Tag: Congress

  • तीन राज्यों के उपचुनाव: दतिया में कांग्रेस, गुजरात में भाजपा की जीत, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बड़ी बढ़त

    तीन राज्यों के उपचुनाव: दतिया में कांग्रेस, गुजरात में भाजपा की जीत, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बड़ी बढ़त

    नई दिल्ली। बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे सामने आ गए हैं। मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा के खाते में गई। वहीं बिहार की बांकीपुर सीट पर मतगणना के दौरान जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर निर्णायक बढ़त बनाए हुए हैं।

    बांकीपुर में प्रशांत किशोर आगे
    बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 27वें राउंड की मतगणना तक जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत किशोर को 59,213 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 39,794 वोट प्राप्त हुए। इस तरह प्रशांत किशोर 19,419 वोटों से आगे चल रहे हैं। बांकीपुर सीट भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन का गढ़ मानी जाती है। उनके राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी, जिसके चलते उपचुनाव कराया गया।

    बढ़त के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके विधायक बनने से बांकीपुर रातोंरात नहीं बदलेगा, लेकिन अगले दो-तीन महीनों में लोग सकारात्मक बदलाव जरूर महसूस करेंगे। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से बिहार के लिए बेहतर मुख्यमंत्री चुनने की भी अपील की।

    दतिया में कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत

    मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,056 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। भाजपा ने इस सीट पर पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। दिलचस्प बात यह रही कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के मतदान केंद्र बूथ नंबर-121 पर भी कांग्रेस को बढ़त मिली। यहां कांग्रेस को 291 और भाजपा को 264 वोट मिले। जीत के बाद घनश्याम सिंह ने कहा कि यह जनादेश देशभर में संदेश देगा और जनता बदलाव चाहती है।

    गुजरात के मंजलपुर में भाजपा की बड़ी जीत
    गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,630 वोटों के अंतर से हराया। जीत के बाद सतीश पटेल ने मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि जनता ने उन पर भी वैसा ही भरोसा जताया है जैसा पहले उनके नेतृत्व पर जताया था। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार भिखाभाई रबारी ने हार स्वीकार करते हुए मतदान के अंतिम चरण में भय का माहौल बनाए जाने का आरोप लगाया।

    30 जुलाई को हुआ था मतदा
    न
    तीनों विधानसभा सीटों पर 30 जुलाई को मतदान हुआ था। गुजरात की मंजलपुर सीट पर 37.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। तीनों राज्यों के उपचुनावों के नतीजों को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • दतिया उपचुनाव: 8वें राउंड तक कांग्रेस ने भाजपा को पछाड़ा, घनश्याम सिंह 6,583 वोट से आगे

    दतिया उपचुनाव: 8वें राउंड तक कांग्रेस ने भाजपा को पछाड़ा, घनश्याम सिंह 6,583 वोट से आगे


    दतिया। मध्य प्रदेश की चर्चित दतिया विधानसभा उपचुनाव की मतगणना सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच जारी है। आठवें राउंड की गिनती पूरी होने तक कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने मुकाबले में मजबूत बढ़त बना ली है। वह भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी से 6,583 मतों से आगे चल रहे हैं। अब तक 15 में से आठ राउंड की मतगणना पूरी हो चुकी है, जबकि सात राउंड की गिनती शेष है।

    आठवें राउंड तक यह रही स्थिति
    आठवें राउंड में कांग्रेस को 6,828, भाजपा को 3,540 और आजाद समाज पार्टी (आसपा) को 1,303 वोट मिले। इसके साथ ही कुल मतों का आंकड़ा इस प्रकार है—
    घनश्याम सिंह (कांग्रेस): 38,264 वोट
    आशुतोष तिवारी (भाजपा): 31,681 वोट
    दामोदर यादव (आसपा): 11,754 वोट
    कांग्रेस ने इस चरण तक 6,583 वोटों की बढ़त बना ली है।

    पहले राउंड में भाजपा आगे, फिर कांग्रेस ने पलटी बाजी
    सुबह 8 बजे शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में मतगणना शुरू हुई। पहले राउंड में भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने 909 वोटों की बढ़त बनाई थी। हालांकि दूसरे, तीसरे और चौथे राउंड में कांग्रेस ने लगातार बढ़त हासिल कर मुकाबले का रुख बदल दिया। पांचवें राउंड में भाजपा ने कुछ अंतर कम किया, लेकिन छठे, सातवें और आठवें राउंड में कांग्रेस ने बढ़त लगातार बढ़ाते हुए निर्णायक स्थिति बना ली।

    नेता प्रतिपक्ष ने किया जीत का दावा
    मतगणना के बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया कि दतिया की जनता का रुझान कांग्रेस के पक्ष में है और पार्टी की जीत तय है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल कांग्रेस और भाजपा के बीच नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र के खिलाफ भी लड़ा गया। सिंघार ने यह भी कहा कि दतिया उपचुनाव का परिणाम 2028 के विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाला साबित होगा।

    दोनों दलों को जीत का भरोसा
    कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने दावा किया कि उनकी जीत का अंतर 12 से 15 हजार वोट तक पहुंच सकता है। वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयासों के दम पर भाजपा ही जीत दर्ज करेगी।

    कड़ी सुरक्षा के बीच जारी मतगणना
    दतिया विधानसभा उपचुनाव में 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ था। मतगणना के लिए 21 टेबल लगाई गई हैं और करीब 350 अधिकारी-कर्मचारी तैनात किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर मतगणना केंद्र को छावनी में तब्दील किया गया है और केवल अधिकृत पासधारकों को ही प्रवेश दिया जा रहा है।

  • मप्रः दतिया उपचुनाव के नतीजों से पहले कांग्रेस की बड़ी कार्रवाई, पूर्व विधायक राजेंद्र भारती 6 साल के लिए निष्कासित

    मप्रः दतिया उपचुनाव के नतीजों से पहले कांग्रेस की बड़ी कार्रवाई, पूर्व विधायक राजेंद्र भारती 6 साल के लिए निष्कासित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से ठीक पहले कांग्रेस आलाकमान ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है। इस संबंध में रविवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश के प्रभारी हरीश चौधरी द्वारा आधिकारिक आदेश जारी किया गया है।

    उपचुनाव के नतीजों के ठीक मुहाने पर पूर्व विधायक पर की गई इस अनुशासनात्मक कार्रवाई से पार्टी के आंतरिक घटनाक्रम और स्थानीय समीकरणों को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। दतिया उपचुनाव के लिए मतों की गिनती 3 अगस्त को होगी। मतगणना से ठीक 24 घंटे पहले पार्टी द्वारा अपने ही वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक को बाहर का रास्ता दिखाने के इस फैसले को राजनीतिक दृष्टि से काफी संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दरअसल, कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह लगातार राजेंद्र भारती पर चुनाव में भीतरघात और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगा रहे थे। हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप खुले तौर पर सामने आए थे।

    राजेंद्र भारती दतिया की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। वे तीन बार विधायक रह चुके हैं और वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराकर पूरे प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गए थे। उनके पिता स्वर्गीय श्याम सुंदर श्याम भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक रहे थे, जिससे दतिया में भारती परिवार का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है।

    हालांकि, इसी वर्ष एक पुराने सहकारी बैंक धोखाधड़ी मामले में विशेष अदालत से तीन वर्ष की सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। इसी कारण दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराया गया। बाद में दोषसिद्धि पर रोक पाने की उनकी कोशिशों के बीच मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा, लेकिन वे चुनाव नहीं लड़ सके।

    उपचुनाव में कांग्रेस ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया। मतदान के बाद घनश्याम सिंह ने राजेंद्र भारती पर भाजपा के साथ मिलकर भीतरघात करने और कांग्रेस प्रत्याशी को हराने की कोशिश करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों के बाद पार्टी में अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग तेज हो गई थी। अब मतगणना से पहले कांग्रेस ने राजेंद्र भारती को छह साल के लिए निष्कासित कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।

  • NEET आंदोलन के समर्थन के बाद बढ़ा सियासी विवाद, कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप- पुलिस ने 10 बार बदलवाया बयान

    NEET आंदोलन के समर्थन के बाद बढ़ा सियासी विवाद, कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप- पुलिस ने 10 बार बदलवाया बयान


    इंदौर । इंदौर में NEET परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलन के समर्थन को लेकर कांग्रेस और पुलिस प्रशासन के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे से गुरुवार को पंढरीनाथ थाने में करीब पांच घंटे तक पूछताछ की गई। इस दौरान उन्हें लंबे समय तक थाने में बैठाए रखने की खबर फैलते ही पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा सहित कई कांग्रेस नेता और समर्थक थाने पहुंच गए। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जमा होने से थाने के बाहर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की। बाद में पुलिस ने चौकसे को जाने की अनुमति दे दी।

    थाने से बाहर आने के बाद चिंटू चौकसे ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि कांग्रेस ने टंट्या भील चौराहे पर NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया था और इसी वजह से उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि थाने पहुंचने के बाद पुलिस ने कई घंटे तक उन्हें बैठाए रखा और बयान में बार-बार संशोधन कराया। उनके अनुसार वहां मौजूद पुलिसकर्मी केवल वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन कर रहे थे और पूरा घटनाक्रम पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर हुआ।

    चौकसे ने दावा किया कि उनके बयान में लगभग दस बार संशोधन कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार बयान की भाषा और उसमें लिखी गई बातों को बदलने का दबाव बनाया गया। उनके मुताबिक यह केवल एक व्यक्ति को परेशान करने का मामला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि जो भी जनता की आवाज उठाता है या छात्र, किसान और आम लोगों के आंदोलनों का समर्थन करता है, उसे प्रशासनिक दबाव के जरिए चुप कराने का प्रयास किया जा रहा है।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी नेता राहुल गांधी के आह्वान पर कांग्रेस देशभर में छात्रों के समर्थन में खड़ी है और इंदौर में भी पार्टी ने NEET अभ्यर्थियों के आंदोलन को समर्थन दिया था। उनका आरोप है कि जैसे ही प्रशासन को कांग्रेस की सक्रिय भूमिका की जानकारी मिली, छह महीने पुराने मामले में उन्हें नोटिस भेज दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।

    चौकसे ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पहले कांग्रेस कार्यालय पर हमला हुआ, पत्थरबाजी हुई और कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हुए, लेकिन पुलिस ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की जबकि भाजपा से जुड़े लोगों के खिलाफ अज्ञात आरोपियों के रूप में मामला दर्ज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस के माध्यम से विपक्षी नेताओं को परेशान कर रही है और आंदोलनों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

    कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। चिंटू चौकसे ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में आने वाले दिनों में इंदौर पुलिस के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और राजनीतिक विरोध की आवाज को दबाने के किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा।

    हालांकि इस मामले में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में कांग्रेस के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

  • राजस्थान कांग्रेस में उभरे संगठनात्मक मतभेद, BAP नेताओं की एंट्री पर छिड़ा विवाद

    राजस्थान कांग्रेस में उभरे संगठनात्मक मतभेद, BAP नेताओं की एंट्री पर छिड़ा विवाद


    नई दिल्ली। पंजाब में गुटबाजी की चुनौती से जूझ रही कांग्रेस के सामने अब राजस्थान में भी संगठनात्मक मतभेद उभरते दिखाई दे रहे हैं। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के करीब 300 नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रदेश इकाई के भीतर नए विवाद ने जन्म ले लिया है। यह कार्यक्रम पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी में आयोजित हुआ, जिस पर प्रदेश नेतृत्व ने अप्रसन्नता जताई है।

    BAP नेताओं की जॉइनिंग बनी विवाद की वजह
    जानकारी के अनुसार, पूर्व मंत्री महेंद्र मालवीय के नेतृत्व में बड़ी संख्या में BAP नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अशोक गहलोत भी मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम की जानकारी प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को पहले से नहीं दी गई थी, जिसके चलते विवाद खड़ा हो गया।

    डोटासरा ने साधा परोक्ष निशाना
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि यदि कोई अपनी व्यक्तिगत छवि बनाने के लिए काम कर रहा है तो उन्हें शुभकामनाएं, लेकिन उनकी प्राथमिकता केवल कांग्रेस पार्टी है। उन्होंने कहा कि उनकी निष्ठा हमेशा संगठन के प्रति रही है और वे किसी व्यक्ति विशेष की ब्रांडिंग के लिए काम नहीं करेंगे।

    मामला दिल्ली तक पहुंचने की चर्चा
    सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व तक भी पहुंचाई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस संबंध में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें के.सी. वेणुगोपाल का नाम भी शामिल है, से चर्चा की गई है। हालांकि, इस पर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    महेंद्र मालवीय को लेकर भी टिप्पणी
    डोटासरा ने पूर्व मंत्री महेंद्र मालवीय का नाम लिए बिना कहा कि जो नेता कांग्रेस छोड़कर गए थे, उन्हें चुनाव में सफलता नहीं मिली और बाद में उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पार्टी में वापसी की। उन्होंने कहा कि पार्टी में लौटने वालों का स्वागत है, लेकिन यदि कोई कांग्रेस के हितों के खिलाफ काम करेगा तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    चार खेमों की चर्चा, कांग्रेस का इनकार
    मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि राजस्थान कांग्रेस एक बार फिर अलग-अलग गुटों में बंटी हुई दिखाई दे रही है। इन चर्चाओं में अशोक गहलोत, सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के अलग-अलग प्रभाव क्षेत्रों का जिक्र किया जा रहा है। हालांकि, पार्टी के किसी भी वरिष्ठ नेता ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। डोटासरा का कहना है कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और सभी नेता मिलकर संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।

  • दतिया उपचुनाव में सुबह 10 बजे तक 16.33% मतदान, वोटिंग को लेकर मतदाताओं में उत्साह

    दतिया उपचुनाव में सुबह 10 बजे तक 16.33% मतदान, वोटिंग को लेकर मतदाताओं में उत्साह

    दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार सुबह 7 बजे से मतदान शांतिपूर्ण माहौल में जारी है। मतदान को लेकर मतदाताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह 10 बजे तक 16.33 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। ग्रामीण इलाकों सहित कई मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मतदान प्रक्रिया शाम 6 बजे तक जारी रहेगी।

    मतदान शुरू होने से पहले तीन मतदान केंद्रों पर ईवीएम से जुड़े उपकरणों में तकनीकी खराबी सामने आई। मतदान केंद्र क्रमांक 186 पर वीवीपैट, 108 पर बैलेटिंग यूनिट (BU) और 290 पर कंट्रोल यूनिट (CU) में समस्या आने पर मॉक पोल के दौरान सभी एजेंटों और कैमरों की मौजूदगी में उपकरण बदल दिए गए। इसके बाद निर्धारित समय पर मतदान शुरू कराया गया। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि तकनीकी खामी का समय रहते समाधान कर लिया गया था, जिससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।

    इधर, बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव में मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने “सड़क नहीं तो वोट नहीं” का नारा लगाते हुए मतदान का बहिष्कार किया। सूचना मिलने पर एसडीएम अशोक अवस्थी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की। समझाइश के बाद करीब 50 ग्रामीणों ने मतदान किया।

    कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने मतदान करने के बाद अपनी जीत का दावा करते हुए कहा कि जनता भाजपा के अहंकार का जवाब देगी। वहीं भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने मतदान से पहले पीतांबरा पीठ में दर्शन कर प्रदेश और दतिया के विकास, युवाओं को रोजगार तथा भयमुक्त वातावरण की कामना की। इसके बाद उन्होंने मतदान केंद्र क्रमांक 158 पहुंचकर पोलिंग एजेंटों से मुलाकात की और भाजपा के पक्ष में भारी मतदान होने का दावा किया।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों पर 2 लाख 20 हजार 400 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजीत सिंह चावला ने विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। वहीं, जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि सभी केंद्रों पर मतदान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो रहा है। इस दौरान पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

  • कांग्रेस साठ साल में पेपर लीक को लेकर उदासीन रही, मोदी सरकार ने कानून बनाया: अनुराग ठाकुर

    कांग्रेस साठ साल में पेपर लीक को लेकर उदासीन रही, मोदी सरकार ने कानून बनाया: अनुराग ठाकुर


    नई दिल्ली।
    मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के समर्थन में बोलते हुए पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि संगठित नकल और पेपर लीक राष्ट्र के लिए आतंकवाद और नक्सलवाद के समान खतरा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन दोनों खतरों का उन्मूलन कर दिया है और परीक्षा माफिया को भी उसी दृढ़ संकल्प के साथ जड़ से उखाड़ फेंकेगी। उन्होंने कहा कि यह संशोधन मूल 2024 के कानून को पहले को और मजबूत बनाता है। इसमें सजा को और कठोर किया गया है, जांच को समयबद्ध बनाया गया है तथा उन करोड़ों छात्रों के लिए न्याय की प्रक्रिया को तेज किया गया है।

    अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि “परीक्षा में धांधली, पेपर लीक, यह किसी आतंकवाद और माओवाद से कम खतरनाक नहीं हैं। इसका इलाज भी हम ही करेंगे क्योंकि हर मर्ज की दवा मोदी सरकार के पास है और जब मामला देश के युवाओं और उनके भविष्य का है तो यह सरकार युवाओं की सरकार है और युवाओं के हित में हम हर जरूरी और कड़े कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज इस देश के युवा और मोदी सरकार एक प्लेटफार्म पर खड़े हैं और हमारे एक इरादे भी स्पष्ट हैं कि हम एक ऐसा कानून लायेंगें जो टेरोरिज्म के खिलाफ बने के कानून से अधिक कठोर होगा। इसी उदेश्य से हमने 2024 में बने कानून में संशोधन कर इसे और भी मजबूत बनाया है जो इस सदन के सामने पेश किया गया है। यह सरकार केवल समस्या पर चर्चा नहीं करती, बल्कि समाधान की व्यवस्था बनाती है। यह विधेयक अपराधियों, परीक्षा कराने वाली लापरवाह एजेंसी और उनका प्रबंधन , सभी की जवाबदेही सुनिश्चित करता है”

    उन्होंने कहा कि भाजपा और राजग सरकार चिंतन भी करती है और कार्यवाई भी करती है, और कानून भी बनाते हैं। जिन्होंने पूरे पचपन साल साठ सालों तक पूरे ठाठ के साथ इस देश पर राज किया उन्होंने तो कोई कानून नहीं बनाया मगर 2024 में देश को पहला एंटी चीटिंग कानून देने का काम किया और अगर आज उस कानून को और भी कठोर बनाने की मांग उठी तो वह भी एनडीए ने ही किया। आज भारत में कॉलेज से लेकर यूनिवर्सिटी, आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपलआईटी, एम्स की संख्या में जो इजाफा हुआ है वह मोदी सरकार की देन है। हमने 2020 में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को लागू किया जिसका उद्देश्य है भारत को ग्लोबल नॉलेज पावर बनाना तो जो लोग आज युवाओं का सीजनल लीडर बनने की कोशिश कर रहे हैं वह अपने गिरेबान में झांकें की उन्होंने युवाओं के लिए क्या किया। जिन्होंने गुलशन को उजाड़ा है आज वह गुलशन में बहार लाने की दुहाई देते हैं तो अच्छा नहीं लगता है।”

    अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा, “विपक्ष को भी आत्ममंथन करना चाहिए कि जब उनके शासन में पेपर लीक होते थे, तब न मजबूत केंद्रीय कानून बना, न ऐसी फास्ट ट्रैक व्यवस्था बनी और न ऐसी जवाबदेही की संरचना खड़ी हुई। यूपीए काल में ऐम्स पीजी जैसी परीक्षाओं से जुड़े गंभीर विवाद और अनियमितताएं सामने आईं, किंतु व्यापक राष्ट्रीय एंटी पेपर लीक फ्रेमवर्क नहीं बनाया गया। राज्यों के अनुभव भी हमें चेतावनी देते हैं, राजस्थान में रीट था भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक के मामले, हिमाचल प्रदेश में सरकारी परीक्षाएं से जुड़ा संकट, झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल विवाद और कर्नाटक में परीक्षा-पत्र लीक जैसी घटनाओं ने लाखों युवाओं को अनिश्चितता में डाला। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार में भर्ती परीक्षाओं की एक लंबी शृंखला रही है, जिसने राज्य की भर्ती व्यवस्था की साख को बुरी तरह प्रभावित किया। देश के अलग-अलग राज्यों, कर्नाटक, तेलंगाना, केरल, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, पंजाब अथवा अन्य स्थानों, में किसी भी परीक्षा में अनियमितता हो, उस पर राजनीति नहीं, कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। हमारा मानना है कि दोषी का दल नहीं देखा जाना चाहिए; केवल अपराध देखा जाना चाहिए। मैं विपक्षी दलों से पूछना चाहता हूँ, जब विद्यार्थी चिंतित हों, तब क्या हमारा काम उनकी पीड़ा को राजनीतिक मंच बनाना है, या उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए कानून को मजबूत करना है? छात्रों की चिंता को चुनावी नारा बनाना आसान है; उनकी मेहनत को सुरक्षित करने के लिए कानून बनाना कठिन है, और मोदी सरकार ने कठिन रास्ता चुना है।”

  • राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव में 50% टिकट 50 साल से कम उम्र के नेताओं को देगी कांग्रेस

    राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव में 50% टिकट 50 साल से कम उम्र के नेताओं को देगी कांग्रेस


    जयपुर। राजस्थान में होने वाले निकाय और पंचायत चुनावों से पहले कांग्रेस ने युवाओं को आगे बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने घोषणा की कि पार्टी शहरी निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में 50 वर्ष से कम आयु के उम्मीदवारों को 50 प्रतिशत टिकट देगी।

    पार्टी मुख्यालय में शहरी निकाय चुनावों की तैयारियों की समीक्षा बैठक के दौरान डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें नेतृत्व का अवसर देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

    उन्होंने टिकट के दावेदारों को यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि केवल आवेदन करने से टिकट की गारंटी नहीं होगी। उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय परिस्थितियों, संगठन की जरूरतों और जीत की संभावनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

    डोटासरा ने वार्ड बदलकर टिकट मांगने की प्रवृत्ति पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि एक वार्ड से दूसरे वार्ड में जाकर दावेदारी करने को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। टिकट वितरण पूरी तरह संगठनात्मक मानकों और स्थानीय समीकरणों के आधार पर होगा।

    राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, पंचायत चुनावों की अधिसूचना 23 सितंबर के आसपास जारी होने की संभावना है। मतदान 13 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच विभिन्न चरणों में कराया जा सकता है, जबकि मतगणना 12 नवंबर तक पूरी होने की उम्मीद है।

    वहीं, शहरी निकाय चुनावों की घोषणा 17 अगस्त के आसपास होने की संभावना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 6 और 9 सितंबर को मतदान तथा 11 सितंबर को मतगणना कराई जा सकती है। हालांकि, अंतिम कार्यक्रम चुनाव आयोग की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही तय होगा।

  • कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2028 विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का किया ऐलान, चुनावी राजनीति से संन्यास की घोषणा

    कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2028 विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का किया ऐलान, चुनावी राजनीति से संन्यास की घोषणा


    नई दिल्ली । 
    कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया है कि वह वर्ष 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने एक विस्तृत संदेश जारी कर अपने फैसले की जानकारी दी और कहा कि बढ़ती उम्र, स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियां तथा राजनीति में बढ़ते भ्रष्टाचार ने उन्हें यह निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव नहीं लड़ने के बावजूद वह सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय बने रहेंगे।

    सिद्धारमैया ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक माहौल पहले की तुलना में काफी बदल चुका है। उनके अनुसार, आज राजनीति में ईमानदारी और सिद्धांतों के साथ काम करना पहले से अधिक कठिन हो गया है। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया में धनबल का प्रभाव बढ़ा है और अब चुनाव लड़ने के लिए परिस्थितियां पहले जैसी नहीं रहीं। उन्होंने कहा कि इसी बदलते माहौल को देखते हुए उन्होंने भविष्य में किसी भी चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनने का फैसला किया है।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी उम्र अब 79 वर्ष हो चुकी है और वर्तमान सरकार का कार्यकाल समाप्त होने तक उनकी आयु 81 से 82 वर्ष के बीच होगी। उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है। पहले जैसी ऊर्जा और निरंतर सक्रियता बनाए रखना अब संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने समय रहते चुनावी राजनीति से अलग होने का निर्णय लिया है।

    उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सार्वजनिक यात्रा वर्ष 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के रूप में शुरू हुई थी। पिछले लगभग पांच दशकों में उन्होंने जीत और हार दोनों का अनुभव किया, लेकिन हमेशा अपने सिद्धांतों और वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ काम करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी व्यक्तिगत लाभ के लिए अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया और यही उनके सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

    सिद्धारमैया ने यह भी बताया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र वरुणा के लोग लगातार उनसे अगला चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपना निर्णय नहीं बदलने की बात कही। उनका कहना है कि वह जनता की भावनाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन अब चुनावी राजनीति से पीछे हटना ही उचित मानते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनता की समस्याओं और सामाजिक मुद्दों को उठाने का उनका प्रयास आगे भी जारी रहेगा।

    उन्होंने अपने संदेश में राजनीति में बढ़ते आर्थिक प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि पहले चुनाव जनता के सहयोग और जनसमर्थन के बल पर लड़े जाते थे, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उनके अनुसार, स्वस्थ लोकतंत्र के लिए पारदर्शिता, नैतिकता और जनविश्वास आवश्यक हैं तथा इन मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है।

    सिद्धारमैया के इस ऐलान को कर्नाटक की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। लंबे समय तक राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने वाले इस वरिष्ठ नेता के फैसले के बाद भविष्य में कांग्रेस की चुनावी रणनीति और नेतृत्व को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज होने की संभावना है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि चुनाव नहीं लड़ने के बावजूद वह संगठन और जनता के बीच सक्रिय रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।

  • दतिया की चुनावी जंग में आरोप प्रत्यारोप तेज भाजपा की नई रणनीति नरोत्तम का टैंकर और सिंधिया के तंज बने चर्चा का केंद्र

    दतिया की चुनावी जंग में आरोप प्रत्यारोप तेज भाजपा की नई रणनीति नरोत्तम का टैंकर और सिंधिया के तंज बने चर्चा का केंद्र


    भोपाल । मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में चुनाव प्रचार अब पूरी तरह गर्मा चुका है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। चुनावी सभाओं में विकास के मुद्दों के साथ साथ तंज व्यंग्य और राजनीतिक बयानबाजी भी सुर्खियां बटोर रही है। नेताओं के बयान और चुनावी रणनीतियां इस उपचुनाव को लगातार दिलचस्प बना रही हैं।

    भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाया है लेकिन प्रचार अभियान में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका भी बेहद अहम नजर आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दतिया में आयोजित चुनावी सभा के दौरान आशुतोष तिवारी और नरोत्तम मिश्रा को मंच पर साथ खड़ा करते हुए दोनों को राम लक्ष्मण की जोड़ी बताया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई लोग इसे भाजपा की ऐसी रणनीति बता रहे हैं जिसमें प्रत्याशी के साथ वरिष्ठ नेता की लोकप्रियता का भी पूरा लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है।

    इसी बीच दतिया में सड़क किनारे खड़े एक पुराने टैंकर ने भी चुनावी माहौल को नया मोड़ दे दिया। टैंकर पर पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम लिखा होने का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। कांग्रेस नेताओं ने इसे लेकर भाजपा पर तंज कसते हुए दावा किया कि पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता को राजनीतिक रूप से पीछे कर दिया है। हालांकि भाजपा नेताओं ने इस तरह की टिप्पणियों को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया।

    उधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी दतिया में लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि उनका पूरा ध्यान दतिया उपचुनाव पर है और कांग्रेस इस सीट को हर हाल में जीतना चाहती है। भाजपा ने भी इस बयान पर पलटवार किया। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने व्यंग्य करते हुए कहा कि जीतू पटवारी आजकल हर जगह घूम रहे हैं लेकिन उनका अपना कोई हल्का नहीं है। इस बयान के बाद दोनों दलों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई।

    चुनावी प्रचार के दौरान नेताओं ने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को भी अपने अपने तरीके से उठाया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी की पृष्ठभूमि को लेकर बयान दिए तो कांग्रेस ने लोकतंत्र में जनता को सबसे बड़ा बताया। दोनों दल अपने समर्थकों को यह भरोसा दिलाने में जुटे हैं कि वही जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी दतिया पहुंचकर भाजपा के पक्ष में प्रचार किया। उन्होंने कांग्रेस शासनकाल की बिजली व्यवस्था का जिक्र करते हुए पुराने दिनों का उदाहरण दिया और अपने खास अंदाज में कांग्रेस पर निशाना साधा। उनके भाषण और मंचीय प्रस्तुति को लेकर भी सभा में मौजूद लोगों के बीच खूब चर्चा रही।

    राजनीतिक हलकों में चुनाव प्रचार से जुड़ा एक रोचक प्रसंग भी चर्चा का विषय बना। भाजपा की एक संगठनात्मक बैठक के दौरान एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने मजाकिया अंदाज में संगठन के एक पदाधिकारी से मुख्यमंत्री बनने की बात कह दी। इस टिप्पणी पर कुछ देर के लिए बैठक में मौजूद नेताओं के बीच हल्की मुस्कान और हास्य का माहौल बन गया।

    दतिया उपचुनाव में अब प्रचार अंतिम दौर में पहुंच रहा है। दोनों प्रमुख दल अपने अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए लगातार जनसभाएं कर रहे हैं। आने वाले दिनों में चुनावी बयानबाजी और रणनीतियां और तेज होने की संभावना है जबकि अंतिम फैसला मतदाता अपने वोट के जरिए करेंगे।