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  • भारत अब रूस से नहीं खरीद पाएगा सस्ता तेल…. अमेरिका ने फिर लगाई पाबंदी

    भारत अब रूस से नहीं खरीद पाएगा सस्ता तेल…. अमेरिका ने फिर लगाई पाबंदी


    वाशिंगटन।
    ईरान युद्ध (Iran War) के बाद गहराए ईंधन संकट के बीच अमेरिका (America) ने रूसी तेल (Russian oil) खरीद पर लगाई पाबंदी में ढील दी थी। इसकी मियाद 11 अप्रैल को पूरी हो गई। इस दौरान भारत ने अपने सबसे पुराने और भरोसेमंद देश रूस से जमकर कच्चे तेल (Crude oil) की खरीद की। अब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ताजा फैसले ने भारत समेत कई एशियाई देशों की चिंता बढ़ा दी है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को घोषणा की कि अमेरिका रूसी और ईरानी तेल खरीद के लिए दी गई प्रतिबंधों की छूट की समय सीमा को नहीं बढ़ाएगा।

    अमेरिका का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया के तेल बाजार में भारी अस्थिरता है। भारत जैसे देशों ने अपनी आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए इन छूटों का भरपूर लाभ उठाया था।

    क्या है पूरा मामला?
    फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान युद्ध छिड़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थीं। दुनिया के तेल बाजार को स्थिर करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने एक अस्थायी नीति अपनाई थी। इसके तहत 12 मार्च को भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट दी गई थी। यह केवल उस तेल के लिए थी जो 11 मार्च से पहले जहाजों पर लद चुका था। इसी तरह ईरान के लिए भी 30 दिनों का लाइसेंस दिया गया था। रूस के लिए दी गई छूट 11 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गई है, जबकि ईरान के लिए यह छूट 19 अप्रैल को समाप्त होने जा रही है।


    भारत के लिए बड़ा झटका

    भारत इस छूट का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रिलायंस जैसी भारतीय रिफाइनरियों ने पहले रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसे रूसी आपूर्तिकर्ताओं से किनारा कर लिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, छूट मिलने के बाद भारत ने रूस से लगभग 3 करोड़ बैरल तेल के ऑर्डर दिए थे। भारत समेत कई एशियाई देशों ने अमेरिका से इन छूटों को आगे बढ़ाने की अपील की थी, जिसे अब अमेरिकी ट्रेजरी ने ठुकरा दिया है।

    ट्रंप के फैसले की खूब हुई आलोचना
    ट्रंप प्रशासन के इस रुख की अमेरिका के भीतर खासकर विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा कड़ी आलोचना की जा रही थी। सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल और अल्पसंख्यक नेता चक शूमर जैसे नेताओं ने आरोप लगाया कि इस छूट से रूस को यूक्रेन के खिलाफ अपनी युद्ध मशीनरी के लिए भारी पैसा मिल रहा है।

    डेमोक्रेट्स का कहना है कि एक तरफ रूस यूक्रेन में बच्चों की हत्या कर रहा है, तो दूसरी तरफ वह ईरान को अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने के लिए खुफिया जानकारी दे रहा है। ऐसे में उन्हें आर्थिक राहत देना खतरनाक है। ट्रेजरी सचिव बेसेंट ने स्पष्ट किया कि अब कोई नया लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा क्योंकि समुद्र में जो तेल 11 मार्च से पहले था, वह इस्तेमाल किया जा चुका है।


    अब आगे क्या?

    रूस और ईरान से तेल की आयात बंद होने से भारत को अब खाड़ी के अन्य देशों या अमेरिकी घरेलू बाजार पर निर्भरता बढ़ानी होगी, जो महंगा पड़ सकता है। आपूर्ति कम होने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। भारत को अब रूस के साथ व्यापार करने के लिए वैकल्पिक पेमेंट गेटवे जैसे रुपया-रुबल पर गंभीरता से विचार करना होगा, जो अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में न आए।

  • ईरान युद्ध के चलते कई देशों में आसमान पर पहुंचे पेट्रोल-डीजल के दाम… भारत में अब तक राहत

    ईरान युद्ध के चलते कई देशों में आसमान पर पहुंचे पेट्रोल-डीजल के दाम… भारत में अब तक राहत


    नई दिल्ली।
    ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध (Iran–US–Israel War.) शुरू होने के बाद से अबतक कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम (Petrol-Diesel Price) आसमान पर पहुंच गए। फिलीपिंस में डीजल के रेट में 172 प्रतिशत उछाल आया तो म्यांमार में पेट्रोल के रेट डबल हो गए। लेकिन, भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट में अभी राहत है। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर पिछले कई साल से अटका हुआ है। यह आशंका प्रबल है कि यह राहत चुनाव के बाद छिन सकती है।


    पेट्रोल के दाम सबसे अधिक बढ़ाने वाले देश

    globalpetrolprices.com के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक पेट्रोल के सबसे अधिक दाम बढ़ाने वाले देशों में म्यांमार (101.1%), फिलीपींस (72.6%), मलेशिया (68.1%), लाओस (45.6%), जिम्बाब्वे (42.9%) पाकिस्तान (42.0%), यूएई (40.8%), कंबोडिया (40.4%) और नेपाल (39.5%)।


    डीजल के दाम सबसे अधिक बढ़ाने वाले देश

    फिलीपींस 172.0%
    लाओस 169.5%
    म्यांमार 161.4%
    मलेशिया 124.7%
    न्यूजीलैंड 89.9%
    यूएई 86.1%
    कंबोडिया 84.0%
    लेबनान 80.5%
    वियतनाम 77.9%
    ऑस्ट्रेलिया 65.3%
    स्रोत: globalpetrolprices.com


    कई देशों को क्यों बढ़ाने पड़े पेट्रोल-डीजल के दाम

    युद्ध के शुरू होने के बाद ्रबेंट क्रूड की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 111 डॉलर तक पहुंच गईं। सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ी, जिससे मार्च के मध्य तक ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के ऊपर पहुंच गया। 6 अप्रैल तक यह 111.73 डॉलर पर था। हालांकि, सीजफायर के बीच इसमें गिरावट आई और कीमत 95.49 डॉलर पर आ गई।

    इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा। दुनिया भर में औसत पेट्रोल कीमत 1.2 डॉलर प्रति लीटर से बढ़कर 1.44 डॉलर और डीजल 1.2 से 1.6 डॉलर प्रति लीटर तक पहुंच गया। डेटा के अनुसार कुछ देशों में ईंधन कीमतों में विस्फोटक उछाल देखने को मिली। खासतौर पर एशिया और छोटे आयात-निर्भर देशों में दाम तेजी से बढ़े।


    भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं बढ़े?

    एक ओर जब पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतो में आग लगी हई है तो दूसरी ओर भारत में शांति है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि भारत में इस दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बंगाल समेत 5 राज्यों का चुनाव और सरकार द्वारा टैक्स में कटौती। केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल को महंगा होने से बचाने के लिए 10-10 रुपये टैक्स कम कर दिए। वहीं, निर्यात पर टैक्स बढ़ाया, ताकि घरेलू सप्लाई में दिक्कत न हो।

    क्या चुनाव बाद पेट्रोल-डीजल हो जाएगा महंगा?
    चाय की दुकानों से लेकर चौक-चौराहों तक यह चर्चा आम है कि पेट्रोल-डीजल के दाम 5 राज्यों के चुनाव के बाद बढ़ जाएंगे। Macquarie Group ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पेट्रोल पर कंपनियों को 18 और डीजल पर 35 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा होने की संभावना है। क्यांकि, एक बैरल कच्चे तेल में 10 डॉलर की बढ़ोतरी की वजह से कंपनियों को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होता है।

  • भारत से इतनी नफरत, पाकिस्तान में आशा भोसले के गाने चलाए तो चैनल को नोटिस भेजा

    भारत से इतनी नफरत, पाकिस्तान में आशा भोसले के गाने चलाए तो चैनल को नोटिस भेजा

    इस्‍लामाबाद। दिग्गज भारतीय गायिका आशा भोसले पर कंटेंट चलाने को लेकर पाकिस्तान में एक चैनल को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। पाकिस्तान में नियामक की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि भारतीय कंटेंट का प्रसारण करना मना है। साथ ही चैनल से इस संबंध में जवाब भी तलब किया गया है। भोसले का रविवार को मुंबई के अस्पताल में निधन हो गया था। सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया।

    पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (PEMRA) ने जियोन्यूज को कारण बताओ नोटिस जारी कर यह स्पष्टीकरण मांगा है कि उसने भोसले की मौत की खबर के साथ भारतीय सामग्री क्यों प्रसारित की। पाकिस्तान में भारतीय कंटेंट पर प्रतिबंध 2018 से लागू है।
    PEMRA ने कहा कि भोसले की मौत की खबर प्रसारित करते समय जियोन्यूज ने भारतीय गाने और भारतीय फिल्मों के दृश्य प्रसारित करना, पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का जानबूझकर उल्लंघन है। जिसमें भारतीय सामग्री के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया गया है।
    जियोन्यूज के प्रबंध निदेशक अजहर अब्बास ने एक पोस्ट में कहा, ‘प्रतिष्ठित कलाकारों के बारे में रिपोर्टिंग करते समय उनके कार्यों को याद करना और उनकी सराहना करना हमेशा से एक परंपरा रही है। वास्तव में, आशा भोसले जैसी कलाकार के लिए, हमें उनके कालजयी और यादगार गीतों को और भी अधिक साझा करना चाहिए था। फिर भी, पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक, PEMRA ने इसे प्रतिबंधित करने का विकल्प चुना है।’
    भोसले का मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर सोमवार शाम हिंदू रीति-रिवाज और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। संगीत जगत की जानी-मानी हस्ती को अंतिम विदाई देने के लिए शिवाजी पार्क के अंदर और बाहर काफी संख्या में लोग एकत्र थे। पृष्ठभूमि में आशा का गाया गीत, ‘अभी ना जाओ छोड़कर…’ बज रहा था।

    लता मंगेशकर की बहनों में से एक, आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया था। वह 92 वर्ष की थीं। उनकी बड़ी बहन लता का भी फरवरी 2022 में 92 वर्ष की आयु में रविवार के ही दिन निधन हुआ था। भोसले के बेटे आनंद ने उन्हें मुखाग्नि दी। आशा भोसले ने महज 10 साल की उम्र में गाना शुरू किया था और वह आठ दशक लंबे अपने करियर में लगभग 12,000 गीत गाए।

    दिवंगत गायिका को अंतिम विदाई देने वालों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार तथा निर्देशक रमेश सिप्पी, अभिनेता आमिर खान और विक्की कौशल शामिल थे।

  • LPG कालाबाजारी पर बड़ा प्रहार 2840 जगह छापे हजारों सिलेंडर जब्त

    LPG कालाबाजारी पर बड़ा प्रहार 2840 जगह छापे हजारों सिलेंडर जब्त

    भोपाल । मध्य प्रदेश में एलपीजी गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने बड़ा और सख्त अभियान चलाया है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की अगुवाई में पूरे प्रदेश में व्यापक जांच अभियान चलाया गया जिसमें बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आईं।

    अभियान के तहत प्रदेशभर में कुल 2840 स्थानों पर जांच की गई जहां से 3691 एलपीजी गैस सिलेंडर जब्त किए गए। यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत की गई है जिसका उद्देश्य जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना है। इस दौरान 11 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई जबकि पेट्रोल पंपों पर भी सख्ती दिखाई गई और 734 रिटेल आउटलेट की जांच में एक मामला दर्ज किया गया।

    सरकार ने केवल कार्रवाई तक ही खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि आगे की व्यवस्था को भी मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। जिन इलाकों में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG की पाइपलाइन पहुंच चुकी है वहां के घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द पीएनजी कनेक्शन लेने के निर्देश दिए गए हैं।

    स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि उपभोक्ता आगामी तीन महीनों में पीएनजी कनेक्शन नहीं लेते हैं तो उन्हें एलपीजी गैस की सप्लाई बंद की जा सकती है। यह कदम गैस वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में उठाया गया है ताकि कालाबाजारी पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।

    सरकार ने सीजीडी संस्थाओं को भी निर्देशित किया है कि वे पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन मिलने के 24 घंटे के भीतर पाइपलाइन बिछाने की स्वीकृति जारी करें। इसके साथ ही पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठान, सरकारी कॉलोनियों और सुधार गृहों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन देने को कहा गया है।

    औद्योगिक क्षेत्रों को भी इस बदलाव में शामिल किया जा रहा है। जहां जहां पाइपलाइन उपलब्ध है वहां की औद्योगिक इकाइयों को चिन्हित कर उन्हें पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं जिससे गैस आपूर्ति प्रणाली अधिक नियंत्रित और प्रभावी बन सके।

    इस अभियान के तहत विभिन्न गैस कंपनियों जैसे GAIL Gas Limited Indian Oil Corporation Bharat Petroleum और Gujarat Gas को कंट्रोल रूम नंबर जारी कर उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करने की सुविधा दी गई है।

    सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब गैस वितरण में पारदर्शिता और सख्ती दोनों साथ साथ लागू की जाएंगी। एलपीजी की कालाबाजारी पर लगाम कसने के साथ साथ पीएनजी को बढ़ावा देकर एक स्थायी और सुरक्षित विकल्प की ओर बढ़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

  • भारत के लिए गुड न्यूज है सीजफायर, LPG पर पड़ेगा बड़ा असर; कितने दिन खुलेगा होर्मुज

    भारत के लिए गुड न्यूज है सीजफायर, LPG पर पड़ेगा बड़ा असर; कितने दिन खुलेगा होर्मुज


    वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर हालात सामान्य हो सकते हैं। एक ओर जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो सप्ताह के युद्ध विराम का ऐलान किया है। वहीं, ईरान ने भी होर्मुज जलमार्ग खोलने पर सहमति जता दी है। अब यह घोषणा भारत के लिए भी खुशखबरी साबित हो सकती है, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव के बीच देश में ईंधन संकट गहराता जा रहा था।
    कब तक मिलेगी राहत

    ट्रंप ने लिखा, ‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर से हुई बातचीत के आधार पर, जिसमें उन्होंने मुझसे ईरान पर आज रात होने वाले विनाशकारी हमले को रोकने का अनुरोध किया था। साथ ही ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरा, तत्काल और सुरक्षित तरीके से खोलने के मद्देनजर मैं दो सप्ताह के लिए ईरान पर दो हफ्ते के लिए बमबारी और हमले रोकने के लिए तैयार हो गया हूं।’

    एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान भी सीजफायर के लिए तैयार हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने माना है कि तेहरान की तरफ से मांगें स्वीकार कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी बलों के समन्वय के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से इन दो सप्ताह के लिए जहाजों को सुरक्षित तरीके से निकलने दिया जाएगा।
    भारत पर क्यों पड़ा था होर्मुज बंद होने का असर

    युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान कर दिया था। अब इसके चलते भारत में ईंधन सप्लाई को बड़ा झटका लगा था।

    खबरें हैं कि भारत का 40 फीसदी कच्चा तेल आयात, 50 प्रतिशत से ज्यादा LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस और 90 प्रतिशत LPG इस स्ट्रेट के जरिए ही पश्चिम एशिया से आता था।
    भारत को दे दी थी अनुमति

    होर्मुज जलमार्ग ईरान की तरफ से बंद किए जाने के बाद यहां जहाजों का आवागमन करीब 95 प्रतिशत गिर गया था। हालांकि, इसके कुछ समय बाद ईरान ने भारत समेत कुछ देशों को मित्र करार दिया और होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी थी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की तरफ से जारी बयान के अनुसार, चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान को गुजरने की अनुमति दी गई थी।
    कितने भारतीय जहाज अटके

    पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर भारतीय बंदरगाहों की तरफ बढ़ रहे हैं, जबकि 16 अन्य मालवाहक जहाज अब भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

    बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने कहा कि 46,650 टन एलपीजी से लदा टैंकर ‘ग्रीन सानवी’ सात अप्रैल को भारत पहुंचेगा। जबकि 15,500 टन गैस लेकर ‘ग्रीन आशा’ टैंकर नौ अप्रैल को भारतीय तट पर पहुंचेगा।

    फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों में एक एलएनजी पोत, दो एलपीजी टैंकर, छह कच्चा तेल ले जाने वाले जहाज, तीन कंटेनर पोत, एक ड्रेजर, एक रसायन ले जाने वाला पोत और दो थोक मालवाहक शामिल हैं।

    वरिष्ठ अधिकारी ने इस स्ट्रेट को पार करने के लिए ईरान द्वारा शुल्क लिए जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘हमें इस तरह के भुगतान की कोई जानकारी नहीं है।’

    भारतीयों को मिलेगी राहत

    भारत रसोई गैस की अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात से पूरा करता है, जिसमें से करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति पश्चिम एशिया से होती है। ऐसे में इन टैंकरो का आगमन देश में एलपीजी आपूर्ति पर दबाव को कम करने में मदद करेगा। वहीं, अब जब होर्मुज दो सप्ताह के लिए खुलने जा रहा है, तो भारत आने वाले जहाजों में तेजी आएगी। ऐसे में भारत को बड़ी राहत मिल सकती है। दरअसल, भारत की सालाना एलपीजी खपत 33 मिलियन टन से ज्यादा की है।

  • भारत के टेक्सटाइल सेक्टर तेजी से कर रहा विस्तार… 14 साल में 3 गुना बढ़ा कपड़ा मार्केट

    भारत के टेक्सटाइल सेक्टर तेजी से कर रहा विस्तार… 14 साल में 3 गुना बढ़ा कपड़ा मार्केट


    नई दिल्ली।
    भारत (India) का कपड़ा और अपैरल बाजार (Textile and Apparel Market) तेजी से विस्तार कर रहा है और इसकी झलक हाल ही में जारी रिपोर्ट में साफ दिखाई देती है। वस्त्र मंत्रालय के सर्वे के अनुसार, देश का टेक्सटाइल मार्केट (Textile market) 2024 में बढ़कर 14.95 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो 2010 में सिर्फ 4.89 लाख करोड़ रुपये था, यानी पिछले करीब 14 साल में इस सेक्टर ने शानदार ग्रोथ दिखाई है और यह हर साल औसतन 8.3% की दर से बढ़ा है। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह घरेलू मांग में लगातार इजाफा है। जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ रही है और लाइफस्टाइल बदल रहा है, वैसे-वैसे कपड़ों पर खर्च भी बढ़ता जा रहा है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, आज के समय में सिंथेटिक और मिक्स फाइबर वाले कपड़ों की मांग सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ी है। इनका कुल बाजार में हिस्सा 52.2% तक पहुंच गया है, जबकि कॉटन यानी सूती कपड़ों की हिस्सेदारी 41.2% है। वहीं, सिल्क और ऊन जैसे रेगुलर फाइबर की हिस्सेदारी काफी कम है। खास बात यह है कि सिंथेटिक और मिक्स फाइबर का बाजार 2010 के 1.47 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 4.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो उपभोक्ताओं की बदलती पसंद को दर्शाता है। लोग अब ऐसे कपड़े पसंद कर रहे हैं, जो सस्ते, टिकाऊ और मेंटेन करने में आसान हों।

    इस ग्रोथ में घरेलू उपभोक्ताओं का बहुत बड़ा योगदान है। रिपोर्ट के अनुसार, परिवारों द्वारा कपड़ों पर खर्च 2010 के 4.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 8.77 लाख करोड़ रुपये हो गया है, यानी कुल बाजार का बड़ा हिस्सा घरेलू खपत से ही आ रहा है। इसके अलावा प्रति व्यक्ति खर्च भी तेजी से बढ़ा है। 2010 में जहां एक व्यक्ति औसतन 2,119 रुपये कपड़ों पर खर्च करता था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 6,066 रुपये हो गया है। यह दिखाता है कि लोग अब फैशन और ब्रांड्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

    एक और दिलचस्प बात यह है कि कपड़ा बाजार में महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल खरीद में महिलाओं का योगदान 55.5% है, जबकि मेल की हिस्सेदारी 44.5% है, यानी इस सेक्टर की ग्रोथ में महिला उपभोक्ता सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं।

    भारत का टेक्सटाइल सेक्टर न सिर्फ तेजी से बढ़ रहा है, बल्कि इसमें बड़े बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं। बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ती आय और फैशन के प्रति बढ़ती जागरूकता इस ग्रोथ को आगे भी गति दे सकती है। आने वाले समय में यह सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत इंजन साबित हो सकता है।

  • LPG संकट के बीच एक और राहत की खबर… भारत के नौंवे जहाज ने भी पार किया होर्मुज

    LPG संकट के बीच एक और राहत की खबर… भारत के नौंवे जहाज ने भी पार किया होर्मुज


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में एलपीजी (LPG) की कमी के बीच बड़ी राहत की खबर है। ईरान युद्ध के बीच होर्मुज (Hormuz) से भारत के 9वें टैंकर को निकले की इजाजत मिल गई है। ‘ग्रीन आशा’ नाम का भारतीय झंडे वाला यह पोत बड़ी मात्रा में एलपीजी लेकर भारत आ रहा है। इससे पहले 3 अप्रैल को ‘ग्रीन सांवी’ को होर्मुज से निकलने की इजाजत मिली थी। इससे 46 हजार टन एलपीजी भारत पहुंच रही है। इससे कहा जा सकता है कि जल्द ही भारत में एलपीजी की किल्लत दूर होने वाली है।


    एक और एलपीजी टैंकर कर रहा इंतजार

    रिपोर्ट के मुताबिक भारत का एक और पोत ‘जग विक्रम’ अभी परमीशन का इंतजार कर रहा है। ये भी टैंकर होर्मुज से पहले ही रुककर इजाजत का इंतजार करते हैं। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इन्हें पास कराया जाता है। कच्चे तेल और एलपीजी वाले पोतों को प्राथमिकता दी जाती है। ईरान ने स्पष्ट कह दिया है कि भारत के टैंकरों को होर्मुज से निकलने की इजाजत दी जाएगी। इसके अलावा अमेरिका और इजरायल का साथ देने वाले देशों के लिए होर्मुज बंद माना जाए।

    इससे पहले BW TYR टैंकर मुंबई पहुंचा है। शिपिंग महानिदेशालय की रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज के पास अभी 16 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। इनमें से पांच शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं। ओमान की खाड़ी , अदन की खाड़ी और लाल सागर में भी कुछ भारतीय जहाज मौजूद हैं।


    खाड़ी में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक

    खाड़ी इलाकों में भारतीय नाविकों की संख्या भी काफी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र में भारत के कम से कम 20 हजार 500 नाविक हैं। इनमें से 504 नाविक ही भारतीय शिप पर हैं। 3 अप्रैल को अलग-अलग शिपिंग कंपनियों द्वारा 1130 नाविकों को सुरक्षित निकाला गया है। भारत ईरान की सरकार के साथ कूटनीतिक वार्ता भी कर रहा है। ईरान का भी रुख भारत के प्रति बेहद नरम है।

    डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को होर्मुज खोलने के लिए चेतावनी दे रहे हैं। ट्रंप ने कहा है कि तेहरान में एक ‘भीषण हमले’ में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों को ‘खत्म’ कर दिया गया है। उन्होने कहा कि अगर ईरान अब भी नहीं मानता है तो ऐसे अभियान चलते रहेंगे। उन्होंने कहा, “याद रखें जब मैंने ईरान को समझौता करने या होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए दस दिन का समय दिया था। अब समय खत्म हो रहा है-48 घंटे बचे हैं, इसके बाद उन पर चौतरफा आफत बरसेगी।”

  • पाकिस्तान में 458 रुपये पहुंचे पेट्रोल के रेट… भारत में अब तक नहीं बढ़ी कीमतें

    पाकिस्तान में 458 रुपये पहुंचे पेट्रोल के रेट… भारत में अब तक नहीं बढ़ी कीमतें


    नई दिल्ली।
    पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price Today) में आज फिर कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर के रेट से बिक रहा है। वहीं, डीजल का रेट दिल्ली में आज शनिवार को 87.67 रुपये प्रति लीटर है। बता दें, दुनिया भर में इस समय पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आग लगी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil Prices) में जारी तेजी की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि, घरेलू स्तर पर भारत सरकार ने आम-आदमी को अबतक इससे बचा कर रखा है।


    पाकिस्तान में 458 रुपये प्रति लीटर बिक रहा पेट्रोल

    पाकिस्तान सरकार ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों को बढ़ाने की घोषणा की। पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की कीमतों में क्रमश: 43 प्रतिशत और 55 प्रतिशत की भारी बढोतरी की है। इस फैसले के तहत, पेट्रोल की कीमत 321.17 रुपये से 137.23 रुपये प्रति लीटर (करीब 42.7 प्रतिशत) बढ़ाकर 458.41 रुपये प्रति लीटर कर दी गई। वहीं, हाई स्पीड डीजल की कीमत 335.86 रुपये से 184.49 रुपये प्रति लीटर (करीब 55 प्रतिशत) बढ़ाकर 520.35 रुपये प्रति लीटर कर दी गई। ये नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। इसके साथ, केरोसिन तेल की कीमत भी 34.08 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 457.80 रुपये कर दी गई है।


    देश के अलग-अलग शहरों में किस रेट पर बिक रहा पेट्रोल (Petrol Rate)

    दिल्ली – 94.77 रुपये
    मुंबई – 104.21 रुपये
    कोलकाता – 103.94 रुपये
    चेन्नई – 100.75 रुपये
    अहमदाबाद – 94.49 रुपये
    बेंगलुरू – 102.92 रुपये
    हैदराबाद – 107.46 रुपये
    जयपुर – 104.72 रुपये
    लखनऊ – 94.69 रुपये
    पुणे – 104.04 रुपये
    चंडीगढ़ – 94.30 रुपये
    इंदौर – 106.48 रुपये


    डीजल का क्या है अलग-अलग शहरों में रेट (Diesel Rate)

    मुंबई – 92.15 रुपये
    कोलकाता – 90.76 रुपये
    चेन्नई – 92.34 रुपये
    अहमदाबाद – 90.17 रुपये
    बेंगलुरू – 89.02 रुपये
    हैदराबाद – 95.70 रुपये
    जयपुर – 90.21 रुपये
    लखनऊ – 87.80 रुपये
    पुणे – 90.57 रुपये
    चंडीगढ़ – 82.45 रुपये
    इंदौर – 91.88 रुपये
    पटना – 93.80 रुपये

    पिछले दिनों प्रीमियम पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इंडियन ऑयल ने इजाफा किया था। जिसके बाद दिल्ली में XP100 पेट्रोल का रेट 149 रुपये से बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर और एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल का रेट 91.49 रुपये से 92.99 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

  • भारत में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं…. सरकार का दावा – देश में दो माह का भंडार मौजूद

    भारत में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं…. सरकार का दावा – देश में दो माह का भंडार मौजूद


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis) से ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ी आशंकाओं के बीच सरकार रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस बीच, सरकार का कहना है कि देश में कच्चे तेल (Crude oil) की कोई कमी नहीं है। रिफाइनरी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। सरकार का दावा है कि करीब दो माह का कच्चा तेल मौजूद है। पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत (India) के पास कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है।

    उन्होंने कहा कि सभी घरों को ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पिछले एक माह में तीन लाख 33 हजार पीएनजी कनेक्शन दिए गए। इनमें से दो लाख नब्बे हजार पीएनजी कनेक्शन घरेलू हैं। वहीं, करीब साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों ने घरेलू पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है।

    पीएनजी कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं से एलपीजी कनेक्शन छोड़ने की अपील पर 14 हजार चार सौ उपभोक्ताओं ने अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर किया है। सुजाता शर्मा ने अपील करते हुए कहा कि पीएनजी कनेक्शन इस्तेमाल करने वाले दूसरे उपभोक्ता भी अपना एलपीजी कनेक्शन को वापस कर दे।

    पेट्रोलियम मंत्रालय ने व्यवसायिक गतिविधियों व औद्योगिक मांग को सुचारू बनाए रखने के लिए आठ राज्यों के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के कोटे में दस फीसदी अतिरिक्त बढ़ोतरी की भी घोषणा की। सुजाता शर्मा ने बताया कि भारत के पास अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल का भंडार है।


    भारत समुद्र में प्रतिबंधों के खिलाफ

    होर्मुज जलमार्ग के मुद्दे पर ब्रिटेन द्वारा आहूत बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जल मार्ग में बिना किसी रुकावट के आवागहन की नीति पर भारत का पक्ष रखा। भारत ने स्पष्ट तौर पर इस संकट से निकलने के लिए तनाव कम करने और कूटनीति रास्ता निकालने पर जोर दिया। ब्रिटेन द्वारा गुरुवार को बुलाई गई इस बैठक में 60 देशों ने हिस्सा लिया। बैठक वर्चुअल तरीके से हुई जिसमें होर्मुज को खोलने के लिए एक गठबंधन बनाने की दिशा में प्रगति होती हुई दिखी।

    विदेश मंत्रालय की तरफ से इस बैठक को लेकर जारी बयान में कहा गया है कि बैठक में विदेश सचिव मिसरी ने समुद्री परिवहन की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में बिना किसी रुकावट के आने जाने के सिद्धांत के महत्व को रेखांकित किया।


    ईरान जलमार्ग को हाईजैक करने में सफल रहा

    बैठक में ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर ने कहा कि ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को हाईजैक करने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि हार्मुज को खोलने के लिए सैन्य आपरेशन के बजाय कूटनीतिक तरीके खोजने होंगे। बैठक को होर्मुज पोतों की सुरक्षित निकासी के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की शुरुआती पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसमें 28 देशों के भाग लेने की उम्मीद थी लेकिन कहीं ज्यादा 48 देशों ने हिस्सा लिया है।

  • कभी दिखाते थे आंखें… अब ईंधन के लिए भारत के आगे फैला रहे हाथ…

    कभी दिखाते थे आंखें… अब ईंधन के लिए भारत के आगे फैला रहे हाथ…


    नई दिल्ली।
    ईरान और अमेरिका युद्ध (Iran and America war) के कारण आए ईंधन संकट (Fuel Crisis) का असर भारत के पड़ोसियों पर भी पड़ा है। खबर है कि श्रीलंका, नेपाल समेत कई देशों ने भारत से सप्लाई की गुहार लगाई है। वहीं, इनमें मालदीव (Maldives) भी शामिल है। खास बात है कि मालदीव सरकार कभी भारत के खिलाफ खुलकर बात कर रही थी। बहरहाल, भारत में इन अनुरोधों पर विचार किया जा रहा है। हाल ही में ईरान ने कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz.) से निकलने को लेकर भारत में हमारे दोस्तों को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।


    किसने मांगा ईंधन

    भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल मालदीव भारत से ईंधन मांग रहा है। भारत अपने पड़ोसी देशों को लगातार ईंधन भेज रहा है। उन्होंने बताया कि भारत कॉमर्शियल समझौतों के तहत बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को ईंधन की सप्लाई कर रहा है। खास बात है कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है।


    मालदीव की मांग

    उन्होंने जानकारी दी कि मालदीव सरकार ने भी हमसे शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों आधार पर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई के लिए संपर्क किया है। मालदीव के इस अनुरोध पर हमारी अपनी उपलब्धता और हमारी अपनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा रहा है। विश्व बैंक के डाटा के अनुसार मालदीव आमतौर पर अपने ज्यादातर ईंधन की सप्लाई ओमान से लेता है।

    फिलहाल, मालदीव में राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जू की सरकार है। वह चुनाव में जीतने से पहले ‘India Out’ का नारा लगा रहे थे। साथ ही उन्होंने भारतीय सैनिकों को वापस जाने के आदेश भी जारी कर दिए थे। हालांकि, अब मुइज्जू ने हाल में ही भारत को अपना भरोसेमंद साझेदार करार दे दिया है। खबर है कि पर्यटन पर बड़े स्तर पर निर्भर देश उड़ानों पर पड़े प्रभाव के कारण भी मुश्किलों का सामना कर रहा है।


    बड़ी बैठक में शामिल हुआ भारत

    विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ब्रिटेन में आयोजित 60 से अधिक देशों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की आंशिक नाकेबंदी को लेकर भारत के रुख पर बात की। मंत्रालय ने बताया कि मिसरी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के प्रभाव और इस तथ्य पर बल दिया कि खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हमलों में नाविकों को खोने वाला भारत एकमात्र देश है।

    विदेश मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में बताया, ‘उन्होंने (मिसरी ने) इस बात पर भी जोर दिया कि संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता तनाव कम करना और सभी संबंधित पक्षों के बीच कूटनीति और संवाद के मार्ग पर लौटना है।’ ईरान की तरफ से फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित संकरे होर्मुज जलमार्ग को लगभग रोक दिए जाने के बाद वैश्विक तेल व गैस की कीमतों में उछाल आया है। इस जलमार्ग से वैश्विक तेल और एलएनजी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होकर गुजरता है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है।