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  • भोपाल में बड़ा हादसा टला, निगम भवन की लिफ्ट में फंसी महिला; बैकअप सिस्टम नहीं होने से बढ़ी चिंता

    भोपाल में बड़ा हादसा टला, निगम भवन की लिफ्ट में फंसी महिला; बैकअप सिस्टम नहीं होने से बढ़ी चिंता


    भोपाल । भोपाल नगर निगम की नई मुख्यालय बिल्डिंग में बुधवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक महिला कर्मचारी लिफ्ट के अंदर फंस गईं। लिंक रोड नंबर-2 स्थित 73 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित इस अत्याधुनिक भवन में बिजली गुल होते ही लिफ्ट बीच रास्ते में रुक गई और महिला करीब 20 मिनट तक उसमें कैद रहीं। घटना ने भवन की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार महिला कर्मचारी ग्राउंड फ्लोर से तीसरी मंजिल पर जाने के लिए लिफ्ट में सवार हुई थीं। जैसे ही लिफ्ट ऊपर बढ़ी, अचानक बिजली चली गई और लिफ्ट सेकंड फ्लोर के पास अटक गई। अंदर फंसी महिला घबरा गईं, जबकि घटना की जानकारी मिलते ही भवन में मौजूद कर्मचारियों और नागरिकों की भीड़ मौके पर जमा हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तकनीकी टीम के पहुंचने से पहले कुछ लोगों ने चाबी और पेचकस की मदद से लिफ्ट का दरवाजा खोलने की कोशिश भी की। हालांकि बाद में पहुंचे तकनीकी कर्मचारियों ने लोगों को ऐसा करने से रोका और लिफ्ट सिस्टम को रीसेट करने की प्रक्रिया शुरू की। करीब 10 मिनट की मशक्कत के बाद महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बाहर निकलते समय वह काफी घबराई हुई नजर आईं।

    नगर निगम की बिजली शाखा के कार्यपालन यंत्री आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि लिफ्ट में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी, बल्कि बिजली बाधित होने के कारण यह बीच में रुक गई थी। हालांकि घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया कि करोड़ों रुपए की लागत से बने नए भवन में ऑटो रेस्क्यू सिस्टम और पावर बैकअप जैसी जरूरी सुविधाएं क्यों नहीं हैं।

    कर्मचारियों और आम नागरिकों का कहना है कि रोजाना बड़ी संख्या में लोग इस भवन में आते हैं। ऐसे में लिफ्ट में ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस और बैकअप पावर सिस्टम होना अनिवार्य है, ताकि बिजली जाने की स्थिति में यात्री सुरक्षित बाहर निकल सकें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक लिफ्टों में सुरक्षा के लिए कई स्वचालित सिस्टम लगे होते हैं। बिजली जाने पर लिफ्ट निकटतम फ्लोर तक पहुंचने का प्रयास करती है। ऐसे समय में दरवाजा जबरन खोलने या छेड़छाड़ करने से सुरक्षा तंत्र प्रभावित हो सकता है और राहत कार्य में देरी हो सकती है।

    उल्लेखनीय है कि इस नई निगम बिल्डिंग का लोकार्पण 6 मई को मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने किया था। भवन में निगम के अधिकांश विभागों को एक छत के नीचे लाने की योजना बनाई गई है। हालांकि उद्घाटन के एक महीने के भीतर सामने आई इस घटना ने भवन की तकनीकी तैयारियों और सुरक्षा मानकों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

  • आखिरी मैसेज, CCTV और 3 घंटे की मौजूदगी… ख्याति की मौत ने खड़े किए कई सवाल

    आखिरी मैसेज, CCTV और 3 घंटे की मौजूदगी… ख्याति की मौत ने खड़े किए कई सवाल


    नई दिल्ली । भोपाल में 18 वर्षीय छात्रा ख्याति जैन की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही ख्याति 11 मई 2026 को अपने घर में मृत पाई गई थी। घटना के 24 दिन बाद भी मामला चर्चा में बना हुआ है, क्योंकि परिजनों ने इसे आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है।

    ख्याति की मां वर्षा जैन का आरोप है कि उनकी बेटी की मौत सामान्य आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी साजिश हो सकती है। उन्होंने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि कई महत्वपूर्ण तथ्यों की अब तक गंभीरता से जांच नहीं की गई है।

    मां के अनुसार घटना वाले दिन वह एक स्कूल में इंटरव्यू देने के लिए घर से बाहर गई थीं। इसी दौरान उनकी बेटी के बॉयफ्रेंड तनीष चंद्रवंशी का घर आना-जाना हुआ। परिवार का दावा है कि तनीष करीब तीन घंटे तक घर में मौजूद रहा था। CCTV फुटेज में उसके घर में प्रवेश करने की बात भी सामने आई है। इतना ही नहीं, ख्याति की मौत की सूचना सबसे पहले तनीष ने ही पुलिस और परिवार को दी थी।

    मामले को और रहस्यमय बनाता है वह आखिरी इंस्टाग्राम मैसेज, जो ख्याति के अकाउंट से उसके बॉयफ्रेंड को भेजा गया था। इस संदेश में पारिवारिक तनाव, मानसिक परेशानी और जीवन समाप्त करने जैसी बातें लिखी गई थीं। हालांकि मां का कहना है कि यह भाषा उनकी बेटी की सामान्य लेखन शैली से मेल नहीं खाती। उनका आरोप है कि तनीष के पास ख्याति के इंस्टाग्राम अकाउंट का एक्सेस था और संभव है कि संदेश किसी और ने भेजा हो।

    पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने सवालों को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार ख्याति ने मौत से लगभग 24 घंटे पहले तक भोजन नहीं किया था। उसकी बाईं कलाई पर कट के दो निशान भी पाए गए। हालांकि मौत के वास्तविक कारण को लेकर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है और विसरा रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    ख्याति मूल रूप से औबेदुल्लागंज की रहने वाली थी और पिछले दो वर्षों से भोपाल में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान उसकी दोस्ती और फिर प्रेम संबंध तनीष चंद्रवंशी से हुआ था। परिवार का कहना है कि वे इस रिश्ते के पक्ष में नहीं थे और इसी वजह से दोनों के बीच तनाव की स्थिति बनी रहती थी।

    फिलहाल पुलिस मामले की जांच आत्महत्या के एंगल से कर रही है, जबकि परिजन हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं। मामले की सच्चाई जांच पूरी होने और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • आत्महत्या या हत्या? ट्विशा केस में CBI जोड़ रही हर कड़ी, समर्थ से हो रही लंबी पूछताछ

    आत्महत्या या हत्या? ट्विशा केस में CBI जोड़ रही हर कड़ी, समर्थ से हो रही लंबी पूछताछ


    मध्य प्रदेश । भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। मामले में आरोपी समर्थ की फरारी को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसी को मिले शुरुआती तथ्यों के अनुसार एफआईआर दर्ज होने के बाद समर्थ तत्काल शहर नहीं छोड़ पाया था और करीब तीन दिनों तक भोपाल में ही अलग-अलग स्थानों पर रुका रहा। इसके बाद वह जबलपुर पहुंचा, जहां उसने लगभग पांच दिनों तक अपनी मौजूदगी छिपाए रखी। अब सीबीआई इस पूरे घटनाक्रम की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

    जांच एजेंसी का मुख्य फोकस यह जानने पर है कि फरारी के दौरान समर्थ कहां-कहां रुका, किन लोगों के संपर्क में रहा और उसे किस-किस व्यक्ति ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता पहुंचाई। इसके लिए उसके मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन हिस्ट्री, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और डिजिटल चैट्स की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से फरारी के दौरान की गतिविधियों की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।

    मामले में एक नया पहलू ट्विशा की कथित प्रेग्नेंसी और गर्भपात से भी जुड़ा हुआ है। इसी क्रम में सीबीआई ने उस डॉक्टर को भी पूछताछ के लिए तलब किया है, जिसने कथित तौर पर ट्विशा को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी यानी गर्भपात की सलाह दी थी। जांच एजेंसी यह समझना चाहती है कि प्रेग्नेंसी और गर्भपात को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, उनमें कितनी सच्चाई है और उनका इस पूरे मामले से क्या संबंध हो सकता है।

    सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान समर्थ लगातार यह दावा कर रहा है कि ट्विशा की मौत आत्महत्या का मामला है। उसका कहना है कि गर्भपात के बाद ट्विशा मानसिक तनाव और अवसाद से गुजर रही थी, जिसके कारण उसने यह कदम उठाया। हालांकि जांच एजेंसी केवल उसके बयानों पर निर्भर नहीं है और हर दावे को वैज्ञानिक तथा फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर परख रही है।

    सीबीआई इस मामले को आत्महत्या और हत्या दोनों संभावनाओं के दृष्टिकोण से देख रही है। जांचकर्ता यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि घटना से पहले दोनों के संबंधों की स्थिति क्या थी, क्या किसी प्रकार का विवाद या मारपीट हुई थी और घटनास्थल से मिले साक्ष्य क्या संकेत देते हैं। यदि यह आत्महत्या थी तो उसके पीछे तत्काल कारण क्या था और यदि नहीं, तो फिर वास्तविक घटनाक्रम क्या रहा।

    जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा घटनास्थल से लेकर अस्पताल तक की पूरी टाइमलाइन तैयार करना भी है। सीबीआई समर्थ से लगातार पूछताछ कर रही है कि उसने सबसे पहले ट्विशा को किस अवस्था में देखा, उसे फंदे से किसने उतारा, उस समय घर में कौन-कौन मौजूद था और अस्पताल ले जाने तक क्या-क्या घटनाएं हुईं। इन सभी बयानों का मिलान फोरेंसिक रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से किया जा रहा है।

    इसके अलावा जांच एजेंसी उन लोगों की भी पहचान करने में जुटी है जिन्होंने एफआईआर दर्ज होने के बाद समर्थ को फरार रहने में मदद की हो सकती है। यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    ट्विशा शर्मा मौत मामला शुरुआत से ही कई सवालों और विवादों के घेरे में रहा है। अब सीबीआई हर एंगल से जांच कर रही है ताकि घटनाओं की वास्तविक श्रृंखला सामने लाई जा सके और यह स्पष्ट हो सके कि यह मामला आत्महत्या का था या इसके पीछे कोई और सच्चाई छिपी हुई है।

  • भोपाल की वॉटर स्पोर्ट्स एकेडमी में 13 वर्षीय खिलाड़ी के साथ विवाद और आरोपों का मामला

    भोपाल की वॉटर स्पोर्ट्स एकेडमी में 13 वर्षीय खिलाड़ी के साथ विवाद और आरोपों का मामला


    भोपाल । भोपाल से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां 13 वर्षीय सेलर ध्रुवी टंडन और उनके परिवार ने वॉटर स्पोर्ट्स एकेडमी के अधिकारियों पर मानसिक प्रताड़ना, पक्षपात और खेल करियर बाधित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि ध्रुवी को “लड़कों के साथ घूमने” जैसे आधारहीन आरोप लगाकर एकेडमी से बाहर कर दिया गया, जिसके बाद से वह पिछले तीन वर्षों से दोबारा प्रवेश के लिए संघर्ष कर रही हैं।

    परिवार का आरोप है कि ध्रुवी को प्रतियोगिताओं में कमजोर और फटे उपकरण दिए गए, जिससे उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ। वहीं, उनकी छोटी बहन सिद्धि टंडन, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीत चुकी हैं, के चयन में भी अनियमितताओं और 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

    परिजनों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें लगातार निराशा ही हाथ लगी। आर्थिक तंगी के चलते परिवार ने अपनी संपत्ति तक गिरवी रख दी और कई बार यात्रा के दौरान मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया।

    वहीं दूसरी ओर, परिवार इसे पुरानी रंजिश और बदले की भावना से जुड़ा मामला बता रहा है। आरोप है कि शिकायतें करने के बाद से ही दोनों बहनों को लगातार परेशान किया जा रहा है। यह मामला अब खेल व्यवस्था, चयन प्रक्रिया और खिलाड़ियों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • भोपाल: बशीर बद्र की याद में जुटेगा साहित्यिक जगत, राज सदन में होगी श्रद्धांजलि सभा

    भोपाल: बशीर बद्र की याद में जुटेगा साहित्यिक जगत, राज सदन में होगी श्रद्धांजलि सभा


    भोपाल  भोपाल का साहित्यिक और सांस्कृतिक वातावरण एक बार फिर भावनात्मक माहौल में डूबने जा रहा है, क्योंकि शहर के ख्यात पद्मश्री शायर Bashir Badr को श्रद्धांजलि देने के लिए एक सामूहिक सभा का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 30 मई को शाम 5 बजे दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय के राज सदन में आयोजित होगा।

    28 मई को उनके निधन के बाद से ही देशभर के साहित्यिक जगत में शोक की लहर है। भोपाल, जो उनकी साहित्यिक कर्मभूमि में से एक रहा है, वहां विभिन्न साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थाएं मिलकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगी।

    इस श्रद्धांजलि सभा में दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय, मध्यप्रदेश लेखक संघ, वनमाली सृजन पीठ, मध्यप्रदेश लेखिका संघ, हिन्दी भवन, अभिनव कला परिषद, प्रभात साहित्य परिषद, कला मंदिर, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, वरिष्ठ नागरिक मंच और अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच सहित कई प्रमुख संस्थाएं शामिल होंगी। शहर के वरिष्ठ साहित्यकार, कवि और शायर भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।

    कार्यक्रम का उद्देश्य केवल औपचारिक श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि शायर Bashir Badr के रचनात्मक योगदान को याद करना और उनकी शायरी की विरासत को जीवंत रखना है। इस दौरान उनकी प्रसिद्ध गजलों और शेर-ओ-शायरी के माध्यम से उन्हें याद किया जाएगा, जिससे माहौल पूरी तरह साहित्यिक और भावुक हो उठेगा।

    दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय की निदेशक करुणा राजूकर ने शहर के सभी साहित्य प्रेमियों और सांस्कृतिक संस्थाओं से अपील की है कि वे इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर शायर को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें। उनका कहना है कि यह अवसर न केवल एक महान शायर को याद करने का है, बल्कि हिंदी और उर्दू साहित्य की समृद्ध परंपरा को भी सम्मान देने का है।

    भोपाल हमेशा से साहित्य और शायरी का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, और Bashir Badr की उपस्थिति ने इस शहर को एक विशेष पहचान दी है। ऐसे में उनकी स्मृति में आयोजित यह सभा साहित्यिक दुनिया के लिए एक भावपूर्ण क्षण साबित होगी, जहां शब्दों के जरिए उनके योगदान को सलाम किया जाएगा।

  • जिपं CEO के आदेश पर जनपद CEO की ‘कैंची’! 10 महीने से अधिकारों के लिए भटक रहीं उप सरपंच

    जिपं CEO के आदेश पर जनपद CEO की ‘कैंची’! 10 महीने से अधिकारों के लिए भटक रहीं उप सरपंच


    भोपाल । भोपाल की अर्रावती ग्राम पंचायत में सरपंच पद के प्रभार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उप सरपंच सविता चौहान ने जनपद CEO पर जिला पंचायत CEO के आदेश को पलटने और 10 महीने तक अधिकार नहीं देने के आरोप लगाए हैं। मामला अब पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल तक पहुंच गया है।

    भोपाल जिले की ग्राम पंचायत अर्रावती में सरपंच पद के प्रभार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक गलियारों से निकलकर राजनीतिक स्तर तक पहुंच गया है। पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के बंगले तक पहुंची इस शिकायत ने पंचायत व्यवस्था और प्रशासनिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उप सरपंच सविता चौहान ने आरोप लगाया है कि जिला पंचायत CEO के स्पष्ट आदेश के बावजूद उन्हें आज तक सरपंच के पूर्ण अधिकार नहीं दिए गए।

    पूरा मामला अगस्त 2025 से शुरू हुआ, जब अर्रावती के तत्कालीन सरपंच गंगाराम अहिरवार के खिलाफ बैरसिया थाने में आपराधिक मामला दर्ज हुआ। प्रकरण दर्ज होने के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। पंचायत राज अधिनियम के अनुसार सरपंच का प्रभार उप सरपंच को सौंपा जाना था। इसी नियम के तहत जिला पंचायत CEO इला तिवारी ने 14 अगस्त 2025 को जनपद CEO देवेशकुमार सराठे को आदेश जारी कर सविता चौहान को सरपंच पद का प्रभार देने के निर्देश दिए थे।

    आरोप है कि आदेश जारी होने के बाद भी जनपद CEO ने शुरुआत में प्रभार देने में देरी की। बाद में औपचारिक रूप से चार्ज तो सौंप दिया गया, लेकिन सरपंच के अधिकार और वित्तीय शक्तियां नहीं दी गईं। सविता चौहान का कहना है कि पिछले 10 महीनों से वे अधिकारों के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन ही मिला।

    मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब पंचायत के खातों और बिल भुगतान को लेकर सवाल उठने लगे। सविता चौहान ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना लाखों रुपए के बिल पास किए गए। इतना ही नहीं, बाद में पंचों के सम्मेलन आयोजित किए गए और इसी प्रक्रिया के बीच लेखरात अहिरवार को सरपंच घोषित कर दिया गया। चौहान का कहना है कि यह फैसला जिला पंचायत CEO के आदेश के खिलाफ है और जनपद CEO को ऐसा करने का अधिकार नहीं था।

    उप सरपंच सविता चौहान अपने पति धनवीर सिंह और समर्थकों के साथ पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल से मिलने पहुंचीं। उन्होंने मंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उन्हें नियमानुसार अधिकार दिलाने की मांग की। जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले में जनपद CEO की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। जिला पंचायत सदस्य विनय मेहर ने कहा कि जब वरिष्ठ अधिकारी नियमों के तहत सविता चौहान को प्रभार दे चुके हैं, तब किसी दूसरे व्यक्ति को सरपंच घोषित करना नियम विरुद्ध है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और जिला पंचायत CEO इला तिवारी ने जांच के आदेश दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और आखिर पंचायत व्यवस्था में आदेशों के टकराव का जिम्मेदार कौन माना जाएगा।

  • अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल, मॉर्च्युरी के बाहर पोस्टमॉर्टम से हड़कंप

    अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल, मॉर्च्युरी के बाहर पोस्टमॉर्टम से हड़कंप


    नई दिल्ली। राजधानी भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया में मानव संवेदनाओं को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां मॉर्च्युरी के बाहर खुले रास्ते पर एक शव का पोस्टमॉर्टम किए जाने का वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि स्ट्रेचर पर रखे शव की खुले में चीर-फाड़ की जा रही है, जबकि आसपास से मरीजों के परिजन और आम लोग लगातार गुजर रहे हैं।

    मामला बजरिया थाना क्षेत्र से जुड़े एक अज्ञात व्यक्ति के शव का बताया जा रहा है। पुलिस शव को पोस्टमॉर्टम के लिए हमीदिया अस्पताल लेकर पहुंची थी। लेकिन शव को मॉर्च्युरी के अंदर ले जाने के बजाय बाहर जाने वाले रास्ते पर ही स्ट्रेचर पर रख दिया गया। इसके बाद डॉक्टरों ने वहीं खुले में पोस्टमॉर्टम शुरू कर दिया।

    वीडियो में देखा जा सकता है कि डॉक्टर छेनी और हथौड़ी की मदद से शव की खोपड़ी खोल रहे हैं। इस दौरान आसपास खड़े लोग पूरी प्रक्रिया देखते रहे। जैसे ही बदबू फैलनी शुरू हुई, वहां मौजूद लोग दूर हटने लगे। कुछ देर बाद अन्य अस्पतालकर्मी और एक पुलिसकर्मी भी मौके पर नजर आए।

    सबसे गंभीर बात यह रही कि पोस्टमॉर्टम ऐसी जगह किया गया जहां से अस्पताल के भीतर लगातार लोगों की आवाजाही बनी हुई थी। न तो वहां कोई पर्दा लगाया गया था और न ही किसी तरह की गोपनीयता या सुरक्षा व्यवस्था दिखाई दी। इससे अस्पताल की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन और फॉरेंसिक विभाग ने सफाई दी। गांधी मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक विभाग के एचओडी डॉ. आशीष जैन ने कहा कि कुछ विशेष मामलों में शवों की सफाई या कीड़े हटाने की प्रक्रिया मॉर्च्युरी के बाहर बने शेड वाले हिस्से में की जाती है। उनका दावा था कि सामान्य पोस्टमॉर्टम मॉर्च्युरी के अंदर ही किए जाते हैं।

    हालांकि वायरल वीडियो प्रशासन के इन दावों से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रहा है। वीडियो में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि सिर्फ सफाई नहीं बल्कि शव का पूरा पोस्टमॉर्टम किया जा रहा था। डॉक्टर स्ट्रेचर पर ही चीर-फाड़ कर रहे थे और शव की खोपड़ी तक खोली जा रही थी।

    अस्पताल प्रशासन का दावा था कि यह प्रक्रिया शेड वाले हिस्से में होती है, लेकिन वीडियो में शव मॉर्च्युरी के मुख्य रास्ते पर खुले में रखा दिखाई दे रहा है। इस दौरान वहां से लगातार लोग गुजरते रहे। ऐसे में प्रशासन की सफाई पर सवाल उठना लाजिमी माना जा रहा है।

    इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाओं और संवेदनशीलता को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर लोग नाराजगी जता रहे हैं और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि मृतक के सम्मान और आम लोगों की भावनाओं का ध्यान रखना अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी होती है, लेकिन इस मामले में गंभीर लापरवाही सामने आई है।

    अब देखना होगा कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

  • भोपाल में पानी को लेकर बड़ा दावा: RO की जरूरत नहीं, मेयर का बयान चर्चा में

    भोपाल में पानी को लेकर बड़ा दावा: RO की जरूरत नहीं, मेयर का बयान चर्चा में


    भोपाल । भोपाल में मंगलवार को नगर निगम के जल प्रबंधन सिस्टम की एक अहम झलक देखने को मिली, जब महापौर मालती राय ने विधानसभा के सामने स्थित फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ एमआईसी सदस्य, नगर निगम अधिकारी और बीजेपी जिलाध्यक्ष रविंद्र यती भी मौजूद रहे। पूरे निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य बड़े तालाब से आने वाले पानी की शुद्धिकरण प्रक्रिया को समझना और उसकी गुणवत्ता की जांच करना था।

    निरीक्षण के दौरान महापौर ने फिल्टर प्लांट में पहुंचकर एक-एक प्रक्रिया को करीब से देखा। उन्होंने यह समझा कि बड़े तालाब से आने वाला कच्चा पानी किस तरह विभिन्न चरणों से गुजरकर पीने योग्य बनाया जाता है। प्लांट में मौजूद तकनीकी स्टाफ ने पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी, जिसमें फिल्ट्रेशन, क्लोरीनेशन और लैब टेस्टिंग शामिल रही।

    इसके बाद पानी की गुणवत्ता की जांच नगर निगम की लैब में कराई गई। टेस्ट के दौरान पानी को मानकों के अनुरूप पाया गया और उसे पीने योग्य घोषित किया गया। इसी मौके पर महापौर मालती राय ने कहा कि शहर में गर्मी के चलते पानी की खपत काफी बढ़ गई है, जिससे कुछ इलाकों में कम प्रेशर की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम लगातार व्यवस्था सुधारने में जुटा है।

    महापौर ने स्पष्ट रूप से कहा कि बड़े तालाब से आने वाला पानी पूरी तरह शुद्ध है और जिन क्षेत्रों में यह सप्लाई किया जा रहा है, वहां के लोगों को RO लगाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि फिल्टर प्लांट से गुजरने के बाद पानी पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है और इसकी गुणवत्ता लगातार मॉनिटर की जाती है।

    निरीक्षण के दौरान एक रोचक दृश्य भी देखने को मिला, जब लैब टेस्ट में पास हुए पानी को महापौर के सामने ही बीजेपी जिलाध्यक्ष रविंद्र यती और अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग ने पीकर उसकी गुणवत्ता पर भरोसा जताया। इस कदम को प्रशासनिक स्तर पर जनता के भरोसे को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

    महापौर ने आगे बताया कि भोपाल शहर में पानी की सप्लाई मुख्य रूप से चार स्रोतों से होती है। इनमें कोलार डैम प्रमुख है, जो शहर के बड़े हिस्से को पानी उपलब्ध कराता है। इसके अलावा केरवा डैम, बड़े तालाब और नर्मदा नदी से भी अलग-अलग इलाकों में जलापूर्ति की जाती है। कोलार रोड और आसपास के क्षेत्रों में केरवा डैम का पानी पहुंचता है, जबकि लालघाटी और कोहेफिजा क्षेत्र में बड़े तालाब का पानी सप्लाई होता है। होशंगाबाद रोड और उससे जुड़ी कॉलोनियों में नर्मदा का पानी दिया जाता है।

    निरीक्षण के बाद महापौर ने भरोसा जताया कि नगर निगम शहरवासियों को स्वच्छ और पर्याप्त जल आपूर्ति देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की जल गुणवत्ता में समझौता नहीं किया जाएगा।

  • बहन की शादी से पहले टूटा परिवार: भोपाल में 16 साल के किशोर ने की आत्महत्या

    बहन की शादी से पहले टूटा परिवार: भोपाल में 16 साल के किशोर ने की आत्महत्या


    भोपाल । भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र के अन्ना नगर, बीएचईएल इलाके में रविवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां 16 वर्षीय किशोर ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से पूरे इलाके में शोक और स्तब्धता का माहौल है। परिजन इस घटना के बाद गहरे सदमे में हैं।

    मृतक की पहचान करण (16) के रूप में हुई है, जो 9वीं कक्षा तक पढ़ा था और सुबह के समय दूध बांटने वाली गाड़ी पर काम करता था। परिजनों के अनुसार, 18 जून को उसकी बहन की शादी होने वाली थी, जिसकी तैयारियां परिवार में चल रही थीं। लेकिन इस खुशी के माहौल के बीच अचानक आई इस घटना ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।

    परिजनों ने बताया कि घटना से कुछ घंटे पहले करण ने अपने पिता और बहन से फोन पर बातचीत की थी। पिता मौहर सिंह के अनुसार, सुबह करण ने फोन कर कहा था—“सॉरी, मैं शादी में शामिल नहीं हो पाऊंगा।” इस बात को उस समय सामान्य बातचीत समझा गया, लेकिन कुछ देर बाद जब दोबारा फोन लगाया गया तो उसने कॉल रिसीव नहीं किया।

    इसके बाद परिवार को छोटे बेटे के माध्यम से घटना की जानकारी मिली। जब परिजन घर पहुंचे तो देखा कि करण कमरे में फंदे से लटका हुआ था। इस दृश्य को देखकर पूरा परिवार टूट गया और घर में चीख-पुकार मच गई।

    सूचना मिलने पर गोविंदपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। बाद में पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल की जांच के दौरान किशोर का मोबाइल फोन भी बरामद किया, जो डिस्चार्ज हालत में मिला।

    थाना प्रभारी अवधेश सिंह तौमर ने बताया कि फिलहाल आत्महत्या के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस ने मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है और उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है ताकि किसी भी संभावित कारण का पता लगाया जा सके। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है, वहीं परिवार इस असामयिक और दर्दनाक घटना से गहरे सदमे में है।

  • 12 दिन बाद मिला एक्ट्रेस ट्विशा को अंतिम विदाई, भोपाल में हुआ अंतिम संस्कार

    12 दिन बाद मिला एक्ट्रेस ट्विशा को अंतिम विदाई, भोपाल में हुआ अंतिम संस्कार


    भोपाल। भोपाल में एक्ट्रेस ट्विशा का अंतिम संस्कार रविवार को भदभदा श्मशान घाट पर 12 दिन बाद संपन्न हुआ। इस दौरान पूरा माहौल गमगीन और भावुक था। परिवार के सदस्यों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। अंतिम संस्कार में सबसे भावुक क्षण वह रहा जब ट्विशा के भाई मेजर हर्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान मौजूद परिजन और करीबी लगातार रोते-बिलखते नजर आए।

    ट्विशा के अंतिम दर्शन और अंतिम यात्रा के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। अंतिम यात्रा भोपाल AIIMS से शुरू होकर भदभदा विश्राम घाट तक पहुंची, जहां पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।

    इससे पहले दिन में एक महत्वपूर्ण मेडिकल प्रक्रिया के तहत दिल्ली AIIMS की विशेष टीम ने भोपाल AIIMS परिसर में ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। यह प्रक्रिया करीब तीन घंटे तक चली, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सभी आवश्यक जांचें कीं। पोस्टमॉर्टम के दौरान लिए गए सैंपल और विसरा को सुरक्षित रूप से भोपाल AIIMS में सील कर रखा गया है। टीम अब अपनी विस्तृत रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपेगी, जिसे जांच प्रक्रिया में अहम माना जा रहा है।

    यह मामला 12 मई की रात का है, जब भोपाल के कटारा हिल्स क्षेत्र में ट्विशा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। शुरुआती जांच के बाद मामला आत्महत्या और हत्या के आरोपों के बीच उलझ गया है। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया है, जबकि मायके पक्ष ने गंभीर आरोप लगाते हुए पति और ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया है। इस विरोधाभास ने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं। कोर्ट की कार्रवाई के तहत ट्विशा के पति समर्थ को पहले ही गिरफ्तार कर 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा जा चुका है। साथ ही अदालत ने उसका पासपोर्ट भी जब्त करने के आदेश दिए हैं, जिससे विदेश भागने की संभावना को रोका जा सके। वहीं सास की जमानत रद्द करने की मांग को लेकर भी अदालत में आवेदन दायर किया गया है, जिस पर सोमवार को सुनवाई प्रस्तावित है।

    इसी बीच, इस हाई-प्रोफाइल मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सोमवार को चीफ जस्टिस की बेंच में सुनवाई तय की है। माना जा रहा है कि शीर्ष अदालत इस मामले में जांच की दिशा और प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दे सकती है।

    इसके अलावा, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को सीबीआई को सौंपने पर सहमति जता दी है, जिससे जांच और तेज होने की उम्मीद है।

    अंतिम संस्कार के दौरान भदभदा घाट पर भारी भीड़ और पुलिस सुरक्षा के बीच पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई। परिवार और रिश्तेदारों ने नम आंखों से ट्विशा को अंतिम विदाई दी। माहौल इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

    फिलहाल, पूरे मामले की जांच अलग-अलग स्तरों पर जारी है और आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सीबीआई जांच की दिशा इस केस को और स्पष्ट कर सकती है।