Tag: Indore

  • मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन करने वाले दंपती जेल भेजे गए, सोशल मीडिया पोस्ट से पुलिस तक पहुंची जानकारी

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन करने वाले दंपती जेल भेजे गए, सोशल मीडिया पोस्ट से पुलिस तक पहुंची जानकारी


    इंदौर। मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के आवास के बाहर बिना अनुमति प्रदर्शन करने पहुंचे दंपती के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। साथ ही टंट्या भील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान भी प्रदर्शनकारियों से मंत्री के घर तक चलने का आग्रह किया था।

    जानकारी के मुताबिक, बुधवार दोपहर प्रहलाद पांडेय और उनकी पत्नी संगीता हाथ में संविधान की प्रति लेकर मंत्री के आवास के बाहर पहुंचे थे। इससे पहले ही पुलिस को सोशल मीडिया के माध्यम से संभावित प्रदर्शन की सूचना मिल गई थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मंत्री के आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी।

    पुलिस पूछताछ में सामने आया कि दंपती ने कई लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह किया था, लेकिन निर्धारित समय पर कोई भी उनके समर्थन में नहीं पहुंचा। जांच में यह भी पता चला कि उन्होंने टंट्या भील चौराहे पर चल रहे छात्र धरना-प्रदर्शन में मौजूद लोगों से भी मंत्री के आवास तक चलने की अपील की थी, लेकिन वहां से भी किसी ने उनका साथ नहीं दिया।

    जब दंपती मंत्री के आवास के बाहर पहुंचे तो पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया और बिना अनुमति प्रदर्शन न करने की सलाह दी। इसके बावजूद वे सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे। इसके बाद पुलिस ने प्रहलाद पांडेय को उठाकर वाहन में बैठाया और उनकी पत्नी को भी हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया, जहां दोनों से पूछताछ की गई।

    परदेशीपुरा थाना प्रभारी आर.डी. कानवा ने बताया कि पूछताछ के दौरान दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने लोगों को प्रदर्शन के लिए बुलाया था। उन्होंने यह भी माना कि बिना अनुमति प्रदर्शन करना उनकी गलती थी। इसके बाद पुलिस ने शांति भंग की आशंका और बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 151 सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

    इससे पहले भी दंपती ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हालिया बयानों से आहत होने की बात कहते हुए उनके आवास के बाहर प्रदर्शन करने का प्रयास किया था। उस दौरान भी पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की थी, लेकिन वे प्रदर्शन पर अड़े रहे थे।

  • इंदौर दूषित जल कांड की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, भूजल तक पहुंचा था मलमूत्र का जानलेवा बैक्टीरिया

    इंदौर दूषित जल कांड की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, भूजल तक पहुंचा था मलमूत्र का जानलेवा बैक्टीरिया


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा मोहल्ले में पिछले वर्ष दूषित जल से 36 लोगों की मौत होने के बाद जांच के लिए गठित स्वास्थ्य विभाग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की समिति ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) को सौंप दी है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि भागीरथपुरा के भूमिगत जल तक मलमूत्र में पाया जाने वाला खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया पहुंच गया है। इससे पहले उच्च न्यायालय में पेश एक रिपोर्ट में बताया जा चुका है कि भागीरथपुरा से लिए गए पेयजल के 52 नमूनों में से 50 में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिले।

    बीमारी का जलापूर्ति लाइन में सीवर के पानी का मिल
    स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में कहा गया कि बीमारी फैलने का सबसे बड़ा कारण नगर निगम की जलापूर्ति लाइन में सीवर के पानी का मिलना था। प्रभावित लोगों ने पानी के स्वाद और गंध में बदलाव की शिकायत की थी, लेकिन समय रहते नगर निगम के अधिकारियों ने कोई कार्यवाही नहीं की।

    भूमिगत जल तक खतरनाक बैक्टीरिया पहुंचा

    पेश रिपोर्ट में बताया गया कि विशेषज्ञ समिति ने घटना के तीन महीने बाद अलग-अलग स्रोतों के 43 नमूने लिए थे। उनमें से 10 नमूने नर्मदा पाइपलाइन के थे। इसमें ई-कोलाई नहीं मिला। यही पानी भागीरथपुरा में आपूर्ति किया जाता है। पास की कान्ह नदी के तीन नमूनों में ई-कोलाई की भारी मौजूदगी मिली। वहीं एक बोरवेल में भी ई-कोलाई की हानिकारक मात्रा पाई गई। इससे साफ हुआ कि भूमिगत जल तक खतरनाक बैक्टीरिया पहुंच चुका है।

    इधर, भागीरथपुरा जल प्रदूषण मामले की रिपोर्ट आने के बाद प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जल आपूर्ति एवं जल प्रदूषण से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान भोपाल स्थित राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी की क्षेत्रीय पीठ के न्यायिक सदस्य जस्टिस शेओ कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने अहम टिप्पणी की।

    एनजीटी ने कहा है कि इंदौर में पेयजल आपूर्ति और जल प्रदूषण से जुड़े मुद्दों पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय पहले से सुनवाई कर रहा है। ऐसे में उच्च न्यायालय द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग पूरे मामले की जांच कर रहा है और सुरक्षित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं।

    सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कहा कि इंदौर में जल प्रदूषण और पेयजल आपूर्ति से जुड़े मुद्दे पहले से ही मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से विचाराधीन हैं। विशेष रूप से भागीरथपुरा जल प्रदूषण प्रकरण में हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तय करने के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है।

    नजीटी ने स्पष्ट किया कि इन सभी बिंदुओं की जांच उच्च न्यायालय द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग कर रहा है। चूंकि पूरा मामला हाईकोर्ट के विचाराधीन है, इसलिए आयोग की रिपोर्ट और कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई होगी।

    सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से बताया गया कि मामले में अपनी रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है। इस पर एनजीटी ने निर्देश दिया कि रिपोर्ट की प्रति ई-मेल के माध्यम से सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे तीन सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां या जवाब प्रस्तुत कर सकें।

    न्यायाधिकरण के सदस्य न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने इंदौर के दूषित जलकांड को लेकर कहा कि जलापूर्ति व्यवस्था में हुई लापरवाही की कीमत आम लोगों ने अपनी जान देकर चुकाई है, इसलिए अब जिम्मेदारी तय किए बिना मामला नहीं छोड़ा जा सकता। एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को निर्धारित की है। तब तक संबंधित पक्षों से जवाब और रिपोर्ट पर प्रतिक्रियाएं प्राप्त होने की उम्मीद है।

    गौरतलब है कि भागीरथपुरा कांड के बाद एनजीटी की केंद्रीय जोन पीठ के सामने रशीद नूर खान और कमल कुमार राठी ने जनवरी में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। उसके बाद पीठ ने विशेषज्ञ समिति बनाकर जांच कराने का निर्देश दिया था।

  • इंदौर में सड़क हादसे ने ली किसान की जान, इलाज के दौरान तोड़ा दम; आरोपी वाहन चालक की तलाश

    इंदौर में सड़क हादसे ने ली किसान की जान, इलाज के दौरान तोड़ा दम; आरोपी वाहन चालक की तलाश


    इंदौर। इंदौर के रीगल ब्रिज पर मंगलवार शाम हुए एक सड़क हादसे में 48 वर्षीय किसान की मौत हो गई। वह कोर्ट में पेशी पूरी करने के बाद पैदल बस स्टैंड की ओर जा रहे थे, तभी एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल किसान को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां देर रात उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर अज्ञात वाहन और उसके चालक की तलाश शुरू कर दी है।

    छोटी ग्वालटोली थाना पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान खुडेल क्षेत्र के काजी पलासिया निवासी इलियास पुत्र अब्दुल रज्जाक के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसा मंगलवार शाम रीगल ब्रिज पर हुआ। टक्कर इतनी जोरदार थी कि इलियास सड़क पर गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। कुछ समय तक घायल सड़क पर ही पड़े रहे। बाद में राहगीरों ने उन्हें देखा और तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन देर रात उनकी मौत हो गई।

    अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद पता चला कि इलियास किसी न्यायिक मामले में पेशी के लिए इंदौर आए थे। अदालत का काम पूरा होने के बाद वह पैदल बस स्टैंड की ओर जा रहे थे ताकि अपने गांव लौट सकें। इसी दौरान यह हादसा हो गया।

    परिजनों ने बताया कि इलियास खेती-किसानी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनके परिवार में एक बेटा, छह बेटियां और पांच भाई हैं। उनकी असमय मौत से परिवार में शोक का माहौल है।

    पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि वाहन और उसके चालक की पहचान की जा सके। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

  • नीट पेपर लीक के विरोध में इंदौर में छात्रों का प्रदर्शन, बारिश के बीच भी डटे रहे आंदोलनकारी

    नीट पेपर लीक के विरोध में इंदौर में छात्रों का प्रदर्शन, बारिश के बीच भी डटे रहे आंदोलनकारी


    इंदौर। इंदौर में नीट पेपर लीक मामले और अन्य मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शहर के टंट्या भील चौराहे पर पिछले 22 दिनों से चल रहे अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन में हर दिन नए छात्र जुड़ रहे हैं। मंगलवार देर रात तक बड़ी संख्या में छात्र चौराहे पर डटे रहे और अपनी मांगों के समर्थन में लगातार नारेबाजी करते रहे। आंदोलन स्थल पर युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।

    छात्रों का यह आंदोलन 30 जून से जारी है। प्रदर्शनकारी नीट पेपर लीक मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।

    मंगलवार को टंट्या भील चौराहे पर सुबह से ही छात्रों का जुटना शुरू हो गया था। शाम होते-होते बड़ी संख्या में युवा हाथों में तख्तियां लेकर धरना स्थल पर पहुंच गए। पूरे क्षेत्र में नारेबाजी का माहौल बना रहा। प्रदर्शन के दौरान राहगीर भी कुछ देर रुककर आंदोलन को देखते रहे और कई लोगों ने छात्रों का समर्थन भी किया।

    बारिश के बावजूद आंदोलन की रफ्तार कम नहीं हुई। खराब मौसम के बीच भी छात्र धरना स्थल पर डटे रहे और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराते रहे। आंदोलन के दौरान राष्ट्रभक्ति से जुड़े गीतों की प्रस्तुति भी दी गई, जिससे प्रदर्शनकारियों का उत्साह और बढ़ गया। इस अवसर पर अखिलेश राणा, रोहित वास्कले, दुर्गा माणसाने, भारत चौहान, राधिका सहित कई युवाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर आंदोलन को समर्थन दिया।

    अनशन पर बैठे प्रहलाद पाण्डेय ने कहा कि यह आंदोलन केवल कुछ मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और पारदर्शी व्यवस्था की आवाज भी है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना है और लगातार बढ़ रही छात्रों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि युवाओं में इस विषय को लेकर गंभीर चिंता है।

    इससे पहले आंदोलनकारी छात्र टंट्या भील चौराहे से कलेक्टर कार्यालय तक पैदल मार्च भी निकाल चुके हैं। वहां कई घंटे तक प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने उनकी कुछ मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अभी कई महत्वपूर्ण मांगें लंबित हैं, इसलिए आंदोलन जारी रहेगा।

    टंट्या भील चौराहे पर लगातार बढ़ती छात्रों की मौजूदगी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने शहर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अब सभी की नजर प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।

  • इंदौर में नवविवाहित युवक की आत्महत्या, पत्नी की शिकायत के बाद पुलिस जांच में जुटी

    इंदौर में नवविवाहित युवक की आत्महत्या, पत्नी की शिकायत के बाद पुलिस जांच में जुटी


    इंदौर। इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में एक 27 वर्षीय युवक ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों का कहना है कि घटना से कुछ समय पहले उसे पत्नी की शिकायत के आधार पर पुलिस पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और आत्महत्या के कारणों की पड़ताल की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार पटेल नगर निवासी अभिषेक चौहान ने मंगलवार रात अपने घर में फंदा लगाकर जान दे दी। परिवार के लोगों ने बताया कि रात में जब उसका बड़ा भाई खाना देने कमरे में पहुंचा तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी आवाज लगाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। खिड़की से देखने पर अभिषेक फंदे से लटका दिखाई दिया। परिजन तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    परिजनों का आरोप है कि अभिषेक की पत्नी साधना नामदेव ने उसके खिलाफ प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के सिलसिले में मंगलवार को पुलिस ने अभिषेक को एरोड्रम थाने बुलाकर पूछताछ की थी। परिवार का कहना है कि थाने से लौटने के बाद वह बेहद परेशान और शांत था। उसने किसी से ज्यादा बातचीत नहीं की और अपने कमरे में चला गया, जहां बाद में उसने यह कदम उठा लिया।

    परिवार के मुताबिक अभिषेक एयरपोर्ट पर टैक्सी चलाता था। इसी दौरान उसकी पहचान टैक्सी काउंटर पर काम करने वाली साधना से हुई थी। दोनों ने मई 2026 में प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद दोनों के बीच पारिवारिक मुद्दों को लेकर मतभेद शुरू हो गए थे।

    परिजनों का कहना है कि साधना चाहती थी कि अभिषेक संयुक्त परिवार से अलग होकर उसके मायके के पास किराए के मकान में रहे, जबकि अभिषेक अपने परिवार से अलग नहीं होना चाहता था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था।

    वहीं, पत्नी ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि अभिषेक उसे घुमाने के बहाने ले गया और उसके साथ मारपीट की। उसने दहेज प्रताड़ना के आरोप भी लगाए थे। पुलिस इन आरोपों की भी जांच कर रही है।

    घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। दोनों पक्षों के बयान, कॉल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि युवक ने किन परिस्थितियों में यह कदम उठाया।

    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • 'इंदौर को अनाथ समझ लिया'… पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन का रेलवे पर बड़ा हमला

    'इंदौर को अनाथ समझ लिया'… पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन का रेलवे पर बड़ा हमला


    इंदौर। इंदौर की पूर्व सांसद और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन द्वारा पश्चिम रेलवे के अधिकारियों को लिखा गया एक पत्र सार्वजनिक होने के बाद शहर की राजनीति गरमा गई है। पत्र में उन्होंने इंदौर की रेल सुविधाओं की लगातार हो रही उपेक्षा पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो पश्चिम रेलवे ने इंदौर को अनाथ समझ लिया हो। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस ने भी भाजपा सरकार और स्थानीय सांसद पर सवाल खड़े किए हैं।

    20 जुलाई को पश्चिम रेलवे के अधिकारी रामश्रय पांडे को लिखे पत्र में सुमित्रा महाजन ने कहा कि उन्हें अत्यंत दुख के साथ यह पत्र लिखना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर के लिए नई रेल सेवाएं शुरू करने के बजाय पहले से लंबित प्रस्तावों पर भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है। उनका कहना है कि शहर की लगातार बढ़ती आबादी और यात्रियों की जरूरतों के बावजूद रेलवे अपेक्षित सुविधाएं उपलब्ध कराने में गंभीरता नहीं दिखा रहा है।

    महाजन ने पत्र में कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं और सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जयपुर–इंदौर और रीवा–इंदौर रेल सेवाओं के प्रस्ताव लंबे समय से लंबित हैं। उन्होंने यह भी लिखा कि प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटित MEMU सेवा का रैक इंदौर से हटाकर पुराने DEMU रैक चलाए जा रहे हैं, जो अक्सर तकनीकी खराबियों का सामना करते हैं और यात्रियों को परेशानी होती है।

    उन्होंने पुणे–इंदौर ट्रेन का संचालन बंद होने पर भी चिंता जताई और कहा कि इसे किसी वैकल्पिक मार्ग से भी शुरू नहीं किया गया, जबकि अन्य शहरों की ट्रेनों को वैकल्पिक रूट पर चलाया जा रहा है। इसके अलावा पटना, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम के लिए ट्रेनों के फेरों में बढ़ोतरी नहीं होने, महू–उज्जैन लोकल ट्रेन और अयोध्या के लिए सीधी रेल सेवा नहीं होने का मुद्दा भी उन्होंने उठाया।

    पत्र में सुमित्रा महाजन ने यह भी कहा कि लक्ष्मीबाई नगर में अतिरिक्त प्लेटफॉर्म और महू में लाइन क्षमता उपलब्ध होने के बावजूद रेलवे इन संसाधनों का उपयोग कर सुविधाओं का विस्तार नहीं कर रहा है। उन्होंने सवाल किया कि लगभग 40 लाख आबादी वाले इंदौर शहर के लिए मौजूदा रेल व्यवस्था क्या वास्तव में पर्याप्त मानी जा सकती है।

    पत्र के अंत में उन्होंने अधिकारी से भावनात्मक अपील करते हुए लिखा कि वे शब्दों के बीच छिपी पीड़ा को समझेंगे और इंदौर के यात्रियों की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीरता से कदम उठाएंगे।

    सुमित्रा महाजन का यह पत्र सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब केंद्र, प्रदेश और इंदौर तीनों जगह भाजपा की सरकार है और शहर का सांसद भी भाजपा का है, तब इंदौर की रेल सुविधाओं की उपेक्षा पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। कांग्रेस ने स्थानीय सांसद से भी सवाल पूछा कि शहर को नई रेल सेवाएं दिलाने और लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद इंदौर में रेल सुविधाओं को लेकर बहस तेज हो गई है और लोगों की नजर अब रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

  • शादी का वादा कर बनाया शारीरिक संबंध, फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल करता रहा आरोपी गिरफ्तार

    शादी का वादा कर बनाया शारीरिक संबंध, फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल करता रहा आरोपी गिरफ्तार


    इंदौर । इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में शादी का झांसा देकर एक युवती के साथ दुष्कर्म और बाद में आपत्तिजनक फोटो एवं वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक कथित शोषण करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    हीरानगर थाना पुलिस के अनुसार 27 वर्षीय युवती ने गौरी नगर निवासी हर्ष उर्फ राज चौहान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में युवती ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले दोनों की पहचान हुई थी। मोबाइल पर बातचीत के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया।

    पीड़िता का आरोप है कि 7 मार्च 2023 को आरोपी उसे अपने घर ले गया, जहां शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद वह उसे अपने एक परिचित के घर भी ले गया, जहां भी उसके साथ संबंध बनाए गए। युवती का कहना है कि वह शादी के भरोसे आरोपी पर विश्वास करती रही।

    शिकायत के अनुसार जब युवती ने शादी की बात दोहराई तो आरोपी का व्यवहार बदल गया। उसने कथित रूप से आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी लगातार उसका शोषण करता रहा।

    युवती ने पुलिस को बताया कि इस वर्ष जनवरी में शादी को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके दौरान आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद भी वह कथित रूप से फोन कर धमकियां देता रहा और मिलने के लिए दबाव बनाता रहा।

    लगातार मानसिक प्रताड़ना और धमकियों से परेशान होकर युवती ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। इसके बाद परिवार के साथ वह हीरानगर थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तत्काल मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की भी जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    English Tags:
    Indore, Crime, RapeCase, MadhyaPradesh, Police, Arrest, Hiranagar, CrimeNewsइंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में शादी का झांसा देकर एक युवती के साथ दुष्कर्म और बाद में आपत्तिजनक फोटो एवं वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक कथित शोषण करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    हीरानगर थाना पुलिस के अनुसार 27 वर्षीय युवती ने गौरी नगर निवासी हर्ष उर्फ राज चौहान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में युवती ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले दोनों की पहचान हुई थी। मोबाइल पर बातचीत के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया।

    पीड़िता का आरोप है कि 7 मार्च 2023 को आरोपी उसे अपने घर ले गया, जहां शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद वह उसे अपने एक परिचित के घर भी ले गया, जहां भी उसके साथ संबंध बनाए गए। युवती का कहना है कि वह शादी के भरोसे आरोपी पर विश्वास करती रही।

    शिकायत के अनुसार जब युवती ने शादी की बात दोहराई तो आरोपी का व्यवहार बदल गया। उसने कथित रूप से आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी लगातार उसका शोषण करता रहा।

    युवती ने पुलिस को बताया कि इस वर्ष जनवरी में शादी को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके दौरान आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद भी वह कथित रूप से फोन कर धमकियां देता रहा और मिलने के लिए दबाव बनाता रहा।

    लगातार मानसिक प्रताड़ना और धमकियों से परेशान होकर युवती ने पूरी घटना अपने परिजनों को बताई। इसके बाद परिवार के साथ वह हीरानगर थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तत्काल मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की भी जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • MP: इंदौर की 3 वर्षीय अनिका के लिए एक-एक पल भारी, राशि जुटाने के बाद शुरू नहीं हुआ इलाज…. AIIMS में घूम रहीं फाइलें

    MP: इंदौर की 3 वर्षीय अनिका के लिए एक-एक पल भारी, राशि जुटाने के बाद शुरू नहीं हुआ इलाज…. AIIMS में घूम रहीं फाइलें


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) की तीन वर्षीय अनिका शर्मा (Anika Sharma) के लिए समय लगातार भारी पड़ता जा रहा है. स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी (Spinal Muscular Atrophy- SMA) टाइप-2 जैसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रही इस मासूम का इलाज अब भी शुरू नहीं हो पाया है. जबकि परिवार, समाज और संस्थाओं की मदद से उपचार के लिए अधिकांश राशि जुटाई जा चुकी है. इसके बावजूद प्रशासनिक देरी बच्ची के इलाज की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है.

    दरअसल, इसी मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सुनवाई करते हुए दिल्ली एम्स की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई. अदालत ने पाया कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद एम्स की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया. इस पर अदालत ने साफ निर्देश दिए कि हर हाल में 23 जुलाई 2026 तक जवाब पेश किया जाए. मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

    याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि इलाज के लिए अब केवल सीमित राशि की जरूरत है, लेकिन एम्स की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से जीवनरक्षक इंजेक्शन की खरीद अटकी हुई है. एक ओर केंद्र सरकार से स्वीकृत सहायता की प्रक्रिया लंबित है, तो दूसरी ओर क्राउडफंडिंग से जुटाई गई राशि भी इनवॉइस के अभाव में जारी नहीं हो पा रही है।

    हाईकोर्ट ने संकेत दिए हैं कि इतने संवेदनशील मामले में अब और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी, क्योंकि अनिका के लिए बीतता हर दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि जिंदगी और उम्मीद के बीच की दूरी बढ़ा रहा है।

    इससे पहले, हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से 22 जून को जवाब तलब किया था. साथ ही राज्य सरकार से यह बताने को कहा था कि वह बच्ची के इलाज में किसी प्रकार सहायता कर सकती है या नहीं?

    बता दें कि बच्ची के इलाज के लिए करीब 9.50 करोड़ रुपये की जरूरत है. परिजन अब तक करीब 8 करोड़ रुपये जुटा चुके हैं, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत 50 लाख रुपये और तमाम लोगों एवं सामाजिक संगठनों से प्राप्त सहयोग राशि शामिल है.

    बच्ची के इलाज के लिए अमेरिका से एक इंजेक्शन मंगाया जाना है. यह इंजेक्शन मंगवाकर उसका इलाज जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए, क्योंकि हर गुजरते दिन के साथ उसके स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ रहा है.

    स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक आनुवंशिक तंत्रिका-मांसपेशीय रोग है. इसमें रीढ़ की हड्डी में मौजूद ‘मोटर न्यूरॉन’ धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं, जिससे मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं और उनका क्षय होने लगता है.

    ‘मोटर न्यूरॉन’ मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में पाई जाने वाली खास तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं, जो दिमाग से शरीर की मांसपेशियों तक अलग-अलग क्रियाओं के वास्ते संदेश पहुंचाती हैं, जिनमें सांस लेना, निगलना और बोलना शामिल हैं. फिलहाल मासूम की हालत स्थिर है और उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।

  • दुर्लभ बीमारी से जूझ रही तीन वर्षीय बच्ची के इलाज में कथित देरी पर हाई कोर्ट सख्त, दिल्ली AIIMS से मांगा जवाब, 23 जुलाई तक रिपोर्ट तलब

    दुर्लभ बीमारी से जूझ रही तीन वर्षीय बच्ची के इलाज में कथित देरी पर हाई कोर्ट सख्त, दिल्ली AIIMS से मांगा जवाब, 23 जुलाई तक रिपोर्ट तलब


    मध्य प्रदेश: हाई कोर्ट ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-2 जैसी दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित तीन वर्षीय बच्ची के इलाज में कथित देरी को गंभीरता से लेते हुए नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) से निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की संवेदनशीलता और बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जवाब 23 जुलाई तक हर हाल में दाखिल किया जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है।

    इंदौर निवासी तीन वर्षीय अनिका शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी मरीज के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। सुनवाई के दौरान AIIMS की ओर से पेश अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय का अनुरोध किया, लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से इसका विरोध किया गया। उनका कहना था कि इलाज के लिए आवश्यक धनराशि का बड़ा हिस्सा जुटाए जाने के बावजूद उपचार शुरू नहीं हो सका है।

    इससे पहले भी अदालत केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले में जानकारी मांग चुकी है। न्यायालय ने यह भी जानना चाहा था कि क्या राज्य सरकार बच्ची के उपचार में किसी प्रकार की आर्थिक या प्रशासनिक सहायता उपलब्ध करा सकती है। अदालत का मानना है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के मामलों में संबंधित संस्थाओं को समयबद्ध और संवेदनशील तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए।

    याचिका के अनुसार बच्ची के इलाज के लिए लगभग 9.50 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। परिवार अब तक करीब 8 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर चुका है। इसमें केंद्र सरकार से स्वीकृत आर्थिक सहायता के अलावा सामाजिक संगठनों और विभिन्न दानदाताओं का सहयोग भी शामिल है। परिवार का कहना है कि उपचार में जितनी अधिक देरी होगी, बीमारी के बढ़ने का जोखिम उतना ही बढ़ता जाएगा।

    मामले में बताया गया है कि उपचार के लिए एक विशेष जीवनरक्षक इंजेक्शन विदेश से मंगाना आवश्यक है। यह दवा अमेरिका से आयात की जानी है और इसके बिना उपचार की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार एसएमए जैसी बीमारी में समय पर इलाज अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि देरी होने पर मांसपेशियों की कार्यक्षमता लगातार प्रभावित होती जाती है और रोगी की स्थिति अधिक जटिल हो सकती है।

    स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक दुर्लभ आनुवंशिक न्यूरोमस्कुलर बीमारी है, जिसमें रीढ़ की हड्डी के मोटर न्यूरॉन्स धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। इसके कारण शरीर की मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं और सांस लेने, निगलने तथा सामान्य गतिविधियां करने जैसी आवश्यक शारीरिक क्षमताएं भी प्रभावित हो सकती हैं। यही वजह है कि इस बीमारी में समय पर उपचार को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

    अब सभी की निगाहें AIIMS की ओर से अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब और आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि न्यायालय के निर्देशों के बाद उपचार प्रक्रिया को लेकर स्थिति जल्द स्पष्ट होगी और बच्ची को आवश्यक चिकित्सा सहायता समय पर उपलब्ध कराने की दिशा में आगे की कार्रवाई तेज होगी।

  • इंदौर में कारोबारी और आरटीआई कार्यकर्ता के विवाद ने पकड़ा तूल, शिकायतकर्ता पर ही एफआईआर से उठे सवाल

    इंदौर में कारोबारी और आरटीआई कार्यकर्ता के विवाद ने पकड़ा तूल, शिकायतकर्ता पर ही एफआईआर से उठे सवाल


    मध्य प्रदेश
    के इंदौर में एक शराब कारोबारी और आरटीआई कार्यकर्ता के बीच विवाद अब कानूनी और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है। दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ लगाए गए आरोपों के बीच पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। मामले की विशेष चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि ब्लैकमेलिंग और कथित रंगदारी की शिकायत करने वाले व्यक्ति के खिलाफ ही पहले मामला दर्ज हो गया, जबकि उसकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, शराब कारोबारी सूरज रजक ने स्थानीय पुलिस थाने में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा उनके खिलाफ सोशल मीडिया और व्हाट्सएप समूहों में कथित रूप से मानहानिकारक सामग्री प्रसारित की जा रही है। शिकायत में यह भी दावा किया गया कि उनसे कथित रूप से बड़ी धनराशि की मांग की गई और भुगतान नहीं करने पर और अधिक सामग्री सार्वजनिक करने की चेतावनी दी गई।

    कारोबारी का आरोप है कि उन्होंने पुलिस से ब्लैकमेलिंग, मानहानि और सूचना प्रौद्योगिकी कानून से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना है कि शिकायत देने के बावजूद कई दिनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी दौरान दूसरे पक्ष की ओर से भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर कारोबारी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।

    इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। कारोबारी का कहना है कि उन्होंने सबसे पहले पुलिस को शिकायत दी थी और अपनी बात रखने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया था। उनका आरोप है कि उनकी शिकायत पर कार्रवाई लंबित रहने के दौरान उनके खिलाफ दर्ज हुए मामले ने पूरे घटनाक्रम को विवादास्पद बना दिया है। वहीं दूसरे पक्ष की शिकायत के आधार पर दर्ज प्रकरण अब जांच का विषय बना हुआ है।

    मामले में दोनों पक्षों के आरोप और प्रत्यारोपों के बीच पुलिस की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति ने पहले गंभीर आरोपों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी, तो उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई और किस आधार पर दूसरे पक्ष की शिकायत पर पहले प्रकरण दर्ज किया गया। हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

    विवाद के दौरान आरटीआई कार्यकर्ता को लेकर भी विभिन्न प्रकार के दावे सामने आए हैं। कुछ सूत्रों के अनुसार उन पर पूर्व में भी सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों को लेकर दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए जाते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित पक्ष की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। इसलिए इन आरोपों को जांच पूरी होने तक प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

    फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों द्वारा दिए गए दस्तावेजों, शिकायतों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध तथ्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस बीच यह मामला शहर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं।