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  • एयरबस को भारत के पहले एच175 हेलीकॉप्‍टर के लिए मिला ऑर्डर

    एयरबस को भारत के पहले एच175 हेलीकॉप्‍टर के लिए मिला ऑर्डर


    नई दिल्‍ली।
    फ्रांस की कंपनी एयरबस कॉर्पोरेट हेलीकॉप्टर्स (French company Airbus Corporate Helicopters) को एक निजी भारतीय ग्राहक (Private Indian Customers) से तीन हेलीकॉप्टर के ऑडर्र मिले हैं। इसमें एक एच175 हेलीकॉप्‍टर और दो एसीएच160 हेलीकॉप्टर शामिल है। हालांकि, इसकी कीमत की जानकारी कंपनी ने साझा नहीं किया है।

    एयरबस कॉर्पोरेट हेलीकॉप्टर्स ने शनिवार को एक बयान में कहा कि उसने एक निजी भारतीय ग्राहक के साथ दो एसीएच 160 हेलीकॉप्टर और एक एच175 हेलीकॉप्‍टर के लिए ऑर्डर साइन किया है। यह ऑपरेटर पहले से ही एसीएच 160 का ग्राहक है, जो भारत का पहला एच175 हेलीकॉप्‍टर ग्राहक बनेगा।

    कंपनी ने बताया कि भारतीय सिविल मार्केट में सुपर-मीडियम ट्विन-इंजन हेलीकॉप्टर की एंट्री के साथ एच175 हेलीकॉप्टर 16-सीट कॉन्फ़िगरेशन में आएगा। इसकी डिलीवरी 2026 में होने वाली है। वहीं, दो एसीएच160 हेलीकॉप्टर ग्राहक की जरूरतों के हिसाब से खास तौर पर कॉन्फ़िगर किए जाएंगे, जो 2027 में डिलीवर किए जाएंगे।

    भारत और दक्षिण एशिया में एयरबस हेलीकॉप्टर्स कंपनी के हेड सनी गुगलानी ने कहा, “दो एसीएच160 के लिए यह रिपीट ऑर्डर और एक भारतीय ग्राहक द्वारा पहला एच175 ऑर्डर देश में सिविल हेलीकॉप्टर मार्केट की बढ़ती मेच्योरिटी को दिखाता है। दोनों हेलीकॉप्टर पैसेंजर ट्रांसपोर्ट के लिए एकदम सही हैं और बेहतर परफॉर्मेंस और शानदार आराम देते हैं। गुगलानी ने कहा क‍ि हम ग्राहक को उनकी पसंद के लिए बधाई देते हैं और हमारे प्रोडक्ट्स पर भरोसा दिखाने के लिए उनका धन्यवाद करते हैं।

    एयरबस कॉर्पोरेट हेलीकॉप्टर्स का विश्वसनीयता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया, एसीएच160 पावर और एलिगेंस का एक शानदार कॉम्बिनेशन है। अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस, एसीएच160 बिज़नेस लीडर्स को समय और दूरी की बाधाओं को दूर करने में मदद करता है, जिससे वे सही समय पर, सही जगह पर महत्वपूर्ण फैसले ले पाते हैं। वहीं, सुपर मीडियम एच175 अपनी वर्सेटिलिटी, रेंज और पेलोड क्षमताओं के साथ एयरबस हेलीकॉप्टर्स के सिविल पोर्टफोलियो को पूरा करता है। अपनी क्लास में सबसे कम वाइब्रेशन और साउंड सिग्नेचर, और एडवांस्ड हेलियोनिक्स सेफ्टी सिस्टम के साथ, एच175 पैसेंजर ट्रांसपोर्ट के लिए असाधारण आराम और सुरक्षा देता है।

  • 2036 ओलंपिक की मेजबानी का भारत का सपना: अवसर, चुनौतियां और तैयारी की असली परीक्षा

    2036 ओलंपिक की मेजबानी का भारत का सपना: अवसर, चुनौतियां और तैयारी की असली परीक्षा


    नई दिल्ली । भारत ने 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए औपचारिक रूप से दावेदारी पेश कर दी है। यह कदम देश की खेल महाशक्ति बनने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, लेकिन इसके साथ ही प्रशासनिक कमजोरियां, बुनियादी ढांचे की सीमाएं, पर्यावरणीय चिंताएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन जैसे सवाल भी खड़े हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट जैसे सुधारों का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया कि भारत न सिर्फ 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स बल्कि 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भी गंभीर प्रयास कर रहा है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य देश के अधिक से अधिक खिलाड़ियों को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा के अवसर देना है।

    पिछले वर्ष जुलाई में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने स्विट्जरलैंड के लुजान स्थित अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति आईओसी मुख्यालय का दौरा किया और गुजरात के अहमदाबाद को संभावित मेजबान शहर के रूप में प्रस्तुत किया। अहमदाबाद और गांधीनगर को मिलाकर तैयार की गई योजना में करीब 4.1 से 7.5 अरब डॉलर के खर्च का अनुमान है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आईओसी ने बातचीत के दौरान तीन प्रमुख चिंताएं जताईं भारतीय ओलंपिक संघ के भीतर प्रशासनिक खामियां, डोपिंग के बढ़ते मामले और ओलंपिक खेलों में भारत का अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन।

    विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है। स्पोर्ट्स मेडिसिन और एंटी-डोपिंग विशेषज्ञ पी.एस.एम. चंद्रन का मानना है कि इन चुनौतियों को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उनके अनुसार डोपिंग के आंकड़े इसलिए अधिक दिखते हैं क्योंकि भारत अन्य देशों की तुलना में ज्यादा परीक्षण करता है। उनका यह भी कहना है कि बोली प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका पैसे और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव की होती है, न कि केवल पदकों की संख्या की।

    दूसरी ओर, खेल प्रशासक शाजी प्रभाकरन का मानना है कि भारत को अब स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी के जरिए अपनी क्षमताओं को दुनिया के सामने रखना चाहिए। हालांकि, वे यह भी स्वीकार करते हैं कि इंडोनेशिया, तुर्की, चिली, सऊदी अरब और जर्मनी जैसे देशों से मुकाबला कड़ा होगा। उनके अनुसार, यदि भारत 2036 की रेस में सफल नहीं होता, तो 2040 का दशक ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है।

    पूर्व ओलंपियन और लॉन्ग जंपर अंजू बॉबी जॉर्ज भारत की दावेदारी की प्रबल समर्थक हैं। उनका कहना है कि ग्रासरूट टैलेंट प्रोग्राम और नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल जैसे कदम भारत को ओलंपिक मेजबानी के लिए तैयार कर रहे हैं। वहीं, वरिष्ठ खेल पत्रकार शारदा उग्रा आगाह करती हैं कि प्रदूषण, शहरी बुनियादी ढांचा और वैश्विक छवि जैसे मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक अहमदाबाद को एक पूर्ण वैश्विक शहर के रूप में खुद को साबित करने के लिए अभी समय चाहिए। कुल मिलाकर, 2036 ओलंपिक की मेजबानी भारत के लिए एक बड़ा अवसर है लेकिन यह तभी संभव होगा जब देश खेल प्रशासन, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर ठोस और विश्वसनीय प्रगति दिखा सके।

  • यूनुस की भविष्यवाणी पड़ी उलटी, कहा था भारतीय कंपनियां बांग्लादेश आएंगी, अब खुद की मिलों पर गहराया संकट

    यूनुस की भविष्यवाणी पड़ी उलटी, कहा था भारतीय कंपनियां बांग्लादेश आएंगी, अब खुद की मिलों पर गहराया संकट


    नई दिल्ली। भारत को लेकर बांग्लादेश में हालिया घटनाक्रम लगातार सुर्खियों में है। इसी बीच अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस की एक पुरानी टिप्पणी फिर चर्चा में आ गई है। वर्ष 2025 में यूनुस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ को लेकर उत्साहित नजर आए थे। तब उन्होंने दावा किया था कि ऊंचे टैरिफ और ज्यादा लागत के चलते भारतीय उद्योग, खासकर टेक्सटाइल सेक्टर, भारत छोड़कर बांग्लादेश में निवेश करेंगे।

    अमेरिकी पत्रकार मेहदी हसन को दिए एक इंटरव्यू में यूनुस ने कहा था कि अमेरिका के भारी टैरिफ के कारण भारतीय कंपनियां भारत में उत्पादन करना छोड़ेंगी और बांग्लादेश में फैक्ट्रियां लगाएंगी, क्योंकि वहां लागत कम है और टैरिफ भी अपेक्षाकृत कम हैं। हालांकि मौजूदा हालात उनकी इस भविष्यवाणी से बिल्कुल उलट दिखाई दे रहे हैं।

    खुद का टेक्सटाइल सेक्टर संकट में

    जनवरी 2026 के अंत तक बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग गंभीर संकट में फंस गया है। जहां एक ओर भारत पर अमेरिकी टैरिफ को लेकर बयानबाजी की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर देश की घरेलू टेक्सटाइल मिलें बंद होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन BTMA ने ऐलान किया है कि 1 फरवरी 2026 से देशभर की टेक्सटाइल मिलें अनिश्चितकाल के लिए बंद की जाएंगी।

    BTMA अध्यक्ष शौकत अजीज रसेल के अनुसार मिल मालिक बैंक कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं हैं। उद्योग की पूंजी 50 प्रतिशत से अधिक घट चुकी है और कई यूनिट पहले ही ताले लगा चुकी हैं। उद्योग का आरोप है कि भारत से आयातित सस्ते सूत ने स्थानीय बाजार को नुकसान पहुंचाया है। करीब 12 हजार करोड़ टका का तैयार माल गोदामों में बिना बिके पड़ा है। वहीं गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के चलते उत्पादन क्षमता भी 50 प्रतिशत तक गिर गई है। संगठन ने सरकार से 10 से 30 काउंट के सूत पर ड्यूटी-फ्री आयात सुविधा खत्म करने और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

    भारत–EU समझौता बढ़ाएगा दबाव

    भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। यह समझौता बांग्लादेश के गारमेंट निर्यात के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अभी LDC श्रेणी में होने के कारण बांग्लादेश को EU बाजार में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलती है, जबकि भारत को करीब 12 प्रतिशत शुल्क देना पड़ता है।

    समझौता लागू होने के बाद भारत को भी शून्य टैरिफ का लाभ मिलेगा। भारत के पास कपास और सूत जैसे कच्चे माल की मजबूत उपलब्धता है, जिससे उसके उत्पाद सस्ते और बेहतर गुणवत्ता वाले हो सकते हैं। वहीं बांग्लादेश 2026-27 तक LDC सूची से बाहर हो जाएगा, जिससे उसका ड्यूटी-फ्री लाभ समाप्त हो जाएगा। ऐसे में यूरोपीय बाजार में भारत से प्रतिस्पर्धा करना उसके लिए बेहद कठिन होगा। फिलहाल EU में हर तीसरा व्यक्ति बांग्लादेशी डेनिम पहनता है, लेकिन इस डील के बाद भारत इस बाजार का बड़ा हिस्सा अपने कब्जे में कर सकता है।

    कुल मिलाकर, जहां मोहम्मद यूनुस भारतीय कंपनियों के बांग्लादेश आने की उम्मीद जता रहे थे, वहीं जमीनी सच्चाई यह है कि बांग्लादेश का अपना टेक्सटाइल आधार और बैकवर्ड लिंकेज तेजी से कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।

  • अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026: भारत-पाकिस्तान मुकाबले से तय होगी सेमीफाइनल की तस्वीर

    अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026: भारत-पाकिस्तान मुकाबले से तय होगी सेमीफाइनल की तस्वीर


    नई दिल्ली। अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप 2026 अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है और ग्रुप-2 में भारत व पाकिस्तान के बीच होने वाला महामुकाबला पूरे टूर्नामेंट की दिशा तय कर सकता है। इस ग्रुप में सेमीफाइनल की दौड़ फिलहाल तीन टीमोंभारत, इंग्लैंड और पाकिस्तानके बीच सिमटी हुई है।

    भारत बनाम पाकिस्तान: करो या मरो की जंग
    भारत और पाकिस्तान की अंडर-19 टीमें रविवार, 1 फरवरी को बुलावायो के क्वींस स्पोर्ट्स क्लब में आमने-सामने होंगी। दोनों टीमों के बीच पिछली भिड़ंत एशिया कप 2025 के फाइनल में हुई थी, जहां पाकिस्तान ने जीत दर्ज की थी। ऐसे में भारतीय टीम के पास बदला लेने का मौका होगा, जबकि पाकिस्तान के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा है।
    ग्रुप-1 से ऑस्ट्रेलिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने चारों मुकाबले जीत लिए हैं और 8 अंकों के साथ सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली है।
    वेस्टइंडीज: 4 अंक (कमजोर नेट रन रेट)
    अफगानिस्तान: 4 अंक, नेट रन रेट +1.020
    श्रीलंका: 4 अंक, नेट रन रेट -0.181

    अगर अफगानिस्तान अपने आखिरी मैच में आयरलैंड को हरा देता है, तो उसका सेमीफाइनल में पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है।ग्रुप-2 में न्यूज़ीलैंड, जिम्बाब्वे और बांग्लादेश पहले ही सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो चुके हैं।

    भारत: 3 मैच, 3 जीत – 6 अंक (NRR +3.337)
    इंग्लैंड: 3 मैच, 3 जीत – 6 अंक (NRR +1.989)
    पाकिस्तान: 3 मैच, 2 जीत – 4 अंक (NRR +1.484)
    नेट रन रेट के मामले में भारत इस ग्रुप में सबसे मजबूत स्थिति में है।

    सेमीफाइनल के संभावित परिदृश्य
    अगर भारत पाकिस्तान को हरा देता है
    पाकिस्तान टूर्नामेंट से बाहर
    भारत सीधे सेमीफाइनल में इंग्लैंड का परिणाम अप्रासंगिक

    अगर इंग्लैंड न्यूजीलैंड को हरा देता है
    इंग्लैंड 8 अंकों के साथ सेमीफाइनल मेंपाकिस्तान को भारत के खिलाफ बड़ी जीत चाहिएभारत का बेहतर नेट रन रेट पाकिस्तान की राह बेहद मुश्किल बना देगा अगर न्यूजीलैंड इंग्लैंड को हरा देता है
    भारत, इंग्लैंड और पाकिस्तानतीनों के 6-6 अंक हो सकते हैंऐसे में नेट रन रेट निर्णायक भूमिका निभाएगा

    नजरें टिकीं महामुकाबले पर
    भारत-पाकिस्तान का यह मुकाबला सिर्फ अंक तालिका नहीं, बल्कि पूरे टूर्नामेंट की तस्वीर साफ कर देगा। एशिया की इस पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता में रोमांच अपने चरम पर होगा और हर गेंद सेमीफाइनल की कहानी लिखेगी।क्रिकेट फैंस के लिए यह मुकाबला किसी फाइनल से कम नहीं होगा।

  • अकीरा नंदन AI फिल्म केस: दिल्ली हाई कोर्ट का कड़ा रुख फर्जी सामग्री 72 घंटे में हटाने का आदेश

    अकीरा नंदन AI फिल्म केस: दिल्ली हाई कोर्ट का कड़ा रुख फर्जी सामग्री 72 घंटे में हटाने का आदेश


    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI के बढ़ते दुरुपयोग और डीपफेक तकनीक पर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने आंध्र प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री और सुपरस्टार पवन कल्याण के बेटे अकीरा नंदन की तस्वीर और नाम का इस्तेमाल कर बनाई गई AI फिल्म के प्रसारण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी की निजता और व्यक्तित्व के अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    क्या है पूरा मामला

    अकीरा नंदन अकीरा देसाई की ओर से दायर याचिका में संभवमी स्टूडियोज एलएलपी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे बिना अनुमति फिल्म: स्टूडियो ने अकीरा की अनुमति के बिना उनकी इमेज का उपयोग कर लगभग एक घंटे की फिल्म बनाई और उसे यूट्यूब पर दुनिया की पहली ग्लोबल एआई फिल्म बताकर पोस्ट कर दिया। मनगढ़ंत सीन: याचिका में दावा किया गया कि फिल्म में AI के जरिए अकीरा के फर्जी रोमांटिक सीन दिखाए गए हैं जिससे उनकी प्रतिष्ठा और सामाजिक छवि को गहरा नुकसान पहुंचा है।अधिकारों का हनन: अकीरा के व्यक्तित्व आवाज और नाम का कमर्शियल उपयोग उनकी निजता के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

    दिल्ली हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ

    मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति तुषार राव गडेला की पीठ ने कहा एआई टूल्स का उपयोग करके किसी व्यक्ति को उसकी अनुमति के बिना मुख्य भूमिका में दिखाना और मनगढ़ंत सामग्री पेश करना उसके व्यक्तित्व के अधिकारों का उल्लंघन है। यदि इस पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो याचिकाकर्ता को ऐसी क्षति हो सकती है जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी।

    अदालत का आदेश और टेक कंपनियों को निर्देश

    अदालत ने अकीरा के पक्ष में अंतरिम आदेश जारी करते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं: ब्रॉडकास्ट पर रोक: विवादित फिल्म के सर्कुलेशन और ब्रॉडकास्ट पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध। मेटा को निर्देश कोर्ट ने मेटा प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वह उल्लंघन करने वाले सभी URL की पहचान करे। 2 घंटे की डेडलाइन: संबंधित प्लेटफॉर्म्स को 72 घंटे के भीतर इस सामग्री को हटाने का आदेश दिया गया है। यदि स्टूडियो सामग्री नहीं हटाता है तो मेटा खुद इसे ब्लॉक/डिलीट करेगा। अगली सुनवाई: इस गंभीर विषय पर अब अगली सुनवाई 5 फरवरी 2026 को होगी।

    व्यक्तित्व अधिकार क्या हैं

    यह कानूनी अधिकार किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को अपने नाम छवि आवाज या व्यक्तित्व की अन्य विशेषताओं को व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल होने से रोकने की शक्ति देता है। हाल के दिनों में अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर जैसे सितारों ने भी अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए कोर्ट से आदेश प्राप्त किए हैं।

  • यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता, मर्सिडीज जैसी कारों पर भारत 40% तक घटाएगा टैरिफ

    यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता, मर्सिडीज जैसी कारों पर भारत 40% तक घटाएगा टैरिफ

    मुंबई। अगर आप लग्जरी कार खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता (Free Trade Deal) होने जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, भारत यूरोप से आने वाली कारों पर लगने वाले भारी-भरकम इंपोर्ट ड्यूटी को 110% से घटाकर सीधे 40% करने की तैयारी में है.

    यह देश के बड़े बाजार को खोलने की अब तक की सबसे बड़ी पहल हो सकती है, क्योंकि दोनों देशों के बीच मंगलवार तक फ्री ट्रेड समझौता होने की उम्मीद है.
    क्या हैं डील की अहम बातें?
    अभी भारत विदेशी कारों पर 110% तक टैक्स लेता है, जिसे घटाकर 40% किया जा सकता है.
    यह छूट उन कारों पर मिलेगी जिनकी कीमत 15,000 यूरो (करीब 13-14 लाख रुपये) से ज्यादा होगी. यानी इसका बड़ा फायदा लग्जरी कारों को मिलेगा.

    टैक्स सिर्फ 40% पर नहीं रुकेगा. आने वाले समय में इसे धीरे-धीरे घटाकर 10% तक लाने की योजना है.
    इस फैसले से फॉक्सवैगन, मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू जैसी दिग्गज कंपनियों की कारें भारतीय बाजार में काफी सस्ती हो जाएंगी.

    आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?
    अभी तक विदेशों में बनी कारें भारत आते-आते अपनी असली कीमत से दोगुनी महंगी हो जाती थीं. टैक्स कम होने से इन प्रीमियम कारों की कीमतों में भारी गिरावट आएगी, जिससे भारतीय ग्राहकों के पास ज्यादा ऑप्शन होंगे. वहीं दूसरी तरफ विदेशी कंपनियों के लिए भारत में अपना बाजार बढ़ाना आसान होगा.

    भारत के लिए क्यों अहम है यह FTA?

    यह भारत के लिए अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता होगा. 27 देशों के यूरोपीय ब्लॉक के साथ सर्विस और सामानों का यह तालमेल भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस हब बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है.

  • स्लीप-एपनिया की पहली दवा जल्द हो सकती है उपलब्ध: खर्राटों और सांस रुकने की समस्या से मिलेगा आराम

    स्लीप-एपनिया की पहली दवा जल्द हो सकती है उपलब्ध: खर्राटों और सांस रुकने की समस्या से मिलेगा आराम


    नई दिल्ली।ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज AIIMS के अनुसार भारत में करीब 10.4 करोड़ लोग ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया OSA से पीड़ित हैं। यह गंभीर स्लीप डिसऑर्डर धीरे-धीरे हार्ट, ब्रेन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है।फिलहाल स्लीप एपनिया का इलाज मुख्य रूप से लाइफस्टाइल बदलाव और CPAP मशीन के जरिए किया जाता रहा है। लेकिन अमेरिका में विकसित नई ओरल पिल, थर्ड फेज क्लिनिकल ट्रायल पूरी कर चुकी है और FDA अप्रूवल का इंतजार कर रही है।

    दवा का काम करने का तरीका रात को सोने से पहले ली जाएगी गले की मांसपेशियों को एक्टिव रखेगी, जिससे नींद में सांस की नली बंद नहीं होगी ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर होगी और स्लीप एपनिया की गंभीरता घटेगी CPAP मशीन पर निर्भर मरीजों के लिए आसान विकल्प

    ट्रायल और असर
    फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में दवा ने स्लीप एपनिया की गंभीरता में लगभग 47% तक कमी दिखाई। हल्के साइड इफेक्ट में मुंह सूखना और नींद आने में थोड़ी कठिनाई देखने को मिली।

    भारत में उपलब्धता
    अभी यह दवा भारत में उपलब्ध नहीं होगी। अमेरिका या अन्य देशों में मंजूरी मिलने के बाद ही भारत में उपलब्ध हो सकेगी। संभावित समय 2027 की शुरुआत तक बताया जा रहा है।

    हेल्थ रिस्क अगर समय पर इलाज न हो
    हार्ट डिजीज

    हाई ब्लड प्रेशर

    स्ट्रोक

    डायबिटीज

    ब्रेन से जुड़ी समस्याएं

    इस नई दवा से स्लीप एपनिया के मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो CPAP मशीन का नियमित इस्तेमाल नहीं कर पाते।

  • अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाने का संकेत, वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा-रूसी तेल खरीद घटने से बड़ी जीत

    अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाने का संकेत, वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा-रूसी तेल खरीद घटने से बड़ी जीत


    नई दिल्ली। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ट्रम्प सरकार भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ में से आधा हटाने पर विचार कर सकती है, क्योंकि भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद काफी कम कर दी है। बेसेंट ने यह दावा किया कि 25% टैरिफ ने भारत की रूसी तेल खरीद घटाने में असर दिखाया है और अब राहत देने का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने इसे अमेरिका की बड़ी जीत बताया और कहा कि टैरिफ अभी भी लागू हैं,
    लेकिन धीरे-धीरे इन्हें हटाने की संभावना है।

    अमेरिका ने अगस्त 2025 में भारत पर दो बार 25-25% टैरिफ लगाए थेपहला व्यापार घाटे के आधार पर और दूसरा रूस से तेल खरीदने के कारण। बेसेंट ने यह भी आरोप लगाया कि यूरोपीय देश भारत पर टैरिफ इसलिए नहीं लगा रहे क्योंकि वे भारत के साथ बड़े व्यापार समझौते के लिए इच्छुक हैं, जबकि यूरोप खुद रिफाइंड तेल खरीदकर रूस की मदद कर रहा है।

    बेसेंट 500% टैरिफ के प्रस्ताव पर भी बोले
    बेसेंट ने कहा कि रूसी तेल खरीदने पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सीनेटर ग्राहम ने रखा है, लेकिन ट्रम्प को इसकी जरूरत नहीं है।

    राष्ट्रपति के पास पहले से ही IEEPA कानून के तहत राष्ट्रीय आपात स्थिति का हवाला देकर अन्य देशों पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार है।

    भारत ने रूस से तेल खरीद घटाई, पर पूरी तरह नहीं रोकी
    अमेरिकी दावों के बावजूद भारत सरकार का कहना है कि रूस से तेल खरीद अभी भी जारी है और भारत अपनी ऊर्जा नीति अपने हितों के आधार पर तय करता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में भारत की रूस से तेल खरीद में गिरावट आई और वह तीसरे नंबर पर खिसक गया। वहीं तुर्की दूसरे सबसे बड़े खरीदार बन गया।

    चीन अभी भी रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है।

    भारत की खरीद में गिरावट का कारण
    रूस ने अब तेल की छूट घटा दी है और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत भी कम हो गई है, जिससे भारत के लिए रूस से तेल खरीदना पहले जैसा लाभकारी नहीं रहा। इसके अलावा शिपिंग, बीमा और भुगतान में दिक्कतें भी बढ़ीं। इसी वजह से भारत सऊदी, UAE और अमेरिका जैसे स्थिर सप्लायर्स से भी तेल खरीद बढ़ा रहा है।

    अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता और टैरिफ में नरमी
    अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते की बातचीत चल रही है, ऐसे में टैरिफ घटाने के संकेत दोनों देशों के रिश्तों में नरमी की तरफ माना जा रहा है।
    अमेरिका के टैरिफ में राहत के संकेत से भारत-यूएस संबंधों में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन रूस से तेल खरीद पर भारत की नीति अभी भी अपने हितों पर आधारित है।

  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत माता के सच्चे सपूत थे : सीएम योगी..

    नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत माता के सच्चे सपूत थे : सीएम योगी..


    नई दिल्ली :लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर नेताजी सुभाष चौक हजरतगंज लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि नेताजी भारत की आजादी का ऐसा नाम हैं जो प्रत्येक भारतीय के मन में सर्वोच्च सम्मान के साथ किसी भी विपरीत परिस्थिति में देशद्रोही तत्वों के सामने न झुकने का दृढ़ संकल्प उत्पन्न करता है भारत माता के सच्चे सपूत नेताजी का नाम लेते ही हर भारतीय के मन में श्रद्धा सम्मान और राष्ट्रप्रेम की भावना स्वतः जाग्रत हो जाती है

    सीएम योगी ने कहा कि नेताजी ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी उनका आह्वान तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा भारत की आजादी का मंत्र बन गया उनका प्रत्येक शब्द स्वतंत्रता संग्राम का संदेश बन जाता था दिल्ली चलो का उद्घोष हर भारतीय को प्रेरित करता है उनका कदम कदम बढ़ाए जा खुशी के गीत गाए जा गीत आज भी भारतीय सेना के दीक्षांत समारोह में बड़ी शान से गाया जाता है नेताजी का योगदान महात्मा गांधी के नेतृत्व वाले आंदोलन को भी नई ऊर्जा प्रदान करता है

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नेताजी ने क्रांतिकारियों के सिरमौर के रूप में आजादी की लड़ाई का नेतृत्व किया भारत के अंदर और बाहर जाकर स्वतंत्रता के लिए जो संघर्ष किया वह अविस्मरणीय है जर्मनी जापान और अन्य देशों में जाकर उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया यह हमारे लिए प्रेरणा की गाथा है

    मुख्यमंत्री ने नेताजी के जीवन पर भी प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि नेताजी का जन्म 1897 में कटक में एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता परिवार में हुआ बचपन में ही उन्हें उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन भेजा गया आईसीएस की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने अंग्रेजों की चाकरी करने से इनकार कर दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े उनका विराट व्यक्तित्व और देश के प्रति अमूल्य योगदान आज भी हम सबको प्रेरणा देता हैसीएम योगी ने कहा कि हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और उनके श्रीचरणों में प्रदेशवासियों की ओर से नमन करते हैं उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और उनका आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत रह

  • सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और टीएमसी को इतिहास पर घेरा..

    सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और टीएमसी को इतिहास पर घेरा..


    नई दिल्ली: भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कांग्रेस तथा तृणमूल कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस के कारण अंग्रेजों का भारत पर कब्जा करने का सपना चकनाचूर हो गया

    सुधांशु त्रिवेदी ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कटाक्ष किया उन्होंने कहा कि आपकी पार्टी भी कांग्रेस से निकली है आप भी कांग्रेस में थीं इतने सालों तक क्यों नहीं याद आया कि नेताजी को सम्मान और उचित स्थान मिलना चाहिए अगर टीएमसी के मन में नेताजी के प्रति सम्मान है तो उन्हें अपने नाम से कांग्रेस हटा देना चाहिए अन्यथा बंगाल की प्रबुद्ध जनता उन्हें जड़-मूल से खत्म कर देगीउन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सबसे सच्चा सम्मान दिया 2018 में आजाद हिंद की निर्वासित सरकार के 75 वर्ष पूरे होने पर सभी जीवित सेनानियों को गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल किया गया और उनका सम्मान किया गया किसी भी राजनीतिक दल ने इससे पहले ऐसा सम्मान नहीं दिया इंडिया गेट पर 1968 तक जॉर्ज पंचम की मूर्ति रही थी वहां नेताजी की मूर्ति पुनर्स्थापित की गई

    सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा कि भारत की स्वतंत्रता में कई लोगों ने योगदान दिया लेकिन सुभाष चंद्र बोस का योगदान अग्रणी और अविस्मरणीय है इसे भुलाने के अनेक कुत्सित प्रयास हुए हैं उन्होंने डॉ भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि 1955 में दिए साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना की निष्ठा अंग्रेजों के प्रति बदल चुकी थी और नेताजी के नेतृत्व ने ब्रिटिश शासन की धारणा को तोड़ दिया

    त्रिवेदी ने 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत के बाद नेताजी द्वारा इसे ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाने का अवसर बताया और सवाल उठाया कि उस समय कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन पर दबाव क्यों नहीं बनाया उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी के 14 जुलाई 1942 के रेजोल्यूशन का हवाला दिया जिसमें कहा गया कि ब्रिटिश सरकार के खिलाफ नकारात्मक भाव को सहयोग और सकारात्मक में बदला जाएगा और कांग्रेस पूरी स्वेच्छा से ब्रिटिश फौजों के समर्थन के लिए तैयार थी यही कारण था कि कांग्रेस ने 1931 से 1947 तक 1942 को छोड़कर कोई आंदोलन नहीं किया

    सुधांशु त्रिवेदी का कहना है कि इतिहास में नेताजी के योगदान को सही रूप में प्रस्तुत करना और उनका सम्मान करना आवश्यक है यह केवल भारत के गौरव के लिए नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है