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  • रूसी तेल खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों को ट्रंप ने टैरिफ से दी छूट, अमेरिकी राष्ट्रपति ने फैसले की बताई वजह

    रूसी तेल खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों को ट्रंप ने टैरिफ से दी छूट, अमेरिकी राष्ट्रपति ने फैसले की बताई वजह

    नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से जुड़े प्रावधानों को लागू नहीं किया है। इस फैसले के बाद अमेरिकी राजनीति में बहस शुरू हो गई है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं ने इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं। वहीं, ट्रंप ने अपने कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह अमेरिका के हित में है और इससे दुनिया को भी फायदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अभी कई लोगों को उनके फैसले का वास्तविक अर्थ समझ नहीं आया है।

    जिन पांच देशों को इस टैरिफ से छूट मिली है, उनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। ये देश रूस से तेल और गैस खरीदते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले के तहत इन देशों पर प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ फिलहाल लागू नहीं होगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और उसकी ऊर्जा खरीद से जुड़े व्यापारिक संबंधों को लेकर अमेरिका में चर्चा जारी है।

    ट्रंप ने रविवार को मियामी में मीडिया से बातचीत के दौरान अपने निर्णय का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बहुत से लोगों को अभी यह जानकारी नहीं है कि उनके फैसले का वास्तविक मतलब क्या है। उनके मुताबिक, समय के साथ इस निर्णय के पीछे का उद्देश्य समझ में आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनका कदम अमेरिका के हित में होगा और वैश्विक स्तर पर भी इसका लाभ देखने को मिल सकता है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में इस फैसले से होने वाले संभावित लाभों का विस्तृत विवरण नहीं दिया।

    इससे पहले शुक्रवार को ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत रूस से संबंधित नए प्रतिबंध कानून के कुछ प्रावधानों को लागू करने से छूट दी गई। अमेरिकी कांग्रेस ने सितंबर में इस कानून को पारित किया था। इसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल था। भारत और चीन समेत पांच देशों को इस कार्रवाई से फिलहाल राहत मिलने के बाद कानून के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    आदेश के अनुसार, यह छूट तब तक लागू रहेगी, जब तक राष्ट्रपति या विदेश मंत्री और वित्त मंत्री यह तय नहीं कर लेते कि आगे क्या कार्रवाई आवश्यक है। इस व्यवस्था के कारण संबंधित देशों पर टैरिफ लगाने का निर्णय तत्काल लागू नहीं हुआ है। हालांकि, इससे भविष्य में टैरिफ लगाने की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं होती। आगे की कार्रवाई अमेरिकी प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करेगी।

    ट्रंप के इस कदम की आलोचना उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के साथ-साथ डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने भी की है। दोनों दलों के नेताओं ने पिछले महीने इस कानून को भारी बहुमत से पारित किया था। ऐसे में राष्ट्रपति के फैसले को लेकर अमेरिकी राजनीतिक हलकों में मतभेद सामने आए हैं। आलोचकों का मानना है कि रूस पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए इस कानून का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

    दक्षिण कैरोलिना की रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह रूस पर दबाव बनाने का विकल्प चुनतीं, ताकि युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम उठाया जा सके और गैस की कीमतें कम हों। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर भरोसा नहीं होने की बात भी कही। इस कानून का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ रखा गया है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि रूस से ऊर्जा खरीद और उस पर प्रतिबंधों को लेकर अमेरिकी प्रशासन तथा कांग्रेस के कुछ नेताओं के बीच मतभेद बने हुए हैं।

  • भारत की आर्थिक प्रगति जश्न के काबिल, अगले वर्षों में भी सात प्रतिशत से अधिक विकास की उम्मीद

    भारत की आर्थिक प्रगति जश्न के काबिल, अगले वर्षों में भी सात प्रतिशत से अधिक विकास की उम्मीद

    नई दिल्ली । भारत की आर्थिक प्रगति को पिछले एक दशक की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए शीर्ष अर्थशास्त्री क्युंघून किम ने कहा है कि देश की लगातार मजबूत आर्थिक वृद्धि और बेहतर होती आर्थिक स्थिति भविष्य के लिए आशावाद का आधार प्रदान करती है। उनके अनुसार, भारत के सामने अभी कई चुनौतियां हैं, लेकिन इसके बावजूद देश ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि मध्यम अवधि में भी भारत के मजबूत विकास की संभावनाएं बनी हुई हैं और यह उपलब्धि सराहना के साथ जश्न मनाने योग्य है।

    क्युंघून किम ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने विचारों में कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति को उसके आकार और आबादी के संदर्भ में समझना जरूरी है। करीब 1.4 अरब लोगों वाले देश के लिए लगातार मजबूत विकास दर हासिल करना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक रूप से आगे बढ़ने की क्षमता और आने वाले वर्षों में विकास की संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं।

    उनकी यह टिप्पणी भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर वैश्विक संस्थानों के बदले आकलन के बीच आई है। एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, एशियाई विकास बैंक और विश्व बैंक जैसे प्रमुख वैश्विक संस्थानों ने चालू वर्ष और अगले वर्ष के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमानों को बढ़ाकर सात प्रतिशत से अधिक कर दिया है। उनके अनुसार, विभिन्न संस्थानों के अनुमानों में हुआ यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और विकास की संभावनाओं को दर्शाता है।

    किम ने कोविड-19 महामारी के बाद भारत की आर्थिक स्थिति में आए सुधार का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, महामारी के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में 5.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, इसके बाद अर्थव्यवस्था ने तेजी से वापसी की और वर्ष 2021 में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसके बाद अगले चार वर्षों तक विकास दर सात प्रतिशत से ऊपर बनी रही। इस प्रदर्शन को उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।

    अर्थशास्त्री ने कहा कि लगातार बेहतर होते आर्थिक आंकड़ों के कारण उन्हें और कई अन्य अर्थशास्त्रियों को अपनी विकास दर संबंधी भविष्यवाणियों में बार-बार संशोधन करना पड़ा। हर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के आंकड़े उम्मीदों से बेहतर रहे। इसके परिणामस्वरूप भारत ने लगातार पांच वर्षों तक सात प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर्ज की। उनके मुताबिक, यह प्रदर्शन वर्ष 2003 से 2007 के उस दौर की याद दिलाता है, जब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ था।

    किम ने वर्ष 2021 से 2025 के बीच भारत की औसत वार्षिक विकास दर 7.83 प्रतिशत रहने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1960 के बाद किसी भी पांच वर्षीय अवधि में यह दूसरी सबसे ऊंची औसत वृद्धि दर है। इससे अधिक औसत वृद्धि केवल वर्ष 2003 से 2007 के दौरान दर्ज की गई थी, जब यह आंकड़ा 7.89 प्रतिशत रहा था। इस तुलना के जरिए उन्होंने भारत की हालिया आर्थिक वृद्धि के महत्व को रेखांकित किया।

    भारत की अर्थव्यवस्था के आकार में आए बदलाव को भी किम ने अहम बताया। उनके अनुसार, वर्ष 2007 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार एक ट्रिलियन डॉलर से थोड़ा अधिक था, जबकि अब यह चार ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच रही है। इसका अर्थ है कि आज समान विकास दर से होने वाला आर्थिक विस्तार दो दशक पहले की तुलना में कहीं बड़े पैमाने पर मूल्य सृजन करता है। किम ने कहा कि भारत की पिछले दशक की प्रगति और मध्यम अवधि में मजबूत विकास की संभावनाएं महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि देश के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं।

  • US: ट्रंप के रूख से भारत को बड़ी राहत…. 100% टैरिफ लगाने वाला फैसला फिलहाला टाला

    US: ट्रंप के रूख से भारत को बड़ी राहत…. 100% टैरिफ लगाने वाला फैसला फिलहाला टाला


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने भारत (India) पर 100 फीसदी टैरिफ (100% Tariff) के इरादे को टाल दिया है। ‘लिंडसे ग्राहम कानून’ (‘Lindsey Graham Law’) के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों पर कड़े प्रतिबंध लगने थे, जिसे ट्रंप ने 18 अक्तूबर की समयसीमा से पहले रोक दिया। ट्रंप के इस रुख से भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने और अमेरिकी बाजार में अपने निर्यात को सुरक्षित रखने की दोहरी संजीवनी मिल गई है।

    ट्रंप ने शुक्रवार रात एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट के तहत निर्धारित प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों को लागू करने से छूट दे दी। यह कदम रूस के साथ अमेरिका और वैश्विक बाजारों के लिए डीजल की सप्लाई के संबंध में समझौता होने के कुछ दिन बाद उठाया गया है। वहीं, ट्रंप ने अपने आदेश में कहा कि इस समय यह छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। हालांकि, अमेरिकी सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा, इन छूटों का मकसद व्लादिमीर पुतिन को खुश करना है।


    रुबियो की भारत यात्रा से ठीक पहले फैसला

    अमेरिकी कांग्रेस ने 16 सितंबर को ग्राहम अधिनियम पारित किया था। इस कानून के तहत ट्रंप को रूस से कच्चा तेल या गैस आयात करने वाले पांच सबसे बड़े देशों भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान से आने वाली वस्तुओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिला था।

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की 17 से 22 अक्टूबर के बीच भारत यात्रा प्रस्तावित है। अब दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और ऊर्जा साझेदारी पर बातचीत सकारात्मक माहौल में होगी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बीते महीने न्यूयॉर्क में रुबियो से मुलाकात में अधिनियम पर चिंता जताई थी।


    भारत को क्या होगा फायदा?

    सस्ते तेल की बेरोकटोक खरीद: भारत रूस से तेल खरीद जारी रख सकेगा। अगस्त में भारतीय तेल आयात में रूस का हिस्सा 44% था। यह छूट घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रखने में अहम है।

    नुकसान से बचाव:

    कानून लागू होता तो अमेरिका जाने वाले भारतीय सामानों पर 100% तक दंडात्मक टैरिफ लग सकता था। फैसले ने भारतीय निर्यातकों को संभावित नुकसान से बचा लिया है। प्रतिबंध टलने से भारत और अमेरिका के बीच जारी द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के पटरी से उतरने का जोखिम भी खत्म हो गया है।


    ट्रंप की भी मजबूरी:

    अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से पहले डीजल की बढ़ती कीमतों ने ट्रंप प्रशासन पर दबाव बना दिया था। खुद अमेरिका ने रूस से डीजल खरीद का समझौता किया है। ऐसे में वह भारत को कैसे रोक सकता था।


    ट्रंप की छूट से भारत को अस्थायी राहत

    थिंक टैंक जीटीआरआई ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ‘ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ (SRIA) के तहत प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से दी गई छूट भारत को केवल अस्थायी राहत दे सकती है, लेकिन इससे कोई स्थायी निश्चितता नहीं मिलेगी। थिंक टैंक ने कहा कि ऐसे में नई दिल्ली को अपनी ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करनी चाहिए और वाणिज्यिक शर्तों पर तेल खरीदना जारी रखना चाहिए।

    जीटीआरआई ने कहा कि इस कानून में वाशिंगटन ने टैरिफ को फिर से लागू करने के अधिकार को अभी भी सुरक्षित रखा है। उनके मुताबिक, इस छूट की कोई निश्चित समाप्ति तारीख नहीं है और इसे कभी भी वापस लिया जा सकता है। उनके मुताबिक, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रूसी ऊर्जा की खरीद पर नजर रखना जारी रखेंगे। इससे अमेरिकी प्रशासन को इस छूट की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टैरिफ को फिर से लागू करने का मौका मिल सकता है।

  • भारत-वेस्टइंडीज पांचवें टी20 में ईशान किशन का तूफान, छक्का मारकर स्टेडियम के बाहर पहुंचाई गेंद, अंपायरों को मंगानी पड़ी नई बॉल

    भारत-वेस्टइंडीज पांचवें टी20 में ईशान किशन का तूफान, छक्का मारकर स्टेडियम के बाहर पहुंचाई गेंद, अंपायरों को मंगानी पड़ी नई बॉल


    नई दिल्ली ।
    भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांचवें टी20 मुकाबले में ईशान किशन ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से दर्शकों का ध्यान खींचा। बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले जा रहे इस मुकाबले में बारिश के कारण खेल प्रभावित हुआ और मैच को घटाकर नौ-नौ ओवर का कर दिया गया। टॉस जीतने के बाद वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी करने उतरी, लेकिन शुरुआती ओवर में ही उसे पहला झटका लग गया।

    वेस्टइंडीज के गेंदबाज कीमो पॉल ने अभिषेक शर्मा को छह रन के निजी स्कोर पर आउट कर भारत को शुरुआती नुकसान पहुंचाया। इसके बाद बल्लेबाजी करने आए ईशान किशन ने तेजी से रन बनाकर भारतीय पारी को गति दी। उन्होंने क्रीज पर आते ही कैरेबियाई गेंदबाजों पर आक्रमण शुरू कर दिया। उनकी बल्लेबाजी में बड़े शॉट खेलने का अंदाज साफ दिखाई दिया और कुछ ही गेंदों में उन्होंने मुकाबले का माहौल बदल दिया।

    ईशान की पारी का सबसे खास क्षण रोमारियो शेफर्ड के ओवर में देखने को मिला। उन्होंने लेग साइड की ओर हटकर घुटने के बल बैठते हुए फाइन लेग के ऊपर से स्कूप शॉट खेला। गेंद इतनी दूर गई कि स्टेडियम की सीमा पार कर बाहर जा गिरी। इस जोरदार छक्के के बाद मैच में नई गेंद की जरूरत पड़ी और अंपायरों को गेंद बदलनी पड़ी। उनके इस शॉट ने मैदान पर मौजूद दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ा दिया।

    ईशान किशन ने अपनी पारी में केवल 10 गेंदों का सामना किया और 30 रन बनाकर आउट हो गए। शमर जोसेफ की गेंद पर रोवमैन पॉवेल ने उनका कैच पकड़ा। हालांकि, उनकी पारी ज्यादा लंबी नहीं चली, लेकिन कम गेंदों में बनाए गए रनों ने भारतीय बल्लेबाजी को तेज शुरुआत देने में मदद की। इस दौरान उन्होंने बड़े शॉट लगाने की अपनी क्षमता दिखाई। मुकाबले में लगाया गया छक्का सीरीज के छक्कों का शतक पूरा होने से भी जुड़ा रहा।

    बारिश के कारण मैच की परिस्थितियों में बदलाव करना पड़ा। मुकाबले को नौ-नौ ओवर का किए जाने के बाद गेंदबाजों के लिए भी विशेष नियम लागू किए गए। नए खेल नियमों के अनुसार, प्रत्येक टीम का कोई भी गेंदबाज अधिकतम दो ओवर डाल सकता है, जबकि एक गेंदबाज को केवल एक ओवर करने की अनुमति होगी। छोटे प्रारूप में बल्लेबाजों को कम समय में तेजी से रन बनाने का मौका मिलता है, वहीं गेंदबाजों के सामने भी सीमित ओवरों में विकेट निकालने की चुनौती रहती है।

    ह मुकाबला सीरीज के लिहाज से बेहद अहम था, क्योंकि पांचवें टी20 से पहले भारत और वेस्टइंडीज के बीच श्रृंखला 2-2 से बराबर थी। ऐसे में दोनों टीमों के लिए यह मैच निर्णायक महत्व रखता था। बारिश से प्रभावित खेल में बल्लेबाजी और गेंदबाजी के दौरान गलतियों की गुंजाइश कम हो गई थी। भारत की ओर से ईशान की तेज पारी ने शुरुआती चरण में टीम को आक्रामक रुख अपनाने का अवसर दिया।

    इस मुकाबले के लिए भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने प्लेइंग इलेवन में दो बदलाव किए। चार साल बाद भारतीय टीम में वापसी करने वाले भुवनेश्वर कुमार को मयंक यादव की जगह शामिल किया गया। भारत की प्लेइंग इलेवन में अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, नमन धीर, अक्षर पटेल, भुवनेश्वर कुमार, प्रिंस यादव और अर्शदीप सिंह शामिल रहे।

    वेस्टइंडीज की टीम में शाई होप कप्तान और विकेटकीपर की भूमिका में उतरे। उनके साथ ज्वेल एंड्रयू, शिमरोन हेटमायर, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, रोमारियो शेफर्ड, रोस्टन चेज, कीमो पॉल, शमर स्प्रिंगर, गुडाकेश मोटी और शमर जोसेफ को प्लेइंग इलेवन में जगह मिली। सीरीज बराबर होने के कारण दोनों टीमें निर्णायक मुकाबले में जीत हासिल कर ट्रॉफी अपने नाम करने के इरादे से उतरीं।

  • ऑस्ट्रेलिया की जीत से WTC फाइनल की रेस हुई रोमांचक, भारत के पास बचे सात टेस्ट, जानिए कैसे मिलेगी फाइनल में जगह

    ऑस्ट्रेलिया की जीत से WTC फाइनल की रेस हुई रोमांचक, भारत के पास बचे सात टेस्ट, जानिए कैसे मिलेगी फाइनल में जगह

    नई दिल्ली । वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) 2025-27 के फाइनल में पहुंचने की दौड़ ऑस्ट्रेलिया की दक्षिण अफ्रीका पर जीत के बाद और दिलचस्प हो गई है। डरबन में खेले गए टेस्ट मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने मेजबान दक्षिण अफ्रीका को 214 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। इस जीत से ऑस्ट्रेलिया ने अंक तालिका में अपनी शीर्ष स्थिति मजबूत कर ली, जबकि मौजूदा चैंपियन दक्षिण अफ्रीका तीसरे स्थान पर खिसक गया। न्यूजीलैंड दूसरे और भारतीय टीम पांचवें स्थान पर बनी हुई है।

    ऑस्ट्रेलिया ने मौजूदा WTC चक्र में 11 मैचों में नौ जीत दर्ज की हैं। उसके खाते में 108 अंक हैं और अंक प्रतिशत यानी पीसीटी 81.82 हो गया है। न्यूजीलैंड छह मैचों में चार जीत, एक हार और एक ड्रॉ के साथ 72.22 प्रतिशत अंक लेकर दूसरे स्थान पर है। दक्षिण अफ्रीका ने पांच मैचों में तीन जीत और दो हार के बाद 36 अंक जुटाए हैं। उसका पीसीटी 60 है। बांग्लादेश 55.56 प्रतिशत अंकों के साथ चौथे स्थान पर है।

    भारतीय टीम ने अब तक 11 टेस्ट खेले हैं, जिनमें पांच जीत, चार हार और दो ड्रॉ शामिल हैं। भारत के खाते में 68 अंक हैं और उसका पीसीटी 51.52 है। टीम ने हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज 1-0 से जीती थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की ताजा जीत के बाद भारतीय टीम की रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ। बांग्लादेश फिलहाल भारत से आगे है, इसलिए टीम इंडिया को अपनी स्थिति बेहतर बनाने के लिए आगामी मुकाबलों में लगातार जीत दर्ज करनी होगी।

    अंक तालिका में इंग्लैंड 38.54 प्रतिशत अंकों के साथ छठे स्थान पर है। उसने 16 मैचों में सात जीत, आठ हार और एक ड्रॉ दर्ज किया है। धीमी ओवर गति के कारण उसके 14 अंक काटे गए हैं। श्रीलंका 33.33 प्रतिशत अंकों के साथ सातवें, वेस्टइंडीज 20.83 प्रतिशत के साथ आठवें और पाकिस्तान 4.63 प्रतिशत अंकों के साथ नौवें स्थान पर है। वेस्टइंडीज के दो और पाकिस्तान के नौ अंक पेनल्टी के कारण काटे गए हैं।

    भारत के सामने अब सात टेस्ट मैच बाकी हैं। इनमें न्यूजीलैंड के खिलाफ उसके घर में दो मुकाबले और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू मैदान पर पांच टेस्ट शामिल हैं। फाइनल में पहुंचने के लिए भारत को इन मैचों में अधिकतम जीत हासिल करने के साथ अन्य टीमों के नतीजों पर भी नजर रखनी होगी। WTC में टीमों की रैंकिंग कुल अंकों के बजाय अंक प्रतिशत के आधार पर तय होती है। जीत पर 12, ड्रॉ पर चार और टाई होने पर छह अंक मिलते हैं। चक्र के अंत में अंक तालिका की शीर्ष दो टीमें फाइनल खेलती हैं।

    अगर भारत अपने बाकी सभी सात टेस्ट जीत लेता है, तो उसके कुल अंक 152 हो जाएंगे। इस चक्र में भारत के कुल 18 मैच होने हैं और अधिकतम उपलब्ध अंक 216 हैं। इस हिसाब से उसका पीसीटी 70.37 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह स्कोर भारत को फाइनल की दौड़ में मजबूत स्थिति में ला सकता है। हालांकि, क्वालिफिकेशन दूसरी टीमों के प्रदर्शन और उनके अंतिम अंक प्रतिशत पर भी निर्भर करेगा। केवल छह मैच जीतना अपने आप में फाइनल में जगह की गारंटी नहीं देता।

    ऑस्ट्रेलिया की मौजूदा स्थिति भारत के लिए बड़ी चुनौती है। अगर ऑस्ट्रेलिया लगातार जीत दर्ज करता है, तो उसका अंक प्रतिशत भारत के संभावित स्कोर से ऊपर रह सकता है। दूसरी ओर, दक्षिण अफ्रीका का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बाकी मुकाबलों में जीतना भारतीय टीम के लिए मददगार हो सकता है, क्योंकि इससे ऑस्ट्रेलिया के अंक प्रतिशत पर असर पड़ेगा। भारत को अपने पांचों घरेलू टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को हराने की भी जरूरत पड़ सकती है।

    न्यूजीलैंड भी भारत की राह में चुनौती बना हुआ है। उसके पास अभी दस टेस्ट बाकी हैं और मौजूदा अंक प्रतिशत 72.22 है। भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने दोनों मुकाबले जीतने होंगे, लेकिन इसके बावजूद कीवी टीम अन्य मैचों में अच्छा प्रदर्शन करके अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है।

    पिछली WTC साइकिलों के नतीजे बताते हैं कि फाइनल में पहुंचने के लिए कोई एक स्थायी अंक प्रतिशत तय नहीं है। 2021-23 चक्र में भारत 58.80 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरे और ऑस्ट्रेलिया 66.67 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर रहा था। 2023-25 चक्र में दक्षिण अफ्रीका ने 69.44 और ऑस्ट्रेलिया ने 67.54 प्रतिशत अंकों के साथ फाइनल के लिए क्वालिफाई किया था। ऐसे में भारत की उम्मीदें अभी कायम हैं, लेकिन सातों टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन और प्रतिद्वंद्वी टीमों के नतीजे निर्णायक होंगे।

  • पैरा एशियन गेम्स 2026 की आज होगी भव्य शुरुआत… भारत के 168 खिलाड़ी लेंगे हिस्सा

    पैरा एशियन गेम्स 2026 की आज होगी भव्य शुरुआत… भारत के 168 खिलाड़ी लेंगे हिस्सा


    आइची-नागोया।
    भारत (India) रविवार से शुरू हो रहे पैरा एशियन गेम्स (Para Asian Games) में अपने पिछले प्रदर्शन को पीछे छोड़ने के इरादे से उतरेगा। हालांकि, इस बार भारतीय दल का आकार पहले के मुकाबले काफी छोटा है। इसके अलावा पैरा निशानेबाजी और पैरा साइकिलिंग में चयन प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों ने भी खेलों से पहले माहौल को प्रभावित किया है। ऐसे में भारत के लिए 2023 में जीते गए 111 पदकों की उपलब्धि को दोहराना एक बड़ी चुनौती होगी। भारत ने चीन के हांगझोउ में 2023 में आयोजित पिछले पैरा एशियन गेम्स में 29 स्वर्ण, 31 रजत और 51 कांस्य सहित कुल 111 पदक जीते थे। यह इन खेलों में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। इस बार भारतीय खिलाड़ी (Indian players) इस रिकॉर्ड को बेहतर करने के लक्ष्य (New Medal Record) के साथ मैदान में उतरेंगे।


    303 से घटकर 168 हुआ भारतीय दल

    आइची-नागोया (Aichi-Nagoya) में आयोजित होने वाले इन खेलों में भारत ने 11 खेलों के लिए 168 खिलाड़ियों का दल भेजा है, जबकि हांगझोउ में भारत की ओर से 303 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। भागीदारी के लिए कड़े किए गए कोटे और खेल कार्यक्रमों में बदलाव के कारण भारतीय दल के आकार में कमी आई है। खिलाड़ियों की संख्या में आई इस गिरावट का असर पदकों की कुल संख्या पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत की सफलता काफी हद तक अनुभवी पदक विजेताओं के प्रदर्शन और नए खिलाड़ियों की महाद्वीपीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की क्षमता पर निर्भर करेगी। आधिकारिक उद्घाटन समारोह से पहले ही भारतीय खिलाड़ी पैरा बैडमिंटन, पैरा टेबल टेनिस, बोकिया और दृष्टिबाधित फुटबॉल में अपने अभियान की शुरुआत कर चुके हैं।


    पैरा एथलेटिक्स से सबसे ज्यादा उम्मीदें

    हांगझोउ पैरा एशियन गेम्स में भारत ने पैरा एथलेटिक्स में 18 स्वर्ण सहित कुल 55 पदक जीते थे। इस बार भी एथलेटिक्स भारतीय दल के लिए पदकों का बड़ा स्रोत बन सकता है। हालांकि, इस स्पर्धा में भारत के खिलाड़ियों की संख्या 123 से घटकर 62 रह गई है। पैरालंपिक चैंपियन और विश्व रिकॉर्डधारी भाला फेंक खिलाड़ी सुमित अंतिल से स्वर्ण पदक की उम्मीद होगी। ऊंची कूद में निषाद कुमार, फर्राटा दौड़ में प्रीति पाल और क्लब थ्रो में धरमबीर सिंह भारतीय चुनौती को मजबूती देंगे।


    तीरंदाजी, बैडमिंटन और निशानेबाजी पर नजर

    तीरंदाजी में भुजाहीन तीरंदाज शीतल देवी और पायल नाग से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। वहीं, पैरालंपिक रिकर्व चैंपियन हरविंदर सिंह और विश्व चैंपियन तोमान कुमार भी पदक के दावेदारों में शामिल हैं। पैरा बैडमिंटन में कई बार के चैंपियन प्रमोद भगत और सुहास एलवाई पर भारत की उम्मीदों का बड़ा दारोमदार होगा। निशानेबाजी में पैरालंपिक चैंपियन अवनि लेखरा भारतीय चुनौती की अगुवाई करेंगी। पैरा टेबल टेनिस में टोक्यो पैरालंपिक की रजत पदक विजेता भाविना पटेल से भी पदक की आस रहेगी।

    चयन प्रक्रिया पर विवाद से बढ़ी मुश्किलें
    खेलों से पहले पैरा निशानेबाजी और पैरा साइकिलिंग में चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आए हैं। करीब 150 पैरा निशानेबाजों ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) से कथित वित्तीय अनियमितताओं, वसूली और चयन संबंधी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। भारतीय पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष देवेंद्र झाझड़िया ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी की गई। वहीं, खेल मंत्रालय ने निशानेबाजी टीम के मुख्य कोच को दल से हटाकर उनकी जगह दूसरे कोच को शामिल किया। इस फैसले का कई प्रमुख निशानेबाजों ने विरोध किया। पैरा साइकिलिंग में भी चयन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी। संयुक्त चयन समिति ने छह साइकिलिस्ट का चयन किया था, लेकिन खेल मंत्रालय ने केवल अरशद शेख के नाम को मंजूरी दी।


    अनुभवी खिलाड़ियों और नए चेहरों पर टिकी निगाहें

    भारतीय दल के सामने इस बार चुनौती केवल पदकों की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि सीमित खिलाड़ियों के साथ बेहतर प्रदर्शन करने की भी है। एक ओर सुमित अंतिल, अवनि लेखरा, प्रमोद भगत और भाविना पटेल जैसे अनुभवी खिलाड़ियों से पदक की उम्मीदें हैं, तो दूसरी ओर नए खिलाड़ियों के पास बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा साबित करने का मौका होगा। अब देखना होगा कि छोटा भारतीय दल विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हांगझोउ के 111 पदकों के रिकॉर्ड को पार कर पाता है या नहीं।

  • Ind vs WI: पांचवां T20 मैच आज बेंगलुरु में… भारत हारा तो 24 साल बाद वेस्टइंडीज टीम रचेगी इतिहास

    Ind vs WI: पांचवां T20 मैच आज बेंगलुरु में… भारत हारा तो 24 साल बाद वेस्टइंडीज टीम रचेगी इतिहास


    बेंगलुरु।
    भारत और वेस्टइंडीज (India vs West Indies) के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज (Five-match T20 series) का निर्णायक मुकाबला शनिवार, 17 अक्टूबर को बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम (M. Chinnaswamy Stadium, Bengaluru) में खेला जाएगा. सीरीज फिलहाल 2-2 से बराबर है, लेकिन इस मुकाबले से पहले मौसम ने टीम इंडिया की टेंशन बढ़ा दी है। बारिश (Rain) के कारण मैच में रुकावट आने की आशंका है. अगर भारत (India) यह मुकाबला हार जाता है, तो वेस्टइंडीज (West Indies) के पास 24 साल बाद भारतीय जमीन पर किसी भी फॉर्मेट की सीरीज जीतने का मौका होगा।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, शनिवार को बेंगलुरु में आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे. बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने के एक-दो दौर देखने को मिल सकते हैं। विभाग ने आकाशीय बिजली के साथ तूफान की चेतावनी भी दी है. मौसम विभाग के अनुसार, शहर में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री और अधिकतम 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

    वहीं, BBC की मौसम र‍िपोर्ट के मुताब‍िक- उपलब्ध प्रति घंटा पूर्वानुमान में भी बारिश की आशंका काफी ज्यादा दिखाई गई है. शाम 5 बजे बारिश की संभावना 66 फीसदी है. शाम 6 बजे यह 68 फीसदी, 7 बजे 69 फीसदी और रात 8 बजे 70 फीसदी तक पहुंच जाती है. रात 9 बजे भी बारिश की संभावना 70 फीसदी और 10 बजे 69 फीसदी दिखाई गई है. ऐसे में मैच शुरू होने के समय और उसके बाद भी बारिश खलल डाल सकती है।


    क्या बारिश धुलवा देगी पूरा मैच?

    बारिश का खतरा जरूर है, लेकिन अभी पूरे मैच के धुलने की पुष्टि नहीं की जा सकती. अगर बारिश थोड़ी देर के लिए होती है, तो मैदान खेलने लायक होने पर मुकाबला देरी से शुरू हो सकता है. हालांकि, लगातार बारिश या गरज-चमक के कारण ओवर कम करने की नौबत भी आ सकती है।

    एम चिन्नास्वामी स्टेडियम की ड्रेनेज व्यवस्था पानी निकालने में मदद करती है. इसके बावजूद लगातार बारिश होने पर मैच समय पर शुरू कराना चुनौती बन सकता है. सीरीज 2-2 से बराबर होने के कारण दोनों टीमें हर हाल में निर्णायक मुकाबला पूरा करना चाहेंगी।

    बल्लेबाजों के लिए अच्छी पिच, ओस भी डाल सकती है असर
    बेंगलुरु की पिच को आमतौर पर बल्लेबाजों के लिए मददगार माना जाता है. IPL में भी यहां बड़े स्कोर देखने को मिलते हैं, बशर्ते पिच की तैयारी में कोई समस्या न हो. लेकिन इस बार खिलाड़ियों की रणनीति पर पिच से ज्यादा मौसम का असर पड़ सकता है।

    अगर मैच शुरू होकर देर शाम तक चलता है, तो ओस भी भूमिका निभा सकती है. गीली गेंद के कारण गेंदबाजों को ग्रिप बनाने और गेंद पर नियंत्रण रखने में परेशानी हो सकती है. ऐसी स्थिति में लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को फायदा मिलने की संभावना रहेगी. टॉस के समय परिस्थितियों का आकलन करना दोनों टीमों के लिए अहम होगा।


    24 साल बाद इतिहास रचने का मौका

    वेस्टइंडीज ने 2002 के बाद से भारत में किसी भी फॉर्मेट की सीरीज नहीं जीती है. ऐसे में शनिवार का मुकाबला उसके लिए इस लंबे इंतजार को खत्म करने का मौका है. पांच मैचों की सीरीज 2-2 से बराबर होने के कारण दोनों टीमों के सामने जीत की चुनौती है।

    हालांकि, बारिश के कारण मुकाबला प्रभावित होता है, तो सीरीज का फैसला भी मौसम और मैच के नियमों पर निर्भर करेगा. फिलहाल भारत और वेस्टइंडीज दोनों की नजरें बेंगलुरु के आसमान पर रहेंगी. निर्णायक मुकाबले में बारिश सबसे बड़ा विलेन बन सकती है।

    कैसा है भारत का बेंगलुरु में टी20 र‍िकॉर्ड
    भारतीय टीम आख‍िरी बार जब बेंगलुरु में कोई टी20 इंटरनेशनल मैच खेली थी तो वो अफगान‍िस्तान के ख‍िलाफ ‘डबल सुपर ओवर’ वाला मैच था. तब हमारी टीम ने जीत दर्ज की थी. उस मैच के करीब 2 साल बाद बेंगलुरु के एम च‍िन्नास्वामी स्टेड‍ियम में टीम इंड‍िया के सामने वेस्ट इंडीज की टीम है, अभी सीरीज 2-2 से बराबरी पर है. अब शन‍िवार (17 अक्टूबर) को होने वाले मैच से यह तय होगा कि सीरीज कौन जीतेगा।

    भारतीय टीम यहां कुल म‍िलाकर 8 मैच खेली है, जिसमें उसने 4 मैच जीते (डबल सुपर वाला मैच भी शाम‍िल) हैं, 3 मैच में हार म‍िली है और एक मैच बेनतीजा रहा है।

  • निर्मला सीतारमण ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर दिया जोर, बातचीत अंतिम चरण में पहुंची

    निर्मला सीतारमण ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर दिया जोर, बातचीत अंतिम चरण में पहुंची

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते का निष्पादन वैश्विक व्यापार और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के हित में होगा। उनके अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत अब अंतिम चरण के करीब पहुंचती दिखाई दे रही है। ऐसे में समझौते को जल्द पूरा करना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
    सीतारमण ने यह बात बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों से इतर अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत के दौरान कही। उन्होंने संकेत दिया कि व्यापार समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार चर्चा हो रही है और इसके जल्द हस्ताक्षर के लिए तैयार होने की उम्मीद है।
    वित्त मंत्री ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के हालिया बयान का भी उल्लेख किया। गोयल ने एक-दो दिन पहले उम्मीद जताई थी कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता जल्द हस्ताक्षर के लिए तैयार हो सकता है। इससे पहले उन्होंने बताया था कि समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा चुका है और फिलहाल उसका कानूनी मसौदा तैयार किया जा रहा है।
    गोयल के अनुसार, समझौते को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि भारत को समान प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में पर्याप्त प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिले। इस रुख से स्पष्ट है कि समझौते को आगे बढ़ाने के साथ भारत अपने आर्थिक और व्यापारिक हितों को भी ध्यान में रख रहा है।
    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी पक्ष की ओर से भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को कहा था कि प्रस्तावित समझौते का व्यापक ढांचा तैयार हो चुका है और दोनों देश इसे अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में यह बात कही थी।
    व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था विभिन्न अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ऐसे माहौल में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तों और इसके लागू होने की तारीख को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
    बातचीत के दौरान सीतारमण ने भारत की आर्थिक वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश अपनी विकास दर बनाए रखने में सफल रहा है। उनके अनुसार, कोविड महामारी के बाद पिछले चार से पांच वर्षों के दौरान भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा है।
    वित्त मंत्री ने इस प्रदर्शन का श्रेय समावेशी विकास नीतियों, कौशल विकास में निवेश और वित्तीय अनुशासन को दिया। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर अपनी जिम्मेदारी समझती है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सहायता करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ सरकारी खर्च को अनुशासित बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
    सीतारमण ने बुनियादी ढांचे के विकास में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय की भूमिका पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, इस खर्च से देश में आधारभूत सुविधाओं के निर्माण को गति मिली है और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर इसका व्यापक गुणक प्रभाव पड़ा है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने की उनकी अपील के साथ आर्थिक विकास, वित्तीय अनुशासन और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा से जुड़े मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे।
  • जसप्रीत बुमराह न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से रह सकते हैं बाहर, टीम मैनेजमेंट ने टेस्ट क्रिकेट के लिए बनाई खास रणनीति

    जसप्रीत बुमराह न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से रह सकते हैं बाहर, टीम मैनेजमेंट ने टेस्ट क्रिकेट के लिए बनाई खास रणनीति


    नई दिल्ली ।
    भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी पांच मैचों की वनडे सीरीज में खेलते नजर नहीं आ सकते हैं। उनके इस सीरीज से बाहर रहने की संभावित वजह चोट नहीं, बल्कि टीम मैनेजमेंट की रणनीति बताई जा रही है। बुमराह पूरी तरह फिट हैं और फिलहाल टेस्ट क्रिकेट की तैयारी पर ध्यान दे रहे हैं।

    भारतीय टीम उन्हें आगामी महत्वपूर्ण टेस्ट मुकाबलों के लिए तरोताजा और पूरी तरह तैयार रखना चाहती है।टीम प्रबंधन की योजना के अनुसार, बुमराह को वनडे सीरीज में उतारने के बजाय लाल गेंद से खेले जाने वाले क्रिकेट के लिए तैयार किया जा सकता है। वह अहमदाबाद में टेस्ट क्रिकेट की तैयारी शुरू कर चुके हैं। अक्टूबर के आखिर में उनके भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहुंचने की संभावना है। इसके बाद वह न्यूजीलैंड रवाना हो सकते हैं। हालांकि, वनडे सीरीज में उनकी अनुपस्थिति को लेकर अंतिम स्थिति टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

    वर्कलोड मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान
    लंबे अंतरराष्ट्रीय दौरे और लगातार होने वाले मुकाबलों को देखते हुए बुमराह के कार्यभार का प्रबंधन भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण है। वह टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज हैं और टेस्ट क्रिकेट में उनकी भूमिका काफी अहम मानी जाती है। ऐसे में टीम मैनेजमेंट उनकी फिटनेस को ध्यान में रखते हुए खेलने के कार्यक्रम की योजना बना रहा है।

    बुमराह को आगामी टेस्ट मुकाबलों से पहले मैच अभ्यास दिलाने के लिए इंडिया ए की टीम के साथ मैदान पर उतारने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। योजना के मुताबिक, उन्हें 6 नवंबर से शुरू होने वाले इंडिया ए के तीसरे मुकाबले में खेलने का मौका मिल सकता है। इससे उनके कार्यभार को धीरे-धीरे बढ़ाने और टेस्ट क्रिकेट के लिए लय हासिल करने में मदद मिल सकती है।इसके बाद 19 नवंबर से वेलिंगटन में शुरू होने वाले पहले टेस्ट मुकाबले से पहले उन्हें पर्याप्त आराम और तैयारी का समय मिल सकता है। टीम प्रबंधन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बुमराह महत्वपूर्ण टेस्ट मैचों में अपनी पूरी क्षमता के साथ गेंदबाजी कर सकें।

    चोट के बाद टेस्ट क्रिकेट पर नजर
    बुमराह को इस साल की शुरुआत में घुटने की चोट के कारण श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों से बाहर रहना पड़ा था। इसके बाद उनकी फिटनेस और आगामी मुकाबलों में उपलब्धता को लेकर टीम प्रबंधन सावधानी बरत रहा है। बुमराह ने पिछले साल घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना पिछला बहुदिवसीय मुकाबला खेला था। ऐसे में टेस्ट प्रारूप में वापसी के लिए उनकी तैयारी को अहम माना जा रहा है।उनके खेलने के कार्यक्रम को लेकर टीम से जुड़े अधिकारियों के बीच कई दौर की चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य यह तय करना है कि तेज गेंदबाज को किस तरह पर्याप्त अभ्यास, आराम और मैच खेलने का अवसर दिया जाए, ताकि लंबे प्रारूप में उनकी उपलब्धता बनी रहे।

    ऑस्ट्रेलिया सीरीज और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप पर नजर
    भारतीय टीम की रणनीति केवल न्यूजीलैंड दौरे तक सीमित नहीं है। अगले साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली पांच टेस्ट मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी को भी ध्यान में रखा जा रहा है। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए बुमराह जैसे अनुभवी गेंदबाज की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी।इसी वजह से टीम मैनेजमेंट उन्हें हर द्विपक्षीय सीरीज में खिलाने के बजाय महत्वपूर्ण टेस्ट मुकाबलों के लिए सुरक्षित रखने की रणनीति अपना सकता है। वनडे सीरीज में उनकी संभावित अनुपस्थिति को इसी योजना से जोड़कर देखा जा रहा है।

    टीम चयन पर जल्द साफ होगी तस्वीर
    भारत की वनडे और टेस्ट टीमों की घोषणा आने वाले दिनों में होने की संभावना है। चयनकर्ता हर्षित राणा, प्रसिद्ध कृष्णा और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ियों की फिटनेस तथा उपलब्धता से जुड़ी जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। इन खिलाड़ियों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद टीम संयोजन को अंतिम रूप दिया जा सकता है। बुमराह के वनडे सीरीज में खेलने या आराम दिए जाने पर भी आधिकारिक घोषणा के बाद स्थिति साफ होगी।

  • भारत ने UN में मानवाधिकार रिपोर्ट पर उठाए सवाल…. आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरा

    भारत ने UN में मानवाधिकार रिपोर्ट पर उठाए सवाल…. आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरा


    वाशिंगटन।
    न्यूयॉर्क (New York) में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के 81वें सत्र में मानवाधिकार उच्चायोग के साथ ‘इंटरैक्टिव डायलॉग’ के दौरान प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने भारत का बयान रखा. उन्होंने ओएचसीएचआर (OHCHR) के चयनात्मक रवैये और दोहरे मानदंडों पर चिंता जाहिर करते हुए सवाल खड़े किए. उनकी ओर से पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिका के उल्लंघनों पर रिपोर्ट की मांग की गई।

    दरअसल, अनुज स्वरूप ने मानवाधिकार परिषद में भारत के सदस्य के रूप में अपनी रचनात्मक और सकारात्मक भूमिका को रेखांकित किया. अपने संबोधन के दौरान उम्होंने कहा कि मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) की ओर से चुनिंदा मुद्दों पर ध्यान देने और दोहरे मानदंड अपनाने से बहुपक्षीय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है।


    पाकिस्तान पर OHCHR रिपोर्ट जारी करने की मांग

    इस दौरान भारत ने पाकिस्तान पर एक ओएचसीएचआर रिपोर्ट जारी करने की मांग की, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की ओर से लोगों की हत्या के मामलों की निष्पक्ष जांच, हिरासत में रखे गए आवामी एक्शन कमेटी के नेताओं को कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक अधिकार दिए जाने और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवाओं पर लगी सभी पाबंदियां हटाने जैसे मुद्दों को शामिल करने की बात कही।


    भारत की पाकिस्तान को दो टूक

    भारत ने पाकिस्तान से कहा कि वह इस बात पर आत्ममंथन करें कि उसके देश के कई हिस्सों, खासकर उसके अवैध कब्जे वाले क्षत्रों में मानवाधिकारों का किस तरीके से उल्लंघन हो रहा है. प्रथम सचिव की ओर से कहा गया कि मानवाधिकारों की रक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है और इस दिशा में निष्पक्षता तथा पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

    बता दें इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण सम्मेलन में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया गया था. स्थायी मिशन के वरिष्ठ सलाहकार अनमोल शेर बेदी ने पाकिस्तान को साफ संदेश दिया कि भारत आतंकवाद के मुद्दे पर परमाणु हथियारों की धमकी से दबने वाला नहीं है. बेदी ने कहा कि भारत परमाणु धमकी के आगे नहीं झुकेगा और किसी भी आतंकी हमले का जवाब देगा।


    भारत ने पाकिस्तान को दी सीधी चेतावनी

    उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत के खिलाफ होने वाली किसी भी आतंकी हमले का करारा जवाब दिया जाएगा. भारत आतंकवाद को समर्थन देने वालों और उसकी साजिश रचने वालों के बीच कोई फर्क नहीं करेगा. बेदी ने यह भी कहा कि पिछले साल पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों के खिलाफ चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद किया गया था. पहलगाम हमले में पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 नागरिकों की हत्या कर दी थी।