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  • झरने वाले सीन से मिली पहचान, लेकिन इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है मंदाकिनी की जिंदगी और फिल्मी सफर

    झरने वाले सीन से मिली पहचान, लेकिन इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है मंदाकिनी की जिंदगी और फिल्मी सफर

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री मंदाकिनी का नाम आज भी 1985 में रिलीज हुई फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ के साथ सबसे पहले जुड़ता है। अपनी पहली बड़ी फिल्म से ही उन्होंने दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई और रातोंरात स्टार बन गईं। हालांकि, उनकी पहचान अक्सर फिल्म के चर्चित झरने वाले दृश्य तक सीमित कर दी जाती है, जबकि उनकी निजी जिंदगी और फिल्मी सफर कई दिलचस्प घटनाओं से भरा रहा है। 30 जुलाई को जन्मदिन के मौके पर उनके जीवन के कई ऐसे पहलू याद किए जाते हैं, जिन्होंने उन्हें बॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल किया।

    मंदाकिनी का जन्म 30 जुलाई 1963 को उत्तर प्रदेश के मेरठ में यास्मीन जोसेफ के रूप में हुआ था। उनके पिता ब्रिटिश मूल के थे, जबकि उनकी मां मुस्लिम परिवार से थीं। फिल्मों में आने से पहले उनका नाम यास्मीन ही था। शुरुआती दौर में उन्हें एक फिल्म के लिए ‘माधुरी’ नाम से भी साइन किए जाने की चर्चा रही, लेकिन इसी बीच उनकी मुलाकात फिल्मकार राज कपूर से हुई। राज कपूर ने उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उनका नाम बदलकर ‘मंदाकिनी’ रख दिया, जो आगे चलकर उनकी स्थायी पहचान बन गया।

    राज कपूर ने अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ में मंदाकिनी को मुख्य भूमिका दी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता साबित हुई और मंदाकिनी रातोंरात लोकप्रिय हो गईं। फिल्म के कुछ दृश्य उस समय काफी चर्चा में रहे और इन्हीं के कारण वह लंबे समय तक सुर्खियों में बनी रहीं। हालांकि, उनके अभिनय, स्क्रीन प्रेजेंस और सहज अभिव्यक्ति की भी खूब सराहना हुई। इस फिल्म के बाद उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित अभिनेत्रियों में गिना जाने लगा।

    इसके बाद मंदाकिनी ने मिथुन चक्रवर्ती, संजय दत्त, गोविंदा, आदित्य पंचोली और अन्य कई बड़े सितारों के साथ फिल्मों में काम किया। ‘जीते हैं शान से’ का लोकप्रिय गीत ‘जूली जूली जॉनी का दिल तुमपे आया जूली’ आज भी उनके यादगार गीतों में गिना जाता है। 1980 और 1990 के दशक में उन्होंने कई फिल्मों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई।

    अपने करियर के दौरान मंदाकिनी को कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि कई बार फिल्मों के लिए चयन होने के बावजूद उन्हें अंतिम समय में बदल दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर में फिल्म उद्योग का माहौल महिलाओं के लिए आसान नहीं था और कई अवसर उनके हाथ से निकल गए। कुछ फिल्मों में उन्हें साइन किए जाने की चर्चाएं भी रहीं, लेकिन वे परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ सकीं।

    1996 में रिलीज हुई फिल्म ‘जोरदार’ के बाद मंदाकिनी ने फिल्मों से लगभग दूरी बना ली। बाद में उन्होंने पूर्व बौद्ध भिक्षु डॉ. कग्युर टी. रिनपोछे ठाकुर से विवाह किया और पारिवारिक जीवन को प्राथमिकता दी। लंबे समय तक लाइमलाइट से दूर रहने के बावजूद आज भी मंदाकिनी का नाम हिंदी सिनेमा की उन अभिनेत्रियों में लिया जाता है, जिन्होंने कम समय में अपनी अलग पहचान बनाई और दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह बनाई।

  • अभिनेता संजय दत्त के 67वें जन्मदिन पर उनके उतार-चढ़ाव भरे जीवन और चार दशक लंबे फिल्मी सफर का लेखा-जोखा

    अभिनेता संजय दत्त के 67वें जन्मदिन पर उनके उतार-चढ़ाव भरे जीवन और चार दशक लंबे फिल्मी सफर का लेखा-जोखा

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में अपनी विशिष्ट अभिनय शैली और दमदार शख्सियत के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता संजय दत्त 29 जुलाई को अपना 67वां जन्मदिन मना रहे हैं। चार दशक से भी लंबे अपने करियर में लगभग 135 से अधिक फिल्मों में अभिनय करने वाले संजय दत्त का जीवन सफलताओं, व्यक्तिगत त्रासदियों, विवादों और कड़े संघर्षों की एक अनूठी दास्तान रहा है। फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद उनका जीवन कभी आसान नहीं रहा और उन्हें कई मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा।

    सुप्रसिद्ध अभिनेता सुनील दत्त और अभिनेत्री नरगिस के घर जन्मे संजय दत्त ने महज बारह वर्ष की उम्र में कव्वाली गायक के रूप में एक छोटी सी भूमिका से अपनी अभिनय यात्रा की शुरुआत की थी। इसके बाद वर्ष 1981 में उन्होंने मुख्य अभिनेता के तौर पर अपनी पहली फिल्म ‘रॉकी’ से बॉलीवुड में औपचारिक कदम रखा। हालांकि फिल्म के प्रदर्शन से ठीक तीन दिन पहले उनकी मां का निधन हो गया, जिसने उनके जीवन पर गहरा मानसिक प्रभाव डाला। इसके बाद वे गंभीर नशे की लत में फंस गए, जिससे उबरने के लिए उन्हें लंबा वक्त लगा।

    अमेरिका स्थित पुनर्वास केंद्र से लौटने के बाद उन्होंने अपनी शारीरिक फिटनेस और अभिनय पर ध्यान केंद्रित किया और 80 व 90 के दशक में एक प्रमुख एक्शन और रोमांटिक हीरो के रूप में खुद को स्थापित किया। इस दौरान उन्होंने कई ब्लॉकबस्टर और यादगार फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। हालांकि वर्ष 1993 में आए मुंबई बम धमाकों के मामले में कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी के बाद उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन में एक बार फिर गंभीर उथल-पुथल देखने को मिली।

    व्यक्तिगत जीवन में संजय दत्त को कई बार अपनों को खोने का दर्द सहना पड़ा। उनकी पहली पत्नी का कम उम्र में ही गंभीर बीमारी के चलते निधन हो गया था। बाद के वर्षों में विभिन्न उतार-चढ़ावों से गुजरने के बाद उन्होंने मान्यता दत्त से विवाह किया। कई कानूनी लड़ाइयों, जेल की सजा और निजी असफलताओं के बावजूद वे हर बार एक मजबूत वापसी करने में सफल रहे। वर्ष 2018 में उनके संघर्षपूर्ण जीवन पर आधारित एक बायोपिक फिल्म का भी निर्माण किया गया था, जिसे दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया गया।

    वर्तमान समय में संजय दत्त हिंदी सिनेमा के साथ-साथ दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी बेहद सक्रिय हैं और नकारात्मक व मुख्य भूमिकाओं में अपनी छाप छोड़ रहे हैं। एक्शन, कॉमेडी, ड्रामा और थ्रिलर जैसे विभिन्न शैलियों की फिल्मों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के बाद अब वे अपनी आने वाली नई फिल्मों की तैयारियों में जुटे हुए हैं। चार दशक बाद भी उनका स्टारडम और प्रशंसकों के बीच उनकी लोकप्रियता लगातार बनी हुई है।

  • भीषण बाढ़ की तबाही से कराहते असम के लिए आगे आए बॉलीवुड सितारे, आलिया भट्ट और सलमान खान ने संभाला राहत मोर्चा

    भीषण बाढ़ की तबाही से कराहते असम के लिए आगे आए बॉलीवुड सितारे, आलिया भट्ट और सलमान खान ने संभाला राहत मोर्चा

    नई दिल्ली । पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख राज्य असम इन दिनों विनाशकारी बाढ़ की चपेट में है, जिससे व्यापक स्तर पर जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच फिल्म जगत की हस्तियों ने प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए मदद के प्रयास तेज कर दिए हैं। अभिनेत्री आलिया भट्ट ने सोशल मीडिया के जरिए आम जनता से आगे आकर राहत कार्यों में योगदान देने की अपील की है, वहीं अभिनेता सलमान खान की संस्था जमीनी स्तर पर राहत सामग्री पहुंचाने के काम में जुट गई है।

    असम में बने हालात पर गहरी चिंता जताते हुए आलिया भट्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक भावुक संदेश साझा किया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ की वजह से अब तक साठ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होने को मजबूर हुए हैं। हर साल असम को इस भीषण त्रासदी का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद बुनियादी स्तर पर तैयारियां नाकाफी नजर आती हैं। उन्होंने आपदा प्रभावितों को तत्काल और दीर्घकालिक पुनर्वास सहायता देने की जरूरत पर जोर दिया।

    अभिनेत्री ने स्पष्ट किया है कि वह जल्द ही जमीनी स्तर पर कार्य कर रही प्रामाणिक संस्थाओं का विवरण साझा करेंगी, ताकि लोग सही माध्यमों से आर्थिक या सामग्री के रूप में योगदान दे सकें। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों का सहारा बनने की गुजारिश की है। कई परिवारों द्वारा अपने प्रियजनों, मवेशियों और आजीविका के साधनों को खो देने की घटना बेहद पीड़ादायक है।

    दूसरी ओर, अभिनेता सलमान खान ने अपने धर्मार्थ संगठन और स्थानीय प्रशंसक समूहों के माध्यम से राहत अभियान शुरू कर दिया है। गुवाहाटी से राहत सामग्री जुटाकर बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में पहुंचाई जा रही है। विशेषकर शिवसागर जिले के ग्रामीण इलाकों में जलभराव से जूझ रहे परिवारों को तत्काल राहत के रूप में भोजन के पैकेट और दैनिक आवश्यकता का सामान वितरित किया जा रहा है।

    आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के कई प्रमुख जिलों में जलस्तर खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट, कामरूप समेत सात से अधिक जिलों के सैकड़ों गांव पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न होने से फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है। ऐसे विकट समय में सामाजिक संगठनों और मशहूर हस्तियों की ओर से की जा रही पहल से राहत कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • आवाज के जादूगर ही नहीं बड़े दिल वाले इंसान भी थे किशोर कुमार फीस लेने के बाद जो किया उसने जीत लिया हर किसी का दिल

    आवाज के जादूगर ही नहीं बड़े दिल वाले इंसान भी थे किशोर कुमार फीस लेने के बाद जो किया उसने जीत लिया हर किसी का दिल


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार अपनी अनोखी गायकी बेहतरीन अभिनय और मस्तमौला स्वभाव के लिए हमेशा याद किए जाते हैं। उनकी जिंदगी से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं जो आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं। ऐसा ही एक किस्सा उनकी दरियादिली और बड़े दिल का है जिसने यह साबित कर दिया कि उनके लिए रिश्ते और इंसानियत पैसों से कहीं ज्यादा मायने रखते थे।

    यह घटना उस समय की है जब निर्देशक सुधाकर शर्मा अपनी फिल्म का निर्माण कर रहे थे। वह चाहते थे कि फिल्म का एक खास गीत किशोर कुमार अपनी आवाज में गाएं। सुधाकर शर्मा पहले कई वर्षों तक किशोर कुमार के साथ सहायक के रूप में काम कर चुके थे इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि पुराने संबंधों को देखते हुए किशोर कुमार आसानी से तैयार हो जाएंगे।

    जब उन्होंने किशोर कुमार से फिल्म में गाना गाने का अनुरोध किया तो किशोर कुमार ने मुस्कुराते हुए कहा कि वह गीत जरूर गाएंगे लेकिन इसके लिए उन्हें पूरे 17 हजार रुपये फीस चाहिए और एक रुपया भी कम स्वीकार नहीं करेंगे। उस दौर में यह रकम काफी बड़ी मानी जाती थी। यह सुनकर सुधाकर शर्मा हैरान रह गए क्योंकि उन्हें लगा था कि वर्षों पुराने रिश्ते की वजह से फीस में रियायत मिल सकती है।

    इसके बावजूद उन्होंने किसी तरह रकम की व्यवस्था की और रिकॉर्डिंग की तैयारी पूरी की। तय समय पर किशोर कुमार स्टूडियो पहुंचे और पूरे मन से गीत रिकॉर्ड किया। बताया जाता है कि गीत की रिकॉर्डिंग पूरी होने के बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि जब इतने पैसे लिए हैं तो एक अंतरा और रिकॉर्ड करवा लो। स्टूडियो में मौजूद सभी लोग उनकी बात सुनकर मुस्कुरा उठे।

    रिकॉर्डिंग खत्म होने के बाद सुधाकर शर्मा ने 17 हजार रुपये किशोर कुमार को सौंप दिए। किशोर कुमार ने पैसे अपने पास रख लिए लेकिन जैसे ही वह स्टूडियो से निकलने लगे उन्होंने चुपचाप पूरी रकम वापस सुधाकर शर्मा को लौटा दी। इतना ही नहीं उन्होंने उनसे कहा कि किसी को भी यह मत बताना कि मैंने पैसे वापस कर दिए हैं। घर जाकर यह रकम अपनी पत्नी को दे देना क्योंकि फिल्म बनाना आसान काम नहीं होता और परिवार की जिम्मेदारियां भी साथ चलती हैं।

    किशोर कुमार का यह व्यवहार देखकर सुधाकर शर्मा भावुक हो गए। उन्हें समझ आ गया कि फीस मांगना शायद केवल उनकी आर्थिक स्थिति को समझने और उनकी मदद करने का एक तरीका था। बिना किसी दिखावे के सहायता करना किशोर कुमार की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक थी।

    किशोर कुमार ने अपने करियर में हजारों गीत गाए और राजेश खन्ना अमिताभ बच्चन देव आनंद ऋषि कपूर जैसे कई बड़े सितारों की आवाज बने। उन्हें आठ फिल्मफेयर पुरस्कार मिले और आज भी उनके गीत हर पीढ़ी के लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। लेकिन उनकी महानता केवल उनकी गायकी तक सीमित नहीं थी बल्कि उनके व्यक्तित्व में छिपी संवेदनशीलता और उदारता भी उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती है।

    आज भी जब किशोर कुमार का नाम लिया जाता है तो उनकी अमर आवाज के साथ ऐसे प्रेरणादायक किस्से भी याद आते हैं जो बताते हैं कि असली महानता केवल सफलता से नहीं बल्कि बड़े दिल और नेक इंसानियत से हासिल होती है।

  • मां की एक सलाह ने बदल दी जिंदगी धर्मेंद्र नहीं चाहते थे कि हेमा मालिनी राजनीति में जाएं एक्ट्रेस ने सुनाया दिलचस्प किस्सा

    मां की एक सलाह ने बदल दी जिंदगी धर्मेंद्र नहीं चाहते थे कि हेमा मालिनी राजनीति में जाएं एक्ट्रेस ने सुनाया दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की ड्रीम गर्ल और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता हेमा मालिनी ने अपने राजनीतिक सफर को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया था तब उनके पति और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र इसके पक्ष में नहीं थे। इसका कारण किसी राजनीतिक मतभेद से ज्यादा उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता थी। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान होने वाली भारी भीड़ और लगातार हेलिकॉप्टर से यात्रा करना धर्मेंद्र को हमेशा परेशान करता था।

    हेमा मालिनी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से उन्हें अलग अलग राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए भेजा जाता था जहां हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती थी। ऐसी परिस्थितियों को देखकर धर्मेंद्र हमेशा चिंतित रहते थे। वह बार बार उनसे सुरक्षित रहने की सलाह देते और पूछते कि क्या इतना जोखिम उठाना वास्तव में जरूरी है। चुनाव प्रचार के दौरान हेलिकॉप्टर से लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने पर भी उन्हें काफी चिंता रहती थी। हालांकि हेमा मालिनी का कहना है कि पार्टी की जिम्मेदारी होने के कारण उन्हें अपना दायित्व निभाना पड़ता था।

    उन्होंने बताया कि राजनीति की ओर उनका झुकाव वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ जब उन्होंने अभिनेता और भाजपा नेता विनोद खन्ना के लिए चुनाव प्रचार किया था। उसी दौरान उन्होंने पहली बार इतनी बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन और स्नेह देखा। उन्होंने कहा कि जब भी चुनावी सभाओं में विशाल भीड़ उमड़ती थी तो उन्हें विश्वास ही नहीं होता था कि इतने लोग उन्हें देखने और सुनने आए हैं। लोगों का यह प्रेम उनके लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक अनुभव था।

    हेमा मालिनी ने यह भी बताया कि शुरुआत में उन्होंने राजनीति में आने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। लेकिन उनकी मां ने उन्हें समझाया कि अब केवल अभिनय तक सीमित रहने के बजाय देश के लिए भी योगदान देने का समय आ गया है। उनकी मां ने उन्हें बताया कि भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे बड़े और सम्मानित नेता हैं तथा यह अवसर देश सेवा का माध्यम बन सकता है। मां की यह बात उनके मन को छू गई और उन्होंने राजनीति में सक्रिय होने का निर्णय ले लिया।

    एक्ट्रेस ने अपने पहले चुनाव से जुड़ा एक और रोचक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने पार्टी के सामने स्पष्ट शर्त रखी थी कि यदि वह चुनाव लड़ेंगी तो केवल मथुरा लोकसभा सीट से ही लड़ेंगी क्योंकि वह भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त हैं और मथुरा से उनका विशेष आध्यात्मिक जुड़ाव है। बाद में पार्टी ने उनकी इच्छा का सम्मान किया और उन्हें मथुरा से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने इस दौरान दिवंगत नेताओं सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के सहयोग को भी याद करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

    फिल्मी दुनिया में दशकों तक अपनी अभिनय प्रतिभा से दर्शकों का दिल जीतने वाली हेमा मालिनी आज राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में मनोरंजन और जनसेवा दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका यह अनुभव बताता है कि परिवार की चिंताओं और व्यक्तिगत दुविधाओं के बावजूद यदि उद्देश्य स्पष्ट हो तो जीवन में नए रास्ते अपनाए जा सकते हैं।

  • 'लवयात्री' के बाद करियर में आया ठहराव, आयुष शर्मा ने संघर्ष और एक्टिंग स्कूल लौटने का किया खुलासा

    'लवयात्री' के बाद करियर में आया ठहराव, आयुष शर्मा ने संघर्ष और एक्टिंग स्कूल लौटने का किया खुलासा

    नई दिल्ली । अभिनेता आयुष शर्मा ने अपने फिल्मी करियर के संघर्ष को लेकर खुलकर बात करते हुए बताया है कि पहली फिल्म के बाद उन्हें उम्मीद के अनुरूप काम नहीं मिला। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें विश्वास था कि डेब्यू के बाद नए प्रोजेक्ट्स के प्रस्ताव आएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी अनुभव ने उन्हें अपने अभिनय पर दोबारा काम करने और खुद को बेहतर बनाने के लिए फिर से एक्टिंग स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया।

    आयुष शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत फिल्म ‘लवयात्री’ से की थी। इस फिल्म से उन्हें काफी उम्मीदें थीं और उन्हें लगा था कि इसके बाद उन्हें अलग-अलग तरह की फिल्मों के प्रस्ताव मिलेंगे। हालांकि, उनकी अपेक्षाओं के विपरीत ऐसा नहीं हुआ। उनका कहना है कि पहली फिल्म में उनके अभिनय को वैसी सराहना नहीं मिली, जिसकी उन्होंने उम्मीद की थी। इसके चलते उन्हें अपने करियर की दिशा पर दोबारा गंभीरता से विचार करना पड़ा।

    उन्होंने कहा कि अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए केवल पहली फिल्म पर्याप्त नहीं होती, बल्कि लगातार अच्छा प्रदर्शन और दर्शकों की स्वीकृति भी जरूरी होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने दोबारा एक्टिंग स्कूल जाकर अपनी कला को और निखारने का फैसला किया। उनका मानना है कि एक कलाकार के लिए सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती और हर अनुभव उसे बेहतर बनने का अवसर देता है।

    आयुष शर्मा ने यह भी बताया कि उनके करियर के शुरुआती दौर में अभिनेता सलमान खान ने उन्हें लगातार मार्गदर्शन दिया। फिल्मों के चयन से लेकर अभिनय से जुड़े कई पहलुओं पर उन्हें सलाह मिलती रही। उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग का अनुभव कम होने के कारण उन्होंने वरिष्ठ कलाकार के रूप में सलमान खान के सुझावों को हमेशा गंभीरता से लिया। बाद में दोनों ने फिल्म ‘अंतिम: द फाइनल ट्रुथ’ में साथ काम किया, जिससे उन्हें उम्मीद थी कि उनके करियर को नई गति मिलेगी।

    उन्होंने स्वीकार किया कि ‘अंतिम’ के बाद भी उन्हें वैसी फिल्में नहीं मिलीं, जैसी वे करना चाहते थे। उनके अनुसार फिल्म उद्योग में अवसर काफी हद तक बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर निर्भर करते हैं। यदि किसी कलाकार की फिल्में व्यावसायिक रूप से अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पातीं, तो नए अवसर सीमित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे लगातार अच्छे किरदारों की तलाश में हैं और भविष्य में चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाना चाहते हैं।

    आयुष शर्मा का मानना है कि फिल्मी करियर में संघर्ष हर कलाकार के सफर का हिस्सा होता है। उन्होंने कहा कि कठिन समय के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने कौशल को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। उनका विश्वास है कि लगातार मेहनत और सही अवसर मिलने पर कलाकार अपनी पहचान बना सकता है। इसी सोच के साथ वे भविष्य की परियोजनाओं का इंतजार कर रहे हैं और अपने अभिनय के माध्यम से दर्शकों का भरोसा जीतना चाहते हैं।

    आयुष शर्मा ने वर्ष 2018 में फिल्म ‘लवयात्री’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने ‘अंतिम: द फाइनल ट्रुथ’ और ‘रुसलान’ जैसी फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं। हालांकि अब तक उनका सफर अपेक्षित सफलता तक नहीं पहुंच सका है, लेकिन उनका कहना है कि वे अपने अभिनय को लगातार बेहतर बनाने और नए अवसरों के लिए पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

  • वीकेंड पर क्या देखें यहां है इस हफ्ते रिलीज होने वाली फिल्मों की पूरी लिस्ट एक्शन कॉमेडी रोमांस और फैमिली ड्रामा सब कुछ मिलेगा

    वीकेंड पर क्या देखें यहां है इस हफ्ते रिलीज होने वाली फिल्मों की पूरी लिस्ट एक्शन कॉमेडी रोमांस और फैमिली ड्रामा सब कुछ मिलेगा

    नई दिल्ली । अगर आप वीकेंड पर परिवार या दोस्तों के साथ थिएटर में नई फिल्म देखने की योजना बना रहे हैं तो यह सप्ताह आपके लिए शानदार रहने वाला है। 27 जुलाई से 2 अगस्त के बीच बड़े पर्दे पर एक्शन सुपरहीरो कॉमेडी फैमिली ड्रामा और रोमांस से भरपूर कई फिल्में रिलीज होने जा रही हैं। हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक अलग अलग जॉनर की फिल्मों के साथ दर्शकों को मनोरंजन का भरपूर मौका मिलेगा।

    स्पाइडर मैन ब्रांड न्यू डे
    रिलीज डेट – 30 जुलाई
    इस सप्ताह की सबसे बड़ी रिलीज हॉलीवुड की सुपरहीरो फिल्म स्पाइडर मैन ब्रांड न्यू डे है। फिल्म में पीटर पार्कर अपनी सुपरहीरो पहचान से दूर एक सामान्य कॉलेज छात्र की जिंदगी जीने की कोशिश करता है। लेकिन जब उसके करीबियों पर नया खतरा मंडराता है तो उसे फिर से स्पाइडर मैन बनकर दुनिया की रक्षा के लिए मैदान में उतरना पड़ता है। एक्शन और सुपरहीरो फिल्मों के प्रशंसकों के लिए यह फिल्म खास आकर्षण होगी।

    भाई तेरा स्टार है
    रिलीज डेट – 30 जुलाई
    राघव जुयाल अभिनीत यह फिल्म कॉमेडी और फैमिली ड्रामा का अनोखा मिश्रण है। कहानी एक ऐसे अभिनेता की है जो क्रिकेट सट्टेबाजी के कारण कर्ज में फंस जाता है। मुश्किलों से निकलने की कोशिश में बोला गया एक झूठ उसे और उसके परिवार को हास्यास्पद और रोमांचक घटनाओं के बीच पहुंचा देता है। राघव जुयाल की कॉमिक टाइमिंग इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत मानी जा रही है।

    ओह माय डॉग
    नई रिलीज डेट – 7 अगस्त
    यह फिल्म पहले 31 जुलाई को रिलीज होने वाली थी लेकिन निर्माताओं ने इसकी रिलीज टाल दी है। अब यह 7 अगस्त को सिनेमाघरों में आएगी। फिल्म एक छोटे बच्चे और एक बेघर कुत्ते के बीच बने भावनात्मक रिश्ते की कहानी है। पेट लवर्स और पारिवारिक दर्शकों के लिए यह एक भावुक और प्रेरणादायक फिल्म मानी जा रही है।

    दिल दीवाना हो गया
    रिलीज डेट – 31 जुलाई
    रोमांस और फैमिली ड्रामा से भरपूर यह फिल्म राहुल नैना और राज की जिंदगी के इर्द गिर्द घूमती है। प्यार विश्वास त्याग और रिश्तों की खूबसूरती को दर्शाती यह म्यूजिकल फिल्म पूरे परिवार के साथ देखने के लिए उपयुक्त मानी जा रही है। साफ सुथरी कहानी और पारिवारिक भावनाओं के कारण यह फिल्म हर आयु वर्ग के दर्शकों को पसंद आ सकती है।

    इस सप्ताह सिनेमाघरों में हर वर्ग के दर्शकों के लिए कुछ न कुछ खास मौजूद है। जहां सुपरहीरो फिल्मों के प्रशंसकों के लिए स्पाइडर मैन सबसे बड़ा आकर्षण रहेगा वहीं कॉमेडी पसंद करने वालों के लिए भाई तेरा स्टार है और पारिवारिक दर्शकों के लिए दिल दीवाना हो गया अच्छी पसंद साबित हो सकती है। हालांकि ओह माय डॉग देखने के लिए दर्शकों को अब 7 अगस्त तक इंतजार करना होगा।

  • रावण बनने के लिए यश का अनोखा तरीका बड़े स्पीकर्स पर बजाते थे शिव भक्ति के गाने सेट पर बात करना भी हो जाता था मुश्किल

    रावण बनने के लिए यश का अनोखा तरीका बड़े स्पीकर्स पर बजाते थे शिव भक्ति के गाने सेट पर बात करना भी हो जाता था मुश्किल


    नई दिल्ली । फिल्म रामायण के बहुप्रतीक्षित ट्रेलर लॉन्च के दौरान अभिनेता यश ने शूटिंग से जुड़ा एक दिलचस्प अनुभव साझा किया। रावण का किरदार निभा रहे यश ने बताया कि वह सेट पर बड़े स्पीकर्स लेकर आते थे और तेज आवाज में शिव भक्ति के गीत बजाते थे। उन्होंने हंसते हुए कहा कि उनकी इस आदत से पूरे सेट का माहौल बदल जाता था और कई बार लोगों को बातचीत करने में भी दिक्कत होती थी।

    सैन डिएगो कॉमिक कॉन में फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर निर्देशक नितेश तिवारी निर्माता नमित मल्होत्रा और यश मौजूद रहे। बातचीत के दौरान जब यश से पूछा गया कि वह हर दिन खुद को रावण के किरदार में कैसे ढालते थे तो उन्होंने बताया कि जैसे ही वह रावण का विशाल मुकुट पहनते थे वह अपने किरदार के भाव में पहुंच जाते थे। इसके साथ ही संगीत भी उनके लिए इस तैयारी का अहम हिस्सा था।

    इसी दौरान निर्देशक नितेश तिवारी ने यश को उनके तेज म्यूजिक की याद दिलाई। इस पर यश ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्होंने एक तरह से पूरे सेट का माहौल बदल दिया था। वह बड़े स्पीकर्स पर पूरी आवाज में गाने चलाते थे ताकि अपने किरदार की मानसिक स्थिति में बने रह सकें।

    यश ने बताया कि वह खास तौर पर भगवान शिव की भक्ति से जुड़े गीत सुनते थे। उनके अनुसार रावण भगवान शिव का परम भक्त था इसलिए वह उसी भक्ति और ऊर्जा को महसूस करना चाहते थे। उनका मानना था कि इस तरह का माहौल उन्हें अपने अभिनय में गहराई लाने में मदद करता था। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि तेज संगीत के कारण सेट पर मौजूद अन्य लोगों को बातचीत करने में परेशानी होती थी।

    रणबीर कपूर ने भी इस दौरान यश की तारीफ करते हुए कहा कि भले ही पहले भाग में उनके और यश के साथ कोई दृश्य नहीं है लेकिन जिन कलाकारों ने यश के साथ काम किया उन्होंने बताया कि उनका व्यक्तित्व और उनकी तैयारी पूरे सेट की ऊर्जा बदल देती थी। रणबीर ने कहा कि यश का प्रभाव इतना मजबूत था कि उनके किरदार की झलक शूटिंग के माहौल में भी महसूस होती थी।

    फिल्म रामायण का पहला भाग इस साल दिवाली पर रिलीज होने वाला है। पहले भाग में राम और रावण आमने सामने नहीं दिखाई देंगे जबकि दोनों के बीच महायुद्ध दूसरे भाग में दिखाया जाएगा जो वर्ष 2027 में रिलीज होगा। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम के रूप में और यश रावण के किरदार में नजर आएंगे। इसके अलावा साई पल्लवी सीता सनी देओल हनुमान काजल अग्रवाल मंदोदरी रवि दुबे लक्ष्मण अरुण गोविल दशरथ और लारा दत्ता कैकेयी सहित कई कलाकार अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे।

  • जो डर गया वो मर गया सलमान खान के क्रिप्टिक पोस्ट ने बढ़ाई फैंस की बेचैनी सोशल मीडिया पर मचा बवाल

    जो डर गया वो मर गया सलमान खान के क्रिप्टिक पोस्ट ने बढ़ाई फैंस की बेचैनी सोशल मीडिया पर मचा बवाल


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने अपने आधिकारिक अकाउंट पर जिम में वर्कआउट करते हुए एक तस्वीर साझा की जिसके साथ लिखा कि सलमान खान डर गया हम्म जो डर गया वो मर गया। इस छोटे से संदेश ने सोशल मीडिया पर जबरदस्त हलचल मचा दी और कुछ ही समय में यह पोस्ट तेजी से वायरल होने लगा। प्रशंसकों ने इस पोस्ट के अलग अलग मायने निकाले और कमेंट सेक्शन में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।

    सलमान खान पिछले कुछ दिनों से लगातार अपने सोशल मीडिया पोस्ट के कारण चर्चा में बने हुए हैं। इससे पहले उन्होंने छात्रों से जुड़े मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए युवाओं के समर्थन में संदेश साझा किया था। उस पोस्ट में उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों की परेशानियों पर सहानुभूति जताई थी और न्यायपूर्ण व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसके बाद उन्होंने एक और पोस्ट में आंदोलन कर रहे छात्रों से संयम बनाए रखने और सकारात्मक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील भी की थी।

    अब उनके नए पोस्ट ने लोगों की जिज्ञासा और बढ़ा दी है। जिम में पसीना बहाते हुए साझा की गई तस्वीर के साथ लिखा गया संदेश कई लोगों को प्रेरणादायक लगा तो कुछ ने इसे एक रहस्यमयी संकेत के रूप में देखा। हालांकि सलमान खान ने इस पोस्ट के पीछे किसी विशेष संदर्भ का उल्लेख नहीं किया है लेकिन उनके प्रशंसकों ने इसे अपने अपने अंदाज में समझा।

    पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर हजारों यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने लिखा कि भाईजान को कोई रिप्लेस नहीं कर सकता जबकि कुछ ने कहा कि सलमान खान हमेशा अपने अंदाज से लोगों का ध्यान खींच लेते हैं। कई प्रशंसकों ने उन्हें बॉलीवुड का सबसे दमदार स्टार बताते हुए लिखा कि उनका आत्मविश्वास और अंदाज ही उन्हें सबसे अलग बनाता है। अभिनेत्री राखी सावंत ने भी इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भाई लिखकर अपना समर्थन जताया।

    सलमान खान का सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रभाव माना जाता है। उनके हर पोस्ट पर लाखों लाइक्स और हजारों कमेंट्स आते हैं। यही वजह है कि उनका कोई भी संदेश कुछ ही मिनटों में इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन जाता है। फैंस उनके हर नए पोस्ट के पीछे छिपे संदेश को समझने की कोशिश करते रहते हैं और यही बात उन्हें सोशल मीडिया पर सबसे चर्चित सितारों में शामिल करती है।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो सलमान खान आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाले हैं। उनकी फिल्म मातृभूमि को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्साह है। इसके अलावा वह साउथ फिल्म इंडस्ट्री की एक बड़ी परियोजना की शूटिंग में भी व्यस्त हैं जिसमें उनके साथ अभिनेत्री नयनतारा मुख्य भूमिका निभाती दिखाई देंगी। यह फिल्म अगले वर्ष ईद के अवसर पर रिलीज होने की संभावना है।

    सलमान खान का नया पोस्ट चाहे प्रेरणादायक संदेश हो या सिर्फ एक स्टाइलिश कैप्शन लेकिन इतना तय है कि उन्होंने एक बार फिर अपने फैंस का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सोशल मीडिया पर उनके इस रहस्यमयी संदेश को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है और प्रशंसक अब उनके अगले पोस्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

  • अनकिस्ड गर्ल ऑफ इंडिया बनीं निम्मी एक फैसले ने दिलाई दुनिया भर में पहचान हॉलीवुड के ऑफर भी लौटाए

    अनकिस्ड गर्ल ऑफ इंडिया बनीं निम्मी एक फैसले ने दिलाई दुनिया भर में पहचान हॉलीवुड के ऑफर भी लौटाए


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की चर्चित अभिनेत्री निम्मी ने अपने अभिनय और मासूमियत से करोड़ों दर्शकों का दिल जीता। ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों के दौर से लेकर रंगीन सिनेमा तक उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। दिलीप कुमार राज कपूर और भारत भूषण जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम करने वाली निम्मी उस दौर की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाती थीं। उनकी खूबसूरती और सादगी के किस्से आज भी फिल्म प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं।

    निम्मी का असली नाम नवाब बानो था। फिल्म निर्माता और निर्देशक राज कपूर ने उन्हें अपनी चर्चित फिल्म बरसात के जरिए फिल्मी दुनिया में मौका दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कई यादगार फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेरा। उनकी सहज अदायगी और भावपूर्ण अभिनय ने उन्हें उस दौर की सबसे पसंदीदा अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया।

    निम्मी के करियर का एक बेहद चर्चित किस्सा फिल्म आन से जुड़ा है। इस फिल्म का प्रीमियर लंदन के रियाल्टो थिएटर में आयोजित किया गया था जहां कई अंतरराष्ट्रीय मेहमान और हॉलीवुड से जुड़े कलाकार भी मौजूद थे। इसी कार्यक्रम के दौरान हॉलीवुड अभिनेता एरल फ्लिन ने पश्चिमी परंपरा के अनुसार निम्मी का हाथ चूमने की कोशिश की। लेकिन भारतीय संस्कारों में विश्वास रखने वाली निम्मी ने विनम्रता से ऐसा करने से इनकार कर दिया। उनका यह व्यवहार वहां मौजूद लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया।

    इस घटना के बाद विदेशी मीडिया ने निम्मी को अनकिस्ड गर्ल ऑफ इंडिया का नाम दिया। देखते ही देखते यह उपनाम पूरी दुनिया में उनकी पहचान बन गया। उस दौर में यह खबर अंतरराष्ट्रीय अखबारों की सुर्खियां बनी और निम्मी की लोकप्रियता भारत के बाहर भी तेजी से बढ़ गई।

    लंदन प्रीमियर के बाद निम्मी के सामने हॉलीवुड से चार फिल्मों के प्रस्ताव आए। किसी भी भारतीय अभिनेत्री के लिए उस समय यह बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। हालांकि निम्मी ने बिना किसी हिचकिचाहट के इन सभी प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया। इसकी वजह केवल एक थी। वह अपनी व्यक्तिगत मर्यादाओं और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहती थीं। उस समय हॉलीवुड फिल्मों में किसिंग और अंतरंग दृश्यों का होना सामान्य माना जाता था जबकि निम्मी ऐसे दृश्य करने के पक्ष में नहीं थीं।

    निम्मी का मानना था कि सफलता तभी सार्थक है जब वह अपने सिद्धांतों और आत्मसम्मान के साथ मिले। उन्होंने कभी लोकप्रियता या बड़े अवसरों के लिए अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया। यही कारण है कि आज भी उन्हें केवल एक सफल अभिनेत्री ही नहीं बल्कि मजबूत व्यक्तित्व वाली कलाकार के रूप में भी याद किया जाता है।

    अपने फिल्मी सफर में निम्मी ने बरसात दीदार आन दाग कुंदन भाई भाई उड़नखटोला और बसंत बहार जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया। उनकी फिल्मों और अभिनय ने हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी। निम्मी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्ची पहचान केवल सफलता से नहीं बल्कि अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर अडिग रहने से भी बनती है। यही वजह है कि दशकों बाद भी उनका नाम सम्मान और गर्व के साथ लिया जाता है।