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  • ब्यूटी पार्लर से किराना और कोचिंग तक पर निगम की नजर, भोपाल में 1 लाख प्रॉपर्टी की होगी जांच; कार्रवाई की तैयारी तेज

    ब्यूटी पार्लर से किराना और कोचिंग तक पर निगम की नजर, भोपाल में 1 लाख प्रॉपर्टी की होगी जांच; कार्रवाई की तैयारी तेज


    भोपाल भोपाल में अपने घर से कारोबार करने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यदि किसी रिहाइशी मकान में ब्यूटी पार्लर सैलून किराना दुकान कोचिंग सेंटर बुटीक क्लिनिक या किसी अन्य तरह की व्यावसायिक गतिविधि संचालित हो रही है तो अब वह नगर निगम की जांच के दायरे में आ सकती है। भोपाल नगर निगम ने ऐसे भवनों की पहचान के लिए पूरे शहर में व्यापक सर्वे की तैयारी शुरू कर दी है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक राजधानी में करीब एक लाख ऐसी प्रॉपर्टी हो सकती हैं जहां आवासीय भवनों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। सर्वे के दौरान यदि भवन उपयोग और संबंधित नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संपत्ति मालिकों को नोटिस दिया जाएगा और नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में सीलिंग जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।

    नगर निगम ने शहर को 21 जोन में बांटकर विशेष सर्वे टीमों का गठन किया है। ये टीमें छोटे मोहल्लों से लेकर बड़ी कॉलोनियों और प्रमुख इलाकों तक रिहाइशी भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की जानकारी जुटाएंगी। जांच के दौरान संपत्ति कर रिकॉर्ड भवन के वास्तविक उपयोग सड़क की चौड़ाई और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। इसके अलावा वाटर बॉडी और ग्रीन बेल्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी भवनों के इस्तेमाल की स्थिति देखी जाएगी। निगम का लक्ष्य करीब 10 से 15 दिनों में सर्वे पूरा करने का है और जहां नियमों का उल्लंघन सामने आएगा वहां मौके पर ही नोटिस देने की तैयारी है।

    नगर निगम के रिकॉर्ड में करीब 65 हजार व्यावसायिक संपत्तियां दर्ज हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे मकान बताए जा रहे हैं जहां कारोबार तो चल रहा है लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए जरूरी अनुमति या निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। यही वजह है कि निगम अब रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच अंतर को भी जांचने जा रहा है।

    इस पूरी कार्रवाई के पीछे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी अहम हैं। 5 अगस्त की सुनवाई में अदालत ने अवैध निर्माण और रिहाइशी भवनों के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े मामलों में कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। इसके बाद नगर निगम ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। निगम को 15 सितंबर तक कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करनी है। ऐसे में सर्वे को समयसीमा के भीतर पूरा करने की तैयारी की जा रही है।

    हालांकि व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अचानक बड़े पैमाने पर सीलिंग की कार्रवाई से छोटे कारोबारियों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो सकता है। व्यापारियों का सुझाव है कि ब्यूटी पार्लर सैलून कोचिंग किराना जैसी छोटी गतिविधियों को राहत दी जाए और प्रमुख सड़कों पर मिक्स लैंड यूज की व्यवस्था लागू की जाए। इसके तहत तय शर्तों के साथ एक ही क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। पार्किंग ट्रैफिक प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए चौड़ी सड़कों पर नियंत्रित व्यावसायिक उपयोग की व्यवस्था को भी समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।

    भोपाल में लंबे समय से मास्टर प्लान लागू नहीं होने को भी मौजूदा स्थिति की बड़ी वजह बताया जा रहा है। भोपाल की विकास योजना का अंतिम प्रकाशन वर्ष 2005 में हुआ था और इसके बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि शहर के विस्तार और बढ़ती कारोबारी जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं होने के कारण कई लोगों ने आवासीय क्षेत्रों में ही कारोबार शुरू कर दिया।

    व्यापारियों का दावा है कि इन गतिविधियों से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है और कई कारोबारी व्यावसायिक दर से संपत्ति कर तथा अन्य शुल्क भी जमा करते हैं। अनुमान है कि व्यापक कार्रवाई होने पर करीब पांच लाख लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अब नगर निगम के सर्वे पर शहर के हजारों कारोबारियों और मकान मालिकों की नजर है। आने वाले दिनों में सर्वे के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से साफ होगा कि कितनी संपत्तियां नियमों के दायरे में आती हैं और कितनों पर कार्रवाई की स्थिति बनती है।

  • MP में रजिस्ट्री सिस्टम में बड़ा बदलाव, अधिकारी खाली नहीं तो दूसरे जिले में जाएगी फाइल; घर बैठे दस्तावेज पंजीयन से घटेगा इंतजार

    MP में रजिस्ट्री सिस्टम में बड़ा बदलाव, अधिकारी खाली नहीं तो दूसरे जिले में जाएगी फाइल; घर बैठे दस्तावेज पंजीयन से घटेगा इंतजार


    मध्य प्रदेश  मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी और अन्य दस्तावेजों की रजिस्ट्री कराने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सरकार ने फेसलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को अधिक तेज और प्रभावी बनाने के लिए नियमों में बदलाव किया है। अब प्रदेश का कोई भी सब रजिस्ट्रार किसी भी जिले की फेसलेस रजिस्ट्री और अन्य फेसलेस दस्तावेजों का पंजीयन कर सकेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसी एक जिले में अधिकारी पर काम का दबाव अधिक होने के कारण रजिस्ट्री अटकने की स्थिति कम होगी। सिस्टम जरूरत के अनुसार दस्तावेज को ऐसे सब रजिस्ट्रार के पास भेज सकेगा जहां काम का भार अपेक्षाकृत कम हो। इससे लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होने और आम लोगों का इंतजार कम होने की उम्मीद है।

    रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 की धारा 6 के तहत किए गए संशोधन के बाद पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों का अधिकार क्षेत्र प्रदेश के सभी उपजिलों तक बढ़ा दिया गया है। हालांकि यह सुविधा केवल फेसलेस रजिस्ट्री और अन्य फेसलेस दस्तावेजों के पंजीयन के लिए लागू होगी। फरवरी 2026 में शुरू किए गए साइबर सब रजिस्ट्रार कार्यालय के माध्यम से अब तक प्रदेश में 10 हजार से अधिक दस्तावेजों का फेसलेस पंजीयन किया जा चुका है। नई व्यवस्था के बाद इस प्रक्रिया को और गति मिलने की उम्मीद है।

    इस व्यवस्था में लोगों को सबसे बड़ा फायदा यह मिलेगा कि रजिस्ट्री के लिए बार बार कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी। किसी जिले में काम अधिक होने पर संबंधित दस्तावेज दूसरे उपलब्ध सब रजिस्ट्रार को भेजा जा सकेगा। यानी अधिकारी की अनुपलब्धता या अधिक कार्यभार के कारण फाइल के लंबे समय तक अटके रहने की समस्या कम होगी। इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज होने के साथ सरकारी संसाधनों का भी बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।

    फेसलेस व्यवस्था के तहत रजिस्टर्ड लीज पट्टा विलेख प्रॉपर्टी एग्रीमेंट प्रशासन बंध पत्र शपथ पत्र दत्तक ग्रहण से जुड़े दस्तावेज बैंक गारंटी का नवीनीकरण विक्रय प्रमाण पत्र वसीयत से जुड़े दस्तावेज तलाक विलेख क्षतिपूर्ति बंध पत्र और शेयर आवंटन पत्र सहित करीब 75 प्रकार के दस्तावेजों का पंजीयन किया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से देश के किसी दूसरे जिले में बैठकर और विदेश से भी दस्तावेज पंजीकृत कराने की सुविधा उपलब्ध हो सकती है।

    फेसलेस रजिस्ट्री के लिए सुरक्षा और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया भी अनिवार्य रखी गई है। पक्षकारों को आधार नंबर देना होगा और वर्चुअल प्रक्रिया के दौरान एआई सिस्टम के जरिए वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। इसमें व्यक्ति को सिर दाएं बाएं और ऊपर नीचे घुमाने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद वोटर आईडी पासपोर्ट पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे पहचान पत्रों में से किसी एक की जानकारी ली जाएगी। एआई सिस्टम वीडियो आधार फोटो और पहचान पत्र की तस्वीर का मिलान करेगा। सभी जानकारी सही पाए जाने के बाद ही साइबर रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    इसके अलावा पक्षकार को यह घोषणा भी करनी होगी कि वह किसी दबाव में नहीं है और अपनी इच्छा से इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों के जरिए पंजीयन करा रहा है। इसके लिए ई केवाईसी और ई साइन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से रजिस्ट्री कार्यालयों में भीड़ घटेगी और आम नागरिकों को ज्यादा तेज पारदर्शी और सुविधाजनक सेवा मिल सकेगी। प्रॉपर्टी लेनदेन बढ़ने के बीच संपदा 2.0 पोर्टल में किए गए बदलावों से रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में भी इसे अहम कदम माना जा रहा है।

  • बहन से मुलाकात के बाद लौट रहा था युवक, रास्ते में चलती बाइक से गिरा, अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

    बहन से मुलाकात के बाद लौट रहा था युवक, रास्ते में चलती बाइक से गिरा, अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित किया


    देवास देवास में बुधवार को एक दुखद घटना सामने आई जहां बहन से मुलाकात कर घर लौट रहे 30 वर्षीय युवक की चलती बाइक से गिरने के बाद मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों ने साइलेंट हार्ट अटैक की आशंका जताई है। हालांकि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है जबकि युवक के दोस्तों के भी अस्पताल पहुंचने से माहौल गमगीन हो गया।

    जानकारी के अनुसार मानकुंड निवासी धर्मेंद्र मालवीय एक निजी कंपनी में कार्यरत था। बुधवार को वह अपनी बहन से मिलने देवास आया था। परिजनों के मुताबिक मुलाकात के बाद वह बाइक से अपने घर लौट रहा था। घर से कुछ ही दूरी पर पहुंचने के दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह चलती बाइक से सड़क पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों और परिजनों ने उसे तुरंत संभाला लेकिन वह बेसुध अवस्था में था।

    घटना के तुरंत बाद परिजन धर्मेंद्र को उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसकी जांच की लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अचानक हुई इस घटना से परिवार और परिचितों को गहरा सदमा लगा है।

    जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. कमल प्रजापति के अनुसार प्रथम दृष्टया मामला साइलेंट हार्ट अटैक का प्रतीत हो रहा है। कई बार व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट लक्षण के हार्ट अटैक आ जाता है जिससे वह अचानक बेहोश होकर गिर सकता है। हालांकि डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि अभी यह केवल प्रारंभिक आशंका है और मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही की जाएगी। जांच के लिए विसरा भी सुरक्षित रख लिया गया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर विस्तृत परीक्षण किया जा सके।

    परिजनों ने बताया कि धर्मेंद्र की शादी करीब चार से पांच वर्ष पहले हुई थी और वह निजी कंपनी में नौकरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। उसकी अचानक मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। घटना की सूचना मिलते ही इंदौर से उसके कई मित्र भी जिला अस्पताल पहुंच गए और परिजनों को सांत्वना दी।

    पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत साइलेंट हार्ट अटैक से हुई या इसके पीछे कोई अन्य चिकित्सीय कारण था। फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रहे हैं।

  • कवच योजना बनी किसानों की नई उम्मीद, डिफॉल्टर किसानों को फिर मिलेगा खेती का सहारा

    कवच योजना बनी किसानों की नई उम्मीद, डिफॉल्टर किसानों को फिर मिलेगा खेती का सहारा


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। सहकारी बैंकों और समितियों में हुई वित्तीय अनियमितताओं के कारण डिफॉल्टर घोषित हुए हजारों किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार कवच योजना लागू करने की तैयारी में है। इस योजना के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल सकती है। योजना का उद्देश्य उन किसानों को दोबारा आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ना है जिन्होंने अपना कर्ज और खाद-बीज का बकाया समय पर जमा कर दिया था लेकिन बैंक अधिकारियों और समिति कर्मचारियों की गड़बड़ी के कारण उनकी राशि बैंक खातों में दर्ज नहीं हो सकी।

    जानकारी के अनुसार प्रदेश में ऐसे करीब पांच हजार किसान हैं जिन्होंने सहकारी बैंकों और समितियों में अपनी बकाया राशि जमा कर दी थी लेकिन कुछ बैंक प्रबंधकों और कर्मचारियों ने वह राशि बैंक में जमा करने के बजाय उसका गबन कर लिया। किसानों ने भरोसे के आधार पर बिना रसीद के पैसा जमा कराया था क्योंकि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि बाद में आधिकारिक रसीद उपलब्ध करा दी जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और बैंक रिकॉर्ड में राशि जमा नहीं होने के कारण किसान डिफॉल्टर घोषित हो गए।

    डिफॉल्टर घोषित होने का सबसे बड़ा नुकसान किसानों को यह हुआ कि वे दोबारा सहकारी बैंकों से कृषि ऋण लेने के पात्र नहीं रहे। इसके साथ ही उन्हें खाद बीज और अन्य कृषि सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ा। इससे उनकी खेती प्रभावित हुई और आर्थिक स्थिति भी कमजोर होती चली गई। कई किसानों ने लगातार इस समस्या को सरकार के सामने उठाया जिसके बाद सहकारिता विभाग ने समाधान के लिए कवच योजना तैयार की।

    योजना के तहत ऐसे किसानों पर दर्ज बकाया राशि का भार राज्य सरकार और अपेक्स बैंक मिलकर वहन करेंगे ताकि किसानों के नाम से डिफॉल्टर का रिकॉर्ड हटाया जा सके। इसके बाद प्रभावित किसान फिर से सहकारी बैंकों से ऋण ले सकेंगे और खाद बीज सहित अन्य कृषि सुविधाओं का लाभ भी उठा पाएंगे। सरकार का मानना है कि किसानों की गलती न होने के बावजूद उन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए इसलिए यह योजना उनके हितों की रक्षा के लिए लाई जा रही है।

    सहकारिता विभाग के अनुसार जिन बैंक प्रबंधकों और समिति कर्मचारियों पर गबन के आरोप सिद्ध हुए हैं उनके खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। कई मामलों में राशि की वसूली की प्रक्रिया जारी है। हालांकि जब तक पूरा पैसा वापस नहीं आता तब तक किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने यह अंतरिम व्यवस्था तैयार की है ताकि उनकी खेती और आजीविका प्रभावित न हो।

    आज होने वाली कैबिनेट बैठक में इस योजना के अलावा विभिन्न विभागों की कई योजनाओं को वर्ष 2031 तक जारी रखने के प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान की तैयारियों की भी समीक्षा होगी। यह अभियान 7 अगस्त से शुरू किया जाएगा जिसमें मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में जाकर योजनाओं की निगरानी और जनता से सीधा संवाद करने के निर्देश दिए जाएंगे।

    कवच योजना को किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है क्योंकि इससे उन लोगों को नई उम्मीद मिलेगी जो वर्षों से बिना किसी गलती के बैंकिंग व्यवस्था की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे थे। सरकार का यह कदम न केवल किसानों का भरोसा बहाल करेगा बल्कि सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

  • इंदौर में दर्दनाक हादसा, दोस्तों का इंतजार कर रही युवती को अज्ञात कार ने रौंदा, अस्पताल में तोड़ा दम

    इंदौर में दर्दनाक हादसा, दोस्तों का इंतजार कर रही युवती को अज्ञात कार ने रौंदा, अस्पताल में तोड़ा दम


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में शनिवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक युवती की जिंदगी छीन ली। तेजाजी नगर थाना क्षेत्र के बायपास स्थित अंडरपास के पास दोस्तों का इंतजार कर रही 29 वर्षीय युवती को तेज रफ्तार अज्ञात कार ने टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल युवती को उसके दोस्त अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन कई घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर अज्ञात वाहन और चालक की तलाश शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान महालक्ष्मी नगर निवासी 29 वर्षीय साहिबा पिता मोहम्मद अफसर के रूप में हुई है। मूल रूप से भोपाल की रहने वाली साहिबा पिछले करीब दो वर्षों से इंदौर में रहकर इवेंट मैनेजमेंट से जुड़ा काम कर रही थीं। हादसा शनिवार रात करीब 11 बजे उस समय हुआ, जब वह अपने दोस्तों के साथ भोजन करने के लिए निर्धारित स्थान पर पहुंचने की कोशिश कर रही थीं।

    जानकारी के मुताबिक साहिबा को ढाबे का सही रास्ता नहीं मिल रहा था। उन्होंने अपने दोस्त अंकुर को फोन कर लोकेशन नहीं मिलने की जानकारी दी। इस पर अंकुर ने उन्हें तेजाजी नगर अंडरपास के पास रुकने के लिए कहा और बताया कि वह कुछ ही देर में उन्हें लेने पहुंच रहा है। साहिबा अपनी एक्टिवा लेकर वहीं इंतजार करने लगीं, लेकिन इससे पहले कि उनके दोस्त वहां पहुंचते, एक तेज रफ्तार अज्ञात कार ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी।

    हादसे के बाद साहिबा गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर गईं। कुछ देर बाद जब अंकुर ने उन्हें दोबारा फोन किया तो किसी राहगीर ने कॉल रिसीव कर बताया कि उनका एक्सीडेंट हो गया है। सूचना मिलते ही अंकुर और उसका साथी सहज मौके पर पहुंचे और पहले घायल युवती को गौरव अस्पताल ले गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया।

    एमवाय अस्पताल में चिकित्सकों ने पूरी कोशिश की, लेकिन अत्यधिक चोटों के कारण रविवार तड़के करीब तीन बजे साहिबा ने दम तोड़ दिया। हादसे के बाद दोनों दोस्त अस्पताल में मौजूद रहे, लेकिन मौत की पुष्टि होने के बाद वे शव छोड़कर चले गए। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।

    घटना की सूचना मृतका के परिजनों को भी दी गई। बताया जा रहा है कि साहिबा ने हादसे से पहले अपने भाई से भी संपर्क किया था। हालांकि, जानकारी मिलने के बावजूद परिजन रातभर इंदौर नहीं पहुंचे। पुलिस के अनुसार मृतका के भाई ने प्रारंभिक बातचीत में हादसे को लेकर कुछ सवाल उठाए हैं और दोस्तों पर भी संदेह जताया है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से साहिबा का अपने परिवार से नियमित संपर्क नहीं था।

    तेजाजी नगर थाना पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि हादसे के जिम्मेदार वाहन और चालक की पहचान की जा सके। प्रारंभिक जांच में मामला हिट एंड रन का माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग के कारण सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • सावन में शिवभक्ति का महासंगम: 31 जुलाई से निकलेगी भव्य कांवड़ यात्रा भोपाल से नर्मदापुरम तक गूंजेगा हर हर महादेव

    सावन में शिवभक्ति का महासंगम: 31 जुलाई से निकलेगी भव्य कांवड़ यात्रा भोपाल से नर्मदापुरम तक गूंजेगा हर हर महादेव


    भोपाल। सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही राजधानी भोपाल शिवभक्ति के रंग में रंगने जा रही है। भगवान भोलेनाथ की आराधना को समर्पित चार दिवसीय विशाल कांवड़ यात्रा 31 जुलाई से प्रारंभ होगी। ॐ शिव सेवा भक्त मंडल के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक यात्रा में बड़ी संख्या में शिवभक्त भोपाल से नर्मदापुरम पहुंचकर मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर पदयात्रा के माध्यम से वापस राजधानी आएंगे और भगवान शिव का विधिवत जलाभिषेक करेंगे। पूरे आयोजन के दौरान हर हर महादेव और बोल बम के जयघोष से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहेगा।

    मंडल के पदाधिकारियों के अनुसार श्रद्धालुओं का जत्था 31 जुलाई शुक्रवार को दोपहर दो बजे भोपाल से नर्मदापुरम के लिए रवाना होगा। वहां मां नर्मदा के पावन तट से जल भरने के बाद श्रद्धालु कांवड़ लेकर पैदल यात्रा करते हुए भोपाल लौटेंगे। यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं बल्कि आस्था अनुशासन और सेवा भावना का भी प्रतीक मानी जाती है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

    चार दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में श्रद्धालु भजन कीर्तन मंत्रोच्चार और शिव नाम के संकीर्तन के साथ आगे बढ़ेंगे। पूरे मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां भी की गई हैं। जगह जगह पेयजल चिकित्सा और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि कांवड़ियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा भी यात्रा के दौरान सेवा कार्य किए जाएंगे।

    यात्रा का सबसे प्रमुख आयोजन 3 अगस्त सोमवार को होगा। इस दिन प्राचीन श्री पिपलेश्वर महादेव मंदिर पात्रा पुल से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए परम पूज्य बाबा बटेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेगी जहां मां नर्मदा के पवित्र जल से भगवान शिव का महाजलाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद यात्रा का समापन बड़े वाले महादेव मंदिर कायस्थपुरा में धार्मिक अनुष्ठानों और आरती के साथ होगा।

    आयोजकों ने बताया कि पूरे आयोजन के दौरान महाआरती शिव भजन रुद्राभिषेक और ॐ नमः शिवाय के मंत्रों की गूंज श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगी। सावन में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि इस दौरान भगवान शिव को नर्मदा और गंगा जैसे पवित्र जल से अभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होने की धार्मिक मान्यता है।

    मंडल ने राजधानी और आसपास के क्षेत्रों के सभी शिवभक्तों से इस पावन यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक एकता सेवा और भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का भी प्रतीक है। सावन के इस पावन अवसर पर निकलेगी यह विशाल कांवड़ यात्रा निश्चित रूप से भोपाल को शिवमय बना देगी और हर ओर हर हर महादेव के जयघोष से भक्तिमय वातावरण देखने को मिलेगा।

  • जली लाश के पीछे छिपा था खौफनाक सच फोरेंसिक एक्सपर्ट के एक सुराग ने पहुंचाया पुलिस को कातिल तक

    जली लाश के पीछे छिपा था खौफनाक सच फोरेंसिक एक्सपर्ट के एक सुराग ने पहुंचाया पुलिस को कातिल तक


    इंदौर  इंदौर में बैंककर्मी पलक केशव हत्याकांड ने यह साबित कर दिया कि किसी भी आपराधिक मामले में फोरेंसिक विज्ञान की भूमिका कितनी अहम होती है। जिस घटना को शुरुआती तौर पर आग लगने से हुई दुर्घटना माना जा रहा था वही मामला फोरेंसिक विशेषज्ञों की सतर्कता और वैज्ञानिक जांच के कारण हत्या में बदल गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले ही विशेषज्ञों ने पुलिस को स्पष्ट संकेत दे दिए थे कि युवती की मौत आग से नहीं बल्कि पहले उसकी हत्या की गई और बाद में सबूत मिटाने के लिए शव को जलाया गया।

    हरदा जिले के टिमरनी की रहने वाली पलक इंदौर में किराए के मकान में रहकर बैंक में नौकरी कर रही थी। 25 जुलाई को उसका जला हुआ शव कमरे में मिला था। शुरुआती जांच में यह माना गया कि आग लगने से उसकी मौत हुई है लेकिन जब शव पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल पहुंचा तो फोरेंसिक विशेषज्ञों ने शरीर पर मौजूद चोटों और जलने के निशानों का बारीकी से परीक्षण किया। जांच में सामने आया कि सिर गर्दन और चेहरे पर गंभीर चोटें थीं जबकि शरीर पर आग से हुए निशान मृत्यु के बाद के थे। इससे साफ हो गया कि पहले हत्या की गई और बाद में आग लगाकर इसे हादसे का रूप देने की कोशिश की गई।

    फोरेंसिक विशेषज्ञों के इस इनपुट के बाद पुलिस ने जांच का पूरा फोकस बदल दिया। तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस दतिया निवासी मयंक शाक्य तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पिछले पांच वर्षों से पलक के संपर्क में था और उससे शादी करना चाहता था। हालांकि पलक ने शादी से इनकार कर दिया था क्योंकि उसके परिवार ने उसके लिए दूसरा रिश्ता तय कर दिया था।

    आरोपी के मुताबिक वह दतिया से इंदौर पलक से मिलने पहुंचा था। दोनों पहले सराफा चौपाटी गए और वहां साथ में समय बिताया। कमरे पर लौटने के बाद जब उसने एक बार फिर शादी का प्रस्ताव रखा तो पलक ने साफ मना कर दिया। इसी बात पर दोनों के बीच विवाद हुआ और गुस्से में आकर आरोपी ने पहले पलक का गला घोंट दिया। हत्या के बाद उसने शव के ऊपरी हिस्से पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी ताकि घटना को दुर्घटना साबित किया जा सके। इतना ही नहीं उसने रसोई में गैस चूल्हे के पास शव रखकर हादसे जैसा माहौल बनाने का प्रयास भी किया और अपने जले हुए कपड़े साथ लेकर वहां से फरार हो गया।

    एमवाय अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ बजरंग कुमार सिंह ने बताया कि ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम के दौरान मिलने वाले छोटे से छोटे संकेत भी जांच की दिशा बदल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संवेदनशील मामलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी पोस्टमार्टम के समय जरूरी होनी चाहिए ताकि चिकित्सकों और जांच एजेंसियों के बीच तत्काल समन्वय स्थापित हो सके और अपराध की तह तक जल्दी पहुंचा जा सके।

    पलक हत्याकांड एक बार फिर यह साबित करता है कि आधुनिक फोरेंसिक तकनीक अपराधियों को कानून से बचने नहीं देती। वैज्ञानिक जांच और पुलिस की सतर्कता के कारण इस मामले का खुलासा बेहद कम समय में हो गया और आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच गया। यह घटना समाज के लिए भी एक संदेश है कि रिश्तों में अस्वीकार को स्वीकार करना सीखना जरूरी है क्योंकि जुनून और हिंसा केवल जीवन ही नहीं बल्कि कई परिवारों की खुशियां भी छीन लेती है।

  • मांगें पूरी होने तक नहीं लौटेंगे किसान भोपाल में पैदल मार्च के साथ सीएम हाउस घेराव की तैयारी सात दिन के राशन के साथ पहुंचे प्रदर्शनकारी

    मांगें पूरी होने तक नहीं लौटेंगे किसान भोपाल में पैदल मार्च के साथ सीएम हाउस घेराव की तैयारी सात दिन के राशन के साथ पहुंचे प्रदर्शनकारी

    भोपाल  मध्यप्रदेश में किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। मूंग की शत प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हजारों किसानों ने भोपाल की ओर कूच कर दिया। मंगलवार को राजधानी की सीमा पर मंडीदीप स्थित कलियासोत नदी के पुल के पास पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगाई थी लेकिन बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने उसे हटाते हुए भोपाल में प्रवेश कर लिया। इसके बाद किसानों का विशाल पैदल मार्च राजधानी की ओर बढ़ता गया और पूरे इलाके में जय जवान जय किसान के नारों से माहौल गूंज उठा।

    आंदोलन में शामिल किसानों का कहना है कि वे केवल प्रदर्शन करने नहीं बल्कि अपनी मांगों को पूरा करवाने के इरादे से आए हैं। उनका लक्ष्य मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना है और जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती तब तक वे वापस नहीं लौटेंगे। आंदोलन को लंबा खींचने की तैयारी के तहत किसान अपने साथ सात दिन का राशन पानी और जरूरी सामान भी लेकर पहुंचे हैं। कई किसान अपने ट्रैक्टर ट्रॉली में पहले से तैयार भोजन और दाल बाटी जैसी खाद्य सामग्री भी साथ लाए हैं ताकि आंदोलन के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि सरकार को कई बार ज्ञापन और बातचीत के माध्यम से किसानों की समस्याओं से अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। किसानों का आरोप है कि मूंग की सरकारी खरीदी सीमित होने के कारण उन्हें अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसके अलावा खाद वितरण की ई टोकन व्यवस्था भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। उनका कहना है कि तकनीकी खामियों और अव्यवस्था के चलते समय पर खाद नहीं मिल रही जिससे खेती प्रभावित हो रही है।

    भोपाल सीमा पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसानों को राजधानी में प्रवेश से रोका जा सके लेकिन किसानों के भारी दबाव के आगे बैरिकेडिंग टिक नहीं सकी। किसानों के प्रवेश के बाद पुलिस और प्रशासन पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है तथा राजधानी के कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

    आंदोलन में शामिल किसान हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़ रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की बात कह रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक फसल या एक जिले का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के अधिकारों की लड़ाई है। यदि सरकार जल्द सकारात्मक पहल नहीं करती तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

    अब सभी की नजर सरकार और किसान संगठनों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हुई है। यदि जल्द समाधान नहीं निकलता तो राजधानी में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियां भी प्रभावित होने की संभावना है।

  • राजधानी भोपाल में पुलिस की बड़ी कार्रवाई इतवारा इलाके में 200 पुलिसकर्मियों का फ्लैग ऑपरेशन गांजा समेत नशीले पदार्थ जब्त

    राजधानी भोपाल में पुलिस की बड़ी कार्रवाई इतवारा इलाके में 200 पुलिसकर्मियों का फ्लैग ऑपरेशन गांजा समेत नशीले पदार्थ जब्त


    भोपाल। राजधानी भोपाल के संवेदनशील माने जाने वाले इतवारा इलाके में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात पुलिस ने नशे के कारोबार और आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया। डीसीपी जोन तीन आयुष गुप्ता के नेतृत्व में करीब 200 पुलिसकर्मियों की टीम ने सुनियोजित तरीके से इलाके के 24 से अधिक घरों और संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। देर रात शुरू हुआ यह ऑपरेशन कई घंटों तक चलता रहा जिससे पूरे इलाके में हड़कंप की स्थिति बन गई।

    पुलिस की यह कार्रवाई पहले से तैयार रणनीति के तहत की गई। बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ अलग अलग टीमों ने एक ही समय पर कई स्थानों पर छापेमारी की ताकि किसी भी संदिग्ध को भागने या सबूत नष्ट करने का मौका न मिल सके। कार्रवाई के दौरान कई घरों की गहन तलाशी ली गई और पुलिस ने गांजा सहित अन्य अवैध मादक पदार्थ बरामद किए। हालांकि जब्त किए गए नशीले पदार्थों की कुल मात्रा का आधिकारिक खुलासा अभी नहीं किया गया है।

    छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक दर्जन से अधिक संदिग्ध लोगों को हिरासत में भी लिया है। अधिकारियों के अनुसार इन सभी से पूछताछ की जा रही है और उनके आपराधिक रिकॉर्ड तथा नशे के अवैध कारोबार से संभावित संबंधों की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा या पूछताछ के बाद कुछ को छोड़ दिया जाएगा।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और मामले की जांच लगातार जारी है। बरामद मादक पदार्थों की जांच की जा रही है तथा अन्य संभावित ठिकानों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का उद्देश्य नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना और इस अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना है।

    सूत्रों के अनुसार यह अभियान लंबे समय से मिल रही शिकायतों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर चलाया गया। इतवारा क्षेत्र में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही थी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने एक साथ बड़े स्तर पर कार्रवाई का फैसला लिया ताकि पूरे नेटवर्क को एक ही अभियान में निशाना बनाया जा सके।

    पुलिस ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से साझा की जाएगी। इसमें बरामद नशीले पदार्थों की मात्रा गिरफ्तार आरोपियों की संख्या और उनके खिलाफ दर्ज किए गए मामलों की पूरी जानकारी दी जाएगी। पुलिस ने यह भी संकेत दिए हैं कि राजधानी में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आगे भी इसी तरह के विशेष अभियान लगातार जारी रहेंगे ताकि युवाओं को नशे के जाल से बचाया जा सके और शहर में कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।

  • सिहोरा में सड़क की बदहाली बनी बच्चों की मुसीबत कीचड़ में फंसी स्कूल बस ढाई घंटे बाद ट्रैक्टर से निकली

    सिहोरा में सड़क की बदहाली बनी बच्चों की मुसीबत कीचड़ में फंसी स्कूल बस ढाई घंटे बाद ट्रैक्टर से निकली


    जबलपुर । जबलपुर जिले के सिहोरा की पालीवाल कॉलोनी में शनिवार सुबह सड़क की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आ गई। बच्चों को लेने पहुंची मेरिडियन स्कूल की बस कीचड़ और दलदल में इस तरह फंस गई कि उसे निकालने में करीब ढाई घंटे का समय लग गया। आखिरकार ट्रैक्टर की मदद से बस को बाहर निकाला जा सका। इस घटना ने न केवल कॉलोनी की खराब सड़क व्यवस्था की पोल खोल दी बल्कि बच्चों की सुरक्षा और आवागमन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार खितौला नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 12 स्थित पालीवाल कॉलोनी में शनिवार सुबह लगभग नौ बजे मेरिडियन स्कूल की बस बच्चों को लेने पहुंची थी। कॉलोनी में सड़क का निर्माण नहीं होने और लगातार बारिश के कारण रास्ता पूरी तरह दलदल में बदल चुका था। जैसे ही बस अंदर पहुंची उसका पहिया कीचड़ में धंस गया और वाहन वहीं फंस गया। चालक ने काफी प्रयास किया लेकिन बस बाहर नहीं निकल सकी।

    बस के फंसने की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और बस को निकालने की कोशिश शुरू की गई। करीब ढाई घंटे तक लगातार प्रयास करने के बाद ट्रैक्टर बुलाया गया। ट्रैक्टर से टोचन कर आखिरकार बस को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बस अपने निर्धारित अन्य स्टॉप तक नहीं पहुंच सकी जिससे कई बच्चों को समय पर स्कूल नहीं ले जाया जा सका।

    बस के निर्धारित समय पर नहीं पहुंचने से कई अभिभावकों को अपने बच्चों को स्वयं स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे उन्हें अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ा और सुबह का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क की स्थिति समय रहते सुधारी गई होती तो ऐसी नौबत नहीं आती।

    रहवासियों ने बताया कि पालीवाल कॉलोनी के इस हिस्से में वर्षों से सड़क निर्माण नहीं हुआ है। हर बारिश के मौसम में कच्चा रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता है जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन अक्सर फंस जाते हैं। स्कूल बसों एंबुलेंस और अन्य आवश्यक वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हर वर्ष बारिश के दौरान यही स्थिति बनती है और जिम्मेदार विभाग को कई बार शिकायतें भी दी जा चुकी हैं। इसके बावजूद सड़क निर्माण या जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई। लोगों का कहना है कि यदि जल्द पक्की सड़क और बेहतर ड्रेनेज की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

    रहवासियों ने नगर पालिका और प्रशासन से मांग की है कि पालीवाल कॉलोनी में प्राथमिकता के आधार पर सड़क का निर्माण कराया जाए ताकि बच्चों को सुरक्षित परिवहन सुविधा मिल सके और बारिश के मौसम में लोगों को बार-बार ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े। उनका कहना है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है और अब इस समस्या का स्थायी समाधान होना जरूरी है।