Blog

  • महावीर जयंती पर शेयर बाजार बंद, कमोडिटी मार्केट शाम को खुलेगा

    महावीर जयंती पर शेयर बाजार बंद, कमोडिटी मार्केट शाम को खुलेगा


    नई दिल्ली महावीर जयंती के मौके पर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह बंद रहा। इस दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर किसी भी तरह की ट्रेडिंग या सेटलमेंट नहीं हुआ। अब निवेशकों के लिए अगला ट्रेडिंग दिन 1 अप्रैल 2026 (बुधवार) होगा, जब बाजार सामान्य रूप से खुलेगा। हालांकि इस दिन एक खास बात यह रहेगी कि सेटलमेंट हॉलिडे होगा यानी खरीद-बिक्री तो होगी, लेकिन पे-इन और पे-आउट उसी दिन नहीं होगा।

    कमोडिटी मार्केट का हाल
    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX):
    सुबह का सेशन बंद, लेकिन शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे तक ट्रेडिंग होगी
    नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX):
    पूरे दिन बंद रहेगा
    इस हफ्ते कम रहेंगे ट्रेडिंग के दिन

    इस सप्ताह निवेशकों को कम मौके मिलेंगे:

    31 मार्च: महावीर जयंती (बंद)
    3 अप्रैल: गुड फ्राइडे (फिर से बंद)
    यानी पूरे हफ्ते में सिर्फ 3 दिन ही ट्रेडिंग होगी।

    निवेशकों के लिए जरूरी सलाह

    लगातार छुट्टियों के कारण बाजार में वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) बढ़ सकता है। ऐसे में:

    ट्रेडिंग प्लान पहले से बनाएं
    सेटलमेंट हॉलिडे को ध्यान में रखें
    शॉर्ट-टर्म ट्रेड में सावधानी बरतें

  • दतिया में दिनदहाड़े भाजपा पार्षद की हत्या, मंदिर से लौटते समय बदमाशों ने मारी गोली, जांच में जुटी पुलिस

    दतिया में दिनदहाड़े भाजपा पार्षद की हत्या, मंदिर से लौटते समय बदमाशों ने मारी गोली, जांच में जुटी पुलिस


    दतिया । मध्य प्रदेश के दतिया में मंगलवार सुबह एक भाजपा पार्षद की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात उस समय हुई जब पार्षद मंदिर से लौट रहे थे। हमलावरों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है। घटना सुबह करीब 8:30 बजे सेवढ़ा चुंगी चौराहे पर हुई।

    ऐसे हुआ हमला

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वार्ड नंबर 1 के पार्षद कल्लू कुशवाहा रोज की तरह चौराहे पर टहलने पहुंचे थे। उनके साथ दो अन्य लोग भी मौजूद थे। इसी दौरान तीन हमलावर वहां पहुंचे और उन पर फायरिंग कर दी। हमलावरों ने दो राउंड फायर किए। एक गोली कल्लू कुशवाहा के सिर में लगी, जबकि दूसरी पीठ में जा लगी। गोली लगते ही वे मौके पर गिर पड़े। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।

    कई आपराधिक मामले दर्ज थे

    दतिया एसडीओपी आकांक्षा जैन के मुताबिक, कल्लू कुशवाहा पर शराब तस्करी, हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट सहित 15 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। प्रारंभिक जांच में मामला वर्चस्व की रंजिश से जुड़ा माना जा रहा है।

    पहले भी हत्या के मामले में मिली थी सजा

    कल्लू कुशवाहा 2022 में वार्ड नंबर 1 से भाजपा के टिकट पर पार्षद चुने गए थे। 18 फरवरी 2025 को दतिया कोर्ट ने पूर्व पार्षद बाल किशन कुशवाहा की हत्या के मामले में कल्लू सहित छह आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां से उन्हें जमानत मिल गई थी। वह करीब चार महीने पहले ही जेल से बाहर आए थे। घटना के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके।

    नगर पालिका का बजट सम्मेलन स्थगित

    पार्षद की हत्या के बाद नगर पालिका का बजट सम्मेलन स्थगित कर दिया गया। बैठक की शुरुआत में सभी पार्षदों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और दो मिनट का मौन रखा। नगर पालिका अध्यक्ष के बेटे प्रशांत ढेंगुला ने बताया कि बजट पहले ही प्रेसिडेंट इन काउंसिल (PIC) में पारित हो चुका है, इसलिए इसे स्वतः मंजूर माना जाएगा। उन्होंने कहा कि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के कारण शहर के विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे।

  • एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड पर 'पंप-एंड-डंप' का आरोप, सेबी ने शुरू की जांच

    एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड पर 'पंप-एंड-डंप' का आरोप, सेबी ने शुरू की जांच


    नई दिल्ली  शेयर बाजार में निवेशकों के लिए एक बड़ा अलर्ट सामने आया है। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के शेयरों में कथित ‘पंप-एंड-डंप’ घोटाले के संकेत मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। यह मामला शेयर कीमतों में असामान्य तेजी और उसके बाद आई तेज गिरावट से जुड़ा हुआ है।

    60 गुना उछाल के बाद अचानक गिरावट ने बढ़ाए शक
    सेबी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कंपनी के शेयरों में बेहद कम समय में 60 गुना से ज्यादा की उछाल आई। इसके बाद कीमतों में अचानक गिरावट देखी गई, जो आमतौर पर ‘पंप-एंड-डंप’ स्कीम का संकेत माना जाता है। इस तरह के मामलों में पहले कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ाई जाती हैं और फिर ऊंचे स्तर पर शेयर बेचकर मुनाफा कमाया जाता है।

    प्रमोटरों और जुड़े पक्षों की भूमिका पर सवाल
    नियामक को संदेह है कि कंपनी के प्रमोटरों और उनसे जुड़े पक्षों ने आपसी तालमेल से ट्रेडिंग की और फंड ट्रांसफर के जरिए शेयर की कीमतों को ऊपर पहुंचाया। जांच में यह भी सामने आया कि ऊंचे दामों पर शेयर बेचने वालों में कंपनी के अंदरूनी लोग शामिल हो सकते हैं। प्रमोटर विपिन शर्मा को इस मामले में एक प्रमुख विक्रेता के तौर पर चिन्हित किया गया है।

    आय में असामान्य उछाल ने खड़े किए सवाल
    सेबी ने कंपनी के वित्तीय आंकड़ों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का राजस्व दो वर्षों में करीब 686 गुना बढ़ा, जो असामान्य माना जा रहा है। खासतौर पर सितंबर 2025 तिमाही में आय 525 करोड़ रुपए से बढ़कर 2,195.8 करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जिसने नियामक की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

    भ्रामक जानकारी से निवेशकों को गुमराह करने का शक
    जांचकर्ताओं को यह भी आशंका है कि कंपनी ने अपने वास्तविक कारोबार से ज्यादा मजबूत तस्वीर दिखाने के लिए भ्रामक कॉर्पोरेट खुलासे किए। इसका उद्देश्य शेयर की कीमतों में तेजी लाकर खुदरा निवेशकों को आकर्षित करना हो सकता है।

    खुलासे में लापरवाही भी जांच के दायरे में
    सेबी ने कंपनी पर गंभीर खुलासा संबंधी चूक का आरोप भी लगाया है। खासकर 408 करोड़ रुपए के जीएसटी विवाद जैसी अहम जानकारी समय पर शेयरधारकों को नहीं दी गई। इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं को या तो देर से बताया गया या पूरी तरह छिपाया गया।

    जांच जारी, हो सकते हैं कड़े एक्शन
    नियामक इस पूरे मामले में ट्रेडिंग पैटर्न, फाइनेंशियल डेटा और संबंधित पक्षों के बीच संबंधों की गहराई से जांच कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद कंपनी और संबंधित लोगों पर भारी जुर्माना, बाजार से प्रतिबंध जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

    शेयर में गिरावट, निवेशकों में चिंता
    इस खबर के बाद सोमवार को बीएसई पर एलीटकॉन इंटरनेशनल का शेयर करीब 5% गिरकर 48.38 रुपए पर बंद हुआ, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।

    क्या होता है ‘पंप-एंड-डंप’?
    ‘पंप-एंड-डंप’ एक धोखाधड़ी वाली रणनीति होती है, जिसमें शेयर की कीमत को कृत्रिम रूप से बढ़ाया जाता है (पंप) और फिर ऊंचे स्तर पर बेचकर (डंप) निवेशकों को नुकसान में छोड़ दिया जाता है।

  • 1 अप्रैल से गूंजेगा स्कूल चलें हम अभियान CM मोहन यादव की मौजूदगी में बच्चों के भविष्य का महाअभियान शुरू

    1 अप्रैल से गूंजेगा स्कूल चलें हम अभियान CM मोहन यादव की मौजूदगी में बच्चों के भविष्य का महाअभियान शुरू

    भोपाल । मध्यप्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत एक बड़े जनजागरूकता अभियान के साथ होने जा रही है। मध्यप्रदेश में 1 अप्रैल से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल चलें हम अभियान की शुरुआत की जाएगी जो 4 अप्रैल तक चलेगा। इस अभियान का उद्देश्य हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना नामांकन बढ़ाना और स्कूलों को एक उत्सव के रूप में सक्रिय करना है। राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल में आयोजित होगा जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव की विशेष उपस्थिति रहेगी।

    यह अभियान प्रदेश की लगभग 92 हजार सरकारी स्कूलों में एक साथ चलाया जाएगा जहां प्रतिदिन अलग अलग गतिविधियां आयोजित होंगी। इन गतिविधियों में प्रवेशोत्सव नामांकन अभियान खेलकूद सांस्कृतिक कार्यक्रम और बाल सभाएं प्रमुख रूप से शामिल रहेंगी। सरकार का मानना है कि इस तरह के आयोजन से न केवल बच्चों में स्कूल के प्रति आकर्षण बढ़ेगा बल्कि अभिभावकों की भागीदारी भी मजबूत होगी।

    अभियान के पहले दिन यानी 1 अप्रैल को सभी स्कूलों में प्रवेशोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान बच्चों का स्वागत किया जाएगा और कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए बाल सभा आयोजित होगी। साथ ही विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा ताकि सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके। कई स्थानों पर साइकिल और अन्य आवश्यक सामग्री भी वितरित की जाएगी जिससे छात्रों को स्कूल आने में सुविधा मिल सके।

    दूसरे दिन भविष्य से भेंट कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों के सफल और प्रेरणादायी व्यक्तियों को स्कूलों में आमंत्रित किया जाएगा। ये अतिथि बच्चों के साथ संवाद करेंगे और उन्हें शिक्षा का महत्व समझाएंगे। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को प्रेरित करना और उन्हें अपने भविष्य के प्रति जागरूक बनाना है। जिला प्रशासन के अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूलों में जाकर बच्चों से सीधे संवाद करें।

    तीसरे दिन सांस्कृतिक और खेलकूद गतिविधियों के माध्यम से स्कूलों में उत्सव जैसा माहौल बनाया जाएगा। इस दिन अभिभावकों को भी आमंत्रित किया जाएगा ताकि वे स्कूल की गतिविधियों में भाग ले सकें। साथ ही शिक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उन्हें दी जाएगी। जिन विद्यार्थियों की उपस्थिति 85 प्रतिशत से अधिक रही है उनके अभिभावकों का सम्मान किया जाएगा जिससे अन्य परिवार भी प्रेरित हो सकें।

    अभियान के अंतिम दिन हार के आगे जीत कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें उन विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जो किसी कारणवश अपनी कक्षा में सफल नहीं हो पाए हैं। उनके अभिभावकों को समझाइश दी जाएगी कि बच्चों को निराश न होने दें और उन्हें आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करें। इसी दिन स्कूल प्रबंधन समितियों की बैठक भी होगी जिसमें शत प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

    सरकार का मानना है कि स्कूल चलें हम अभियान शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल तैयार करेगा और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में मददगार साबित होगा। यह पहल न केवल नामांकन बढ़ाने का प्रयास है बल्कि बच्चों के उज्जवल भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।

  • गर्मी में ठंडक का रामबाण: बेल का शर्बत और इसका आसान तरीका

    गर्मी में ठंडक का रामबाण: बेल का शर्बत और इसका आसान तरीका


    नई दिल्ली  गर्मियों का मौसम आते ही शरीर में थकान, डिहाइड्रेशन और पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे में प्राकृतिक और पारंपरिक पेय बेल का शर्बत न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार के केमिकल युक्त ड्रिंक्स की जगह बेल का शर्बत एक सस्ता, पौष्टिक और पूरी तरह सुरक्षित विकल्प है।

    क्यों खास है बेल का शर्बत?
    आयुर्वेद में बेल को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। इसमें फाइबर, आयरन, प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं। तेज गर्मी में बार-बार पसीना आने से शरीर कमजोर पड़ जाता है, लेकिन बेल का शर्बत ऊर्जा बनाए रखने और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है।

    पाचन के लिए रामबाण उपाय
    बेल का शर्बत पेट के लिए बेहद फायदेमंद है। यह कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं को दूर करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। खास बात यह है कि यह दस्त और डायरिया जैसी समस्याओं में भी काफी असरदार माना जाता है। पेट की सूजन कम करने और आंतों को स्वस्थ रखने में भी यह मददगार है।

    दिल और खून के लिए भी लाभकारी
    इस शर्बत का नियमित सेवन कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में सहायक होता है, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। साथ ही, यह शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालकर खून को साफ करने में भी मदद करता है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है।

    महिलाओं के लिए खास फायदे
    प्रसव के बाद महिलाओं के लिए भी बेल का शर्बत बेहद लाभकारी माना जाता है। यह शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ दूध बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है।

    घर पर ऐसे बनाएं बेल का शर्बत
    बेल का शर्बत बनाना बेहद आसान है। इसके लिए पके हुए बेल का गूदा निकालकर अच्छी तरह मसल लें। इसमें ठंडा पानी मिलाएं और स्वाद के अनुसार काला नमक, भुना जीरा पाउडर और शहद या गुड़ डालें। इसे छानकर ठंडा-ठंडा परोसें। रोजाना एक गिलास सेवन करने से शरीर दिनभर तरोताजा रहता है।

    क्यों बेहतर है यह देसी पेय?
    जहां एक ओर बाजार के ठंडे पेय शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं, वहीं बेल का शर्बत प्राकृतिक रूप से शरीर को ठंडा रखने, पाचन सुधारने और ऊर्जा देने का काम करता है। यह न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं।

  • उज्जैन में सड़कों पर उतरी कांग्रेस बिजली दर बढ़ोतरी और गेहूं खरीदी टलने पर उग्र आंदोलन का ऐलान

    उज्जैन में सड़कों पर उतरी कांग्रेस बिजली दर बढ़ोतरी और गेहूं खरीदी टलने पर उग्र आंदोलन का ऐलान


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन में बढ़ती महंगाई और जनसुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। शहर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया और बिजली दरों में प्रस्तावित वृद्धि गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी तथा ईंधन संकट को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस ने आम जनता और किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार को चेतावनी भी दी है।

    प्रदर्शन की शुरुआत देवास गेट चौराहे से हुई जहां बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एकत्रित हुए। यहां से रैली मालीपुरा होते हुए एटलस चौराहे तक निकाली गई। पूरे रास्ते कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए महंगाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ विरोध जताया। रैली के समापन के बाद कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया जिसमें 1 अप्रैल से लागू होने वाली बिजली दर वृद्धि को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।

    कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियां आम नागरिकों के हितों के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है जिससे आम परिवारों का बजट बिगड़ गया है। साथ ही पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर भी संकट की स्थिति बताई जा रही है जिससे लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रदेश में लगातार बिजली बिलों में वृद्धि की जा रही है और अब एक बार फिर प्रति यूनिट दर बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले ही महंगाई से जूझ रही जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। कांग्रेस ने इस निर्णय को जनविरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।

    इसके साथ ही किसानों से जुड़े मुद्दे को भी जोरशोर से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी 1 अप्रैल से शुरू होनी थी लेकिन इसे बढ़ाकर 10 अप्रैल कर दिया गया है। इस फैसले से किसानों को नुकसान होगा क्योंकि उन्हें मजबूरी में अपनी फसल कम दामों पर बेचनी पड़ सकती है। इसे किसानों के साथ अन्याय बताते हुए कांग्रेस ने सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की।

    प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर गैस सिलेंडर और ईंधन की कमी के कारण लोगों को ज्यादा कीमत देकर सामान खरीदना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि जो गैस सिलेंडर पहले कम कीमत में मिलता था अब वह ब्लैक में काफी महंगा बिक रहा है जिससे आम लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।

    कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 1 अप्रैल से बिजली दरों में वृद्धि लागू की जाती है और जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। इस प्रदर्शन ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में महंगाई और जनहित के मुद्दों पर राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है।

  • पश्चिम एशिया संकट का असर: महंगाई से धीमी ग्रोथ तक, IMF की चेतावनी

    पश्चिम एशिया संकट का असर: महंगाई से धीमी ग्रोथ तक, IMF की चेतावनी


    नई दिल्ली वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर चुकी है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी तनाव और युद्ध का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। संस्था के अनुसार, इस संकट का सीधा असर महंगाई में बढ़ोतरी और आर्थिक विकास की रफ्तार में गिरावट के रूप में देखने को मिलेगा।

    ऊर्जा संकट से बढ़ेगा दबाव, आयातक देशों पर सबसे ज्यादा असर
    आईएमएफ के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दुनिया के करीब 25-30 प्रतिशत तेल और 20 प्रतिशत एलएनजी की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है। ऐसे में यदि यहां किसी तरह की बाधा आती है, तो इसका सीधा असर एशिया और यूरोप के उन देशों पर पड़ेगा, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं।

    गरीब और विकासशील देशों पर दोहरी मार
    रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ्रीका और एशिया के कई गरीब देश पहले ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। अब बढ़ती ऊर्जा कीमतों और सप्लाई में कमी के कारण उनकी स्थिति और खराब हो सकती है। इन देशों को महंगे दाम पर भी पर्याप्त ईंधन नहीं मिल पा रहा, जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

    खाद्य और उर्वरक संकट गहराने का खतरा
    आईएमएफ ने आगाह किया है कि यह संकट केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं रहेगा। खाद्य और उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी से भी वैश्विक स्तर पर दबाव बढ़ेगा। खासकर गरीब देशों में खाद्य संकट गहरा सकता है और उन्हें बाहरी सहायता की जरूरत पड़ सकती है।

    लंबा चला युद्ध तो बढ़ेगा संकट का दायरा
    संस्था का मानना है कि अगर यह संघर्ष अल्पकालिक रहा, तो तेल-गैस की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिलेगा। लेकिन यदि यह लंबे समय तक चला, तो ऊर्जा की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहेंगी, जिससे आयात करने वाले देशों की आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी।

    उद्योग और आम उपभोक्ता दोनों प्रभावित
    एशिया के बड़े मैन्युफैक्चरिंग देशों में ईंधन और बिजली की लागत बढ़ने से उत्पादन महंगा हो रहा है। इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। साथ ही कई देशों में भुगतान संतुलन पर दबाव बढ़ने से उनकी मुद्रा भी कमजोर हो रही है।

    यूरोप में दोहराया जा सकता है गैस संकट जैसा हाल
    आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि यूरोप में 2021-22 जैसा गैस संकट फिर से पैदा हो सकता है। इटली और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जबकि फ्रांस और स्पेन अपनी परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के कारण अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रह सकते हैं।

    सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स पर भी असर
    इस संघर्ष के चलते वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है। जहाजों के रूट बदलने से ट्रांसपोर्ट और बीमा लागत बढ़ गई है, जिससे सामान की डिलीवरी में देरी हो रही है। साथ ही, खाड़ी क्षेत्र से मिलने वाले हीलियम और अन्य जरूरी संसाधनों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है।

    वित्तीय बाजारों में बढ़ी अस्थिरता
    इस भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी दिख रहा है। शेयर बाजारों में गिरावट, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। हालांकि, यह गिरावट अभी पिछले बड़े संकटों जितनी गंभीर नहीं है, लेकिन इससे वित्तीय स्थितियां सख्त हो गई हैं।

    आईएमएफ की सलाह: सतर्क रहें और सही नीतियां अपनाएं
    आईएमएफ ने देशों को सलाह दी है कि वे इस स्थिति से निपटने के लिए संतुलित और प्रभावी नीतियां अपनाएं। खासतौर पर कम संसाधनों वाले देशों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि “अनिश्चितता भरे इस दौर में अधिक देशों को समर्थन की जरूरत है और हम उनके साथ खड़े हैं।”

  • 1 अप्रैल 2026 से बदलेंगे कई नियम, नए टैक्स सिस्टम के साथ वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत

    1 अप्रैल 2026 से बदलेंगे कई नियम, नए टैक्स सिस्टम के साथ वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत


    नई दिल्ली  भारत में 1 अप्रैल 2026 से नए वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत के साथ ही टैक्स सिस्टम में कई बड़े और अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं। सरकार द्वारा पेश किया गया नया आयकर अधिनियम, 2025 अब लागू होगा, जो लगभग 60 साल पुराने कानून की जगह लेगा। इन बदलावों का मकसद टैक्स प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और अधिक व्यवस्थित बनाना है।

    अब ‘टैक्स ईयर’ से होगी पहचान, खत्म होंगे FY और AY
    नए सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव ‘फाइनेंशियल ईयर (FY)’ और ‘असेसमेंट ईयर (AY)’ की जगह एक ही ‘टैक्स ईयर’ का कॉन्सेप्ट लागू होना है। इससे टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न फाइलिंग और समझने की प्रक्रिया सरल हो जाएगी। अब अलग-अलग सालों के भ्रम से राहत मिलने की उम्मीद है।

    ITR फाइलिंग की समयसीमा में राहत
    सरकार ने आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा में भी बदलाव किया है। जहां सैलरीड क्लास के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन पहले की तरह बनी रहेगी, वहीं नॉन-ऑडिट केस वाले करदाताओं जैसे फ्रीलांसर और प्रोफेशनल्स को अब 31 अगस्त तक का समय मिलेगा। इससे उन्हें अतिरिक्त समय का फायदा मिलेगा।

    डेरिवेटिव ट्रेडिंग होगी महंगी
    फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में निवेश करने वालों के लिए झटका है। सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ा दिया गया है, जिससे डेरिवेटिव ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी। इसका असर शेयर बाजार के सक्रिय निवेशकों पर साफ दिखाई देगा।

    HRA क्लेम के नियम हुए सख्त
    हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर टैक्स छूट लेने के नियमों को भी सख्त किया गया है। अब कई मामलों में मकान मालिक का PAN देना अनिवार्य होगा। हालांकि राहत की बात यह है कि बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे शहरों को अधिक छूट वाली सूची में शामिल किया गया है।

    टैक्स बेनिफिट्स में भी मिली राहत
    सरकार ने कुछ मामलों में टैक्सपेयर्स को राहत भी दी है। खाने-पीने से जुड़े टैक्स बेनिफिट्स बढ़ाए गए हैं और टैक्स-फ्री गिफ्ट की सीमा में भी इजाफा किया गया है। साथ ही पुराने टैक्स सिस्टम में बच्चों की शिक्षा और हॉस्टल खर्च पर मिलने वाली छूट भी बढ़ाई गई है।

    शेयर और निवेश पर बदले नियम
    अब शेयर बायबैक पर टैक्स डिविडेंड के बजाय कैपिटल गेन के रूप में लगेगा। वहीं, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स छूट केवल मूल इश्यू के दौरान खरीदे गए बॉन्ड्स पर ही लागू होगी। इसके अलावा, डिविडेंड और म्यूचुअल फंड आय पर लिए गए कर्ज के ब्याज पर टैक्स छूट खत्म कर दी गई है।

    TDS और TCS नियमों में बदलाव
    अब टैक्सपेयर्स एक ही घोषणा पत्र के जरिए कई इनकम सोर्स पर TDS से बच सकते हैं। NRI से प्रॉपर्टी खरीदने पर अब TAN की जरूरत नहीं होगी, सिर्फ PAN से काम चल जाएगा। विदेश यात्रा पर TCS घटाकर 2% कर दिया गया है, जबकि शिक्षा और इलाज के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर भी राहत दी गई है।

    रिवाइज्ड रिटर्न और ITR फॉर्म में बदलाव
    अब टैक्सपेयर्स 31 मार्च तक अपने रिटर्न में संशोधन कर सकेंगे, हालांकि दिसंबर के बाद देरी से करने पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा। साथ ही ITR-1 फॉर्म में अब दो मकानों से होने वाली आय दिखाने की सुविधा भी दी गई है, जिससे कई लोगों के लिए फाइलिंग आसान हो जाएगी।

  • ग्रामीण विकास को रफ्तार: केंद्र ने 6 राज्यों को जारी किए 1500 करोड़ से ज्यादा

    ग्रामीण विकास को रफ्तार: केंद्र ने 6 राज्यों को जारी किए 1500 करोड़ से ज्यादा

    नई दिल्ली  ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार ने 15वां वित्त आयोग के तहत 6 राज्यों को 1,500 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की है। इस फंड का उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण स्थानीय निकायों को मजबूत बनाकर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को गति देना है।

    किन राज्यों को मिला फायदा

    इस वित्तीय सहायता का लाभ तेलंगाना, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मिजोरम और मेघालय को मिला है। यह राशि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ग्रामीण ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास योजनाओं को लागू करने में मदद करेगी।

    तेलंगाना और उत्तराखंड को मिली पहली किस्त

    तेलंगाना को 247.94 करोड़ रुपए की अनटाइड ग्रांट जारी की गई है, जिससे राज्य की 12,600 ग्राम पंचायतों को सीधा लाभ मिलेगा। वहीं उत्तराखंड को 91.31 करोड़ रुपए की दूसरी किस्त दी गई है, जिससे जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा रुकी हुई राशि भी जारी कर दी गई है, जिससे अतिरिक्त पंचायतों को भी फायदा पहुंचेगा।

    राजस्थान और मेघालय में विकास को बल

    राजस्थान को 315.61 करोड़ रुपए की दूसरी किस्त जारी की गई है। इससे राज्य की जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायतों को मजबूती मिलेगी। वहीं मेघालय को स्वायत्त जिला परिषदों और ग्राम परिषदों के लिए कुल मिलाकर करीब 49 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि दी गई है, जिससे स्थानीय प्रशासन को और सशक्त बनाया जा सकेगा।

    महाराष्ट्र को कई मदों में बड़ी सहायता

    महाराष्ट्र को अलग-अलग मदों में बड़ी रकम जारी की गई है। इसमें टाइड और अनटाइड ग्रांट की कई किस्तें शामिल हैं। इस राशि से जिला और ब्लॉक पंचायतों के साथ हजारों ग्राम पंचायतों को फायदा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलेगी।

    क्या है इस फंड का उद्देश्य

    15वां वित्त आयोग के तहत जारी यह फंड ग्रामीण भारत में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, स्वच्छता, जल प्रबंधन, सड़क निर्माण और अन्य आवश्यक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए दिया जाता है। इससे स्थानीय निकायों को अपनी जरूरतों के हिसाब से योजनाएं लागू करने की स्वतंत्रता भी मिलती है।

    जमीनी स्तर पर दिखेगा असर

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की वित्तीय मदद से गांवों में विकास की रफ्तार तेज होगी और स्थानीय प्रशासन अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सकेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।
    निष्कर्ष केंद्र सरकार का यह कदम ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने और पंचायतों को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

  • CSK पर ऐतिहासिक जीत: राजस्थान रॉयल्स ने दर्ज की अपनी सबसे बड़ी जीत

    CSK पर ऐतिहासिक जीत: राजस्थान रॉयल्स ने दर्ज की अपनी सबसे बड़ी जीत


    नई दिल्ली।आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स ने धमाकेदार अंदाज में शुरुआत करते हुए इतिहास रच दिया है। रियान पराग की कप्तानी में टीम ने गुवाहाटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स को 8 विकेट से हराकर आईपीएल इतिहास की अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज की।

    47 गेंद शेष रहते हासिल किया लक्ष्य

    राजस्थान ने 128 रनों के लक्ष्य को महज 12.1 ओवर में 2 विकेट खोकर हासिल कर लिया। इस जीत की सबसे खास बात यह रही कि टीम ने 47 गेंदें बाकी रहते मुकाबला अपने नाम कर लिया, जो गेंदों के लिहाज से उसकी अब तक की सबसे बड़ी जीत है। इससे पहले साल 2014 में राजस्थान ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ 42 गेंद शेष रहते जीत दर्ज की थी।

    15 साल के वैभव सूर्यवंशी का तूफान

    इस ऐतिहासिक जीत के हीरो रहे महज 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी, जिन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से मैच को एकतरफा बना दिया। वैभव ने सिर्फ 17 गेंदों में 52 रन ठोक दिए और महज 15 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया। 305 के स्ट्राइक रेट से खेली गई इस पारी में उन्होंने 4 चौके और 5 छक्के जड़े। उनके आउट होने तक राजस्थान जीत की दहलीज पर पहुंच चुका था। वहीं यशस्वी जायसवाल ने 36 गेंदों में 38 रन बनाकर नाबाद रहते हुए टीम को जीत तक पहुंचाया।

    सीएसके की बल्लेबाजी रही पूरी तरह फ्लॉप

    चेन्नई सुपर किंग्स के बल्लेबाज इस मुकाबले में पूरी तरह फ्लॉप साबित हुए। टीम का टॉप ऑर्डर ताश के पत्तों की तरह बिखर गया और पूरी टीम सिर्फ 127 रन पर ढेर हो गई। सीएसके की ओर से जेमी ओवरटन ने सबसे ज्यादा 43 रन बनाए, जबकि कार्तिक शर्मा ने 18 रनों का योगदान दिया।

    गेंदबाजों ने रखी जीत की मजबूत नींव

    राजस्थान की जीत में गेंदबाजों की भी अहम भूमिका रही। जोफ्रा आर्चर ने 4 ओवर में 19 रन देकर 2 विकेट झटके। वहीं नांद्रे बर्गर ने भी 2 विकेट लेकर सीएसके के टॉप ऑर्डर को झकझोर दिया। रवींद्र जडेजा ने अपनी स्पिन से बल्लेबाजों को परेशान करते हुए 3 ओवर में 18 रन देकर 2 अहम विकेट निकाले।

    आंकड़ों में भी राजस्थान का दबदबा

    यह जीत इंडियन प्रीमियर लीग में सीएसके के खिलाफ राजस्थान की 16वीं जीत है। इस आंकड़े के साथ राजस्थान और पंजाब किंग्स संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। सीएसके को सबसे ज्यादा बार हराने का रिकॉर्ड मुंबई इंडियंस के नाम है, जिसने 21 मुकाबले जीते हैं। राजस्थान रॉयल्स ने इस मैच में बल्लेबाजी, गेंदबाजी और रणनीति—तीनों मोर्चों पर शानदार प्रदर्शन करते हुए आईपीएल 2026 में अपने इरादे साफ कर दिए हैं।