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  • घर में 10 बच्चे फिर भी छह को खोज रहा था पिता पत्नी की तलाश के बीच ट्रेन से कटकर मौत

    घर में 10 बच्चे फिर भी छह को खोज रहा था पिता पत्नी की तलाश के बीच ट्रेन से कटकर मौत


    देवास । देवास में पत्नी और बच्चों की तलाश कर रहे 45 वर्षीय व्यक्ति की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। घटना मंगलवार रात विजयनगर क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर हुई। मृतक की पहचान मोती बंगला निवासी सरदार पिता पिट्टू डामोर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि सरदार पिछले करीब एक महीने से अपनी पत्नी और छह बच्चों की तलाश में इधर उधर भटक रहा था। इसी दौरान मंगलवार रात रेलवे ट्रैक पर हुए हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

    जानकारी के मुताबिक सरदार और उसकी पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। करीब एक महीने पहले भी दोनों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। विवाद के बाद उसकी पत्नी अपने छह बच्चों को लेकर घर से चली गई थी। पत्नी के घर से जाने के बाद सरदार लगातार उन्हें तलाश कर रहा था। उसने पत्नी के मायके में भी जानकारी ली और वहां जाकर बच्चों के बारे में पता करने की कोशिश की लेकिन उसे कोई सुराग नहीं मिला।

    सरदार के कुल 10 बच्चे बताए गए हैं। इनमें से चार बच्चे फिलहाल उसके साथ रह रहे थे जबकि छह बच्चे उसकी पत्नी के साथ घर से चले गए थे। पत्नी और बच्चों के अचानक चले जाने के बाद सरदार उनकी तलाश में लगातार परेशान था। परिवार और आसपास के लोगों से भी उसने जानकारी जुटाई लेकिन पत्नी और बच्चों का पता नहीं चल सका।

    मंगलवार रात करीब 9:30 बजे विजयनगर क्षेत्र में सरदार रेलवे ट्रैक पर था। इसी दौरान वह ट्रेन की चपेट में आ गया। हादसा इतना गंभीर था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया।

    पुलिस ने घटना की जानकारी मृतक के परिवार और मोहल्ले के लोगों को दी। बुधवार सुबह शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे से जुड़े परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि सरदार रेलवे ट्रैक पर किस वजह से पहुंचा था। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पत्नी और छह बच्चों के घर से चले जाने के बाद करीब एक महीने तक उनकी तलाश करने की बात सामने आई है। इसी दौरान उसकी ट्रेन से कटकर मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में मातम का माहौल है और अब पुलिस घटना की परिस्थितियों को समझने के लिए जांच आगे बढ़ा रही है।

  • मेडिकल यूनिवर्सिटी के 250 करोड़ के फंड पर भी विवाद उज्जैन को 70 फीसदी राशि देने पर आपत्ति

    मेडिकल यूनिवर्सिटी के 250 करोड़ के फंड पर भी विवाद उज्जैन को 70 फीसदी राशि देने पर आपत्ति


    जबलपुर। जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के पुनर्गठन का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। विश्वविद्यालय को दो हिस्सों में बांटने की प्रक्रिया को लेकर जबलपुर निवासी डॉ. पीजी नाजपांडे सहित अन्य लोगों ने याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदेश की इकलौती मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के पुनर्गठन में जबलपुर के साथ समान व्यवहार नहीं किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा है।

    याचिका में मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के पुनर्गठन से जुड़े राजपत्र में प्रकाशित संशोधन अधिनियम के साथ मध्य प्रदेश धन्वंतरि विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 की वैधानिकता को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नए ढांचे के तहत जबलपुर विश्वविद्यालय के हिस्से में चार संभाग रखे गए हैं जबकि उज्जैन में गठित धन्वंतरि विश्वविद्यालय को छह संभाग दिए गए हैं। याचिका में इसी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए हैं और कहा गया है कि पुनर्गठन की प्रक्रिया समानता के संवैधानिक सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने अदालत में पुनर्गठन की प्रक्रिया को लेकर कई आपत्तियां रखीं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय के विभाजन से पहले किसी विशेषज्ञ समिति से विस्तृत अध्ययन नहीं कराया गया। इसके अलावा प्रक्रिया की व्यवहार्यता को लेकर भी कोई रिपोर्ट तैयार नहीं कराई गई। याचिका में दावा किया गया है कि इतने बड़े संस्थागत बदलाव से पहले प्रशासनिक और शैक्षणिक प्रभाव का विशेषज्ञ स्तर पर आकलन किया जाना जरूरी था। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं ने पुनर्गठन की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

    मामले में विश्वविद्यालय की आर्थिक संपत्तियों का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बन गया है। याचिका के अनुसार मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के पास करीब 250 करोड़ रुपए का रिजर्व फंड है। याचिकाकर्ताओं ने इस राशि के बंटवारे को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है। आरोप है कि रिजर्व फंड की करीब 70 प्रतिशत राशि उज्जैन में गठित धन्वंतरि विश्वविद्यालय को दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। याचिका में इस राशि के हस्तांतरण पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है।

    याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय का पुनर्गठन केवल प्रशासनिक सीमाओं का बदलाव नहीं है बल्कि इसका सीधा असर मेडिकल शिक्षा से जुड़े संस्थानों और विद्यार्थियों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में संभागों के बंटवारे और आर्थिक संसाधनों के वितरण को लेकर स्पष्ट और समान नीति जरूरी है। हाईकोर्ट ने फिलहाल सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग से जवाब मांगा है। अब मामले की अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि पुनर्गठन की प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर उसका क्या रुख है।

  • छतरपुर गोलीकांड में बड़ा अपडेट शालिगराम गर्ग को मिली जमानत 50 हजार के मुचलके पर रिहाई के निर्देश

    छतरपुर गोलीकांड में बड़ा अपडेट शालिगराम गर्ग को मिली जमानत 50 हजार के मुचलके पर रिहाई के निर्देश

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर में हुए चर्चित गोलीकांड के आरोपी शालिगराम गर्ग उर्फ छोटे सरकार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिली है। बागेश्वर धाम के संत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिगराम की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने उन्हें 50 हजार रुपए के मुचलके पर रिहा करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की सिंगल बेंच ने पहले से सुरक्षित रखा गया फैसला सुनाया। अदालत के आदेश के बाद अब शालिगराम की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

    शालिगराम गर्ग के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर छतरपुर के कोड़ा गांव निवासी मोतीलाल कुशवाहा पर जानलेवा हमला किया था। शिकायत के मुताबिक घटना के दौरान गोली भी चलाई गई थी और एक गोली मोतीलाल के सीने में जाकर फंस गई थी। घायल मोतीलाल का जिला अस्पताल में ऑपरेशन किया गया था जिसके बाद गोली निकाल दी गई थी। इस मामले में रघुराजनगर थाना पुलिस ने जांच के बाद शालिगराम को 15 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था।

    जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में शालिगराम की ओर से अधिवक्ता रोहित रघुवंशी और अमित दवे ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने अदालत में आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि शालिगराम को राजनीतिक दबाव और पुरानी रंजिश के चलते मामले में फंसाया गया है। वकीलों ने यह भी दलील दी कि आरोपी को बदनाम करने के उद्देश्य से उसके खिलाफ मामला बनाया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को कोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए 50 हजार रुपए के मुचलके पर रिहाई के निर्देश दिए।

    पूरा मामला जुलाई 2026 में सामने आया था। मोतीलाल कुशवाहा ने आरोप लगाया था कि शालिगराम गर्ग अपने साथियों के साथ उनके घर पहुंचे थे। शिकायत के अनुसार उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें घर से बाहर खींचकर लाठी डंडों से पीटा गया। इसके बाद गोली चलाए जाने का आरोप लगाया गया। मोतीलाल के सीने में गोली लगने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच शुरू की थी।

    मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आने की बात कही गई थी। पुलिस जांच में CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों को भी शामिल किया गया। एक तस्वीर में शालिगराम के हाथ में हथियार दिखाई देने का दावा किया गया था। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और बाद में शालिगराम को गिरफ्तार कर लिया।

    इस मामले में जमीन विवाद की बात भी सामने आई थी। घायल मोतीलाल ने आरोप लगाया था कि शालिगराम उनकी जमीन पर कब्जा करना चाहते थे। हालांकि यह आरोप मामले की शिकायत और बयान का हिस्सा हैं और अदालत में मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान इन पर निर्णय होना बाकी है।

    मामले पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि शालिगराम गर्ग से उनका कोई संबंध नहीं है और वह इस बात को पहले भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने घटना को लेकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की बात कही थी। फिलहाल हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शालिगराम की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है जबकि मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

  • शिवपुरी में सिंध नदी का गहरा पानी बना काल 14 साल के सौरभ की तलाश 18 घंटे बाद हुई खत्म

    शिवपुरी में सिंध नदी का गहरा पानी बना काल 14 साल के सौरभ की तलाश 18 घंटे बाद हुई खत्म


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के इंदार थाना क्षेत्र के बिजरौनी गांव के पास सिंध नदी में मंगलवार दोपहर डूबे 14 साल के सौरभ कुशवाह का शव बुधवार सुबह बरामद कर लिया गया। बच्चे की तलाश के लिए करीब 18 घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाया गया। बुधवार सुबह करीब 8 बजे घटनास्थल से लगभग आधा किलोमीटर दूर नदी में शव उतराता हुआ दिखाई दिया। शव मिलने की खबर जैसे ही परिजनों तक पहुंची परिवार में चीख पुकार मच गई। परिजन बदहवास होकर मौके पर पहुंचे और बच्चे का शव देखते ही रोने लगे।

    जानकारी के मुताबिक मंगलवार को ऋषिपंचमी के अवसर पर बिजरौनी गांव की कुछ महिलाएं सिंध नदी के किनारे पूजा और स्नान करने पहुंची थीं। उनके साथ परिवार के बच्चे भी मौजूद थे। सौरभ भी अपनी मां के साथ नदी पर गया था। महिलाएं नदी किनारे पूजा की तैयारी में जुटी थीं इसी दौरान सौरभ नहाने के लिए नदी के पानी में उतर गया। देखते ही देखते वह गहरे पानी की तरफ चला गया और डूब गया। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन पानी की गहराई अधिक होने के कारण तत्काल उसका पता नहीं चल सका।

    घटना की सूचना मिलते ही इंदार थाना पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद एसडीईआरएफ की टीम को भी बुलाया गया। टीम ने मंगलवार दोपहर से नदी में सौरभ की तलाश शुरू कर दी। गोताखोरों और रेस्क्यू टीम ने नदी के आसपास काफी देर तक तलाश की लेकिन बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला। शाम होने के बाद अंधेरा बढ़ गया जिसके चलते रेस्क्यू अभियान रोकना पड़ा। इसके बाद बुधवार सुबह दोबारा तलाश शुरू करने का फैसला लिया गया।

    बुधवार सुबह करीब 4 बजे सौरभ के परिजन और गांव के लोग फिर नदी के किनारे पहुंच गए। ग्रामीणों ने भी अपने स्तर पर नदी में बच्चे की तलाश शुरू कर दी। कई घंटे की कोशिश के बाद सुबह करीब 8 बजे घटनास्थल से लगभग आधा किलोमीटर दूर नदी के पानी में सौरभ का शव दिखाई दिया। शव को बाहर निकाला गया और पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी।

    सौरभ की मौत के बाद ग्रामीणों में सिंध नदी में कथित अवैध रेत खनन को लेकर भी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी से रेत निकालने के लिए कई जगह गहरे गड्ढे बनाए गए हैं। बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाता है और वे सामान्य नदी के तल से अलग नजर नहीं आते। ऐसे में नदी में नहाने वाले लोगों को पानी की वास्तविक गहराई का अंदाजा नहीं हो पाता। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के गहरे गड्ढे हादसों का खतरा बढ़ा रहे हैं।

    पुलिस ने शव बरामद करने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। सौरभ की मौत से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहीं बिजरौनी गांव में भी शोक का माहौल है। ऋषिपंचमी के दिन मां के साथ पूजा के लिए नदी पर गया सौरभ वापस घर नहीं लौट सका। करीब 18 घंटे की तलाश के बाद उसका शव मिलने से परिवार की उम्मीदें भी टूट गईं।

  • सीधी में सांसद को चेतावनी खंडवा में कुत्ते को ज्ञापन इंदौर में राहुल गांधी पर विजयवर्गीय का चुटीला बयान

    सीधी में सांसद को चेतावनी खंडवा में कुत्ते को ज्ञापन इंदौर में राहुल गांधी पर विजयवर्गीय का चुटीला बयान


    सीधी । मध्यप्रदेश में मंगलवार को राजनीति और प्रशासन से जुड़ी कई घटनाएं चर्चा में रहीं। सीधी में सड़क की बदहाली को लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर लीला साहू ने भाजपा सांसद राजेश मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें सड़क निर्माण शुरू नहीं होने पर कड़ी चेतावनी दी। वहीं इंदौर में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी के प्रस्तावित छात्र कार्यक्रम को लेकर सवाल पूछे जाने पर ऐसा जवाब दिया जिस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोग हंस पड़े। दूसरी ओर खंडवा में कलेक्टर के किसानों से नहीं मिलने पर प्रदर्शनकारियों ने कुत्ते के गले में ज्ञापन बांधकर विरोध जताया। रतलाम में भी किसानों ने कलेक्ट्रेट में हनुमान चालीसा का पाठ किया।

    सीधी में सड़क की खराब हालत को लेकर आंदोलन कर रहीं लीला साहू ने भाजपा सांसद राजेश मिश्रा को सार्वजनिक तौर पर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि इसी साल सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ तो सांसद की सांसदी चली जाएगी। उन्होंने अपने बयान में महिला शक्ति और रावण के संदर्भ का उदाहरण देते हुए सांसद के साम्राज्य के खत्म होने की बात कही।

    लीला साहू के मुताबिक उनके गांव की सड़क लंबे समय से खराब है। सड़क पर कीचड़ जमा होने के कारण वाहनों की आवाजाही मुश्किल है और पैदल चलने में भी लोगों को परेशानी होती है। उनका कहना है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस के गांव तक पहुंचने में भी दिक्कत हो सकती है। सड़क निर्माण की मांग को लेकर उन्होंने धरना प्रदर्शन शुरू किया है।

    लीला साहू ने एक पुरानी घटना का भी जिक्र किया जिसमें उनके मुताबिक गर्भावस्था के दौरान सांसद की ओर से हेलिकॉप्टर से ले जाने की बात कही गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गांव की गर्भवती महिलाओं को वास्तव में परेशानी हो रही है तो उनकी मदद के लिए हेलिकॉप्टर क्यों नहीं आया।

    इधर इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल किया गया। कार्यक्रम में युवाओं की मौजूदगी बढ़ाने के लिए रैपर्स और सिंगर्स को बुलाए जाने की चर्चा के बीच विजयवर्गीय ने तंज करते हुए कहा कि जबरदस्ती बुला रहे हैं और राहुल गांधी इसके लिए पर्याप्त हैं। उनके इस बयान के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोगों के बीच हंसी का माहौल बन गया। यह बयान राजनीतिक तंज के तौर पर सामने आया।

    खंडवा में किसानों का विरोध प्रदर्शन अलग वजह से चर्चा में आ गया। किसान अपनी मांगों को लेकर रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उनका कहना था कि वे कलेक्टर को ज्ञापन देना चाहते थे लेकिन कलेक्टर के कार्यालय में मौजूद होने के बावजूद उनसे मिलने नहीं आए। इसके बाद किसानों ने विरोध के अनोखे तरीके के तौर पर एक कुत्ते के गले में ज्ञापन बांध दिया।

    भारतीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार कक्काजी ने भी इस दौरान प्रशासन पर नाराजगी जताई। उन्होंने कलेक्टर को लेकर कड़ा बयान दिया और कहा कि वे अधिकारियों की अकड़ निकालने का काम करेंगे। इसी तरह रतलाम में भी किसानों के कलेक्टर से नहीं मिलने पर नाराजगी सामने आई। किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में ही हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया।

    इन घटनाओं के बीच मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में एक IAS अधिकारी की ऊर्जा विभाग में वापसी को लेकर भी चर्चाएं चलती रहीं। खबर में दावा किया गया है कि अधिकारी अपनी वापसी के लिए प्रयास कर रहे हैं और दिल्ली स्तर पर भी संपर्क साधे जा रहे हैं। साथ ही उनके बिहार से जुड़े पारिवारिक संबंधों को लेकर भी चर्चा का उल्लेख किया गया है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं रखी गई है।

    इस तरह मंगलवार को मध्यप्रदेश में सड़क की बदहाली से लेकर किसानों के विरोध और नेताओं के राजनीतिक बयानों तक कई घटनाएं सुर्खियों में रहीं। सीधी में सड़क आंदोलन खंडवा में अनोखा ज्ञापन और इंदौर में राहुल गांधी को लेकर विजयवर्गीय का बयान खास तौर पर चर्चा में रहा।

  • देर रात तक घरों और पंडालों में पहुंचे गणपति जबलपुर से आई मीरानी के राजा की निकली भव्य यात्रा

    देर रात तक घरों और पंडालों में पहुंचे गणपति जबलपुर से आई मीरानी के राजा की निकली भव्य यात्रा


    सतना । सतना में सोमवार को गणेश चतुर्थी के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर शहर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। सुबह से ही घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान श्री गणेश की स्थापना की तैयारियां चलती रहीं। रविवार को गणेश प्रतिमाओं की खरीदारी के लिए बाजारों में दिनभर भीड़ रही। अलग अलग आकार और स्वरूप में तैयार गणेश प्रतिमाओं को श्रद्धालु अपने घरों प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक पंडालों तक लेकर पहुंचे। देर रात तक प्रतिमाओं को पहुंचाने का सिलसिला जारी रहा।

    सिंधी कैंप स्थित मीरानी कॉलोनी में गणेशोत्सव को लेकर इस बार भी विशेष उत्साह देखने को मिला। यहां स्थापित होने वाली प्रसिद्ध गणेश प्रतिमा मीरानी के राजा रविवार देर रात जबलपुर से सतना पहुंची। प्रतिमा के सतना पहुंचते ही श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई। भक्तों ने ढोल नगाड़ों की धुन पर जयकारे लगाए और गणपति की अगवानी की। इसके बाद प्रतिमा को जुलूस के रूप में मीरानी कॉलोनी तक ले जाया गया। रास्ते में भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। सोमवार को शुभ मुहूर्त में विधि विधान के साथ मीरानी के राजा की स्थापना की गई।

    गणेश चतुर्थी के पर्व को लेकर शहर के अलग अलग हिस्सों में कई सार्वजनिक पंडाल तैयार किए गए हैं। रविवार देर रात तक इन पंडालों में सजावट का काम चलता रहा। कई स्थानों पर आकर्षक झांकियां और विशेष सजावट की गई है। घरों में भी श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की स्थापना के लिए विशेष तैयारियां की हैं। गणपति स्थापना के साथ ही अगले दस दिनों तक शहर में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा और अलग अलग क्षेत्रों में गणपति बप्पा के जयकारों की गूंज सुनाई देगी।

    ज्योतिषाचार्य पं. प्रमोद मिश्रा के अनुसार इस बार गणेश चतुर्थी पर ब्रह्म योग और चित्रा नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं में ब्रह्म योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। ऐसे में इस संयोग में भगवान गणेश की स्थापना और पूजन को विशेष महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह करीब 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। गणपति स्थापना और पूजन के लिए दोपहर का समय विशेष शुभ माना गया है।

    गणेशोत्सव की शुरुआत के साथ ही सतना में धार्मिक उल्लास का माहौल बन गया है। बाजारों से लेकर कॉलोनियों और सार्वजनिक पंडालों तक हर जगह गणपति उत्सव की तैयारियां दिखाई दे रही हैं। श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ भगवान गणेश की पूजा अर्चना में जुटे हैं। अगले दस दिनों तक शहर में धार्मिक आयोजनों के साथ भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहने की उम्मीद है।

  • चित्रकूट में चाय दुकान पर अचानक भिड़े दो पक्ष पुरानी रंजिश में जमकर मारपीट और तोड़फोड़ CCTV में कैद हुई पूरी घटना

    चित्रकूट में चाय दुकान पर अचानक भिड़े दो पक्ष पुरानी रंजिश में जमकर मारपीट और तोड़फोड़ CCTV में कैद हुई पूरी घटना


    सतना । सतना जिले के चित्रकूट थाना क्षेत्र में रविवार देर शाम चाय की एक दुकान पर पुरानी रंजिश को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट के साथ दुकान में तोड़फोड़ शुरू हो गई। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है जिसमें कुछ युवक दुकान के बाहर आपस में मारपीट करते और सामान में तोड़फोड़ करते दिखाई दे रहे हैं। घटना के बाद इलाके में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।

    घटना चित्रकूट के स्फटिक शिला मोड़ पर स्थित मनोहर चाय दुकान की बताई जा रही है। रविवार शाम कुछ युवक बोलेरो और ओमनी वैन से वहां पहुंचे थे। इसके बाद किसी बात को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। विवाद बढ़ने पर दुकान के बाहर रखा सामान तोड़ दिया गया। इस दौरान दुकान में मौजूद ब्रजनारेश सिंह ने युवकों को तोड़फोड़ करने से रोकने की कोशिश की। आरोप है कि उनके रोकने पर युवक और अधिक नाराज हो गए और उन्होंने ब्रजनारेश सिंह पर डंडे से हमला कर दिया।

    पिता पर हमला होते देख उनके बेटे अंकित सिंह ने बीच बचाव किया और उन्हें बचाने की कोशिश की। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच मारपीट शुरू हो गई। दुकान के आसपास मौजूद लोगों ने भी घटना देखी। कुछ देर तक चले विवाद के बाद मामला शांत हुआ लेकिन तब तक दुकान के बाहर रखा सामान क्षतिग्रस्त हो चुका था। घटना की सूचना पुलिस को दी गई जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची।

    मामले में दुकान संचालक अंकित सिंह की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। चित्रकूट थाना प्रभारी नीलेश तिवारी के मुताबिक विवाद के पीछे दोनों पक्षों के बीच पुरानी रंजिश की बात सामने आई है। शिकायत के आधार पर वरुण तिवारी और अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। पुलिस अब पूरे मामले की जानकारी जुटाने के साथ विवाद की वजह और घटना में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

    घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस की जांच को भी दिशा मिली है। फुटेज में कुछ युवक दुकान के बाहर मारपीट और तोड़फोड़ करते नजर आ रहे हैं। पुलिस इसी फुटेज के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जिन लोगों की पहचान फुटेज और जांच के आधार पर होगी उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस ने सोमवार सुबह मामले में दो आरोपियों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। वहीं अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और शिकायत में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    चाय दुकान पर हुए इस विवाद ने आसपास के लोगों को भी हैरान कर दिया। पुरानी रंजिश के चलते शुरू हुआ विवाद कुछ ही देर में मारपीट और तोड़फोड़ तक पहुंच गया। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों से जुड़ी जानकारी जुटा रही है और घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। दो आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद पुलिस की कार्रवाई आगे भी जारी है।

  • जबलपुर में घर के अंदर सांप ने उड़ाई परिवार की नींद ढाई फीट लंबे बुल स्नेक को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा

    जबलपुर में घर के अंदर सांप ने उड़ाई परिवार की नींद ढाई फीट लंबे बुल स्नेक को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा


    जबलपुर। जबलपुर के गढ़ा बाजार इलाके में एक कच्चे मकान में पिछले तीन दिनों से सांप की मौजूदगी ने पूरे परिवार की चिंता बढ़ा दी थी। कभी वॉशरूम तो कभी रसोई और कभी बिस्तर पर दिखाई देने वाले सांप के कारण परिवार के लोग डर के माहौल में रहने को मजबूर थे। सांप करीब ढाई फीट लंबा था और उसका रंग बादामी बताया गया है। उसके शरीर पर पीले रंग की गोल धारियां दिखाई दे रही थीं। लगातार तीन दिन तक घर के अलग अलग हिस्सों में नजर आने के बाद परिवार ने आखिरकार सर्प और वन्य प्राणी विशेषज्ञ से मदद मांगी।

    मामला गढ़ा बाजार में पुराने स्टेट बैंक के पास जवाहर लाल सेन के घर का है। रविवार सुबह करीब 10 बजे जवाहर लाल सेन ने सर्प और वन्य प्राणी विशेषज्ञ गजेंद्र दुबे को सांप के घर में छिपे होने की सूचना दी। जानकारी मिलते ही गजेंद्र दुबे मौके पर पहुंचे और काफी सावधानी के साथ सांप की तलाश शुरू की। कुछ देर की मशक्कत के बाद उन्होंने सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। सांप के पकड़े जाने के बाद परिवार के लोगों ने राहत की सांस ली।

    सर्प विशेषज्ञ गजेंद्र दुबे के मुताबिक पकड़ा गया सांप गनैता प्रजाति का है जिसे बुल स्नेक भी कहा जाता है। यह सांप जहरीला नहीं होता लेकिन इसका स्वभाव काफी गुस्सैल और आक्रामक माना जाता है। खतरा महसूस होने या छेड़छाड़ किए जाने पर यह पीछे हटने के बजाय हमला करने की कोशिश कर सकता है। यही वजह है कि घर में सांप दिखाई देने के बाद परिवार के लोगों ने खुद उसे पकड़ने का प्रयास नहीं किया और विशेषज्ञ को बुलाकर सुरक्षित रेस्क्यू कराया।

    विशेषज्ञ के अनुसार इस सांप के करीब 50 दांत होते हैं। इसका भोजन मुख्य रूप से छिपकली चिड़िया के अंडे और चूहों के बच्चे होते हैं। भोजन की तलाश में ऐसे सांप कई बार आबादी वाले इलाकों तक पहुंच जाते हैं। खासकर मौसम में उमस बढ़ने के दौरान सांप ठंडी और सुरक्षित जगहों की तलाश करते हैं। इसी वजह से वे ईंट गिट्टी कचरे के ढेर और घर के आसपास मौजूद अंधेरी जगहों में छिप सकते हैं।

    सांप को सुरक्षित पकड़ने के बाद उसे उसके प्राकृतिक वातावरण यानी जंगल में छोड़ दिया गया। विशेषज्ञ ने लोगों से अपील की कि घर के आसपास सफाई का विशेष ध्यान रखें। ईंट गिट्टी और कचरे के ढेर को लंबे समय तक जमा करके न रखें क्योंकि ऐसी जगहें सांपों के छिपने का ठिकाना बन सकती हैं। घर की नालियों में फिनाइल डालने के साथ दीवारों में मौजूद दरारों को भी बंद करने की सलाह दी गई है।

    विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि यदि घर या आसपास सांप दिखाई दे तो उसे पकड़ने या मारने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सांप को छेड़ने से वह आक्रामक हो सकता है और ऐसी स्थिति में किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। बेहतर है कि सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए तुरंत प्रशिक्षित सर्प विशेषज्ञ या संबंधित विभाग को सूचना दी जाए। गढ़ा में तीन दिन तक परिवार के लिए परेशानी बने सांप के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद अब घरवालों ने राहत की सांस ली है।

  • कई महीनों से पेट दर्द और उल्टी से परेशान थी किशोरी जांच में सामने आया बालों का बड़ा गुच्छा

    कई महीनों से पेट दर्द और उल्टी से परेशान थी किशोरी जांच में सामने आया बालों का बड़ा गुच्छा


    शिवपुरी । शिवपुरी के श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने 14 वर्षीय किशोरी का जटिल ऑपरेशन कर उसके पेट से बालों का बड़ा गुच्छा निकाला है। करीब 16×14 सेंटीमीटर आकार का यह बालों का गुच्छा पेट के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से में फैला हुआ था और छोटी आंत तक पहुंच गया था। करीब तीन घंटे तक चली ओपन सर्जरी के बाद किशोरी की हालत अब स्थिर बताई जा रही है।

    किशोरी को पिछले कई महीनों से लगातार पेट दर्द की शिकायत थी। इसके साथ ही उसे उल्टी होती थी और पेट भरा हुआ महसूस होता था। भूख भी काफी कम लग रही थी। लगातार बनी इन परेशानियों के बाद उसे 11 सितंबर को मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया। जांच के दौरान उसका हीमोग्लोबिन स्तर सिर्फ 7.8 ग्राम पाया गया। डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को देखते हुए उसे दो यूनिट खून चढ़ाया।

    इसके बाद किशोरी का सीटी स्कैन कराया गया। जांच में पेट के भीतर बड़े आकार का बालों का गुच्छा दिखाई दिया। साथ ही आंत में छेद होने की आशंका भी सामने आई। मरीज की स्थिति और पेट में मौजूद गुच्छे के आकार को देखते हुए डॉक्टरों ने सामान्य प्रक्रिया के बजाय ओपन सर्जरी करने का फैसला लिया।

    अधिष्ठाता डॉ. ईला गुजारिया के मार्गदर्शन और सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. अनंत राखोंडे के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन किया। प्रोफेसर डॉ. सौरभ चौहान और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कौशलेन्द्र सिंह नरवरिया के साथ पीजी डॉक्टर डॉ. महेश पाटीदार ने सर्जरी में हिस्सा लिया। एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका गुप्ता की देखरेख में करीब तीन घंटे तक ऑपरेशन चला।

    डॉक्टरों के मुताबिक पेट में मौजूद बालों का गुच्छा इतना बड़ा हो चुका था कि उसे सामान्य एंडोस्कोपी के जरिए पूरी तरह निकालना मुश्किल था। इसी वजह से पेट खोलकर सर्जरी की गई और बालों के पूरे गुच्छे को बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के बाद किशोरी की हालत स्थिर है और डॉक्टर उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं।

    प्रोफेसर डॉ. सौरभ चौहान ने बताया कि बाल आसानी से पचते नहीं हैं। लंबे समय तक बाल निगलने पर वे पेट में जमा होते रहते हैं और धीरे धीरे एक ठोस गुच्छे का रूप ले लेते हैं। इसी स्थिति को ट्राइकोबेजोआर कहा जाता है। इस किशोरी के मामले में भी पेट के भीतर लंबे समय तक बाल जमा होने के कारण बड़ा गुच्छा बन गया था।

    असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कौशलेन्द्र सिंह नरवरिया के मुताबिक ऐसी स्थिति कई बार ट्राइकोटिलोमेनिया यानी बाल तोड़ने की आदत और ट्राइकोफेजिया यानी बाल खाने या निगलने की आदत से जुड़ी हो सकती है। मानसिक तनाव और चिंता भी इसके पीछे एक कारण हो सकते हैं। ऐसे मामलों में केवल सर्जरी ही पर्याप्त नहीं मानी जाती बल्कि ऑपरेशन के बाद मरीज की निगरानी और जरूरत के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी महत्वपूर्ण होता है।

    यह मामला इस बात की ओर भी ध्यान दिलाता है कि बच्चों और किशोरों में लंबे समय तक बने रहने वाले पेट दर्द उल्टी भूख कम लगना या पेट भरा रहने जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच होने से गंभीर स्थिति का पता लगाया जा सकता है और उचित उपचार शुरू किया जा सकता है।

  • बिजली के तार ने छीन ली 17 साल के सौरभ की जिंदगी हादसे के बाद परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

    बिजली के तार ने छीन ली 17 साल के सौरभ की जिंदगी हादसे के बाद परिवार ने लगाए गंभीर आरोप


    शिवपुरी । शिवपुरी में कबाड़ा उठाने गए 17 वर्षीय नाबालिग की करंट लगने से मौत हो गई। गंभीर रूप से झुलसने के बाद सौरभ शाक्य का ग्वालियर में कई दिनों तक इलाज चला लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। हादसे में सौरभ का शरीर करीब 70 प्रतिशत झुलस गया था। सोमवार को ग्वालियर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। अब शिवपुरी कोतवाली पुलिस पूरे मामले की जांच करेगी।

    जानकारी के मुताबिक यह हादसा 6 जुलाई को शिवपुरी की हनुमान कॉलोनी में हुआ था। सौरभ अपने दोस्त सुमित शाक्य के साथ हाथ ठेला लेकर कबाड़ा खरीदने निकला था। दोनों एक मकान पर पहुंचे थे। वहां मौजूद महिला ने सौरभ से पहली मंजिल की छत पर रखा कबाड़ा नीचे लाने के लिए कहा। सौरभ कबाड़ा लेने के लिए ऊपर पहुंचा तो वहां मौजूद बिजली के तार की चपेट में आ गया।

    करंट लगते ही सौरभ के शरीर में आग लग गई। बिजली का झटका इतना तेज था कि वह पहली मंजिल से नीचे गिर गया। हादसे के बाद उसका दोस्त सुमित उसे हाथ ठेले पर लेकर सिद्धि विनायक अस्पताल पहुंचा। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए मेडिकल कॉलेज भेजा गया। हालत बेहद नाजुक होने के कारण उसी दिन सौरभ को ग्वालियर रेफर कर दिया गया था। ग्वालियर में कई दिनों तक उसका इलाज चला लेकिन आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।

    सौरभ की बहन काजल शाक्य ने बताया कि हादसे के बाद जब परिवार के लोग संबंधित मकान पर पहुंचे तो वहां मौजूद महिला ने मदद करने के बजाय परिवार पर चोरी का आरोप लगाया। परिजनों का कहना है कि हादसे के बाद उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। परिवार ने मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर कोतवाली थाने का रुख किया था। परिजनों ने पुलिस पर सुनवाई नहीं करने का आरोप भी लगाया था।

    सौरभ के परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर बताई गई है। उसके पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। परिवार फिजिकल थाना क्षेत्र में कोलियों के मंदिर के पास किराए के मकान में रहता है। परिवार के तीन भाई मेहनत मजदूरी करके घर का खर्च चलाते थे। सौरभ भी कबाड़ा उठाने और बेचने का काम करता था।

    अब सौरभ की मौत के बाद परिवार हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। परिजन चाहते हैं कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और यह सामने आए कि आखिर बिजली के तार की चपेट में आने से नाबालिग की जान कैसे गई। पुलिस अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी।