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  • अरिजीत सिंह से तुलना पर अभिजीत सावंत ने खोला पुराना राज, बोले- एक समय मैं बहुत पॉपुलर था लेकिन…

    अरिजीत सिंह से तुलना पर अभिजीत सावंत ने खोला पुराना राज, बोले- एक समय मैं बहुत पॉपुलर था लेकिन…


    नई दिल्ली । अभिजीत सावंत और अरिजीत सिंह ने साल 2005 के आसपास अपने संगीत करियर की शुरुआत की, लेकिन दोनों का सफर आगे चलकर बिल्कुल अलग दिशा में गया। एक ओर अभिजीत सावंत रियलिटी शो जीतने के बाद अचानक घर-घर में पहचान बनाने वाले गायक बन गए, वहीं अरिजीत सिंह ने लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर संगीतकारों और कंपोजर्स के साथ काम किया। अब अभिजीत ने दोनों के शुरुआती दौर की तुलना करते हुए अपने अनुभव साझा किए हैं।

    अभिजीत सावंत ने बताया कि रियलिटी शो जीतने के बाद उन्हें बहुत कम समय में बड़ी लोकप्रियता मिल गई थी। उस दौर में वह लगातार लोगों की नजरों में थे और उनके करियर को लेकर उम्मीदें भी काफी बढ़ गई थीं। दूसरी तरफ अरिजीत उस समय लाइमलाइट से काफी दूर थे। वह स्टूडियो में जाकर संगीत से जुड़े अलग-अलग काम कर रहे थे और अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे।

    अभिजीत के मुताबिक, शुरुआती वर्षों में अरिजीत को बतौर गायक वह पहचान नहीं मिली थी, जो बाद में उन्हें हासिल हुई। उन्होंने बताया कि अरिजीत ने करीब एक दशक तक म्यूजिक इंडस्ट्री में अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते हुए अनुभव हासिल किया। इस दौरान उन्होंने कई संगीतकारों और म्यूजिशियंस के साथ काम किया और धीरे-धीरे अपनी क्षमता को मजबूत किया।

    अपने उस दौर को याद करते हुए अभिजीत ने कहा कि अगर उस समय दोनों की लोकप्रियता की तुलना की जाए, तो वह खुद काफी ज्यादा लोकप्रिय थे, जबकि अरिजीत को बहुत कम लोग जानते थे। हालांकि, दोनों के सामने मौजूद चुनौतियां अलग थीं। अभिजीत पर अचानक मिली लोकप्रियता को बनाए रखने का दबाव था, जबकि अरिजीत को लंबे समय तक अपनी पहचान बनाने के लिए इंतजार और मेहनत करनी पड़ी।

    अभिजीत ने यह भी बताया कि अरिजीत ने उन वर्षों का इस्तेमाल अपने संगीत अनुभव को मजबूत करने में किया। उन्होंने संगीतकारों के साथ लगातार काम किया और इसी प्रक्रिया में अपनी प्रतिभा को निखारा। इसके बाद उन्हें बतौर प्लेबैक सिंगर बड़े अवसर मिलने लगे और उनकी आवाज ने अलग पहचान बनानी शुरू की।

    अरिजीत सिंह के करियर में फिल्म ‘आशिकी 2’ का गाना ‘तुम ही हो’ बेहद महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। हालांकि इससे पहले भी वह फिल्मों के लिए गाने रिकॉर्ड कर चुके थे, लेकिन इस गीत ने उन्हें देशभर में बड़ी पहचान दिलाई। अभिजीत ने भी माना कि ‘तुम ही हो’ अरिजीत के करियर में ऐसा गाना साबित हुआ, जिसने उनकी पहचान को पूरी तरह बदल दिया।

    अभिजीत ने अरिजीत की सफलता को केवल मेहनत से जोड़ने के बजाय किस्मत के पहलू का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि किसी खास गाने का किसी कलाकार की आवाज तक पहुंचना कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है। उनके अनुसार, हर कलाकार का अपना समय और अपना सफर होता है।

    अभिजीत ने यह भी कहा कि दर्शकों को केवल सफल व्यक्ति की उपलब्धियों को देखकर दूसरे लोगों की कमियां नहीं निकालनी चाहिए। उनके मुताबिक, हर कलाकार अपनी जिंदगी और करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रयास करता है और हर किसी की परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए लोगों को अलग-अलग कलाकारों के सफर को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

  • काम न मिलने पर घर बैठी थीं परिणीति चोपड़ा, 15 साल के करियर की गलतियों और मुश्किल दौर पर खुलकर बोलीं

    काम न मिलने पर घर बैठी थीं परिणीति चोपड़ा, 15 साल के करियर की गलतियों और मुश्किल दौर पर खुलकर बोलीं


    नई दिल्ली । परिणीति चोपड़ा बॉलीवुड में अपने 15 साल के सफर के अहम पड़ाव पर पहुंचने वाली हैं। फिल्म ‘लेडीज वर्सेस रिकी बहल’ से अभिनय की शुरुआत करने वाली परिणीति ने इन वर्षों में कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। उनके करियर में सफलता के साथ ऐसे दौर भी आए, जब उन्हें काम नहीं मिला और काफी समय घर पर बैठकर गुजारना पड़ा। अपने इस मुश्किल दौर को याद करते हुए अभिनेत्री ने माना कि करियर में उनसे कई गलतियां हुईं और उन्होंने उन गलतियों से काफी कुछ सीखा।

    परिणीति ने बताया कि वह किसी फिल्मी परिवार से नहीं आती थीं, इसलिए करियर की शुरुआत में लिए गए फैसलों का असर भी उन्हें खुद ही झेलना पड़ा। उनके मुताबिक, कभी गलत फिल्मों का चुनाव हुआ, कभी फैशन को लेकर गलतियां हुईं और कभी पब्लिक रिलेशन से जुड़े फैसले भी सही नहीं रहे। उन्होंने कहा कि उनके करियर की ये सभी गलतियां लोगों के सामने हुईं और उन्हें इन्हीं अनुभवों से आगे बढ़ना सीखना पड़ा।

    अभिनेत्री के करियर में एक ऐसा समय भी आया, जब उनके पास कोई काम नहीं था। दूसरी ओर, उन्होंने ऐसा दौर भी देखा जब लगातार काम के कारण परिवार के लिए समय निकालना मुश्किल हो गया। उनके अनुसार, करियर में आए इन दोनों तरह के अनुभवों ने उन्हें काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन को समझने में मदद की।

    इन दिनों परिणीति वेब सीरीज ‘शक – ट्रस्ट नो वन’ के जरिए ओटीटी पर भी नजर आ रही हैं। इसमें वह एक ऐसी मां की भूमिका निभा रही हैं, जो आठ साल से अपनी लापता बेटी की तलाश कर रही है और उसे अपने ही परिवार के लोगों पर शक है। अभिनेत्री ने बताया कि सस्पेंस और थ्रिलर से जुड़े किरदार निभाना उन्हें काफी पसंद है। कहानी का रहस्य अंत तक बनाए रखना इस प्रोजेक्ट की खास चुनौती थी, क्योंकि शूटिंग पहले ही पूरी हो चुकी थी।

    परिणीति ने मदरहुड और कामकाजी महिलाओं को लेकर भी अपनी राय रखी। उनका कहना है कि किसी नई मां को यह बताने का अधिकार दूसरों को नहीं है कि उसे कब काम पर लौटना चाहिए। अगर कोई महिला बच्चे के जन्म के बाद अपनी इच्छा से काम जारी रखना चाहती है, तो उसके फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए।

    अभिनेत्री ने मां बनने के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले बदलावों और उन पर की जाने वाली टिप्पणियों पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि बच्चे को जन्म देना बेहद कठिन अनुभव है और इसके बाद शरीर पर आने वाले बदलावों को लेकर महिलाओं को शर्मिंदा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने शरीर पर आए स्ट्रेच मार्क्स को भी मां बनने के अनुभव का हिस्सा बताया।

    काम और परिवार के संतुलन पर परिणीति ने कहा कि अगर शुरुआत में ही काम की परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट बातचीत हो, तो दोनों चीजों को साथ संभाला जा सकता है। उनका मानना है कि आज की युवा महिलाएं करियर और परिवार दोनों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहती हैं। उनके अनुसार, इसके लिए कामकाजी महिलाओं और मेकर्स के बीच समझदारी और सहयोग जरूरी है।

  • अमिताभ बच्चन ने शाहरुख खान के साथ काम का अनुभव किया साझा, बताया क्यों मुश्किल हालात में भी नहीं मानते हार

    अमिताभ बच्चन ने शाहरुख खान के साथ काम का अनुभव किया साझा, बताया क्यों मुश्किल हालात में भी नहीं मानते हार

    नई दिल्ली ।अमिताभ बच्चन ने शाहरुख खान के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा करते हुए उनके व्यक्तित्व की एक खास बात बताई है। उन्होंने कहा कि शाहरुख किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानते और मुश्किल समय में भी सामने वाले का आत्मविश्वास बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। दोनों कलाकारों ने कई फिल्मों में साथ काम किया है और उनकी जोड़ी को दर्शकों ने अलग-अलग भूमिकाओं में देखा है।

    अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान ने ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘मोहब्बतें’, ‘वीर जारा’, ‘भूतनाथ’ और ‘कभी अलविदा ना कहना’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया है। लंबे समय तक एक-दूसरे के साथ काम करने के अनुभव के आधार पर अमिताभ ने शाहरुख के स्वभाव को लेकर अपनी बात रखी।

    यह बातचीत उस समय हुई जब अभिनेता राजकुमार राव एक फिल्म के प्रचार के लिए अमिताभ बच्चन के शो में पहुंचे थे। उनके साथ अभिनेत्री वामिका गब्बी भी मौजूद थीं। बातचीत के दौरान राजकुमार राव ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्मी यात्रा ने उन्हें अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

    राजकुमार ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने कम उम्र में ही अभिनेता बनने का फैसला कर लिया था। उन्होंने अमिताभ बच्चन को भी अपनी प्रेरणा बताया और कहा कि उनके घर में अमिताभ का पोस्टर तक मौजूद था। इसके साथ ही उन्होंने शाहरुख खान की यात्रा से भी प्रभावित होने की बात कही।

    राजकुमार के अनुसार, शाहरुख की कहानी उन्हें इसलिए प्रेरित करती थी क्योंकि वह दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर थिएटर और छोटे-छोटे कार्यक्रमों से होते हुए हिंदी सिनेमा के बड़े सितारे बने। राजकुमार ने अपने शुरुआती मुंबई प्रवास का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब वह पहली बार एक शो के सिलसिले में मुंबई पहुंचे थे, तब उनका चयन नहीं हुआ था। उस दौर में वह शाहरुख के बंगले के बाहर तक खड़े रहते थे।

    राजकुमार की बात सुनने के बाद अमिताभ बच्चन ने शाहरुख के साथ काम करने का अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि शाहरुख ऐसे व्यक्ति हैं, जो किसी भी बात पर आसानी से हार नहीं मानते। उनके मुताबिक, किसी भी समस्या का सामना होने पर शाहरुख अपने व्यवहार से सामने वाले व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ाने की कोशिश करते हैं।

    इस दौरान राजकुमार राव की आगामी फिल्म ‘प्रहार’ की भी चर्चा हुई। यह फिल्म सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के जीवन पर आधारित बताई गई है। फिल्म के ट्रेलर में 26/11 मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े मामले और अजमल कसाब के मुकदमे को भी दिखाया गया है।

    वहीं अमिताभ बच्चन के आगामी प्रोजेक्ट्स की बात करें तो वह ‘कल्कि 2898 एडी’ और ‘सेक्शन 84’ से जुड़े हैं। ‘कल्कि 2898 एडी’ में उनके साथ प्रभास और कमल हासन प्रमुख भूमिकाओं में हैं। दूसरी ओर ‘सेक्शन 84’ में अमिताभ के साथ निमृत कौर और अभिषेक बनर्जी नजर आएंगे।

    अमिताभ और शाहरुख की फिल्मों में साथ दिखाई देने की यात्रा के साथ अब उनके पुराने अनुभवों से जुड़े किस्से भी चर्चा में बने रहते हैं। इस बातचीत में अमिताभ की कही बात ने शाहरुख के काम करने के तरीके और संघर्ष के दौरान उनके रवैये की एक झलक पेश की।

  • नेटफ्लिक्स पर साउथ फिल्मों का दबदबा, रवि तेजा की ‘इरुमुडी’ ने अजय देवगन की ‘धमाल 4’ को पीछे छोड़ा

    नेटफ्लिक्स पर साउथ फिल्मों का दबदबा, रवि तेजा की ‘इरुमुडी’ ने अजय देवगन की ‘धमाल 4’ को पीछे छोड़ा


    नई दिल्ली ।शनिवार को नेटफ्लिक्स की ट्रेंडिंग फिल्मों की सूची में साउथ सिनेमा का दबदबा देखने को मिला। देशभर में सबसे ज्यादा देखी जा रही फिल्मों की शीर्ष सूची में कई दक्षिण भारतीय फिल्मों ने अपनी जगह बनाई है। खास बात यह है कि शीर्ष दस में केवल दो हिंदी फिल्में शामिल हैं। रवि तेजा की ‘इरुमुडी’ ने पहला स्थान हासिल किया है, जबकि अजय देवगन की ‘धमाल 4’ सातवें पायदान पर है।

    ट्रेंडिंग सूची में सबसे ऊपर ‘इरुमुडी’ है। रवि तेजा की इस फिल्म की कहानी एक पिता और उसकी बेटी के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी में सस्पेंस, थ्रिल और भावनात्मक पहलुओं को शामिल किया गया है। सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच चर्चा में रही यह फिल्म अब ओटीटी पर भी दर्शकों का ध्यान खींच रही है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने के बाद फिल्म शीर्ष स्थान तक पहुंच गई है।

    दूसरे नंबर पर तमिल कॉमेडी फिल्म ‘मोथा रात्रि’ ट्रेंड कर रही है। फिल्म की कहानी एक शादी के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जहां गांव का एक पंडित अपमान महसूस करने के बाद बीच समारोह से चला जाता है। इसके बाद कहानी में कई हास्यपूर्ण घटनाएं सामने आती हैं। हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आई यह फिल्म दर्शकों के बीच अपनी जगह बना रही है।

    तीसरे स्थान पर सूर्या की ‘विश्वनाथ एंड सन’ मौजूद है। फिल्म में संजय विश्वनाथ नाम के एक अमीर कारोबारी की कहानी दिखाई गई है, जो 40 वर्ष की उम्र पार करने के बाद भी शादी नहीं करना चाहता। अपनी मां की इच्छा पूरी करने के लिए वह सरोगेसी के जरिए पिता बनता है। बच्चे से जुड़ी परेशानी सामने आने के बाद उसकी सरोगेट मां की तलाश शुरू होती है।

    चौथे नंबर पर हुमा कुरैशी की ‘बेबी डू डाई डू’ है। फिल्म की कहानी बेबी करमकर नाम की एक ऐसी महिला पर केंद्रित है, जो सुन और बोल नहीं सकती। वह गुप्त कॉन्ट्रैक्ट किलर है और अपनी जुड़वां बहन की हत्या का बदला लेने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति की तलाश करती है। फिल्म में चंकी पांडे और सिकंदर खेर भी अहम भूमिकाओं में हैं।

    ‘लस्ट स्टोरीज 3’ पांचवें स्थान पर बनी हुई है। फिल्म चार अलग-अलग कहानियों के जरिए मानवीय रिश्तों और इच्छाओं के विभिन्न पहलुओं को सामने रखती है। इसमें राधिका आप्टे, विजय वर्मा, राधिका मदान, कोंकणा सेन शर्मा और अभिषेक बनर्जी जैसे कलाकार नजर आते हैं।

    तापसी पन्नू की ‘गांधारी’ छठे नंबर पर है। कहानी एक ऐसी मां की है, जिसकी बेटी लापता हो जाती है और वह उसकी तलाश में जुट जाती है। इसके बाद सामने आने वाली घटनाएं फिल्म की मुख्य कहानी बनती हैं।

    अजय देवगन की ‘धमाल 4’ सातवें स्थान पर पहुंच गई है। सिनेमाघरों में फिल्म को मिली-जुली प्रतिक्रिया के बाद ओटीटी पर इसे दर्शकों का ध्यान मिल रहा है। इसके बाद ‘बेस्ट ऑफ द बेस्ट’ आठवें, आर माधवन की ‘GDN’ नौवें और ‘कोरियन कनकराजू’ दसवें स्थान पर हैं। इस तरह शनिवार की सूची में दक्षिण भारतीय फिल्मों की मजबूत मौजूदगी देखने को मिली।

  • देव आनंद ने स्टैंप बेचकर काटे मुश्किल दिन, होर्डिंग से पहचाना सितारा, अमिताभ के साथ क्यों नहीं की फिल्म?

    देव आनंद ने स्टैंप बेचकर काटे मुश्किल दिन, होर्डिंग से पहचाना सितारा, अमिताभ के साथ क्यों नहीं की फिल्म?

    नई दिल्ली । देव आनंद हिंदी सिनेमा के उन दिग्गज कलाकारों में शामिल रहे, जिनकी पहचान केवल अभिनय तक सीमित नहीं रही। अभिनेता के साथ-साथ वह निर्देशक, लेखक, निर्माता और राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। 26 सितंबर 1923 को धर्मदेव पिशोरिमल आनंद के रूप में जन्मे देव आनंद ने अपने लंबे फिल्मी करियर में 100 से अधिक फिल्मों में काम किया। उनकी खास शैली, अभिनय और व्यक्तित्व ने उन्हें कई दशकों तक दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाए रखा।

    फिल्मी दुनिया में कदम रखने से पहले देव आनंद ने सामान्य नौकरी से अपने जीवन की शुरुआत की थी। उन्होंने एक अकाउंटेंसी फर्म में क्लर्क के तौर पर काम किया, जहां उन्हें 85 रुपये मासिक वेतन मिलता था। इसके बाद उन्होंने मिलिट्री सेंसर ऑफिस में नौकरी की और वहां उनकी तनख्वाह 160 रुपये थी। हालांकि, अभिनय की दुनिया में जाने का सपना उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा। नौकरी छोड़ने के बाद शुरुआती दौर में उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। यहां तक कि गुजारा चलाने के लिए उन्होंने अपना स्टैंप कलेक्शन तक बेच दिया था। बाद में उन्हें फिल्म ‘हम एक हैं’ में काम करने का अवसर मिला और यहीं से उनके फिल्मी सफर ने गति पकड़ी।

    देव आनंद अपने अभिनय के साथ-साथ अपने पहनावे और खास अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। फिल्म ‘काला पानी’ के दौरान उनके काले कपड़ों को लेकर एक चर्चित किस्सा सामने आता है। बताया जाता है कि उनके काले परिधान में नजर आने को लेकर प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह रहता था। इसी दौर से जुड़ी एक घटना में एक महिला की जान जाने की बात भी कही जाती है, जिसके बाद उनके काले कपड़े पहनने पर रोक लगाए जाने का किस्सा मशहूर हुआ।

    देव आनंद महान अभिनेता और कॉमेडियन चार्ली चैपलिन के भी प्रशंसक थे। 1954 में स्विट्जरलैंड के मॉन्ट्रो में उनकी चार्ली चैपलिन से मुलाकात हुई। उन्हें सामने देखकर देव आनंद बेहद उत्साहित हो गए और जोर से उनका अभिवादन किया। यह मुलाकात उनके लिए यादगार रही।

    देव आनंद, दिलीप कुमार और राज कपूर को 1950 और 1960 के दशक में हिंदी सिनेमा के प्रमुख सितारों में गिना जाता था। तीनों के बीच पेशेवर प्रतिस्पर्धा की चर्चाएं होती थीं, लेकिन निजी स्तर पर उनके संबंध अच्छे बताए जाते थे। देव आनंद की दिलीप कुमार से मिलने की इच्छा आखिरी दिनों तक बनी रही, मगर यह पूरी नहीं हो सकी। 4 दिसंबर 2011 को देव आनंद का निधन हो गया।

    उनकी जिंदगी में अभिनेत्री सुरैया का भी खास स्थान रहा। दोनों की नजदीकियां फिल्म ‘विद्या’ के दौरान बढ़ीं। बाद में देव आनंद ने सुरैया को शादी के लिए प्रपोज किया और उन्हें हीरे की अंगूठी भी दी। हालांकि, सुरैया की मां इस रिश्ते के पक्ष में नहीं थीं और दोनों विवाह नहीं कर सके। बाद में देव आनंद ने कल्पना कार्तिक से शादी की।

    देव आनंद ने जैकी श्रॉफ को भी उनके शुरुआती दौर में अवसर दिया। उन्होंने एक होर्डिंग पर जैकी श्रॉफ की तस्वीर देखी थी और उन्हें फिल्म में लेने का विचार किया। जैकी श्रॉफ ने फिल्म ‘स्वामी दादा’ से अभिनय की शुरुआत की और आगे चलकर ‘हीरो’ के जरिए बड़ी पहचान बनाई।

    देव आनंद ने अपने करियर में अनेक बड़े कलाकारों के साथ काम किया, लेकिन अमिताभ बच्चन के साथ कभी स्क्रीन साझा नहीं की। ‘जंजीर’ में इंस्पेक्टर विजय खन्ना की भूमिका पहले देव आनंद को पेश की गई थी। उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। बाद में यही भूमिका अमिताभ बच्चन ने निभाई और यह फिल्म उनके करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल हुई। इस तरह दोनों दिग्गज कलाकारों का साथ काम करने का अवसर कभी नहीं आया।

    देव आनंद ने फिल्मों के अलावा राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। आपातकाल के दौर में उन्होंने सरकार के खिलाफ अभियान में हिस्सा लिया और बाद में एक राजनीतिक दल भी बनाया। अपने लंबे सफर में उन्हें कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। उनकी फिल्में, गीत और अभिनय आज भी हिंदी सिनेमा की विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं।

  • अभिनेता मुश्ताक खान का 56 साल की उम्र में निधन, लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे मशहूर कॉमेडियन

    अभिनेता मुश्ताक खान का 56 साल की उम्र में निधन, लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे मशहूर कॉमेडियन

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के अभिनेता और कॉमेडियन मुश्ताक खान का गुरुवार को 56 साल की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक की लहर है। बताया गया कि उन्होंने गुरुवार शाम करीब 7 बजे अंतिम सांस ली।

    मुश्ताक खान के निधन की पुष्टि अभिनेता और कॉमेडियन सुनील पाल ने की। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े संगठन के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने भी उनके निधन की पुष्टि की। जानकारी के अनुसार, मुश्ताक खान की बीमारी काफी गंभीर हो चुकी थी और कैंसर आखिरी चरण में पहुंच गया था।

    मुश्ताक खान ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई चर्चित हिंदी फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने मुख्य भूमिकाओं के साथ-साथ सपोर्टिंग और कॉमिक किरदारों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी खासियत यह थी कि सीमित स्क्रीन टाइम में भी वह अपने अभिनय और कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों का ध्यान खींच लेते थे।

    उनके फिल्मी सफर में ‘आशिकी’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘हेरा फेरी’, ‘जोड़ी नंबर 1’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘वेलकम’ और ‘राउडी राठौर’ जैसी चर्चित फिल्में शामिल रहीं। इसके अलावा उन्होंने बाद के वर्षों में ‘गदर 2’, ‘बधाई दो’ और ‘स्त्री 2’ जैसी फिल्मों में भी काम किया।

    मुश्ताक खान की सबसे लोकप्रिय भूमिकाओं में अक्षय कुमार और कैटरीना कैफ की फिल्म ‘वेलकम’ का बल्लू किरदार शामिल रहा। वर्ष 2007 में रिलीज हुई इस फिल्म में उनका किरदार दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय हुआ था। फिल्म का उनका चर्चित कॉमिक संवाद और उससे जुड़ा दृश्य लंबे समय तक लोगों की यादों में बना रहा। बाद में भी यह दृश्य सोशल मीडिया और मीम्स के जरिए चर्चा में आता रहा।

    हालांकि, मुश्ताक खान के करियर की पहचान केवल एक किरदार तक सीमित नहीं रही। कई दशकों तक उन्होंने फिल्मों और टेलीविजन में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाईं। छोटे और सहायक किरदारों को अपने अंदाज से प्रभावशाली बनाना उनकी अभिनय शैली की प्रमुख विशेषता रही।

    मुश्ताक खान ने फिल्मों के अलावा टेलीविजन पर भी काम किया। वह लोकप्रिय टीवी शो ‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’ में नजर आए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनका स्क्रीन डेब्यू वर्ष 1980 में आई फिल्म ‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’ से हुआ था।

    मुश्ताक खान का जन्म 31 दिसंबर 1969 को मध्य प्रदेश में हुआ था। उनका परिवार मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर से जुड़ा रहा है। उनके परिवार में पत्नी सलमा खान और दो बेटे हैं। उनके निधन से हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसने लंबे समय तक सहायक और हास्य भूमिकाओं के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया।

  • 17 साल की उम्र में जैकी श्रॉफ संग काम करने से नर्वस थीं करिश्मा कपूर, पुराने अनुभव को किया याद

    17 साल की उम्र में जैकी श्रॉफ संग काम करने से नर्वस थीं करिश्मा कपूर, पुराने अनुभव को किया याद

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री करिश्मा कपूर ने अपने शुरुआती फिल्मी करियर के दिनों को याद करते हुए जैकी श्रॉफ के साथ काम करने का अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने जैकी श्रॉफ के साथ 1992 में रिलीज हुई फिल्म ‘पुलिस ऑफिसर’ में काम किया था, तब वह केवल 17 साल की थीं। यह उनके करियर के शुरुआती दौर की फिल्म थी और उस समय बड़े अभिनेता के साथ काम करने को लेकर वह काफी नर्वस हो गई थीं।

    जैकी श्रॉफ एक डांस रियलिटी शो के पांचवें सीजन में बतौर अतिथि पहुंचे थे। इसी दौरान करिश्मा कपूर ने उनके साथ अपने पुराने अनुभव को याद किया। उन्होंने बताया कि ‘पुलिस ऑफिसर’ उनके शुरुआती प्रोजेक्ट्स में शामिल थी। यह फिल्म उन्होंने ‘प्रेम कैदी’ के बाद की थी और उस समय उनकी उम्र महज 17 वर्ष थी।

    करिश्मा ने फिल्म के एक बड़े डांस नंबर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फिल्म में ‘देखो ये लड़की करंट मारती है’ गाना था, जिसमें बड़ी संख्या में डांसर्स शामिल थे। उनके लिए यह अनुभव इसलिए भी अलग था क्योंकि पहली बार वह इतने सारे डांसर्स और किसी बड़े स्टार के साथ एक साथ काम कर रही थीं।

    अभिनेत्री ने बताया कि इस वजह से वह शूटिंग के दौरान काफी डरी हुई और नर्वस थीं। शुरुआती करियर में किसी बड़े अभिनेता के साथ काम करना और इतने बड़े डांस सीक्वेंस का हिस्सा बनना उनके लिए नया अनुभव था। उन्होंने जैकी श्रॉफ के साथ काम करने को सम्मान और खुशी का अवसर भी बताया।

    करिश्मा ने जैकी श्रॉफ के प्रति अपना सम्मान जताते हुए कहा कि उनके साथ काम करने का अनुभव हमेशा उनके लिए खास रहेगा। पुराने प्रोजेक्ट को याद करते हुए उन्होंने उस दौर की अपनी भावनाओं को भी साझा किया और बताया कि उस समय वह काफी घबराई हुई थीं।

    इस दौरान जैकी श्रॉफ ने भी करिश्मा कपूर की तारीफ की। उन्होंने उन्हें शानदार अभिनेत्री बताते हुए उनकी प्रतिभा और बहुमुखी क्षमता की प्रशंसा की। जैकी श्रॉफ ने कहा कि करिश्मा एक मल्टीटैलेंटेड कलाकार हैं और वह अलग-अलग तरह के काम कर सकती हैं।

    उन्होंने करिश्मा के साथ काम करने को अपने लिए भी सम्मान और खुशी का अनुभव बताया। जैकी श्रॉफ ने उनके परिवार का भी जिक्र किया और कहा कि यह परिवार फिल्म इंडस्ट्री का मजबूत हिस्सा रहा है। उन्होंने करिश्मा और उनके परिवार के प्रति अपना सम्मान और गर्व व्यक्त किया।

    करिश्मा कपूर और जैकी श्रॉफ ने वर्ष 1992 में आई फिल्म ‘पुलिस ऑफिसर’ में साथ काम किया था। फिल्म का निर्देशन अशोक गायकवाड़ ने किया था। इसमें अरुणा ईरानी और परेश रावल भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में थे।

    फिल्म की कहानी जय नाम के एक ईमानदार और मेहनती पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी में जय की हत्या के बाद किशन नाम का एक ठग उसकी जगह लेता है। इसके बाद वह अपने भाई की मौत का बदला लेने की कोशिश करता है। फिल्म में करिश्मा और जैकी की जोड़ी भी उस दौर के दर्शकों के बीच चर्चा में रही थी।

  • कोमल रानी संग डेटिंग की अफवाहों पर गोविंदा ने दी सफाई, बोले परिवार से दूर करने और छवि खराब करने की कोशिश

    कोमल रानी संग डेटिंग की अफवाहों पर गोविंदा ने दी सफाई, बोले परिवार से दूर करने और छवि खराब करने की कोशिश

    नई दिल्ली ।अभिनेता गोविंदा लंबे समय बाद फिल्म ‘रूपा’ के जरिए पर्दे पर वापसी की तैयारी कर रहे हैं। फिल्म की घोषणा हो चुकी है और इसमें उनके साथ अभिनेत्री कोमल रानी नजर आएंगी। फिल्म को लेकर चर्चा के बीच दोनों के कथित रिश्ते की खबरों ने भी जोर पकड़ लिया है। हाल ही में दोनों के साथ लाल बाग के राजा के दर्शन करने पहुंचने के बाद डेटिंग की अटकलें और तेज हो गई थीं। अब गोविंदा ने इन चर्चाओं पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

    गोविंदा ने कोमल रानी के साथ मंदिर जाने को उनकी आगामी फिल्म से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि वह ‘रूपा’ के लिए प्रार्थना करने लाल बाग के राजा के दर्शन करने पहुंचे थे। अभिनेता ने यह भी कहा कि वह इससे पहले अपनी सह-अभिनेत्रियों करिश्मा कपूर और रवीना टंडन के साथ भी मंदिर जा चुके हैं।

    गोविंदा के मुताबिक, करिश्मा कपूर के साथ मंदिर जाने का अनुभव उनके लिए अच्छा रहा था और उस दौर में उनकी फिल्मों ने अच्छा प्रदर्शन किया था। इसी तरह वह रवीना टंडन के साथ भी मंदिर जा चुके हैं। अब उन्होंने कोमल रानी के साथ दर्शन करने की वजह फिल्म की शुरुआत और उसके लिए की गई प्रार्थना को बताया है।

    अभिनेता ने कहा कि वह लंबे समय बाद दोबारा काम शुरू कर रहे हैं, इसलिए फिल्म के लिए प्रार्थना करने मंदिर गए थे। उनके मुताबिक, कोमल रानी के साथ मंदिर जाना किसी निजी रिश्ते का संकेत नहीं है, बल्कि फिल्म से जुड़ी वजह से हुआ।

    डेटिंग की अटकलों पर गोविंदा ने स्पष्ट तौर पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि फिल्म अभी शुरू ही हुई है और इसके बारे में इतनी चर्चा पहले से होने लगी है। अभिनेता ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि अगर किसी फिल्म को लेकर वह और उनकी सह-अभिनेत्री चर्चा में आ रहे हैं तो लोगों को इससे परेशानी क्यों हो रही है।

    गोविंदा ने कहा कि वह यह समझ नहीं पा रहे हैं कि उनके मशहूर होने या फिल्म को लेकर चर्चा बढ़ने से लोगों को आपत्ति क्यों हो रही है। उन्होंने कोमल रानी के साथ रिश्ते की अटकलों को खारिज किया और ऐसी चर्चाओं पर नाराजगी जाहिर की।

    अभिनेता ने इन अफवाहों को लेकर यह भी दावा किया कि मामला अचानक शुरू हुई चर्चा नहीं है। उनके अनुसार, इसके पीछे उन्हें उनके परिवार से दूर करने और उनकी छवि खराब करने की सोची-समझी कोशिश शामिल है। हालांकि, उन्होंने अपनी बात रखते हुए इस पूरे मामले को फिल्म ‘रूपा’ से जोड़कर देखा।

    ‘रूपा’ गोविंदा के लंबे अंतराल के बाद आने वाले प्रोजेक्ट के तौर पर चर्चा में है। फिल्म में उनके साथ कोमल रानी दिखाई देंगी। फिल्म की घोषणा के बाद से ही दोनों कलाकारों को लेकर चर्चा चल रही है। मंदिर में साथ पहुंचने के बाद सामने आई डेटिंग की अटकलों के बीच गोविंदा ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

    अभिनेता की प्रतिक्रिया के मुताबिक, कोमल रानी के साथ उनका मंदिर जाना फिल्म के लिए की गई प्रार्थना का हिस्सा था। उन्होंने पुरानी सह-अभिनेत्रियों के साथ मंदिर जाने के उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह की मुलाकातों को निजी रिश्ते से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

  • एसपी बालासुब्रमण्यम की आवाज के वो 10 यादगार गीत, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में बनाई खास पहचान

    एसपी बालासुब्रमण्यम की आवाज के वो 10 यादगार गीत, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में बनाई खास पहचान

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के महान पार्श्व गायकों में शामिल एसपी बालासुब्रमण्यम की आज छठी पुण्यतिथि है। पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने हिंदी के साथ तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम समेत कई भाषाओं में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी। उनकी आवाज में भावनाओं की ऐसी विविधता थी कि रोमांटिक गीतों से लेकर भावुक और मधुर रचनाओं तक हर तरह के गाने श्रोताओं के बीच खास पहचान बना लेते थे। 25 सितंबर 2020 को उनके निधन के बाद भी उनके गीत लगातार लोगों की यादों का हिस्सा बने हुए हैं।

    4 जून 1946 को जन्मे एसपी बालासुब्रमण्यम ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी, लेकिन संगीत के प्रति उनका लगाव उन्हें गायकी की दुनिया में ले आया। उन्होंने संगीत प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया और 15 दिसंबर 1966 को तेलुगु फिल्म ‘श्री श्री श्री मर्यादा रामन्ना’ से बतौर पार्श्व गायक अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बनाई और आगे चलकर हिंदी फिल्मों में भी उनकी आवाज बेहद लोकप्रिय हुई।

    साल 1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान मजबूत की। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इसके बाद सलमान खान की फिल्मों में उनकी आवाज ने खास लोकप्रियता हासिल की। ‘मैंने प्यार किया’, ‘हम आपके हैं कौन’, ‘साजन’ और ‘लव’ जैसी फिल्मों के गीतों ने उनकी आवाज को हिंदी दर्शकों के बीच घर-घर पहुंचाया।

    एसपी बालासुब्रमण्यम के नाम गायकी से जुड़े कई उल्लेखनीय रिकॉर्ड भी रहे। उनका करियर करीब पांच दशक तक चला और उन्होंने 16 भारतीय भाषाओं में 40 हजार से अधिक गीत रिकॉर्ड किए। एक दिन में उन्होंने कन्नड़ में 21, तमिल में 19 और हिंदी में 16 गाने रिकॉर्ड किए। उन्हें अलग-अलग भाषाओं में गायकी के लिए छह बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें 2001 में पद्म श्री और 2011 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

    उनके लोकप्रिय हिंदी गीतों में ‘आजा शाम होने आई’ खास है। इसी तरह ‘दिल दीवाना’ और ‘मेरे रंग में रंगने वाली’ जैसे गीतों ने भी उनकी आवाज को घर-घर तक पहुंचाया। इन गीतों में उनकी गायकी की सहजता और रोमांटिक अंदाज साफ नजर आता है।

    फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ का ‘पहला पहला प्यार है’ भी आज तक श्रोताओं के बीच लोकप्रिय है। ‘साजन’ का ‘बहुत प्यार करते हैं’ और ‘देखा है पहली बार’ उनकी यादगार प्रस्तुतियों में शामिल हैं। वहीं फिल्म ‘लव’ का ‘साथिया तूने क्या किया’ भी उनकी चर्चित प्रस्तुतियों में गिना जाता है।

    ‘एक दूजे के लिए’ का ‘हम बने तुम बने’ भी उनकी यादगार प्रस्तुतियों में शामिल है। वहीं ‘पत्थर के फूल’ का ‘कभी तू छलिया लगता है’ भी उनकी लोकप्रिय गीतों की सूची का हिस्सा रहा। इन गीतों के जरिए एसपी बालासुब्रमण्यम ने हिंदी सिनेमा के संगीत में अपनी अलग पहचान बनाई, जिसे आज भी संगीत प्रेमी याद करते हैं।

  • साउथ सिनेमा में बॉलीवुड सितारों का दबदबा, राघव जुयाल से इमरान हाशमी तक बने खतरनाक विलेन

    साउथ सिनेमा में बॉलीवुड सितारों का दबदबा, राघव जुयाल से इमरान हाशमी तक बने खतरनाक विलेन

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के बीच कलाकारों का आदान-प्रदान लंबे समय से देखने को मिलता रहा है। हिंदी फिल्मों के कई कलाकार दक्षिण भारतीय फिल्मों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं। खास तौर पर पिछले कुछ वर्षों में बॉलीवुड सितारों के साउथ फिल्मों में खलनायक के किरदार निभाने का चलन तेजी से बढ़ा है। अब इस सूची में अभिनेता और डांसर राघव जुयाल का नाम भी जुड़ गया है।

    राघव जुयाल साउथ की चर्चित फिल्म ‘द पैराडाइज’ में खलनायक की भूमिका में दिखाई देंगे। नानी अभिनीत इस फिल्म में राघव के किरदार को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता है। बताया गया है कि वह फिल्म में विक्रम मालिक नाम के मुख्य खलनायक का किरदार निभा रहे हैं। उनका यह किरदार पहले निभाई गई भूमिकाओं से अलग और अधिक आक्रामक अंदाज में नजर आने वाला है।

    राघव ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत हिंदी फिल्म ‘सोनाली केबल’ से की थी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदारों में काम किया। अब साउथ सिनेमा में उनकी एंट्री बतौर विलेन हुई है। ‘द पैराडाइज’ में उनकी भूमिका फिल्म की कहानी में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ भी दक्षिण भारतीय फिल्मों में नकारात्मक भूमिकाएं निभा चुके हैं। उन्होंने ‘साहो’ में रॉय का किरदार निभाया था। इसके बाद वह रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर’ में वर्मन के रूप में नजर आए। दोनों फिल्मों में उनके किरदारों का अंदाज हिंदी फिल्मों में निभाई गई उनकी पारंपरिक भूमिकाओं से अलग रहा।

    बॉबी देओल ने भी साउथ सिनेमा में खलनायक के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने सूर्या की फिल्म ‘कंगुवा’ में उधीरन की भूमिका निभाई थी। इसके बाद वह विजय की फिल्म ‘जन नायगन’ में महादेव के किरदार में दिखाई दिए। साउथ की फिल्मों में बॉबी के नकारात्मक किरदारों ने उनके अभिनय के एक अलग पक्ष को दर्शकों के सामने रखा।

    संजय दत्त भी दक्षिण भारतीय फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभा चुके हैं। यश अभिनीत ‘केजीएफ: चैप्टर 2’ में उन्होंने अधीरा का किरदार निभाया था। फिल्म में उनका लुक और किरदार काफी अलग अंदाज में पेश किया गया था। यह फिल्म व्यावसायिक रूप से भी बड़ी सफलता हासिल करने में कामयाब रही।

    इमरान हाशमी का नाम भी इस सूची में शामिल है। उन्होंने पवन कल्याण की फिल्म ‘दे कॉल हिम ओजी’ में ओमी भाई नाम के खलनायक की भूमिका निभाई। इस फिल्म के जरिए इमरान ने दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी अलग मौजूदगी दर्ज कराई। उनके किरदार को लेकर भी दर्शकों के बीच काफी चर्चा रही।

    सैफ अली खान ने भी साउथ फिल्म ‘देवरा पार्ट 1’ में नकारात्मक भूमिका निभाई। उन्होंने फिल्म में भैरा का किरदार निभाया था। फिल्म में उनके साथ जूनियर एनटीआर और जान्हवी कपूर नजर आए थे। सैफ का यह किरदार भी उनके अब तक के कई हिंदी फिल्म किरदारों से अलग था।

    इस तरह राघव जुयाल के ‘द पैराडाइज’ में खलनायक बनने के साथ बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के बीच कलाकारों का यह सिलसिला एक बार फिर चर्चा में है। अलग-अलग भाषाओं और फिल्म उद्योगों के कलाकारों के साथ आने से दर्शकों को भी नए तरह के किरदार और अभिनय देखने को मिल रहे हैं।