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  • ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत का कड़ा संदेश, भारतीय नाविक की मौत पर ईरान के डिप्टी राजदूत तलब, होर्मुज में बढ़ा सैन्य और समुद्री संकट

    ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत का कड़ा संदेश, भारतीय नाविक की मौत पर ईरान के डिप्टी राजदूत तलब, होर्मुज में बढ़ा सैन्य और समुद्री संकट

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ रहे सैन्य तनाव के बीच भारत ने अपने एक नागरिक की मौत के मामले में कड़ा राजनयिक कदम उठाया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मृत्यु के बाद भारत सरकार ने ईरान के डिप्टी राजदूत को तलब कर अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए भारतीय नागरिकों और समुद्री जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री क्षेत्र में लगातार सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं। तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों पर हमलों की घटनाओं ने वैश्विक समुद्री परिवहन को प्रभावित किया है। इसी दौरान एक हमले में भारतीय चालक दल का सदस्य जान गंवा बैठा, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए। इस घटना के बाद भारत ने राजनयिक माध्यमों से अपना विरोध दर्ज कराया और पूरे मामले पर विस्तृत जानकारी मांगी है।

    भारत ने स्पष्ट किया कि किसी भी संघर्ष की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। भारतीय नागरिकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से ईरान के प्रतिनिधि को तलब कर घटना पर आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा गया। इससे पहले भी क्षेत्र में भारतीय जहाजों से जुड़ी घटनाओं पर भारत संबंधित देशों के समक्ष अपनी चिंता दर्ज करा चुका है।

    दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं। विभिन्न क्षेत्रों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं। कई देशों ने समुद्री सुरक्षा को लेकर अपने जहाजों और नागरिकों के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह जारी की है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    रणनीतिक दृष्टि से होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक कच्चे तेल और गैस की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी उसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

    भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि सभी पक्ष संयम बरतें और विवादों का समाधान संवाद तथा कूटनीतिक माध्यमों से किया जाए। सरकार का मानना है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक है। इसी कारण भारत क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अपने नागरिकों तथा समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।

    भारतीय नाविक की मौत के बाद उठाया गया यह राजनयिक कदम दर्शाता है कि विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भारत किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। आने वाले दिनों में क्षेत्र की परिस्थितियों और संबंधित देशों की प्रतिक्रिया के आधार पर आगे की कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी रणनीति तय की जा सकती है। फिलहाल पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और बढ़ा दी है।

  • ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर, बढ़ा आयात खर्च, जून में व्यापार घाटा 30.4 अरब डॉलर पर पहुंचा

    ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर, बढ़ा आयात खर्च, जून में व्यापार घाटा 30.4 अरब डॉलर पर पहुंचा


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारत का आयात बिल बढ़ गया है। इसका सीधा असर देश के व्यापार घाटे पर पड़ा है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर करीब 30.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहा और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो भारत पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

    महंगे तेल ने बढ़ाया आयात खर्च
    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश के आयात खर्च पर पड़ता है। जून महीने में कच्चे तेल का आयात 40 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 19.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके पीछे मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    इसके अलावा खाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान और मशीनरी के आयात में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके चलते जून में भारत का कुल आयात बढ़कर 70.8 अरब डॉलर हो गया।

    निर्यात बढ़ा, लेकिन घाटे पर नहीं लगी लगाम
    भारत के लिए राहत की बात यह रही कि जून में निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई। देश का कुल निर्यात करीब 40.4 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है।

    इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और रसायनों की विदेशी मांग मजबूत रही। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगातार सुधार देखा गया, वहीं हीरे और आभूषणों के निर्यात में भी बढ़ोतरी हुई। हालांकि, आयात में हुई तेज वृद्धि के मुकाबले निर्यात की रफ्तार कम रही, जिसके कारण व्यापार घाटा बढ़ गया।

    आम लोगों पर क्या हो सकता है असर?
    व्यापार घाटे में बढ़ोतरी का असर केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता। यदि कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियां अपने उत्पादों के दाम बढ़ा सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इसी वजह से सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    आगे की चुनौती और सरकार की रणनीति
    आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो भारत का आयात बिल ऊंचा बना रह सकता है। इससे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। सरकार फिलहाल निर्यात बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों में जुटी है। इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में बढ़ता निर्यात सकारात्मक संकेत दे रहा है।

    हालांकि, भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए वैश्विक बाजार की स्थिति अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक हालात देश की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर विवाद की खबरों को सर्जियो गोर ने बताया गलत, बोले- बातचीत सकारात्मक दिशा में जारी

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर विवाद की खबरों को सर्जियो गोर ने बताया गलत, बोले- बातचीत सकारात्मक दिशा में जारी


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर चल रही अटकलों पर अब अमेरिकी पक्ष की ओर से सफाई सामने आई है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने उन खबरों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता अटक गया है या किसी पक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया है।

    सर्जियो गोर ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ऐसी खबरें गलत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका दोनों ही व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और हाल की बातचीत सकारात्मक रही है।

    सर्जियो गोर ने कहा- किसी पक्ष ने डील रिजेक्ट नहीं की
    अमेरिकी राजदूत ने एक्स पर लिखा, “फेक न्यूज अलर्ट! किसी ने कुछ भी रिजेक्ट नहीं किया है।” उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक माहौल में आगे बढ़ रही है और ट्रेड डील को पूरा करने के लिए दोनों पक्ष सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि संबंधित पक्षों को इससे बेहतर काम करना चाहिए।

    भारत सरकार ने भी रिपोर्टों को बताया भ्रामक
    भारत सरकार ने भी उन दावों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि नई दिल्ली व्यापार समझौते में देरी कर रही है या पीछे हट गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इन दावों को झूठा, आधारहीन और भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता लगातार जारी है और समझौते की दिशा में काफी प्रगति हुई है।

    गोयल ने यह भी कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील से दूरी नहीं बनाई है और न ही जानबूझकर इसमें देरी की जा रही है। उन्होंने रॉयटर्स की रिपोर्ट में किए गए दावों को पूरी तरह गलत बताया।

    क्या थी रिपोर्ट में कही गई बात?
    इससे पहले समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत और अमेरिका बेहतर शर्तों की तलाश में व्यापार समझौते को लेकर सहमति तक नहीं पहुंच सके हैं।

    रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए किसी ऐसे समझौते में जल्दबाजी नहीं करना चाहता, जिससे घरेलू स्तर पर नुकसान हो। इसमें यह भी दावा किया गया था कि दोनों देश अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेसन ग्रीयर की भारत यात्रा के दौरान अंतरिम समझौते की शर्तों को अंतिम रूप देने में सफल नहीं हो पाए।

    रिपोर्ट के अनुसार, एक भारतीय अधिकारी ने दावा किया था कि अमेरिका की ओर से कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है। इनमें चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को लेकर टैरिफ लाभ और समझौते के बाद नए अमेरिकी शुल्कों से सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल बताए गए थे।

    संवेदनशील क्षेत्रों पर भारत का रुख
    रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि भारत कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करना चाहता। भारत का जोर ऐसे व्यापार समझौते पर है, जो दोनों देशों के हितों के अनुरूप हो। फिलहाल भारत और अमेरिका दोनों की ओर से यही संकेत दिए गए हैं कि बातचीत जारी है और ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

  • सेवा और निष्ठा की विरासत का उत्सव सीआरपीएफ स्थापना दिवस पर सरकार ने देशभर के नागरिकों को दिया भागीदारी का अवसर

    सेवा और निष्ठा की विरासत का उत्सव सीआरपीएफ स्थापना दिवस पर सरकार ने देशभर के नागरिकों को दिया भागीदारी का अवसर


    नई दिल्ली । भारत की आंतरिक सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल माने जाने वाले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सीआरपीएफ के 88वें स्थापना दिवस को इस वर्ष विशेष अंदाज में मनाया जाएगा। भारत सरकार ने इस अवसर पर देशभर के नागरिकों को सीआरपीएफ के शौर्य समर्पण और सेवा भावना को सम्मान देने के लिए विभिन्न ऑनलाइन प्रतियोगिताओं और जनभागीदारी अभियानों से जोड़ने का फैसला किया है। सरकार ने सभी आयु वर्ग के लोगों से अपील की है कि वे इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें और देश की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करें।

    भारत सरकार के नागरिक सहभागिता मंच माई जीओवी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस विशेष अभियान की घोषणा करते हुए नागरिकों को सेवा और निष्ठा की गौरवशाली विरासत विषय पर आधारित पेंटिंग प्रतियोगिता क्विज शॉर्ट वीडियो प्रतियोगिता और नागरिक प्रतिज्ञा अभियान में भाग लेने का निमंत्रण दिया है। इच्छुक प्रतिभागी माई जीओवी पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण कर इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकते हैं।

    सरकार ने अपने संदेश में कहा है कि सीआरपीएफ केवल भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ही नहीं बल्कि देश की एकता अखंडता और आंतरिक सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तंभ भी है। वर्ष 1939 में स्थापित इस बल ने सेवा और निष्ठा के अपने मूल मंत्र को निभाते हुए हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित की है। चाहे आतंकवाद के खिलाफ अभियान हो वामपंथी उग्रवाद से मुकाबला हो कानून व्यवस्था बनाए रखना हो शांतिपूर्ण चुनाव कराना हो या प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्य करना हो सीआरपीएफ ने हर मोर्चे पर अपनी दक्षता और बहादुरी का परिचय दिया है।

    सीआरपीएफ की विशेष इकाइयों रैपिड एक्शन फोर्स और कोबरा ने भी समय समय पर कठिन अभियानों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। देश के दुर्गम इलाकों से लेकर संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों तक बल के जवान दिन रात राष्ट्र की सुरक्षा में तैनात रहते हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करते हैं।

    इस गौरवशाली यात्रा के दौरान सीआरपीएफ के 2270 से अधिक वीर जवान देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। उनका साहस समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सरकार का मानना है कि स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिताएं केवल प्रतिभा प्रदर्शन का मंच नहीं बल्कि नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति सुरक्षा और सेवा के मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी बनेंगी।

    सरकार ने सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाकर सीआरपीएफ के वीर जवानों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें। साथ ही अपनी रचनात्मकता और ज्ञान के माध्यम से उस बल के प्रति सम्मान प्रकट करें जिसने दशकों से भारत की एकता संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

  • कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत में राष्ट्रीय शोक नई दिल्ली मुंबई और केरल में आधा झुका तिरंगा

    कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत में राष्ट्रीय शोक नई दिल्ली मुंबई और केरल में आधा झुका तिरंगा


    नई दिल्ली । कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर भारत ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए पूरे देश में एक दिन का राष्ट्रीय शोक मनाया। भारत सरकार के निर्देश पर सोमवार को नई दिल्ली मुंबई केरल सहित देशभर के उन सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया जहां नियमित रूप से तिरंगा फहराया जाता है। इसके साथ ही राष्ट्रीय शोक के सम्मान में सभी आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम भी स्थगित कर दिए गए। भारत और कतर के दशकों पुराने मजबूत संबंधों को देखते हुए इस निर्णय को दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और मित्रता का प्रतीक माना जा रहा है।

    कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का रविवार को निधन हो गया था। उनके निधन की सूचना मिलते ही भारत सरकार ने राष्ट्रीय शोक की घोषणा की। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन पर तिरंगा आधा झुका रहा जबकि मुंबई के मंत्रालय और केरल के विभिन्न सरकारी भवनों पर भी राष्ट्रीय ध्वज सम्मान स्वरूप आधा झुकाया गया। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार पूरे देश में ध्वज संहिता का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए।

    केरल में इस शोक का विशेष महत्व देखने को मिला क्योंकि राज्य का बड़ा प्रवासी समुदाय लंबे समय से कतर और अन्य खाड़ी देशों में कार्यरत है। कतर के साथ केरल के आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध काफी मजबूत माने जाते हैं। राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि अपने अधिकार क्षेत्र के प्रत्येक सरकारी कार्यालय और संस्थान में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें और राष्ट्रीय शोक से जुड़े सभी प्रोटोकॉल का पालन कराया जाए।

    विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शोक के दौरान पूरे भारत में उन सभी सरकारी और सार्वजनिक भवनों पर तिरंगा आधा झुका रहेगा जहां नियमित रूप से ध्वज फहराया जाता है। साथ ही इस दिन किसी भी प्रकार के आधिकारिक सांस्कृतिक या मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे ताकि दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त किया जा सके।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शेख हमद दूरदर्शी नेतृत्व वाले ऐसे शासक थे जिन्होंने कतर को विकास समृद्धि और वैश्विक पहचान की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत का सच्चा मित्र बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती मिली और सहयोग के अनेक नए रास्ते खुले।

    जानकारी के अनुसार केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भारत सरकार की ओर से शोक संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए जल्द ही कतर जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि शेख हमद बिन खलीफा अल थानी ने वर्ष 1995 से 2013 तक कतर का नेतृत्व किया और बाद में सत्ता अपने पुत्र शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सौंप दी। उनके कार्यकाल को कतर के आधुनिक विकास और वैश्विक प्रभाव के विस्तार का महत्वपूर्ण दौर माना जाता है।

  • ईरान अमेरिका तनाव के बीच भारत तैयार कच्चे तेल एलपीजी और गैस का पर्याप्त भंडार संकट से देगा सुरक्षा

    ईरान अमेरिका तनाव के बीच भारत तैयार कच्चे तेल एलपीजी और गैस का पर्याप्त भंडार संकट से देगा सुरक्षा


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में एक बार फिर बढ़ते भू राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर यह है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के मामले में पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में खड़ा है। ईरान और अमेरिका के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव तथा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने समय रहते आवश्यक तैयारियां कर ली हैं। इसी कारण संभावित आपूर्ति संकट का असर फिलहाल सीमित रहने की उम्मीद है।

    हाल के घटनाक्रम में अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने 11 जुलाई को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने का ऐलान किया। इसके बाद इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई। यह समुद्री रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का प्रमुख माध्यम है इसलिए इसके प्रभावित होने का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत दिखाई देने लगा।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो सितंबर और अक्टूबर के दौरान कच्चे तेल की आपूर्ति लागत बढ़ सकती है। हालांकि भारत ने पहले से ही अगस्त तक के लिए कच्चे तेल और एलपीजी के आयात की व्यवस्था सुरक्षित कर ली है। यही वजह है कि निकट भविष्य में देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में कुछ चुनौतियां जरूर सामने आ सकती हैं लेकिन उन्हें भी प्रभावी तरीके से संभाला जा सकता है।

    मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड करीब पांच प्रतिशत की बढ़त के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी लगभग पांच प्रतिशत बढ़कर 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतें 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच सकती हैं।

    हालांकि इस बार वैश्विक बाजार में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि गैर ओपेक देशों ने अपना उत्पादन पहले ही बढ़ा दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति का दबाव कुछ हद तक कम हुआ है और संभावित कमी की भरपाई करने की क्षमता भी बनी हुई है। यही कारण है कि कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका के बावजूद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर स्थिति पहले जैसी गंभीर नहीं मानी जा रही।

    भारत सरकार भी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क बनी हुई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि देश के पास लगभग 60 दिनों के लिए कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है जबकि एलपीजी का करीब 45 दिनों का स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा वैकल्पिक आयात स्रोतों और रणनीतिक भंडारण की व्यवस्था भी लगातार मजबूत की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में आम लोगों और उद्योगों पर असर कम से कम पड़े।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जो काम किया है उसका फायदा अब दिखाई दे रहा है। यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबा भी खिंचता है तो भारत के पास स्थिति से निपटने के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत तैयारी मौजूद है। यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश की ऊर्जा सुरक्षा फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है।

  • 8वें वेतन आयोग से जुड़े कर्मचारियों के लिए राहत, डेटा जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई तक बढ़ी, मंत्रालयों और विभागों को मिला अतिरिक्त समय

    8वें वेतन आयोग से जुड़े कर्मचारियों के लिए राहत, डेटा जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई तक बढ़ी, मंत्रालयों और विभागों को मिला अतिरिक्त समय


    नई दिल्ली ।
    आठवें वेतन आयोग की प्रक्रिया से जुड़े केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक अपडेट सामने आया है। आयोग ने केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों को कर्मचारी एवं पेंशनर संबंधी आवश्यक जानकारी जमा करने के लिए अतिरिक्त समय प्रदान किया है। पहले यह प्रक्रिया 30 जून तक पूरी की जानी थी, लेकिन अब इसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई है। इस निर्णय से विभिन्न विभागों को आवश्यक आंकड़ों का संकलन और सत्यापन पूरा करने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।

    आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद से ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच नई वेतन एवं पेंशन सिफारिशों को लेकर लगातार उत्सुकता बनी हुई है। आयोग द्वारा मांगी जा रही जानकारी भविष्य की वेतन संरचना, भत्तों और पेंशन संबंधी सिफारिशों के लिए आधार तैयार करेगी। ऐसे में सभी मंत्रालयों और विभागों से सटीक तथा अद्यतन आंकड़े उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    आयोग के अनुसार कई मंत्रालयों और विभागों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक सूचनाओं का संकलन पूरा नहीं होने की जानकारी दी थी। विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से कर्मचारी एवं पेंशनर संबंधी आंकड़ों को अंतिम रूप देने में अधिक समय की आवश्यकता महसूस की गई। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने अंतिम तिथि को एक महीने के लिए आगे बढ़ाने का निर्णय लिया, ताकि सभी संबंधित विभाग निर्धारित प्रारूप में पूरी जानकारी उपलब्ध करा सकें।

    आयोग ने अपने निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया है कि सभी नोडल अधिकारी निर्धारित ऑनलाइन डेटा कलेक्शन पोर्टल के माध्यम से ही जानकारी अपलोड करेंगे। किसी भी प्रकार की भौतिक प्रति, ईमेल, एक्सेल शीट, पीडीएफ या अन्य माध्यम से भेजे गए दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। आयोग का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और एकरूप बनाए रखना है, जिससे आंकड़ों का विश्लेषण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

    डेटा संग्रह प्रक्रिया के तहत विभागों से पिछले तीन वर्षों के व्यय का विवरण, नियमित कर्मचारियों और पेंशनर्स की प्रोफाइल, विभिन्न श्रेणियों में कार्यरत मानव संसाधन की जानकारी तथा आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े आंकड़े भी मांगे गए हैं। इन सूचनाओं के आधार पर सरकारी कार्यबल की संरचना, सेवानिवृत्ति की प्रवृत्ति, वेतन व्यय और भविष्य की वित्तीय आवश्यकताओं का विस्तृत आकलन किया जाएगा। यही जानकारी आयोग की आगामी सिफारिशों के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय सीमा बढ़ाए जाने से आयोग की अंतिम रिपोर्ट पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। इसके बजाय यह कदम सुनिश्चित करेगा कि सभी विभागों से अधिक सटीक और व्यापक जानकारी प्राप्त हो सके। इससे आयोग को वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप वेतन, भत्तों और पेंशन से संबंधित सुझाव तैयार करने में सुविधा मिलेगी।

    आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ भविष्य में बड़ी संख्या में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने की उम्मीद है। ऐसे में डेटा संग्रह की यह प्रक्रिया पूरे आयोग के कार्य का महत्वपूर्ण चरण मानी जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि सभी संबंधित विभाग समय सीमा के भीतर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि आयोग अपनी समीक्षा प्रक्रिया को तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ाते हुए समय पर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कर सके।

  • EPFO की एमनेस्टी स्कीम 2026 से संस्थानों को बड़ी राहत, छह महीने में PF ट्रस्ट रिकॉर्ड नियमित कराने का मिला एकमुश्त अवसर

    EPFO की एमनेस्टी स्कीम 2026 से संस्थानों को बड़ी राहत, छह महीने में PF ट्रस्ट रिकॉर्ड नियमित कराने का मिला एकमुश्त अवसर

    नई दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने उन संस्थानों को बड़ी राहत देने के उद्देश्य से एमनेस्टी स्कीम 2026 लागू की है, जो अपने कर्मचारियों के भविष्य निधि का संचालन स्वयं के छूट प्राप्त पीएफ ट्रस्ट के माध्यम से करते हैं। इस विशेष योजना के तहत पात्र संस्थानों को छह महीने की अवधि में अपने ट्रस्ट की कानूनी स्थिति, रिकॉर्ड और आवश्यक दस्तावेजों को नियमों के अनुरूप नियमित कराने का एकमुश्त अवसर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य ऐसे ट्रस्टों को नियामकीय व्यवस्था के अनुरूप लाना है, जिनके पास आयकर कानून के तहत मान्यता तो है, लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि कानून के तहत औपचारिक छूट आदेश उपलब्ध नहीं है।

    यह योजना वित्त अधिनियम 2026 में किए गए संशोधनों के बाद लागू की गई है। नए प्रावधानों के अनुसार अब केवल उन्हीं भविष्य निधि ट्रस्टों को आयकर कानून के तहत मान्यता मिलेगी, जिन्हें कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम की धारा 17 के अंतर्गत विधिवत छूट प्राप्त होगी। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए EPFO ने यह विशेष योजना शुरू की है ताकि पात्र संस्थान समय रहते अपनी स्थिति को पूरी तरह कानूनी रूप से नियमित कर सकें।

    योजना का लाभ उन संस्थानों को मिलेगा, जो आयकर अधिनियम 1961 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त पीएफ ट्रस्ट का संचालन कर रहे हैं, लेकिन उनके पास केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी औपचारिक छूट आदेश नहीं है। यह योजना 29 जून 2026 से प्रभावी है और इसकी अवधि छह महीने निर्धारित की गई है। इस दौरान आवेदन करने वाले पात्र संस्थानों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का अवसर मिलेगा।

    EPFO ने योजना के लिए पात्र संस्थानों को दो श्रेणियों में विभाजित किया है। पहली श्रेणी में वे संस्थान शामिल हैं जो अपने ट्रस्ट का पूर्व प्रभाव से नियमितीकरण कराना चाहते हैं और वर्तमान में बिना औपचारिक छूट के नियमों का पालन कर रहे हैं या आगे भी उसी व्यवस्था में काम करना चाहते हैं। दूसरी श्रेणी में वे संस्थान हैं जो अपने ट्रस्ट का नियमितीकरण कराने के साथ भविष्य में भी सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत छूट प्राप्त संस्थान के रूप में कार्य जारी रखना चाहते हैं।

    इस योजना के तहत पात्र ट्रस्टों को उनके गठन की तारीख से निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक पूर्व प्रभाव से छूट और मान्यता प्रदान की जा सकती है। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के कुछ प्रावधानों में भी विशेष राहत दी गई है। इनमें न्यूनतम कर्मचारियों की संख्या, ट्रस्ट फंड की न्यूनतम सीमा तथा तीन वर्ष के पूर्व अनुपालन जैसी शर्तों में छूट शामिल है। इससे अनेक संस्थानों के लिए नियामकीय प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हो जाएगी।

    यदि किसी ट्रस्ट ने अपने कर्मचारियों के खातों में कानून के अनुरूप या उससे अधिक अंशदान और ब्याज जमा किया है, तो उससे संबंधित बकाया राशि, हर्जाना और ब्याज के लंबित मामलों को वापस लेने पर भी विचार किया जा सकता है। इसके साथ ही पहले जारी किए गए कुछ आदेशों को भी शून्य माना जा सकता है, जिससे पात्र संस्थानों को अतिरिक्त राहत मिलने की संभावना है।

    योजना का लाभ लेने के इच्छुक संस्थानों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन संबंधित EPFO क्षेत्रीय कार्यालय को ईमेल के माध्यम से भेजना होगा। आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज और वित्तीय अभिलेख प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। संस्थानों को अपने खातों का ऑडिट चार्टर्ड अकाउंटेंट से कराना होगा। यदि EPFO किसी विशेष या अनुपालन ऑडिट का निर्देश देता है, तो आवेदन जमा होने के तीन महीने के भीतर उसे पूरा करना आवश्यक होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना पात्र पीएफ ट्रस्टों के लिए अपने रिकॉर्ड नियमित करने, कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करने और भविष्य में नियामकीय जटिलताओं से बचने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है।

  • रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारत ने बढ़ाई रफ्तार, जून में 34 प्रतिशत उछाल के साथ ऊर्जा आयात रणनीति हुई और मजबूत

    रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारत ने बढ़ाई रफ्तार, जून में 34 प्रतिशत उछाल के साथ ऊर्जा आयात रणनीति हुई और मजबूत

    नई दिल्ली । भारत ने जून 2026 में रूस से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज करते हुए अपनी ऊर्जा आयात रणनीति को और मजबूत किया है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच भारत ने रूस से 4.5 अरब यूरो मूल्य का कच्चा तेल आयात किया, जो मई के मुकाबले 34 प्रतिशत अधिक है। इस बढ़ोतरी के साथ भारत चीन के बाद रूस के हाइड्रोकार्बन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध रूसी तेल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आयात लागत को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    ऊर्जा और स्वच्छ वायु पर शोध करने वाली संस्था की रिपोर्ट के अनुसार जून महीने में भारत के कुल रूसी जीवाश्म ईंधन आयात का सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का रहा। कुल 5.5 अरब यूरो के रूसी हाइड्रोकार्बन आयात में 83 प्रतिशत हिस्सेदारी केवल कच्चे तेल की रही, जिसकी कीमत 4.5 अरब यूरो आंकी गई। इससे स्पष्ट है कि भारत की ऊर्जा जरूरतों में रूसी कच्चे तेल का महत्व लगातार बना हुआ है।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत के कुल कच्चे तेल आयात में भी मासिक आधार पर 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान देश की कई प्रमुख रिफाइनरियों ने रूस से तेल खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां लागत और उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए रूसी आपूर्ति का अधिक उपयोग कर रही हैं।

    देश की सबसे बड़ी रिफाइनिंग इकाइयों में इस दौरान रूसी तेल की आपूर्ति में तेज वृद्धि देखने को मिली। जामनगर रिफाइनरी में रूस से आने वाले कच्चे तेल का आयात पिछले महीने की तुलना में 150 प्रतिशत बढ़ गया। वहीं पारादीप रिफाइनरी में यह वृद्धि 126 प्रतिशत रही। कोच्चि रिफाइनरी ने भी अपनी खरीद में 83 प्रतिशत का इजाफा किया, जबकि वाडिनार रिफाइनरी में रूसी तेल की आपूर्ति 45 प्रतिशत बढ़ी। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि प्रमुख रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल पर पहले से अधिक भरोसा जता रही हैं।

    भारत की बढ़ी हुई मांग का असर रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात पर भी दिखाई दिया। जून के दौरान रूस के कच्चे तेल के निर्यात की मात्रा में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अपेक्षाकृत कम रहने के कारण रूस की निर्यात आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो सकी। कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली दैनिक आय घटकर 348 मिलियन यूरो रह गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि अधिक मात्रा में निर्यात होने के बावजूद कम कीमतों ने राजस्व पर दबाव बनाए रखा।

    रूस के कुल जीवाश्म ईंधन निर्यात से होने वाली आय में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार निर्यात की मात्रा बढ़ने के बावजूद कुल दैनिक आय एक प्रतिशत घटकर 734 मिलियन यूरो रह गई। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव और मांग के संतुलन को दर्शाती है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कच्चे तेल के अलावा भारत ने रूस से 488 मिलियन यूरो मूल्य के तेल उत्पाद और 444 मिलियन यूरो का कोयला भी आयात किया। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार लगातार मजबूत बना हुआ है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यदि वैश्विक बाजार में कीमतें अनुकूल रहती हैं और आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और लागत प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद को प्राथमिकता देता रह सकता है।

  • AI रणनीति ने बदली IT कंपनी की तस्वीर, पहली तिमाही में 17% बढ़ा मुनाफा, 1.68 अरब डॉलर के नए ऑर्डर से मजबूत हुई भविष्य की कारोबारी संभावनाएं

    AI रणनीति ने बदली IT कंपनी की तस्वीर, पहली तिमाही में 17% बढ़ा मुनाफा, 1.68 अरब डॉलर के नए ऑर्डर से मजबूत हुई भविष्य की कारोबारी संभावनाएं

    नई दिल्ली । आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एलटीआईमाइंडट्री ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 1,466 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 1,254 करोड़ रुपये था। बेहतर आय और लगातार बढ़ती कारोबारी मांग ने कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती दी है।

    पहली तिमाही के दौरान कंपनी की परिचालन आय भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी। ऑपरेशन से प्राप्त राजस्व 17.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 11,608 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि एक वर्ष पहले यह 9,840.6 करोड़ रुपये था। पिछली तिमाही की तुलना में भी राजस्व में सुधार दर्ज किया गया, जिससे संकेत मिलता है कि कंपनी लगातार नए व्यवसाय हासिल करने और मौजूदा ग्राहकों से कारोबार बढ़ाने में सफल रही है।

    तिमाही के दौरान कंपनी को लगभग 1.68 अरब डॉलर के नए ऑर्डर प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 3.1 प्रतिशत अधिक हैं। वहीं पिछले बारह महीनों में कुल ऑर्डर बुक का मूल्य बढ़कर 6.65 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह वृद्धि बताती है कि कंपनी की सेवाओं की मांग वैश्विक ग्राहकों के बीच लगातार बनी हुई है और भविष्य के लिए उसकी कारोबारी स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है।

    कंपनी का कहना है कि इस प्रदर्शन के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधानों पर केंद्रित रणनीति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विभिन्न उद्योगों के ग्राहक अब AI तकनीक को तेजी से अपनाने की दिशा में निवेश कर रहे हैं, जिससे कंपनी को बड़े और दीर्घकालिक प्रोजेक्ट हासिल करने में मदद मिल रही है। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और ऑटोमेशन से जुड़े समाधान भी कंपनी की आय बढ़ाने में सहायक बने हैं।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक वेणु लाम्बू ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजे इस बात का संकेत हैं कि AI-केंद्रित रणनीति व्यावसायिक रूप से सकारात्मक परिणाम दे रही है। उनके अनुसार ग्राहक अब AI आधारित समाधानों से वास्तविक कारोबारी लाभ प्राप्त कर रहे हैं, जिसके कारण कंपनी को अधिक मूल्य वाले प्रोजेक्ट और नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाली तिमाहियों में भी यह रणनीति कंपनी की विकास यात्रा को गति देगी।

    मानव संसाधन के मोर्चे पर कंपनी में 30 जून तक कुल 87,886 कर्मचारी कार्यरत थे। पिछली तिमाही की तुलना में कर्मचारियों की संख्या में 64 की मामूली कमी दर्ज की गई। वहीं पिछले बारह महीनों की कर्मचारी त्याग दर 13.3 प्रतिशत पर स्थिर रही, जिससे संकेत मिलता है कि कार्यबल की स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है।

    हालांकि वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा है, लेकिन शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन अब भी दबाव में है। इस वर्ष अब तक शेयर में 33 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। पिछले एक वर्ष में भी निवेशकों को लगभग 24 प्रतिशत का नुकसान हुआ है, जबकि तीन वर्षों के दौरान शेयर करीब 19 प्रतिशत कमजोर हुआ है। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि मजबूत तिमाही नतीजे, बढ़ती ऑर्डर बुक और AI आधारित रणनीति आने वाले समय में कंपनी के शेयर प्रदर्शन को कितनी मजबूती दे पाते हैं।