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  • तुअर दाल के कारोबार में मुनाफे का झांसा देकर 65 लाख की ठगी, स्टॉक के फोटो दिखाकर कारोबारी को फंसाया; दो पर केस दर्ज

    तुअर दाल के कारोबार में मुनाफे का झांसा देकर 65 लाख की ठगी, स्टॉक के फोटो दिखाकर कारोबारी को फंसाया; दो पर केस दर्ज


    मध्य प्रदेश:
    की आर्थिक राजधानी इंदौर में व्यापारिक निवेश के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। तुअर दाल के कारोबार में अधिक मुनाफा दिलाने का भरोसा देकर एक कारोबारी से 65 लाख रुपए की राशि हासिल कर ली गई। आरोप है कि रकम लेने के बाद न तो माल की आपूर्ति की गई और न ही निवेश की गई राशि लौटाई गई। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार भंवरकुआं थाना क्षेत्र निवासी कारोबारी गिरीश रामनानी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी पहचान महाराष्ट्र के सोलापुर निवासी गुरुशांतलिंग कुंभार और सोमनाथ हलगोदे से कई वर्ष पहले हुई थी। दोनों व्यापारियों से पूर्व में भी विभिन्न स्थानों पर व्यापारिक लेन-देन हो चुका था। इसी पुराने परिचय और विश्वास का फायदा उठाकर आरोपियों ने उन्हें नए व्यापारिक निवेश का प्रस्ताव दिया।

    शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने खुद को तुअर दाल के बड़े कारोबारी के रूप में प्रस्तुत किया और अपनी फर्म के माध्यम से व्यापार में निवेश करने पर आकर्षक मुनाफा मिलने का दावा किया। फरवरी 2026 में एक आरोपी इंदौर पहुंचा और कारोबारी से मुलाकात की। इस दौरान उसने मोबाइल फोन पर बड़े पैमाने पर तुअर दाल के स्टॉक की तस्वीरें और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े विवरण दिखाए। साथ ही निवेश करने पर कम समय में अच्छा लाभ मिलने का भरोसा भी दिलाया।

    व्यापारिक अवसर को लाभदायक मानते हुए गिरीश रामनानी ने निवेश का निर्णय लिया। शिकायत के अनुसार उन्होंने विभिन्न बैंकों से ऋण लेकर कुल 65 लाख रुपए की व्यवस्था की। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में यह पूरी राशि आरोपियों द्वारा संचालित फर्म के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। लेन-देन के दौरान कारोबारी को भरोसा दिलाया गया था कि तय समय के भीतर माल की आपूर्ति कर दी जाएगी और व्यापारिक लाभ भी मिलेगा।

    फरियादी का आरोप है कि रकम जमा होने के बाद आरोपियों का व्यवहार बदलने लगा। निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद तुअर दाल की खेप नहीं भेजी गई। जब माल की आपूर्ति को लेकर लगातार संपर्क किया गया तो आरोपियों ने विभिन्न कारण बताते हुए समय मांगना शुरू कर दिया। कई बार बातचीत के बावजूद न तो व्यापार पूरा हुआ और न ही निवेश की गई राशि वापस की गई।

    समय बीतने के साथ कारोबारी को संदेह हुआ कि उनके साथ सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की गई है। उन्होंने अपने स्तर पर आरोपियों से संपर्क कर समाधान निकालने की कोशिश की, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की और उपलब्ध दस्तावेज, बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी तथा अन्य साक्ष्य जांच एजेंसी को सौंपे।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए तथ्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया है। शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब धनराशि के लेन-देन, व्यापारिक दस्तावेजों और आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं।

    यह मामला व्यापारिक निवेश के दौरान सतर्कता बरतने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े वित्तीय लेन-देन से पहले संबंधित व्यक्ति, फर्म और कारोबार की स्वतंत्र जांच करना आवश्यक है। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और आरोपियों की भूमिका तथा धनराशि के उपयोग से जुड़े पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।

  • इंदौर ने रचा योग इतिहास: 10 हजार साधकों ने 3 मिनट तक किया सामूहिक भ्रामरी प्राणायाम, बना रिकॉर्ड

    इंदौर ने रचा योग इतिहास: 10 हजार साधकों ने 3 मिनट तक किया सामूहिक भ्रामरी प्राणायाम, बना रिकॉर्ड


    इंदौर। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को मध्य प्रदेश का इंदौर शहर एक बार फिर योग के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा, जहां हजारों लोगों ने एक साथ मिलकर योग और प्राणायाम का भव्य प्रदर्शन किया। शहर के गोपुर चौराहे पर आयोजित इस विशाल योग कार्यक्रम में करीब 10 हजार से अधिक साधकों ने सामूहिक रूप से भ्रामरी प्राणायाम किया और इसे 3 मिनट से अधिक समय तक जारी रखते हुए एक उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की।

    इस भव्य आयोजन का संचालन नगर निगम इंदौर द्वारा चलाए जा रहे योगमित्र अभियान के अंतर्गत किया गया, जिसमें शहरभर की योग संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस वर्ष योग दिवस की थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” के अनुरूप कार्यक्रम में स्वास्थ्य, संतुलन और दीर्घायु जीवन का संदेश दिया गया।

    कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सरकार के कई मंत्री और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें Durgadas Uikey और Kailash Vijayvargiya प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने भी योगाभ्यास में भाग लेकर इस आयोजन को और भव्य बना दिया।

    सुबह 6 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में पहले शहर की विभिन्न योग संस्थाओं ने आकर्षक और भक्तिमय योग प्रस्तुतियां दीं, जिसने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद निर्धारित कॉमन योग प्रोटोकॉल के अनुसार सामूहिक योगाभ्यास कराया गया, जिसमें हजारों लोगों ने एक साथ विभिन्न योगासन किए।

    योग सत्र का संचालन योग प्रशिक्षक राकेश चौधरी और इंदौर की बेटी तथा मिसेज इंडिया-2023 चेतना जोशी ने किया, जिन्होंने प्रतिभागियों को भ्रामरी प्राणायाम और अन्य श्वसन तकनीकों का अभ्यास कराया। पूरे मैदान में एक साथ गूंजते “ॐ” और भ्रामरी की ध्वनि ने एक अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण तैयार कर दिया।

    कार्यक्रम में 70 से अधिक योग संस्थाएं और 150 से अधिक सामाजिक संगठन शामिल हुए, जिससे यह आयोजन एक जनआंदोलन के रूप में दिखाई दिया। हजारों लोगों की एकजुटता ने इंदौर को योग के क्षेत्र में एक बार फिर देशभर में चर्चा का केंद्र बना दिया।

    इस अवसर पर योग के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वरिष्ठ योग गुरुओं, योग खिलाड़ियों और योग प्रचारकों को ‘योग अलंकरण’ से सम्मानित भी किया गया। साथ ही योगमित्र अभियान की आधिकारिक वेबसाइट का शुभारंभ किया गया, जिससे अब शहर की सभी योगशालाओं और योग गतिविधियों की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध हो सकेगी।

    कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने नियमित योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल एक रिकॉर्ड बना गया, बल्कि स्वास्थ्य, अनुशासन और सामूहिक चेतना का भी प्रतीक बन गया।

  • अनिका की जिंदगी के लिए जुटे 8.23 करोड़ रुपए, अब सिर्फ 77 लाख की दरकार; 9 करोड़ पूरे होते ही शुरू होगा इलाज

    अनिका की जिंदगी के लिए जुटे 8.23 करोड़ रुपए, अब सिर्फ 77 लाख की दरकार; 9 करोड़ पूरे होते ही शुरू होगा इलाज


    मध्यप्रदेश । इंदौर की मासूम अनिका शर्मा की जिंदगी बचाने की मुहिम अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचती दिखाई दे रही है। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 जैसी गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रही अनिका के इलाज के लिए अब तक 8 करोड़ 23 लाख रुपए जुटाए जा चुके हैं। परिवार को अब सिर्फ शेष राशि मिलने का इंतजार है, ताकि कुल 9 करोड़ रुपए पूरे होते ही बच्ची का इलाज शुरू कराया जा सके।

    पिछले कई महीनों से अनिका के माता-पिता सरिता शर्मा और प्रवीण शर्मा अपनी बेटी की जिंदगी बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। महंगे इलाज और विदेश से आने वाले विशेष इंजेक्शन की व्यवस्था करना परिवार के लिए आसान नहीं था, लेकिन समाज, दानदाताओं और सामाजिक संगठनों के सहयोग से यह अभियान एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है।

    अनिका SMA टाइप-2 बीमारी से पीड़ित है, जो बच्चों की मांसपेशियों और शारीरिक विकास को प्रभावित करती है। इस बीमारी के इलाज के लिए अमेरिका से विशेष इंजेक्शन मंगवाया जाना है, जिसकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपए बताई जा रही है। यही कारण है कि परिवार लंबे समय से क्राउड फंडिंग के जरिए राशि जुटाने में लगा हुआ है।

    इलाज के लिए सिर्फ धनराशि जुटाना ही चुनौती नहीं थी, बल्कि अनिका की उम्र और वजन भी महत्वपूर्ण मानदंड थे। परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता यह थी कि इलाज के लिए निर्धारित वजन सीमा से बच्ची का वजन अधिक न हो जाए। इसके लिए माता-पिता ने बेहद सावधानी बरतते हुए अनिका को नियंत्रित और विशेष लिक्विड डाइट पर रखा। लगातार निगरानी और चिकित्सकीय सलाह के चलते वे अब तक उसका वजन नियंत्रित रखने में सफल रहे हैं।

    अनिका की मदद के लिए समाज के हर वर्ग से लोग आगे आए हैं। इंदौर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी लोगों ने आर्थिक सहयोग दिया। कई संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और व्यक्तिगत दानदाताओं ने सहायता राशि उपलब्ध कराई, जबकि कुछ लोगों और संगठनों ने मदद का आश्वासन भी दिया है। अब परिवार को इन्हीं स्वीकृत सहायता राशियों के मिलने का इंतजार है।

    इस अभियान को देशभर में पहचान दिलाने में कई चर्चित हस्तियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। अभिनेता सोनू सूद, वरिष्ठ कलाकार रजा मुराद, बिग बॉस की आवाज के रूप में प्रसिद्ध विजय विक्रम सिंह सहित कई सेलिब्रिटी वीडियो संदेशों के माध्यम से लोगों से सहयोग की अपील कर चुके हैं। इन अपीलों का सकारात्मक असर देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़े।

    हाल ही में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और “SMA Man of India” के नाम से पहचाने जाने वाले प्रतीक क्वात्रा ने ट्रू होप फाउंडेशन के साथ मिलकर अनिका के लिए 1 करोड़ 20 लाख रुपए की सहायता उपलब्ध कराई। इस सहायता राशि का चेक परिवार को सौंप दिया गया है, जिससे इलाज की दिशा में एक बड़ा कदम आगे बढ़ा है।

    अनिका के माता-पिता का कहना है कि जिन लोगों और संस्थाओं ने सहायता का आश्वासन दिया है, यदि वे जल्द राशि उपलब्ध करा दें तो 9 करोड़ रुपए का लक्ष्य पूरा हो जाएगा और उनकी बेटी को जीवन देने वाला इलाज समय पर मिल सकेगा। परिवार को उम्मीद है कि समाज का सहयोग उनकी बेटी के जीवन में नई उम्मीद लेकर आएगा।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पांच दिवसीय एमपी दौरे पर, इंदौर पहुंचते ही ओंकारेश्वर रवाना; सुरक्षा के कड़े इंतजाम

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पांच दिवसीय एमपी दौरे पर, इंदौर पहुंचते ही ओंकारेश्वर रवाना; सुरक्षा के कड़े इंतजाम


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इंदौर पहुंचीं। देश की प्रथम नागरिक के स्वागत के लिए देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मौजूद रहे। राष्ट्रपति के आगमन के साथ ही प्रदेश में उनके महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू हो गई है, जो 22 जून तक जारी रहेगी।

    इंदौर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू सीधे ओंकारेश्वर के लिए रवाना हुईं। यहां वे भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और विशेष पूजा-अर्चना करेंगी। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर ओंकारेश्वर और इंदौर दोनों स्थानों पर प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है।

    राष्ट्रपति के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इंदौर में विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। उन्होंने वीर हनुमान मंदिर परिसर स्थित ऐतिहासिक बावड़ी का अवलोकन किया और शहर की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर अधिकारियों से चर्चा की।

    राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से जुड़ा हुआ है। 19 जून को वे अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम में भाग लेंगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और प्रभावित समुदायों तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाना है। इसके अलावा राष्ट्रपति ग्वालियर और श्योपुर में आयोजित विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों में भी शामिल होंगी।

    राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती है। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार एयरपोर्ट और उसके आसपास के क्षेत्रों को अस्थायी रूप से नो-फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। वहीं 17 से 19 जून तक शहर के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है ताकि वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम जनता को न्यूनतम परेशानी हो।

    ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। दर्शनार्थियों के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था, बस सेवाएं और मार्गदर्शन केंद्र बनाए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित ट्रैफिक प्लान का पालन करें और यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलें।

    राष्ट्रपति के दौरे के मद्देनजर भारी मालवाहक वाहनों के मार्ग भी बदले गए हैं। इंदौर-इच्छापुर मार्ग पर चलने वाले ट्रकों और अन्य भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जा रहा है। इससे वीआईपी रूट पर यातायात का दबाव कम करने और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे प्रदेश में विकास, स्वास्थ्य जागरूकता और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कार्यक्रमों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • आवास योजना में मकान दिलाने का झांसा, युवक से 5.60 लाख की ठगी: खुद को वकील बताने वाले आरोपी पर केस दर्ज

    आवास योजना में मकान दिलाने का झांसा, युवक से 5.60 लाख की ठगी: खुद को वकील बताने वाले आरोपी पर केस दर्ज


    मध्य प्रदेश । इंदौर में सरकारी आवास योजना के नाम पर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आजाद नगर थाना क्षेत्र में रहने वाले एक युवक ने आरोप लगाया है कि खुद को वकील बताने वाले व्यक्ति ने उसकी मां के नाम पर आवास योजना में मकान दिलाने का झांसा देकर 5 लाख 60 हजार रुपए हड़प लिए। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार रामनगर मुसाखेड़ी निवासी कपिल उईके ने नीलगिरी परिसर दूधिया निवासी दीपक शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। कपिल का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान उसकी पहचान दीपक शर्मा से हुई थी। उस समय दीपक ने स्वयं को पेशे से वकील बताया था और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता देने का भरोसा दिलाया था। इसी परिचय का फायदा उठाकर उसने परिवार का विश्वास जीत लिया।

    कपिल के मुताबिक जून 2026 में दीपक शर्मा ने उसकी मां अवंतीबाई के नाम पर सरकारी आवास योजना का लाभ दिलाने की बात कही। आरोपी उन्हें जिला न्यायालय परिसर स्थित कैंटीन में ले गया, जहां एक महिला के माध्यम से आवेदन फार्म भरवाया गया। इसके बाद कुछ राशि भी जमा कराई गई। अगले दिन आरोपी ने अवंतीबाई के मोबाइल में 311 ऐप डाउनलोड कर यह विश्वास दिलाया कि आवास योजना से जुड़ी सारी जानकारी और अपडेट इसी माध्यम से प्राप्त होंगे।

    कुछ दिनों बाद आरोपी ने दावा किया कि आवंटित होने वाला मकान किसी अन्य व्यक्ति को अधिक कीमत पर बेचा जा सकता है। उसने पूरे सौदे की प्रक्रिया कलेक्टर कार्यालय में पूरी कराने की बात कही। 10 जून को कथित खरीदार पक्ष और पीड़ित परिवार को कलेक्टर कार्यालय बुलाया गया, जहां लगभग 9 लाख 60 हजार रुपए में सौदा तय हुआ। आरोप है कि खरीदार पक्ष ने उसी समय 5 लाख 60 हजार रुपए नकद दिए, जबकि शेष राशि खाते में जमा कराने की बात कही गई।

    पीड़ित परिवार का कहना है कि यहीं से ठगी का खेल शुरू हुआ। आरोपी दीपक शर्मा उसी शाम उनके घर पहुंचा और रकम गिनने के बहाने नकदी अपने कब्जे में ले ली। अगले दिन वह एक महिला के साथ दोबारा घर आया और नगर निगम द्वारा सत्यापन किए जाने की बात कहकर परिवार को भ्रमित करता रहा। बाद में उसने कहा कि अधिकारी आने वाले हैं, इसलिए रकम तैयार रखी जाए।

    कपिल के अनुसार आरोपी ने चालाकी से पूरी रकम एक बैग में रखवाई और फिर उसे नाश्ता लेने के बहाने घर से बाहर भेज दिया। इसके बाद वह कपिल को नगर निगम कार्यालय ले गया। वहां बैग लेकर अंदर जाने की बात कहकर वह भवन में प्रवेश कर गया, लेकिन फिर वापस नहीं लौटा। काफी देर इंतजार करने के बाद जब कपिल ने उसे तलाशने की कोशिश की तो उसका कोई पता नहीं चला।

    घर लौटकर जांच करने पर परिवार को एहसास हुआ कि पूरी नकदी गायब हो चुकी है। इसके बाद आरोपी को लगातार फोन किए गए, लेकिन उसने कॉल उठाना बंद कर दिया। खुद को ठगा महसूस करने के बाद कपिल ने वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

    मामले की जांच के बाद आजाद नगर पुलिस ने आरोपी दीपक शर्मा के खिलाफ चोरी और धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अब आरोपी की तलाश कर रही है और यह भी जांच कर रही है कि कहीं उसने इसी तरह अन्य लोगों को भी सरकारी योजनाओं का झांसा देकर ठगी का शिकार तो नहीं बनाया। यह मामला एक बार फिर लोगों को सावधान करता है कि सरकारी योजनाओं से जुड़े किसी भी काम के लिए केवल अधिकृत माध्यमों और अधिकारियों पर ही भरोसा करें।

  • इंदौर की महावीर कॉलोनी में पानी का संकट गहराया: दूषित जल से लोग बीमार, नर्मदा लाइन का अब भी इंतजार

    इंदौर की महावीर कॉलोनी में पानी का संकट गहराया: दूषित जल से लोग बीमार, नर्मदा लाइन का अब भी इंतजार


    मध्य प्रदेश । इंदौर के वार्ड क्रमांक-16 स्थित महावीर नगर में पेयजल संकट और दूषित पानी की समस्या एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। भागीरथपुरा जलकांड की यादें अभी लोगों के जहन से मिट भी नहीं पाई थीं कि अब महावीर नगर के रहवासियों को भी इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बोरिंग के पानी में सीवरेज मिलने की शिकायत सामने आने के बाद नगर निगम ने सरकारी बोरिंग बंद कर दी है, जिससे पूरे इलाके के लोग टैंकरों के भरोसे रहने को मजबूर हो गए हैं।

    महावीर नगर और आसपास की कॉलोनियों के लोग वर्षों से नर्मदा जलापूर्ति योजना का इंतजार कर रहे हैं। क्षेत्र में आज तक नर्मदा की पाइपलाइन नहीं पहुंच सकी है, जिसके कारण लोग बोरिंग और टैंकरों से मिलने वाले पानी पर निर्भर हैं। लेकिन अब जब बोरिंग का पानी भी दूषित होने लगा है, तो लोगों की चिंता और बढ़ गई है। रहवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।

    स्थानीय निवासी बसंत राव निकम बताते हैं कि पिछले 35 वर्षों से वे इस क्षेत्र में रह रहे हैं और अक्सर बोरिंग के पानी में गंदगी तथा सीवरेज की समस्या देखने को मिलती है। शिकायत के बाद निगम की टीम चैंबर साफ कर देती है, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। उनका कहना है कि वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।

    इसी तरह क्षेत्र की अन्य महिलाओं ने भी अपनी परेशानी साझा की। सीमा साखले और ममता मालवीय का कहना है कि वे कई वर्षों से यहां रह रही हैं, लेकिन आज तक नर्मदा जलापूर्ति का लाभ नहीं मिल पाया। ऐसे में उन्हें मजबूरी में बोरिंग का पानी इस्तेमाल करना पड़ता है, जो कई बार दूषित निकलता है।

    इस बीच एक मासूम बच्ची की तबीयत बिगड़ने के बाद मामला और गंभीर हो गया। बच्ची के पिता नागेश्वर खालोटिया का दावा है कि दूषित पानी के सेवन के कारण उनकी बेटी अविका खालोटिया गंभीर रूप से बीमार हो गई। उसे लगातार दस्त, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होने लगीं। इंदौर के अस्पतालों में उपचार के बाद भी जब स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो परिवार उसे बेहतर इलाज के लिए अहमदाबाद लेकर गया। चिकित्सकों ने संक्रमण की पुष्टि की और दूषित भोजन या पानी को संभावित कारण बताया।

    रहवासियों का कहना है कि केवल एक बच्ची ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोग भी उल्टी-दस्त और पेट संबंधी बीमारियों से प्रभावित हुए हैं। इससे पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। लोगों को डर है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित बोरिंग को बंद कर दिया गया है और नई बोरिंग कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। साथ ही अमृत-2 योजना के तहत 30 लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकी और नई जलापूर्ति व्यवस्था विकसित करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार आगामी कुछ महीनों में इस दिशा में काम शुरू हो सकता है, जिससे क्षेत्र की 30 से 40 कॉलोनियों को लाभ मिलेगा।

    फिलहाल महावीर नगर के लोग स्वच्छ पानी और नर्मदा लाइन के इंतजार में हैं। उनका कहना है कि विकास के दावों के बीच यदि लोगों को आज भी पीने के सुरक्षित पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

  • “साहब, ये मुझे मार डालेगा…” ट्रस्टी की चेतावनी हुई सच, एक महीने बाद चौकीदार ने ली जान

    “साहब, ये मुझे मार डालेगा…” ट्रस्टी की चेतावनी हुई सच, एक महीने बाद चौकीदार ने ली जान


    मध्य प्रदेश । इंदौर के अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र स्थित 150 साल पुराने बारामत्था बगीची शिव-हनुमान मंदिर के ट्रस्टी कैलाश चंद्र मोदी की निर्मम हत्या ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। 70 वर्षीय कैलाश मोदी की मौत केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी का ऐसा मामला बन गई है, जिसमें पीड़ित ने अपनी जान को खतरा होने की आशंका पहले ही जाहिर कर दी थी। दुखद बात यह रही कि उनकी चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया और आखिरकार वही हुआ, जिसका डर उन्हें लगातार सता रहा था।

    परिजनों के अनुसार कैलाश मोदी पिछले कई महीनों से मंदिर परिसर के चौकीदार मुकेश शर्मा की गतिविधियों से परेशान थे। उन्होंने पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर, एसीपी और थाना प्रभारी सहित कई अधिकारियों को लिखित शिकायतें देकर बताया था कि आरोपी मंदिर परिसर में अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहा है और विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां देता है। 13 मई को दिए गए आवेदन में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि आरोपी कभी भी उनकी हत्या कर सकता है।

    बताया जाता है कि मुकेश शर्मा पर पहले से ही मारपीट, धमकी, अवैध हथियार रखने और अवैध वसूली जैसे पांच आपराधिक मामले दर्ज थे। इसके बावजूद वह लगातार खुलेआम घूमता रहा। पुलिस ने उसके खिलाफ बाउंड ओवर और जिलाबदर की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन वह कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। इसी बीच आरोपी की गुंडागर्दी और बढ़ती गई।

    कैलाश मोदी ने केवल एक-दो नहीं, बल्कि करीब 40 शिकायतें विभिन्न विभागों को सौंपी थीं। उन्होंने मंदिर परिसर में शराबखोरी, जुआ-सट्टा, अवैध गतिविधियों और कब्जे के प्रयासों की जानकारी भी प्रशासन को दी थी। दिसंबर 2025 में आरोपी ने मंदिर परिसर में ही कैलाश मोदी पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। उस समय भी मामला दर्ज हुआ, लेकिन सख्त कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण रहा कि आरोपी के हौसले लगातार बुलंद होते गए।

    मंगलवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे आरोपी मुकेश शर्मा कथित तौर पर नशे की हालत में मंदिर पहुंचा। वहां किसी बात को लेकर विवाद हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के मुताबिक जब कैलाश मोदी ने उसे समझाने का प्रयास किया तो वह आक्रामक हो गया और डंडा लेकर उनके पीछे दौड़ पड़ा। जान बचाने के लिए मोदी पास स्थित गुरुद्वारे की ओर भागे, लेकिन आरोपी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। उसने ताबड़तोड़ डंडों से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया।

    घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें आरोपी लगातार बुजुर्ग ट्रस्टी पर हमला करता दिखाई दे रहा है। गंभीर रूप से घायल कैलाश मोदी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि पुलिस और प्रशासन ने समय रहते शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई की होती तो आज कैलाश मोदी जीवित होते।

    अब पुलिस हत्या के मामले की जांच कर रही है और मृतक द्वारा पहले की गई शिकायतों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। लेकिन यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि जब कोई नागरिक अपनी जान को खतरा बताते हुए बार-बार गुहार लगाता है, तब उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

  • सोसाइटी विवाद में पुलिस पर पक्षपात के आरोप: महिला बोली- FIR से आरक्षक का नाम हटाया, न्याय के लिए भटक रहा परिवार

    सोसाइटी विवाद में पुलिस पर पक्षपात के आरोप: महिला बोली- FIR से आरक्षक का नाम हटाया, न्याय के लिए भटक रहा परिवार

     
    इंदौर ; इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र स्थित गुलमार्ग परिसर हाउसिंग सोसाइटी में चल रहा विवाद अब केवल सोसाइटी प्रबंधन और वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोसाइटी की रहवासी सुलोचना शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे के साथ हुई मारपीट के मामले में एक पुलिस आरक्षक को बचाने के लिए एफआईआर में उसका नाम शामिल नहीं किया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि न्याय पाने के लिए वे थाने से लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

    महिला के अनुसार पूरा विवाद सोसाइटी के हैंडओवर, मेंटेनेंस फंड और कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर चल रहा है। उनका आरोप है कि सोसाइटी के फंड से करीब 15 लाख रुपए का गबन किया गया है और कुछ पदाधिकारी चार्ज हस्तांतरण से इसलिए बच रहे हैं ताकि कथित अनियमितताएं उजागर न हों। इसके अलावा नगर निगम की जमीन पर कथित अतिक्रमण और वहां धार्मिक संरचना स्थापित करने को लेकर भी विवाद बना हुआ है।

    पीड़िता का कहना है कि 8 जून की रात सोसाइटी परिसर में विवाद के दौरान उनके बेटे कार्तिक शर्मा ने केवल गाली-गलौज का विरोध किया था। इसके बाद कुछ लोगों ने उस पर लाठियों, लात-घूंसों से हमला कर दिया। परिवार का आरोप है कि हमले में कार्तिक गंभीर रूप से घायल हुआ और उसके गले से सोने की चेन भी गायब हो गई। घटना के बाद परिवार शिकायत लेकर कनाड़िया थाने पहुंचा, लेकिन रातभर इंतजार कराने के बाद रिपोर्ट दर्ज की गई।

    सबसे गंभीर आरोप यह है कि घटना में शामिल बताए जा रहे कनाड़िया थाने के आरक्षक नारायण जाट का नाम एफआईआर से हटा दिया गया। महिला का कहना है कि उन्होंने पुलिस को कई नाम बताए थे, लेकिन रिपोर्ट में केवल कुछ लोगों के नाम शामिल किए गए। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस विभाग से जुड़े होने के कारण आरक्षक को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

    सुलोचना शर्मा ने थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब वे कार्रवाई की मांग लेकर थाने पहुंचीं तो उन्हें केवल जांच का आश्वासन दिया गया। दूसरी ओर कनाड़िया थाना प्रभारी सहर्ष यादव का कहना है कि मामले में दर्ज शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है और जिस आरक्षक पर आरोप लगाए गए हैं, उसकी भूमिका की भी जांच जारी है। पुलिस का दावा है कि महिला द्वारा बताए गए सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

    उधर, आरक्षक नारायण जाट ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वह घटना के समय मौके पर मौजूद थे, लेकिन किसी प्रकार की मारपीट में शामिल नहीं थे। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी पहले सोसाइटी में सचिव पद पर थीं, जिसके कारण उनका नाम विवाद में घसीटा जा रहा है।

    इस पूरे मामले ने सोसाइटी के रहवासियों के बीच तनाव और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। पीड़ित परिवार ने पुलिस कमिश्नर और नगर निगम आयुक्त से हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • जॉइंट डायरेक्टर की संपत्तियों पर लोकायुक्त की नजर: सूदखोरी, चेक बाउंस और करोड़ों के निवेश की जांच तेज

    जॉइंट डायरेक्टर की संपत्तियों पर लोकायुक्त की नजर: सूदखोरी, चेक बाउंस और करोड़ों के निवेश की जांच तेज


    इंदौर इंदौर में महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के खिलाफ चल रही आय से अधिक संपत्ति की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। लोकायुक्त पुलिस की छापामार कार्रवाई के बाद अब ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, जिनसे जांच का दायरा और बढ़ सकता है। कंडवाल के परिवार के नाम पर करोड़ों रुपए की संपत्तियां, निवेश और व्यवसाय मिलने के साथ-साथ सूदखोरी और चेक बाउंस मामलों को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

    लोकायुक्त पुलिस ने हाल ही में कंडवाल के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान उनकी पत्नी शारदा कंडवाल, पुत्रवधु तनु और हर्षिता के नाम पर कई संपत्तियों और निवेश का पता चला। शुरुआती जांच में इन संपत्तियों का मूल्य करोड़ों रुपए में आंका गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय की तुलना में काफी अधिक हो सकती है।

    जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। जानकारी के अनुसार कंडवाल के पुत्र अभिषेक के नाम से वर्ष 2022 में रमेश मलकानी के खिलाफ चेक बाउंस के छह मामले दर्ज कराए गए थे। ये मामले न्यायालय तक पहुंचे और बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। हालांकि इन मामलों से जुड़े वित्तीय लेनदेन को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।

    सूत्रों के अनुसार जिन चेकों को लेकर मुकदमे दर्ज हुए थे, वे केसरबाग रोड स्थित एक संपत्ति के सौदे से जुड़े बताए जाते हैं। बाद में समझौते के तहत राशि प्राप्त होने के बाद मामला समाप्त कर दिया गया था। लेकिन जांच एजेंसियां अब यह जानने का प्रयास कर सकती हैं कि उस समय पढ़ाई कर रहे अभिषेक के पास इतनी बड़ी रकम कहां से आई और संपत्ति निवेश के लिए धन का स्रोत क्या था।

    जानकारों का कहना है कि यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि निवेश की राशि वास्तव में लक्ष्मी नारायण कंडवाल द्वारा उपलब्ध कराई गई थी, तो बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर दर्ज संपत्तियों की भी गहन जांच हो सकती है। लोकायुक्त टीम इस बात का भी परीक्षण कर सकती है कि कहीं परिवार के नाम का उपयोग कर संपत्तियां तो नहीं बनाई गईं।

    कंडवाल ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1986 में ग्राम सुनाला के माध्यमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में की थी। इसके बाद वे विभिन्न पदों पर पदोन्नत होते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग में संयुक्त संचालक के पद तक पहुंचे। नौकरी के दौरान उनकी पदस्थापना नीमच, खरगोन, उज्जैन, जबलपुर, भोपाल, रीवा सहित कई जिलों में रही।

    लोकायुक्त जांच में यह भी सामने आया है कि उनके पुत्र अभिषेक और पवन के नाम पर एक सुपर मार्केट संचालित है, जिसमें लाखों रुपए का निवेश किया गया है। इसके अलावा एक आधुनिक और आलीशान जिम की जानकारी भी सामने आई है, जहां अत्याधुनिक फिटनेस उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन निवेशों और व्यवसायों के वित्तीय स्रोतों की भी जांच की जा रही है।

    लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। सभी संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और वित्तीय लेनदेन का विस्तृत मूल्यांकन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट राज्य शासन को भेजी जाएगी। साथ ही विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को भी पत्र भेजा जा सकता है। इस मामले ने प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है और अब सभी की नजर लोकायुक्त की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है।