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  • आजीविका पर संकट का आरोप: ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का प्रदर्शन

    आजीविका पर संकट का आरोप: ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का प्रदर्शन


    मध्यप्रदेश। देशभर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में केमिस्ट संगठनों के आह्वान पर बुधवार को कई जिलों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यप्रदेश के झाबुआ और आलीराजपुर जिलों में देखने को मिला, जहां सुबह से ही दवा दुकानों के शटर गिरे रहे और मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा।

    झाबुआ जिले के झाबुआ, थांदला और पेटलावद सहित कई क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। केमिस्टों का कहना है कि ई-फार्मेसी के बढ़ते चलन से छोटे दवा व्यापारियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना पर्याप्त निगरानी के दवाओं की बिक्री हो रही है, जिससे न सिर्फ कारोबार प्रभावित हो रहा है बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    झाबुआ में शिवम मेडिकल के संचालक महेंद्र प्रताप सिंह राठौर ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण स्थानीय दुकानदारों की आजीविका पर गंभीर संकट आ गया है। उन्होंने सरकार से इस पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

    वहीं प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की है। जिला प्रशासन ने कुछ सरकारी और निजी अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोरों को चालू रखने का निर्णय लिया, ताकि जरूरी दवाइयों की उपलब्धता बनी रहे। इनमें जिला अस्पताल परिसर स्थित जन औषधि केंद्र सहित कई निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर शामिल रहे।

    इसी तरह आलीराजपुर जिले में भी मेडिकल स्टोर बंद रहे। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर हुई इस हड़ताल का असर पूरे जिले में दिखा। सुबह से ही मरीज और उनके परिजन दवाइयों के लिए परेशान नजर आए। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग पर्चे लेकर बंद दुकानों के बाहर खड़े रहे, लेकिन उन्हें दवा नहीं मिल सकी।

    ग्राम बड़ा गुड़ा निवासी राजू ने बताया कि वे इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन दवा न मिलने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इसी तरह बुजुर्ग मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के परिजनों को भी सबसे ज्यादा कठिनाई का सामना करना पड़ा।

    दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे मेडिकल स्टोर बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। उनका आरोप है कि यह व्यवस्था बिना पर्याप्त नियंत्रण के चल रही है, जो आने वाले समय में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

    हालांकि, दिनभर की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी आम मरीजों और ग्रामीण परिवारों को झेलनी पड़ी। कई लोगों का कहना है कि इस तरह के विरोध प्रदर्शनों का सीधा असर जरूरतमंद मरीजों पर पड़ता है, जिन्हें समय पर दवा नहीं मिल पाती।

  • भारत–कोरिया रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती, राजनाथ सिंह की यात्रा से बढ़ा सहयोग का दायरा

    भारत–कोरिया रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती, राजनाथ सिंह की यात्रा से बढ़ा सहयोग का दायरा


    नई दिल्ली । भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की हालिया दक्षिण कोरिया यात्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने सियोल स्थित राष्ट्रीय समाधि स्थल पर पहुंचकर देश के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इस अवसर पर उनका संदेश केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें दोनों देशों के बीच साझा मूल्यों, आपसी सम्मान और वैश्विक शांति के प्रति गहरी प्रतिबद्धता भी झलकती दिखाई दी। उन्होंने कहा कि सैनिकों का साहस, त्याग और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगा और किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा उसकी सेना के बलिदान पर ही आधारित होती है।

    इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान रक्षा मंत्री ने दक्षिण कोरिया के अपने समकक्ष के साथ व्यापक स्तर पर द्विपक्षीय वार्ता की योजना भी साझा की, जिसमें रक्षा सहयोग, सैन्य तकनीक, समुद्री सुरक्षा, और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों की तलाश पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है और अब इसे एक अधिक संरचित और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी में बदलने पर जोर दिया जा रहा है। बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विचारों का आदान-प्रदान किया जाना प्रस्तावित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं बल्कि दूरगामी रणनीतिक महत्व रखती है।

    राजनाथ सिंह की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं और देशों के बीच रक्षा सहयोग अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है। भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ही लोकतांत्रिक मूल्य, शांति और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के पक्षधर माने जाते हैं, और यही समानता दोनों देशों को और अधिक करीब ला रही है। समुद्री सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और रक्षा निर्माण के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी भविष्य में नई ऊंचाइयों को छू सकती है।

    सियोल स्थित राष्ट्रीय समाधि स्थल पर दी गई श्रद्धांजलि को एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि भारत न केवल अपने ही सैनिकों के बलिदान का सम्मान करता है, बल्कि अन्य देशों के वीरों के प्रति भी समान सम्मान की भावना रखता है। यह दृष्टिकोण दोनों देशों के बीच मानवीय और सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करता है।

    इस यात्रा से यह संकेत मिलता है कि भारत और दक्षिण कोरिया अब केवल व्यापारिक या औपचारिक संबंधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें रक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह साझेदारी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग का एक मजबूत आधार बन सकती है।

  • भारत की ‘S5’ परमाणु सबमरीन: समुद्र में छिपा ‘ब्रह्मास्त्र’, चीन-पाकिस्तान के लिए बढ़ी टेंशन

    भारत की ‘S5’ परमाणु सबमरीन: समुद्र में छिपा ‘ब्रह्मास्त्र’, चीन-पाकिस्तान के लिए बढ़ी टेंशन



    नई दिल्ली। भारत अपनी रणनीतिक समुद्री ताकत को लगातार मजबूत कर रहा है, और ब्रिटिश थिंक टैंक IISS की रिपोर्ट के मुताबिक आने वाली S5 श्रेणी की परमाणु पनडुब्बियां देश की न्यूक्लियर डिटरेंस क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ये पनडुब्बियां भारत की “सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी” को और ज्यादा मजबूत बनाकर दुश्मनों के लिए जवाबी हमला लगभग अटूट बना देंगी।

    भारतीय नौसेना पहले ही INS अरिहंत (S2), INS अरिघात (S3) और हाल ही में शामिल INS अरिदमन (S4) के साथ अपनी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी क्षमता को मजबूत कर चुकी है। इन पनडुब्बियों का काम समुद्र की गहराइयों में छिपकर परमाणु मिसाइलों के जरिए लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता रखना है।

    रिपोर्टों के अनुसार INS अरिदमन का हाल ही में विशाखापत्तनम में कमीशन होना भारत की रणनीतिक शक्ति में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह पनडुब्बी INS अरिहंत और INS अरिघात के साथ मिलकर काम करेगी, जिससे भारत की समुद्री परमाणु शक्ति और मजबूत होगी।

    पनडुब्बियों की सबसे बड़ी ताकत यह होती है कि ये महीनों तक समुद्र में बिना सतह पर आए रह सकती हैं और इन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है। इसी वजह से इन्हें किसी भी देश की “सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी” की रीढ़ माना जाता है, यानी अगर भारत पर परमाणु हमला हो तो जवाबी हमला निश्चित रूप से किया जा सकता है।

    डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक भारत का लक्ष्य “Continuous At-Sea Deterrence (CASD)” हासिल करना है, जिसमें हमेशा कम से कम एक परमाणु पनडुब्बी समुद्र में तैनात रहे। इससे भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी।

    इसके साथ ही भारत अपनी आगामी S5 श्रेणी की पनडुब्बियों पर भी काम कर रहा है, जिन्हें मौजूदा SSBN से अधिक लंबा, एडवांस और ज्यादा मिसाइल क्षमता वाला बताया जा रहा है। साथ ही विशाखापत्तनम के पास बन रहा ‘आईएनएस वर्षा’ बेस भी इन पनडुब्बियों के संचालन में अहम भूमिका निभाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इन विकासों के बाद भारत की परमाणु त्रिस्तरीय (न्यूक्लियर ट्रायड) क्षमता पूरी तरह मजबूत हो जाएगी, जिससे समुद्र के रास्ते देश की सुरक्षा रणनीति पहले से कहीं अधिक सशक्त बन जाएगी।

  • भारत में पड़ोसी देशों से सस्ता पेट्रोल, पाकिस्तान-श्रीलंका-नेपाल में कीमतें काफी ज्यादा

    भारत में पड़ोसी देशों से सस्ता पेट्रोल, पाकिस्तान-श्रीलंका-नेपाल में कीमतें काफी ज्यादा



    नई दिल्ली(New Delhi)। 
    भारत में हाल के दिनों में पेट्रोल-डीजल के दामों में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद पड़ोसी देशों की तुलना में भारत में ईंधन अभी भी अपेक्षाकृत सस्ता बताया जा रहा है। मौजूदा रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में पेट्रोल की औसत कीमत लगभग 101 रुपये प्रति लीटर है।

    वहीं पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत करीब 142 रुपये प्रति लीटर है, जो भारत से लगभग 41 रुपये अधिक है। इसी तरह Sri Lanka में पेट्रोल लगभग 140 रुपये प्रति लीटर और Nepal में करीब 136 रुपये प्रति लीटर बताया जा रहा है, जो भारत की तुलना में क्रमशः 39 और 35 रुपये ज्यादा है।

    अन्य पड़ोसी और वैश्विक देशों की बात करें तो बांग्लादेश, म्यांमार और चीन में भी पेट्रोल भारत से महंगा बताया जा रहा है। वहीं अमेरिका और यूरोपीय देशों में ईंधन की कीमतें और अधिक हैं, जबकि हांगकांग को दुनिया में सबसे महंगा पेट्रोल बेचने वाला देश माना जाता है, जहां कीमतें 400 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाती हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक तनाव के कारण ईंधन दरों पर लगातार दबाव बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड के दाम बढ़ने से कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें प्रभावित हो रही हैं, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है।

  • गोल्ड खरीदारी को लेकर बदल रही सोच: सर्वे में सामने आया पीएम मोदी की अपील का प्रभाव

    गोल्ड खरीदारी को लेकर बदल रही सोच: सर्वे में सामने आया पीएम मोदी की अपील का प्रभाव

    नई दिल्ली । देश में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने की खरीदारी को लेकर लोगों की सोच में बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुए एक सर्वे में यह सामने आया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर अब आम लोगों के व्यवहार पर भी दिखाई देने लगा है। बड़ी संख्या में भारतीयों ने अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की बात कही है।

    कुछ समय पहले प्रधानमंत्री ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और अनावश्यक सोने की खरीद पर नियंत्रण रखने की अपील की थी। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करना बताया गया था। अब एक सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि लोगों ने इस अपील को गंभीरता से लिया है और अपनी खरीदारी की आदतों पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है।

    सर्वे में शामिल लोगों में से लगभग 61 प्रतिशत ने कहा कि वे अगले एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने का प्रयास करेंगे। इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जो नियमित रूप से सोना खरीदते रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के चलते लोग अब खर्च को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं।

    भारत में सोने की खरीदारी केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सांस्कृतिक और पारिवारिक महत्व भी काफी गहरा है। शादियों, त्योहारों और पारंपरिक आयोजनों में सोना खरीदना लंबे समय से भारतीय समाज का हिस्सा रहा है। इसके बावजूद सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों का सोना खरीदने को लेकर संयम दिखाना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बीते वित्तीय वर्ष में भारत का सोना आयात बिल काफी बढ़ गया। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में तेज उछाल के कारण आयात की कुल लागत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। हालांकि आयात की मात्रा में बहुत ज्यादा वृद्धि नहीं हुई, लेकिन ऊंची कीमतों ने विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पैदा किया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग गैर-जरूरी सोना खरीदने में कमी करते हैं तो इससे देश की आर्थिक स्थिति को कुछ हद तक राहत मिल सकती है। विदेशी मुद्रा की बचत होने से आयात संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और आर्थिक दबाव कम किया जा सकेगा।

    हालांकि सर्वे में यह भी सामने आया कि सभी लोग अपनी पारंपरिक आदतें बदलने के लिए तैयार नहीं हैं। करीब 19 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे शादियों और पारिवारिक जरूरतों के लिए सोना खरीदना जारी रखेंगे। कई लोगों का यह भी मानना है कि आर्थिक अस्थिरता के दौर में सोना अब भी सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक है।

    इस सर्वे ने यह साफ कर दिया है कि देश में आर्थिक मुद्दों को लेकर लोगों की जागरूकता बढ़ रही है और सरकारी अपीलों का असर अब आम नागरिकों की सोच और फैसलों में भी दिखाई देने लगा है।

  • वैश्विक सहयोग की दिशा में बड़ा कदम: भारत–नीदरलैंड ने बढ़ाई रणनीतिक साझेदारी और किए कई MoU

    वैश्विक सहयोग की दिशा में बड़ा कदम: भारत–नीदरलैंड ने बढ़ाई रणनीतिक साझेदारी और किए कई MoU

    नई दिल्ली । भारत और यूरोप के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है, जब भारत और नीदरलैंड ने अपने द्विपक्षीय रिश्तों को और अधिक मजबूत और संरचनात्मक बनाने की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय लिया। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने पर सहमति व्यक्त की, जिससे भविष्य में सहयोग के नए आयाम खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस अवसर पर दोनों पक्षों ने संयुक्त बयान जारी करते हुए व्यापार, रक्षा, तकनीक, शिक्षा, जल प्रबंधन, ऊर्जा और स्वास्थ्य जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और आपसी समझ का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है, जिसमें वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने की रणनीति भी शामिल है।

    इस बैठक के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच व्यापक स्तर पर वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही नीदरलैंड के शाही परिवार के साथ हुई मुलाकातों ने इस दौरे को और भी विशेष बना दिया, जहां आपसी संबंधों को सांस्कृतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी मजबूती देने पर जोर दिया गया। इस बातचीत में दोनों देशों ने स्वीकार किया कि वैश्विक परिस्थितियों में तेजी से बदलाव हो रहा है और ऐसे समय में मजबूत साझेदारी अत्यंत आवश्यक है।

    इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों और आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनका दायरा काफी व्यापक रहा। इनमें सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। इसके अलावा रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लेकर भी दोनों देशों ने अपनी साझेदारी को मजबूत करने का निर्णय लिया है, जिससे समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों को मजबूती मिलेगी। जल प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने संयुक्त रूप से काम करने की योजना बनाई है, जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा परिवर्तन जैसे विषय प्रमुख हैं।

    कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में भी सहयोग को एक नई दिशा दी गई है, जिसमें प्रशिक्षण और तकनीकी आदान-प्रदान के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी कई विश्वविद्यालयों और संस्थानों के बीच समझौते हुए हैं, जिससे छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में भी दोनों देशों ने मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है, विशेष रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान और चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में।

    कुल मिलाकर यह दौरा और उसके दौरान हुए समझौते भारत और नीदरलैंड के बीच संबंधों को एक नई दिशा और गति देने वाले साबित हो सकते हैं। यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि वैश्विक स्थिरता और विकास के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें सहयोग, नवाचार और साझा जिम्मेदारी की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

  • पाकिस्तान ने घटाए पेट्रोल-डीजल के दाम, फिर भी भारत और पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतें अलग-अलग क्यों?

    पाकिस्तान ने घटाए पेट्रोल-डीजल के दाम, फिर भी भारत और पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतें अलग-अलग क्यों?



    नई दिल्ली। पाकिस्तान सरकार ने आम जनता को राहत देते हुए पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। नई दरें 16 मई 2026 से लागू हो गई हैं। कटौती के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 409.78 पाकिस्तानी रुपये और डीजल 409.58 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गया है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 140–141 रुपये प्रति लीटर के आसपास बैठता है।

    हालांकि यह कटौती राहत देने वाली है, फिर भी पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें भारत के मुकाबले अधिक बनी हुई हैं। इससे पहले वहां पेट्रोल और डीजल में करीब 15 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी भी की गई थी, जिससे आम लोगों पर बोझ और बढ़ गया था।

    पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें (भारत की तुलना में)
    भारत में हाल ही में पेट्रोल-डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल करीब 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर है, जबकि मुंबई में पेट्रोल 106 रुपये के पार पहुंच चुका है।

    नेपाल में ईंधन भारत से महंगा है, जहां पेट्रोल करीब 134 रुपये और डीजल लगभग 139 रुपये प्रति लीटर पड़ता है। बांग्लादेश में पेट्रोल लगभग 109 रुपये और डीजल करीब 90 रुपये प्रति लीटर है। श्रीलंका में डीजल की कीमत 137 रुपये प्रति लीटर के आसपास है, जबकि भूटान में पेट्रोल-डीजल भारत के लगभग बराबर, यानी 98 से 102 रुपये के बीच मिलता है।

    कीमतें क्यों बदल रही हैं लगातार?
    दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, मध्य-पूर्व में तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों (जैसे होर्मुज स्ट्रेट) में अस्थिरता के कारण ईंधन सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसी वजह से भारत, पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देश अपनी घरेलू नीतियों और टैक्स ढांचे के अनुसार समय-समय पर कीमतों में बदलाव कर रहे हैं।

  • ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया पर फूटा मतभेद, संयुक्त बयान अटका; 63 बिंदुओं का अलग दस्तावेज जारी

    ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया पर फूटा मतभेद, संयुक्त बयान अटका; 63 बिंदुओं का अलग दस्तावेज जारी



    नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में हुई ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए, जिसके चलते इस बार कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया जा सका। बैठक में ईरान, इजरायल और अमेरिका से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिली, जिससे साझा सहमति बनाना मुश्किल हो गया। इसके बाद अध्यक्ष की ओर से एक विस्तृत बयान जारी किया गया, जिसमें 63 बिंदुओं के जरिए सभी देशों के विचारों को शामिल किया गया।

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में ईरान ने मांग रखी थी कि इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों की निंदा ब्रिक्स मंच से की जाए, लेकिन इस पर सभी सदस्य देश सहमत नहीं हो सके। कुछ देशों ने कहा कि किसी एक पक्ष को सीधे तौर पर निशाना बनाना कूटनीतिक संतुलन के खिलाफ होगा, जबकि अन्य देशों ने क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए सख्त रुख अपनाने की वकालत की।

    इसी असहमति के कारण संयुक्त बयान पर सहमति नहीं बन सकी। बाद में जारी अध्यक्षीय बयान में कहा गया कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर सदस्य देशों के विचार अलग-अलग हैं, लेकिन सभी देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि संकट का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। बयान में अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर भी जोर दिया गया।

    बयान में यह भी कहा गया कि ब्रिक्स देशों ने एकतरफा प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत दंडात्मक उपायों की आलोचना की है। साथ ही मानवीय संकटों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। बैठक में फलस्तीन के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, जिसमें 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फलस्तीन राज्य के समर्थन की बात दोहराई गई।

    इस तरह पश्चिम एशिया के संवेदनशील मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण के कारण ब्रिक्स बैठक में एकजुटता की कमी दिखी, हालांकि संवाद और शांति की आवश्यकता पर सभी देशों ने सहमति व्यक्त की।

  • Middle East Crisis में भारत के प्लान-बी का कमाल….. ग्लोबल संकट के बीच Import-Export में वृद्धि

    Middle East Crisis में भारत के प्लान-बी का कमाल….. ग्लोबल संकट के बीच Import-Export में वृद्धि


    नई दिल्ली।
    अमेरिका-ईरान तनाव (US-Iran Tensions), होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) बंद और इससे क्रूड की कीमतों (Crude Prices) में लगी आग के चलते ग्लोबल टेंशन चरम पर है. दुनिया के तमाम देशों में इससे उपजे तेल-गैस संकट (Oil and Gas Crisis) से हाहाकार मचा है और महंगाई की मार आम आदमी पर पड़ रही है. भारत भी इससे अछूता नहीं है, शुक्रवार को ही देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई. हालांकि, ये अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है और करीब चार साल बाद इसमें इजाफा हुआ है।

    लेकिन बड़े ग्लोबल संकटों के बावजूद भारत सही ट्रैक पर आगे बढ़ रहा है. इसका एक ताजा उदाहरण देश के निर्यात के आंकड़े हैं. तमाम चुनौतियों के बाद भी भारतीय सामानों का एक्सपोर्ट अप्रैल महीने में बढ़कर 43.56 अरब डॉलर रहा है, जबकि आयात में भी तेज उछाल देखने को मिला है. कुल निर्यात की बात करें, तो ये 80.80 अरब डॉलर रहा है।

    इन चीजों का खूब हुआ निर्यात
    कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने शुक्रवार ये आंकड़े जारी करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश का निर्यात बढ़ रहा है. अप्रैल में ये 13.78 फीसदी की उछाल के साथ बढ़कर 43.56 अरब डॉलर हो गया. इसके अलावा अप्रैल में भारतीय आयात भी सालाना आधार पर 10 फीसदी बढ़कर 71.94 अरब डॉलर हो गया।

    इस दौरान कई क्षेत्रों में निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई. अनाजों के निर्यात में सबसे अधिक 210.19% का उछाल आया, इसके बाद मीट, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों में 48.03% और इलेक्ट्रॉनिक सामानों में 40.31% की तेजी आई. पेट्रोलियम प्रोडक्ट, हस्तशिल्प, मरीन प्रोडक्ट, इंजीनियरिंग सामान, दवाएं और कॉफी में भी ग्रोथ देखने को मिली है.


    होर्मुज संकट का यहां पड़ा असर

    अप्रैल महीने में भारत का व्यापार घाटा 28.38 अरब डॉलर रहा. होर्मुज संकट के असर की बात करें, तो राजेश अग्रवाल ने बताया कि पिछले महीने पश्चिम एशिया को भारत का निर्यात 28% घटकर 4.16 अरब डॉलर रह गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह 5.78 अरब डॉलर था. इस क्षेत्र से आयात अप्रैल में 31.64% घटा और 10.47 अरब डॉलर रह गया।


    दुनिया में हाय-तौबा, भारत ने ऐसा संभाला

    आयात-निर्यात के इन ताजा आंकड़ों को देखकर साफ हो जाता है कि ट्रंप का टैरिफ अटैक हो या फिर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध से पैदा हुआ तेल-गैस संकट. मोदी सरकार का प्लान-बी (Modi Govt Plan-B) काम कर रहा है और इसका असर भी देखने को मिल रहा है।

    अमेरिका-ईरान युद्ध से मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच पाकिस्तान से लेकर साउथ कोरिया तक में हायतौबा मची नजर आई. लेकिन देश के आयात-निर्यात को सुचारू रखने के लिए सरकार कई बड़े कदम उठाए, इनमें आयात डेस्टिनेशंस की संख्या बढ़ाने के साथ ही ग्लोबल टेंशन के बीच भारतीय निर्यात के लिए नए बाजारों तक पहुंच शामिल है. बीते कुछ समय में भारत ने न्यूजीलैंड, यूरोपीय यूनियन समेत कई देशों से बड़े FTA साइन किए हैं।

  • ईरान-अमेरिका तनाव में भारत बन सकता है शांति का बड़ा चेहरा, रूस ने नई दिल्ली को बताया सबसे भरोसेमंद मध्यस्थ

    ईरान-अमेरिका तनाव में भारत बन सकता है शांति का बड़ा चेहरा, रूस ने नई दिल्ली को बताया सबसे भरोसेमंद मध्यस्थ



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच रूस ने भारत की भूमिका को लेकर एक बड़ा कूटनीतिक बयान दिया है। रूसी विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में India ईरान, अमेरिका और पश्चिम एशियाई देशों के बीच संवाद स्थापित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान लावरोव ने भारत की विदेश नीति की तारीफ करते हुए कहा कि भारत लंबे समय से संतुलित कूटनीति अपनाता रहा है और विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ उसके मजबूत संबंध हैं। इसी वजह से भारत को एक “भरोसेमंद मध्यस्थ” के रूप में देखा जा सकता है, जो तनाव कम करने और बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।

    रूस का कहना है कि पश्चिम एशिया में हाल के वर्षों में तनाव काफी बढ़ा है, जिसमें ईरान-अमेरिका टकराव, ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। ऐसे में किसी ऐसे देश की जरूरत है जो दोनों पक्षों के बीच विश्वास पैदा कर सके और बातचीत का रास्ता खोल सके। लावरोव के अनुसार, भारत इस भूमिका के लिए उपयुक्त है क्योंकि वह किसी एक खेमे का हिस्सा न होकर सभी प्रमुख देशों के साथ समान रूप से संबंध बनाए रखता है।

    लावरोव ने यह भी कहा कि भारत का कूटनीतिक अनुभव केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बहुपक्षीय मंचों जैसे ब्रिक्स, जी20 और शंघाई सहयोग संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। उन्होंने यह संकेत दिया कि भारत की यह वैश्विक स्वीकार्यता उसे मध्यस्थता की भूमिका के लिए और मजबूत बनाती है।

    रूस के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत केवल सुरक्षा या राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ता है। ऐसे में किसी स्थिर और भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

    लावरोव ने यह भी कहा कि कुछ पश्चिमी देशों की नीतियां इस क्षेत्र में तनाव को कम करने के बजाय बढ़ाने का काम कर रही हैं, जबकि समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान और अरब देशों के बीच दूरी बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं, जो वैश्विक स्थिरता के लिए सही नहीं है।

    भारत को लेकर रूस की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री की हालिया कूटनीतिक गतिविधियों और खाड़ी देशों के साथ बढ़ते संबंधों ने भारत की भूमिका को और मजबूत किया है। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भागीदारी ने उसे एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।

    हालांकि भारत सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाता है तो वह पश्चिम एशिया में शांति स्थापना के प्रयासों का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।

    कुल मिलाकर रूस का यह बयान भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है, जहां वह अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता में योगदान देने वाला अहम देश बनता जा रहा है।