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  • सब्सिडी के लिए मांगी रिश्वत की शिकायत पहुंची केंद्रीय मंत्री तक सीहोर में कृषि मंत्रालय के अधिकारी पर गिरी गाज

    सब्सिडी के लिए मांगी रिश्वत की शिकायत पहुंची केंद्रीय मंत्री तक सीहोर में कृषि मंत्रालय के अधिकारी पर गिरी गाज


    सीहोर । सीहोर जिले में सब्सिडी की राशि जारी करने के एवज में कथित तौर पर रिश्वत मांगने के मामले में केंद्रीय कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी पर कार्रवाई की गई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के विपणन अधिकारी अनुराग को शिकायत सामने आने के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामला उस समय सामने आया जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सीहोर जिले के दौरे पर निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान वेयरहाउस संचालकों ने अधिकारी पर सब्सिडी की राशि जारी करने के बदले पैसे मांगने का आरोप लगाया था।

    बताया गया है कि शिकायत में दो वेयरहाउस संचालकों से रिश्वत मांगने की बात कही गई थी। आरोप है कि शिवाय वेयरहाउस से सब्सिडी की रकम जारी करने के बदले एक लाख रुपए की मांग की गई जबकि श्रीकृष्णा वेयरहाउस संचालक से 60 हजार रुपए मांगे गए। शिकायतकर्ताओं ने इस मामले की जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री तक पहुंचाई थी। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    शिकायत सामने आने के बाद कृषि मंत्रालय के स्तर पर अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि सब्सिडी जारी करने के लिए वास्तव में किसी तरह की रकम की मांग की गई थी या नहीं और इस पूरे मामले में अधिकारी की भूमिका क्या रही।

    मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सब्सिडी की राशि सरकारी प्रक्रिया के तहत पात्र लाभार्थियों और संबंधित संस्थानों तक पहुंचाई जाती है। ऐसे में राशि जारी करने के बदले कथित तौर पर पैसे मांगने की शिकायत ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर तय होगी।

    सीहोर में निरीक्षण के दौरान सामने आई इस शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लिया गया है। अब जांच में शिकायत से जुड़े दस्तावेजों रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयान लिए जा सकते हैं। इसके आधार पर यह स्पष्ट होगा कि सब्सिडी जारी करने की प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं।

    इस मामले में अभी विभागीय जांच के परिणाम सामने नहीं आए हैं। इसलिए रिश्वत मांगने के आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारी अनुराग के निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। सीहोर में सामने आए इस मामले ने सरकारी सब्सिडी से जुड़ी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निगरानी को लेकर भी ध्यान खींचा है।

  • शिवपुरी में हरियाणा जा रहा लकड़ी से भरा ट्रक पकड़ा गया डामरौन में वन विभाग ने घेराबंदी कर की कार्रवाई

    शिवपुरी में हरियाणा जा रहा लकड़ी से भरा ट्रक पकड़ा गया डामरौन में वन विभाग ने घेराबंदी कर की कार्रवाई


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले के करैरा क्षेत्र में वन विभाग ने लकड़ी के अवैध परिवहन की आशंका के मामले में कार्रवाई करते हुए एक ट्रक को जब्त किया है। यह ट्रक लकड़ी लेकर हरियाणा की ओर जा रहा था। वन विभाग की टीम ने मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर दिनारा पिछोर मार्ग पर डामरौन के पास घेराबंदी की और संदिग्ध ट्रक को रोक लिया। तलाशी के दौरान ट्रक में लकड़ी भरी हुई मिली जिसके बाद विभाग ने वाहन को अपने कब्जे में ले लिया। मामले में अब लकड़ी के स्रोत और उसके परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार वन विभाग के अधिकारियों को सूचना मिली थी कि करैरा क्षेत्र से लकड़ी से भरा एक ट्रक हरियाणा की तरफ रवाना होने वाला है। सूचना मिलने के बाद रेंजर लक्ष्मण मीणा और डिप्टी रेंजर कुलदीप गौर के नेतृत्व में टीम ने डामरौन के आसपास निगरानी शुरू की। टीम ट्रक के आने का इंतजार कर रही थी। जैसे ही बताए गए हुलिए और नंबर का ट्रक वहां पहुंचा वन विभाग के कर्मचारियों ने उसे रोक लिया।

    ट्रक की जांच की गई तो उसमें लकड़ी लदी हुई मिली। इसके बाद वाहन को जब्त कर लिया गया। वन विभाग की ओर से अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ट्रक में लदी लकड़ी आखिर कहां से लाई गई थी। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि लकड़ी के परिवहन के लिए चालक के पास आवश्यक अनुमति और दस्तावेज मौजूद थे या नहीं।

    शुरुआती जानकारी में यह बात सामने आई है कि ट्रक बालाघाट से करैरा पहुंचा था। बताया जा रहा है कि वहां ट्रक में पहले प्लाईबोर्ड से जुड़ा सामान छोड़ा गया था। इसके बाद ट्रक करैरा क्षेत्र में पहुंचा जहां उसमें लकड़ी लोड की गई। लकड़ी भरने के बाद वाहन को हरियाणा की ओर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान वन विभाग की टीम ने उसे डामरौन के पास रोक लिया।

    लकड़ी के इस्तेमाल को लेकर भी वन विभाग जांच कर रहा है। प्रारंभिक तौर पर माना जा रहा है कि जब्त की गई लकड़ी का इस्तेमाल प्लाईबोर्ड तैयार करने में किया जा सकता है। इसी वजह से विभाग यह भी पता लगाने में जुटा है कि लकड़ी करैरा क्षेत्र की किसी आरा मशीन से तो नहीं लाई गई थी। अधिकारियों की जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि यदि लकड़ी स्थानीय स्तर पर लोड की गई थी तो इसके लिए किस स्थान का इस्तेमाल किया गया और उसके परिवहन की वैध अनुमति थी या नहीं।

    करैरा क्षेत्र में इससे पहले भी वन विभाग की ओर से आरा मशीनों को लेकर कार्रवाई की जा चुकी है। ऐसे में जब्त ट्रक में मिली लकड़ी और क्षेत्र की आरा मशीनों के बीच किसी तरह का संबंध है या नहीं इसकी भी पड़ताल की जा रही है। वन विभाग दस्तावेजों और लकड़ी के स्रोत की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय करेगा। फिलहाल ट्रक विभाग के कब्जे में है और मामले की जांच जारी है।

  • पूजा के बाद स्कूटी के पास पहुंची युवती तो दिखी सांप की पूंछ: इंजन में जा छिपा था सांप एक घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन

    पूजा के बाद स्कूटी के पास पहुंची युवती तो दिखी सांप की पूंछ: इंजन में जा छिपा था सांप एक घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन


    देवास । देवास में एक मंदिर में पूजा करने पहुंची युवती उस समय घबरा गई जब अपनी स्कूटी के पास लौटने पर उसे वाहन के अंदर सांप दिखाई दिया। सांप की पूंछ नजर आते ही युवती ने तुरंत आसपास मौजूद लोगों को इसकी जानकारी दी। कुछ ही देर में मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने स्कूटी को ध्यान से देखा तो पता चला कि सांप वाहन के अंदर काफी गहराई तक जा चुका था। इसके बाद सर्प मित्र को सूचना दी गई और सांप को सुरक्षित बाहर निकालने की कवायद शुरू हुई।

    मामला देवास के उज्जैन रोड स्थित शिव मंदिर का बताया जा रहा है। युवती मंदिर में पूजा करने के लिए पहुंची थी। उसने अपनी स्कूटी मंदिर के पास खड़ी की थी। पूजा पूरी करने के बाद जब वह वापस स्कूटी के पास आई तो उसकी नजर वाहन के अंदर मौजूद सांप की पूंछ पर पड़ी। सांप को देखते ही वह घबरा गई और उसने आसपास के लोगों को बुलाया। कुछ ही समय में वहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।

    सूचना मिलने पर सर्प मित्र शाहिद अली अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उस समय तक सांप स्कूटी के अंदर इंजन के आसपास के हिस्से में जाकर छिप चुका था। सांप को बाहर निकालने के लिए टीम ने पहले वाहन के अलग अलग हिस्सों की जांच की। काफी कोशिश के बाद भी सांप आसानी से बाहर नहीं आया। इसके बाद स्कूटी की डिक्की और दूसरे जरूरी पार्ट्स को खोलकर अंदर छिपे सांप की तलाश की गई।

    सर्प मित्र और उनकी टीम करीब एक घंटे तक स्कूटी में सांप की तलाश करती रही। सांप इंजन के पास जाकर इस तरह छिपा हुआ था कि उसे सीधे बाहर निकालना आसान नहीं था। टीम ने बेहद सावधानी के साथ स्कूटी के हिस्से खोले और सांप तक पहुंचने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद आखिरकार सांप को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल लिया गया।

    सर्प मित्र शाहिद अली ने बताया कि सांप स्कूटी के अंदर काफी गहराई तक चला गया था। इसी वजह से उसे बाहर निकालने के लिए वाहन के कई हिस्सों को खोलना पड़ा। राहत की बात यह रही कि सांप जहरीला नहीं था। इसके बावजूद टीम ने पूरी सावधानी के साथ उसका रेस्क्यू किया ताकि सांप या आसपास मौजूद किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे।

    सांप के बाहर निकलने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। जिस स्कूटी में कुछ देर पहले तक सांप छिपा हुआ था उसे देखने के लिए भी लोगों की भीड़ लगी रही। रेस्क्यू के बाद सांप को किसी तरह की चोट नहीं आई और उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। बाद में उसे जंगल में छोड़ दिया गया।

    इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि बारिश और बदलते मौसम के दौरान सांप सुरक्षित और गर्म जगह की तलाश में वाहनों के अंदर भी पहुंच सकते हैं। ऐसे में वाहन खड़ा करने के बाद उसे चलाने से पहले आसपास और खासकर खुले हिस्सों की जांच करना जरूरी है। अगर किसी वाहन में सांप दिखाई दे तो खुद उसे पकड़ने या निकालने की कोशिश करने के बजाय प्रशिक्षित सर्प मित्र या विशेषज्ञ की मदद लेना ज्यादा सुरक्षित रहता है।

  • बालाघाट के बैगा गांवों में बीमारी का खौफ: 32 बच्चों की मौत के बाद तेज हुई जांच 37 हजार लोगों की स्क्रीनिंग

    बालाघाट के बैगा गांवों में बीमारी का खौफ: 32 बच्चों की मौत के बाद तेज हुई जांच 37 हजार लोगों की स्क्रीनिंग


    बालाघाट । मध्य प्रदेश के बालाघाट में बैगा आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की बीमारी और मौतों का मामला गंभीर बना हुआ है। बीते तीन महीने में 32 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि मृतकों की संख्या सरकारी आंकड़े से ज्यादा हो सकती है। प्रभावित गांवों में बीमारी का डर इस कदर है कि छोटे बच्चों की तबीयत ठीक होने के बाद भी परिवार चिंतित हैं। कई जगह अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद बच्चों को दोबारा तेज बुखार आने की शिकायत सामने आई है। जांच में मीजल्स और मलेरिया के पॉजिटिव केस भी मिले हैं।

    बालाघाट के जंगलों में बसे अड़ोरी कुंडेकसा बोंदारी और आसपास के गांवों में स्वास्थ्य विभाग ने जांच और उपचार के लिए अस्थायी कैंप लगाए हैं। कुंडेकसा के स्कूल में बने स्वास्थ्य केंद्र में रोज बड़ी संख्या में बच्चे पहुंच रहे हैं। कई बच्चों के शरीर पर दाने और फफोले दिखाई दिए। रजिस्टर के मुताबिक एक दिन में 26 और अगले दिन सुबह तक 15 बच्चों के नाम दर्ज किए गए। स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार अलग-अलग केंद्रों पर रोज करीब 60 प्रभावित बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग भी कर रही हैं। बिरसा ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर के अनुसार रोज 100 से 150 घरों में पहुंचकर बच्चों की जांच की जा रही है। प्रभावित क्षेत्र में करीब 18 से 20 गांवों को प्रमुख रूप से चिन्हित किया गया है। कुंडेकसा के अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र में दो बेड और चार गद्दों की व्यवस्था है। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण कई बच्चों का इलाज जमीन पर गद्दे बिछाकर किया जा रहा है। कुछ बच्चों को खिड़की से सलाइन की बोतलें लटकाकर उपचार दिया जा रहा है।

    बीमारी के साथ इन गांवों में बुनियादी सुविधाओं का संकट भी सामने आया है। कई बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र आधार और समग्र आईडी तक नहीं बनी थी। अब प्रशासन ने स्वास्थ्य कैंप के साथ दस्तावेज बनाने की व्यवस्था भी शुरू की है। ग्रामीण महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान पोषण आहार नहीं मिलने और बच्चों के टीकाकरण में कमी की शिकायत की है। बोंदारी गांव में आज भी कुछ परिवार नाले का पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के मुताबिक घरों तक पर्याप्त साफ पानी नहीं पहुंचता।

    मृत बच्चों के परिजनों ने भी स्वास्थ्य सुविधाओं और पोषण व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। एक पिता ने बताया कि उनके पांच साल के बेटे की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सुधार नहीं होने पर गोंदिया के निजी अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। एक अन्य बच्चे को 10 सितंबर को अस्पताल से स्वस्थ बताकर डिस्चार्ज किया गया लेकिन घर लौटने के बाद उसे फिर तेज बुखार आने लगा।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 37 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और करीब साढ़े चार हजार लोगों का उपचार किया गया है। 56 स्वास्थ्य टीमें करीब 200 कर्मचारियों और 40 डॉक्टरों के साथ काम कर रही हैं। 490 बच्चों को उपचार के बाद घर भेजा जा चुका है जबकि 57 बच्चे अभी भर्ती बताए गए हैं।

    जांच में 101 मीजल्स सैंपल में 32 पॉजिटिव मिले हैं। मलेरिया के लिए भेजे गए 64 सैंपल में 50 पॉजिटिव पाए गए। डेंगू के 28 सैंपल में दो और चिकनगुनिया का एक सैंपल पॉजिटिव मिला। पानी के 14 सैंपल में पांच के परिणाम पॉजिटिव आए और अधिकारियों के मुताबिक नाले के पानी में एडिनोवायरस मिला है। प्रशासन का कहना है कि मौतों को किसी एक बीमारी से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। मलेरिया उल्टी-दस्त और कुपोषण जैसे कई कारक भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

    फिलहाल प्रभावित मुख्य क्षेत्र में मीजल्स टीकाकरण रोककर आसपास के क्षेत्रों में अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति सामान्य होने पर प्रभावित क्षेत्र में भी टीकाकरण शुरू किया जाएगा। दूसरी ओर ग्रामीणों की शिकायतें यह सवाल जरूर खड़ा कर रही हैं कि बीमारी के साथ स्वास्थ्य पोषण पानी और टीकाकरण जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी ने हालात को कितना प्रभावित किया है।

  • शराब टेंडर में मिलीभगत की जांच जारी रख सकेगा CCI: हाईकोर्ट ने डिस्टिलरीज की याचिकाएं खारिज कर अंतरिम रोक हटाई

    शराब टेंडर में मिलीभगत की जांच जारी रख सकेगा CCI: हाईकोर्ट ने डिस्टिलरीज की याचिकाएं खारिज कर अंतरिम रोक हटाई


    भोपाल। मध्य प्रदेश में देशी शराब की थोक सप्लाई के टेंडरों में डिस्टिलरीज के बीच कथित मिलीभगत और टेंडर फिक्सिंग से जुड़े मामले में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी CCI की जांच अब आगे जारी रह सकेगी। जबलपुर हाईकोर्ट ने एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड बेवरेजेस लिमिटेड समेत अन्य डिस्टिलरीज की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही CCI की जांच पर लगी अंतरिम रोक भी हटा दी गई है। हालांकि कोर्ट के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि कंपनियों को टेंडर में मिलीभगत का दोषी घोषित कर दिया गया है। फिलहाल अदालत ने केवल CCI के जांच करने के अधिकार को बरकरार रखा है।

    मामला वर्ष 2012-13 से 2016-17 के बीच हुए देशी शराब के सरकारी टेंडरों से जुड़ा है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की वर्ष 2016-17 की ऑडिट रिपोर्ट में अलग-अलग डिस्टिलरीज की बोलियों के बीच बेहद कम अंतर होने पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद CCI ने वर्ष 2020 में मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान आबकारी विभाग के अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए और संबंधित डिस्टिलरीज के परिसरों की तलाशी भी ली गई।

    जांच में एमपी डिस्टिलर्स एसोसिएशन नाम के WhatsApp ग्रुप से जुड़े रिकॉर्ड ईमेल और अन्य डिजिटल सामग्री मिलने की बात सामने आई। महानिदेशक स्तर पर की गई जांच के बाद 1200 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट CCI को सौंपी गई। इसके बाद एसोसिएटेड अल्कोहल्स ग्रेट गैलियन ओएसिस डिस्टिलरीज समेत कुछ कंपनियों ने CCI की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

    कंपनियों की ओर से दलील दी गई कि शराब का पूरा कारोबार राज्य सरकार और आबकारी विभाग के नियंत्रण में है। लाइसेंस उत्पादन आपूर्ति कीमत और कोटा जैसी व्यवस्थाएं सरकार निर्धारित करती है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा कानून के तहत CCI को इस मामले की जांच करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। आबकारी विभाग की ओर से भी इसी तरह का पक्ष रखा गया और बताया गया कि डिस्टिलरीज का मुनाफा भी निर्धारित सीमा में रहता है।

    हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि आबकारी कानून के तहत शराब कारोबार पर सरकारी नियंत्रण होने से CCI के अधिकार समाप्त नहीं हो जाते। आबकारी विभाग की भूमिका नियामकीय व्यवस्था तक है जबकि कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा विरोधी गतिविधियों की जांच का सवाल अलग है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि CAG की रिपोर्ट को अंतिम सबूत नहीं माना गया है। रिपोर्ट केवल जांच शुरू करने का आधार बनी और इसके बाद CCI के महानिदेशक ने स्वतंत्र रूप से दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच की।

    कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि कंपनियों ने CCI के शुरुआती आदेश को उसी समय चुनौती नहीं दी थी और जांच प्रक्रिया में सहयोग करती रहीं। महानिदेशक की रिपोर्ट सामने आने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया गया। अब CCI जांच रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजी व डिजिटल सामग्री के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा। संबंधित कंपनियों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी मिलेगा।

    मामले में अंतिम निर्णय आने के बाद यदि कोई पक्ष CCI के आदेश से असहमत होता है तो उसके पास NCLAT में अपील करने का कानूनी विकल्प रहेगा। इस तरह हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश के देशी शराब टेंडरों में कथित मिलीभगत से जुड़े मामले की जांच का रास्ता साफ हो गया है।

  • रात में चोरों ने बनाया निर्माणाधीन मकान को निशाना: मोटर-केबल समेत 2 क्विंटल सरिया ले गए

    रात में चोरों ने बनाया निर्माणाधीन मकान को निशाना: मोटर-केबल समेत 2 क्विंटल सरिया ले गए


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के कोलारस में निर्माणाधीन मकान को चोरों ने निशाना बनाते हुए मोटर केबल और भारी मात्रा में लोहे का सरिया चोरी कर लिया। घटना लोधी मोहल्ला जगतपुर की है जहां चोर मुख्य दरवाजे के पास लगी ईंटों को तोड़कर मकान के अंदर दाखिल हुए और वहां रखा निर्माण सामग्री से जुड़ा सामान लेकर फरार हो गए। चोरी की घटना 14 से 16 सितंबर के बीच की बताई जा रही है। मकान मालिक ने मामले की शिकायत 17 सितंबर को कोलारस थाने में दर्ज कराई है।

    जानकारी के अनुसार ग्राम राछी निवासी इंदरसेन धाकड़ कोलारस के लोधी मोहल्ला जगतपुर में अपना मकान बनवा रहे हैं। मकान का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है। इसी का फायदा उठाकर चोरों ने निर्माणाधीन भवन को निशाना बनाया। बताया गया है कि चोर मकान के मुख्य दरवाजे के पास लगी कुछ ईंटों को तोड़कर अंदर घुसे। इसके बाद उन्होंने वहां रखा कीमती सामान समेट लिया और बिना किसी को भनक लगे मौके से निकल गए।

    मकान मालिक के मुताबिक चोर बोरवेल में लगी मोटर के साथ एक टिल्लू मोटर भी निकालकर ले गए। इसके अलावा करीब 300 फीट लंबी केबल भी चोरी कर ली गई। निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाला लगभग दो क्विंटल लोहे का सरिया भी चोरों ने नहीं छोड़ा। चोरी हुए सामान का पता उस समय चला जब मकान मालिक निर्माणाधीन भवन पर पहुंचे और सामान गायब मिला।

    मकान में सामान अस्त व्यस्त मिलने और प्रवेश के स्थान पर ईंटें टूटी देखकर उन्हें चोरी की आशंका हुई। इसके बाद इंदरसेन धाकड़ ने आसपास रहने वाले लोगों से जानकारी लेने की कोशिश की। उन्होंने स्थानीय लोगों से यह पता लगाने का प्रयास किया कि 14 से 16 सितंबर के बीच किसी संदिग्ध व्यक्ति या वाहन को इलाके में देखा गया था या नहीं। हालांकि आसपास के लोगों से चोरों के संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।

    इसके बाद मकान मालिक ने मामले की सूचना पुलिस को दी और 17 सितंबर को कोलारस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में अज्ञात चोरों के खिलाफ कार्रवाई करने और चोरी गया सामान बरामद कराने की मांग की गई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस अब आसपास के क्षेत्र में पूछताछ करने के साथ ही चोरी की घटना से जुड़े संभावित सुराग जुटा रही है। निर्माणाधीन मकान में आमतौर पर सुरक्षा व्यवस्था कम होने के कारण वहां रखा सरिया केबल मोटर और अन्य निर्माण सामग्री चोरों के निशाने पर रहती है। इस घटना में भी चोरों ने ऐसी ही सामग्री को चुना जिसे आसानी से निकालकर ले जाया जा सकता था और जिसकी कीमत भी अच्छी होती है।

    मकान मालिक की शिकायत के बाद अब पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि चोरी में कितने लोग शामिल थे और चोरी का सामान किस वाहन से ले जाया गया। आसपास के इलाकों में पूछताछ और उपलब्ध सुरागों के आधार पर पुलिस चोरों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

  • हाईवे पर गौवंश बना जानलेवा खतरा बाइक सवार युवक की मौत उसी हादसे में बैल ने भी तोड़ा दम

    हाईवे पर गौवंश बना जानलेवा खतरा बाइक सवार युवक की मौत उसी हादसे में बैल ने भी तोड़ा दम


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में हाईवे पर आवारा गौवंश की मौजूदगी लगातार हादसों की वजह बन रही है। बुधवार रात सुभाषपुरा थाना क्षेत्र में मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। यहां सड़क पर बैठे बैल से बाइक की जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार 38 वर्षीय विकास भार्गव गंभीर रूप से घायल हो गए और उपचार के लिए अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे में बैल की भी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद हाईवे पर कुछ देर के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    जानकारी के मुताबिक खेड़ापति कॉलोनी शिवपुरी निवासी विकास भार्गव बुधवार को किसी काम से बाइक लेकर ग्वालियर गए थे। रात करीब 8 बजे वह ग्वालियर से शिवपुरी वापस लौट रहे थे। इसी दौरान मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास सड़क पर एक बैल बैठा हुआ था। अंधेरा होने के कारण बाइक सवार को सड़क पर बैठे बैल का अंदाजा नहीं हो सका और बाइक सीधे उससे जा टकराई। प्रत्यक्ष तौर पर टक्कर बेहद तेज बताई जा रही है।

    हादसे के बाद विकास सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। टक्कर की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। हाईवे एंबुलेंस की मदद से घायल विकास भार्गव को मेडिकल कॉलेज शिवपुरी ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जांच की लेकिन तब तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने विकास को मृत घोषित कर दिया। गुरुवार को पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार में भी मातम पसर गया।

    यह हादसा ऐसे समय हुआ जब इसी दिन शिवपुरी जिले में गौवंश से जुड़ा एक और गंभीर सड़क हादसा सामने आया था। सतनबाड़ा थाना क्षेत्र में एनएच-46 पर सुबह एक कार सड़क पर मौजूद गौवंश से टकरा गई थी। बताया गया कि कार में उत्तर प्रदेश के दो लोग सवार थे। हादसे के दौरान सड़क पर मौजूद आठ गौवंश में से छह की मौत हो गई जबकि दो घायल हो गए। टक्कर के बाद कार में सवार दोनों लोग वाहन के भीतर फंस गए थे जिन्हें पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाला।

    बुधवार सुबह हुए इस हादसे के कुछ घंटे बाद रात में सुभाषपुरा इलाके में बैल से बाइक की टक्कर ने एक और जान ले ली। एक ही दिन में सामने आई इन घटनाओं ने हाईवे पर आवारा गौवंश की मौजूदगी और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर रात के समय हाईवे पर बैठे या अचानक सड़क पर आ जाने वाले गौवंश वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।

    प्रशासन की ओर से सड़कों पर बैठे गौवंश को हटाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद हाईवे और प्रमुख सड़कों पर बड़ी संख्या में गौवंश नजर आने की बात सामने आ रही है। लगातार हो रहे हादसों में कई गौवंश की भी मौत हो चुकी है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार ऐसी घटनाओं में अब तक करीब आधा सैकड़ा गौवंश की मौत होने की बात कही जा रही है। विकास भार्गव की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सड़क पर बैठे गौवंश को हटाने के लिए जारी आदेशों का प्रभावी तरीके से पालन कब होगा।

  • 50 लाख संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री का महाअभियान किसे मिलेगा लाभ और किन मामलों में अटक सकती है रजिस्ट्री

    50 लाख संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री का महाअभियान किसे मिलेगा लाभ और किन मामलों में अटक सकती है रजिस्ट्री


    भोपाल। मध्य प्रदेश में गांवों में वर्षों से अपने घर और आबादी की जमीन पर रह रहे लाखों परिवारों के लिए 17 सितंबर से एक बड़ा अभियान शुरू हो रहा है। स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश में 50 लाख से ज्यादा चयनित संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराई जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि जिन लोगों के नाम स्वामित्व योजना के रिकॉर्ड में पहले से दर्ज हैं उन्हें अब संपत्ति का पंजीकृत कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराया जाए। सरकार के अनुसार इस प्रक्रिया में हितग्राहियों से स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    इस योजना को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि स्वामित्व योजना में प्रॉपर्टी कार्ड और रजिस्ट्री एक जैसी चीज नहीं हैं। ग्रामीण आबादी की जमीन का सर्वे कर तैयार किए गए अधिकार अभिलेख में संपत्ति पर संबंधित व्यक्ति के अधिकार का रिकॉर्ड दर्ज होता है। अब सरकार इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए चयनित संपत्तियों का पंजीयन कराने जा रही है। यानी पहले से तैयार रिकॉर्ड को पंजीकृत दस्तावेज का रूप दिया जाएगा।

    सरकार ने इसके लिए अलग से बड़े पैमाने पर प्रशासनिक व्यवस्था की है। पंचायत स्तर पर शिविर लगाए जाने की योजना है ताकि लोगों को रजिस्ट्री कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। पंजीयन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कुछ अधिकारियों को उप-पंजीयक की शक्तियां भी दी गई हैं। सरकार का लक्ष्य इस अभियान के दौरान बड़ी संख्या में संपत्तियों का पंजीयन कम समय में पूरा करना है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अभियान एक महीने तक चलाया जाएगा और पंजीयन के बाद दस्तावेज डिजिटल माध्यम से भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

    इसका फायदा हर व्यक्ति को अपने आप नहीं मिलेगा। अभियान में वही संपत्तियां शामिल हैं जिनके अधिकार अभिलेख स्वामित्व योजना के तहत पहले से तैयार और मंजूर हैं। इसका मतलब यह है कि अगर किसी व्यक्ति का नाम अभी स्वामित्व योजना के तैयार रिकॉर्ड में शामिल नहीं है तो केवल इस अभियान के दौरान आवेदन करके तुरंत मुफ्त रजिस्ट्री कराने की सुविधा नहीं होगी। पहले उसका रिकॉर्ड योजना की प्रक्रिया के तहत तैयार होना जरूरी होगा।

    रजिस्ट्री होने के बाद संपत्ति के मालिक के पास उसका पंजीकृत दस्तावेज होगा। इससे संपत्ति से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड को और मजबूत आधार मिल सकता है। सरकार का कहना है कि पंजीकृत दस्तावेज के आधार पर पात्रता और बैंक की अन्य शर्तें पूरी होने पर संपत्ति के बदले ऋण लेने में भी मदद मिल सकती है। इसके अलावा संपत्ति को कारोबार या स्वरोजगार के लिए इस्तेमाल करने के रास्ते भी आसान हो सकते हैं।

    हालांकि जमीन विवादित होने पर स्थिति अलग हो सकती है। सिर्फ रजिस्ट्री हो जाने से किसी पुराने मालिकाना विवाद का अपने आप अंत नहीं माना जा सकता। यदि किसी संपत्ति पर किसी दूसरे व्यक्ति का दावा है या मामला राजस्व अथवा सिविल कोर्ट में चल रहा है तो उसका कानूनी निपटारा अलग प्रक्रिया से ही होगा। इसलिए रजिस्ट्री को हर तरह के भूमि विवाद का अंतिम समाधान मानना सही नहीं होगा।

    इस अभियान के बीच पटवारियों की आपत्ति भी सामने आई है। पटवारी संघों की चिंता अतिरिक्त जिम्मेदारी और रिकॉर्ड में भविष्य में सामने आने वाली किसी गलती की जवाबदेही को लेकर बताई गई है। उनका सवाल है कि यदि खसरे नक्शे या सर्वे रिकॉर्ड में कोई त्रुटि निकलती है और उसके आधार पर विवाद खड़ा होता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी। कुछ पटवारी संगठनों ने इस तरह की जिम्मेदारी के साथ अधिकार भी स्पष्ट करने की मांग की है।

    यह मुद्दा सरकार के स्तर पर भी उठा है। रिपोर्टों के मुताबिक मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को पटवारियों की आशंकाएं दूर करने के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से यह कहा गया है कि रजिस्ट्री का काम शासन स्तर से कराया जा रहा है और प्रक्रिया को लेकर अनावश्यक चिंता की जरूरत नहीं है।

    यानी स्वामित्व योजना के तहत शुरू हो रहा यह अभियान उन ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी संपत्ति पहले से योजना के रिकॉर्ड में दर्ज है। लेकिन किसी नए दावे या पुराने विवाद को केवल मुफ्त रजिस्ट्री के जरिए खत्म नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित राजस्व या न्यायिक प्रक्रिया ही लागू होगी। अब अभियान शुरू होने के साथ यह देखना अहम होगा कि चयनित 50 लाख से ज्यादा संपत्तियों का पंजीयन तय समय में किस तरह पूरा होता है।

  • उदय प्रताप सिंह के खिलाफ तिरंगा अपमान का मामला खारिज कोर्ट ने कहा मंत्री के निर्देश का प्रमाण नहीं

    उदय प्रताप सिंह के खिलाफ तिरंगा अपमान का मामला खारिज कोर्ट ने कहा मंत्री के निर्देश का प्रमाण नहीं


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के परिवहन और स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से जुड़े राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने परिवाद खारिज कर दिया है। जबलपुर की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट के सामने यह प्रमाण नहीं आया कि जिस वाहन पर राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया था वह मंत्री का वाहन था या तिरंगा मंत्री के निर्देश पर वहां लगाया गया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इसी आधार पर अदालत ने मामले में आगे कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया।

    यह मामला 11 अगस्त 2024 को नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में निकाली गई तिरंगा यात्रा से जुड़ा है। गोटेगांव निवासी कौशल सिलावट ने इस संबंध में अदालत में परिवाद दायर किया था। परिवादी की ओर से आरोप लगाया गया था कि तिरंगा यात्रा के दौरान मंत्री एक खुली जीप में सवार थे और वाहन के बोनट पर राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया था। आरोप था कि झंडा इस तरह लगा हुआ था कि वह मंत्री के पैरों को स्पर्श कर रहा था।

    परिवादी ने इस घटना को राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के प्रावधानों से जोड़ते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। मामले में यह तर्क भी रखा गया था कि वाहन के बोनट या किसी अन्य हिस्से पर राष्ट्रीय ध्वज को इस तरह रखना जिससे उसकी गरिमा प्रभावित हो कानून के प्रावधानों के विपरीत है। मार्च 2026 में इसी परिवाद पर एमपी-एमएलए कोर्ट ने मंत्री को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। उस समय अदालत में यह सवाल भी उठा था कि मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश क्यों न दिया जाए।

    परिवादी पक्ष ने अदालत में घटना से संबंधित तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों को साक्ष्य के तौर पर पेश किया था। उनका कहना था कि घटना की शिकायत पहले गाडरवारा थाने में की गई लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को भी लिखित शिकायतें भेजे जाने का दावा किया गया था। परिवादी ने इसी आधार पर अदालत का रुख किया था। इन दावों का उल्लेख पहले की सुनवाई से जुड़ी रिपोर्टों में भी किया गया था।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की। रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने पाया कि पेश की गई तस्वीर में वाहन का नंबर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। साथ ही यह स्थापित करने वाला पर्याप्त प्रमाण भी सामने नहीं आया कि जिस वाहन पर तिरंगा लगाया गया था वह सरकारी वाहन या मंत्री का निजी वाहन था। इसके अलावा यह भी प्रमाणित नहीं हुआ कि राष्ट्रीय ध्वज को मंत्री के निर्देश पर वाहन पर लगाया गया था।

    इन्हीं बिंदुओं को देखते हुए अदालत ने परिवाद को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया। इसका अर्थ यह है कि इस परिवाद के आधार पर मंत्री के खिलाफ आगे की आपराधिक कार्रवाई का रास्ता इस स्तर पर बंद हो गया है।

    इस मामले की शुरुआत में अदालत की ओर से जारी नोटिस और अब परिवाद खारिज किए जाने के बीच कई महीनों तक सुनवाई चली। मार्च में सामने आई रिपोर्टों में मंत्री से जवाब मांगे जाने की जानकारी थी जबकि अब उपलब्ध रिपोर्ट में अदालत द्वारा परिवाद खारिज किए जाने की बात सामने आई है।

    फिलहाल अदालत के फैसले के बाद राव उदय प्रताप सिंह को इस परिवाद में राहत मिली है। मामले में लगाए गए आरोपों और परिवादी की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों पर अदालत ने पर्याप्त आधार नहीं पाया और इसी वजह से आगे की कार्रवाई के लिए परिवाद को स्वीकार नहीं किया।

  • 100 से ज्यादा ग्रामीण रोज बना रहे अपनी सड़क 40 साल पहले उजड़े गांव में अब भी नहीं पहुंची पक्की सड़क

    100 से ज्यादा ग्रामीण रोज बना रहे अपनी सड़क 40 साल पहले उजड़े गांव में अब भी नहीं पहुंची पक्की सड़क


    जबलपुर । ज्जबलपुर जिले के दुर्गानगर गांव में सड़क की समस्या ने ग्रामीणों को इस कदर परेशान कर दिया कि अब उन्होंने सरकारी मदद का इंतजार छोड़कर खुद सड़क सुधारने का फैसला किया है। करीब 40 साल पहले बरगी बांध परियोजना के लिए अपना घर बार छोड़कर यहां बसे ग्रामीण आज अपने गांव की करीब 2 किलोमीटर सड़क बनाने के लिए गैंती फावड़ा और तसला उठा रहे हैं। गांव के 100 से ज्यादा महिला पुरुष बच्चे और दिव्यांग रोज सुबह श्रमदान कर सड़क को बारिश में चलने लायक बनाने में जुटे हैं। ग्रामीण अपने स्तर पर मुरम और पत्थर की व्यवस्था कर रास्ते में डाल रहे हैं।

    जबलपुर मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर शहपुरा जनपद के दुर्गानगर में बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव की मुख्य सड़क बारिश शुरू होते ही कीचड़ में बदल जाती है। कई बार रास्ता इतना खराब हो जाता है कि गांव का संपर्क आसपास के इलाकों से प्रभावित हो जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर स्कूल जाने वाले बच्चों मरीजों और बुजुर्गों पर पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में जरूरी काम के लिए गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

    सड़क की बदहाली का गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार खराब रास्ते के कारण कई बार एंबुलेंस और 108 वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। प्रसव के नजदीक पहुंचने पर गर्भवती महिलाओं को दूसरे गांव में जाकर रहने की मजबूरी होती है ताकि जरूरत पड़ने पर समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या केवल आने जाने की परेशानी नहीं बल्कि उनके लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है।

    दुर्गानगर के ग्रामीण बताते हैं कि वे लंबे समय से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार आवेदन देने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिला पंचायत की बैठकों में भी सड़क का मुद्दा कई बार उठाया गया। जिला पंचायत सीईओ को लिखित प्रस्ताव देने की बात भी ग्रामीणों ने कही है। इसके बावजूद सड़क का काम शुरू नहीं होने पर लोगों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने खुद रास्ता सुधारने का निर्णय लिया।

    ग्रामीण भीमा बाई के मुताबिक सड़क की जरूरत इतनी ज्यादा है कि अब गांव के लोगों को इसे खुद ही बनाने के लिए आगे आना पड़ा। गांव के कई लोग मजदूरी करके अपना परिवार चलाते हैं। इसके बावजूद वे रोज सुबह मजदूरी पर जाने से पहले करीब दो से तीन घंटे सड़क सुधारने में लगा रहे हैं। पहले सड़क पर काम किया जाता है और इसके बाद लोग रोजी रोटी कमाने के लिए निकलते हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में स्थानीय विधायक से लेकर जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर तक सड़क निर्माण के लिए आवेदन दिए गए। जनसुनवाई में भी समस्या रखी गई लेकिन हर बार निरीक्षण और जल्द कार्रवाई का आश्वासन ही मिला। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है क्योंकि खराब रास्ते के कारण उनका स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है।

    मामला सामने आने के बाद बरगी विधायक नीरज सिंह ने ग्रामीणों की परेशानी को गंभीर बताया है। उन्होंने अधिकारियों से चर्चा कर सड़क निर्माण के लिए बजट का प्रावधान कराने की बात कही है। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने भी मामले की जानकारी होने की बात कही और ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए जल्द सड़क बनाने का प्रयास करने की बात कही है।

    फिलहाल दुर्गानगर के ग्रामीण अपने श्रम और संसाधनों से रास्ता सुधार रहे हैं। जिन लोगों ने चार दशक पहले विकास परियोजना के लिए अपना घर गांव और जमीन छोड़ी थी वे आज भी बुनियादी सड़क सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों की मेहनत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि जरूरी सुविधाओं के लिए आखिर उन्हें कितने वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा।