Tag: India

  • भारत के साथ संयुक्त विकास के वादे से पीछे हटा मालदीव, थिलाफुशी पोर्ट के लिए चीन की CHEC से किया समझौता

    भारत के साथ संयुक्त विकास के वादे से पीछे हटा मालदीव, थिलाफुशी पोर्ट के लिए चीन की CHEC से किया समझौता

    नई दिल्ली । मालदीव ने थिलाफुशी पोर्ट के विकास को लेकर चीन की कंपनी चाइना हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी यानी CHEC के साथ समझौता किया है। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2024 में मालदीव और भारत के बीच थिलाफुशी पोर्ट को संयुक्त रूप से विकसित करने की योजना सामने आई थी। ऐसे में परियोजना के पहले चरण के लिए चीनी कंपनी को जिम्मेदारी देने के फैसले से भारत की रणनीतिक चिंताएं बढ़ सकती हैं।

    मालदीव पोर्ट्स लिमिटेड और CHEC के बीच हुए समझौते के तहत परियोजना का काम सिंगल नॉमिनेशन के आधार पर सौंपा गया है। CHEC चीन की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी चाइना कम्युनिकेशंस कंस्ट्रक्शन कंपनी यानी CCCC से जुड़ी है। कंपनी पहले भी कई देशों में बंदरगाह और परिवहन से संबंधित बड़े प्रोजेक्ट में काम कर चुकी है।

    CHEC की अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में श्रीलंका का हंबनटोटा पोर्ट, केन्या का नैवाशा इनलैंड कंटेनर डिपो, गुयाना का एयरपोर्ट प्रोजेक्ट और प्रशांत क्षेत्र में नाउरू पोर्ट का पुनर्विकास शामिल रहा है। कंपनी को लेकर कुछ अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में वित्तीय प्रबंधन, अनुबंध और परियोजना जोखिम से जुड़े सवाल भी उठते रहे हैं। इसी वजह से मालदीव के मौजूदा आर्थिक हालात के बीच इस फैसले को लेकर रणनीतिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

    थिलाफुशी पोर्ट परियोजना का उद्देश्य माले पोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करना और मालदीव के औद्योगिक केंद्र थिलाफुशी की कनेक्टिविटी तथा व्यापारिक क्षमता को बढ़ाना है। वर्ष 2024 में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइजू की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने माले पोर्ट पर भीड़ कम करने के लिए थिलाफुशी पोर्ट के संयुक्त विकास की योजना की घोषणा की थी। इसलिए अब चीन की कंपनी के साथ समझौते को भारत-मालदीव संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब मालदीव आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। देश के चालू खाते और राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी का अनुमान है। इसके साथ ही आर्थिक वृद्धि की रफ्तार भी कमजोर रहने की संभावना जताई जा रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके व्यापक आर्थिक प्रभावों ने छोटे द्वीपीय देश की अर्थव्यवस्था के सामने अतिरिक्त दबाव पैदा किया है।

    दूसरी ओर, भारत पिछले कई वर्षों से मालदीव में बुनियादी ढांचे और विकास से जुड़ी परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। भारत के सहयोग से ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट यानी GMCP का निर्माण हुआ है, जो माले को विलिंगिली, गुल्हिफाल्हु और थिलाफुशी जैसे क्षेत्रों से जोड़ने की दिशा में अहम परियोजना है। इसे मालदीव की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल किया जाता है।

    भारत ने पिछले वर्षों में मालदीव में कई विकास परियोजनाओं को पूरा किया है, जिनका लाभ स्थानीय आबादी को मिला है। ऐसे में थिलाफुशी पोर्ट के लिए चीन की कंपनी का चयन दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के व्यापक परिदृश्य में अहम घटनाक्रम है। चीन की बढ़ती भागीदारी से हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी मौजूदगी को लेकर भारत की चिंताएं भी बढ़ सकती हैं।

    मालदीव के लिए चुनौती यह भी है कि वह आर्थिक जरूरतों, बुनियादी ढांचा विकास और क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन के बीच किस तरह तालमेल कायम करता है। थिलाफुशी पोर्ट समझौता आने वाले समय में मालदीव की विदेश नीति और भारत तथा चीन के साथ उसके संबंधों की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है।

  • इस हफ्ते सोने के भाव में 4,694 रुपये और चांदी में 8,436 रुपये की बड़ी गिरावट, निवेशकों को राहत

    इस हफ्ते सोने के भाव में 4,694 रुपये और चांदी में 8,436 रुपये की बड़ी गिरावट, निवेशकों को राहत

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। घरेलू सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव 4,694 रुपये घटकर 1,54,884 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। सप्ताह की शुरुआत में इसकी कीमत 1,59,578 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इस तरह कुछ ही कारोबारी सत्रों में सोने के भाव में करीब 4,700 रुपये की कमी दर्ज की गई है।

    इसी तरह 22 कैरेट सोने की कीमत भी कम हुई है। सप्ताह की शुरुआत में 1,46,173 रुपये प्रति 10 ग्राम के मुकाबले इसका भाव घटकर 1,41,874 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। वहीं 18 कैरेट सोने की कीमत 1,19,684 रुपये से घटकर 1,16,163 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। यानी अलग-अलग शुद्धता वाले सोने के भाव में भी उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली है।

    सप्ताह के दौरान 24 कैरेट सोने का सबसे ऊंचा भाव 31 अगस्त को शाम के सत्र में दर्ज किया गया। उस समय कीमत 1,55,835 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इसके बाद बाजार में गिरावट का दौर देखने को मिला। 2 सितंबर को शाम के सत्र में सोने का भाव इस सप्ताह के निचले स्तर 1,51,184 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया।

    चांदी की कीमत में भी इस सप्ताह सोने की तरह बड़ी गिरावट रही। चांदी का भाव 8,436 रुपये घटकर 2,35,456 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया। सप्ताह की शुरुआत में इसकी कीमत 2,43,892 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इस तरह एक सप्ताह के भीतर चांदी के भाव में 8,000 रुपये से अधिक की कमी आई है।

    चांदी का सप्ताह का उच्चतम भाव 31 अगस्त को शाम के सत्र में 2,37,199 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। इसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा और 3 सितंबर को सुबह के सत्र में चांदी का भाव 2,28,360 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया। बाद में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला।

    घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव को कई अंतरराष्ट्रीय कारक प्रभावित करते हैं। सप्ताह के दौरान वैश्विक बाजार में भी कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव करीब 4,500 डॉलर प्रति औंस और चांदी करीब 66 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर रही।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ा है। तनाव बढ़ने के बीच डॉलर, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती आई, जिसका असर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर पड़ा। आम तौर पर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती आने पर सोने की मांग और कीमतों पर दबाव बन सकता है।

    सर्राफा बाजार में कीमतों की निगरानी करने वाले इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की ओर से सोने और चांदी के भाव दिन में दो बार जारी किए जाते हैं। सुबह और शाम के सत्र में जारी होने वाली कीमतों से बाजार में चल रहे उतार-चढ़ाव का पता चलता है। हालांकि आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए वास्तविक कीमत शुद्धता, मेकिंग चार्ज, टैक्स और अन्य शुल्क के कारण अलग हो सकती है।

  • नेपाल के फ्लैश फ्लड पर मुआवजे की मांग, भारत बोला- जलवायु संकट साझा चुनौती, विकसित देश करें मदद

    नेपाल के फ्लैश फ्लड पर मुआवजे की मांग, भारत बोला- जलवायु संकट साझा चुनौती, विकसित देश करें मदद


    नई दिल्ली। नेपाल में फ्लैश फ्लड से हुई भारी तबाही के बाद जलवायु संकट के लिए भारत, चीन और अमेरिका से मुआवजा देने की मांग को लेकर उठे विवाद पर भारत ने अपना रुख साफ किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के सामने साझा चुनौती है और इससे निपटने की जिम्मेदारी भी इसी आधार पर तय होनी चाहिए।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का हमेशा से मानना रहा है कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े कदम ‘साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं’ के सिद्धांत पर आधारित होने चाहिए।

    नेपाल ने उठाया था ऐतिहासिक जिम्मेदारी का मुद्दा

    नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने फ्लैश फ्लड के बाद कहा था कि उनके देश का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन लगभग शून्य है, इसके बावजूद नेपाल को जलवायु संकट की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।

    उन्होंने दुनिया के तीन प्रमुख ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देशों—चीन, अमेरिका और भारत—से ऐतिहासिक जिम्मेदारी स्वीकार करने की अपील की थी। उनका कहना था कि इन देशों को नेपाल जैसे जलवायु संकट से प्रभावित और कमजोर देशों को मुआवजा देना चाहिए।

    नेपाल के विदेश मंत्री ने इसे किसी तरह की ‘दान’ की मांग नहीं, बल्कि इन देशों का कानूनी और नैतिक दायित्व बताया था।

    भारत बोला- विकसित देशों को आगे आना चाहिए

    भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार विकसित देशों को जलवायु संकट से प्रभावित विकासशील देशों की मदद में आगे आना चाहिए।

    रणधीर जायसवाल ने कहा कि जिन विकसित देशों का ऐतिहासिक उत्सर्जन सबसे ज्यादा रहा है और जिन्होंने जलवायु संकट को बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया है, उन्हें उत्सर्जन कम करने के साथ-साथ विकासशील देशों को वित्तीय सहायता और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए मदद करनी चाहिए।

    नेपाल ने बाद में दी थी सफाई

    विवाद बढ़ने के बाद नेपाल के विदेश मंत्री ने अपने बयान पर स्पष्टीकरण भी दिया था। उन्होंने कहा था कि न तो उन्होंने और न ही नेपाल सरकार ने भारत, चीन या अमेरिका से विशेष रूप से मुआवजा मांगा है। उनकी अपील पूरी वैश्विक बिरादरी से थी कि जलवायु परिवर्तन के असर को गंभीरता से समझा जाए और प्रभावित देशों को लंबे समय तक सहयोग दिया जाए।

    त्रासदी में 1200 से ज्यादा मौतें

    नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। आपदा के बाद नेपाल में राहत और बचाव कार्य जारी हैं।

    भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत नेपाल की सरकार और वहां के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। मंत्रालय के मुताबिक, करीबी दोस्त और साझेदार होने के नाते भारत ने तत्काल प्रतिक्रिया दी और नेपाल में राहत, रिकवरी तथा पुनर्निर्माण के प्रयासों में सहयोग जारी रखेगा।

  • आरबीआई के कदमों से भारत का भुगतान संतुलन मजबूत, वित्त वर्ष 2027 में 75 अरब डॉलर तक अधिशेष का अनुमान

    आरबीआई के कदमों से भारत का भुगतान संतुलन मजबूत, वित्त वर्ष 2027 में 75 अरब डॉलर तक अधिशेष का अनुमान

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने और घरेलू मुद्रा पर दबाव कम करने के लिए उठाए गए कदमों का असर भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति पर दिखाई दे सकता है। एक रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में देश का भुगतान संतुलन यानी बैलेंस ऑफ पेमेंट 65 से 75 अरब डॉलर के अधिशेष में रह सकता है।

    रिपोर्ट के अनुसार सेवा निर्यात और विदेशों से आने वाली रेमिटेंस में मजबूती भारत के चालू खाते को सहारा देगी। इसके चलते वित्त वर्ष 2027 में चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद के करीब 1 से 1.25 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान है। इससे बाहरी क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    विदेशी मुद्रा को देश में आकर्षित करने के लिए आरबीआई ने कई योजनाएं शुरू की हैं। इन उपायों के तहत कुल 136.4 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह आने का अनुमान है। इस बढ़े हुए प्रवाह ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के साथ रुपये के अवमूल्यन पर दबाव कम करने में भी मदद की है।

    भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की बढ़ोतरी महत्वपूर्ण रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 47.9 अरब डॉलर की वृद्धि हुई और देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 729.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया।

    आरबीआई की ओर से जून में शुरू की गई विदेशी मुद्रा आकर्षित करने वाली योजनाओं में एफसीएनआर यानी विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक जमा की अहम भूमिका रही। इन जमा के जरिए करीब 127.2 अरब डॉलर जुटाए गए, जो कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह का 90 प्रतिशत से अधिक है।

    इसके अलावा विदेशी मुद्रा में विदेशी कर्ज यानी ओएफसीबी के माध्यम से करीब 5.3 अरब डॉलर और बाह्य वाणिज्यिक उधारी यानी ईसीबी के जरिए 3.9 अरब डॉलर जुटाए गए। इस तरह विदेशी मुद्रा जुटाने के अलग-अलग माध्यमों ने देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में योगदान दिया।

    एफसीएनआर जमा को आकर्षक बनाने के लिए कई बैंकों ने तीन से पांच वर्ष की अवधि वाली जमा पर ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी की। इन दरों को करीब 2 से 4 प्रतिशत के स्तर से बढ़ाकर 6 से 7 प्रतिशत तक किया गया। इससे एनआरआई के लिए भारत में विदेशी मुद्रा जमा रखने की आकर्षकता बढ़ी और बैंकों को अतिरिक्त विदेशी मुद्रा जुटाने में मदद मिली।

    आरबीआई ने बाजार में अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने के लिए भी कदम उठाए हैं। इसके तहत 6 अगस्त से 2 सितंबर के बीच कुल 53.5 लाख करोड़ रुपये की वीआरआरआर यानी वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो नीलामियों की घोषणा की गई। इसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त नकदी का प्रबंधन करना है।

    इन उपायों की पृष्ठभूमि में बाहरी क्षेत्र पर बढ़े दबाव को भी देखा जा सकता है। मध्य पूर्व में संघर्ष और उससे जुड़े घटनाक्रम के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी तथा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां बढ़ाई थीं। महंगे तेल से आयात बिल बढ़ने और डॉलर की मांग बढ़ने के कारण रुपये पर दबाव बना था।

    हालांकि रिपोर्ट का आकलन है कि मजबूत सेवा निर्यात, रेमिटेंस और विदेशी मुद्रा प्रवाह ने भारत को इन बाहरी झटकों से निपटने के लिए पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में पहुंचाया है। रिपोर्ट के मुताबिक मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार और बाहरी वित्तीय स्थिति में सुधार से भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीलापन क्षमता मजबूत हुई है।

  • नेपाल बाढ़ में भारत के लापता लोगों के परिजनों की बनेगी DNA प्रोफाइल… अज्ञात शवों से होगा मिलान

    नेपाल बाढ़ में भारत के लापता लोगों के परिजनों की बनेगी DNA प्रोफाइल… अज्ञात शवों से होगा मिलान


    नई दिल्ली।
    नेपाल (Nepal) में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ (Devastating floods) के बाद अपनों की तलाश कर रहे परिवारों के लिए भारत सरकार (India Government ) ने अहम कदम उठाया है. बाढ़ में लापता लोगों की पहचान के लिए अब भारत (India) में उनके करीबी रिश्तेदारों की DNA प्रोफाइल तैयार की जाएगी. इसके बाद इन DNA प्रोफाइल का मिलान नेपाल में मिले अज्ञात शवों से किया जाएगा।

    विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, भारत में रहने वाले लापता लोगों के फर्स्ट-डिग्री जैविक रिश्तेदारों के सैंपल लेकर DNA प्रोफाइल तैयार की जाएगी. इनमें माता-पिता, बेटा, बेटी और भाई-बहन शामिल हैं. इसके लिए भारत की केंद्रीय और राज्य स्तरीय फॉरेंसिक लैब की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

    DNA प्रोफाइल बनाने के लिए अब सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब (CFSL), राज्य फॉरेंसिक साइंस लैब (SFSL), नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी की लैब और NABL से मान्यता प्राप्त उन लैब्स का इस्तेमाल किया जा सकेगा, जहाँ डीएनए प्रोफाइलिंग की सुविधा उपलब्ध है।


    नेपाल पुलिस से होगा DNA का मिलान

    मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स (MEA) ने बताया कि नेपाल पुलिस की सलाह के मुताबिक पहचान के लिए Autosomal STR DNA profiling कराई जा सकती है.इसके लिए नेपाल पुलिस ने तकनीकी जरूरतों की जानकारी भी साझा की है .DNA प्रोफाइल तैयार होने के बाद उसे जरूरी शुरुआती जानकारी के साथ नेपाल पुलिस को भेजा जा सकेगा।

    इन DNA प्रोफाइल को नेपाल पुलिस के ईमेल [email protected] पर भेजा जा सकता है. इससे नेापल में मिले अज्ञात शवों के DNA प्रोफाइल के साथ इनका मिलान और पहचान की जाएगी. भारत सरकार ने समन्वय के लिए एक और व्यवस्था की है. DNA प्रोफाइल की कॉपी काठमांडू के भारतीय दूतावास को [email protected] पर भेजी जा सकती है। इसके साथ ही लोगों की सहायता के लिए पुलिस का हेल्पलाइन नंबर +977 9841 6160 95 भी जारी किया गया है।


    1,259 लोगों की मौत, 5 हजार अब भी लापता

    नेपाल में पिछले हफ्ते आई त्रासदी से कई घर उजड़ गए. नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,259 हो गई है.राहत और बचाव टीमों ने अब तक 12 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला है, जबकि करीब 5 हजार लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

    भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि काठमांडू के भारतीय दूतावास ने मंगलवार को पीड़ितों के शवों की पहचान से जुड़ी जानकारी और प्रक्रिया साझा की थी. अब गृह मंत्रालय की पहल से भारत में DNA प्रोफाइलिंग की सुविधा उपलब्ध कराकर पहचान की प्रक्रिया को और आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।

    बता दें कि 26 अगस्त को आया यह फ्लैश फ्लड नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के बाद आई थी. इसने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को भारी नुकसान पहुंचाया है.अब DNA जांच की यह व्यवस्था उन परिवारों के लिए उम्मीद के नए रास्ते खोलेगी जो अपने लापता परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।

  • पाकिस्तान के साथ नो डील…. बेल्जियम के PM ने मानी भारत की बात, हुए 10 बड़े समझौते

    पाकिस्तान के साथ नो डील…. बेल्जियम के PM ने मानी भारत की बात, हुए 10 बड़े समझौते


    नई दिल्ली।
    ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद भारत (India) लगातार आक्रामक तरीके से पाकिस्तान (Pakistan) को वैश्विक मंच पर अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में भारत ने बेल्जियम (Belgium) को कहा कि वह पाकिस्तान के साथ किसी प्रकार का रक्षा समझौता (Defence Agreement) नहीं करे और न ही किसी प्रकार की रक्षा तकनीक का हस्तांतरण करे। बेल्जियम ने इस पर सहमति व्यक्त करते हुए भारत को आश्वस्त किया है।


    बेल्जियम ने मानी भारत की बात

    सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकन के साथ बातचीत के दौरान यह बात रखी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को रक्षा तकनीक देने का मतलब है कि उसका दुरुपयोग होना। यह तकनीकें आतंकियों तक पहुंच सकती हैं। इसलिए बेल्जियम उसे कोई तकनीक नहीं दे। बेल्जियम ने इस पर सहमति प्रकट की है। उन्होंने भारत को आश्वस्त किया कि पाकिस्तान के साथ ऐसा कोई करार बेल्जियम नहीं करेगा।


    जापान को भी किया था आगाह

    मौजूदा समय में बेल्जियम के साथ पाकिस्तान का कोई रक्षा समझौता नहीं है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वह इसके लिए प्रयासरत है। बता दें कि पिछले दिनों जब जापान के रक्षा मंत्री भारत आए थे तो भारत ने उन्हें भी आगाह किया था कि वे पाक को कोई रक्षा तकनीक हस्तांतरित नहीं करें। वहीं, रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने बेल्जियम की रक्षा कंपनियों से आग्रह किया कि वे साझा सुरक्षा व समृद्धि के लिए विशिष्ट रक्षा उत्पादों के संयुक्त विकास और उत्पादन में भारत की विनिर्माण क्षमता और अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का भी लाभ उठाएं। फ्रैंकन ने संयुक्त प्रयासों के माध्यम से दोनों देशों की सेनाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत यात्रा पर आए बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रैंकन संग द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा व औद्योगिक सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की तथा सहयोग को गहरा करने पर सहमति जताई। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि दोनों मंत्रियों ने रक्षा सहयोग वार्ता, यात्राओं, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने पर सहमति जताई है।


    चीन के प्रभुत्व को संतुलित करने में भारत सहायक

    बेल्जियम के रक्षा और व्यापार मंत्री थियो फ्रेंकेन ने भारत की बढ़ती सैन्य क्षमताओं के रणनीतिक महत्व पर बल देते हुए कहा है कि भारत के रक्षा-औद्योगिक आधार के विस्तार में उनके देश का प्रत्यक्ष सुरक्षा हित जुड़ा हुआ है। मजबूत भारतीय रक्षा क्षेत्र दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता लाएगा। यह भारत को एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव के सामने एक म उपयोगी संतुलनकर्ता बनाता है।


    भारत-बेल्जियम के हुए 10 समझौते

    1. रक्षा क्षेत्र में सहयोग की इच्छा
    2. बेल्जियम एवं भारत के रक्षा निर्माताओं के बीच एमओयू
    3. रिन्यूबल ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग
    4. सीबीआई और बेल्जियम संघीय पुलिस में समझौता
    5. कूटनीतिक प्रशिक्षण को करार
    6. ब्रुसेल्स में डिफेंस अटैची की नियुक्त
    7. फास्ट ट्रैक निवेश मैकेनिज्म की स्थापना
    8. व्यापार दोगुना करने की घोषणा
    9. इंडिया-बेल्जियम बिजनेस फोरम का गठन
    10. भारत और बेल्जियम के बीच कौंसुलर डायलाग की स्थापना

  • दुनिया में बढ़ी भारत की साख…. 35 साल बाद जापान ने रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर A किया

    दुनिया में बढ़ी भारत की साख…. 35 साल बाद जापान ने रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर A किया


    नई दिल्ली।
    जापान (Japan) की साख निर्धारण एजेंसी जेसीआर (Credit rating agency JCR) ने बुधवार को स्थिर परिदृश्य के साथ भारत (India) की रेटिंग एक पायदान बढ़ाकर ‘ए-’ कर दी। एजेंसी ने रेटिंग बढ़ाने के पीछे भारत की ‘मजबूत’ आर्थिक वृद्धि (‘Robust’ Economic Growth) और वित्तीय स्थिति में सुधार को प्रमुख कारण बताया।

    जेसीआर ने कहा कि 140 करोड़ से अधिक की आबादी और मौजूदा मूल्य पर 3.9 लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी वाली भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू वित्त वर्ष में छह प्रतिशत से अधिक की उच्च वृद्धि दर बनाए रखने की उम्मीद है। निजी खपत और निवेश के मजबूत समर्थन से भारतीय अर्थव्यवस्था हाल के वर्षों में ऊंची वृद्धि दर बनाए हुए है।

    15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह ने कहा 35 से ज्यादा वर्षों बाद भारत को फिर ‘ए’ रेटिंग मिली है। यह भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, संरचनात्मक सुधारों और केंद्र-राज्य साझेदारी की मजबूती की मान्यता है। इससे पहले भारत को ‘ए’ श्रेणी की रेटिंग मूडीज ने 1988 में ए2 दी थी। हालांकि, 1990-91 के भुगतान संतुलन संकट के दौरान यह रेटिंग चली गई थी।


    क्या मिलेगा फायदा

    आम आदमी को सीधे नहीं, बल्कि धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था के जरिए फायदा मिल सकता है। बेहतर रेटिंग से कंपनियों के लिए विदेशों से कर्ज सस्ता होगा। इससे भविष्य में होम लोन, कार लोन और कारोबार के कर्ज की ब्याज दरों पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। विदेशी निवेश भी आकर्षित होगा। इससे कारखाने, नए कारोबार बढ़ने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।


    बेल्जियम से बढ़ेगा व्यापार

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को भारत की यात्रा पर आए बेल्जियम के प्रधानमंत्री बर्ट दे वेवर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान व्यापार और निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। ऊर्जा, रक्षा, जलवायु परिवर्तन, प्रौद्योगिकी आदि के क्षेत्रों में भी कई समझौते की उम्मीद है। यूरोपीय संघ के देश के रूप में बेल्जियम भारत में निवेश और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा दो दशक के अंतराल के बाद हो रही है। इससे दोनों देशों के बीच संबंधों के एक नए युग की शुरूआत होने की उम्मीद है। बेल्जियम उन यूरोपीय देशों में शामिल है, जिसने भारत के आजाद होने के तुरंत बाद राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में बेल्जियम की यात्रा की थी।

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ वहां के रक्षा और विदेश व्यापार मंत्री भी भारत आए हैं। संभावना है कि रक्षा उद्योगों के बीच सह उत्पादन को लेकर कुछ समझौते हो सकते हैं। वहीं, बीते वर्ष विभिन्न क्षेत्रों में 40 से अधिक समझौते हुए थे।


    18 अरब डॉलर का व्यापार

    भारत और बेल्जियम के बीच मौजूदा व्यापार 13 अरब डॉलर सालाना है। हाल में यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद इसमें बढ़ोतरी की उम्मीद है। इतना ही नहीं भारत में विदेशी निवेश का भी बेल्जियम एक महत्वपूर्ण स्रोत है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2000-2025 के दौरान बेल्जियम से 4.2 अरब डॉलर का निवेश भारत में आया। अब इसमें बढ़ोतरी की संभावना है।

  • भारत-उज्बेकिस्तान के बीच यूरेनियम को लेकर बड़ी डील, UPI- वीजा फ्री एंट्री समेत हुए 16 अहम समझौते

    भारत-उज्बेकिस्तान के बीच यूरेनियम को लेकर बड़ी डील, UPI- वीजा फ्री एंट्री समेत हुए 16 अहम समझौते


    ताशकंद।
    भारत (India) और उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) ने रविवार को असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हुए लंबे समय के लिए यूरेनियम आपूर्ति (Uranium supply) की व्यवस्था बनाने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव (President Shavkat Mirziyoyev) के बीच रविवार को हुई वार्ता में यह अहम फैसला हुआ। दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने की घोषणा भी की। साथ ही, वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को पांच अरब डॉलर सालाना तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया।


    2030 तक 5 अरब डॉलर करना है व्यापार

    मोदी और मिर्जियोयेव की वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में यूरेनियम आपूर्ति की प्रस्तावित मात्रा और समयसीमा का खुलासा नहीं किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार एक अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। अब इसे 2030 तक पांच अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक साझेदारी की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर पर ले जाना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।


    विदेश मंत्रियों की समन्वय परिषद बनेगी

    मोदी ने कहा कि द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं को दिशा देने के लिए विदेश मंत्रियों के स्तर पर समन्वय परिषद स्थापित की जाएगी। संयुक्त आयोग का स्तर भी सचिवों से बढ़ाकर मंत्रिस्तरीय किया जाएगा। दोनों देश कारोबारी नेताओं की भागीदारी वाला संयुक्त व्यापार सम्मेलन आयोजित करेंगे। दोनों देशों ने आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर प्रतिबद्धता जताई। मोदी ने कहा कि ये चुनौतियां पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।


    बौद्ध स्थलों के संरक्षण पर सहमति

    भारत और उज्बेकिस्तान ने प्राचीन बौद्ध स्थलों फयाज तेपा और कारा तेपा के संरक्षण एवं पुनरुद्धार के लिए आशय पत्र पर सहमति जताई। दोनों स्थल सिल्क रोड के जरिए मध्य एशिया में बौद्ध धर्म के प्रसार के महत्वपूर्ण प्रमाण माने जाते हैं।


    52 योग साधकों का विशेष सत्र

    मोदी ने ताशकंद में 52 योग साधकों की भागीदारी वाला विशेष योग सत्र भी देखा। उन्होंने कहा, ‘उज्बेकिस्तान योग से प्यार करता है।’ दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचा, महत्वपूर्ण खनिज, खनन, रक्षा एवं सुरक्षा, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, यूपीआई और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। रक्षा उद्योगों को सैन्य उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन की दिशा में काम करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। व्यापार विस्तार पर जोर दिया जाएगा।


    भारतीयों के लिए 30 दिन तक वीजा फ्री एंट्री

    प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों के लोगों के बीच आवाजाही आसान करने की दिशा में बड़ा फैसला हुआ। उज्बेकिस्तान ने भारतीय नागरिकों के लिए 30 दिन की वीजा-मुक्त यात्रा व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है। राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच जन-जन के संपर्क, पर्यटन और कारोबारी आदान-प्रदान को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।


    उज्बेकिस्तान में चलेगा यूपीआई

    डिजिटल सहयोग के तहत एनपीसीआई और उज्बेकिस्तान के नेशनल इंटरबैंक प्रोसेसिंग सेंटर के बीच वाणिज्यिक समझौता हुआ। इसके लागू होने के बाद भारतीय यात्री यूपीआई ऐप के जरिए उज्बेकिस्तान में कोड स्कैन कर दुकानों पर भुगतान कर सकेंगे।

    प्रधानमंत्री मोदी उज्बेकिस्तान की यात्रा के बाद रविवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए किर्गिस्तान पहुंचे। किर्गिस्तान के मंत्रिपरिषद के अध्यक्ष अदेलबेक कासिमालियेव ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक किर्गिज नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई। होटल पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष से हुआ। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने ‘एक्स’ पर कहा कि सम्मेलन में 10 सदस्य देश, 15 साझेदार देश और दो पर्यवेक्षक देश क्षेत्रीय एवं सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एकत्र होंगे।

  • नेपाल ने भारत की रेस्क्यू टीम की पेशकश क्यों ठुकराई?

    नेपाल ने भारत की रेस्क्यू टीम की पेशकश क्यों ठुकराई?


    नई दिल्ली। नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। हादसे में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस बीच भारत समेत कई देशों ने नेपाल को राहत और बचाव के लिए विशेषज्ञ टीमें भेजने की पेशकश की, लेकिन नेपाल सरकार ने विदेशी रेस्क्यू टीमों को बुलाने से इनकार कर दिया है। नेपाल का कहना है कि उसके सुरक्षा बल राहत और बचाव अभियान चलाने में सक्षम हैं और फिलहाल उसे जमीनी टीमों के बजाय वित्तीय सहायता की जरूरत है।

    काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने अपनी विशेषज्ञ आपदा प्रबंधन टीमों को नेपाल भेजने का प्रस्ताव दिया था। भारत ने भी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम भेजने की पेशकश की थी। हालांकि, नेपाली सेना और पुलिस की सलाह के बाद सरकार ने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया।

    2015 के भूकंप से लिया सबक

    नेपाल सरकार के इस फैसले के पीछे 2015 का विनाशकारी भूकंप भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। उस समय बड़ी संख्या में विदेशी राहत और बचाव दल नेपाल पहुंचे थे। इससे राहत कार्यों के समन्वय और प्रबंधन में काफी दिक्कतें सामने आई थीं। इसी अनुभव को देखते हुए नेपाल इस बार विदेशी टीमों के बजाय अपने सुरक्षा बलों के जरिए अभियान चलाना चाहता है।

    नेपाल पुलिस और विभिन्न दूतावासों के आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ के बाद स्थिति अब भी गंभीर है। दूसरे देशों के नागरिकों को सहायता पहुंचाने और उनके परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम बनाई है।

    विदेश मंत्रालय के एक उप-सचिव स्तर के अधिकारी को रसुवा के तिमुरे में ग्राउंड ऑपरेशन्स टीम के साथ भेजा गया है। यह टीम सुरक्षा बलों के साथ समन्वय कर दूसरे देशों के दूतावासों और परिजनों को लापता लोगों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएगी। विदेश मंत्री शिसिर खनल ने भी संबंधित विभागों को विदेशी सरकारों के लगातार संपर्क में रहने के निर्देश दिए हैं।

    भारत से 47.5 टन राहत सामग्री पहुंची

    नेपाल ने विदेशी रेस्क्यू टीमों को भले ही आने की अनुमति नहीं दी है, लेकिन मानवीय और आर्थिक सहायता लेने से इनकार नहीं किया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, भारत अब तक नेपाल को 47.5 टन राहत सामग्री भेज चुका है।

    भारत ने नेपाल को बेली ब्रिज और प्रीफैब ट्रस ब्रिज उपलब्ध कराने की पेशकश भी की है, ताकि बाढ़ से क्षतिग्रस्त संपर्क व्यवस्था को बहाल करने में मदद मिल सके।

    कई देशों ने आर्थिक मदद का ऐलान किया

    भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन और विश्व बैंक भी नेपाल के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा कर चुके हैं। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) के अध्यक्ष मासातो कांडा ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बातचीत की और पुनर्निर्माण के साथ-साथ पूर्व चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) को मजबूत करने में सहयोग का भरोसा दिया है।

    नेपाल सरकार ने अपने दूतावासों को भी निर्देश दिया है कि किसी भी तरह की वित्तीय सहायता केवल प्रधानमंत्री राहत कोष के माध्यम से ही स्वीकार की जाए।

  • नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह अपने पहले विदेश दौरे पर आएंगे भारत…

    नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह अपने पहले विदेश दौरे पर आएंगे भारत…


    नई दिल्ली।
    नेपाल (Nepal) के प्रधानमंत्री बालेन्द्र उर्फ बालेन शाह (Prime Minister Balen Shah) अपने पहले विदेश यात्रा (Foreign Travel) पर भारत (India) आ सकते हैं। नेपाल में आए भीषण बाढ़ के बीच नेपाली वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने गुरुवार को यह जानकारी दी है। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा है कि प्रधानमंत्री शाह का यह भारत दौरा इस साल के अंत से पहले आयोजित होने की संभावना है।

    काठमांडू में आयोजित एनडीटीवी समिट को संबोधित करते हुए नेपाल के वित्त मंत्री वागले ने कहा कि यात्रा की तारीखों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि पद संभालने के बाद प्रधानमंत्री शाह का पहला विदेशी दौरा भारत का ही होगा। वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने कहा, “हमने प्रधानमंत्री के विदेश दौरों की चर्चा शुरू कर दी है। मुझे पूरा विश्वास है कि उनकी पहली विदेश यात्रा भारत की होगी। तारीख तय की जानी बाकी है, लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि यह दौरा इसी साल के अंत से पहले होगा।”


    नेपाल में बाढ़ के बाद भारत बना संकटमोचक

    नेपाल के वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ और तबाही से देश जूझ रहा है। समाचार लिखे जाने तक इस त्रासदी में कम से कम 389 लोगों की मौत हो चुकी है। अब भी 1500 लोग लापता हैं। मलबे के तेज बहाव ने कई गांवों, सड़कों और पुलों को तबाह कर दिया है।

    संकट की इस घड़ी में भारत नेपाल की मदद के लिए सबसे पहले आगे आया। भारत ने सैन्य विमानोंके जरिए पहले 10 टन की मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी। इसके बाद 37.5 टन की अतिरिक्त खेप एयरलिफ्ट की गई है। वहीं विदेश मंत्री ने गुरुवार को एक बयान में कहा है कि भारत नेपाल की जनता के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है। उन्होंने भारत की ओर से हर संभव सहायता और मानवीय सहायता की पेशकश भी की।


    PM मोदी ने दिया था भरोसा

    इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के पीएम बालेन शाह से फोन पर बात कर इस आपदा पर गहरा शोक व्यक्त किया था। पीएम मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक पोस्ट में कहा, “प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बात की और नेपाल में बाढ़ के कारण हुई जनहानि पर संवेदना व्यक्त की। इस कठिन समय में भारत की जनता नेपाल में अपने बहनों और भाइयों के साथ एकजुटता से खड़ी है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की टीमें बचाव और राहत प्रयासों के लिए समन्वय कर रही हैं। उन्होंने कहा, “भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है।”


    नेपाल ने जताया आभार

    वहीं भारत से मिली त्वरित मदद के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने पीएम मोदी का शुक्रिया अदा किया था। पीएम मोदी द्वारा फोन पर सद्भावनापूर्ण बातचीत और गहरी संवेदना व्यक्त करने के लिए उनका आभार जताते हुए बालेन्द्र शाह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ”हम इस मुश्किल घड़ी में नेपाल के प्रति एकजुटता व्यक्त करने वाले आपके आत्मीय शब्दों और सहायता की उदार पेशकश की दिल से सराहना करते हैं।” उन्होंने कहा, ”सहयोग का यह भाव हमारे दोनों देशों के बीच दोस्ती के मजबूत रिश्तों को दिखाता है, जिन्हें हम बहुत महत्व देते हैं।”