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  • MP में दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा, भोपाल पुलिस लाइन में जुटे जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी, सत्य-धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश

    MP में दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा, भोपाल पुलिस लाइन में जुटे जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी, सत्य-धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश


    भोपाल । विजयादशमी के अवसर पर मध्य प्रदेश में मंगलवार को शस्त्र पूजन के आयोजन किए गए। राजधानी भोपाल में नेहरू नगर स्थित पुलिस लाइन ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विश्वास सारंग और सांसद आलोक शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान पारंपरिक विधि-विधान से शस्त्रों का पूजन किया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सुख-समृद्धि शांति और उन्नति की कामना की। विजयादशमी पर आयोजित इस कार्यक्रम में सनातन परंपराओं और शस्त्र पूजन के महत्व पर भी जोर दिया गया।

    भोपाल पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में महापौर मालती राय विधायक भगवानदास सबनानी कमिश्नर कर्मवीर शर्मा पुलिस कमिश्नर संजय कुमार और संयुक्त पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान भी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पूजा में भाग लिया। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा को शक्ति साहस और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसी परंपरा के तहत भोपाल में भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने समाज और प्रदेश में शांति तथा समृद्धि बनाए रखने की कामना की।

    मंत्री विश्वास सारंग ने विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व बताया। उन्होंने कहा कि यह त्योहार पूरे विश्व में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। उनके मुताबिक विजयादशमी लोगों को सत्य धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने शस्त्रों को शक्ति साहस और राष्ट्र की सुरक्षा का प्रतीक बताते हुए कहा कि भारतीय परंपराओं में शस्त्र पूजन का विशेष महत्व है। यह परंपरा लोगों को अपनी संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहने का संदेश देती है।

    सारंग ने कहा कि सनातन परंपराएं केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे लोगों को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का भी बोध कराती हैं। विजयादशमी के अवसर पर शस्त्रों की पूजा इसी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस दिन लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का संकल्प लेते हैं और समाज में सकारात्मकता तथा सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

    भोपाल के अलावा मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी विजयादशमी पर शस्त्र पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की गई। शस्त्र पूजन की परंपरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसमें शक्ति के साथ जिम्मेदारी और सुरक्षा के भाव को भी जोड़ा जाता है। पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी ने आयोजन को औपचारिक स्वरूप दिया।

    विजयादशमी का पर्व देशभर में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं रावण दहन के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है तो कहीं शस्त्र पूजन के माध्यम से शक्ति और कर्तव्य के महत्व को याद किया जाता है। भोपाल में आयोजित कार्यक्रम भी इसी परंपरा का हिस्सा रहा। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने प्रदेश में सुख-समृद्धि शांति और उन्नति की कामना की।

  • खेत से घर लौट रहा किसान आग की चपेट में आया, बिजली के तारों से सुलगी मक्के की करप, लाखों के नुकसान की आशंका

    खेत से घर लौट रहा किसान आग की चपेट में आया, बिजली के तारों से सुलगी मक्के की करप, लाखों के नुकसान की आशंका


    शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में मंगलवार सुबह एक हादसे में किसान की मक्के की पूरी करप जलकर राख हो गई। घटना इंदार थाना क्षेत्र के बामौर खुर्द गांव की है। यहां खेत से मक्के की करप ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर घर ले जा रहे किसान मोहन सिंह कुशवाह की ट्रॉली बिजली के तारों के संपर्क में आ गई। तार छूते ही सूखी मक्के की करप में आग लग गई और देखते ही देखते लपटें तेज हो गईं। हालांकि समय रहते ग्रामीणों ने मोर्चा संभाल लिया और जलती हुई करप को ट्रॉली से नीचे गिराना शुरू कर दिया। इससे आग ट्रैक्टर तक नहीं पहुंच सकी और चालक की जान बच गई।

    जानकारी के अनुसार किसान मोहन सिंह कुशवाह अपने खेत से मक्के की करप ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर घर लौट रहे थे। रास्ते में बिजली के खंभों पर लटके पंप लाइन के तार ट्रॉली में भरी करप से टकरा गए। तारों के संपर्क में आते ही सूखी फसल ने आग पकड़ ली। कुछ ही देर में ट्रॉली में भरी करप जलने लगी। अचानक आग भड़कने से मौके पर अफरा तफरी मच गई। किसान के सामने एक ओर उसकी मेहनत से जुटाई गई फसल जलने का खतरा था तो दूसरी ओर आग के ट्रैक्टर तक पहुंचने की आशंका भी बनी हुई थी।

    घटना के दौरान आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मदद के लिए आगे आए। उन्होंने लाठियों की मदद से ट्रॉली में जल रही करप को नीचे गिराना शुरू किया। ग्रामीणों ने तेजी से एक के बाद एक जलती हुई फसल को नीचे गिराया ताकि आग ट्रैक्टर और ट्रॉली के दूसरे हिस्सों तक न फैल सके। उनकी तत्परता से आग को वाहन तक पहुंचने से रोकने में मदद मिली। इससे ट्रैक्टर-ट्रॉली जलने से बच गए और चालक भी सुरक्षित रहा। यदि आग वाहन तक पहुंच जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था।

    हालांकि इस प्रयास के बावजूद किसान की मक्के की पूरी करप जलकर राख हो गई। फसल के नष्ट होने से किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। मक्के की करप पशुओं के चारे सहित खेती से जुड़े अन्य कामों में उपयोग की जाती है। ऐसे में पूरी करप का जल जाना किसान के लिए परेशानी बढ़ाने वाला है। नुकसान की वास्तविक कीमत कितनी है इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस घटना ने गांवों में खेतों से फसल और चारा ले जाते समय बिजली की लाइनों से होने वाले खतरे को भी उजागर किया है। ट्रैक्टर-ट्रॉली में ऊंचाई तक भरी सूखी फसल बिजली के तारों के संपर्क में आ जाए तो आग लगने का जोखिम बढ़ जाता है। खासकर पंप लाइन के तार यदि नीचे लटक रहे हों तो किसानों और ग्रामीणों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में बिजली लाइनों की उचित ऊंचाई और रखरखाव पर ध्यान देना जरूरी है। फिलहाल इस हादसे में राहत की बात यह रही कि किसान की जान बच गई और ट्रैक्टर-ट्रॉली सुरक्षित रहे लेकिन उसकी पूरी मक्के की करप जलने से बड़ा नुकसान हुआ।

  • उज्जैन में विजयादशमी पर संघ का पथ संचलन, बैंड और लाठी के साथ कदमताल करते निकले स्वयंसेवक, 25 अक्टूबर तक होंगे आयोजन

    उज्जैन में विजयादशमी पर संघ का पथ संचलन, बैंड और लाठी के साथ कदमताल करते निकले स्वयंसेवक, 25 अक्टूबर तक होंगे आयोजन


    उज्जैन। विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार को उज्जैन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS का पथ संचलन निकाला गया। शहर की 65 बस्तियों से स्वयंसेवक पारंपरिक वेशभूषा में अनुशासित तरीके से कदमताल करते हुए विभिन्न मार्गों से गुजरे। इस दौरान शहर में कई जगह उत्साह का माहौल देखने को मिला। स्थानीय रहवासियों ने रंगोली बनाकर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। कई स्थानों पर लोगों ने फूल बरसाए और सड़क के दोनों ओर खड़े होकर संचलन में शामिल स्वयंसेवकों का अभिवादन किया। विजयादशमी पर आयोजित इस कार्यक्रम में अनुशासन और सामूहिक सहभागिता प्रमुख रूप से दिखाई दी।

    पथ संचलन की शुरुआत से पहले संबंधित बस्तियों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें संघ के गीत अमृत वचन बौद्धिक और प्रार्थना शामिल रहे। इन कार्यक्रमों के बाद स्वयंसेवक निर्धारित मार्गों पर संचलन के लिए निकले। सभी स्वयंसेवक एक साथ कदमताल करते हुए आगे बढ़े। उनके साथ बैंड भी शामिल रहा और कई स्वयंसेवक हाथों में लाठी लेकर चलते दिखाई दिए। संचलन के दौरान स्वयंसेवकों ने अनुशासन बनाए रखा और निर्धारित मार्ग से होते हुए कार्यक्रम पूरा किया। इसके बाद सभी अपने अपने क्षेत्रों की बस्तियों में लौट गए।

    उज्जैन में दशहरे के अवसर पर संघ की ओर से अलग-अलग बस्तियों में पथ संचलन निकालने की परंपरा रही है। इस आयोजन के माध्यम से स्वयंसेवक एकजुट होकर निर्धारित कार्यक्रम में भाग लेते हैं। इस बार भी शहर की 65 बस्तियों में विजयादशमी के दिन संचलन आयोजित किए गए। मार्गों पर स्थानीय लोगों की मौजूदगी और स्वागत की तैयारियों ने आयोजन को खास बनाया। कई स्थानों पर रंगोली के जरिए रास्तों को सजाया गया। लोगों ने फूल बरसाकर स्वयंसेवकों का स्वागत किया और उनके गुजरने के दौरान अभिवादन किया।

    संघ की ओर से पथ संचलन के आयोजन केवल विजयादशमी तक सीमित नहीं रहेंगे। जानकारी के अनुसार 20 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक शहर की अलग-अलग बस्तियों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के तहत संबंधित क्षेत्रों में स्वयंसेवक एकत्र होंगे और तय कार्यक्रम के अनुसार संचलन निकालेंगे। आयोजन की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर की जा रही है। इससे शहर की विभिन्न बस्तियों में अलग-अलग दिनों पर संघ के कार्यक्रम देखने को मिलेंगे।

    विजयादशमी पर निकले पथ संचलन के दौरान पारंपरिक वेशभूषा बैंड की धुन और एक साथ कदमताल करते स्वयंसेवक आकर्षण का केंद्र रहे। स्वागत के लिए बनाई गई रंगोलियों और फूलों की वर्षा से कई मार्गों पर उत्सवी माहौल दिखाई दिया। अब 25 अक्टूबर तक उज्जैन की अन्य बस्तियों में भी पथ संचलन और संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के जरिए संघ की स्थानीय इकाइयां अपने तय कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएंगी।

  • ग्वालियर हादसे में ट्रक कैसे पहुंचा श्रद्धालुओं की कतार तक, ब्रेक फेल या ड्राइवर की गलती या साजिश, जांच में खुलेंगे सुरक्षा व्यवस्था के राज

    ग्वालियर हादसे में ट्रक कैसे पहुंचा श्रद्धालुओं की कतार तक, ब्रेक फेल या ड्राइवर की गलती या साजिश, जांच में खुलेंगे सुरक्षा व्यवस्था के राज


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर में हुए भीषण ट्रक हादसे के बाद दुर्घटना की वजह और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। शनिवार रात करीब डेढ़ बजे धान से भरा ट्रक दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं पर चढ़ गया। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई जबकि 40 से अधिक लोग घायल हुए। मंदिर समिति ने घटना में आतंकी साजिश की आशंका जताते हुए विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग की है। दूसरी ओर पुलिस की शुरुआती जांच में ब्रेक फेल होने और रास्ते की जानकारी नहीं होने जैसी संभावनाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। फिलहाल साजिश के आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं हुआ है।

    हादसे को लेकर पहली थ्योरी ट्रक के ब्रेक फेल होने की है। ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि वाहन के ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया था। पुलिस भी शुरुआती स्तर पर इस संभावना की जांच कर रही है। भारी वाहनों में एयर ब्रेक का इस्तेमाल होता है और लंबी ढलान पर लगातार ब्रेक लगाने से उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। ट्रक में तकनीकी खराबी थी या नहीं इसकी पुष्टि क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय की जांच से हो सकेगी। वाहन के ब्रेक टायर गियर और उसमें लदे धान के वास्तविक वजन की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।

    दूसरी थ्योरी ड्राइवरों की गलती और रास्ते को लेकर भ्रम की है। पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक दोनों ट्रक चालक रास्ते से अनजान थे और गूगल मैप की मदद से आगे बढ़ रहे थे। एक रिपोर्ट के अनुसार टोल टैक्स बचाने के लिए शॉर्टकट तलाशने की बात भी सामने आई है। अमरोल गांव के कुछ लोगों ने दावा किया कि उन्होंने ड्राइवरों को आगे रास्ता बंद होने की जानकारी दी थी लेकिन वे गूगल मैप पर रास्ता खुला होने की बात कह रहे थे। ग्रामीणों ने ड्राइवरों के मुंह से शराब की गंध आने का दावा भी किया है। इसकी पुष्टि के लिए मेडिकल जांच और ब्लड रिपोर्ट जरूरी होगी।

    तीसरी थ्योरी मंदिर समिति की ओर से उठाई गई साजिश की आशंका है। समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर ने धार्मिक आयोजन को जानबूझकर निशाना बनाए जाने की संभावना जताते हुए एसआईटी जांच की मांग की है। हालांकि अब तक पुलिस या प्रशासन ने आतंकी हमले की पुष्टि नहीं की है। ट्रक का चेकिंग पॉइंट पार करना और बैरिकेड तोड़ते हुए मंदिर की ओर बढ़ना जांच के अहम बिंदु हैं। वहीं ट्रक मालिक का कहना है कि वाहन रास्ता तलाशते हुए आगे बढ़ा था। हादसे के बाद ड्राइवर और मालिक के भागने की घटना भी जांच का हिस्सा है लेकिन केवल इससे साजिश साबित नहीं होती।

    जांच में ट्रक की तकनीकी स्थिति के साथ ड्राइवरों की मेडिकल रिपोर्ट मोबाइल लोकेशन गूगल मैप का रिकॉर्ड माल से जुड़े दस्तावेज और रास्ते में लगे सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की जा सकती है। ग्रामीणों पुलिसकर्मियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी घटना की कड़ियां जोड़ने में मदद करेंगे। यदि लापरवाही साबित होती है तो भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई हो सकती है। वहीं गैर इरादतन हत्या या आतंकी कृत्य जैसे गंभीर आरोपों के लिए संबंधित कानूनी तत्वों और पर्याप्त सबूतों का होना जरूरी है।

    हादसे ने मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। सामान्य तौर पर मंदिर समिति भीड़ की जानकारी देने और व्यवस्थाओं में सहयोग करती है जबकि पुलिस यातायात नियंत्रण और कानून व्यवस्था संभालती है। जिला प्रशासन विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी निभाता है। रिपोर्टों के मुताबिक मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर पार्किंग बनाई गई थी और रात में 50 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे। इसके बावजूद भारी ट्रक प्रतिबंधित क्षेत्र तक कैसे पहुंच गए यह जांच का अहम सवाल है। चेकिंग पॉइंट पर ट्रक रोकने को लेकर पुलिस के बयान और ग्राउंड रिपोर्ट में अंतर भी सामने आया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को हटाया गया और तीन थाना प्रभारियों समेत आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। कलेक्टर रुचिका चौहान ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं और सात दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है। हालांकि चेकिंग पॉइंट की जिम्मेदारी और कार्रवाई के दायरे को लेकर सवाल बने हुए हैं। सरकार ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है जबकि पीड़ित परिवार अधिक मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग कर रहे हैं। अब जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि हादसा तकनीकी खराबी या मानवीय लापरवाही का नतीजा था अथवा इसके पीछे कोई दूसरी वजह थी। साथ ही यह भी तय करना होगा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा में हुई चूक के लिए किस स्तर पर जवाबदेही बनती है।

  • ग्वालियर हादसे में 15 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द, सीएम से 3 से 7 मिनट की मुलाकात, घायलों ने इलाज पर उठाए सवाल

    ग्वालियर हादसे में 15 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द, सीएम से 3 से 7 मिनट की मुलाकात, घायलों ने इलाज पर उठाए सवाल


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के प्रवेश द्वार पर हुए भीषण हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी बनी हुई है। हादसे में अपनों को खोने वाले परिजन प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ग्वालियर दौरे से पहले पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सक्रिय हो गए। जिला प्रशासन पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों ने अस्पताल से लेकर पीड़ित परिवारों के घरों तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर रुचिका चौहान और एसपी धर्मवीर सिंह यादव भी मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले संबंधित स्थानों पर पहुंचे और तैयारियों की जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट के साथ पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। हालांकि कई परिवारों के साथ उनकी मुलाकात तीन से सात मिनट तक ही रही। इस दौरान परिजनों ने नौकरी आवास और आर्थिक सहायता की मांग रखी। लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच ट्रक मंदिर तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई जैसे सवाल इन मुलाकातों में प्रमुखता से सामने नहीं आए।

    मुख्यमंत्री के ट्रॉमा सेंटर पहुंचने के दौरान बाहर मौजूद कुछ घायलों और उनके परिजनों ने इलाज को लेकर नाराजगी जताई। शिवम ने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर में उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा जहां 15 हजार रुपये खर्च हुए। उनका कहना था कि प्रशासन मुफ्त इलाज की बात कर रहा है लेकिन खर्च की गई रकम वापस नहीं मिली। वहीं कोमल ने शिकायत की कि घायल कल्पना परिहार को 24 घंटे तक जरूरी पट्टा नहीं मिला और उन्हें बाजार से 15 हजार रुपये में खरीदना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का भरोसा दिया गया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शैलेंद्र शर्मा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के आने से पहले अस्पताल में पंखे लगाए गए जाले हटाए गए और बेडशीट बदली गईं। उन्होंने मुख्यमंत्री से नहीं मिल पाने की भी शिकायत की।

    महेशपुरा में मुख्यमंत्री शाम करीब 4 बजकर 57 मिनट पर पहुंचे। इससे पहले स्थानीय नेता वीरेंद्र गुर्जर मृतक दिव्यांश कुशवाह के भाई शुभम को समझाते नजर आए। मुख्यमंत्री के काफिले के आने की सूचना मिलने पर उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। इसके बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने दिव्यांश के पिता अशोक कुशवाह और उनके बेटे शुभम को सांत्वना दी। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने परिवार के मकान और आवास योजना के बारे में पूछा। अशोक कुशवाह ने बताया कि उनका एक कमरे का अपना मकान है और उन्होंने शुभम के लिए नौकरी की मांग रखी। करीब तीन मिनट में यह मुलाकात समाप्त हो गई।

    इसके बाद मुख्यमंत्री महलगांव में मृतक सतेंद्र गुर्जर के घर पहुंचे। वहां उनके पिता जगदीश गुर्जर भावुक हो गए। सतेंद्र के ताऊ रामचित्र ने परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग रखी। पार्षद गिर्राज कंसाना के अनुसार मुख्यमंत्री ने जरूरी दस्तावेज भेजने को कहा और आर्थिक सहायता का चेक देकर आगे बढ़ गए। गल्ला कोठार में मुख्यमंत्री ने मृतक प्रिंस और निकेश के परिवारों से मुलाकात की। परिजनों ने कमाने वाले बेटों की मौत से आजीविका पर आए संकट की जानकारी दी और नौकरी तथा आवास की मांग रखी।

    गदाईपुरा के शिवनगर में मुख्यमंत्री ने मृतक हेमंत राठौर पवन राठौर और लव अमन तथा अशोक त्यागी के परिजनों से भी मुलाकात की। यहां कांग्रेस नेता सुनील शर्मा और स्थानीय लोगों ने ज्ञापन सौंपकर मृतकों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये घायलों को 10-10 लाख रुपये और प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। हादसे के बाद परिवारों के सामने आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की चिंता बनी हुई है। वहीं ट्रक मंदिर परिसर तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी इन सवालों का जवाब हादसे की जांच के लिहाज से अहम बना हुआ है।

  • ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में बड़ी लापरवाही, फायर हाइड्रेंट के उपकरण गायब, ICU और नवजातों की सुरक्षा पर सवाल

    ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में बड़ी लापरवाही, फायर हाइड्रेंट के उपकरण गायब, ICU और नवजातों की सुरक्षा पर सवाल


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बने हजार बिस्तर अस्पताल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में आग बुझाने के लिए लगाए गए फायर हाइड्रेंट सिस्टम के कई जरूरी उपकरण गायब मिले हैं। इनमें पाइप नोजल और होज रील कपलिंग जैसे सामान शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि इन उपकरणों के गायब होने की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को सिस्टम की जांच के दौरान मिली। जिस अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज भर्ती रहते हैं वहां आग जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    हजार बिस्तर अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 200 से 300 मरीज भर्ती रहते हैं। इनमें आईसीयू में उपचार करा रहे गंभीर मरीज नवजात शिशु उनकी माताएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। ऐसे मरीजों को आग लगने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना आसान नहीं होता। बहुमंजिला अस्पताल में मरीजों को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त समय और प्रशिक्षित कर्मचारियों के साथ काम करने वाली अग्निशमन व्यवस्था जरूरी होती है। ऐसे में फायर हाइड्रेंट सिस्टम के अहम उपकरणों का गायब होना मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाता है।

    अस्पताल प्रबंधन के अनुसार नई बिल्डिंग हैंडओवर होने के बाद फायर सेफ्टी के कुछ उपकरण चोरी होने की बात सामने आई है। हालांकि उपकरण कब चोरी हुए और कुल कितने सामान गायब हैं इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस मामले ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और नियमित निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर फायर सिस्टम के उपकरण लंबे समय से गायब थे तो समय रहते उनकी कमी का पता क्यों नहीं चला यह भी जांच का विषय है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा उपकरणों का नियमित भौतिक सत्यापन बेहद जरूरी है ताकि किसी भी कमी को आपात स्थिति आने से पहले दूर किया जा सके।

    मौके पर लगे फायर बॉक्स की हालत भी चिंता बढ़ाने वाली बताई गई है। इसके अलावा अस्पताल में लगे कुछ अग्निशमन सिलेंडरों पर एक्सपायरी डेट स्पष्ट रूप से नहीं मिली। ऐसे में केवल उपकरणों की मौजूदगी ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उनका सही हालत में होना और जरूरत पड़ने पर काम करना भी जरूरी है। आग लगने की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि जरूरी पाइप और नोजल उपलब्ध नहीं हों तो आग पर शुरुआती स्तर पर काबू पाने में परेशानी हो सकती है। इससे मरीजों को सुरक्षित निकालने और आग को फैलने से रोकने की चुनौती बढ़ सकती है।

    हजार बिस्तर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना ने बताया कि अज्ञात चोर फायर सेफ्टी के उपकरण चुरा ले गए हैं। नए उपकरण खरीदने के लिए वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने कहा कि आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए सिस्टम दुरुस्त है। उपकरणों की जांच के लिए निजी एजेंसियों से बातचीत चल रही है और जल्द ही मॉक ड्रिल भी कराई जाएगी। हालांकि फायर हाइड्रेंट के कुछ जरूरी उपकरणों के गायब मिलने के बाद पूरी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का परीक्षण महत्वपूर्ण हो गया है।

    इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल में सुरक्षा गार्ड और जिम्मेदार अधिकारी तैनात होने के बावजूद उपकरण कैसे गायब हुए और नियमित जांच में इसका पता क्यों नहीं चला इस पर जवाबदेही तय करना जरूरी है। नए उपकरण खरीदने का प्रस्ताव भेजना एक कदम हो सकता है लेकिन इसके साथ पूरे फायर सिस्टम का निरीक्षण करना सभी उपकरणों की कार्यक्षमता जांचना और कर्मचारियों को आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण देना भी आवश्यक है। अस्पताल में भर्ती मरीज अपनी सुरक्षा के लिए व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। इसलिए अग्नि सुरक्षा में किसी भी कमी को जल्द दूर करना और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए निगरानी मजबूत करना बेहद जरूरी है।

  • 15 मौतों के बाद शीतला माता मेले से गायब हुए श्रद्धालु, लाखों का सामान लेकर लौटे व्यापारी, कोरोना के बाद पहली बार ऐसे हालात

    15 मौतों के बाद शीतला माता मेले से गायब हुए श्रद्धालु, लाखों का सामान लेकर लौटे व्यापारी, कोरोना के बाद पहली बार ऐसे हालात


    भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सातऊ गांव के शीतला माता मंदिर में हर साल अष्टमी और नवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। नौ दिनों तक चलने वाले मेले में खिलौनों प्रसाद झूलों और घरेलू सामान की दुकानों पर जमकर खरीदारी होती है। इसी उम्मीद के साथ दूरदराज के जिलों और दूसरे राज्यों से व्यापारी यहां दुकानें लगाने पहुंचते हैं। लेकिन इस बार मेले की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। 17 अक्टूबर की रात मंदिर के पास हुए दर्दनाक ट्रक हादसे के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट आई है। हादसे में 15 लोगों की मौत की खबर से लोग दुखी हैं और इसका सीधा असर मेले के कारोबार पर पड़ा है। व्यापारियों के मुताबिक दो दिनों में 50 लाख रुपये से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है और नवमी से पहले ही करीब 80 प्रतिशत दुकानदार अपनी दुकानें समेटकर लौटने लगे।

    सोमवार को दुर्गा नवमी के दिन मेले का नजारा सामान्य वर्षों से बिल्कुल अलग दिखाई दिया। जिन रास्तों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और दुकानों पर ग्राहकों की चहल पहल रहती थी वहां सन्नाटा पसरा था। कई दुकानदार सामान पैक करते नजर आए तो कुछ आखिरी समय तक ग्राहकों का इंतजार करते रहे। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने नौ दिनों तक चलने वाले मेले के लिए पहले से सामान खरीदा था और दुकान लगाने के लिए किराया तथा परिवहन पर भी खर्च किया था। लेकिन हादसे के बाद लोगों के नहीं पहुंचने से उनकी कमाई की उम्मीद टूट गई। कुछ व्यापारियों के लिए तो दुकान तक सामान लाने का भाड़ा निकालना भी मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के बाद भी मेले में कारोबार की ऐसी स्थिति नहीं देखी थी।

    हर साल अष्टमी और नवमी पर शीतला माता मंदिर में करीब एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी अनुमान के आधार पर छोटे और बड़े व्यापारी अपनी तैयारियां करते हैं। इस बार भी दुकानदारों को अच्छी बिक्री की उम्मीद थी लेकिन हादसे के बाद मेले में आने वालों की संख्या बेहद कम रह गई। छतरपुर से परिवार के साथ आईं दर्पण पिछले पांच साल से यहां खिलौनों की दुकान लगाती हैं। उन्हें इस बार भी अच्छी कमाई की उम्मीद थी लेकिन ग्राहकों की कमी ने उन्हें निराश कर दिया। वहीं दतिया से पहली बार दुकान लगाने आईं दामिनी को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। उनका कहना है कि कारोबार नहीं होने से उनका पूरा हिसाब बिगड़ गया है।

    ग्वालियर की मंजिता देवी के मुताबिक उन्होंने करीब एक लाख रुपये का सामान बिक्री के लिए रखा था लेकिन ग्राहकों की कमी के कारण सामान नहीं बिक सका। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंदिर मार्ग पर बाइक तक जाने में रोक लगाई जाती है तो भारी ट्रक वहां तक कैसे पहुंच गया। भितरवार की 80 वर्षीय कस्तूरी देवी भी नुकसान से परेशान हैं। वे हर सोमवार को शीतला माता मंदिर आती हैं और उनके मुताबिक सामान्य सोमवार को भी इस बार की तुलना में ज्यादा भीड़ रहती है। उन्होंने बताया कि उन पर करीब 50 हजार रुपये का कर्ज है और अब कारोबार ठप होने से इसकी भरपाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    मंदिर के महंत कमल सिंह भगत ने भी हादसे पर दुख जताया। उनका कहना है कि मंदिर के सैकड़ों साल के इतिहास में ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई। उनके मुताबिक नवमी पर इस बार सामान्य दिनों की तुलना में बेहद कम श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने कहा कि मंदिर का मजबूत प्रवेश द्वार पहले भी कई लोगों की जान बचाने में मददगार रहा है। भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए मंदिर प्रबंधन प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से चर्चा कर बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग करेगा।

    इस बीच कुछ दुकानदारों ने स्थानीय लोगों पर दुकान लगाने की जगह के लिए 500 रुपये और बिजली के लिए प्रतिदिन 200 रुपये मांगने के आरोप भी लगाए हैं। कुछ ने धमकी और मारपीट की शिकायतें भी बताई हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हादसे के बाद मेले में पसरे सन्नाटे ने व्यापारियों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब उनके सामने बचा हुआ सामान वापस ले जाने और हुए नुकसान की भरपाई करने की चुनौती है। वहीं श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

  • ग्वालियर में बेकाबू ट्रक का कहर, मंदिर में दर्शन करने पहुंचे 57 श्रद्धालु चपेट में आए, 16 की मौत और 41 घायल

    ग्वालियर में बेकाबू ट्रक का कहर, मंदिर में दर्शन करने पहुंचे 57 श्रद्धालु चपेट में आए, 16 की मौत और 41 घायल


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने एक और परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल 78 वर्षीय मोतीराम प्रजापति ने मंगलवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। करीब 52 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद उनकी मौत हो गई। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात हुए इस हादसे में एक बेकाबू ट्रक ने दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं और आसपास मौजूद लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था। हादसे में कुल 57 लोग प्रभावित हुए थे जिनमें 15 लोगों की मौत पहले ही हो चुकी थी जबकि 41 लोग घायल बताए गए हैं।

    मोतीराम प्रजापति मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार के पास प्रसाद की दुकान लगाते थे। इसी दुकान से होने वाली कमाई के सहारे वे अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। हादसे की रात वे भी ट्रक की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। परिजन उन्हें इलाज के लिए लिंक हॉस्पिटल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी। चिकित्सकों के मुताबिक हादसे में लगी चोट के कारण उनकी खून की नली में थक्का जम गया था। इस स्थिति को सुपरफिशियल फीमोरल थ्रोम्बोसिस बताया गया। मोतीराम को वर्ष 2024 में हार्ट अटैक भी आया था जिसके बाद उनके दिल में स्टेंट डाला गया था। तमाम प्रयासों के बावजूद मंगलवार सुबह उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और सातऊ गांव में शोक की लहर फैल गई।

    हादसे में गंभीर रूप से घायल संजय शर्मा और 19 वर्षीय कल्पना परिहार को बेहतर उपचार के लिए भोपाल एम्स भेजा गया है। संजय को सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात एयर एम्बुलेंस से शिफ्ट किया गया जबकि कल्पना को मंगलवार सुबह एयर एम्बुलेंस के जरिए भोपाल पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इससे पहले घायलों के उपचार की जानकारी ली थी और अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि इलाज में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।

    संजय शर्मा अपने परिवार के साथ शीतला माता मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। वे श्योपुर के निवासी हैं और शनिवार को परिवार के साथ एक तेरहवीं कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अपने भाइयों से मिलने सहसराम गांव गए थे। वहां से वे अपने बड़े भाई महेश को साथ लेकर ग्वालियर आए थे। संजय यहां मकान बनवा रहे थे और चाहते थे कि महेश निर्माण कार्य की देखरेख करें। रात करीब डेढ़ बजे हुए हादसे में उनके भाई महेश और मासूम शौर्य की मौत हो गई जबकि संजय गंभीर रूप से घायल हो गए।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक धान से भरे दो ओवरलोड ट्रक नो एंट्री वाले रास्ते में करीब सात किलोमीटर तक अंदर आ गए थे। मंदिर के पास संकरे रास्ते और ढलान पर पहुंचने के बाद एक ट्रक रुक गया जबकि दूसरा ट्रक बेकाबू होकर नीचे की ओर बढ़ने लगा। रास्ते में उसने दुकानों और श्रद्धालुओं को अपनी चपेट में ले लिया। आखिरकार मंदिर का करीब 200 साल पुराना सीमेंट कंक्रीट का प्रवेश द्वार ट्रक के सामने आ गया और उससे टकराने के बाद वाहन रुक गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यदि ट्रक गेट से नहीं टकराता तो आगे कतार में खड़े अन्य श्रद्धालु भी उसकी चपेट में आ सकते थे।

    हादसे के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और नो एंट्री मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए तीन शिफ्ट में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है और 150 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात बताए गए थे। हादसे से करीब 15 मिनट पहले ग्वालियर के एसएसपी धर्मवीर सिंह भी मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रित करते दिखाई दिए थे। इसके कुछ ही समय बाद ट्रक के श्रद्धालुओं को कुचलने की सूचना मिली। अब इस दर्दनाक घटना के बाद घायलों के उपचार के साथ यह सवाल भी अहम है कि प्रतिबंधित मार्ग पर ओवरलोड ट्रक कैसे पहुंचा और ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

  • महाअष्टमी पर मां अष्टभुजा के दरबार में भक्तों का महाकुंभ, कन्या पूजन और भंडारे में उमड़े हजारों श्रद्धालु

    महाअष्टमी पर मां अष्टभुजा के दरबार में भक्तों का महाकुंभ, कन्या पूजन और भंडारे में उमड़े हजारों श्रद्धालु


    मऊगंज । मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के अष्टभुजा धाम नईगढ़ी में शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। रविवार को मां अष्टभुजा के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिर में दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या 50 हजार से अधिक बताई गई। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तिमय माहौल बना रहा। मां के जयकारों से पूरा धाम गूंज उठा और श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देर तक लगी रहीं।
    महाअष्टमी के पावन अवसर पर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना तड़के ही शुरू हो गया था। सुबह करीब तीन बजे से ही मंदिर के बाहर भक्तों की कतारें लगने लगीं। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। भक्तों ने मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कई श्रद्धालु मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से भी अष्टभुजा धाम पहुंचे। रीवा सीधी सतना प्रयागराज और वाराणसी सहित कई स्थानों से आए भक्तों ने मां के दरबार में माथा टेका।
    दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। मंदिर परिसर में सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन हुआ और भजन-कीर्तन के माध्यम से भक्तों ने देवी की आराधना की। नवरात्रि के इस विशेष अवसर पर कई परिवारों ने बच्चों के मुंडन और कर्णछेदन जैसे धार्मिक संस्कार भी संपन्न कराए। मंदिर परिसर के आसपास मेले जैसा माहौल रहा और बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने धार्मिक गतिविधियों में भाग लिया।
    महाअष्टमी के अवसर पर अष्टभुजा धाम में विशेष हवन और पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके बाद नौ कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया गया। कन्याओं को भोजन कराया गया और दक्षिणा तथा उपहार भेंट कर आशीर्वाद लिया गया। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। जिले के दूसरे देवी मंदिरों और दुर्गा पंडालों में भी हवन कन्या पूजन और भंडारे आयोजित किए गए।
    महाअष्टमी पर केवल अष्टभुजा धाम ही नहीं बल्कि पूरे मऊगंज जिले में भक्ति का माहौल दिखाई दिया। मां जालपा धाम दूबी और बसदेईन माता वसिगड़ा देवी धाम सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भी सुबह से भक्तों की भीड़ रही। नईगढ़ी हनुमना शाहपुर खटखरी पहाड़ी और देवतालाब सहित कस्बों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सजे दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। जगह-जगह भजन और धार्मिक आयोजनों के बीच नवरात्रि का उत्साह नजर आया।
    इस अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और देवतालाब विधायक गिरीश गौतम भी अपने परिवार के साथ अष्टभुजा धाम पहुंचे। उन्होंने मां के दर्शन कर चुनरी अर्पित की और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने अपने परिवार के साथ क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
  • ग्वालियर में देर रात भीषण हादसे से मचा कोहराम, दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं को कुचला, CSP हटाए गए और 8 निलंबित

    ग्वालियर में देर रात भीषण हादसे से मचा कोहराम, दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं को कुचला, CSP हटाए गए और 8 निलंबित


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। चीनौर रोड पर दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं को धान से भरे एक बेकाबू ट्रक ने कुचल दिया। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। घायलों में दो पुलिसकर्मियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और मंदिर परिसर के आसपास चीख-पुकार सुनाई देने लगी।
    जानकारी के मुताबिक हादसा शनिवार देर रात करीब डेढ़ बजे हुआ। उस समय शीतला माता मंदिर में दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। कई लोग सड़क किनारे कतार में खड़े थे। इसी दौरान चीनौर की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक ढलान पर अचानक बेकाबू हो गया। बताया गया है कि घटनास्थल पर सड़क का ढलान काफी तीखा है। ट्रक लोगों को रौंदता हुआ आगे बढ़ा और पुलिस चेकपोस्ट को तोड़ते हुए मंदिर की बाहरी दीवार तथा गेट से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मंदिर की दीवार ढह गई और कई लोग मलबे में दब गए।
    ट्रक चालक ने पुलिस को बताया कि वाहन के ब्रेक फेल हो गए थे। खबर के मुताबिक वह गूगल मैप की मदद से ट्रक चला रहा था। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों और उसमें किसी तरह की लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद पुलिस और राहत दल ने घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। घायलों को ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई गई है।
    हादसे में घायल थाटीपुर निवासी अभिषेक ने बताया कि वह उस समय हाथ-पैर धो रहे थे जब अचानक सामने से ट्रक आ गया। उनके मुताबिक ट्रक उन्हें घसीटते हुए आगे ले गया। एक व्यक्ति ने उन्हें तलाशकर बाहर निकाला जिससे उनकी जान बच सकी। हादसे में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। अस्पताल में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद मृतकों के शव उनके परिजनों तक पहुंचाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
    घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को पद से हटाया गया है। इसके साथ ही आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। इनमें झांसी रोड थाना प्रभारी शक्ति सिंह यादव और आंतरी थाना प्रभारी गीतेश शर्मा सहित यातायात पुलिस के अधिकारी तथा अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। यह कार्रवाई हादसे के दौरान कथित लापरवाही के मामले में की गई है।
    मुख्यमंत्री ने मृतकों की मौत पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि इस कठिन समय में सरकार प्रभावित परिवारों के साथ है। उन्होंने हादसे में घायल सभी लोगों का निशुल्क इलाज कराने की घोषणा की है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी घटना पर दुख जताया और मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
    अष्टमी के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रहने के बीच इस हादसे ने धार्मिक स्थलों के आसपास सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीखे ढलान वाले मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा जरूरी मानी जा रही है। हादसे की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ट्रक के बेकाबू होने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में चूक के लिए कौन से कारण जिम्मेदार थे।