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  • खर्राटे लेने वालों के लिए जरूरी खबर सांस रुकने से लेकर हाई बीपी तक इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

    खर्राटे लेने वालों के लिए जरूरी खबर सांस रुकने से लेकर हाई बीपी तक इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

    नई दिल्ली । खर्राटे लेना आम समस्या है और बहुत से लोगों को सोते समय इसकी परेशानी होती है लेकिन हर बार खर्राटों को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। कई बार खर्राटे केवल सोने के दौरान गले और मुंह के आसपास मौजूद ऊतकों में कंपन के कारण आते हैं लेकिन कुछ परिस्थितियों में यही खर्राटे शरीर में चल रही गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। खासतौर पर अगर खर्राटों के साथ सोते समय सांस रुकने लगे हांफते हुए नींद खुले रात में बार बार आंख खुले या सुबह उठने के बाद भी अत्यधिक थकान महसूस हो तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

    दरअसल जब व्यक्ति सोता है तो गले जीभ और मुंह के आसपास के कुछ ऊतक ढीले पड़ जाते हैं। इससे सांस लेने का रास्ता कुछ संकरा हो सकता है। जब हवा इस संकरे रास्ते से गुजरती है तो आसपास के ऊतकों में कंपन पैदा होता है और इसी कंपन की आवाज खर्राटे के रूप में सुनाई देती है। अधिक वजन धूम्रपान शराब का सेवन और सोने की कुछ स्थितियां खर्राटों की समस्या को बढ़ा सकती हैं। हालांकि लगातार और बहुत तेज खर्राटे हमेशा सामान्य कारणों से ही हों यह जरूरी नहीं है।

    सबसे बड़ा खतरा तब माना जाता है जब सोते समय कुछ सेकंड के लिए सांस रुकती है और इसके बाद व्यक्ति अचानक जोर से सांस लेने लगता है। परिवार के किसी सदस्य को अगर ऐसा बार बार दिखाई देता है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में नींद के दौरान सांस की ऊपरी नली बार बार संकरी या बंद हो सकती है जिससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा प्रभावित होती है और नींद बार बार बाधित होती रहती है। इसका असर यह होता है कि व्यक्ति पर्याप्त समय सोने के बावजूद सुबह उठकर तरोताजा महसूस नहीं करता।

    खर्राटों के साथ हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी है तो विशेष सावधानी जरूरी है। लंबे समय से तेज खर्राटे आने और ब्लड प्रेशर नियंत्रित न रहने की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है क्योंकि नींद में सांस रुकने की समस्या का संबंध हाई ब्लड प्रेशर और हृदय तथा रक्त वाहिकाओं से जुड़ी परेशानियों से हो सकता है। इसलिए केवल खर्राटे कम करने के उपाय करने के बजाय उनके पीछे छिपे कारण को समझना जरूरी है।

    अगर दिन के समय लगातार नींद आती है काम करते समय थकान महसूस होती है एकाग्रता प्रभावित होती है या रात में घुटन और हांफने के कारण बार बार नींद खुलती है तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। समय रहते समस्या की पहचान होने पर उचित उपचार और जीवनशैली में बदलाव से राहत मिल सकती है।

    खर्राटों की समस्या में वजन को नियंत्रित रखना करवट लेकर सोना धूम्रपान से बचना और शराब का सेवन सीमित करना मददगार हो सकता है। लेकिन अगर खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसे संकेत दिखाई दे रहे हैं तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा जरूरी है। शरीर रात में जिन संकेतों के जरिए अपनी परेशानी बता रहा हो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते समझना ही बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में पहला कदम है।

  • अमेरिका का सरकारी कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार, ट्रंप के लिए बढ़ी आर्थिक चुनौती

    अमेरिका का सरकारी कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार, ट्रंप के लिए बढ़ी आर्थिक चुनौती

    वॉशिंगटन। अमेरिका का कुल सरकारी कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार को कारोबार खत्म होने तक सरकार का कुल बकाया कर्ज बढ़कर 40.05 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया। कर्ज का यह स्तर कांग्रेस के बजट कार्यालय (CBO) के अनुमान से भी ज्यादा है।

    कर्ज में यह तेज बढ़ोतरी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती मानी जा रही है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप ने सरकारी खर्च कम करने और सरकारी कामकाज में दक्षता बढ़ाने का वादा किया था।

    CBO के अनुमान से भी आगे निकला कर्ज

    CBO ने वित्त वर्ष 2026 के अंत तक अमेरिका के कुल सरकारी कर्ज के करीब 39.4 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया था। लेकिन वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले ही कर्ज इस अनुमान से ऊपर निकल गया।

    सरकारी कर्ज में तेजी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें बढ़ता संघीय खर्च, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाला खर्च तथा पुराने कर्ज पर बढ़ता ब्याज भुगतान प्रमुख हैं।

    ब्याज भुगतान ने बढ़ाई मुश्किल

    अमेरिकी सरकार के लिए कर्ज का बढ़ता ब्याज खर्च एक बड़ी चिंता बन गया है। जैसे-जैसे सरकारी कर्ज बढ़ता है, उस पर ब्याज का बोझ भी बढ़ता जाता है। इसके साथ ही महंगाई और सरकारी खर्च को लेकर बाजार में बनी चिंता के कारण सरकार के लिए नए सिरे से कर्ज लेना भी महंगा हुआ है।

    सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर लगातार बढ़ता खर्च भी अमेरिका के दीर्घकालिक वित्तीय दबाव को बढ़ा रहा है।

    ट्रंप के खर्च घटाने के दावे पर सवाल

    ट्रंप प्रशासन ने संघीय कर्मचारियों, सरकारी एजेंसियों और सरकारी खर्च में कटौती के लिए डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) के जरिए कई कदम उठाए हैं। सरकार की वेबसाइट पर फिलहाल करीब 215 अरब डॉलर की बचत का दावा किया गया है।

    हालांकि, स्वतंत्र विशेषज्ञ इन आंकड़ों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार की ओर से बताई गई बचत और वास्तव में हासिल हुई बचत में अंतर हो सकता है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि खर्च में कटौती का सरकारी कर्ज पर कितना वास्तविक असर पड़ा है।

    दोनों पार्टियों के सांसदों ने जताई चिंता

    अमेरिकी सरकारी कर्ज के 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचने पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के सांसदों की ओर से चिंता जताई गई है। बढ़ता कर्ज अमेरिका की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भविष्य के बजट पर भी दबाव बढ़ा रहा है।

    कर्ज का यह रिकॉर्ड स्तर ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका को सामाजिक योजनाओं, रक्षा और अन्य सरकारी कार्यक्रमों पर बड़े पैमाने पर खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले समय में खर्च घटाने, टैक्स नीति और कर्ज नियंत्रण को लेकर ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव और बढ़ सकता है।

  • फिल्मी पर्दे से सब्जी मंडी तक पहुंचे एक्टर विमल, दुकानदारों के साथ बैठकर बेची सब्जियां; 4.5 करोड़ के चेक केस से भी चर्चा में

    फिल्मी पर्दे से सब्जी मंडी तक पहुंचे एक्टर विमल, दुकानदारों के साथ बैठकर बेची सब्जियां; 4.5 करोड़ के चेक केस से भी चर्चा में

    नई दिल्ली । तमिल सिनेमा के अभिनेता विमल इन दिनों अपनी फिल्मों से ज्यादा एक अनोखी वजह से चर्चा में हैं। तिरुचिरापल्ली जिले में मनाप्पराई के पास अपने होमटाउन पहुंचे अभिनेता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में विमल स्थानीय दुकानदारों के साथ बैठकर सब्जियां बेचते नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि यह पूरा मामला उस समय सामने आया है जब अभिनेता हाल ही में 4.5 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में एक साल की जेल की सजा को लेकर सुर्खियों में आए थे। हालांकि उनकी सजा पर फिलहाल रोक लगाई गई है ताकि वह अदालत के फैसले के खिलाफ अपील कर सकें।

    विमल तिरुचिरापल्ली के पास पन्नानकोम्बु में शुरू हुए एक साप्ताहिक बाजार में पहुंचे थे। वह इलाके में अपनी एक फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में आए थे। इसी दौरान उन्होंने बाजार का रुख किया और वहां मौजूद स्थानीय व्यापारियों के बीच जाकर बैठ गए। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक दुकानदारों के साथ सब्जियां बेचने में मदद की। अभिनेता को इस अंदाज में देखकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए और देखते ही देखते बाजार में उन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    वायरल वीडियो में विमल बेहद सहज अंदाज में नजर आ रहे हैं। वह किसी बड़े स्टार की तरह अलग रहने के बजाय स्थानीय दुकानदारों के साथ बैठकर बातचीत करते दिखाई देते हैं। उन्होंने ग्राहकों के साथ भी बातचीत की और कुछ देर तक सब्जियां बेचने में हाथ बंटाया। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान अभिनेता ने आसपास के कुछ दुकानदारों को 500 रुपये भी दिए। उनके इस व्यवहार को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोग उनकी सादगी की तारीफ कर रहे हैं।

    विमल का यह अंदाज इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ समय पहले ही वह एक कानूनी मामले को लेकर सुर्खियों में थे। चेन्नई की अदालत ने जुलाई 2026 में फिल्म मन्नार वर्गीयारा के निर्माण से जुड़े 4.5 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में उन्हें एक साल की जेल की सजा सुनाई थी। रिपोर्टों के अनुसार अभिनेता ने फिल्म के लिए फाइनेंसर गोपी से 4.5 करोड़ रुपये उधार लिए थे। रकम लौटाने के लिए दिया गया चेक बैंक में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण बाउंस हो गया था। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा।

    फैसले के बाद विमल की ओर से अपील करने की बात कही गई थी। अदालत ने भी उन्हें अपील के लिए समय देते हुए सजा को फिलहाल एक महीने के लिए निलंबित कर दिया था। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अभिनेता इस समय जेल की सजा काट रहे हैं। उनका कानूनी मामला अभी अपील की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।

    इस कानूनी विवाद के बीच विमल का अपने गृह क्षेत्र के लोगों के साथ इस तरह घुलना मिलना उनके फैंस के लिए भी खास रहा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर लोगों की अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे अभिनेता की जमीन से जुड़ी सादगी बता रहे हैं तो कुछ इसे अपने क्षेत्र के लोगों के साथ जुड़ने का सहज तरीका मान रहे हैं।

    वर्कफ्रंट की बात करें तो विमल ने तमिल सिनेमा में लंबे समय तक काम किया है। उन्हें कलवाणी वागई सूडा वा और केडी बिल्ला किल्लाडी रंगा जैसी फिल्मों से पहचान मिली। उनकी हालिया फिल्म वधम को दर्शकों और समीक्षकों से मिली जुली प्रतिक्रिया मिली थी। अब अभिनेता कई नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। ऐसे में सब्जी बाजार में उनका यह अलग अंदाज फिल्मी करियर से इतर उनकी चर्चा का नया कारण बन गया है।

  • घुटने की पुरानी चोट के बीच प्रभास की हेल्थ पर फिर सवाल, सर्जन की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बढ़ी बेचैनी

    घुटने की पुरानी चोट के बीच प्रभास की हेल्थ पर फिर सवाल, सर्जन की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बढ़ी बेचैनी

    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के सुपरस्टार प्रभास की सेहत को लेकर उनके फैंस की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। इसकी वजह अभिनेता की ओर से जारी कोई आधिकारिक हेल्थ अपडेट नहीं बल्कि एक ऑर्थोपेडिक सर्जन की सोशल मीडिया पोस्ट है। हैदराबाद के अपोलो हॉस्पिटल से जुड़े ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. केजे रेड्डी ने प्रभास के साथ एक तस्वीर शेयर की और अभिनेता की मेहनत तथा उनके संघर्ष की तारीफ की। पोस्ट में उन्होंने सफलता के पीछे छिपी निजी कुर्बानियों का जिक्र किया। इसके बाद फैंस ने कमेंट सेक्शन में प्रभास की सेहत को लेकर सवाल पूछने शुरू कर दिए।

    डॉ. केजे रेड्डी की पोस्ट में प्रभास के साथ उनकी तस्वीर दिखाई दे रही है। डॉक्टर ने अभिनेता के व्यवहार और उनके सकारात्मक रवैये की तारीफ की। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभास की सेहत की देखभाल की जिम्मेदारी मिलना उनके लिए खुशी की बात है। पोस्ट में अभिनेता के अच्छे स्वास्थ्य और खुशी की कामना भी की गई है। हालांकि डॉक्टर ने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रभास को फिलहाल कौन सी समस्या है या उन्होंने हाल में किस तरह का उपचार कराया है।

    पोस्ट का वह हिस्सा सबसे ज्यादा चर्चा में आया जिसमें डॉक्टर ने कहा कि किसी सफल व्यक्ति को देखने पर उसकी सार्वजनिक उपलब्धियां दिखाई देती हैं लेकिन उस मुकाम तक पहुंचने के लिए की गई निजी कुर्बानियां नजर नहीं आतीं। इसी लाइन को फैंस ने प्रभास की पुरानी चोटों से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर कई फैंस ने अभिनेता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई और डॉक्टर से उनका बेहतर ध्यान रखने की अपील की।

    प्रभास की सेहत को लेकर चिंता की एक वजह उनका पुराना इंजरी इतिहास भी है। अपने लंबे एक्शन फिल्मी करियर के दौरान अभिनेता को कई बार चोटों का सामना करना पड़ा है। बाहुबली साहो और सालार जैसी फिल्मों के दौरान उनके एक्शन सीक्वेंस और शारीरिक मेहनत की चर्चा होती रही है। रिपोर्टों में उनके घुटने से जुड़ी पुरानी समस्या और सर्जरी का भी जिक्र किया गया है। इसी वजह से डॉक्टर की नई पोस्ट सामने आने के बाद फैंस को लगा कि शायद अभिनेता किसी नए उपचार से गुजर रहे हैं।

    हालांकि यहां सबसे जरूरी बात यह है कि डॉक्टर की पोस्ट को प्रभास की किसी गंभीर बीमारी या हालिया सर्जरी की आधिकारिक पुष्टि नहीं माना जा सकता। पोस्ट में ऐसा कोई स्पष्ट मेडिकल विवरण नहीं दिया गया है जिससे यह साबित हो कि अभिनेता की हालत गंभीर है। तस्वीर में भी प्रभास सामान्य और मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं। इसलिए फिलहाल सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं को अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

    इससे पहले अगस्त में प्रभास की एक नई तस्वीर को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चा हुई थी। तस्वीर में वह पहले की तुलना में काफी दुबले नजर आए थे। कुछ फैंस ने इसे लेकर चिंता जताई जबकि कई लोगों ने माना कि यह उनकी आगामी फिल्म फौजी के किरदार के लिए किया गया शारीरिक बदलाव हो सकता है। प्रभास फिलहाल कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं और उनका व्यस्त शूटिंग शेड्यूल भी लगातार चर्चा में है।

    वर्कफ्रंट की बात करें तो प्रभास की आने वाली फिल्मों में फौजी और संदीप रेड्डी वांगा की स्पिरिट प्रमुख हैं। फौजी को लेकर अभिनेता का लुक और फिल्म की कहानी पहले से ही चर्चा में है। ऐसे में उनके फैंस उनकी फिटनेस को लेकर भी काफी सतर्क रहते हैं।

    फिलहाल डॉक्टर की पोस्ट ने सवाल जरूर खड़े किए हैं लेकिन प्रभास की किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या या नई सर्जरी की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आधिकारिक जानकारी आने तक अटकलों पर भरोसा करने के बजाय डॉक्टर की पोस्ट को अभिनेता की सेहत और मेहनत को लेकर की गई प्रशंसा के तौर पर देखना ज्यादा उचित होगा। फैंस की चिंता के बीच फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि तस्वीर में प्रभास सामान्य और खुश नजर आ रहे हैं।

  • फाइव स्टार होटल की किचन में गंदगी का मामला, फ्रीजर का तापमान भी मानक से बाहर; खाद्य विभाग ने लिए कई सैंपल

    फाइव स्टार होटल की किचन में गंदगी का मामला, फ्रीजर का तापमान भी मानक से बाहर; खाद्य विभाग ने लिए कई सैंपल


    इंदौर । इंदौर के प्रसिद्ध सयाजी होटल में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने का मामला सामने आया है। गुरुवार को खाद्य विभाग की टीम ने होटल की किचन और फूड स्टोरेज एरिया में करीब पांच घंटे तक निरीक्षण किया। जांच के दौरान फूड स्टोरेज में चूहे और किचन तथा फूड प्रिपरेशन एरिया में कॉकरोच मिलने की बात सामने आई। अधिकारियों को खाद्य सामग्री के रखरखाव और लेबलिंग से जुड़ी कई कमियां भी मिलीं। विभाग ने अलग अलग खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा है। संबंधित कार्रवाई की पुष्टि खाद्य सुरक्षा विभाग से जुड़े सोशल मीडिया अपडेट में भी हुई है।

    जांच के दौरान खाद्य स्टोरेज में चूहों की मौजूदगी दिखाई दी। पैलेट के नीचे भी चूहों की मौजूदगी के संकेत मिले। किचन और फूड प्रिपरेशन प्लेटफॉर्म पर कॉकरोच तथा गंदगी मिलने की बात अधिकारियों ने दर्ज की। ड्राय स्टोरेज की दीवार और फर्श में दरारें भी मिलीं। इसके अलावा गीले और सूखे कचरे के लिए अलग व्यवस्था नहीं होने की कमी सामने आई। पीने के पानी के बर्तनों के पास रखे डस्टबिन में भी अलग अलग प्रकार का कचरा एक साथ मिला।

    स्टोरेज में वेज और नॉनवेज खाद्य सामग्री के रखरखाव को लेकर भी सवाल उठे। जांच में सीफूड चिकन और मटन के लिए अलग अलग स्टोरेज व्यवस्था नहीं मिलने की जानकारी सामने आई। ड्राय और नॉनवेज स्टोरेज के प्लेटफॉर्म पर जंग के निशान भी मिले। स्टोरेज रैक दीवार से सटाकर रखे गए थे। खाद्य सामग्री को नमी और संभावित संक्रमण से बचाने के लिए स्टोरेज की स्वच्छता और उचित व्यवस्था बेहद जरूरी मानी जाती है।

    फ्रीजर के तापमान को लेकर भी जांच में गंभीर कमी सामने आई। नॉनवेज को सुरक्षित रखने के लिए सामान्य तौर पर फ्रीजर में करीब माइनस 18 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रखना जरूरी होता है। निरीक्षण के दौरान एक फ्रीजर का तापमान प्लस 20 डिग्री और दूसरे का माइनस 16 डिग्री दर्ज किया गया। इसके अलावा 33 नॉनवेज पैकेटों पर पैकेजिंग डेट बैच नंबर और एक्सपायरी डेट दर्ज नहीं होने की बात सामने आई। पैक्ड कुल्फी पर भी जरूरी जानकारी नहीं मिली।

    स्टोर में रखी मूंगफली में फंगस पाया गया। इसके साथ ही सड़े हुए टमाटर और आलू भी मिले। उबले आलू पर एक्सपायरी डेट की टैगिंग पाए जाने की जानकारी सामने आई। कुछ खाद्य उत्पाद उचित लेबल के बिना रखे गए थे। टॉपिंग के कुछ टेट्रापैक लीक भी मिले जिससे खाद्य सामग्री के दूषित होने का जोखिम बढ़ सकता है। पैकेटबंद कुकीज पर भी पैकेजिंग और एक्सपायरी से जुड़ी जानकारी नहीं होने की बात सामने आई।

    लाइसेंस से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी खाद्य विभाग ने आपत्ति दर्ज की। जांच में होटल में इस्तेमाल होने वाली नॉनवेज गतिविधियों का लाइसेंस में उल्लेख नहीं होने की जानकारी सामने आई। इसी तरह इन हाउस बेकरी और स्वीट्स निर्माण से जुड़ी गतिविधियों का उल्लेख भी लाइसेंस में नहीं मिलने की बात कही गई। निरीक्षण के दौरान होटल का सेंट्रल FSSAI फाइव स्टार लाइसेंस मौके पर उपलब्ध नहीं मिला। हालांकि होटल स्वयं अलग अलग ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर पांच सितारा होटल के रूप में सूचीबद्ध है।

    खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जांच के दौरान पनीर कच्चे नॉनवेज पैक्ड पनीर सौंफ मसाले और ड्रायफ्रूट्स समेत कई खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए हैं। इन सैंपलों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों के मुताबिक रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की स्थिति में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब खाद्य सुरक्षा विभाग इंदौर में होटल और रेस्टोरेंट्स में स्वच्छता तथा खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर लगातार निरीक्षण कर रहा है। FSSAI के नियमों के तहत खाद्य कारोबारियों के लिए स्वच्छ परिसर उचित भंडारण और सही लेबलिंग जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हैं।

    अब सभी की नजर प्रयोगशाला रिपोर्ट और खाद्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर है। सैंपल रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि जांच के दौरान लिए गए खाद्य पदार्थ निर्धारित सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। इसके बाद विभाग नियमों के मुताबिक होटल प्रबंधन के खिलाफ आगे की कार्रवाई कर सकता है।

  • इंदौर के दोहरे हत्याकांड में मासूम की गवाही पर टिकी नजर, घटना के तुरंत बाद रिकॉर्ड हुआ बयान जांच में बनेगा अहम कड़ी

    इंदौर के दोहरे हत्याकांड में मासूम की गवाही पर टिकी नजर, घटना के तुरंत बाद रिकॉर्ड हुआ बयान जांच में बनेगा अहम कड़ी


    इंदौर  इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र के झलारिया गांव में हुए मां बेटी हत्याकांड की जांच में अब 8 साल के मासूम बेटे का बयान बेहद अहम माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक आरोपी पिता सुनील चौहान ने पहले पत्नी अनीता की हत्या की और इसके बाद दोनों बच्चों को हिंगोनिया तालाब में फेंक दिया। इस घटना में 10 वर्षीय बेटी माही की मौत हो गई जबकि 8 वर्षीय बेटा अजय किसी तरह अपनी जान बचाकर तालाब से बाहर निकल आया। इसके बाद उसने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। घटना के बाद पुलिस ने बच्चे का बयान मोबाइल में रिकॉर्ड किया था। बताया जा रहा है कि यह वीडियो करीब 2 मिनट 8 सेकंड का है। बाद में बच्चे का बयान अदालत में भी दर्ज कराया गया। घटना और बच्चे के पुलिस को दिए बयान की जानकारी की पुष्टि कई रिपोर्टों में हुई है।

    पुलिस के अनुसार तालाब में फेंके जाने के बाद बच्चे ने अपनी जान बचाने के लिए खुद को मृत होने का आभास दिया और मौका मिलते ही पानी से बाहर निकलकर सड़क की ओर पहुंचा। वहां गश्त कर रही पुलिस टीम की नजर उस पर पड़ी। गीले कपड़ों और घबराए हुए बच्चे ने पुलिस को जो जानकारी दी उसके बाद तालाब में तलाश अभियान शुरू किया गया। कई घंटे की मशक्कत के बाद उसकी बहन का शव बरामद किया गया। इस तरह घटना के तुरंत बाद सामने आया बच्चे का बयान पुलिस के लिए शुरुआती जांच का महत्वपूर्ण आधार बना।

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अदालत में 8 साल के बच्चे की गवाही कितनी महत्वपूर्ण होगी। कानूनी तौर पर केवल उम्र कम होने की वजह से किसी बच्चे की गवाही को खारिज नहीं किया जाता। अदालत यह देखती है कि बच्चा सवाल समझने और उनके जवाब तार्किक तरीके से देने में सक्षम है या नहीं। यदि अदालत को लगता है कि बच्चा घटनाक्रम को समझने और सही तरीके से बताने की क्षमता रखता है तो उसकी गवाही को साक्ष्य के रूप में महत्व दिया जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी और बयान की विश्वसनीयता दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों के साथ परखी जाएगी।

    इस मामले में घटना के तुरंत बाद दिया गया बयान भी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बच्चे ने घटना के कुछ ही समय बाद पुलिस को जानकारी दी थी। ऐसे बयान की जांच करते समय पुलिस और अदालत परिस्थितियों तथा दूसरे साक्ष्यों से उसका मिलान कर सकती है। वीडियो रिकॉर्डिंग भी जांच में उपयोगी हो सकती है लेकिन केवल वीडियो बन जाना अपने आप में पर्याप्त नहीं माना जाता। डिजिटल रिकॉर्ड को कानून के मुताबिक सुरक्षित और प्रमाणित तरीके से अदालत के सामने पेश करना जरूरी होगा।

    मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट घटनास्थल से मिले साक्ष्य आरोपी के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भी जांच होगी। इन सभी साक्ष्यों को एक साथ देखकर अदालत यह तय करेगी कि अभियोजन पक्ष के आरोप किस हद तक साबित होते हैं। इसलिए बच्चे का बयान महत्वपूर्ण होने के बावजूद पूरे मामले का फैसला केवल एक साक्ष्य के आधार पर नहीं बल्कि समग्र साक्ष्य के आधार पर होगा।

    इस घटना का सबसे संवेदनशील पहलू मासूम की मानसिक स्थिति भी है। उसने अपनी मां और बहन को खोया है और खुद भी जानलेवा परिस्थिति से बचकर निकला है। ऐसे हादसे का बच्चे के मन पर गहरा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक उसे सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल देना जरूरी है। परिवार को उससे बार बार घटना पूछने के बजाय उसे भावनात्मक सहारा देना चाहिए। जरूरत पड़ने पर बाल मनोवैज्ञानिक या काउंसलर की मदद भी ली जा सकती है।

    इस पूरे मामले में एक तरफ पुलिस हत्या के आरोपों से जुड़े साक्ष्यों को मजबूत करने में जुटी है तो दूसरी तरफ मासूम के भविष्य और मानसिक सुरक्षा की चुनौती भी सामने है। मां और बहन की मौत के बाद उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। ऐसे में अदालत में न्याय की प्रक्रिया के साथ उसकी देखभाल और पुनर्वास पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी होगा। आरोपी सुनील चौहान के खिलाफ पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • दर्द की गोली को हल्के में न लें! बार-बार पेनकिलर लेने से किडनी पर पड़ा असर, इंदौर में 31 वर्षीय युवक का हुआ ट्रांसप्लांट

    दर्द की गोली को हल्के में न लें! बार-बार पेनकिलर लेने से किडनी पर पड़ा असर, इंदौर में 31 वर्षीय युवक का हुआ ट्रांसप्लांट


    भोपाल । बुखार या शरीर में दर्द होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से पेनकिलर लेकर खाना कई लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुकी है। दर्द कम होते ही लोग इसे बीमारी का इलाज मान लेते हैं लेकिन इंदौर में सामने आया एक मामला इस आदत के गंभीर खतरे की ओर इशारा करता है। 31 वर्षीय नंदराम को अहमदाबाद में काम करने के दौरान बुखार और हाथ पैर में दर्द हुआ तो उसने डॉक्टर से संपर्क करने के बजाय मेडिकल स्टोर से पेनकिलर खरीदकर लेना शुरू कर दिया। करीब एक महीने में उसने लगभग 13 बार दवा ली। हर बार कुछ समय के लिए राहत मिलती रही लेकिन समस्या दोबारा सामने आती रही। बाद में जब पेट में दर्द शुरू हुआ तो जांच में उसकी दोनों किडनियां गंभीर रूप से खराब पाई गईं।

    ललितपुर जिले के तुर्का गांव निवासी नंदराम ने इसके बाद दिल्ली भोपाल और अहमदाबाद में इलाज कराया। हालत बिगड़ने पर उसे नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ने लगी। करीब एक साल तक डायलिसिस के बाद उसे इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए भर्ती किया गया। 4 अगस्त को उसकी मां भगवती ने अपनी किडनी दान की और बेटे को नई जिंदगी मिली। यह ट्रांसप्लांट आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त किया गया। फिलहाल नंदराम की हालत स्थिर बताई गई है और ट्रांसप्लांट के बाद नई किडनी सामान्य रूप से काम कर रही है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ दर्द निवारक दवाओं का बार बार या लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। खासकर NSAIDs जैसी दवाओं का अधिक इस्तेमाल जोखिम बढ़ा सकता है। ये दवाएं किडनी में रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं और कुछ परिस्थितियों में एक्यूट किडनी इंजरी का खतरा बढ़ सकता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन भी लंबे समय तक या अधिक मात्रा में NSAIDs के इस्तेमाल को किडनी के लिए नुकसानदायक मानता है।

    हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पेनकिलर की एक या दो खुराक लेने से हर व्यक्ति की किडनी खराब हो जाएगी। खतरा दवा के प्रकार और मात्रा के साथ व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर भी निर्भर करता है। पहले से किडनी की बीमारी होना हाई ब्लड प्रेशर या शरीर में पानी की कमी जैसी स्थितियां जोखिम बढ़ा सकती हैं। डिहाइड्रेशन खुद भी किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।

    डॉक्टरों का कहना है कि बार बार होने वाले बुखार या दर्द को केवल पेनकिलर से दबाने के बजाय उसके कारण की जांच कराना जरूरी है। संक्रमण सूजन या दूसरी बीमारी की वजह से दर्द और बुखार हो सकता है। ऐसे में दवा का चुनाव उसकी सही मात्रा और कितने समय तक इस्तेमाल करना है यह डॉक्टर की सलाह से तय किया जाना चाहिए।

    इंदौर में इलाज करा रहे 37 वर्षीय जितेंद्र कुमार का मामला भी पेनकिलर के लंबे इस्तेमाल से जुड़ी गंभीर परेशानी की ओर ध्यान खींचता है। अशोक नगर निवासी जितेंद्र इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे और काम के दौरान होने वाली थकान तथा शरीर के दर्द से राहत के लिए पेनकिलर लेने लगे। करीब एक महीने तक लगातार दवा लेने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और जांच में दोनों किडनियों के खराब होने की जानकारी मिली। वर्ष 2021 से वह स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहे हैं और अब सप्ताह में तीन दिन डायलिसिस के लिए अस्पताल जाना पड़ता है।

    एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में अब तक 8 किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की जानकारी दी गई है। इनमें सभी ट्रांसप्लांट आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त किए गए हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार 7 मामलों में मां ने अपने बच्चों को किडनी दान की है। अस्पताल का कहना है कि मरीजों को समय पर उपचार जरूरी दवाएं और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है।

    विशेषज्ञों की सलाह साफ है कि हर दर्द के लिए खुद से पेनकिलर लेना सुरक्षित तरीका नहीं है। अगर दर्द या बुखार बार बार हो रहा है तो उसके कारण की जांच कराना ज्यादा जरूरी है। दवा की जरूरत होने पर डॉक्टर से सही दवा और उसकी खुराक के बारे में सलाह लेना चाहिए। खासकर लंबे समय तक दर्द निवारक दवा लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूरी है। दवाओं के गलत या अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाली किडनी की क्षति कई बार गंभीर स्थिति तक पहुंच सकती है और कुछ मामलों में डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत भी पड़ सकती है।

  • अस्पताल दूर टीकाकरण अधूरा और कुपोषण का संकट, बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत ने खोली सिस्टम की पोल

    अस्पताल दूर टीकाकरण अधूरा और कुपोषण का संकट, बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत ने खोली सिस्टम की पोल


    भोपाल । मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक में बैगा आदिवासी परिवारों के बच्चों की मौत का मामला स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। प्रभावित गांवों में बच्चों के बीमार पड़ने और मौतों की खबर सामने आने के बाद सरकारी टीमें सक्रिय हुईं लेकिन बीमारी के कारण और मृतकों की संख्या को लेकर सरकारी दावे और स्थानीय स्तर पर किए जा रहे दावों में अंतर दिखाई दे रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार आठ बच्चों की मौत हुई है जबकि स्थानीय कांग्रेस विधायक संजय उइके ने 20 बच्चों की मौत का दावा किया है। उन्होंने मृत बच्चों की सूची होने और कई परिवारों को लंबे समय तक राशन नहीं मिलने की बात भी कही है।

    बिरसा ब्लॉक के बैगा बहुल इलाकों में कुंडेकसा अडोरी कोरका और बांदरी समेत कई गांवों में बड़ी संख्या में बच्चे बीमार हुए। बच्चों में बुखार सर्दी खांसी दस्त त्वचा संबंधी समस्या और मिजल्स जैसे लक्षण सामने आए। स्वास्थ्य विभाग ने बाद में घर घर सर्वे शुरू किया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 14 अगस्त तक 140 प्रभावित बच्चों में से 100 स्वस्थ होकर घर लौट चुके थे जबकि 40 बच्चों का उपचार चल रहा था। स्वास्थ्य टीमों ने बच्चों को विटामिन ए ओआरएस आयरन सिरप और अन्य जरूरी दवाएं भी दीं।

    इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच को लेकर उठ रहा है। प्रभावित आदिवासी गांव बेहद दुर्गम इलाकों में स्थित हैं और कई जगह अस्पताल तथा स्वास्थ्य केंद्र काफी दूर हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ इलाकों में निकटतम अस्पताल करीब 70 किलोमीटर दूर है। ऐसे में गंभीर हालत में बच्चों को समय पर अस्पताल पहुंचाना परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। कई परिवार पारंपरिक उपचार और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध साधनों पर निर्भर रहते हैं जिससे अस्पताल पहुंचने में और देरी हो सकती है।

    दूसरी बड़ी चिंता कुपोषण की है। प्रभावित क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्रों में किए गए वजन परीक्षण में बड़ी संख्या में बच्चे सामान्य से कम वजन के पाए गए। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जुलाई में 28 आंगनवाड़ी केंद्रों में छह साल से कम उम्र के 1149 बच्चों का वजन किया गया। इनमें 213 बच्चे मध्यम रूप से कम वजन वाले और 18 बच्चे गंभीर रूप से कम वजन वाले पाए गए। यानी पोषण संकट बीमारी के साथ बच्चों की स्थिति को और गंभीर बना रहा था।

    टीकाकरण को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। मिजल्स से बचाव के लिए टीकाकरण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है लेकिन दूरदराज के गांवों में वैक्सीनेशन कवरेज और स्वास्थ्य कर्मियों की नियमित पहुंच को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें सामने आई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बाद में प्रभावित इलाकों में सर्वेक्षण टीमों की संख्या बढ़ाई और घर घर जाकर बच्चों की जांच शुरू की। 14 अगस्त तक 20 सर्वेक्षण टीमें सक्रिय थीं और सैकड़ों लोगों की जांच की जा चुकी थी।

    सरकार की ओर से बीमारी को किसी रहस्यमयी बीमारी के बजाय मौसमी संक्रमणों से जोड़कर देखा गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि कई मामलों में मलेरिया और मिजल्स जैसे लक्षण पाए गए हैं। आईसीएमआर और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की टीमें भी क्षेत्र में पहुंचकर स्थिति का आकलन कर चुकी हैं। प्रशासन ने पानी के स्रोतों को सैनिटाइज करने सफाई अभियान चलाने और मच्छरों के नियंत्रण के लिए फॉगिंग तथा एंटी लार्वा गतिविधियां शुरू की हैं।

    प्रशासन ने अब प्रभावित गांवों में निगरानी बढ़ा दी है। घर घर स्वास्थ्य जांच के साथ बीमार बच्चों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है और पोषण तथा राशन की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया है कि कई बच्चों को उपचार के बाद स्वस्थ होने पर घर भेजा जा चुका है।

    हालांकि मौतों की वास्तविक संख्या और उनके कारण को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने तक किसी एक बीमारी को सभी मौतों का निश्चित कारण बताना जल्दबाजी होगी। फिलहाल यह मामला सिर्फ बीमारी का नहीं बल्कि दूरदराज आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पोषण टीकाकरण और समय पर निगरानी की व्यवस्था का भी बड़ा सवाल बन चुका है। बैगा जैसे विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह के बच्चों तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाना इस संकट से निकलने की सबसे बड़ी चुनौती है।

  • BJP युवा मोर्चा की नई टीम तैयार, ग्वालियर से भोपाल और उज्जैन तक बदली कमान; जानें किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी

    BJP युवा मोर्चा की नई टीम तैयार, ग्वालियर से भोपाल और उज्जैन तक बदली कमान; जानें किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने युवा मोर्चा के संगठन को और मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति के बाद भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने 12 जिलों में नए जिलाध्यक्षों की घोषणा की है। इसके साथ ही 9 जिलों में जिला महामंत्रियों की नियुक्ति भी की गई है। नई जिम्मेदारियां ग्वालियर ग्रामीण मऊगंज सतना कटनी पांढुर्णा भोपाल ग्रामीण धार ग्रामीण बुरहानपुर देवास विदिशा उज्जैन ग्रामीण और शाजापुर में दी गई हैं। इससे पहले जुलाई में भी युवा मोर्चा ने 15 जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ति की थी। उस सूची में ग्वालियर नगर समेत कई जिलों को नई कमान मिली थी। (peptechtime.com)

    ताजा नियुक्तियों में ग्वालियर ग्रामीण की जिम्मेदारी शिवराज यादव को दी गई है जबकि मनोज गुर्जर को जिला महामंत्री बनाया गया है। मऊगंज में प्रवीण सिंह जिलाध्यक्ष और विवेक तिवारी महामंत्री होंगे। सतना में यश यादव को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है और शुभम परिहार जिला महामंत्री बनाए गए हैं। कटनी में पारस जैन को जिलाध्यक्ष तथा देवांश श्रीवास्तव को महामंत्री नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने ग्रामीण और संगठनात्मक क्षेत्रों में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है।

    पांढुर्णा में विवेक रामचाकले को जिलाध्यक्ष बनाया गया है जबकि पंकज बंजारी को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। भोपाल ग्रामीण में वीरेंद्र सिंह राजपूत को युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। धार ग्रामीण में उज्ज्वल सोलंकी को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इन दोनों जिलों में फिलहाल जिला महामंत्री के नाम की घोषणा नहीं की गई है।

    बुरहानपुर में भरत रावल को जिलाध्यक्ष और अमित वास्कले को जिला महामंत्री बनाया गया है। देवास में रजत पाल सिंह को अध्यक्ष तथा मोहित जाट को महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। विदिशा में अनुज मित्तल जिलाध्यक्ष होंगे जबकि शिवेंद्र सिंह राजपूत को जिला महामंत्री बनाया गया है। उज्जैन ग्रामीण में हरजीत सिंह को जिलाध्यक्ष और राहुल धाकड़ को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। शाजापुर में हर्षवर्धन मंडलोई को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यहां भी महामंत्री का नाम फिलहाल घोषित नहीं किया गया है।

    बीजेपी युवा मोर्चा में लगातार हो रही इन नियुक्तियों को संगठन विस्तार की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। जुलाई में प्रदेश के 15 जिलों में अध्यक्षों की पहली बड़ी सूची जारी हुई थी जिसमें सागर ग्रामीण हरदा सीधी टीकमगढ़ खरगोन जबलपुर ग्रामीण बैतूल झाबुआ उज्जैन नगर ग्वालियर नगर रतलाम बड़वानी शहडोल सीहोर और खंडवा शामिल थे। उस सूची में छह जिलों के महामंत्रियों की भी घोषणा की गई थी। (starsamachar.com)

    पार्टी के युवा संगठन में जिला अध्यक्षों की भूमिका अहम मानी जाती है। इन पदाधिकारियों के जरिए बूथ स्तर तक युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और संगठन की गतिविधियों को गति देने की जिम्मेदारी रहती है। आने वाले समय में प्रदेश के बाकी जिलों में भी नियुक्तियां होने की संभावना है। इससे युवा मोर्चा का संगठनात्मक ढांचा और मजबूत होने के साथ आगामी राजनीतिक गतिविधियों में युवाओं की भूमिका बढ़ सकती है।

    इधर बीजेपी महिला मोर्चा ने भी प्रदेश में संगठनात्मक नियुक्तियों का ऐलान किया है। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अर्चना परांजपे राजगढ़े की ओर से जारी सूची में अलग अलग संभागों के लिए प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। चंबल की जिम्मेदारी ज्योति तोमर को जबकि ग्वालियर की जिम्मेदारी क्रांति जोशी को दी गई है। सागर में शालिनी खरबानी रीवा में आशा गुप्ता शहडोल में डॉ. स्वप्ना वर्मा और जबलपुर में डॉ. सारिका उपाध्याय को जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा छिंदवाड़ा नर्मदापुरम भोपाल इंदौर निमाड़ उज्जैन और मंदसौर संभाग में भी महिला पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    बीजेपी के दोनों मोर्चों में एक साथ संगठनात्मक गतिविधियां तेज होने से साफ है कि पार्टी जिला स्तर पर अपनी टीम को सक्रिय करने पर जोर दे रही है। युवा और महिला कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियां देकर संगठन बूथ और जमीनी स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • मुरैना में ट्रेन से तोमर का भाषण और भोपाल में पटवारी का हमला, MP की राजनीति में छाया इंजन-डिब्बे वाला तंज

    मुरैना में ट्रेन से तोमर का भाषण और भोपाल में पटवारी का हमला, MP की राजनीति में छाया इंजन-डिब्बे वाला तंज


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के बयानों और अंदाज को लेकर खूब चर्चा हो रही है। मुरैना में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने संत रविदास की 650वीं जयंती के कार्यक्रम में जाति व्यवस्था को लेकर नेताओं पर सीधा निशाना साधा। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी की सरकार और संगठन के भीतर कथित खींचतान को ट्रेन के इंजन और डिब्बों की लड़ाई बताकर सियासी तंज कसा। पटवारी का यह बयान 20 अगस्त को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में दिए गए उनके हमले के दौरान सामने आया था।

    मुरैना में संत रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित समरसता संकल्प अभियान और यात्रा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जाति का बंधन भगवान ने नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि समाज में अपनी व्यवस्था के लिए लोगों ने जाति व्यवस्था बनाई थी लेकिन बाद में इसके स्वरूप को बिगाड़ने और तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा देने का काम नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए किया। तोमर के इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। संत रविदास के विचारों में सामाजिक समरसता और समानता का संदेश प्रमुख रहा है और इसी विचार को लेकर समरसता से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

    तोमर का दूसरा अंदाज तब देखने को मिला जब उन्होंने मुरैना के कैलारस से वीरपुर के बीच हाल ही में शुरू हुई मेमू ट्रेन में आम यात्रियों के साथ सफर किया। ट्रेन के अलग अलग स्टेशनों पर रुकने के दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित भी किया। ट्रेन के अंदर खड़े होकर माइक से संबोधन के वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। राजनीतिक कार्यक्रमों में नेताओं के भाषण और जनसंपर्क के इस अंदाज को लेकर लोग अपने अपने तरीके से टिप्पणी कर रहे हैं।

    इधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी की सरकार पर हमला बोलते हुए ट्रेन का ही उदाहरण इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक ऐसी ट्रेन बन गई है जिसमें डिब्बे कहते हैं कि इंजन हटा दो और इंजन कहता है कि डिब्बों को बदल दूंगा। पटवारी ने आरोप लगाया कि इस कथित खींचतान के बीच सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को हो रही है। उनके बयान की पुष्टि हालिया मीडिया रिपोर्टों में भी हुई है।

    पटवारी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के बड़े नेता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ दिल्ली तक जा रहे हैं जबकि दूसरी तरफ मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल में बदलाव की बात कर रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इसी राजनीतिक स्थिति को इंजन और डिब्बों के बीच चल रही लड़ाई बताया। यह बयान विपक्ष की ओर से बीजेपी सरकार पर किया गया राजनीतिक हमला है और इसे इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    पटवारी ने सरकार को घेरते हुए शिक्षा व्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दे भी उठाए। उन्होंने स्कूलों की स्थिति को लेकर कांग्रेस के जरिए जमीनी अभियान चलाने की बात कही और सरकार से शिक्षा व्यवस्था पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों और सांची दूध के दामों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

    इस पूरे घटनाक्रम में दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सामाजिक समरसता और जातिगत भेदभाव के मुद्दे पर नेताओं की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस बीजेपी की अंदरूनी राजनीति पर ट्रेन के इंजन और डिब्बों का रूपक इस्तेमाल कर रही है। दोनों बयानों ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी को तेज कर दिया है। अब इन मुद्दों पर आने वाली प्रतिक्रियाएं प्रदेश की राजनीतिक बहस को और गर्म कर सकती हैं।