Tag: Madhya Pradesh

  • भारत टैक्स-2026 में CM मोहन यादव का निवेशकों को न्योता, बोले- MP बनेगा देश का टेक्सटाइल हब

    भारत टैक्स-2026 में CM मोहन यादव का निवेशकों को न्योता, बोले- MP बनेगा देश का टेक्सटाइल हब


    भोपाल। मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। मध्य प्रदेश टैक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करते हुए कपड़ा उत्पादन और रोजगार दोनों को बढ़ा रहा है। टैक्सटाइल इंडस्ट्री से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

    यह बात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम् में भारत टैक्स-2026 के अंतर्गत आयोजित राउंड टेबल संवाद कार्यक्रम में कही। इस अवसर पर केंद्रीय टैक्टाइल मंत्री गिरिराज किशोर, प्रमुख टैक्टाइल उद्योग प्रतिनिधि, केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के अधिकारी तथा राज्य सरकार के अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने धार जिले में देश के पहले पीएम मित्र पार्क की आधारशिला रखी है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा और मालवा-निमाड़ अंचल के 6 लाख से अधिक कपास उत्पादक किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। पीएम मित्र पार्क से खेत से लेकर गारमेंट इंडस्ट्री और इंडस्ट्री से वैश्विक बाजार तक प्रदेश के उत्पादों की पहुंच आसान होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योपतियों और निवेशकों को मध्यप्रदेश में अपना उद्योग स्थापित करने का आमंत्रण देते हुए कहा कि एक बार जो मध्यप्रदेश आता है वहीं का होकर रह जाता है। हृदय प्रदेश सभी उद्योगपतियों का स्वागत कर रहा है।

    महेश्वरी और चंदेरी साड़ियां वस्त्र उद्योग में विशेष स्थान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज भारत मंडपम् में वस्त्र उद्योग का कुंभ आयोजित हो रहा है। मध्यप्रदेश सरकार, सभी वैश्विक ब्रांड्स के प्रतिनिधि, निवेशक, उद्योगपति, पॉलिसी मेकर और फैशन डिजाइनर भारत सरकार के संकल्प के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। वर्तमान समय ब्रांडिंग और पैकेजिंग का है। प्राचीन समय में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने स्थानीय बुनकरों को रोजगार से जोड़ने के लिए महेश्वरी साड़ियां तैयार करने की शुरुआत करवाई थी। महेश्वरी साड़ियां वर्तमान में भी देश-विदेश मे लोकप्रिय है। चंदेरी की साड़ियां भी वस्त्र उद्योग में विशेष स्थान रखती हैं। आज भी स्वावलंबन और रोजगार परक उद्योग हमारी पहचान हैं।

    राज्य सरकार ने उद्योगपतियों और निवेशकों से किए पूरे किए सभी वादे

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अब जरी स्टेट, रेशम स्टेट, मैनमेड फाइबर स्टेट, कॉटन कैपिटल बन चुका है। राज्य में टैक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था, कुशल कामगारों की पर्याप्त उपलब्धता और श्रमिकों के साथ आत्मीय संबंध बेहतर औद्योगिक वातावरण प्रदान करते है। राज्य सरकार ने उद्योगपति और निवेशकों से किए अपने सभी वायदे पूरे किए हैं। सभी सेक्टर्स में उद्योगपतियों और निवेशकों को सब्सिडी के रूप में उनके हक की राशि डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जा चुकी है। राज्य सरकार ने मई 2026 तक की सभी देनदारियां चूकता कर दी हैं। प्रदेश सरकार ने डेढ़ साल में लगभग 5500 करोड़ रुपए की राशि उद्योगपतियों को सब्सिडी के रूप में उपलब्ध करायी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने ग्रीन एनर्जी सेक्टर में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की हैं। राज्य में सोलर और पंप स्टोरेज से निर्मित बिजली की पर्याप्त उपलब्धता है।

    राउंड टेबल चर्चा का शुभारंभ उद्योग प्रतिनिधियों द्वारा मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के प्रतिनिधियों के स्वागत से हुआ। प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र कुमार सिंह ने मध्यप्रदेश के टेक्सटाइल एवं गारमेंट इको सिस्टम, निवेश अवसरों, औद्योगिक नीतियों तथा उपलब्ध सुविधाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव आरती कंवर ने भी विशेष संबोधन में वस्त्र क्षेत्र में राज्यों और उद्योगों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रतिमा सिंटेक्स के प्रबंध निदेशक श्रेयस्कर चौधरी ने किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टेक्सटाइल उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठक कर निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार सृजन से जुड़े विषयों पर चर्चा की। इस अवसर पर अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, मैनमेड एंड टेक्निकल टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल तथा द कॉटन टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के साथ सहयोग संबंधी एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए।

    मुख्यमंत्री ने भारत टैक्स-2026 में लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और देश के प्रमुख टेक्सटाइल उद्योग प्रतिनिधियों के साथ राउंड टेबल चर्चा में हिस्सा लिया। इस अवसर पर केंद्रीय वस्त्र सचिव नीलम शम्मी राव और औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह सहित केंद्र और राज्य के अधिकारी मौजूद थे।

  • MP Weather : एमपी में सामान्य से 11% कम बारिश, 35 जिलों में सूखे जैसे हालात, जाने आगे कैसा रहेगा मौसम?

    MP Weather : एमपी में सामान्य से 11% कम बारिश, 35 जिलों में सूखे जैसे हालात, जाने आगे कैसा रहेगा मौसम?


    भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। लगातार कमजोर मानसूनी गतिविधियों के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बनने लगी है। सबसे अधिक असर पूर्वी मध्य प्रदेश पर दिखाई दे रहा है, जहां जबलपुर सहित 35 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी (9.5 इंच) बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 270.3 मिमी (10.6 इंच) होनी चाहिए थी। यानी अब तक प्रदेश में 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां औसतन 24 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इसके विपरीत पश्चिमी हिस्से के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में सामान्य से 2 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।

    19 जुलाई से बदलेगा मौसम, तेज बारिश के आसार
    भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय होने जा रहा है। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी में भी नया मौसम तंत्र विकसित हो रहा है और साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी सक्रिय है। इन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से मध्य प्रदेश में एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू होने की संभावना जताई गई है।

    आज इन जिलों में हल्की बारिश और आंधी की संभावना
    मौसम विभाग के मुताबिक गुरुवार को इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, भिंड, दतिया, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में हल्की बारिश के साथ आंधी चलने का अनुमान है।

    वहीं मुरैना, ग्वालियर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, रायसेन, भोपाल, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, उज्जैन, आगर-मालवा, रतलाम, नीमच और मंदसौर में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है।

    जुलाई के दूसरे पखवाड़े में राहत मिलने की उम्मीद
    मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश स्तर पर मानसून की स्थिति फिलहाल संतोषजनक है, लेकिन पूर्वी जिलों में वर्षा की कमी कृषि और जल संसाधनों के लिहाज से चिंता का विषय बनी हुई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, आगामी निम्न दाब प्रणाली की दिशा और उसकी तीव्रता तय करेगी कि मानसून कितनी तेजी से दोबारा सक्रिय होगा। यदि मौसम प्रणालियां अनुकूल रहीं तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

    जून के बाद जुलाई में भी बारिश का ग्राफ कमजोर
    मौसम विभाग के अनुसार जून में भी सामान्य से कम बारिश हुई थी। हालांकि जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश के कारण वर्षा का आंकड़ा सुधरा था, लेकिन पिछले सात दिनों से भारी बारिश नहीं होने के कारण लगातार तीसरे दिन प्रदेश की कुल वर्षा सामान्य से नीचे बनी हुई है।

  • एमपी में जुलाई में बढ़ी गर्मी, 36 डिग्री के पार पहुंचा पारा, आज 21 जिलों में हल्की बारिश की संभावना

    एमपी में जुलाई में बढ़ी गर्मी, 36 डिग्री के पार पहुंचा पारा, आज 21 जिलों में हल्की बारिश की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश में बारिश की रफ्तार धीमी पड़ते ही गर्मी ने फिर से तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। कई शहरों में अधिकतम तापमान 35 से 36 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे जुलाई के बीच मार्च-अप्रैल जैसी गर्मी का एहसास हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले पांच दिनों तक प्रदेश में भारी बारिश की संभावना कम है, ऐसे में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है।

    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, पिछले छह दिनों से प्रदेश में कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। हालांकि, कई जिलों में दिन के समय बादलों की आवाजाही बनी हुई है, लेकिन इसका बारिश पर खास असर नहीं दिखा। यही वजह है कि प्रदेश के आधे से अधिक जिलों में सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

    आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी (9.5 इंच) बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य औसत 260 मिमी (10.2 इंच) होना चाहिए था। इस तरह प्रदेश में अब तक 7 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    क्षेत्रवार स्थिति देखें तो प्रदेश के पूर्वी हिस्से जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभाग—में औसत से 21 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं पश्चिमी क्षेत्र, जिसमें भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग शामिल हैं, वहां औसत से 6 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

    आज 21 जिलों में हल्की बारिश की संभावना
    मौसम विभाग ने बुधवार को इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, धार, अलीराजपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली जिलों में हल्की बारिश की संभावना जताई है।

    वहीं भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में उमस और गर्मी का असर बना रहने की संभावना है।

  • एमपी में मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी, पहली बार बारिश सामान्य से 3% कम, हल्‍की बारिश की संभावना

    एमपी में मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी, पहली बार बारिश सामान्य से 3% कम, हल्‍की बारिश की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान जुलाई में पहली बार बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे पहुंच गया है। अब तक प्रदेश में 241.8 मिमी (9.5 इंच) वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 250.1 मिमी (9.8 इंच) मानी जाती है। इस तरह प्रदेश में फिलहाल 3 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, यह अब तक के निर्धारित मानसूनी कोटे का लगभग 25 प्रतिशत है।

    बारिश की रफ्तार पिछले पांच दिनों से लगभग थमी हुई है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल तो छा रहे हैं, लेकिन तेज बारिश नहीं हो रही। यही वजह है कि आधे से अधिक जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, शहडोल, सागर और रीवा संभागों में औसत से 17 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं पश्चिमी क्षेत्र के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में सामान्य से 10 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।

    आज ऐसा रहेगा मौसम
    मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में आंधी-गरज के साथ हल्की बारिश हो सकती है।

    वहीं भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में तेज धूप निकलने का अनुमान है।

    क्यों कमजोर पड़ा मानसून?
    मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल मानसून को सक्रिय बनाए रखने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां कमजोर हो गई हैं या उनका प्रभाव मध्य प्रदेश से दूर चला गया है। इसी कारण अधिकांश क्षेत्रों में केवल बादल छाए रहने और हल्की फुहार जैसी स्थिति बनी हुई है। हालांकि, उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक नया ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) बनने की संभावना है। यदि यह आगे चलकर निम्न दाब क्षेत्र में परिवर्तित होता है, तो मध्य प्रदेश में एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

    इसके अलावा मौसम विभाग का अनुमान है कि प्रशांत महासागर में तीन नए मौसमीय सिस्टम विकसित हो रहे हैं। इनमें से यदि कोई एक भी बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है, तो प्रदेश में मानसून दोबारा सक्रिय होने की संभावना बढ़ जाएगी।

    जून की तुलना में जुलाई बेहतर, लेकिन पांच दिन की सुस्ती से घटे आंकड़े
    मौसम विभाग के मुताबिक जून में बारिश सामान्य से कम रही थी, जबकि जुलाई की शुरुआत में वर्षा की गतिविधियां बढ़ी थीं। लेकिन पिछले पांच दिनों से तेज बारिश नहीं होने के कारण कुल वर्षा का आंकड़ा घटकर 13 जुलाई को सामान्य से नीचे पहुंच गया।

    आंकड़ों के अनुसार, जुलाई मानसून का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। इसी महीने प्रदेश में पूरे मानसूनी कोटे की लगभग 40 प्रतिशत बारिश होती है। उदाहरण के तौर पर भोपाल में सामान्य वार्षिक वर्षा 39 इंच है, जिसमें से करीब 14 इंच बारिश केवल जुलाई में होती है। वहीं बड़े शहरों में जबलपुर ऐसा शहर है, जहां जुलाई में सबसे अधिक 17 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की जाती है।

  • हबीबगंज पुलिस की दो बड़ी चूक कोर्ट में उजागर, एक केस 5 साल गलत कोर्ट में चला, पॉक्सो में दो आरोपी बरी

    हबीबगंज पुलिस की दो बड़ी चूक कोर्ट में उजागर, एक केस 5 साल गलत कोर्ट में चला, पॉक्सो में दो आरोपी बरी


    मध्य प्रदेश। भोपाल की हबीबगंज थाना पुलिस की विवेचना में हुई गंभीर लापरवाहियां अदालत में उजागर हुई हैं। दो अलग-अलग मामलों में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत ने एक मामले में पांच वर्षों से चल रहे ट्रायल को निरस्त कर किशोर न्याय बोर्ड भेजने के निर्देश दिए, जबकि दूसरे पॉक्सो प्रकरण में विवेचना की गंभीर खामियों के चलते दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इन दोनों मामलों ने पुलिस की जांच प्रक्रिया और दस्तावेजी कार्रवाई की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

    पहला मामला वर्ष 2021 के एक मारपीट प्रकरण से जुड़ा है। पुलिस ने घटना के समय 17 वर्षीय किशोर को बालिग मानकर गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ नियमित सत्र न्यायालय में चालान पेश कर दिया। इसके बाद करीब पांच वर्षों तक नियमित अदालत में ट्रायल चलता रहा। जब मामला अंतिम बहस के दौर में पहुंचा तो बचाव पक्ष ने अदालत के सामने किशोर की वास्तविक उम्र से जुड़े दस्तावेज पेश किए।

    सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि गिरफ्तारी से पहले ही किशोर के आधार कार्ड की प्रति थाने में जमा कराई जा चुकी थी, जिसमें उसकी जन्मतिथि 14 मार्च 2004 दर्ज थी। इसके बावजूद पुलिस ने उसे बालिग बताते हुए नियमित अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी, जबकि कानून के अनुसार मामला किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था।

    अदालत ने जन्मतिथि की पुष्टि के लिए माता-पिता और संबंधित ग्राम पंचायत सचिव के बयान दर्ज किए। मूल जन्म रजिस्टर के आधार पर यह प्रमाणित हुआ कि घटना के समय किशोर की उम्र 17 वर्ष से कुछ अधिक थी। इसके बाद अदालत ने नियमित न्यायालय में चल रही कार्यवाही समाप्त करते हुए थाना प्रभारी को सभी दस्तावेज किशोर न्याय बोर्ड में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। वहीं सह-आरोपी के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी।

    दूसरा मामला 15 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के आरोप से जुड़ा था। विशेष पॉक्सो अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच में कई गंभीर कमियां सामने आईं। विवेचना अधिकारी ने दावा किया कि पीड़िता को बेंगलुरु से बरामद किया गया था, लेकिन इस कार्रवाई से संबंधित कोई आधिकारिक रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया। इतना ही नहीं, बेंगलुरु की स्थानीय पुलिस को भी बरामदगी की सूचना नहीं दी गई थी।

    अदालत ने यह भी पाया कि कथित बरामदगी पंचनामे पर मुख्य आरोपी के हस्ताक्षर तक नहीं कराए गए। इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं और बचाव पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

    अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पीड़िता द्वारा आरोप लगाने के बावजूद मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी तत्काल नहीं की गई। रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता की बरामदगी के तीन दिन बाद आरोपी को केवल नोटिस देकर गिरफ्तार किया गया, जबकि दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी भी कई दिन बाद हुई। इस देरी और जांच प्रक्रिया की कमियों ने अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर कर दिया।

    इन दोनों मामलों ने स्पष्ट किया है कि विवेचना में छोटी-सी लापरवाही भी न्यायिक प्रक्रिया को वर्षों तक प्रभावित कर सकती है। अदालत के फैसलों ने यह संदेश दिया है कि जांच एजेंसियों के लिए कानूनी प्रक्रिया, दस्तावेजी साक्ष्य और निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है, क्योंकि जांच में हुई त्रुटियों का सीधा असर न्याय मिलने की प्रक्रिया पर पड़ता है।

  • एमपी बनेगा देश का अगला टेक हब, 40 हजार करोड़ के निवेश से 35 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार

    एमपी बनेगा देश का अगला टेक हब, 40 हजार करोड़ के निवेश से 35 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार


    मध्य प्रदेश। भोपाल में आयोजित एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 के साथ मध्यप्रदेश ने खुद को देश के उभरते तकनीकी और औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कॉन्क्लेव का शुभारंभ करते हुए प्रदेश के भविष्य का ऐसा विजन पेश किया जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और आधुनिक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की नई पहचान बनने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि इस आयोजन के जरिए प्रदेश में करीब 40 हजार करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित होगा और लगभग 35 हजार नए रोजगार के अवसर तैयार होंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। मध्यप्रदेश भी अब केवल कृषि प्रधान राज्य नहीं रहा बल्कि यहां ड्रोन, रक्षा उपकरण और मिसाइल जैसे अत्याधुनिक उत्पादों का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य भविष्य की तकनीकों को अपनाते हुए नई औद्योगिक क्रांति की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    कॉन्क्लेव के दौरान 51 विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा जिनका उद्देश्य निवेशकों को प्रदेश की संभावनाओं से जोड़ना और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण प्रस्तुत करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष उनकी बार्सिलोना यात्रा के बाद स्पेन, अमेरिका और कनाडा की कंपनियों ने मध्यप्रदेश में 228 करोड़ रुपए का निवेश किया। इसी यात्रा के दौरान एक गीगावाट क्षमता वाले एआई डेटा सेंटर के लिए समझौता हुआ था और अब संबंधित कंपनी के प्रतिनिधि भोपाल पहुंच चुके हैं जिससे परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।

    राज्य सरकार ने आईटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की भी बड़ी घोषणा की। इंदौर के सुपर कॉरिडोर में आधुनिक आईटी पार्क विकसित किया जाएगा जहां प्लग एंड प्ले सुविधा उपलब्ध होगी ताकि कंपनियां बिना अतिरिक्त निर्माण के तुरंत संचालन शुरू कर सकें। इसी तरह भोपाल आईटी पार्क का लगभग चार लाख वर्गफुट तक विस्तार किया जाएगा जबकि कोलार रोड पर पांच एकड़ भूमि में नया अत्याधुनिक आईटी पार्क बनाया जाएगा। इन परियोजनाओं से प्रदेश के युवाओं के लिए आईटी, इंजीनियरिंग और डिजिटल क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अनुसंधान, नवाचार और उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि तकनीकी निवेश केवल उद्योगों को नहीं बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और रोजगार व्यवस्था को भी नई दिशा देगा।

    कॉन्क्लेव में देश और विदेश की कई प्रतिष्ठित कंपनियां शामिल हुई हैं जिनमें CtrlS Datacenters, Kaynes Technologies, Fujiyama Power और Nyobolt Limited प्रमुख हैं। इसके अलावा आईआईएम इंदौर और आईआईएसईआर जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान भी भाग ले रहे हैं जो कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार को नई गति देंगे। कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण एमओयू और रणनीतिक साझेदारियों पर भी सहमति बनने की उम्मीद है जो राज्य के डिजिटल ढांचे को मजबूत करेंगी।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव का तीसरा संस्करण निवेश, रोजगार और तकनीकी विकास के मामले में नया रिकॉर्ड बनाएगा। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में देश के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी और इनोवेशन हब के रूप में उभरने की पूरी क्षमता रखता है और सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर आवश्यक कदम उठा रही है।

  • मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड पर घमासान तेज, गैर-मुस्लिम नियुक्तियों के खिलाफ शिया समुदाय की भी खुली नाराजगी

    मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड पर घमासान तेज, गैर-मुस्लिम नियुक्तियों के खिलाफ शिया समुदाय की भी खुली नाराजगी


    मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। अब तक सुन्नी उलेमा और मुस्लिम संगठनों के विरोध के बाद पहली बार शिया समुदाय ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। भोपाल के करोंद स्थित आल-ए-मोहम्मद शिया जामा मस्जिद के इमाम-ए-जुमा मौलाना सैयद अज़हर हुसैन रिजवी ने साफ कहा कि वक्फ की जमीनें और संपत्तियां मुस्लिम समाज की अमानत हैं, इसलिए इनके संचालन और प्रबंधन में गैर-मुस्लिमों को शामिल करना उचित नहीं माना जा सकता।

    मौलाना रिजवी का कहना है कि वक्फ की संपत्तियां वर्षों पहले नवाबों, राजाओं और समाज के संपन्न लोगों ने गरीब और जरूरतमंद मुसलमानों की शिक्षा, आवास तथा सामाजिक कल्याण के उद्देश्य से दान की थीं। ऐसे में इन संपत्तियों से जुड़े फैसले भी मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के हाथों में ही होने चाहिए। उनके मुताबिक वक्फ केवल संपत्ति का मामला नहीं बल्कि धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें बाहरी दखल उचित नहीं है।

    उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि नए वक्फ बोर्ड में शिया समुदाय के किसी भी प्रतिनिधि को स्थान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि प्रदेश के मुस्लिम समाज में शिया समुदाय भी महत्वपूर्ण हिस्सा है और बोर्ड में कम से कम एक शिया आलिम या प्रतिनिधि को शामिल किया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं होने से समाज के एक बड़े वर्ग में निराशा है।

    मौलाना रिजवी ने उन लोगों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए जिन्होंने नए वक्फ बोर्ड अध्यक्ष के स्वागत का समर्थन किया। उनका कहना है कि यदि कोई धार्मिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसे फैसलों का समर्थन करता है तो यह मुस्लिम समाज की भावनाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उनका मानना है कि धार्मिक मामलों में समाज की भावनाओं और विश्वास का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।

    दरअसल हाल ही में शहर काजी मुश्ताक अली नदवी और शहर मुफ्ती अब्दुल कलाम द्वारा वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनव्वर पटेल के स्वागत के बाद मुस्लिम समाज के एक वर्ग में नाराजगी देखने को मिली थी। इस मुद्दे पर पहले भी कई मुस्लिम संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था। जुमे की नमाज के दौरान लोगों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया था, जबकि कुछ धार्मिक पदाधिकारियों ने भी इस फैसले पर असहमति जताई थी।

    मौलाना रिजवी ने मुस्लिम समाज से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों की एक बड़ी वजह आपसी एकता की कमी भी है। यदि समाज संगठित रहता तो ऐसे विवादों की स्थिति नहीं बनती। उन्होंने सभी मतभेद भुलाकर समाजहित में एक साथ खड़े होने की आवश्यकता बताई।

    इधर यह मामला अब कानूनी दिशा भी पकड़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा के बाद मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड ने जबलपुर हाईकोर्ट में केविएट दायर कर दी है। बोर्ड अध्यक्ष सनव्वर पटेल का कहना है कि यदि इस मामले में कोई याचिका दायर होती है तो अदालत किसी भी आदेश से पहले बोर्ड का पक्ष भी अवश्य सुने। ऐसे में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर लगातार गहराता दिखाई दे रहा है।

    Tags (English):
    Waqf Board, Madhya Pradesh, Shia Community, Bhopal News, Waqf Controversy मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। अब तक सुन्नी उलेमा और मुस्लिम संगठनों के विरोध के बाद पहली बार शिया समुदाय ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। भोपाल के करोंद स्थित आल-ए-मोहम्मद शिया जामा मस्जिद के इमाम-ए-जुमा मौलाना सैयद अज़हर हुसैन रिजवी ने साफ कहा कि वक्फ की जमीनें और संपत्तियां मुस्लिम समाज की अमानत हैं, इसलिए इनके संचालन और प्रबंधन में गैर-मुस्लिमों को शामिल करना उचित नहीं माना जा सकता।

    मौलाना रिजवी का कहना है कि वक्फ की संपत्तियां वर्षों पहले नवाबों, राजाओं और समाज के संपन्न लोगों ने गरीब और जरूरतमंद मुसलमानों की शिक्षा, आवास तथा सामाजिक कल्याण के उद्देश्य से दान की थीं। ऐसे में इन संपत्तियों से जुड़े फैसले भी मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के हाथों में ही होने चाहिए। उनके मुताबिक वक्फ केवल संपत्ति का मामला नहीं बल्कि धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें बाहरी दखल उचित नहीं है।

    उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि नए वक्फ बोर्ड में शिया समुदाय के किसी भी प्रतिनिधि को स्थान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि प्रदेश के मुस्लिम समाज में शिया समुदाय भी महत्वपूर्ण हिस्सा है और बोर्ड में कम से कम एक शिया आलिम या प्रतिनिधि को शामिल किया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं होने से समाज के एक बड़े वर्ग में निराशा है।

    मौलाना रिजवी ने उन लोगों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए जिन्होंने नए वक्फ बोर्ड अध्यक्ष के स्वागत का समर्थन किया। उनका कहना है कि यदि कोई धार्मिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसे फैसलों का समर्थन करता है तो यह मुस्लिम समाज की भावनाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उनका मानना है कि धार्मिक मामलों में समाज की भावनाओं और विश्वास का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।

    दरअसल हाल ही में शहर काजी मुश्ताक अली नदवी और शहर मुफ्ती अब्दुल कलाम द्वारा वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनव्वर पटेल के स्वागत के बाद मुस्लिम समाज के एक वर्ग में नाराजगी देखने को मिली थी। इस मुद्दे पर पहले भी कई मुस्लिम संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था। जुमे की नमाज के दौरान लोगों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया था, जबकि कुछ धार्मिक पदाधिकारियों ने भी इस फैसले पर असहमति जताई थी।

    मौलाना रिजवी ने मुस्लिम समाज से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों की एक बड़ी वजह आपसी एकता की कमी भी है। यदि समाज संगठित रहता तो ऐसे विवादों की स्थिति नहीं बनती। उन्होंने सभी मतभेद भुलाकर समाजहित में एक साथ खड़े होने की आवश्यकता बताई।

    इधर यह मामला अब कानूनी दिशा भी पकड़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा के बाद मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड ने जबलपुर हाईकोर्ट में केविएट दायर कर दी है। बोर्ड अध्यक्ष सनव्वर पटेल का कहना है कि यदि इस मामले में कोई याचिका दायर होती है तो अदालत किसी भी आदेश से पहले बोर्ड का पक्ष भी अवश्य सुने। ऐसे में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर लगातार गहराता दिखाई दे रहा है।

  • MP Weather: मप्र में 16 जुलाई से फिर बदलेगा मौसम, फिलहाल 22 जिलों में आज हल्की बारिश के आसार

    MP Weather: मप्र में 16 जुलाई से फिर बदलेगा मौसम, फिलहाल 22 जिलों में आज हल्की बारिश के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। प्रदेश के करीब 60 प्रतिशत हिस्से से मानसूनी बादल छंट चुके हैं, जिसके चलते अगले पांच दिनों तक कहीं भी भारी या अति भारी बारिश की संभावना नहीं है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 16 जुलाई से एक नया मौसम तंत्र सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश में फिर तेज बारिश का दौर शुरू होने के संकेत हैं।

    फिलहाल प्रदेश में हल्की बारिश और बूंदाबांदी का सिलसिला जारी रहेगा। सोमवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार और अलीराजपुर जिलों में बादल छाने के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है।

    वहीं, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, आगर-मालवा, इंदौर, उज्जैन, राजगढ़, शाजापुर, देवास, विदिशा, भोपाल, सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, दमोह, पन्ना, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया और ग्वालियर में मौसम सामान्य रहने के साथ धूप निकलने के आसार हैं।

    फिलहाल रिमझिम बारिश, भारी बरसात के संकेत नहीं
    मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता फिलहाल कमजोर बनी हुई है। इसी वजह से पिछले चार-पांच दिनों से प्रदेश में कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। आने वाले कुछ दिनों तक केवल हल्की बारिश या रिमझिम फुहारें पड़ने की संभावना है, जबकि 16 जुलाई के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

    मानसून की रफ्तार क्यों हुई धीमी?
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून को सक्रिय बनाए रखने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ गई हैं या उनका प्रभाव मध्य प्रदेश से दूर हो गया है। इसी कारण अधिकांश इलाकों में केवल बादल छाए रहने और हल्की बारिश जैसी स्थिति बनी हुई है।

    बंगाल की खाड़ी से नए सिस्टम का इंतजार
    मौसम विभाग का अनुमान है कि 13 से 19 जुलाई के बीच उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक नया ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) बनने की संभावना है। यदि यह आगे चलकर निम्न दाब क्षेत्र में परिवर्तित होता है तो मध्य प्रदेश में एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है। इसके अलावा प्रशांत महासागर में तीन नए मौसम तंत्र विकसित होने की संभावना जताई गई है। इनमें से यदि कोई एक बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है, तो मानसून दोबारा सक्रिय होकर प्रदेश में अच्छी बारिश करा सकता है।

    सामान्य से सिर्फ 1 प्रतिशत अधिक बारिश
    पिछले पांच दिनों से भारी बारिश नहीं होने के कारण प्रदेश में वर्षा का अतिरिक्त आंकड़ा लगातार घटा है। पहले यह सामान्य से करीब 30 प्रतिशत अधिक था, जो अब घटकर सिर्फ 1 प्रतिशत रह गया है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी (9.5 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य औसत 239.8 मिमी (9.4 इंच) है। यानी अब तक सामान्य से केवल 1 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है, जो पूरे मानसून कोटे का लगभग 25 प्रतिशत है।

  • एमपी में मिड डे मील योजना पर घोटाले की आशंका 74 हजार रसोइयों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में

    एमपी में मिड डे मील योजना पर घोटाले की आशंका 74 हजार रसोइयों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में स्कूली बच्चों को मिलने वाले मिड डे मील की व्यवस्था एक बड़े सवालों के घेरे में आ गई है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत रसोइयों और सहायकों के मानदेय भुगतान में गंभीर अनियमितताओं की आशंका सामने आने के बाद राज्य सरकार ने व्यापक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। शुरुआती समीक्षा में पता चला है कि हजारों मामलों में रसोइयों के नाम और पते तो सही दर्ज हैं लेकिन उनके बैंक खातों की जगह किसी दूसरे व्यक्ति के खाते में मानदेय भेजा जा रहा है। इस खुलासे ने करोड़ों रुपये के संभावित फर्जीवाड़े की आशंका को जन्म दे दिया है।

    प्रदेशभर में संचालित इस योजना के तहत हर महीने लगभग 20 करोड़ रुपये रसोइयों और सहायकों के मानदेय के रूप में वितरित किए जाते हैं। योजना के पोर्टल की समीक्षा के दौरान 74 हजार से अधिक रसोइयों और सहायकों के पंजीयन तथा भुगतान संबंधी रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद सरकार ने सभी जिलों के कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को तत्काल जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

    सरकार ने सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को 20 जुलाई 2026 तक रसोइयों और सहायकों का अनिवार्य सत्यापन पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक कर्मचारी का ई केवाईसी समग्र आईडी और बैंक खाते का मिलान किया जाएगा। सत्यापन पूरा होने के बाद ही संबंधित जानकारी पोर्टल पर अपडेट होगी और उसके बाद ही मानदेय का भुगतान किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी खातों में जाने वाले भुगतान पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी।

    जांच प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विकासखंड स्तर पर ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे सभी रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन करेंगे और यदि किसी भी स्तर पर डुप्लीकेट या फर्जी पंजीयन मिलता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पूरी प्रक्रिया की लगातार मॉनिटरिंग और समीक्षा भी की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियां दोबारा सामने न आएं।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी स्कूल में निर्धारित संख्या से अधिक रसोइयों का पंजीयन पाया जाता है तो अतिरिक्त कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान शासन नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में पूरी जिम्मेदारी संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी की होगी। इससे अनावश्यक और फर्जी भुगतान पर रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    अस्थायी एवं आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने इस मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि पिछले करीब 20 वर्षों से यह योजना संचालित हो रही है लेकिन आज तक सरकार के पास रसोइयों और सहायकों का पूरी तरह प्रमाणित और अद्यतन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होना चिंता का विषय है। उनके अनुसार यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के पोर्टल को एजुकेशन पोर्टल 3.0 से भी जोड़ दिया है। अब सभी प्रधानाध्यापक केवल आधिकारिक लॉगिन आईडी और पासवर्ड के माध्यम से ही पोर्टल का उपयोग कर सकेंगे। इसी तरह ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर के लिए भी अधिकृत लॉगिन अनिवार्य कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अनधिकृत एंट्री या बदलाव की संभावना समाप्त हो सके।

    सरकार का मानना है कि सत्यापन अभियान पूरा होने के बाद योजना का पूरा भुगतान तंत्र अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगा। यदि जांच में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा साबित होता है तो संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है। इस अभियान के नतीजों पर अब पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।

  • 116 करोड़ की इमारतों में बंद लिफ्ट 5 करोड़ की साइकिलें बेकार स्मार्ट सिटी की हकीकत ने चौंकाया

    116 करोड़ की इमारतों में बंद लिफ्ट 5 करोड़ की साइकिलें बेकार स्मार्ट सिटी की हकीकत ने चौंकाया


    भोपाल । भोपाल स्मार्ट सिटी मिशन को देश की सबसे महत्वाकांक्षी शहरी विकास योजनाओं में शामिल किया गया था। आधुनिक सुविधाओं से लैस राजधानी बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में शुरू हुई इस परियोजना पर अब तक एक हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन जमीनी हकीकत कई बड़े सवाल खड़े कर रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब सत्तारूढ़ दल के विधायक भगवानदास सबनानी ने भी खुलकर कहा है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर शहर का नुकसान हुआ और बदले में नागरिकों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल सकीं।

    जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक में विधायक की नाराजगी के बाद सामने आई तस्वीरें बताती हैं कि कई परियोजनाएं या तो अधूरी हैं या फिर रखरखाव के अभाव में अपनी उपयोगिता खो चुकी हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए आवासीय टावर इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। करीब 116 करोड़ रुपये की लागत से बने तीन 13 मंजिला टावरों में सरकारी कर्मचारियों को फ्लैट आवंटित किए गए लेकिन कुछ ही समय में लिफ्ट बंद हो गईं और रखरखाव की जिम्मेदारी तय नहीं होने से रहवासी परेशान हैं। अग्निशमन व्यवस्था डोर कैमरे पार्क और अन्य सुविधाएं भी उचित देखरेख के अभाव में प्रभावित हो रही हैं।

    स्मार्ट सिटी क्षेत्र में लगभग 49 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हाट बाजार भी सवालों के घेरे में है। तीन मंजिला इमारत में सैकड़ों दुकानें बनाई गईं लेकिन पार्किंग और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि वर्षों पहले दुकानों का वादा किया गया था लेकिन आज तक उन्हें आवंटन नहीं मिला।

    करीब 31 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रहा स्मार्ट दशहरा मैदान भी अब तक अधूरा पड़ा है। धीमी निर्माण गति के कारण यह स्थान असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। लगातार टेंडर प्रक्रिया के बावजूद परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकी जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

    स्मार्ट सिटी की सबसे चर्चित योजनाओं में शामिल सार्वजनिक साइकिल परियोजना भी पूरी तरह विफल साबित हुई। वर्ष 2018 में लगभग 5 करोड़ 36 लाख रुपये खर्च कर खरीदी गई 500 साइकिलें अब धूल खा रही हैं। जिन साइकिल ट्रैक पर इन्हें चलाया जाना था वे भी कई स्थानों पर उखड़ चुके हैं। अब दोबारा नई एजेंसी नियुक्त करने और नए सिरे से काम शुरू करने की तैयारी की जा रही है जिससे अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ेगा।

    इसी तरह स्मार्ट सिटी क्षेत्र में विकसित किए गए बड़े व्यावसायिक प्लॉट भी अपेक्षित खरीदार नहीं जुटा सके हैं। कुल 42 प्लॉटों में से केवल 18 ही बिक पाए हैं जबकि शेष खाली पड़े हैं। विधायक का सुझाव है कि बड़े प्लॉटों को छोटे हिस्सों में विभाजित किया जाए ताकि छोटे और मध्यम व्यापारी भी निवेश कर सकें और परियोजना को गति मिल सके।

    शहर में लगाए गए स्मार्ट पोल भी अपनी घोषित सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा सके। वाईफाई ई वाहन चार्जिंग और पब्लिक एड्रेस सिस्टम जैसी सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं। पांच करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई स्मार्ट डस्टबिन परियोजना भी विफल रही। इसके अलावा हजारों पेड़ों की कटाई पर्यावरण को लेकर चिंता का विषय बनी हुई है जबकि कई खाली सरकारी परिसरों पर दोबारा अवैध कब्जों की शिकायतें सामने आ रही हैं।

    हालांकि सदर मंजिल जैसे कुछ प्रोजेक्ट बेहतर उपयोग के उदाहरण बने हैं जहां ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण कर उसे निजी संचालन के माध्यम से राजस्व से जोड़ा गया है। लेकिन समग्र तस्वीर यह संकेत देती है कि स्मार्ट सिटी मिशन में केवल निर्माण कार्य पर्याप्त नहीं है बल्कि समय पर रखरखाव जवाबदेही और योजनाओं के प्रभावी संचालन पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है। भोपाल का अनुभव यह बताता है कि विकास केवल करोड़ों रुपये खर्च करने से नहीं बल्कि नागरिकों तक सुविधाएं पहुंचाने से सफल माना जाएगा।