Tag: Madhya Pradesh News

  • भोपाल में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने फहराया तिरंगा: परेड की सलामी ली, संविधान निर्माताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन

    भोपाल में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने फहराया तिरंगा: परेड की सलामी ली, संविधान निर्माताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन


    नई दिल्ली । 77वें गणतंत्र दिवस पर भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। परेड की सलामी लेने के साथ उन्होंने संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महापुरुषों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव का भव्य नज़ारा देखने को मिला। लाल परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्य समारोह में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। इस अवसर पर पूरा वातावरण तिरंगे की शान, देशभक्ति के गीतों और नागरिक गर्व से ओत-प्रोत नजर आया।

    परेड में कुल 23 प्लाटून ने अनुशासन और समर्पण का परिचय दिया। इसके साथ ही अश्वरोही दल, शौर्य दल और डॉग स्क्वाड की प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी प्रभावशाली बना दिया। सशस्त्र बलों और पुलिस टुकड़ियों की सधी हुई कदमताल ने उपस्थित जनसमूह को गर्व की अनुभूति कराई। राज्यपाल ने परेड का निरीक्षण कर जवानों के उत्साह और अनुशासन की सराहना की।

    झंडा वंदन के पश्चात अपने संबोधन में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने प्रदेश और देशवासियों को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस हमारे संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह दिन हमें अपने कर्तव्यों की याद दिलाता है और देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को सुदृढ़ करने का संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है।

    राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, संविधान सभा के सभी सदस्यों और अमर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि इन्हीं महापुरुषों के संघर्ष, त्याग और बलिदान के कारण देश को स्वतंत्रता और सशक्त संविधान प्राप्त हुआ। बाबा साहेब के विचार सामाजिक न्याय, समता और बंधुत्व के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं, जो आज भी हमारे लिए मार्गदर्शक हैं।

    उन्होंने गर्व के साथ कहा कि मध्य प्रदेश को बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर की जन्मस्थली होने का गौरव प्राप्त है। उनके सिद्धांतों को आत्मसात कर प्रदेश निरंतर सामाजिक समरसता और समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्यपाल ने कहा कि आज भारत विश्व पटल पर एक सशक्त, आत्मविश्वासी और सम्मानित राष्ट्र के रूप में स्थापित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा लगातार बढ़ी है और देश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

    राज्यपाल ने किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के विकास पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है, जिसकी तैयारियां पहले से ही की जा रही हैं। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों का बजट वर्ष 2002-03 में जहां 600 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 27 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। “समृद्ध किसान–समृद्ध प्रदेश” के लक्ष्य के तहत कृषि विकास का बहुआयामी मॉडल अपनाया गया है, जिसमें तकनीक, नवाचार, प्राकृतिक खेती, बाजार और डिजिटल पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।कुल मिलाकर, भोपाल में आयोजित यह गणतंत्र दिवस समारोह संविधान के मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और विकास के संकल्प को दोहराने का सशक्त मंच बना, जिसने नागरिकों में देश के प्रति गर्व और जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत किया।

  • रिंग रोड निर्माण में दर्दनाक हादसा: पुल पिलर की सेंट्रिंग गिरने से मजदूर की मौत, दो घायल

    रिंग रोड निर्माण में दर्दनाक हादसा: पुल पिलर की सेंट्रिंग गिरने से मजदूर की मौत, दो घायल


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में रविवार देर रात रिंग रोड निर्माण के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जिसने निर्माण कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यू भेड़ाघाट क्षेत्र के ललपुर गांव के पास निर्माणाधीन पुल के पिलर की सेंट्रिंग अचानक गिर गई, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गए। इस हादसे में पश्चिम बंगाल निवासी एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर की पहचान शेख नैरुद्दीन के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रात के समय पुल के पिलर पर सेंट्रिंग का काम चल रहा था, तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से भारी ढांचा गिर पड़ा। सेंट्रिंग के नीचे काम कर रहे मजदूर संभल भी नहीं पाए और मलबे में दब गए। घटना के तुरंत बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और अन्य मजदूरों ने शोर मचाकर मदद की गुहार लगाई।

    हादसे में घायल हुए मजदूरों के नाम राहिल और राजेश्वर बताए जा रहे हैं। दोनों को हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। घायलों को तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर बताई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार दोनों मजदूर फिलहाल निगरानी में हैं और उनका इलाज जारी है।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया और एहतियातन रिंग रोड पर चल रहा निर्माण कार्य तुरंत रोक दिया गया। प्रारंभिक जांच में सेंट्रिंग के गिरने की वजह तकनीकी खामी या लापरवाही मानी जा रही है, हालांकि वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।

    बताया जा रहा है कि रिंग रोड पर यह पुल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से बनवाया जा रहा है। हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण कार्य में नाबालिगों से भी काम कराया जा रहा था और मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के जोखिम भरे कार्य में लगाया गया था। हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य आवश्यक सुरक्षा साधनों की कमी के आरोप भी सामने आए हैं।

    इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर कर दिया है। मजदूरों की जान की कीमत पर तेजी से काम पूरा करने की प्रवृत्ति पर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। वहीं मृतक मजदूर के परिजनों को सूचना दे दी गई है और मुआवजे की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है। कुल मिलाकर यह हादसा न सिर्फ एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है।

  • भोजशाला में 'मिशन शांति' सफल: 8 हजार जवानों की मुस्तैदी के बाद थिरके खाकी के कदम, वायरल हुआ जश्न का वीडियो

    भोजशाला में 'मिशन शांति' सफल: 8 हजार जवानों की मुस्तैदी के बाद थिरके खाकी के कदम, वायरल हुआ जश्न का वीडियो


    धार । मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और संवेदनशील भोजशाला परिसर में ‘वसंत पंचमी’ का महापर्व इस बार आपसी सौहार्द और कड़े सुरक्षा घेरे के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। पिछले कई दिनों से बिना सोए दिन-रात तनावपूर्ण ड्यूटी कर रहे करीब 8 हजार पुलिसकर्मियों ने जब शनिवार को राहत की सांस ली, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अपनी कर्तव्यनिष्ठा की अग्निपरीक्षा में पास होने के बाद पुलिस लाइन में आयोजित एक भोज के दौरान जवानों का मानवीय और खुशनुमा चेहरा सामने आया, जहां वे फिल्मी गानों पर जमकर थिरकते नजर आए।

    खाकी का तनावमुक्त अवतार: ड्यूटी के बाद ‘डांस’ का तड़का

    शुक्रवार को भोजशाला में पूजा और नमाज का संयोग एक ही दिन था, जिसे लेकर प्रशासन और पुलिस पर भारी दबाव था। स्थानीय पुलिस से लेकर केंद्रीय सुरक्षा बलों के करीब 7,000 से 8,000 जवानों ने शहर के चप्पे-चप्पे पर पहरा दिया। लगातार फ्लैग मार्च और बिना ब्रेक के की गई ड्यूटी के बाद शनिवार को धार पुलिस लाइन में इन जवानों के लिए ‘विशेष भोज’ का आयोजन किया गया था।अनायास बना जश्न का माहौल: रक्षित निरीक्षक पुरुषोत्तम विश्नोई के अनुसार, विभाग की ओर से केवल भोजन की व्यवस्था थी, लेकिन ड्यूटी आवंटन के लिए लगे स्पीकर्स पर जैसे ही संगीत बजा, जवानों ने अपनी थकान मिटाने के लिए डांस करना शुरू कर दिया।सोशल मीडिया पर वायरल: वर्दी में जवानों के इस डांस का वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग पुलिसकर्मियों के इस तनावमुक्ति के तरीके और उनकी कड़ी मेहनत की जमकर सराहना कर रहे हैं।

    शांतिपूर्ण आयोजन: एक बड़ी उपलब्धि

    भोजशाला विवाद की संवेदनशीलता को देखते हुए इस बार की चुनौती बड़ी थी। पुलिस बल ने जिस धैर्य और अनुशासन के साथ हजारों की भीड़ को नियंत्रित किया, उसने प्रदेश में कानून-व्यवस्था की एक मिसाल पेश की है। दिन-रात की कठिन ड्यूटी और फ्लैग मार्च के बाद जब जिम्मेदारी सफलतापूर्वक पूरी हुई, तो जवानों का यह उत्साह स्वाभाविक था। यह उनके मानसिक तनाव को कम करने की एक सकारात्मक पहल है। स्थानीय अधिकारी

    मानवीय पक्ष की प्रशंसा

    अक्सर पुलिस का सख्त चेहरा ही सामने आता है, लेकिन धार का यह वीडियो दिखाता है कि वर्दी के पीछे भी एक इंसान है, जिसे लंबी थकान के बाद मुस्कुराने और थिरकने का पूरा हक है। शहरवासियों ने भी पुलिस की इस भूमिका की प्रशंसा की है, क्योंकि उनकी सजगता के कारण ही शहर में शांति और भाईचारा बना रहा।

  • बीना रेलवे फाटक ओवरब्रिज पर गड्ढों से खतरा, विधायक निर्मला सप्रे ने दी आंदोलन की चेतावनी

    बीना रेलवे फाटक ओवरब्रिज पर गड्ढों से खतरा, विधायक निर्मला सप्रे ने दी आंदोलन की चेतावनी


    बीना /सागर। मध्यप्रदेश के सागर जिले में बीना शहर के झांसी फाटक ओवरब्रिज पर सड़क की बिगड़ती हालत ने स्थानीय लोगों और अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। ओवरब्रिज के निर्माण के कुछ महीनों बाद ही सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे पड़ गए हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही खतरे में है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। इस मामले में विधायक निर्मला सप्रे ने रेलवे और सेतु विभाग के अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई और चेतावनी दी कि यदि जल्द मरम्मत कार्य नहीं हुआ तो वह और उनके पार्टी कार्यकर्ता आंदोलन करेंगे।

    मरम्मत कार्य नाममात्र ही हुआ

    स्थानीय लोगों और पार्षद बीडी रजक के अनुसार, ओवरब्रिज कई वर्षों के संघर्ष और दोनों विभागों की सहयोगी प्रक्रिया के बाद बना था। निर्माण पूरा होने के कुछ महीनों में ही सड़क पर गहरे गड्ढे पड़ने लगे। स्थानीय वाहन चालक कई बार दुर्घटनाओं का शिकार हुए। गड्ढों के कारण रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो रही है। पार्षद और नागरिकों ने कई बार धरना प्रदर्शन और शिकायत के माध्यम से मरम्मत की मांग की, लेकिन विभागीय कार्रवाई नाममात्र ही हुई। इससे लोगों में भारी आक्रोश है।

    विभागीय समन्वय की कमी का उदाहरण

    विधायक निर्मला सप्रे का कहना है कि उन्होंने कई अवसरों पर रेलवे और सेतु विभाग के अधिकारियों से गड्ढों की समस्या के बारे में बात की, लेकिन दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। उनका कहना है कि “किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली, जिसका खामियाजा आम लोग भुगत रहे हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जल्द मरम्मत नहीं हुई तो वह मौके पर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आंदोलन करेंगे और जनता की सुरक्षा के लिए आवाज उठाएंगे। विधायक ने बताया कि झांसी फाटक ओवरब्रिज का महत्व इसलिए भी है क्योंकि पहले रेलवे क्रॉसिंग की वजह से दुर्घटनाओं का खतरा था। ओवरब्रिज बनने के बाद भी गड्ढों के कारण यही जोखिम कायम है। उन्होंने विभागों से अपील की कि तुरंत मरम्मत कार्य शुरू किया जाए और सड़क को सुरक्षित बनाया जाए।

    स्थानीय लोगों की परेशानियां

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गड्ढों के कारण वाहन चालकों को रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं। छात्रों और ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए यह सड़क रोजमर्रा की जिंदगी में सबसे अधिक इस्तेमाल होती है। सड़क की खस्ता हालत ने लोगों में निराशा और गुस्सा दोनों पैदा कर दिया है। पार्षद बीडी रजक ने भी कहा कि लंबे समय से विभागीय लापरवाही और अनदेखी के कारण यह स्थिति बनी है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि बिना विलंब किए मरम्मत कार्य पूरा किया जाए और जनता को राहत मिले। वर्तमान में यह मामला विभागीय समन्वय की कमी और जनप्रतिनिधियों की चेतावनी को गंभीरता से न लेने का उदाहरण बन गया है। विधायक निर्मला सप्रे का आंदोलन की चेतावनी देने का निर्णय इस बात का संकेत है कि स्थानीय लोग अब इंतजार करने को तैयार नहीं हैं।

  • शाहजहांनाबाद मासूम हत्याकांड: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दोषी अतुल निहाले का तिहरा मृत्युदंड बरकरार

    शाहजहांनाबाद मासूम हत्याकांड: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दोषी अतुल निहाले का तिहरा मृत्युदंड बरकरार


    जबलपुर/भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी को झकझोर देने वाले शाहजहांनाबाद मासूम बलात्कार और हत्याकांड मामले में न्याय की जीत हुई है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी अतुल निहाले 30 को मिली फांसी की सजा को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ आरोपी के परिजनों द्वारा दायर की गई अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया।

    यह मामला न केवल अपनी संवेदनशीलता के लिए, बल्कि कानूनी इतिहास के लिए भी विशेष है। भोपाल की विशेष अदालत ने दोषी अतुल निहाले को अपहरण बलात्कार और हत्या, इन तीनों अलग-अलग धाराओं में ‘तिहरा मृत्युदंड सुनाया था। यानी उसे प्रत्येक जघन्य अपराध के लिए अलग से फांसी की सजा दी गई थी। भारतीय न्याय संहिता के लागू होने के बाद मध्यप्रदेश में यह अपनी तरह का पहला मामला है जहां किसी अपराधी को एक साथ तीन मृत्युदंड मिले हों।

    क्या थी दिल दहला देने वाली वह घटना

    घटना भोपाल के शाहजहांनाबाद क्षेत्र की है, जहां एक 5 वर्षीय मासूम बच्ची अचानक लापता हो गई थी। सघन तलाशी के बाद बच्ची का शव पड़ोस में रहने वाले मजदूर अतुल निहाले के घर में पानी की टंकी से बरामद हुआ था। जांच में यह बात सामने आई थी कि आरोपी ने बच्ची का अपहरण किया, उसके साथ हैवानियत की और पकड़े जाने के डर से उसकी बेरहमी से हत्या कर शव को छिपा दिया।

    हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर दुर्लभ से दुर्लभतम की श्रेणी में माना। न्यायालय ने कहा कि ऐसे जघन्य कृत्य समाज के लिए खतरा हैं और मासूमों की सुरक्षा के प्रति कोई भी समझौता नहीं किया जा सकता। आरोपी के परिजनों ने उसकी पृष्ठभूमि और कम उम्र का हवाला देकर सजा कम करने की गुहार लगाई थी जिसे अदालत ने अपराध की वीभत्सता को देखते हुए ठुकरा दिया। भोपाल पुलिस और अभियोजन पक्ष ने इस मामले में बेहद कम समय में वैज्ञानिक साक्ष्य और पुख्ता गवाह पेश किए थे, जिसकी बदौलत यह सजा बरकरार रह सकी। इस फैसले के बाद पीड़िता के परिवार और स्थानीय नागरिकों ने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया है।

  • भ्रष्टाचार का 'संस्थागत मॉडल': जीतू पटवारी ने ग्वालियर में सरकार को घेरा, बोले- हर कलेक्टर चोर है

    भ्रष्टाचार का 'संस्थागत मॉडल': जीतू पटवारी ने ग्वालियर में सरकार को घेरा, बोले- हर कलेक्टर चोर है


    ग्वालियर । मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शुक्रवार को ग्वालियर दौरे के दौरान प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पटवारी ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि प्रदेश के जिलों में स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि “हर कलेक्टर चोर है।” उन्होंने दावा किया कि यह केवल विपक्ष का आरोप नहीं है, बल्कि स्वयं मुख्य सचिव ने इसे स्वीकार किया है।

    जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे अपने पत्र का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव दोनों इस सच्चाई से वाकिफ हैं कि जिलों में बिना पैसे लिए कोई काम नहीं हो रहा है। उन्होंने ग्वालियर में मीडिया से चर्चा करते हुए कहा मुख्य सचिव ने खुद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान यह स्वीकार किया है कि कोई भी कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करता। यदि प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी यह मान रहा है तो मुख्यमंत्री को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

    पटवारी के आरोपों के मुख्य बिंदु

    भ्रष्टाचार की सीमा टूटी: पटवारी ने आरोप लगाया कि पहले सरकार पर ’50 प्रतिशत कमीशन’ के आरोप लगते थे, लेकिन अब भ्रष्टाचार ने संस्थागत स्वरूप ले लिया है और सभी सीमाएं तोड़ दी गई हैं। पैसे के दम पर पोस्टिंग उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि कलेक्टरों की नियुक्तियां योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि लेन-देन और बोली के आधार पर होती हैं। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय CMO और PMO दोनों को है।

    नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग स्वतंत्र जांच की मांग: कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि मध्यप्रदेश में जिला प्रशासन स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार की किसी केंद्रीय एजेंसी या स्वतंत्र समिति से निष्पक्ष जांच कराई जाए। सियासी भूचाल जीतू पटवारी का यह बयान मध्यप्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचाने वाला है। ग्वालियर-चंबल संभाग की बैठक लेने पहुंचे पटवारी ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में कांग्रेस ‘भ्रष्टाचार’ को सबसे बड़ा चुनावी और सामाजिक मुद्दा बनाएगी। उन्होंने अधिकारियों को भी चेतावनी दी कि जो भी अवैधानिक कार्यों में संलिप्त पाया जाएगा, कांग्रेस उसे जेल भिजवाकर ही दम लेगी।

  • खरगोन: टंट्या मामा मूर्ति विवाद में बड़ी गाज, दो इंजीनियर निलंबित; भ्रष्टाचार के आरोपों पर अपनों ने ही खोला मोर्चा

    खरगोन: टंट्या मामा मूर्ति विवाद में बड़ी गाज, दो इंजीनियर निलंबित; भ्रष्टाचार के आरोपों पर अपनों ने ही खोला मोर्चा


    खरगोन । क्रांतिकारी आदिवासी नायक जननायक टंट्या मामा भील की मूर्ति स्थापना को लेकर उपजा विवाद अब शासन की कड़ी कार्रवाई और राजनीतिक घमासान में तब्दील हो चुका है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए खरगोन नगरपालिका में पदस्थ दो इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई बिस्टान नाका चौराहे पर स्थापित की गई मूर्ति में बरती गई भारी अनियमितताओं और लापरवाही के चलते की गई है।

    शासन की सख्त कार्रवाई

    नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे द्वारा जारी आदेश के तहत सहायक यंत्री मनीष महाजन और उपयंत्री जितेन्द्र मेढ़ा को निलंबित किया गया है। विभाग ने माना है कि मूर्ति स्थापना की प्रक्रिया में इन अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर चूक की और सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन किया।

    क्या है पूरा विवाद करोड़ों की मंजूरी, कौड़ियों की मूर्ति

    विवाद की जड़ मूर्ति के निर्माण में हुआ कथित भ्रष्टाचार है। नगरपालिका की प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल PIC ने टंट्या मामा की भव्य कांस्य या पत्थर की मूर्ति के लिए 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की थी। लेकिन आरोप है कि ठेकेदार ने अधिकारियों की मिलीभगत से महज 75 हजार से 1 लाख रुपये की सस्ती की मूर्ति स्थापित कर दी। जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, आदिवासी समाज और राजनीतिक गलियारों में आक्रोश फैल गया।

    भाजपा पार्षदों का सद्बुद्धि यज्ञ और मोर्चा

    हैरान करने वाली बात यह है कि खरगोन नगरपालिका में भाजपा का ही परिषद अध्यक्ष छाया जोशी है, लेकिन अब भाजपा पार्षदों ने ही अपनी ही परिषद के अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रोलिंग का डर भाजपा पार्षदों का कहना है कि इस भ्रष्टाचार के कारण उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है, जिससे उनकी छवि धूमिल हो रही है। विरोध का तरीका: पार्षद भागीरथ बड़ोले के नेतृत्व में भाजपा पार्षदों ने गांधी प्रतिमा पर ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ किया और अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर FIR दर्ज करने की मांग की।

    कांग्रेस का अल्टीमेटम और चक्का जाम की चेतावनी

    कांग्रेस इस मुद्दे पर और अधिक हमलावर हो गई है। जिला अध्यक्ष रवि नायक ने इसे आदिवासी अस्मिता का अपमान बताते हुए प्रशासन के 45 दिनों के आश्वासन को ठुकरा दिया है। उन्होंने 26 जनवरी 2026 से 60 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में भव्य धातु की मूर्ति स्थापित नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरे जिले में उग्र आंदोलन और चक्का जाम किया जाएगा।

    अब आगे क्या

    नगरपालिका ने अपनी गलती सुधारने के प्रयास शुरू कर दिए हैं नया टेंडर 19 जनवरी 2026 को धातु की नई मूर्ति के लिए ई-टेंडर जारी किया गया है। समय सीमा 2 फरवरी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी कर 45 दिनों के भीतर नई मूर्ति स्थापित करने का दावा किया गया है।

  • गणतंत्र दिवस की फाइनल रिहर्सल: लाल परेड मैदान पर गूँजी 'जय हिंद' की हुंकार, DGP ने लिया जायजा

    गणतंत्र दिवस की फाइनल रिहर्सल: लाल परेड मैदान पर गूँजी 'जय हिंद' की हुंकार, DGP ने लिया जायजा


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियां अपने चरम पर हैं। शनिवार, 24 जनवरी की सुबह स्थानीय लाल परेड मैदान पर संयुक्त परेड की फुल ड्रेस फाइनल रिहर्सल का भव्य आयोजन किया गया। इस रिहर्सल के जरिए 26 जनवरी को होने वाले मुख्य समारोह की पूरी रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया, जिसमें कदम से कदम मिलाते जवानों के जोश और बैंड की सुमधुर लहरियों ने पूरे मैदान को देशभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया।

    फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान प्रदेश के पुलिस महानिदेशक DGP श्री कैलाश मकवाणा विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने परेड की सलामी ली और सुरक्षा व्यवस्थाओं सहित पूरे कार्यक्रम का बारीकी से निरीक्षण किया। उनके साथ कई वरिष्ठ आईपीएस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। रिहर्सल में ‘डमी’ राज्यपाल द्वारा परेड का निरीक्षण और ध्वजारोहण की प्रक्रिया को ठीक उसी तरह दोहराया गया, जैसा मुख्य समारोह में होना है।

    इस वर्ष की परेड में मध्य प्रदेश पुलिस, होमगार्ड, विशेष सशस्त्र बल , एसटीएफ, जेल विभाग की महिला टुकड़ी, एनसीसी, और स्काउट-गाइड सहित कुल 13 से अधिक टुकड़ियां शामिल हो रही हैं। परेड के साथ-साथ अश्वरोही दल और स्वान दल का प्रदर्शन भी आकर्षण का केंद्र रहा। पुलिस बैंड की धुनों पर जवानों के ऊंचे कदमताल ने उपस्थित दर्शकों में उत्साह भर दिया।

    इसके अलावा रिहर्सल में विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा तैयार की गई झांकियों का भी प्रदर्शन किया गया। इस वर्ष झांकियों की थीम विरासत से विकास और विकसित भारत 2047 रखी गई है जो मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि और भविष्य के आधुनिक विजन को प्रदर्शित करती हैं। 26 जनवरी को मुख्य समारोह में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ध्वजारोहण करेंगे। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और पूरे लाल परेड मैदान क्षेत्र को नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है।

  • बैतूल में खाद्य विभाग का 'सफाई सर्जिकल स्ट्राइक': गंदगी मिलने पर दुकानें बंद, चौपाटी पर मचा हड़कंप

    बैतूल में खाद्य विभाग का 'सफाई सर्जिकल स्ट्राइक': गंदगी मिलने पर दुकानें बंद, चौपाटी पर मचा हड़कंप


    बैतूल । आम जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों और लापरवाह दुकानदारों के खिलाफ बैतूल जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शहर के खान-पान के प्रमुख ठिकानों, विशेषकर चौपाटी क्षेत्र में एक सघन जांच अभियान चलाया। इस दौरान कई दुकानों में गंदगी और अस्वच्छता का आलम देखकर अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल बंद करा दिया। विभाग की इस अचानक हुई छापेमारी से पूरे बाजार में हड़कंप मच गया और कई दुकानदार अपनी खामियां छिपाते नजर आए।

    जांच दल ने विशेष रूप से चौपाटी पर लगने वाले स्टॉल्स को निशाने पर लिया। इस दौरान चलित खाद्य प्रयोगशाला को भी साथ रखा गया था, जिससे नमूनों की मौके पर ही जांच संभव हो सकी। टीम ने दुकानों से पानीपुरी का पानी, आलू मसाला, पनीर, मंचूरियन, सॉस और विभिन्न प्रकार की चटनियों के नमूने लिए। परीक्षण में कई खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता मानकों से कम पाई गई, वहीं कुछ स्थानों पर इस्तेमाल होने वाले सॉस और चटनी के रंग व गुणवत्ता संदेहास्पद मिली।

    सबसे गंभीर स्थिति स्वच्छता के मोर्चे पर देखी गई। कई दुकानों पर साफ-सफाई के बुनियादी मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा था। बर्तनों की गंदगी और कचरे के सही निपटान की व्यवस्था न होने के कारण खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने संबंधित दुकानों को अस्थायी रूप से बंद रवा दिया। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि व्यापार अपनी जगह है लेकिन लोगों के स्वास्थ्य के साथ समझौता कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    विभाग ने सभी दुकानदारों को अंतिम और सख्त चेतावनी देते हुए निर्देश दिए हैं कि यदि दोबारा जांच के दौरान परिसर में गंदगी पाई गई या खाद्य पदार्थों में मिलावट की पुष्टि हुई तो न केवल भारी जुर्माना लगाया जाएगा बल्कि संबंधित प्रतिष्ठान का खाद्य पंजीयन स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाएगा। प्रशासन के इस कदम की आम नागरिकों ने सराहना की है क्योंकि बाहर मिलने वाले स्ट्रीट फूड की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं।

  • प्रखर राष्ट्रवाद के प्रतीक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाला साहेब ठाकरे की जयंती पर अर्पित की श्रद्धांजलि

    प्रखर राष्ट्रवाद के प्रतीक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाला साहेब ठाकरे की जयंती पर अर्पित की श्रद्धांजलि


    भोपाल। प्रखर हिंदुत्व और सशक्त राष्ट्रवादी विचारधारा के ध्वजवाहक शिवसेना के संस्थापक स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे की जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने बाला साहेब के व्यक्तित्व को अदम्य साहस और निर्भीकता का पर्याय बताते हुए राष्ट्र के प्रति उनके योगदान का स्मरण किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि बाला साहेब ठाकरे मात्र एक राजनेता नहीं, बल्कि एक प्रखर राष्ट्रवादी विचारधारा के जीवंत प्रतीक थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन वंचितों श्रमिकों और समाज के गरीब तबकों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बाला साहेब का जीवन साहस स्वाभिमान और बिना किसी समझौते के की गई निर्भीक राष्ट्र सेवा का एक अनुपम उदाहरण है जो आज भी करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र है।

    डॉ. यादव ने आगे कहा कि देश की एकता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए बाला साहेब द्वारा उठाए गए कदम सदैव इतिहास में दर्ज रहेंगे। उनके ओजस्वी विचार और जनहित के प्रति उनकी कटिबद्धता ने भारतीय राजनीति में एक विशिष्ट स्थान बनाया है। मुख्यमंत्री के इस नमन ने एक बार फिर बाला साहेब की उन स्मृतियों को ताजा कर दिया है जहाँ उन्होंने सदैव राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वोपरि रखा।