Tag: Bollywood

  • डॉन 3’ विवाद में नया ट्विस्ट: सलमान खान की मध्यस्थता की खबर निकली अफवाह, रणवीर-फरहान विवाद पर बड़ा खुलासा

    डॉन 3’ विवाद में नया ट्विस्ट: सलमान खान की मध्यस्थता की खबर निकली अफवाह, रणवीर-फरहान विवाद पर बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली । बहुचर्चित फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह फिल्म से जुड़े कलाकारों के बीच मतभेद नहीं बल्कि सलमान खान की कथित मध्यस्थता को लेकर फैली अफवाहें हैं। पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा तेज थी कि सुपरस्टार सलमान खान ने रणवीर सिंह और निर्देशक फरहान अख्तर के बीच चल रहे कथित विवाद को सुलझाने के लिए हस्तक्षेप किया है, लेकिन अब सामने आई रिपोर्ट्स ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

    सूत्रों के अनुसार सलमान खान का इस पूरे मामले से कोई संबंध नहीं है और न ही उन्होंने किसी भी स्तर पर रणवीर सिंह या फरहान अख्तर के बीच सुलह कराने की कोई कोशिश की है। इस स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि यह खबर केवल अटकलों पर आधारित थी और इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। इसके साथ ही ‘डॉन 3’ को लेकर चल रही चर्चाओं में एक नया मोड़ आ गया है।

    दरअसल ‘डॉन 3’ की घोषणा वर्ष 2023 में की गई थी, जब रणवीर सिंह को इस प्रतिष्ठित फ्रेंचाइजी का नया चेहरा घोषित किया गया था। घोषणा के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह देखा गया था, लेकिन इसके बाद से प्रोजेक्ट लगातार देरी का सामना कर रहा है। इस देरी के पीछे मुख्य कारणों में शेड्यूलिंग और अन्य फिल्मों की प्रतिबद्धताएं बताई जा रही हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, निर्देशक फरहान अख्तर और निर्माता रितेश सिधवानी की ओर से प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन रणवीर सिंह की पहले से तय फिल्मों की व्यस्तता के कारण शूटिंग शेड्यूल प्रभावित होता रहा। बताया जा रहा है कि उस समय रणवीर सिंह ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ और अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स में व्यस्त थे, जिसके चलते ‘डॉन 3’ की शूटिंग शुरू नहीं हो सकी।

    इसके अलावा यह भी सामने आया है कि रणवीर सिंह ने बाद में अन्य फिल्मों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया, जिसमें ‘धुरंधर’ जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसी वजह से ‘डॉन 3’ की शुरुआत और भी पीछे खिसक गई। सूत्रों का कहना है कि दिसंबर 2025 में रणवीर सिंह ने निर्माताओं को अपने फैसले से अवगत कराया, जिससे फिल्म की तैयारियों पर असर पड़ा।

    इस घटनाक्रम के बाद प्रोडक्शन हाउस को कथित तौर पर आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है और कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि करोड़ों रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है, जो लोकेशन, प्री-प्रोडक्शन और तकनीकी तैयारियों पर खर्च किया गया था। इस मामले को लेकर इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों तक भी चर्चा पहुंची, हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई है।

    कुल मिलाकर ‘डॉन 3’ फिलहाल अनिश्चितताओं के दौर में है, जहां एक ओर अफवाहों का बाजार गर्म है तो दूसरी ओर फिल्म की वास्तविक स्थिति को लेकर स्पष्टता की कमी बनी हुई है। सलमान खान की कथित एंट्री को लेकर चल रही चर्चाएं अब थम गई हैं, लेकिन फिल्म के भविष्य और इसकी शूटिंग को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं।

  • संघर्ष से सफलता तक: ‘सारांश’ के 42 साल पर अनुपम खेर ने सुनाई सपनों, मेहनत और पहचान बनने की कहानी

    संघर्ष से सफलता तक: ‘सारांश’ के 42 साल पर अनुपम खेर ने सुनाई सपनों, मेहनत और पहचान बनने की कहानी

    नई दिल्ली।हिंदी सिनेमा में कुछ कहानियां केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वे संघर्ष, मेहनत और सपनों की जीवंत मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी दिग्गज अभिनेता Anupam Kher की है, जिन्होंने सीमित साधनों और बड़े सपनों के साथ अपने सफर की शुरुआत की और आज भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित कलाकारों में अपनी जगह बनाई। उनकी पहली फिल्म Saaransh के 42 साल पूरे होने के मौके पर अभिनेता ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए एक भावुक संदेश साझा किया, जिसने एक बार फिर उनके संघर्षपूर्ण सफर को चर्चा में ला दिया।

    वर्ष 1984 में रिलीज हुई इस फिल्म ने अनुपम खेर को फिल्म इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाई थी। खास बात यह थी कि अपने करियर की शुरुआत में ही उन्होंने उम्र से कहीं अधिक बड़े किरदार को निभाकर अभिनय की ऐसी छाप छोड़ी, जिसे आज भी याद किया जाता है। यह फिल्म उनके करियर के लिए केवल शुरुआत नहीं थी, बल्कि एक ऐसे सफर की नींव बनी जिसने आगे चलकर उन्हें सैकड़ों फिल्मों तक पहुंचाया।

    अपने अनुभव साझा करते हुए अभिनेता ने बताया कि जब वह सपनों की नगरी मुंबई पहुंचे थे, तब उनके पास केवल 37 रुपए थे। न कोई बड़ा सहारा था और न ही इंडस्ट्री में मजबूत पहचान। लेकिन उनके पास एक चीज थी—अपने सपनों पर अटूट विश्वास। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि व्यक्ति मेहनत और धैर्य बनाए रखे तो सफलता की राह बनाई जा सकती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि बीते चार दशकों में दर्शकों, निर्देशकों, निर्माताओं और साथी कलाकारों से उन्हें जो प्यार मिला, वह उनकी कल्पना से कहीं ज्यादा था। अपने सफर को याद करते हुए उन्होंने गर्व के साथ कहा कि अब तक वे 551 फिल्मों का हिस्सा बन चुके हैं। यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, समर्पण और अभिनय के प्रति उनके जुनून की कहानी भी बयां करता है।

    अभिनेता ने अपने सफर में साथ देने वाले लोगों का भी आभार व्यक्त किया और उन फिल्मकारों को विशेष धन्यवाद दिया, जिनका उनके करियर में महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने अपने शुरुआती दौर की कई यादों को भी साझा किया और बताया कि फिल्म रिलीज के समय परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन समय ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था।

    आज भी जब भारतीय सिनेमा में दमदार अभिनय और यादगार किरदारों की बात होती है तो उनकी पहली फिल्म का नाम जरूर सामने आता है। उनका सफर उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। यह कहानी बताती है कि सफलता की शुरुआत अक्सर छोटी होती है, लेकिन हौसले बड़े होने चाहिए।

  • बेटे वरुण संग आखिरी फिल्म के बाद रिटायरमेंट की तैयारी ने फैंस को किया भावुक

    बेटे वरुण संग आखिरी फिल्म के बाद रिटायरमेंट की तैयारी ने फैंस को किया भावुक

    नई दिल्ली ।   बॉलीवुड को सालों तक अपनी कॉमेडी फिल्मों से हंसाने वाले मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. वे अब फिल्में बनाना छोड़ रहे हैं, यानी वे रिटायर होने जा रहे हैं. उनकी आखिरी फिल्म बेटे वरुण धवन के साथ ‘है जवानी तो इश्क होना है’ होगी. अपनी रिटायरमेंट का ऐलान उन्होंने हाल ही में पीवीआर के एक खास इवेंट में किया. इस खबर को सुनकर इंडस्ट्री के कई लोग और उनके फैंस को झटका लगा है, क्योंकि अब डेविड धवन फिल्मों का डायरेक्शन करते हुए नजर नहीं आएंगे. उन्होंने अपने अब तक के करियर में करीब 45 फिल्मों का निर्देशन किया है. डायरेक्टर ने अपने करियर की शुरुआत साल 1989 में आई फिल्म ‘ताकतवर’ से की थी. डेविड धवन ने बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान का भी कमबैक कराया था.
    डेविड धवन क्यों हुए इमोशनल
    फेमस डायरेक्टर डेविड धवन इन दिनों अपने बेटे की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. इस फिल्म के ट्रेलर लॉन्च में डेविड धवन भी नजर आए थे. इस दौरान मीडिया से बात करते हुए वे इमोशनल हो गए. उन्होंने ट्रेलर इवेंट में बेटे वरुण धवन की जमकर तारीफ की. डायरेक्टर ने कहा, ‘जब मैं साल 2022 में बीमार पड़ा था, तो वह मेरे साथ अस्पताल में सोया करता था.’ पिता को इमोशनल देख एक्टर वरुण धवन ने उन्हें शांत किया. वरुण धवन की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ सिनेमाघरों में 5 जून को रिलीज होगी, जो डेविड धवन की आखिरी फिल्म होगी.

    डेविड धवन ने फिल्म मेकिंग से लिया संन्यास?

    बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने 23 मई 2026 को डायरेक्शन की दुनिया को अलविदा कह दिया है. उन्होंने इसका ऐलान एक इवेंट के दौरान किया. इस पार्टी में बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान, करण जौहर, पूजा हेगड़े, वरुण धवन और चंकी पांडे जैसे सितारे शामिल हुए थे. दरअसल, डायरेक्टर की रिटायरमेंट की खबर की पुष्टि करण जौहर ने की है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी शेयर की, जिसमें उन्होंने लिखा, ‘कल जब मैं डेविड जी के सेलिब्रेशन में गया, तो उन्होंने मुझे बताया कि यह ‘है जवानी तो इश्क होना है’ उनकी आखिरी फिल्म होने वाली है.’
    डेविड धवन ने बॉलीवुड को दी कई हिट कॉमेडी
    फेमस डायरेक्टर डेविड धवन को बॉलीवुड के सबसे बड़े कॉमेडी डायरेक्टर्स में गिना जाता है. उन्होंने 90 और 2000 के दशक में एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दी हैं, जिन्होंने दर्शकों को खूब हंसाया है. उन्होंने इंडस्ट्री को राजा बाबू, जुड़वा, पार्टनर, मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी, हीरो नंबर 1, हसीना मान जाएगी, मुझसे शादी करोगी, कुली नंबर 1 और मैंने प्यार किया जैसी कई फिल्में दी हैं।
    कई बड़े कलाकारों संग किया काम
    डेविड धवन को बॉलीवुड इंडस्ट्री में कॉमेडी फिल्मों के सबसे सफल निर्देशकों में माना जाता है. उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में कई बड़े सितारों संग काम किया है. इसमें अमिताभ बच्चन, गोविंदा, सलमान खान, अक्षय कुमार, तापसी पन्नू, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर जैसे कई सितारे शामिल हैं. डेविड धवन ने करीब 6 साल के ब्रेक के बाद ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के साथ डायरेक्शन में वापसी की है. इसमें उनके बेटे वरुण धवन के अलावा मृणाल ठाकुर, पूजा हेगड़े, मौनी रॉय, राकेश बेदी, राजेश कुमार और मनीष पॉल जैसे सितारे नजर आएंगे. सिनेमाघरों में यह फिल्म 5 जून को रिलीज होगी.
  • मीना कुमारी के आखिरी दिनों का सबसे भावुक किस्सा, मौत के बिस्तर पर मोहम्मद रफी से सुना था अपना पसंदीदा गीत

    मीना कुमारी के आखिरी दिनों का सबसे भावुक किस्सा, मौत के बिस्तर पर मोहम्मद रफी से सुना था अपना पसंदीदा गीत


    नई दिल्ली ।  हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय और खूबसूरती से छाप छोड़ने वाली मीना कुमारी का आखिरी वक्त बुरा गुजरा। एक्ट्रेस लीवर सिरोसिस से पीड़ित थीं। और लंबे इलाज के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। लेकिन जब वो बीमार, बिस्तर पर पड़ी थीं तो अक्सर एक गाना सुना करती थीं। उन्हें हमेशा से लगता था कि ये गाना उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा हुआ है।
    वो एक ऐसा गीत था जो तकलीफ भरे दिनों में मीना कुमारी को राहत की सांस देता था। मीना जब-जब इस गीत को गुनगुनाया करतीं तो अपने आधे ग़मों को भूल जाया करती थीं। मीना कुमारी का इस गाने से इतना गहरा जुड़ाव था कि जब मोहम्मद रफी उनसे मिलने आए तो एक्ट्रेस ने उनसे ये गाना गाने की रिक्वेस्ट की थी।
    बुरे दिनों में मीना कुमारी का साथी था ये गाना
    1961 में मीना कुमारी की एक रिलीज हुई थी जिसका नाम था प्यार का सागर। इस फिल्म में मीना के साथ एक्टर राजेंद्र कुमार लीड रोल में थे। इस फिल्म में वैसे कई खूबसूरत गाने थे लेकिन ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले’। इस गाने को मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने गाया था। ये गाना मीना कुमारी के दर्द की दवा बन गया था। अपना अकेलापन, दर्द भूलने के लिए अक्सर एक्ट्रेस इसी गाने को गुनगुनाया करती थीं।
    ये वो समय था जब मीना बहुत बीमार पड़ चुकी थीं, मौत से लड़ रही थीं। उन्हें फिल्मों के सेट पर नहीं बल्कि घर के एक कमरे में पड़े बिस्तर पर बीमार हालत में देखा जाता था। उनके आखिरी समय में फिल्मी जगत के कई कलाकार उनसे मिलने पहुंचा करते थे। एक दिन सिंगर मोहम्मद रफी भी पहुंचे। और मौत के बिस्तर पर मीना ने मोहम्मद रफी से वो गाना गाने की रिक्वेस्ट कर दी जो उनके दिल के बहुत करीब था।

    आत्मा में उतर चुका था मोहम्मद रफी का ये गीत
    बीमार, मौत से लड़ रही मीना कुमारी की इस इच्छा को मोहम्मद रफी ने टाला नहीं। वो उनके सिरहाने बैठे थे। उन्होंने उसी दर्द, और फीलिंग्स के साथ मीना के सामने गाया ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले’। ये गाना मीना की आत्मा में उतर चुका था।
    ऐसे बना था ये गाना

    इस गाने को बनाने की भी एक अलग कहानी है। फिल्म प्यार का सागर में कुल 8 गाने थे। इन सभी गानों को रवि और प्रेम धवन ने कंपोज़ किया था। असद भोपाली ने गीत लिखे थे। इन गानों को आशा भोसले। शमशाद बेगम, मोहम्मद रफी और मुकेश ने गाए थे। फिल्म का गाना ‘ ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले’ गाने को अगले दिन फिल्माया जाना था,
    लेकिन उस वक़्त तक रिकॉर्डिंग नहीं हुई थी।
    प्रेम धवन ने गाने को लिखा था और सिंगर मोहम्मद रफी को गाना रिकॉर्डिंग के लिए उसी दिन बुला लिया गया। लेकिन फीमेल सिंगर के लिए आशा भोसले और लता मंगेशकर से संपर्क नहीं हो पा रहा था। ऐसे में कंपोजर रवि ने सुमन कल्यानपुर से बात की गई। उन्होंने आने का वादा किया लेकिन वो स्टूडियो पहुंची नहीं। बहुत इंतजार के बाद अंत में एक बार फिर आशा भोसले से संपर्क किया गया और उनसे इस गाने को लेकर बात पक्की हो गई। आशा भोसले और मोहम्मद रफी ने मिलकर इस गाने को गया। अगले दिन गाने की शूटिंग को गई। मीना कुमारी और राजेंद्र इस गाने में नजर आए थे।
  • जलसा के बाहर हंगामा: अमिताभ बच्चन के दीदार के इंतजार में फैन बेहोश, ‘दर्शन’ कल्चर पर भड़के लोग

    जलसा के बाहर हंगामा: अमिताभ बच्चन के दीदार के इंतजार में फैन बेहोश, ‘दर्शन’ कल्चर पर भड़के लोग




    नई दिल्ली(New Delhi)। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के जुहू स्थित बंगले जलसा के बाहर रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया। भीषण गर्मी में अमिताभ बच्चन की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार कर रहा एक फैन अचानक बेहोश हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसकी मदद की और पानी डालकर उसे होश में लाया।

    जानकारी के मुताबिक, हर रविवार की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में फैंस अमिताभ बच्चन के वीकली अपीयरेंस का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान एक अधेड़ उम्र का फैन गर्मी और भीड़ के बीच अचानक गिर पड़ा, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि समय रहते उसे राहत मिल गई और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

    इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए वीडियो के कमेंट सेक्शन में कई यूजर्स ने इस तरह की भीड़ और “दर्शन संस्कृति” पर सवाल उठाए हैं। कुछ लोगों ने लिखा कि “ये कोई भगवान नहीं हैं”, तो कुछ ने भीड़ को गैरजरूरी बताया।

    वहीं दूसरी ओर कई यूजर्स ने फैन के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि भीषण गर्मी में इस तरह घंटों इंतजार करना खतरनाक हो सकता है और ऐसी भीड़ पर नियंत्रण जरूरी है।

    बताया जा रहा है कि अमिताभ बच्चन हर रविवार अपने फैंस से जलसा के बाहर मिलते हैं और उनके साथ तस्वीरें भी साझा करते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने ब्लॉग में फैंस के प्रति आभार जताते हुए उनके साथ अच्छे व्यवहार की बात भी कही थी।

    इस घटना के बाद एक बार फिर फैंस की सुरक्षा और इस तरह के सार्वजनिक जमावड़े को लेकर बहस तेज हो गई है।

  • फिल्मों के नाम में ‘के’ था सफलता का फॉर्मूला, लेकिन एक कहानी ने तोड़ दिया करण जौहर का भ्रम

    फिल्मों के नाम में ‘के’ था सफलता का फॉर्मूला, लेकिन एक कहानी ने तोड़ दिया करण जौहर का भ्रम


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की दुनिया में जब सफल फिल्म निर्माताओं का जिक्र होता है तो निर्देशक और निर्माता Karan Johar का नाम प्रमुखता से सामने आता है। बीते कई वर्षों में उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई है। बड़े सेट, भावनात्मक कहानियां, रिश्तों की गहराई और पारिवारिक मूल्यों को पर्दे पर भव्य तरीके से दिखाने की उनकी शैली ने उन्हें फिल्म जगत का एक बड़ा नाम बना दिया। हालांकि फिल्मों के अलावा करण अपनी निजी सोच और मान्यताओं को लेकर भी कई बार चर्चा में रहे हैं।

    एक समय ऐसा था जब करण जौहर न्यूमरोलॉजी यानी अंकों और अक्षरों के प्रभाव पर काफी विश्वास करते थे। उनका मानना था कि अंग्रेजी का ‘K’ अक्षर उनके लिए बेहद शुभ है और इसी वजह से उनकी फिल्मों को सफलता मिलती है। यही कारण था कि उन्होंने लगातार अपनी फिल्मों के नाम ऐसे चुने जिनकी शुरुआत इसी अक्षर से होती थी। उनकी कई चर्चित और सफल फिल्मों के नाम इसी पैटर्न पर आधारित रहे। उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में भी न्यूमरोलॉजी को लेकर खास आकर्षण देखा जाता था और कई लोग नामों की स्पेलिंग तक बदलते नजर आते थे।

    करण जौहर की फिल्मी यात्रा भी काफी दिलचस्प रही है। फिल्मी माहौल में बड़े होने के कारण उनका झुकाव बचपन से सिनेमा की ओर था। उन्होंने शुरुआत पर्दे के पीछे काम करते हुए की और बाद में निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। उनकी पहली निर्देशित फिल्म ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई और उसके बाद उन्होंने कई यादगार फिल्मों का निर्माण किया। उनकी फिल्मों ने केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल नहीं की बल्कि दर्शकों के दिलों में भी खास जगह बनाई।

    लेकिन समय के साथ करण की सोच में बदलाव आया। उन्होंने एक बातचीत के दौरान बताया था कि निर्देशक Rajkumar Hirani की फिल्म Lage Raho Munna Bhai देखने के बाद उनकी सोच बदल गई। फिल्म में अंधविश्वास और न्यूमरोलॉजी जैसे विषयों को हल्के अंदाज में दिखाया गया था, जिसने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्हें महसूस हुआ कि किसी फिल्म की सफलता उसके नाम के पहले अक्षर से नहीं बल्कि उसकी कहानी, मेहनत और दर्शकों से जुड़ाव से तय होती है।

    इसके बाद उन्होंने फिल्मों के नाम को लेकर अपनी पुरानी मान्यता छोड़ दी और नए विचारों के साथ आगे बढ़ना शुरू किया। आने वाले वर्षों में उन्होंने कई अलग-अलग शीर्षकों वाली सफल फिल्में दीं और निर्माता के रूप में नए कलाकारों को भी मौका दिया। आज करण जौहर केवल एक सफल निर्देशक नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की बदलती सोच और आधुनिक फिल्म निर्माण शैली की एक बड़ी पहचान बन चुके हैं। उनकी यात्रा यह भी दिखाती है कि समय के साथ विचार बदलना और नई सोच अपनाना सफलता का अहम हिस्सा हो सकता है।

  • संघर्ष, विवाद और सफलता की अनोखी कहानी: चाइल्ड आर्टिस्ट से बॉलीवुड स्टार बनने तक ऐसा रहा कुणाल खेमू का सफर

    संघर्ष, विवाद और सफलता की अनोखी कहानी: चाइल्ड आर्टिस्ट से बॉलीवुड स्टार बनने तक ऐसा रहा कुणाल खेमू का सफर

    नई दिल्ली। बॉलीवुड में कई कलाकार ऐसे रहे हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर खास पहचान बनाई, लेकिन कुछ सितारों की कहानी संघर्ष, विवाद और लगातार खुद को साबित करने की जिद से भी भरी होती है। अभिनेता कुणाल खेमू का सफर भी कुछ ऐसा ही रहा है। बचपन में कैमरे के सामने कदम रखने वाले कुणाल ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता और समय के साथ खुद को केवल अभिनेता ही नहीं बल्कि लेखक और निर्देशक के रूप में भी स्थापित किया। उनका जीवन केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निजी जीवन, विवाद और लगातार आगे बढ़ने की सोच ने भी उनके सफर को खास बनाया।

    कुणाल खेमू का बचपन बेहद अलग परिस्थितियों में गुजरा। कश्मीर की खूबसूरत वादियों में जन्मे कुणाल का शुरुआती जीवन सामान्य था, लेकिन समय के साथ हालात बदलते गए। देश के एक संवेदनशील दौर का असर उनके परिवार पर भी पड़ा और परिस्थितियों ने उन्हें अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद परिवार ने नए शहर में नई शुरुआत की और यहीं से कुणाल की जिंदगी का नया अध्याय शुरू हुआ। बदलती परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों का साथ नहीं छोड़ा।

    बहुत कम उम्र में अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाले कुणाल ने अपने मासूम चेहरे और स्वाभाविक अभिनय से लोगों का ध्यान आकर्षित किया। बाल कलाकार के रूप में उन्होंने कई फिल्मों और धारावाहिकों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। छोटी उम्र में भी उनके अभिनय की गंभीरता और भावनात्मक प्रस्तुति को खूब सराहा गया। धीरे-धीरे वह दर्शकों के बीच एक पहचाना हुआ चेहरा बन गए और उनके अभिनय को लगातार सराहना मिलने लगी।

    हालांकि बाल कलाकार से मुख्य अभिनेता बनने का सफर आसान नहीं था। बड़े पर्दे पर वापसी के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। फिल्मी दुनिया में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही थी और खुद को स्थापित करना किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं था। लेकिन कुणाल ने हार नहीं मानी और अलग-अलग किरदारों के जरिए अपनी अभिनय क्षमता साबित की। कॉमेडी, रोमांस और गंभीर भूमिकाओं में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

    कुणाल का नाम कई बार विवादों में भी रहा। खासकर उनके टैटू को लेकर उठा विवाद काफी चर्चा में रहा था। इस मामले ने सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में बड़ी बहस को जन्म दिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी भावनाएं सम्मान और श्रद्धा से जुड़ी थीं। इस पूरे घटनाक्रम ने यह दिखाया कि लोकप्रियता के साथ विवाद भी कलाकारों की जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं।

    आज कुणाल खेमू केवल अभिनेता नहीं बल्कि मनोरंजन जगत में एक बहुआयामी प्रतिभा के रूप में देखे जाते हैं। अभिनय से आगे बढ़कर उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रखा और अपनी नई पहचान बनाने की कोशिश की। उनका सफर यह साबित करता है कि कठिन परिस्थितियां, विवाद और असफलताएं रास्ता जरूर कठिन बनाती हैं, लेकिन लगातार मेहनत और विश्वास इंसान को मंजिल तक पहुंचाने की ताकत रखते हैं।

  • ‘वर्क फ्रॉम होम’ की जगह निकला ‘होम फ्रॉम वर्क’, रवि किशन ने वायरल वीडियो पर पहली बार तोड़ी चुप्पी

    ‘वर्क फ्रॉम होम’ की जगह निकला ‘होम फ्रॉम वर्क’, रवि किशन ने वायरल वीडियो पर पहली बार तोड़ी चुप्पी

    नई दिल्ली ।  इंटरनेट के दौर में कौन कब वायरल हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। कभी फोटो तो कभी लोगों की जुबान से निकले शब्द सोशल मीडिया पर वायरल हो जाते हैं। जब लोग कुछ सोच पाते हैं तब तक वह हजारों लोगों तक पहुंच जाता है। ऐसे में कुछ लोगों को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ता है। ऐसा ही एक वीडियो गोरखपुर सांसद रवि किशन का वायरल हो गया। रवि किशन के इस वीडियो पर लोगों ने अब मीम्स बनाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि रवि किशन ने इसको लेकर सफाई भी दी।
    गोरखपुर से भाजपा सांसद और अभिनेता रवि किशन का कहना है कि वह आज तक यह नहीं समझ पाए हैं कि सोशल मीडिया पर उनके वीडियो और ‘मीम्स’ क्यों प्रसारित होते रहते हैं। उन्होंने कहा कि वह महज एक आम इंसान हैं और दूसरों की तरह उनसे भी गलतियां हो जाती हैं। अभिनेता रवि किशन से शुक्रवार शाम उनकी आगामी फिल्म ‘मां बहन’ के ट्रेलर जारी करने के मौके पर उनकी हालिया वायरल हुई वीडियो के संबंध में पूछा गया था, जिसमें उन्होंने गलती से ‘वर्क फ्रॉम होम’ कहने के बजाय ‘होम फ्रॉम वर्क’ कह दिया। वह इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘वर्क फ्रॉम होम’ की अपील के समर्थन में बोल रहे थे।
    मां-बहन फिल्म में नजर आएंगे रवि किशन
    गोरखपुर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद रवि किशन ने कहा, मैं महादेव की कसम खाकर कहता हूं कि मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं है कि मैं क्यों वायरल होता रहता हूं। मैं उस समय संसद जा रहा था और कहना चाहता था कि ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) करने की जरूरत है, लेकिन उसकी जगह मुंह से ‘होम फ्रॉम वर्क’ निकल गया। बतादें कि ‘मां बहन’ फिल्म में रवि किशन के साथ माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर धारणा दुर्गा मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगी। नेटफ्लिक्स की इस फिल्म का निर्देशन ‘सूबेदार’ और ‘तुम्हारी सुलू’ फिल्म के निर्देशक सुरेश त्रिवेणी ने किया है।
    साइकिल चलाकर दिया था पेट्रोल-डीजल बचत का संदेश
    ईंधन बचाने को लेकर पीएम मोदी की अपील के बाद पिछले दिनों सांसद रवि किशन ने साइकिल चलाकर लोगों को पेट्रोल-डीजल बचत का संदेश दिया था। इसका भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। सांसद रवि किशन शुक्ला ने पेट्रोल-डीजल संकट से निपटने के लिए तारामंडल क्षेत्र में साइकिल चलाकर लोगों को जागरूक किया। सांसद ने अपने समर्थकों के साथ रामगढ़झील क्षेत्र में साइकिल चलाई। मीडिया से बातचीत में कहा कि मध्य पूर्व एशिया में युद्ध से उपजे हालात से क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार उछाल हो रहा है। पेट्रोलियम पदार्थ की खरीद में देश को करोड़ों डॉलर आयात में खर्च करना पड़ रहा है। सासंद ने कहा कि पेट्रोल-डीजल पर खर्च होने वाले डॉलर को देश वासी जागरूकता से बचा सकते हैं।
  • ‘हेरा फेरी 3’ को लेकर फैली अफवाहों पर फूटा परेश रावल का गुस्सा, बोले- फिल्म नहीं छोड़ी, सच्चाई कुछ और है

    ‘हेरा फेरी 3’ को लेकर फैली अफवाहों पर फूटा परेश रावल का गुस्सा, बोले- फिल्म नहीं छोड़ी, सच्चाई कुछ और है


    नई दिल्ली । 
    हेरी फेरी 3 को लेकर एक बार फिर खबर आई कि परेश रावल ने फिल्म से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। दावा किया गया कि परेश रावल ने फिल्म के साइनिंग अमाउंट में मिले 11 लाख रुपये भी अक्षय कुमार को वापस कर दिए हैं। इस खबर से फैंस परेशान थे। इस बीच परेश रावल ने इन खबरों पर रिएक्ट किया है। उन्होंने साफ किया है कि ये खबरें झूठी हैं और वो फिल्म का हिस्सा हैं।

    परेश रावल ने नहीं छोड़ी है हेरा फेरी 3

    विकी लालवाणी के इंस्टाग्राम पेज के मुताबिक, परेश रावल ने साफ किया है कि वो अब भी हेरा फेरी का हिस्सा हैं। उन्होंने कोई भी साइनिंग अमाउंट वापस नहीं किया है। परेश रावल ने कहा कि उनके फिल्म छोड़ने की खबरों आधारहीन हैं।
    परेश रावल ने वापस कर दिए 11 लाख रुपये
    बॉलीवुड हंगामा की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि परेश रावल ने प्रोजेक्ट से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। उन्होंने निर्माताओं को 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ साइनिंग अमाउंट में मिले 11 लाख रुपये लौटा दिए हैं।
    किस चीज से खुश नहीं थे परेश रावल?
    रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया था कि परेश रावल की टोटल फीस 15 करोड़ रुपये थी। शीट में लिखा गया था कि फिल्म के रिलीज के एक महीने बाद परेश रावल को 14.89 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। परेश रावल इस शर्त से खुश नहीं थे। फिल्म का शूट अगले साल शुरू होना है। इसका मतलब है कि हेरा फेरी 3 2026 या 2027 में रिलीज होगी। इसका मतलब है कि परेश रावल को अपने बकाया रुपयों के लिए दो साल का इंतजार करना पड़ता। रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि हेरा फेरी 3 का अनाउंसमेंट वीडियो भूत बंगला के सेट पर शूट किया गया था।
    फिल्म को लेकर क्या बोले थे अक्षय कुमार?
    बता दें, कुछ वक्त पहले अक्षय कुमार ने एक पॉडकास्ट में बताया था कि हेरा फेरी 3 अभी नहीं बन रही है। उन्होंने कहा था कि जब सही समय होगा तब हेरा फेरी 3 बनेगी। उन्होंने ये भी कहा था कि ऐसा न कि सही समय आते-आते वो लोग बहुत बूढ़े हो जाएं।
    साल 2025 में शुरू हुआ था विवाद
    हेरा फेरी 3 को लेकर विवाद साल 2025 में शुरू हुआ था। जब परेश रावल ने कहा था कि वो हेरा फेरी 3 नहीं करेंगे। फैंस इस बात से काफी निराश हुए थे। इसके बाद खबरें आईं कि अक्षय कुमार के प्रोडक्शन हाउस ने परेश रावल के अचानक एग्जिट से हुए नुकसान को ध्यान में रखते हुए एक्टर के खिलाफ केस दर्ज कराया है। इसके बाद खबरें आई थीं कि परेश रावल पार्ट 3 का हिस्सा होंगे।

  • राज बब्बर जैसा स्टार बनने का सपना अधूरा रह गया, आर्य बब्बर को बॉलीवुड में नहीं मिला बड़ा मुकाम

    राज बब्बर जैसा स्टार बनने का सपना अधूरा रह गया, आर्य बब्बर को बॉलीवुड में नहीं मिला बड़ा मुकाम

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा में कई ऐसे स्टार किड्स आए जिन्होंने बड़े सपने लेकर फिल्मी दुनिया में कदम रखा, लेकिन हर किसी को वैसी सफलता नहीं मिल पाई जिसकी उम्मीद की जाती है। अभिनेता आर्य बब्बर भी उन्हीं कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें वह मुकाम हासिल नहीं हो सका जो उनके पिता राज बब्बर को मिला था। फिल्मी परिवार से आने के बावजूद उनका सफर संघर्षों और उतार-चढ़ाव से भरा रहा।

    आर्य बब्बर का जन्म मुंबई के एक प्रतिष्ठित फिल्मी परिवार में हुआ। उनके पिता राज बब्बर हिंदी सिनेमा के चर्चित और सफल अभिनेता रहे हैं, जबकि उनकी मां नादिरा बब्बर थिएटर जगत का बड़ा नाम मानी जाती हैं। घर में अभिनय और कला का माहौल होने की वजह से आर्य का झुकाव भी बचपन से फिल्मों की तरफ हो गया था। उन्होंने हमेशा अपने पिता की तरह लंबा और मजबूत करियर बनाने का सपना देखा, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में सफलता का रास्ता उनके लिए आसान नहीं रहा।

    आर्य बब्बर ने अपने करियर की शुरुआत साल 2002 में फिल्म ‘अब के बरस’ से की थी। इस फिल्म से उन्हें बड़ी उम्मीदें थीं और दर्शकों को भी लगा था कि वह बॉलीवुड में लंबी पारी खेलेंगे। फिल्म में उनके साथ अमृता राव नजर आई थीं, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा सकी। पहली फिल्म के असफल होने का असर उनके करियर पर भी पड़ा। हालांकि इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार फिल्मों में काम करते रहे।

    आर्य बब्बर कई फिल्मों में नजर आए जिनमें ‘गुरु’, ‘रेडी’ और ‘मटरू की बिजली का मंडोला’ जैसी फिल्में शामिल हैं। उन्होंने बड़े कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा की, लेकिन फिर भी उन्हें इंडस्ट्री में वह पहचान नहीं मिल सकी जिसकी उन्हें तलाश थी। धीरे-धीरे बॉलीवुड में उनका करियर कमजोर पड़ने लगा और उन्हें मुख्य अभिनेता के बजाय सहायक भूमिकाओं तक सीमित होना पड़ा।

    बॉलीवुड में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिलने के बाद आर्य ने पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की ओर रुख किया। यहां उनके अभिनय को सराहना मिली और दर्शकों ने उन्हें पसंद भी किया। उनकी फिल्म ‘यार अन्मुल्ले’ ने उन्हें पंजाबी सिनेमा में एक नई पहचान दिलाई। इससे यह साबित हुआ कि उनमें अभिनय की क्षमता थी, लेकिन शायद हिंदी फिल्मों में उन्हें सही मौके नहीं मिल पाए।

    फिल्मों के अलावा आर्य बब्बर ने टीवी की दुनिया में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। वह रियलिटी शो ‘बिग बॉस 8’ का हिस्सा बने, जहां उनके अलग अंदाज और बेबाक बयान काफी चर्चा में रहे। हालांकि शो में उनका सफर ज्यादा लंबा नहीं चला, लेकिन उन्होंने दर्शकों का ध्यान जरूर खींचा। इसके अलावा उन्होंने पौराणिक टीवी शो में रावण का किरदार निभाकर भी लोगों की सराहना हासिल की।

    आर्य बब्बर केवल अभिनय तक सीमित नहीं रहे। उन्हें लेखन का भी शौक है और उन्होंने कॉमिक बुक भी लिखी। यह दिखाता है कि वह खुद को लगातार नए क्षेत्रों में आजमाने की कोशिश करते रहे। भले ही उन्हें बॉलीवुड में पिता जैसी सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने हुनर के दम पर अलग-अलग मंचों पर खुद को साबित करने की कोशिश जारी रखी।