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  • राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत चौथे स्थान पर, 39 पदकों के साथ अभियान समाप्त

    राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत चौथे स्थान पर, 39 पदकों के साथ अभियान समाप्त


    ग्लासगो।
    राष्ट्रमंडल खेल 2026 के सभी मुकाबलों के समापन के साथ भारत ने पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। भारतीय दल ने कुल 39 पदक जीतकर लगातार दूसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में चौथे स्थान पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

    भारत के खाते में 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक आए। इनमें पुरुष खिलाड़ियों ने 5 स्वर्ण, 13 रजत और 5 कांस्य सहित कुल 23 पदक, जबकि महिला खिलाड़ियों ने 8 स्वर्ण, 4 रजत और 4 कांस्य सहित 16 पदक जीते।

    पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया 70 स्वर्ण, 45 रजत और 56 कांस्य सहित कुल 171 पदकों के साथ शीर्ष पर रहा। इंग्लैंड 110 पदकों के साथ दूसरे और कनाडा 62 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भारत और स्कॉटलैंड दोनों ने 39-39 पदक जीते, लेकिन अधिक रजत पदकों के आधार पर भारत चौथे स्थान पर रहा।

    अहम बात यह रही कि इस बार राष्ट्रमंडल खेल के कार्यक्रम में भारत के मजबूत खेलों में शामिल कुछ प्रमुख स्पर्धाएं नहीं थीं। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बर्मिंघम 2022 की तरह इस बार भी चौथा स्थान हासिल किया।

    भारत के अभियान में मुक्केबाजी, टेबल टेनिस, एथलेटिक्स, भारोत्तोलन, जूडो और अन्य खेलों में खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। महिला खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदकों की संख्या में पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए भारतीय दल की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  • दिल्ली में 22वीं कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप का भव्य समापन, भारत के खाते में 16 पदक

    दिल्ली में 22वीं कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप का भव्य समापन, भारत के खाते में 16 पदक


    नई दिल्ली।
    दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित 22वीं कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप 2026 का रविवार को भव्य समापन हुआ। समापन समारोह में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुख्य अतिथि के रूप में विजेता खिलाड़ियों को पदक एवं सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का संकल्प है कि राष्ट्रीय राजधानी को केवल देश की राजनीतिक राजधानी ही नहीं, बल्कि भारत की ‘स्पोर्ट्स कैपिटल’ के रूप में भी स्थापित किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 27 जुलाई से आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में 25 कॉमनवेल्थ देशों के खिलाड़ियों की भागीदारी ने दिल्ली की विश्वस्तरीय खेल आयोजनों की मेजबानी क्षमता को एक बार फिर साबित किया है। उन्होंने इसे खेल उत्कृष्टता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का उत्सव बताया।

    समारोह में शिक्षा एवं खेल मंत्री आशीष सूद, कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस फेडरेशन और टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारी, विभिन्न देशों के खिलाड़ी, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल तथा खेल जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। समापन समारोह में कलारीपयट्टू, फ्लाइंग ड्रमर्स, विशेष बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और मेडल सेरेमनी ने आकर्षण का केंद्र बनाया।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थियों को प्रतियोगिता देखने के लिए आमंत्रित किया गया, ताकि वे विश्वस्तरीय खिलाड़ियों से प्रेरणा लेकर खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने कहा कि खेल अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों का विकास करते हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत न केवल अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, बल्कि विश्वस्तरीय खेल आयोजनों की सफल मेजबानी भी कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2027 में दिल्ली आईएसएफ वर्ल्ड स्कूल रेसलिंग चैंपियनशिप और आईएसएफ वर्ल्ड स्कूल बैडमिंटन चैंपियनशिप की मेजबानी करेगी। इसके अलावा दिल्ली सरकार ने नेशनल गेम्स और खेलो इंडिया गेम्स की मेजबानी के लिए भी दावेदारी पेश की है।

    मुख्यमंत्री ने भारतीय टीम को विशेष रूप से बधाई देते हुए कहा कि पुरुष और महिला दोनों टीम स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर खिलाड़ियों ने देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने आयोजन समिति, तकनीकी अधिकारियों, स्वयंसेवकों, सुरक्षा एजेंसियों और सभी सहभागी देशों का सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।

    शिक्षा एवं खेल मंत्री आशीष सूद ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली को इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी का अवसर मिला, जिसने राजधानी को वैश्विक खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित करेंगे।

    भारत का शानदार प्रदर्शन

    चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 16 पदक अपने नाम किए। भारत ने पुरुष और महिला टीम स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतने के अलावा पुरुष एवं महिला एकल, महिला युगल, मिश्रित युगल तथा पुरुष युगल स्पर्धाओं में भी स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल कर प्रतियोगिता में अपना दबदबा कायम रखा। भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने विश्व मंच पर भारतीय टेबल टेनिस की बढ़ती ताकत को एक बार फिर साबित किया।

  • कच्चे तेल की खोज….. समुद्र मंथन योजना पर 84084 करोड़ खर्च करेगा भारत

    कच्चे तेल की खोज….. समुद्र मंथन योजना पर 84084 करोड़ खर्च करेगा भारत


    नई दिल्‍ली।
    भारत (India) एनर्जी निर्भरता (Energy Dependence) को कम करने के लिए कई बड़े कदम उठा रहा है. अब भारत ने समुद्र से कच्‍चे तेल (Crude Oil) को निकालने के लिए एक योजना शुरू किया है. इस योजना के तहत समुद्र के नीचे अधिक तेल और प्राकृतिक गैस की खोज की जाएगी. यह एक लॉन्‍गटर्म स्‍कीम है. इस प्रोग्राम का नाम ‘समुद्र मंथन’ रखा गया है.

    नेशनल आफसोर एक्‍सप्‍लोरेशन योजना (समुद्र मंथन) के तहत 84,084 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है. यह खर्च वित्त वर्ष 2030-31 तक चलेगा, जिसका लक्ष्य गहरे जल क्षेत्रों में घरेलू तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है. समुद्र में उन जगहों पर तेल और गैस की खोज की जाएगी, जहां पर विशाल संसाधन मौजूद हैं और अभी तक किसी ने खोज नहीं की है।

    सरकार के अनुसार, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस नजरिए को दर्शाती है, जिसे उन्होंने पहली बार 2025 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में चर्चा की थी, जिसमें भारत की ऊर्जा क्षमता को उजागर करने के लिए आधुनिक युग के समुद्र मंथन का संचालन करने की बात कही गई थी।

    यह कार्यक्रम ऐसे समय में शुरू किया गया है जब भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88-89% और प्राकृतिक गैस का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है. यानी देश की ऊर्जा की बढ़ती मांग विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है और जियो-पॉलिटिक तनाव के कारण भारत के लिए एनर्जी सप्‍लाई प्रभावित हुई है।


    इस योजना के तहत क्‍या होगा?

    भारत में कई आफशोर सेमीडेंट्र्री बेसिन हैं, जिनमें तेल और प्राकृतिक गैस मौजूद हो सकती है, लेकिन इनमें से कई अभी भी बड़े पैमाने पर अनछुए हैं क्योंकि वहां से तेल निकालना कठिन और महंगा है. इस योजना के तहत, सरकार बड़े पैमाने पर सर्वे, भूवैज्ञानिक अध्ययन, ड्रिलिंग और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे प्रमुख प्रारंभिक चरण के कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराएगी।

    इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले भूवैज्ञानिक डेटा का उत्पादन करना है जो आशाजनक हाइड्रोकार्बन संसाधनों की पहचान कर सके और तेल-गैस निकालने में मदद कर सके. भारत के इस कदम से घरेलू स्‍तर पर तेल और गैस में बड़ा निवेश आ सकता है. साथ ही भारत का एनर्जी क्षमता मजबूत हो सकती है।


    समुद्र मंथन आखिर करेगा क्या?

    इस योजना के तहत आधुनिक टेक्‍नोलॉजी का उपयोग करते हुए उन जगहों की पहचानल की जाएगी, जहां पर तेल और गैस के होने की संभावना है. इसके बाद आशाजनक गहरे पानी और अति-गहरे पानी के क्षेत्रों में ड्रिलिंग की जाएगी. इस योजना के तहत सीमावर्ती जगहों में वैज्ञानिक ड्रिलिंग, सामान्य उत्पादन और निकासी, तेल और गैस विनिर्माण और सेवा क्षेत्र, आधुनिक टेक, डिजिटल प्रोगाम मैनेजमेंट और क्षमता निर्माण भी शामिल हैं।

    इससे क्‍या लाभ हो सकता है?
    सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से समय के साथ तेल और गैस भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल के बराबर मात्रा जुड़ जाएगी. हालांकि व्यावसायिक उत्पादन में अभी कई साल लगेंगे, लेकिन सफल खोजों से भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, लॉन्‍गटर्म ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है, निवेश आकर्षित हो सकता है, रोजगार पैदा हो सकते हैं और देश की ऊर्जा क्षमताओं को बढ़ावा मिल सकता है।

  • CWG 2026: भारत की पदक तालिका में लंबी छलांग….एक दिन में 8 गोल्ड सहित रिकॉर्ड 16 मेडल जीते

    CWG 2026: भारत की पदक तालिका में लंबी छलांग….एक दिन में 8 गोल्ड सहित रिकॉर्ड 16 मेडल जीते


    नई दिल्ली।
    ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स (Glasgow Commonwealth Games) के 10वें दिन भारत (India) की झोली में रिकॉर्ड 16 मेडल (Record 16 medals) आए। इन मेडल के दम पर भारत ने ओवरऑल मेडल टैली में लंबी छलांग लगाई है। भारत अब कुल 39 मेडल के साथ चौथे पायदान पर पहुंच गया है।

    भारत ने 10वें दिन 8 गोल्ड, 5 सिल्वर और 3 बॉन्ज मेडल जीते, जिसमें 7 गोल्ड तो बॉक्सिंग में आए। बॉक्सर प्रीति पवार, जैस्मीन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने टॉप मेडल जीते, जबकि जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने अपने-अपने वेट कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीते। लॉन्ग-डिस्टेंस रनर गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 5000m फाइनल में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर CWG 2026 का अपना दूसरा मेडल जीता। दूसरी ओर, पुरुषों के F57 शॉट पुट इवेंट में भारत 1-2 पर रहा, जिसमें सोमन राणा ने गोल्ड और शुभम जुयाल ने सिल्वर मेडल जीता। पुरुषों के ट्रिपल जंप इवेंट में, प्रवीण चित्रवेल ने सिल्वर मेडल जीता, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। जूडोका उन्नति शर्मा ने भी ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। भारत के कुल 39 मेडल (13 गोल्ड, 17 ​​सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज) हो गए हैं, जिससे देश मेडल टेबल में चौथे नंबर पर आ गया है।


    कॉमनवेल्थ गेम्स के 10वें दिन मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स

    गोल्ड प्रीति पवार – महिलाओं की 54kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड जैस्मिन लैम्बोरिया – महिलाओं की 57kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड सोमन राणा – पुरुषों की शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    गोल्ड साक्षी चौधरी – महिलाओं की 51kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड प्रिया घनघस – महिलाओं की 60kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड अरुंधति चौधरी – महिलाओं की 70kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड सचिन सिवाच – पुरुषों की 60kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड अंकुश पंघाल – पुरुषों का 80kg (बॉक्सिंग)
    सिल्वर प्रवीण चित्रावेल – पुरुषों का ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    सिल्वर जदुमणि सिंह मंडेंगबाम – पुरुषों का 55kg (बॉक्सिंग)
    सिल्वर शुभम जुयाल – पुरुषों का शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    सिल्वर लवलीना बोरगोहेन – महिलाओं का 75kg (बॉक्सिंग)
    सिल्वर नरेंद्र बेरवाल – पुरुषों का +90kg (बॉक्सिंग)
    ब्रॉन्ज सेल्वा प्रभु थिरुमारन – पुरुषों की ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    ब्रॉन्ज उन्नति शर्मा – महिलाओं की -57kg (जूडो)
    ब्रॉन्ज गुलवीर सिंह – पुरुषों की 5000m (एथलेटिक्स)


    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स (13)

    मीराबाई चानू – महिलाओं की 48kg (वेटलिफ्टिंग)
    शर्मिला धनखड़ – महिलाओं की शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    दिलीप महादू गावित – पुरुषों की 100m T47 (पैरा एथलेटिक्स)
    अस्मिता डे – महिलाओं की -48kg (जूडो)
    हर्ष सिंह – पुरुषों की -60kg (जूडो)
    प्रीति पवार – महिलाओं की 54kg (बॉक्सिंग)
    जैस्मिन लैम्बोरिया – महिलाओं की 57kg (बॉक्सिंग)
    सोमन राणा – पुरुषों की शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    साक्षी चौधरी – महिलाओं की 51kg (बॉक्सिंग)
    प्रिया घनघस – महिलाओं की 60kg (बॉक्सिंग)
    अरुंधति चौधरी – महिलाओं की 70kg (बॉक्सिंग)
    सचिन सिवाच – पुरुषों की 60kg (बॉक्सिंग)
    अंकुश पंघाल – पुरुषों का 80kg (बॉक्सिंग)


    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स (17)

    ऋषिकांत सिंह – पुरुषों का 60kg (वेटलिफ्टिंग)
    मुथुपंडी राजा – पुरुषों का 65kg (वेटलिफ्टिंग)
    ज्ञानेश्वरी यादव – महिलाओं का 53kg (वेटलिफ्टिंग)
    वल्लूरी अजय बाबू – पुरुषों का 79kg (वेटलिफ्टिंग)
    हरजिंदर कौर – महिलाओं का 69kg (वेटलिफ्टिंग)
    सर्वेश कुशारे – पुरुषों का हाई जंप (एथलेटिक्स)
    गुलवीर सिंह – पुरुषों का 10,000m (एथलेटिक्स)
    एम. श्रीशंकर – पुरुषों का लॉन्ग जंप (एथलेटिक्स)
    मोहम्मद बेसिल – पुरुषों का 100m T47 (पैरा एथलेटिक्स)
    लवप्रीत सिंह – पुरुषों का +110kg (वेटलिफ्टिंग)
    यामिनी मौर्या – महिलाओं का -57kg (जूडो)
    नीरज चोपड़ा – पुरुषों का जेवलिन थ्रो (एथलेटिक्स)
    प्रवीण चित्रावेल – पुरुषों का ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    जदुमणि सिंह मंडेंगबाम – पुरुषों का 55kg (बॉक्सिंग)
    शुभम जुयाल – पुरुषों का शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    लवलीना बोरगोहेन – महिलाओं का 75kg (बॉक्सिंग)
    नरेंद्र बेरवाल – पुरुषों का +90kg (बॉक्सिंग)


    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स (9)

    झंडू कुमार – पुरुषों का हैवीवेट (पैरा पावरलिफ्टिंग)
    बिंद्यारानी देवी – महिलाओं का 58kg (वेटलिफ्टिंग)
    शिल्पा के. शायला – महिलाओं का शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    सीमा कालीरमना – महिलाओं का डिस्कस थ्रो (एथलेटिक्स)
    तेजस्विन शंकर – डेकाथलॉन (एथलेटिक्स)
    यश वीर सिंह – पुरुषों की जैवलिन थ्रो (एथलेटिक्स)
    सेल्वा प्रभु थिरुमारन – पुरुषों की ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    उन्नति शर्मा – महिलाओं की -57kg (जूडो)
    गुलवीर सिंह – पुरुषों की 5000m (एथलेटिक्स)

  • PoK में पाक सेना की फायरिंग में 40 लोगों की मौत… भारत की जांच की मांग

    PoK में पाक सेना की फायरिंग में 40 लोगों की मौत… भारत की जांच की मांग


    नई दिल्ली।
    पाक अधिकृत कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir- PoK) में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) की फायरिंग में 40 लोगों की मौत पर भारत (India) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकृष्ट कराते हुए जांच की मांग की है। भारत ने कहा कि इस प्रकरण में पाकिस्तान (Pakistan) ने स्वीकारा है कि वह भारत में खून बहाने के लिए मुजाहिदीन भेजता है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेस में कहा कि प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग में पीओके में 40 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने इन लोगों को अपना दुश्मन बताया। राजनीतिक मामलों पर प्रधानमंत्री के विशेष सहायक ने खुले तौर पर माना कि जिन मुजाहिदीन को पाकिस्तान सरकार ने ट्रेनिंग और हथियार दिए और भारत में खून बहाने के लिए भेजा,अब वे इसका इस्तेमाल पाक के खिलाफ ही करने लगे हैं। जैसवाल ने कहा, इससे पाकिस्तान ने अपनी करतूतों की पुष्टि कर दी है।

    पीओके में निहत्थे लोगों पर हमला
    पीओके में पाक की बर्बरता के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा। आरोप है कि सुरक्षाबल निहत्थे लोगों पर सुरक्षाबल ताकत का इस्तेमाल कर रहे। लोग मारे जा रहे हैं, मीडिया पर प्रतिबंध लगा हुआ है। शुक्रवार को लोग पाक के खिलाफ सड़कों पर उतरे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। रावलकोट के रहने वाले सरदार अमन खान कश्मीरी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अकील ने बयान जारी कर बताया कि पाकिस्तान शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग कर रहा। दोनों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से स्थिति की जमीनी हकीकत के बारे में बताने की अपील की है।

    अमन खान ने पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों को आतंकी बताया जा रहा। पाक रेंजर, फ्रंटियर कॉर्प्स और अन्य सुरक्षाबल घरों की छतों पर तैनात हैं और बेकसूर लोगों को निशाना बना रहे। अमन खान ने बताया कि सुरक्षाबल राष्ट्रीय सुरक्षा में इस्तेमाल होने वाले घातक हथियारों का इस्तेमाल निहत्थे लोगों पर कर रहे हैं। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे।

    एक प्रश्न के उत्तर में जैसवाल ने कहा कि रूसी सेना से अब तक 139 भारतीयों की रिहाई हो चुकी है। अभी 24 भारतीयों के वहां होने की खबर है। सरकार उनकी रिहाई की कोशिश कपीओके में पाक की बर्बरता के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा। आरोप है कि सुरक्षाबल निहत्थे लोगों पर सुरक्षाबल ताकत का इस्तेमाल कर रहे। लोग मारे जा रहे हैं, मीडिया पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

    अमेरिकी समाचार पत्र द्वारा पीओके को पाकिस्तानी कश्मीर बताने वाली रिपोर्ट पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि पीओके पर अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मीडिया संस्थानों को कानूनी नामों का इस्तेमाल करना होगा। जम्मू- कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है, था और हमेशा रहेगा।

  • भारत में इबोला को लेकर हाई अलर्ट…. कांगो से लौटे BSF जवान में दिखे लक्षण

    भारत में इबोला को लेकर हाई अलर्ट…. कांगो से लौटे BSF जवान में दिखे लक्षण


    नई दिल्ली।
    दुनियाभर में इबोला वायरस (Ebola virus) के मंडराते खतरे के बीच भारत (India) भी अलर्ट (Alert) पर है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) से लौटे सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force-BSF) के एक 52 वर्षीय जवान में इबोला के संदिग्ध लक्षण दिखने के बाद हड़कंप मच गया है। एहतियात के तौर पर जवान को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के इबोला आइसोलेशन वॉर्ड में भर्ती कराया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि देश में अभी तक इबोला के एक भी कन्फर्म मामले की पुष्टि नहीं हुई है और सरकार स्थिति पर पूरी मुस्तैदी से नजर बनाए हुए है।


    क्वारंटीन के 20वें दिन बिगड़ी जवान की तबीयत

    संदिग्ध लक्षणों वाला यह बीएसएफ जवान संयुक्त राष्ट्र (UN) शांति मिशन का हिस्सा था और बीते 11 जुलाई को ही कांगो से भारत लौटा था। इबोला प्रभावित क्षेत्र से आने के कारण नियमों के तहत जवान को एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (APHO) में 21 दिनों के अनिवार्य क्वारंटीन में रखा गया था।

    क्वारंटीन पीरियड के 20वें दिन की शाम को जवान को अचानक तेज बुखार और बदन दर्द की शिकायत हुई, जो इबोला संक्रमण के शुरुआती लक्षण माने जाते हैं। प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करते हुए मरीज को तुरंत RML अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया।

    स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, जवान के खून के नमूने जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे भेजे गए हैं। फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार है और यह केवल एक संदिग्ध मामला है।


    एक्शन में सरकार, 11 हजार यात्रियों की हो चुकी है स्क्रीनिंग

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा ‘बुंदीबुग्यो इबोला आउटब्रेक’ को अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद से ही भारत सरकार अलर्ट मोड पर है। शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने संसद में बताया कि 23 मई से अब तक इबोला प्रभावित देशों से भारत आए 10,974 अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच की जा चुकी है।


    यात्रा पर बैन नहीं, लेकिन निगरानी सख्त

    कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान जैसे इबोला प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की कड़ी निगरानी की जा रही है। भारत सरकार ने यात्रा पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन एयर सुविधा 2.0 पोर्टल और ‘सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म’ के जरिए उन सभी यात्रियों की पहचान की जा रही है, जो पिछले 21 दिनों में इन देशों में गए थे।


    इन शहरों के एयरपोर्ट्स पर सबसे ज्यादा जांच

    स्क्रीनिंग के मामले में मुंबई एयरपोर्ट सबसे आगे है, जहां अब तक 7,568 यात्रियों की जांच की गई है। इसके बाद दिल्ली में 1,833, हैदराबाद में 532, चेन्नई में 210, बेंगलुरु में 205 और अहमदाबाद में 200 यात्रियों की स्क्रीनिंग हो चुकी है।


    इबोला से निपटने के लिए भारत की क्या है तैयारी?

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इबोला के संभावित खतरे से निपटने के लिए नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC), ICMR और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ मिलकर एक मजबूत रणनीति तैयार की है। देशभर के अस्पतालों में विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार किए गए हैं।

    प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर अतिरिक्त डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती कर दी गई है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए NCDC का पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर 24×7 काम कर रहा है। इसके अलावा, देश भर के चुनिंदा अस्पतालों में मॉक ड्रिल भी आयोजित की गई हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध मामले के सामने आने पर बिना देरी के तुरंत एक्शन लिया जा सके।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर का ऐतिहासिक कारनामा, डेकाथलॉन में भारत को मिला पहला पदक

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर का ऐतिहासिक कारनामा, डेकाथलॉन में भारत को मिला पहला पदक


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने ऐसा इतिहास रचा है, जिसने भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दिला दी है। पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में 7976 अंक हासिल कर उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया और राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में इस कठिन स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि डेकाथलॉन को ट्रैक एंड फील्ड की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिताओं में गिना जाता है, जिसमें खिलाड़ी की ताकत, गति, तकनीक, सहनशक्ति और मानसिक मजबूती सभी की एक साथ परीक्षा होती है।

    इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक ग्रेनाडा के लिंडन विक्टर ने 8096 अंकों के साथ जीता, जबकि कनाडा के अनुभवी एथलीट डेमियन वार्नर 8036 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। तेजस्विन शंकर ने दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया और भारत के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक सुनिश्चित किया।

    तेजस्विन की शुरुआत 100 मीटर दौड़ में सातवें स्थान से हुई थी, लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की। लंबी कूद में दूसरे स्थान पर रहते हुए उन्होंने अंकतालिका में सुधार किया। हाई जंप में 2.15 मीटर की शानदार छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया और कुल रैंकिंग में दूसरे स्थान पर पहुंच गए। पहले दिन के अंत तक उन्होंने खुद को पदक की दौड़ में मजबूती से बनाए रखा।

    दूसरे दिन भी तेजस्विन ने दमदार प्रदर्शन जारी रखा। 110 मीटर बाधा दौड़ और डिस्कस थ्रो में उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया। हालांकि पोल वॉल्ट और भाला फेंक में उन्हें उम्मीद के मुताबिक अंक नहीं मिले, जिससे वह तीसरे स्थान पर खिसक गए। इसके बावजूद अंतिम इवेंट 1500 मीटर दौड़ में उन्होंने संयम बनाए रखा और कुल 7976 अंक के साथ कांस्य पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया।

    डेकाथलॉन को एथलेटिक्स की सबसे कठिन स्पर्धाओं में से एक माना जाता है। यह प्रतियोगिता दो दिनों तक चलती है और इसमें कुल 10 अलग-अलग इवेंट शामिल होते हैं। पहले दिन खिलाड़ियों को 100 मीटर दौड़, लंबी कूद, शॉटपुट, हाई जंप और 400 मीटर दौड़ में हिस्सा लेना होता है। दूसरे दिन 110 मीटर बाधा दौड़, डिस्कस थ्रो, पोल वॉल्ट, भाला फेंक और 1500 मीटर दौड़ आयोजित की जाती है। हर स्पर्धा में प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाते हैं और अंत में सभी 10 इवेंट्स के अंकों को जोड़कर अंतिम परिणाम तय किया जाता है।

    समय आधारित प्रतियोगिताओं जैसे 100 मीटर, 400 मीटर और 1500 मीटर में कम समय लेने वाले खिलाड़ी को अधिक अंक मिलते हैं। वहीं लंबी कूद, हाई जंप, पोल वॉल्ट, शॉटपुट, डिस्कस और भाला फेंक जैसी फील्ड स्पर्धाओं में जितनी अधिक दूरी या ऊंचाई हासिल होती है, उतने अधिक अंक दिए जाते हैं। इसके लिए विश्व एथलेटिक्स द्वारा निर्धारित आधिकारिक स्कोरिंग प्रणाली लागू होती है।

    तेजस्विन शंकर का यह कांस्य पदक केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए मील का पत्थर है। लगातार दो दिनों तक दस अलग-अलग स्पर्धाओं में उच्च स्तर का प्रदर्शन करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में इस कठिन प्रतियोगिता में भारत का पहला पदक जीतकर तेजस्विन ने साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी अब बहु-इवेंट एथलेटिक्स में भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उनकी यह ऐतिहासिक सफलता आने वाली पीढ़ी के एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और भारतीय एथलेटिक्स के भविष्य को नई दिशा देगी।

  • भारत में जुट सकते हैं दुनिया के बड़े नेता, BRICS समिट में शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की संभावित मौजूदगी पर टिकी नजर

    भारत में जुट सकते हैं दुनिया के बड़े नेता, BRICS समिट में शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की संभावित मौजूदगी पर टिकी नजर

    नई दिल्ली । भारत सितंबर 2026 में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी की तैयारी में जुटा है। इस सम्मेलन को लेकर सबसे अधिक चर्चा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को लेकर हो रही है। यदि उनका दौरा तय होता है, तो यह कोविड-19 महामारी और वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुए सीमा विवाद के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है, यह सम्मेलन भारत की कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भी शामिल होने की संभावना है। रूस की ओर से पहले ही संकेत दिए जा चुके हैं कि राष्ट्रपति पुतिन भारत यात्रा कर सकते हैं। वहीं ब्रिक्स के नए सदस्य देशों में शामिल ईरान भी सम्मेलन में भाग लेने की तैयारी कर रहा है। हालांकि ईरान की ओर से किस स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। यदि सभी प्रमुख नेता सम्मेलन में शामिल होते हैं तो यह हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय बैठकों में से एक होगी।

    ब्रिक्स सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले महीने किर्गिस्तान में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने की संभावना भी जताई जा रही है। इस दौरान उनकी रूस, चीन और ईरान सहित कई सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात हो सकती है। यह बैठक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद एससीओ देशों की पहली शीर्ष स्तरीय बैठक मानी जा रही है, इसलिए क्षेत्रीय सुरक्षा, पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा सहयोग, व्यापार और बहुपक्षीय साझेदारी जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शी जिनपिंग नई दिल्ली आते हैं तो यह भारत और चीन के संबंधों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत होगा। पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद और तनाव के कारण दोनों देशों के रिश्तों में दूरी आई थी, लेकिन हाल के महीनों में संवाद बढ़ाने के प्रयास भी तेज हुए हैं। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की संभावित मुलाकात द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से अहम मानी जा रही है। सीमा प्रबंधन, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर भी चर्चा की संभावना जताई जा रही है।

    इस बीच पाकिस्तान की ओर से भी संकेत मिले हैं कि वर्ष 2027 में इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए भारत सहित सभी सदस्य देशों को औपचारिक निमंत्रण भेजा जाएगा। पाकिस्तान सितंबर 2026 से एससीओ की अध्यक्षता संभालेगा और मेजबान देश होने के नाते सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को आमंत्रित करना उसकी जिम्मेदारी होगी। इस घटनाक्रम को भी क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नई दिल्ली में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर अब दुनिया की नजरें टिकी हैं। यदि चीन, रूस, भारत और अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेता एक मंच पर आते हैं, तो वैश्विक आर्थिक सहयोग, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, व्यापार, निवेश, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे कई अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है। ऐसे में यह सम्मेलन केवल सदस्य देशों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीतिक परिदृश्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

  • भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिर मजबूत, 682.23 अरब डॉलर पर पहुंचा; गोल्ड रिजर्व में भी दर्ज हुई बड़ी बढ़ोतरी

    भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिर मजबूत, 682.23 अरब डॉलर पर पहुंचा; गोल्ड रिजर्व में भी दर्ज हुई बड़ी बढ़ोतरी

    नई दिल्ली । भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार मजबूत होता जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 24 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 6.118 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के साथ 682.2354 अरब डॉलर पर पहुंच गया। लगातार दूसरे सप्ताह दर्ज हुई इस वृद्धि को देश की बाहरी आर्थिक स्थिति के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    इससे पहले 17 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 1.08 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। लगातार दो सप्ताह तक विदेशी मुद्रा भंडार में हुई वृद्धि से यह संकेत मिल रहा है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत की वित्तीय स्थिति स्थिर बनी हुई है और विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार का क्रम जारी है।

    केंद्रीय बैंक के अनुसार, इस दौरान स्वर्ण भंडार के मूल्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। समीक्षा अवधि में गोल्ड रिजर्व 1.308 अरब डॉलर बढ़कर 103.058 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां भी 4.873 अरब डॉलर बढ़कर 555.929 अरब डॉलर हो गईं। यह बढ़ोतरी देश की समग्र वित्तीय मजबूती का संकेत देती है।

    भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया कि विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में केवल अमेरिकी डॉलर ही नहीं बल्कि यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का भी प्रभाव शामिल होता है। इसलिए विदेशी मुद्रा भंडार में होने वाले बदलाव वैश्विक मुद्रा बाजार की गतिविधियों से भी प्रभावित होते हैं।

    हालांकि इस अवधि में स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) में मामूली गिरावट दर्ज की गई। यह 5.3 करोड़ डॉलर घटकर 18.617 अरब डॉलर रह गया। इसके बावजूद विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य प्रमुख घटकों में हुई वृद्धि के कारण कुल भंडार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली।

    वर्ष 2026 की शुरुआत में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बना था। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते रुपये पर भी दबाव देखा गया, जिसके बाद बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने समय-समय पर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया था। इसके कारण कुछ सप्ताह तक विदेशी मुद्रा भंडार में कमी दर्ज की गई थी।

    उल्लेखनीय है कि फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। उसके बाद आई गिरावट से अब धीरे-धीरे उबरने का क्रम जारी है और हाल के सप्ताहों में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है।

    आरबीआई का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी विशेष विनिमय दर को बनाए रखना नहीं है, बल्कि केवल बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करना और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है। आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता है ताकि रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोका जा सके।

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार होता है। इससे आयात भुगतान, बाहरी ऋण दायित्वों का निर्वहन और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौरान वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है। हालिया बढ़ोतरी को भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति और वैश्विक चुनौतियों से निपटने की क्षमता के रूप में देखा जा रहा है।

  • नागरिकता को लेकर बहस के बीच सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, भारतीय पासपोर्ट जारी करने के नियमों पर संसद में दी जानकारी

    नागरिकता को लेकर बहस के बीच सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, भारतीय पासपोर्ट जारी करने के नियमों पर संसद में दी जानकारी

    नई दिल्ली । भारतीय पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है और इसके लिए निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जाती है। हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया कि पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना गया है, बल्कि यह मुख्य रूप से विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला आधिकारिक दस्तावेज है।

    राज्यसभा में भारतीय पासपोर्ट की स्थिति और नागरिकता से जुड़े सवाल उठाए गए थे। इस दौरान सरकार से पूछा गया था कि क्या भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जा सकता है और विदेश की नागरिकता लेने के बाद भारतीय नागरिकता की स्थिति क्या होती है। इसके अलावा नागरिकता कानून से जुड़े कई अन्य विषयों पर भी जानकारी मांगी गई थी।

    सरकार ने जवाब में बताया कि भारतीय पासपोर्ट पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत जारी किया जाता है। पासपोर्ट जारी करने से पहले आवेदक की पात्रता, दस्तावेजों और अन्य जरूरी जानकारियों का सत्यापन किया जाता है। सरकार के अनुसार, यह प्रक्रिया इसलिए अपनाई जाती है ताकि केवल योग्य भारतीय नागरिकों को ही पासपोर्ट जारी किया जा सके।

    केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट भारत के नागरिकों को विदेश यात्रा की सुविधा देने वाला आधिकारिक दस्तावेज है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को नियंत्रित और व्यवस्थित करना है। हालांकि पासपोर्ट नागरिकता से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज जरूर है, लेकिन इसे नागरिकता का एकमात्र और अंतिम प्रमाण नहीं बताया गया है।

    सरकार ने यह भी दोहराया कि भारत में दोहरी नागरिकता की व्यवस्था नहीं है। यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी दूसरे देश की नागरिकता प्राप्त करता है, तो भारतीय कानूनों के अनुसार उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है। ऐसी स्थिति में उसका भारतीय पासपोर्ट भी वैध नहीं रहता और उसे संबंधित प्रक्रिया के तहत इसे वापस करना पड़ता है।

    नागरिकता कानून के प्रावधानों के अनुसार विदेशी नागरिकता लेने के बाद किसी व्यक्ति का भारतीय नागरिक दर्जा समाप्त हो सकता है। इसी वजह से पासपोर्ट जारी करने और उसकी वैधता बनाए रखने के लिए नागरिकता की स्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है। सरकार ने कहा कि पासपोर्ट जारी करने की पूरी प्रक्रिया कानून और निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होती है।

    पासपोर्ट जारी करने से इनकार करने के मामलों का भी कानून में प्रावधान है। यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि आवेदक भारतीय नागरिक नहीं है या वह निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करता, तो उसका आवेदन रोका जा सकता है। इसके अलावा सुरक्षा और कानूनी कारणों के आधार पर भी पासपोर्ट जारी करने से इनकार किया जा सकता है।

    सरकार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में नागरिकता, पहचान और दस्तावेजों को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। केंद्र ने अपने जवाब के माध्यम से यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि भारतीय पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया नियमों और सत्यापन व्यवस्था के आधार पर होती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पासपोर्ट किसी व्यक्ति की विदेश यात्रा के अधिकार से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन नागरिकता का निर्धारण अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है। ऐसे में पासपोर्ट और नागरिकता को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता। सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद नागरिकता और पासपोर्ट से जुड़े नियमों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हुई है।