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  • मुरादाबाद: 5 मुस्लिम छात्राओं ने हिंदू छात्रा को सड़क पर घेरकर जबरन बुर्का पहनाया, भाई ने लगाया धर्मांतरण का आरोप FIR दर्ज

    मुरादाबाद: 5 मुस्लिम छात्राओं ने हिंदू छात्रा को सड़क पर घेरकर जबरन बुर्का पहनाया, भाई ने लगाया धर्मांतरण का आरोप FIR दर्ज



    मुरादाबाद। यूपी के मुरादाबाद में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें 5 मुस्लिम छात्राओं पर एक हिंदू नाबालिग छात्रा को जबरन बुर्का पहनाने का आरोप लगा है। घटना 20 दिसंबर की बताई जा रही है, लेकिन पीड़िता के भाई ने 22 जनवरी को पुलिस में FIR दर्ज कराई।

    पीड़िता और आरोपी छात्राएं सभी 12वीं की छात्राएं हैं और एक ही स्कूल तथा कोचिंग में पढ़ती हैं। आरोप है कि कोचिंग से निकलने के बाद आरोपित छात्राओं ने छात्रा को सड़क पर घेर लिया, उसके बैग से बुर्का निकाला और उसे पहनाने पर मजबूर किया।

    भाई ने लगाया बड़ा आरोप: “इस्लाम कबूल करने से किस्मत बदलेगी”
    पीड़िता के भाई ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि शुरुआत में दोस्ती के बहाने आरोपी छात्राओं ने उसकी बहन का ब्रेनवॉश किया और उसे बार-बार इस्लाम अपनाने के लिए उकसाया। उसने दावा किया कि उसकी बहन के मन में हिंदू धर्म के प्रति नकारात्मक भाव पैदा किए गए।

    भाई ने बताया कि 11वीं में दोस्ती बढ़ी और धीरे-धीरे बहन ने परिवार की बात नहीं सुननी शुरू कर दी। 20 दिसंबर को ट्यूशन के बाद आरोपी छात्राओं ने उसे रोककर बुर्का पहनाया और उसका वीडियो/फोटो भी लिया जा सकता है।

    मामले में FIR दर्ज, जांच जारी
    पुलिस ने 5 आरोपी छात्राओं के खिलाफ आईपीसी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें छात्रा को बुर्का पहनाते हुए देखा गया है।

    भाई का दावा: पीछे साजिश है
    पीड़िता के भाई का कहना है कि यह सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि धर्मांतरण की साजिश है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि किसी संगठन द्वारा छात्राओं को उकसाकर हिंदू नाबालिगों को धर्म बदलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
    भाई ने यह भी कहा कि ट्यूशन टीचर ने सबसे पहले बहन को बुर्का पहनाने की जानकारी दी थी और बाद में जब बहन से पूछा गया तो वह डरकर कुछ नहीं बताई।

  • यूपी बना सिनेमा का 'हॉटस्पॉट': वाराणसी की गलियों से मिर्जापुर के स्वैग तक, सिल्वर स्क्रीन पर छा रहा है उत्तर प्रदेश

    यूपी बना सिनेमा का 'हॉटस्पॉट': वाराणसी की गलियों से मिर्जापुर के स्वैग तक, सिल्वर स्क्रीन पर छा रहा है उत्तर प्रदेश

    नई दिल्ली/वाराणसी। आज उत्तर प्रदेश अपना 77वां स्थापना दिवस मना रहा है। जनसंख्या के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य अब केवल राजनीति ही नहीं बल्कि मनोरंजन जगत की धुरी भी बन चुका है। अपनी प्राचीन वास्तुकला गंगा के घाटों और ऐतिहासिक धरोहरों के दम पर यूपी फिल्म मेकर्स के लिए हब बन गया है। साल 2021 में मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का नेशनल अवार्ड जीतने वाला यह राज्य अब दुनिया भर के निर्देशकों को आकर्षित कर रहा है।

    बनारस: फिल्मकारों की पहली पसंद वाराणसी की संकरी गलियां और मणिकर्णिका घाट की जीवन-मृत्यु की गाथा ने मसान जैसी संजीदा फिल्मों को जन्म दिया तो वहीं अस्सी घाट की जीवंतता रांझणा और मोहल्ला अस्सी की आत्मा बनी। ब्रह्मास्त्र जैसी बड़े बजट की फिल्मों से लेकर वनवास और भूल चूक माफ जैसी नई कहानियों तक काशी का कैनवास हर रंग में फिट बैठता है।

    अपराध और इमोशन का कॉकटेल यूपी की पृष्ठभूमि ने भारतीय डिजिटल स्पेस को मिर्जापुर और असुर जैसी कल्ट वेब सीरीज दी हैं। वहीं गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्मों ने राज्य के देहाती और औद्योगिक परिवेश को वैश्विक पहचान दिलाई। लखनऊ आगरा और कानपुर जैसे शहर अब केवल पर्यटन केंद्र नहीं बल्कि बड़े फिल्म स्टूडियो में तब्दील हो चुके हैं।

    सरकार का प्रोत्साहन और भविष्य उत्तर प्रदेश सरकार की फिल्म बंधु एजेंसी और नई फिल्म पॉलिसी ने शूटिंग के नियमों को बेहद सरल बना दिया है। सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए न केवल ऑनलाइन अनुमति मिलती है बल्कि वेब सीरीज और फिल्मों के लिए भारी सब्सिडी का भी प्रावधान है। नोएडा के सेक्टर 21 में बन रही फिल्म सिटी इस क्रांति को नए पंख लगाने के लिए तैयार है।

  • सीहोर में 1.97 लाख मतदाताओं के नाम 2003 से बेमेल, निर्वाचन विभाग ने शुरू किया घर-घर सत्यापन सुधार का मौका, 7 फरवरी को अंतिम सूची

    सीहोर में 1.97 लाख मतदाताओं के नाम 2003 से बेमेल, निर्वाचन विभाग ने शुरू किया घर-घर सत्यापन सुधार का मौका, 7 फरवरी को अंतिम सूची


    सीहोर। सीहोर जिले में मतदाता सूची को पारदर्शी और शुद्ध बनाने के लिए चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान बड़ी विसंगति सामने आई है। जिले के लगभग 1 लाख 97 हजार मतदाताओं के नाम और डेटा 2003 की पुरानी मतदाता सूची से मेल नहीं खा रहे, जिससे निर्वाचन आयोग का पोर्टल इन प्रविष्टियों को स्वीकार नहीं कर रहा है। यह गड़बड़ी जिले की चारों विधानसभाओंसीहोर, आष्टा, बुदनी और इछावर में पाई गई है।
    मुख्य कारण:
    मतदाताओं के नाम, पिता या पति के नाम की वर्तनी में त्रुटि, डेटा एंट्री में तकनीकी खामी या गलत मिलान की वजह से पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पा रहा है। अकेले सीहोर विधानसभा क्षेत्र में 44 हजार से अधिक मतदाताओं का डेटा असंगत पाया गया है।

    निर्वाचन विभाग की कार्रवाई:
    निर्वाचन शाखा ने अब बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) को निर्देशित किया है कि वे प्रभावित मतदाताओं के घर-घर जाकर नोटिस दें और सही जानकारी एकत्रित करें। यह कार्य पहले से शुरू हो चुका है।

    आपत्ति की सुनवाई और अंतिम सूची:
    एसआईआर (दावा-आपत्ति) प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति की सुनवाई 31 जनवरी तक होगी। इसके बाद 7 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

    मतदाता क्या करें:
    जिन मतदाताओं का डेटा 2003 की सूची से मेल नहीं खा रहा है, वे बीएलओ को अपने आधार कार्ड, पहचान पत्र या अंकसूची जैसे दस्तावेज दिखाकर मौके पर नाम, पिता/पति का नाम और पता सुधारवा सकते हैं।

    तहसीलदार अमित सिंह ने बताया कि जिन लोगों ने गणना पत्रक भरा था और जिनका डेटा पुराने रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पा रहा है, उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

  • भिंड के शहीद हवलदार की अंतिम विदाई: 6 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, पत्नी ने रोना-धोना बंद करने की दी हिम्मत

    भिंड के शहीद हवलदार की अंतिम विदाई: 6 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, पत्नी ने रोना-धोना बंद करने की दी हिम्मत

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सर्चिंग ऑपरेशन के दौरान हुए हादसे में शहीद हुए भिंड के हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया का शनिवार सुबह उनके पैतृक गांव चितावली (अटेर) में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान शहीद के 6 वर्षीय बेटे भावेश ने पिता को मुखाग्नि दी, वहीं शहीद की पत्नी शिवानी ने अदम्य साहस दिखाते हुए लोगों से कहा, “रोना-धोना बंद करो, कुछ नहीं होगा।”

    जब शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

    सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर सलामी दी। डोडा में सेना का वाहन खाई में गिरने से शैलेंद्र सिंह समेत 10 जवान शहीद हुए थे।

    पत्नी का दर्दनाक लेकिन साहसी रुख
    शहीद की पत्नी शिवानी ने अपने पति के शव के पास बैठकर बार-बार बलाएं लेकर अपने पति के गाल चूमा और सभी को हिम्मत दी। उनका यह साहस देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। उन्होंने बताया कि 21 जनवरी की रात शैलेंद्र से आखिरी कॉल पर शैलेंद्र ने कहा था कि उन्हें डर लग रहा है। उन्होंने सपना देखा था कि उनकी बेटियाँ पढ़ाई के बावजूद सफल नहीं हो रही हैं, और परिवार शादी के लिए परेशान है। शिवानी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि रिटायरमेंट के बाद प्लॉट बेचकर बेटियों की शादी कर देंगे, लेकिन शैलेंद्र ने कहा, “मुझे बहुत डर लग रहा है, कुछ होने वाला है।”

    इसके बाद उनकी शहादत की खबर आई।

    परिवार की शौर्य गाथा: दादा भी थे शहीद
    शैलेंद्र के पिता हनुमत सिंह ने गर्व और आंसूओं के साथ बताया कि उनके तीनों बेटे सेना में हैं और शैलेंद्र उनके दूसरे बेटे थे। उन्होंने कहा कि उनका दादा भी 1972 में शहीद हुए थे, और आज उनका बेटा भी देश के लिए शहीद हुआ है।

    शहीद के बड़े भाई देव सिंह ने कहा कि परिवार को दुख है, लेकिन फौजी होने पर गर्व भी है। उन्होंने बताया कि वे तीनों भाई सेना में सेवा कर चुके हैं और देश रक्षा में शैलेंद्र की शहादत पर उन्हें गर्व है।

    अंतिम यात्रा में भावुक माहौल
    अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने फूलों की वर्षा की और “शैलेंद्र सिंह भदौरिया अमर रहें” के नारे लगाए। शमशान घाट पर जब मासूम भावेश ने पिता का शव देखा तो वह फूट-फूटकर रो पड़ा और मुखाग्नि देने से पहले पिता से लिपट गया। इस मौके पर मेजर अक्षय कुमार, एसडीएम शिवानी अग्रवाल, तहसीलदार जगन सिंह कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

    ब्रिगेडियर अमित वर्मा ने कहा कि पूरा आर्मी परिवार शहीद के परिजनों के साथ खड़ा है और परिवार को मिलने वाली सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

  • वाराणसी से मिर्जापुर तक, मनोरंजन जगत के लिए बेहद खास उत्तर प्रदेश, सैकड़ों फिल्मों की हो चुकी है शूटिंग

    वाराणसी से मिर्जापुर तक, मनोरंजन जगत के लिए बेहद खास उत्तर प्रदेश, सैकड़ों फिल्मों की हो चुकी है शूटिंग

    नई दिल्ली।  जनसंख्या के लिहाज से देश का सबसे बड़ा और खूबसूरत राज्य उत्तर प्रदेश न केवल पर्यटन बल्कि सिनेमा जगत को समृद्ध करने में भी अहम योगदान देता रहा है। प्राचीन शहरों के गंगा घाट, पतली गलियां, ऐतिहासिक मंदिर, ताजमहल और खूबसूरत नजारे फिल्मों के लिए आकर्षक पृष्ठभूमि बनाते हैं। यही वजह है कि यूपी भारत के सबसे फिल्म फ्रेंडली राज्यों में शुमार है। 2021 में इसे “मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट” घोषित किया गया था।

    शूटिंग की विशेषताएं और फिल्म नीति

    राज्य सरकार ने शूटिंग नियमों को सरल किया है। सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम के जरिए फिल्म मेकर्स को ऑनलाइन अनुमति और सब्सिडी मिलती है। वेब सीरीज के लिए भी सब्सिडी का प्रावधान है। सूचना विभाग की नोड एजेंसी ‘फिल्म बंधु’ फिल्म शूटिंग को बढ़ावा दे रही है। यूपी की फिल्म पॉलिसी सांस्कृतिक, पौराणिक और ऐतिहासिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने पर केंद्रित है।

    बोलती पृष्ठभूमि: प्रसिद्ध फिल्में और वेब सीरीज

    मसान (2015) में विक्की कौशल और ऋचा चड्ढा के किरदार काशी की गहराई को छूते हैं।
    रांझणा (2013) बनारस की गलियों में प्रेम, त्याग और सामाजिक विभाजन की कहानी दिखाती है।
    मुक्ति भवन (2016) में कॉमेडी और भावुकता का अनोखा मिश्रण है।
    बनारस में शहर की आध्यात्मिकता और रहस्य कहानी को मजबूती देती है।
    मोहल्ला अस्सी अस्सी घाट और स्थानीय संस्कृति पर आधारित व्यंग्यात्मक कहानी है।
    ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन – शिव (2022) में पौराणिक कथाओं से प्रेरित कहानी और शक्तियों का खेल है।
    गैंग्स ऑफ वासेपुर (2012) में अपराध, सत्ता और बदले की महाकाव्य कहानी दिखाई गई।
    मिर्जापुर (वेब सीरीज) में अपराधी कालीन त्रिपाठी का साम्राज्य और क्राइम थ्रिलर कहानी है।
    वनवास (2024) बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा और परिवारिक संघर्ष पर आधारित भावुक कहानी है।
    भूल चूक माफ में वाराणसी की रंगीन गलियों और टाइम लूप की रोमांटिक कॉमेडी दिखाई गई।

    उत्तर प्रदेश की फिल्म नीति और पुरस्कार

    यूपी ने कई बड़े पुरस्कार जीते हैं। 64वें और 68वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड, 2021 में आईएफएफआई गोवा, और 2022 में मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल से ‘शूटिंग फ्रेंडली राज्य’ का सम्मान मिला।

    उत्तर प्रदेश अपने खूबसूरत नजारों, सांस्कृतिक विरासत और फिल्म फ्रेंडली नीति से सिनेमा जगत का पसंदीदा राज्य बनकर 77वें स्थापना दिवस पर गौरव महसूस कर रहा है।

  • क्रिकेट विवाद अपडेट: नजम सेठी ने खुलकर जताया PCB के पक्ष में समर्थन

    क्रिकेट विवाद अपडेट: नजम सेठी ने खुलकर जताया PCB के पक्ष में समर्थन

    नई दिल्ली। बांग्लादेश क्रिकेट टीम टी20 विश्व कप 2026 से बाहर होने के कगार पर खड़ी है। टीम ने भारत में अपने मैच खेलने से इनकार किया है, जिसके कारण आईसीसी जल्द ही बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को शामिल करने का निर्णय ले सकती है। बांग्लादेश की यह जिद्द खेल जगत में विवाद का केंद्र बन गई है और पाकिस्तान ने इस मामले में आईसीसी पर कड़ा आरोप लगाया है।

    पाकिस्तान ने दिखाया समर्थन

    पूर्व पीसीबी अध्यक्ष नजम सेठी ने इस विवाद में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के रुख का समर्थन किया है। सेठी ने कहा कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश की चिंता को समझा और आईसीसी को ईमेल के जरिए अपने समर्थन का इज़हार किया। उन्होंने अन्य देशों के क्रिकेट बोर्ड से भी अपील की कि वे बांग्लादेश का समर्थन करें ताकि आईसीसी को भारत के दबाव से बाहर सोचने पर मजबूर किया जा सके।

    बीसीबी का रुख और कारण

    दरअसल, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) चाहता था कि उसकी टीमें भारत में न खेलें और उनके मैच श्रीलंका में आयोजित हों। बीसीबी ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया। मामला तब और गंभीर हो गया जब मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स से रिलीज किया गया। बांग्लादेश सरकार ने आईपीएल ब्रॉडकास्ट पर प्रतिबंध भी लगा दिया। इसके बाद बीसीबी ने आईसीसी से औपचारिक रूप से अपने ग्रुप मैच भारत से बाहर स्थानांतरित करने का अनुरोध किया, जिसे आईसीसी ने खारिज कर दिया।

    नजम सेठी ने कहा, “विश्व कप का बॉयकॉट”

    नजम सेठी ने कहा, “बांग्लादेश ने विश्व कप का बॉयकॉट करने का निर्णय लिया है। अब यह देखना बाकी है कि पीसीबी क्या फैसला करता है। मोहसिन नकवी खेल की समझ रखते हैं और उनका निर्णय संतुलित होगा।” उन्होंने अन्य देशों से भी बांग्लादेश का समर्थन करने की अपील की।

    आईसीसी और बीसीबी के बीच गतिरोध

    टी20 विश्व कप शुरू होने में अब दो सप्ताह से कम समय बाकी है। इस बीच आईसीसी और बीसीबी के बीच गतिरोध जारी है। यदि बांग्लादेश का अनुरोध मान्यता नहीं पाता और टीम भारत नहीं आती, तो स्कॉटलैंड को विकल्प के रूप में शामिल किया जा सकता है।

    खेल जगत में सियासी और प्रशासनिक दबाव

    इस विवाद ने साबित कर दिया है कि आधुनिक क्रिकेट केवल खेल नहीं, बल्कि सियासी और प्रशासनिक दबाव का भी मैदान बन गया है। बांग्लादेश का यह कदम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नए विवादों और बहस को जन्म दे रहा है।

    भारत में मैच न खेलने की जिद्द के चलते बांग्लादेश टी20 विश्व कप 2026 से बाहर होने के कगार पर, आईसीसी स्कॉटलैंड को विकल्प के तौर पर शामिल कर सकती है।

  • खंडवा में हैवानियत: आदिवासी महिला से 2 महीने तक 'ब्लैकमेलिंग और रेप', विरोध करने पर बेटे को भी पीटा

    खंडवा में हैवानियत: आदिवासी महिला से 2 महीने तक 'ब्लैकमेलिंग और रेप', विरोध करने पर बेटे को भी पीटा


    खंडवा । खंडवा जिले के पंधाना थाना क्षेत्र से रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ एक 40 वर्षीय भील समाज की महिला को डरा-धमकाकर और उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल करने का भय दिखाकर पिछले दो महीनों से लगातार अपनी हवस का शिकार बनाया जा रहा था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
    वारदात का घटनाक्रम: असीरगढ़ से बोरगांव तक दरिंदगी
    पुलिस जांच और पीड़िता के बयान के अनुसार, आरोपी तसलीम खां (निवासी: खिराला) ने पिछले दो महीनों से महिला का जीवन नर्क बना रखा था
    दिसंबर 2025 आरोपी महिला को अपनी ईको कार में बैठाकर असीरगढ़ के जंगलों में ले गया। वहां जान से मारने की धमकी देकर पहली बार दुष्कर्म किया और चुपके से महिला की आपत्तिजनक तस्वीरें खींच लीं।
    ब्लैकमेलिंग का दौर: इन्हीं तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर आरोपी ने महिला को सुक्ता डेम के जंगलों में ले जाकर कई बार शारीरिक शोषण किया।
    23 जनवरी 2026 हैवानियत की हद तब पार हो गई जब आरोपी उसे बोरगांव स्थित एक चिप्स फैक्ट्री के पीछे ले गया और वहां फिर से दुष्कर्म किया।
    बेटे के साथ मारपीट और खुलासा
    लगातार हो रहे शोषण से टूट चुकी पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर अपने बेटे को आपबीती सुनाई। जब बेटे ने अपनी मां के सम्मान की रक्षा के लिए आरोपी से तस्वीरों के बारे में सवाल किया, तो तसलीम खां ने न केवल गाली-गलौज की बल्कि उसके साथ बर्बरता से मारपीट भी की।

    पुलिस की सख्त कार्रवाई: इन धाराओं में फंसा आरोपी
    पंधाना टीआई दिलीप देवड़ा ने बताया कि मामला संज्ञान में आते ही पुलिस ने तत्परता दिखाई। चूंकि आरोपी जानता था कि महिला अनुसूचित जनजाति (ST) से है, इसलिए केस को और अधिक गंभीरता से लिया गया है।

    दर्ज की गई मुख्य धाराएं
    भारतीय न्याय संहिता (BNS) 64(1), 64(2)(M) दुष्कर्म और गंभीर प्रताड़ना भारतीय न्याय संहिता (BNS) 115(2), 296(B), 351(3) मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी एट्रोसिटी एक्ट SC/ST अधिनियम जातिगत आधार पर उत्पीड़न पुलिस ने आरोपी तसलीम खां को गिरफ्तार कर लिया है और पीड़िता की काउंसलिंग व मेडिकल जांच कराई गई है।एक जागरूक नागरिक के तौर पर: अगर आपके आसपास ऐसी कोई भी घटना घटित हो रही है, तो चुप न रहें। पुलिस हेल्पलाइन नंबर 100 या महिला हेल्पलाइन 181 पर तुरंत सूचना दें।
  • तराना में नमाज के बाद हंगामा: CCTV में कैद हुआ उपद्रव, 6 उपद्रवियों पर नामजद FIR दर्ज

    तराना में नमाज के बाद हंगामा: CCTV में कैद हुआ उपद्रव, 6 उपद्रवियों पर नामजद FIR दर्ज


    उज्जैन/तराना। मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के तराना शहर में शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के बाद माहौल गरमा गया। शहर के नई बाखल क्षेत्र में कुछ असामाजिक तत्वों ने जमकर उपद्रव मचाया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। हालांकि उपद्रवियों की यह पूरी करतूत पास ही लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई है। घटना से आक्रोशित स्थानीय निवासियों ने एकजुट होकर थाने का घेराव किया और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 6 मुख्य आरोपियों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है।

    घटना का विवरण और पुलिस की कार्रवाई

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को नमाज के बाद अचानक कुछ युवकों ने क्षेत्र में हुड़दंग शुरू कर दिया।नामजद FIR पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयान के आधार पर 6 लोगों को नामजद किया है। इसके अलावा कई अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।पहचान की प्रक्रिया: पुलिस वीडियो फुटेज को खंगाल रही है ताकि भीड़ में शामिल अन्य उपद्रवियों के चेहरों की पहचान कर उन्हें भी सलाखों के पीछे भेजा जा सके।वर्तमान स्थिति: घटना के बाद क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन तनाव को देखते हुए पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है।

    स्थानीय निवासियों में रोष

    नई बाखल के निवासियों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ केवल कागजी कार्रवाई न हो बल्कि कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में शांति भंग न हो सके। पुलिस ने जनता को आश्वस्त किया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

    एक अन्य दुखद घटना: कुएं में मिली मां-बेटे की लाश

    तराना में मचे उपद्रव के बीच जिले से एक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। एक महिला और उसके 3 माह के मासूम बच्चे की लाश कुएं में तैरती मिली है। जांच जारी: पुलिस इस मामले में उलझी हुई है कि यह आत्महत्या है, कोई दुखद हादसा या फिर सोची-समझी हत्या। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मर्ग कायम कर लिया गया है।

  • ‘मर्दानी 3’ को लेकर एक्साइटमेंट: हरमनप्रीत कौर बोलीं-अब इंतजार नहीं हो रहा

    ‘मर्दानी 3’ को लेकर एक्साइटमेंट: हरमनप्रीत कौर बोलीं-अब इंतजार नहीं हो रहा

    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने रानी मुखर्जी की आने वाली क्राइम ड्रामा फिल्म ‘मर्दानी 3’ के ट्रेलर की जमकर तारीफ की है। हरमनप्रीत ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि ट्रेलर बेहद प्रभावशाली है और फिल्म देखने का इंतजार नहीं कर सकती। उन्होंने रानी मुखर्जी के अभिनय की भी सराहना की और कहा कि आज के समय में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर तेज और कड़ा एक्शन बेहद जरूरी है।

    पुलिस फोर्स को दिया धन्यवाद

    हरमनप्रीत कौर ने अपने पोस्ट में देश की पुलिस फोर्स का आभार जताया, जो हर दिन लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास करती है। उन्होंने लिखा, “हमें पुलिस फोर्स से प्यार है, जो हर दिन हमारी सुरक्षा के लिए मौजूद रहती है। मर्दानी 3 का ट्रेलर जबरदस्त है।”

    तीसरी फिल्म में संवेदनशील मुद्दों पर फोकस

    ‘मर्दानी 3’ इस लोकप्रिय फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म है। इस बार कहानी कम आय वर्ग की 8–9 साल की बच्चियों के अपहरण जैसे गंभीर अपराध के इर्द-गिर्द घूमती है। इससे पहले ‘मर्दानी’ में मानव तस्करी और ‘मर्दानी 2’ में एक सीरियल रेपिस्ट की विकृत मानसिकता को दिखाया गया था, जिसने समाज और सिस्टम दोनों को झकझोर कर रख दिया था।

    फिल्म इंडस्ट्री की हस्तियों ने भी किया सम्मान

    हरमनप्रीत के अलावा फिल्म इंडस्ट्री की कई जानी-मानी हस्तियों ने भी ट्रेलर की तारीफ की। करीना कपूर खान ने रानी मुखर्जी को ‘डायनामाइट’ बताया, जबकि कैटरीना कैफ ने उन्हें ‘क्वीन’ कहकर सम्मान दिया। कियारा आडवाणी ने कहा कि तीन दशक पूरे करने के बाद भी रानी आज भी स्क्रीन पर राज कर रही हैं।

    निर्देशन और रिलीज की जानकारी

    फिल्म का निर्देशन अभिराज मीनावाला ने किया है, जबकि इसे आदित्य चोपड़ा ने निर्मित किया है। ‘मर्दानी 3’ 30 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म से उम्मीद है कि यह समाज में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय को लेकर एक बार फिर मजबूत संदेश देगी।

    समाज के लिए संदेश

    ‘मर्दानी 3’ सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सख्त और प्रभावशाली संदेश देने वाली फिल्म साबित होने जा रही है। हरमनप्रीत कौर और कई बॉलीवुड सितारों की सराहना इस बात का संकेत है कि फिल्म दर्शकों में जागरूकता पैदा करेगी और समाज में सुरक्षा और न्याय की संवेदनशीलता को बढ़ाएगी।

    हरमनप्रीत कौर ने ‘मर्दानी 3’ ट्रेलर की तारीफ करते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर तेज और सख्त कार्रवाई जरूरी है, जबकि फिल्म समाज में सुरक्षा और न्याय का मजबूत संदेश देगी।

  • डिजिटल इंडिया की जीत: UPI को पब्लिक गुड बनाने पर RBI की तारीफ, नारायण मूर्ति ने कही बड़ी बात

    डिजिटल इंडिया की जीत: UPI को पब्लिक गुड बनाने पर RBI की तारीफ, नारायण मूर्ति ने कही बड़ी बात

    नई दिल्ली।  इंफोसिस के संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की जमकर सराहना करते हुए कहा है कि आरबीआई हमेशा से एक उत्प्रेरक, उदार, दूरदर्शी और देश को सक्षम बनाने वाली संस्था रहा है। उन्होंने कहा कि यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) को एक पब्लिक गुड के रूप में विकसित करना आरबीआई का ऐतिहासिक निर्णय है, जिसने डिजिटल भुगतान को आम आदमी के लिए सस्ता, सुरक्षित और सुलभ बना दिया।

    यूपीआई ने जीता आम लोगों का भरोसा

    नारायण मूर्ति ने कहा कि यूपीआई को कम लागत वाला और सभी के लिए आसानी से उपलब्ध बनाकर आरबीआई ने देश के हर वर्ग का भरोसा जीता है। इससे डिजिटल भुगतान प्रणाली सिर्फ शहरी इलाकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांवों, छोटे दुकानदारों और आम नागरिकों तक पहुंच सकी। उन्होंने इसे भारत की डिजिटल सफलता की सबसे बड़ी कहानी बताया।

    नेतृत्व की सोच से बदलता है देश

    बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए मूर्ति ने कहा कि जब किसी देश में ऐसे नेता होते हैं जिनके लक्ष्य बड़े होते हैं और जिनकी नीयत साफ होती है, तब वही नेतृत्व देश को बदलने की ताकत रखता है। उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थाएं मजबूत मूल्यों से बनती हैं, और यही मूल्य लंबे समय तक विकास की नींव रखते हैं।

    कथनी और करनी में समानता जरूरी

    आईआईएम बेंगलुरु के सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक गुड्स में हुई बातचीत के दौरान उन्होंने नेतृत्व के मूल सिद्धांतों पर जोर देते हुए कहा कि यदि कोई संगठन मजबूत मूल्यों के साथ आगे बढ़ना चाहता है, तो नेताओं को कथनी और करनी में समानता रखनी होगी।
    मूर्ति ने साफ शब्दों में कहा, “मूल्य भाषणों से नहीं, बल्कि कार्यों से बनते हैं।”

    संवेदनशील पूंजीवाद का महत्व

    उन्होंने कहा कि अनुशासन, सही मूल्य, मजबूत नेतृत्व और संवेदनशील पूंजीवाद समाज और राष्ट्र दोनों को आगे बढ़ाता है। तकनीक की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से बदलती है, इसलिए समय के साथ उसे समझना, सुधारना और अनुकूल बनाना बेहद जरूरी है।

    संस्थागत यादों को संजोने की जरूरत

    नारायण मूर्ति ने इस बात पर चिंता जताई कि भारत में संस्थाओं के विकास को लेकर लिखित दस्तावेज बहुत कम हैं। उन्होंने कहा कि संगठनों के बनने की प्रक्रिया, संघर्ष, नेतृत्व की कमियां, टीमवर्क की जटिलताएं और नई तकनीक पर काम करने के अनुभव—ये सभी संस्थागत यादों का हिस्सा होते हैं, जिन पर भविष्य की प्रगति टिकी होती है।

    ओपन और कम लागत वाला मॉडल जरूरी

    उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सबक यह है कि कोड को सार्वजनिक और कम लागत वाला बनाया जाए। इससे एकाधिकार खत्म होता है और नवाचार को बढ़ावा मिलता है। मजबूत आधार के साथ इनोवेशन को आगे बढ़ाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले नेताओं की जरूरत होती है।

    छात्रों को दिया नेतृत्व का मंत्र

    छात्रों को संबोधित करते हुए मूर्ति ने कहा कि भविष्य के नेताओं को सादा जीवन जीना चाहिए और दिखावे से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप संवेदनशील पूंजीवाद के संदेशवाहक हैं, जो समाज, देश और उद्यमिता तीनों को आगे ले जाएंगे।”

    नारायण मूर्ति ने यूपीआई को पब्लिक गुड बनाने के लिए आरबीआई की सराहना करते हुए कहा कि मजबूत मूल्य, दूरदर्शी नेतृत्व और संवेदनशील पूंजीवाद ही भारत की डिजिटल और आर्थिक प्रगति की असली ताकत हैं।