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  • खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में बदलाव की तैयारी, चौड़ा होगा प्रवेश द्वार; निकली 150 किलो चांदी

    खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में बदलाव की तैयारी, चौड़ा होगा प्रवेश द्वार; निकली 150 किलो चांदी


    मध्य प्रदेश । इंदौर के विश्वप्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा बदलाव किया जाने वाला है। आगामी सिंहस्थ और भविष्य में बढ़ने वाली भक्तों की संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह के मुख्य द्वार को चौड़ा करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत वर्तमान प्रवेश द्वार को लगभग 10 फीट चौड़ा बनाया जाएगा, जिससे दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम और व्यवस्थित हो सकेगी।

    मंदिर प्रशासन के अनुसार हाल ही में आयोजित मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में समिति अध्यक्ष एवं इंदौर कलेक्टर Shivam Verma तथा नगर निगम आयुक्त Kshitij Singhal सहित अन्य अधिकारियों ने श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया।

    निर्णय के बाद विकास कार्यों की तैयारी शुरू कर दी गई है। सबसे पहले गर्भगृह के मुख्य द्वार पर लगी लगभग 150 किलो चांदी को सावधानीपूर्वक हटाया गया है। यह चांदी वर्षों से मंदिर के प्रवेश द्वार की शोभा बढ़ा रही थी। अब निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसके पुनः उपयोग या स्थापना को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा।

    मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट के अनुसार, गर्भगृह का द्वार चौड़ा होने से श्रद्धालुओं को भगवान गणेश के दर्शन करने में अधिक सुविधा मिलेगी। वर्तमान में विशेष अवसरों और त्योहारों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे दर्शन व्यवस्था प्रभावित होती है। सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भवन की संरचनात्मक मजबूती का परीक्षण भी कराया जा रहा है। इसके लिए Shri Govindram Seksaria Institute of Technology and Science (एसजीएसआईटीएस) की विशेषज्ञ टीम ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया है। इंजीनियरों ने दीवारों, द्वार और आसपास की संरचना की तकनीकी जांच की है, ताकि विस्तार कार्य के दौरान मंदिर की मूल संरचना सुरक्षित रहे।

    मंदिर प्रशासन का कहना है कि परीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद ही निर्माण कार्य की अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी। यदि रिपोर्ट अनुकूल रहती है तो आगामी दिनों में गर्भगृह के द्वार को चौड़ा करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

    खजराना गणेश मंदिर न केवल इंदौर बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में यह विकास कार्य मंदिर की धार्मिक गरिमा बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं को बेहतर और सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • देवास में युवक ने फांसी लगाकर दी जान, सुबह पत्नी ने देखा तो मचा हड़कंप

    देवास में युवक ने फांसी लगाकर दी जान, सुबह पत्नी ने देखा तो मचा हड़कंप


    देवास । देवास शहर के जवाहर नगर क्षेत्र में बुधवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां 26 वर्षीय युवक ने कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। युवक का शव घर में फंदे पर लटका मिला। घटना का पता उस समय चला जब सुबह उसकी पत्नी की नींद खुली और उसने पति को फांसी के फंदे पर झूलते देखा। यह दृश्य देखकर वह घबरा गई और तुरंत परिजनों को सूचना दी।

    मृतक की पहचान अजय जाटव (26) के रूप में हुई है। वह जवाहर नगर क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रह रहा था और मूल रूप से उत्तर प्रदेश का निवासी था। परिजनों के अनुसार अजय पिछले तीन वर्षों से एक निजी कंपनी में हेल्पर के रूप में कार्यरत था। उसके परिवार में पत्नी और एक छोटा बेटा है।

    घटना की जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और अजय को तत्काल जिला अस्पताल लेकर गए। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की अचानक मौत से परिवार में मातम का माहौल है और परिजन गहरे सदमे में हैं।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अजय ने अपनी पत्नी की साड़ी से फंदा बनाकर यह कदम उठाया। हालांकि उसने आत्महत्या जैसा कठोर फैसला क्यों लिया, इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं होने की जानकारी सामने आई है।

    सूचना मिलने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस परिजनों, परिचितों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि आत्महत्या के पीछे की वजह का पता लगाया जा सके।

    फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया।

  • लोकायुक्त के भीतर कथित रिश्वतखोरी का खुलासा, सिस्टम की पारदर्शिता पर बहस तेज

    लोकायुक्त के भीतर कथित रिश्वतखोरी का खुलासा, सिस्टम की पारदर्शिता पर बहस तेज


    जबलपुर। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली लोकायुक्त संस्था खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। एक स्टिंग ऑपरेशन में लोकायुक्त संगठन के कुछ कर्मचारियों पर रिश्वत लेकर ट्रैप मामलों को कमजोर करने और आरोपियों को राहत पहुंचाने की कथित डील करते हुए सामने आने का दावा किया गया है। इस खुलासे ने उस व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिसका काम भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है।

    स्टिंग ऑपरेशन के दौरान रिपोर्टर ने रिश्वत लेते पकड़े गए सरकारी कर्मचारियों के रिश्तेदार बनकर लोकायुक्त के कर्मचारियों से संपर्क किया। बातचीत में कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर ऐसे तरीके बताए, जिनके जरिए ट्रैप मामलों की जांच को प्रभावित किया जा सकता है। इनमें वॉयस सैंपल की प्रक्रिया को प्रभावित करना, जांच को वर्षों तक लंबित रखना और गवाहों को मैनेज करने जैसे दावे शामिल हैं।

    भोपाल लोकायुक्त में पदस्थ टेक्नीशियन अमित विश्वकर्मा के साथ हुई मुलाकात में कथित तौर पर यह दावा किया गया कि जांच को आरोपी की सेवानिवृत्ति तक लंबा खींचा जा सकता है, जिससे पेंशन और अन्य सेवा लाभों पर तत्काल प्रभाव न पड़े। बातचीत के दौरान वॉयस सैंपल को प्रभावित करने और जांच प्रक्रिया को धीमा करने के लिए लाखों रुपये की मांग किए जाने का भी दावा किया गया।

    स्टिंग में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में आरोपी को पहले से यह बताया जा सकता है कि उसे वॉयस सैंपल के दौरान क्या बोलना है और क्या नहीं। कथित तौर पर गवाहों को भी प्रभावित करने की बात कही गई, ताकि जांच की दिशा बदली जा सके। इस पूरी प्रक्रिया के लिए 3 लाख से 5 लाख रुपये तक की डील की चर्चा सामने आई।

    सागर में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल यशवंत सिंह के साथ हुई बातचीत में भी जांच को प्रभावित करने, भाषा और बोलने के तरीके में बदलाव कर वॉयस सैंपल को कमजोर करने तथा फॉरेंसिक रिपोर्ट पर असर डालने जैसे दावे किए गए। उन्होंने कथित तौर पर जांच को कई महीनों तक टालने और दस्तावेजों को मैनेज कराने की बात भी कही।

    वहीं, लोकायुक्त के अन्य कर्मचारियों के नाम भी सामने आए, जिन पर कथित तौर पर आरोपियों और अधिकारियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के आरोप लगे हैं। एक अन्य कर्मचारी ने तो कथित रूप से 3 लाख रुपये में पूरा मामला “मैनेज” करने का दावा करते हुए पहले किस्त के रूप में रकम देने की बात कही।

    यह खुलासा इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि लोकायुक्त जैसी संस्था पर आम लोगों का भरोसा भ्रष्टाचार के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई के लिए टिका होता है। यदि जांच एजेंसियों के भीतर ही ऐसे नेटवर्क सक्रिय हैं, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन आरोपों और स्टिंग में सामने आए तथ्यों पर क्या कार्रवाई होती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे तंत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता पर व्यापक बहस खड़ी कर सकता है।

  • इंदौर में पानी संकट पर बवाल, ‘पानी दो-पानी दो’ के नारे लगाकर चक्काजाम

    इंदौर में पानी संकट पर बवाल, ‘पानी दो-पानी दो’ के नारे लगाकर चक्काजाम


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत अब जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। शहर के कई वार्डों और कॉलोनियों में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग पिछले चार दिनों से नहाने तक के लिए पानी नहीं जुटा पा रहे हैं। इसी के विरोध में शुक्रवार को कई इलाकों में जोरदार प्रदर्शन और चक्काजाम देखने को मिला।

    पालदा चौराहे पर कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में रहवासी सड़क पर उतर आए और “पानी दो-पानी दो” के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम प्रशासन, टैंकर व्यवस्था और नर्मदा लाइन की धीमी सप्लाई को लेकर नाराजगी जताई। इस दौरान सड़क पर लंबा जाम लग गया और कई घंटों तक सिटी बसों में यात्री फंसे रहे।

    इसी तरह दीनदयाल उपाध्याय चौराहा और सुखलिया जोन-5 क्षेत्र में भी स्थानीय लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई इलाकों में पहले जो निःशुल्क पानी वितरण व्यवस्था थी, उसे बंद कर दिया गया है, जिससे संकट और बढ़ गया है। लोगों को अब मजबूरी में महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है।

    वार्ड-27 में पार्षद राजू भदौरिया के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। यहां भी महापौर और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। लोगों का कहना है कि पानी की आपूर्ति नियमित नहीं है और टैंकर भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराए जा रहे।

    इससे पहले भी कांग्रेस ने शहर के सभी 22 जोनल कार्यालयों पर पानी संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतरकर चक्काजाम और धरना दे चुके हैं। हाल ही में बड़ी संख्या में लोग “पानी दो-पानी दो” के नारे लगाते हुए पैदल विधायक रमेश मेंदोला के निवास तक पहुंच गए थे, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया था।

    वर्तमान स्थिति में सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई वार्डों में नर्मदा लाइन की सप्लाई अब तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है। स्थानीय पार्षद कुणाल सोलंकी ने बताया कि नगर निगम से टैंकरों की कमी के कारण पानी वितरण व्यवस्था चरमराई हुई है और लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ देर के लिए हालात तनावपूर्ण भी रहे, लेकिन एंबुलेंस को रास्ता देकर प्रदर्शनकारियों ने मानवता का परिचय दिया और उसे तुरंत निकलने दिया गया। फिलहाल शहर में जल संकट को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है और प्रशासन पर तत्काल समाधान का दबाव भी तेज हो गया है।

  • ग्वालियर में दुष्कर्म का मामला, अश्लील वीडियो की धमकी से पीड़िता दहशत में

    ग्वालियर में दुष्कर्म का मामला, अश्लील वीडियो की धमकी से पीड़िता दहशत में


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर के थाटीपुर थाना क्षेत्र से एक गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है, जहां 20 वर्षीय युवती ने पड़ोस में रहने वाले एक युवक पर घर में घुसकर दुष्कर्म करने और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, पीड़िता अपनी मां के साथ किराए के मकान में रहती थी। दिसंबर माह में उसकी मां का निधन हो गया था, जिसके बाद वह घर में अकेली रह गई थी, जबकि उसके पिता ड्राइवर होने के कारण अक्सर बाहर रहते हैं। इसी स्थिति का फायदा उठाकर आरोपी युवक ने कथित रूप से वारदात को अंजाम दिया।

    पीड़िता ने पुलिस को बताया कि पड़ोस में रहने वाला युवक अभिषेक धनौलिया अक्सर उसके घर आता-जाता था और परिवार के संपर्क में था। इसी दौरान उसकी नीयत बिगड़ गई और उसने युवती को अकेला पाकर वारदात की साजिश रची।

    करीब एक महीने पहले रात लगभग 12 बजे आरोपी कथित रूप से युवती के कमरे में घुस आया और जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस दौरान उसने पीड़िता का अश्लील वीडियो भी बना लिया। घटना के बाद युवती डर के कारण चुप रही और किसी को कुछ नहीं बताया।

    इसके बाद आरोपी लगातार वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती का शोषण करता रहा। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने कई बार युवती के साथ दुष्कर्म किया और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। 9 मई 2026 की रात भी उसने कथित रूप से वारदात को दोहराया।

    लगातार बढ़ते दबाव और धमकियों के बीच पीड़िता ने आखिरकार अपने पिता को पूरी घटना बताई। इसके बाद वह अपने पिता के साथ गोला का मंदिर थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, धमकी और ब्लैकमेलिंग की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारी का कहना है कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • संदिग्ध फूड पॉइजनिंग: एक मौत और तीन लोग बीमार, जांच में जुटा प्रशासन

    संदिग्ध फूड पॉइजनिंग: एक मौत और तीन लोग बीमार, जांच में जुटा प्रशासन


    मध्य प्रदेश । सतना जिले के उचेहरा ब्लॉक में फूड पॉइजनिंग का दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसमें 7 साल के बच्चे की मौत हो गई, जबकि परिवार के तीन अन्य सदस्य गंभीर रूप से बीमार हैं। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और स्वास्थ्य विभाग जांच में जुट गया है।

    परिजनों के मुताबिक, 20 मई की रात परिवार ने घर में बनी करेले की सब्जी और रोटी खाई थी। इसके बाद सभी ने बेल का शरबत भी पिया। कुछ ही घंटों बाद सभी की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। सात साल के किशुन को तेज उल्टी-दस्त शुरू हुए और हालत इतनी बिगड़ गई कि सुबह अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी मौत हो गई।

    परिवार के अन्य सदस्य दादा बाबूलाल दहिया, दादी शांति बाई और भाई शिवम भी उल्टी-दस्त और चक्कर की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें से दो की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है।

    डॉक्टरों के अनुसार यह स्पष्ट रूप से फूड पॉइजनिंग का मामला है और सभी मरीजों में सीवियर डायरिया के लक्षण पाए गए हैं। वहीं प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि जहर किस वजह से फैला।

    जांच में तीन अलग-अलग संभावनाएं सामने आ रही हैं। पहली आशंका यह है कि घर के पीछे लगी बगिया में जिन करेले के पौधों पर हाल ही में कीटनाशक का छिड़काव किया गया था, उन्हीं सब्जियों का उपयोग खाना बनाने में किया गया। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यह सबसे मजबूत वजह हो सकती है।

    दूसरी तरफ परिजनों का कहना है कि सब्जी खाने के बाद बेल का शरबत पीने के तुरंत बाद सभी की हालत बिगड़ी, जिससे शरबत की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं गांव के कुछ लोग कुएं के दूषित पानी को भी संभावित कारण मान रहे हैं, हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने शुरुआती तौर पर इस थ्योरी को कम संभावना वाला बताया है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पीएचई और स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंच चुकी है। कुएं के पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और बचे हुए स्रोतों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को सतर्क रहने, पानी उबालकर पीने और कीटनाशक लगे खेतों की सब्जियों का उपयोग तुरंत बंद करने की सलाह दी है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारण की पुष्टि हो सकेगी।

  • सीहोर में कुपोषण का बड़ा खुलासा: 605 बच्चे गंभीर स्थिति में

    सीहोर में कुपोषण का बड़ा खुलासा: 605 बच्चे गंभीर स्थिति में


    मध्यप्रदेश । सीहोर जिले में बच्चों के पोषण स्तर को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जिला अस्पताल में महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग द्वारा ‘एक कदम सुपोषण की ओर’ अभियान के तहत कुपोषित बच्चों को पोषण टोकरियां वितरित की गईं, लेकिन सरकारी आंकड़े ही इस दावे पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

    जिले में फिलहाल 605 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित (Severe Acute Malnutrition – SAM) श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें तत्काल विशेष पोषण और चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा सुपोषण सुधार के दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, जमीनी हकीकत इससे काफी अलग नजर आती है।

    केंद्र सरकार के पोषण ट्रैकर ऐप पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों के वजन और ऊंचाई की नियमित एंट्री की जाती है, लेकिन इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई स्थानों पर लक्ष्य पूरा करने के लिए आंकड़े वास्तविकता से अलग दर्ज किए जा रहे हैं। नतीजतन, कई बच्चे जो ऐप पर सामान्य या कम कुपोषित दिखाए जाते हैं, वे अस्पताल पहुंचने पर गंभीर कुपोषण की स्थिति में पाए जाते हैं।

    स्थिति और अधिक गंभीर इसलिए हो जाती है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। संसाधनों की कमी, खराब या अनुपलब्ध मोबाइल उपकरण और दूरस्थ इलाकों में नेटवर्क की समस्या के कारण पोषण ट्रैकर ऐप पर सटीक डेटा एंट्री करना मुश्किल हो जाता है। इसके चलते कागजों पर स्थिति भले ही सुधरी हुई दिखती हो, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत रहती है।

    जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में लगातार कुपोषण और एनीमिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बनी हुई है, जो इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर सुधार की गति बेहद धीमी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आंकड़ों के भरोसे स्थिति को बेहतर नहीं माना जा सकता, बल्कि वास्तविक पोषण और चिकित्सा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन 605 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को तत्काल उपचार और नियमित पोषण सपोर्ट की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय पर हस्तक्षेप नहीं किया गया तो इन बच्चों का स्वास्थ्य और अधिक बिगड़ सकता है।

    वहीं, महिला बाल विकास विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत समय-समय पर पोषण टोकरियां वितरित की जा रही हैं। शहरी बाल विकास परियोजना अधिकारी बीएल मालवीय ने बताया कि अभियान का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाना है और इस दौरान स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया है।

    हालांकि, जमीनी स्तर पर मौजूद चुनौतियां और आंकड़ों की विसंगति यह संकेत देती हैं कि केवल वितरण कार्यक्रमों से कुपोषण जैसी गंभीर समस्या का समाधान संभव नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक डेटा पारदर्शिता, नियमित मॉनिटरिंग और ग्रामीण स्तर पर मजबूत स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित नहीं की जातीं, तब तक स्थिति में बड़ा बदलाव मुश्किल है।

  • रॉन्ग साइड से आया वाहन बना हादसे की वजह, बड़वानी में चार घायल

    रॉन्ग साइड से आया वाहन बना हादसे की वजह, बड़वानी में चार घायल


    मध्य प्रदेश । बड़वानी जिले में सड़क सुरक्षा की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है, जहां बुधवार देर रात दो अलग-अलग सड़क हादसों में कुल चार लोग घायल हो गए। दोनों ही घटनाओं में स्थानीय लोगों की तत्परता से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    पहला हादसा शहर के सांवरिया मंदिर के सामने हुआ, जहां दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालु एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अर्चना पति निलेश, हंसिका और मंथन बाइक पर सवार होकर मंदिर से लौट रहे थे। इसी दौरान रॉन्ग साइड से तेज रफ्तार में आ रहे एक छोटा हाथी वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि तीनों लोग सड़क पर गिरकर घायल हो गए।

    स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों की मदद की और 108 एम्बुलेंस को सूचना दी। घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि इस मार्ग पर कई वाहन चालक लगातार लापरवाही से रॉन्ग साइड ड्राइविंग करते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

    दूसरा हादसा राजघाट रोड स्थित सर्किट हाउस के पास हुआ, जहां ईंट भट्टे से निकलने वाले घने धुएं ने एक युवक की जान पर भारी संकट खड़ा कर दिया। कुकरा बसाहट निवासी संजय वर्मा ने बताया कि ईंट भट्टे का धुआं सड़क पर फैलने के कारण दृश्यता काफी कम हो जाती है।

    इसी दौरान 17 वर्षीय अखिलेश केवट, जो मछली पकड़कर बाइक से घर लौट रहे थे, धुएं के कारण रास्ता ठीक से न देख पाने की वजह से दुर्घटना का शिकार हो गए। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें साईं अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में रेत और मिट्टी से भरे डंपरों की लगातार आवाजाही के कारण भी भारी मात्रा में धूल उड़ती रहती है, जिससे सड़क पर दृश्यता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ईंट भट्टों और भारी वाहनों पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।

    जिला अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर के अनुसार, सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद भर्ती किया गया है और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। दोनों हादसों ने एक बार फिर क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • आवारा कुत्तों का आतंक: जबलपुर में मासूम बहनों पर हमला, इलाके में दहशत

    आवारा कुत्तों का आतंक: जबलपुर में मासूम बहनों पर हमला, इलाके में दहशत


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के पाटन तहसील अंतर्गत आगासौद गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक आवारा कुत्ते ने घर के बाहर खेल रही मासूम बच्ची पर हमला कर दिया और उसे बुरी तरह नोच डाला। यह घटना उस समय हुई जब तीन वर्षीय बच्ची प्राची घर के बाहर खेल रही थी।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्ची की चीख सुनकर उसकी मां सुलोचना बाहर दौड़ी और लाठी लेकर कुत्ते को भगाने की कोशिश की। जैसे ही मां ने बड़ी बेटी को किसी तरह बचाया, कुत्ता अचानक घर के अंदर घुस गया और वहां जमीन पर सो रही छह माह की दूसरी बच्ची पर झपट पड़ा। कुत्ते ने मासूम को जबड़े में दबोच लिया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    मां की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह कुत्ते को भगाकर दोनों बच्चियों को उसके चंगुल से छुड़ाया। इस हमले में दोनों बच्चियां गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिनके चेहरे, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे घाव आए हैं।

    परिजन तुरंत दोनों को पाटन स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर उन्हें जबलपुर रेफर कर दिया गया। फिलहाल दोनों मासूमों का इलाज शहर के एक निजी अस्पताल में जारी है और डॉक्टरों की टीम उनकी हालत पर नजर बनाए हुए है।

    घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में आवारा श्वानों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन नगर निगम की ओर से प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। कई इलाकों में लोग बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डरने लगे हैं।

    इसी बीच स्वास्थ्य विभाग ने भी कुत्ते के काटने की स्थिति में तुरंत उपचार लेने की अपील की है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में समय पर रेबीज का टीका लगवाना बेहद जरूरी है, अन्यथा गंभीर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

    यह घटना एक बार फिर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की समस्या और उसके समाधान पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

  • ग्वालियर में घरेलू विवाद के बाद दर्दनाक हादसा: पत्नी ने फांसी लगाई, इलाज के दौरान मौत

    ग्वालियर में घरेलू विवाद के बाद दर्दनाक हादसा: पत्नी ने फांसी लगाई, इलाज के दौरान मौत



    ग्वालियर। ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र स्थित सुरेश नगर सरकारी मल्टी में पति-पत्नी के बीच देर से घर आने को लेकर हुआ विवाद एक दर्दनाक घटना में बदल गया। बहस के बाद पत्नी ने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, जिससे परिवार में मातम छा गया।

    देर से घर आने पर शुरू हुआ विवाद
    जानकारी के मुताबिक, रविवार रात करीब 11 बजे रामचंद्र आदिवासी घर पहुंचे थे। देर से आने पर पत्नी सोनम ने उनसे सवाल किए, जिसके बाद दोनों के बीच बच्चों के सामने बहस हो गई।

    विवाद इतना बढ़ गया कि रामचंद्र गुस्से में घर से बाहर चले गए। इसी दौरान पत्नी सोनम कमरे में गई और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।

    बच्चों ने दी दर्दनाक सूचना
    कुछ देर बाद बड़ा बेटा ओम रोते हुए बाहर आया और पिता को बताया कि मां पंखे से लटकी हुई है। यह सुनकर पिता तुरंत घर की ओर दौड़े।दरवाजा अंदर से बंद होने के कारण परिजनों ने पड़ोसियों की मदद से दीवार तोड़ी और अंदर दाखिल हुए।

    अस्पताल में इलाज के दौरान मौत
    परिजन सोनम को तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने करीब 26 मिनट के इलाज के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद बच्चों और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

    पुलिस ने शुरू की जांच
    घटना की सूचना मिलने पर थाटीपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मर्ग कायम कर लिया।थाना प्रभारी विपेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला घरेलू विवाद का प्रतीत हो रहा है। परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

    घरेलू विवाद बना जानलेवा
    यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि छोटे-छोटे घरेलू विवाद भी कई बार गंभीर और दुखद परिणाम दे सकते हैं। पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है।