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  • विवादों के समाधान पर चीन का बड़ा संकेत, जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले सीमा मुद्दे पर बढ़ी उम्मीद

    विवादों के समाधान पर चीन का बड़ा संकेत, जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले सीमा मुद्दे पर बढ़ी उम्मीद

    नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार के संकेतों के बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे जिनपिंग की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। इस मुलाकात से पहले भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग के बयान ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर सकारात्मक उम्मीदें बढ़ाई हैं।

    चीनी राजदूत ने कहा है कि चीन और भारत बातचीत को आगे बढ़ाने, सहयोग मजबूत करने और आपसी मतभेदों का उचित समाधान निकालने के लिए मिलकर काम करेंगे। उनके इस बयान को सीमा विवाद समेत दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    लगातार तीसरे साल मोदी-शी की मुलाकात

    शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि चीन और भारत राष्ट्रपति शी जिनपिंग तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक की तैयारियां कर रहे हैं। रूस के कजान और चीन के तियानजिन में दोनों नेताओं की मुलाकातों के बाद यह लगातार तीसरा वर्ष होगा, जब मोदी और शी आमने-सामने बातचीत करेंगे।

    चीनी राजदूत ने कहा कि चीन दोनों नेताओं की ओर से दिए गए रणनीतिक मार्गदर्शन को लागू करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा। दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाने, संवाद बढ़ाने और सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि दोनों देश अपने मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाने के साथ अच्छे पड़ोसियों की तरह मित्रता निभाएंगे और एक-दूसरे की सफलता में साझेदार बनकर आगे बढ़ेंगे।

    धीरे-धीरे सामान्य हो रहे भारत-चीन संबंध

    पिछले कुछ वर्षों में भारत और चीन के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। वर्ष 2024 में रूस के कजान में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हुई थी।

    इन मुलाकातों के बाद दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों को आगे ले जाने की कोशिशें तेज हुई हैं। ऐसे में नई दिल्ली में प्रस्तावित मोदी-शी बैठक को इस प्रक्रिया की अगली महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।

    भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का भी चीन ने किया समर्थन

    शी जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले चीन ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का भी समर्थन किया है। शू फेइहोंग ने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि चीन ब्रिक्स सहयोग को काफी महत्व देता है और इस वर्ष सफल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन में भारत का समर्थन करता है।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में दुनिया की कई प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि हिस्सा लेने पहुंचे हैं।

    मोदी-शी की बैठक पर टिकी निगाहें

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक पर दोनों देशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर है। बैठक में सीमा विवाद, व्यापार, निवेश, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

    चीनी राजदूत के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि बीजिंग भारत के साथ मतभेदों को टकराव के बजाय संवाद और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाली मोदी-शी वार्ता भारत-चीन संबंधों की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • डॉलर पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी…. भारत-चीन-रूस ने बनाया नया पेमेंट प्लान!

    डॉलर पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी…. भारत-चीन-रूस ने बनाया नया पेमेंट प्लान!


    नई दिल्ली।
    भारत (India) इस सप्ताह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) की मेजबानी कर रहा है। नई दिल्ली में शनिवार से शुरू हो रहे इस सम्मेलन में 11 देशों के शीर्ष नेता जुटेंगे। इस बीच अब ब्रिक्स देशों (BRICS Nations) की डॉलर (Dollar) पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी वाली योजना पर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। दरअसल भारत, चीन और रूस की अगुवाई वाला ब्रिक्स कई सालों से डॉलर का विकल्प तलाशने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में यह समूह अमेरिका से हमेशा खटकता रहा है। अब आगामी शिखर सम्मेलन से पहले भारत ने क्रॉस बॉर्डर भुगतान को आसान बनाने के लिए एक अहम प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इससे अमेरिका की बौखलाहट और बढ़ सकती है।

    दरअसल BRICS बीते कुछ समय से एक ऐसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर काम कर रहा है जिससे भारत, चीन और रूस जैसे देशों की डिजिटल करेंसियों को इंटीग्रेट किया जा सके। अब ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच केंद्रीय बैंकों द्वारा जारी डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की वकालत करेगा।

    हालांकि भारत किसी ऐसे यूनिफाइड पेमेंट नेटवर्क का समर्थन नहीं कर रहा है जिसे अमेरिकी डॉलर या SWIFT के विकल्प के रूप में देखा जाए। इसकी वजह यह है कि भारत नहीं चाहता कि ब्रिक्स समूह को अमेरिका या पश्चिमी देशों के खिलाफ खड़े ब्लॉक के रूप में देखा जाए। यही कारण है कि भारत एक साझा ‘ब्रिक्स पेमेंट सिस्टम’ बनाने के बजाय द्विपक्षीय डिजिटल करेंसी कनेक्टिविटी पर जोर दे रहा है।

    डिजिटल और स्थानीय करेंसी पर जोर
    रिपोर्ट के मुताबिक भारत का प्रस्ताव है कि ब्रिक्स देश अपनी-अपनी सेंट्रल बैंक की डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ें। इससे मध्यस्थ बैंकों पर निर्भरता कम होगी और लेनदेन की लागत में भारी गिरावट आएगी। आसान भाषा ने कहें तो भारत किसी तीसरे देश की करेंसी यानी डॉलर का उपयोग करने के बजाय सदस्य देशों की अपनी करेंसी में व्यापार करने की बात पर जोर दे रहा है।


    क्या है भारत का प्लान?

    जानकारी के मुताबिक इस सिस्टम में भारत के ई-रुपया, चीन की डिजिटल युआन और रूस की डिजिटल रूबल जैसी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को एक साझा तकनीकी प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसमें हर देश अपनी करेंसी पर पूरा कंट्रोल बनाए रखेगा। बदलाव सिर्फ इतना होगा कि इन करेंसी के जरिए आपसी लेनदेन आसान हो जाएगा। इस सिस्टम के जरिए ब्रिक्स देश आपस में होने वाले व्यापार का भुगतान सीधे अपनी डिजिटल करेंसी में कर सकेंगे। इसके लिए ना तो डॉलर की जरूरत होगी और न ही स्विफ्ट जैसे डॉलर आधारित सिस्टम से होकर भुगतान करना पड़ेगा।

    भारत इस पूरे मॉडल को आकार देने में अहम भूमिका निभा रहा है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि करेंसी को मिलाने की बजाय सिस्टम को आपस में जोड़ना बेहतर रास्ता है। इसका आधार भारत का खुद का डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई है। UPI ने देश के अंदर डिजिटल पेमेंट को काफी आसान बनाया है और इसी मॉडल को अन्य देशों के साथ भी जोड़ा जा सकता है।


    काम कैसे करेगा ब्रिक्स का पेमेंट सिस्टम?

    ब्रिक्स डिजिटल पेमेंट सेटलमेंट साइकिल पर काम करेगा। इसका मतलब है कि हर लेनदेन का भुगतान तुरंत नहीं किया जाएगा। एक तय अवधि में आयात और निर्यात का हिसाब जोड़ा जाएगा और आखिर में सिर्फ अंतर की रकम का भुगतान होगा। उदाहरण के लिए, अगर भारत एक महीने में चीन से 500 अरब रुपये का सामान खरीदता है और चीन भारत से 450 अरब रुपये का सामान लेता है, तो भारत को सिर्फ 50 अरब रुपये का ही भुगतान करना होगा। इससे ट्रांजेक्शन कॉस्ट भी कम होंगी।

  • BRICS Summit 2026 में शामिल होने भारत आएंगे शी जिनपिंग, पीएम मोदी के निमंत्रण पर 12-13 सितंबर को होगा दौरा

    BRICS Summit 2026 में शामिल होने भारत आएंगे शी जिनपिंग, पीएम मोदी के निमंत्रण पर 12-13 सितंबर को होगा दौरा

    नई दिल्ली ।चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत दौरे पर आएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को उनके दौरे की जानकारी दी। शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को भारत में आयोजित होने वाले BRICS सम्मेलन में शामिल होंगे। करीब सात साल बाद उनका भारत दौरा होने जा रहा है।

    शी जिनपिंग का यह दौरा भारत और चीन के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2020 में गलवान की घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की यह पहली आमने-सामने की द्विपक्षीय मुलाकात होगी। इससे पहले दोनों नेता किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान एक ही मंच पर नजर आए थे। उस दौरान दोनों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया था, लेकिन उनके बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई थी।

    शी जिनपिंग इससे पहले वर्ष 2019 में भारत आए थे। तब उन्होंने तमिलनाडु के मामल्लपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत हुई थी। इससे पहले वर्ष 2016 में शी जिनपिंग गोवा में आयोजित BRICS सम्मेलन में शामिल होने भारत पहुंचे थे। सितंबर 2014 में उन्होंने पहली बार भारत का दौरा किया था। उस समय भी प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच कई अहम विषयों पर चर्चा हुई थी।

    शी जिनपिंग का आगामी दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन अपने संबंधों में आई दूरी को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक तनाव की स्थिति रही है। अब दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात से भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने को लेकर नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    नई दिल्ली में 11 से 13 सितंबर तक BRICS सम्मेलन आयोजित होगा। इस बैठक में कई देशों के प्रमुख नेता शामिल होंगे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के सम्मेलन में पहुंचने की पुष्टि हो चुकी है।

    BRICS बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया की स्थिति भी बैठक में चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकती है।

    सम्मेलन में विकासशील देशों की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बदलाव जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की उम्मीद है। ऐसे में शी जिनपिंग की भारत यात्रा और BRICS बैठक में उनकी भागीदारी दोनों देशों के बीच संबंधों से जुड़े घटनाक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

  • भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 में नई दिल्ली का फोकस, समावेशी वैश्विक व्यवस्था और ग्लोबल साउथ की आवाज पर जोर

    भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 में नई दिल्ली का फोकस, समावेशी वैश्विक व्यवस्था और ग्लोबल साउथ की आवाज पर जोर

    नई दिल्ली ।कभी चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए इस्तेमाल होने वाले आर्थिक शब्द के रूप में सामने आया ब्रिक्स अब चार महाद्वीपों तक फैले प्रभावशाली भू-राजनीतिक समूह का रूप ले चुका है। नए सदस्य देशों के जुड़ने के साथ इसकी आर्थिक और रणनीतिक ताकत में लगातार विस्तार हुआ है। वर्ष 2026 में संगठन की अध्यक्षता भारत के पास है और नई दिल्ली इसे अधिक समावेशी, प्रभावी तथा समाधान-केंद्रित मंच बनाने की दिशा में काम कर रही है।

    ब्रिक्स प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक नीतियों के समन्वय का महत्वपूर्ण मंच बन गया है। सदस्य देश यहां वैश्विक शासन, विकास, व्यापार और आर्थिक सुधारों से जुड़े मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करते हैं। लगातार संवाद और सहयोग के जरिए संगठन ने वैश्विक दक्षिण की आवाज को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों तक पहुंचाने में भी भूमिका निभाई है।

    भारत की 2026 की अध्यक्षता “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” विषय पर केंद्रित है। इसी थीम के तहत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की जाएगी। भारत का लक्ष्य संगठन की संस्थागत क्षमता को मजबूत करना, विकास और नवाचार को प्राथमिकता देना तथा वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय विमर्श में प्रमुख स्थान दिलाना है।

    वर्तमान में ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात सहित 11 सदस्य देश हैं। ये देश मिलकर दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद और करीब 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे संगठन की आर्थिक और जनसांख्यिकीय पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    ब्रिक्स के विस्तार का बड़ा चरण जनवरी 2024 में आया, जब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया 11वां पूर्ण सदस्य बना। इन देशों के शामिल होने से संगठन का प्रभाव एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका तक और व्यापक हुआ।

    विस्तार के साथ ब्रिक्स में पार्टनर कंट्री श्रेणी भी बनाई गई। वर्ष 2025 के दौरान बेलारूस, बोलिविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम इस ढांचे से जुड़े। इससे संगठन की पहुंच और प्रभाव क्षेत्र में और विस्तार हुआ।

    समय के साथ ब्रिक्स का एजेंडा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहा। आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, कृषि, श्रम एवं रोजगार, दूरसंचार, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियां भी इसके प्रमुख विषयों में शामिल हैं।

    ब्रिक्स विश्व व्यापार संगठन और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में अधिक प्रतिनिधित्व तथा संतुलित भागीदारी की वकालत करता है। इसके प्रयासों का उद्देश्य वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाना तथा बदलती वैश्विक चुनौतियों के प्रति उसे अधिक उत्तरदायी बनाना है।

  • भारत के पास 190 परमाणु वॉरहेड, 225 तक हथियार बनाने की क्षमता, जल-थल-नभ से जवाब देने की तैयारी

    भारत के पास 190 परमाणु वॉरहेड, 225 तक हथियार बनाने की क्षमता, जल-थल-नभ से जवाब देने की तैयारी

    नई दिल्ली । चीन और पाकिस्तान की ओर से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत लगातार अपनी सैन्य क्षमताओं में इजाफा कर रहा है. भारत के परमाणु हथियारों को लेकर एक नई रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे किए गए हैं.

    भारत के पास 190 न्यूक्लियर वॉरहेड

    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास अब करीब 190 परमाणु वॉरहेड मौजूद हैं. भारत ने अपने एटमी पावरबैंक को बेहद एडवांस और पावरफुल बना लिया है. रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के पास करीब 140 से 225 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में ‘वेपन-ग्रेड प्लूटोनियम’ (परमाणु ईंधन) तैयार हो चुका है. इसमें भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के ध्रुव रिएक्टर की अहम भूमिका रही है.

    नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास अब 3 तरीके (न्यूक्लियर ट्रायड) से परमाणु हमला करने वाले 9 अलग-अलग सिस्टम पूरी तरह तैयार और चालू हैं. भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 और जगुआर लड़ाकू विमानों को परमाणु हथियार ले जाने और सटीक निशाना लगाने के लिए आधुनिक एविओनिक्स से लैस रखा गया है.

    वहीं, अग्नि सीरीज (अग्नि-1 से लेकर अग्नि-5) और पृथ्वी मिसाइलें भारत की जमीन से मार करने वाली बड़ी ताकत हैं. अग्नि-5 की रेंज 5,000 किलोमीटर से ज्यादा है, जो पूरे एशिया और चीन के दूर के हिस्सों तक मार कर सकती है. इसके अलावा रिपोर्ट्स ये भी हैं कि भारत अग्नि 6 मिसाइल भी बना रहा है, जिसकी रेंज 12000 किलोमीटर तक है. इसके अलावा ब्रह्मोस सुपरसॉनिक मिसाइलों को भी न्यूक्लियर वॉरहेड से लैस किया जा सकता है.

    समुद्र से भी मार कर सकता है भारत

    इसके अलावा समुद्र में भी दुश्मनों पर हमला करने के लिए भारत ने कमर कस रखी है. भारत की स्वदेशी एटमी एनर्जी से चलने वाली पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत और इस कैटेगरी की अन्य पनडुब्बियां समुद्र की गहराइयों में तैनात रहकर दुश्मन पर दूसरा जवाबी हमला करने की काबिलियत रखती हैं.

    इतन ही नहीं, अब भारत अपनी मिसाइलों को स्पेशल सीलबंद डिब्बों (कैनिस्टर) में रख रहा है. वहां ये लंबे वक्त तक सुरक्षित रहती हैं. इससे इन्हें सड़क या रेल मार्ग से कहीं भी ले जाना बेहद आसान होता है, और हमले का आदेश मिलते ही इन्हें कुछ ही मिनटों में लॉन्च किया जा सकता है.

    कई शहरों पर गिराए जा सकते हैं परमाणु बम!

    इसके अलावा, भारत Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle तकनीक पर भी काम कर रहा है, जिससे एक ही मिसाइल से एक साथ अलग-अलग शहरों या ठिकानों पर कई परमाणु बम गिराए जा सकते हैं.

    हालांकि, भारत सरकार अपने परमाणु हथियारों के बारे में कभी कोई आधिकारिक बयान नहीं देती. लेकिन DRDO अक्सर उन हथियारों के बारे में जानकारी देता है, जिन्हें वह विकसित कर रहा है. भारत की परमाणु नीति नो फर्स्ट यूज की है. यानी भारत खुद से पहले दुश्मन पर न्यूक्लियर अटैक नहीं करेगा. लेकिन अगर दुश्मन हिमाकत करता है तो भारत के 190 परमाणु हथियार दुनिया के नक्शे से दुश्मन देश का सफाया कर देंगे.

  • जीएफएफ 2026 में समीर निगम ने वित्तीय समावेशन के अगले दशक का विजन रखा, डिजिटल पहुंच बढ़ाने की रणनीति बताई

    जीएफएफ 2026 में समीर निगम ने वित्तीय समावेशन के अगले दशक का विजन रखा, डिजिटल पहुंच बढ़ाने की रणनीति बताई

    नई दिल्ली । फोनपे ने बुधवार को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में अगले दशक के लिए अपने विजन को सामने रखा। कंपनी के संस्थापक और सीईओ समीर निगम ने मुख्य संबोधन में देशभर के लोगों, परिवारों और कारोबारों के लिए डिजिटल प्रगति को आगे बढ़ाने की रणनीतिक रूपरेखा साझा की। यह प्रस्तुति कंपनी की एक दशक लंबी तकनीकी नवाचार और बड़े स्तर पर विस्तार की यात्रा पर आधारित रही।

    सत्र की शुरुआत में समीर निगम ने फोनपे के मूल दर्शन और समावेशी विकास पर कंपनी के फोकस को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि शीर्ष 10 प्रतिशत लोग कितनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि कहीं कोई पीछे तो नहीं छूट रहा। उनके मुताबिक फोनपे ने पिछले एक दशक में भारत की प्रगति को दिशा देने वाले तकनीकी अग्रणी के रूप में काम किया है और उसके पूरे इकोसिस्टम के उत्पादों को प्रगति की राह में आने वाली बाधाओं को कम करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

    समीर ने कहा कि वास्तविक वित्तीय समावेशन अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक वर्गों के लिए अलग उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार जरूरी यह है कि ऐसा सिस्टम बनाया जाए, जो हर भारतीय की जरूरत के अनुरूप लचीले तरीके से काम कर सके।

    उन्होंने बताया कि फोनपे ने एनपीसीआई के साथ मिलकर उन बाधाओं को व्यवस्थित रूप से दूर करने पर काम किया है, जिनके कारण लंबे समय से लोग डिजिटल अर्थव्यवस्था से बाहर रहे। इनमें स्मार्टफोन, बैंक खाते और सीमाओं से संबंधित अड़चनें शामिल हैं। हार्डवेयर से जुड़ी समस्या पर उन्होंने यूपीआई 123पे के विस्तार का उल्लेख किया। उनके मुताबिक 20 करोड़ से अधिक फीचर फोन यूजर्स डिजिटल अर्थव्यवस्था से बाहर थे। इंटरनेट के बिना एसएमएस, आईवीआर, मिस्ड कॉल और वॉयस तकनीक के जरिए यह सिस्टम यूपीआई की सुविधाएं फीचर फोन तक पहुंचाता है। प्रमुख कंपनियों के साथ साझेदारी में अब तक आठ लाख से अधिक ऐसे सक्षम डिवाइस भेजे जा चुके हैं।

    उन्होंने यूपीआई सर्किल का भी उल्लेख किया, जिसके जरिए मुख्य अकाउंट धारक अपने आश्रितों को सुरक्षित तरीके से खर्च करने की अनुमति दे सकते हैं। सीमा से जुड़ी बाधाओं को कम करने के लिए सिंगापुर, यूएई, फ्रांस और नेपाल में यात्रियों के लिए यूपीआई का विस्तार किया गया है। एनआरई और एनआरओ खातों के माध्यम से 3.5 करोड़ से अधिक एनआरआई के लिए डिजिटल भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

    धन और बचत को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए समीर ने ‘सैशेकरण की विचारधारा’ पेश की। इसके तहत बड़े वित्तीय निवेश को छोटी रोजमर्रा की आदतों में बदलने पर जोर है। फोनपे डेली एफडी के जरिए 100 रुपये प्रतिदिन से बैंक स्तर की एफडी शुरू की जा सकती है। डेली गोल्ड, सिल्वर और म्यूचुअल फंड एसआईपी की शुरुआत 10 रुपये से होती है।

    निवेश संबंधी मार्गदर्शन के लिए उन्होंने सीआरआईएसपी का जिक्र किया, जो रियल-टाइम बाजार की जानकारी उपलब्ध कराता है। उन्होंने बताया कि यह हाई नेटवर्थ यूजर्स की जरूरतों के अनुसार एकमुश्त निवेश और एफएंडओ ट्रेडिंग तक विस्तार कर सकता है।

    क्रेडिट की पहुंच बढ़ाने को लेकर समीर ने बताया कि फोनपे का एआई आधारित अंडरराइटिंग सिस्टम 2.5 मिनट में लोन वितरण संभव बना रहा है। उन्होंने कहा कि रोजाना के सेटलमेंट इतिहास को क्रेडिट स्कोर के तौर पर इस्तेमाल करते हुए ऑटोमेटेड डेली-रिपेमेंट मर्चेंट लोन के जरिए उन लोगों तक भी क्रेडिट पहुंचाया जा रहा है, जिनका पारंपरिक क्रेडिट स्कोर नहीं है। उन्होंने विश क्रेडिट कार्ड का भी उल्लेख किया, जो पहली बार कर्ज लेने वालों को साधारण एफडी के जरिए क्रेडिट हिस्ट्री बनाने में मदद करता है। एसबीआई और एचडीएफसी के साथ साझेदारी में यूपीआई पर रुपे क्रेडिट कार्ड जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

    मर्चेंट इकोसिस्टम के लिए फोनपे बिजनेस ऐप को नए रूप में पेश किया गया है। इसमें हाइपरलोकल ऑनलाइन विज्ञापन, व्यक्तिगत बाजार जानकारी और बिना कोडिंग पेमेंट सेटअप की सुविधा शामिल है। स्मार्टकनेक्ट, स्मार्टस्टोर और फोनपे पेमेंट गेटवे के साथ डेटा आधारित सीआरएम, लॉयल्टी इंजन, स्मार्ट स्पीकर और एआई ऑडियो अलर्ट जैसी सुविधाएं भी इकोसिस्टम का हिस्सा हैं।

    सत्र के अंत में समीर ने फोनपे प्लस प्रो पेश किया। यह हाइपरलोकल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म हर महीने होने वाले 11 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन से डेटा प्राप्त करता है और 40 वर्ग मीटर तक के छोटे भौगोलिक क्षेत्र के स्तर पर जानकारी उपलब्ध कराता है। इसका उद्देश्य कारोबारियों और नीति निर्माताओं को रणनीतिक विकास संबंधी फैसलों में मदद करना है।

  • अगस्त 2026 में ईवी बिक्री रिकॉर्ड 2.98 लाख यूनिट पार, बाजार हिस्सेदारी 12.3 प्रतिशत पहुंची, चारों सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन

    अगस्त 2026 में ईवी बिक्री रिकॉर्ड 2.98 लाख यूनिट पार, बाजार हिस्सेदारी 12.3 प्रतिशत पहुंची, चारों सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन

    नई दिल्ली ।भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार मजबूत हो रही है। अगस्त 2026 में देश में ईवी की खुदरा बिक्री 52.9 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ रिकॉर्ड 2,98,448 यूनिट पर पहुंच गई। इसके साथ कुल वाहन बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 12.3 प्रतिशत हो गई, जबकि अगस्त 2025 में यह 9.5 प्रतिशत थी।

    अगस्त में इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, यात्री वाहन और वाणिज्यिक वाहन, चारों प्रमुख श्रेणियों में अब तक की सबसे अधिक मासिक खुदरा बिक्री दर्ज की गई। आंकड़ों से संकेत मिलता है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रही है।

    इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री अगस्त में 67.05 प्रतिशत बढ़कर 1,83,204 यूनिट रही। हालांकि जुलाई 2026 में दर्ज 2,04,362 यूनिट की तुलना में अगस्त में बिक्री कुछ कम रही। इस श्रेणी में टीवीएस मोटर 48,938 यूनिट के साथ पहले स्थान पर रही। बजाज ऑटो ने 41,114 और एथर एनर्जी ने 28,757 यूनिट बेचीं। ओला इलेक्ट्रिक की बिक्री 13,852 यूनिट रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 29 प्रतिशत कम है। इलेक्ट्रिक दोपहिया की बाजार हिस्सेदारी 7.7 प्रतिशत से बढ़कर 10.7 प्रतिशत हो गई।

    इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की बिक्री 25.28 प्रतिशत बढ़कर 79,846 यूनिट पहुंच गई। इस श्रेणी में इलेक्ट्रिक वाहनों की पैठ 56.6 प्रतिशत से बढ़कर 65.3 प्रतिशत हो गई। बजाज ऑटो ने 13,833 यूनिट के साथ सबसे अधिक बिक्री की। महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी ने 12,806 और टीवीएस मोटर ने 4,415 यूनिट बेचीं।

    इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहन सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेगमेंट के रूप में सामने आए। अगस्त में इनकी बिक्री करीब तीन गुना बढ़कर 4,702 यूनिट रही, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 1,631 यूनिट था। बाजार हिस्सेदारी भी 2.06 प्रतिशत से बढ़कर 5.18 प्रतिशत हो गई। टाटा मोटर्स ने 1,416 यूनिट के साथ इस श्रेणी में बढ़त बनाए रखी। यूलर मोटर्स ने 849 और सैनी हेवी इंडस्ट्री इंडिया ने 605 यूनिट बेचीं।

    इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की बिक्री 51.89 प्रतिशत बढ़कर 30,696 यूनिट रही। इस श्रेणी में ईवी की बाजार हिस्सेदारी 5.8 प्रतिशत से बढ़कर 7.6 प्रतिशत हो गई। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने 13,158 यूनिट के साथ सबसे अधिक बिक्री दर्ज की। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 6,464 और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया ने 4,622 यूनिट बेचीं। नई कंपनियों में विनफास्ट ऑटो इंडिया की बिक्री 2,199 यूनिट और टेस्ला इंडिया मोटर्स एंड एनर्जी की बिक्री 116 यूनिट रही।

    फाडा के अध्यक्ष साई गिरिधर ने अगस्त 2026 को भारतीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी उद्योग के इतिहास का सबसे बड़ा अगस्त महीना बताया। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहन सेगमेंट के प्रदर्शन को खास तौर पर उल्लेखनीय बताया और कहा कि फ्लीट विद्युतीकरण अब परीक्षण से आगे बढ़कर वास्तविक खरीद निर्णयों तक पहुंच गया है।

    उन्होंने कहा कि गैर-त्योहारी मौसम के बावजूद इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है, जबकि इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन संरचनात्मक रूप से इलेक्ट्रिक श्रेणी में बदल चुके हैं। उनके अनुसार, ईवी की वृद्धि अब केवल सरकारी प्रोत्साहनों तक सीमित नहीं है। कम परिचालन लागत, बढ़ता चार्जिंग नेटवर्क, उपभोक्ताओं का बढ़ता विश्वास, पीएम ई-ड्राइव योजना और राज्यों की अनुकूल नीतियां मिलकर इस बदलाव को आगे बढ़ा रही हैं।

  • नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होगा ब्रिक्स सम्मेलन, पुतिन-मोदी मुलाकात में भारत-रूस सहयोग और वैश्विक हालात पर चर्चा संभव

    नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होगा ब्रिक्स सम्मेलन, पुतिन-मोदी मुलाकात में भारत-रूस सहयोग और वैश्विक हालात पर चर्चा संभव

    नई दिल्ली । रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के दौरान भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय संपर्क भी देखने को मिलेगा। पुतिन 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस मुलाकात में दोनों देशों के आपसी संबंधों और व्यापक अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

    रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा की पुष्टि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को की। उन्होंने कहा कि पुतिन कुछ ही दिनों में भारत की यात्रा शुरू करेंगे। पेसकोव के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच लंबे समय से करीबी और व्यावहारिक संबंध रहे हैं। दोनों नेता द्विपक्षीय एजेंडे से जुड़े संवेदनशील विषयों पर भी खुले और रचनात्मक तरीके से बातचीत करने में सक्षम हैं।

    रूस की ओर से पुतिन की इस यात्रा को भारत के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, तकनीक और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में लंबे समय से सहयोग रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर विचार किया जा सकता है।

    18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और उसने समूह के लिए लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर आधारित व्यापक प्राथमिकताएं तय की हैं। सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा।

    ब्रिक्स सहयोग को रूस मुख्य रूप से तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित मानता है। इनमें राजनीति और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वित्त तथा सांस्कृतिक और मानवीय सहयोग शामिल हैं। रूस समूह के विस्तार और अलग-अलग प्रारूपों में नए देशों की भागीदारी को भी समर्थन देता रहा है। ऐसे में सम्मेलन में ब्रिक्स के भविष्य और वैश्विक स्तर पर इसकी भूमिका से जुड़े मुद्दे भी अहम रह सकते हैं।

    पुतिन और मोदी की इससे पहले 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में मुलाकात हुई थी। दोनों नेता शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से इतर मिले थे। उस बातचीत के दौरान रूस और भारत के संबंधों को लगातार मजबूत बताते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।

    बिश्केक बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत का रुख भी स्पष्ट किया था। उन्होंने शत्रुता समाप्त करने और शांति की दिशा में प्रयासों को समर्थन देने की बात कही थी। भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए।

    इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि 2026 में संगठन की स्थापना के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भारत की अध्यक्षता के दौरान व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, शहरी विकास, स्टार्टअप और जलवायु कार्रवाई जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुतिन की मौजूदगी से सम्मेलन में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ ब्रिक्स के व्यापक एजेंडे को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

  • BRICS सम्मेलन में भारत-चीन के बीच कारोबार पर अहम बातचीत, तकनीक और निवेश से जुड़ी अड़चनें उठाएगा भारत

    BRICS सम्मेलन में भारत-चीन के बीच कारोबार पर अहम बातचीत, तकनीक और निवेश से जुड़ी अड़चनें उठाएगा भारत

    नई दिल्ली । में 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत और चीन के बीच आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत अहम हो सकती है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है और उनके साथ बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी आ सकता है। ऐसे में भारत चीन से आने वाली हाईटेक वस्तुओं के आयात में आ रही अड़चनों और चीन में भारतीय कंपनियों के निवेश से जुड़े प्रतिबंधों का मुद्दा उठा सकता है।

    भारत सरकार की ओर से चीनी तकनीक और महत्वपूर्ण सामान के आयात से जुड़ी परेशानियों पर उद्योग संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है। सरकार ने चीन की ओर से प्रमुख तकनीकी उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी अध्ययन किया है। भारतीय उद्योग जगत का मानना है कि इन प्रतिबंधों का असर देश की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

    चीन की ओर से कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्यात संबंधी प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें इंगट और वेफर तकनीक, बैटरी सेल और उससे जुड़ी तकनीक, हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट यानी HVDC उपकरण तथा कुछ विशेष ट्रांसमिशन कंपोनेंट्स शामिल हैं। HVDC तकनीक लंबी दूरी तक बिजली पहुंचाने में महत्वपूर्ण होती है और इससे ट्रांसमिशन के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलती है। यह रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड से जोड़ने और बिजली व्यवस्था को स्थिर रखने में भी उपयोगी मानी जाती है।

    भारत की चिंता यह है कि महत्वपूर्ण तकनीक और कच्चे माल की आपूर्ति में लगातार अड़चनें आने से घरेलू विनिर्माण को नुकसान हो सकता है। इससे बैकवर्ड इंटीग्रेशन की प्रक्रिया भी प्रभावित होने की आशंका है। भारत बातचीत के दौरान प्रक्रियागत बाधाओं और सोर्सिंग से जुड़े नियमों में राहत के साथ पारस्परिकता का मुद्दा उठा सकता है, यानी दोनों देशों की कंपनियों को समान स्तर की सुविधा मिले।

    हालांकि भारत-चीन व्यापार की तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून अवधि में चीन को भारत का निर्यात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 28 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 5.55 अरब डॉलर हो गया। अमेरिकी टैरिफ के कारण कुछ क्षेत्रों में निर्यात प्रभावित होने के बीच चीन को बढ़े निर्यात ने भारत को कुछ राहत दी।

    भारत और चीन के संबंधों में हाल के महीनों में कुछ नरमी भी दिखाई दी है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की बहाली, नाथू ला के रास्ते सीमा व्यापार फिर शुरू होना और लोगों के बीच संपर्क बढ़ना इसी बदलाव के संकेत हैं। इसके अलावा, लैंड बॉर्डर साझा करने वाले देशों से FDI से जुड़े नियमों में भी कुछ बदलाव किए गए हैं।

    बिजली क्षेत्र में भी भारत ने चीन के साथ कुछ मामलों में नियमों में ढील दी है। मार्च में सरकारी बिजली उपकरण कंपनी BHEL को चीन से 21 महत्वपूर्ण वस्तुओं की खरीद पांच साल तक करने की अनुमति दी गई। जून में भारत में कारखाने रखने वाली चार चीनी बिजली उपकरण कंपनियों को महत्वपूर्ण बिजली परियोजनाओं से जुड़े सरकारी टेंडरों में भाग लेने की अनुमति मिली।

    2020 में LAC पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद चीनी कंपनियों के लिए सरकारी खरीद और निवेश से जुड़े नियम कड़े किए गए थे। अब कुछ क्षेत्रों में सीमित राहत से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में व्यावहारिक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

    BRICS सम्मेलन भारत-चीन के बीच इन आर्थिक मुद्दों पर उच्चस्तरीय बातचीत का अवसर बन सकता है। भारत की प्राथमिकता हाईटेक सामान और जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति आसान कराने के साथ भारतीय कंपनियों के लिए चीन में निवेश का माहौल बेहतर करना हो सकती है। ऐसे में शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर होने वाली बातचीत पर खास नजर रहेगी।

  • भारत-बांग्लादेश के बीच फिर रेल सेवा शुरू करने की तैयारी….इसी सप्ताह हो सकती है बड़ी बैठक

    भारत-बांग्लादेश के बीच फिर रेल सेवा शुरू करने की तैयारी….इसी सप्ताह हो सकती है बड़ी बैठक


    नई दिल्ली।
    भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) के तनावपूर्ण संबंधों (Strained Relations) के बीच जल्द एक खुशखबरी मिलने के आसार हैं। खबर है कि भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) इस हफ्ते सीमा पार यात्री ट्रेन (Passenger Train) सेवाओं को फिर से शुरू करने पर चर्चा कर सकते हैं। ये सेवाएं 2024 में बांग्लादेश में हुई हिंसक अशांति के बाद से बंद हैं जिसके कारण प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

    अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश रेलवे के अधिकारी मंगलवार से ढाका में अपने भारतीय अधिकारियों के साथ दो दिन की बैठक करेंगे। इसमें मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस सेवाओं को फिर से शुरू करने और एक नया रेलमार्ग शुरू करने की संभावना पर चर्चा होगी।


    जान ले स्टॉपेज

    इस मामले से अवगत बांग्लादेश रेलवे के एक अधिकारी ने कहा, ‘हम कल से शुरू होने वाली IGRM यानी अंतर-सरकारी रेलवे बैठक में मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस जैसी रेलवे सेवाओं को फिर से शुरू करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने वाले हैं।’ मैत्री एक्सप्रेस ढाका को कोलकाता से जोड़ती है, बंधन एक्सप्रेस खुलना को कोलकाता से जोड़ती है जबकि मिताली एक्सप्रेस पहले ढाका को न्यू जलपाईगुड़ी से जोड़ती थी। कोलकाता और न्यू जलपाईगुड़ी, दोनों पश्चिम बंगाल में हैं।


    किस मूड में है बांग्लादेश

    नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश देश के उत्तर-पश्चिम में स्थित राजशाही को कोलकाता से जोड़ने वाले एक नए रेल मार्ग का प्रस्ताव रख सकता है। बांग्लादेश की ओर से यह प्रस्ताव दिए जाने की भी संभावना है कि मैत्री एक्सप्रेस जमुना ब्रिज के बजाय हाल में बने पद्मा ब्रिज से होकर ढाका और कोलकाता के बीच चले।

    अधिकारी ने कहा, ‘अगर दोनों पक्ष सहमत होते हैं तो मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन अगले महीने से फिर शुरू हो सकता है।’ उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रेलवे अधिकारी भी इन सेवाओं को फिर से शुरू करने में रुचि रखते हैं।


    अब कैसे हैं रिश्ते

    भारत और बांग्लादेश ने सोमवार को द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की और ‘पारस्परिक विश्वास एवं आपसी लाभ के आधार पर भविष्य को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करने’ पर सहमति जताई। बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने यहां प्रधानमंत्री के सलाहकार मो इस्माइल जबीउल्ला से मुलाकात की और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों पर चर्चा की।

    भारतीय उच्चायोग ने उम्मीद जताई कि दोनों संप्रभु देश पारस्परिक विश्वास और आपसी फायदे के आधार पर भविष्य को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।