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  • हरदा के IIT ग्रेजुएट श्रेयांश बड़ोदिया ने 2.3 करोड़ की नौकरी छोड़ यूपीएससी में पहले प्रयास में हासिल की सफलता

    हरदा के IIT ग्रेजुएट श्रेयांश बड़ोदिया ने 2.3 करोड़ की नौकरी छोड़ यूपीएससी में पहले प्रयास में हासिल की सफलता


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के हरदा निवासी श्रेयांश बड़ोदिया ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 194वीं रैंक हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। खास बात यह है कि उन्होंने 2.3 करोड़ रुपए सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर देश और समाज के लिए खुद को समर्पित किया। श्रेयांश ने बताया कि नौकरी से आर्थिक सुविधा तो मिल रही थी, लेकिन मन को संतुष्टि नहीं मिल रही थी। वे चाहते थे कि उनका काम समाज के लिए लाभकारी हो।

    श्रेयांश ने अपनी स्थिति को इंग्लिश की कहावत “I was in two minds” से जोड़ा, क्योंकि एक तरफ जीवन आरामदायक था, वहीं दूसरी तरफ मन संतुष्ट नहीं था। उन्होंने सोचा कि भविष्य में जब अपने जीवन को देखेंगे तो महसूस हो कि उन्होंने देश और समाज के लिए कुछ किया।

    श्रेयांश ने 2018 में IIT मुंबई से बीटेक की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद गुरुग्राम की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम शुरू किया। नौकरी के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा की ओर झुकाव महसूस किया। उनके कई मित्र पहले ही सिविल सेवा में थे, जिससे उन्हें प्रेरणा मिली।

    अगस्त 2024 में श्रेयांश ने नौकरी छोड़कर पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी में लग गए। उन्होंने मई 2025 में प्रीलिम्स, अगस्त 2025 में मेंस और जनवरी 2026 में इंटरव्यू सफलतापूर्वक पास किया। करीब नौ माह की मेहनत और फोकस के साथ उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को पहले प्रयास में पास कर लिया।

    श्रेयांश का कहना है कि आईटी सेक्टर में उन्हें कंफर्ट जोन जरूर मिला था, लेकिन संतुष्टि नहीं। प्रशासनिक सेवा में जाकर वे अपनी क्षमताओं का सही उपयोग करना चाहते थे। उनका उद्देश्य शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार करना है। खासकर प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाना और स्वास्थ्य सेवा में लोगों को “आउट ऑफ पॉकेट खर्च” कम करना उनका लक्ष्य है।

    श्रेयांश का परिवार फिलहाल मुंबई में रहता है। उनके पिता जीडी बड़ोदिया नर्मदापुरम में जिला कोषालय अधिकारी रह चुके हैं और समाज में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। परिवार ने श्रेयांश के इस फैसले का पूरा समर्थन किया और परिणाम घोषित होने के बाद उनका स्वागत किया।

    UPSC 2025 में कुल 958 उम्मीदवार विभिन्न सेवाओं के लिए क्वालिफाई हुए। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के अनुज अग्निहोत्री ने ऑल इंडिया टॉप किया, जबकि भोपाल और धार से भी कई युवा टॉप 10 में शामिल हुए।

    श्रेयांश की कहानी प्रेरणादायक है क्योंकि उन्होंने आराम और आर्थिक सुविधा को त्याग कर समाज और देश के लिए चुनौतियों से भरा रास्ता चुना। यह साबित करता है कि असली सफलता केवल पैकेज और पद से नहीं, बल्कि समाज के लिए योगदान और संतुष्टि से मापी जाती है।

  • MP में LPG का बड़ा संकट: होटलों के चूल्हे ठंडे, घरों में 8 घंटे की कतार, प्रशासन अलर्ट पर

    MP में LPG का बड़ा संकट: होटलों के चूल्हे ठंडे, घरों में 8 घंटे की कतार, प्रशासन अलर्ट पर



    भोपाल। मध्य प्रदेश में रसोई गैस (LPG) संकट ने आम नागरिक और व्यवसाय दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से मिली रिपोर्टों के मुताबिक, घरेलू गैस की कमी ने लोगों को धूप में घंटों कतार में खड़ा कर दिया है, वहीं कॉमर्शियल सिलेंडर न मिलने से होटलों और रेस्तरां के चूल्हे ठंडे पड़े हैं। राजधानी भोपाल के जहांगीराबाद और बोगदा पुल इलाकों में स्थिति गंभीर है। स्थानीय निवासी शीबा खान के अनुसार, उनके पास 13 मार्च को डिलीवरी का मैसेज तो आया, लेकिन सिलेंडर घर नहीं पहुंचा, जिससे उन्हें अब रिश्तेदारों के यहां खाना बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं मोहम्मद रियाज ने तीन दिन गैस न मिलने के बाद नया इंडक्शन चूल्हा खरीदा, ताकि परिवार भूखा न रहे।

    कॉमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत ने प्रदेश के होटल और रेस्तरां उद्योग को भी प्रभावित किया है। पिछले छह दिनों में 50,000 से ज्यादा होटलों और छोटे रेस्टॉरेंट्स को सिलेंडर नहीं मिले हैं। भोपाल और इंदौर के कई होटलों ने मेन्यू छोटा कर दिया है, जबकि कई रेहड़ियां और स्ट्रीट फूड ठेले पूरी तरह बंद हो गए हैं। इससे दैनिक मजदूरी पर निर्भर दुकानदारों की आमदनी भी प्रभावित हो रही है।

    हालांकि ग्वालियर और उज्जैन में प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं। ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने दावा किया कि जिले में स्टॉक की कोई कमी नहीं है और खाद्य विभाग की टीमें लगातार चेकिंग कर रही हैं। अफवाहों को रोकने के लिए कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। उज्जैन में रविवार की छुट्टी के बावजूद महाकाल गैस एजेंसी खोलकर घरेलू गैस की सप्लाई जारी रखी गई। एजेंसी संचालक भगवान दास एरन ने बताया कि घरेलू सिलेंडर की निरंतर सप्लाई की जा रही है, हालांकि कॉमर्शियल सिलेंडरों के लिए नए आदेशों का इंतजार किया जा रहा है।

    इंदौर में स्थिति थोड़ी मिश्रित रही। प्रशासन के निर्देश पर रविवार को खुली एजेंसियों में उपभोक्ताओं ने बुकिंग कराने में कोई परेशानी नहीं बताई, लेकिन सप्लाई में देरी के कारण डिलीवरी 7-8 दिन में मिलने का आश्वासन दिया गया। वहीं कुछ उपभोक्ताओं ने KYC प्रक्रिया और गैस पाइप (नली) खरीदने का दबाव भी अनुभव किया।

    इस संकट ने साफ कर दिया है कि प्रदेश में LPG की आपूर्ति और वितरण में प्रशासनिक और लॉजिस्टिक चुनौतियां हैं। घरों में खाना बनाने वाले आम नागरिक और व्यवसायिक स्तर पर रेस्तरां चलाने वाले दोनों ही इस संकट से प्रभावित हैं। ग्वालियर, उज्जैन और इंदौर में प्रशासन की सक्रियता के बावजूद राजधानी भोपाल सहित कई इलाकों में जनता को गैस के लिए लंबी कतारों और देरी का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं की मांग है कि राज्य सरकार और गैस एजेंसियां जल्द से जल्द सप्लाई और वितरण सुचारू करें ताकि रोजमर्रा के काम और व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित न हों।

  • मध्य प्रदेश में LPG संकट: सिलेंडर 30% महंगे, होटल और घरों में हाहाकार

    मध्य प्रदेश में LPG संकट: सिलेंडर 30% महंगे, होटल और घरों में हाहाकार

    भोपाल। मध्य प्रदेश में रसोई गैस (LPG) की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले 6 दिनों से प्रदेश के कई शहरों में कॉमर्शियल और घरेलू सिलेंडर की सप्लाई बाधित है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि होटल, रेस्टोरेंट और घरों में रसोई गैस की गंभीर किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

    सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें:
    भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे प्रमुख शहरों में लोग सुबह-सुबह सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़े हो रहे हैं। बड़ी संख्या में बच्चे और बुजुर्ग भी सिलेंडर लेने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। कई बार बुकिंग पूरी नहीं हो पा रही है, जबकि कभी-कभी 6 से 8 घंटे इंतजार के बाद सिलेंडर मिल पा रहा है।

    होटल और रेस्टोरेंट्स पर असर:
    प्रदेश में करीब 50 हजार होटल और रेस्टोरेंट्स इस संकट से प्रभावित हैं। इन व्यवसायों को अपने संचालन के लिए कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे, जिससे खाना पकाने में बाधा और ग्राहकों की सेवा प्रभावित हो रही है।

    विकल्प और बढ़ा खर्च:
    गैस की कमी के कारण इंडक्शन और डीजल भट्ठियों का उपयोग बढ़ गया है। हालांकि, इनके संचालन की लागत 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। भोपाल में कुछ रेहड़ियां और छोटे स्ट्रीट फूड स्टॉल्स अस्थायी रूप से बंद भी हो गए हैं।

    राज्यव्यापी स्थिति:
    LPG संकट केवल भोपाल तक सीमित नहीं है। राजधानी से लेकर छिंदवाड़ा और अन्य शहरों में रसोई गैस की कमी ने आम जनता और व्यवसायों में हाहाकार मचा दिया है।

    विशेषज्ञों की चेतावनी:
    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो इससे खाद्य सेवा उद्योग और घरेलू रसोई दोनों प्रभावित होंगे। लंबे समय तक गैस की कमी के कारण लोग सस्ता और असुरक्षित विकल्प, जैसे खुले भट्ठी या कोयला, इस्तेमाल करने पर मजबूर हो सकते हैं, जिससे सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।

    सरकारी कदम:
    इस समय सरकारी एजेंसियां और वितरक प्रयास कर रहे हैं कि जल्द से जल्द सिलेंडर की सप्लाई बहाल हो। हालाँकि, अभी तक कोई ठोस समयरेखा नहीं दी गई है।

    मध्य प्रदेश में LPG संकट से गृहस्थी और व्यापार दोनों प्रभावित हैं। होटल और रेस्टोरेंट्स संचालन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, घरों में रसोई गैस की कमी आमजन की दिनचर्या पर असर डाल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की सुविधा दोनों पर लंबी अवधि में असर डाल सकता है।

  • मध्य प्रदेश में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं, निर्बाध आपूर्ति रहेगी जारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मध्य प्रदेश में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं, निर्बाध आपूर्ति रहेगी जारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नागरिकों को रसोई गैस संबंधी परेशानी नहीं होगी। प्रदेश में घरेलू रसोई गैस सहित पीएनजी और सीएनजी की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार देर शाम एक बयान में कहा कि वर्तमान में मिडिल ईस्ट-एशिया में युद्ध की स्थितियों के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मंत्रीगण सजग हैं। नागरिकों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है, केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर कालाबाजारी रोकने के लिए पूरे प्रबंधन किए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक गतिविधियों के कारण से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस के संबंध में वर्तमान स्थितियों में अभी तक अधिकांश कच्चे तेल की आपूर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होती थी, जिसे परिवर्तित कर अन्य स्थानों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। साथ ही देश की रिफाइनरी उच्च क्षमता पर कार्य कर रही है। प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिये वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता के माध्यम से खरीदी प्रक्रिया जारी है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि घरेलू पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति बिना कटौती के हो रही है। रिफाइनरी को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे वर्तमान में एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि भी हुई है। इसके अलावा एक विशेष उपलब्धि प्राप्त हुई है कि जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले ऐसे जहाज एवं टेंकर जिनमें भारतीय फ्लेग लगे हैं उनको नहीं रोका जाएगा, यह एक राजनयिक विजय है, जिससे पेट्रोलियम सप्लाई में बाधा समाप्त होगी।

    उन्होंने बताया कि गैस आपूर्ति प्रबंधन के लिये प्राकृतिक गैस नियंत्रण आदेश जारी किया गया है, जिससे देश में किसी भी प्रकार की घरेलू गैस की आपूर्ति में कमी न हो। उपरोक्त के अनुक्रम में प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, एटीएस, क्रूड ऑयल और घरेलू गैस की किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है तथा निरंतर आपूर्ति जारी है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं हुई है। इसी के दृष्टिगत मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार वरिष्ठ मंत्रियों की समिति का गठन भी किया गया है।


    मुख्य सचिव जैन ने जिला कलेक्टर्स को दिये निर्देश

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने गुरुवार देर शाम वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कमिश्नर-कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के साथ पश्चिम-मध्य एशिया में युद्ध के कारण उत्पन्न हुई स्थिति के दृष्टिगत एलपीजी सहित अन्य ईंधन की उपलब्धता की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में डीजीपी कैलाश मकवाना और एसीएस शिवशेखर शुक्ला एवं रश्मि अरुण शमी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्य सचिव जैन ने कलेक्टर्स से कहा कि घरेलू गैस वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था को और मजबूत करें तथा इससे जुड़ी कंपनियां भी सर्वर आदि की क्षमता बढाएं जिससे रिफिल बुकिंग ओटीपी जनरेशन और वितरण बिना असुविधा के सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सुनिश्चत करें कि गलत सूचनाओं का प्रसार और अफवाहों को सख्ती से रोंके और उपभोक्ताओं तक मीडिया आदि का उपयोग कर सही सूचना पहुचाएं। उन्होंने कहा कि नागरिकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाए और सूचना तंत्र मजबूत कर अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी की कोई भी घटना नही हो, यह सुनिश्चत करें।

    मुख्य सचिव ने कलेक्टर्स द्वारा होटल्स, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन आदि के संचालकों से बात कर रसोई गैस की जगह इलेक्ट्रिक भट्टी और इंडेक्शन आदि का उपयोग बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे भी वैकल्पिक और सुरक्षित ईंधन के उपयोग के प्रति नागरिकों और खानपान व्यवसाय में लगे लोगों बीच वैकल्पिक ईंधन के उपयोग के प्रति जागरूकता बढाएं।

    मुख्य सचिव जैन ने विभिन्न शहरों में पीएनजी के कनेक्शन की जानकारी ली और कलेक्टर्स से कहा कि वे अधिकाधिक उपभोक्ताओं को पाइप लाइन गैस प्रणाली से जोड़ें। उन्होंने कलेक्टर्स से कहा कि सी एम हेल्पलाइन की शिकायतों का उसी दिन संतुष्टि पूर्वक समाधान सुनिश्चित किया जाए।

    डीजीपी मकवाना ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे सोशल मीडिया सहित विभिन्न प्लेट फार्म पर गलत सूचनाओं और अफवाह फैलाने वालों पर कार्यवाही करें और संपूर्ण व्यवस्था में सुरक्षात्मक इंतजाम सुनिश्चित करें।

    खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरूण शमी ने बताया कि प्रदेश में एलपीजी सहित पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश के सीएनजी स्टेशन एवं पीएनजी उपभोक्ताओं के उपयोग के लिए एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश मे पेट्रोलियम/ सीएनजी, पीएनजी गैस की आपूर्ति लगातार जारी है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त मात्रा में एलपीजी की लगातार उपलब्धता है। शैक्षणिक एवं चिकित्सा संस्थानों को वाणिज्यिक सिलेंडर के उपयोग की छूट प्रदान की गई है। उन्होंने कलेक्टर्स से मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने के लिए भी कहा है।

    कांफ्रेंस में इंदौर, भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, सागर, धार के कलेक्टर्स सहित ग्वालियर एवं रीवा के कमिश्नर ने किए जा रहे उपायों की जानकारी दी। एसीएस रश्मि अरूण शमी ने अधिकारियों से कहा कि वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध स्टॉक का विवेकपूर्ण उपयोग करने एवं वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को अपनाने की सलाह दें। जहां पीएनजी लाइन उपलब्ध है वहां पीएनजी के कनेक्शन लेने के लिए प्रेरित किया जाए। जिन कामो में गैस ज्यादा खर्च होती है उनको नियंत्रित करने एवं विकल्प तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाए। जिला कलेक्टर, जिले के खाद्य नियंत्रक/अधिकारी, ऑयल कंपनी के नोडल अधिकारी तथा एलपीजी वितरकों से समन्वय कर एलपीजी की आवश्यकता तथा उपलब्धता की प्रतिदिन समीक्षा भी करें।


    वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा

    प्रदेश में घरेलू रसोई गैस की कोई कमीं नहीं है और उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। राज्य शासन एलपीजी सहित अन्य ईंधन के परिवहन, भंडारण और वितरण पर पूरी तरह से सतर्क है। एसीएस रश्मि अरूण शमी को समन्वय अधिकारी बनाया गया है, वे प्रतिदिन सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों से संवाद और समन्वय करेंगी। मुख्य सचिव जैन ने कहा कि पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद गलत सूचनाओं के कारण घरेलू गैस की कमी की अफवाह फैलने से रोका जाए। उन्होंने कहा कि रसोई गैस सहित अन्य ईंधन का सुरक्षित परिवहन, भंडारण और वितरण सुनिश्चित किया जाए।

    मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य स्तर के साथ ही जिला स्तर पर भी कंट्रोल रूम बनाए जाएं जहां प्रतिदिन की स्थिति की समीक्षा के साथ ही समाधान हो। बैठक में बताया गया कि गैस कंपनियों की भी हेल्पलाइन से लोगों को सही जानकारी दी जा रही है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जन भावनाओं के दृष्टिगत कंट्रोल रूम में कई फोन नम्बर रखें तथा दक्ष अमले की तैनाती की जाए। उन्होंने कहा कि रसोई गैस वितरण की पारदर्शी व्यवस्था है और संबंधित विभागों का दायित्व है कि वे ऐसा वातावरण तैयार करें जिससे जन भावनाएं व्यवस्था के साथ हों।

  • मुख्यमंत्री के प्रयासों से मप्र के किसानों को मिली बड़ी सौगात, केंद्र ने दी कई अहम मंजूरियां

    मुख्यमंत्री के प्रयासों से मप्र के किसानों को मिली बड़ी सौगात, केंद्र ने दी कई अहम मंजूरियां


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से प्रदेश के किसानों को केंद्र सरकार से कई और बड़ी महत्वपूर्ण मंजूरियां मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर राज्य के किसानों और ग्रामीण विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, जिस पर केंद्र ने सकारात्मक निर्णय लिए।

    बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस उच्च स्तरीय चर्चा में ग्रामीण सड़कों सहित अनेक विषयों पर मध्यप्रदेश को बड़ी राहत देने वाले निर्णय लिये गये। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से केन्द्र के मप्र के किसानों के लिए निर्णयों की जानकारी साझा की है।


    सरसों किसानों को मिलेगा भावांतर भुगतान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आग्रह पर सरसों की खरीद से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने भावांतर भुगतान योजना के तहत मध्यप्रदेश के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए संबंधित विभागों को भुगतान प्रक्रिया तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। इससे राज्य के सरसों उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।


    तुअर की शत-प्रतिशत खरीद का मार्ग प्रशस्त

    केंद्रीय मंत्री चौहान ने बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को तुअर (अरहर) की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद का स्वीकृति-पत्र भी सौंपा। इस निर्णय से मध्य प्रदेश के तुअर उत्पादक किसानों की उपज का पूर्ण सरकारी उपार्जन सुनिश्चित होगा, जिससे उन्हें बाजार में भाव गिरने का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा और आय में स्थिरता आयेगी।


    दलहन–तिलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में पहल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को दलहन और तिलहन उत्पादन का अग्रणी केंद्र बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस पर केंद्र और राज्य की संयुक्त टीम द्वारा मूंग, उड़द, चना, तिल, सरसों और पाम ऑयल जैसी फसलों के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने पर सहमति बनी।


    फसल बीमा में किसानों के हितों की सुरक्षा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। केंद्रीय मंत्री चौहान ने निर्देश दिए कि सोयाबीन जैसी फसलों के आंकलन में केवल सैटेलाइट डेटा के बजाय क्रॉप कटिंग और रिमोट सेंसिंग तरीकों का उपयोग किया जाए, जिससे किसानों को वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा मिल सके।


    कृषि से जुड़े मुद्दों और योजनाओं की हुई समीक्षा

    बैठक में मध्य प्रदेश के लिए सरसों और सोयाबीन के भावांतर भुगतान, दलहन मिशन के तहत मूंग-उड़द के अतिरिक्त लक्ष्य, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता कार्यक्रम, मनरेगा मजदूरी और सामग्री भुगतान, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़े मुद्दों पर बिंदुवार चर्चा की गई। केन्द्रीय मंत्री चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मध्यप्रदेश से जुड़े लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाया जाए, जिससे राज्य के किसानों, मजदूरों और ग्रामीण गरीबों को शीघ्र राहत मिल सके।


    ग्रामीण विकास योजनाओं को मिलेगी गति

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाते हुए किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण विकास को नई गति देने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान ने मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश मेरा अपना घर है। किसान कल्याण वर्ष में यह सुनिश्चित किया जायेगा कि सरसों, तुअर, मूंग, उड़द और तिलहनों की खेती करने वाले किसानों को हर संभव सहायता मिले और राज्य ग्रामीण विकास के हर पैमाने पर अग्रणी बने।

  • केंद्रीय मंत्री सिंधिया के प्रयासों से मप्र के कोलारस को मिली रेल कनेक्टिविटी की बड़ी सौगात

    केंद्रीय मंत्री सिंधिया के प्रयासों से मप्र के कोलारस को मिली रेल कनेक्टिविटी की बड़ी सौगात


    भोपाल।
    केन्द्रीय संचार मंत्री तथा गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों से मध्य प्रदेश के अशोकनगर और कोलारस क्षेत्र की जनता को बेहतर रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

    रेल मंत्रालय ने गुरुवार को अशोकनगर में सोगरिया–दानापुर एक्सप्रेस (19801/02) तथा कोलारस में उज्जैनी एक्सप्रेस (14309/10) के स्टॉपेज को स्वीकृति दी है। यह निर्णय क्षेत्र के यात्रियों के लिए आवागमन को अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाएगा। यह जानकारी केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने सोशल मीडिया फेसबुक पर पोस्ट कर साझा की है।

    पत्र पर त्वरित कार्रवाई
    सिंधिया ने बताया कि उन्होंने 26 फरवरी 2026 को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर अशोकनगर और कोलारस में इन ट्रेनों के ठहराव की आवश्यकता को रेखांकित किया था। उनके इस पत्र पर त्वरित संज्ञान लेते हुए रेल मंत्रालय ने दोनों स्टॉपेज को स्वीकृति प्रदान की है, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को सीधी और बेहतर रेल सुविधा मिल सकेगी।

    सिंधिया ने कहा कि अशोकनगर में सोगरिया–दानापुर एक्सप्रेस और कोलारस में उज्जैनी एक्सप्रेस के ठहराव से क्षेत्र के यात्रियों को देश के विभिन्न हिस्सों से बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त होगी। इससे न केवल दैनिक यात्रियों, छात्रों और व्यापारियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।


    रेल मंत्री के प्रति सिंधिया ने व्यक्त किया आभार

    इस बड़ी सौगात पर सिंधिया ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता की सुविधा मोदी सरकार के लिए सर्वोपरि है और सभी मंत्रालय एक साथ मिलकर (Whole of Government) अप्रोच के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह निर्णय अशोकनगर और कोलारस की जनता के लिए बड़ी राहत और सुविधा लेकर आएगा तथा क्षेत्र की कनेक्टिविटी को और अधिक सुदृढ़ करेगा।

  • प्रहलाद पटेल के साथ दिल्ली में मिले सीएम मोहन यादव, सरसों और तुअर किसानों को बड़ी राहत

    प्रहलाद पटेल के साथ दिल्ली में मिले सीएम मोहन यादव, सरसों और तुअर किसानों को बड़ी राहत

    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। इस बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा किसानों की फसलों से जुड़ी समस्याओं और उनकी आय बढ़ाने के उपाय थे।

    बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि यह चर्चा मुख्यतः सरसों और तुअर की फसल से संबंधित रही। लंबे समय से लंबित सरसों की खरीद पर भावांतर भुगतान योजना को हरी झंडी दे दी गई है। इसका लाभ सीधे किसानों के बैंक खातों में मिलेगा और यह उनके लिए बड़ी राहत साबित होगी। इससे प्रदेश के लाखों सरसों उत्पादक किसानों को बाजार मूल्य और समर्थन मूल्य के अंतर की राशि मिल सकेगी।

    इसके अलावा, तुअर की पूरी फसल 100 प्रतिशत सरकारी खरीद के तहत खरीदी जाएगी। शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को इस योजना का स्वीकृति पत्र भी सौंपा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम मध्य प्रदेश के दलहन उत्पादन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा।

    दिल्ली में हुई इस बैठक की पृष्ठभूमि में एमपी विधानसभा का हालिया बजट सत्र भी रहा। सत्र के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयानों से सीएम और उनके बीच अंदरूनी मतभेद नजर आए थे। इसके बाद पिछले हफ्ते सीएम मोहन यादव, कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल ने अलग-अलग समय पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। हालांकि इस बार कैलाश विजयवर्गीय निजी कार्यक्रम में व्यस्त रहे और बैठक में शामिल नहीं हो पाए।

    बैठक में यह भी तय किया गया कि वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। इसमें मध्य प्रदेश को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इस वर्ष में मूंग, उड़द, सोयाबीन और अन्य तिलहनों पर विशेष फोकस रहेगा। सरकार किसानों के लिए योजनाओं की प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर निगरानी भी सुनिश्चित करेगी।

    शिवराज-मोहन-प्रहलाद की यह बैठक किसानों के हितों के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि भावांतर भुगतान योजना और तुअर की पूरी सरकारी खरीद से किसान आर्थिक रूप से सशक्त होंगे और राज्य में दलहन उत्पादन में तेजी आएगी।

    प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार मिलकर किसानों की आय बढ़ाने, फसल की सही कीमत सुनिश्चित करने और उत्पादन को प्रोत्साहित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। यह बैठक किसानों के लिए वास्तविक राहत और लंबे समय से प्रतीक्षित निर्णयों का परिणाम साबित होगी।

  • मध्यप्रदेश में अब दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस अनिवार्य, मिलावटी दूध पर कड़ा नियंत्रण

    मध्यप्रदेश में अब दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस अनिवार्य, मिलावटी दूध पर कड़ा नियंत्रण



    भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब डेयरी सहकारी समितियों को छोड़कर सभी दूध उत्पादक और विक्रेता लाइसेंस या पंजीकरण के बिना अपने कारोबार को जारी नहीं रख सकते। यह निर्णय एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है।

    सरकार ने दूध संग्रह और परिवहन में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और भंडारण व्यवस्थाओं की नियमित जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे मिलावटी दूध और नकली दुग्ध उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। राज्य में ऐसे दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की पहचान की जाएगी जो अभी तक पंजीकृत नहीं हैं। साथ ही, दूध से जुड़ी हर गतिविधि की मासिक निगरानी रिपोर्ट 15 और 30 या 31 तारीख को तैयार कर प्राधिकरण को भेजी जाएगी।

    मध्यप्रदेश देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहाँ कुल 213 लाख टन दूध का उत्पादन होता है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 9 प्रतिशत है। राज्य में भैंस के दूध का हिस्सा लगभग 48 प्रतिशत है। वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 652 से 707 ग्राम प्रतिदिन रही।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में दूध उत्पादन को वर्तमान 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ अनुबंध भी किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में दूध संग्रह को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 381 नई सहकारी समितियां भी संचालित हो रही हैं।

    प्रदेश सरकार ने दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना भी शुरू की है। इस योजना के तहत यदि कोई किसान 25 गायों की यूनिट स्थापित करता है, तो उसे 10 लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादन बढ़ाना और किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है।

    केंद्र सरकार भी दूध उत्पादन और बिक्री पर नजर रख रही है। एफएसएसएआई ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र में दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की निगरानी बढ़ाएं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य इस अनिवार्यता से छूट प्राप्त हैं, लेकिन अन्य सभी को खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार पंजीकरण या लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।

    एफएसएसएआई ने विशेष पंजीकरण अभियान चलाकर उन दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की पहचान करने को कहा है जो अब तक पंजीकृत नहीं हैं। साथ ही, दूध संग्रह, परिवहन और भंडारण की जांच को नियमित रूप से लागू करने का निर्देश भी दिया गया है।

  • भारत मंडपम में अमृत मित्र महोत्सव: महिला सशक्तिकरण और शहरी विकास का संगम

    भारत मंडपम में अमृत मित्र महोत्सव: महिला सशक्तिकरण और शहरी विकास का संगम


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में 13 मार्च को आयोजित होने वाले अमृत मित्र महोत्सव में देशभर से स्व-सहायता समूह की महिलाएँ शामिल होंगी। मध्यप्रदेश की लगभग 300 महिलाएँ इस राष्ट्रीय मंच पर अपनी सक्रिय भागीदारी के लिए भाग लेंगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि राज्य के 55 नगरीय निकायों में 312 स्व-सहायता समूहों की 1 028 महिलाओं को अमृत मित्र के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन महिलाओं ने जल गुणवत्ता परीक्षण सार्वजनिक उद्यानों के रख-रखाव और केंद्र सरकार के पेड़ों के लिए महिलाएं कार्यक्रम के तहत पौधरोपण एवं सुरक्षा के कार्यों को सफलतापूर्वक निभाया है।

    यह महोत्सव भारत मंडपम नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है और इसमें उत्तर प्रदेश हरियाणा महाराष्ट्र राजस्थान सहित देश के अन्य राज्यों से भी अमृत मित्र महिलाएँ सम्मिलित होंगी। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं की उत्कृष्ट उपलब्धियों को मान्यता देना और शहरी विकास में उनके योगदान को रेखांकित करना है।

    केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर इस अवसर पर जल संरक्षण स्वच्छता और शहरी प्रबंधन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को सम्मानित करेंगे। यह न केवल महिलाओं की उपलब्धियों को पहचान देगा बल्कि महिला नेतृत्व के माध्यम से सतत शहरी विकास की संकल्पना को भी सुदृढ़ करेगा।

    आयुक्त संकेत भोंडवे ने नई दिल्ली जा रही सभी अमृत मित्र महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह पहल शहरी विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश की महिलाएँ इस राष्ट्रीय मंच पर राज्य के नवाचारों और उत्कृष्ट कार्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगी।

    अमृत मित्र पहल के तहत महिलाएँ केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय मंच पर भी शहरी विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभा रही हैं। यह पहल महिला सशक्तिकरण और शहरी प्रबंधन के संगम का प्रतीक बनकर सामने आई है। आयोजन में सहभागिता से महिलाओं का मनोबल बढ़ेगा और शहरी क्षेत्रों में सतत विकास के लिए उनका नेतृत्व और अधिक सशक्त होगा।

  • बैतूल में आदिवासी भूमि अधिकारों को लेकर जयस का प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

    बैतूल में आदिवासी भूमि अधिकारों को लेकर जयस का प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन


    बैतूल । बैतूल जिले में आदिवासी भूमि अधिकारों को लेकर जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन ने जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं और आदिवासी समाज के लोगों ने रानी दुर्गावती ऑडिटोरियम में सभा आयोजित की जिसमें संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की गई।

    सभा के बाद कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर बैतूल कलेक्ट्रेट का रुख किया। वहां उन्होंने राज्यपाल के नाम ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा। ज्ञापन में मुख्य रूप से आदिवासी भूमि संरक्षण जमीन हड़पने के खिलाफ सुरक्षा और स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा को सुनिश्चित करने की मांग की गई।

    कार्यकर्ताओं का कहना था कि पिछले वर्षों में आदिवासी भूमि से जुड़े मुद्दों पर प्रशासनिक कार्रवाई में देरी और कानूनी रूप से सही संरक्षण न होने के कारण कई समुदाय प्रभावित हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासी भूमि के संरक्षण और स्थानीय लोगों के अधिकारों को प्राथमिकता दी जाए।

    आदिवासी समाज के लोग और युवा कार्यकर्ता इस प्रदर्शन के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अपने अधिकारों के लिए सतत जागरूक हैं और उनके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए जिससे प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक उनकी मांगों का प्रभावी संदेश पहुंचा।