Tag: India

  • कर्ज के दबाव में मालदीव, अब भारत से फिर उम्मीद; करेंसी स्वैप बढ़ाने की गुहार

    कर्ज के दबाव में मालदीव, अब भारत से फिर उम्मीद; करेंसी स्वैप बढ़ाने की गुहार


    नई दिल्ली। आर्थिक संकट से जूझ रहे मालदीव ने एक बार फिर भारत की ओर रुख किया है। बढ़ते कर्ज और घटते विदेशी मुद्रा भंडार के बीच राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की सरकार ने भारत से करेंसी स्वैप सुविधा को आगे बढ़ाने की अपील की है। हालांकि, भारत के लिए मौजूदा नियमों और शर्तों के चलते इस मांग पर फैसला लेना आसान नहीं माना जा रहा।
    दरअसल, मालदीव इस समय गंभीर वित्तीय दबाव में है। अंतरराष्ट्रीय कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा है। ऊपर से पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पर्यटन सेक्टर को झटका दिया है। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने संकट को और गहरा कर दिया है।

    नियम बने बड़ी बाधा

    सूत्रों के अनुसार, मालदीव ने भारत से करेंसी स्वैप सुविधा के विस्तार की मांग की है, लेकिन भारतीय व्यवस्था में दो बार निकासी के बीच ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ अनिवार्य होता है। इसके अलावा कर्ज को आगे बढ़ाने (रोल-ओवर) की भी सीमाएं तय हैं। ऐसे में तकनीकी कारणों से भारत के लिए तुरंत राहत देना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि इस बार मदद नहीं मिलती, तो मालदीव की आर्थिक हालत और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    भारत पहले भी दे चुका है सहारा

    भारत पहले भी कई बार मालदीव की मदद करता रहा है। अक्टूबर 2024 में 400 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप सुविधा दी गई थी, जिसे दो बार बढ़ाया गया। इसके अलावा 2025 में 50-50 मिलियन डॉलर के ब्याज मुक्त ट्रेजरी बिलों की अवधि भी बढ़ाई गई।

    जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा के दौरान 565 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट देने और कर्ज चुकाने की शर्तों में राहत का ऐलान भी किया गया था।

    रेटिंग एजेंसियों की चेतावनी

    वैश्विक एजेंसियों ने भी मालदीव की स्थिति को चिंताजनक बताया है। Fitch Ratings ने देश की रेटिंग ‘CC’ पर रखी है, जो डिफॉल्ट के उच्च खतरे का संकेत देती है, जबकि Moody’s ने ‘CAA2’ रेटिंग बरकरार रखी है।

    कर्ज चुकाने से खाली हुआ खजाना

    अप्रैल 2026 में मालदीव पर करीब 1 अरब डॉलर चुकाने का दबाव था। इसमें 500 मिलियन डॉलर का सुकुक बॉन्ड शामिल था, जिसे सरकार ने अपने सॉवरेन डेवलपमेंट फंड से चुका दिया। हालांकि, इससे विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी कमी आ गई।

    पर्यटन पर टिकी अर्थव्यवस्था

    मालदीव की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर है। लेकिन मिडिल ईस्ट संकट के चलते पर्यटकों की संख्या घटी है और ईंधन महंगा हुआ है। ऐसे हालात में नए कर्ज जुटाना भी मुश्किल होता जा रहा है।

    कुल मिलाकर, मालदीव इस समय आर्थिक मोर्चे पर नाजुक दौर से गुजर रहा है और उसकी नजरें एक बार फिर भारत की मदद पर टिकी हैं।

  • अक्षय तृतीया पर इन वस्तुओं से रहें दूर सोना चांदी के साथ ये गलत खरीदारी ला सकती है पनौती

    अक्षय तृतीया पर इन वस्तुओं से रहें दूर सोना चांदी के साथ ये गलत खरीदारी ला सकती है पनौती


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ और समृद्धि देने वाला पर्व माना जाता है इस दिन सोना चांदी जमीन और वाहन जैसी कीमती वस्तुओं की खरीदारी को विशेष रूप से शुभ समझा जाता है मान्यता है कि इस दिन शुरू किए गए कार्य का फल लंबे समय तक और अक्षय रूप में मिलता है यानी उसका शुभ प्रभाव कभी समाप्त नहीं होता

    वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी यह शुभ तिथि 19 अप्रैल सुबह 10 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 20 अप्रैल सुबह 7 बजकर 28 मिनट तक रहेगी इस दौरान कई महत्वपूर्ण शुभ योग भी बन रहे हैं जिनमें सर्वार्थ सिद्धि योग अमृत सिद्धि योग और गज केसरी योग शामिल हैं साथ ही रोहिणी नक्षत्र का संयोग इस दिन को और अधिक फलदायी बना रहा है

    हालांकि इस दिन को बेहद शुभ माना जाता है लेकिन ज्योतिष और लोक मान्यताओं के अनुसार कुछ वस्तुओं की खरीदारी से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें नकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है माना जाता है कि गलत चीजें खरीदने से घर में अशांति आर्थिक बाधाएं या मानसिक तनाव बढ़ सकता है

    विशेषज्ञों के अनुसार इस दिन लोहे और स्टील से बनी वस्तुएं जैसे बर्तन या मशीनरी घर लाना शुभ नहीं माना जाता क्योंकि इसे नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है इसी तरह प्लास्टिक की वस्तुएं भी अशुभ मानी जाती हैं जो घर की समृद्धि पर असर डाल सकती हैं

    इसके अलावा काले रंग की वस्तुओं को भी इस दिन न खरीदने की सलाह दी जाती है क्योंकि काला रंग शनि और नकारात्मक ऊर्जा से संबंधित माना जाता है धारदार या नुकीली चीजें जैसे चाकू कैंची या सुई आदि भी इस दिन घर लाना शुभ नहीं माना जाता क्योंकि यह तनाव और विवाद का कारण बन सकता है

    कांच से बनी वस्तुओं को भी राहु ग्रह से जोड़कर देखा जाता है इसलिए इन्हें भी इस दिन खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है साथ ही इस दिन किसी को उधार देना या लेना भी अशुभ माना जाता है क्योंकि इससे आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दिन पैसों से जुड़े निर्णय भी सोच समझकर लेने चाहिए और अनावश्यक खर्च या उधारी से बचना चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि बनी रहे कुल मिलाकर अक्षय तृतीया का दिन जितना शुभ माना जाता है उतना ही जरूरी है कि इस दिन सही और गलत खरीदारी के बारे में जागरूक रहा जाए ताकि इस पर्व का पूरा लाभ प्राप्त किया जा सके

  • शादी से लेकर गृह प्रवेश ,तक बिना मुहूर्त के, भी होते हैं शुभ कार्य जानिए अबूझ मुहूर्त के दिन

    शादी से लेकर गृह प्रवेश ,तक बिना मुहूर्त के, भी होते हैं शुभ कार्य जानिए अबूझ मुहूर्त के दिन


    नई दिल्ली । हिंदू परंपराओं में शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है लेकिन कुछ ऐसे विशेष समय भी होते हैं जब किसी पंचांग या ज्योतिषीय गणना की आवश्यकता नहीं होती और इन समयों को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है आम धारणा यह है कि यह योग केवल अक्षय तृतीया तक ही सीमित होता है लेकिन वास्तविकता यह है कि साल में कई ऐसे अवसर आते हैं जब बिना मुहूर्त देखे भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साल में लगभग साढ़े तीन दिन ऐसे माने जाते हैं जिन्हें स्वयंसिद्ध या अबूझ मुहूर्त कहा जाता है इन दिनों में ग्रह नक्षत्रों की स्थिति इतनी अनुकूल होती है कि किसी भी शुभ कार्य की सफलता के लिए अलग से मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती

    इन विशेष अवसरों में चैत्र नवरात्रि का पहला दिन, अक्षय तृतीया, विजयादशमी और एक आधा अतिरिक्त शुभ योग शामिल होता है इन दिनों को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है और धार्मिक दृष्टि से इन्हें अत्यधिक महत्व प्राप्त है

    इन अबूझ मुहूर्तों में विवाह जैसे बड़े मांगलिक कार्य विशेष रूप से किए जाते हैं क्योंकि माना जाता है कि इस समय किया गया विवाह स्थायी और सुखद होता है खासकर उन जोड़ों के लिए जिनकी कुंडली का मिलान कठिन होता है उनके लिए यह दिन वरदान के समान माने जाते हैं

    इसके अलावा गृह प्रवेश, नए मकान की नींव रखना, सोना चांदी, वाहन या जमीन की खरीदारी जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी इन दिनों में शुभ माने जाते हैं व्यवसाय शुरू करना भी इस समय अत्यंत लाभकारी माना जाता है क्योंकि यह समय सफलता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है

    बच्चों से जुड़े संस्कार जैसे अन्नप्राशन, कर्णवेध, नामकरण, विद्यारंभ और मुंडन संस्कार भी इन शुभ दिनों में संपन्न किए जाते हैं धार्मिक मान्यता है कि इस समय किए गए सभी कार्यों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है और उन्हें अक्षय पुण्य प्राप्त होता है

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार अबूझ मुहूर्त का अर्थ है ऐसा समय जो स्वयं में पूर्ण रूप से शुभ हो और जिसमें किसी विशेष गणना की आवश्यकता न हो इन दिनों को इतना शुभ माना जाता है कि कोई भी कार्य बिना बाधा के सफल होने की संभावना अधिक रहती है कुल मिलाकर यह मान्यता भारतीय संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है जहां समय को केवल कैलेंडर नहीं बल्कि शुभ और अशुभ ऊर्जा के आधार पर भी देखा जाता है

  • बंगाल में बदलाव की हुंकार सीएम मोहन यादव बोले जंगलराज से मुक्ति दिलाएगी भाजपा

    बंगाल में बदलाव की हुंकार सीएम मोहन यादव बोले जंगलराज से मुक्ति दिलाएगी भाजपा

    कोलकाता/भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान कोलकाता में भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में जोरदार चुनाव प्रचार किया। उन्होंने कमरहाटी क्षेत्र के वार्ड 24 और 112 में घर घर पहुंचकर लोगों से मुलाकात की और दुकानों पर जाकर आम नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में बदलाव और विकास के नाम पर भाजपा को समर्थन देने की अपील की।

    कोलकाता में जनसंपर्क अभियान के दौरान डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अब पश्चिम बंगाल की जनता ठहराव नहीं बल्कि विकास चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य विकास की दौड़ में पीछे छूटता जा रहा है जबकि देश के अन्य राज्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार बंगाल को फिर से प्रगति के रास्ते पर लाने के लिए भाजपा की सरकार बनना जरूरी है।

    उन्होंने कहा कि बंगाल अब जंगलराज से मुक्ति चाहता है और यहां की जनता बदलाव के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आगामी चुनाव में जनता प्रचंड बहुमत से भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में लाने का मन बना चुकी है। उन्होंने भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल को विकास और समृद्धि का प्रतीक बताते हुए लोगों से इसे चुनने का आग्रह किया।

    इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का भी जिक्र किया और कहा कि देश के कई राज्यों में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। मध्यप्रदेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी विकास की गति लगातार बढ़ी है और इसी मॉडल को बंगाल में भी लागू किया जा सकता है।

    जनसंपर्क के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय नागरिकों की समस्याएं भी सुनीं और भरोसा दिलाया कि भाजपा की सरकार बनने पर जनकल्याण योजनाओं को तेजी से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना ही उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए मजबूत और स्थिर सरकार जरूरी है।

    डॉ. मोहन यादव का यह दौरा दो दिनों का बताया जा रहा है जिसमें वे विभिन्न क्षेत्रों में जनसभाएं और संपर्क अभियान चला रहे हैं। राजनीतिक रूप से यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके जरिए भाजपा बंगाल में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

  • प्रदर्शन पड़ा भारी ,केन बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध, में 50 लोगों पर केस दर्ज

    प्रदर्शन पड़ा भारी ,केन बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध, में 50 लोगों पर केस दर्ज


    छतरपुर । मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। इस मामले में यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार समेत करीब 50 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कार्रवाई के बाद इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

    जानकारी के अनुसार ग्राम ढोड़न में परियोजना के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा था जहां स्थिति उस समय बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान शासकीय कार्य में बाधा डाली गई कर्मचारियों के साथ अभद्रता की गई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। इन आरोपों के आधार पर बमीठा थाने में गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है।

    बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई की शुरुआत चंद्रनगर रेंजर की शिकायत के बाद हुई। मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह वीडियो कथित तौर पर अभिषेक परमार की ओर से अपलोड किया गया था जिसके आधार पर पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों की पहचान शुरू की। अब तक 15 से 20 लोगों की पहचान की जा चुकी है और आगे भी जांच जारी है।

    बमीठा थाना प्रभारी वाल्मीकि चौबे के मुताबिक वन परिक्षेत्र अधिकारी राजेंद्र तिवारी ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। FIR में सरकारी कर्मचारी पर हमला शासकीय कार्य में बाधा डालना और लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3 (1) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

    पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे भी आरोपियों की पहचान की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में है और इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

    यह मामला अब सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि राजनीतिक रंग भी लेता नजर आ रहा है। एक ओर जहां प्रशासन इसे कानून के उल्लंघन का मामला बता रहा है वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी इसे अपने अधिकारों की आवाज बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

  • भारत में बढ़ी चीतों की संख्या…… दक्षिण अफ्रीका से बेंगलुरु पहुंचे 4 नए मेहमान

    भारत में बढ़ी चीतों की संख्या…… दक्षिण अफ्रीका से बेंगलुरु पहुंचे 4 नए मेहमान


    बेंगलुरु।
    भारत (India) में चीतों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है. दक्षिण अफ्रीका (South Africa) से चार और चीतों को भारत लाया गया है. ये सभी चीते सुरक्षित तरीके से बेंगलुरु पहुंचे चुके हैं और उन्हें कर्नाटक (Karnataka) के बैनरघट्टा बायोलॉजिकल पार्क (Bannerghatta Biological Park) में रखा जाएगा. यह कदम राज्य में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने और लोगों में जैव-विविधता के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से उठाया गया है.

    अधिकारियों के मुताबिक, चीतों को विशेष निगरानी के बीच लाया गया है. फिलहाल वन विभाग और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर रख रही है. शुरुआती जांच के बाद सभी चीतों को निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत निगरानी में रखा गया है, जिससे नए वातावरण में उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।


    कर्नाटक के वन मंत्री ने दिए ये निर्देश

    कर्नाटक के वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि जलवायु और पर्यावरण में बदलाव के कारण चीतों को किसी प्रकार का तनाव या स्वास्थ्य संबंधी समस्या न हो. उन्होंने कहा कि सभी चीतों को कम से कम 30 दिनों के लिए क्वारंटीन में रखा जाएगा. इस दौरान उन्हें निर्धारित आहार दिया जाएगा और किसी भी संक्रमण या बीमारी की पूरी जांच की जाएगी।

    वन मंत्री ने यह भी कहा कि चीतों को उनके नए आवास में छोड़ने से पहले सभी आवश्यक मेडिकल परीक्षण पूरे किए जाएंगे. सुरक्षा और देखभाल में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

    कर्नाटक में चीतों को कहा जाता है ‘शिवंगी’
    गौरतलब है कि कर्नाटक में कभी चीतों को स्थानीय रूप से ‘शिवंगी’ कहा जाता था. हालांकि यह प्रजाति दशकों पहले राज्य के जंगलों से विलुप्त हो चुकी थी. अब चीतों की वापसी को वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.

  • भारत श्रीलंका रिश्तों में नया अध्याय उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन दो दिवसीय यात्रा पर

    भारत श्रीलंका रिश्तों में नया अध्याय उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन दो दिवसीय यात्रा पर


    नई दिल्ली ।
    भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 19 और 20 अप्रैल 2026 को दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर श्रीलंका जाएंगे। यह दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह उपराष्ट्रपति के रूप में उनका पहला द्विपक्षीय श्रीलंका दौरा होगा और इससे दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    इस दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और प्रधानमंत्री डॉ हरिनी अमरसूर्या से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वह अन्य वरिष्ठ नेताओं अधिकारियों और श्रीलंका में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी संवाद करेंगे।

    भारत और श्रीलंका के संबंध ऐतिहासिक सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद मजबूत रहे हैं। श्रीलंका भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” और “विजन महासागर” नीति का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में यह दौरा हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने का अवसर प्रदान करेगा।

    इस बीच वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव विशेषकर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष की स्थिति ने तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसका असर श्रीलंका पर भी पड़ा जहां ईंधन संकट की स्थिति बनने लगी थी। ऐसे समय में भारत ने आगे बढ़कर मदद करते हुए 38 000 मीट्रिक टन ईंधन की आपूर्ति की जिससे श्रीलंका को राहत मिली।

    भारत की इस सहायता के लिए श्रीलंका के नेताओं ने आभार व्यक्त किया। सांसद नमल राजपक्षे ने भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” नीति की सराहना करते हुए कहा कि भारत संकट के समय हमेशा श्रीलंका के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने श्रीलंका सरकार को भारत की आर्थिक नीतियों विशेष रूप से फ्यूल टैक्स एडजस्टमेंट मॉडल को अपनाने की सलाह भी दी।

    वहीं राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने भी भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनकी प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत हुई थी जिसमें उन्होंने ईंधन संकट की स्थिति साझा की थी और भारत ने तुरंत सहायता उपलब्ध कराई। कुल मिलाकर उपराष्ट्रपति का यह दौरा न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह दोनों देशों के बीच सहयोग विश्वास और साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

  • दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में एक पायदान नीचे खिसका भारत, छठे स्थान पर पहुंचा

    दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में एक पायदान नीचे खिसका भारत, छठे स्थान पर पहुंचा


    नई दिल्ली।
    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund.- IMF) ने दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं (World Economies) को लेकर नए अनुमान जारी किए हैं। इन ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत (India) डॉलर के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में एक पायदान नीचे खिसक कर छठे स्थान पर आ गया है और ब्रिटेन फिर से भारत से आगे निकल गया है। इससे पहले भारत पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, लेकिन अब वह छठे स्थान पर आ गया है। हालांकि, वास्तविक विकास दर के मामले में भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।


    क्या हुआ है बदलाव?

    2024 की स्थिति: भारत 5वें स्थान पर था। भारत की जीडीपी 3.76 ट्रिलियन डॉलर थी, जबकि ब्रिटेन की जीडीपी 3.7 ट्रिलियन डॉलर थी। यानी भारत ब्रिटेन से आगे था।

    2025 (पिछले साल) की स्थिति: भारत की जीडीपी बढ़कर 3.92 ट्रिलियन डॉलर हो गई, लेकिन ब्रिटेन की जीडीपी भी तेजी से बढ़कर 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। इसी वजह से ब्रिटेन ने भारत को पछाड़ दिया और भारत छठे नंबर पर आ गया।


    मौजूदा वैश्विक रैंकिंग इस प्रकार है (2026 अनुमान):

    अमेरिका
    चीन
    जर्मनी
    जापान
    यूके
    भारत


    भारत के पिछड़ने के दो मुख्य कारण क्या हैं?

    भले ही भारत तेजी से विकास कर रहा है, लेकिन डॉलर में गिनती करने पर दो कारणों से भारत की रैंक गिरी है।
    रुपये का कमजोर होना: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर हुआ है। जब हम अपनी कमाई (जो रुपये में है) को मजबूत डॉलर में बदलते हैं, तो वह कम हो जाती है।
    बेस ईयर में बदलाव: जीडीपी को मापने के लिए इस्तेमाल होने वाले आधार वर्ष में बदलाव के कारण भी आंकड़ों पर यह असर पड़ा है।


    रुपये और डॉलर का गणित

    IMF के आंकड़ों के अनुसार रुपये की स्थिति कुछ इस तरह रही है।
    2024: 1 डॉलर = 84.57 रुपये
    2025: 1 डॉलर = 88.48 रुपये (रुपया कमजोर हुआ)
    इस साल (2026) का अनुमान: 1 डॉलर = 92.59 रुपये (रुपया और कमजोर हो सकता है)

    इसके बिल्कुल उलट, ब्रिटेन की मुद्रा (ब्रिटिश पाउंड) डॉलर के मुकाबले मजबूत हुई है। इसी करेंसी एक्सचेंज के खेल में ब्रिटेन आगे निकल गया।

    यह समझना बहुत जरूरी है कि भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। अगर हम डॉलर के बजाय अपने रुपयों में बात करें, तो हमारी अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से बढ़ रही है:

    2024 में जीडीपी 318 लाख करोड़ रुपये थी। 2025 में यह 9% बढ़कर लगभग 347 लाख करोड़ रुपये हो गई। इस साल इसके 11% बढ़कर 385 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। यानी देश के अंदर विकास हो रहा है, लेकिन डॉलर के महंगा होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी वैल्यू कम दिख रही है।

    भविष्य को लेकर क्या उम्मीदें हैं?
    सरकार को उम्मीद थी कि भारत 2025-26 तक जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, लेकिन रुपये की कमजोरी के कारण अब इसके लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। इस साल भी भारत के छठे स्थान पर ही रहने की उम्मीद है। यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि रुपये और डॉलर का रेट क्या रहता है।


    विकास की कहानी बरकरार, भविष्य उज्ज्वल

    इस गिरावट के बावजूद IMF ने भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ फोरकास्ट बढ़ा दी है। FY27 के लिए 6.5% वृद्धि का अनुमान है, जबकि घरेलू अनुमान FY26 में 7.4% तक हैं। भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। 2021-2025 के बीच भारत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 8.56% रही, जो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ऊंची है।


    कब बनेगा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था?

    अनुमान है कि अगले साल भारत न सिर्फ ब्रिटेन को पछाड़ेगा, बल्कि जापान को भी पीछे छोड़ देगा। IMF के इन आंकड़ों को देखते हुए ऐसा लगता है कि भारत को नंबर 3 की कुर्सी तक पहुंचने के लिए 2031 तक का लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो भारत की कमाई (रुपये में) लगातार बढ़ रही है, लेकिन चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तुलना डॉलर में होती है और डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो गया है, इसलिए रैंकिंग में हम एक कदम पीछे हो गए हैं।

  • भारत का सबसे बड़ा Trade पार्टनर बना चीन… अमेरिका को छोड़ा पीछे

    भारत का सबसे बड़ा Trade पार्टनर बना चीन… अमेरिका को छोड़ा पीछे


    नई दिल्ली।
    चीन (China), अमेरिका (America) को पीछे छोड़कर 2025-26 में भारत (India) का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार (Largest Trading Partner) बन गया है। उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस दौरान चीन के साथ देश का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया। अमेरिका 2024-25 तक लगातार चार वर्षों तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था।


    व्यापार घाटा भी रिकॉर्ड स्तर पर

    चीन 2013-14 से 2017-18 तक और फिर 2020-21 में भी भारत का शीर्ष व्यापारिक साझेदार रहा। चीन से पहले यूएई देश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। पिछले वित्त वर्ष के दौरान चीन को भारत का निर्यात 36.66 फीसदी बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 16 फीसदी बढ़कर 131.63 अरब डॉलर रहा। व्यापार घाटा 2025-26 में बढ़कर 112.16 अरब डॉलर के अब तक के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो 2024-25 में 99.2 अरब डॉलर था।


    व्यापार संतुलन में बदलाव

    2025-26 में अमेरिका को निर्यात मामूली रूप से 0.92 प्रतिशत बढ़कर 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 15.95 फीसदी बढ़कर 52.9 अरब डॉलर हो गया। व्यापार अधिशेष 2024-25 के 40.89 अरब डॉलर से घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया। जिन प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ भारत का निर्यात घटा है, उनमें नीदरलैंड, ब्रिटेन, सिंगापुर, बांग्लादेश, सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका और मलयेशिया शामिल हैं। जिन प्रमुख देशों के साथ 2025-26 में आयात बढ़ा है, उनमें रूस, इराक, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, कतर और ताइवान शामिल हैं।

  • जांच खत्म करे अमेरिका…. भारत ने अतिरिक्त उत्पादन के आरोपों को किया खारिज

    जांच खत्म करे अमेरिका…. भारत ने अतिरिक्त उत्पादन के आरोपों को किया खारिज


    नई दिल्ली।
    भारत (India) ने अमेरिका (America) के व्यापार प्रतिनिधित (यूएसटीआर-USTR) की ओर से लगाए गए आरोपों को सख्ती के साथ खारिज किया। उन्होंने भारत समेत कई देशों पर अतिरिक्त उत्पादन (Excess Production) और औद्योगिक असंतुलन (Industrial Imbalance) का आरोप लगाया था। भारत ने कहा कि जांच शुरू करने वाले नोटिस में इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस कारण नहीं दिया गया है।

    भारत ने अमेरिका से अनुरोध किया है कि वह यह निष्कर्ष निकाले कि भारत ने कोई नकारात्मक काम नहीं किया है और उसके खिलाफ जो जांच चल रही है, उसे समाप्त कर दे। यह बात भारत सरकार ने अपने जवाब में यूएसटीआर को बताई।

    11 मार्च को अमेरिका ने अपने व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ जांच शुरू करने की घोषणा की। इनमें भारत, चीन, जापान और यूरोपीय संघ शामिल हैं। इस जांच का उद्देश्य उन ‘अनुचित विदेशी नीतियों या तरीकों’ को देखना और उन पर कार्रवाई करना है, जिनसे अमेरिकी विनिर्माण उद्योग को नुकसान होता है।

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर ने जांच शुरू करने की घोषणा की। यह जांच 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301(बी) के तहत की गई है। इस जांच में अलग-अलग देशों की ‘नीतियों, कार्यों और तरीकों’ की जांच की जाएगी। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि क्या उन देशों में उद्योगों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता है और विनिर्माण क्षेत्र में असंतुलन है।


    जांच के दायर में कौन-कौन देश?

    इस जांच के दायरे में आने वाली अर्थव्यवस्थाएं हैं- बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन, यूरोपीय संघ, भारत, इंडोनेशिया, जापान, कोरिया, मलयेशिया, मेक्सिको, नॉर्वे, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम।


    अमेरिकी जांच पर भारत ने क्या कहा?

    अमेरिका के जांच नोटिस के जवाब में भारत सरकार ने कहा कि वह इस नोटिस में लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह और सख्ती से खारिज करती है। भारत ने कहा कि यह जांच नोटिस सिर्फ बड़े आर्थिक आंकड़ों पर आधारित है। इसमें भारत सरकार की किसी खास नीति या काम का नाम नहीं बताया गया है, जिसे गलत या भेदभावपूर्ण कहा जा सके या जो अमेरिका के व्यापार को नुकसान पहुंचाता हो, जैसा कि कानून की धारा 301(b) में जरूरी है।

    भारत ने कहा है कि नोटिस में इन आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस कारण या शुरुआती सबूत नहीं दिए गए हैं। यह दावा कि भारत के बड़े उद्योगों में ‘जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता’ है और इससे अमेरिका के साथ व्यापार में अधिक लाभ (ट्रेड सरप्लस) होता है, उसके समर्थन में कोई प्रमाण नहीं दिया गया है।

    भारत ने कहा कि यह जांच 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 और 302 के नियमों के अनुसार सही तरीके से शुरू नहीं की गई है। इसलिए भारत ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि से अनुरोध किया है कि वह भारत के पक्ष में फैसला दे, जांच को खत्म करे और इसे तुरंत बंद कर दे।

    भारत ने आगे कहा है कि चूंकि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू हो चुकी है, इसलिए किसी भी व्यापारिक चिंता को इसी बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए। भारत ने यह भी कहा कि ऐसे मुद्दों का समाधान एकतरफा कदमों से नहीं, बल्कि आपसी बातचीत के ढांचे के भीतर होना चाहिए।