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  • VIT भोपाल की वेबसाइट और विज्ञापनों की भी होगी जांच, NHRC ने पूछा- कैंपस की असली लोकेशन छात्रों को स्पष्ट बताई जाती है या नहीं

    VIT भोपाल की वेबसाइट और विज्ञापनों की भी होगी जांच, NHRC ने पूछा- कैंपस की असली लोकेशन छात्रों को स्पष्ट बताई जाती है या नहीं


    भोपाल । वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी VIT भोपाल विश्वविद्यालय के नाम और उसके वास्तविक परिसर की लोकेशन को लेकर विवाद गहरा गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC ने इस मामले में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए अतिरिक्त रिपोर्ट और कार्रवाई प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 29 नवंबर निर्धारित की गई है। अब इस मामले में विश्वविद्यालय के नाम के साथ उसकी वेबसाइट प्रॉस्पेक्टस और विज्ञापनों में परिसर का पता किस तरह बताया जाता है यह भी जांच के दायरे में रहेगा।

    यह शिकायत राष्ट्रीय छात्र संघ यानी NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय के नाम में भोपाल शब्द होने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को परिसर की वास्तविक लोकेशन को लेकर भ्रम हो सकता है। शिकायतकर्ता के मुताबिक विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर सीहोर जिले के कोठरी कलां में भोपाल-इंदौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। ऐसे में दाखिले के लिए जानकारी जुटाने वाले विद्यार्थियों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि विश्वविद्यालय का परिसर वास्तव में कहां है।

    NHRC ने 22 अक्टूबर को मामले पर विचार करते हुए राज्य सरकार की रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा की। आयोग ने माना कि VIT भोपाल का नाम राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित किया गया है और विश्वविद्यालय की स्थापना मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन अधिनियम 2007 के तहत हुई है। हालांकि आयोग का सवाल केवल नाम की वैधानिकता तक सीमित नहीं है। आयोग ने यह जानना चाहा है कि जब विश्वविद्यालय का कानूनी नाम भोपाल है और उसका वास्तविक परिसर दूसरे जिले में स्थित है तो क्या इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में स्थान को लेकर गलत धारणा बनने की आशंका है।

    आयोग के अनुसार राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इसलिए अतिरिक्त रिपोर्ट के जरिए स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट प्रॉस्पेक्टस और विज्ञापनों में परिसर की वास्तविक लोकेशन के उल्लेख को लेकर भी जानकारी मांगी है। इस पहलू को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले से पहले विद्यार्थी और अभिभावक अक्सर वेबसाइट और प्रचार सामग्री के आधार पर निर्णय लेते हैं। ऐसे में संस्थान का नाम और परिसर का पता स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है ताकि किसी तरह की गलतफहमी न हो।

    शिकायत में विश्वविद्यालय परिसर में कथित अनधिकृत क्लिनिक संचालित होने और पूर्व में अशांति की घटनाओं से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे। आयोग ने पाया कि राज्य सरकार की रिपोर्ट में इन आरोपों की जांच की स्थिति का उल्लेख नहीं है। अब सरकार को यह भी बताना होगा कि इन मामलों की जांच हुई है या नहीं और यदि हुई है तो उसके निष्कर्ष क्या रहे हैं। फिलहाल इन आरोपों को लेकर आयोग ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और न ही किसी पक्ष की गलती प्रमाणित की है।

    इस मामले में अगला कदम राज्य सरकार की अतिरिक्त रिपोर्ट के बाद सामने आएगा। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के वैधानिक नाम और वास्तविक लोकेशन के बीच संबंध प्रचार सामग्री में दी जाने वाली जानकारी और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इसके बाद आयोग उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकता है। फिलहाल विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि विश्वविद्यालय के नाम को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद विद्यार्थियों को परिसर की वास्तविक लोकेशन की जानकारी किस तरह दी जा रही है।
    शॉर्ट डिस्क्रिप्शन
    VIT भोपाल के नाम और सीहोर जिले में स्थित परिसर की लोकेशन को लेकर NHRC ने मध्यप्रदेश सरकार से अतिरिक्त रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने वेबसाइट और विज्ञापनों में पते की जानकारी के साथ कथित अनधिकृत क्लिनिक और अशांति से जुड़े आरोपों की जांच पर भी जवाब मांगा है।
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    VIT Bhopal, NHRC, NSUI, Madhya Pradesh News, Higher Education1. VIT भोपाल की वेबसाइट और विज्ञापनों की भी होगी जांच, NHRC ने पूछा- कैंपस की असली लोकेशन छात्रों को स्पष्ट बताई जाती है या नहीं
    मूल खबर
    वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी VIT भोपाल विश्वविद्यालय के नाम और उसके वास्तविक परिसर की लोकेशन को लेकर विवाद गहरा गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC ने इस मामले में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए अतिरिक्त रिपोर्ट और कार्रवाई प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 29 नवंबर निर्धारित की गई है। अब इस मामले में विश्वविद्यालय के नाम के साथ उसकी वेबसाइट प्रॉस्पेक्टस और विज्ञापनों में परिसर का पता किस तरह बताया जाता है यह भी जांच के दायरे में रहेगा।

    यह शिकायत राष्ट्रीय छात्र संघ यानी NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय के नाम में भोपाल शब्द होने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को परिसर की वास्तविक लोकेशन को लेकर भ्रम हो सकता है। शिकायतकर्ता के मुताबिक विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर सीहोर जिले के कोठरी कलां में भोपाल-इंदौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। ऐसे में दाखिले के लिए जानकारी जुटाने वाले विद्यार्थियों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि विश्वविद्यालय का परिसर वास्तव में कहां है।

    NHRC ने 22 अक्टूबर को मामले पर विचार करते हुए राज्य सरकार की रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा की। आयोग ने माना कि VIT भोपाल का नाम राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित किया गया है और विश्वविद्यालय की स्थापना मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन अधिनियम 2007 के तहत हुई है। हालांकि आयोग का सवाल केवल नाम की वैधानिकता तक सीमित नहीं है। आयोग ने यह जानना चाहा है कि जब विश्वविद्यालय का कानूनी नाम भोपाल है और उसका वास्तविक परिसर दूसरे जिले में स्थित है तो क्या इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में स्थान को लेकर गलत धारणा बनने की आशंका है।

    आयोग के अनुसार राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इसलिए अतिरिक्त रिपोर्ट के जरिए स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट प्रॉस्पेक्टस और विज्ञापनों में परिसर की वास्तविक लोकेशन के उल्लेख को लेकर भी जानकारी मांगी है। इस पहलू को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले से पहले विद्यार्थी और अभिभावक अक्सर वेबसाइट और प्रचार सामग्री के आधार पर निर्णय लेते हैं। ऐसे में संस्थान का नाम और परिसर का पता स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है ताकि किसी तरह की गलतफहमी न हो।

    शिकायत में विश्वविद्यालय परिसर में कथित अनधिकृत क्लिनिक संचालित होने और पूर्व में अशांति की घटनाओं से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे। आयोग ने पाया कि राज्य सरकार की रिपोर्ट में इन आरोपों की जांच की स्थिति का उल्लेख नहीं है। अब सरकार को यह भी बताना होगा कि इन मामलों की जांच हुई है या नहीं और यदि हुई है तो उसके निष्कर्ष क्या रहे हैं। फिलहाल इन आरोपों को लेकर आयोग ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और न ही किसी पक्ष की गलती प्रमाणित की है।

    इस मामले में अगला कदम राज्य सरकार की अतिरिक्त रिपोर्ट के बाद सामने आएगा। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के वैधानिक नाम और वास्तविक लोकेशन के बीच संबंध प्रचार सामग्री में दी जाने वाली जानकारी और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इसके बाद आयोग उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकता है। फिलहाल विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि विश्वविद्यालय के नाम को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद विद्यार्थियों को परिसर की वास्तविक लोकेशन की जानकारी किस तरह दी जा रही है।

  • पहले प्यार और शादी का भरोसा फिर होटल में दुष्कर्म का आरोप, ग्वालियर में युवती की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को दबोचा

    पहले प्यार और शादी का भरोसा फिर होटल में दुष्कर्म का आरोप, ग्वालियर में युवती की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को दबोचा

    ग्वालियर । ग्वालियर में शादी का झांसा देकर युवती के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। सिरोल थाना क्षेत्र में दर्ज इस मामले में पीड़िता ने आरोप लगाया है कि युवक ने पहले उससे प्रेम संबंध बनाए और शादी करने का भरोसा दिलाया। इसके बाद वह उसे बहाने से होटल ले गया जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता के मुताबिक जब उसने घटना के बाद शादी की बात कही तो आरोपी अपने वादे से मुकर गया और उसे डराने धमकाने लगा। इसके बाद युवती ने पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान रोहित राजौरिया के रूप में हुई है जो सिरोल की फूटी कॉलोनी का निवासी बताया गया है। शिकायत में युवती ने आरोप लगाया कि रोहित ने लगातार शादी का भरोसा देकर उसका विश्वास जीता था। इसी भरोसे के चलते वह उसके साथ जाने के लिए तैयार हुई। पीड़िता के अनुसार 15 अक्टूबर को आरोपी उसे मंदिर जाने के बहाने कलारी चौराहा स्थित होटल सिरोल ले गया था।

    शिकायत के मुताबिक होटल में दोपहर करीब 11:30 बजे से 1 बजे के बीच आरोपी ने शादी का झांसा देकर युवती के साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता का आरोप है कि उस समय आरोपी ने शादी करने का भरोसा दिलाया था। हालांकि घटना के बाद जब उसने युवक से शादी करने के लिए कहा तो उसका रवैया बदल गया। आरोप है कि उसने शादी करने से इनकार कर दिया और युवती को डराने धमकाने लगा। इससे पीड़िता को महसूस हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है।

    इसके बाद युवती ने हिम्मत जुटाकर सिरोल थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच शुरू की। बुधवार देर रात आरोपी रोहित राजौरिया के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जानकारी जुटाई जा सके।

    पुलिस अब पीड़िता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। ऐसे मामलों में शिकायत के प्रत्येक पहलू की जांच करना और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करना जरूरी होता है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

    इस घटना ने एक बार फिर प्रेम संबंधों में शादी का झूठा भरोसा देकर धोखा देने के आरोपों से जुड़े मामलों को चर्चा में ला दिया है। पुलिस की ओर से फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी और पूछताछ की जानकारी सामने आई है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच में मिलने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

  • ग्वालियर हादसे ने छीना बुढ़ापे का सहारा, 21 साल के पवन की मौत से टूटे पिता, बोले- बेटा चला गया अब कर्ज कैसे चुकाऊंगा

    ग्वालियर हादसे ने छीना बुढ़ापे का सहारा, 21 साल के पवन की मौत से टूटे पिता, बोले- बेटा चला गया अब कर्ज कैसे चुकाऊंगा


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के बाहर हुए भीषण सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में जान गंवाने वाले 21 वर्षीय पवन राठौर की कहानी बेहद दर्दनाक है। पिता विद्याराम राठौर ने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपना मकान गिरवी रख दिया था। दूसरों की जमीन बटाई पर लेकर खेती की ताकि बेटे की पढ़ाई जारी रह सके और वह भविष्य में परिवार का सहारा बन सके। लेकिन 17 अक्टूबर की रात मंदिर में दर्शन करने निकला पवन कभी वापस नहीं लौटा। हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है और 41 लोग घायल हुए हैं। बेटे को खोने के गम के साथ अब परिवार के सामने कर्ज चुकाने और आगे की जिंदगी चलाने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।

    विद्याराम राठौर बताते हैं कि हादसे वाली रात पवन के कुछ दोस्त पैदल शीतला माता मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे। पवन ने भी उनके साथ जाने की इच्छा जताई। उसकी मां ने उसे जाने से मना किया लेकिन वह दोस्तों के साथ जाने की जिद करता रहा। आखिरकार परिवार ने उसे जाने की अनुमति दे दी। माता-पिता को जरा भी अंदाजा नहीं था कि दोस्तों के साथ मंदिर जाने का फैसला उनके बेटे की जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। जिस बेटे के लौटने का इंतजार था उसके बजाय परिवार को उसकी मौत की खबर मिली।

    पवन पढ़ाई में होशियार था और ग्वालियर में बीएचएमएस की पढ़ाई कर रहा था। पिता का सपना था कि बेटा डॉक्टर बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारेगा। इसी उम्मीद में उन्होंने अपना मकान गिरवी रखा और दूसरों की जमीन पर बटाई से खेती करके परिवार का खर्च चलाया। पवन का बड़ा भाई विशाल राठौर भोपाल से बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। परिवार को उम्मीद थी कि दोनों बेटे पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़े होंगे और माता-पिता को मेहनत भरी जिंदगी से राहत मिलेगी। अब पवन की मौत के बाद ये सपने अधूरे रह गए हैं।

    परिवार को पवन के दोस्तों ने बताया कि वह धार्मिक स्वभाव का था। मंदिर पहुंचने के बाद वह नहाकर दर्शन करने की बात कह रहा था। इसी दौरान चीनौर की ओर से ढलान वाले रास्ते पर एक तेज रफ्तार ट्रक बेकाबू होकर श्रद्धालुओं की भीड़ में घुस गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पवन उछलकर पास की दुकान में जा गिरा और ट्रक उसके ऊपर चढ़ गया। हादसे में कई अन्य श्रद्धालुओं की भी जान चली गई।

    पवन की मौत के बाद परिवार में शोक के साथ नाराजगी भी है। परिजनों का आरोप है कि प्रतिबंधित रास्ते पर भारी ट्रक का मंदिर के पास तक पहुंचना पुलिस और प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। बड़े भाई विशाल का कहना है कि रास्ता संकरा है और वहां बड़े ट्रक के प्रवेश पर रोक होनी चाहिए थी। उनके मुताबिक हादसे से पहले एक अन्य ट्रक भी उस रास्ते से गुजरा था। परिवार ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। अब विद्याराम सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि उनके बड़े बेटे को नौकरी दिलाने में मदद की जाए ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति संभल सके और गिरवी रखे मकान का कर्ज चुकाया जा सके। जिस बेटे के भविष्य के लिए उन्होंने अपनी जमा पूंजी और घर दांव पर लगाया था वह अब उनके बीच नहीं है।

    इस हादसे की मजिस्ट्रियल जांच भी शुरू हो गई है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर सीबी प्रसाद को सौंपी है और सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि प्रतिबंधित रास्ते पर भारी ट्रक कैसे पहुंचे और उस समय सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी। हादसे से पहले ट्रक को कथित तौर पर 200 रुपये लेकर प्रवेश देने का आरोप भी सामने आया है लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब पीड़ित परिवारों को जांच से जवाब और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की उम्मीद है।

  • पहले ट्रेडिंग ऐप पर दिखाया मुनाफा फिर अलग-अलग खातों में जमा कराए रुपए, इंदौर के व्यक्ति से 15 लाख की साइबर ठगी

    पहले ट्रेडिंग ऐप पर दिखाया मुनाफा फिर अलग-अलग खातों में जमा कराए रुपए, इंदौर के व्यक्ति से 15 लाख की साइबर ठगी


    इंदौर । इंदौर में शेयर बाजार में निवेश कर कम समय में मोटा मुनाफा कमाने की चाह एक व्यक्ति को भारी पड़ गई। लसूड़िया थाना क्षेत्र में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करीब 15 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाजों ने पहले वॉट्सऐप के जरिए पीड़ित से संपर्क किया और फिर उसे एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवाकर निवेश के लिए तैयार किया। शुरुआत में ऐप पर जमा रकम और मुनाफा दिखाई दिया जिससे पीड़ित को भरोसा हो गया। इसके बाद अलग-अलग प्रक्रियाओं का हवाला देकर उससे कई किश्तों में रुपए जमा कराए गए। जब रकम वापस नहीं मिली तो उसे ठगी का अहसास हुआ। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    लसूड़िया पुलिस के मुताबिक स्कीम नंबर 78 में रहने वाले विश्वामित्र दुबे ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि एक सितंबर को उनके वॉट्सऐप पर अनजान नंबर से संपर्क किया गया था। फोन करने वाली युवती ने अपना नाम शिखा बताया और शेयर बाजार में निवेश के जरिए अच्छा मुनाफा कमाने की बात कही। युवती की बातों में आकर विश्वामित्र ने उसके बताए तरीके से मोबाइल में निफ्टी पीडब्ल्यूएम नाम का ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कर लिया।

    पीड़ित के अनुसार ऐप में एक कस्टमर एजेंट भी मौजूद था जो उन्हें निवेश के लिए अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी देता था। इन खातों में रुपए ट्रांसफर करने के बाद ऐप पर जमा राशि दिखाई देने लगती थी। इससे उन्हें लगा कि उनका पैसा ट्रेडिंग में लगाया जा रहा है। इसी दौरान उन्हें दो आईपीओ अलॉट होने का दावा भी किया गया। ऐप पर शेयर और आईपीओ से बड़ा लाभ होता दिखाए जाने के कारण पीड़ित को निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिला।

    मामले में ठगी का संदेह तब गहराया जब विश्वामित्र ने ऐप में दिखाई जा रही रकम को अपने बैंक खाते में वापस लेने की कोशिश की। आरोप है कि जालसाजों ने रुपए निकालने के लिए अलग-अलग प्रक्रियाओं का हवाला दिया और इसके नाम पर उनसे और रकम जमा करवाई। पीड़ित से कई किश्तों में अलग-अलग बैंक खातों में करीब 15 लाख रुपए ट्रांसफर कराए गए। इसके बावजूद उनकी रकम वापस नहीं आई।

    करीब दस दिन इंतजार करने के बाद भी जब पैसा खाते में नहीं पहुंचा तो विश्वामित्र को शक हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की जांच के बाद मामला लसूड़िया पुलिस को सौंपा गया। पुलिस ने फोन करने वाली युवती और संबंधित बैंक खाताधारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

    अब पुलिस संबंधित बैंक खातों के लेनदेन और ट्रेडिंग ऐप से जुड़े विवरणों की जांच कर रही है ताकि इस पूरे मामले में शामिल लोगों की पहचान की जा सके। यह मामला ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली ठगी के उस तरीके की ओर इशारा करता है जिसमें शुरुआत में फर्जी मुनाफा दिखाकर लोगों का भरोसा जीता जाता है और बाद में रकम निकालने के नाम पर अतिरिक्त भुगतान मांगा जाता है। निवेशकों को ऐसे मामलों में सतर्क रहने की जरूरत है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऐप डाउनलोड करने या अज्ञात बैंक खातों में पैसे भेजने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।

  • 64 करोड़ की संपत्तियों की जांच के बीच हेड कॉन्स्टेबल का नया जमीन सौदा चर्चा में, वृद्धा की मौत से 4 दिन पहले रजिस्ट्री

    64 करोड़ की संपत्तियों की जांच के बीच हेड कॉन्स्टेबल का नया जमीन सौदा चर्चा में, वृद्धा की मौत से 4 दिन पहले रजिस्ट्री

    इंदौर । इंदौर में करोड़ों रुपए की संपत्तियों को लेकर जांच के घेरे में आए पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान का नाम अब 45 बीघा जमीन की रजिस्ट्री से भी जुड़ गया है। इंदौर उज्जैन हाईवे पर मगरखेड़ा गांव में स्थित इस जमीन की रजिस्ट्री में फिरोज खान गवाह के रूप में दर्ज हैं। जमीन को लेकर एक परिवार ने धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि 83 वर्षीय कस्तूरी बाई के अस्पताल की आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी। रजिस्ट्री के चार दिन बाद ही वृद्धा की मौत हो गई। अब परिवार ने रजिस्ट्री को शून्य घोषित कराने के लिए अदालत का रुख किया है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि होना बाकी है।

    दस्तावेजों के मुताबिक मगरखेड़ा गांव में कस्तूरी बाई के नाम दर्ज करीब 11.403 हेक्टेयर यानी 45 बीघा जमीन की रजिस्ट्री 27 अगस्त 2024 को श्याम इंफ्रा के सुमित जिंदल के नाम की गई थी। दस्तावेजों में जमीन का सरकारी मूल्यांकन करीब 8.97 करोड़ रुपए और बिक्री मूल्य 9 करोड़ रुपए दर्ज है। कस्तूरी बाई के पोते दीपक शर्मा का कहना है कि यह परिवार की पुश्तैनी संपत्ति है। परिवार के मुताबिक कस्तूरी बाई की तबीयत खराब होने पर उन्हें रतलाम से इंदौर के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसी दौरान जमीन से जुड़े दस्तावेजों और पावर ऑफ अटॉर्नी को लेकर विवाद हुआ। परिवार का आरोप है कि वृद्धा के आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान ही जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई। इसके बाद 2 सितंबर 2024 को कस्तूरी बाई की अस्पताल में मौत हो गई।

    इस जमीन की कीमत को लेकर भी बड़ा अंतर सामने आया है। परिवार और स्थानीय जानकारों का दावा है कि इंदौर उज्जैन रोड पर स्थित जमीन का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 150 करोड़ रुपए है। वहीं 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से इस जमीन का मूल्य करीब 45 करोड़ 61 लाख रुपए बैठता है। स्थानीय लोगों और प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक आसपास सैटेलाइट टाउनशिप विकसित होने के कारण जमीन की बाजार कीमत सरकारी गाइडलाइन से कई गुना अधिक हो सकती है। हालांकि 150 करोड़ रुपए का आंकड़ा परिवार और स्थानीय जानकारों का अनुमान है।

    रजिस्ट्री के दस्तावेजों में फिरोज खान का नाम गवाह के तौर पर दर्ज है। दस्तावेजों के पेज 12 और 25 पर उनका नाम पता फोटो और हस्ताक्षर होने की बात सामने आई है। इस सौदे को लेकर एक और कारोबारी संबंध चर्चा में है। पावर ऑफ अटॉर्नी धारक रविकांत पंवार के बेटे युवराज पंवार स्पार्कवेव रियलिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में डायरेक्टर हैं। इसी कंपनी में फिरोज खान की पत्नी हिना खान भी डायरेक्टर बताई गई हैं। कंपनी का नाम लोकायुक्त की जांच में जमीनों की खरीद फरोख्त के मामलों में सामने आया है। इन संबंधों के कारण सौदे में फिरोज खान की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं लेकिन उनकी भूमिका और किसी कथित अनियमितता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    जमीन के नामांतरण को लेकर भी कानूनी विवाद सामने आया है। परिवार की अपील के बाद एसडीएम कोर्ट ने नामांतरण निरस्त कर दिया। आदेश में कहा गया कि नामांतरण की प्रक्रिया में गंभीर कमियां थीं। इनमें सिविल कोर्ट के यथास्थिति बनाए रखने और जमीन नहीं बेचने के अंतरिम आदेश के बाद नामांतरण किया जाना तथा संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलना शामिल है। हालांकि नामांतरण निरस्त होने से रजिस्ट्री अपने आप अमान्य नहीं होती। इसी कारण परिवार ने अब सिविल कोर्ट में रजिस्ट्री को शून्य घोषित करने की मांग की है।

    लोकायुक्त पुलिस पहले से फिरोज खान और उनसे जुड़े लोगों की संपत्तियों की जांच कर रही है। जांच में 64 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की 48 संपत्तियों का पता चलने की बात सामने आई है। लोकायुक्त डीएसपी सुनील तालान के मुताबिक मगरखेड़ा की जमीन के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फिरोज खान और उनसे जुड़ी कंपनियों की इस सौदे में क्या भूमिका रही। दूसरी ओर पावर ऑफ अटॉर्नी कराने वाले रविकांत पंवार ने कहा कि वह कस्तूरी बाई के कानूनी सलाहकार थे। उन्होंने दावा किया कि कस्तूरी बाई अपनी जमीन परिवार को नहीं देना चाहती थीं। अब इस पूरे मामले में अदालत और जांच एजेंसियों की पड़ताल से ही विवादित रजिस्ट्री की वैधता और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

  • दर्द से तड़प रहे युवक को इंजेक्शन देने के बाद नहीं आया होश, एमवाय अस्पताल में मौत से मचा हड़कंप, परिजनों ने उठाए इलाज पर सवाल

    दर्द से तड़प रहे युवक को इंजेक्शन देने के बाद नहीं आया होश, एमवाय अस्पताल में मौत से मचा हड़कंप, परिजनों ने उठाए इलाज पर सवाल


    इंदौर । इंदौर में गर्म दाल से झुलसे 30 वर्षीय युवक की एमवाय अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। युवक की मौत के बाद परिजनों ने इलाज के दौरान इंजेक्शन दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि दर्द से परेशान युवक को इंजेक्शन लगाने के बाद होश नहीं आया और बाद में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल युवक की मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही चल सकेगा।

    एमआईजी पुलिस के मुताबिक मृतक आकाश वर्मा पुत्र कन्हैयालाल वर्मा सोमनाथ की चाल का निवासी था। रविवार को वह घर में गर्म दाल से झुलस गया था। हादसे में उसके पैर बुरी तरह जल गए थे। इसके बाद परिजन उसे उपचार के लिए एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे जहां उसे भर्ती किया गया। परिवार के लोगों को उम्मीद थी कि इलाज के बाद उसकी हालत में सुधार होगा लेकिन कुछ दिनों बाद उसकी मौत की खबर से परिवार में शोक छा गया।

    परिजनों और रिश्तेदारों के अनुसार आकाश का परिवार एमआईजी मेन रोड पर दाल पकवान की दुकान चलाता है। दुकान के लिए दाल घर पर ही उबाली जाती है। रविवार को आकाश ऊपर बने कमरे से गर्म दाल लेकर नीचे आ रहा था। इसी दौरान वह गर्म दाल की चपेट में आ गया और उसके पैर झुलस गए। हादसे के बाद परिवार के लोग उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार शुरू किया गया।

    परिवार का आरोप है कि मंगलवार रात आकाश दर्द के कारण चिल्ला रहा था। इसी दौरान डॉक्टरों ने उसे एक इंजेक्शन लगाया। परिजनों के मुताबिक इंजेक्शन दिए जाने के बाद आकाश को होश नहीं आया। बुधवार रात चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत के बाद परिवार ने उपचार के तरीके को लेकर सवाल उठाए और इंजेक्शन दिए जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ने की आशंका जताई। हालांकि फिलहाल यह साबित नहीं हुआ है कि इंजेक्शन और युवक की मौत के बीच कोई सीधा संबंध था। इस संबंध में चिकित्सकीय जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

    पुलिस ने परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों को ध्यान में रखते हुए मामले में मर्ग कायम किया है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है ताकि मौत के कारणों का पता लगाया जा सके। जांच के दौरान उपचार से जुड़े तथ्यों और अन्य परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत किस वजह से हुई। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    इसी बीच इंदौर के खुड़ैल क्षेत्र से भी एक अन्य मौत का मामला सामने आया है। तिल्लोर खुर्द निवासी 46 वर्षीय अजय पुत्र दयाशंकर की एमवाय अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस के अनुसार अजय ने जहर खा लिया था और परिजन बुधवार को उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में भी पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    दोनों घटनाओं के बाद पुलिस मौतों से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। आकाश वर्मा के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है। वहीं इलाज के दौरान लापरवाही के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

  • बड़ा तालाब संरक्षण के नाम पर जमीन छिनने का डर, भोपाल में किसानों की पदयात्रा, BIZ-1 और BIZ-2 जोन हटाने की मांग

    बड़ा तालाब संरक्षण के नाम पर जमीन छिनने का डर, भोपाल में किसानों की पदयात्रा, BIZ-1 और BIZ-2 जोन हटाने की मांग


    नई दिल्ली। भोपाल मास्टर प्लान के नए ड्राफ्ट को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध तेज होने लगा है। प्रस्तावित योजना में 66 गांवों की कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव किए जाने की आशंका से किसान चिंतित हैं। किसानों का आरोप है कि खेती की जमीन को रिवरफ्रंट फॉरेस्ट ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने का प्रस्ताव उनकी आजीविका पर असर डाल सकता है। इसी मुद्दे को लेकर किसानों ने अपनी जमीन बचाने और प्रस्तावित बदलावों पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए पदयात्रा शुरू की। किसान मुगालिया छाप से नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय तक पहुंचकर ज्ञापन देना चाहते थे लेकिन पुलिस ने नीलबड़ में बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक लिया। पुलिस की ओर से पहले से व्यवस्था किए जाने की वजह यह बताई गई कि पिछली बार किसान भोपाल शहर तक पहुंच गए थे।

    किसानों की मुख्य मांग है कि उनकी कृषि भूमि का उपयोग पहले की तरह खेती के लिए ही सुरक्षित रखा जाए। उनका कहना है कि जिस जमीन पर किसान वर्षों से खेती कर रहे हैं उसी से उनके परिवारों का भरण पोषण होता है। यदि इन जमीनों को दूसरी आरक्षित श्रेणियों में शामिल कर दिया गया तो खेती करने और भविष्य में जमीन का उपयोग करने को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। किसानों का कहना है कि जमीन केवल संपत्ति नहीं बल्कि उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। इसलिए मास्टर प्लान में कोई भी बदलाव करने से पहले प्रभावित ग्रामीणों की बात सुनी जानी चाहिए।

    किसान अनोखी सिंह पटेल ने आरोप लगाया कि बड़ा तालाब के संरक्षण के नाम पर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि का लैंडयूज बदलने का प्रस्ताव किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि वे बड़ा तालाब के संरक्षण के महत्व को समझते हैं लेकिन इसके नाम पर कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव करने से पहले स्थानीय लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि वर्षों से खेती कर रहे परिवारों के भविष्य को लेकर स्पष्टता होना जरूरी है। इसी वजह से किसान प्रस्तावित ड्राफ्ट में किए गए बदलावों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराना चाहते हैं।

    किसानों के मुताबिक वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में संबंधित जमीनों का भू-उपयोग कृषि निर्धारित था। इसके बाद वर्ष 2031 के मास्टर प्लान के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट में भी कृषि उपयोग का प्रावधान रखा गया था। हालांकि बाद में वह मास्टर प्लान निरस्त हो गया। अब मौजूदा ड्राफ्ट में बड़ा तालाब के आसपास की कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव की आशंका को लेकर किसान विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि नई योजना तैयार करते समय पुराने प्रावधानों और किसानों की आजीविका पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    किसानों ने भोजताल संरक्षण जोन-1 यानी BIZ-1 और जोन-2 यानी BIZ-2 को हटाने की मांग भी उठाई है। किसान अनोखी सिंह पटेल के मुताबिक खेती उनकी आय का प्रमुख स्रोत है और कृषि भूमि का उपयोग कृषि के लिए ही बनाए रखना जरूरी है। किसानों का कहना है कि यदि उनकी जमीनों को दूसरी श्रेणियों में शामिल किया जाता है तो उनके सामने भविष्य में कई तरह की व्यावहारिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि प्रस्तावित बदलावों पर पुनर्विचार किया जाए और उनकी आपत्तियों का उचित समाधान निकाला जाए।

    किसानों का एक बड़ा सवाल ग्रामसभाओं में सहमति लेने को लेकर भी है। उनका आरोप है कि वर्ष 2031 के मास्टर प्लान की प्रक्रिया के दौरान नए ड्राफ्ट को तैयार करने में पंचायतों से सहमति लेने का आश्वासन दिया गया था लेकिन मौजूदा प्रस्ताव में संबंधित गांवों की सहमति नहीं ली गई। किसान चाहते हैं कि पहले सभी 66 गांवों में ग्रामसभाएं आयोजित की जाएं और प्रस्तावित भू-उपयोग पर विस्तार से चर्चा हो। उनका कहना है कि किसानों की समस्याएं और आपत्तियां सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए। फिलहाल मास्टर प्लान को लेकर किसानों की चिंता बनी हुई है और वे अपनी मांगों को संबंधित विभाग तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

  • माधव चौक पर रातभर गूंजे माता के भजन, अमोला पुल पर विसर्जन के दौरान मची अफरा-तफरी, बेहोश युवक को बचाया

    माधव चौक पर रातभर गूंजे माता के भजन, अमोला पुल पर विसर्जन के दौरान मची अफरा-तफरी, बेहोश युवक को बचाया


    शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में विजयादशमी के अवसर पर 20 अक्टूबर को माता रानी की प्रतिमाओं का विसर्जन धूमधाम के साथ किया गया। श्री नवदुर्गा सांस्कृतिक समारोह मंडल के आयोजन में शहर के माधव चौक से आकर्षक झांकियां निकाली गईं। इस दौरान भव्य मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और माता की प्रतिमाओं के साथ निकली झांकियों का आयोजन समिति की ओर से सम्मान किया गया। पूरे शहर में उत्सव का माहौल रहा और देर रात तक डीजे तथा ढोल की धुन पर युवा माता के भजनों पर झूमते नजर आए। वहीं अमोला पुल पर बड़ी प्रतिमाओं का विसर्जन बुधवार सुबह तक जारी रहा। इस दौरान विसर्जन की व्यवस्थाओं को लेकर पुलिस और वहां पहुंचे लोगों के बीच गहमा-गहमी भी देखने को मिली। इसी बीच पानी में ट्यूब पर बैठा एक युवक अचानक चक्कर आने से बेहोश हो गया। उसके साथ मौजूद युवकों ने तत्परता दिखाते हुए उसे पानी में डूबने से बचा लिया।

    माधव चौक पर रातभर रही उत्सव की रौनक

    दशहरे के अवसर पर माधव चौक पर भव्य मंच तैयार किया गया था। यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ माता रानी की आकर्षक झांकियां निकाली गईं। आयोजन समिति ने झांकियों का सम्मान कर प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया। शहर के अलग-अलग इलाकों के साथ बाहर से भी डीजे और ढोल की टीमें पहुंचीं। उनकी धुन पर युवा देर रात तक माता के भजनों पर नाचते रहे। माधव चौक पर अलग-अलग डीजे के बीच तेज संगीत बजाने की होड़ भी दिखाई दी। कई जगहों पर एक-दूसरे के पास खड़े होकर डीजे बजाए गए और युवाओं ने जमकर नृत्य किया। श्रद्धा और उत्साह के बीच पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा।

    अमोला पुल पर सुबह तक चलता रहा विसर्जन

    शहर में निकलीं माता की बड़ी प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए अमोला पुल ले जाया गया। यहां मंगलवार रात से शुरू हुआ विसर्जन बुधवार सुबह तक चलता रहा। बड़ी प्रतिमाओं को पानी तक पहुंचाने और विसर्जन की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। लगातार आवाजाही के कारण मौके पर भीड़ बनी रही। व्यवस्था संभालने के दौरान पुलिस और विसर्जन करने पहुंचे कुछ लोगों के बीच गहमा-गहमी की स्थिति भी बनी। प्रतिमाओं के आकार और भीड़ को देखते हुए विसर्जन का काम सुबह तक जारी रहा।

    ट्यूब पर बैठा युवक चक्कर आने से हुआ बेहोश

    अमोला पुल के नीचे पानी में कुछ युवक ट्यूब पर बैठकर प्रतिमा विसर्जन के दौरान क्रेन का पट्टा निकाल रहे थे। इसी दौरान एक युवक को अचानक चक्कर आया और वह बेहोश हो गया। पानी में मौजूद उसके साथियों ने उसे संभालते हुए पकड़ लिया और डूबने से बचाया। इसके बाद युवक को पानी से बाहर निकाला गया और नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। जानकारी के अनुसार युवक की हालत सामान्य बताई गई है। इस घटना के बाद विसर्जन के दौरान पानी में उतरने और भारी प्रतिमाओं के आसपास काम करने के समय सावधानी बरतने की जरूरत एक बार फिर सामने आई। विजयादशमी पर जहां शहर में धार्मिक उत्साह और भव्य आयोजनों की रौनक रही वहीं अमोला पुल पर हुई इस घटना ने विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के महत्व को भी उजागर किया।

  • अंग्रेजों के सामने वंदेमातरम का उद्घोष, RSS संस्थापक हेडगेवार के जीवन पर बनी AI शॉर्ट फिल्म की खास उपलब्धि

    अंग्रेजों के सामने वंदेमातरम का उद्घोष, RSS संस्थापक हेडगेवार के जीवन पर बनी AI शॉर्ट फिल्म की खास उपलब्धि


    भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदेमातरम से जुड़े संघर्ष पर आधारित एआई शॉर्ट फिल्म वंदेमातरम और डॉ. हेडगेवार का चयन उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के सीजन-4 में स्क्रीनिंग के लिए किया गया है। इस फिल्म में ब्रिटिश शासन के दौरान किशोरावस्था से लेकर जेल यात्रा तक डॉ. हेडगेवार के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों को दर्शाया गया है। फिल्म का निर्देशन और पटकथा लेखन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. लोकेन्द्र सिंह ने किया है। यह उनकी पहली एआई फिल्म है। फिल्म में ऐतिहासिक घटनाओं और संस्मरणों के आधार पर उन प्रसंगों को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है जिनमें वंदेमातरम के उद्घोष और सम्मान को लेकर संघर्ष देखने को मिला था।

    फिल्म की कहानी वर्ष 1905 के बंग-भंग आंदोलन और ब्रिटिश शासन के दौर से शुरू होती है। उस समय वंदेमातरम राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन रहा था। फिल्म में वर्ष 1907 की उस घटना को भी दिखाया गया है जब नागपुर के नील सिटी हाईस्कूल में पढ़ने वाले किशोर केशव बलिराम हेडगेवार ने ब्रिटिश स्कूल इंस्पेक्टर के निरीक्षण के दौरान पूरी कक्षा से वंदेमातरम का नारा लगवाया था। इस प्रसंग के माध्यम से फिल्म में उस दौर के विद्यार्थियों के बीच विकसित हो रही राष्ट्रवादी चेतना और अंग्रेजी शासन के प्रति विरोध को दर्शाया गया है।

    फिल्म में वर्ष 1908 में मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के रामपायली में दशहरे के अवसर पर दिए गए हेडगेवार के भाषण का भी चित्रण किया गया है। इस भाषण को सीमोल्लंघन के नाम से जाना जाता है। इसके बाद उनके खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा चलने और परिवार को दमन का सामना करने से जुड़े प्रसंग भी फिल्म की कहानी में शामिल किए गए हैं। इन घटनाओं के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई है कि ब्रिटिश शासन के दौरान राष्ट्रवादी विचारों को व्यक्त करने वालों को किस तरह की कानूनी और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।

    फिल्म की कहानी आगे बढ़ते हुए वर्ष 1930 के यवतमाल जंगल सत्याग्रह तक पहुंचती है। इसमें डॉ. हेडगेवार की गिरफ्तारी और अकोला जेल यात्रा से जुड़े प्रसंगों को शामिल किया गया है। फिल्म में रेलवे स्टेशनों पर उनके स्वागत के लिए जुटने वाली भीड़ और वंदेमातरम के नारों को प्रभावशाली दृश्यों तथा संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा वर्ष 1937 में प्रांतीय सरकारों के गठन के दौर में राष्ट्रगीत के सम्मान की रक्षा के लिए उनके संकल्प को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है। इस तरह फिल्म स्वतंत्रता आंदोलन के अलग-अलग चरणों को एक साथ जोड़ते हुए हेडगेवार के जीवन से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को सामने लाती है।

    निर्देशक डॉ. लोकेन्द्र सिंह ने कहा कि वंदेमातरम केवल एक गीत या नारा नहीं है बल्कि भारत की स्वाधीनता का बीज मंत्र और राष्ट्रीय चेतना की अमर ध्वनि है। उनके अनुसार डॉ. हेडगेवार का जीवन मातृभूमि की वंदना और इस मंत्र के सम्मान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने बताया कि फिल्म बनाने का उद्देश्य नई पीढ़ी को इतिहास के उन प्रसंगों से परिचित कराना है जिनमें त्याग और राष्ट्रभक्ति को विशेष महत्व दिया गया था।

    डॉ. लोकेन्द्र सिंह इससे पहले बाचा : द राइजिंग विलेज समिधा गो-वर और कद जैसी फिल्मों से भी जुड़े रहे हैं। उनकी ये फिल्में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराही जा चुकी हैं। अब एआई तकनीक के माध्यम से बनाई गई उनकी पहली शॉर्ट फिल्म का उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में चयन उनके फिल्म निर्माण के सफर की एक नई उपलब्धि है। फिल्म की स्क्रीनिंग के जरिए दर्शकों को डॉ. हेडगेवार के जीवन और वंदेमातरम से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को एक नए सिनेमाई रूप में देखने का अवसर मिलेगा।

  • एमपी के नगरीय निकायों में खरीदी की दरों में भारी अंतर, 250 करोड़ रुपए की बचत की गुंजाइश, ACS संजय दुबे ने दी कार्रवाई की चेतावनी

    एमपी के नगरीय निकायों में खरीदी की दरों में भारी अंतर, 250 करोड़ रुपए की बचत की गुंजाइश, ACS संजय दुबे ने दी कार्रवाई की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी की दरों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कचरा वाहनों से लेकर एलईडी लाइट और सफाई में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की खरीदी तक में कीमतों का भारी अंतर सामने आया है। नगरीय प्रशासन विभाग की एक विभागीय बैठक में इन आंकड़ों पर चर्चा के दौरान प्रमुख सचिव संजय दुबे ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि अब खरीदी में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। बैठक में प्रस्तुत विश्लेषण के मुताबिक पिछले तीन साल में प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस यानी GeM पोर्टल के माध्यम से करीब 1134 करोड़ रुपए की खरीदी की। विश्लेषण में यह भी बताया गया कि यदि सामान औसत दरों पर खरीदा जाता तो लगभग 250 करोड़ रुपए की बचत संभव थी।

    बैठक में कचरा वाहनों की खरीदी का उदाहरण देकर कीमतों में अंतर को समझाया गया। प्रमुख सचिव संजय दुबे के मुताबिक एक नगरीय निकाय ने करीब दो लाख रुपए में कचरा वाहन खरीदा जबकि दूसरे निकाय ने इसी तरह के वाहन को चार डस्टबिन के साथ छह लाख रुपए में खरीदा। इस तरह दोनों खरीदी की कीमत में तीन गुना तक का अंतर सामने आया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि कुछ निकायों ने डेढ़ करोड़ रुपए तक के कचरा वाहन खरीद लिए जबकि उनके पास इतने वाहन चलाने के लिए पर्याप्त वार्ड तक नहीं हैं। अधिकारियों से कहा गया कि वे यह न समझें कि विभाग को खरीदी की जानकारी नहीं है। किस निकाय ने कौन सा सामान कितनी मात्रा में और किस दर पर खरीदा है इसका पूरा ब्योरा विभाग के पास उपलब्ध है।

    भोपाल के भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा शहरी विकास प्रशिक्षण संस्थान में हुई इस बैठक में नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे समेत प्रदेश के विभिन्न नगरीय निकायों के अधिकारी मौजूद थे। बैठक के दौरान प्रमुख सचिव ने कहा कि पिछले साल खरीदी की गड़बड़ियों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया था लेकिन अब ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। हालांकि सामने आए मूल्य अंतर और संभावित अनियमितताओं के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित खरीदी के दस्तावेजों और परिस्थितियों की जांच जरूरी होगी।

    बैठक में MPSEDC के एडिशनल एमडी अंशुमन राज ने भी खरीदी के आंकड़ों का विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में एक नगर पालिका में 60 लाख रुपए में 200 एलईडी बल्ब खरीदने की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद अलग-अलग नगरीय निकायों में सामान की खरीदी दरों की तुलना की गई। प्रस्तुतीकरण में फिनॉलिक डिसइन्फेक्टेंट की कीमतों में भी बड़ा अंतर बताया गया। एक जगह एक लीटर उत्पाद की कीमत पांच रुपए दर्ज हुई जबकि दूसरी जगह इसी तरह के उत्पाद की कीमत 33 हजार 500 रुपए बताई गई। सरदारपुर निकाय में 2500 लीटर संबंधित उत्पाद की खरीदी एक लाख 35 हजार रुपए में होने का भी उल्लेख किया गया।

    एलईडी लाइट की खरीदी के आंकड़ों ने भी अधिकारियों का ध्यान खींचा। प्रस्तुतीकरण के मुताबिक 60 वाट की एक एलईडी लाइट कहीं 306 रुपए में खरीदी गई जबकि भोपाल में इसकी कीमत 11 हजार 800 रुपए दर्ज हुई। भोपाल की इस खरीदी का कुल मूल्य 3.78 लाख रुपए बताया गया। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद सरकारी खरीद प्रक्रिया में दरों की तुलना और मूल्य निर्धारण की समीक्षा की जरूरत पर जोर दिया गया।

    पिछले तीन साल के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के नगरीय निकायों ने करीब 65 करोड़ रुपए गारबेज टिपर और डंपर की खरीदी पर खर्च किए। स्ट्रीट लाइट पर लगभग 49 करोड़ रुपए ऑक्टागोनल पोल पर 27 करोड़ रुपए और डिसइन्फेक्टेंट की खरीदी पर 18 करोड़ रुपए खर्च किए गए। जबलपुर संभाग में कुल खरीदी करीब 202 करोड़ रुपए बताई गई जबकि बड़ोदिया कलां में लगभग 97 लाख रुपए के ऑक्टागोनल पोल खरीदे जाने का भी उल्लेख हुआ।

    अब नगरीय प्रशासन विभाग की नजर इस बात पर है कि अलग-अलग निकायों में एक जैसे सामान की कीमतों में इतना अंतर क्यों रहा। यदि जांच में अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। विभाग की चेतावनी के बाद सरकारी खरीदी की प्रक्रिया और खर्च की निगरानी को लेकर जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।