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  • ट्रंप की सबसे बड़े विरोधी से फिर यारी! कभी कोर्ट में खिलाफ गवाही देने वाले कोहेन के शो में पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति

    ट्रंप की सबसे बड़े विरोधी से फिर यारी! कभी कोर्ट में खिलाफ गवाही देने वाले कोहेन के शो में पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके पूर्व करीबी सहयोगी माइकल कोहेन के बीच सालों पुरानी कड़वाहट अब कम होती नजर आ रही है। कभी ट्रंप के खिलाफ अदालत में अहम गवाही देने वाले कोहेन के रेडियो शो में ट्रंप पहुंचे। बातचीत के दौरान दोनों के बीच पुरानी तल्खी की जगह दोस्ताना अंदाज दिखाई दिया। कोहेन ने पुराने दिनों को याद करते हुए ट्रंप को फिर ‘बॉस’ कहकर संबोधित किया।

    कभी ट्रंप के लिए सबकुछ करने को तैयार थे कोहेन

    माइकल कोहेन लंबे समय तक ट्रंप के बेहद करीबी माने जाते थे। करीब 15 साल तक दोनों साथ रहे। उस दौर में कोहेन खुद को ट्रंप का बेहद वफादार बताते थे। लेकिन 2018 में दोनों के रिश्तों में बड़ी दरार आ गई।

    जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद कोहेन ने ट्रंप के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 2019 में अमेरिकी कांग्रेस के सामने भी गवाही दी और ट्रंप से जुड़े कई मामलों पर अपनी बात रखी।

    हश-मनी केस में ट्रंप के खिलाफ गवाही

    2024 में कोहेन ट्रंप के हश-मनी मामले में अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाह बने। उन्होंने दावा किया कि 2016 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले ऐसी जानकारियों को सार्वजनिक होने से रोकने की कोशिश की गई थी, जो ट्रंप के चुनाव अभियान के लिए नुकसानदेह हो सकती थीं।

    इस मुकदमे में ट्रंप को 34 मामलों में दोषी ठहराया गया। कोहेन की गवाही केस की अहम कड़ी रही। दूसरी तरफ कोहेन खुद भी कानूनी मामलों में फंसे और कई आरोपों में दोष स्वीकार करने के बाद उन्हें तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई।

    किताब में ट्रंप पर लगाए थे गंभीर आरोप

    कोहेन ने 2020 में प्रकाशित अपनी किताब में ट्रंप पर तीखे आरोप लगाए थे। उन्होंने ट्रंप को बेहद चालाक और लोगों को प्रभावित करने वाला व्यक्ति बताया था। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने संकेत दिया था कि पुराने रिश्ते और भावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई थीं।

    बाद में कोहेन ने अपने रुख में बदलाव करते हुए दावा किया कि ट्रंप के खिलाफ गवाही देने के दौरान जांच एजेंसियों ने उन पर दबाव बनाया था। ट्रंप ने भी कोहेन के इन बयानों को सोशल मीडिया पर साझा किया था।

    एक साल से फिर हो रही थी बातचीत

    कोहेन ने बताया कि पिछले करीब एक साल से दोनों के बीच कई बार बातचीत हुई है। उनका कहना है कि दोनों ने पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि माफी का मतलब अतीत को मिटा देना नहीं है, बल्कि आगे बढ़ना है।

    रेडियो शो का माहौल भी दोनों के बदले रिश्ते की झलक दे रहा था। कार्यक्रम में दोस्ती और दोबारा साथ आने की थीम वाले गाने बजाए गए।

    कोहेन ने फिर मांगी सजा में राहत

    कोहेन ने यह भी बताया कि उन्होंने व्हाइट हाउस में अपनी सजा माफी की अर्जी दोबारा भेजी है। पहले उनकी अर्जी खारिज हो चुकी है। अब उन्होंने नए सिरे से राहत की मांग की है और जल्द ही इस संबंध में फिर संपर्क करने की बात कही है।

    कभी ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले कोहेन और उनके ‘बॉस’ का दोबारा दोस्ताना अंदाज अमेरिकी राजनीति में रिश्तों के बदलते समीकरण की नई तस्वीर पेश कर रहा है।

  • सावन में नॉनवेज क्यों छोड़ते हैं लोग, जानिए धार्मिक मान्यता के साथ मानसून और खाद्य सुरक्षा से जुड़े प्रमुख कारण

    सावन में नॉनवेज क्यों छोड़ते हैं लोग, जानिए धार्मिक मान्यता के साथ मानसून और खाद्य सुरक्षा से जुड़े प्रमुख कारण

    नई दिल्ली ।सावन का महीना शुरू होते ही देश के कई हिस्सों में लोग खानपान में बदलाव करते हैं। बहुत से परिवारों में इस दौरान मांस, मछली, चिकन और अंडे से दूरी बनाई जाती है। कुछ लोग प्याज और लहसुन का सेवन भी छोड़ देते हैं। आमतौर पर इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसके पीछे जीवनशैली, संयम, जीवदया और मानसून के दौरान खाद्य सुरक्षा जैसे पहलुओं को भी समझा जा सकता है।

    हिंदू परंपरा में सावन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु व्रत रखते हैं, पूजा करते हैं और ध्यान तथा धार्मिक गतिविधियों में समय देते हैं। धार्मिक दृष्टि से साधना के समय भोजन में सादगी और संयम को महत्व दिया जाता है। इसी सोच के तहत कई लोग मांसाहार छोड़कर हल्का और सात्त्विक भोजन अपनाते हैं।

    सात्त्विक भोजन की अवधारणा ताजे, पौष्टिक और अपेक्षाकृत हल्के भोजन से जुड़ी है। इसका उद्देश्य केवल खानपान को बदलना नहीं, बल्कि इंद्रियों पर नियंत्रण और मन को शांत रखने की साधना से भी जोड़ा जाता है। हालांकि धार्मिक ग्रंथों में सावन के दौरान हर व्यक्ति के लिए मांसाहार पूरी तरह प्रतिबंधित होने का सीधा निर्देश नहीं मिलता। यह परंपरा धार्मिक आचार, स्थानीय मान्यताओं और लंबे समय से चली आ रही जीवनशैली का हिस्सा बनी है।

    सावन चातुर्मास की अवधि में भी आता है। परंपरागत रूप से यह समय तप, व्रत, दान और आत्मसंयम के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। वर्षा ऋतु में साधु-संतों द्वारा यात्राएं सीमित करने की परंपरा भी रही है। इसे मौसम की कठिन परिस्थितियों के साथ-साथ छोटे जीवों को अनजाने में नुकसान से बचाने की भावना से भी जोड़ा जाता है।

    बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है और कई प्रकार के सूक्ष्मजीवों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। मांस, मछली, चिकन और अंडे जैसे खाद्य पदार्थ जल्दी खराब होने वाले होते हैं। इनके सुरक्षित भंडारण और उचित तापमान पर रखे जाने की जरूरत होती है। कच्चे मांस को गलत तरीके से रखने या संभालने पर उसमें मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीव दूसरे खाद्य पदार्थों तक भी पहुंच सकते हैं।

    मानसून में जलभराव, दूषित पानी, अस्वच्छ बाजार और बिजली आपूर्ति में बाधा जैसी परिस्थितियां खाद्य पदार्थों की स्वच्छता को प्रभावित कर सकती हैं। पुराने समय में रेफ्रिजरेशन और सुरक्षित परिवहन की सुविधाएं सीमित थीं। ऐसे वातावरण में जल्दी खराब होने वाले भोजन से दूरी बनाना व्यावहारिक सावधानी भी रही होगी।

    हालांकि विज्ञान यह नहीं कहता कि सावन के महीने में मांसाहार अपने आप हानिकारक हो जाता है। बीमारी का जोखिम मुख्य रूप से भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, भंडारण और पकाने की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। यदि मांस या मछली ताजा हो, उचित तापमान पर रखी गई हो और पूरी तरह पकाई जाए तो संक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है।

    इसी तरह यह दावा भी सही नहीं है कि सावन में हर व्यक्ति की पाचन शक्ति निश्चित रूप से कमजोर हो जाती है। उमस, कम शारीरिक गतिविधि, अनियमित खानपान और बहुत अधिक तला या मसालेदार भोजन कुछ लोगों में अपच और भारीपन बढ़ा सकता है, लेकिन इसका प्रभाव व्यक्ति की स्थिति और खानपान पर निर्भर करता है।

    इसलिए सावन में नॉनवेज खाना या छोड़ना व्यक्तिगत आस्था, पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकताओं पर निर्भर कर सकता है। धार्मिक दृष्टि से इसे संयम और जीवदया का माध्यम माना जाता है, जबकि स्वास्थ्य की दृष्टि से मानसून में भोजन की स्वच्छता और सुरक्षित रखरखाव पर विशेष ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।

    सावन की इस परंपरा को केवल डर या बीमारी से जोड़कर देखने के बजाय इसके व्यापक भाव को समझना जरूरी है। इसमें कुछ समय के लिए स्वाद और इच्छाओं पर नियंत्रण, सादगी अपनाने, प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने और भोजन को लेकर सावधानी बरतने की भावना शामिल है।

  • 82 लाख की जमीन 18 लाख में रजिस्ट्री का आरोप, कटनी की DSP नेहा पच्चीसिया सहित 3 पर FIR

    82 लाख की जमीन 18 लाख में रजिस्ट्री का आरोप, कटनी की DSP नेहा पच्चीसिया सहित 3 पर FIR


    कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी में पदस्थ सीएसपी नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विभागीय जांच रिपोर्ट के बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मामला हत्या के एक आरोपी के परिवार की बेशकीमती जमीन के कथित दबाव में कराए गए सौदे से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज और मारूफ अहमद के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। कटनी एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने FIR की पुष्टि की है।

    82.86 लाख की जमीन 18.20 लाख में रजिस्ट्री का आरोप

    शिकायत और विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, सरकारी गाइडलाइन के अनुसार जमीन की कीमत 82 लाख 86 हजार रुपए थी। आरोप है कि इसकी रजिस्ट्री महज 18 लाख 20 हजार रुपए में कराई गई। दस्तावेजों में 15 लाख रुपए चेक और 3.20 लाख रुपए नकद भुगतान का उल्लेख है।

    मामला कुठला थाना क्षेत्र में एक युवक की हत्या के केस से जुड़ा है। इस मामले में आकाश लोधी को मुख्य आरोपी बनाया गया था। गिरफ्तारी के बाद डिफॉल्ट जमानत पर बाहर आए आकाश ने जमीन के सौदे को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।

    DSP पर परिवार पर दबाव बनाने का आरोप

    आकाश लोधी का आरोप है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद DSP नेहा पच्चीसिया ने उसके परिवार पर जमीन बेचने के लिए दबाव बनाया। उसने दावा किया कि उसके पिता रमेश लोधी को दो दिन तक DSP के घर पर बैठाकर रखा गया। इसके बाद सरकारी वाहन से ग्राम कन्हवारा स्थित करीब 2.15 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री कराई गई।

    आकाश के मुताबिक, जमीन की गाइडलाइन कीमत करीब 82 लाख रुपए थी, जबकि सौदा 1 करोड़ 7 लाख रुपए में तय किया गया था। आरोप है कि रजिस्ट्री के समय सिर्फ 15 लाख रुपए का चेक दिया गया और बाकी 92 लाख रुपए सात दिन में देने की बात कही गई।

    रकम नहीं मिली तो CM हेल्पलाइन में शिकायत

    आरोप के मुताबिक, बाकी रकम नहीं मिलने पर रमेश लोधी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की। उन्होंने जमीन के नामांतरण पर भी आपत्ति जताई। इसके बाद रमेश लोधी और उनके दामाद को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने का भी आरोप लगाया गया।

    शिकायत के बाद जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और IPS अधिकारी अनु बेनीवाल को जांच सौंपी गई। जांच में जमीन के सौदे, रजिस्ट्री और रकम के लेनदेन से जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल की गई।

    बैंक खाते में ट्रांसफर हुए 15 लाख रुपए

    जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के मुताबिक, जमीन के खरीदार मारूफ अहमद हनफी के खाते में 15 लाख रुपए क्षितिज राज के खाते से ट्रांसफर किए गए थे। शिकायत में क्षितिज राज को नेहा पच्चीसिया का कथित पार्टनर और संबंधी बताया गया है।

    जांच में कथित तौर पर यह भी देखा गया कि आपराधिक मामले की जांच के दौरान रमेश लोधी पर जमीन कम कीमत में बेचने का दबाव बनाया गया या नहीं।

    पहले भी विवादों में रही हैं नेहा पच्चीसिया

    DSP नेहा पच्चीसिया इससे पहले भी शिकायतों और विवादों को लेकर चर्चा में रही हैं। एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी की कथित अवैध वसूली की शिकायत के बाद कटनी एसपी ने उनके ड्राइवर केशव सिंह को सस्पेंड किया था। साथ ही DSP से तीन थानों का प्रभार भी वापस लिया गया था।

    इसके अलावा हत्या के एक मामले में समय पर चालान पेश नहीं होने के कारण आरोपी को डिफॉल्ट बेल मिलने का मामला भी विभागीय जांच के दायरे में आया था। इसी मामले में आरोपी ने नेहा पच्चीसिया के खिलाफ न्यायालय में परिवाद पेश कर जमीन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे।

    अब पुलिस जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर

    लगातार सामने आई शिकायतों के बाद जबलपुर रेंज के आईजी के निर्देश पर मामलों की जांच कराई गई। विभागीय जांच और शिकायतों के आधार पर अब कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज और मारूफ अहमद के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

    फिलहाल पुलिस जमीन के सौदे, कथित दबाव और बैंक खातों के जरिए हुए लेनदेन की जांच कर रही है। FIR में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

  • MP में नर्मदा-मंदाकिनी खतरे के निशान के पार, कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात, आज भारी बारिश का अलर्ट

    MP में नर्मदा-मंदाकिनी खतरे के निशान के पार, कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात, आज भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय स्ट्रॉन्ग सिस्टम के कारण डिंडौरी, पन्ना, रीवा, सतना, छतरपुर समेत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। नर्मदा और मंदाकिनी समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। मैहर में आज सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है, जबकि डिंडौरी में आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे।

    16 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम विभाग ने निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर समेत 16 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में अगले 24 घंटे में 4 से 8 इंच तक बारिश होने का अनुमान है। इसके अलावा ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, दमोह, पन्ना, सीधी और सिवनी में भी भारी बारिश की चेतावनी है। भोपाल समेत कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

    मऊगंज में नदी उफनी, एक मजदूर बहा

    मऊगंज में अष्टभुजा नदी के उफान पर आने से नईगढ़ी गांव में बाढ़ की स्थिति बन गई। अमृत योजना के निर्माण कार्य में लगे चार मजदूर फंस गए, जिनमें से एक तेज बहाव में बह गया। बताया गया कि वह करीब दो घंटे तक मदद के लिए गुहार लगाता रहा।

    उमरिया में भी एक बुजुर्ग के बाढ़ में बहने की खबर है। डिंडौरी में भारी बारिश के कारण आंगनवाड़ी से लेकर 12वीं तक के स्कूल बंद रहे। खरमेर नदी का पानी पुल के ऊपर आने से डिंडौरी-मंडला स्टेट हाईवे पर आवागमन बंद हो गया।

    चित्रकूट में बाजार तक पहुंचा मंदाकिनी का पानी

    चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी बाजार तक पहुंच गया। सड़कों पर पानी भरने के कारण नाव चलानी पड़ी। गुप्त गोदावरी की दोनों गुफाओं को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। रीवा के निराला नगर हॉस्टल समेत नौ इलाकों में जलभराव से घरों और दुकानों में रखा सामान प्रभावित हुआ है।

    MP में अब तक 23.6 इंच बारिश

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, मानसून ट्रफ समेत अन्य सिस्टम सक्रिय होने से पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश हो रही है। 20 से 24 अगस्त के बीच बारिश का असर धीरे-धीरे मध्य और पश्चिमी हिस्सों की ओर बढ़ने के संकेत हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 599 मिमी यानी 23.6 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य बारिश 675.1 मिमी यानी 26.6 इंच के मुकाबले यह करीब 3 इंच कम है। प्रदेश में अब तक 11% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में 11% और पश्चिमी हिस्से में 12% बारिश सामान्य से कम है।

    39 जिलों में अब भी बारिश का घाटा

    प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से 4% से 58% तक कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का घाटा 19% तक है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी सामान्य से 5% से 39% तक कम बारिश हुई है।

    इसके उलट अनूपपुर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • 10 साल से बेटे के अगले गुरुवार का इंतजार, अब आश्रम ही परिवार; भारत भवन की कलाकार की कहानी ने झकझोरा

    10 साल से बेटे के अगले गुरुवार का इंतजार, अब आश्रम ही परिवार; भारत भवन की कलाकार की कहानी ने झकझोरा


    भोपाल  भोपाल के अपना घर वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की जिंदगी बाहर से भले ही सामान्य नजर आए लेकिन उनके भीतर कई ऐसी कहानियां दबी हैं जो रिश्तों और बदलते पारिवारिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। हाल ही में आश्रम में रहने वाले 70 वर्षीय घनश्याम की मौत के बाद जब उनके चारों बच्चे अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे तो वहां रहने वाले दूसरे बुजुर्ग भी भावुक हो गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक घनश्याम का निधन 4 अगस्त 2026 को हुआ था। आश्रम प्रबंधन ने परिवार के आने का इंतजार किया लेकिन कोई नहीं पहुंचा। आखिरकार पुलिस की मदद से उनका अंतिम संस्कार कराया गया।

    घनश्याम की कहानी भी संघर्ष से भरी रही। वह इंदौर में टायर और ट्यूब का कारोबार करते थे और उन्होंने अपने चार बच्चों को पालने के लिए जीवनभर मेहनत की। बुजुर्गावस्था में वह भोपाल के अपना घर वृद्धाश्रम में रहने लगे। उनके निधन के बाद परिवार से संपर्क किया गया लेकिन किसी के नहीं पहुंचने पर दो दिन तक उनके शव को इस उम्मीद में रखा गया कि शायद कोई अपना अंतिम विदाई देने आ जाए। परिवार की ओर से अंतिम संस्कार आश्रम से कराने की बात कही गई। इस घटना ने आश्रम में रह रहे दूसरे बुजुर्गों के भीतर अपने भविष्य को लेकर चिंता पैदा कर दी।

    इसी आश्रम में रहने वाली 80 वर्षीय अंजली श्रीवास्तव की कहानी भी बेहद भावुक कर देने वाली है। अंजली को करीब एक दशक से आश्रम में रहते हुए बताया गया है। उन्होंने एक पुराने प्रसंग को याद करते हुए कहा कि जब उन्हें मोतियाबिंद की समस्या थी तब एक मिठाई कारोबारी उन्हें मंदिर के पास से उठाकर आश्रम छोड़ गया था। कुछ समय बाद उनका बेटा उनसे मिलने आया और अगले गुरुवार को वापस आने की बात कही। वह गुरुवार फिर कभी नहीं आया। अंजली की यह कहानी इंतजार और उम्मीद के उस दर्द को सामने लाती है जिसमें बुजुर्ग वर्षों तक अपनों के लौटने की राह देखते रहते हैं। वर्ष 2022 की एक रिपोर्ट में भी अंजली श्रीवास्तव ने बताया था कि वह अपना घर वृद्धाश्रम में करीब 11 वर्षों से रह रही थीं।

    आश्रम में रहने वाली रानी चंद्र सक्सेना की जिंदगी भी कभी कला और सम्मान से जुड़ी थी। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने भारत भवन से जुड़कर रंगमंच पर काम किया और रंग निर्देशक बाबा कारंत के साथ कई नाटकों में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने आकाशवाणी और दूरदर्शन में समाचार वाचक के तौर पर भी काम किया। उनके पति सरकारी मत्स्य विभाग में वरिष्ठ पद पर रहे थे। आज उनकी जिंदगी का एक बड़ा सहारा उनका बेटा है जो विदेश में रहता है लेकिन दूरी और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण रानी ने करीब 15 वर्ष पहले आश्रम को अपना ठिकाना बना लिया।

    रानी का कहना है कि अब आश्रम ही उनका परिवार है। उन्हें यह उम्मीद नहीं है कि विदेश में रहने वाला बेटा उनके पास लौटकर आएगा। उन्होंने आश्रम संचालिका माधुरी मिश्रा को अपने अंतिम समय की जिम्मेदारी भी सौंप दी है। यह बात केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं बल्कि उन अनेक बुजुर्गों की स्थिति को सामने लाती है जो उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच चुके हैं जहां उन्हें सबसे ज्यादा अपनेपन और सहारे की जरूरत होती है।

    अपना घर वृद्धाश्रम की संचालिका माधुरी मिश्रा के मुताबिक कोई भी बुजुर्ग खुशी से अपना घर नहीं छोड़ता। उनके अनुसार कई बुजुर्ग परिस्थितियों से मजबूर होकर आश्रम पहुंचते हैं। जब किसी बुजुर्ग की मृत्यु के बाद परिवार का कोई सदस्य नहीं आता तो वहां रहने वाले दूसरे लोगों को भी अपने भविष्य की चिंता सताने लगती है। भोपाल में वर्षों से बुजुर्गों की सेवा कर रहा यह आश्रम अब कई लोगों के लिए केवल रहने की जगह नहीं बल्कि उनका अंतिम सहारा और परिवार बन चुका है।

    इन कहानियों का सबसे बड़ा संदेश यही है कि बुजुर्गों को केवल आर्थिक मदद नहीं बल्कि समय अपनापन और सम्मान भी चाहिए। जिंदगी की भागदौड़ में परिवार कितना भी दूर क्यों न हो जाए लेकिन माता पिता के जीवन के आखिरी पड़ाव पर उनकी मौजूदगी और संवेदनशीलता सबसे बड़ी जरूरत बन जाती है।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीथमपुर में दो बड़े उद्योगों का किया उद्घाटन, धार में निवेश और रोजगार को मिलेगी नई गति

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीथमपुर में दो बड़े उद्योगों का किया उद्घाटन, धार में निवेश और रोजगार को मिलेगी नई गति

    मध्य प्रदेश: के धार जिले के पीथमपुर में औद्योगिक विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में एडवांस ऑप्टिकल फाइबर और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स का उद्घाटन किया गया। इन दोनों औद्योगिक इकाइयों के शुरू होने से प्रदेश में निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार, इन उद्योगों से 30 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है।

    पीथमपुर लंबे समय से मध्य प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल रहा है और अब यहां नई तकनीक से जुड़े उद्योगों के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। ऑप्टिकल फाइबर निर्माण से दूरसंचार और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़े क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जबकि बैटरी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट ऊर्जा भंडारण और आधुनिक औद्योगिक जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों क्षेत्रों में भविष्य में मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए इन संयंत्रों की शुरुआत को औद्योगिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

    उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नए उद्योगों की स्थापना से मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। उन्होंने औद्योगिक निवेश को प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे राज्य के विकास के साथ देश की आर्थिक प्रगति को भी गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए किए गए समझौतों को अब जमीन पर उतारने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने धार जिले के औद्योगिक बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीते एक महीने के दौरान वह दूसरी बार इस क्षेत्र में आए हैं और इससे पहले भी कई उद्योगों का लोकार्पण किया गया था। उनके मुताबिक, पिछले समय में किए गए कई समझौते अब वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं में बदल रहे हैं। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी तेज हो रही हैं।

    धार जिले को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र कभी पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था, लेकिन अब औद्योगिक विकास की वजह से इसकी तस्वीर बदल रही है। जनजातीय बहुल धार और पीथमपुर क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ने वाले इलाकों में शामिल हो रहे हैं। औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से स्थानीय कारोबार, परिवहन, निर्माण, सेवा और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

    ऑप्टिकल फाइबर और बैटरी निर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश को राज्य के औद्योगिक विस्तार के साथ तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं को नए प्रकार के कौशल और रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही उद्योगों के आसपास सहायक इकाइयों और सेवा क्षेत्र के विस्तार की संभावना भी बनेगी।

    सरकार का जोर प्रदेश में बड़े निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ रोजगार आधारित औद्योगिक विकास पर है। पीथमपुर में शुरू हुए दोनों प्लांट इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं। आने वाले समय में इन परियोजनाओं से उत्पादन बढ़ने और रोजगार के अवसरों में विस्तार होने की उम्मीद है। इससे धार जिले की औद्योगिक पहचान और मजबूत होने के साथ मध्य प्रदेश के आर्थिक विकास को भी नई गति मिल सकती है।

  • तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस पर आमने-सामने आए दोनों गुट, कार्यक्रम की अनुमति को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा मामला

    तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस पर आमने-सामने आए दोनों गुट, कार्यक्रम की अनुमति को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा मामला

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन के भीतर चल रहा विवाद अब 28 अगस्त को होने वाले स्थापना दिवस कार्यक्रम को लेकर खुलकर सामने आ गया है। तृणमूल छात्र परिषद के दो गुटों ने मध्य कोलकाता के मेयो रोड स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगी है। एक ही स्थान और एक ही दिन कार्यक्रम की मांग किए जाने से दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

    तृणमूल छात्र परिषद का स्थापना दिवस हर वर्ष 28 अगस्त को मनाया जाता है। इस अवसर पर मेयो रोड पर रैली और सभा का आयोजन किया जाता रहा है। इस बार पार्टी से जुड़े दो छात्र गुटों की अलग-अलग गतिविधियों के कारण स्थापना दिवस का कार्यक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।

    ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति के लिए अदालत का रुख किया जा चुका है। संबंधित याचिका पर सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध भी किया गया। इसके बाद दूसरे गुट ने भी इसी स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं मिलने का हवाला देते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट भी 28 अगस्त को मेयो रोड पर कार्यक्रम आयोजित करना चाहता है। इस गुट की ओर से कोलकाता पुलिस से रैली की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया।

    अदालत ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया और इसे अगले शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध किया है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी समर्थक गुट की याचिका पर पहले ही सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस वजह से अब दोनों पक्षों की नजर अदालत के अगले रुख पर टिकी हुई है।

    मामले का मुख्य प्रश्न यह है कि क्या दोनों गुटों को एक ही स्थान पर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी जा सकती है या फिर प्रशासन और अदालत की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था तय की जाएगी। एक ही दिन और एक ही स्थान पर दो कार्यक्रम होने की स्थिति में कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी विचार करना होगा।

    मेयो रोड का स्थान तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस कार्यक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में स्थान को लेकर दोनों पक्षों की दावेदारी ने संगठन के भीतर चल रहे मतभेद को और स्पष्ट कर दिया है। पहले से मौजूद राजनीतिक खींचतान के बीच छात्र संगठन का यह विवाद अब न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है।

    फिलहाल अदालत के फैसले और प्रशासन की अनुमति पर आगे की तस्वीर निर्भर करेगी। दोनों गुट अपने-अपने कार्यक्रम को लेकर सक्रिय हैं, जबकि 28 अगस्त की तारीख नजदीक आने के साथ विवाद के समाधान को लेकर भी दबाव बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि स्थापना दिवस का आयोजन किस व्यवस्था के तहत होगा और क्या दोनों पक्षों को अलग-अलग कार्यक्रम के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।

  • सरस्वती विहार हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार ने सफदरजंग अस्पताल में ली अंतिम सांस, लंबे समय से जेल में थे बंद

    सरस्वती विहार हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार ने सफदरजंग अस्पताल में ली अंतिम सांस, लंबे समय से जेल में थे बंद

    नई दिल्ली ।1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को निधन हो गया। वह तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे सज्जन कुमार की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन के बाद परिवार के सदस्य अस्पताल पहुंचे।

    जानकारी के अनुसार, जेल में सज्जन कुमार के शरीर में कोई हलचल नहीं मिलने के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जांच की और उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके बेटे जग प्रवेश कुमार भी निधन की जानकारी मिलने के बाद सफदरजंग अस्पताल पहुंचे।

    सज्जन कुमार 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े कई मामलों में लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई का सामना करते रहे। दिल्ली के सरस्वती विहार इलाके में 1 नवंबर 1984 को हुए पिता-पुत्र की हत्या के मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था। इस घटना में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरनदीप सिंह की हत्या हुई थी।

    इस मामले में सज्जन कुमार पर हिंसा के दौरान भीड़ को उकसाने का आरोप था। अदालत ने उन्हें दंगा करने, गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने, हत्या और अन्य संबंधित अपराधों की धाराओं के तहत दोषी माना था। मामले की सुनवाई के दौरान घटना से जुड़े कई पहलुओं पर विचार किया गया और इसके बाद उन्हें दोषी करार दिया गया।

    फरवरी 2025 में दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने सज्जन कुमार को इस मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा के बाद उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया, जहां वह अपनी सजा काट रहे थे। 1984 के दंगों से जुड़े मामलों में यह उनके खिलाफ सुनाई गई महत्वपूर्ण सजा में शामिल थी।

    इससे पहले भी सज्जन कुमार को 1984 के दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में दोषी ठहराया जा चुका था। वर्ष 2018 में उन्हें पांच सिखों की हत्या और एक धार्मिक स्थल को आग लगाए जाने से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इस दोषसिद्धि के बाद उनके राजनीतिक जीवन को भी बड़ा झटका लगा था।

    सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने 1970 के दशक में राजनीति की शुरुआत की। शुरुआती दौर में वह दिल्ली नगर निगम के पार्षद बने और बाद में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव की जिम्मेदारी संभाली। धीरे-धीरे दिल्ली की राजनीति में उनका प्रभाव बढ़ता गया और वह कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए।

    सज्जन कुमार वर्ष 1980, 1991 और 2004 में लोकसभा सांसद चुने गए। वह संजय गांधी के करीबी नेताओं में माने जाते थे। कई वर्षों तक उन्होंने दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और कांग्रेस के भीतर महत्वपूर्ण राजनीतिक पहचान बनाई।

    वर्ष 2018 में 1984 के सिख विरोधी दंगों में दोषसिद्धि के बाद उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उनका सार्वजनिक जीवन मुख्य रूप से दंगा मामलों में चल रही न्यायिक प्रक्रिया और सजा से जुड़ा रहा।

    सज्जन कुमार के निधन के साथ उनके लंबे राजनीतिक सफर और 1984 के दंगा मामलों से जुड़े कानूनी घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। उनके निधन की खबर के बाद परिवार और समर्थकों के बीच शोक का माहौल है।

  • राजीव गांधी की जयंती पर वीर भूमि पहुंचे सोनिया, राहुल और प्रियंका, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

    राजीव गांधी की जयंती पर वीर भूमि पहुंचे सोनिया, राहुल और प्रियंका, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

    नई दिल्ली ।भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर गुरुवार को देशभर में उन्हें याद किया गया। 20 अगस्त को मनाए जाने वाले इस अवसर को सद्भावना दिवस के रूप में भी जाना जाता है। दिल्ली स्थित वीर भूमि पर राजीव गांधी की समाधि पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वीर भूमि पहुंचकर राजीव गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित किए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री के राजनीतिक जीवन, विचारों और देश के विकास में उनके योगदान को याद किया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के जरिए पूर्व प्रधानमंत्री को याद करते हुए उनके योगदान को नमन किया। इसके अलावा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित अन्य नेताओं ने भी राजीव गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था। वह देश के ऐसे प्रधानमंत्री रहे, जिन्होंने अपेक्षाकृत कम उम्र में यह जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी ने देश की बागडोर संभाली और 40 वर्ष की उम्र में भारत के प्रधानमंत्री बने। वह 1984 से 1989 तक इस पद पर रहे।

    राजीव गांधी के कार्यकाल को भारत में तकनीक, संचार, शिक्षा और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए भी याद किया जाता है। उनके समर्थक उन्हें युवा भारत की बदलती जरूरतों और तकनीकी विकास के साथ देश को आगे बढ़ाने वाले नेताओं में शामिल करते हैं। उनके राजनीतिक विचारों में युवाओं की भागीदारी और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर रहा।

    कांग्रेस नेताओं ने जयंती के अवसर पर राजीव गांधी की उस विरासत को भी रेखांकित किया, जिसमें युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने और देश में आधुनिक तकनीकी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया था। मतदान की न्यूनतम उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष करने का संवैधानिक बदलाव भी उनके प्रधानमंत्रित्व काल की महत्वपूर्ण पहलों में गिना जाता है। इससे बड़ी संख्या में युवाओं को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिला।

    राजीव गांधी का राजनीतिक जीवन हालांकि उपलब्धियों के साथ-साथ कई विवादों और चुनौतियों से भी जुड़ा रहा। प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद भी वह राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे। 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी सभा के दौरान आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई थी।

    राजीव गांधी की जयंती पर होने वाले कार्यक्रम हर वर्ष उनकी सार्वजनिक और राजनीतिक विरासत को याद करने का अवसर बनते हैं। वीर भूमि पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे नेताओं ने उनके योगदान को स्मरण करते हुए देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, तकनीकी प्रगति और युवाओं की भूमिका से जुड़े उनके विचारों को रेखांकित किया। इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का एक साथ पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि देना उनके राष्ट्रीय राजनीतिक जीवन की व्यापक पहचान को भी दर्शाता है।

  • उत्तर प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने से मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, जननी सुरक्षा योजना के तहत सात लाख से अधिक प्रसव

    उत्तर प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने से मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, जननी सुरक्षा योजना के तहत सात लाख से अधिक प्रसव

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए चल रही जननी सुरक्षा योजना का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई दे रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से नौ अगस्त तक प्रदेश में 7,17,736 संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए हैं। योजना का उद्देश्य महिलाओं को घर पर प्रसव के बजाय सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के लिए प्रोत्साहित करना है।

    जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने वाली पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह सहायता 1,400 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 1,000 रुपये निर्धारित है। इस आर्थिक सहयोग का उद्देश्य प्रसव से जुड़े खर्चों में सहायता देना और महिलाओं को सुरक्षित स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना है।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक अप्रैल से नौ अगस्त के बीच दर्ज कुल 7,17,736 संस्थागत प्रसवों में से 5,43,661 लाभार्थियों को योजना की राशि का भुगतान किया जा चुका है। इस तरह बड़ी संख्या में महिलाओं तक योजना का प्रत्यक्ष लाभ पहुंचा है। विभाग का जोर अब बाकी पात्र लाभार्थियों का भुगतान जल्द पूरा करने पर है।

    प्रदेश के कई जिलों में योजना के क्रियान्वयन और लाभार्थियों को भुगतान पहुंचाने में बेहतर प्रदर्शन सामने आया है। हाथरस, मैनपुरी, फिरोजाबाद, हरदोई, कानपुर देहात, मुजफ्फरनगर, बागपत, जौनपुर, अम्बेडकरनगर और सोनभद्र में 80 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों का भुगतान किया जा चुका है।

    पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में योजना की प्रगति से यह संकेत मिलता है कि संस्थागत प्रसव को लेकर जागरूकता बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच, सुरक्षित प्रसव और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    सुरक्षित मातृत्व के लिए केवल अस्पताल में प्रसव कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रसव के दौरान जरूरी चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध होना भी महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य संस्थानों में प्रशिक्षित चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, दवाएं, रक्त की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाएं जरूरत के अनुसार मिल सकती हैं। प्रसव के दौरान किसी जटिलता की स्थिति में समय पर पहचान और उपचार से मां तथा नवजात दोनों के स्वास्थ्य जोखिम को कम किया जा सकता है।

    इस व्यवस्था को मजबूत करने में आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के फील्ड कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ये कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जांच के लिए प्रेरित करने, सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में सहयोग करते हैं।

    स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सिद्धार्थनगर, बहराइच और अलीगढ़ में लाभार्थियों के भुगतान की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही है। इन जिलों में 50 प्रतिशत या उससे कम भुगतान होने की जानकारी सामने आई है। संबंधित अधिकारियों को भुगतान में आ रही बाधाओं को दूर कर पात्र लाभार्थियों को शत प्रतिशत राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    उत्तर प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने की यह पहल मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। अस्पतालों में प्रसव बढ़ने से जटिल मामलों में समय पर चिकित्सा सहायता मिलने की संभावना बढ़ती है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य योजना की पहुंच को और व्यापक बनाते हुए भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाना और सुरक्षित प्रसव की सुविधा को अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचाना है।