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  • रूस से 288 S-400 मिसाइलों की खरीदी करेगा भारत… DAC ने दी मंजूरी…

    रूस से 288 S-400 मिसाइलों की खरीदी करेगा भारत… DAC ने दी मंजूरी…


    नई दिल्ली।
    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने रूस (Russia) से 288 S-400 मिसाइलों (S-400 Missiles) की खरीद को आवश्यक स्वीकृति (AoN) प्रदान कर दी है। इन मिसाइलों की अनुमानित लागत 10,000 करोड़ है। यह निर्णय मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor)’ के दौरान इस्तेमाल की गई मिसाइलों के स्टॉक को फिर से भरने और देश की हवाई रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, DAC द्वारा मंजूर की गई AoN में 120 छोटी दूरी वाली और 168 लंबी दूरी वाली मिसाइलें शामिल हैं। इन मिसाइलों की खरीद फास्ट ट्रैक प्रोसीजर के माध्यम से की जाएगी।

    इसके अतिरिक्त, भारत को पहले से अनुबंधित दो और S-400 सिस्टम इसी साल जून और नवंबर में मिलने वाले हैं। वायुसेना S-400 के साथ-साथ पैंटसिर छोटी दूरी वाली प्रणाली को खरीदने का प्रस्ताव भी रख रही है, जो ड्रोन और कामिकेज़ ड्रोन से निपटने में प्रभावी है।


    ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की भूमिका

    S-400 मिसाइलों का स्टॉक बढ़ाना इसलिए जरूरी समझा गया क्योंकि भारतीय सशस्त्र बलों ने मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इनका व्यापक उपयोग किया था। इन मिसाइलों ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों, अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट और सशस्त्र ड्रोन को मार गिराया था।

    खास बात यह है कि जब भारत ने S-400 मिसाइल का उपयोग करके पाकिस्तान के पंजाब में 314 किमी की दूरी पर एक बड़े विमान को मार गिराया, तो पाकिस्तान ने अपने लगभग सभी ऑपरेशनल विमानों को अफगानिस्तान और ईरान के पास के हवाई अड्डों पर स्थानांतरित कर दिया था। अदमपुर और भुज सेक्टर में तैनात S-400 सिस्टम के डर से 9-10 मई को पाकिस्तानी वायुसेना ने कोई कार्रवाई नहीं की।


    रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया

    भारत की रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया सख्त निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कई चरणों से गुजरती है। ‘स्टेटमेंट ऑफ केस’ से शुरू होकर, यह प्रस्ताव रक्षा खरीद बोर्ड और फिर DAC तक जाता है, जिसके बाद कीमत पर बातचीत होती है। अंतिम मंजूरी सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) द्वारा दी जाती है।

    गुरुवार को, रक्षा मंत्री ने कुल ₹3.60 लाख करोड़ से अधिक के विभिन्न प्रस्तावों को AoN दी। इसमें राफेल फाइटर जेट, कॉम्बैट मिसाइल और हाई एल्टीट्यूड स्यूडो-सैटेलाइट की खरीद। अधिकांश लड़ाकू विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। एंटी-टैंक माइन्स (विभव) और टैंकों व लड़ाकू वाहनों (BMP-II) का ओवरहाल। मरीन गैस टर्बाइन-आधारित इलेक्ट्रिक पावर जनरेटर और P-8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान।

  • भ्रष्टाचार के मामले में सुधरी भारत की रैकिंग, 185 देशों की लिस्ट में 5 स्थान की छलांग… 91वें स्थान पर पहुंचा

    भ्रष्टाचार के मामले में सुधरी भारत की रैकिंग, 185 देशों की लिस्ट में 5 स्थान की छलांग… 91वें स्थान पर पहुंचा


    नई दिल्ली।
    भारत (India) मंगलवार को जारी भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (Corruption Perceptions Index.-CPI) 2025 में 182 देशों और क्षेत्रों में से 91वें स्थान पर पहुंच गया। यह पिछली रैंकिंग की तुलना में पांच स्थान बेहतर है। वैश्विक गैर-सरकारी संगठन (Global Non-Governmental Organizations) ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (Transparency International) के नवीनतम सीपीआई के अनुसार, भारत का स्कोर पिछले साल की तुलना में एक अंक बढ़ा है। वहीं, उसकी रैंक बेहतर हुई है। बर्लिन स्थित भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था की रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया प्रशांत इलाके में भ्रष्टाचार विरोधी प्रगति की वृद्धि धीमी रही है। वजह, कई देशों में पिछले साल जनता का गुस्सा देखा गया।


    दुनिया के हर हिस्से में खतरा

    2025 भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक दिखाता है कि भ्रष्टाचार दुनिया के हर हिस्से में एक गंभीर खतरा बना हुआ है। हालांकि इसकी प्रगति की रफ्तार जरूर प्रभावित हुई है। रिपोर्ट में कहा गया कि नेताओं को सत्ता के दुरुपयोग और इस गिरावट को प्रेरित करने वाले व्यापक कारकों, जैसे लोकतांत्रिक जांच और संतुलन की वापसी और स्वतंत्र नागरिक समाज पर हमलों से निपटने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। इसमें आगे कहा गया है कि दुनिया भर में सरकार विरोधी प्रदर्शन यह दिखाते हैं कि लोग अक्षम नेतृत्व से उकता चुके हैं। यह लोग अब सुधार की मांग कर रहे हैं।


    पत्रकारों के लिए खतरनाक

    सीपीआई दुनिया के 182 देशों और क्षेत्रों को उनके सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के अनुमानित स्तर के अनुसार रैंक करता है। परिणाम जीरो (अत्यधिक भ्रष्ट) से 100 (बहुत साफ) के पैमाने पर दिए जाते हैं। रिपोर्ट में भारत को उन देशों में भी सूचीबद्ध किया गया है जो भ्रष्टाचार पर रिपोर्ट करने वाले पत्रकारों के लिए खतरनाक हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब पत्रकारों पर भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए हमला किया जाता है या उन्हें मार दिया जाता है, तो सत्ता को प्रभावी ढंग से जवाबदेह नहीं ठहराया जा सकता और भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। 2012 से, वैश्विक स्तर पर गैर-संघर्ष क्षेत्रों में 829 पत्रकारों की हत्या की जा चुकी है। इन हत्याओं में से 90 फीसदी से अधिक उन देशों में हुई हैं, जहां भ्रष्टाचार सूचकांक 50 से कम है। इनमें ब्राजील (35), भारत (39), मैक्सिको (27), पाकिस्तान (28) और इराक (28) शामिल हैं। यह विशेष रूप से उन पत्रकारों के लिए खतरनाक हैं जो भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग करते हैं।


    भ्रष्टाचार की कीमत

    रिपोर्ट में कहा गया है कि 2012 के बाद से 31 देशों ने अपने भ्रष्टाचार के स्तर में काफी कमी की है। बाकी इस समस्या से निपटने में विफल रहे हैं। इस अवधि के दौरान या तो वह स्थिर रहे हैं या बदतर हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक औसत गिरकर 42 के नए निचले स्तर पर आ गया है, जबकि दो-तिहाई से अधिक देश 50 से नीचे स्कोर कर रहे हैं। लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं, क्योंकि भ्रष्टाचार के कारण अस्पताल की सुविधाओं में कमी आती है। बाढ़ से निपटने की क्षमता पर असर पड़ता है। कुल मिलाकर यह युवाओं के सपनों पर खत्म कर देता है। इस सूचकांक में डेनमार्क 89 प्वॉइंट्स के साथ टॉप पर है। वह फिनलैंड और सिंगापुर से आगे है। वहीं, दक्षिण सूडान और सोमालिया की हालत भ्रष्टाचार के मामले में काफी खराब है। दोनों के नौ-नौ प्वॉइंट्स हैं। इनके बाद वेनेजुएला है।

  • 'इंडिया को 4 गुजराती चला रहे हैं', IND vs PAK मैच से पहले शाहिद अफरीदी ने उगला जहर; जानें अब क्या कहा

    'इंडिया को 4 गुजराती चला रहे हैं', IND vs PAK मैच से पहले शाहिद अफरीदी ने उगला जहर; जानें अब क्या कहा


    नई दिल्ली ।टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत बनाम पाकिस्तान मैच को लेकर पिछले काफी दिनों से विवाद चल रहा है. पाकिस्तान ने 15 फरवरी को होने वाले भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार का एलान किया, लेकिन अब अपने फैसले से यू-टर्न लेते हुए उन्हें खेलने के लिए राजी होना पड़ा. इस बीच शाहिद अफरीदी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. हमेशा की तरह इसमें भी वह भारत के खिलाफ जहर ही उगल रहे हैं.

    पूरा पाकिस्तान इस समय बौखलाया हुआ है, जो उनके बयानों से साफ झलक रहा है. दरअसल पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर्स पहले इस बात से खुश थे कि उनके देश ने भारत के खिलाफ मैच खेलने से मना कर दिया. उन्हें लगा कि इससे बीसीसीआई या आईसीसी दबाव में आ जाएगा, लेकिन इसके उलट पीसीबी पर ही दबाव बढ़ता गया और अंत में उन्हें भारत के खिलाफ खेलने के लिए राजी होना पड़ा. शाहिद अफरीदी का वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें वह कह रहे हैं कि भारत को सिर्फ 4 गुजराती चला रहे हैं.

    शाहिद अफरीदी ने उगला भारत के खिलाफ जहर
    पाकिस्तानी टीवी चैनल समा पर एक शो के दौरान शाहिद अफरीदी ने कहा, “इंडिया को 4 गुजराती चला रहे हैं. 2 बेच रहे हैं और 2 चला रहे हैं. अगर नीचे काम करने वालों को इन्हीं चारों को खुश करना है तो ऐसे चीजें चलती नहीं हैं.” अफरीदी की बातों से साफ झलक रहा था कि वह आईसीसी के सामने पाकिस्तान क्रिकेट की बेबसी और हालत देखकर कितने मायूस हैं.

    15 फरवरी को होगा भारत-पाकिस्तान मैच
    भारत और पाकिस्तान टी20 वर्ल्ड कप में एक ही ग्रुप (A) में शामिल हैं. दोनों के बीच 15 फरवरी को कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में मैच होना है. पाकिस्तान ने जब इस मैच के बहिष्कार का फैसला किया था तो उसके बाद सूर्यकुमार यादव ने साफ कहा था कि टीम इंडिया मैच खेलने जाएगी, चाहे विरोधी टीम आए या न आए. भारत शुरुआत से अपने स्टैंड पर अड़ा रहा, लेकिन अंत में पाकिस्तान को झुकना पड़ा.
  • क्रिकेट की जीत…IND vs PAK मैच को लेकर राजीव शुक्ला ने ICC की जमकर की तारीफ

    क्रिकेट की जीत…IND vs PAK मैच को लेकर राजीव शुक्ला ने ICC की जमकर की तारीफ


    नई दिल्ली । टी-20 विश्व कप में भारत और पाकिस्तान के बीच 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाला मैच अब तय है। बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने इसकी पुष्टि की है। पहले बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों से भारत में खेलने से इनकार किया था, जिसके बाद पाकिस्तान ने भी बहिष्कार की धमकी दी थी। हालांकि, आईसीसी की मध्यस्थता और पाकिस्तान सरकार की मंजूरी के बाद यह विवाद सुलझ गया है। शुक्ला ने इसे ‘क्रिकेट की जीत’ बताया है।
    टी-20 विश्व कप में 15 फरवरी को कोलंबो में भारत के साथ मैच खेलने के लिए पाकिस्तान तैयार हो गया है, लेकिन इसकी आधिकारिक घोषणा आज होगी। इस बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला का रिएक्शन सामने आया है।उन्होंने आईसीसी के प्रयासों की सराहना की और ये पुष्टि की है कि टी20 विश्व कप 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला हाई-वोल्टेज मुकाबला अब तय कार्यक्रम के अनुसार कोलंबो में खेला जाएगा।

    Rajeev Shukla ने IND vs PAK मैच को लेकर क्या कहा?

    दरअसल, बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने 10 फरवरी को पत्रकारों से बात करते हुए इसे “क्रिकेट की जीत” करार दिया। उन्होंने कहा कि आईसीसी ने जिस तरह से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के साथ बातचीत कर बीच का रास्ता निकाला है, वह काबिले तारीफ है।
    पूरा विवाद समझेंये पूरा मामला बीसीसीआई के बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल 2026 के लिए टीम से रिलीज करने का केकेआर को आदेश दिया था, जिसके बाद बांग्लादेश की सरकार ने ये फैसला लिया कि उनकी नेशनल टीम टी-20 विश्व कप के लिए भारत नहीं आएगी।

    बांग्लादेश क्रिकेट टीम ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने मैच भारत से बाहर कराने की आईसीसी से मांग की थी। आईसीसी द्वारा इस मांग को ठुकराए जाने और बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर करने के बाद, पाकिस्तान ने एकजुटता दिखाते हुए भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार की धमकी दी थी। हालांकि, अब ये मामला सुलझ गया है।

    पाकिस्तान सरकार ने दी हरी झंडी

    सोमवार को पाकिस्तान सरकार ने अपनी टीम को भारत के खिलाफ मैदान में उतरने का औपचारिक निर्देश दिया। पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को आईसीसी और अन्य हितधारकों के साथ हुई चर्चा की जानकारी दी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इस दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति से भी बातचीत की।

    पाकिस्तान के अपने फैसले से यू-टर्न के बाद राजीव शुक्ला ने ये विश्वास भी जताया कि यह विश्व कप एक बड़ी सफलता साबित होगा। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की चिंताओं को भी सुना गया है और उनके बोर्ड को कुछ राहत दी गई है, जिससे वे भी अब संतुष्ट हैं।अब सबकी निगाहें 15 फरवरी पर टिकी हैं, जब कोलंबो में डिफेंडिंग चैंपियन भारत का सामना अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से होगा।

  • ई-कचरा नियमन पर अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के लिए छह देशों के प्रतिनिधि भारत पहुंचे

    ई-कचरा नियमन पर अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के लिए छह देशों के प्रतिनिधि भारत पहुंचे


    नई दिल्ली।
    देश में आज से 13 फरवरी तक होने वाले ई-कचरा के नियमन और रीसाइक्लिंग (Regulation and Recycling of E-Waste) पर अंतरराष्ट्रीय अध्ययन (International Studies) के लिए छह देशों के प्रतिनिधि भारत (India) पहुंचे हैं। कार्यक्रम का आयोजन अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) और दूरसंचार विभाग कर रहा है।

    केंद्रीय संचार मंत्रालय के अनुसार, कार्यक्रम में कोलंबिया, डोमिनिकन गणराज्य, भारत, मलेशिया, नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधि शामिल हैं। पहले दिन करीब 40 प्रतिभागी मौजूद रहे। संचार मंत्रालय ने बताया कि कार्यक्रम में 09 से 11 फरवरी तक तकनीकी कार्यशाला होगी। इसमें ई-कचरा से जुड़े कानून, उत्पादक की जिम्मेदारी और डिजिटल निगरानी प्रणाली पर चर्चा होगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार क्षेत्र में सर्कुलर मॉडल पर भी फोकस रहेगा।

    डिजिटल संचार आयोग के सदस्य रुद्र नारायण पलई ने कहा कि भारत ई-कचरा रीसाइक्लिंग में वैश्विक नेतृत्व कर सकता है। उन्होंने कहा कि सही प्रबंधन से हरित रोजगार बनेंगे और कच्चे माल की कमी घटेगी। कोलंबिया के राजदूत डॉ विक्टर ह्यूगो एचेवेरी जारामिलो ने कहा कि यह दौरा केवल तकनीकी कार्यक्रम नहीं है। यह देशों के बीच भरोसा और दीर्घकालिक सहयोग का मंच है।

    दूरसंचार विभाग के सलाहकार शुभेंदु तिवारी ने कहा कि मजबूत नियमों के साथ उद्योग की भागीदारी जरूरी है। आधुनिक रीसाइक्लिंग ढांचे में निवेश पर जोर दिया गया।

    12 फरवरी को प्रतिनिधि राजस्थान के अलवर में स्थित ई-कचरा रीसाइक्लिंग इकाई का दौरा करेंगे। 13 फरवरी को आईटीयू क्षेत्रीय कार्यालय और नवाचार केंद्र का भ्रमण होगा। यह अध्ययन दौरा अक्टूबर 2025 में कोलंबिया में हुए पहले आदान-प्रदान के बाद हो रहा है। अगला अध्ययन दौरा अप्रैल 2026 में दक्षिण अफ्रीका में होगा। उल्लेखनीय है कि दुनिया में हर साल 6.2 करोड़ टन ई-कचर निकलता है। केवल 22.3 प्रतिशतक कचरा ही औपचारिक रूप से एकत्र और रिसाइकिल किया जाता है।

  • भारत-वियतनाम के बीच रेशम और वस्त्र क्षेत्र में मजबूत होगा द्विपक्षीय सहयोग

    भारत-वियतनाम के बीच रेशम और वस्त्र क्षेत्र में मजबूत होगा द्विपक्षीय सहयोग


    नई दिल्ली।
    भारतीय रेशम और वस्त्र उद्योग (Indian Silk and Textile Industry) के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) के केंद्रीय रेशम बोर्ड और प्रमुख भारतीय उद्यमियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने वियतनाम का पांच दिवसीय आधिकारिक दौरा किया।

    वस्त्र मंत्रालय के अनुसार हनोई स्थित भारतीय दूतावास के सहयोग से आयोजित इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रेशम उत्पादन, हथकरघा और तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और तकनीकी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

    यात्रा के दौरान, केंद्रीय रेशम बोर्ड के संयुक्त सचिव (तकनीकी) डॉ. नरेश बाबू एन. ने वियतनाम के अग्रणी वस्त्र निर्माता और निर्यातकों में शामिल बिटेक्सको नाम लॉन्ग जॉइंट स्टॉक कंपनी के अध्यक्ष को फाइव-इन-वन सिल्क स्टोल (छोटे शॉल) भेंट कर सम्मानित किया और कंपनी को भारत टेक्स 2026 में भाग लेने का न्यौता दिया। उन्होंने वियतनाम टेक्सटाइल एंड अपैरल एसोसिएशन (वीआईटीएएस) को भी भारत टेक्स 2026 के लिए आमंत्रित किया और वियतनाम एसोसिएशन ऑफ क्राफ्ट विलेजेज के साथ हथकरघा और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने, उत्पादों के विकास, ग्राम स्तरीय रेशमी वस्त्र उत्पादन, निर्यात और नीतिगत समर्थन पर चर्चा की। वियतनामी एसोसिएशन ने इस पर सहयोग में गहरी रुचि दिखाई।

    प्रतिनिधिमंडल ने हनोई में भारत के राजदूत शेरिंग वांगचुक शेरपा से मुलाकात कर रेशम और वस्त्र क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर गहन चर्चा की। इस दौरान भारत और वियतनाम के बीच व्यापार-से-व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर सहमति बनी।

    ​भारतीय दल ने हनोई के ऐतिहासिक वान फुक सिल्क क्राफ्ट विलेज का दौरा किया। यहां के बुनाई, डिजाइन और फैशन के एकीकृत मॉडल का अध्ययन किया गया, जिससे भारत में ‘रेशम उत्पादन-पर्यटन’ मॉडल विकसित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, दल ने स्वचालित रीलिंग इकाइयों और शहतूत के खेतों का भी निरीक्षण किया।

    ​वियतनाम में आयोजित दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों—वियतनाम इंटरनेशनल वैल्यू चेन एग्जिबिशन 2026 और वियतनाम ग्लोरियस स्प्रिंग फेयर 2026 में केंद्रीय रेशम बोर्ड के स्टॉल भी लगाया गया। भारतीय रेशम उत्पादों के प्रति बढ़ती रुचि ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाया।

    इस यात्रा के समापन पर विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और वियतनाम के बीच इस सहयोग से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और आधुनिक सिलाई तकनीकों का आदान-प्रदान होगा, उत्पाद विविधीकरण के नए अवसर मिलेंगे, ​दोनों देशों के बीच संवहनीय विकास और वैश्विक बाजार संबंधों को मजबूती मिलेगी।

  • Gold-Silver Price: सोना-चांदी के दामों में आयी तेजी, जानिए प्रमुख शहरों का आज का रेट

    Gold-Silver Price: सोना-चांदी के दामों में आयी तेजी, जानिए प्रमुख शहरों का आज का रेट


    नई दिल्ली। सोमवार, 9 फरवरी को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। घरेलू फ्यूचर मार्केट में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 मार्च, 2026 की एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा 1,54,224 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 1,53,931 रुपये पर बंद हुआ था।

    दिन की शुरुआत में ही सोना 1,55,674 रुपये तक पहुंच गया, यानी पिछले बंद रेट से करीब 1,800 रुपये की तेजी। शुरुआती कारोबार में MCX गोल्ड ने 1,57,000 रुपये तक का उच्च स्तर भी छुआ।

    चांदी में भी तेजी, जानें MCX रेट
    सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी मजबूती रही। MCX पर 5 मार्च 2026 की सिल्वर फ्यूचर वायदा 2,60,301 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही है। यह पिछले बंद रेट से लगभग 10,400 रुपये की तेजी दिखाता है। शुरुआती कारोबार में सिल्वर 2,64,885 रुपये के उच्च स्तर तक भी गया।

    शहरवार सोने का रेट
    दिल्ली:
    24 कैरेट: ₹1,56,740
    22 कैरेट: ₹1,43,690
    18 कैरेट: ₹1,17,590

    मुंबई:
    24 कैरेट: ₹1,56,590
    22 कैरेट: ₹1,43,540
    18 कैरेट: ₹1,17,440

    चेन्नई:
    24 कैरेट: ₹1,57,300
    22 कैरेट: ₹1,44,190
    18 कैरेट: ₹1,23,490

    कोलकाता:
    24 कैरेट: ₹1,56,590
    22 कैरेट: ₹1,43,540
    18 कैरेट: ₹1,17,440

    अहमदाबाद:
    24 कैरेट: ₹1,56,640
    22 कैरेट: ₹1,43,590
    18 कैरेट: ₹1,17,490

    लखनऊ:
    24 कैरेट: ₹1,56,740
    22 कैरेट: ₹1,43,690
    18 कैरेट: ₹1,17,590

    पटना:
    24 कैरेट: ₹1,56,640
    22 कैरेट: ₹1,43,590
    18 कैरेट: ₹1,17,490

    हैदराबाद:
    24 कैरेट: ₹1,56,590
    22 कैरेट: ₹1,43,540
    18 कैरेट: ₹1,17,440

  • आतंकवाद के मुद्दे पर मिला इस देश का साथ … PM मोदी बोले- भारत का संदेश स्पष्ट

    आतंकवाद के मुद्दे पर मिला इस देश का साथ … PM मोदी बोले- भारत का संदेश स्पष्ट

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने रविवार को कहा कि आतंकवाद (Terrorism) के मुद्दे पर भारत (Indore) का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है। भारत इस मुद्दे पर न तो दोहरे मापदंड अपनाता है और न ही किसी तरह का समझौता करता है। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम (Malaysian Prime Minister Anwar Ibrahim) के साथ बैठक के बाद उन्होंने यह बात कही। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने सीमापार आतंकवाद की कड़ी निंदा की।

    दोनों ने आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाने और इससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयासों पर जोर दिया। दोनों ने आतंक के वित्तपोषण पर अंकुश लगाने और नई तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।

    मलेशिया दौरे के आखिरी दिन विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गजों से मुलाकात के बाद PM मोदी ने कहा, भारत और मलेशिया के बीच विशेष संबंध हैं और दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष आतंकवाद और खुफिया क्षेत्र में सहयोग एवं समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में तालमेल मजबूत करेंगे। साथ ही रक्षा सहयोग को भी और व्यापक बनाया जाएगा। PM मोदी ने कहा कि AI और डिजिटल तकनीक के साथ सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाया जाएगा।

    PM मोदी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्षेत्र दुनिया की विकास धुरी के रूप में उभर रहा है और भारत आसियान देशों के साथ मिलकर इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मलेशियाई प्रधानमंत्री इब्राहिम ने कहा कि भारत और मलेशिया व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और रक्षा सहयोग को लगातार विस्तार दे रहे हैं। उन्होंने वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भारत की तेज प्रगति की सराहना की।


    उद्योगपतियों से मुलाकात की

    PM मोदी ने मलेशिया के चार प्रमुख उद्योगपतियों से मुलाकात कर भारतीय अर्थव्यवस्था में उनकी बढ़ती दिलचस्पी की सराहना की। प्रधानमंत्री ने भारत और मलेशिया के बीच बढ़ते कारोबारी रिश्तों को सकारात्मक बताया और कहा कि भारतीय विकास यात्रा में मलेशियाई कंपनियों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने पेट्रोनास के प्रमुख तेंगकु मोहम्मद तौफिक, बरजाया कॉरपोरेशन के संस्थापक विंसेंट टैन, खजानाह नेशनल के प्रबंध निदेशक अमीरुल फैसल वान जाहिर और फिसन इलेक्ट्रॉनिक्स के संस्थापक पुआ खेन सेंग से अलग-अलग मुलाकात की।


    भारतीय मूल के नेताओं से मिले

    PM मोदी ने भारतीय मूल के मंत्रियों, सांसदों, सीनेटरों से मुलाकात की और भारत-मलेशिया संबंध मजबूत करने में उनकी भूमिका की सराहना की। PM मोदी ने कहा कि इन नेताओं का भारत से भावनात्मक जुड़ाव स्पष्ट दिखता है और सार्वजनिक जीवन में उनकी उपलब्धियां गर्व की बात हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की भागीदारी भारत-मलेशिया मित्रता के समर्थन को दर्शाती है।


    भारत-मलेशिया को जोड़ती है तमिल

    PM मोदी ने कहा, भारत और मलेशिया तमिल भाषा के प्रति साझा लगाव से जुड़े हुए हैं। मलेशिया में तमिल की मजबूत मौजूदगी शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक जीवन में साफ दिखाई देती है। मलेशिया में भारतीय मूल के करीब 30 लाख लोग रहते हैं, जो दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी है। इनमें बड़ी संख्या तमिल मूल के लोगों की है।


    आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिक से मिले

    PM मोदी आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिक जयराज राजा राव से भी मिले। उन्होंने उनके साहस, विरासत और बलिदान के लिए देशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज के वीरों का साहस भारत की नियति को आकार देने में अहम रहा। राव से मिलना बहुत विशेष रहा और उनके अनुभव बेहद प्रेरणादायक हैं।


    ‘इब्राहिम भी एमजीआर के बड़े प्रशंसक’

    PM मोदी ने कहा कि उनके मलेशियाई समकक्ष अनवर इब्राहिम भी तमिल अभिनेता और पूर्व मुख्यमंत्री एमजीआर के बड़े प्रशंसक हैं। उन्होंने यह टिप्पणी तब की जब इब्राहिम द्वारा आयोजित लंच के दौरान एमजीआर की फिल्म नालै नमथे का गीत प्रस्तुत किया गया। एमजीआर यानी मरुथुर गोपालन रामचंद्रन प्रसिद्ध अभिनेता, निर्देशक और निर्माता रहे हैं। उन्होंने तमिलनाडु में एआईएडीएमके की स्थापना की और बाद में राज्य के मुख्यमंत्री बने। 1975 में रिलीज हुई नालै नमथे उनकी लोकप्रिय फिल्मों में शामिल है।

  • चंद्रयान-4 मिशन धरती पर वापस लौटेगा भारत, ISRO ने लैंडिंग के लिए खोजी जगह

    चंद्रयान-4 मिशन धरती पर वापस लौटेगा भारत, ISRO ने लैंडिंग के लिए खोजी जगह


    नई दिल्ली।
    चंद्रयान-4 मिशन (Chandrayaan-4 Mission) को लेकर ISRO को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इसरो के स्पेस ऐप्लिकेशन सेंटर (Space Applications Center-SAC) ने अब तक के सबसे कठिन मून मिशन के लिए लैंडिंग की जगह खोज ली है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लगभग 1 वर्ग किलोमीटर का पैच है जहां चंद्रयान-4 की सफल लैंडिंग करवाई जा सकती है। बता दें कि यह इसरो का पहला रिटर्न मिशन होगा। यानी चंद्रयान-4 को वापस धरती पर भी लाना है।

    चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से भजी गई हाई रिजोल्यूशन तस्वीरों से इस जगह को खोजा है जहां चंद्रयान-4 को उतारा जा सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह पूरा अध्ययन अमिताभ के सुरेश, अजय के पाराशर, कनन वी अय्यर, अब्दुल एस, श्वेता वर्मा त्रिवेदी और नितांत दुबे ने की है। इस मिशन में प्रोपल्सन मॉड्यूल के अलावा डिसेंटर और असेंडर मॉड्यूल भी होंगे। इसके अलावा ट्रांसफर मॉड्यूल और रीएंट्री मॉड्यूल भी काम करेगा।


    क्या होगी चंद्रयान- 4 की खासियत

    यह मिशन भारत के लिए बहुत खास होने वाला है। इसका उद्देश्य चंद्रमा पर लैंडिंग करके मिट्टी और पत्थरों के सैंपल इकट्ठे करना और फिर वापस धरती पर लौटना है। इसरो का चंद्रयान -3 मिशन पूरी तरह से सफल हुआ था। इसके बाद इसरो ने यह कठिन कदम उठाने का फैसला किया है। चंद्रयान-4 अगर सफलतापूर्वक वापस लौटता है तो आगे मानव मिशन का भी रास्ता खुल जाएगा।


    चंद्रयान-4 कहां उतरेगा

    वैज्ञानिकों ने ऑर्बिटर से भेजी गई तस्वीरों में से चार जगहों के बारे में अध्ययन किया था। इसमें एमएम-4 नाम की जगह को सुरक्षित पाया गया है। यह जगह नॉविस माउटन पहाड़ी के पास है लेकिन समतल है। ऐसे में लैंडर को नुकसान पहु्ंचने का खतरा नहीं है। इस जगह पर सूरज की रोशनी भी अच्छी रहती है। ऐसे में लैंडिंग के लिए जगह उपयुक्त है। यहां बड़े गड्ढे ना होने की वजह से लैंडर को चलने में भी आसानी होगी।

    अब तक के अध्ययन से इतना स्पष्ट हो गया है कि इसी इलाके में चंद्रयान-4 को उतारा जाएगा। यह शिव-शक्ति पॉइंट से बहुत दूर नहीं है। वहीं इस इलाके में गड्ढों के पास अंधेरा रहता है। इसरो का कहना है कि इस इलाके में पानी या बर्फ के सैंपल भी मिल सकतेहैं। इसके अलावा यहां से मिले सैंपल से चंद्रमा के निर्माण और यहां उपस्थिति संसाधनों के बारे में जानकारी मिलेगी।

  • Trade Deal: अगले 5 साल में 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा भारत… क्या US कंपनियां पूरी कर पाएंगी डिमांड?

    Trade Deal: अगले 5 साल में 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा भारत… क्या US कंपनियां पूरी कर पाएंगी डिमांड?


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Historic Trade Agreements) के तहत भारत (India) ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर लगभग 41 लाख करोड़ रुपये के मूल्य के सामान आयात करने की जो प्रतिबद्धता जताई है वह वैश्विक व्यापार की दिशा बदल सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस लक्ष्य की सफलता केवल भारतीय कंपनियों (Indian Companies) के ऑर्डर देने पर नहीं, बल्कि अमेरिकी सप्लायर्स की सप्लाई क्षमता पर भी निर्भर करेगी। शनिवार को जारी संयुक्त बयान के बाद अब इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि आखिर किन क्षेत्रों में भारत अपनी खरीदारी बढ़ाएगा और अमेरिका के सामने क्या चुनौतियां होंगी।

    आयात के इस लक्ष्य को हासिल करने में ऊर्जा क्षेत्र सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा। आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में भारत ने अमेरिका से करीब 40 अरब डॉलर का आयात किया, जिसमें से 11 अरब डॉलर केवल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद थे। यह पिछले साल की तुलना में 35% अधिक है।

    भारत अब अपनी तेल जरूरतों के लिए रूस के बजाय अमेरिकी तेल को प्राथमिकता देने की ओर बढ़ रहा है। भारत अब इंडोनेशिया से आने वाले ‘कोकिंग कोल’ की जगह अमेरिकी कोयले को तरजीह दे सकता है। अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी कोयला न केवल गुणवत्ता में बेहतर है, बल्कि कीमत में भी प्रतिस्पर्धी है। भारतीय तेल कंपनियों ने पहले ही अधिक तरल प्राकृतिक गैस (LNG) की खरीद के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।


    हाई-टेक और विमानन

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, चिप्स, सेमीकंडक्टर और हवाई जहाज जैसे हाई-टेक उत्पाद इस 500 अरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने की कुंजी होंगे। भारत अकेले बोइंग को 70 से 80 अरब डॉलर के नए ऑर्डर देने की तैयारी में है। डेटा सेंटर्स और AI के लिए आवश्यक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स और हाई-एंड चिप्स की खरीद में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है।


    सप्लाई चेन और पेंडिंग ऑर्डर्स जैसी अड़चनें

    इस भव्य योजना की राह में कुछ तकनीकी अड़चनें भी हैं। उदाहरण के तौर पर, बोइंग जैसी कंपनियों के पास पहले से ही भारी ऑर्डर का बैकलॉग है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अमेरिकी कंपनियां समय पर डिलीवरी दे पाएंगी? इसी तरह, वैश्विक बाजार में सेमीकंडक्टर चिप्स की भारी मांग है। भारतीय खरीदारों को इन उत्पादों को हासिल करने के लिए वैश्विक कतार में लगना होगा। गोयल ने कहा, “यह अमेरिकी विक्रेताओं पर निर्भर करता है कि वे भारतीय खरीदारों को ऐसा प्रस्ताव दें जिसे वे ठुकरा न सकें। 100 अरब डॉलर प्रति वर्ष का लक्ष्य पहले ही साल में शायद पूरा न हो, लेकिन हम उसी दिशा में बढ़ रहे हैं।”


    100 अरब डॉलर प्रति वर्ष का रोडमैप

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत सालाना 100 अरब डॉलर का आयात अमेरिका से करता है तो अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार होने के साथ-साथ सबसे बड़ा ऊर्जा आपूर्तिकर्ता भी बन सकता है। इससे भारत की रूस पर निर्भरता कम होगी और अमेरिका के साथ उसके रणनीतिक संबंध और गहरे होंगे। यह समझौता केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि एक बड़ा कूटनीतिक दांव है। जहां भारत को 18% कम टैरिफ का लाभ मिल रहा है, वहीं अमेरिका को 500 अरब डॉलर का सुनिश्चित बाजार मिल गया है। अब सफलता इस बात पर टिकी है कि अमेरिकी फैक्ट्रियां और तेल के कुएं भारत की इस विशाल मांग को कितनी तेजी से पूरा करते हैं।