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  • गर्भवती महिलाओं की जांच में लापरवाही: दो सीबीएमओ को नोटिस, 15 दिन का अल्टीमेटम

    गर्भवती महिलाओं की जांच में लापरवाही: दो सीबीएमओ को नोटिस, 15 दिन का अल्टीमेटम


    नई दिल्ली । राजगढ़ जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और स्वास्थ्य केंद्रों की खराब स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के तहत दो सीबीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि कई कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है।

    जानकारी के अनुसार, नरसिंहगढ़ ब्लॉक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में खराब प्रदर्शन पर सीबीएमओ डॉ. राजेंद्र अहिरवार को नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा खिलचीपुर और राजगढ़ ब्लॉक के सीबीएमओ को बैठक में अनुपस्थित रहने पर कारण बताओ नोटिस दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के वेतन काटने की कार्रवाई की जाएगी।

    स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई स्थानों पर गर्भवती महिलाओं का पंजीयन समय पर नहीं हो रहा है और उनकी नियमित जांच में लापरवाही बरती जा रही है। इस पर प्रशासन ने सख्त नाराजगी जताते हुए प्रत्येक ब्लॉक से सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले पांच सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और एएनएम को भी नोटिस जारी किए हैं।

    इसके अलावा ओपीडी सेवाओं और स्वास्थ्य शिविरों में तय लक्ष्य के अनुसार एक्स-रे जांच नहीं होने पर भी संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई गई है। प्रशासन ने इसे गंभीर सेवा लापरवाही मानते हुए सुधार के निर्देश दिए हैं।

    पोषण पुनर्वास केंद्रों की स्थिति भी समीक्षा में संतोषजनक नहीं पाई गई। यहां बच्चों की कम संख्या और समय से पहले डिस्चार्ज किए जाने के मामलों पर भी कार्रवाई की गई है। इस पर जिले के सभी छह फीडिंग डेमोंस्ट्रेटर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

    जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. इच्छित गढ़पाले ने स्पष्ट कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों में जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिखता है तो और भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

  • सरकारी कार्रवाई: वन भूमि पर कब्जे के आरोप में पंचायत सचिव की नौकरी गई

    सरकारी कार्रवाई: वन भूमि पर कब्जे के आरोप में पंचायत सचिव की नौकरी गई


    नई दिल्ली । विदिशा वन मंडल में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। ग्राम पंचायत बीजूखेड़ी, जनपद पंचायत लटेरी के पंचायत सचिव किशन सिंह गुर्जर को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई वन भूमि पर कब्जे के गंभीर आरोपों और जांच में दोष सिद्ध होने के बाद की गई है।
    मामले की शुरुआत उस समय हुई जब वन परिक्षेत्र उत्तर लटेरी की देहरीपामा बीट के कक्ष क्रमांक पी-410 में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण की शिकायत सामने आई। इस पर वन विभाग ने 21 जुलाई 2024 को वन अपराध प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि पंचायत सचिव किशन सिंह गुर्जर पर ही इस अतिक्रमण का आरोप था।
    वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 80 ‘अ’ के तहत संबंधित सचिव को दो बार कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन आरोपी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। इससे मामला और गंभीर हो गया।
    जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद वनमंडलाधिकारी विदिशा ने अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद भूमि से कब्जा नहीं हटाया गया। आदेश की अवहेलना के बाद विभाग ने जिला पंचायत को कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पत्र लिखा।
    इसके बाद जिला पंचायत ने कार्रवाई करते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी के निर्देश पर 8 मई 2026 को पंचायत सचिव किशन सिंह गुर्जर को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया।
    वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हों।
    इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है, जिससे सरकारी भूमि संरक्षण को लेकर एक सख्त संदेश दिया गया है।

  • खुद चला रहा था ट्रैक्टर, लौटते समय हादसा: हरदा में नदी पार करते वक्त अनहोनी

    खुद चला रहा था ट्रैक्टर, लौटते समय हादसा: हरदा में नदी पार करते वक्त अनहोनी


    नई दिल्ली ।  हरदा जिले के झाड़पा गांव में रविवार सुबह एक बेहद दर्दनाक हादसा हो गया। अजनाल नदी पर बने पुल पर ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे 15 वर्षीय किशोर की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब किशोर खेत से मक्का लेकर ट्रॉली में भरकर गांव लौट रहा था और स्वयं ट्रैक्टर चला रहा था।

    जानकारी के अनुसार, झाड़पा गांव निवासी सूरज विश्नोई का बेटा दर्शन विश्नोई (15) रविवार सुबह नीमगांव स्थित अपने खेत से मक्का भरकर ट्रॉली में गांव लौट रहा था। लौटते समय जब वह अजनाल नदी के रपटे पर पहुंचा, तो ट्रैक्टर अचानक अनियंत्रित हो गया और सीधे नदी में पलट गया। हादसे में किशोर ट्रैक्टर के नीचे दब गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    घटना के बाद आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और जेसीबी मशीन की मदद से ट्रैक्टर के नीचे दबे किशोर को बाहर निकाला। गंभीर हालत में उसे तत्काल हरदा के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल भेजा गया, जहां पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। हादसे के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

    बताया जा रहा है कि मृतक दर्शन विश्नोई अपने दो भाइयों में सबसे छोटा था। उसका बड़ा भाई लुधियाना में पढ़ाई कर रहा है। दर्शन हरदा के सरस्वती शिशु मंदिर में दसवीं कक्षा का छात्र था और पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की मदद के लिए खेत का काम भी करता था।

    ग्रामीणों के अनुसार, नदी का रपटा कई बार हादसों का कारण बन चुका है, लेकिन सुरक्षा इंतजामों की कमी के चलते ऐसी घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं। इस हादसे ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में खतरनाक रास्तों और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के जोखिम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • जिला अस्पताल में बड़ा फर्जीवाड़ा: ब्लड डोनेशन के नाम पर ग्रामीण से ठगी, आरोपी फरार

    जिला अस्पताल में बड़ा फर्जीवाड़ा: ब्लड डोनेशन के नाम पर ग्रामीण से ठगी, आरोपी फरार


    नई दिल्ली । नरसिंहपुर जिला अस्पताल में ब्लड उपलब्ध कराने के नाम पर ठगी का गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल परिसर में सक्रिय कुछ दलालों ने एक ग्रामीण से उसकी पत्नी के इलाज के लिए ब्लड दिलाने के बहाने ढाई हजार रुपये ऐंठ लिए और बाद में मौके से फरार हो गए। इस घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार, शनिवार को एक दूरस्थ गांव से आया ग्रामीण अपनी पत्नी को जिला अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज करा रहा था। डॉक्टरों ने महिला के लिए ‘ओ पॉजिटिव’ ब्लड की आवश्यकता बताई थी। इसके बाद ग्रामीण ब्लड बैंक पहुंचा, जहां उसे नियमों के तहत डोनर लाने की बात कही गई।

    इसी दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद एक संदिग्ध व्यक्ति, जिसे नशेड़ी और दलाल बताया जा रहा है, ने ग्रामीण से संपर्क किया। उसने ब्लड उपलब्ध कराने का झांसा देकर ढाई हजार रुपये की मांग की। मजबूरी और पत्नी की हालत को देखते हुए ग्रामीण ने पैसे दे दिए और उस व्यक्ति को भोजन भी कराया। लेकिन जब ब्लड देने की बारी आई, तो आरोपी वहां से फरार हो गया।

    ठगी का अहसास होने पर ग्रामीण ने अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों को पूरी घटना बताई। मामला तुरंत ब्लड बैंक अधिकारियों और सिविल सर्जन तक पहुंचा। इसके बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और पीड़ित महिला को तत्काल नि:शुल्क ब्लड उपलब्ध कराया गया।

    रेडक्रॉस रक्त बैंक प्रभारी डॉ. स्वाति मीणा ने स्पष्ट किया कि इस घटना में ब्लड बैंक के किसी कर्मचारी की संलिप्तता नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्लड बैंक के बाहर सक्रिय दलालों और असामाजिक तत्वों पर रोक लगाने के लिए पहले भी सिविल सर्जन को पत्र लिखा गया था और अब कलेक्टर को भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए पत्र भेजा जाएगा।

    उन्होंने यह भी बताया कि रक्त की खरीद-फरोख्त जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए जागरूकता पोस्टर लगाए गए हैं, ताकि लोग ऐसे किसी भी झांसे में न आएं और तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को दें।

    वहीं, सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि पीड़ित ग्रामीण ने किसी भी कर्मचारी पर आरोप नहीं लगाया है। मामला केवल बाहरी व्यक्ति की ठगी से जुड़ा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि भविष्य में इस तरह की कोई शिकायत मिलती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और अगर किसी कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा।

  • नरसिंहपुर सड़क हादसा: शादी से लौटते समय कार खाई में गिरी, युवक की जान गई

    नरसिंहपुर सड़क हादसा: शादी से लौटते समय कार खाई में गिरी, युवक की जान गई


    नई दिल्ली । नरसिंहपुर जिले के ठेमी थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। ग्राम चंदपुरा के पास एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई और इसके बाद करीब 8 फीट गहरी खाई में पलट गई। इस हादसे में कार सवार एक युवक की मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई।
    जानकारी के अनुसार, मृतक युवक शादी समारोह में शामिल होकर अपने गांव लौट रहा था। हादसा उस समय हुआ जब वह नरसिंहपुर में एक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद देर रात लगभग 12 बजे अपने घर गुड़वारा की ओर जा रहा था। रास्ते में चंदपुरा के पास कार अचानक नियंत्रण खो बैठी और सड़क किनारे लगे बबूल के पेड़ से जोरदार टकरा गई। टक्कर के बाद वाहन खाई में जा गिरा।
    हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक को स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान अंकित पटेल, उम्र 25 वर्ष, निवासी ग्राम गुड़वारा के रूप में हुई है। वह अपनी कार से अकेले यात्रा कर रहा था।
    घटना की सूचना मिलते ही ठेमी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद परिजन भी अस्पताल पहुंचे। शव को जिला अस्पताल लाया गया, जहां रविवार को पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी की गई।
    पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में जुट गई है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और वाहन पर नियंत्रण खोने को हादसे का कारण माना जा रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
    परिजनों ने बताया कि अंकित पिछले कई दिनों से लगातार शादी समारोहों में शामिल हो रहा था, जिससे वह काफी थका हुआ था। आशंका जताई जा रही है कि थकान या नींद की झपकी के कारण यह हादसा हुआ होगा। इस दर्दनाक घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

  • सिवनी में दोहरे हादसे से हड़कंप: पिकअप को डंपर ने टक्कर मारी, एक की मौत, चार घायल

    सिवनी में दोहरे हादसे से हड़कंप: पिकअप को डंपर ने टक्कर मारी, एक की मौत, चार घायल


    नई दिल्ली । सिवनी जिले के घंसौर थाना क्षेत्र अंतर्गत रूपदोंन गांव के पास रविवार सुबह एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार डंपर ने सामने से आ रही पिकअप वाहन को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गहरे गड्ढे में जा पलटा। इस दर्दनाक हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद डंपर चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पिकअप वाहन में सवार सभी लोग अतरिया गांव से घंसौर की ओर जा रहे थे। जैसे ही वाहन रूपदोंन गांव के पास पहुंचा, सामने से तेज रफ्तार में आ रहे डंपर ने नियंत्रण खोते हुए पिकअप को सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि पिकअप सड़क से नीचे उतरकर पलट गया और उसमें बैठे लोग इधर उधर जा गिरे। हादसे के बाद मौके पर चीख पुकार मच गई और आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मदद के लिए दौड़े।

    सूचना मिलते ही 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। एमएमटी मनीष रैकवार और चालक संदीप ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को वाहन से बाहर निकाला और तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घंसौर पहुंचाया। डॉक्टरों ने जांच के बाद एक युवक को मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान संतोष काकोडिया उम्र 20 वर्ष के रूप में हुई है। वहीं घायलों में राहुल उइके 26 वर्ष, सतेंद्र आर्मो 21 वर्ष, हिमेश आर्मो 23 वर्ष और शैलेंद्र शामिल हैं। इनमें कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है।

    घटना की जानकारी मिलते ही घंसौर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने मृतक के शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही फरार डंपर चालक की तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं ताकि आरोपी तक जल्द पहुंचा जा सके।

    इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मार्ग पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर पहले भी कई छोटे बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने से स्थिति जस की तस बनी हुई है।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लापरवाह ड्राइविंग पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक युवा की मौत और चार लोगों के घायल होने से पूरा क्षेत्र गम और आक्रोश में डूब गया है।

  • एमपी में शादी के दौरान रेबीज वैक्सीनेशन कैंप, बारातियों को बुलाकर लगाया गया इंजेक्शन, उठे सवाल

    एमपी में शादी के दौरान रेबीज वैक्सीनेशन कैंप, बारातियों को बुलाकर लगाया गया इंजेक्शन, उठे सवाल


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शादी समारोह के दौरान शामिल हुए बारातियों को बाद में घर-घर बुलाकर रेबीज के इंजेक्शन लगाए गए। यह पूरा मामला भैंसादंड गांव का है, जिसने पूरे इलाके में चिंता और अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया है।

    जानकारी के अनुसार, शादी समारोह में मेहमानों को जो मट्ठा (छाछ) परोसा गया था, वह एक ऐसी गाय के दूध से बनाया गया था, जिसमें रेबीज जैसे गंभीर लक्षण पाए गए थे। बाद में जांच में सामने आया कि संबंधित गाय को कुछ दिन पहले एक कुत्ते ने काट लिया था और उसी के बाद उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई।

    मंगलवार को जब गाय की हालत अचानक गंभीर हुई, तब गांव में यह जानकारी फैली कि उसी दूध से बने मट्ठे का उपयोग शादी में किया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग तुरंत हरकत में आया और संभावित संक्रमण के खतरे को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए।

    स्वास्थ्य विभाग ने उप स्वास्थ्य केंद्र भैंसादंड में तत्काल कैंप लगाकर टीकाकरण अभियान शुरू किया। अब तक करीब 200 से 250 लोगों को रेबीज के एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं। विभाग की टीम लगातार लोगों की पहचान कर उन्हें बुला रही है और टीकाकरण सुनिश्चित कर रही है।

    अधिकारियों के अनुसार, यह कदम पूरी तरह सावधानी के तौर पर उठाया गया है, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण या जोखिम से बचा जा सके। क्योंकि रेबीज एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो संक्रमित जानवरों के संपर्क या उनके दूध/लार से फैलने की आशंका में भी जोखिम पैदा कर सकती है।

    गांव में स्वास्थ्य टीम की तैनाती की गई है और सभी बारातियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। जिन लोगों ने शादी में भोजन और पेय पदार्थों का सेवन किया था, उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि शादी समारोह में बड़ी संख्या में मेहमान शामिल हुए थे, इसलिए अब सभी को ट्रैक कर टीकाकरण किया जा रहा है। अचानक हुई इस कार्रवाई से लोग पहले तो घबरा गए, लेकिन बाद में स्वास्थ्य विभाग की समझाइश के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।

    फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है कि क्या वास्तव में दूध या मट्ठे से किसी प्रकार का संक्रमण फैलने का खतरा था या यह पूरी तरह एहतियाती कदम है।

    यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता की आवश्यकता को भी उजागर करती है, ताकि भविष्य में ऐसे हालात से बचा जा सके।

  • आटे में छिपे बम से 4 गायों का जबड़ा लटका, 2 की मौत; बैतूल की घटना ने झकझोरा

    आटे में छिपे बम से 4 गायों का जबड़ा लटका, 2 की मौत; बैतूल की घटना ने झकझोरा


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में एक दर्दनाक और हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। शाहपुर के कोयलारी गांव में आटे में छिपाकर रखे गए विस्फोटक को गायों ने खा लिया, जिससे हुए धमाके में 2 गायों की मौत हो गई और 4 गायें व एक बैल गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उनकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।

    घटना 5 मई की है जब कोयलारी गांव के तालाब के पास गायें पानी पीने पहुंचीं। वहां खेत किनारे आटे और दाल में लिपटे विस्फोटक गोले रखे गए थे। भूखी गायों ने उन्हें चारा समझकर खा लिया। जैसे ही उन्होंने इन्हें चबाया, जोरदार धमाका हुआ और मवेशियों के जबड़े बुरी तरह फट गए।
    धमाके में दो गायों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि 4 गायें और एक बैल गंभीर रूप से घायल हो गए।

    गंभीर हालत: जबड़ा लटका, खाना-पानी बंद
    घायल पशुओं की स्थिति बेहद गंभीर है। उनका निचला जबड़ा पूरी तरह टूटकर लटक गया है। कई पशुओं के गले और आहार नली तक पत्थर पहुंच गए हैं, जिससे वे न तो खाना खा पा रहे हैं और न ही पानी पी पा रहे हैं।
    पशु चिकित्सकों के अनुसार उनकी हालत नाजुक है और अगले 48 घंटे बेहद अहम हैं। बचने की संभावना बहुत कम बताई जा रही है।

    मौके से मिले और विस्फोटक, बम स्क्वॉड की कार्रवाई
    सूचना मिलने पर पुलिस और पशु चिकित्सा टीम मौके पर पहुंची। जांच में सामने आया कि खेत के पास और भी 9 विस्फोटक गोले छिपाए गए थे। नर्मदापुरम से बम स्क्वॉड बुलाकर इन्हें सुरक्षित तरीके से नष्ट किया गया।

    आरोपी गिरफ्तार, ‘सूअर मारने के लिए रखा बम’ बताया
    पुलिस जांच में पता चला कि विस्फोटक कोयलारी गांव निवासी राकेश चौहान के खेत के पास रखे गए थे। घटना के बाद वह फरार हो गया था, जिसे बाद में इटारसी रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया।

    पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि उसने जंगली सूअरों से फसल बचाने के लिए ये “सूअर मार बम” रखे थे और उन पर आटा-दाल चिपका दी थी, ताकि जानवर उन्हें खा लें। पुलिस ने उसके खिलाफ विस्फोटक अधिनियम और बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज किया है।

    डॉक्टरों की चेतावनी: हालत बेहद नाजुक
    पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विस्फोटक में छोटे पत्थर भी भरे थे, जो मवेशियों के मुंह और आहार नली तक पहुंच गए हैं। इससे अंदरूनी चोटें गंभीर हो गई हैं और जीवित बचने की संभावना बहुत कम है।

    वन्यजीवों के लिए भी खतरा
    वन विभाग ने मामले की जांच वन्यजीव एंगल से भी शुरू कर दी है, क्योंकि यह क्षेत्र सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से सटा हुआ है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसे “चारा बम” न केवल मवेशियों बल्कि हिरण, नीलगाय और अन्य वन्यजीवों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।

    सुरक्षा पर सवाल
    विशेषज्ञों का कहना है कि आटे में छिपे ऐसे विस्फोटक ग्रामीणों, बच्चों और जानवरों सभी के लिए बड़ा खतरा हैं। पुलिस और प्रशासन ने जांच तेज कर दी है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा के प्रथम जत्थे को हरी झंडी दिखाकर करेंगे रवाना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा के प्रथम जत्थे को हरी झंडी दिखाकर करेंगे रवाना


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज गुरुवार को रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक 1 से ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा’ के प्रथम जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह गौरवशाली यात्रा ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अंतर्गत निकाली जा रही है। भारत की सांस्कृतिक चेतना, आस्था और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व–2026 (8 से 11 जनवरी 2026) का शुभारंभ ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर से किया गया है।

    मध्यप्रदेश से पहली बार निकलने वाली इस विशेष यात्रा में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से 1,100 श्रद्धालुओं का दल सम्मिलित होगा। यह रेलगाड़ी भोपाल और उज्जैन रेलवे स्टेशनों से भी तीर्थयात्रियों को अपने साथ लेकर सोमनाथ की ओर प्रस्थान करेगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालु सोमनाथ की पावन धरा पर आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, दर्शन और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता करेंगे।

    संचालक संस्कृति एन.पी. नामदेव ने बताया कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का उद्देश्य देशभर के राज्यों के माध्यम से भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान, हजार वर्षों के संघर्ष और आस्था का स्मरण करना है। यह उत्सव राष्ट्र की गौरवमयी विरासत के उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। यह पर्व केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनरुत्थान और राष्ट्रीय अस्मिता का महाकुंभ है। इसका उद्देश्य देशवासियों को उन हजार वर्षों के लंबे संघर्ष और आस्था की याद दिलाना है, जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी भारतीय सांस्कृतिक ज्योति को बुझने नहीं दिया। सोमनाथ मंदिर, जो हमारे राष्ट्रीय गौरव और अडिग श्रद्धा का प्रतीक है, वहीं से इस पावन पर्व की प्रेरणा ली गई है जिससे भावी पीढ़ी अपनी विरासत पर गर्व कर सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में निकाली जा रही यह यात्रा प्रदेश की सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय भावना को और अधिक सशक्त करेगी। श्रद्धा और भक्ति के इस अनूठे संगम का समापन 11 मई, 2026 को होगा, जब यह दल सोमनाथ महादेव का आशीर्वाद और सांस्कृतिक गौरव की स्मृतियां लेकर वापस लौटेगा। यह यात्रा जन-जन के मन में स्वाभिमान और श्रद्धा का नया संचार करेगी।

  • ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन के साथ CM डॉ. मोहन यादव ने फूंका ज्ञान क्रांति का शंखनाद, मध्य प्रदेश बनेगा देश का एजुकेशन हब!

    ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन के साथ CM डॉ. मोहन यादव ने फूंका ज्ञान क्रांति का शंखनाद, मध्य प्रदेश बनेगा देश का एजुकेशन हब!


    मध्य प्रदेश
    की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी ग्वालियर अब ज्ञान और कौशल के नए वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर की इस पावन धरा पर ‘ऋषि गालव विश्वविद्यालय’ का विधि-विधान से भूमिपूजन कर प्रदेश के शिक्षा जगत में एक नए अध्याय की शुरुआत की है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्वालियर की वीरता, विद्वता और कला की त्रिवेणी का स्मरण करते हुए कहा कि एक विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाला केंद्र नहीं होता, बल्कि वह राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होता है। ऋषि गालव के नाम पर स्थापित होने वाला यह संस्थान हमारी भावी पीढ़ियों को आधुनिक तकनीक के साथ-साथ हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और संस्कारों से भी जोड़ेगा, ताकि वे राष्ट्र निर्माण के अग्रदूत बन सकें।

    मुख्यमंत्री ने मध्य भारत शिक्षा समिति के संस्थापक सदाशिव गणेश गोखले के महान योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पराधीनता के कठिन समय में वर्ष 1941 में जो दीया एक छोटे से स्कूल के रूप में जलाया गया था, वह आज चार महाविद्यालयों, पांच विद्यालयों और एक खेल अकादमी के रूप में एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। वर्तमान में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षित कर रही यह संस्था अब विश्वविद्यालय के रूप में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के संगम का केंद्र बनेगी। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है जो न केवल तकनीकी रूप से दक्ष हों, बल्कि चरित्रवान, नवाचारी और समाज के प्रति पूर्णतः उत्तरदायी भी हों। सरकार और समाज के सामूहिक प्रयासों का यह अनूठा उदाहरण प्रदेश के शैक्षणिक ढांचे को नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा।

    शिक्षा प्रणाली में बदलाव की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने नई शिक्षा नीति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और इसी को आधार मानकर प्रदेश में कई क्रांतिकारी नवाचार किए गए हैं। अब दीक्षांत समारोहों में औपनिवेशिक काल के काले कोट के स्थान पर भारतीय वेशभूषा और साफे की परंपरा को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को ‘कुलगुरु’ का गौरवपूर्ण संबोधन दिया गया है, जो हमारी गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान को दर्शाता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा में अमीर-गरीब का भेद समाप्त होना चाहिए और सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से चरित्र निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    मध्य प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा के लोकतंत्रीकरण के लिए निरंतर कार्यरत है, जिसके तहत प्रदेश के सभी 55 जिलों में ‘पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने गुमनाम नायकों और महान क्रांतिकारियों के सम्मान में तात्या टोपे विश्वविद्यालय, क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय और रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की स्थापना की है, ताकि युवा पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरित हो सके। उन्होंने विश्वास जताया कि ग्वालियर का यह नया विश्वविद्यालय अगले वर्ष गुरु पूर्णिमा तक अपना कार्य प्रारंभ कर देगा और ग्वालियर न केवल मध्य भारत, बल्कि पूरे देश में शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र (एजुकेशन हब) के रूप में नई चमक बिखेरेगा। यह संस्थान राष्ट्रवाद की भावना से ओतप्रोत होकर छात्रों के भीतर योग्यता और दक्षता का नया संचार करेगा।