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  • राहुल गांधी की हिरासत के विरोध में देवास में कांग्रेस का प्रदर्शन, पोस्टर जलाकर जताया विरोध

    राहुल गांधी की हिरासत के विरोध में देवास में कांग्रेस का प्रदर्शन, पोस्टर जलाकर जताया विरोध


    देवास । नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली में राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में मध्य प्रदेश के देवास में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। मंगलवार रात आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, रैली निकाली और पोस्टर जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

    प्रदर्शन की शुरुआत रात करीब साढ़े नौ बजे शहर के मंडूक पुष्कर तालाब क्षेत्र से हुई। यहां बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एकत्र हुए और धरना-प्रदर्शन के बाद विरोध मार्च निकाला। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए सयाजी द्वार पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के नेताओं के पोस्टर जलाकर अपना विरोध जताया।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जवाब देने के बजाय विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि नीट पेपर लीक जैसे संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

    कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

    प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। कार्यकर्ताओं ने छात्रों के हितों की रक्षा और पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई। पूरे प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बनाए रखी गई।

    इस विरोध कार्यक्रम में शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रयास गौतम सहित पार्टी के कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

  • CM कक्ष के बाहर देर रात तक डटे कांग्रेस विधायक, जीतू पटवारी बोले- छात्रों को देशद्रोही कहना गलत

    CM कक्ष के बाहर देर रात तक डटे कांग्रेस विधायक, जीतू पटवारी बोले- छात्रों को देशद्रोही कहना गलत


    मध्य प्रदेश। दिल्ली में राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में मध्य प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा। प्रदेशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर कांग्रेस विधायक धरने पर बैठे रहे। बाद में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी धरना स्थल पहुंचे और विधायकों का समर्थन करते हुए सरकार पर छात्रों के मुद्दों को दबाने का आरोप लगाया।

    इससे पहले जीतू पटवारी राजभवन के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठे थे। पुलिस ने उन्हें और अन्य प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाकर हिरासत में लिया और वाहन में बैठाया। रिहा होने के बाद वे सीधे विधानसभा पहुंचे, जहां नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

    धरना देर रात करीब 11.30 बजे समाप्त हुआ। धरना खत्म होने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस अगले दिन भी विधानसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगी और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से छात्रों को लेकर दिए गए कथित बयान पर सार्वजनिक माफी की मांग करेगी।

    धरना स्थल पर पहुंचे जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस अपने विधायकों और नेता प्रतिपक्ष के फैसले के साथ खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को देशद्रोही और राजद्रोही बताने वाले मंत्री को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक करने वाले और उन्हें संरक्षण देने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले ही असली दोषी हैं।

    यह पूरा विवाद दिल्ली में छात्र आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ। प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसी कार्रवाई के विरोध में मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी राज्यभर में प्रदर्शन आयोजित किए।

    विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होने के बाद कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। विरोध के दौरान कुछ विधायक फर्श पर लेट गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने उन्हें समझाकर धरना समाप्त कराने की कोशिश की, लेकिन विधायक अपनी मांगों पर अड़े रहे। बाद में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी बातचीत के लिए पहुंचे। इस दौरान उनकी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और अन्य कांग्रेस विधायकों से तीखी बहस हुई।

    भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर, कटनी, खंडवा, हरदा, शाजापुर, टीकमगढ़, रतलाम, डबरा और खरगोन सहित कई जिलों में कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए। कई स्थानों पर रैलियां निकाली गईं, नारेबाजी हुई और कुछ जगहों पर पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। हालांकि देर रात तक अधिकांश स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गए।

    मध्य प्रदेश की राजनीति में इस घटनाक्रम ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। कांग्रेस छात्रों के मुद्दे और राहुल गांधी की गिरफ्तारी को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है, जबकि सत्ता पक्ष विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहा है।

  • विधानसभा में दिनभर सियासी संग्राम, UCC बिल पास तो पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस का धरना

    विधानसभा में दिनभर सियासी संग्राम, UCC बिल पास तो पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस का धरना


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन से लेकर मुख्यमंत्री कक्ष तक राजनीतिक हलचल तेज रही। दिन की शुरुआत समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन से हुई, जबकि दिन का समापन पेपर लीक मामले और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में मुख्यमंत्री कक्ष के सामने कांग्रेस विधायकों के धरने के साथ हुआ। पूरे दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

    सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में समान नागरिक संहिता के विरोध में सांकेतिक प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान तीन सांकेतिक शव रखे गए, जिन पर भाजपा, आरएसएस और एबीवीपी के नाम लिखे कफन ओढ़ाए गए। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि सरकार बेरोजगारी, किसानों और युवाओं के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए अन्य विषयों को प्राथमिकता दे रही है।

    इसके बाद सरकार ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक सदन में पेश किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधेयक को विस्तृत समीक्षा के लिए प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के चलते विधानसभा अध्यक्ष को दो बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में सरकार ने बहुमत के आधार पर UCC सहित चार महत्वपूर्ण विधेयक पारित करा लिए।

    विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेताओं ने संविधान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का मुद्दा उठाया। विपक्षी विधायकों ने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा और सभी पक्षों से राय लेना जरूरी था। सरकार का पक्ष था कि विधेयक पूरी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लाया गया है और इसे पारित किया जाना आवश्यक है।

    शाम को कांग्रेस ने दिल्ली में पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मुद्दा विधानसभा में उठाया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस विषय पर सदन में चर्चा कराने की मांग की, लेकिन अनुमति नहीं मिली। इसके बाद कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के सामने धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

    धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। उनका कहना था कि पेपर लीक जैसे मामलों का असर देशभर के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है, इसलिए इस विषय पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

    सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिस विषय को लेकर कांग्रेस चर्चा चाहती है, वह राज्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला है। सरकार ने विधानसभा के नियमों का हवाला देते हुए चर्चा से इनकार किया और विपक्ष के विरोध को राजनीतिक प्रदर्शन बताया।

    दिनभर चले घटनाक्रम ने एक बार फिर विधानसभा के मानसून सत्र को राजनीतिक रूप से बेहद गर्म बना दिया। एक ओर सरकार ने महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया, तो दूसरी ओर विपक्ष ने छात्रों, युवाओं और संविधान से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की।

  • धरना प्रदर्शन और सियासी तकरार भोपाल में कांग्रेस भाजपा आमने-सामने कई घटनाओं ने खींचा ध्यान

    धरना प्रदर्शन और सियासी तकरार भोपाल में कांग्रेस भाजपा आमने-सामने कई घटनाओं ने खींचा ध्यान


    मध्य प्रदेश। दिल्ली में छात्रों के मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस नेताओं की हिरासत के बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी राजनीतिक माहौल गर्म रहा। विधानसभा परिसर से लेकर राजभवन तक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई घटनाएं चर्चा का केंद्र बनीं, जिनमें एनएसयूआई कार्यकर्ताओं की नारेबाजी में हुई चूक, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का कांग्रेस विधायक के साथ हल्का-फुल्का व्यवहार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की गिरफ्तारी जैसी तस्वीरें सामने आईं।

    छात्र संगठन एनएसयूआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते समय कुछ कार्यकर्ताओं के मुंह से गलती से “नरेंद्र मोदी जिंदाबाद” के नारे निकल गए। हालांकि तुरंत गलती का एहसास होने पर नारे बदल दिए गए, लेकिन घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया।

    उधर मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने दिल्ली की घटना के विरोध में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरना दिया। इसी दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय धरना स्थल पर पहुंचे और कांग्रेस विधायकों से बातचीत की। चर्चा के बाद लौटते समय उन्होंने कांग्रेस विधायक विजय चौरे के गाल पर हल्के अंदाज में थपथपाया। इस घटना को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं और यह दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    राजभवन के सामने भी कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठे। पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया और बाद में उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस वाहन में बैठाया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराते रहे।

    धरने से पहले जारी एक वीडियो संदेश में जीतू पटवारी से भी जुबान फिसल गई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद में धरने पर बैठे हैं, जबकि प्रदर्शन प्रधानमंत्री आवास के बाहर किया गया था। इस बयान को लेकर भी राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर टिप्पणियां देखने को मिलीं।

    विधानसभा के भीतर कांग्रेस ने छात्रों, रोजगार, आरक्षण और किसानों के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने नाटक के माध्यम से भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और एबीवीपी पर निशाना साधा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं और किसानों के मुद्दों की अनदेखी कर रही है।

    भाजपा ने कांग्रेस के प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी बताया। पार्टी नेताओं का कहना था कि कांग्रेस जनता के मुद्दों के बजाय केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रही है। भाजपा विधायक हरदीप सिंह डंग ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष के नेताओं को फिल्मों में अभिनय करना चाहिए।

    इसी बीच विधानसभा के मानसून सत्र से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग भी सामने आया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पहले दिन सदन में देरी से पहुंचे। चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि देर रात तक फुटबॉल विश्व कप फाइनल देखने के कारण सुबह समय पर नहीं उठ सके। यह प्रसंग भी सत्ता और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा।

  • मानसून सत्र में गरमाई सियासत कांग्रेस का वॉकआउट जैसा विरोध सदन 15 मिनट के लिए स्थगित

    मानसून सत्र में गरमाई सियासत कांग्रेस का वॉकआउट जैसा विरोध सदन 15 मिनट के लिए स्थगित


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन राजनीतिक टकराव और तीखी बहसों के नाम रहा। दिल्ली में छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायकों ने सदन में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में विपक्ष ने इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव के तहत इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ और लगातार शोरगुल के चलते कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    कांग्रेस विधायकों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई और आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को दबाया जा रहा है। विपक्ष ने यह भी कहा कि छात्रों के सम्मान और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर सरकार जवाब देने से बच रही है। वहीं सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के विरोध को केवल राजनीतिक प्रदर्शन और मीडिया में सुर्खियां बटोरने का प्रयास बताया।

    शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दिल्ली में छात्रों के साथ हुई घटना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि छात्रों का अपमान किया गया और उनके खिलाफ बल प्रयोग हुआ। उन्होंने इस विषय पर सदन में चर्चा कराने की मांग की। जवाब में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यह मामला मध्य प्रदेश के अधिकार क्षेत्र से बाहर का है और विधानसभा के नियमों के अनुसार इस पर चर्चा नहीं कराई जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से सूचना निर्धारित समय के बाद दी गई थी।

    सदन में प्रश्नकाल के दौरान भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा गया। विधायकों ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था, आदिवासियों की जमीन, किसानों के लंबित मुआवजे, केन-बेतवा परियोजना, भोपाल सिटी लिंक परियोजना पर लगाए गए जुर्माने, वसीयत के आधार पर नामांतरण और चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना जैसे विषयों पर सरकार को घेरा।

    शिवपुरी की चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना पर कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने 167 करोड़ रुपये की परियोजना में भ्रष्टाचार और किसानों तक पानी नहीं पहुंचने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि वर्षों बाद भी किसानों को परियोजना का लाभ नहीं मिला और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इसके जवाब में मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि परियोजना पूरी हो चुकी है और हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जहां भी तकनीकी खामियां होंगी, वहां जांच कराकर सुधार कराया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी परियोजना का निरीक्षण कर कमियों को दूर करने के निर्देश दिए।

    पेसा एक्ट और सोलर प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण का मुद्दा भी सदन में गूंजा। विधायक बाला बच्चन ने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसानों को नोटिस दिए जा रहे हैं। हालांकि राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि किसी भी भूमि का अधिग्रहण नहीं किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में भूमि से जुड़े मामलों में स्थानीय समुदाय के अधिकारों और सामूहिक हितों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

    सत्र के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक को सदन ने पारित कर दिया। इसके बाद मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक पर चर्चा शुरू हुई। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने निजी विश्वविद्यालयों के लिए 25 एकड़ भूमि की अनिवार्यता समाप्त किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

    मानसून सत्र के तीसरे दिन विधानसभा के भीतर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, जनहित के मुद्दों पर बहस और विधायी कार्यवाही एक साथ देखने को मिली। आने वाले दिनों में भी किसानों, शिक्षा, आदिवासी अधिकारों और विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर सदन में तीखी बहस जारी रहने की संभावना है।

  • राहुल गांधी के विरोध में बीजेपी का प्रदर्शन विवादित तख्ती पर बढ़ा सियासी घमासान भोपाल में कांग्रेस भी करेगी पलटवार

    राहुल गांधी के विरोध में बीजेपी का प्रदर्शन विवादित तख्ती पर बढ़ा सियासी घमासान भोपाल में कांग्रेस भी करेगी पलटवार


    नई दिल्ली । दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन के बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के विधायक और कार्यकर्ता रेड क्रॉस चौराहे पर राहुल गांधी के प्रदर्शन के विरोध में एकत्र हुए और प्रदर्शन किया। इसी दौरान प्रदर्शन स्थल पर एक महिला कार्यकर्ता के हाथ में ऐसी तख्ती दिखाई दी जिस पर संविधान से जुड़ा विवादित संदेश लिखा था। पोस्टर सामने आते ही वहां मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं में हलचल मच गई।

    मौके पर मौजूद भाजपा नेताओं को जैसे ही तख्ती पर लिखे संदेश की जानकारी मिली उन्होंने तुरंत उसे हटाने का प्रयास किया। बताया गया कि पार्टी के प्रवक्ता ने स्थिति को संभालते हुए विवादित तख्ती को सार्वजनिक रूप से दिखाई देने से रोक दिया। हालांकि इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया तथा प्रदर्शन के दौरान मौजूद लोगों के बीच भी इस विषय को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    भारतीय जनता पार्टी का यह प्रदर्शन दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के जवाब में आयोजित किया गया था। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन करने और राजनीतिक माहौल खराब करने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कांग्रेस के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

    दूसरी ओर कांग्रेस ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी रणनीति तैयार कर ली है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित आदिवासी छात्रावास में छात्रों की गूंज अभियान के तहत प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। इस दौरान वे छात्रों से जुड़े मुद्दों के साथ दिल्ली में हुए घटनाक्रम पर कांग्रेस का आधिकारिक पक्ष सामने रखेंगे। कांग्रेस का कहना है कि छात्रों के हितों और लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल पर पार्टी लगातार आवाज उठाती रहेगी।

    समाजवादी पार्टी ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ मनोज यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाने की तैयारी की है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में विपक्षी नेताओं के साथ हुई कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं थी और इस विषय पर जनता के सामने अपना पक्ष रखा जाएगा।

    दिल्ली में हुए घटनाक्रम का असर अब प्रदेश की राजनीति पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। एक ओर भाजपा विरोध प्रदर्शन कर रही है तो दूसरी ओर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपनी बात जनता तक पहुंचाने में जुटी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

    नोट: भाजपा प्रदर्शन के दौरान दिखाई देने वाली विवादित तख्ती को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आए हैं। इस मामले पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं और घटनाक्रम राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है।

  • NEET विवाद पर कांग्रेस ने बदली रणनीति, छात्र आंदोलन में बढ़ाई सक्रियता; सरकार पर संसद से सड़क तक बनाया दबाव

    NEET विवाद पर कांग्रेस ने बदली रणनीति, छात्र आंदोलन में बढ़ाई सक्रियता; सरकार पर संसद से सड़क तक बनाया दबाव


    नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। शुरुआत में आंदोलन से सीमित दूरी बनाए रखने वाली पार्टी अब खुलकर छात्रों के समर्थन में उतर आई है। संसद के भीतर से लेकर सड़क तक कांग्रेस ने सरकार को घेरने की तैयारी तेज कर दी है, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक मुकाबला और तीखा हो गया है।

    शुरुआत में दूरी, बाद में बदला रुख

    पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस ने देशभर में छात्रों से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत तो की, लेकिन जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन से खुद को अलग रखा। पार्टी के भीतर यह धारणा थी कि सीजेपी का आंदोलन राजनीतिक रूप से भाजपा को लाभ पहुंचाने वाला हो सकता है। हालांकि, सीजेपी की अपील पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा जंतर-मंतर पहुंचे, लेकिन उन्होंने केवल भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात की।

    पार्टी ने औपचारिक रूप से आंदोलन का समर्थन नहीं किया।

    छात्र जुटे तो कांग्रेस ने बदली रणनीति

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संसद मार्च के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी और पूरे दिन चले विरोध प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि युवाओं में सरकार के खिलाफ व्यापक असंतोष है। इसके बाद पार्टी ने आंदोलन को अधिक सक्रियता से आगे बढ़ाने का फैसला किया।

    रणनीति बदलने के साथ ही लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद के भीतर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। राहुल गांधी ने सदन में इस मामले पर चर्चा कराने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात की।

    कानूनी सहायता का भी ऐलान

    कांग्रेस ने प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए छात्रों और युवाओं को कानूनी मदद उपलब्ध कराने की घोषणा भी की है।

    पार्टी का कहना है कि आंदोलन के दौरान किसी भी छात्र के साथ अन्याय होने पर उसकी हरसंभव सहायता की जाएगी। इससे संकेत मिलता है कि कांग्रेस अब इस आंदोलन में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के पक्ष में है।

    धरना, हिरासत और फिर रिहाई

    मंगलवार को राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास के निकट निषेधाज्ञा वाले क्षेत्र में धरने पर बैठ गए। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। कुछ घंटों तक हिरासत में रखने के बाद रात में सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया।

    राजनीतिक मुकाबला हुआ तेज

    NEET पेपर लीक विवाद अब केवल शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह विपक्ष और सरकार के बीच बड़ा राजनीतिक संघर्ष बनता जा रहा है। कांग्रेस की सक्रियता के बाद संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे पर सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना मानी जा रही है।

  • NEET मुद्दे पर देशभर में तेज हुआ आंदोलन, शहर-शहर सड़कों पर उतरी कांग्रेस, जंतर-मंतर पर CJP का धरना जारी

    NEET मुद्दे पर देशभर में तेज हुआ आंदोलन, शहर-शहर सड़कों पर उतरी कांग्रेस, जंतर-मंतर पर CJP का धरना जारी


    नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था और NEET परीक्षा से जुड़े कथित घोटाले को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब राष्ट्रीय स्तर पर फैलता नजर आ रहा है। जंतर-मंतर से शुरू हुए आंदोलन में अब छात्रों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों के साथ कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल भी शामिल हो गए हैं। संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और राहुल गांधी की हिरासत के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है।

    जंतर-मंतर से शुरू होकर कई राज्यों तक पहुंचा आंदोलन
    दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ प्रदर्शन अब कई राज्यों में फैल चुका है। प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इस दौरान कई स्थानों पर धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज की स्थिति बनी तथा कई लोगों को हिरासत में लिया गया। सोशल मीडिया पर घायल छात्रों के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद इस मुद्दे पर देशभर में चर्चा तेज हो गई।

    राहुल गांधी की हिरासत के बाद बढ़ा सियासी तापमान
    मंगलवार शाम कांग्रेस नेता राहुल गांधी को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद कांग्रेस ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। वहीं, सरकार का कहना है कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है।

    संसद में भी गूंजा मामला
    संसद के मानसून सत्र में भी NEET और शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विपक्ष ने परीक्षा प्रणाली और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा। जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस छात्रों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है और प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना नियमों के विरुद्ध है।

    बारिश के बीच भी जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारी
    बुधवार सुबह दिल्ली में बारिश के बावजूद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या पहले से अधिक दिखाई दी। आयोजकों ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    अहमदाबाद सहित कई शहरों में प्रदर्शन
    दिल्ली के अलावा अहमदाबाद में करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। वहीं हैदराबाद, मुंबई, प्रयागराज सहित कई शहरों में भी प्रदर्शन आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया।

    प्रीति जिंटा ने दी प्रतिक्रिया
    बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने कहा कि छात्रों का समर्थन करना और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उचित है, लेकिन यह भी जरूरी है कि शांतिपूर्ण आंदोलन का दुरुपयोग देशविरोधी तत्व न कर सकें। उन्होंने सोशल मीडिया पर बढ़ती नफरत और विभाजनकारी माहौल पर भी चिंता जताई।

    राज्यसभा में चर्चा की मांग
    आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सदन का कामकाज स्थगित कर NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली की कथित विफलता, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर चर्चा कराने की मांग की है।

    आंदोलन जारी रखने का ऐलान
    जंतर-मंतर पर धरना दे रहे आयोजकों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं कांग्रेस ने भी राहुल गांधी की हिरासत के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज करने के संकेत दिए हैं।

  • वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की सतर्कता से शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स 77,500 के नीचे बंद, लार्जकैप शेयरों में बढ़ी बिकवाली

    वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की सतर्कता से शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स 77,500 के नीचे बंद, लार्जकैप शेयरों में बढ़ी बिकवाली

    नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे आज अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सत्ता और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से जारी संदेशों में उनके स्वस्थ, दीर्घायु और सक्रिय सार्वजनिक जीवन की कामना की गई। जन्मदिन के मौके पर नेताओं के शुभकामना संदेशों ने लोकतांत्रिक परंपराओं और राजनीतिक शिष्टाचार की भावना को भी रेखांकित किया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि ईश्वर उन्हें स्वस्थ और लंबा जीवन प्रदान करें। प्रधानमंत्री के संदेश के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपने-अपने स्तर पर उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद, स्वस्थ और मंगलमय जीवन की कामना की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें बधाई संदेश भेजते हुए स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं व्यक्त कीं। सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं की ओर से आए इन संदेशों को राजनीतिक सौहार्द का सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।

    कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पार्टी नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संगठनात्मक क्षमता और सामाजिक न्याय, संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में पार्टी जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

    उत्तर प्रदेश कांग्रेस सहित पार्टी की विभिन्न प्रदेश इकाइयों ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके नेतृत्व को करोड़ों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक बताया। संदेशों में उनके सार्वजनिक जीवन के लंबे अनुभव, संगठन निर्माण में योगदान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का उल्लेख किया गया। साथ ही उनके स्वस्थ, यशस्वी और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की गई।

    समाजवादी पार्टी ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की कामना की। विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा भेजे गए शुभकामना संदेशों ने यह भी दर्शाया कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का निर्वहन भारतीय राजनीति की महत्वपूर्ण परंपरा का हिस्सा है।

    मल्लिकार्जुन खरगे भारतीय राजनीति के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने लंबे समय तक संगठन और संसदीय राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वर्तमान में वह कांग्रेस अध्यक्ष के साथ-साथ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। उनके राजनीतिक अनुभव और संसदीय कार्यशैली को राष्ट्रीय राजनीति में विशेष महत्व दिया जाता है।

    जन्मदिन के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया। कई स्थानों पर रक्तदान शिविर, पौधारोपण, जरूरतमंदों की सहायता और अन्य जनकल्याणकारी गतिविधियां आयोजित की गईं। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने संगठन को और मजबूत बनाने तथा जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का जन्मदिन आज, सत्ता और विपक्ष के नेताओं ने दी बधाई; दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का जन्मदिन आज, सत्ता और विपक्ष के नेताओं ने दी बधाई; दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना

    नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे आज अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सत्ता और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सफल सार्वजनिक जीवन की कामना की। विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से आए शुभकामना संदेशों ने लोकतांत्रिक परंपराओं और राजनीतिक शिष्टाचार की एक सकारात्मक तस्वीर भी प्रस्तुत की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा कि वह उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं और ईश्वर से उनके दीर्घायु तथा उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं। प्रधानमंत्री के संदेश के बाद विभिन्न दलों के नेताओं ने भी अपने-अपने संदेशों के माध्यम से उन्हें जन्मदिन की बधाई दी।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और मंगलमय जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनका अनुभव लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की।

    कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पार्टी नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक न्याय, संविधान तथा जनसेवा के प्रति समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित के मुद्दों को मजबूती से आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।

    उत्तर प्रदेश कांग्रेस सहित पार्टी की विभिन्न प्रदेश इकाइयों ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके नेतृत्व को कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक बताया। शुभकामना संदेशों में उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और संगठन को मजबूत बनाने में निभाई गई भूमिका का उल्लेख किया गया। साथ ही उनके स्वस्थ, सक्रिय और यशस्वी जीवन की कामना भी की गई।

    समाजवादी पार्टी ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की प्रार्थना की। विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से आए इन संदेशों को लोकतांत्रिक परंपरा और राजनीतिक सौहार्द का प्रतीक माना जा रहा है, जहां वैचारिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और शुभकामनाओं का आदान-प्रदान जारी रहता है।

    मल्लिकार्जुन खरगे भारतीय राजनीति के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वर्तमान में वह कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ-साथ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभा रहे हैं। संसदीय राजनीति, संगठन और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल किया जाता है।

    उनके जन्मदिन के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सेवा और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों का भी आयोजन किया। कई स्थानों पर रक्तदान शिविर, पौधारोपण, जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री वितरण और अन्य सामाजिक गतिविधियां आयोजित की गईं। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने संगठन को और मजबूत बनाने तथा जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।