Tag: Congress

  • राजनीतिक तनाव बढ़ा इंदौर में: कांग्रेस कार्यालय पर भाजपा घेराव, पत्थरबाजी में पुलिसकर्मी समेत कई घायल

    राजनीतिक तनाव बढ़ा इंदौर में: कांग्रेस कार्यालय पर भाजपा घेराव, पत्थरबाजी में पुलिसकर्मी समेत कई घायल


    मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में रविवार को राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया जब पंढरीनाथ थाना क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। भाजपा युवा मोर्चा द्वारा कांग्रेस कार्यालय का घेराव करने की घोषणा के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया। पुलिस प्रशासन ने संभावित विवाद को देखते हुए पहले ही भारी सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग कर दी थी। दूसरी ओर कांग्रेस कार्यकर्ता भी कार्यालय परिसर के बाहर बड़ी संख्या में जमा हो गए।

    शुरुआती नारेबाजी के बीच माहौल धीरे-धीरे गरमाता गया और देखते ही देखते स्थिति पत्थरबाजी में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ही मिनटों में हालात नियंत्रण से बाहर हो गए। दोनों दलों के समर्थक आमने-सामने आ गए और हाथापाई और पत्थरबाजी शुरू हो गई।

    इस दौरान कई लोग घायल हुए, जबकि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी इसकी चपेट में आए। सब इंस्पेक्टर राम सिंह बघेल को सीधे पत्थर लगने से गंभीर चोट आई, जबकि आरक्षक जगमोहन भी घायल हुए। पुलिस ने तुरंत स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए भीड़ को तितर-बितर किया। घायल पुलिसकर्मियों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि प्रदर्शन के लिए कोई विधिवत अनुमति नहीं ली गई थी। मामले में शासकीय कार्य में बाधा, बिना अनुमति प्रदर्शन और कानून व्यवस्था भंग करने से संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

    पुलिस अब घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप्स की मदद से पत्थरबाजी में शामिल लोगों की पहचान कर रही है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों।

    पुलिस प्रशासन ने राजनीतिक दलों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज करें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा से समझौता करने वालों पर सख्ती बरती जाएगी।

    यह घटना इंदौर में राजनीतिक हिंसा की चिंता बढ़ाती है और यह याद दिलाती है कि सड़क और सार्वजनिक जगह पर सुरक्षा का ध्यान रखना कितना जरूरी है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता कभी-कभी हिंसक रूप ले लेती है, इसलिए सभी पक्षों से संयम और कानून का पालन करने की अपील की जा रही है।

  • इंदौर-भोपाल घटनाक्रम पर गरमाई सियासत, PCC चीफ जीतू पटवारी ने CS को लिखा पत्र

    इंदौर-भोपाल घटनाक्रम पर गरमाई सियासत, PCC चीफ जीतू पटवारी ने CS को लिखा पत्र


    भोपाल । भोपाल और इंदौर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ हुई मारपीट और पार्टी कार्यालयों पर हुए कथित हमलों को लेकर प्रदेश की सियासत तेज हो गई है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी आपत्ति जताते हुए मुख्य सचिव अनुराग जैन को पत्र लिखा है।

    जीतू पटवारी ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि भोपाल, इंदौर सहित विभिन्न स्थानों पर कांग्रेस कार्यालयों पर संगठित रूप से हमला किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं पर जानलेवा हमले का प्रयास किया गया, जबकि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद मूकदर्शक बनी रही। पटवारी ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला करार दिया है।

    उन्होंने कहा कि पीसीसी कार्यालय पर हुए प्रदर्शन ने गुंडागर्दी का रूप ले लिया। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई और कार्यालयों में तोड़फोड़ की कोशिश की गई। उनके अनुसार, यह घटनाएं प्रदेश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होंगी।

    पत्र में पटवारी ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी भी स्तर पर राजनीतिक संरक्षण या सहमति की भूमिका पाई जाती है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए, ताकि प्रदेश की जनता का कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर विश्वास कायम रह सके। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।

    इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रही है, वहीं सत्तारूढ़ दल की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल मामला प्रशासन के संज्ञान में है और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

  • इंदौर में भाजयुमो और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प, पुलिस ने किया बैरिकेडिंग और वॉटर कैनन का इस्तेमाल

    इंदौर में भाजयुमो और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प, पुलिस ने किया बैरिकेडिंग और वॉटर कैनन का इस्तेमाल


    नई दिल्ली।  दिल्ली के ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ में यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन की आग अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गई है। शनिवार को भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने प्रदेश भर में कांग्रेस कार्यालयों का घेराव किया, जिससे इंदौर में यह विरोध प्रदर्शन हिंसक झड़प में बदल गया।

    इंदौर में पथराव और पुलिस कार्रवाई
    इंदौर में जब भाजयुमो कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय (गांधी भवन) का घेराव करने पहुंचे, तो वहां पहले से मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं से उनकी भिड़ंत हो गई। दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर पत्थर, पानी की बोतलें, तेल की थैलियां, और संतरे-टमाटर फेंके। इस दौरान सुरक्षा में तैनात सब इंस्पेक्टर आरएस बघेल के सीने पर एक बड़ा पत्थर लगने से वह घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    स्थिति बेकाबू होने के बाद पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और बैरिकेड्स पार करने की कोशिश करने वाले कार्यकर्ताओं पर ठंडे पानी की बौछारें छोड़ीं, जिसके बाद भीड़ तितर-बितर हुई।

    भोपाल और ग्वालियर में विरोध प्रदर्शन
    भोपाल में भी सैकड़ों भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक लिया। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

    ग्वालियर में भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने विशाल रैली निकाली और राहुल गांधी का पुतला फूंका। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि कांग्रेस अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचा रही है।

    विरोध प्रदर्शन की जड़
    इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत दिल्ली के भारत मंडपम में हुए यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन से हुई। इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी के खिलाफ नारेबाजी की थी। भाजपा ने इसे राष्ट्रविरोधी बताते हुए कड़ी आलोचना की, जबकि कांग्रेस इसे बेरोजगारी और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने का तरीका बता रही है।

    उज्जैन में भाजपा और कांग्रेस का आमना-सामना
    उज्जैन में भी भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए राहुल गांधी का पुतला फूंका और कांग्रेस कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात था और कांग्रेस नेता अमरीश मिश्रा ने आरोप लगाया कि भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने उनके कार्यकर्ताओं पर हमले की कोशिश की थी।

    जबलपुर में भी विरोध
    जबलपुर में यूथ कांग्रेस के समर्थन में प्रदर्शन हुआ, जहां कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स तोड़कर कांग्रेस कार्यालय के पास जाने की कोशिश की। इसके बाद वहां भी पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा और 10 थानों की पुलिस को तैनात किया गया।

    दिल्ली में ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ के दौरान यूथ कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन के बाद, मध्य प्रदेश में भाजयुमो और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा और विरोध प्रदर्शन की घटनाओं ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए विभिन्न शहरों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाई है, लेकिन दोनों दलों के बीच बढ़ते तनाव और नोकझोंक ने इस विवाद को और जटिल बना दिया है।

  • जबलपुर सिहोरा विवाद: 10 और आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने दोनों पक्षों पर दर्ज की एफआईआर

    जबलपुर सिहोरा विवाद: 10 और आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने दोनों पक्षों पर दर्ज की एफआईआर


    जबलपुर के सिहोरा के आजाद चौक में गुरुवार रात हुए विवाद के बाद से माहौल धीरे-धीरे शांत हुआ लेकिन पुलिस की सतत गश्ती जारी रही लोग दहशत में थे लेकिन आवागमन सामान्य रूप से चलता रहा शुक्रवार और शनिवार की सुबह पुलिस की कई टीमों ने 10 और हंगामा करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार किया ये आरोपी हिंदू पक्ष से हैं और इन पर दूसरे वर्ग के धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने का आरोप है

    इससे पहले ही पुलिस ने 49 लोगों को गिरफ्तार किया था अब तक कुल 59 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है वहीं कुछ और आरोपियों की तलाश जारी है पुलिस ने मामले में दोनों पक्षों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है

    शुक्रवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने समझाने का प्रयास किया लेकिन जब वे नहीं माने तो लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया गया पुलिस ने बताया कि मामला शांतिपूर्ण बनाने के लिए यह आवश्यक था

    पुलिस ने घटना स्थल और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और स्थानीय लोगों से पूछताछ की कई असामाजिक तत्व घटना को अंजाम देकर फरार हो गए ऐसे लोगों की पहचान भी की जा रही है इस काम में स्थानीय पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच और अन्य अधिकारियों को लगाया गया है

    मामला गुरुवार रात का है जब सिहोरा के आजाद चौक में दो पक्षों में विवाद हुआ देखते ही देखते दोनों पक्षों के सैकड़ों लोग वहां जमा हो गए और एक दूसरे पर पथराव और तोड़फोड़ शुरू कर दी भगदड़ के हालात बन गए मौके पर सिहोरा समेत आसपास के थानों की पुलिस पहुंची भीड़ को खदेड़कर स्थिति को नियंत्रित किया गया

    पुलिस ने रात में ही उपद्रवियों की पहचान कर ली थी इनमें किशोर और अधिक उम्र के लोग शामिल थे कुछ को सिहोरा में ही छोड़ दिया गया जबकि लगभग 25 से 30 आरोपियों को बस से शहर के थानों में ले जाकर गिरफ्तारी और अन्य कार्रवाई की गई

    स्थानीय प्रशासन और पुलिस का कहना है कि मामले की जांच पूरी गंभीरता से की जा रही है और किसी भी परिस्थिति में कानून व्यवस्था को बनाए रखना प्राथमिकता है दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है विशेषज्ञ मानते हैं कि चुनावी या धार्मिक तनाव के समय ऐसे घटनाओं को रोकने के लिए सतत निगरानी और समय पर कार्रवाई जरूरी है

  • इंदौर में राजनीतिक हिंसा, भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया पथराव, जिला अध्यक्ष अस्पताल में भर्ती

    इंदौर में राजनीतिक हिंसा, भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया पथराव, जिला अध्यक्ष अस्पताल में भर्ती


    इंदौर में शनिवार को सियासी पारा चरम पर पहुंच गया जब भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए शहर के कांग्रेस मुख्यालय गांधी भवन के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे भाजपा कार्यकर्ताओं और वहां पहले से मौजूद कांग्रेसियों के बीच झड़प हो गई

    स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब भाजपा की ओर से गांधी भवन पर पथराव शुरू कर दिया गया पथराव के दौरान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े गंभीर रूप से घायल हो गए उनके सिर पर गहरी चोट आई और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया

    स्थानीय लोगों और पुलिस अधिकारियों के अनुसार घटना अचानक हुई और झड़प में कई अन्य कार्यकर्ता भी घायल होने के कगार पर थे मौके पर भारी संख्या में पुलिस तैनात की गई और स्थिति को नियंत्रित किया गया

    पुलिस ने बताया कि पथराव करने वालों की पहचान की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों ने घटना की निंदा की है और प्रशासन से शीघ्र जांच की मांग की है

    घटना के बाद गांधी भवन के आसपास क्षेत्र को सील कर दिया गया और हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया स्थानीय प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है

    विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी मौसम में शहरों में ऐसे सियासी तनाव बढ़ सकते हैं ऐसे मामलों में समय पर नियंत्रण और न्यायिक कार्रवाई बेहद जरूरी होती है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे

  • राजस्थान बजट सत्र में BJP विधायक के विवादित बयान ने मचाया हंगामा: 'BJP सरकार ने छोरा, गहलोत ने छोरी पैदा की'

    राजस्थान बजट सत्र में BJP विधायक के विवादित बयान ने मचाया हंगामा: 'BJP सरकार ने छोरा, गहलोत ने छोरी पैदा की'


    नई दिल्ली । राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान एक बार फिर सियासी और सांस्कृतिक विवाद उभर गया है। सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के विधायक बहादुर सिंह कोली ने सदन में एक विवादित बयान देते हुए बजट की तुलना ‘बेटे’ और ‘बेटी’ से कर दी। बहादुर सिंह कोली जो भरतपुर जिले से विधायक और पूर्व लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं ने कहा कि भजनलाल शर्मा की बीजेपी सरकार का बजट छोरा था जबकि अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार का बजट ‘छोरी’ था और इसी वजह से कांग्रेस चुनाव में हार गई।

    बीजेपी विधायक ने बजट सत्र के दौरान रात करीब 8 बजे सदन में कहा हमारी सरकार ने पहले बजट में छोरा पैदा किया फिर दूसरे और तीसरे बजट में भी छोरा पैदा किया। जो जवानी में छोरा पैदा करता है वह हमेशा काम आता है। जब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे उन्होंने अपने आखिरी बजट में घोषणाएं कीं लेकिन छोरा नहीं पैदा हुआ छोरी पैदा हुई और इसी वजह से आप विपक्ष में बैठे हैं। इस बयान ने सदन में मौजूद सदस्यों को झकझोर दिया और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया।

    कांग्रेस ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। पार्टी के अनुसार यह बयान लड़कों और लड़कियों में भेदभाव को दर्शाता है और सदन में इस तरह की संवेदनहीन टिप्पणी देना महिलाओं के प्रति पक्षपात को उजागर करता है। कांग्रेस के मुख्य सचेतक रफीक खान ने कहा कि बीजेपी विधायक के इस बयान ने उनकी पार्टी की सोच को सार्वजनिक कर दिया है। बीजेपी के लोग महिलाओं को लेकर क्या सोच रखते हैं यह अब साफ हो गया है। कांग्रेस का आरोप है कि इस तरह के बयान केवल राजनीतिक लाभ के लिए महिलाओं के प्रति नजरिए को हल्के में दिखाने वाले हैं।

    वहीं बीजेपी की तरफ से गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम ने बहादुर सिंह कोली के बयान की व्याख्या करते हुए कहा कि विधायक बजट पर चर्चा कर रहे थे और कांग्रेस केवल हंगामा कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी और हमारी सरकार बेटियों का सम्मान करती है और उन्हें देवी स्वरूप में पूजती है। मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि भाजपा सरकार ने संसद में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिलाने का काम किया है और महिलाओं के सम्मान को सर्वोपरि माना जाता है।

    राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार यह बयान न केवल बजट सत्र में विवाद पैदा करने वाला है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी संवेदनशील है। महिलाओं और लड़कियों के प्रति राजनीतिक दलों की सोच पर भी बहस छिड़ा है। सत्तारूढ़ दल का कहना है कि यह केवल बजट पर व्यंग्य था जबकि विपक्ष इसे महिलाओं के प्रति पक्षपातपूर्ण टिप्पणी मान रहा है। यह घटना राज्य में आगामी चुनावों के मद्देनजर भी राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर सकती है।

    कुल मिलाकर बहादुर सिंह कोली के बयान ने विधानसभा में बहस का नया मुद्दा खड़ा किया है जहां बजट पर चर्चा के दौरान संवेदनशील सामाजिक मुद्दों को भी राजनीति की भेंट चढ़ाया गया। बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी और प्रतिक्रिया जारी रही और राज्य की सियासत में यह विवाद केंद्र में बन गया।

  • MP में टैलेंट हंट प्रोग्राम’ के जरिए प्रवक्ता खोज कर रही कांग्रेस… BJP ने उठाए सवाल

    MP में टैलेंट हंट प्रोग्राम’ के जरिए प्रवक्ता खोज कर रही कांग्रेस… BJP ने उठाए सवाल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की सियासत में अब ‘टैलेंट’ (‘Talent’) भी बहस का विषय बन गया है. प्रदेश कांग्रेस (MP Congress) ने संगठन में नए और ऊर्जावान चेहरों को मौका देने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए प्रवक्ताओं के चयन के लिए ‘टैलेंट हंट प्रोग्राम’ (Talent Hunt Program) शुरू किया है. हालांकि इस पहल पर बीजेपी (BJP) ने तंज कसते हुए कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाए हैं.

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jeetu Patwari) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा की. उन्होंने कहा कि बदलते राजनीतिक परिदृश्य में पार्टी को ऐसे प्रवक्ताओं की जरूरत है जो वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध हों, समसामयिक मुद्दों पर गहरी पकड़ रखते हों और कांग्रेस की विचारधारा को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचा सकें. पार्टी का दावा है कि अब चयन प्रक्रिया योग्यता, अध्ययन और संवाद क्षमता के आधार पर होगी।


    क्या है टैलेंट हंट की पूरी प्रक्रिया?

    – कार्यक्रम जिला, संभाग, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक आयोजित होगा
    – 28 फरवरी तक आवेदन जमा किए जा सकेंगे
    – संभाग स्तर पर इंटरव्यू होंगे
    – AICC नामित कोऑर्डिनेटर, टैलेंट हंट कमेटी, वरिष्ठ नेता और जिला अध्यक्ष मिलकर मूल्यांकन करेंगे
    – अंतिम निर्णय अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी लेगी
    – 20 प्रदेश प्रवक्ताओं का चयन किया जाएगा
    – साथ ही मीडिया पैनलिस्ट, संभाग और जिला स्तर पर दो-दो अधिकृत प्रवक्ता, राष्ट्रीय स्तर पर दो पैनलिस्ट और एक विशेष अंग्रेजी मीडिया पैनलिस्ट नियुक्त किए जाएंगे.

    इस बीच बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा समेत मंत्रियों गोविंद सिंह राजपूत और प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए कहा कि पार्टी में टैलेंट की कमी है, इसलिए बाहर से तलाश की जा रही है. मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने तो कहा कि कांग्रेस को टैलेंट से ज्सादा एक्सपियरेंस की जरूरत है नहीं तो सब एक-एक कार कांग्रेस छोड़ कर चले जाएंगे।

    कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश की राजनीति में अब प्रवक्ताओं का चयन भी सियासी संग्राम का हिस्सा बन गया है. एक तरफ कांग्रेस नई ऊर्जा के साथ संगठन को धार देने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे कांग्रेस की मजबूरी बता रही है। अब देखना होगा कि यह टैलेंट हंट वाकई कांग्रेस को मजबूत और मुखर आवाजें देता है या फिर यह पहल भी सियासी बयानबाजी तक ही सीमित रह जाती है।

  • असफल वंशज पर न पार्टी नेताओं को भरोसा, न सहयोगियों को… कांग्रेस के सियासी घमासान पर BJP का तंज

    असफल वंशज पर न पार्टी नेताओं को भरोसा, न सहयोगियों को… कांग्रेस के सियासी घमासान पर BJP का तंज


    नई दिल्ली
    । कांग्रेस पार्टी (Congress Party) के लिए सोमवार का दिन उलझनों भरा रहा। मणिशंकर अय्यर (Mani Shankar Aiyar.) जैसे नेता ने पार्टी हाई कमान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, तो वहीं असम के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा (Bhupen Bora) ने भी पार्टी को अपना इस्तीफा भेज दिया। उन्होंने पार्टी हाई कमान पर उन्हें नजर अंदाज करने का आरोप लगाया था। इस उठा पटक के बीच भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के नेतृत्व के ऊपर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। भाजपा की तरफ से राहुल गांधी को एक ‘असफल वंशज’ करार देते हुए कहा गया कि उन पर न तो उनकी पार्टी के नेताओं को भरोसा है और न ही उनके सहयोगियों को भरोसा है।

    दिन भर से कांग्रेस पार्टी के अंदर जारी घमासान पर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने जमकर तंज कसा। उन्होंने कहा, “तृणमूल कांग्रेस कहती है राहुल को हटाओ, ममता को लाओ, ‘इंडी-गठबंधन’ को बचाओ। असम के कांग्रेस नेता भूपेन बोरा ने इस्तीफा दिया। मणिशंकर अय्यर कहते हैं कि कांग्रेस केरल हारेगी और विजयन जीतेंगे।” भाजपा नेता ने सवाल किया कि क्या यह समझने के लिए और सबूतों की जरूरत है कि न तो गांधी की अपनी पार्टी के नेता और न ही उनके सहयोगी उन्हें गंभीरता से लेते हैं। भाजपा नेता ने अपने हमले को और भी तीखा करते हुए कहा, “राहुल गांधी के पास न तो जनमत है और न ही संगत… वह बस एक असफल विशेषाधिकार प्राप्त वंशवादी हैं।”

    आपको बता दें, खबर लिखे जाने तक असम के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने इस्तीफे को वापस ले लिया था। इसके अलावा मणिशंकर अय्यर को लेकर कांग्रेस पार्टी की तरफ से कहा गया कि वह अब पार्टी में नहीं है, ऐसे में उनके बयान को पार्टी से जोड़ने का कोई मतलब नहीं है। दरअसल, मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अपने पद पर बने रहेंगे। इसके अलावा उन्होंने प्रवक्ता पवन खेड़ा और शशि थरूर पर भी निशाना साधा था। उनके इस बयान को लेकर कांग्रेस पार्टी की तरफ से जबरदस्त विरोध देखने को मिला था। पार्टी की तरफ से कांग्रेस से संबंध न होने की बात पर पूर्व सांसद ने कहा कि उन्हें केवल अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ही पार्टी से निकाल सकते हैं।

    कांग्रेस पार्टी ने भले ही खुद को इस बयान से दूर कर लिया हो लेकिन भाजपा ने हमला बोलने का कोई मौका नहीं छोड़ा। प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, “कांग्रेस नेताओं द्वारा राहुल गांधी को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है। राहुल गांधी को कांग्रेस के कट्टर वफादार मणिशंकर अय्यर ने खुलेआम नकार दिया।”

    भंडारी ने कहा, ”अय्यर हों या तृणमूल कांग्रेस या भूपेन बोरा सब जानते हैं। राहुल गांधी राजनीतिक ‘पप्पू’ हैं। कांग्रेस में अपना पूरा जीवन बिताने वाले वफादार अब खुलेआम राहुल गांधी के खिलाफ बोल रहे हैं।”

    दरअसल, यह पूरा मामला कांग्रेस के पूर्व सांसद मणिशंकर अय्यर के बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेताओं के ऊपर निशाना साधा। उन्होंने पवन खेड़ा, केसी वेणुगोपाल और शशि थरूर को भी अपने निशाना पर लिया। इसके अलावा असम से पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन के इस्तीफे ने भी कांग्रेस पार्टी के दिन को बर्बाद करने की कोशिश की। मणिशंकर के मामले पर कांग्रेस पार्टी की तरफ से तीखी टिप्पणी आई, जिसमें कहा गया कि मणिशंकर अय्यर अब पार्टी में नहीं है, तो उस पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वह नेहरू वादी और राजीववादी हैं लेकिन राहुलवादी नहीं है। इतना ही नहीं अय्यर ने कहा कि उन्हें पार्टी से निकालने का अधिकार केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को है।

  • मप्र बजट सत्र का पहला दिन: कांग्रेस ने भागीरथपुरा दूष‍ित पानी का उठाया मुद्दा, सरकार को घेरा

    मप्र बजट सत्र का पहला दिन: कांग्रेस ने भागीरथपुरा दूष‍ित पानी का उठाया मुद्दा, सरकार को घेरा


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को कांग्रेस विधायक दल ने राज्य सरकार पर तीखे सवाल उठाए और जनहित के मुद्दों को सदन में जोरदार तरीके से पेश किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसमें सरकार और प्रधानमंत्री की उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख है, लेकिन प्रदेशवासियों की वास्तविक समस्याओं और पीड़ा को उचित जगह नहीं मिली।
    उमंग सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा में हुई दु:खद घटना का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की लापरवाही से 35 निर्दोष लोगों की जान गई। उन्होंने पूछा कि क्या उन परिवारों का दर्द और उनके सवाल इस सदन के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधायक दल इस मामले को गंभीरता से उठाएगा और जिम्मेदारों को चिन्हित करने की मांग करेगा।

    मीडिया से बातचीत में उमंग सिंघार ने कहा कि बजट केवल घोषणाओं का दस्तावेज नहीं होना चाहिए, बल्कि यह प्रदेश की जमीनी हकीकत को उजागर करने का माध्यम होना चाहिए। उन्होंने बढ़ते प्रदेश कर्ज पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की, ताकि जनता को आर्थिक स्थिति की पारदर्शी जानकारी मिल सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस विधायक दल बजट में की गई घोषणाओं और उनकी जमीनी वास्तविकता के बीच के अंतर को सदन में सामने लाएगा। नेता प्रतिपक्ष ने दोहराया कि वह लगातार जनता के मुद्दों को उठाएगी और सरकार को जवाबदेह बनाएगी।

  • राहुल गांधी के बयान पर सियासी संग्राम तेज, सदस्यता खत्म करने और चुनाव लड़ने पर रोक की मांग

    राहुल गांधी के बयान पर सियासी संग्राम तेज, सदस्यता खत्म करने और चुनाव लड़ने पर रोक की मांग


    नई दिल्ली ।लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हालिया बयान को लेकर संसद और सियासत दोनों में घमासान मच गया है। भारत अमेरिका व्यापार समझौते पर केंद्र सरकार को घेरते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने अमेरिका के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया है और देश के किसानों के हितों को कुचल दिया है। उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे देश को गुमराह करने वाला बताया है।

    भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ प्रस्ताव पेश करते हुए उनकी संसद सदस्यता समाप्त करने और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने की मांग की है। दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सोरोस जैसी विदेशी ताकतों के प्रभाव में आकर देश के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान न केवल संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं बल्कि देश की छवि को भी नुकसान पहुंचाते हैं। उनके अनुसार राहुल गांधी लगातार तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश कर रहे हैं और जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।

    इस विवाद पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक गंभीर संवैधानिक पद पर हैं और उन्हें अपनी जिम्मेदारियों तथा शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। पासवान ने कहा कि विशेषाधिकार प्रस्ताव लाना संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा है और यदि कोई सदस्य तथ्यहीन या आपत्तिजनक टिप्पणी करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय संसदीय प्रक्रियाओं के तहत ही होगा।

    दरअसल बुधवार को सदन में बोलते हुए राहुल गांधी ने भारत अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा कि इस समझौते में भारत के किसानों के हितों की अनदेखी की गई है जैसा पहले किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को शर्म आनी चाहिए कि उसने भारत माता को बेच दिया। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यदि इंडिया गठबंधन की सरकार होती तो अमेरिका के साथ बातचीत बराबरी के स्तर पर की जाती। उनके अनुसार भारतीय डेटा एक रणनीतिक संपत्ति है और अमेरिका के साथ किसी भी वार्ता में इसे केंद्र में रखा जाना चाहिए। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की रक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

    राहुल गांधी के इन बयानों ने संसद में तीखी बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर भाजपा इसे राष्ट्रविरोधी मानसिकता करार दे रही है तो दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना और नीतियों की आलोचना करना है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रस्ताव पर क्या कार्रवाई होती है और क्या यह मामला विशेषाधिकार समिति तक पहुंचता है या सियासी बयानबाजी तक ही सीमित रहता है। फिलहाल इस मुद्दे ने संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।