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  • गणतंत्र दिवस पर पिछले 16 सालों में कौन-कौन से राज्य रहे झांकी के विजेता, जानिए कैसे होता है चयन ?

    गणतंत्र दिवस पर पिछले 16 सालों में कौन-कौन से राज्य रहे झांकी के विजेता, जानिए कैसे होता है चयन ?

    नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस की झांकियां भारत के राष्ट्रीय उत्सव में एक खास जगह रखती हैं। हर भारतीय के बचपन की यादें समेटे हुए यह परेड श की एक बदलती हुई कहानी दिखाती है। 1952 में कल्चरल झांकियां शुरू की गईं, जिससे परेड में गर्व और अनेकता की भावना का एक नया पहलू जुड़ा।

    सांस्कृतिक झांकियों की शुरुआत असल में “विविधता में एकता” के तहत हुई थी। शुरुआती परेड में साधारण झांकियां होती थीं जिनमें फ्लैटबेड ट्रकों पर क्षेत्रीय हस्तशिल्प और लोक कलाकार होते थे। धीरे-धीरे समय के साथ झांकियों की झलक भी बदलती गई। आज हम यहां पिछले 16 सालों में जो झांकियां विजेता रहीं, उनकी बात करेंगे।

    उत्तर प्रदेश, महाकुंभ 2025
    इस झांकी ने महाकुंभ मेले का एक शानदार नजारा पेश किया था। इसमें ‘समुद्र मंथन’, ‘अमृत कलश’ और संगम के किनारे पवित्र स्नान करते साधु-संतों को दिखाकर आध्यात्मिक भव्यता को दर्शाया गया था। इसमें ‘विरासत’ और ‘विकास’ के लाक्षणिक संगम को भी दिखाया गया था।
    ओडिशा, महिला सशक्तिकरण और रेशम 2024

    झांकी में पट्टाचित्र कला रूप दिखाया गया था और राज्य की हस्तशिल्प अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका पर जोर दिया गया था। इसकी बारीक हाथ से बनी डिटेल्स और पारंपरिक नर्तकियों की लाइव परफॉर्मेंस के लिए इसकी खूब तारीफ हुई।
    उत्तराखंड, मानसखंड 2023

    इस झांकी में घने देवदार के जंगलों के बीच जागेश्वर धाम को दिखाया गया था। यह कर्तव्य पथ पर शांत, ‘देवभूमि’ का माहौल लाने के लिए खास थी।

    उत्तर प्रदेश, अयोध्या और राम मंदिर 2021
    इसमें बन रहे राम मंदिर का एक भव्य मॉडल दिखाया गया था। इसमें दीपोत्सव की झलकियां और रामायण महाकाव्य की अलग-अलग कहानियों के साथ-साथ ऋषि वाल्मीकि की एक विशाल मूर्ति भी दिखाई गई थी।

    असम, भोरताल नृत्य और हस्तशिल्प 2020
    इस झांकी को भोरताल नृत्य और राज्य के बांस और बेंत की कारीगरी पर फोकस करके दिखाया गया था। झांकी पर कलाकारों द्वारा मंजीरों की लयबद्धता से एक अनोखा अनुभव हुआ।
    त्रिपुरा 2019

    इस झांकी में गांधीवादी तरीके से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनता हुआ दर्शाया गया था।
    महाराष्ट्र 2018

    इस झांकी में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज तिलक को दर्शाया गया था।
    अरुणाचल प्रदेश 2017

    इस झांकी में मोनपास के याक डांस को दर्शाया गया।

    पश्चिम बंगाल 2016

    इस झांकी में भटके हुए जोगियों को दर्शाया गया।
    महाराष्ट्र 2015

    इस झांकी की थीम वारी से पंढर पुर थी।
    पश्चिम बंगाल 2014

    इस झांकी की थीम पुरुलिया छऊ नृत्य थी।
    केरल 2013

    इसने “गॉड्स ओन कंट्री” की प्राकृतिक सुंदरता को वहां के लोगों की आजीविका के साथ खूबसूरती से बैलेंस किया, जिसमें एक विशाल हाउस-बोट (केट्टुवल्लम) का रेप्लिका दिखाया गया था।
    एचआरडी मंत्रालय 2012

    इस झांकी थीम साक्षर भारत थी।
    दिल्ली 2011

    इस झांकी की थीम सांस्कृतिक और धार्मिक सद्भाव थी।
    संस्कृति मंत्रालय, 2010

    इस झांकी थीम भारतीय संगीत वाद्ययंत्र थी।

  • महिला गिग वर्कर्स की हड़ताल! आज ऑनलाइन हड़ताल, सब कुछ बंद

    महिला गिग वर्कर्स की हड़ताल! आज ऑनलाइन हड़ताल, सब कुछ बंद


    नई दिल्‍ली। गिग और प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले कर्मचारियों ने अपने अधिकार और सुरक्षा की मांग को लेकर पूरे देश में आंदोलन करने का ऐलान किया है। गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन के अनुसार, कर्मचारी 26 जनवरी 2026 को ऐप बंद करके ऑनलाइन हड़ताल करेंगे। इसके बाद 3 फरवरी 2026 को सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया जाएगा। बड़ी संख्या में महिला गिग वर्कर्स इस आंदोलन की अगुवाई करेंगी।

    यूनियन के मुताबिक, देश में लाखों गिग वर्कर्स अलग-अलग ऐप कंपनियों से जुड़े हुए हैं। ये लोग फूड डिलीवरी, घरेलू काम से लेकर लॉजिस्टिक्स तक कई क्षेत्रों में काम करते हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक श्रमिक का दर्जा नहीं मिला है।

    उन्हें हमेशा कमाई की अनिश्चितता और कंपनियों की मनमानी नीतियों का सामना करना पड़ता है।
    सबसे ज्यादा महिला वर्कर्स के सामने चुनौतियां
    यूनियन के अनुसार, महिला कर्मचारियों का कहना है कि जब वे ऐसी समस्याओं की शिकायत कंपनियों से करती हैं, तो उन्हें अक्सर सही और संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। कई बार शिकायत करने के बाद उनकी आईडी ही बंद कर दी जाती है, जिससे उनकी रोजी-रोटी छिन जाती है।
    गिग वर्कर्स की सबसे बड़ी शिकायत मनमाने तरीके से आईडी ब्लॉक किया जाना शामिल है। उनका कहना है कि बिना स्पष्ट कारण उन्हें काम से हटा दिया जाता है। इस वजह से उनकी आय अचानक बंद हो जाती है और परिवार की आजीविका संकट में पड़ जाती है।

    यूनियन का कहना है कि कंपनियों द्वारा अपनाए जा रहे ऑटो असाइन सिस्टम, रेटिंग सिस्टम और बंडल बुकिंग जैसी व्यवस्थाएं पारदर्शी नहीं हैं और इनके जरिए श्रमिकों पर अतिरिक्त दबाव बनाया जाता है। इसके अलावा, आय दरों में लगातार कटौती और जुर्मानों की वजह से आमदनी पहले से भी अस्थिर हो गई है।

  • रोजगार की रीढ़ बना MSME, देश के लिए सबसे शक्तिशाली मंच: जीतन राम मांझी

    रोजगार की रीढ़ बना MSME, देश के लिए सबसे शक्तिशाली मंच: जीतन राम मांझी

    नई दिल्ली। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि एमएसएमई रोजगार पैदा करने का सबसे मजबूत और प्रभावी मंच हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाना है तो एमएसएमई सेक्टर को और मजबूती देनी होगी। मांझी गणतंत्र दिवस परेड 2026 देखने के लिए आमंत्रित एमएसएमई लाभार्थियों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

    कृषि के बाद अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान

    मंत्री ने बताया कि एमएसएमई न सिर्फ रोजगार देता है, बल्कि देश की समृद्धि को भी मजबूत करता है। उन्होंने कहा, “कृषि के बाद एमएसएमई क्षेत्र का ही आर्थिक विकास में सबसे बड़ा योगदान है। यह सेक्टर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी अवसर पैदा करता है, जिससे संतुलित विकास संभव हो पाता है।” मांझी ने एमएसएमई की भूमिका को अहम और निर्णायक बताते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत का मजबूत आधार करार दिया।

    गणतंत्र दिवस परेड में विशेष अतिथि बने कारीगर

    इस अवसर पर रक्षा मंत्रालय की ओर से एमएसएमई से जुड़े लाभार्थियों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। इनमें पीएम विश्वकर्मा योजना के 100 लाभार्थी, खादी विकास योजना के तहत प्रशिक्षित 199 कारीगर, सेल्फ रिलायंट इंडिया (एसआरआई) फंड के 50 लाभार्थी और महिला कॉयर योजना की 50 उत्कृष्ट महिला कारीगर अपने जीवनसाथियों के साथ शामिल रहीं। यह आयोजन कारीगरों और उद्यमियों के सम्मान का प्रतीक बना।

    ‘मिनी इंडिया’ जैसा दृश्य: शोभा करंदलाजे

    एमएसएमई राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लाभार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “आप सभी को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे मैं एक ‘मिनी इंडिया’ देख रही हूं।” उन्होंने कहा कि सभी अलग-अलग क्षेत्रों और पृष्ठभूमि से आए हैं, लेकिन देश की प्रगति के लिए एकजुट हैं। करंदलाजे ने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सरकार लगातार ऐसी योजनाएं बना रही है, जिनसे प्रशिक्षण, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

    मेहनत से आगे बढ़ रहा देश: सचिव

    एमएसएमई मंत्रालय के सचिव एस.सी.एल. दास ने कहा कि देश की प्रगति आप सभी की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने विविधता में एकता को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया और भरोसा दिलाया कि एमएसएमई मंत्रालय लगातार लाभार्थियों से जुड़ा रहेगा, ताकि और लोग आगे बढ़ सकें।

    पीएम विश्वकर्मा और एसआरआई फंड की अहम भूमिका

    पीएम विश्वकर्मा योजना 18 पारंपरिक कार्यों से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, टूलकिट, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने का काम कर रही है। वहीं, सेल्फ रिलायंट इंडिया (एसआरआई) फंड एमएसएमई को मजबूत कर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक अहम सरकारी पहल साबित हो रहा है।

  • यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता, मर्सिडीज जैसी कारों पर भारत 40% तक घटाएगा टैरिफ

    यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता, मर्सिडीज जैसी कारों पर भारत 40% तक घटाएगा टैरिफ

    मुंबई। अगर आप लग्जरी कार खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता (Free Trade Deal) होने जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, भारत यूरोप से आने वाली कारों पर लगने वाले भारी-भरकम इंपोर्ट ड्यूटी को 110% से घटाकर सीधे 40% करने की तैयारी में है.

    यह देश के बड़े बाजार को खोलने की अब तक की सबसे बड़ी पहल हो सकती है, क्योंकि दोनों देशों के बीच मंगलवार तक फ्री ट्रेड समझौता होने की उम्मीद है.
    क्या हैं डील की अहम बातें?
    अभी भारत विदेशी कारों पर 110% तक टैक्स लेता है, जिसे घटाकर 40% किया जा सकता है.
    यह छूट उन कारों पर मिलेगी जिनकी कीमत 15,000 यूरो (करीब 13-14 लाख रुपये) से ज्यादा होगी. यानी इसका बड़ा फायदा लग्जरी कारों को मिलेगा.

    टैक्स सिर्फ 40% पर नहीं रुकेगा. आने वाले समय में इसे धीरे-धीरे घटाकर 10% तक लाने की योजना है.
    इस फैसले से फॉक्सवैगन, मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू जैसी दिग्गज कंपनियों की कारें भारतीय बाजार में काफी सस्ती हो जाएंगी.

    आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?
    अभी तक विदेशों में बनी कारें भारत आते-आते अपनी असली कीमत से दोगुनी महंगी हो जाती थीं. टैक्स कम होने से इन प्रीमियम कारों की कीमतों में भारी गिरावट आएगी, जिससे भारतीय ग्राहकों के पास ज्यादा ऑप्शन होंगे. वहीं दूसरी तरफ विदेशी कंपनियों के लिए भारत में अपना बाजार बढ़ाना आसान होगा.

    भारत के लिए क्यों अहम है यह FTA?

    यह भारत के लिए अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता होगा. 27 देशों के यूरोपीय ब्लॉक के साथ सर्विस और सामानों का यह तालमेल भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस हब बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है.

  • ट्रंप के टैरिफ से हुए नुकसान की भरपाई! एक डील से भारत कमाएगा 10 गुना, कई सेक्टर्स को फायदा

    ट्रंप के टैरिफ से हुए नुकसान की भरपाई! एक डील से भारत कमाएगा 10 गुना, कई सेक्टर्स को फायदा


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल और अगस्‍त में भारत पर 25-25 फीसदी का टैरिफ लगाया था. भारत से अमेरिका जाने वाले उत्‍पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद भारतीय निर्यात क्षेत्र को करीब 6 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था. अब भारत ने ऐसा दांव खेला है कि सिर्फ एक डील से न सिर्फ इस पूरे नुकसान की भरपाई हो जाएगी, बल्कि इस नुकसान के मुकाबले 10 गुना ज्‍यादा कमाई हो जाएगी. यह डील कल यानी 27 जनवरी को पूरी होने का अनुमान है और इससे भारत एकसाथ 27 देशों को साधने में सफल होगा.
    भारत और यूरोपीय यूनियन मुक्‍त व्‍यापार समझौते (FTA) पर 27 जनवरी को हस्‍ताक्षर कर सकते हैं. दोनों पक्षों के नेताओं ने इसे ‘मदर ऑफ आल डील’ का नाम दिया है, क्‍योंकि इस एक डील से ही भारत को यूरोप के 27 देशों में बिना शुल्‍क के कारोबार करने की अनुमति मिल जाएगी. फिलहाल यूरोपीय यूनियन की अध्‍यक्ष भारत में गणतंत्र दिवस के मौके पर बतौर मुख्‍य अतिथि मौजूद हैं. इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड को लेकर बातचीत भी हुई है और अब इस पर अंतिम मुहर लगने का इंतजार है.
    भारतीय निर्यात को कितना फायदा
    भारत और यूरोप के बीच में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होता है तो भारतीय निर्यात का ट्रेड सरप्‍लस करीब 50 अरब डॉलर बढ़ जाएगा. एमके ग्‍लोबल ने अपनी शोध में बताया है कि यह डील पूरी हुई तो वित्‍तवर्ष 2031 तक भारत का यूरोप के साथ ट्रेड सरप्‍लस 50 अरब डॉलर का हो जाएगा. वित्‍तवर्ष 2025 में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्‍सेदारी 17.3 थी, जो इस डील के बाद 2031 तक 22 से 23 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है.
    यूरोप के लिए भी फायदे की डील
    यह डील सिर्फ भारत को ही नहीं, बल्कि यूरोपीय बाजार को भी फायदा पहुंचाएगी. भले ही अभी यूरोप के निर्यात बाजार में भारत की हिस्‍सेदारी महज 0.8 फीसदी है, लेकिन वित्‍तवर्ष 2025 में यूरोप का भारत के साथ 15 अरब डॉलर का व्‍यापार घाटा रहा था. वित्‍तवर्ष 2019 में यूरोप का भारत के साथ 3 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्‍लस था. अगर यह डील पूरी होती है तो निश्चित रूप से भारत के कारोबार को और गति मिलेगी और भारत का यूरोप के साथ ट्रेड सरप्‍लस और भी ज्‍यादा हो जाएगा.

    किस सेक्‍टर को सबसे ज्‍यादा लाभ
    यूरोप के साथ फ्री ट्रेड डील पूरी होने से भारत के इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, मशीनरी और केमिकल उद्योग को सबसे ज्‍यादा लाभ मिलेगा. चालू वित्‍तवर्ष में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्‍सेदारी मामूली रूप से गिरकर 16.8 फीसदी पर आ गई है. यह अलग बात है कि इस डील से भारत के साथ यूरोप का व्‍यापार घाटा और बढ़ जाएगा. बावजूद इसके यूरोप ने रूस के ऊपर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करने और चीन की सप्‍लाई का विकल्‍प खोजने की तैयारी कर ली है. यूरोप में अभी से भारतीय रिफाइनरी के तेल, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और केमिकल की खरीद बढ़ गई है. एफटीए के बाद इसमें और बढ़ोतरी हो जाएगी.

  • छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में आजादी के बाद 41 गांवों में पहली बार मनाया जा रहा गणतंत्र दिवस

    छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में आजादी के बाद 41 गांवों में पहली बार मनाया जा रहा गणतंत्र दिवस

    रायपुर। यह खबर वाकई चौंकाने वाली है। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में माओवादी प्रभाव से मुक्त हुए 41 गांवों में गणतंत्र दिवस के अवसर पर पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा। यह कदम ‘लाल आतंक’ के अंत की लड़ाई में मिली सफलता को साफ तौर पर दर्शाती है। साथ ही यह खबर शांति एवं विकास का संकेत भी देती है।
    पुलिस महानिरीक्षक (आईजी), बस्तर रेंज, सुंदरराज पी ने बताया कि इन 41 गांवों में से 13 गांव बीजापुर जिले में, 18 नारायणपुर में और 10 सुकमा में हैं।
    गणतंत्र दिवस पूरे जोश से मनाने की तैयारी

    उन्होंने कहा, ‘‘बस्तर मंडल के 41 गांवों में पहली बार 77वां गणतंत्र दिवस पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। ये गांव दशकों से इस तरह के राष्ट्रीय समारोहों से दूर रहे थे, लेकिन अब देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक भावना में वे एक्टिव होकर भाग ले रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में इन जगहों पर सुरक्षा शिविरों की स्थापना ने स्थानीय आबादी के बीच विश्वास, सुशासन और अपनेपन की भावना जगाने में अहम भूमिका निभाई है।

    धीरे-धीरे स्थापित हो रही है शांति

    आईडी सुंदरराज पी ने कहा, ‘‘सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से यह सकारात्मक परिवर्तन संभव हो पाया है। पिछले वर्ष 13 गांवों में 15 अगस्त को पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। अब, इन 13 गांवों सहित कुल 54 गांव पहली बार गणतंत्र दिवस मनाएंगे।” सुंदरराज ने कहा कि अबूझमाड़, राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र आदि में बसवराजु, के रामचंद्र रेड्डी, सुधाकर, कट्टा सत्यनारायण रेड्डी और अन्य माओवादी कैडर को निष्क्रिय करने से क्षेत्र में चरमपंथी प्रभाव काफी कमजोर हो गया है। नक्सलियों की ताकत और उनके प्रभाव कमजोर होने से भय और धमकी की जगह धीरे-धीरे शांति, विकास और प्रशासनिक संपर्क स्थापित हो रहे हैं।
    रायपुर में राज्यपाल फहराएंगे तिरंगा

    इस बीच, एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि राज्य भर में गणतंत्र दिवस समारोह की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि राज्यपाल रमन डेका सोमवार सुबह रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और विभिन्न सुरक्षा इकाइयों से ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ (सलामी गारद) लेंगे, जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साई बिलासपुर जिले में तिरंगा फहराएंगे।

  • UGC बिल 2026 बना विवाद की वजह! सवर्ण समाज का विरोध, बृजभूषण शरण सिंह के बयान के 5 बड़े पॉइंट

    UGC बिल 2026 बना विवाद की वजह! सवर्ण समाज का विरोध, बृजभूषण शरण सिंह के बयान के 5 बड़े पॉइंट


    नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ( UGC ) की ओर से लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम- 2026’ को लेकर विवाद गहरा गया है। उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड तक विवाद की गूंज सुनाई दे रही है। सवर्ण समाज इस बिल के विरोध में खड़ा हो गया है। समानता को बढ़ावा देने और जातीय भेदभाव को खत्म करने वाले कानून को बड़े स्तर असमानता का कानून होने की दलील दी जा रही है। इसको लेकर लगातार केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले यूपी में पुलिस भर्ती परीक्षा में पेपर लीक का मामला ऐसा गरमाया था, युवा वर्ग नाराज हो गया।

    युवाओं की नाराजगी का खामियाजा उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को चुनावी रिजल्ट में भुगतना पड़ा। युवा वर्ग को नाराज करने का जोखिम सरकार लेने के मूड में नहीं दिख रहा है। वहीं, कानून को लेकर जब पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अभी इसका अध्ययन कर रहा हूं। जो बोलूंगा, सोच-समझकर बोलूंगा। इससे साफ है कि सीनियर भाजपा नेता भी इस मामले में कोई भी बयान देने से बचते दिख रहे हैं।
    1. क्यों हो रहा है विरोध?
    यूजीसी की ओर से यूनिवर्सिटी और कॉलेज स्तर पर जातीय भेदभाव को खत्म करने के लिए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू किया गया हैं। 15 जनवरी 2026 से यह रेगुलेशन पूरे देश में यूजीसी से संबद्ध सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों प्रभावी हुआ है। सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों और समूहों ने इसके लागू होने के बाद ही विरोध शुरू किया था। दरअसल, नए रेगुलेशन में ओबीसी को भी जातीय भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया।

    एससी और एसटी छात्रों को पहले से ही कई अधिकार मिले हुए थे। वे भी इस दायरे में आ गए हैं। नए कानून के तहत इनके साथ-साथ ओबीसी छात्र, शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी भेदभाव और उत्पीड़न की शिकायत सक्षम पदाधिकारी के समक्ष दर्ज करा सकते हैं।

    2. नए कोषांग के गठन के निर्देश
    यूजीसी ओर से लागू किए गए रेगुलेशन के तहत यूनिवर्सिटी और कॉलेज स्तर पर नए कोषांग का गठन किया जाना है। समान अवसर प्रकोष्ठ का गठन हर संस्थान में एससी, एसटी और ओबीसी छात्र, शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों के लिए किया जाना है। यूनिवर्सिटी लेवल पर समानता समिति होगी। इसमें एससी, एसटी के साथ-साथ ओबीसी, महिला और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिध सदस्य के तौर पर शामिल किए जाने हैं। हर छह माह में यह समिति रिपोर्ट तैयार कर यूजीसी को भेजेगी। इसके आधार पर यूनिवर्सिटी और कॉलेज की स्थिति को मापा जाएगा।

    3. सवर्ण समाज का विरोध क्यों?
    मामले में सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस कानून में कोई भी एससी, एसटी, ओबीसी छात्र, शिक्षक या शिक्षकेतर कर्मचारी हमारे खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके बाद हमें अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। बड़े स्तर पर इस नियम का दुरुपयोग किया जा सकता है। विश्वविद्यालयों में कुलपति और कॉलेजों में प्राचार्य सभी छात्रों की शिकायतों पर जब सुनवाई करते हैं तो फिर नई व्यवस्था से असमानता ही फैलेगी। सवर्ण वर्ग को अलग-थलग किए जाने की साजिश के तौर पर इस कानून को पेश किया जा रहा है।

    सवर्ण समाज की ओर से अपनी बात को उठाने के लिए यूनवर्सिटी स्तर पर फोरम तैयार किए गए हैं। इन फोरम का कहना है कि ओबीसी को यूनवर्सिटी में एडमिशन में आरक्षण 1990 से मिल रहा है। फैकल्टी नियुक्तियों में आरक्षण की व्यवस्था वर्ष 2010 से है। ऐसे में नए कानून से सवर्ण समाज को और अधिक दबाने की कोशिश की जा रही है।

    4. यति नरसिंहानंद से गरमाया विवाद
    मामले को लेकर पिछले दिनों डासना देवी मंदिर के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देने की योजना बनाई। इसके लिए वे लाव-लश्कर के साथ गाजियाबाद से निकले तो दिल्ली बॉर्डर पर उन्हें रोक दिया गया। उन्होंने इस मुद्दे पर कहा कि हर वर्ग की बात हो रही है, लेकिन ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ, भूमिहार और अन्य सवर्ण समाज के लोगों की बात क्यों नहीं की जा रही। उनके हितों की बात कहां होगी। अगर उनके साथ कुछ गलत होता है तो वे कहां पर शिकायत करेंगे। इस प्रकार के कानून उच्च शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक माहौल को खराब करेंगे।

    5. कानून वापस लिए जाने की चर्चा
    यूजीसी कानून का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चुनावी साल से पहले विरोध को गहराता देख अब यूजीसी के स्तर पर इस कानून को लेकर विचार होने की बात कही जा रही है। माना जा रहा है कि यूजीसी इस कानून को वापस ले सकता है। इसके कड़े विरोध ने सरकार को अपनी इस नीति पर दोबारा विचार करने को मजबूर किया है।

  • लखनऊ में THAR के पहियों के नीचे 25 मिनट तक फंसा रहा कारोबारी, चीख-पुकार सुन बचाने दौड़े लोग

    लखनऊ में THAR के पहियों के नीचे 25 मिनट तक फंसा रहा कारोबारी, चीख-पुकार सुन बचाने दौड़े लोग

    नई दिल्ली।लखनऊ के पॉश इलाके विभूति खंड में एक थार गाड़ी ने कारोबारी पवन पटेल को कुचल दिया. यह हादसा तब हुआ जब आरोपी चालक कार को आगे-पीछे कर रहा था. इस दौरान पवन पटेल के दोनों पैर गाड़ी के पहियों के नीचे फंस गए और वह करीब 25 मिनट तक वहीं दबे रहे. मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने अफरा-तफरी के बीच कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला.

    सूचना पाकर घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने गंभीर रूप से घायल कारोबारी को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया. पुलिस ने इस मामले में दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

    25 मिनट तक पहियों के नीचे मची चीख-पुकार
    हादसे के वक्त मौके पर काफी भीड़ जमा हो गई थी. बताया जा रहा है कि थार के नीचे दबे पवन पटेल दर्द से तड़पते रहे, लेकिन उन्हें निकालना आसान नहीं था. करीब 25 मिनट की कड़ी जद्दोजहद के बाद स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें गाड़ी के नीचे से निकाला जा सका. घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है और कारोबारी की हालत फिलहाल गंभीर बनी हुई है.

    पुलिस की कार्रवाई और हादसे की वजह

    विभूति खंड पुलिस के मुताबिक, यह हादसा गाड़ी को बैक या आगे करने के दौरान लापरवाही की वजह से हुआ. इस मामले में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दो आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. पुलिस घटना के हर पहलू की जांच कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि क्या यह महज एक दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई और वजह थी.

  • जानिए आज सोमवार का राशिफल

     

    मेष :अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। पठन पाठन में स्थिति कमजोर रहेगी। किसी से वाद-विवाद अथवा कहासुनी होने का भय रहेगा। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। जल्दबाजी में कोई भूल संभव है। आय-व्यय समान्य रहेगा। शुभांक-5-7-9

    वृष : बुरी संगति से बचें। आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। लेन-देन में अस्पष्टता ठीक नहीं। दूसरों के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप न करें। निर्मूल शंकाओं के कारण मनस्ताप भी पैदा हो सकते है। भय तथा शत्रुहानि की आशंका रहेगी। एकाकी प्रवृति का त्याग करें। शुभांक-3-5-7

    मिथुन: कारोबार के विस्तार का मानस बनेगा। शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। मन प्रसन्न बना रहेगा। अचल संपति की खरीद अथवा कृषि उद्यम में रुचि पैदा होगी। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। व्यापार व व्यवसाय में स्थिति उत्तम रहेगी। शुभांक-2-4-6

    कर्क : नये-नये व्यापारिक अनुबंध होंगे। मित्रों से सावधानी रखें तो ज्यादा उत्तम है। शारीरिक सुख के लिए व्यसनों का त्याग करें। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। मान-सम्मान में वृद्घि होगी। हरि करे सो खरी इसीलिए पूरे मनोयोग से कार्य करें। यात्रा योग हैं। शुभांक-5-7-9

    सिंह : कार्यक्षेत्र में खुशनुमा माहौल बनेगा। मध्याह्न पूर्व समय आपके पक्ष का रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने के प्रयास होंगे। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। पर-प्रपंच में ना पड़कर अपने काम पर ध्यान दीजिए। शुभांक-2-5-8

    कन्या : भावनाओं का उद्वेग बढ़ेगा। जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। हित के काम में आ रही बाधा मध्याह्न पश्चात् दूर हो जाएगी। अपने काम आसानी से बनते चले जाएंगे। संतान पक्ष की समस्या समाप्त होगी। आपसी प्रेम-भाव में बढ़ोतरी होगी।

    शुभांक-3-5-7

    तुला : योजना क्रियान्वन के लिए समय अच्छा व सकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। जीवन साथी अथवा यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। सफलता मिलेगी। सुनियोजित तरीके से कार्यारम्भ करें। शुभांक-2-5-7

    वृश्चिक : व्यवसाय में प्रतिद्वंद्वी परेशान कर सकते हैं। समय व्ययकारी सिद्घ होगा। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। आध्यात्मिक रुचि बनेगी। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। कार्य सफल होगें। शुभांक-4-5-7

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    धनु: लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। धार्मिक यात्रा का योग बना है। शुभांक-3-6-8

    मकर: सैर-सपाटे में समय व्यतीत होगा। मान-सम्मान में वृद्घि होगी। अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। अपने हित के काम सुबह-सबेरे ही निपटा लें। शुद्घ गोचर का लाभ। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। यात्रा प्रवास का सार्थक परिणाम मिलेगा। आर्थिक लाभ के किये कार्यों का तत्काल प्रतिफल मिलेगा। शुभांक-4-6-8

    कुंभ : मनोरंजन के साधनों पर धन-व्यय होगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। कामकाज में आ रही बाधा दूर होगी। लेन-देन में आ रही बाधा को दूर करने के प्रयास सफल होंगे। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। स्त्री का सहयोग मिलेगा। शुभांक-2-5-8

    मीन : कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। सुबह-सुबह की महत्वपूूर्ण सिद्घि के बाद दिन-भर उत्साह रहेगा। किसी लाभदायक कार्य के लिए व्ययकारक स्थितियां पैदा होगी। अल्प-परिश्रम से ही लाभ होगा। नियोजित धन से लाभ होने लगेगा। आर्थिक स्थिति सुधरेगी। शुभांक-2-4-6

  • Republic Day Special: डेढ़ लीटर दूध के दाम में 10 ग्राम सोना! 76 सालों में कितना बदल गया भारत

    Republic Day Special: डेढ़ लीटर दूध के दाम में 10 ग्राम सोना! 76 सालों में कितना बदल गया भारत

    नई दिल्ली। आज अगर आपके गुल्लक में या आलमारी के किसी कोने में 25 पैसे का सिक्का है तो आप उससे कुछ नहीं खरीद सकते, लेकिन आजादी के समय, पहले गणतंत्र दिवस के समय आप इससे 1 लीटर दूध, 1 लीटर पेट्रोल भरवा सकते थे. जिसमें आज एक लीटर दूध मिलता है, उतने ही रुपये में आप आजादी के वक्त 10 ग्राम सोना खरीद सकते थे. जितने में आज एक लीटर दूध खरीदते हैं, उतने में 4 बार आप दिल्ली से मुंबई ट्रेन से सफर कर सकते थे. आबादी बढ़ी और साथ में महंगाई भी. अगर एक नजर साल 1950 से साल 2026 तक के सफर में डाले तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि महंगाई का आलम कितना है.

    साल 1950 से लेकर साल 2026 तक का सफर
    आजादी के समय देश की जनसंख्या सिर्फ 34 करोड़ थी. पहली बार जब 1951 में जनगणना हुई तो उस वक्त देश की आबादी 34 करोड़ से बढ़कर 36 करोड़ हो गई थी. आज भारत की आबादी 140 करोड़ के ऊपर पहुंच गई है. आबादी के साथ देश की अर्थव्यवस्था भी बढ़ी, देश की जीडीपी में विस्तार देखने को मिली. 1950 से लेकर अब तक भारत की जीडीपी 55 गुना से अधिक बढ़ चुकी है. 1950 में भारत की अर्थव्यवस्था करीब 2.7 लाख करोड़ की थी, जो साल 2026 में बढ़कर 4.51 ट्रिलियन पर पहुंच गई है

    1950 में कितने का था सोना-चांदी
    सोने-चांदी की बात करें तो भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था. लोगों के घरों में सोने-चांदी के जेवरों की ढ़ेर लगे थे. आज भी दुनिया के कई देशों की जीडीपी से ज्यादा सोना भारत के घरों में है, जो कई पीढ़ियों से चली आ रही है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक भारत के घरों में 25 हजार टन से ज्यादा सोना है. अगर कीमत की बात करें तो साल 1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस के मौके पर सोने की कीमत 99 रुपये प्रति 10 ग्राम थी. इससे पहले आजादी के वक्त 1947 में सोना मात्र 89 रुपये प्रति 10 ग्राम का बिक रहा था. आज साल 2026 में सोने की कीमत 155000 रुपये प्रति 10 ग्राम को पार कर गया है. चांदी की बात करें तो उस वक्त 1 किलो चांदी 100-159 रुपये में मिल जाती थी. 10 ग्राम चांदी के लिए के लिए 1 रुपये से 1.50 रुपये तक खर्च करना पड़ता था. आज उतनी ही चांदी खरीदने के लिए आपको साढ़े 3 लाख रुपये चाहिए.

    1950 से अब तक कितना महंगा हुआ तेल

    1950 से लेकर अब तक पेट्रोल की कीमत 300 गुना बढ़ चुकी है. 1951 के मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट के गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन डेटा के मुताबिक उस समय देश में 3 लाख गाड़ियां रजिस्टर्ड थीं. 1947 में पेट्रोल की कीमत 27 पैसे प्रति लीटर था, जो 1950 में 30 पैसे पर पहुंच गया था. आज 2026 में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत औसत रूप से 100 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है.

    76 सालों में रेल किराया कितना महंगा हुआ

    भारत में पहली ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को चली थी. 76 सालों में रेल यात्रियों की संख्या जिस तेजी से बढ़ी उतनी ही तेजी से रेल किराया भी. 1951 से लेकर अब तक रेल किराए में 30 गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई. 1950-51 में रेलवे हर एक किमी पर 1.5 पैसा किराया वसूलती थी जो साल 2018-19 में बढ़कर 44 पैसे से ऊपर पहुंच गई. रेलवे ने हाल ही में प्रति किलोमीटर में रेल किराए में 2 पैसा प्रति किमी की बढ़ोतरी कर दी है.

    डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का हाल

    1947 में आजादी के वक्त 1 डॉलर की वैल्यू 1 रुपए के बराबर थी. साल 1950 में डॉलर के मुकाबले रुपया काफी मजबूत था और इसकी वैल्यूएशन $1 = ₹4.76 थी. आज डॉलर के मुकाबले रुपया 92 रुपये पर पहुंच गया है. कर्तव्य पथ बनेगा ‘पावर पथ’, 77वें गणतंत्र दिवस पर दुनिया देखेगी भारत के अर्जुन-ब्रह्मोस का दम