इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव का उदाहरण देते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए, हालांकि इन बयानों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
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मंडला दौरे पर अजय सिंह राहुल का बयान: एकजुटता से ही मिलेगी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को सफलता
नई दिल्ली । मंडला में शनिवार शाम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल पहुंचे। यह दौरा प्रदेश में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है। वे इन दिनों पूरे मध्य प्रदेश का दौरा कर पार्टी को जमीनी स्तर पर फिर से सक्रिय करने की कोशिश में जुटे हैं।मंडला पहुंचने पर उन्होंने स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं से मुलाकात की और संगठन की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि यदि कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर काम करें तो आगामी चुनावों में पार्टी की जीत पूरी तरह सुनिश्चित है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि किसी भी राजनीतिक दल में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन चुनाव के समय एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत होती है।अजय सिंह राहुल ने अपने संबोधन में संगठन की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि कई कार्यकर्ता लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर हो गए हैं या उपेक्षा महसूस कर रहे हैं, ऐसे सभी लोगों को फिर से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का आधार मजबूत है, जरूरत सिर्फ उसे सही दिशा देने की है।अपने बयान में उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजनीति में कोई भी दल स्थायी रूप से सत्ता में नहीं रहता और समय हमेशा बदलता है। उन्होंने भाजपा को अहंकार से बचने की सलाह देते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि सत्ता का संतुलन कभी भी बदल सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव का उदाहरण देते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए, हालांकि इन बयानों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।इस दौरान मंडला में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें जिलाध्यक्ष डॉ. अशोक मर्सकोले, निवास विधायक चैनसिंह वरकड़े और केवलारी विधायक रजनीश सिंह प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी ने संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर पार्टी को सक्रिय करने पर सहमति जताई। -

असम-बंगाल चुनाव परिणाम पर कांग्रेस असमंजस में, शर्मनाक हार के बाद नेतृत्व पर उठे सवाल
नई दिल्ली। हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। केरल को छोड़कर असम और पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जिसके बाद अब संगठन के भीतर गंभीर मंथन शुरू हो गया है।असम और पश्चिम बंगाल में मिली हार के बाद पार्टी ने समीक्षा बैठक बुलाने का निर्णय लिया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन हारों की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी। संगठन के भीतर अभी तक किसी भी स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं हो पाई है, जिससे असंतोष और बढ़ता जा रहा है।
असम में हार के बाद प्रदेश प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन पार्टी हाईकमान ने अभी तक उस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि हार की विस्तृत समीक्षा के बाद ही आगे कोई कदम उठाया जाएगा।पिछले कुछ वर्षों में लगातार चुनावी असफलताओं के बावजूद संगठनात्मक स्तर पर जिम्मेदारी तय न किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं की गई, तो जमीनी स्तर पर सुधार मुश्किल होगा।इसी संदर्भ में पार्टी के अंदर चल रहे संगठन सृजन कार्यक्रम पर भी चर्चा हो रही है, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2025 में अहमदाबाद अधिवेशन के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य जिला स्तर पर नेतृत्व को मजबूत करना और जवाबदेही तय करना था, लेकिन अब तक इसका प्रभाव सीमित ही दिखाई दिया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने पहले भी कहा था कि जिला अध्यक्षों और स्थानीय नेतृत्व को स्थायी पद नहीं माना जाएगा और प्रदर्शन के आधार पर ही उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। हालांकि जमीनी स्तर पर इस व्यवस्था का प्रभाव अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो सका है।इसी बीच, आगामी 2027 के चुनावों को देखते हुए पार्टी पर प्रदर्शन सुधारने का दबाव बढ़ रहा है। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संगठन को पुनर्गठित किए बिना चुनावी स्थिति में सुधार संभव नहीं है।
वहीं दूसरी ओर, केरल में पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को मिली सफलता के बाद वहां सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी के भीतर कई नामों पर चर्चा चल रही है, जिनमें वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथला और केसी वेणुगोपाल प्रमुख बताए जा रहे हैं।हालांकि पार्टी नेतृत्व ने अभी अंतिम फैसला हाईकमान पर छोड़ दिया है, जिससे यह स्पष्ट है कि संगठन में निर्णय प्रक्रिया अब भी केंद्रीकृत बनी हुई है।कुल मिलाकर, असम और बंगाल में हार के बाद कांग्रेस एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां समीक्षा तो शुरू हो चुकी है, लेकिन जवाबदेही तय करने और संगठन में वास्तविक सुधार की दिशा अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। -

केरल में CM फेस पर सस्पेंस: राहुल का फॉर्मूला लागू, विधायक तय करेंगे मुख्यमंत्री; सतीशन-वेणुगोपाल-चेन्नीथला रेस में आगे
नई दिल्ली। केरल में चुनावी जीत के बाद सत्ता की तस्वीर तो साफ हो गई है, लेकिन मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इस पर सस्पेंस बरकरार है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की सरकार बनने जा रही है, लेकिन कांग्रेस के भीतर सीएम फेस को लेकर मंथन तेज हो गया है। इस बीच राहुल गांधी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि इस बार फैसला हाईकमान नहीं, बल्कि विधायक करेंगे।सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी चाहते हैं कि विधायक दल की बैठक में आम सहमति से नेता चुना जाए और वही मुख्यमंत्री बने। उन्होंने अपने इस रुख की जानकारी पार्टी पर्यवेक्षकों मुकुल वासनिक और अजय माकन को भी दे दी है, जो तिरुअनंतपुरम जाकर विधायकों की राय जानेंगे।
सीएम पद की रेस में फिलहाल तीन बड़े नाम सबसे आगे चल रहे हैं। पहला नाम है केसी वेणुगोपाल का, जो कांग्रेस संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं और राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं। हालांकि, पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि उन्हें दिल्ली की राजनीति में बनाए रखना ज्यादा जरूरी है, जिससे उनकी दावेदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दूसरा बड़ा नाम वी. डी. सतीशन का है, जो युवा चेहरा हैं और नेता प्रतिपक्ष के तौर पर सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उनकी लोकप्रियता और आक्रामक राजनीतिक शैली उनके पक्ष में जाती है, लेकिन हाल के कुछ विवाद उनकी राह में बाधा बन सकते हैं।
तीसरे दावेदार रमेश चेन्नीथला हैं, जिन्हें अनुभव और वरिष्ठता का बड़ा फायदा मिल सकता है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मानते हैं कि लंबे समय से संगठन और सरकार में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें मौका मिलना चाहिए।
इसके अलावा शशि थरूर का नाम भी चर्चा में है, लेकिन सांसद होने के कारण उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना कम मानी जा रही है, क्योंकि इससे उपचुनाव का जोखिम खड़ा हो सकता है।
राजनीतिक समीकरणों के बीच यह भी साफ है कि अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान के शीर्ष नेताओं मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी की राय से प्रभावित होगा, लेकिन राहुल गांधी का रुख इस बार निर्णायक माना जा रहा है।
कुल मिलाकर केरल में मुख्यमंत्री का चेहरा तय करने की जिम्मेदारी अब विधायकों के कंधों पर है। कांग्रेस इस बार किसी तरह का विवाद या असंतोष नहीं चाहती, इसलिए आम सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि विधायक किस नेता पर भरोसा जताते हैं और किसके सिर पर केरल का ताज सजता है।
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तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस ने DMK छोड़ TVK को दिया समर्थन
नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है, जहां विजय ने चुनाव नतीजों के बाद सरकार गठन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख विजय का यह कदम राज्य की सियासत को नए मोड़ पर ले गया है।इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने टीवीके प्रमुख से मुलाकात कर औपचारिक रूप से समर्थन पत्र भी सौंपा, जिसके बाद पार्टी मुख्यालय में जश्न का माहौल देखने को मिला।
कांग्रेस के इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में गेमचेंजर माना जा रहा है। पार्टी के प्रभारी गिरीश चोडानकर ने कहा कि विजय के समर्थन मांगने के बाद यह निर्णय लिया गया और शीर्ष नेतृत्व ने भी इसे मंजूरी दी है। कांग्रेस को उम्मीद है कि राज्यपाल विजय को जल्द ही सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।
हालांकि, आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। टीवीके ने चुनाव में 108 सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस के 5 विधायक हैं। इस तरह दोनों का कुल आंकड़ा 113 तक पहुंचता है, जो बहुमत से अभी भी 5 सीट कम है। ऐसे में विजय को सरकार बनाने के लिए अन्य दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना होगा।
तमिलनाडु की सियासत में यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है, जहां एक तरफ नए समीकरण बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने गठबंधन टूटते नजर आ रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विजय बहुमत का आंकड़ा हासिल कर पाते हैं या राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ेगी।
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देश की सियासत में बड़ा उलटफेर! बंगाल में BJP का ‘जयघोष’, तमिलनाडु में विजय की एंट्री, प्रियंका चतुर्वेदी ने बताए बदलाव के संकेत
नई दिल्ली। देशभर में चुनावी रुझानों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है और अलग-अलग राज्यों से बड़े बदलाव के संकेत सामने आ रहे हैं। इसी बीच Priyanka Chaturvedi ने इन नतीजों को भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव का इशारा बताया है।उनके मुताबिक, ये चुनाव सिर्फ जीत-हार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश की सियासी दिशा बदलने वाले साबित हो सकते हैं। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF गठबंधन की बढ़त ने वामपंथी गढ़ को हिला दिया है, जो लंबे समय से सत्ता में बना हुआ था। इसे एंटी-इनकंबेंसी और बदलाव की चाह का नतीजा माना जा रहा है।
वहीं तमिलनाडु में Vijay की पार्टी TVK ने जबरदस्त एंट्री करते हुए पारंपरिक दलों DMK और AIADMK को कड़ी टक्कर दी है। यह राज्य की राजनीति में नई शुरुआत और युवा नेतृत्व के उभार के तौर पर देखा जा रहा है।
पश्चिम बंगाल में Bharatiya Janata Party की मजबूत बढ़त ने सबका ध्यान खींचा है। रुझानों में पार्टी 150 से 200 सीटों के बीच पहुंचती दिख रही है, जो राज्य की राजनीति में बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। वहीं असम और पुडुचेरी में भी बीजेपी और उसके सहयोगियों ने अपनी पकड़ बनाए रखी है।
प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि इन नतीजों से साफ है कि देश में पुराने राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं और नई ताकतें उभर रही हैं। जहां एक तरफ पारंपरिक गढ़ कमजोर पड़ते दिख रहे हैं, वहीं नए नेतृत्व और नई पार्टियां तेजी से जगह बना रही हैं।
कुल मिलाकर, 2026 के चुनावी रुझान भारतीय राजनीति के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं जहां हर राज्य अपनी अलग कहानी लिख रहा है और आने वाले समय में सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
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पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाया, अमित शाह ने कांग्रेस और टीएमसी पर साधा निशाना
नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच राजनीतिक सरगर्मी लगातार तेज होती जा रही है। दम दम उत्तर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने अपने संबोधन में राज्य की राजनीतिक स्थिति और आगामी मतदान को लेकर कई महत्वपूर्ण दावे किए, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गरम हो गया है।सभा के दौरान उन्होंने दावा किया कि इस बार पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है और मौजूदा नेतृत्व को जनता का समर्थन कम होता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब बदलाव की ओर देख रही है और आगामी चुनाव परिणाम इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस पार्टी को भी निशाने पर लिया और कहा कि राज्य में उसका प्रभाव काफी कमजोर हो चुका है। उनके अनुसार, कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने में असफल रही है और इस बार भी उसके लिए स्थिति अनुकूल नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी राज्य में अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने में संघर्ष कर रही है।
सभा में दिए गए भाषण के दौरान राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने विपक्षी नेताओं की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक विमर्श में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी के साथ बयान देना आवश्यक है ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान बना रहे।
इसके अलावा उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि राज्य में कई मुद्दों पर जनता असंतोष व्यक्त कर रही है और यह आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे मतदान के दिन सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें और अपने मताधिकार का प्रयोग करें।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के बयान चुनावी माहौल में मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास माने जाते हैं। पश्चिम बंगाल में पहले से ही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र है और विभिन्न दल अपनी रणनीति के तहत मतदाताओं को आकर्षित करने में जुटे हुए हैं।
चुनाव आयोग की निगरानी में राज्य में मतदान प्रक्रिया की तैयारी चल रही है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर प्रचार अभियान को अंतिम चरण में पहुंचा रहे हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक परिदृश्य लगातार बदलता दिखाई दे रहा है।
आने वाले दिनों में मतदान और उसके बाद के परिणाम राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे। फिलहाल सभी दल अंतिम चरण के प्रचार में पूरी ताकत लगा रहे हैं और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।
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सुप्रिया सुले ने की राहुल गांधी की खुलकर तारीफ, बोलीं ईमानदारी का ओलंपिक होता तो…
नई दिल्ली। एनसीपी एसपी सांसद सुप्रिया सुले ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की खुलकर तारीफ की है। सोमवार 20 अप्रैल को उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को किसी भी जांच एजेंसी से डर नहीं लगता। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि अगर ईमानदारी के लिए ओलंपिक में कोई पदक होता, तो राहुल गांधी निश्चित रूप से उसे जीतते।महिला आरक्षण पर उठाए सवाल
महिला आरक्षण को लेकर सुप्रिया सुले ने कहा कि हालिया विधेयक वास्तव में महिलाओं के आरक्षण का नहीं, बल्कि परिसीमन डिलिमिटेशन से जुड़ा मुद्दा था। उन्होंने दावा किया कि महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक पहले ही 2003 में पारित हो चुका है और इसे राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित भी किया जा चुका है।
देवेंद्र फडणवीस पर साधा निशानासुले ने देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि वे यह कहते हैं कि जनगणना के कारण 2029 तक महिला आरक्षण लागू होने में देरी हो रही है, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि जनगणना प्रक्रिया को तेज करने से किसने रोका। उनके मुताबिक, समय पर जनगणना पूरी कर इसे लागू किया जा सकता था।
आदिवासी लड़कियों के लापता होने पर जताई चिंताउन्होंने महाराष्ट्र में आदिवासी लड़कियों के लापता होने के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। सुले ने कहा कि सत्ताधारी दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोप गलत हैं और लोकतंत्र में हर किसी को विरोध करने का अधिकार है।आईएएस अधिकारी के व्यवहार पर कार्रवाई की मांग
सुप्रिया सुले ने MHADA के सीईओ संजीव जायसवाल से जुड़े एक कथित मामले का जिक्र करते हुए कहा कि गोरेगांव के मोतीलाल नगर में स्थानीय निवासियों को धमकाने के आरोप वाले वायरल वीडियो पर मुख्यमंत्री को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले पर ध्यान दिया होगा। -

महिला आरक्षण पर राजनीति…. कांग्रेस बोली- LS की वर्तमान संख्या के आधार पर तुरंत इसे लागू करे सरकार
नई दिल्ली। कांग्रेस (Congress) ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर महिलाओं के लिए आरक्षण के मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहाने का आरोप लगाया और मांग की कि लोकसभा की वर्तमान संख्या में आरक्षण को तत्काल लागू किया जाए। विपक्षी दल ने यह भी दावा किया कि 17 अप्रैल को लोकसभा (Lok Sabha) में जो विधेयक पारित नहीं सका वह महिला आरक्षण विधेयक नहीं बल्कि परिसीमन विधेयक था। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत (Supriya Shrinet) ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक संसद द्वारा 21 सितंबर, 2023 को सर्वसम्मति से पारित किया गया था और अब यह संविधान का हिस्सा है। उन्होंने यहां प्रेसवार्ता में कहा, ”महिलाओं के लिए आरक्षण विधेयक पराजित नहीं हुआ, बल्कि परिसीमन विधेयक पराजित हुआ है, जिसे आप (सरकार) देश पर थोपना चाहते थे।”श्रीनेत ने कहा, ”प्रधानमंत्री मोदी घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं और महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में छिप रहे हैं।” श्रीनेत ने एक कार्टून प्रदर्शित किया, जिसमें प्रधानमंत्री के पास 543 आमों से भरी टोकरी दिखाई गई है, लेकिन वह महिलाओं को 33 प्रतिशत हिस्सा देने से इनकार कर रहे हैं और उनसे कह रहे हैं कि वह उन्हें उनका हिस्सा तभी दे सकते हैं जब वह आमों की संख्या बढ़ाकर 850 कर दें, जो विपक्ष उन्हें करने नहीं दे रहा है। संसद में संविधान संशोधन विधेयक के खारिज होने पर प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन पर कांग्रेस नेता ने अपनी पार्टी के रुख को दोहराते हुए कहा कि अगर मोदी वाकई गंभीर हैं, तो उन्हें लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में महिलाओं के लिए तत्काल आरक्षण प्रदान करना चाहिए। सरकार पर हमला करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “आपने इस पर एक शर्त लगा दी है। उस शर्त को हटाइए। आप ही महिला आरक्षण में बाधा डाल रहे हैं, आप पुरुषों को खुश रखना चाहते हैं और उनकी सीटें कम नहीं करना चाहते।”
मोदी द्वारा महिलाओं से माफी मांगने का जिक्र करते हुए श्रीनेत ने कहा कि प्रधानमंत्री सही थे क्योंकि उन्हें मणिपुर में दंगों के दौरान दो महिलाओं के साथ जो हुआ, हाथरस और उन्नाव में जो हुआ, महिला ओलंपिक खिलाड़ियों के साथ जो हुआ और बिलकीस बानो मामले में दोषियों को जिस तरह सम्मानित किया गया, उसके लिए देश की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, ”आप (प्रधानमंत्री) सही थे। महिलाएं अपने अपमान को नहीं भूलतीं। आपसे बेहतर यह बात और कौन जान सकता है?”
श्रीनेत ने कहा कि 240 सांसदों में से केवल 31 महिलाएं हैं, जो मात्र 12 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि देशभर के 1,654 विधायकों में से केवल 164 महिलाएं हैं, जो 10 प्रतिशत से भी कम है। कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा के 21 मुख्यमंत्रियों में से केवल एक महिला है। श्रीनेत ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने मूल रूप से 1989 में दिवंगत राजीव गांधी के नेतृत्व में महिला आरक्षण पेश किया था, जिसका अटल बिहारी वाजपेयी, एल के आडवाणी, जसवंत सिंह और राम जेठमलानी जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने विरोध किया था। परिसीमन के मुद्दे पर, कांग्रेस प्रवक्ता ने लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत आनुपातिक वृद्धि के प्रधानमंत्री के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मसौदा विधेयक में इसका कहीं भी उल्लेख नहीं है।
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कांग्रेस ने हिमाचल में 71 ब्लॉक अध्यक्ष किए नियुक्त, एक भी महिला को नहीं मिली जगह
नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश में संगठन विस्तार के तहत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ी स्तर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों की नियुक्ति की है। कुल 71 ब्लॉक अध्यक्षों की सूची जारी की गई है, लेकिन इस सूची में किसी भी महिला को जगह नहीं दी गई है।संगठन विस्तार में नई नियुक्तियां
कांग्रेस द्वारा जारी सूची के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में ब्लॉक स्तर पर नए अध्यक्षों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, ऊना, हमीरपुर, सोलन, सिरमौर, शिमला, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जैसे सभी जिलों को शामिल किया गया है।नालागढ़ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बने बाबूराम ठाकुर ने अपनी नियुक्ति पर हाईकमान का आभार जताया और इसे बड़ी जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि वे संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करेंगे और सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलेंगे।
नेताओं ने जताया नेतृत्व पर भरोसा
बाबूराम ठाकुर ने अपनी नियुक्ति को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन का परिणाम बताया। उन्होंने मुकेश अग्निहोत्री, प्रतिभा सिंह, विक्रमादित्य सिंह और अन्य नेताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।जमीनी संगठन को मजबूत करने का दावा
नवनियुक्त अध्यक्षों ने कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करेंगे और कार्यकर्ताओं के सम्मान को प्राथमिकता देंगे। साथ ही, किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय लेने की बात भी कही गई।जिलावार नियुक्तियां पूरी
सूची के अनुसार सभी जिलों में ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी गई है, जिनमें चंबा, कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, ऊना, सोलन, सिरमौर, शिमला और अन्य जिले शामिल हैं।महिला प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल
हालांकि संगठन विस्तार के इस कदम के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि इतने बड़े स्तर पर नियुक्तियों के बावजूद किसी भी महिला को ब्लॉक अध्यक्ष नहीं बनाया गया। यह मुद्दा राजनीतिक बहस का नया विषय बन सकता है, खासकर उस समय जब महिला प्रतिनिधित्व और आरक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। -

राहुल गांधी ने अंबेडकर मैराथन से BJP-RSS पर साधा निशाना, बताया संविधान पर खतरा
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में आयोजित रन फॉर अंबेडकर और रन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन मैराथन 2026 को हरी झंडी दिखाकर शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला।राहुल गांधी ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का सबसे बड़ा संदेश देश का संविधान है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से जुड़े लोग अंबेडकर के सिद्धांतों और संविधान को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये ताकतें देश में सभी को समान अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं। राहुल गांधी के मुताबिक भाजपा के नेता अंबेडकर की प्रतिमा के सामने सम्मान जताते जरूर हैं लेकिन असल में उनका उद्देश्य संविधान को नुकसान पहुंचाना है।
इस कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार संविधान पर प्रहार कर रही है और उसके नेता आक्रामक रवैया अपना रहे हैं। उनके अनुसार सरकार परोक्ष रूप से संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी कर रही है। पुनिया ने कहा कि यह मैराथन लोगों को जागरूक करने के लिए आयोजित की गई है ताकि सभी मिलकर अंबेडकर की विचारधारा और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हो सकें।
महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा इसके समर्थन में रही है लेकिन भाजपा के लागू करने के तरीके पर सवाल उठते हैं। उनका कहना था कि बिना नई जनगणना और परिसीमन के इस बिल को लागू करना उचित नहीं है। कांग्रेस की मांग है कि इसे नई जनगणना के आधार पर ही लागू किया जाना चाहिए न कि 2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर।