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  • ट्रंप के टैरिफ से हुए नुकसान की भरपाई! एक डील से भारत कमाएगा 10 गुना, कई सेक्टर्स को फायदा

    ट्रंप के टैरिफ से हुए नुकसान की भरपाई! एक डील से भारत कमाएगा 10 गुना, कई सेक्टर्स को फायदा


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल और अगस्‍त में भारत पर 25-25 फीसदी का टैरिफ लगाया था. भारत से अमेरिका जाने वाले उत्‍पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद भारतीय निर्यात क्षेत्र को करीब 6 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था. अब भारत ने ऐसा दांव खेला है कि सिर्फ एक डील से न सिर्फ इस पूरे नुकसान की भरपाई हो जाएगी, बल्कि इस नुकसान के मुकाबले 10 गुना ज्‍यादा कमाई हो जाएगी. यह डील कल यानी 27 जनवरी को पूरी होने का अनुमान है और इससे भारत एकसाथ 27 देशों को साधने में सफल होगा.
    भारत और यूरोपीय यूनियन मुक्‍त व्‍यापार समझौते (FTA) पर 27 जनवरी को हस्‍ताक्षर कर सकते हैं. दोनों पक्षों के नेताओं ने इसे ‘मदर ऑफ आल डील’ का नाम दिया है, क्‍योंकि इस एक डील से ही भारत को यूरोप के 27 देशों में बिना शुल्‍क के कारोबार करने की अनुमति मिल जाएगी. फिलहाल यूरोपीय यूनियन की अध्‍यक्ष भारत में गणतंत्र दिवस के मौके पर बतौर मुख्‍य अतिथि मौजूद हैं. इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड को लेकर बातचीत भी हुई है और अब इस पर अंतिम मुहर लगने का इंतजार है.
    भारतीय निर्यात को कितना फायदा
    भारत और यूरोप के बीच में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होता है तो भारतीय निर्यात का ट्रेड सरप्‍लस करीब 50 अरब डॉलर बढ़ जाएगा. एमके ग्‍लोबल ने अपनी शोध में बताया है कि यह डील पूरी हुई तो वित्‍तवर्ष 2031 तक भारत का यूरोप के साथ ट्रेड सरप्‍लस 50 अरब डॉलर का हो जाएगा. वित्‍तवर्ष 2025 में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्‍सेदारी 17.3 थी, जो इस डील के बाद 2031 तक 22 से 23 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है.
    यूरोप के लिए भी फायदे की डील
    यह डील सिर्फ भारत को ही नहीं, बल्कि यूरोपीय बाजार को भी फायदा पहुंचाएगी. भले ही अभी यूरोप के निर्यात बाजार में भारत की हिस्‍सेदारी महज 0.8 फीसदी है, लेकिन वित्‍तवर्ष 2025 में यूरोप का भारत के साथ 15 अरब डॉलर का व्‍यापार घाटा रहा था. वित्‍तवर्ष 2019 में यूरोप का भारत के साथ 3 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्‍लस था. अगर यह डील पूरी होती है तो निश्चित रूप से भारत के कारोबार को और गति मिलेगी और भारत का यूरोप के साथ ट्रेड सरप्‍लस और भी ज्‍यादा हो जाएगा.

    किस सेक्‍टर को सबसे ज्‍यादा लाभ
    यूरोप के साथ फ्री ट्रेड डील पूरी होने से भारत के इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, मशीनरी और केमिकल उद्योग को सबसे ज्‍यादा लाभ मिलेगा. चालू वित्‍तवर्ष में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्‍सेदारी मामूली रूप से गिरकर 16.8 फीसदी पर आ गई है. यह अलग बात है कि इस डील से भारत के साथ यूरोप का व्‍यापार घाटा और बढ़ जाएगा. बावजूद इसके यूरोप ने रूस के ऊपर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करने और चीन की सप्‍लाई का विकल्‍प खोजने की तैयारी कर ली है. यूरोप में अभी से भारतीय रिफाइनरी के तेल, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और केमिकल की खरीद बढ़ गई है. एफटीए के बाद इसमें और बढ़ोतरी हो जाएगी.

  • छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में आजादी के बाद 41 गांवों में पहली बार मनाया जा रहा गणतंत्र दिवस

    छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में आजादी के बाद 41 गांवों में पहली बार मनाया जा रहा गणतंत्र दिवस

    रायपुर। यह खबर वाकई चौंकाने वाली है। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में माओवादी प्रभाव से मुक्त हुए 41 गांवों में गणतंत्र दिवस के अवसर पर पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा। यह कदम ‘लाल आतंक’ के अंत की लड़ाई में मिली सफलता को साफ तौर पर दर्शाती है। साथ ही यह खबर शांति एवं विकास का संकेत भी देती है।
    पुलिस महानिरीक्षक (आईजी), बस्तर रेंज, सुंदरराज पी ने बताया कि इन 41 गांवों में से 13 गांव बीजापुर जिले में, 18 नारायणपुर में और 10 सुकमा में हैं।
    गणतंत्र दिवस पूरे जोश से मनाने की तैयारी

    उन्होंने कहा, ‘‘बस्तर मंडल के 41 गांवों में पहली बार 77वां गणतंत्र दिवस पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। ये गांव दशकों से इस तरह के राष्ट्रीय समारोहों से दूर रहे थे, लेकिन अब देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक भावना में वे एक्टिव होकर भाग ले रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में इन जगहों पर सुरक्षा शिविरों की स्थापना ने स्थानीय आबादी के बीच विश्वास, सुशासन और अपनेपन की भावना जगाने में अहम भूमिका निभाई है।

    धीरे-धीरे स्थापित हो रही है शांति

    आईडी सुंदरराज पी ने कहा, ‘‘सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से यह सकारात्मक परिवर्तन संभव हो पाया है। पिछले वर्ष 13 गांवों में 15 अगस्त को पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। अब, इन 13 गांवों सहित कुल 54 गांव पहली बार गणतंत्र दिवस मनाएंगे।” सुंदरराज ने कहा कि अबूझमाड़, राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र आदि में बसवराजु, के रामचंद्र रेड्डी, सुधाकर, कट्टा सत्यनारायण रेड्डी और अन्य माओवादी कैडर को निष्क्रिय करने से क्षेत्र में चरमपंथी प्रभाव काफी कमजोर हो गया है। नक्सलियों की ताकत और उनके प्रभाव कमजोर होने से भय और धमकी की जगह धीरे-धीरे शांति, विकास और प्रशासनिक संपर्क स्थापित हो रहे हैं।
    रायपुर में राज्यपाल फहराएंगे तिरंगा

    इस बीच, एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि राज्य भर में गणतंत्र दिवस समारोह की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि राज्यपाल रमन डेका सोमवार सुबह रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और विभिन्न सुरक्षा इकाइयों से ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ (सलामी गारद) लेंगे, जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साई बिलासपुर जिले में तिरंगा फहराएंगे।

  • UGC बिल 2026 बना विवाद की वजह! सवर्ण समाज का विरोध, बृजभूषण शरण सिंह के बयान के 5 बड़े पॉइंट

    UGC बिल 2026 बना विवाद की वजह! सवर्ण समाज का विरोध, बृजभूषण शरण सिंह के बयान के 5 बड़े पॉइंट


    नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ( UGC ) की ओर से लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम- 2026’ को लेकर विवाद गहरा गया है। उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड तक विवाद की गूंज सुनाई दे रही है। सवर्ण समाज इस बिल के विरोध में खड़ा हो गया है। समानता को बढ़ावा देने और जातीय भेदभाव को खत्म करने वाले कानून को बड़े स्तर असमानता का कानून होने की दलील दी जा रही है। इसको लेकर लगातार केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले यूपी में पुलिस भर्ती परीक्षा में पेपर लीक का मामला ऐसा गरमाया था, युवा वर्ग नाराज हो गया।

    युवाओं की नाराजगी का खामियाजा उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को चुनावी रिजल्ट में भुगतना पड़ा। युवा वर्ग को नाराज करने का जोखिम सरकार लेने के मूड में नहीं दिख रहा है। वहीं, कानून को लेकर जब पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अभी इसका अध्ययन कर रहा हूं। जो बोलूंगा, सोच-समझकर बोलूंगा। इससे साफ है कि सीनियर भाजपा नेता भी इस मामले में कोई भी बयान देने से बचते दिख रहे हैं।
    1. क्यों हो रहा है विरोध?
    यूजीसी की ओर से यूनिवर्सिटी और कॉलेज स्तर पर जातीय भेदभाव को खत्म करने के लिए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू किया गया हैं। 15 जनवरी 2026 से यह रेगुलेशन पूरे देश में यूजीसी से संबद्ध सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों प्रभावी हुआ है। सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों और समूहों ने इसके लागू होने के बाद ही विरोध शुरू किया था। दरअसल, नए रेगुलेशन में ओबीसी को भी जातीय भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया।

    एससी और एसटी छात्रों को पहले से ही कई अधिकार मिले हुए थे। वे भी इस दायरे में आ गए हैं। नए कानून के तहत इनके साथ-साथ ओबीसी छात्र, शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी भेदभाव और उत्पीड़न की शिकायत सक्षम पदाधिकारी के समक्ष दर्ज करा सकते हैं।

    2. नए कोषांग के गठन के निर्देश
    यूजीसी ओर से लागू किए गए रेगुलेशन के तहत यूनिवर्सिटी और कॉलेज स्तर पर नए कोषांग का गठन किया जाना है। समान अवसर प्रकोष्ठ का गठन हर संस्थान में एससी, एसटी और ओबीसी छात्र, शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों के लिए किया जाना है। यूनिवर्सिटी लेवल पर समानता समिति होगी। इसमें एससी, एसटी के साथ-साथ ओबीसी, महिला और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिध सदस्य के तौर पर शामिल किए जाने हैं। हर छह माह में यह समिति रिपोर्ट तैयार कर यूजीसी को भेजेगी। इसके आधार पर यूनिवर्सिटी और कॉलेज की स्थिति को मापा जाएगा।

    3. सवर्ण समाज का विरोध क्यों?
    मामले में सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस कानून में कोई भी एससी, एसटी, ओबीसी छात्र, शिक्षक या शिक्षकेतर कर्मचारी हमारे खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके बाद हमें अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। बड़े स्तर पर इस नियम का दुरुपयोग किया जा सकता है। विश्वविद्यालयों में कुलपति और कॉलेजों में प्राचार्य सभी छात्रों की शिकायतों पर जब सुनवाई करते हैं तो फिर नई व्यवस्था से असमानता ही फैलेगी। सवर्ण वर्ग को अलग-थलग किए जाने की साजिश के तौर पर इस कानून को पेश किया जा रहा है।

    सवर्ण समाज की ओर से अपनी बात को उठाने के लिए यूनवर्सिटी स्तर पर फोरम तैयार किए गए हैं। इन फोरम का कहना है कि ओबीसी को यूनवर्सिटी में एडमिशन में आरक्षण 1990 से मिल रहा है। फैकल्टी नियुक्तियों में आरक्षण की व्यवस्था वर्ष 2010 से है। ऐसे में नए कानून से सवर्ण समाज को और अधिक दबाने की कोशिश की जा रही है।

    4. यति नरसिंहानंद से गरमाया विवाद
    मामले को लेकर पिछले दिनों डासना देवी मंदिर के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देने की योजना बनाई। इसके लिए वे लाव-लश्कर के साथ गाजियाबाद से निकले तो दिल्ली बॉर्डर पर उन्हें रोक दिया गया। उन्होंने इस मुद्दे पर कहा कि हर वर्ग की बात हो रही है, लेकिन ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ, भूमिहार और अन्य सवर्ण समाज के लोगों की बात क्यों नहीं की जा रही। उनके हितों की बात कहां होगी। अगर उनके साथ कुछ गलत होता है तो वे कहां पर शिकायत करेंगे। इस प्रकार के कानून उच्च शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक माहौल को खराब करेंगे।

    5. कानून वापस लिए जाने की चर्चा
    यूजीसी कानून का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चुनावी साल से पहले विरोध को गहराता देख अब यूजीसी के स्तर पर इस कानून को लेकर विचार होने की बात कही जा रही है। माना जा रहा है कि यूजीसी इस कानून को वापस ले सकता है। इसके कड़े विरोध ने सरकार को अपनी इस नीति पर दोबारा विचार करने को मजबूर किया है।

  • लखनऊ में THAR के पहियों के नीचे 25 मिनट तक फंसा रहा कारोबारी, चीख-पुकार सुन बचाने दौड़े लोग

    लखनऊ में THAR के पहियों के नीचे 25 मिनट तक फंसा रहा कारोबारी, चीख-पुकार सुन बचाने दौड़े लोग

    नई दिल्ली।लखनऊ के पॉश इलाके विभूति खंड में एक थार गाड़ी ने कारोबारी पवन पटेल को कुचल दिया. यह हादसा तब हुआ जब आरोपी चालक कार को आगे-पीछे कर रहा था. इस दौरान पवन पटेल के दोनों पैर गाड़ी के पहियों के नीचे फंस गए और वह करीब 25 मिनट तक वहीं दबे रहे. मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने अफरा-तफरी के बीच कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला.

    सूचना पाकर घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने गंभीर रूप से घायल कारोबारी को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया. पुलिस ने इस मामले में दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

    25 मिनट तक पहियों के नीचे मची चीख-पुकार
    हादसे के वक्त मौके पर काफी भीड़ जमा हो गई थी. बताया जा रहा है कि थार के नीचे दबे पवन पटेल दर्द से तड़पते रहे, लेकिन उन्हें निकालना आसान नहीं था. करीब 25 मिनट की कड़ी जद्दोजहद के बाद स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें गाड़ी के नीचे से निकाला जा सका. घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है और कारोबारी की हालत फिलहाल गंभीर बनी हुई है.

    पुलिस की कार्रवाई और हादसे की वजह

    विभूति खंड पुलिस के मुताबिक, यह हादसा गाड़ी को बैक या आगे करने के दौरान लापरवाही की वजह से हुआ. इस मामले में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दो आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. पुलिस घटना के हर पहलू की जांच कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि क्या यह महज एक दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई और वजह थी.

  • जानिए आज सोमवार का राशिफल

     

    मेष :अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। पठन पाठन में स्थिति कमजोर रहेगी। किसी से वाद-विवाद अथवा कहासुनी होने का भय रहेगा। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। जल्दबाजी में कोई भूल संभव है। आय-व्यय समान्य रहेगा। शुभांक-5-7-9

    वृष : बुरी संगति से बचें। आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। लेन-देन में अस्पष्टता ठीक नहीं। दूसरों के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप न करें। निर्मूल शंकाओं के कारण मनस्ताप भी पैदा हो सकते है। भय तथा शत्रुहानि की आशंका रहेगी। एकाकी प्रवृति का त्याग करें। शुभांक-3-5-7

    मिथुन: कारोबार के विस्तार का मानस बनेगा। शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। मन प्रसन्न बना रहेगा। अचल संपति की खरीद अथवा कृषि उद्यम में रुचि पैदा होगी। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। व्यापार व व्यवसाय में स्थिति उत्तम रहेगी। शुभांक-2-4-6

    कर्क : नये-नये व्यापारिक अनुबंध होंगे। मित्रों से सावधानी रखें तो ज्यादा उत्तम है। शारीरिक सुख के लिए व्यसनों का त्याग करें। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। मान-सम्मान में वृद्घि होगी। हरि करे सो खरी इसीलिए पूरे मनोयोग से कार्य करें। यात्रा योग हैं। शुभांक-5-7-9

    सिंह : कार्यक्षेत्र में खुशनुमा माहौल बनेगा। मध्याह्न पूर्व समय आपके पक्ष का रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने के प्रयास होंगे। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। पर-प्रपंच में ना पड़कर अपने काम पर ध्यान दीजिए। शुभांक-2-5-8

    कन्या : भावनाओं का उद्वेग बढ़ेगा। जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। हित के काम में आ रही बाधा मध्याह्न पश्चात् दूर हो जाएगी। अपने काम आसानी से बनते चले जाएंगे। संतान पक्ष की समस्या समाप्त होगी। आपसी प्रेम-भाव में बढ़ोतरी होगी।

    शुभांक-3-5-7

    तुला : योजना क्रियान्वन के लिए समय अच्छा व सकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। जीवन साथी अथवा यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। सफलता मिलेगी। सुनियोजित तरीके से कार्यारम्भ करें। शुभांक-2-5-7

    वृश्चिक : व्यवसाय में प्रतिद्वंद्वी परेशान कर सकते हैं। समय व्ययकारी सिद्घ होगा। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। आध्यात्मिक रुचि बनेगी। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। कार्य सफल होगें। शुभांक-4-5-7

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    धनु: लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। धार्मिक यात्रा का योग बना है। शुभांक-3-6-8

    मकर: सैर-सपाटे में समय व्यतीत होगा। मान-सम्मान में वृद्घि होगी। अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। अपने हित के काम सुबह-सबेरे ही निपटा लें। शुद्घ गोचर का लाभ। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। यात्रा प्रवास का सार्थक परिणाम मिलेगा। आर्थिक लाभ के किये कार्यों का तत्काल प्रतिफल मिलेगा। शुभांक-4-6-8

    कुंभ : मनोरंजन के साधनों पर धन-व्यय होगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। कामकाज में आ रही बाधा दूर होगी। लेन-देन में आ रही बाधा को दूर करने के प्रयास सफल होंगे। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। स्त्री का सहयोग मिलेगा। शुभांक-2-5-8

    मीन : कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। सुबह-सुबह की महत्वपूूर्ण सिद्घि के बाद दिन-भर उत्साह रहेगा। किसी लाभदायक कार्य के लिए व्ययकारक स्थितियां पैदा होगी। अल्प-परिश्रम से ही लाभ होगा। नियोजित धन से लाभ होने लगेगा। आर्थिक स्थिति सुधरेगी। शुभांक-2-4-6

  • Republic Day Special: डेढ़ लीटर दूध के दाम में 10 ग्राम सोना! 76 सालों में कितना बदल गया भारत

    Republic Day Special: डेढ़ लीटर दूध के दाम में 10 ग्राम सोना! 76 सालों में कितना बदल गया भारत

    नई दिल्ली। आज अगर आपके गुल्लक में या आलमारी के किसी कोने में 25 पैसे का सिक्का है तो आप उससे कुछ नहीं खरीद सकते, लेकिन आजादी के समय, पहले गणतंत्र दिवस के समय आप इससे 1 लीटर दूध, 1 लीटर पेट्रोल भरवा सकते थे. जिसमें आज एक लीटर दूध मिलता है, उतने ही रुपये में आप आजादी के वक्त 10 ग्राम सोना खरीद सकते थे. जितने में आज एक लीटर दूध खरीदते हैं, उतने में 4 बार आप दिल्ली से मुंबई ट्रेन से सफर कर सकते थे. आबादी बढ़ी और साथ में महंगाई भी. अगर एक नजर साल 1950 से साल 2026 तक के सफर में डाले तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि महंगाई का आलम कितना है.

    साल 1950 से लेकर साल 2026 तक का सफर
    आजादी के समय देश की जनसंख्या सिर्फ 34 करोड़ थी. पहली बार जब 1951 में जनगणना हुई तो उस वक्त देश की आबादी 34 करोड़ से बढ़कर 36 करोड़ हो गई थी. आज भारत की आबादी 140 करोड़ के ऊपर पहुंच गई है. आबादी के साथ देश की अर्थव्यवस्था भी बढ़ी, देश की जीडीपी में विस्तार देखने को मिली. 1950 से लेकर अब तक भारत की जीडीपी 55 गुना से अधिक बढ़ चुकी है. 1950 में भारत की अर्थव्यवस्था करीब 2.7 लाख करोड़ की थी, जो साल 2026 में बढ़कर 4.51 ट्रिलियन पर पहुंच गई है

    1950 में कितने का था सोना-चांदी
    सोने-चांदी की बात करें तो भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था. लोगों के घरों में सोने-चांदी के जेवरों की ढ़ेर लगे थे. आज भी दुनिया के कई देशों की जीडीपी से ज्यादा सोना भारत के घरों में है, जो कई पीढ़ियों से चली आ रही है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक भारत के घरों में 25 हजार टन से ज्यादा सोना है. अगर कीमत की बात करें तो साल 1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस के मौके पर सोने की कीमत 99 रुपये प्रति 10 ग्राम थी. इससे पहले आजादी के वक्त 1947 में सोना मात्र 89 रुपये प्रति 10 ग्राम का बिक रहा था. आज साल 2026 में सोने की कीमत 155000 रुपये प्रति 10 ग्राम को पार कर गया है. चांदी की बात करें तो उस वक्त 1 किलो चांदी 100-159 रुपये में मिल जाती थी. 10 ग्राम चांदी के लिए के लिए 1 रुपये से 1.50 रुपये तक खर्च करना पड़ता था. आज उतनी ही चांदी खरीदने के लिए आपको साढ़े 3 लाख रुपये चाहिए.

    1950 से अब तक कितना महंगा हुआ तेल

    1950 से लेकर अब तक पेट्रोल की कीमत 300 गुना बढ़ चुकी है. 1951 के मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट के गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन डेटा के मुताबिक उस समय देश में 3 लाख गाड़ियां रजिस्टर्ड थीं. 1947 में पेट्रोल की कीमत 27 पैसे प्रति लीटर था, जो 1950 में 30 पैसे पर पहुंच गया था. आज 2026 में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत औसत रूप से 100 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है.

    76 सालों में रेल किराया कितना महंगा हुआ

    भारत में पहली ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को चली थी. 76 सालों में रेल यात्रियों की संख्या जिस तेजी से बढ़ी उतनी ही तेजी से रेल किराया भी. 1951 से लेकर अब तक रेल किराए में 30 गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई. 1950-51 में रेलवे हर एक किमी पर 1.5 पैसा किराया वसूलती थी जो साल 2018-19 में बढ़कर 44 पैसे से ऊपर पहुंच गई. रेलवे ने हाल ही में प्रति किलोमीटर में रेल किराए में 2 पैसा प्रति किमी की बढ़ोतरी कर दी है.

    डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का हाल

    1947 में आजादी के वक्त 1 डॉलर की वैल्यू 1 रुपए के बराबर थी. साल 1950 में डॉलर के मुकाबले रुपया काफी मजबूत था और इसकी वैल्यूएशन $1 = ₹4.76 थी. आज डॉलर के मुकाबले रुपया 92 रुपये पर पहुंच गया है. कर्तव्य पथ बनेगा ‘पावर पथ’, 77वें गणतंत्र दिवस पर दुनिया देखेगी भारत के अर्जुन-ब्रह्मोस का दम

  • ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी का कहर: एक महीने में 8 मौतें, अमेरिका में विद्रोह क्यों भड़का?

    ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी का कहर: एक महीने में 8 मौतें, अमेरिका में विद्रोह क्यों भड़का?

    नई दिल्ली।  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां ने विदेशों में ही नहीं अमेरिका के अंदर भी उथल-पुथल मचा रखा है. अमेरिका के अंदर से अवैध प्रवासियों को निकालने के लिए डोनाल्ड ट्रंप सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी अपना रहे हैं लेकिन इसे अंजाम देने की कोशिश में ट्रंप के एजेंट सीमा लांघते नजर आ रहे हैं. उनपर अमेरिकियों को ही गोली मारकर मौत के घाट उतारने का आरोप लग रहा है. अमेरिका में मिनेसोटा के मिनियापोलिस में अमेरिका में इमिग्रेशन एजेंटों (ICE) की गोली से एक और शख्स की मौत हो गई है और वहां तनाव बढ़ गया है.

    यह घटना जनवरी में हुई ऐसी पांच गोलीबारी में से एक थी, जिसमें अवैध प्रवासियों को खोजने वाले वाले फेडरल एजेंट शामिल थे. इससे पहले मिनेसोटा की महिला रेनी गुड की भी ICE एजेंटों ने गोली मारकर जान ले ली थी. इतना ही नहीं रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार इस महीने अवैध प्रवासियों को रखे जाने वाले फेडरल हिरासत केंद्र में कम से कम छह अप्रवासियों की मौत हो गई है, जो असामान्य रूप से काफी अधिक है.

    अमेरिका में अब क्या हुआ है?
    शनिवार को फेडरल इमिग्रेशन एजेंटों ने एक और अमेरिकी नागरिक एलेक्स प्रेट्टी की हत्या कर दी, जो ICU नर्स थे. कुछ हफ्ते पहले ही मिनियापोलिस में ICE अधिकारियों ने 37 साल की एक महिला, रेनी गुड को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था. इसके बाद इलाके में यह दूसरी हत्या है.

    एजेंट की कार्रवाई पर ट्रंप सरकार ने क्या कहा?
    अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ICE की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा था कि वह सेल्फ डिफेंस था. डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने प्रेट्टी के पास से मिला एक पिस्तौल की ओर इशारा किया है. डोनाल्ड ट्रम्प ने विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी पर ही “अराजकता” पैदा करने का आरोप लगाया है जिसके कारण संघीय एजेंटों के हाथों दो अमेरिकियों की मौत हो गई है. राष्ट्रपति ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर यह भी दावा किया कि डेमोक्रेट के कंट्रोल वाले शहर और राज्य ICE के साथ सहयोग करने से इनकार कर रहे हैं और “वास्तव में वामपंथी आंदोलनकारियों को उनके कार्यों में गैरकानूनी रूप से बाधा डालने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं”.

    असल में वीडियो में क्या दिखा था?
    वायरल हो रहे वीडियो में प्रेट्टी बर्फ से ढकी सड़क पर एजेंटों को फिल्माते और ट्रैफिक को कंट्रोल करते हुए दिख रहे हैं. एक वीडियो में ICE अधिकारी को एक महिला प्रदर्शनकारी को फुटपाथ पर जमीन पर धकेलते हुए देखा गया. इसके बाद प्रेट्टी उनके बीच आ जाते हैं और एजेंट के चेहरे पर एक केमिकल इरिटेंट स्प्रे कर देता है. इसके बाद एजेंट, प्रेट्टी को जमीन पर खींच लेता है और कई अधिकारी उसे बर्फ वाली सड़क पर हिरासत में लेने की कोशिश करने लगते हैं. इस बीच जैसे ही एक अधिकारी को लगता है कि प्रेट्टी के पास बंदूक है, वह उसके पैंट से बंदूक निकालता है कि तभी दूसरा एजेंट प्रेट्टी पर गोली चला देता है. इसके बाद ICE अधिकारी दूर से उसके बेजान शरीर पर कई बार गोली चलाते हैं.

    ट्रंप सरकार के खिलाफ अमेरिका में क्या हो रहा?
    ट्रंप सरकार की सख्त कार्रवाई के कारण मिनेसोटा राज्य में व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं. यहां ट्रंप सरकार से ऑर्डर मिलने के बाद ICE का ऑपरेशन छह सप्ताह से अधिक समय से चल रहा है. इहां सरकार ने इसे एक सार्वजनिक सुरक्षा अभियान बताया है, जिसका उद्देश्य देश में अवैध रूप से अपराधियों को निर्वासित करना है. लेकिन आलोचकों का कहना है कि उन प्रवासियों को भी निशाना बनाया जा रहा है जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और अमेरिकी नागरिकों को भी हिरासत में लिया जा रहा है. इसी महीने 2 अमेरिकी नागरिकों की कार्रवाई में मौत के बाद लोगों का गुस्सा अलग लेबल पर पहुंच गया है.

    ट्रंप सरकार पर कैसे दबाव बढ़ रहा है?
    मिनियापोलिस में एलेक्स प्रेट्टी की हत्या की पूरी तरह से जांच करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप की सरकार पर दबाव बढ़ गया है. पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ने हत्या को “एक दिल दहला देने वाली त्रासदी” कहा है. उन्होंने कहा कि पार्टी की परवाह किए बिना यह घटना हर अमेरिकी के लिए एक अलार्म है कि एक राष्ट्र के रूप में कई मूल मूल्यों पर तेजी से हमला हो रहा है. पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भी कहा है कि अमेरिका एक ऐतिहासिक क्षण का सामना कर रहा है जो आने वाले वर्षों में इसे आकार देगा और उन्होंने अमेरिकियों से बोलने और “यह दिखाने का आग्रह किया है कि हमारा देश अभी भी हम लोगों का है”.

    विपक्षी पार्टी ही नहीं, ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के अंदर से भी आवाज उठने लगी है. हाउस होमलैंड सुरक्षा समिति के रिपब्लिकन अध्यक्ष एंड्रयू गारबेरिनो ने ICE समेत इमिग्रेशन से जुड़े सभी एजेंसियों के टॉप अधिकारी से गवाही मांगी है और कहा है, “मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता अमेरिकियों को सुरक्षित रखना है”. कई अन्य कांग्रेसी रिपब्लिकन भी मामले में अधिक जानकारी के लिए दबाव डाल रहे हैं. इनमें टेक्सास के प्रतिनिधि माइकल मैककॉल और उत्तरी कैरोलिना के सीनेटर थॉम टिलिस, लुइसियाना के बिल कैसिडी, मेन के सुसान कोलिन्स और अलास्का के लिसा मुर्कोव्स्की शामिल हैं.

    मिनेसोटा राज्या और स्थानीय एजेंसियों ने भी इस मामले में मुकदमा दायर कर दिया है. इसके बाद एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने एक आपातकालीन आदेश जारी किया है जिसमें अधिकारियों को एलेक्स प्रेट्टी की मौत से संबंधित सभी सबूतों को संभाल कर रखने को कहा गया है

  • अटारी-वाघा बॉर्डर पर मिठास पर ब्रेक, भारत-पाक जवानों के बीच नहीं होगा मिठाई का आदान-प्रदान

    अटारी-वाघा बॉर्डर पर मिठास पर ब्रेक, भारत-पाक जवानों के बीच नहीं होगा मिठाई का आदान-प्रदान

    नई दिल्ली।  अटारी-वाघा बॉर्डर पर नहीं मिलेगी मिठास! भारत-पाक जवानों के बीच नहीं होगा मिठाई का आदान-प्रदान2019 में जम्मू और कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर युद्धविराम उल्लंघन की बढ़ती घटनाओं के कारण भारत ने बीटिंग रिट्रीट परंपरा को छोड़ने का फैसला किया था. सितंबर 2016 में भारतीय सेना द्वारा सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बीएसएफ ने पाकिस्तान रेंजर्स को मिठाइयां नहीं दी थीं.
    इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर वाघा बॉर्डर पर भारत और पाकिस्तान के बीच मिठाई एक्सचेंज करने की परंपरा नहीं निभाई जाएगी. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से बने नियमों के तहत बीएसएफ (BSF) और पाक रेंजर्स के जवान न तो हाथ मिलाएंगे और न ही सरहद का गेट खोला जाएगा. बॉर्डर पर दोपहर 2.50 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू होंगे और शाम 4.30 बजे दोनों देशों के जवान अपने-अपने क्षेत्र में परेड करेंगे.

    कई बार तोड़ी गई मिठाई आदान-प्रदान की परंपरा
    जनवरी 2025 (गणतंत्र दिवस) यानी पिछले साल भी सीमा पर जारी घुसपैठ की कोशिशों और सुरक्षा कारणों से बीएसएफ (BSF) ने पाकिस्तान को मिठाई देने से मना कर दिया था. भारत द्वारा अनुच्छेद 370 (Article 370) को निष्प्रभावी किए जाने के बाद पाकिस्तान ने कड़ा विरोध जताया था. तनाव इतना अधिक था कि दोनों ओर से कोई मिठाई नहीं बांटी गई थी.

    जनवरी 2017 और 2018 में नियंत्रण रेखा (LoC) पर पाकिस्तान द्वारा लगातार किए जा रहे संघर्ष विराम उल्लंघन (Ceasefire Violations) और भारतीय सैनिकों की शहादत के विरोध में बीएसएफ ने परंपरा को तोड़ा था. वहीं अक्टूबर 2016 में उरी हमले के बाद भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) के कारण दिवाली के मौके पर मिठाई का आदान-प्रदान नहीं हुआ था. इसके अलावा अक्टूबर 2014 में दिवाली के दौरान सीमा पर भारी गोलाबारी के चलते बीएसएफ ने पाकिस्तान को मिठाई देने से इनकार कर दिया था.

    कहां है वाघा बॉर्डर
    बता दें कि अटारी-वाघा जॉइंट चेक पोस्ट अमृतसर से लगभग 30 किमी और पाकिस्तान के लाहौर से 22 किमी दूर है, जहां करीब 25,000 दर्शक बीटिंग रिट्रीट समारोह को देखने आते हैं.

  • छत्तीसगढ़ के जांबाजों का सम्मान: 77वें गणतंत्र दिवस पर 10 पुलिसकर्मियों को मिलेगा 'सराहनीय सेवा पदक'

    छत्तीसगढ़ के जांबाजों का सम्मान: 77वें गणतंत्र दिवस पर 10 पुलिसकर्मियों को मिलेगा 'सराहनीय सेवा पदक'


    रायपुर । 77वें गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 के गौरवशाली अवसर पर छत्तीसगढ़ पुलिस के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य के 10 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रतिष्ठित मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस यानी सराहनीय सेवा पदक के लिए चुना है। यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों प्रदान किया जाएगा। यह पदक उन जांबाजों को दिया जा रहा है जिन्होंने अपनी कर्तव्यनिष्ठा, साहस और कार्यकुशलता से राज्य की कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में मिसाल पेश की है।

    इन 10 जांबाजों के नाम सराहनीय सेवा पदक

    सराहनीय सेवाओं के लिए चयनित अधिकारियों की सूची में वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर जमीनी स्तर पर तैनात जांबाज शामिल हैं ध्रुव गुप्ता: आईजी पुलिस मुख्यालय रायपुर। प्रशांत ठाकुर: डीआईजी एवं एसएसपी, सूरजपुर। श्वेता राजमणी: कमांडेंट, 19वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल जगदलपुर। रवि कुमार कुर्रे पुलिस अधीक्षक जिला कोरिया। कौशिल्या भट्ट: निरीक्षक पुलिस मुख्यालय, रायपुर। रोहित कुमार झा: सहायक महानिरीक्षक पुलिस मुख्यालय, रायपुर। कमलेश कुमार मिश्रा: निरीक्षक विशेष शाखा, पुलिस मुख्यालय। दल सिंह नामदेव: प्लाटून कमांडर। महेन्द्र कुमार पाठक: उप निरीक्षक जिला नारायणपुर।मनोज कुमार साहू: सहायक उप निरीक्षक जिला बस्तर। क्यों दिया जा रहा है यह सम्मान

    चयनित पुलिसकर्मियों ने अपने करियर के दौरान कई चुनौतीपूर्ण मोर्चों पर खुद को साबित किया है नक्सल मोर्चे पर सफलता: कई अधिकारियों ने बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियानों और शांति बहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रशासनिक सुधार पुलिस मुख्यालय में तैनात अधिकारियों को उनकी अनुकरणीय कार्यशैली और संगठनात्मक सुधारों के लिए सम्मानित किया जा रहा है। अनुशासन और समर्पण: यह पदक उन कर्मियों को मिलता है जिनकी सेवा का रिकॉर्ड दागमुक्त और संसाधनपूर्ण रहा हो।

    राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पदक

    सराहनीय सेवा पदकों के अलावा, छत्तीसगढ़ के डीजी जेल हिमांशु गुप्ता को ‘विशिष्ट सेवाओं’ के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जाएगा, जो पुलिस सेवा का सर्वोच्च सम्मान है।

  • गणतंत्र दिवस 2026: छत्तीसगढ़ के खाकी वीरों का सम्मान, डीजी हिमांशु गुप्ता समेत 25 अधिकारियों को राष्ट्रपति पदक

    गणतंत्र दिवस 2026: छत्तीसगढ़ के खाकी वीरों का सम्मान, डीजी हिमांशु गुप्ता समेत 25 अधिकारियों को राष्ट्रपति पदक


    रायपुर। गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर छत्तीसगढ़ पुलिस और जेल विभाग के लिए दोहरी खुशी की खबर सामने आई है। राज्य के 25 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक से नवाजा जाएगा। इनमें जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता का नाम प्रमुखता से शामिल है, जिन्हें ‘विशिष्ट सेवाओं’ के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही, राज्य के 14 जांबाज पुलिसकर्मियों को वीरता पुरस्कार देने की भी घोषणा की गई है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और चुनौतीपूर्ण अभियानों में उनके अदम्य साहस का प्रमाण है।

    राज्यपाल प्रदान करेंगे सम्मान

    इन सभी सम्मानित अधिकारियों और कर्मियों को सोमवार, 26 जनवरी 2026 को रायपुर के पुलिस परेड मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका द्वारा राष्ट्रपति पदक प्रदान किए जाएंगे।

    प्रमुख सम्मान और नामचीन चेहरे

    केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची के अनुसार, छत्तीसगढ़ के पुलिस बेड़े में इन नामों की धूम है विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक: * हिमांशु गुप्ता जेल सुधारों और लंबी विशिष्ट सेवा के लिए।सराहनीय सेवाओं के लिए पदक प्रमुख नाम ध्रुव गुप्ता आईजी अअवि पुलिस मुख्यालय। प्रशांत ठाकुर डीआईजी एवं एसएसपी सूरजपुर।श्वेता राजमणी सेनानी, 19वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल छसबल जगदलपुर। रवि कुमार कुर्रे: एसपी कोरिया। कौशिल्या भट्ट निरीक्षक पुलिस मुख्यालय। रोहित कुमार झा: सहायक उपनिरीक्षक पुलिस मुख्यालय। कमलेश कुमार मिश्रा: निरीक्षक, विशेष शाखा पुलिस मुख्यालय।

    14 जांबाजों को वीरता पुरस्कार

    इस वर्ष छत्तीसगढ़ के 14 पुलिसकर्मियों को वीरता पदक से सम्मानित किया जाना राज्य की सुरक्षा रणनीति के लिए बड़ी उपलब्धि है। ये पुरस्कार विशेष रूप से उन जवानों को दिए जा रहे हैं जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अद्वितीय शौर्य का प्रदर्शन किया है।

    गौरवशाली क्षण

    गणतंत्र दिवस पर मिलने वाले ये पदक न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण पर राष्ट्रीय मुहर हैं। विभाग में इस घोषणा के बाद उत्साह का माहौल है और इसे युवा पुलिसकर्मियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।