Tag: Madhya Pradesh News

  • केरवा डैम के FTL और ग्रीन बेल्ट में निर्माण पर उठे सवाल, कहीं रिटेनिंग वॉल तो कहीं पानी में मिट्टी का भराव; NGT को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

    केरवा डैम के FTL और ग्रीन बेल्ट में निर्माण पर उठे सवाल, कहीं रिटेनिंग वॉल तो कहीं पानी में मिट्टी का भराव; NGT को सौंपी जाएगी रिपोर्ट


    भोपाल । भोपाल के केरवा डैम के आसपास अतिक्रमण और निर्माण से जुड़े मामलों को लेकर किए गए निरीक्षण में 19 स्थानों पर कथित अतिक्रमण दर्ज किए गए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी के आदेश के बाद गठित टीम ने डैम के फुल टैंक लेवल यानी FTL बफर जोन और ग्रीन बेल्ट का निरीक्षण किया। रिपोर्ट में निजी निर्माणों के साथ मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम और जल संसाधन विभाग के निर्माणों का भी उल्लेख किया गया है। सूची में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह और पूर्व विधायक जितेंद्र डागा के परिवार से जुड़े निर्माणों का भी जिक्र है। निरीक्षण दल की रिपोर्ट एनजीटी में पेश की जानी है। फिलहाल रिपोर्ट में दर्ज विवरण और आरोपों के आधार पर मामलों की जांच तथा संबंधित निर्माणों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

    निरीक्षण के दौरान मेंडोरा बरखेड़ी बाज्याफ्त कुशलपुरा मुल्ला जी की टेकरी फतेहपुर डोगरा महुआखेड़ा और मीटूखेड़ी सहित अलग-अलग क्षेत्रों में निर्माण और जमीन के भराव से जुड़ी गतिविधियां दर्ज की गईं। टीम ने GPS लोकेशन और समय के साथ तस्वीरें लीं। निरीक्षण में जलाशय के किनारे मिट्टी और पत्थरों का भराव पानी की ओर जाती रिटेनिंग वॉल सीमेंट कंक्रीट के पिलर और निर्माणाधीन परिसरों जैसी स्थितियां सामने आने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ जगहों पर डैम की सीमा दर्शाने वाली मुनारें गायब मिलीं जबकि एक स्थान पर सीमा चिह्न खिसकाए जाने की बात दर्ज की गई है। इससे FTL की वास्तविक सीमा निर्धारित करने को लेकर सवाल उठते हैं।

    रिपोर्ट में मेंडोरा गांव में सबसे अधिक 12 अतिक्रमण दर्ज होने की बात कही गई है। इनमें मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम का पिकनिक रेस्टोरेंट और जल संसाधन विभाग का केरवा रेस्ट हाउस भी शामिल बताए गए हैं। पर्यटन निगम के परिसर में ग्रीन बेल्ट और बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित भूमि पर निर्माण होने का उल्लेख है। वहीं जल संसाधन विभाग के रेस्ट हाउस के पास FTL क्षेत्र में सीमेंट कंक्रीट के पिलर बनाए जाने और बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने की बात भी निरीक्षण विवरण में दर्ज है। इन मामलों में संबंधित विभागों की स्थिति और निर्माणों की अनुमति से जुड़े दस्तावेज अहम होंगे।

    निजी निर्माणों के संबंध में रिपोर्ट में अजय सिंह से जुड़ी भूमि पर FTL क्षेत्र में रिटेनिंग वॉल और बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित जमीन पर पक्के कमरे होने का उल्लेख किया गया है। पूर्व विधायक जितेंद्र डागा की पत्नी निशा डागा से जुड़ी जमीन पर लगभग 0.93 हेक्टेयर क्षेत्र में मिट्टी और पत्थरों का भराव तथा निर्माण कार्य जारी होने की बात कही गई है। इसके अलावा कई अन्य लोगों के नाम भी सूची में शामिल हैं जिन पर FTL में रिटेनिंग वॉल बनाने या ग्रीन बेल्ट में निर्माण करने के आरोप दर्ज हैं। बरखेड़ी बाज्याफ्त क्षेत्र में प्रकाश झा से जुड़े PJP एस्टेट के संबंध में भी आरक्षित भूमि पर रिटेनिंग वॉल और RCC सड़कें होने का उल्लेख है। इन सभी विवरणों को निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए।

    रिपोर्ट में कुशलपुरा क्षेत्र में डैम की सीमा बताने वाली मुनार खिसकाए जाने और FTL के भीतर बाउंड्री बनाकर पानी के बहाव को प्रभावित करने का आरोप भी दर्ज है। कुछ स्थानों पर निजी तालाब और व्यावसायिक गतिविधियां होने की बात कही गई है। मुल्ला जी की टेकरी में FTL के भीतर कई परतों वाली रिटेनिंग वॉल और बफर जोन या ग्रीन बेल्ट में बंगले का निर्माण दर्ज किया गया है। फतेहपुर डोगरा में जमीन के भराव और RCC दीवार के निर्माण का उल्लेख है। निरीक्षण दल ने इन गतिविधियों को तस्वीरों और ड्रोन के माध्यम से दर्ज करने की बात कही है।

    महुआखेड़ा में भी अतिक्रमण का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार एनजीटी ने 4 फरवरी 2026 के आदेश में वहां का कोपरा यानी मिट्टी और पत्थरों का भराव हटाने का निर्देश दिया था लेकिन निरीक्षण के समय यह मौजूद मिला। वहीं मीटूखेड़ी में केरवा नदी पर बिना अनुमति और वैज्ञानिक अध्ययन के सीमेंट कंक्रीट का पुल बनाए जाने की बात दर्ज की गई है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि इससे नदी के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ सकता है और बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।

    वेटलैंड संरक्षण एवं प्रबंधन नियम 2017 का नियम 4 आर्द्रभूमि में अतिक्रमण भराव और स्थायी निर्माण जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध से संबंधित है। जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 भी जल स्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को नियंत्रित करने का कानूनी आधार प्रदान करता है। अब निरीक्षण रिपोर्ट एनजीटी के सामने रखे जाने के बाद संबंधित निर्माणों की अनुमति नियमों के पालन और कथित अतिक्रमणों पर आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय महत्वपूर्ण होगा।

  • भोपाल निगम परिषद में ऑडिट आपत्तियों पर घमासान, एमआईसी सदस्य और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने; बदहाल सड़कों का मुद्दा एजेंडे से गायब

    भोपाल निगम परिषद में ऑडिट आपत्तियों पर घमासान, एमआईसी सदस्य और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने; बदहाल सड़कों का मुद्दा एजेंडे से गायब


    भोपाल । भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक में ऑडिट आपत्तियों के बावजूद भुगतान किए जाने का मुद्दा गरमा गया। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने वित्तीय मामलों पर सवाल उठाते हुए वर्ष 2024-25 और 2026-27 की ऑडिट आपत्तियों के बावजूद किए गए भुगतानों का हिसाब मांगा। इस पर मेयर इन काउंसिल यानी एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने जवाब देते हुए कहा कि भुगतान नियमानुसार किए गए हैं और कोई दस्तावेज नहीं छिपाया गया है। सवाल-जवाब के दौरान दोनों के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई। बैठक में बजट और विकास कार्यों से जुड़े कई प्रस्ताव चर्चा के लिए रखे जाने हैं लेकिन शहर की बदहाल सड़कों और गड्ढों जैसे जनहित के मुद्दे एजेंडे में शामिल नहीं होने पर विपक्ष ने नाराजगी जताई।

    नगर निगम परिषद का सम्मेलन आईएसबीटी स्थित मीटिंग हॉल में शुरू हुआ। बैठक के प्रारंभ में परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने सरकार द्वारा नियुक्त 12 एल्डरमैन और नए निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार का परिचय कराया। अहिरवार ने तीन दिन पहले ही पदभार संभाला है। बैठक में महापौर मालती राय भी मौजूद रहीं। कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने छुट्टी के दिन परिषद का सम्मेलन बुलाए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने निगम एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि छुट्टी के दिन सदन का संचालन नहीं किया जा सकता। इस पर अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने उन्हें समझाइश दी जिसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।

    प्रश्नकाल के दौरान ऑडिट आपत्तियों से जुड़े भुगतानों का मामला उठा। नेता प्रतिपक्ष ने संबंधित वित्तीय मामलों पर सवाल करते हुए जवाब मांगा तो एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने कहा कि सभी भुगतान नियमों के अनुसार किए गए हैं और किसी तरह की जानकारी छिपाई नहीं गई है। इसी दौरान वर्ष 2026-27 के प्रावधानिक बजट में प्रस्तावित राशि से तैयार योजना के आय-व्यय पर भी सवाल किया गया। शुक्ला ने प्रश्न में बताई गई 108 करोड़ रुपये की राशि पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नगर निगम का प्रावधानिक बजट 3938.45 करोड़ रुपये का है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल हाउसिंग फॉर ऑल योजना का बजट ही लगभग 300 से 400 करोड़ रुपये के बीच है। इसके बाद उन्होंने बजट से संबंधित जानकारी देना शुरू किया।

    बैठक के एजेंडे में नगर निगम के नए मुख्यालय के सर्विस ब्लॉक को 10 साल के लिए देने और इसके बाद अगले 10 साल के लिए नवीनीकरण से जुड़ा प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा गर्ल्स कॉलेज के पास स्थित सोन चिरैया हॉकर्स कॉर्नर के संचालन और अमृत 2.0 योजना के लिए 493.49 करोड़ रुपये का ऋण लेने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होनी है। न्यू मार्केट मल्टीलेवल पार्किंग के हॉल को किराए पर देने का प्रस्ताव भी परिषद के सामने रखा गया है। इन प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान पार्षदों की ओर से सवाल उठाए जाने की संभावना है।

    दूसरी ओर विपक्ष ने शहर की बदहाल सड़कों और बारिश के बाद खराब हुई अंदरूनी सड़कों का मुद्दा एजेंडे में शामिल नहीं होने पर नाराजगी जताई। विपक्ष का कहना है कि सड़कें और गड्ढे आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानी से जुड़े मुद्दे हैं और इन पर परिषद में चर्चा होनी चाहिए। पार्षदों की ओर से शहर में वैध और अवैध होर्डिंग्स सहित अन्य नागरिक समस्याओं पर भी सवाल उठाए जाने की संभावना है। ऐसे में बैठक में वित्तीय प्रस्तावों के साथ शहर की बुनियादी सुविधाओं और जनता से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चा भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसे में 16 मौतों के बाद बड़ा फैसला, हर मृतक के परिवार के एक सदस्य को मिलेगी नगर निगम में नौकरी

    ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसे में 16 मौतों के बाद बड़ा फैसला, हर मृतक के परिवार के एक सदस्य को मिलेगी नगर निगम में नौकरी


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के पास हुए दर्दनाक ट्रक हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को अब रोजगार केGwalior Accident, Sheetla Mata Temple, Municipal Corporation Job, Madhya Pradesh News, Road Safety Investigation जरिए सहारा देने की तैयारी है। ग्वालियर नगर निगम परिषद ने निर्णय लिया है कि हादसे में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिवार के एक सदस्य को नगर निगम में आउटसोर्सिंग के माध्यम से नौकरी दी जाएगी। इसके साथ ही हादसे में घायल हुए लोगों की मदद करने पर भी सहमति बनी है। नगर निगम परिषद में इस मुद्दे पर शोक प्रस्ताव के दौरान चर्चा हुई और भारतीय जनता पार्टी तथा कांग्रेस के पार्षद पीड़ित परिवारों की सहायता के फैसले पर एकमत नजर आए।

    18 अक्टूबर की देर रात शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार के पास हुए हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया था। चीनौर रोड पर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालु सड़क किनारे कतार में खड़े थे। इसी दौरान चीनौर की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक ढलान पर अनियंत्रित हो गया और लोगों को अपनी चपेट में लेता चला गया। इस दर्दनाक घटना में 16 लोगों की मौत हो गई जबकि 42 लोग घायल हुए। मृतकों में पुरुषों के साथ महिला और बच्चे भी शामिल थे। हादसे के बाद प्रभावित परिवारों के सामने अपनों को खोने के दुख के साथ आर्थिक और पारिवारिक मुश्किलें भी खड़ी हो गईं।

    नगर निगम परिषद में पीड़ित परिवारों की स्थिति को देखते हुए रोजगार उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। हर मृतक के परिवार के एक सदस्य को आउटसोर्सिंग पर नौकरी देने का उद्देश्य परिवार को नियमित आय का सहारा उपलब्ध कराना है। हादसे के कारण जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है उनके लिए यह सहायता महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि नौकरी की प्रक्रिया कब शुरू होगी और पात्र परिवारों के सदस्यों का चयन किस तरह किया जाएगा इस बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

    नगर निगम सभापति मनोज सिंह तोमर ने पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। परिषद के फैसले को हादसे से प्रभावित लोगों के साथ खड़े होने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। घायलों को भी सहायता देने की बात कही गई है। हादसे के बाद कई परिवार इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में आर्थिक मदद और रोजगार संबंधी सहायता उन्हें आगे की जिंदगी संभालने में सहारा दे सकती है।

    दूसरी ओर महापौर डॉ. शोभा सिकरवार ने हादसे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब मंदिर तक दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित थी तो धान से भरा ट्रक वहां तक कैसे पहुंच गया। उन्होंने सुरक्षा में संभावित चूक की जांच कराने की मांग की ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। हादसे के समय ट्रक पुलिस चेकपोस्ट को तोड़ते हुए श्रद्धालुओं को कुचलकर मंदिर की बाहरी दीवार और प्रवेश द्वार से टकरा गया था। टक्कर के कारण दीवार ढह गई और कुछ लोग मलबे में दब गए।

    घटना के बाद घायलों को जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों ने पुलिस व्यवस्था पर लापरवाही के आरोप भी लगाए। पुलिस ने ट्रक चालक और मालिक को गिरफ्तार किया था। चालक ने पूछताछ में ट्रक के ब्रेक फेल होने की बात कही थी। हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई और सिटी एसपी को हटाने के साथ आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। अब नगर निगम के रोजगार संबंधी फैसले से पीड़ित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है जबकि सुरक्षा में चूक और हादसे के वास्तविक कारणों की जांच भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

  • से पहले ग्वालियर में सफाई व्यवस्था सुधारने की तैयारी, ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक खुलेंगे, 286 वाहनों से होगा कचरा संग्रहण

    से पहले ग्वालियर में सफाई व्यवस्था सुधारने की तैयारी, ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक खुलेंगे, 286 वाहनों से होगा कचरा संग्रहण


    ग्वालियर । दीपावली के त्योहार पर ग्वालियर शहर में घरों और दुकानों से निकलने वाले कचरे का समय पर उठाव सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने विशेष तैयारी शुरू कर दी है। त्योहार के दौरान बाजारों और रिहायशी इलाकों में कचरे की मात्रा बढ़ने की संभावना को देखते हुए कचरा ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं। टिपर वाहनों से रात में भी कचरा उठाया जाएगा और जरूरत के अनुसार प्रत्येक वाहन के दो से तीन फेरे लगवाए जाएंगे। नगर निगम का उद्देश्य है कि त्योहार के दौरान किसी भी वार्ड में कचरा जमा न हो और शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित न होने पाए।

    अपर आयुक्त टी. प्रतीक राव ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डिपो प्रभारियों के साथ सफाई व्यवस्था की समीक्षा करते हुए जरूरी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि कचरा ट्रांसफर स्टेशन देर रात तक चालू रखे जाएं ताकि टिपर वाहनों को कचरा खाली करने के लिए इंतजार न करना पड़े। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त ड्राइवरों की व्यवस्था भी की जाएगी। इससे रात में कचरा संग्रहण का काम जारी रखने और वाहनों के अतिरिक्त फेरे लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। निगम ने कचरा संग्रहण वाहनों को ग्रीन नेट से ढककर ले जाने के निर्देश भी दिए हैं।

    सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नगर निगम 29 नए टिपर वाहन अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इन वाहनों के जुड़ने के बाद सक्रिय वाहनों की संख्या बढ़कर 286 होने की बात कही गई है। अतिरिक्त वाहनों से कचरा संग्रहण की क्षमता बढ़ सकती है और अलग-अलग वार्डों में सफाई कार्य को गति मिल सकती है। हालांकि केवल वाहनों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ नियमित फेरे लगाना और कचरे को समय पर ट्रांसफर स्टेशन तक पहुंचाना भी जरूरी रहेगा।

    नगर निगम ने कचरा संग्रहण में लापरवाही रोकने के लिए वाहनों के वजन की जांच करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि टिपर वाहन कम कचरा लेकर ट्रांसफर स्टेशन न पहुंचें। इसके लिए कचरा संग्रहण के बाद वाहन का वजन कराया जाएगा और ट्रांसफर स्टेशन पहुंचने पर दोबारा वजन जांचने की व्यवस्था की जाएगी। यदि दोनों वजन में अंतर पाया जाता है तो संबंधित ड्राइवर हेल्पर और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कचरा संग्रहण की निगरानी करना और जिम्मेदारी तय करना है।

    दीपावली के दौरान बाजारों में खरीदारी और घरों की सफाई के कारण सामान्य दिनों की तुलना में अधिक कचरा निकल सकता है। ऐसे में समय पर कचरा नहीं उठने से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी बढ़ने की आशंका रहती है। नगर निगम ने इसी चुनौती को देखते हुए रात में भी सफाई कार्य जारी रखने की योजना बनाई है। अतिरिक्त फेरे और देर रात तक खुले रहने वाले ट्रांसफर स्टेशन इस व्यवस्था का अहम हिस्सा होंगे।

    हालांकि शहर के कई इलाकों में पहले से कचरे के ढेर लगे होने और सड़कों पर गंदगी फैलने की शिकायतों के बीच निगम की तैयारियों की प्रभावशीलता पर भी नजर रहेगी। नई व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्देशों का पालन कितना नियमित रूप से होता है और प्रत्येक वार्ड में कचरे का उठाव समय पर हो पाता है या नहीं। दीपावली से पहले नगर निगम के सामने सफाई व्यवस्था सुधारने और त्योहार के दौरान शहर को साफ रखने की चुनौती है।

  • 16 मौतों से प्रभावित परिवारों के लिए बड़ा सहारा, सातऊं समिति उठाएगी 40 परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च

    16 मौतों से प्रभावित परिवारों के लिए बड़ा सहारा, सातऊं समिति उठाएगी 40 परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार पर हुए दर्दनाक हादसे से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए ग्राम सातऊं शीतला माता कल्याण समिति आगे आई है। समिति ने मृतकों के परिजनों और घायलों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही हादसे से प्रभावित 40 परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च उठाने की भी घोषणा की गई है। इस फैसले से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है जो हादसे के बाद आर्थिक और पारिवारिक संकट का सामना कर रहे हैं।

    18 अक्टूबर की रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच हुए इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया जबकि घायल लोगों और उनके परिजनों के सामने इलाज तथा रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी चुनौतियां खड़ी हो गईं। पीड़ित परिवारों की स्थिति और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समिति ने सहायता देने की योजना तैयार की है। इसके लिए अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई जिसमें सदस्यों ने सर्वसम्मति से राहत संबंधी निर्णय लिए।

    समिति के फैसले के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं हादसे में घायल हुए लोगों के परिवारों को 10 हजार रुपये की मदद देने का निर्णय लिया गया है। इस सहायता का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहारा देना है। किसी परिवार के लिए अचानक अपने कमाने वाले सदस्य या प्रियजन को खो देना बेहद कठिन परिस्थिति होती है। ऐसे समय में सामाजिक संगठनों की ओर से मिलने वाली सहायता उन्हें कुछ राहत दे सकती है।

    समिति ने प्रभावित परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च उठाने का भी निर्णय लिया है। इस योजना के तहत 40 प्रभावित परिवारों को लाभ देने की बात कही गई है। शादी जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक आयोजन का खर्च उठाना कई परिवारों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है। हादसे के बाद जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है उनके लिए यह सहायता महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि सहायता प्राप्त करने वाले परिवारों की पहचान और खर्च से जुड़ी प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

    इस संबंध में आयोजित बैठक में समिति अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर के साथ मजबूत सिंह गजराज सिंह जितेंद्र सिंह और कृष्णकांत सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। बैठक में हादसे से प्रभावित परिवारों की परिस्थितियों पर चर्चा की गई और उनकी मदद के लिए सामूहिक रूप से काम करने का संकल्प लिया गया। समिति के सदस्यों ने सहायता संबंधी निर्णय सर्वसम्मति से लिए ताकि पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाई जा सके।

    शीतला माता मंदिर हादसे ने ग्वालियर में कई परिवारों को गहरे दुख और कठिनाइयों में डाल दिया है। ऐसे में आर्थिक मदद के साथ बेटियों की शादी का खर्च उठाने का फैसला प्रभावित परिवारों के लिए सामाजिक सहयोग का उदाहरण है। अब सहायता किस प्रक्रिया के तहत और कब तक परिवारों तक पहुंचाई जाएगी इस पर नजर रहेगी। फिलहाल समिति के इस निर्णय से हादसे के पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। 

  • ग्वालियर मंदिर हादसे की जांच तेज, प्रशासन ने मांगे दस्तावेज और सबूत, 16 लोगों की मौत के कारणों का होगा खुलासा

    ग्वालियर मंदिर हादसे की जांच तेज, प्रशासन ने मांगे दस्तावेज और सबूत, 16 लोगों की मौत के कारणों का होगा खुलासा


    ग्वालियर । ग्वालियर के ऐतिहासिक शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार पर हुए दर्दनाक ट्रक हादसे की मजिस्ट्रियल जांच शुरू हो गई है। हादसे में 16 लोगों की मौत के बाद अब प्रशासन घटना के कारणों और संभावित लापरवाही का पता लगाने में जुट गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रुचिका चौहान ने जांच की जिम्मेदारी अपर जिला दंडाधिकारी यानी ADM सीबी प्रसाद को सौंपी है। प्रशासन ने आम लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से अपील की है कि वे घटना से जुड़ी जानकारी दस्तावेज और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराएं ताकि जांच में सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल किया जा सके।

    यह हादसा 18 अक्टूबर की रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच हुआ था। जानकारी के अनुसार मंदिर के मुख्य द्वार के पास तेज रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक की चपेट में आने से 16 लोगों की जान चली गई थी। घटना के बाद से ही हादसे की परिस्थितियों और संभावित चूक को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब मजिस्ट्रियल जांच के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे कौन से कारण जिम्मेदार रहे। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटना से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    प्रशासन ने हादसे से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 26 से 28 अक्टूबर तक तीन दिन निर्धारित किए हैं। जांच अधिकारी ADM सीबी प्रसाद के अनुसार ऐसे व्यक्ति जिनका मामले से कोई व्यक्तिगत हित या विवाद नहीं है वे घटना से संबंधित जानकारी और साक्ष्य दे सकते हैं। इसके लिए प्रत्यक्षदर्शी और अन्य संबंधित लोग 26 27 और 28 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक ADM न्यायालय कक्ष क्रमांक 201 ग्वालियर में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकेंगे। प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य घटना से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जानकारी एकत्र करना है।

    जांच में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हादसे के समय मंदिर के आसपास मौजूद लोगों के पास घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी हो सकती है। इसके अलावा उपलब्ध दस्तावेज तस्वीरें और वीडियो भी जांच के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। खबर में लाइव वीडियो को भी जांच का संभावित आधार बताया गया है। ऐसे दृश्य उपलब्ध होने पर उनसे हादसे के समय ट्रक की स्थिति घटनास्थल की परिस्थितियों और घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि किसी भी वीडियो या अन्य सामग्री की प्रामाणिकता और उपयोगिता जांच के दौरान परखी जाएगी।

    मजिस्ट्रियल जांच का उद्देश्य केवल हादसे की परिस्थितियों का पता लगाना ही नहीं बल्कि संभावित लापरवाही और सुरक्षा से जुड़े सवालों की पड़ताल करना भी है। मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है इसलिए प्रवेश द्वार के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और वाहनों की आवाजाही जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच अधिकारी उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों के आधार पर मामले की कड़ियों को जोड़ेंगे। प्रशासन की अपील है कि जिन लोगों के पास घटना से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी है वे निर्धारित तारीख और समय पर अपने साक्ष्य प्रस्तुत करें।

    शीतला माता मंदिर हादसे ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब लोगों की नजर मजिस्ट्रियल जांच पर रहेगी कि हादसे के वास्तविक कारण क्या सामने आते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम सुझाए जाते हैं। फिलहाल जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आने तक किसी संभावित कारण या जिम्मेदारी को निश्चित मानना उचित नहीं होगा।

  • ग्वालियर में ऑनलाइन जॉब के नाम पर साइबर फ्रॉड, पैसे वापस मांगे तो तंजानिया की छात्रा को किया ब्लॉक, FIR दर्ज

    ग्वालियर में ऑनलाइन जॉब के नाम पर साइबर फ्रॉड, पैसे वापस मांगे तो तंजानिया की छात्रा को किया ब्लॉक, FIR दर्ज


    ग्वालियर । ग्वालियर में ऑनलाइन पार्ट टाइम नौकरी के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। यहां पढ़ाई कर रही तंजानिया की 22 वर्षीय छात्रा को घर बैठे कमाई का झांसा देकर कथित तौर पर 50 हजार रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने रजिस्ट्रेशन फीस फाइल चार्ज और वेरिफिकेशन सहित अलग-अलग प्रक्रियाओं के नाम पर छात्रा से पैसे ट्रांसफर कराए। 15 और 16 अक्टूबर 2026 के दौरान Paytm UPI के जरिए कुल 13 बार में रकम भेजी गई। जब छात्रा को न नौकरी मिली और न ही उसके पैसे वापस किए गए तो उसे ठगी का अहसास हुआ। रकम वापस मांगने पर आरोपियों ने उसे ब्लॉक कर दिया। शिकायत के बाद सिरोल थाना पुलिस ने ई-जीरो FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के मुताबिक तंजानिया की रहने वाली हेरियथ जस्टीना ग्वालियर के एक विश्वविद्यालय में स्टूडेंट वीजा पर पढ़ाई कर रही हैं। वह सिरोल थाना क्षेत्र की एमके सिटी टाउनशिप में अपने भाई के साथ रहती हैं। पढ़ाई का खर्च उठाने में मदद के लिए वह इंटरनेट पर पार्ट टाइम और वर्क फ्रॉम होम नौकरी तलाश रही थीं। इसी दौरान 15 अक्टूबर को उन्हें घर बैठे काम करने और अच्छी कमाई का ऑफर देने वाला संदेश मिला। छात्रा ने इसे नौकरी का वास्तविक अवसर समझा और आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी।

    आरोप है कि नौकरी देने के नाम पर उनसे अलग-अलग बहाने बनाकर भुगतान मांगा जाने लगा। कभी फाइल चार्ज तो कभी वेरिफिकेशन फीस और कभी अन्य औपचारिकताओं के लिए पैसे जमा करने को कहा गया। नौकरी मिलने की उम्मीद में छात्रा ने आरोपियों के बताए तरीके से Paytm UPI के माध्यम से भुगतान किया। 15 और 16 अक्टूबर के बीच 13 अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल 50 हजार रुपये ट्रांसफर हो गए। लगातार रकम मांगने के बावजूद जब नौकरी शुरू नहीं हुई तो छात्रा को संदेह होने लगा।

    इसके बाद छात्रा ने अपने पैसे वापस मांगने की कोशिश की। आरोप है कि रकम लौटाने के बजाय उससे और पैसे मांगे जाने लगे। जब उसने आगे भुगतान करने से इनकार किया और अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने उसे ब्लॉक कर दिया। इस तरह नौकरी पाने की उम्मीद में भेजी गई रकम वापस नहीं मिल सकी। इसके बाद छात्रा ने साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की।

    सिरोल थाना पुलिस ने शुक्रवार को भारतीय न्याय संहिता के तहत ई-जीरो FIR दर्ज की है। अब पुलिस छात्रा के Paytm ट्रांजैक्शन और आरोपियों के साथ हुई बातचीत की चैट हिस्ट्री खंगाल रही है। जिन बैंक खातों में रकम भेजी गई है उनके खाताधारकों की जानकारी जुटाने के साथ आरोपियों की पहचान करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। डिजिटल भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि रकम किन खातों में पहुंची और ठगी में कौन लोग शामिल हैं।

    डीएसपी साइबर मनीष यादव के मुताबिक छात्रा ने हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत की थी जिसके बाद सिरोल थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। यह घटना एक बार फिर ऑनलाइन नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी के खतरे को सामने लाती है। नौकरी देने से पहले रजिस्ट्रेशन या वेरिफिकेशन के नाम पर बार-बार पैसे मांगने वाले ऑफर से सतर्क रहना जरूरी है। किसी भी अनजान व्यक्ति या कंपनी को भुगतान करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए। फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही आरोपियों की पहचान और ठगी से जुड़े बाकी तथ्यों का खुलासा हो सकेगा।

  • ₹150 करोड़ की जमीन डील में फिरोज खान से जुड़ा नया VIDEO, अस्पताल में भर्ती कस्तूरीबाई से परिजनों को मिलने से रोकने का आरोप

    ₹150 करोड़ की जमीन डील में फिरोज खान से जुड़ा नया VIDEO, अस्पताल में भर्ती कस्तूरीबाई से परिजनों को मिलने से रोकने का आरोप


    इंदौर । इंदौर में करोड़ों रुपये की संपत्ति से जुड़े मामले में हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान को लेकर एक नया वीडियो सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ने की बात कही जा रही है। मामला मगरखेड़ी की कस्तूरीबाई की पारिवारिक जमीन से जुड़ा है जिसका करीब 150 करोड़ रुपये में सौदा होने की बात सामने आई थी। इस सौदे में फिरोज खान को गवाह बताया जा रहा है। अब अस्पताल से जुड़े एक कथित वीडियो ने पूरे मामले में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि बीमारी के दौरान अस्पताल में भर्ती कस्तूरीबाई से उनके परिवार के लोगों को मिलने से रोकने के लिए लिखित सूचना दी गई थी।

    जानकारी के मुताबिक जमीन के सौदे के कुछ दिन बाद कस्तूरीबाई की तबीयत बिगड़ गई थी जिसके बाद उन्हें इंदौर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी दौरान कथित तौर पर अस्पताल को सूचना दी गई कि कस्तूरीबाई से किसी को मिलने न दिया जाए। इस घटनाक्रम को जमीन के सौदे से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि मुलाकात पर रोक लगाने का निर्देश किसने दिया था और इसके पीछे क्या कारण था इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    सामने आए वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि अस्पताल में पुलिस सुरक्षा के बीच फिरोज खान का करीबी बताया जा रहा एक व्यक्ति मौजूद था। वीडियो में एक अन्य पुलिसकर्मी के नजर आने की बात भी कही गई है। आरोप है कि फिरोज खान के कहने पर अस्पताल को लिखित सूचना दी गई थी ताकि कस्तूरीबाई से उनके परिजन मुलाकात न कर सकें। लेकिन इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान और उनकी वास्तविक भूमिका को लेकर भी अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    इस घटनाक्रम के बाद कई अहम सवाल उठ रहे हैं। यदि अस्पताल में मुलाकात पर रोक लगाने के लिए लिखित सूचना दी गई थी तो उसे किसने दिया था और उसका आधार क्या था। क्या यह कदम कस्तूरीबाई की चिकित्सा संबंधी जरूरतों के कारण उठाया गया था या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। क्या इस कथित रोक का जमीन के सौदे से कोई संबंध था। फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी है और बिना जांच के किसी व्यक्ति की भूमिका को दोषपूर्ण मानना उचित नहीं होगा।

    मामले में लोकायुक्त पुलिस की जांच जारी होने की जानकारी दी गई है। जांच के दौरान जमीन के सौदे में फिरोज खान की बताई जा रही भूमिका अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान हुए घटनाक्रम और कथित लिखित सूचना जैसे पहलुओं को खंगाला जा सकता है। साइबर सेल की मदद से वीडियो से जुड़े तथ्यों की जांच किए जाने की भी बात कही गई है। जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि वीडियो कब और कहां बनाया गया था उसमें कौन लोग दिखाई दे रहे हैं और क्या उसमें सामने आ रहे दावों की पुष्टि करने वाले दस्तावेज उपलब्ध हैं।

    फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति को लेकर भी लोकायुक्त की जांच चल रही है। इसी जांच से जुड़े अन्य तथ्यों में देवास के दो प्लॉट खरीदने के लिए उनकी पत्नी मां और बेटी द्वारा ऑनलाइन बोली लगाए जाने की बात सामने आई थी। दोनों प्लॉट की बोली करीब 92 लाख रुपये में तय होने और रजिस्ट्री सहित अन्य खर्च जोड़कर कुल लागत लगभग एक करोड़ रुपये होने का उल्लेख किया गया है। इन सभी मामलों में जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल कस्तूरीबाई से मुलाकात रोकने के कथित निर्देश और जमीन के सौदे के बीच संबंध जांच का अहम पहलू बना हुआ है।

  • VIT भोपाल की वेबसाइट और विज्ञापनों की भी होगी जांच, NHRC ने पूछा- कैंपस की असली लोकेशन छात्रों को स्पष्ट बताई जाती है या नहीं

    VIT भोपाल की वेबसाइट और विज्ञापनों की भी होगी जांच, NHRC ने पूछा- कैंपस की असली लोकेशन छात्रों को स्पष्ट बताई जाती है या नहीं


    भोपाल । वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी VIT भोपाल विश्वविद्यालय के नाम और उसके वास्तविक परिसर की लोकेशन को लेकर विवाद गहरा गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC ने इस मामले में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए अतिरिक्त रिपोर्ट और कार्रवाई प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 29 नवंबर निर्धारित की गई है। अब इस मामले में विश्वविद्यालय के नाम के साथ उसकी वेबसाइट प्रॉस्पेक्टस और विज्ञापनों में परिसर का पता किस तरह बताया जाता है यह भी जांच के दायरे में रहेगा।

    यह शिकायत राष्ट्रीय छात्र संघ यानी NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय के नाम में भोपाल शब्द होने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को परिसर की वास्तविक लोकेशन को लेकर भ्रम हो सकता है। शिकायतकर्ता के मुताबिक विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर सीहोर जिले के कोठरी कलां में भोपाल-इंदौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। ऐसे में दाखिले के लिए जानकारी जुटाने वाले विद्यार्थियों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि विश्वविद्यालय का परिसर वास्तव में कहां है।

    NHRC ने 22 अक्टूबर को मामले पर विचार करते हुए राज्य सरकार की रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा की। आयोग ने माना कि VIT भोपाल का नाम राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित किया गया है और विश्वविद्यालय की स्थापना मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन अधिनियम 2007 के तहत हुई है। हालांकि आयोग का सवाल केवल नाम की वैधानिकता तक सीमित नहीं है। आयोग ने यह जानना चाहा है कि जब विश्वविद्यालय का कानूनी नाम भोपाल है और उसका वास्तविक परिसर दूसरे जिले में स्थित है तो क्या इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में स्थान को लेकर गलत धारणा बनने की आशंका है।

    आयोग के अनुसार राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इसलिए अतिरिक्त रिपोर्ट के जरिए स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट प्रॉस्पेक्टस और विज्ञापनों में परिसर की वास्तविक लोकेशन के उल्लेख को लेकर भी जानकारी मांगी है। इस पहलू को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले से पहले विद्यार्थी और अभिभावक अक्सर वेबसाइट और प्रचार सामग्री के आधार पर निर्णय लेते हैं। ऐसे में संस्थान का नाम और परिसर का पता स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है ताकि किसी तरह की गलतफहमी न हो।

    शिकायत में विश्वविद्यालय परिसर में कथित अनधिकृत क्लिनिक संचालित होने और पूर्व में अशांति की घटनाओं से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे। आयोग ने पाया कि राज्य सरकार की रिपोर्ट में इन आरोपों की जांच की स्थिति का उल्लेख नहीं है। अब सरकार को यह भी बताना होगा कि इन मामलों की जांच हुई है या नहीं और यदि हुई है तो उसके निष्कर्ष क्या रहे हैं। फिलहाल इन आरोपों को लेकर आयोग ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और न ही किसी पक्ष की गलती प्रमाणित की है।

    इस मामले में अगला कदम राज्य सरकार की अतिरिक्त रिपोर्ट के बाद सामने आएगा। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के वैधानिक नाम और वास्तविक लोकेशन के बीच संबंध प्रचार सामग्री में दी जाने वाली जानकारी और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इसके बाद आयोग उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकता है। फिलहाल विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि विश्वविद्यालय के नाम को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद विद्यार्थियों को परिसर की वास्तविक लोकेशन की जानकारी किस तरह दी जा रही है।
    शॉर्ट डिस्क्रिप्शन
    VIT भोपाल के नाम और सीहोर जिले में स्थित परिसर की लोकेशन को लेकर NHRC ने मध्यप्रदेश सरकार से अतिरिक्त रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने वेबसाइट और विज्ञापनों में पते की जानकारी के साथ कथित अनधिकृत क्लिनिक और अशांति से जुड़े आरोपों की जांच पर भी जवाब मांगा है।
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    VIT Bhopal, NHRC, NSUI, Madhya Pradesh News, Higher Education1. VIT भोपाल की वेबसाइट और विज्ञापनों की भी होगी जांच, NHRC ने पूछा- कैंपस की असली लोकेशन छात्रों को स्पष्ट बताई जाती है या नहीं
    मूल खबर
    वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी VIT भोपाल विश्वविद्यालय के नाम और उसके वास्तविक परिसर की लोकेशन को लेकर विवाद गहरा गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC ने इस मामले में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए अतिरिक्त रिपोर्ट और कार्रवाई प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 29 नवंबर निर्धारित की गई है। अब इस मामले में विश्वविद्यालय के नाम के साथ उसकी वेबसाइट प्रॉस्पेक्टस और विज्ञापनों में परिसर का पता किस तरह बताया जाता है यह भी जांच के दायरे में रहेगा।

    यह शिकायत राष्ट्रीय छात्र संघ यानी NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय के नाम में भोपाल शब्द होने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को परिसर की वास्तविक लोकेशन को लेकर भ्रम हो सकता है। शिकायतकर्ता के मुताबिक विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर सीहोर जिले के कोठरी कलां में भोपाल-इंदौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। ऐसे में दाखिले के लिए जानकारी जुटाने वाले विद्यार्थियों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि विश्वविद्यालय का परिसर वास्तव में कहां है।

    NHRC ने 22 अक्टूबर को मामले पर विचार करते हुए राज्य सरकार की रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा की। आयोग ने माना कि VIT भोपाल का नाम राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित किया गया है और विश्वविद्यालय की स्थापना मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन अधिनियम 2007 के तहत हुई है। हालांकि आयोग का सवाल केवल नाम की वैधानिकता तक सीमित नहीं है। आयोग ने यह जानना चाहा है कि जब विश्वविद्यालय का कानूनी नाम भोपाल है और उसका वास्तविक परिसर दूसरे जिले में स्थित है तो क्या इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में स्थान को लेकर गलत धारणा बनने की आशंका है।

    आयोग के अनुसार राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इसलिए अतिरिक्त रिपोर्ट के जरिए स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट प्रॉस्पेक्टस और विज्ञापनों में परिसर की वास्तविक लोकेशन के उल्लेख को लेकर भी जानकारी मांगी है। इस पहलू को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले से पहले विद्यार्थी और अभिभावक अक्सर वेबसाइट और प्रचार सामग्री के आधार पर निर्णय लेते हैं। ऐसे में संस्थान का नाम और परिसर का पता स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है ताकि किसी तरह की गलतफहमी न हो।

    शिकायत में विश्वविद्यालय परिसर में कथित अनधिकृत क्लिनिक संचालित होने और पूर्व में अशांति की घटनाओं से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे। आयोग ने पाया कि राज्य सरकार की रिपोर्ट में इन आरोपों की जांच की स्थिति का उल्लेख नहीं है। अब सरकार को यह भी बताना होगा कि इन मामलों की जांच हुई है या नहीं और यदि हुई है तो उसके निष्कर्ष क्या रहे हैं। फिलहाल इन आरोपों को लेकर आयोग ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और न ही किसी पक्ष की गलती प्रमाणित की है।

    इस मामले में अगला कदम राज्य सरकार की अतिरिक्त रिपोर्ट के बाद सामने आएगा। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के वैधानिक नाम और वास्तविक लोकेशन के बीच संबंध प्रचार सामग्री में दी जाने वाली जानकारी और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इसके बाद आयोग उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकता है। फिलहाल विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि विश्वविद्यालय के नाम को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद विद्यार्थियों को परिसर की वास्तविक लोकेशन की जानकारी किस तरह दी जा रही है।

  • पहले प्यार और शादी का भरोसा फिर होटल में दुष्कर्म का आरोप, ग्वालियर में युवती की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को दबोचा

    पहले प्यार और शादी का भरोसा फिर होटल में दुष्कर्म का आरोप, ग्वालियर में युवती की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को दबोचा

    ग्वालियर । ग्वालियर में शादी का झांसा देकर युवती के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। सिरोल थाना क्षेत्र में दर्ज इस मामले में पीड़िता ने आरोप लगाया है कि युवक ने पहले उससे प्रेम संबंध बनाए और शादी करने का भरोसा दिलाया। इसके बाद वह उसे बहाने से होटल ले गया जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता के मुताबिक जब उसने घटना के बाद शादी की बात कही तो आरोपी अपने वादे से मुकर गया और उसे डराने धमकाने लगा। इसके बाद युवती ने पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान रोहित राजौरिया के रूप में हुई है जो सिरोल की फूटी कॉलोनी का निवासी बताया गया है। शिकायत में युवती ने आरोप लगाया कि रोहित ने लगातार शादी का भरोसा देकर उसका विश्वास जीता था। इसी भरोसे के चलते वह उसके साथ जाने के लिए तैयार हुई। पीड़िता के अनुसार 15 अक्टूबर को आरोपी उसे मंदिर जाने के बहाने कलारी चौराहा स्थित होटल सिरोल ले गया था।

    शिकायत के मुताबिक होटल में दोपहर करीब 11:30 बजे से 1 बजे के बीच आरोपी ने शादी का झांसा देकर युवती के साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता का आरोप है कि उस समय आरोपी ने शादी करने का भरोसा दिलाया था। हालांकि घटना के बाद जब उसने युवक से शादी करने के लिए कहा तो उसका रवैया बदल गया। आरोप है कि उसने शादी करने से इनकार कर दिया और युवती को डराने धमकाने लगा। इससे पीड़िता को महसूस हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है।

    इसके बाद युवती ने हिम्मत जुटाकर सिरोल थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच शुरू की। बुधवार देर रात आरोपी रोहित राजौरिया के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जानकारी जुटाई जा सके।

    पुलिस अब पीड़िता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। ऐसे मामलों में शिकायत के प्रत्येक पहलू की जांच करना और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करना जरूरी होता है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

    इस घटना ने एक बार फिर प्रेम संबंधों में शादी का झूठा भरोसा देकर धोखा देने के आरोपों से जुड़े मामलों को चर्चा में ला दिया है। पुलिस की ओर से फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी और पूछताछ की जानकारी सामने आई है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच में मिलने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।