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  • पेट्रोल के बाद अब खाद्य तेल ने बढ़ाई महंगाई, आयात बिल 1.75 लाख करोड़ पार होने का अनुमान, रसोई का बजट फिर बिगड़ने के आसार

    पेट्रोल के बाद अब खाद्य तेल ने बढ़ाई महंगाई, आयात बिल 1.75 लाख करोड़ पार होने का अनुमान, रसोई का बजट फिर बिगड़ने के आसार

    नई दिल्ली। पेट्रोल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के बीच अब खाद्य तेलों की महंगाई ने आम लोगों की रसोई का बजट भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। सरसों, सोयाबीन, मूंगफली और अन्य खाद्य तेलों की कीमतों में हाल के दिनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की कमजोरी, आयात लागत में बढ़ोतरी और घरेलू उत्पादन की सीमित उपलब्धता के कारण खाद्य तेलों की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। आगामी त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की संभावना के चलते कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    देश में खाद्य तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है। उद्योग से जुड़े संगठनों के अनुसार पिछले वर्ष भारत का खाद्य तेल आयात बिल लगभग 1.61 लाख करोड़ रुपये रहा था, जबकि मौजूदा वित्तीय वर्ष में इसके बढ़कर 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आयात पर अत्यधिक निर्भरता देश के लिए आर्थिक चुनौती बनती जा रही है और इस स्थिति से निपटने के लिए घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देना आवश्यक है।

    बाजार में विभिन्न खाद्य तेलों की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई है। सरसों तेल के भाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि सोयाबीन तेल, मूंगफली तेल और अन्य खाद्य तेलों के दाम भी ऊपर गए हैं। कारोबारियों के अनुसार सरसों की मांग बढ़ने और मंडियों में सीमित आवक के कारण कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना है। वहीं सोयाबीन की आवक में कमी आने से उससे जुड़े उत्पाद भी महंगे हुए हैं। इसका सीधा असर खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

    उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को दीर्घकालिक समाधान के रूप में तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा। इसके लिए बेहतर बीज, आधुनिक खेती, प्रसंस्करण क्षमता और किसानों को प्रोत्साहन देने जैसी योजनाओं को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि घरेलू उत्पादन बढ़ता है तो आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और उपभोक्ताओं को कीमतों में स्थिरता का लाभ मिलेगा।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि वैश्विक बाजार में कच्चे खाद्य तेलों की कीमतों, शिपिंग लागत और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने से आयातित खाद्य तेल और महंगे हो जाते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करती हैं।

    हालांकि बाजार विश्लेषकों का कहना है कि भविष्य में कीमतों की दिशा घरेलू उत्पादन, वैश्विक आपूर्ति, मौसम और सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगी। यदि तिलहन की अच्छी पैदावार होती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें स्थिर रहती हैं तो खाद्य तेलों की महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण संभव है। फिलहाल उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है और आने वाले महीनों में बाजार की स्थिति पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • ग्लासगो में खेलों का महासंग्राम शुरू, मीराबाई-लवलीना बनीं भारत की शान, कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार शुभारंभ

    ग्लासगो में खेलों का महासंग्राम शुरू, मीराबाई-लवलीना बनीं भारत की शान, कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार शुभारंभ


    नई दिल्ली । स्कॉटलैंड के ऐतिहासिक शहर ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का शानदार आगाज हो गया। रंगों रोशनी संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी भव्य उद्घाटन समारोह ने दुनिया भर से पहुंचे खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। ओवीओ हाइड्रो एरिना में आयोजित इस समारोह में स्कॉटलैंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक खेल भावना का अद्भुत संगम देखने को मिला। इसी के साथ अगले 11 दिनों तक चलने वाले खेलों के इस महाकुंभ का औपचारिक शुभारंभ हुआ जहां दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पदकों के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे।

    कॉमनवेल्थ की परंपरा के अनुरूप ब्रिटेन के सम्राट किंग चार्ल्स तृतीय ने आधिकारिक रूप से खेलों का उद्घाटन किया। वर्ष 2014 के बाद एक बार फिर ग्लासगो को इन प्रतिष्ठित खेलों की मेजबानी का अवसर मिला है। उद्घाटन समारोह में स्कॉटलैंड की संस्कृति लोक परंपराओं और आधुनिक कला का अनूठा प्रदर्शन हुआ। प्रसिद्ध कलाकारों केटी टुनस्टॉल नाथन इवांस और सेंट फीनिक्स की शानदार प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी यादगार बना दिया। संगीत नृत्य और रोशनी के शानदार संयोजन ने पूरे माहौल को उत्साह से भर दिया।

    भारत के लिए उद्घाटन समारोह बेहद गर्व का क्षण साबित हुआ जब ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन ने भारतीय दल का नेतृत्व करते हुए परेड ऑफ नेशंस में तिरंगा थामा। जैसे ही भारतीय दल एरिना में पहुंचा पूरा स्टेडियम तालियों और उत्साह से गूंज उठा। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ने राष्ट्रीय ध्वज को गर्व के साथ थामा जबकि टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ बैटन के साथ भारत की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व किया। दोनों खिलाड़ियों की मौजूदगी ने भारतीय दल का उत्साह कई गुना बढ़ा दिया।

    इस बार भारत ने 125 सदस्यीय मजबूत दल ग्लासगो भेजा है जो पैरा खेलों सहित 13 विभिन्न खेलों में अपनी चुनौती पेश करेगा। हालांकि इस संस्करण में प्रतियोगिताओं की संख्या पिछले संस्करणों की तुलना में कम रखी गई है लेकिन भारतीय दल में कई ओलंपिक और विश्व स्तरीय पदक विजेता खिलाड़ियों की मौजूदगी देश की पदक उम्मीदों को मजबूत बनाती है। भारत का लक्ष्य एक बार फिर कॉमनवेल्थ खेलों में अपनी खेल शक्ति का दम दिखाना और पदक तालिका में मजबूत स्थान हासिल करना है।

    दिलचस्प बात यह रही कि उद्घाटन समारोह से पहले ही भारत का अभियान शुरू हो चुका था। भारतीय लॉन बॉल्स टीम सबसे पहले मैदान पर उतरी और उससे बर्मिंघम 2022 जैसे ऐतिहासिक प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद की जा रही है। पिछली बार लॉन बॉल्स में भारत ने ऐतिहासिक सफलता हासिल कर पूरे देश को गौरवान्वित किया था और इस बार भी खिलाड़ियों से वैसी ही उम्मीदें हैं।

    कॉमनवेल्थ गेम्स के 23वें संस्करण में 74 देशों और क्षेत्रों के हजारों खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिताएं 10 खेलों में आयोजित की जाएंगी जिनके मुकाबले स्कॉटिश इवेंट कैंपस स्कॉटस्टाउन स्टेडियम टोलक्रॉस इंटरनेशनल स्विमिंग सेंटर और ग्लासगो एरिना जैसे विश्वस्तरीय मैदानों पर खेले जाएंगे। आयोजन का दायरा भले ही पहले की तुलना में थोड़ा छोटा हो लेकिन प्रतियोगिता का स्तर पहले की तरह बेहद रोमांचक और चुनौतीपूर्ण रहने की उम्मीद है।

    भारत की नजरें इस बार कई बड़े सितारों पर टिकी होंगी। ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा एथलेटिक्स में देश की सबसे बड़ी उम्मीद होंगे जबकि मीराबाई चानू वेटलिफ्टिंग में और लवलीना बोरगोहेन बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक की मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। इसके अलावा भारतीय मुक्केबाजी दल भी शानदार प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है। उद्घाटन समारोह के साथ अब नजरें मैदान पर होने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा पर टिक गई हैं जहां पदकों रिकॉर्ड और नए इतिहास का इंतजार पूरी दुनिया को रहेगा।

  • वैभव की विस्फोटक फिफ्टी और गेंदबाजों का कमाल, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर रचा नया रिकॉर्ड

    वैभव की विस्फोटक फिफ्टी और गेंदबाजों का कमाल, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर रचा नया रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज की शुरुआत टीम इंडिया ने बेहद शानदार अंदाज में की। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए पहले मुकाबले में भारत ने मेजबान टीम को 7 विकेट से करारी शिकस्त देते हुए सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। इस जीत की सबसे बड़ी खासियत 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी रही जिन्होंने अपनी तूफानी पारी से मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। भारत ने 126 रन के लक्ष्य को सिर्फ 13.2 ओवर में हासिल कर लिया और 40 गेंद शेष रहते मुकाबला समाप्त कर टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 120 से अधिक रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए गेंदों के लिहाज से अपनी चौथी सबसे बड़ी जीत दर्ज की।

    इस मुकाबले में पहले गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी को पूरी तरह दबाव में रखा। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मेजबान टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और पहली ही गेंद पर ब्रायन बेनेट बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। इसके बाद भी विकेटों का पतन लगातार जारी रहा और 32 रन तक जिम्बाब्वे अपने चार प्रमुख बल्लेबाज गंवा चुका था। भारतीय गेंदबाजों ने नई गेंद से सटीक लाइन और लेंथ के साथ मेजबान बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

    मुश्किल परिस्थिति में रेयान बर्ल और वेस्ली मधेवेरे ने पारी को संभालने का प्रयास किया। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को कुछ हद तक संकट से बाहर निकाला। मधेवेरे ने बाद में तादिवानाशे मारुमानी के साथ भी उपयोगी रन जोड़े जिससे जिम्बाब्वे का स्कोर सम्मानजनक स्थिति तक पहुंच सका। मधेवेरे ने 39 रन बनाए जबकि मारुमानी 27 रन बनाकर नाबाद लौटे। रेयान बर्ल ने 26 रन का योगदान दिया और जिम्बाब्वे ने निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट पर 125 रन बनाए।

    भारत की ओर से युवा तेज गेंदबाज मयंक यादव और प्रिंस यादव ने शानदार गेंदबाजी करते हुए दो-दो विकेट अपने नाम किए। शिवम दुबे और रवि बिश्नोई ने भी एक-एक विकेट लेकर जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी को कभी खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। अनुशासित गेंदबाजी के दम पर भारतीय टीम ने लक्ष्य को सीमित रखने में अहम भूमिका निभाई।

    126 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत भले ही अभिषेक शर्मा के जल्दी आउट होने से हुई लेकिन इसके बाद वैभव सूर्यवंशी ने अपने आक्रामक तेवर से मैच का रंग बदल दिया। उन्होंने ईशान किशन के साथ तेज साझेदारी करते हुए जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। वैभव ने सिर्फ 19 गेंदों में 50 रन की विस्फोटक पारी खेली जिसमें चार चौके और चार शानदार छक्के शामिल रहे। इस अर्धशतक के साथ उन्होंने इतिहास रचते हुए 15 साल 118 दिन की उम्र में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक लगाने वाले दुनिया के सबसे युवा पुरुष बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल किया।

    वैभव के आउट होने के बाद ईशान किशन ने 35 रन की उपयोगी पारी खेली जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर ने नाबाद 28 रन बनाकर जीत की औपचारिकता पूरी की। अंत में तिलक वर्मा ने भी नाबाद रहकर टीम को आसान जीत तक पहुंचाया। जिम्बाब्वे की ओर से ब्लेसिंग मुजरबानी ने दो विकेट लिए जबकि रिचर्ड नगारवा को एक सफलता मिली।

    यह मुकाबला कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी खास रहा क्योंकि बतौर कप्तान उन्हें लगातार निराशाओं के बाद पहली टी20 अंतरराष्ट्रीय जीत मिली। इससे पहले आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब भारत की नजरें शेष दो मुकाबलों में जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने पर होंगी। 25 और 26 जुलाई को इसी मैदान पर खेले जाने वाले अगले दोनों मैचों में भारतीय टीम अपने शानदार प्रदर्शन को बरकरार रखने के इरादे से उतरेगी जबकि जिम्बाब्वे वापसी की कोशिश करेगा।

  • वैभव सूर्यवंशी का ऐतिहासिक अर्धशतक, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराया

    वैभव सूर्यवंशी का ऐतिहासिक अर्धशतक, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराया


    हरारे।
    युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की शानदार अर्धशतकीय पारी की बदौलत भारत ने पहले टी-20 मुकाबले में जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर तीन मैचों की श्रृंखला में 1-0 की बढ़त बना ली। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए मुकाबले में भारत ने 126 रन का लक्ष्य केवल 13.2 ओवर में तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया।

    मैच के सबसे बड़े आकर्षण वैभव सूर्यवंशी रहे। उन्होंने 15 वर्ष 118 दिन की उम्र में टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अर्धशतक लगाकर नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही वह टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने जिब्राल्टर के लुई ब्रूस का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 16 वर्ष 56 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी।

    यह जीत श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय टीम की पहली अंतरराष्ट्रीय जीत भी रही। इससे पहले उनकी कप्तानी में भारत को आयरलैंड के खिलाफ 2-0 और इंग्लैंड के खिलाफ 4-0 से हार का सामना करना पड़ा था।

    इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करते हुए जिम्बाब्वे ने निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट पर 125 रन बनाए। टीम की ओर से वेस्ली मधेवेरे ने सर्वाधिक 39 रन बनाए, जबकि तदिवानाशे मरुमानी ने नाबाद 27 रन की उपयोगी पारी खेली।

    भारतीय गेंदबाजों ने अनुशासित प्रदर्शन किया। मयंक यादव और प्रिंस यादव ने दो-दो विकेट झटके। मयंक यादव ने मैच की पहली ही गेंद पर ब्रायन बेनेट को आउट कर भारत को शानदार शुरुआत दिलाई और बाद में डियोन मायर्स का विकेट भी अपने नाम किया। शिवम दुबे और रवि बिश्नोई को एक-एक सफलता मिली, जबकि मधेवेरे रन आउट हुए।

    आसान लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। वैभव सूर्यवंशी की रिकॉर्डतोड़ पारी ने टीम की जीत सुनिश्चित करने के साथ भारतीय क्रिकेट को एक नया युवा सितारा भी दे दिया।

  • देशभर में चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने याद किया अमर बलिदान और राष्ट्रसेवा

    देशभर में चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने याद किया अमर बलिदान और राष्ट्रसेवा

    नई दिल्ली । महान क्रांतिकारी और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर गुरुवार को पूरे देश में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उनके साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति को याद करते हुए उन्हें नमन किया। नेताओं ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का जीवन आज भी देशवासियों, विशेषकर युवाओं के लिए राष्ट्रसेवा, स्वाभिमान और समर्पण का प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

    नई दिल्ली से जारी अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चंद्रशेखर आजाद के निडर साहस और अटूट देशभक्ति का गौरवपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि आजाद ने अनगिनत युवा भारतीयों को देश के लिए समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा दी और उनका संकल्प आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के लिए उनका संघर्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आजीवन संघर्ष किया और भारतीयों के मन में स्वाभिमान, आत्मविश्वास तथा राष्ट्रचेतना का संचार किया। उन्होंने कहा कि आजाद ने अपने अदम्य साहस, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान से स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की तथा युवाओं के हृदय में मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना जगाई। उनका बलिदानी जीवन देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा।

    केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए आजाद ने त्याग, संघर्ष और बलिदान की जो अमर गाथा लिखी, वह आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने उन्हें भारत माता का अनन्य उपासक और महान क्रांतिकारी बताते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।

    देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने संदेशों में चंद्रशेखर आजाद के जीवन और योगदान को याद किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके प्रसिद्ध उद्घोष का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्रहित में कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उनके साहस, स्वाभिमान और सर्वोच्च बलिदान को प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चंद्रशेखर आजाद को प्रदेश की माटी का गौरव बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति समर्पण से स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा दी। वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि उनका त्याग, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति देशवासियों को हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देते रहेंगे। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी उनके बलिदान और क्रांतिकारी जीवन को नमन करते हुए कहा कि उनका संघर्ष और राष्ट्रप्रेम आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।

    चंद्रशेखर आजाद भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन महान सेनानियों में शामिल हैं जिन्होंने अपने अदम्य साहस, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान से देश की आजादी की लड़ाई को नई गति दी। उनका जीवन केवल इतिहास का गौरवशाली अध्याय नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और देश के प्रति समर्पण का ऐसा संदेश है, जो आज भी देश के युवाओं को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देता है।

  • जंतर मंतर से संसद तक गूंजा आंदोलन, राहुल गांधी के प्रदर्शन के बाद सरकार ने वांगचुक से की मुलाकात

    जंतर मंतर से संसद तक गूंजा आंदोलन, राहुल गांधी के प्रदर्शन के बाद सरकार ने वांगचुक से की मुलाकात


    नई दिल्ली । जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन ने देश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। लंबे समय तक आंदोलन को सीमित मानकर चल रही केंद्र सरकार ने अब अपना रुख बदलते हुए सक्रिय पहल शुरू कर दी है। राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और सरकार ने न केवल अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से संपर्क किया बल्कि आंदोलन में घायल छात्रों से मिलने के लिए केंद्रीय मंत्रियों को अस्पताल भी भेजा। इसके साथ ही संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कराने की विपक्ष की मांग को भी सरकार ने स्वीकार कर लिया।

    नीट पेपर लीक और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ आंदोलन शुरुआती दिनों में सीमित दायरे में दिखाई दे रहा था। जंतर मंतर पर कम संख्या में प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी को देखते हुए माना जा रहा था कि यह आंदोलन ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पाएगा। लेकिन जैसे जैसे छात्रों का समर्थन बढ़ा और संसद मार्च के बाद आंदोलन ने नया स्वरूप लिया वैसे वैसे राजनीतिक माहौल भी बदलने लगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी के धरने ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी। इसके बाद सरकार ने तेजी से अपनी रणनीति में बदलाव किया। कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मिलने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह पहुंचे और उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की। इससे पहले आंदोलन के प्रतिनिधियों को सरकार से मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा था लेकिन बाद में परिस्थितियां तेजी से बदल गईं।

    सरकार ने संसद में इस पूरे मुद्दे पर चर्चा के लिए भी सहमति जताई। हालांकि विपक्ष ने इस पर नई शर्त रखते हुए कहा कि चर्चा तभी सार्थक होगी जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

    इस बीच सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा करते हुए बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर या व्यक्तिगत रूप से मिलकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने लिखा कि सभी ने उन्हें याद दिलाया है कि देश और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अभी बाकी है। वांगचुक ने कहा कि वह भी जीना चाहते हैं और अपने छात्रों तथा शिक्षा से जुड़े कार्यों में जल्द लौटना चाहते हैं लेकिन आंदोलन के उद्देश्यों को लेकर उनकी प्रतिबद्धता बनी हुई है।

    विश्लेषकों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर युवाओं में पहले से ही असंतोष था। यही कारण है कि आंदोलन धीरे धीरे व्यापक समर्थन हासिल करता गया और सरकार को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    फिलहाल सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है लेकिन आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि संसद में होने वाली चर्चा और सरकार के अगले कदम इस पूरे विवाद का क्या समाधान निकालते हैं।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, 3-4 महीने में साइनिंग की उम्मीद, जाने क्‍यों अटका समझौता?

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, 3-4 महीने में साइनिंग की उम्मीद, जाने क्‍यों अटका समझौता?


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित ट्रेड डील अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, समझौते की शर्तों पर सहमति बन चुकी है और दस्तावेज भी तैयार हैं। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो अगले तीन से चार महीनों के भीतर दोनों देशों के बीच इस अहम व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

    आखिर देरी क्यों हो रही है?
    मनीला में आयोजित आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील की शर्तें अंतिम रूप ले चुकी हैं। हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर फिलहाल अमेरिका में चल रही सेक्शन 301 (Section 301) ट्रेड जांच के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।

    अधिकारी के मुताबिक, भारत सहित करीब 60 देशों से जुड़े मामलों की जांच इस प्रावधान के तहत चल रही है, जिसके नतीजे अगले दो से तीन सप्ताह में आने की संभावना है। जांच पूरी होने के बाद अमेरिका भारत समेत अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।

    क्या है सेक्शन 301?
    अमेरिकी ट्रेड एक्ट-1974 के तहत सेक्शन 301 अमेरिका को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी देश की व्यापारिक नीतियों की जांच कर सके। यदि जांच में अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभाव या अनुचित व्यापारिक व्यवहार पाया जाता है तो अमेरिका उस देश पर व्यापारिक प्रतिबंध, अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) या अन्य कार्रवाई कर सकता है।

    हाल के दिनों में अमेरिका ने इसी प्रावधान के तहत ब्राजील और कनाडा पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। ऐसे में माना जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ व्यापारिक वार्ता में भी इस प्रावधान का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर सकते हैं।

    टैरिफ भी बना बड़ी चुनौती
    भारत-अमेरिका ट्रेड वार्ता के दौरान टैरिफ का मुद्दा भी प्रमुख बाधाओं में शामिल रहा है। अमेरिका पहले ही कई देशों पर 12.5 प्रतिशत तक नए टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दे चुका है। इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने जेनेरिक दवाओं पर भी चरणबद्ध तरीके से 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की योजना की घोषणा की है। प्रस्ताव के अनुसार पहले दो वर्षों तक टैरिफ में राहत, उसके बाद एक वर्ष के लिए 100 प्रतिशत और फिर 200 प्रतिशत तक शुल्क लागू किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका सेक्शन 301 और टैरिफ नीति के जरिए अपनी शर्तों के अनुरूप समझौता करना चाहता है। वहीं भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह केवल ऐसे व्यापारिक समझौतों को स्वीकार करेगा, जो उसके राष्ट्रीय और आर्थिक हितों के अनुरूप हों।

  • क्रांति गौड़ ने अपनी प्रतिभा के दम पर दुनिया में बढ़ाया भारत का मान: मुख्यमंत्री डॉ यादव

    क्रांति गौड़ ने अपनी प्रतिभा के दम पर दुनिया में बढ़ाया भारत का मान: मुख्यमंत्री डॉ यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बेटों के साथ-साथ हमारी बेटियां भी किसी से कम नहीं है। लार्ड्स के ‘टेस्ट ऑनर्स बोर्ड’ पर अपना नाम दर्ज कराने वाली देश की पहली महिला क्रिकेटर मध्य प्रदेश की बेटी क्रांति गौड़ ने अपनी प्रतिभा और कौशल के दम पर पूरे देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार शाम को अपने निवास स्थित संवाद भवन में आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।उन्होंने मध्य प्रदेश की सुप्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर सुश्री क्रांति गौड़ और उनके पिता नरसिंह एवं भाई महेन्द्र सिंह को भी सम्मानित किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर, खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दे रही है। राज्य में ‘खेलो बढ़ो अभियान’ के अंतर्गत सांसद कप, विधायक कप के माध्यम से प्रदेश के हर विधानसभा और तहसील स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। राज्य सरकार के इसी संकल्प का परिणाम है कि आज प्रदेश के खिलाड़ी क्रिकेट टूर्नामेंट्स, ओलिम्पिक गेम्स, खेलो इंडिया गेम्स में पदक जीत कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।

    क्रांति लेकर आईं हैं प्रदेश में खेल क्रांति

    उन्होंने क्रिकेटर क्रांति गौड़ को बधाई देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश की लाड़ली बिटिया और हमारी छोटी बहन क्रांति प्रदेश में नई खेल क्रांति लेकर आईं हैं। मुख्यमंत्री ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से क्रिकेटर क्रांति गौड़ को तीन लाख रुपये का चेक और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लार्ड्स के ऐतिहासिक क्रिकेट ग्राउंड पर बुंदेलखण्ड की गौरव क्रांति गौड़ के सात विकेट लेकर बेहतरीन प्रदर्शन की मुक्तकंठ से सराहना की तथा क्रांति को इस बड़ी उपलब्धि के लिए अपनी ओर से दो लाख रूपये की सम्मान राशि का चेक भी सौंपा।

    परिवार के सपोर्ट के बिना संभव नहीं था ब्लू जर्सी पहनना : क्रांति गौड़

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी क्रांति गौड़ ने क्रिकेटरों एवं मप्र खेल अकादमी के युवा खिलाड़ियों से संवाद भी किया। क्रांति गौड़ ने कहा कि उन्होंने बचपन में अनेक संघर्षों के बीच यह तय कर लिया था कि उन्हें टीम इंडिया की ब्लू जर्सी पहननी है। बुंदेलखंड के एक छोटे से गांव से क्रिकेट के अंतरराष्ट्रीय मंच तक की यात्रा माता-पिता और परिवार के सहयोग एवं समर्थन के बिना पूरी नहीं हो सकती थी।

    क्रांति ने कहा कि उनके सपने को पूरा करने के लिए परिवार ने बारिश के मौसम में भी टपकते मकान के नीचे और रसोई में राशन नहीं होने जैसे मुश्किल दिन भी गुजारे हैं। अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए उन्होंने ठान लिया था कि अब कुछ भी हो देश और अपनों के लिए कुछ कर गुजरना है।

    कार्यक्रम में खेल एवं युवक कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, खेल सचिव संजीव सिंह, खेल संचालक अंशुमान सिंह यादव सहित खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में खिलाड़ी भी उपस्थित थे।

    गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की बेटी भारतीय टीम की तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने इंग्लैंड के खिलाफ ऐतिहासिक लॉर्ड्स टेस्ट में दोनों पारियों में कुल 7 विकेट चटकाए थे। उन्होंने मैच की पहली पारी में शानदार गेंदबाजी करते हुए 37 रन देकर 5 विकेट लिए, जबकि दूसरी पारी में दो विकेट चटकाए। इस मैच में 7 विकेट लेने पर उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। इसके साथ ही क्रांति गौड़ प्रतिष्ठित लॉर्ड्स के ‘ऑनर बोर्ड’ (सम्मान पट्टिका) पर अपना नाम दर्ज कराने वाली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर बनीं।

  • ई20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, पुराने वाहनों में मामूली माइलेज गिरने की बात स्वीकार, इंजन नुकसान के दावों को बताया निराधार

    ई20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, पुराने वाहनों में मामूली माइलेज गिरने की बात स्वीकार, इंजन नुकसान के दावों को बताया निराधार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने ई20 पेट्रोल को लेकर चल रही चर्चाओं और आशंकाओं के बीच स्पष्ट किया है कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग से ई10 मानक के अनुसार तैयार किए गए कुछ पुराने वाहनों में माइलेज में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन इससे इंजन को नुकसान पहुंचने या वाहन के बड़े पैमाने पर खराब होने का कोई सत्यापित प्रमाण उपलब्ध नहीं है। सरकार का कहना है कि इस विषय पर फैलाए जा रहे कई दावे तथ्यों से मेल नहीं खाते और उपलब्ध तकनीकी जानकारी इसके विपरीत संकेत देती है।

    सरकार के अनुसार ई10 मानक के अनुरूप तैयार किए गए पुराने वाहनों में ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से ईंधन दक्षता में सामान्यतः लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी देखी जा सकती है। हालांकि यह गिरावट सीमित मानी गई है और इसे वाहन की समग्र कार्यक्षमता पर गंभीर प्रभाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि इस बदलाव को केवल एथेनॉल मिश्रण से जोड़कर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि माइलेज कई अन्य तकनीकी और परिचालन संबंधी कारणों से भी प्रभावित होता है।

    सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी वाहन का वास्तविक माइलेज चालक की ड्राइविंग शैली, वाहन के नियमित रखरखाव, टायरों में सही हवा, व्हील अलाइनमेंट, इंजन की स्थिति और एयर कंडीशनर के उपयोग जैसी अनेक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ऐसे में यदि किसी वाहन की ईंधन दक्षता में बदलाव दिखाई देता है तो उसके पीछे केवल ई20 पेट्रोल को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

    सरकार ने यह भी बताया कि ई20 पेट्रोल के कई तकनीकी लाभ हैं। इसमें पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अधिक ऑक्टेन रेटिंग मिलती है, जिससे इंजन में बेहतर एंटी-नॉक प्रदर्शन प्राप्त होता है। इसके साथ ही ईंधन का दहन अधिक प्रभावी होता है, जिससे इंजन का संचालन अधिक स्मूथ रहता है और एक्सीलरेशन भी बेहतर महसूस हो सकता है। सरकार का मानना है कि इन विशेषताओं के कारण आधुनिक वाहनों के लिए ई20 मिश्रित ईंधन एक उपयोगी विकल्प बनकर उभर रहा है।

    हाल के दिनों में ई20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर इंजन खराब होने तथा वाहनों को नुकसान पहुंचने जैसे कई दावे सामने आए थे। इन आशंकाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार ने दोहराया कि अब तक ऐसा कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि ई20 पेट्रोल के कारण किसी वाहन का इंजन व्यापक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ हो। सरकार का कहना है कि उपलब्ध तकनीकी परीक्षण और अनुभव ऐसे दावों की पुष्टि नहीं करते।

    इसी क्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी हाल ही में ई20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि यदि किसी वाहन को इस ईंधन से वास्तविक नुकसान हुआ हो तो उसका प्रमाण प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ई20 को लेकर कई भ्रामक दावे फैलाए जा रहे हैं, जबकि इसका उद्देश्य स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना और पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करना है।

    सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन का विस्तार ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाने और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसी कारण ई20 पेट्रोल को लेकर वैज्ञानिक तथ्यों और तकनीकी परीक्षणों के आधार पर लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो और उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके।

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ी सख्ती, अश्लील सामग्री और कानून उल्लंघन के आरोप में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म ब्लॉक

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ी सख्ती, अश्लील सामग्री और कानून उल्लंघन के आरोप में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म ब्लॉक

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने अश्लील सामग्री के प्रसारण और डिजिटल कानूनों के उल्लंघन के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए पिछले दो वर्षों में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म की भारत में सार्वजनिक पहुंच बंद कर दी है। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई डिजिटल माध्यमों पर गैरकानूनी सामग्री के प्रसार को रोकने और इंटरनेट को अधिक सुरक्षित एवं जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से की गई है।

    लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई उन ओटीटी प्लेटफॉर्म और इंटरमीडियरी के खिलाफ की गई, जिन पर अश्लील सामग्री प्रसारित करने और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप थे। सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उपलब्ध कानूनी अधिकारों का उपयोग करते हुए संबंधित प्लेटफॉर्म की भारत में सार्वजनिक पहुंच को प्रतिबंधित किया गया।

    सरकार के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री को लेकर यदि किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है तो उसका परीक्षण किया जाता है। जांच में कानून का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित इंटरमीडियरी या प्लेटफॉर्म को गैरकानूनी सामग्री हटाने अथवा उस तक पहुंच रोकने के निर्देश जारी किए जाते हैं। आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक पहुंच को भी प्रतिबंधित किया जा सकता है।

    केंद्र सरकार ने कहा कि उसकी डिजिटल नीति का मुख्य उद्देश्य ऐसा इंटरनेट वातावरण तैयार करना है, जो सभी उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार हो। विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को हानिकारक ऑनलाइन सामग्री से बचाने को सरकार प्राथमिकता दे रही है। इसी दिशा में डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एवं डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन के लिए व्यापक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराते हैं। इन नियमों के तहत सभी इंटरमीडियरी के लिए ड्यू डिलिजेंस का पालन करना अनिवार्य है, ताकि ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कानून और सामाजिक जिम्मेदारी के अनुरूप हो सके।

    नियमों के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपने उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट रूप से यह बताना होता है कि वे ऐसी किसी भी सामग्री को अपलोड, प्रकाशित, साझा या प्रसारित न करें, जो बच्चों के लिए हानिकारक हो, अश्लील हो या देश के किसी भी लागू कानून का उल्लंघन करती हो। यदि प्लेटफॉर्म इन दायित्वों का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मनोरंजन और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ कंटेंट मॉडरेशन की चुनौती भी बढ़ी है। ऐसे में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य वैध डिजिटल सेवाओं को बाधित करना नहीं, बल्कि कानून का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

    सरकार ने दोहराया कि भविष्य में भी यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी या अश्लील सामग्री प्रसारित किए जाने की शिकायत सामने आती है और जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत आवश्यक कार्रवाई जारी रहेगी। इसके माध्यम से सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में प्रयास लगातार जारी रहेंगे।