोरेट गवर्नेंस के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केयरएज ईएसजी रेटिंग्स ने कंपनी का ईएसजी स्कोर बढ़ाकर 84.3 कर दिया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि कंपनी सतत विकास, पारदर्शिता और जिम्मेदार कारोबारी संचालन के मामले में उद्योग की अग्रणी कंपनियों में शामिल है।

    कंपनी का यह स्कोर पिछले मूल्यांकन के 81 अंकों की तुलना में 3.3 अंक अधिक है। इस सुधार के साथ अदाणी पोर्ट्स को केयरएज की ओर से ईएसजी के क्षेत्र में लीडरशिप श्रेणी में स्थान मिला है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि कंपनी पर्यावरणीय जोखिमों के बेहतर प्रबंधन, सामाजिक उत्तरदायित्व और मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानकों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

    कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यह नई रेटिंग वार्षिक समीक्षा के बाद जारी की गई है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 की इंटीग्रेटेड एनुअल रिपोर्ट में किए गए नए खुलासों और सुधारों को भी शामिल किया गया। रिपोर्ट में पारदर्शिता बढ़ाने और वैश्विक ईएसजी मानकों के अनुरूप नीतियों को मजबूत करने के प्रयासों को विशेष महत्व दिया गया।

    पर्यावरण के क्षेत्र में कंपनी ने कार्बन उत्सर्जन, ऊर्जा उपयोग, जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और पूरी वैल्यू चेन में पर्यावरणीय मानकों को लागू करने की दिशा में उठाए गए कदमों ने भी कंपनी के प्रदर्शन को नई मजबूती दी है।

    सामाजिक जिम्मेदारी के मोर्चे पर भी अदाणी पोर्ट्स ने कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। कर्मचारियों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार, शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना, कार्यस्थल पर विविधता और समान वेतन को बढ़ावा देना तथा कर्मचारियों की भागीदारी मजबूत करना कंपनी की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। इन पहलों का सकारात्मक प्रभाव कंपनी की सामाजिक रेटिंग पर भी देखने को मिला।

    कॉरपोरेट गवर्नेंस के क्षेत्र में बोर्ड स्तर पर ईएसजी की नियमित निगरानी, व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम और सप्लाई चेन से जुड़े साझेदारों के साथ बेहतर समन्वय ने कंपनी की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया है। कंपनी का कहना है कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सतत सुधार की नीति ही उसकी दीर्घकालिक सफलता का आधार है।

    कंपनी ने अपने बयान में कहा कि यह रेटिंग इस बात का प्रमाण है कि पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में अदाणी पोर्ट्स ईएसजी मानकों के मामले में अग्रणी कंपनियों में शामिल है। कंपनी पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व और सुशासन के सर्वोत्तम मानकों को अपनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

    इस उपलब्धि के साथ कंपनी को हाल ही में एक और बड़ी सफलता मिली थी, जब एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने उसकी लंबी अवधि की इश्यूअर क्रेडिट रेटिंग और सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स की रेटिंग को BBB- से बढ़ाकर BBB कर दिया। एजेंसी ने कंपनी का स्टेबल आउटलुक भी बरकरार रखा। यह अपग्रेड मजबूत नकदी प्रवाह, स्वस्थ वित्तीय स्थिति और बड़े विस्तार कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने की क्षमता को देखते हुए दिया गया।

    इन लगातार मिल रही सकारात्मक रेटिंग्स ने अदाणी पोर्ट्स की वैश्विक विश्वसनीयता को और मजबूत किया है। साथ ही यह संकेत भी दिया है कि कंपनी भविष्य में सतत विकास, निवेशकों के भरोसे और जिम्मेदार कारोबारी संचालन के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • किताबों से कंप्यूटर तक, माछिल में सेना ने खोले शिक्षा और रोजगार के नए रास्ते

    किताबों से कंप्यूटर तक, माछिल में सेना ने खोले शिक्षा और रोजगार के नए रास्ते


    नई दिल्ली । भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती कुपवाड़ा जिले के माछिल क्षेत्र में शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आधुनिक स्टडी हब और स्किल डेवलपमेंट सेंटर का उद्घाटन किया है। इस पहल का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं, महिलाओं और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी कौशल उपलब्ध कराना है। इस नई सुविधा को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है और उन्होंने सेना की इस पहल की खुले दिल से सराहना की है।

    नवनिर्मित स्टडी हब में कंप्यूटर प्रशिक्षण, आईटी शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, लाइब्रेरी और हाई स्पीड वाई-फाई जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा महिलाओं के लिए कालीन बुनाई, सिलाई और अन्य कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

    स्थानीय युवतियों ने कहा कि पहले इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। कंप्यूटर सीखने या व्यावसायिक प्रशिक्षण लेने के लिए उन्हें कुपवाड़ा शहर जाना पड़ता था, जिसमें काफी समय लगता था और कई बार परिवार की अनुमति भी नहीं मिल पाती थी। अब गांव में ही आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र खुलने से नई-नई तकनीक और हुनर सीखने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके भविष्य को नई दिशा मिलेगी।

    एक अन्य युवती ने सेना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कंप्यूटर सेंटर, कालीन बुनाई केंद्र और अन्य प्रशिक्षण सुविधाएं शुरू होने से अब स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सकेगा। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी तथा अधिक से अधिक लड़कियां शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ सकेंगी।

    स्थानीय युवकों ने भी इस पहल को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि इस केंद्र में माताओं और बहनों के लिए सिलाई और अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध होगा, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि समाज के विकास और युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    गांव के एक निवासी ने बताया कि इस परियोजना में समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखा गया है। विद्यार्थियों के लिए आधुनिक लाइब्रेरी और वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे वे प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे। डिजिटल संसाधनों तक आसान पहुंच मिलने से ग्रामीण छात्रों को अब बड़े शहरों जैसी सुविधाएं अपने क्षेत्र में ही मिलेंगी।

    स्थानीय लोगों का मानना है कि इस स्टडी हब और स्किल डेवलपमेंट सेंटर से आने वाले वर्षों में क्षेत्र के युवाओं को शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि सीमावर्ती गांव में कंप्यूटर शिक्षा और आधुनिक प्रशिक्षण की ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। भारतीय सेना की यह पहल न केवल शिक्षा को बढ़ावा देगी बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • उज्जैन से दिग्विजय सिंह का केंद्र और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा प्रहार बोले चंपत राय पर हो केस दर्ज

    उज्जैन से दिग्विजय सिंह का केंद्र और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा प्रहार बोले चंपत राय पर हो केस दर्ज


    मध्यप्रदेश । उज्जैन दौरे पर पहुंचे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले को लेकर केंद्र सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की। दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किया गया था इसलिए ट्रस्ट की जवाबदेही भी केंद्र सरकार की बनती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चांदी की ईंटों जेवरात नकदी और विदेशी चंदे के प्रबंधन में गड़बड़ियां हुई हैं जिनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

    उज्जैन के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन संगठनों का धर्म और धार्मिक कार्यों से कोई सरोकार नहीं है बल्कि उनका उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना है। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर के नाम पर सनातन समाज की भावनाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने चंपत राय को संघ का प्रचारक बताते हुए कहा कि उन्हें धार्मिक परंपराओं से कोई संबंध नहीं है और उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

    दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि धार्मिक परंपराओं का पालन नहीं किया गया और पूजा की प्रक्रिया शास्त्रीय नियमों के अनुरूप नहीं थी। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले में ट्रस्ट के सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका की जांच कराई जाए और आवश्यक होने पर उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाए।

    उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल प्रेस वार्ताओं तक सीमित नहीं रखेगी बल्कि गांव गांव और घर घर तक पहुंचाएगी। उन्होंने बताया कि उज्जैन जिले की 609 पंचायतों में कांग्रेस ने दल और मंडल स्तर पर समितियां गठित की हैं जो लोगों के बीच जाकर राम मंदिर दान चोरी के मामले की जानकारी देंगी और पूरे घटनाक्रम को जनता के सामने रखेंगी।

    प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं और मंदिर की जमीन को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि महाकाल मंदिर की जमीन आरएसएस से जुड़ी संस्थाओं को दी गई और वहां गेस्ट हाउस बनाए गए जबकि साधु संतों की उपेक्षा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान व्यवस्था में आम श्रद्धालुओं और संत समाज को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    इंदौर उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन के नामकरण को लेकर चल रहे विवाद पर भी उन्होंने अपनी राय रखी। उनका कहना था कि इस क्षेत्र के नाम में इंदौर का नाम पहले होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को सलाह देते हुए कहा कि प्रशासनिक स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों की जिम्मेदारी आखिरकार सरकार पर ही आती है इसलिए अधिकारियों पर प्रभावी नियंत्रण रखना जरूरी है।

    प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने कुछ दस्तावेज भी दिखाए और दावा किया कि उनके पास जमीन घोटाले से जुड़े नए साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की पूरी जांच के बाद संबंधित लोगों के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे और पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

  • भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का दुनिया ने माना लोहा, लंदन में पीयूष गोयल ने गिनाए निवेश के बड़े अवसर

    भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का दुनिया ने माना लोहा, लंदन में पीयूष गोयल ने गिनाए निवेश के बड़े अवसर


    नई दिल्ली । भारत वैश्विक निवेश और विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। इसी दिशा में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लंदन में आयोजित कई महत्वपूर्ण बैठकों के दौरान दुनिया की अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने भारत की आर्थिक ताकत और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तृत खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत का मजबूत औद्योगिक आधार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वैश्विक निवेशकों के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान कर रही है।

    पीयूष गोयल ने एशिया हाउस और दुनिया की प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित गोलमेज बैठक में आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि बैठक में भारत के विकसित होते मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम, निवेश के अनुकूल माहौल और विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद अपार संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता यानी सीईटीए दोनों देशों की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती देगा।

    उन्होंने यूके-इंडिया बिजनेस काउंसिल के सदस्यों और विभिन्न वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ आयोजित इंटरैक्टिव लंच बैठक में भी भाग लिया। इस दौरान दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने, नई कारोबारी संभावनाओं को विकसित करने और साझा आर्थिक विकास को गति देने पर व्यापक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता लगातार मजबूत हो रही है और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

    पीयूष गोयल ने लंदन बिजनेस स्कूल में फैकल्टी, छात्रों, पूर्व छात्रों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, नवाचार और कौशल विकास भारत और ब्रिटेन के संबंधों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार छात्र, युवा पेशेवर और उद्यमी दोनों देशों के बीच ज्ञान, तकनीक और नवाचार आधारित साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

    उन्होंने कहा कि 15 जुलाई 2026 से लागू होने वाला भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए नए व्यापारिक अवसरों का द्वार खोलेगा। इससे निवेश, व्यापार, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में सहयोग को नई गति मिलेगी। उन्होंने उद्योग जगत से इस समझौते का अधिकतम लाभ उठाने और दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने का आह्वान किया।

    इस दौरे की एक और विशेषता यह रही कि पीयूष गोयल भारत के अब तक के सबसे बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडलों में से एक के साथ ब्रिटेन पहुंचे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में 160 से अधिक अग्रणी भारतीय कंपनियां शामिल हैं, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनाना है।

    बिजनेस प्लेनरी सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। उन्होंने दोनों देशों के उद्योगपतियों से सहयोग बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और साझा समृद्धि के लिए अधिक निवेश करने की अपील की। उनके अनुसार भारत आज वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, विनिर्माण और तकनीकी नवाचार का विश्वसनीय साझेदार बनकर उभर रहा है।

    लंदन दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम के सम्मान समारोह में भी हिस्सा लिया। उन्होंने खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन और उनके संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम देश की लाखों बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने आगामी महिला टी20 विश्व कप के लिए पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि भारतीय टीम विश्व कप जीतकर देश का गौरव बढ़ाएगी।

  • 2030 तक 50 गीगावाट का लक्ष्य: स्वच्छ ऊर्जा और स्टोरेज से बदलेगा भविष्य, सागर अदाणी का बड़ा विजन

    2030 तक 50 गीगावाट का लक्ष्य: स्वच्छ ऊर्जा और स्टोरेज से बदलेगा भविष्य, सागर अदाणी का बड़ा विजन


    नई दिल्ली । ऊर्जा सुरक्षा और सतत आर्थिक विकास आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं। ऐसे समय में स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक तकनीकों पर आधारित ऊर्जा व्यवस्था भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बनती जा रही है। इसी दिशा में अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अदाणी ने कहा है कि तेजी से बढ़ता विद्युतीकरण ही ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और आर्थिक विकास को नई गति देने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उनका मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा को आधुनिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों के साथ जोड़कर ही चौबीसों घंटे भरोसेमंद और किफायती स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराई जा सकती है।

    लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान लंदन के साइंस म्यूजियम में आयोजित पहले अदाणी ग्रीन एनर्जी डायलॉग में सागर अदाणी ने वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा की किफायत और पर्यावरणीय स्थिरता तीनों चुनौतियों का समाधान बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण के जरिए संभव है। जो देश मजबूत अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करना चाहते हैं उनके लिए यह अब विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता बन चुका है।

    सागर अदाणी ने कहा कि केवल सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन पर्याप्त नहीं है। इन स्रोतों को बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ना बेहद जरूरी है। इससे स्वच्छ ऊर्जा को लगातार और भरोसेमंद तरीके से उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अदाणी ग्रीन एनर्जी वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है। गुजरात के खावड़ा में विकसित हो रहा विशाल नवीकरणीय ऊर्जा पार्क इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है जहां बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण सुविधाओं को भी शामिल किया जा रहा है।

    इस अंतरराष्ट्रीय संवाद में नीति निर्माता, निवेशक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और जलवायु विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि ऊर्जा परिवर्तन को गति देने के लिए मजबूत नीतियों, आधुनिक बुनियादी ढांचे और बड़े निवेश की आवश्यकता होगी। कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए देशों के बीच सहयोग और तकनीकी साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण है।

    एनर्जी ट्रांजिशन्स कमीशन के सह-अध्यक्ष लॉर्ड अडेयर टर्नर ने कहा कि यदि दुनिया को शून्य उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना है तो बिजली आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देनी होगी। उनके अनुसार सड़क परिवहन, भवनों की हीटिंग और औद्योगिक प्रक्रियाओं में विद्युतीकरण पहले से ही आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हो रहा है। वहीं नई तकनीकों की मदद से भारी उद्योगों में भी स्वच्छ बिजली का उपयोग तेजी से बढ़ाया जा सकता है।

    एम्बिशन लूप के सह-संस्थापक और यूके क्लाइमेट चेंज कमेटी के अध्यक्ष नाइजेल टॉपिंग ने कहा कि बिजली उत्पादन को कार्बन मुक्त बनाने के साथ-साथ उन क्षेत्रों का भी तेजी से विद्युतीकरण करना होगा जो अभी तक जीवाश्म ईंधन पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक बिजली ग्रिड और घटती तकनीकी लागत बड़े निवेश आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    अदाणी समूह ऊर्जा परिवर्तन और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 100 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने की प्रतिबद्धता जता चुका है। समूह नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण, बिजली ट्रांसमिशन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नई औद्योगिक तकनीकों में लगातार निवेश कर रहा है। हाल ही में समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भी विविध ऊर्जा पोर्टफोलियो विकसित करने और 10 गीगावाट तक परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने की योजना की घोषणा करते हुए भरोसेमंद और कम कार्बन ऊर्जा भविष्य की दिशा में समूह की दीर्घकालिक रणनीति को दोहराया।

  • सिंहस्थ-2028 होगा दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन, सीएम मोहन यादव ने दिए व्यापक तैयारियों के निर्देश

    सिंहस्थ-2028 होगा दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन, सीएम मोहन यादव ने दिए व्यापक तैयारियों के निर्देश

     
    मध्यप्रदेश । उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर आयोजित कार्यशाला में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आगामी महापर्व को विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बताते हुए सभी विभागों को अभी से व्यापक तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में अधोसंरचना विकास से लेकर यातायात, आवास, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं तक हर व्यवस्था को समय रहते मजबूत करना होगा।

    मुख्यमंत्री शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर उज्जैन पहुंचे जहां उन्होंने सिंहस्थ-2016 का संकल्प सिंहस्थ-2028 का संकल्प विषय पर आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में वर्ष 2016 के सिंहस्थ के दौरान जिम्मेदारी संभाल चुके अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और आगामी आयोजन को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए सुझाव दिए। उज्जैन संभाग के आयुक्त आशीष सिंह ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और विकास कार्यों पर विस्तृत प्रस्तुति भी दी। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले सिंहस्थ में सबसे बड़ी चुनौती यातायात और भीड़ प्रबंधन रही थी। कई स्थानों पर लंबा जाम लगने से श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा था। इस बार ऐसी स्थिति से बचने के लिए मध्य प्रदेश की सीमाओं से जुड़े राज्यों के साथ पहले से समन्वय स्थापित करना होगा ताकि विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन को व्यवस्थित किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 की तुलना में अब उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में सड़क और रेल नेटवर्क काफी बेहतर हो चुका है। फतेहाबाद रेलवे ट्रैक शुरू हो चुका है और अधिकांश प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण भी पूरा हो गया है। इन सुविधाओं का बेहतर उपयोग करते हुए श्रद्धालुओं की आवाजाही को अधिक सुगम बनाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ केवल क्षिप्रा नदी में स्नान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि श्रद्धालु पूरे उज्जैन के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन भी करेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए शहर के सभी प्रमुख मंदिरों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य प्राथमिकता से किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक अनुभव मिल सके।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उज्जैन से लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में स्थित ढाबों, होटलों और अन्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जाए। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं को पर्याप्त आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकारी इंतजामों के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि सरकार का प्रयास रहेगा कि श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए निजी व्यवस्थाओं पर निर्भर न रहना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सभी विभागों के समन्वित प्रयास और पड़ोसी राज्यों के सहयोग से सिंहस्थ-2028 को पहले से अधिक भव्य, सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक बनाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर सभी तैयारियां तय समय सीमा में पूरी करने का आह्वान किया।