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  • Weather Update: दिल्ली में मार्च की गर्मी 35.7°C पार, 50 साल का रिकॉर्ड टूटा, इन राज्यों में बारिश की संभावना

    Weather Update: दिल्ली में मार्च की गर्मी 35.7°C पार, 50 साल का रिकॉर्ड टूटा, इन राज्यों में बारिश की संभावना



    नई दिल्ली । मार्च की शुरुआत होते ही देश के कई हिस्सों में गर्मी ने लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है। कई राज्यों में तापमान तेजी से बढ़ते हुए 35 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। राजस्थान के अकोला में अधिकतम तापमान 40.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी तेज गर्मी का असर महसूस किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी मार्च की गर्मी ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। शनिवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 35.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले करीब 50 वर्षों में मार्च के पहले ही सप्ताह में दर्ज सबसे अधिक तापमान है। दिन के समय तेज धूप के कारण लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश में हीटवेव को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार, मैदानी इलाकों में जब तापमान 40 डिग्री या उससे अधिक पहुंच जाता है और सामान्य से 4-6 डिग्री अधिक होता है, तब हीटवेव की स्थिति मानी जाती है। ऐसे समय लोगों को लू लगने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

    हालांकि, आने वाले कुछ दिनों में पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के प्रभाव से पहाड़ी क्षेत्रों में राहत मिल सकती है। 8 से 12 मार्च के बीच जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है। कश्मीर घाटी के कुपवाड़ा, गांदरबल, बांदीपोरा और अनंतनाग में भी हल्की बर्फबारी हो सकती है।

    इसके अलावा सिक्किम, ओडिशा और केरल में बारिश के आसार हैं। पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में मौसम बदलने से लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    मौसम विभाग ने लोगों से आगाह किया है कि तेज धूप में घर से बाहर निकलते समय सुरक्षा उपाय अपनाएं, पर्याप्त पानी पीएं और बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें। इस मार्च की गर्मी ने देशभर में गर्मी की शुरुआती चेतावनी दे दी है और आने वाले दिनों में मौसम पर नजर रखना जरूरी है।

  • MP में 9 दिन लगेगा कुंवारों के देवता बिल्लम बावजी का दरबार, पान और नारियल अर्पित कर लगाई जाती है शादी की अर्जी

    MP में 9 दिन लगेगा कुंवारों के देवता बिल्लम बावजी का दरबार, पान और नारियल अर्पित कर लगाई जाती है शादी की अर्जी

    नीमच । मध्यप्रदेश के नीमच जिले के जावद में कुंवारों के देवता के रूप में प्रसिद्ध बिल्लम बावजी का अनोखा दरबार हर साल रंग पंचमी से शुरू होकर रंग तेरस तक चलता है। इस दौरान हजारों अविवाहित युवक-युवतियां और उनके परिजन विवाह की मनोकामना लेकर बावजी के दर्शन करने पहुंचते हैं।

    करीब 30 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के अनुसार, बावजी की प्रतिमा को गणेश मंदिर की कुई से लाकर जावद के पुरानी धान मंडी क्षेत्र में स्थापित किया जाता है। इसके बाद नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना और मन्नतों का दौर चलता है।

    स्थानीय मान्यता है कि यहां पान और नारियल अर्पित कर अर्जी लगाने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं और जल्द ही योग्य जीवनसाथी मिल जाता है। जिस युवक या युवती की शादी की अर्जी लगाई जाती है, उसे चढ़ाया हुआ पान खाना होता है। इसके बाद शीघ्र ही विवाह का रिश्ता तय होने की बात कही जाती है। कई श्रद्धालुओं ने बावजी की कृपा से मनोकामना पूरी होने के उदाहरण साझा भी किए हैं।

    बताया जाता है कि करीब 30 वर्ष पहले गणेश मंदिर की कुई की सफाई के दौरान यह प्रतिमा मिली थी। इसके बाद इसे कुई के थारे पर विराजित कर दिया गया और धीरे-धीरे इसकी ख्याति कुंवारों के देवता के रूप में फैलने लगी। आज यह दरबार लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है।

    हर साल देश के कोने-कोने से हजारों युवक-युवतियां अपने जीवनसाथी की कामना लेकर बावजी के दरबार में माथा टेकते हैं। नौ दिन तक चलने वाले इस अनोखे उत्सव में पान, नारियल और अर्जी के माध्यम से मनोकामनाएं पूरी होने की उम्मीद के साथ श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। बल्लम बावजी का यह दरबार न केवल विवाह की कामना के लिए बल्कि आस्था और परंपरा का प्रतीक भी बन चुका है।

  • दिग्विजय सिंह आज कर सकते हैं रिटायरमेंट का ऐलान: शाम 4 बजे भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस, राज्यसभा से पहले ही इनकार

    दिग्विजय सिंह आज कर सकते हैं रिटायरमेंट का ऐलान: शाम 4 बजे भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस, राज्यसभा से पहले ही इनकार



    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आज अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर सकते हैं। दिग्विजय ने शाम 4 बजे भोपाल स्थित अपने सरकारी आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। तीन दिन पहले उन्होंने फेसबुक पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, “मेरा रिटायरमेंट प्लान? शायद, क्यों नहीं…”।

    वीडियो में 62 वर्षीय सिबानंद भंजा और उनकी पत्नी बसबी भंजा को दिखाया गया है, जिन्होंने बैंक की नौकरी से रिटायर होने के बाद एक कार में यात्रा कर पूरे भारत का भ्रमण शुरू किया। दंपति ने अब तक 55 हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी कर ली है और होटल के बजाय खुद भोजन बनाकर खाते हैं। दिग्विजय ने इस वीडियो के माध्यम से अपने रिटायरमेंट के अंदाज को दर्शाया।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर भी दिग्विजय पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे राज्यसभा की सीट लेने से इनकार कर चुके हैं। जून में उनका दूसरा कार्यकाल पूरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा जाने का विकल्प छोड़कर एमपी में कांग्रेस की स्थिति पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

    इतिहास पर नजर डालें तो दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन 2003 में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने 10 साल तक चुनाव न लड़ने का संकल्प लिया। 2014 में वे राज्यसभा सदस्य बने और 2020 में दूसरी बार राज्यसभा सांसद चुने गए।

    आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके रिटायरमेंट और भविष्य की योजनाओं का खुलासा होने की उम्मीद है, जिससे मध्य प्रदेश की राजनीति और कांग्रेस के रणनीतिक बदलाव पर नई बहस शुरू हो सकती है।

  • मध्य प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना में बड़ा ड्रॉप आउट, केवल 20% बेटियां ही बन पाएंगी लखपति

    मध्य प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना में बड़ा ड्रॉप आउट, केवल 20% बेटियां ही बन पाएंगी लखपति


    भोपाल । मध्य प्रदेश में बेटियों के सशक्तिकरण और लिंगानुपात सुधारने के उद्देश्य से वर्ष 2007 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना अब गंभीर समीक्षा के दौर में है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि योजना में शामिल बेटियों का सफर आधे रास्ते में ही रुक जाता है।

    कक्षा 5वीं उत्तीर्ण करने के बाद लगभग 52% बेटियां पढ़ाई छोड़ देती हैं। कक्षा 6वीं में छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाली कुल 13 67 897 बालिकाओं में से कक्षा 9वीं तक पहुंचने पर संख्या घटकर 7 06 123 रह जाती है। यानी करीब 48% बेटियां मध्य विद्यालय में ही सिस्टम से बाहर हो जाती हैं। यह गिरावट हायर सेकेंडरी में और तेज हो जाती है। कक्षा 11वीं में केवल 2 72 443 और 12वीं में 1 56 378 बेटियां ही छात्रवृत्ति की पात्र बचती हैं।

    स्नातक स्तर तक पहुंचने वाली बेटियों की संख्या और भी कम है। कुल पंजीकृत लाड़लियों में से केवल 22 022 छात्राएं कॉलेज तक पहुंच पाई हैं और यही वो संख्या है जिन्हें योजना के तहत निर्धारित 1 लाख 43 हजार रुपए की पूरी राशि मिलने की संभावना है। यानी लगभग 80% बेटियां लखपति बनने की दौड़ में पीछे रह जाती हैं।

    पढ़ाई छोड़ने का मुख्य कारण योजना की पात्रता नियमों में बताया गया है। विभाग के अनुसार केवल वही बालिकाएं छात्रवृत्ति की पात्र होती हैं जो कक्षा 5वीं पास कर कक्षा 6वीं में प्रवेश लेती हैं और अन्य सभी शर्तें पूरी करती हैं। वर्तमान स्थिति के अनुसार दिसंबर 2025 तक योजना के तहत कुल 813.20 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा उन लाड़लियों का डेटा भी विभाग एकत्रित कर रहा है जिन्हें पंजीकरण के बावजूद छात्रवृत्ति नहीं मिली।

    योजना के तहत आर्थिक सहायता इस प्रकार दी जाती है: कक्षा 6वीं में प्रवेश पर 2 000 रुपए कक्षा 9वीं में 4 000 रुपए कक्षा 11वीं में 6 000 रुपए कक्षा 12वीं में 6 000 रुपए और ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन/व्यावसायिक पाठ्यक्रम में प्रवेश पर 25 000 रुपए। इसके अलावा बालिका की उम्र 21 वर्ष पूरी होने 12वीं उत्तीर्ण करने और निर्धारित आयु में विवाह होने पर 1 लाख रुपए की अंतिम किश्त सरकार द्वारा दी जाती है।

    योजना के इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि शुरुआती उत्साह के बावजूद बेटियों का लखपति बनने का सपना आधे रास्ते में ही टूट रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि dropout रोकने के लिए स्कूल स्तर पर निरंतर निगरानी परिवारों को जागरूक करना और समय पर छात्रवृत्ति वितरण जरूरी है ताकि लाड़लियों का शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा सके।

  • यूपीएससी 2025 में मप्र के दो युवा टॉप 10 में, भोपाल के ईशान ने 5वीं और धार के पक्षल को मिली 8वीं रैंक

    यूपीएससी 2025 में मप्र के दो युवा टॉप 10 में, भोपाल के ईशान ने 5वीं और धार के पक्षल को मिली 8वीं रैंक


    भोपाल।
    संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में मध्य प्रदेश के दो युवाओं ने परचम लहराते हुए टॉप 10 में जगह बनाई है। भोपाल के ईशान भटनागर ने ऑल इंडिया 5वीं और धार जिले के पक्षल सेक्रेटरी ने 8वीं रैंक हासिल कर अपने क्षेत्र का नाम पूरे देश में रोशन किया है।

    यूपीएससी द्वारा शुक्रवार को सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी किया। इसमें 958 अभ्यर्थियों ने अलग-अलग सेवाओं के लिए क्वालिफाई किया। टॉप 5 रैंक भोपाल के ईशान भटनागर को मिली, जबकि धार जिले के पक्षल सेक्रेटरी ने 8वीं रैंक हासिल की।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूपीएससी में सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि भोपाल के ईशान भटनागर और धार के पक्षल जैन का टॉप-10 में आना प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा का प्रमाण है। उन्होंने सभी सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    सिविल सेवा परीक्षा में टॉप-5 रैंक हासिल करने वाले भोपाल के ईशान भटनागर अभी नागपुर में इंडियन रेवेन्यू सर्विस (आईआरएस) की ट्रेनिंग ले रहे हैं। ईशान के पिता मध्य प्रदेश सरकार में प्रिंसिपल एडवाइजर के तौर पर काम कर चुके हैं। अभी रिटायर हो चुके हैं। उनकी मां इंग्लिश की प्रोफेसर हैं।

    वहीं, धार जिले के छोटे कस्बे बाग के लिए गर्व की बात है कि यहां के होनहार युवा पक्षाल सेक्रेटरी ने यूपीएससी की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल कर क्षेत्र का नाम पूरे देश में रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार सहित पूरे नगर में खुशी और गर्व का माहौल है। लोगों ने मिठाइयां बांटकर और आतिशबाजी कर खुशियां मनाईं।

    पक्षाल का कहना है कि माता-पिता का आशीर्वाद और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रही। उनके पिता निलेश जैन कपड़ा व्यवसायी हैं, जबकि माता दीप्ति जैन गृहिणी हैं। परिवार के अनुसार प्रक्षाल बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं और उन्होंने कड़ी मेहनत व लगन से यह मुकाम हासिल किया।

    पक्षाल ने बताया कि उन्होंने प्रारंभिक पढ़ाई बाग के महेश मेमोरियल स्कूल में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वे इंदौर चले गए और बाद में उन्होंने आईआईटी कानपुर से फाइनेंस में पढ़ाई की। आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में जाने के बजाय देश सेवा का रास्ता चुना और सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। वे वर्ष 2022-23 के आसपास दिल्ली चले गए और वहीं रहकर यूपीएससी की तैयारी की।

    उनकी छोटी बहन क्रिया जैन ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। कई बार ऐसा समय भी आया जब वे रोजाना केवल 3 से 4 घंटे ही सोते थे और दिनभर लाइब्रेरी में पढ़ाई करते थे। पहले प्रयास में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) मिलने की संभावना थी लेकिन उनका लक्ष्य आईएएस बनना था, इसलिए उन्होंने तैयारी जारी रखी। दूसरे प्रयास में वे प्रीलिम्स में ही रह गए लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार सफलता हासिल करते हुए ऑल इंडिया रैंक 8 प्राप्त की।


    अशोकनगर के चितवन जैन को ऑल इंडिया रैंक-17

    अशोकनगर के चितवन जैन ने 17वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने बताया कि यह उनका तीसरा प्रयास था। चितवन के अनुसार, उन्होंने पढ़ाई को लेकर ज्यादा दबाव नहीं लिया और जरूरत के अनुसार रोज पढ़ाई की। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग को दिया।


    खंडवा की रूपल जायसवाल को ऑल इंडिया रैंक-43

    खंडवा की रूपल जायसवाल ने 43वीं रैंक हासिल की है। खास बात यह है कि पिछले प्रयास में उन्हें 512वीं रैंक मिली थी, लेकिन उन्होंने उस रैंक पर सेवा जॉइन नहीं की और दोबारा तैयारी की। इस बार टॉप-50 में जगह बनाकर उन्होंने बड़ी सफलता हासिल की। सफलता के बाद घर के बाहर लोगों ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया।


    मऊगंज की समीक्षा द्विवेदी को ऑल इंडिया रैंक-56

    मऊगंज की समीक्षा द्विवेदी ने 56वीं रैंक हासिल कर टॉप-100 में जगह बनाई। उन्होंने तीसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की। समीक्षा का कहना है कि अगर लक्ष्य तय हो और लगातार मेहनत की जाए तो सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने युवाओं से अपने लक्ष्य से पीछे न हटने की अपील की।


    नरसिंहपुर की दीक्षा पाटकर को ऑल इंडिया रैंक-88

    नरसिंहपुर जिले के करकबेल गांव की दीक्षा पाटकर ने 88वीं रैंक हासिल की। वह हेमराज पाटकर और अर्चना पाटकर की बेटी हैं। उनकी इस उपलब्धि से पूरे गांव में खुशी का माहौल है।


    ग्वालियर की सृष्टि गोयल को ऑल इंडिया रैंक-160

    ग्वालियर के मुरार क्षेत्र की सृष्टि गोयल ने 160वीं रैंक हासिल की। यह उनका पांचवां प्रयास था। उनके पिता सुनील गोयल का सोने-चांदी का व्यवसाय है। सृष्टि ने बताया कि वह पहले आईआईटी में नहीं जा सकीं। सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। प्लान की गई स्ट्रेटेजी आपको सफलता दिलाएगी। सोशल मीडिया जैसी ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूर रहना जरूरी है।


    गुना की देवांगी मीणा को ऑल इंडिया रैंक-236

    गुना जिले के कुंभराज की देवांगी मीणा ने 236वीं रैंक हासिल की। पिछले साल उन्हें 764वीं रैंक मिली थी। वह आईआरएस में चयनित हुई थीं। उनके पिता नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड में कार्यरत हैं।


    नरसिंहपुर की पूजा सोनी को ऑल इंडिया रैंक-249

    नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा में पदस्थ सब-डिविजनल रेवेन्यू ऑफिसर पूजा सोनी ने 249वीं रैंक हासिल की है। रेवेन्यू ऑफिसर की कामयाबी के लिए परिवार और रिश्तेदारों में खुशी की लहर है। हर कोई पूजा सोनी को बधाई भेज रहा है।


    सतना की भूमिका जैन को ऑल इंडिया रैंक-331

    सतना की भूमिका जैन ने 331वीं रैंक हासिल कर आईआरएस सेवा के लिए चयन प्राप्त किया है। वह कृष्णानगर के कपड़ा व्यवसायी मनोज जैन की बेटी हैं। भूमिका ने बताया कि यह उनका तीसरा अटेम्प्ट था। उन्होंने तीन साल दिल्ली में रहकर तैयारी करने में बहुत मेहनत की। भूमिका ने बताया कि अपने पहले अटेम्प्ट में बेसिक समझ हासिल करने के लिए सिर्फ़ कोचिंग ली। उसके बाद, उन्होंने पूरी तरह से सेल्फ-स्टडी पर भरोसा किया। दस किताबों के बजाय एक किताब को कॉन्सन्ट्रेशन के साथ पढ़ना ज्यादा फायदेमंद है।

  • मध्य प्रदेश में बन रहा इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग के लिए सशक्त ईको सिस्टम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मध्य प्रदेश में बन रहा इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग के लिए सशक्त ईको सिस्टम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) मैन्युफेक्चरिंग के क्षेत्र में तेजी से उभरते केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत औद्योगिक आधार, उन्नत परीक्षण अधोसंरचना, ऊर्जा उपलब्धता और निवेश अनुकूल नीतियों के माध्यम से एक सशक्त ईको सिस्टम विकसित किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 और इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी-2025 के माध्यम से ईवी और उससे जुड़े कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को व्यापक प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे प्रदेश में उत्पादन, निवेश और रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।


    वैश्विक बदलाव के साथ बढ़ती ईवी की संभावनाएं

    उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ऑटोमोबाइल उद्योग तेजी से इलेक्ट्रिफिकेशन की दिशा में बढ़ रहा है और भारत भी इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। भारत आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है और यह क्षेत्र राष्ट्रीय जीडीपी में लगभग 7 प्रतिशत का योगदान देता है। इलेक्ट्रिक वाहन आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ बैटरी तकनीक, अनुसंधान एवं विकास, सॉफ्टवेयर, मेंटेनेंस और संबंधित सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर विकसित हो रहे हैं।


    मजबूत ऑटोमोबाइल क्लस्टर और परीक्षण अधोसंरचना

    मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश इस परिवर्तन को अवसर के रूप में लेते हुए इलेक्ट्रिक व्हीकल और ऑटोमोबाइल कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए स्वयं को एक सशक्त औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है। राज्य में पीथमपुर देश के प्रमुख ऑटोमोबाइल क्लस्टर्स में से एक है, जहां 200 से अधिक ऑटोमोबाइल कम्पोनेंट निर्माता संचालित हैं और हजारों लोगों को रोजगार मिला है। इसके साथ ही एशिया का सबसे बड़ा ऑटोमोटिव परीक्षण ट्रैक नैट्रैक्स उद्योगों को अत्याधुनिक परीक्षण और अनुसंधान की सुविधा प्रदान कर रहा है, जिससे ऑटोमोबाइल और ईवी उद्योग के लिए मजबूत तकनीकी आधार उपलब्ध हुआ है।


    इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी से मैन्यूफेक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2025 ईवी और उससे जुड़े कम्पोनेंट के लिए संपूर्ण सप्लाई चेन विकसित करने पर केंद्रित है। इस नीति के माध्यम से बैटरी निर्माण, वाहन असेंबली से लेकर रीसाइक्लिंग तक के क्षेत्रों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। साथ ही इलेक्ट्रिक ट्रकों जैसे उभरते सेगमेंट को बढ़ावा देने के लिए मोटर व्हीकल टैक्स और पंजीयन शुल्क में छूट जैसे प्रावधान किए गए हैं, जिससे इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।


    औद्योगिक प्रोत्साहन और निवेश में बढ़ेंगे अवसर

    उन्होंने बताया कि इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी-2025 के अंतर्गत उद्योगों को पूंजी अनुदान, भूमि रियायत, निर्यात परिवहन सहायता तथा हरित और अनुसंधान निवेश के लिए विशेष प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। इन नीतियों के माध्यम से राज्य में इलेक्ट्रिक व्हीकल और उससे जुड़े उद्योगों की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। मध्यप्रदेश ऊर्जा के मामले में अधिशेष राज्य है और यहां बिजली दरें देश में अपेक्षाकृत कम हैं, जिससे ईवी विनिर्माण इकाइयों और चार्जिंग अधोसंरचना के संचालन के लिए आर्थिक रूप से व्यवहारिक परिस्थितियां उपलब्ध होती हैं।


    भारत में ईवी की बढ़ती मांग

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में दो पहिया वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक व्हीकल की हिस्सेदारी 6.1 प्रतिशत, तीन पहिया में 23.4 प्रतिशत, यात्री कारों में 2 प्रतिशत और बसों में 5.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस प्रकार कुल इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार हिस्सेदारी 7.5 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। औद्योगिक अधोसंरचना, आधुनिक परीक्षण सुविधाएं, निवेश अनुकूल नीतियां और ऊर्जा उपलब्धता जैसे कारकों के कारण मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल विनिर्माण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह क्षेत्र राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

  • एमपी में मार्च में ही अप्रैल जैसी गर्मी, तापमान 39 डिग्री पार, 40 डिग्री तक पहुंचने की संभावना

    एमपी में मार्च में ही अप्रैल जैसी गर्मी, तापमान 39 डिग्री पार, 40 डिग्री तक पहुंचने की संभावना


    भोपाल । मध्य प्रदेश में इस साल मार्च की शुरुआत से ही गर्मी ने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। हालात ऐसे हैं कि मौसम अप्रैल जैसा महसूस होने लगा है और कई शहरों में तापमान 39 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले चार दिनों में तापमान और बढ़ सकता है तथा प्रदेश के कई हिस्सों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना जताई गई है। गुरुवार को नर्मदापुरम में इस सीजन में पहली बार तापमान 39 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया, जिससे गर्मी का असर साफ नजर आया।
    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आमतौर पर मार्च के दूसरे पखवाड़े में तेज गर्मी शुरू होती है, लेकिन इस बार मौसम का ट्रेंड बदल गया है। पिछले दस वर्षों में 15 मार्च के बाद तापमान में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि इस बार महीने की शुरुआत में ही पारे में उछाल आ गया है। प्रदेश के ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के शहर फिलहाल सबसे ज्यादा गर्मी झेल रहे हैं। इन इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से तीन से चार डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रिकॉर्ड किया जा रहा है।

    प्रदेश में फिलहाल किसी बड़े मौसमीय सिस्टम का प्रभाव नहीं दिखाई दे रहा है। हालांकि पूर्वी हिस्से से एक टर्फ लाइन गुजर रही है और साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी सक्रिय है, लेकिन इसका मध्य प्रदेश के मौसम पर खास असर नहीं पड़ रहा। मौसम विभाग के मुताबिक आसमान साफ रहने के कारण सूरज की तेज किरणें सीधे जमीन तक पहुंच रही हैं, जिससे दिन में गर्मी का असर तेजी से बढ़ रहा है।

    गुरुवार को प्रदेश के पांच बड़े शहरों में से चार इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर—में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया, जबकि भोपाल में अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री सेल्सियस रहा। नर्मदापुरम प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां पारा 39.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके अलावा छतरपुर के खजुराहो में 36.8 डिग्री, धार में 36.6 डिग्री, दमोह, सागर और श्योपुर में 36.4 डिग्री, रतलाम में 36.2 डिग्री तथा गुना और टीकमगढ़ में 36 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। शाजापुर, मंडला और सतना में भी अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहा। वहीं रात के समय भी तापमान 18 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार आने वाले चार दिनों में प्रदेश के अधिकतम तापमान में करीब चार डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि मार्च के पहले पखवाड़े में ही कई जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बार अप्रैल और मई के दौरान प्रदेश में 15 से 20 दिनों तक लू चल सकती है। इन दो महीनों में ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना है, जबकि भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी तेज गर्मी का असर बना रहेगा।

  • मप्र के प्रसिद्ध हिल स्टेशन पचमढ़ी प्रतिष्ठित 'ग्रीन डेस्टिनेशंस ब्रॉन्ज' सर्टिफिकेट से सम्मानित

    मप्र के प्रसिद्ध हिल स्टेशन पचमढ़ी प्रतिष्ठित 'ग्रीन डेस्टिनेशंस ब्रॉन्ज' सर्टिफिकेट से सम्मानित


    भोपाल।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजनरी नेतृत्व और प्रदेश में ‘रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म’ को बढ़ावा देने के प्रयासों के फलस्वरूप मध्य प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। जर्मनी के बर्लिन में आयोजित ‘आईटीबी बर्लिन ट्रैवल मार्ट’ में प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन पचमढ़ी को प्रतिष्ठित ‘ग्रीन डेस्टिनेशंस ब्रॉन्ज’ सर्टिफिकेट से सम्मानित किया गया है।

    इसके साथ ही पचमढ़ी यह अंतरराष्ट्रीय गौरव हासिल करने वाला देश का पहला हिल स्टेशन बन गया है। मप्र टूरिज्म बोर्ड की ओर से उज्जैन कमिश्नर आशीष सिंह ने यह सम्मान प्राप्त किया। यह प्रमाणन नीदरलैंड स्थित ‘ग्रीन डेस्टिनेशंस फाउंडेशन’ द्वारा प्रदान किया जाता है, जो ‘ग्लोबल सस्टेनेबल टूरिज्म काउंसिल’ से मान्यता प्राप्त संस्था है।

    मप्र के पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी ने गुरुवार को उक्त जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कुशल मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश पर्यटन नित नई ऊँचाइयों को छू रहा है। पचमढ़ी को मिला यह ‘ग्रीन डेस्टिनेशन ब्रॉन्ज’ सर्टिफिकेट इस बात का प्रमाण है कि हम पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को सहेजने में भी अग्रणी हैं। यह उपलब्धि पचमढ़ी को वैश्विक स्तर पर एक ‘सस्टेनेबल टूरिज्म डेस्टिनेशन’ के रूप में स्थापित करेगी, जिससे यहाँ अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी।

    मप्र टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैया राजा टी ने कहा कि यह सम्मान पचमढ़ी में विरासत संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन ऊर्जा और जलवायु संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की वैश्विक पहचान है। इस उपलब्धि के साथ ही अब पचमढ़ी देश के अन्य पहाड़ी पर्यटन स्थलों और इको-टूरिज्म साइट्स के लिए एक ‘रेप्लिकेबल मॉडल’ (अनुकरणीय मॉडल) के रूप में उभरा है। यह मान्यता प्रदेश में ‘रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म’ को और अधिक सशक्त बनाएगी।

    स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण का वैश्विक मानक

    ‘ग्रीन डेस्टिनेशंस’ अंतर्राष्ट्रीय स्तर का एक प्रतिष्ठित प्रमाणन कार्यक्रम है, जो आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक-सांस्कृतिक स्थिरता के 3 मुख्य स्तंभों पर केंद्रित है।

    कठोर परीक्षण में मिली सफलता

    पचमढ़ी का चयन अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित एक अत्यंत जटिल और सूक्ष्म मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद किया गया। इसके तहत डेस्टिनेशन मैनेजमेंट, प्रकृति एवं परिदृश्य, पर्यावरण और जलवायु, संस्कृति एवं परंपरा, सामाजिक कल्याण और व्यापारिक संचार जैसे 6 प्रमुख विषयों के 75 कड़े मापदंडों पर पचमढ़ी का परीक्षण किया गया। मूल्यांकन में पचमढ़ी ने 10 में से 6.5 का स्कोर और 40% का GSTC अनुपालन स्तर हासिल किया।

    पर्यटन बोर्ड के प्रयासों का परिणाम

    मप्र टूरिज्म बोर्ड द्वारा इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे थे। इस परियोजना के तहत नवंबर 2025 में पचमढ़ी में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई थी, जिसके बाद व्यापक फील्ड वर्क, डेटा कलेक्शन और दस्तावेजीकरण किया गया। फरवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय ऑडिटर द्वारा ऑन-साइट ऑडिट के बाद इस उपलब्धि पर मुहर लगी।

  • मध्य प्रदेश में जल संवर्धन के हो रहे हैं अच्छे प्रयास: केन्द्रीय मंत्री पाटिल

    मध्य प्रदेश में जल संवर्धन के हो रहे हैं अच्छे प्रयास: केन्द्रीय मंत्री पाटिल


    भोपाल।
    केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने गुरुवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से मध्य प्रदेश में जल संरक्षण के लिए किये गये जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में जल संवर्धन और सरंक्षण के अच्छे प्रयास किये जा रहे हैं।

    केन्द्रीय मंत्री पाटिल ने कहा कि मध्य प्रदेश के बड़े भू-भाग में वन हैं। मध्य प्रदेश में महाराष्ट्र के बाद सर्वाधिक बांध हैं। मध्य प्रदेश अपनी नदियों और बांधों से उत्तरप्रदेश, झारखण्ड, बिहार, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र को पानी दे रहा है। जल गंगा जन भागीदारी अभियान में मध्य प्रदेश के खण्डवा जिले को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। खण्डवा की तरह प्रदेश के हर जिले में जल संरक्षण का प्रयास करें। लोगों को जल संरक्षण के लिए जागरूक करने का भी अभियान चलाए। आमजनता की भागीदारी से ही जल संरक्षण का अभियान पूरा होगा।

    उन्होंने कहा कि हर पक्के भवन में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाकर छत का पानी धरती में पहुंचाए। हर बड़े खेत में वर्षा जल को धरती में भेजने के लिए रिचार्जिंग संरचना का निर्माण कराएं। गांव का पानी गांव में और खेत का पानी खेत में रहेगा, तभी जल संवर्धन होगा। गांव में पानी की पर्याप्त उपलब्धता होने पर खेती समृद्ध होगी और किसान खुशहाल होगा। वनों में भी हर बड़े वृक्ष के पास जल संरक्षण के लिए कंटूर और ट्रेन्च बनाएं।

    बैठक में वीडियो कान्फ्रेंसिंग से शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जल संरक्षण के आहवान पर मध्य प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में लगातार जल संरक्षण के प्रयास किये जा रहे हैं। गत वर्ष खण्डवा जिले में एक लाख 29 हजार जल संरचनाओं का निर्माण करके देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। मध्य प्रदेश में पिछले दो वर्षों में जल संरक्षण के लिए 2 लाख 79 हजार जल संरक्षण का निर्माण किया गया है।

    उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश 250 से अधिक नदियों का मायका है। नदियों के उद्गम स्थलों की साफ-सफाई तथा वृक्षारोपण का अभियान शुरू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी चंबल नदी से यमुना नदी को सोन नदी से गंगा नदी को शक्ति मिलती है। हमारी नदियों में जल संचय का स्राेत हमारे वन हैं। वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रदेश को वित्तीय सहायता की आवश्यकता है।

    उन्होंने कहा कि इस वर्ष हम 19 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू कर रहे हैं। सभी कलेक्टर कार्ययोजना बनाकर जल संरक्षण के कार्य शुरू कराएं। प्रदेश को जल संरक्षण में देश में प्रथम स्थान पर लाना है। नहरों की साफ-सफाई, हैण्डपंप में रिचार्ज पिट तथा हर पक्के भवन में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था कराएं।

    बैठक में जल शक्ति विभाग के सचिव बीएल कांता राव ने जल गंगा जन भागीदारी अभियान की उपलब्धियों तथा मध्य प्रदेश के कार्यों की जानकारी दी। वीडियो कान्फ्रेंसिंग में अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश राजौरा ने मध्य प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान की तैयारियों, कार्ययोजना एवं गत वर्ष की उपलब्धियों की जानकारी दी। वीडियो कान्फ्रेंसिंग में खण्डवा, राजगढ़ और इंदौर जिलों की उपलब्धियों को प्रस्तुत किया गया। वीडियो कान्फ्रेंसिंग में ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल तथा अन्य अधिकारी शामिल हुए।

  • अर्मेनिया में युद्ध के बीच फंसी उज्जैन की महिला पहलवान प्रियांशी प्रजापत सुरक्षित लौटीं, सीएम मोहन यादव ने किया त्वरित हस्तक्षेप

    अर्मेनिया में युद्ध के बीच फंसी उज्जैन की महिला पहलवान प्रियांशी प्रजापत सुरक्षित लौटीं, सीएम मोहन यादव ने किया त्वरित हस्तक्षेप

    नई दिल्ली। अर्मेनिया में आयोजित कुश्ती वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेने गई उज्जैन की प्रियांशी प्रजापत पिछले चार दिनों से युद्ध के कारण फंसी थीं। अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के चलते उनका दुबई के रास्ते भारत लौटना असंभव हो गया।

    इस मुश्किल समय में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहलवान से लाइव बातचीत कर उनकी सुरक्षित वापसी के लिए तुरंत कदम उठाए। सीएम के निर्देश और मध्यप्रदेश कुश्ती संघ के सहयोग से प्रियांशी को अर्मेनिया से तुर्की और कजाकिस्तान के मार्ग से भारत लाया गया। गुरुवार सुबह प्रियांशी देश लौट आईं और उनके परिवार व खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई।

    प्रियांशी मध्यप्रदेश की एकमात्र खिलाड़ी थीं जो इस विश्व चैम्पियनशिप में प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। उनकी सुरक्षित वापसी ने राज्य सरकार के त्वरित और प्रभावी हस्तक्षेप की अहमियत को भी दर्शाया।

    इन हालात में उनके पिता ने मध्यप्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष नारायण यादव से संपर्क किया और मदद के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सूचित किया। मुख्यमंत्री ने तुरंत हस्तक्षेप किया और प्रियांशी से ऑनलाइन बातचीत कर उन्हें युद्ध के खतरनाक हालात में सुरक्षित मार्ग से लौटने का भरोसा दिया।

    सीएम के निर्देशों और मध्यप्रदेश कुश्ती संघ के सहयोग से प्रियांशी को अर्मेनिया से तुर्की और कजाकिस्तान के मार्ग से सुरक्षित भारत लाया गया। गुरुवार सुबह वे देश लौट आईं, और उनके परिवार, प्रशिक्षक और खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रियांशी की वापसी ने राज्य सरकार की तत्परता और संकट प्रबंधन क्षमता को उजागर किया।

    प्रियांशी इस चैम्पियनशिप में मध्यप्रदेश की एकमात्र प्रतिनिधि खिलाड़ी थीं। उनके साथियों और प्रशिक्षकों ने बताया कि यह उनका सपना था कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करें, लेकिन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव ने उन्हें अचानक कठिनाई में डाल दिया। इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सक्रिय भूमिका और त्वरित निर्णय ने उनकी जान को सुरक्षित रखने में अहम योगदान दिया।

    प्रियांशी के सुरक्षित लौटने के बाद प्रदेश की खेल प्रतिष्ठा भी बढ़ी है। युवा खिलाड़ी और उनके परिवार ने मुख्यमंत्री और मध्यप्रदेश कुश्ती संघ को धन्यवाद दिया। इसके अलावा, इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय संकट में राज्य सरकार और खेल संस्थाएं मिलकर खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं।

    प्रियांशी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह चार दिन उनके जीवन के सबसे तनावपूर्ण रहे। उन्होंने बताया कि दुबई और अर्मेनिया में युद्ध के कारण भय का माहौल था, लेकिन उन्हें विश्वास था कि मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारी उनकी मदद करेंगे। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने मुझे व्यक्तिगत रूप से आश्वस्त किया और सही मार्ग से भारत लौटने में मदद की। यह अनुभव यादगार तो है, लेकिन काफी डराने वाला भी रहा।”

    इस घटना ने यह संदेश भी दिया कि खेल और खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए प्रशासनिक तत्परता बेहद जरूरी है। प्रियांशी अब सुरक्षित हैं और अपने परिवार के साथ हैं, जबकि मध्यप्रदेश सरकार की इस सक्रिय भूमिका को खेल जगत में सराहा जा रहा है।