Blog

  • ट्रम्प का कनाडा पर तीखा हमला: बोले-चीन एक साल में निगल जाएगा, गोल्डन डोम विरोध से बिगड़े रिश्ते

    ट्रम्प का कनाडा पर तीखा हमला: बोले-चीन एक साल में निगल जाएगा, गोल्डन डोम विरोध से बिगड़े रिश्ते


    नई दिल्ली।ट्रम्प का बयान कनाडा अमेरिका की बजाय चीन की ओर झुक रहा है। ट्रम्प ने कहा कि यह उत्तर अमेरिका की सामूहिक सुरक्षा के लिए खतरा है।

    व्यापार विवाद

    कनाडा-चीन व्यापार समझौते में चीनी ईवी पर टैरिफ 100% से घटाकर 6.1% किया गया।

    चीन ने कनाडा के कृषि उत्पादों पर जवाबी शुल्क कम करने पर सहमति दी।

    अमेरिका इसे अपने हितों के खिलाफ मान रहा है।

    गोल्डन डोम प्रोजेक्ट पर मतभेद

    अमेरिका का मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट 175 अरब डॉलर इजराइल के आयरन डोम पर आधारित है।

    ट्रम्प इसे अमेरिका की सुरक्षा के लिए अहम मानते हैं, जबकि कार्नी इसे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ाने वाला कदम बताते हैं।

    दावोस फोरम में तल्खी

    वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कार्नी ने बड़ी शक्तियों के दबदबे की आलोचना की।

    ट्रम्प ने इसे अमेरिका के प्रति कृतज्ञता की कमी बताया।

    पूर्व विवाद और संभावित भविष्य

    ग्रीनलैंड और नाटो मुद्दों पर दोनों नेताओं के पहले भी मतभेद रहे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, चीन, रक्षा और वैश्विक शक्ति संतुलन के मुद्दों से अमेरिका-कनाडा संबंध और जटिल हो सकते हैं।

  • बड़ा रेल हादसा टला: मक्सी के पास मालगाड़ी के 2 टुकड़े, पटरी टूटने से हुआ एक्सीडेंट

    बड़ा रेल हादसा टला: मक्सी के पास मालगाड़ी के 2 टुकड़े, पटरी टूटने से हुआ एक्सीडेंट


    इंदौर। मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले में शनिवार को एक बड़ा रेल हादसा होते-होते रह गया। उज्जैन से गुना की ओर जा रही एक मालगाड़ी मक्सी रेलवे स्टेशन के पास अचानक पटरी से उतर गई। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि ट्रेन झटके के साथ दो हिस्सों में बंट गई। गनीमत यह रही कि यह एक मालगाड़ी थी जिसके कारण कोई जनहानि नहीं हुई। अगर यही स्थिति किसी यात्री ट्रेन के साथ होती तो परिणाम भयावह हो सकते थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दुर्घटना का मुख्य कारण रेलवे पटरी का टूटना माना जा रहा है। कड़ाके की ठंड के कारण अक्सर पटरियों में दरार आने की घटनाएं बढ़ जाती हैं अंदेशा है कि यहाँ भी ऐसा ही कुछ हुआ होगा।

    घटनाक्रम और वर्तमान स्थिति

    लोकेशन मक्सी रेलवे स्टेशन के पास, शाजापुर जिला। रूट उज्जैन-गुना रेल खंड। प्रभाव मालगाड़ी के पटरी से उतरते ही वैगनों के बीच का कपलिंग टूट गया और ट्रेन दो अलग-अलग हिस्सों में विभाजित हो गई। इससे इस रूट पर रेल यातायात आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है।

    रेलवे की कार्रवाई

    हादसे की सूचना मिलते ही रतलाम और भोपाल मंडल के वरिष्ठ रेलवे अधिकारी अपनी तकनीकी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए हैं। तकनीकी जांच रेलवे की टीम ट्रैक और वैगनों की बारीकी से जांच कर रही है। पटरी टूटने के दावों की पुष्टि के लिए फोरेंसिक नमूने लिए जा रहे हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन क्रेन और हाइड्रोलिक मशीनों की मदद से पटरी से उतरे वैगनों को हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। यातायात बहाली अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता ट्रैक को जल्द से जल्द क्लियर कर यातायात सामान्य करने की है। अधिकारियों का बयान: “हादसे के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह पटरी टूटने के कारण हुआ या किसी तकनीकी खराबी की वजह से। फिलहाल कोई हताहत नहीं है।

  • अदाणी इलेक्ट्रिसिटी को फिर मिला A+ नेशनल रैंकिंग: बिजली आपूर्ति में बनी देश की अग्रणी कंपनी

    अदाणी इलेक्ट्रिसिटी को फिर मिला A+ नेशनल रैंकिंग: बिजली आपूर्ति में बनी देश की अग्रणी कंपनी

    नई दिल्ली। अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने एक बार फिर बिजली वितरण कंपनियों की राष्ट्रीय रैंकिंग में अपनी मजबूत स्थिति साबित की है। पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) द्वारा जारी ‘14वीं वार्षिक रेटिंग और रैंकिंग ऑफ डिस्कॉम्स रिपोर्ट’ में अदाणी इलेक्ट्रिसिटी को ए+ रैंकिंग प्रदान की गई है। लगातार दूसरी बार शीर्ष श्रेणी में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि कंपनी बिना रुकावट बिजली आपूर्ति, कम तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान तथा सुदृढ़ वित्तीय अनुशासन के मामले में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही है।

    मुंबईवासियों के भरोसे की जीत

    इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने कहा कि यह रैंकिंग मुंबई के नागरिकों के भरोसे की पहचान है। कंपनी ने बताया कि वह बीते 100 वर्षों से मुंबई की सेवा कर रही है और हर दिन घरों, अस्पतालों, उद्योगों और आवश्यक सेवाओं को भरोसेमंद और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करती है।
    कंपनी के अनुसार, “लगातार एक और वर्ष शीर्ष स्थान हासिल करना इस बात को दर्शाता है कि मुंबईवासी हर दिन शहर और देश की अग्रणी विद्युत वितरण कंपनी पर भरोसा करते हैं।”

    100 साल की सेवा, भविष्य पर नजर

    अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने कहा कि मुंबई की सेवा के 100 साल पूरे होने के साथ ही कंपनी शहर के विकास के साथ आगे बढ़ रही है। आधुनिक तकनीक, स्मार्ट सिस्टम और उपभोक्ता-केंद्रित सेवाओं के जरिए कंपनी भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए खुद को लगातार तैयार कर रही है।

    बिजली वितरण सेक्टर के लिए ऐतिहासिक साल

    यह रेटिंग देश के बिजली वितरण क्षेत्र के लिए भी एक ऐतिहासिक मोड़ मानी जा रही है। वित्त वर्ष 2025 में देशभर की बिजली वितरण कंपनियों ने मिलकर 2,701 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। यह पहली बार है जब यह सेक्टर कागजी हिसाब से मुनाफे में आया है।
    इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2024 में डिस्कॉम्स को 27,022 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुधार संरचनात्मक सुधारों, बेहतर वित्तीय अनुशासन और तकनीक के प्रभावी उपयोग का नतीजा है।

    बिलिंग और वसूली में देश में अव्वल

    रिपोर्ट के मुताबिक, अदाणी इलेक्ट्रिसिटी की बिलिंग दक्षता लगातार 95 प्रतिशत से अधिक रही है, जबकि बिल वसूली लगभग 100 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। भुगतान प्रबंधन और राजस्व वसूली के मामले में कंपनी का प्रदर्शन देश में सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

    डेटा और तकनीक बनी सफलता की कुंजी

    रिपोर्ट में कहा गया है कि अदाणी इलेक्ट्रिसिटी की सबसे बड़ी ताकत उसका निरंतर एक जैसा उत्कृष्ट प्रदर्शन है। यह किसी एक समय की उपलब्धि नहीं, बल्कि मजबूत सिस्टम, डेटा आधारित निर्णय, स्मार्ट मीटर, एनालिटिक्स और बेहतर उपभोक्ता सेवाओं का परिणाम है।
    इसी वजह से अदाणी इलेक्ट्रिसिटी न सिर्फ महाराष्ट्र, बल्कि पूरे देश में शहरी बिजली वितरण के लिए एक मिसाल बन चुकी है।

    अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने लगातार दूसरी बार ए+ रैंकिंग हासिल कर यह साबित किया है कि मजबूत वित्तीय अनुशासन, तकनीक और भरोसेमंद सेवा से बिजली वितरण में देशभर में नई मिसाल कायम की जा सकती है।

  • यूरोप में नए शक्ति संतुलन का उदय: फ्रांस से बढ़ी दूरी, इटली बना जर्मनी का नया 'पावर पार्टनर'

    यूरोप में नए शक्ति संतुलन का उदय: फ्रांस से बढ़ी दूरी, इटली बना जर्मनी का नया 'पावर पार्टनर'


    नई दिल्ली।द्वितीय विश्व युद्ध की राख से उबरकर जिस फ्रांस-जर्मनी की जोड़ी ने आधुनिक यूरोप की नींव रखी थी, आज वही ऐतिहासिक धुरी डगमगाती नजर आ रही है। बर्लिन और पेरिस के बीच बढ़ते कूटनीतिक गतिरोध ने यूरोपीय संघ (EU) के भीतर एक बड़े सत्ता परिवर्तन के संकेत दे दिए हैं। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच बढ़ती तल्खी ने अब जर्मनी को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की ओर झुकने पर मजबूर कर दिया है। दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान चांसलर मर्ज के बयानों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि अब यूरोप का संचालन पुराने ढर्रे पर नहीं बल्कि नए और अलग तरीके से होगा।

    इस दरार की सबसे बड़ी वजह आर्थिक और रक्षा रणनीतियों में विरोधाभास है। जर्मनी की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के लिए दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ प्रस्तावित ‘मर्कोसुर’ व्यापार समझौता संजीवनी की तरह है। इसके विपरीत राष्ट्रपति मैक्रों अपने देश के नाराज किसानों को शांत करने के लिए इस डील का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। फ्रांस को डर है कि सस्ते लैटिन अमेरिकी कृषि उत्पाद उसके घरेलू बाजार को बर्बाद कर देंगे। यह आर्थिक टकराव केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। रक्षा क्षेत्र के सबसे बड़े प्रोजेक्ट फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम FCAS को लेकर भी दोनों देश आमने-सामने हैं। फ्रांस जहां इस 100 अरब यूरो के फाइटर जेट प्रोजेक्ट पर अपना एकाधिकार और तकनीकी नियंत्रण चाहता है वहीं जर्मनी बराबरी की हिस्सेदारी और अपनी कंपनी एयरबस के लिए समान अधिकारों पर अड़ा है।

    इन्हीं मतभेदों के बीच इटली एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है। मेलोनी और मर्ज के बीच न केवल वैचारिक तालमेल दिख रहा है बल्कि अमेरिका के प्रति उनके व्यवहारिक नजरिए ने भी उन्हें करीब लाया है। डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के साथ संबंधों को लेकर जहां फ्रांस आक्रामक रुख अपना सकता है वहीं जर्मनी और इटली मिलकर एक बैलेंस बनाने की कोशिश में हैं। 23 जनवरी को रोम में होने वाली इटली-जर्मनी शिखर बैठक इस नए गठजोड़ की आधिकारिक मुहर बन सकती है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि फ्रांस-जर्मनी के रिश्ते पूरी तरह खत्म नहीं होंगे लेकिन यूरोप के नेतृत्व का वह दौर अब बीत चुका है जहां सिर्फ पेरिस और बर्लिन की मर्जी चलती थी। अब यूरोप की राजनीति की नई पटकथा रोम के रास्तों से होकर गुजरेगी।

  • Border 2 Box Office Collection Day 1: सनी देओल–वरुण धवन की फिल्म ने रचा इतिहास

    Border 2 Box Office Collection Day 1: सनी देओल–वरुण धवन की फिल्म ने रचा इतिहास

    नई दिल्ली। बॉक्स ऑफिस की जंग में अक्सर किसी फिल्म का भविष्य उसके पहले दिन की कमाई तय कर देती है और इस कसौटी पर ‘बॉर्डर 2’ पूरी तरह खरी उतरी है। 1997 की सुपरहिट फिल्म ‘बॉर्डर’ के सीक्वल को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह था और रिलीज के साथ ही फिल्म ने उम्मीदों पर खरा उतरते हुए शानदार शुरुआत की। रिपब्लिक डे के लंबे वीकेंड पर रिलीज हुई सनी देओल स्टारर इस वॉर ड्रामा ने पहले ही दिन ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसने हालिया ब्लॉकबस्टर ‘धुरंधर’ को भी पीछे छोड़ दिया।

    पहले दिन की कमाई ने मचाया धमाल

    शुरुआती ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘बॉर्डर 2’ ने भारत में पहले दिन करीब 30 करोड़ रुपये नेट की कमाई की है, जबकि फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन लगभग 35 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। इन आंकड़ों के साथ फिल्म न सिर्फ 2026 की सबसे बड़ी ओपनर बन गई है, बल्कि यह सनी देओल की देशभक्ति और एक्शन फिल्मों में अब भी बरकरार जबरदस्त स्टार पावर को भी साबित करती है।

    एडवांस बुकिंग से ही दिख गया था ब्लॉकबस्टर का संकेत

    रिलीज से पहले ही ‘बॉर्डर 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर मजबूत पकड़ बना ली थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म ने एडवांस बुकिंग से करीब 17 करोड़ रुपये कमा लिए थे। यह साफ संकेत था कि दर्शक इस फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

    शो बढ़ने के साथ बढ़ी भीड़, नाइट शोज रहे हाउसफुल के करीब

    ऑक्यूपेंसी रिपोर्ट की बात करें तो फिल्म ने दिन चढ़ने के साथ रफ्तार पकड़ी। कुल मिलाकर हिंदी ऑक्यूपेंसी 32.10 प्रतिशत रही।

    मॉर्निंग शोज: 19.46%

    ईवनिंग शोज: बेहतर रिस्पॉन्स

    नाइट शोज: 48.06% (सबसे ज्यादा)

    यह ट्रेंड साफ दिखाता है कि वीकेंड और छुट्टी के चलते आने वाले दिनों में कलेक्शन और उछाल मार सकता है।

    बॉलीवुड की सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्मों में शामिल

    30 करोड़ की ओपनिंग के साथ ‘बॉर्डर 2’ अब बॉलीवुड की सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्मों की लिस्ट में 28वें स्थान पर पहुंच गई है। भले ही यह 2023 में आई ‘गदर 2’ का रिकॉर्ड न तोड़ पाई हो, लेकिन इसने हालिया हिट ‘धुरंधर’ (28 करोड़) को पीछे छोड़ दिया है।

    रिपब्लिक डे वीकेंड पर और बढ़ेगी कमाई

    रिपब्लिक डे की छुट्टी और पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ को देखते हुए ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिल्म का वीकेंड कलेक्शन और मजबूत हो सकता है। अगर यही रफ्तार बनी रही, तो ‘बॉर्डर 2’ जल्द ही 100 करोड़ क्लब की ओर तेजी से बढ़ सकती है।

    फिल्म के बारे में

    अनुराग सिंह के निर्देशन में बनी ‘बॉर्डर 2’ 1971 के भारत–पाक युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के संयुक्त पराक्रम को दिखाया गया है। सनी देओल के साथ फिल्म में वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी अहम भूमिकाओं में हैं, जबकि मोना सिंह, सोनम बाजवा, अन्या सिंह और मेधा राणा भी प्रमुख किरदार निभा रही हैं।

    ‘बॉर्डर 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर पहले ही दिन 30 करोड़ की बंपर कमाई कर 2026 की सबसे बड़ी ओपनर बनने का रिकॉर्ड बनाया और धुरंधर को पीछे छोड़ दिया।

  • स्लीप-एपनिया की पहली दवा जल्द हो सकती है उपलब्ध: खर्राटों और सांस रुकने की समस्या से मिलेगा आराम

    स्लीप-एपनिया की पहली दवा जल्द हो सकती है उपलब्ध: खर्राटों और सांस रुकने की समस्या से मिलेगा आराम


    नई दिल्ली।ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज AIIMS के अनुसार भारत में करीब 10.4 करोड़ लोग ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया OSA से पीड़ित हैं। यह गंभीर स्लीप डिसऑर्डर धीरे-धीरे हार्ट, ब्रेन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है।फिलहाल स्लीप एपनिया का इलाज मुख्य रूप से लाइफस्टाइल बदलाव और CPAP मशीन के जरिए किया जाता रहा है। लेकिन अमेरिका में विकसित नई ओरल पिल, थर्ड फेज क्लिनिकल ट्रायल पूरी कर चुकी है और FDA अप्रूवल का इंतजार कर रही है।

    दवा का काम करने का तरीका रात को सोने से पहले ली जाएगी गले की मांसपेशियों को एक्टिव रखेगी, जिससे नींद में सांस की नली बंद नहीं होगी ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर होगी और स्लीप एपनिया की गंभीरता घटेगी CPAP मशीन पर निर्भर मरीजों के लिए आसान विकल्प

    ट्रायल और असर
    फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में दवा ने स्लीप एपनिया की गंभीरता में लगभग 47% तक कमी दिखाई। हल्के साइड इफेक्ट में मुंह सूखना और नींद आने में थोड़ी कठिनाई देखने को मिली।

    भारत में उपलब्धता
    अभी यह दवा भारत में उपलब्ध नहीं होगी। अमेरिका या अन्य देशों में मंजूरी मिलने के बाद ही भारत में उपलब्ध हो सकेगी। संभावित समय 2027 की शुरुआत तक बताया जा रहा है।

    हेल्थ रिस्क अगर समय पर इलाज न हो
    हार्ट डिजीज

    हाई ब्लड प्रेशर

    स्ट्रोक

    डायबिटीज

    ब्रेन से जुड़ी समस्याएं

    इस नई दवा से स्लीप एपनिया के मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो CPAP मशीन का नियमित इस्तेमाल नहीं कर पाते।

  • रायपुर टी20 में भारत ने न्यूजीलैंड को 7 विकेट से हराकर रचे कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड

    रायपुर टी20 में भारत ने न्यूजीलैंड को 7 विकेट से हराकर रचे कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड

    नई दिल्ली। रायपुर में खेले गए टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ ऐसा तूफानी प्रदर्शन किया, जिसने क्रिकेट इतिहास में कई नए रिकॉर्ड दर्ज करा दिए। 23 जनवरी (शुक्रवार) को खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत के सामने 209 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था, लेकिन कप्तान सूर्यकुमार यादव और ईशान किशन की विस्फोटक बल्लेबाजी के आगे यह लक्ष्य बौना साबित हुआ। टीम इंडिया ने महज 15.2 ओवर में 7 विकेट से जीत दर्ज कर मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    2 विकेट पर 6 रन से ऐतिहासिक जीत तक का सफर

    भारत की शुरुआत बेहद खराब रही और टीम ने सिर्फ 6 रन पर अपने 2 विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद सूर्यकुमार यादव और ईशान किशन ने पारी को संभालते हुए आक्रामक अंदाज़ में रन बरसाए। सूर्यकुमार यादव ने फॉर्म में शानदार वापसी करते हुए 37 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए, जिसमें 9 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। वहीं ईशान किशन ने भी गेंदबाजों की जमकर खबर लेते हुए 32 गेंदों पर 76 रन ठोके, जिसमें 11 चौके और छक्के शामिल थे।

    फुल मेंबर टीम का सबसे बड़ा रनचेज रिकॉर्ड

    भारतीय टीम ने 2 विकेट पर 6 रन की नाजुक स्थिति से उबरते हुए 209 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया। यह किसी भी फुल मेंबर (FM) टीम द्वारा 6 या उससे कम रन पर 2 विकेट गिरने के बाद किया गया सबसे बड़ा सफल रनचेज है। इससे पहले यह रिकॉर्ड न्यूजीलैंड के नाम था, जिसने 2023 में पाकिस्तान के खिलाफ 194 रन का लक्ष्य हासिल किया था।

    टी20I में भारत का संयुक्त सबसे बड़ा सफल रनचेज

    टी20 इंटरनेशनल में यह भारत का संयुक्त रूप से सबसे बड़ा सफल रनचेज रहा। इससे पहले भारत ने 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विशाखापत्तनम में भी 209 रन का लक्ष्य हासिल किया था। इसके साथ ही टीम इंडिया ने टी20I में छठी बार 200 या उससे अधिक रन का सफलतापूर्वक पीछा किया।

    200+ लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे तेज जीत

    भारत ने इस मुकाबले में 28 गेंदें शेष रहते लक्ष्य हासिल किया, जो कि किसी भी फुल मेंबर टीम द्वारा 200 या उससे अधिक रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे बड़ी जीत है। इस मामले में भारत ने पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया को भी पीछे छोड़ दिया।

    न्यूजीलैंड के गेंदबाज का शर्मनाक रिकॉर्ड

    इस मुकाबले में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज जकारी फाउलकेस के लिए दिन बेहद खराब रहा। उन्होंने अपने 3 ओवर में 67 रन लुटा दिए, जो टी20 इंटरनेशनल में किसी भी न्यूजीलैंड गेंदबाज द्वारा दिए गए सबसे ज्यादा रन हैं। उन्होंने बेन व्हीलर का 2018 का रिकॉर्ड तोड़ दिया।

    रायपुर टी20 में सूर्यकुमार यादव और ईशान किशन की तूफानी बल्लेबाजी से भारत ने 209 रन का लक्ष्य 15.2 ओवर में हासिल कर इतिहास रच दिया और कई विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए।

  • केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

    केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 के पेश होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं और इससे पहले उद्योग जगत की निगाहें सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर टिकी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात तक, हर सेक्टर को इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। इसी क्रम में जेटवर्क के को-फाउंडर और सीईओ अमृत आचार्य ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बजट 2026 को लेकर अपनी अपेक्षाएं साझा की हैं।

    सार्वजनिक पूंजीगत खर्च बढ़ाने की जरूरत

    अमृत आचार्य का कहना है कि केंद्र सरकार को यूनियन बजट 2026 में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) को लगातार बढ़ाते रहना चाहिए। रेलवे, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर एनर्जी जैसी परियोजनाओं पर सरकार का बढ़ता खर्च मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग को मजबूत करता है। सरकार खुद एक बड़े खरीदार के रूप में काम करती है, जिससे घरेलू उद्योगों को सीधे ऑर्डर मिलते हैं और उत्पादन को गति मिलती है।

    इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से रोजगार और ग्रोथ

    उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में बजट के जरिए सार्वजनिक निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है और यही रफ्तार आगे भी जारी रहनी चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च न सिर्फ उद्योगों को काम देता है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करता है।

    पीएलआई ने बदली मैन्युफैक्चरिंग की तस्वीर

    अमृत आचार्य ने बताया कि सरकार का फोकस प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी नीतियों पर रहा है, जिसका मकसद भारत में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे सेक्टरों में पीएलआई के सकारात्मक नतीजे अब साफ दिखने लगे हैं।

    अब ग्लोबल मार्केट पर हो फोकस

    उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत ‘मेक इन इंडिया फॉर इंडिया’ से आगे बढ़कर ‘मेक इन इंडिया फॉर ग्लोबल मार्केट’ की दिशा में काम करे। इसके लिए निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं जरूरी हैं, ताकि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में मजबूती से प्रतिस्पर्धा कर सकें।

    निर्यातकों को मिले जोखिम से सुरक्षा

    चीन का उदाहरण देते हुए आचार्य ने कहा कि वहां सरकार समर्थित बीमा और क्रेडिट स्कीम्स निर्यातकों को जोखिम से सुरक्षा देती हैं। भारत में भी ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे अमेरिकी और अन्य वैश्विक बाजारों में निर्यात करना आसान हो।

    पूंजी की लागत घटाने पर जोर

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पूंजी की लागत अभी कई देशों के मुकाबले अधिक है। यदि सरकार इसे कम करने के लिए योजनाबद्ध कदम उठाती है, तो निवेश और उद्यमिता को नई रफ्तार मिलेगी।

    डेढ़ लाइन का सार:

    बजट 2026 से उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार कैपेक्स बढ़ाएगी और निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लाकर भारत की मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगी।

  • सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी-पेंशन में बड़ा इजाफा 93,000 से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ

    सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी-पेंशन में बड़ा इजाफा 93,000 से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ


    नई दिल्ली।केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए खुशियों की खबर दी है। वित्त मंत्रालय की घोषणा के अनुसार, वेतन और पेंशन में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां, NABARD और RBI के हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगासरकारी आंकड़ों के अनुसार इस फैसले से 46,322 कार्यरत कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी जबकि 23,570 सेवानिवृत्त कर्मचारियों और 23,260 पारिवारिक पेंशनधारकों की आय में भी वृद्धि होगी

    PSU बीमा कंपनियों में इस संशोधन के लिए अनुमानित खर्च 8,170.30 करोड़ रुपये है जिसमें एरियर के लिए 5,822.68 करोड़ और पारिवारिक पेंशन के लिए 2,097.47 करोड़ रुपये शामिल हैंनाबार्ड के कर्मचारियों के लिए वेतन संशोधन 1 नवंबर 2022 से लागू होगा इसके कारण सालाना 170 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा और बकाया भुगतान के लिए करीब 510 करोड़ रुपये खर्च होंगे

    RBI और NABARD के पेंशनर्स के लिए भी संशोधन किया गया है इसके तहत 1 नवंबर 2022 से मूल पेंशन और महंगाई भत्ते में 10 प्रतिशत की वृद्धि होगी साथ ही पात्र लाभार्थियों को बकाया राशि का एकमुश्त भुगतान किया जाएगाइस फैसले से सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और पारिवारिक पेंशनधारकों की भी जीवनशली में सुधार होगा

  • 1,00,000 डाकघर में जमा करो और पाओ ₹44,995 का फिक्स ब्याज, सरकारी गारंटी वाली इस स्कीम ने मचा दिया धमाल!

    1,00,000 डाकघर में जमा करो और पाओ ₹44,995 का फिक्स ब्याज, सरकारी गारंटी वाली इस स्कीम ने मचा दिया धमाल!



    नई दिल्‍ली । पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉजिट TD स्कीम इन दिनों खूब चर्चा में है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि जहां कई बड़े बैंक एफडी पर ब्याज कम कर चुके हैं, वहीं डाकघर अब भी अच्छा और तय रिटर्न दे रहा है। साथ ही, इसमें सरकारी गारंटी भी मिलती है, जिससे लोगों को अपने पैसे की पूरी सुरक्षा का भरोसा रहता है।बढ़ती महंगाई और घटते बैंक ब्याज दरों के बीच अगर कोई इन्वेस्टमेंट ऑप्शन आम लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है, तो वह डाकघर की बचत योजनाएं है। खासकर तब, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कटौती की और बैंकों ने अपनी एफडी की ब्याज दरें घटा दीं। ऐसे माहौल में पोस्ट ऑफिस की एक स्कीम निवेशकों के लिए किसी राहत से कम नहीं है, जिसमें न सिर्फ बेहतर रिटर्न मिल रहा है, बल्कि पैसा भी पूरी तरह सुरक्षित है।

    दरअसल, डाकघर की फिक्स्ड डिपॉजिट को टाइम डिपॉजिट TD कहा जाता है। यह योजना बैंकों की एफडी की तरह ही काम करती है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत है केंद्र सरकार की सीधी गारंटी। पोस्ट ऑफिस में 1 साल, 2 साल, 3 साल और 5 साल की अवधि के लिए टीडी अकाउंट खुलवाया जा सकता है। मौजूदा समय में डाकघर 1 साल की टीडी पर 6.9 प्रतिशत, 2 साल पर 7.0 प्रतिशत, 3 साल पर 7.1 प्रतिशत और 5 साल की टीडी पर 7.5 प्रतिशत का आकर्षक ब्याज दे रहा है।

    44,995 का फिक्स रिटर्न

    अगर कोई निवेशक 5 साल की टीडी स्कीम में ₹1,00,000 जमा करता है, तो मैच्योरिटी पर उसे कुल ₹1,44,995 मिलते हैं। यानी सीधे ₹44,995 का फिक्स ब्याज। मौजूदा हालात में देश का कोई भी बड़ा बैंक 5 साल की एफडी पर इतना हाई ब्याज दर नहीं दे रहा है। यही वजह है कि पोस्ट ऑफिस की यह स्कीम निवेशकों के बीच तेजी से फेमस हो रही है।

    सभी निवेशकों को समान ब्याज

    डाकघर की टीडी स्कीम का एक और अहम पहलू यह है कि इसमें सभी आयु वर्ग के निवेशकों को समान ब्याज दर मिलती है। हालांकि, बैंकों की तरह इसमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक्स्ट्रा ब्याज का लाभ नहीं दिया जाता। इसके बावजूद, सरकारी गारंटी और स्थिर रिटर्न इसे सुरक्षित निवेश चाहने वालों के लिए बेहतरीन ऑप्शन बनाता है।

    ब्याज दरों पर सरकारी कंट्रोल

    खास बात यह भी है कि डाकघर की बचत योजनाओं पर मिलने वाली ब्याज दरों की समीक्षा हर तीन महीने में की जाती है और इन्हें वित्त मंत्रालय द्वारा कंट्रोल किया जाता है। इससे निवेशकों को यह भरोसा रहता है कि उनका पैसा सुरक्षित हाथों में है।