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  • MP में बाढ़ जैसे हालात से हड़कंप, ट्रक पानी में फंसा; कई इलाकों में घरों में घुसा पानी और स्कूलों की छुट्टी

    MP में बाढ़ जैसे हालात से हड़कंप, ट्रक पानी में फंसा; कई इलाकों में घरों में घुसा पानी और स्कूलों की छुट्टी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य के पूर्वी हिस्से में सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है और नदी नाले उफान पर हैं। डिंडौरी पन्ना रीवा सतना मैहर और छतरपुर समेत कई इलाकों में हालात बिगड़ने लगे हैं। नर्मदा और मंदाकिनी जैसी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है जबकि कई निचले इलाकों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में प्रदेश के 16 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। स्थानीय मौसम रिपोर्टों के मुताबिक कुछ इलाकों में 4 से 8 इंच तक बारिश होने की संभावना है।

    भारी बारिश को देखते हुए मैहर और डिंडौरी में स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है। डिंडौरी में आंगनवाड़ी केंद्रों को भी बंद रखा गया है। प्रशासन ने नदी नालों और जलभराव वाले इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम विभाग की ओर से पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया था।

    मैहर में बारिश के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। गुरुवार देर रात मर्जुआ नाले को पार करने की कोशिश के दौरान एक ट्रक करीब सात फीट गहरे पानी में फंस गया। ट्रक में ड्राइवर और क्लीनर मौजूद थे। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। मुकुंदपुर चौकी प्रभारी नागेश्वर मिश्रा ने पानी में उतरकर ट्रक तक पहुंचने की कोशिश की। ग्रामीणों की मदद से रस्से का सहारा लिया गया और दोनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    बारिश का असर पन्ना और चित्रकूट इलाके में भी दिखाई दे रहा है। रनेह जलप्रपात और बृहस्पति कुंड में पानी का बहाव तेज हो गया है। वहीं नर्मदा का जलस्तर बढ़ने से जबलपुर का धुआंधार जलप्रपात भी सामान्य रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। कई स्थानों पर नदी और नालों का पानी पुलों के ऊपर से बह रहा है जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है। डिंडौरी मंडला स्टेट हाईवे पर भी पानी आने के कारण यातायात बाधित होने की स्थिति बनी है।

    रीवा और सतना के कई रिहायशी इलाकों में भी पानी घुसने की खबर है। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की जरूरत पड़ी है। जबलपुर में बरगी डैम के गेट खोले जाने से नर्मदा के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है। ऐसे हालात में प्रशासन और स्थानीय एजेंसियां निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं।

    मौसम विभाग के मुताबिक निवाड़ी टीकमगढ़ छतरपुर समेत 16 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। इसके अलावा ग्वालियर दतिया शिवपुरी गुना अशोकनगर विदिशा रायसेन नर्मदापुरम सागर दमोह पन्ना सीधी और सिवनी में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    लगातार बारिश के बावजूद पूरे मानसूनी सीजन में प्रदेश में कुल बारिश अभी सामान्य से कम है। मौसम रिपोर्ट के अनुसार 20 अगस्त तक मध्य प्रदेश में करीब 599 मिलीमीटर यानी 23.6 इंच बारिश दर्ज की गई है जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश करीब 675 मिलीमीटर यानी 26.6 इंच मानी जाती है। यानी प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां धीरे धीरे मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ सकती हैं। ऐसे में पूर्वी हिस्से के बाद राज्य के दूसरे जिलों में भी बारिश का असर बढ़ने की संभावना है। लोगों को सलाह दी गई है कि तेज बारिश के दौरान नदी नालों और जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखें तथा मौसम और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर नजर रखें।

  • बीना स्टेशन पर रेलवे का मेगा ब्लॉक, ट्रेनों के नंबर और रूट बदले; मालखेड़ी भोपाल और कटनी में मिलेगा अस्थाई ठहराव

    बीना स्टेशन पर रेलवे का मेगा ब्लॉक, ट्रेनों के नंबर और रूट बदले; मालखेड़ी भोपाल और कटनी में मिलेगा अस्थाई ठहराव


    भोपाल । मध्य प्रदेश से होकर ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए सितंबर और अक्टूबर में बड़ी परेशानी सामने आ सकती है। पश्चिम मध्य रेलवे के बीना स्टेशन यार्ड में चल रहे रीमॉडलिंग कार्य के कारण ट्रेनों के संचालन में व्यापक बदलाव किया गया है। रेलवे के संशोधित आदेश के अनुसार 16 ट्रेनें पूरी तरह निरस्त रहेंगी जबकि 48 ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। इसके अलावा कुछ ट्रेनों के नंबर में बदलाव किया गया है और कई प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए अस्थाई ठहराव की व्यवस्था की गई है। बीना यार्ड रीमॉडलिंग के कारण 20 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच रेल परिचालन में बड़े स्तर पर बदलाव प्रस्तावित है।

    बीना स्टेशन पर आगासौद और बीना के बीच तीसरी रेल लाइन को बीना स्टेशन से जोड़ने का काम किया जा रहा है। इसके लिए प्री नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन इंटरलॉकिंग से जुड़े कार्य किए जाएंगे। रेलवे के मुताबिक सुरक्षित रेल संचालन के लिए इस दौरान कुछ ट्रेनों को रद्द करना पड़ेगा जबकि कई ट्रेनों के मार्ग बदले जाएंगे। यह काम कई चरणों में पूरा किया जा रहा है और नॉन इंटरलॉकिंग का अंतिम चरण 13 से 15 अक्टूबर तक निर्धारित है।

    इस बदलाव के तहत दादर से बलिया जाने वाली ट्रेन को नए नंबर 11043 के साथ चलाया जाएगा जबकि बलिया से दादर की सेवा 11044 नंबर से संचालित होगी। इसी तरह दादर से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन को 11047 और गोरखपुर से दादर जाने वाली ट्रेन को 11048 नंबर दिया गया है। यानी जिन यात्रियों ने पुराने ट्रेन नंबर देखकर टिकट या यात्रा की योजना बनाई है उन्हें यात्रा से पहले संशोधित नंबर जरूर जांचना होगा।

    गुना रूठियाई और मक्सी क्षेत्र से परिवर्तित मार्ग पर चलने वाली कई ट्रेनों को मालखेड़ी स्टेशन पर अस्थाई ठहराव दिया गया है। इनमें डॉ अंबेडकर नगर रीवा ट्रेन 11704 हावड़ा इंदौर ट्रेन 22912 अहमदाबाद दरभंगा ट्रेन 15560 भुज शालीमार ट्रेन 22829 और अहमदाबाद गोरखपुर ट्रेन 19489 समेत कई सेवाएं शामिल हैं। इन ट्रेनों को मालखेड़ी स्टेशन पर करीब दो मिनट रुकने की व्यवस्था की गई है। वापसी दिशा की कई ट्रेनों को भी इसी तरह का अस्थाई ठहराव मिलेगा।

    वेरावल और जबलपुर के बीच चलने वाली 11465 और 11466 ट्रेन को भी परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। यात्रियों को राहत देने के लिए इन दोनों ट्रेनों का निशातपुरा के बजाय भोपाल स्टेशन पर करीब पांच मिनट का अस्थाई ठहराव रखा गया है। यह बदलाव संबंधित निर्धारित तारीखों पर लागू रहेगा।

    कटनी स्टेशन पर भी चार ट्रेनों को दो मिनट का अस्थाई ठहराव मिलेगा। इनमें लोकमान्य तिलक टर्मिनस बलिया ट्रेन 11071 और 11072 तथा रानी कमलापति रीवा ट्रेन 12185 और 12186 शामिल हैं। इसके अलावा कटनी साउथ स्टेशन पर हावड़ा भोपाल ट्रेन 13025 और 13026 सहित भोपाल धनबाद भोपाल चोपन भोपाल सिंगरौली और सिंगरौली भोपाल जैसी सेवाओं को अस्थाई ठहराव दिया जाएगा।

    यार्ड के काम का असर मेमू ट्रेनों पर भी पड़ेगा। कोटा बीना मेमू 61633 को निर्धारित अवधि में बीना के बजाय मुंगावली में शॉर्ट टर्मिनेट किया जाएगा। वहीं बीना भोपाल की कुछ मेमू सेवाओं को बीना के बजाय मंडी बामोरा से शुरू किया जाएगा। भोपाल बीना मेमू भी निर्धारित अवधि में मंडी बामोरा में शॉर्ट टर्मिनेट होगी।

    रीमॉडलिंग के दौरान बीना स्टेशन पर कई ट्रेनों के ठहराव समय में भी कटौती की गई है। जिन ट्रेनों का निर्धारित ठहराव 10 मिनट था उनमें इसे घटाकर दो मिनट किया गया है। पांच मिनट वाले ठहराव को भी दो मिनट किया गया है। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि सितंबर और अक्टूबर में बीना होकर यात्रा करने से पहले ट्रेन का नंबर रूट ठहराव और शुरुआती या अंतिम स्टेशन जरूर जांच लें। यार्ड रीमॉडलिंग पूरा होने के बाद ट्रेनों का संचालन सामान्य व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा।

  • बॉयफ्रेंड के लिए गिफ्ट चुनने में हैं कन्फ्यूज तो उनकी पसंद के हिसाब से आजमाएं ये पर्सनलाइज्ड और यादगार विकल्प

    बॉयफ्रेंड के लिए गिफ्ट चुनने में हैं कन्फ्यूज तो उनकी पसंद के हिसाब से आजमाएं ये पर्सनलाइज्ड और यादगार विकल्प


    नई दिल्ली ।
    बॉयफ्रेंड के लिए सही गिफ्ट चुनना कई बार आसान नहीं होता। खासकर तब जब आप ऐसा तोहफा देना चाहती हों जो सिर्फ महंगा या आकर्षक न हो, बल्कि आपके रिश्ते की खासियत और आपकी भावनाओं को भी जाहिर करे। ऐसे में गिफ्ट चुनते समय उनकी पसंद, जरूरत और रोजमर्रा की आदतों को ध्यान में रखना सबसे बेहतर तरीका हो सकता है।

    अगर आप ऐसा तोहफा देना चाहती हैं जिसका इस्तेमाल वह रोज कर सकें और साथ ही उससे आपकी कोई खास याद भी जुड़ी हो, तो पर्सनलाइज्ड वॉलेट और कीचेन अच्छा विकल्प हो सकता है। वॉलेट पर उनका नाम, किसी खास तारीख या तस्वीर को शामिल कराया जा सकता है। वहीं कीचेन पर दोनों के नाम के शुरुआती अक्षर या छोटा सा संदेश लिखवाकर इसे और व्यक्तिगत बनाया जा सकता है।

    यादों से जुड़ा गिफ्ट देने की इच्छा हो तो स्क्रैपबुक एक अलग और भावनात्मक विकल्प बन सकती है। इसमें रिश्ते से जुड़ी तस्वीरों के साथ पहली मुलाकात, कोई यादगार यात्रा, खास तारीख या साथ बिताए गए किसी महत्वपूर्ण पल का जिक्र किया जा सकता है। इसके साथ उनकी पसंद की चॉकलेट, छोटा सा उपयोगी सामान और हाथ से लिखा नोट रखकर सरप्राइज बॉक्स तैयार किया जा सकता है।

    अगर आपके बॉयफ्रेंड को अपने लुक और पर्सनैलिटी का ध्यान रखना पसंद है, तो उनकी पसंद की खुशबू वाला परफ्यूम और ग्रूमिंग किट भी उपयोगी तोहफा हो सकता है। गिफ्ट खरीदते समय उनकी पसंद को प्राथमिकता देना जरूरी है, क्योंकि पसंद के मुताबिक चुना गया साधारण सामान भी महंगे लेकिन बिना सोचे-समझे चुने गए तोहफे से ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

    गिफ्ट चुनने का एक और अच्छा तरीका उनकी हॉबी को समझना है। अगर उन्हें क्रिकेट पसंद है तो क्रिकेट से जुड़ी कोई उपयोगी चीज दी जा सकती है। गेमिंग पसंद करने वाले व्यक्ति के लिए गेमिंग से जुड़ा सामान, संगीत पसंद करने वाले के लिए उनकी पसंद के कलाकार या शैली से संबंधित वस्तु और किताबें पढ़ने वाले व्यक्ति के लिए उनकी रुचि की किताब बेहतर विकल्प हो सकती है।

    फिटनेस में रुचि रखने वाले बॉयफ्रेंड के लिए उनकी जरूरत के अनुसार फिटनेस एक्सेसरी भी चुनी जा सकती है। इसी तरह रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाला कोई सामान भी अच्छा गिफ्ट बन सकता है। इसका फायदा यह है कि तोहफा केवल सजावट तक सीमित नहीं रहता और लंबे समय तक उपयोग में आता है।

    गिफ्ट चुनते समय बजट को लेकर दबाव लेने की जरूरत नहीं है। किसी तोहफे की कीमत से ज्यादा उसमें शामिल व्यक्तिगत सोच महत्वपूर्ण हो सकती है। एक छोटा फोटो फ्रेम, पर्सनलाइज्ड कीचेन या हाथ से लिखा संदेश भी रिश्ते के लिए खास महत्व रख सकता है।

    तोहफा देने का तरीका भी उसे यादगार बना सकता है। किसी खास दिन डिनर के दौरान सरप्राइज देना, किसी पुरानी याद से जुड़ी जगह पर गिफ्ट देना या साधारण तरीके से हाथ से लिखा नोट साथ रखना पल को खास बना सकता है। इसलिए बॉयफ्रेंड के लिए गिफ्ट चुनते समय महंगे विकल्प तलाशने के बजाय उनकी पसंद और आपके रिश्ते से जुड़ी भावनाओं को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।

  • नियाज खान का बड़ा दावा-नाम सुनते ही मकान देने से किया इनकार, पूछा क्या हर मुसलमान आतंकवादी है?

    नियाज खान का बड़ा दावा-नाम सुनते ही मकान देने से किया इनकार, पूछा क्या हर मुसलमान आतंकवादी है?

    भोपाल । पूर्व IAS अधिकारी नियाज खान एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने देश में मुसलमानों के प्रति कथित भेदभाव और नफरत के माहौल को लेकर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए उनके पोस्ट के मुताबिक उनका दावा है कि कोई मुसलमान कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो उसे हिंदू बहुल रिहायशी इलाके में मकान लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सिर्फ धर्म की पहचान के आधार पर हर मुसलमान को आतंकवादी समझा जाना उचित है। नियाज खान इससे पहले भी धर्म और सामाजिक सौहार्द से जुड़े अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। वर्ष 2025 में भी उनके एक पोस्ट को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी जिसमें उन्होंने भारत के हिंदू और मुस्लिम समाज के बीच साझा सांस्कृतिक और आनुवंशिक जुड़ाव की बात कही थी।

    नियाज खान ने अपने ताजा बयान में दावा किया कि हिंदू परिवार कई बार मुसलमानों को अपना मकान देने से बचते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें खुद ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा है। उनके मुताबिक भोपाल के शक्तिनगर इलाके में उन्होंने एक मकान लेने की कोशिश की थी लेकिन मकान मालिक ने उनका नाम पूछने के बाद कथित तौर पर मकान देने से इनकार कर दिया। हालांकि यह उनके व्यक्तिगत अनुभव का दावा है और इससे पूरे समाज के व्यवहार के बारे में कोई सार्वभौमिक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    नियाज खान ने अपने पोस्ट में यह सवाल भी उठाया कि क्या किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान के आधार पर उसे संदेह की नजर से देखना सही है। उन्होंने मुसलमानों को लेकर बने पूर्वाग्रहों पर चिंता जताते हुए कहा कि देश के मुसलमान भी देश के प्रति उतने ही जिम्मेदार और देशभक्त हैं। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर धार्मिक पहचान और आवासीय भेदभाव को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।

    नियाज खान ने इससे पहले देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर भी सोशल मीडिया पर अपनी राय रखी थी। उन्होंने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और किसी दूसरे देश पर निर्भरता कम करने की बात कही थी। उनके मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में भारत को अपनी क्षमता पर ज्यादा भरोसा करना चाहिए।

    इसके अलावा नियाज खान ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान और अजय देवगन को लेकर भी तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने पान मसाला और गुटखा से जुड़े विज्ञापनों में फिल्मी सितारों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि ऐसे उत्पादों के प्रचार से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने दोनों अभिनेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए उन्हें जेल भेजने तक की बात कही। यह उनका व्यक्तिगत बयान और मांग है। दोनों अभिनेताओं के खिलाफ इस बयान के आधार पर किसी आपराधिक दोष का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    गौरतलब है कि तंबाकू और गुटखा विज्ञापनों को लेकर शाहरुख खान और अजय देवगन समेत कुछ बड़े फिल्मी सितारों का नाम पहले भी कानूनी बहस में आया है। वर्ष 2023 में केंद्र सरकार की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया गया था कि शाहरुख खान अक्षय कुमार और अजय देवगन को गुटखा कंपनियों से जुड़े विज्ञापनों के मामले में नोटिस जारी किए गए थे।

    नियाज खान के ताजा बयान ने एक बार फिर धर्म के आधार पर भेदभाव और सार्वजनिक जीवन में मशहूर हस्तियों की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। उनके बयानों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं लेकिन इन मुद्दों पर बहस करते समय व्यक्तिगत अनुभव और व्यापक सामाजिक स्थिति के बीच अंतर करना जरूरी है। साथ ही किसी समुदाय के बारे में सामान्यीकरण करने के बजाय घटनाओं और आरोपों को तथ्य और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर देखना ज्यादा उचित होगा।

  • जहरीली शराब ने खोला MP-गुजरात नेटवर्क का राज, 38.59% मेथनॉल वाली शराब से 9 मौतें; उज्जैन से रईस गिरफ्तार

    जहरीली शराब ने खोला MP-गुजरात नेटवर्क का राज, 38.59% मेथनॉल वाली शराब से 9 मौतें; उज्जैन से रईस गिरफ्तार


    भोपाल ।
    गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का मामला अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है। इस कांड में मौतों का आंकड़ा नौ तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है और गुजरात पुलिस की जांच में मध्य प्रदेश से जुड़े आरोपियों की भूमिका भी सामने आई है। गुजरात स्टेट मॉनिटरिंग सेल ने मध्य प्रदेश के उज्जैन से रईस को पकड़ा है। पुलिस के मुताबिक रईस पर जहरीली शराब तैयार करने वाले नेटवर्क में अहम भूमिका निभाने का आरोप है। उसे गुजरात ले जाकर पूछताछ की जा रही है।

    जांच में मुरैना निवासी नरेंद्र सिंह यादव उर्फ डॉक्टर का नाम भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक रईस को नरेंद्र के कथित अनुभव की जानकारी थी और इसी वजह से उसे गुजरात बुलाया गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार भावनगर में रईस और नरेंद्र ने स्थानीय शराब तस्कर गौतम सोलंकी के साथ मिलकर नकली शराब तैयार की। एफआईआर में आरोप है कि पहले एक खेप तैयार की गई थी लेकिन बाद की खेप में मेथनॉल मिलाकर करीब 25 कार्टन जहरीली शराब तैयार की गई। इसे अलग अलग लोगों तक पहुंचाया गया।

    इस पूरे मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस शराब को तैयार करने में नरेंद्र की भूमिका बताई जा रही है वही शराब पीने के बाद उसकी भी तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नरेंद्र को भावनगर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां 18 अगस्त को उसकी मौत हो गई। पुलिस जांच में उसे मामले के आरोपियों में शामिल किया गया है। हालांकि किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका का अंतिम निर्धारण अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

    फोरेंसिक जांच में जहरीली शराब की गंभीरता भी सामने आई है। जब्त किए गए एक नमूने में 38.59 प्रतिशत मेथनॉल पाया गया जबकि इथेनॉल की मात्रा सिर्फ 0.94 प्रतिशत थी। मेथनॉल अत्यंत जहरीला पदार्थ है और लाइसेंसी शराब में इसका इस तरह मौजूद होना सामान्य नहीं है। इसी जहरीले मिश्रण को पीने के बाद कई लोगों की हालत बिगड़ी और मौतें हुईं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि मेथनॉल कहां से खरीदा गया और तैयार की गई शराब की कितनी बोतलें अभी भी लोगों तक पहुंची हैं।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया कि रईस और उसके साथियों ने शराब बनाने के लिए कच्चा माल जुटाया था। एफआईआर के मुताबिक इसमें मेथनॉल के साथ बोतलें कैप और ब्रांडेड शराब जैसे दिखने वाले स्टीकर शामिल थे। पुलिस का आरोप है कि नकली शराब को असली ब्रांड की बोतलों जैसा रूप देकर बाजार में पहुंचाने की कोशिश की गई। गुजरात पुलिस ने अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और बड़ी मात्रा में नकली शराब रसायन तथा अन्य सामान जब्त किए हैं।

    इस मामले का मध्य प्रदेश से जुड़ना इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि मुरैना में जनवरी 2021 में जहरीली शराब कांड में 24 लोगों की मौत हुई थी। उस घटना के बाद भी अवैध शराब के नेटवर्क पर कार्रवाई की गई थी। पांच साल बाद भावनगर कांड में मुरैना के एक व्यक्ति का नाम सामने आने से अवैध शराब के अंतरराज्यीय नेटवर्क को लेकर सवाल फिर खड़े हो गए हैं। 2021 के मुरैना मामले में बाद में अदालत ने 14 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा भी सुनाई थी।

    अब गुजरात पुलिस की जांच का फोकस केवल भावनगर तक सीमित नहीं है। रईस के मध्य प्रदेश संपर्कों से लेकर शराब बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए कच्चे माल की सप्लाई और तैयार शराब के वितरण तक हर कड़ी की जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे। भावनगर की घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि अवैध और मिलावटी शराब किस तरह लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है।

  • शुक्रवार को संतोषी माता की पूजा से जुड़ी खास मान्यता, ऐसे रखें व्रत और करें विधि-विधान से पूजन

    शुक्रवार को संतोषी माता की पूजा से जुड़ी खास मान्यता, ऐसे रखें व्रत और करें विधि-विधान से पूजन


    नई दिल्ली ।
    हिंदू धार्मिक परंपरा में संतोषी माता का व्रत सुख शांति संतोष और मनोकामना पूर्ति की कामना से किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से शुक्रवार के दिन रखने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार माता संतोषी अपने भक्तों की श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होती हैं। इस व्रत में कठिन नियमों से ज्यादा मन की शुद्धता और संयम को महत्व दिया जाता है। धार्मिक परंपराओं में इस व्रत को लगातार 16 शुक्रवार तक करने का विधान भी मिलता है हालांकि अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में व्रत की अवधि को लेकर कुछ अंतर हो सकता है।

    संतोषी माता का व्रत रखने वाले श्रद्धालु शुक्रवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करके माता संतोषी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित की जाती है। पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर माता को लाल या गुलाबी फूल अर्पित किए जा सकते हैं। इसके बाद जल से भरा कलश रखा जाता है और उसके ऊपर गुड़ तथा चने से भरा पात्र रखने की परंपरा है। घी का दीपक जलाकर धूप और दीप से माता की पूजा की जाती है।

    पूजा के दौरान माता संतोषी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। संकल्प में अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत की अवधि और मनोकामना का स्मरण किया जा सकता है। इसके बाद माता को गुड़ और चने का भोग लगाया जाता है। संतोषी माता के व्रत में गुड़ और चने को विशेष प्रसाद माना जाता है। पूजा के बाद संतोषी माता की व्रत कथा पढ़ने या सुनने की परंपरा है। कथा के दौरान भक्त माता का स्मरण करते हैं और कथा पूरी होने के बाद आरती की जाती है। इसके बाद गुड़ और चने का प्रसाद परिवार और श्रद्धालुओं में बांटा जाता है।

    इस व्रत का सबसे प्रमुख नियम खट्टी चीजों से परहेज करना माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत रखने वाले व्यक्ति को शुक्रवार के दिन नींबू इमली अचार और दूसरी खट्टी वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। कुछ परंपराओं में परिवार के सदस्यों को भी उस दिन खट्टी चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। व्रत में भोजन के नियम भी अलग अलग परंपराओं के अनुसार बदल सकते हैं। कुछ लोग दिनभर निराहार रहते हैं जबकि कुछ श्रद्धालु सात्त्विक भोजन या गुड़ चना और खीर जैसे प्रसाद का सेवन करते हैं।

    संतोषी माता के व्रत में केवल भोजन से जुड़े नियमों को ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता बल्कि व्यवहार में संयम रखने पर भी जोर दिया जाता है। व्रत के दिन क्रोध से बचना किसी का अपमान न करना और मन में नकारात्मक भाव न रखना धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता और भोजन दान भी कर सकते हैं। पूजा के दौरान माता का ध्यान और कथा का श्रवण मन को एकाग्र रखने का माध्यम माना जाता है।

    जब 16 शुक्रवार का संकल्प पूरा हो जाता है तो धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रत का उद्यापन किया जाता है। उद्यापन के दिन विशेष पूजा और भोग लगाया जाता है। कुछ परंपराओं में बच्चों को भोजन कराने और उन्हें दक्षिणा या मिठाई देने का विधान बताया गया है। उद्यापन की विस्तृत विधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए किसी विशेष संकल्प के साथ व्रत शुरू करने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा या योग्य धार्मिक आचार्य से विधि जानना उचित रहता है।

    इस तरह संतोषी माता का व्रत केवल मनोकामना से जुड़ी धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि संतोष संयम श्रद्धा और सकारात्मक भाव को जीवन में अपनाने का अवसर भी माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार सच्ची श्रद्धा के साथ की गई पूजा भक्त के मन में विश्वास और शांति का भाव पैदा करती है। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित पूजा परंपराओं पर आधारित है।

  • शुक्रवार व्रत से सुख-समृद्धि की कामना, सुबह से शाम तक ऐसे करें पूजा; इन नियमों का रखें विशेष ध्यान

    शुक्रवार व्रत से सुख-समृद्धि की कामना, सुबह से शाम तक ऐसे करें पूजा; इन नियमों का रखें विशेष ध्यान

    नई दिल्ली । हिंदू धार्मिक परंपरा में शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और संतोषी माता की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत रखने से घर में सुख शांति और समृद्धि का भाव बढ़ता है। शुक्रवार को अलग अलग परंपराओं के अनुसार संतोषी माता व्रत और वैभव लक्ष्मी व्रत किया जाता है। इसलिए व्रत शुरू करने से पहले यह तय करना जरूरी है कि आप किस परंपरा के अनुसार उपवास कर रहे हैं क्योंकि दोनों की पूजा विधि और नियम अलग हो सकते हैं।

    संतोषी माता का शुक्रवार व्रत रखने वाले भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ कपड़े पहनकर पूजा की तैयारी करते हैं। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करके संतोषी माता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित की जाती है। पूजा स्थल पर कलश रखा जा सकता है और माता को लाल या गुलाबी फूल तथा लाल चुनरी अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद धूप और दीप जलाकर माता का ध्यान किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा के दौरान मन को शांत रखना और श्रद्धा के साथ माता का स्मरण करना व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    संतोषी माता के व्रत में गुड़ और चने का भोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा के दौरान गुड़ और चना माता को अर्पित किया जाता है और बाद में इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। व्रत कथा का पाठ या श्रवण भी इस पूजा का प्रमुख हिस्सा माना जाता है। कथा पूरी होने के बाद माता की आरती की जाती है और परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटा जाता है। धार्मिक परंपरा में यह व्रत अक्सर लगातार सोलह शुक्रवार तक करने का विधान बताया जाता है। हालांकि श्रद्धालु अपनी परंपरा और संकल्प के अनुसार व्रत की अवधि तय करते हैं।

    संतोषी माता के व्रत में खट्टी चीजों से परहेज करने का विशेष नियम माना जाता है। नींबू इमली अचार और अन्य खट्टे खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता। कुछ परंपराओं में व्रत करने वाले व्यक्ति के साथ परिवार के सदस्यों को भी खट्टी चीजों से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में व्रत के नियमों में अंतर हो सकता है। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा या स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार नियमों का पालन करना उचित माना जाता है।

    अगर शुक्रवार का व्रत माता लक्ष्मी के लिए रखा जा रहा है तो पूजा में लाल वस्त्र पर माता लक्ष्मी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करके फूल फल अक्षत और दीप अर्पित करने की परंपरा है। शाम के समय भी माता की पूजा और दीपदान किया जा सकता है। वैभव लक्ष्मी व्रत से जुड़ी परंपराओं में संकल्प के साथ निश्चित संख्या में शुक्रवार तक व्रत रखने और अंत में उद्यापन करने का विधान भी मिलता है। उद्यापन की विधि व्रत की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

    व्रत के दौरान केवल भोजन का त्याग ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता बल्कि संयम और सदाचार पर भी जोर दिया जाता है। क्रोध से बचना कटु वचन न बोलना और किसी के प्रति गलत भावना न रखना धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। व्रत के दिन जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है।

    इस तरह शुक्रवार व्रत को केवल मनोकामना पूरी करने का माध्यम मानने के बजाय श्रद्धा संयम और सकारात्मक दिनचर्या के रूप में करना अधिक महत्वपूर्ण है। पूजा के नियमों में क्षेत्र और परिवार के अनुसार अंतर हो सकता है इसलिए किसी विशेष संकल्प या लंबे व्रत की शुरुआत से पहले योग्य पंडित या अपनी पारिवारिक परंपरा से जानकारी लेना बेहतर रहेगा। यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और इसे आस्था से जुड़े सामान्य मार्गदर्शन के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • Aaj Ka Rashifal 21 August 2026: चंद्रमा की स्थिति बढ़ाएगी भावनात्मक हलचल, जानें सभी 12 राशियों का हाल

    Aaj Ka Rashifal 21 August 2026: चंद्रमा की स्थिति बढ़ाएगी भावनात्मक हलचल, जानें सभी 12 राशियों का हाल


    नई दिल्ली । 21 अगस्त 2026 शुक्रवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से उतार चढ़ाव से भरा रह सकता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार चंद्रमा वृश्चिक राशि में अनुराधा नक्षत्र में रहेगा। इस स्थिति को भावनात्मक रूप से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में कई लोगों को किसी फैसले पर पहुंचने से पहले अपनी भावनाओं के बजाय परिस्थितियों को समझकर आगे बढ़ने की जरूरत होगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार आज कुछ राशियों को काम और करियर में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं जबकि कुछ लोगों को आर्थिक मामलों में विशेष सावधानी बरतनी होगी।

    मेष राशि वालों के लिए दिन मेहनत का अच्छा परिणाम देने वाला रह सकता है। पुराने निवेश या पहले किए गए प्रयासों से संतोषजनक संकेत मिल सकते हैं। कामकाज में नई जिम्मेदारी मिल सकती है और परिवार से जुड़ी कोई उपलब्धि खुशी दे सकती है। हालांकि किसी बड़े आर्थिक फैसले में जल्दबाजी से बचना बेहतर रहेगा। वृषभ राशि वालों को धैर्य और निरंतरता के साथ आगे बढ़ना होगा। कारोबार से जुड़े लोगों के लिए आर्थिक बातचीत आगे बढ़ सकती है लेकिन किसी पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने से बचें।

    मिथुन राशि वालों के लिए करियर के लिहाज से अच्छी खबर मिल सकती है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अवसर मिलने के संकेत हैं। यात्रा भी लाभकारी हो सकती है। हालांकि धन से जुड़े फैसलों में सावधानी जरूरी है। कर्क राशि वालों को परिवार और काम के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। कार्यक्षेत्र में विकास का मौका मिल सकता है और वरिष्ठ लोगों की सलाह उपयोगी साबित हो सकती है। आर्थिक मामलों में सोच समझकर कदम उठाएं।

    सिंह राशि वालों के लिए आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता मजबूत रहने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में आपकी बात को महत्व मिल सकता है। किसी बड़े व्यक्ति की सलाह काम आ सकती है। कन्या राशि वालों के लिए प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। अधूरे काम पूरे करने की दिशा में प्रगति हो सकती है और नए लोगों से संपर्क भविष्य में लाभ दे सकता है।

    तुला राशि वालों के लिए दिन में कुछ अस्थायी रुकावटें आ सकती हैं लेकिन धैर्य रखने पर स्थिति संभल सकती है। आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। वृश्चिक राशि वालों में आज ऊर्जा और जोश भरपूर रह सकता है। नई योजनाओं पर काम करने की इच्छा बढ़ेगी लेकिन मनमानी या जल्दबाजी विवाद की वजह बन सकती है। इसलिए संयम के साथ फैसले लें।

    धनु राशि वालों को कार्यस्थल पर सतर्क रहना होगा। गलत जानकारी या अधूरी सूचना के आधार पर फैसला लेने से नुकसान हो सकता है। खर्चों पर नियंत्रण रखना भी जरूरी होगा। मकर राशि वालों के लिए आर्थिक योजना बनाकर आगे बढ़ना बेहतर रहेगा। मित्रों और अनुभवी लोगों का सहयोग किसी मुश्किल काम को आसान कर सकता है। कुंभ राशि वालों को नई तकनीक और नए विचारों का फायदा मिल सकता है लेकिन अनावश्यक खर्च से बचें। मीन राशि वालों के लिए दिन रचनात्मकता और आत्ममंथन का रहेगा। काम में नई दिशा मिल सकती है लेकिन आर्थिक निर्णय लेते समय विशेष सावधानी बरतना उचित होगा।

    कुल मिलाकर 21 अगस्त का दिन आत्मविश्वास के साथ संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की स्थिति अवसरों के साथ कुछ चुनौतियां भी ला सकती है। इसलिए किसी भी बड़े फैसले में जल्दबाजी के बजाय परिस्थितियों का आकलन करना बेहतर रहेगा। यह राशिफल धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय सामान्य मार्गदर्शन के रूप में देखना चाहिए।

  • भोपाल में रहवासी इलाकों की दुकानों पर सीलिंग की तैयारी, 8 हजार से ज्यादा नोटिस; व्यापारियों का विरोध तेज

    भोपाल में रहवासी इलाकों की दुकानों पर सीलिंग की तैयारी, 8 हजार से ज्यादा नोटिस; व्यापारियों का विरोध तेज


    भोपाल ।
    भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार को लेकर नगर निगम की कार्रवाई अब और सख्त होती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने शहरभर में ऐसे भवनों और संपत्तियों की पहचान शुरू की है जहां आवासीय उपयोग की अनुमति के बावजूद व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के मुताबिक 62 हजार से ज्यादा संपत्तियां जांच के दायरे में हैं और नोटिस की संख्या लगातार बढ़ रही है। 18 अगस्त तक नगर निगम की ओर से 6589 नोटिस जारी किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद भी सर्वे और नोटिस जारी करने की प्रक्रिया जारी रही।

    नगर निगम की कार्रवाई का अगला चरण सुनवाई और अंतिम आदेश से जुड़ा है। अधिकारियों के मुताबिक नोटिस मिलने के बाद संबंधित संपत्ति के दस्तावेज और वास्तविक उपयोग की जांच की जाएगी। मामले के गुण दोष के आधार पर अंतिम आदेश जारी होगा। इसके बाद यदि व्यावसायिक गतिविधि नियमों के विपरीत पाई गई और आदेश का पालन नहीं हुआ तो प्रतिष्ठान को सील करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। कुछ मामलों में अंतिम चेतावनी भी दी जा चुकी है और ऐसे प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की तैयारी है।

    इस पूरे अभियान ने भोपाल के व्यापारियों में चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि शहर के कई इलाकों में वर्षों से छोटे कारोबार चल रहे हैं और अचानक बड़े पैमाने पर सीलिंग होने से दुकानदारों के साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है। व्यापारी संगठनों ने सरकार से ऐसी नीति बनाने की मांग की है जिससे नियमों के दायरे में रहकर पुराने व्यावसायिक उपयोग को नियमित करने का रास्ता निकले। व्यापारियों की ओर से मिक्स्ड लैंड यूज और नए मास्टर प्लान को लेकर भी मांग उठाई जा रही है।

    कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़क पर भी उतर चुके हैं। रोशनपुरा चौराहे पर प्रदर्शन और चक्काजाम के दौरान कारोबारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। महिला कारोबारियों ने भी विरोध में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि ब्यूटी पार्लर क्लीनिक दुकान और दूसरे छोटे व्यवसाय बंद होने से बड़ी संख्या में लोगों की रोजी रोटी प्रभावित हो सकती है। व्यापारी संगठनों ने सरकार से व्यावहारिक समाधान निकालने की अपील की है।

    दूसरी तरफ रहवासी संगठन इस कार्रवाई के समर्थन में हैं। उनका कहना है कि आवासीय कॉलोनियों में लगातार बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से पार्किंग ट्रैफिक शोर और सुरक्षा जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। इसी वजह से कई रहवासी संगठनों ने अभियान चलाकर आवासीय क्षेत्रों में नियमों के खिलाफ कारोबार पर रोक लगाने की मांग की है। भोपाल में रहवासियों की ओर से टॉर्च मार्च भी निकाला जा चुका है और आगे भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की गई है।

    नगर निगम का सर्वे केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहने वाला है। अधिकारियों की ओर से भवन की अनुमति भूमि उपयोग और आसपास की स्थिति की भी जांच की जा रही है। मुख्य मार्गों से लेकर उनसे जुड़ी गलियों और कॉलोनियों तक सर्वे का दायरा बढ़ाया गया है। जल निकायों हरित पट्टी और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में स्थित निर्माण भी जांच के दायरे में हैं। नगर निगम का उद्देश्य यह पता लगाना है कि स्वीकृत उपयोग और मौके पर हो रही गतिविधि में कितना अंतर है।

    इस विवाद की जड़ में भोपाल की पुरानी शहरी योजना और भूमि उपयोग का सवाल भी है। व्यापारियों का कहना है कि शहर के कई हिस्सों में लंबे समय से आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां एक साथ चल रही हैं। उनका तर्क है कि मास्टर प्लान में स्पष्ट नीति बनाकर इस स्थिति का समाधान किया जा सकता है। दूसरी ओर रहवासियों का कहना है कि नियमों को नजरअंदाज कर किसी भी इलाके को धीरे धीरे बाजार में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भोपाल में आगे रास्ता क्या निकलेगा। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम पर नियमों का पालन कराने का दबाव है तो दूसरी तरफ हजारों कारोबारियों की आजीविका का सवाल है। ऐसे में सुनवाई के बाद होने वाले अंतिम आदेश और सरकार की भविष्य की शहरी नीति इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी। फिलहाल नोटिस और सर्वे के बीच भोपाल के व्यापारियों और रहवासियों की निगाह नगर निगम की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

  • त्योहारी सीजन से पहले महंगी हुई शक्कर, बढ़ते भाव पर सरकार की नजर; स्टॉक और जमाखोरी की जांच की मांग

    त्योहारी सीजन से पहले महंगी हुई शक्कर, बढ़ते भाव पर सरकार की नजर; स्टॉक और जमाखोरी की जांच की मांग


    भोपाल ।
    भोपाल में शक्कर की कीमतों में तेजी ने त्योहारी सीजन से पहले आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक बाजार में शक्कर के भाव तेजी से ऊपर जा रहे हैं और खुदरा बाजार में ग्राहकों को इसके लिए और अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। हालांकि उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों में भोपाल के थोक भाव में 19 अगस्त को करीब 2 रुपये की बढ़ोतरी के बाद कीमत 62 रुपये किलो तक पहुंचने की बात कही गई है। इसलिए अलग-अलग क्वालिटी और बाजार स्तर के हिसाब से भाव में अंतर संभव है।

    शक्कर के बढ़ते दामों का असर केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं है। किराना दुकानदारों के साथ मिठाई और खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों पर भी इसका असर पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि जब किसी जरूरी खाद्य वस्तु के भाव लगातार बदलते हैं तो दुकानदारों के लिए नया स्टॉक खरीदना और ग्राहकों को स्थिर कीमत पर माल उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाता है। वहीं ग्राहक भी बढ़े हुए भाव को लेकर सवाल करने लगे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों ने तेजी के पीछे मांग और आपूर्ति के साथ कारोबार में बढ़ती सट्टेबाजी और जमाखोरी की आशंका पर भी नजर रखने की जरूरत बताई है। हालांकि किसी कारोबारी या समूह द्वारा कृत्रिम कमी पैदा किए जाने की पुष्टि जांच के बिना नहीं की जा सकती। ऐसे में वास्तविक स्टॉक और बाजार में हो रही खरीद बिक्री के आंकड़ों की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।

    राष्ट्रीय स्तर पर भी शक्कर की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। रॉयटर्स के मुताबिक घरेलू कीमतें करीब दो महीनों में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ी हैं और उत्पादन में कमी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की आशंका ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है।

    बढ़ते भाव को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने भी कदम उठाए हैं। सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए शक्कर के स्टॉक पर सीमा लागू करने का फैसला किया है। सितंबर से नवंबर के बीच 10 टन से अधिक मासिक खपत करने वाले थोक उपभोक्ताओं को 15 दिन से अधिक का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। इससे जमाखोरी पर अंकुश लगाने और बाजार में उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

    इसके साथ ही सरकार ने 10 लाख टन कच्ची शक्कर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति भी दी है। इसका मकसद घरेलू बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति लाकर कीमतों पर दबाव कम करना है। सरकार की योजना के तहत आयात की प्रक्रिया अगस्त के अंतिम सप्ताह में शुरू होगी और अक्टूबर के अंत तक इसकी अनुमति दी गई है।

    भोपाल के बाजार में अब निगाह इस बात पर है कि आने वाले दिनों में शक्कर की सप्लाई और कीमत किस दिशा में जाती है। कारोबारियों की मांग है कि बड़े स्टॉकिस्ट और थोक व्यापारियों के स्टॉक की नियमित निगरानी हो तथा असामान्य खरीद या भंडारण की स्थिति में जांच की जाए। इससे वास्तविक कमी और कृत्रिम तेजी के बीच अंतर स्पष्ट हो सकेगा।

    फिलहाल शक्कर की कीमतों में तेजी ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि त्योहारी मांग बढ़ने के साथ आम आदमी की रसोई पर इसका कितना अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सरकार के स्टॉक नियंत्रण और आयात जैसे कदमों से बाजार में आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद है। लेकिन स्थानीय स्तर पर कीमतें कब स्थिर होंगी इसका असर सप्लाई और बाजार की गतिविधियों पर निर्भर करेगा।