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  • दतिया उपचुनाव में सुबह 10 बजे तक 16.33% मतदान, वोटिंग को लेकर मतदाताओं में उत्साह

    दतिया उपचुनाव में सुबह 10 बजे तक 16.33% मतदान, वोटिंग को लेकर मतदाताओं में उत्साह

    दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार सुबह 7 बजे से मतदान शांतिपूर्ण माहौल में जारी है। मतदान को लेकर मतदाताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह 10 बजे तक 16.33 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। ग्रामीण इलाकों सहित कई मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मतदान प्रक्रिया शाम 6 बजे तक जारी रहेगी।

    मतदान शुरू होने से पहले तीन मतदान केंद्रों पर ईवीएम से जुड़े उपकरणों में तकनीकी खराबी सामने आई। मतदान केंद्र क्रमांक 186 पर वीवीपैट, 108 पर बैलेटिंग यूनिट (BU) और 290 पर कंट्रोल यूनिट (CU) में समस्या आने पर मॉक पोल के दौरान सभी एजेंटों और कैमरों की मौजूदगी में उपकरण बदल दिए गए। इसके बाद निर्धारित समय पर मतदान शुरू कराया गया। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि तकनीकी खामी का समय रहते समाधान कर लिया गया था, जिससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।

    इधर, बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव में मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने “सड़क नहीं तो वोट नहीं” का नारा लगाते हुए मतदान का बहिष्कार किया। सूचना मिलने पर एसडीएम अशोक अवस्थी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की। समझाइश के बाद करीब 50 ग्रामीणों ने मतदान किया।

    कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने मतदान करने के बाद अपनी जीत का दावा करते हुए कहा कि जनता भाजपा के अहंकार का जवाब देगी। वहीं भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने मतदान से पहले पीतांबरा पीठ में दर्शन कर प्रदेश और दतिया के विकास, युवाओं को रोजगार तथा भयमुक्त वातावरण की कामना की। इसके बाद उन्होंने मतदान केंद्र क्रमांक 158 पहुंचकर पोलिंग एजेंटों से मुलाकात की और भाजपा के पक्ष में भारी मतदान होने का दावा किया।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों पर 2 लाख 20 हजार 400 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजीत सिंह चावला ने विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। वहीं, जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि सभी केंद्रों पर मतदान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो रहा है। इस दौरान पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

  • कांग्रेस साठ साल में पेपर लीक को लेकर उदासीन रही, मोदी सरकार ने कानून बनाया: अनुराग ठाकुर

    कांग्रेस साठ साल में पेपर लीक को लेकर उदासीन रही, मोदी सरकार ने कानून बनाया: अनुराग ठाकुर


    नई दिल्ली।
    मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के समर्थन में बोलते हुए पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि संगठित नकल और पेपर लीक राष्ट्र के लिए आतंकवाद और नक्सलवाद के समान खतरा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन दोनों खतरों का उन्मूलन कर दिया है और परीक्षा माफिया को भी उसी दृढ़ संकल्प के साथ जड़ से उखाड़ फेंकेगी। उन्होंने कहा कि यह संशोधन मूल 2024 के कानून को पहले को और मजबूत बनाता है। इसमें सजा को और कठोर किया गया है, जांच को समयबद्ध बनाया गया है तथा उन करोड़ों छात्रों के लिए न्याय की प्रक्रिया को तेज किया गया है।

    अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि “परीक्षा में धांधली, पेपर लीक, यह किसी आतंकवाद और माओवाद से कम खतरनाक नहीं हैं। इसका इलाज भी हम ही करेंगे क्योंकि हर मर्ज की दवा मोदी सरकार के पास है और जब मामला देश के युवाओं और उनके भविष्य का है तो यह सरकार युवाओं की सरकार है और युवाओं के हित में हम हर जरूरी और कड़े कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज इस देश के युवा और मोदी सरकार एक प्लेटफार्म पर खड़े हैं और हमारे एक इरादे भी स्पष्ट हैं कि हम एक ऐसा कानून लायेंगें जो टेरोरिज्म के खिलाफ बने के कानून से अधिक कठोर होगा। इसी उदेश्य से हमने 2024 में बने कानून में संशोधन कर इसे और भी मजबूत बनाया है जो इस सदन के सामने पेश किया गया है। यह सरकार केवल समस्या पर चर्चा नहीं करती, बल्कि समाधान की व्यवस्था बनाती है। यह विधेयक अपराधियों, परीक्षा कराने वाली लापरवाह एजेंसी और उनका प्रबंधन , सभी की जवाबदेही सुनिश्चित करता है”

    उन्होंने कहा कि भाजपा और राजग सरकार चिंतन भी करती है और कार्यवाई भी करती है, और कानून भी बनाते हैं। जिन्होंने पूरे पचपन साल साठ सालों तक पूरे ठाठ के साथ इस देश पर राज किया उन्होंने तो कोई कानून नहीं बनाया मगर 2024 में देश को पहला एंटी चीटिंग कानून देने का काम किया और अगर आज उस कानून को और भी कठोर बनाने की मांग उठी तो वह भी एनडीए ने ही किया। आज भारत में कॉलेज से लेकर यूनिवर्सिटी, आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपलआईटी, एम्स की संख्या में जो इजाफा हुआ है वह मोदी सरकार की देन है। हमने 2020 में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को लागू किया जिसका उद्देश्य है भारत को ग्लोबल नॉलेज पावर बनाना तो जो लोग आज युवाओं का सीजनल लीडर बनने की कोशिश कर रहे हैं वह अपने गिरेबान में झांकें की उन्होंने युवाओं के लिए क्या किया। जिन्होंने गुलशन को उजाड़ा है आज वह गुलशन में बहार लाने की दुहाई देते हैं तो अच्छा नहीं लगता है।”

    अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा, “विपक्ष को भी आत्ममंथन करना चाहिए कि जब उनके शासन में पेपर लीक होते थे, तब न मजबूत केंद्रीय कानून बना, न ऐसी फास्ट ट्रैक व्यवस्था बनी और न ऐसी जवाबदेही की संरचना खड़ी हुई। यूपीए काल में ऐम्स पीजी जैसी परीक्षाओं से जुड़े गंभीर विवाद और अनियमितताएं सामने आईं, किंतु व्यापक राष्ट्रीय एंटी पेपर लीक फ्रेमवर्क नहीं बनाया गया। राज्यों के अनुभव भी हमें चेतावनी देते हैं, राजस्थान में रीट था भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक के मामले, हिमाचल प्रदेश में सरकारी परीक्षाएं से जुड़ा संकट, झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल विवाद और कर्नाटक में परीक्षा-पत्र लीक जैसी घटनाओं ने लाखों युवाओं को अनिश्चितता में डाला। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार में भर्ती परीक्षाओं की एक लंबी शृंखला रही है, जिसने राज्य की भर्ती व्यवस्था की साख को बुरी तरह प्रभावित किया। देश के अलग-अलग राज्यों, कर्नाटक, तेलंगाना, केरल, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, पंजाब अथवा अन्य स्थानों, में किसी भी परीक्षा में अनियमितता हो, उस पर राजनीति नहीं, कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। हमारा मानना है कि दोषी का दल नहीं देखा जाना चाहिए; केवल अपराध देखा जाना चाहिए। मैं विपक्षी दलों से पूछना चाहता हूँ, जब विद्यार्थी चिंतित हों, तब क्या हमारा काम उनकी पीड़ा को राजनीतिक मंच बनाना है, या उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए कानून को मजबूत करना है? छात्रों की चिंता को चुनावी नारा बनाना आसान है; उनकी मेहनत को सुरक्षित करने के लिए कानून बनाना कठिन है, और मोदी सरकार ने कठिन रास्ता चुना है।”

  • राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव में 50% टिकट 50 साल से कम उम्र के नेताओं को देगी कांग्रेस

    राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव में 50% टिकट 50 साल से कम उम्र के नेताओं को देगी कांग्रेस


    जयपुर। राजस्थान में होने वाले निकाय और पंचायत चुनावों से पहले कांग्रेस ने युवाओं को आगे बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने घोषणा की कि पार्टी शहरी निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में 50 वर्ष से कम आयु के उम्मीदवारों को 50 प्रतिशत टिकट देगी।

    पार्टी मुख्यालय में शहरी निकाय चुनावों की तैयारियों की समीक्षा बैठक के दौरान डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें नेतृत्व का अवसर देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

    उन्होंने टिकट के दावेदारों को यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि केवल आवेदन करने से टिकट की गारंटी नहीं होगी। उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय परिस्थितियों, संगठन की जरूरतों और जीत की संभावनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

    डोटासरा ने वार्ड बदलकर टिकट मांगने की प्रवृत्ति पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि एक वार्ड से दूसरे वार्ड में जाकर दावेदारी करने को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। टिकट वितरण पूरी तरह संगठनात्मक मानकों और स्थानीय समीकरणों के आधार पर होगा।

    राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, पंचायत चुनावों की अधिसूचना 23 सितंबर के आसपास जारी होने की संभावना है। मतदान 13 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच विभिन्न चरणों में कराया जा सकता है, जबकि मतगणना 12 नवंबर तक पूरी होने की उम्मीद है।

    वहीं, शहरी निकाय चुनावों की घोषणा 17 अगस्त के आसपास होने की संभावना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 6 और 9 सितंबर को मतदान तथा 11 सितंबर को मतगणना कराई जा सकती है। हालांकि, अंतिम कार्यक्रम चुनाव आयोग की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही तय होगा।

  • कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2028 विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का किया ऐलान, चुनावी राजनीति से संन्यास की घोषणा

    कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2028 विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का किया ऐलान, चुनावी राजनीति से संन्यास की घोषणा


    नई दिल्ली । 
    कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया है कि वह वर्ष 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने एक विस्तृत संदेश जारी कर अपने फैसले की जानकारी दी और कहा कि बढ़ती उम्र, स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियां तथा राजनीति में बढ़ते भ्रष्टाचार ने उन्हें यह निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव नहीं लड़ने के बावजूद वह सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय बने रहेंगे।

    सिद्धारमैया ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक माहौल पहले की तुलना में काफी बदल चुका है। उनके अनुसार, आज राजनीति में ईमानदारी और सिद्धांतों के साथ काम करना पहले से अधिक कठिन हो गया है। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया में धनबल का प्रभाव बढ़ा है और अब चुनाव लड़ने के लिए परिस्थितियां पहले जैसी नहीं रहीं। उन्होंने कहा कि इसी बदलते माहौल को देखते हुए उन्होंने भविष्य में किसी भी चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनने का फैसला किया है।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी उम्र अब 79 वर्ष हो चुकी है और वर्तमान सरकार का कार्यकाल समाप्त होने तक उनकी आयु 81 से 82 वर्ष के बीच होगी। उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है। पहले जैसी ऊर्जा और निरंतर सक्रियता बनाए रखना अब संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने समय रहते चुनावी राजनीति से अलग होने का निर्णय लिया है।

    उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सार्वजनिक यात्रा वर्ष 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के रूप में शुरू हुई थी। पिछले लगभग पांच दशकों में उन्होंने जीत और हार दोनों का अनुभव किया, लेकिन हमेशा अपने सिद्धांतों और वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ काम करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी व्यक्तिगत लाभ के लिए अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया और यही उनके सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

    सिद्धारमैया ने यह भी बताया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र वरुणा के लोग लगातार उनसे अगला चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपना निर्णय नहीं बदलने की बात कही। उनका कहना है कि वह जनता की भावनाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन अब चुनावी राजनीति से पीछे हटना ही उचित मानते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनता की समस्याओं और सामाजिक मुद्दों को उठाने का उनका प्रयास आगे भी जारी रहेगा।

    उन्होंने अपने संदेश में राजनीति में बढ़ते आर्थिक प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि पहले चुनाव जनता के सहयोग और जनसमर्थन के बल पर लड़े जाते थे, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उनके अनुसार, स्वस्थ लोकतंत्र के लिए पारदर्शिता, नैतिकता और जनविश्वास आवश्यक हैं तथा इन मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है।

    सिद्धारमैया के इस ऐलान को कर्नाटक की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। लंबे समय तक राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने वाले इस वरिष्ठ नेता के फैसले के बाद भविष्य में कांग्रेस की चुनावी रणनीति और नेतृत्व को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज होने की संभावना है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि चुनाव नहीं लड़ने के बावजूद वह संगठन और जनता के बीच सक्रिय रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।

  • दतिया की चुनावी जंग में आरोप प्रत्यारोप तेज भाजपा की नई रणनीति नरोत्तम का टैंकर और सिंधिया के तंज बने चर्चा का केंद्र

    दतिया की चुनावी जंग में आरोप प्रत्यारोप तेज भाजपा की नई रणनीति नरोत्तम का टैंकर और सिंधिया के तंज बने चर्चा का केंद्र


    भोपाल । मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में चुनाव प्रचार अब पूरी तरह गर्मा चुका है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। चुनावी सभाओं में विकास के मुद्दों के साथ साथ तंज व्यंग्य और राजनीतिक बयानबाजी भी सुर्खियां बटोर रही है। नेताओं के बयान और चुनावी रणनीतियां इस उपचुनाव को लगातार दिलचस्प बना रही हैं।

    भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाया है लेकिन प्रचार अभियान में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका भी बेहद अहम नजर आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दतिया में आयोजित चुनावी सभा के दौरान आशुतोष तिवारी और नरोत्तम मिश्रा को मंच पर साथ खड़ा करते हुए दोनों को राम लक्ष्मण की जोड़ी बताया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई लोग इसे भाजपा की ऐसी रणनीति बता रहे हैं जिसमें प्रत्याशी के साथ वरिष्ठ नेता की लोकप्रियता का भी पूरा लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है।

    इसी बीच दतिया में सड़क किनारे खड़े एक पुराने टैंकर ने भी चुनावी माहौल को नया मोड़ दे दिया। टैंकर पर पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम लिखा होने का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। कांग्रेस नेताओं ने इसे लेकर भाजपा पर तंज कसते हुए दावा किया कि पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता को राजनीतिक रूप से पीछे कर दिया है। हालांकि भाजपा नेताओं ने इस तरह की टिप्पणियों को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया।

    उधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी दतिया में लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि उनका पूरा ध्यान दतिया उपचुनाव पर है और कांग्रेस इस सीट को हर हाल में जीतना चाहती है। भाजपा ने भी इस बयान पर पलटवार किया। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने व्यंग्य करते हुए कहा कि जीतू पटवारी आजकल हर जगह घूम रहे हैं लेकिन उनका अपना कोई हल्का नहीं है। इस बयान के बाद दोनों दलों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई।

    चुनावी प्रचार के दौरान नेताओं ने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को भी अपने अपने तरीके से उठाया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी की पृष्ठभूमि को लेकर बयान दिए तो कांग्रेस ने लोकतंत्र में जनता को सबसे बड़ा बताया। दोनों दल अपने समर्थकों को यह भरोसा दिलाने में जुटे हैं कि वही जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी दतिया पहुंचकर भाजपा के पक्ष में प्रचार किया। उन्होंने कांग्रेस शासनकाल की बिजली व्यवस्था का जिक्र करते हुए पुराने दिनों का उदाहरण दिया और अपने खास अंदाज में कांग्रेस पर निशाना साधा। उनके भाषण और मंचीय प्रस्तुति को लेकर भी सभा में मौजूद लोगों के बीच खूब चर्चा रही।

    राजनीतिक हलकों में चुनाव प्रचार से जुड़ा एक रोचक प्रसंग भी चर्चा का विषय बना। भाजपा की एक संगठनात्मक बैठक के दौरान एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने मजाकिया अंदाज में संगठन के एक पदाधिकारी से मुख्यमंत्री बनने की बात कह दी। इस टिप्पणी पर कुछ देर के लिए बैठक में मौजूद नेताओं के बीच हल्की मुस्कान और हास्य का माहौल बन गया।

    दतिया उपचुनाव में अब प्रचार अंतिम दौर में पहुंच रहा है। दोनों प्रमुख दल अपने अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए लगातार जनसभाएं कर रहे हैं। आने वाले दिनों में चुनावी बयानबाजी और रणनीतियां और तेज होने की संभावना है जबकि अंतिम फैसला मतदाता अपने वोट के जरिए करेंगे।

  • MP की सियासत में हलचल: भुट्टा बेचने वाले युवक ने सीएम को सुनाई बेरोजगारी की हकीकत, कांग्रेस नेता को मंच से लौटते वक्त थप्पड़

    MP की सियासत में हलचल: भुट्टा बेचने वाले युवक ने सीएम को सुनाई बेरोजगारी की हकीकत, कांग्रेस नेता को मंच से लौटते वक्त थप्पड़


    मध्यप्रदेश मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार का दिन कई ऐसे घटनाक्रमों का गवाह बना, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा बटोरी। एक ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने एक दिव्यांग युवक ने अपनी बेरोजगारी की कहानी सुनाकर व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, वहीं राजगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष चंदर सिंह सोंधिया के साथ हुई बदसलूकी ने सियासी माहौल गरमा दिया। इसके अलावा दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद भावुक हुए पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं पर भाजपा नेताओं के अलग-अलग बयान भी चर्चा का विषय बने रहे।

    धार जिले के राजगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला गुजर रहा था, तभी सड़क किनारे भुट्टा बेच रहे एक दिव्यांग युवक ने उन्हें आवाज लगाई। मुख्यमंत्री ने काफिला रुकवाया, युवक से भुट्टा खरीदा, बातचीत की और उसे 500 रुपए भी दिए। बातचीत के दौरान युवक ने बताया कि उसने मास्टर ऑफ सोशल वर्क की पढ़ाई की है, लेकिन नौकरी नहीं मिलने के कारण उसे भुट्टा बेचने और चाय-पकौड़े की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करना पड़ रहा है। युवक की यह बात सामने आने के बाद बेरोजगारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने इसे पढ़े-लिखे युवाओं की मौजूदा स्थिति का उदाहरण बताया, जबकि राजनीतिक हलकों में भी इस घटना की चर्चा होती रही।

    उधर राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान बड़ा विवाद हो गया। प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप की मौजूदगी में जिला पंचायत अध्यक्ष और कांग्रेस नेता चंदर सिंह सोंधिया को पहले कार्यक्रम में प्रवेश से रोका गया। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें अंदर जाने दिया गया, लेकिन इस घटनाक्रम से नाराज होकर उन्होंने मंच के सामने बैठकर विरोध जताया। बाद में जब वह कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद पुलिस उन्हें थाने ले गई, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।

    इसी बीच दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद सार्वजनिक मंच पर भावुक हुए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को लेकर भाजपा के भीतर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा कि वर्ष 2018 में उनका भी टिकट कटा था और तब उनकी आंखों में भी आंसू आए थे, लेकिन किसी ने उनकी चिंता नहीं की। उन्होंने पार्टी के फैसले को उचित बताते हुए कहा कि नए लोगों को अवसर देने के लिए कभी-कभी पुराने नेताओं को पीछे हटना पड़ता है।

    वहीं भाजपा के वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने अलग राय रखते हुए कहा कि राजनीति में सक्रिय व्यक्ति का भविष्य कभी समाप्त नहीं होता। उन्होंने संकेत दिया कि नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक भूमिका आगे भी महत्वपूर्ण रह सकती है। इन बयानों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की रणनीति को लेकर अलग-अलग सोच मौजूद है।

    इधर प्रशासनिक गलियारों में भी नई चर्चाओं ने जोर पकड़ा। नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव को लेकर मंत्रालय में हलचल बनी रही। आदेश जारी होने से पहले ही एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा मंत्रालय छोड़ने की तैयारी और बाद में उनकी नई पदस्थापना को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

    इन तीनों घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखाया कि मध्य प्रदेश की राजनीति में जमीनी मुद्दों, राजनीतिक टकराव और सत्ता के भीतर की हलचल लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं।

  • पूर्व IAS नियाज़ खान की राजनीति में एंट्री की इच्छा: बोले- कांग्रेस और भाजपा शायद स्वीकार न करें, नई पार्टी बनी तो करूंगा जॉइन

    पूर्व IAS नियाज़ खान की राजनीति में एंट्री की इच्छा: बोले- कांग्रेस और भाजपा शायद स्वीकार न करें, नई पार्टी बनी तो करूंगा जॉइन


    भोपाल । मध्य प्रदेश के पूर्व आईएएस अधिकारी और चर्चित लेखक नियाज़ खान ने सक्रिय राजनीति में आने की इच्छा जाहिर कर एक नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि देश में बढ़ते भ्रष्टाचार और राजनीतिक व्यवस्था में सुधार लाने के लिए अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना जरूरी हो गया है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।

    नियाज़ खान ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह कांग्रेस पार्टी में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि उनके हिंदू उदारवादी विचारों के कारण कांग्रेस उन्हें स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने भी उनके साथ हमेशा अलग व्यवहार किया और प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्हें कभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां नहीं दीं। उनके अनुसार, इससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा भी उन्हें अपने साथ जोड़ने की इच्छुक नहीं रही।

    पूर्व आईएएस अधिकारी ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि यदि भविष्य में कॉकरोच जनता पार्टी राजनीति में सक्रिय रूप से उतरती है तो वह उस पार्टी से जुड़ने पर विचार करेंगे। उनका कहना है कि वर्तमान समय में राजनीति ही समाज और देश की सबसे बड़ी सेवा का माध्यम बन चुकी है। इसलिए यदि व्यवस्था में बदलाव लाना है तो राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बनना आवश्यक है।

    नियाज़ खान प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ साहित्य जगत में भी अपनी अलग पहचान रखते हैं। उन्होंने ‘ब्राह्मण द ग्रेट’, ‘ब्राउन डेजर्ट IV-786’ और ‘बी रेडी टू डाई’ जैसे कई चर्चित उपन्यास लिखे हैं। उनकी किताबें अक्सर सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर केंद्रित रही हैं, जिसके कारण वे समय-समय पर सार्वजनिक बहस का हिस्सा भी बने हैं।

    सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट सामने आने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने उनके राजनीति में आने के फैसले का स्वागत किया, जबकि कुछ ने उनके बयान को लेकर सवाल भी उठाए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह का इस तरह खुलकर अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं सार्वजनिक करना चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है।

    हालांकि, नियाज़ खान ने फिलहाल किसी राजनीतिक दल में औपचारिक रूप से शामिल होने की घोषणा नहीं की है। उनका बयान केवल अपनी इच्छा और संभावित विकल्पों को लेकर है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में वह वास्तव में सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनते हैं या नहीं और यदि बनते हैं तो किस राजनीतिक मंच से अपनी नई पारी की शुरुआत करते हैं।

  • बात खरी है: बच्चों से चुनावी नारे, कांग्रेस मार्च में मारपीट और नशे में पुलिसकर्मी का ड्रामा

    बात खरी है: बच्चों से चुनावी नारे, कांग्रेस मार्च में मारपीट और नशे में पुलिसकर्मी का ड्रामा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाओं ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। दतिया उपचुनाव के प्रचार से लेकर भोपाल में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन और रीवा के थाने तक, कई घटनाओं ने सवाल खड़े किए हैं। इन घटनाओं ने चुनावी आचार संहिता, राजनीतिक अनुशासन और पुलिस व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।

    दतिया उपचुनाव के प्रचार के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में वे छोटे बच्चों से कांग्रेस के समर्थन में चुनावी नारे लगवाते नजर आ रहे हैं। बच्चों से “जात पे न पात पे, मुहर लगेगी हाथ पे” और “जीतेगा भाई जीतेगा, हाथ का पंजा जीतेगा” जैसे नारे लगवाने के बाद पटवारी ने उनसे पूछा कि उनकी बात सही है या गलत। इस पर बच्चों ने मासूमियत से “गलत” कह दिया। हालांकि उन्होंने इसे नजरअंदाज कर भाषण जारी रखा, लेकिन अब इस वीडियो को लेकर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार चुनाव प्रचार में बच्चों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

    उधर राजधानी भोपाल में भाजपा कार्यालय तक निकाले गए कांग्रेस के पैदल मार्च के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कुछ कार्यकर्ताओं ने एक युवक को जेबकतरा बताकर बीच सड़क पर पीटना शुरू कर दिया। युवक को दौड़ा-दौड़ाकर लात-घूंसों से मारा गया। मौके पर मौजूद पुलिस ने हस्तक्षेप कर उसे भीड़ से बचाया और अस्पताल पहुंचाया। घायल युवक माज कुरैशी ने दावा किया कि वह कांग्रेस कार्यकर्ता है और सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की। वहीं कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनका इस घटना से कोई संबंध नहीं है। घटना ने कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इधर रीवा के अमहिया थाने से सामने आए एक वीडियो ने पुलिस विभाग की छवि को झटका दिया है। वीडियो में प्रधान आरक्षक अच्छेलाल शराब के नशे में थाने के भीतर हंगामा करते दिखाई दे रहे हैं। वह खुद को “पुलिस लाइन का गुंडा” बताते हुए खुलेआम शराब पीने की बात स्वीकार करता नजर आया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पुलिस विभाग प्रदेशभर में “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान चला रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन घटना ने पुलिस व्यवस्था और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इसी बीच राज्य के नए मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। बताया जा रहा है कि अंतिम समय तक कई वरिष्ठ अधिकारियों के बीच इस पद के लिए जोर-आजमाइश चलती रही। नए मुख्य सचिव के कार्यभार संभालने के बाद भी नौकरशाही में इसे लेकर चर्चाएं थमती नजर नहीं आ रही हैं।

  • पीएम मोदी के बयान के बाद खरगे का हमला, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर उठाए गंभीर सवाल

    पीएम मोदी के बयान के बाद खरगे का हमला, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा के बाद देश की राजनीति में इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केवल घोषणाओं से युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। उनका कहना है कि छात्रों और युवाओं को भरोसा दिलाने के लिए सरकार को ठोस और प्रभावी फैसले लेने होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है और युवाओं के सामने रोजगार तथा भविष्य को लेकर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

    खरगे ने कहा कि देश के छात्र और युवा लंबे समय से बेहतर शिक्षा व्यवस्था, निष्पक्ष परीक्षाओं और रोजगार की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों का विश्वास प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल नई घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि दोषियों के खिलाफ समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है ताकि युवाओं का भरोसा फिर से कायम हो सके।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के कार्यकाल में छात्रों के आंदोलनों के दौरान कई स्थानों पर बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले युवाओं के साथ कठोर व्यवहार किया गया, जबकि लोकतंत्र में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि छात्रों की समस्याओं को कानून-व्यवस्था का विषय बनाने के बजाय संवाद और संवेदनशीलता के साथ समाधान तलाशा जाए।

    खरगे ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी दोहराईं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए, छात्रों पर हुई कार्रवाई के लिए सरकार सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और जिन विद्यार्थियों को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है, उन्हें न्याय सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना था कि युवाओं का भविष्य किसी भी राजनीतिक मतभेद से ऊपर होना चाहिए और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

    उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। खरगे का आरोप है कि देश में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर अपेक्षित गति से नहीं बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्थायी नौकरियों की संख्या सीमित होती जा रही है, जबकि संविदा आधारित नियुक्तियों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिससे भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों को शीघ्र एवं कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री के इसी बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिससे शिक्षा, परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

  • लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

    लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव उस समय बढ़ गया, जब भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस प्रदेश कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कई कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया और काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने से रोक दिया। मौके पर कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई।

    दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के बाहर भी सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई थी। कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता लाठी लेकर परिसर में तैनात नजर आईं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता शांतिप्रिय है, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए और उनके पोस्टरों पर जूते-चप्पल भी बरसाए। दोनों दलों के समर्थकों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही।

    यह प्रदर्शन 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन की प्रतिक्रिया के रूप में आयोजित किया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यालय के घेराव का ऐलान किया गया था। विपक्ष के उस प्रदर्शन में राहुल गांधी, अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने हिस्सा लिया था, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।

    पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और निगरानी की व्यवस्था की। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।