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  • हम इकलौते देश, जिसने अपने नाविक खोये…. होर्मुज खुलवाने के लिए जुटे दुनियाभर के देश, भारत की दो टूक

    हम इकलौते देश, जिसने अपने नाविक खोये…. होर्मुज खुलवाने के लिए जुटे दुनियाभर के देश, भारत की दो टूक


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया (West Asia.) में तनाव की वजह से लंबे समय बंद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने को लेकर गुरुवार को अहम बैठक हुई। ब्रिटेन की अगुवाई में हुई इस बैठक में भारत (India) समेत कई देशों को न्योता दिया गया था। भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी (Foreign Secretary Vikram Misri) वर्चुअल मीटिंग में शामिल हुए। इस दौरान, भारत ने दो टूक कहा कि हम इकलौते देश हैं, जिसने अपने नाविक खोए हैं। भारत ने इस बैठक में होर्मुज को खोलने की वकालत की।

    मिसरी गुरुवार को ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर की अध्यक्षता में हुई बैठक में वर्चुअली शामिल हुए। इस बैठक में फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। अमेरिका को इस बैठक में शामिल नहीं होना था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया, “ब्रिटेन ने होर्मुज पर बातचीत के लिए कई देशों को आमंत्रित किया था, जिसमें भारत भी शामिल है।”

    उन्होंने दोहराया कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप, मुक्त और खुले समुद्री सुरक्षा का समर्थन करता है। जायसवाल ने कहा, “हम होर्मुज से सुरक्षित और मुक्त आवागमन सुनिश्चित करने की मांग को प्राथमिकता के तौर पर लगातार उठाते रहे हैं।” ब्रिटेन की अगुवाई में हुई इस बैठक के नतीजों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस टीवी संबोधन के कुछ ही घंटों बाद हुई थी, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ अपने युद्ध के संदर्भ में कहा था कि इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा करना अन्य देशों की जिम्मेदारी है।

    इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि ब्रिटेन द्वारा बुलाई गई बैठक से तुरंत कोई बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद कम ही है। उन्होंने कहा कि इस स्ट्रेट से भारत के जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता पक्का करना अभी भी एक पेचीदा मामला बना हुआ है, और यह पक्का करने के लिए कि जहाज बारूदी सुरंगों वाले इस जलमार्ग से सुरक्षित रूप से गुजर सकें, ईरान की तरफ से करीबी तालमेल की जरूरत है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “जहां तक भारत की बात है, आप अच्छी तरह जानते हैं कि हम स्वतंत्र और खुले कमर्शियल शिपिंग के पक्ष में हैं, और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार समुद्री सुरक्षा के पक्ष में हैं।” उन्होंने कहा, “हम प्राथमिकता के तौर पर होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित और स्वतंत्र आवागमन सुनिश्चित करने की लगातार अपील कर रहे हैं।” ईरान द्वारा होर्मुज को लगभग बंद कर देने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं। यह स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा शिपिंग मार्ग है, जिससे दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) का परिवहन होता है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का एक प्रमुख स्रोत रहा है।

  • भारत की मेजबानी में आमने-सामने होंगे UAE और ईरान, BRICS बैठक से पश्चिम एशिया पर नजर

    भारत की मेजबानी में आमने-सामने होंगे UAE और ईरान, BRICS बैठक से पश्चिम एशिया पर नजर


    नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में होने जा रही ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक कूटनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। खास बात यह है कि मौजूदा तनाव के बावजूद ईरान और संयुक्त अरब अमीरात एक ही मंच पर बैठेंगे।
    यह बैठक 14 और 15 मई को नई दिल्ली में आयोजित होगी, जिसकी अध्यक्षता भारत करेगा।

    भारत ने इस बैठक के लिए रूस, ईरान, यूएई, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका को निमंत्रण भेजा है। माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच यह बैठक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर साबित हो सकती है, जहां टकराव की स्थिति में रहे देश भी एक साथ चर्चा करेंगे।

    ब्रिक्स समूह की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से हुई थी। 2024 में इसका विस्तार कर मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया, जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी इसमें जुड़ गया।

    ब्रिक्स देशों की कुल आबादी करीब 3.9 अरब बताई जाती है, जो वैश्विक जनसंख्या का लगभग 48 प्रतिशत है।

    रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने रूसी मीडिया को बताया कि सर्गेई लावरोव बैठक में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आएंगे। इससे बैठक का महत्व और बढ़ गया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान ने भारत से अपील की है कि अध्यक्ष के तौर पर वह एक औपचारिक बयान जारी कर अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों की निंदा करे।

    हालांकि, समूह के कुछ सदस्य देश इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं और भारत के अमेरिका व इजरायल के साथ करीबी संबंधों को देखते हुए साझा रुख तैयार करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

    इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि पश्चिम एशिया संघर्ष पर ब्रिक्स देशों के बीच एकमत होना आसान नहीं है। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि कुछ सदस्य सीधे इस संघर्ष से जुड़े हैं, जिसके कारण साझा बयान तैयार करना कठिन हो गया है।

    भारत फिलहाल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अलग-अलग विचार रखने वाले देशों के बीच संतुलन बनाते हुए किसी साझा रुख पर सहमति बनाई जाए।

  • फारस की खड़ी में फंसे हैं भारत के लिए ईंधन ला रहे कुल 28 जहाज… इनमें 18 भारतीय और 10 विदेशी

    फारस की खड़ी में फंसे हैं भारत के लिए ईंधन ला रहे कुल 28 जहाज… इनमें 18 भारतीय और 10 विदेशी


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने सोमवार को एक अहम जानकारी देते हुए बताया कि ऊर्जा उत्पादों से लदे और भारत (India) आ रहे 10 विदेशी झंडे वाले जहाज (10 Foreign-Flagged Ships) इस समय फारस की खाड़ी (Persian Gulf ) में फंसे हुए हैं। इसके अलावा, 18 भारतीय जहाज भी वर्तमान में इसी क्षेत्र में मौजूद हैं। कुल मिलाकर 28 जहाजों पर संकट अभी भी मंडरा रहा है। जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा ने मौजूदा हालात पर सवालों के जवाब देते हुए स्थिति को स्पष्ट किया।


    फंसे हुए विदेशी जहाजों की डिटेल

    विशेष सचिव ने बताया कि भारत आ रहे इन 10 विदेशी जहाजों में महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पाद मौजूद हैं।
    3 जहाज: एलपीजी (LPG) से लदे हैं।
    4 जहाज: कच्चा तेल (Crude Oil) लेकर आ रहे हैं।
    3 जहाज: एलएनजी (LNG) से भरे हुए हैं।

    इनके अलावा, भारतीय ध्वज वाले जहाज भी हैं। इनमें एलपीजी के तीन टैंकर, एक एलएनजी वाहक और कच्चे तेल के चार टैंकर शामिल हैं। एक खाली टैंकर में एलपीजी भरी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच संकरे जलडमरूमध्य में फंसे लगभग 500 जहाजों में ये जहाज भी शामिल हैं। अब तक, भारतीय ध्वज वाले आठ जहाज सुरक्षित रूप से निकल चुके हैं।


    भारतीय ध्वज वाले 18 जहाज फंसे

    सिन्हा ने बताया कि जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में भारतीय ध्वज वाले 18 जहाज हैं, जिनमें 485 नाविक सवार हैं। दो अन्य जहाज पूर्वी हिस्से में फंसे हुए हैं। पश्चिमी हिस्से में मौजूद जहाजों में एलपीजी जहाज जग विक्रम, ग्रीन आशा और ग्रीन सानवी शामिल हैं। एक खाली जहाज में एलपीजी भरी जा रही है। इस क्षेत्र में मौजूद अन्य भारतीय ध्वज वाले जहाजों में एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक रासायनिक उत्पाद परिवहन करने वाला जहाज, तीन कंटेनर जहाज और दो ‘बल्क’ कैरियर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, एक जहाज ड्रेजर है और तीन जहाज नियमित रखरखाव के लिए बंदरगाह पर हैं। जब पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ा था, तब होर्मुज जलडमरूमध्य में मूल रूप से 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज थे। इनमें से 24 जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे। पिछले कुछ दिनों में, पश्चिमी हिस्से से छह और पूर्वी हिस्से से दो जहाज सुरक्षित स्थान पर पहुंचने में सफल रहे हैं।


    सरकार की प्राथमिकता

    राजेश सिन्हा ने जोर देकर कहा कि इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय झंडे वाले जहाज जो भारत के लिए माल ला रहे हैं, उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और बिना किसी बाधा के गुजरने दिया जाए। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले और ईरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई ने जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन को लगभग ठप कर दिया है। यह संकरा समुद्री मार्ग खाड़ी देशों से दुनिया भर में तेल और गैस के निर्यात का प्रमुख मार्ग है। हालांकि, ईरान ने पिछले सप्ताह कहा था कि ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय के बाद ‘गैर-शत्रु’ देशों के पोत जलमार्ग से गुजर सकते हैं।


    राहत की खबर: दो जहाज सुरक्षित निकले

    एक सकारात्मक अपडेट शेयर करते हुए बताया गया कि लगभग 94,000 टन रसोई गैस ले जाने वाले दो एलपीजी जहाजों ने शनिवार को सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया है। उम्मीद है कि ये दोनों जहाज अगले दो दिनों के भीतर मुंबई पोर्ट और न्यू मैंगलोर पोर्ट पर लंगर डालेंगे। इनमें दो एलपीजी वाहक पोत, बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम शामिल हैं, जिनमें लगभग 94,000 टन एलपीजी का संयुक्त कार्गो है। ये पोत पिछले कुछ दिनों में युद्धग्रस्त क्षेत्र से सुरक्षित रूप से निकल चुके हैं।


    खाली जहाजों की वापसी पर स्थिति

    जब यह सवाल पूछा गया कि नए सिरे से माल लादने के लिए कितने खाली जहाजों को वापस फारस की खाड़ी भेजा जाएगा, तो सिन्हा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान हालात को देखते हुए खाली जहाजों को वापस भेजने का समय अभी नहीं आया है। उन्होंने कहा- हम अभी उस चरण तक नहीं पहुंचे हैं जहां हम उन्हें (भारतीय झंडे वाले जहाजों को) वापस भेजना शुरू करें।


    बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी

    जहाजों के फंसे होने के अलावा, इस तनाव का सीधा असर व्यापारिक लागत पर भी पड़ रहा है। सिन्हा ने बताया कि खतरा केवल होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके आस-पास के बाहरी इलाके भी अब ‘हाई-रिस्क एरिया’ (HRA) की श्रेणी में आ गए हैं। युद्ध और तनाव से पहले कमर्शियल बीमा प्रीमियम बीमित राशि (Insured Value) का मात्र 0.04% हुआ करता था। लेकिन अब इसमें भारी वृद्धि हुई है। सिन्हा ने एक विशिष्ट मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि अब यह प्रीमियम बढ़कर बीमित राशि का 0.7% हो गया है, और आने वाले समय में इसके और भी अधिक बढ़ने की आशंका है।

  • पीएम मोदी ने मन की बात में जल संरक्षण का संकल्प दोहराने की अपील की, त्रिपुरा-तेलंगाना-छत्तीसगढ़ के गांवों को सराहा

    पीएम मोदी ने मन की बात में जल संरक्षण का संकल्प दोहराने की अपील की, त्रिपुरा-तेलंगाना-छत्तीसगढ़ के गांवों को सराहा

    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की ताज़ा कड़ी में देशवासियों से जल संरक्षण के अपने संकल्प को दोहराने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ ने लोगों में जागरूकता पैदा की है और अब गांव-गांव में सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण के प्रयास शुरू हो गए हैं। पीएम मोदी ने विशेष रूप से बताया कि अमृत सरोवर अभियान के तहत देशभर में लगभग 70 हजार सरोवर बनाए गए हैं और बारिश से पहले उनकी साफ-सफाई भी हो रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिपुरा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के गांवों में हुए प्रेरक प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे छोटे प्रयास बड़े बदलाव की ओर ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की जंपुई पहाड़ियों में वांगमुन गांव 3000 फीट की ऊंचाई पर बसा है और वहां पहले पानी की कमी गंभीर समस्या थी। गर्मियों में गांव के लोग पानी के लिए लंबी दूरी तय करते थे। लेकिन गांववासियों ने मिलकर बारिश का पानी सहेजने का संकल्प लिया और अब लगभग हर घर में ‘रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम’ स्थापित है। यह गांव जल संरक्षण की प्रेरक मिसाल बन गया है।

    छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में भी किसानों ने छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाकर बारिश के पानी को खेतों में रोकने और धीरे-धीरे जमीन में जाने का असर सुनिश्चित किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि अब 1200 से अधिक किसान इस मॉडल को अपनाकर अपने क्षेत्र में भूजल स्तर सुधारने में सफल रहे हैं। इसी तरह तेलंगाना के मंचेरियाल जिले के मुधिगुंटा गांव के लोगों ने मिलकर अपने घरों में सोख गड्ढे बनाए और जल संरक्षण का एक जन-आंदोलन खड़ा किया। इससे गांव का भूजल स्तर सुधरा है और प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियों में भी कमी आई है।

    पीएम मोदी ने कहा कि जल संकट से निपटना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामूहिक प्रयास की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें जल संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेना होगा और गांव-गांव में इस दिशा में किए गए छोटे प्रयासों को पूरे देश में प्रेरणा के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास के इलाकों में जल संचयन के उपाय अपनाएं और जल को बचाने के लिए अपनी आदतों में बदलाव लाएं।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले 11 साल में जल संचय अभियान और अमृत सरोवर जैसी पहलें देशभर में व्यापक रूप से फैल चुकी हैं। अब हर क्षेत्र में जल संरक्षण की नई मिसालें बन रही हैं और ये अनुभव अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। पीएम मोदी ने देशवासियों से कहा कि जल हमारी जीवनधारा है और इसे बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की बात कही कि जल संरक्षण के प्रयास केवल योजनाओं तक सीमित न रहें बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली में भी इसका पालन किया जाए।

  • पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत में ईंधन की कीमतें स्थिर… PM मोदी ने बताई वजह

    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत में ईंधन की कीमतें स्थिर… PM मोदी ने बताई वजह


    नई दिल्ली।
    मिडिल ईस्ट (Middle East) में करीब एक महीने से भीषण संघर्ष जारी है। अमेरिका और इजरायल (America and Israel.) जैसे देश तेहरान पर रोज मिसाइल हमले कर रहे हैं। ईरान भी इसका माकूल जवाब दे रहा है। इस सैन्य संघर्ष का सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर दिखा है, जहां से कच्चे तेल के जहाज गुजरते हैं। भारत भी इसी रूट से खाड़ी देशों से तेल आयात करता है। पहले की तुलना में जहाजों की आवाजाही काफी प्रभावित हुई है। इसके बावजूद, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) शनिवार को जब उत्तर प्रदेश के जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन कर रहे थे तब उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई उथल-पुथल पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने बताया कि आखिर भारत में ईंधन की कीमतें कैसे स्थिर है।


    एथेनॉल मिश्रण से मिली राहत

    उन्होंने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल मिश्रण को एक अहम रणनीति बताया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति लागू नहीं होती तो भारत को हर साल अतिरिक्त 4.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल आयात करना पड़ता, जो करीब 700 करोड़ लीटर के बराबर है। उन्होंने किसानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से इस वैश्विक संकट के समय देश को बड़ी राहत मिली है।


    किसानों की भी बढ़ी आमदनी

    पीएम मोदी ने बताया कि एथेनॉल उत्पादन ने न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि की है। इस पहल के चलते भारत को लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। जेवर क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना उत्पादक इलाकों के करीब है, जहां से एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होता है।

    प्रधानमंत्री ने हाल ही में संसद में दिए अपने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने बताया था कि पिछले एक दशक में एथेनॉल ब्लेंडिंग 1-1.5 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। भारत ने 2025 में ही 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया, जो निर्धारित समय से पहले की उपलब्धि है।


    विद्युतीकरण से भी लाभ

    उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे के विद्युतीकरण से हर साल लगभग 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हो रही है, जबकि मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से भी ईंधन की खपत कम हुई है। वर्तमान में भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 2,000 करोड़ लीटर है, जिसमें से 1,000 करोड़ लीटर से अधिक पेट्रोल में मिलाया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान से जुड़े संघर्ष और इजरायल-अमेरिका के साथ जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। इसके बावजूद भारत सरकार ने ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की है ताकि आम जनता पर कीमतों का अतिरिक्त बोझ न पड़े। उन्होंने कहा, “हम भी युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से ईंधन आयात करते हैं। हर देश इस चुनौती से निपटने के लिए कदम उठा रहा है और हम भी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।” आपको बता दें कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में इसका सीधा असर देखने को नहीं मिला है।

    प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय एकता की भी अपील की। उन्होंने कहा कि यह एक वैश्विक संकट है और इससे निपटने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों से भी आग्रह किया कि ऐसे संवेदनशील समय में गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी से बचें।

  • सुसनेर से कुरावर जा रही बस बनी हादसे का शिकार तेज रफ्तार ने ली एक जान

    सुसनेर से कुरावर जा रही बस बनी हादसे का शिकार तेज रफ्तार ने ली एक जान


    शाजापुर । मध्यप्रदेश में लगातार बढ़ते सड़क हादसे एक बार फिर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं और ताजा मामला आगर मालवा जिले से सामने आया है जहां तेज रफ्तार का कहर एक और जान ले गया। सुसनेर से कुरावर जा रही एक निजी यात्री बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई जिससे मौके पर अफरा तफरी और चीख पुकार मच गई। इस दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि एक दर्जन से अधिक यात्री घायल हो गए जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार यह बस सुसनेर से कुरावर की ओर जा रही थी तभी बड़ागांव के पास चालक बस पर नियंत्रण खो बैठा और वाहन सड़क किनारे पलट गया। बस के पलटते ही यात्रियों में चीख पुकार मच गई और कई लोग अंदर ही फंस गए। आसपास के ग्रामीणों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया और स्थानीय लोगों की मदद से बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला गया।

    घटना के तुरंत बाद सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को नलखेड़ा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो पाई है और पुलिस उसकी शिनाख्त करने में जुटी हुई है।

    हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में बस की तेज रफ्तार और चालक की लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है हालांकि तकनीकी खराबी या अन्य कारणों की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

    इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में लगातार हो रहे ऐसे हादसे यह संकेत देते हैं कि यातायात नियमों का पालन और वाहनों की नियमित जांच बेहद जरूरी है। खासकर निजी बसों में ओवरस्पीडिंग और लापरवाही से वाहन चलाने की घटनाएं आम होती जा रही हैं जो यात्रियों की जान के लिए खतरा बन रही हैं।

    जरूरत इस बात की है कि प्रशासन सख्ती दिखाते हुए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे और लोगों में भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए ताकि इस तरह के दर्दनाक हादसों को रोका जा सके। फिलहाल इस दुर्घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है और लोग घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

  • बांग्लादेश में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत… संकट में भारत ने की मदद… 5000 टन अतिरिक्त Diesel भेजा

    बांग्लादेश में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत… संकट में भारत ने की मदद… 5000 टन अतिरिक्त Diesel भेजा


    ढाका।
    पश्चिम एशिया (West Asia.) में चल रहे संघर्ष के कारण बांग्लादेश (Bangladesh.) में पेट्रोल-डीजल का भारी संकट मंडरा रहा है। इस बीच भारत ने पड़ोसी देश की मदद करते हुए 5,000 टन अतिरिक्त डीजल (5,000 Tonnes Additional Diesel) की सप्लाई की है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने शुक्रवार रात इस बात की पुष्टि की। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के महाप्रबंधक (वाणिज्यिक) मो. मुर्शेद हुसैन आजाद ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि भारत से 5,000 टन अतिरिक्त डीजल बांग्लादेश पहुंच गया है।

    इस नई खेप के साथ, बांग्लादेश को हाल के दिनों में भारत से कुल 15,000 टन डीजल मिल चुका है। 28 मार्च को 6,000 टन अतिरिक्त डीजल भेजने के लिए पंपिंग की प्रक्रिया की जाएगी। भारत ने आगामी अप्रैल माह में 40,000 टन डीजल की आपूर्ति करने का प्रस्ताव रखा है, जिसे बांग्लादेश सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है।

    कैसे पहुंच रहा है डीजल?
    इस डीजल की सप्लाई असम स्थित ‘नुमालीगढ़ रिफाइनरी’ से की जा रही है। यह ईंधन ‘भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन’ के जरिए बांग्लादेश के पारबतीपुर डिपो तक भेजा जाता है। साल 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ हुए बड़े जन आंदोलन के बाद इस मैत्री पाइपलाइन का संचालन रोक दिया गया था।

    हाल ही में फरवरी में हुए आम चुनावों के बाद, जब तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार ने सत्ता संभाली, तो इस पाइपलाइन को फिर से बहाल कर दिया गया। फिर से शुरू होने के बाद से अब तक इसी पाइपलाइन के माध्यम से 15,000 टन डीजल भेजा जा चुका है।

    बांग्लादेश में डीजल की मांग और आयात की स्थिति
    ऊर्जा विशेषज्ञ एजाज अहमद ने बांग्लादेश की ऊर्जा जरूरतों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की वार्षिक डीजल मांग 40 लाख टन है, जो पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। विदेशों से आयात होने वाले कच्चे तेल में से केवल 5 लाख टन को ही बांग्लादेश की ‘ईस्टर्न रिफाइनरी’ में रिफाइन किया जा सकता है। बाकी की जरूरत पूरी करने के लिए सीधा रिफाइंड डीजल ही आयात करना पड़ता है। अपनी डीजल आपूर्ति के लिए बांग्लादेश मुख्य रूप से भारत, सिंगापुर और मध्य पूर्व पर निर्भर है।

  • निवेश का बड़ा झटका: Puch AI का 25,000 करोड़ का MoU यूपी में सिर्फ चार दिन में रद्द

    निवेश का बड़ा झटका: Puch AI का 25,000 करोड़ का MoU यूपी में सिर्फ चार दिन में रद्द


    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश में निवेशकों और सरकार के बीच बड़े समझौतों को लेकर जो उम्मीदें थीं, उन्हें उस वक्त झटका लगा जब राज्य सरकार ने ‘Puch AI’ कंपनी के साथ हुए 25,000 करोड़ रुपये के निवेश समझौते यानी MoU को महज चार दिनों में रद्द कर दिया। यह फैसला तब आया जब कंपनी की वित्तीय स्थिति और दस्तावेजों की गहन जांच में कई संदिग्ध पहलू सामने आए।

    Invest UP के CEO विजय किरन आनंद ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर MoU की समीक्षा की गई थी। कंपनी को नोटिस भेजकर उसका बिजनेस प्लान, वित्तीय स्थिति और Detailed Project Report (DPR) मांगी गई। जवाब देने के लिए कंपनी को केवल तीन दिन का समय दिया गया, लेकिन इस दौरान कंपनी की तरफ से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।

    सरकार की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कंपनी समय पर जरूरी दस्तावेज नहीं जमा कर सकी। वित्तीय स्थिति कमजोर पाई गई और निवेश के लिए फंड का स्रोत भी स्पष्ट नहीं था। इस वजह से यह निवेश प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही जोखिम भरा साबित हुआ।

    योगी सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि इतनी बड़ी परियोजना के लिए Puch AI कंपनी के पास न तो पर्याप्त वित्तीय क्षमता थी और न ही भरोसेमंद दस्तावेज। निवेश में किसी भी तरह के संभावित जोखिम से बचने के लिए सरकार ने MoU रद्द कर दिया।

    इस मामले ने राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। विपक्ष के नेताओं ने भी इस पर सवाल उठाए थे। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने 25,000 करोड़ रुपये के इस निवेश को लेकर सरकार को घेरा था।

    उत्तर प्रदेश सरकार लगातार राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े समझौते कर रही है। इसी कड़ी में Puch AI के साथ यह महत्त्वाकांक्षी निवेश प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि शुरुआती जांच में ही कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल उठे, जिसके चलते यह निवेश प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही रद्द कर दिया गया।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी किसी भी निवेश प्रोजेक्ट में पारदर्शिता और वित्तीय क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि राज्य में आने वाले निवेश सुरक्षित और प्रभावी हों और किसी तरह का वित्तीय या कानूनी जोखिम राज्य को प्रभावित न करे।

    इस फैसले से यह संदेश गया कि यूपी सरकार बड़े निवेश प्रोजेक्ट्स में केवल भरोसेमंद और सक्षम कंपनियों के साथ ही आगे बढ़ेगी। Puch AI का मामला एक चेतावनी भी है कि वित्तीय और प्रबंधन संबंधी कमजोरियों वाले निवेश समझौतों को राज्य सरकार बढ़ावा नहीं देगी।

    अंततः, चार दिन में रद्द किया गया यह 25,000 करोड़ का MoU यह दिखाता है कि यूपी सरकार निवेशकों की विश्वसनीयता और परियोजनाओं की पारदर्शिता पर पूरी तरह ध्यान देती है और किसी भी तरह के जोखिम से राज्य को बचाने के लिए त्वरित और निर्णायक कदम उठाती है।

  • श्रीरामपुर में रामनवमी जुलूस बना निशाना मस्जिद के पास पथराव से बिगड़ा माहौल

    श्रीरामपुर में रामनवमी जुलूस बना निशाना मस्जिद के पास पथराव से बिगड़ा माहौल


    नई दिल्ली:  महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के श्रीरामपुर शहर में रामनवमी के पावन अवसर पर निकाले जा रहे जुलूस के दौरान उस समय अचानक तनाव फैल गया जब जुलूस पर पथराव की घटना सामने आई यह घटना गुरुवार शाम करीब चार बजे की बताई जा रही है जब श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ जुलूस में शामिल होकर भजन कीर्तन करते हुए आगे बढ़ रहे थे

    जानकारी के अनुसार जुलूस जब सय्यद बाबा चौक से होते हुए एक स्थानीय मस्जिद के पास पहुंचा तभी अचानक मस्जिद के पीछे की ओर से कुछ अज्ञात लोगों ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया इस अप्रत्याशित पथराव से जुलूस में अफरा तफरी मच गई और लोग इधर उधर भागने लगे इस घटना में तीन लोग घायल हो गए जिनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है घायल व्यक्ति को तुरंत श्रीरामपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसका उपचार जारी है

    घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों में आक्रोश फैल गया और कुछ समय के लिए माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया हालांकि स्थिति को बिगड़ने से पहले ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मोर्चा संभाल लिया पुलिस बल ने तुरंत मौके पर पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित किया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की इसके बाद स्थिति धीरे धीरे सामान्य हुई

    पुलिस ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए मस्जिद के मौलाना सहित 10 से 12 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी गई है अधिकारियों के अनुसार घटना की हर पहलू से जांच की जा रही है ताकि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके

    इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है जिनमें धारा 190 191(1) 191(2) 192 110 और 118(1) शामिल हैं इन धाराओं के तहत आरोपियों पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी

    घटना के बाद पूरे श्रीरामपुर शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है

    गौरतलब है कि श्रीरामपुर में हर वर्ष रामनवमी का त्योहार बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है इस अवसर पर शहर में विशाल जुलूस निकाला जाता है जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं और पूरे शहर में मेले जैसा माहौल रहता है हालांकि इस बार हुई इस घटना ने उत्सव के माहौल को कुछ समय के लिए प्रभावित जरूर किया लेकिन प्रशासन की तत्परता से हालात पर काबू पा लिया गया

    फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और शहर में शांति बनी हुई है पुलिस द्वारा लगातार गश्त की जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके प्रशासन का कहना है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी

  • UN में ब्रिटेन के खिलाफ किस प्रस्ताव पर भारत ने किया वोट? लंदन की बढ़ी टेंशन

    UN में ब्रिटेन के खिलाफ किस प्रस्ताव पर भारत ने किया वोट? लंदन की बढ़ी टेंशन


    संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन को एक बड़ा झटका लगा है. अफ्रीकी देशों की मांग पर UN जनरल असेंबली में एक प्रस्ताव पास किया गया है, जिसमें ब्रिटेन और अन्य पूर्व उपनिवेशवादी देशों से ट्रांसअटलांटिक गुलाम व्यापार के लिए मुआवजा देने की मांग की गई है. इस प्रस्ताव में गुलाम व्यापार को मानवता के खिलाफ सबसे गंभीर अपराध बताया गया है.

    यह प्रस्ताव अफ्रीकी देश घाना की ओर से अफ्रीकी संघ के तत्वावधान में पेश किया गया था. इस पर हुए वोटिंग में 124 देशों ने समर्थन किया, जिसमें भारत भी शामिल है. इस प्रस्ताव का तीन देशों ने विरोध किया और 52 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.

    इस बिल का विरोध करने वाले देशों में अमेरिका, इजराइल और अर्जेंटीना शामिल हैं. वहीं ब्रिटेन के साथ फ्रांस और यूरोपीय संघ (European Union) के कई देशों ने वोटिंग से परहेज किया है. ब्रिटेन ने साफ कर दिया कि वह इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है. ब्रिटेन के प्रतिनिधि ने कहा कि उन्हें प्रस्ताव में इस्तेमाल की गई कानूनी भाषा पर आपत्ति है. ब्रिटेन के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा, “ब्रिटेन का रुख साफ है, हम मुआवजा नहीं देंगे.”

    यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन यह अफ्रीकी देशों के लिए एक बड़ी राजनयिक जीत है. अब अफ्रीकी देश इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं. उनका तर्क है कि गुलाम व्यापार की वजह से अफ्रीका का विकास रुका और आज भी इसकी वजह से नस्लभेद की समस्या बनी हुई है.

    अमेरिका ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि वह मानवता के खिलाफ अपराधों की रैंकिंग बनाने का विरोध करता है. अमेरिका ने उन मुस्लिम देशों के गुलाम व्यापार का भी मुद्दा उठाया जो 20वीं सदी तक जारी रहा. UN में ब्रिटेन के खिलाफ पारित इस प्रस्ताव में मुआवजे की मांग की गई है. भारत ने इसके समर्थन में वोट किया, जिससे ब्रिटेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं. अब अगला दौर अंतरराष्ट्रीय अदालत में लड़ा जा सकता है.