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  • 52वाँ खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय नृत्य समारोह: शास्त्रीय कला का भव्य संगम

    52वाँ खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय नृत्य समारोह: शास्त्रीय कला का भव्य संगम



    खजुराहो। मध्यप्रदेश विश्व धरोहर स्थल खजुराहो में शुक्रवार से 52वाँ खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय नृत्य समारोह प्रारंभ हो गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि यह समारोह हमारी राष्ट्रीय धरोहर और शास्त्रीय संस्कृति का अनमोल संगम है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि खजुराहो “पत्थरों में प्राण” की भूमि है, जहां कंदरिया महादेव, चतुर्भुज, वामन, चित्रगुप्त और पार्वती मंदिर जैसे ऐतिहासिक देवालय मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि 52वाँ नृत्य समारोह इस वर्ष भगवान नटराज को समर्पित है और इसका आयोजन भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को भगवान शिव के नटराज स्वरूप से जोड़ने का अद्वितीय प्रयास है।

    समारोह की प्रमुख विशेषताएँ
    मुख्य अतिथि: मुख्यमंत्री मोहन यादव

    विशिष्ट उपस्थितगण: संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी, सांसद खजुराहो वी.डी. शर्मा, अपर मुख्य सचिव संस्कृति विभाग श्री शिवशेखर शुक्ला, संचालक संस्कृति श्री एन.पी. नामदेव और कलेक्टर छतरपुर श्री पार्थ जायसवाल।

    पुस्तक विमोचन: नटराज – भगवान शिव के नृत्य मुद्रा, खजुराहो एवं नृत्य समारोह कॉफी टेबल बुक, बुंदेली – इतिहास, संस्कृति और गौरव, बुन्देलखण्ड – मध्यप्रदेश की अमूल्य विरासत।

    आयोजन में सहयोग: संस्कृति विभाग, उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (दक्षिण मध्य क्षेत्र), मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन छतरपुर।

    पहली दिन की भव्य प्रस्तुतियाँ
    कथक नृत्य – सुश्री मैत्रेयी पहाड़ी, दिल्ली

    नृत्यनाटिका: प्रतिष्ठा: शाश्वत तत्वों का आह्वान

    पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) के प्रति श्रद्धांजलि।

    भरतनाट्यम नृत्य – सुश्री अनुराधा वेंकटरमन, चेन्नई

    मंगलाचरण में शिव के विभिन्न रूपों का दृश्य।

    राग हंसध्वनि एवं आदि ताल में संगीतबद्ध प्रस्तुति।

    ओडिसी नृत्य – सुश्री शुभदा वरडाकर, भुवनेश्वर

    प्रस्तुति: अभेदम्

    अद्वैत वेदान्त की गहन परंपरा के माध्यम से आत्मा और परमात्मा की एकता का संदेश।

    अगले दिन की झलक
    21 फरवरी, 2026, शाम 6:30 बजे

    श्री विश्वदीप (दिल्ली) – कथक

    श्री प्रभात मेहतो (झारखंड) – छाऊ

    सुश्री अक्मारल काइना रोवा (कजाकिस्तान) – भरतनाट्यम

    मुख्यमंत्री का संदेश
    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि खजुराहो नृत्य समारोह केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत की शास्त्रीय कला, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अंतर्राष्ट्रीय मंच है। उन्होंने कलाकारों का स्वागत करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश कला साधकों के लिए एक प्रेरणास्थल है, जहाँ वे बार-बार लौटना चाहेंगे।

  • MP में लंबे समय से रह रहे लोगों की लीज का नवीनीकरण संभव, नियमों में होगा संशोधन

    MP में लंबे समय से रह रहे लोगों की लीज का नवीनीकरण संभव, नियमों में होगा संशोधन


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि वर्षों से किसी भूमि पर रह रहे या व्यापार कर रहे लोगों के लिए भूमि लीज के नवीनीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नियमों में संशोधन किया जाएगा। भोपाल में विधानसभा में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि समय-समय पर व्यापारिक और आवासीय परियोजनाओं के लिए दी गई लीज में परिवार बढ़ने और भूमि विभाजन के कारण नवीनीकरण में समस्या आती है।

    मंत्री ने कहा कि लंबे समय से लोग किसी भूमि पर रह रहे हैं या कारोबार कर रहे हैं, ऐसे में भूमि हटाना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए नियम में संशोधन करके ऐसा रास्ता निकाला जाएगा कि संबंधित निकाय की आय बढ़े और लीज का नवीनीकरण भी संभव हो। यह घोषणा उन्होंने विधानसभा में कांग्रेस के डॉ. हिरालाल अलावा और भाजपा के अभिलाष पांडेय के प्रश्नों के जवाब में की।

    डॉ. हिरालाल अलावा ने मनावर नगर पालिका परिषद की भूमि के अवैध हस्तांतरण का मामला उठाया। जांच में तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष, सीएमओ और अन्य कर्मचारी दोषी पाए गए थे, लेकिन चार वर्ष में भी अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
    इस बदलाव से न केवल भूमि संबंधी विवादों का समाधान होगा, बल्कि लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया भी सरल और पारदर्शी बनेगी।

  • उज्जैन में युवक की पिटाई का VIDEO: महाकाल दर्शन को आया था, नाम सामने आते ही बजरंग दल ने घेरा

    उज्जैन में युवक की पिटाई का VIDEO: महाकाल दर्शन को आया था, नाम सामने आते ही बजरंग दल ने घेरा


    उज्जैन। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने धोती-कुर्ता माथे पर त्रिपुंड और गले में रुद्राक्ष की माला पहने एक युवक की पिटाई कर दी। युवक एक युवती के साथ मोहाली से उज्जैन आया था। घटना नानाखेड़ा क्षेत्र में सोमवार रात की बताई जा रही है जिसका वीडियो मंगलवार को सामने आया।

    वीडियो में युवक अपना नाम जफर खान बताते हुए खुद को भगवान शिव का भक्त बता रहा है। जानकारी के मुताबिक कार्यकर्ताओं को सूचना मिली थी कि अलग-अलग राज्यों से आए युवक-युवती एक होटल में ठहरे हैं। करीब एक घंटे इंतजार के बाद होटल के बाहर युवक को पकड़कर पूछताछ की गई।

    बताया जा रहा है कि युवक ने पहले हिंदू नाम बताया लेकिन बाद में अपना नाम जफर खान स्वीकार किया। उसने कहा कि वह शिव भक्त है और युवती उसे उज्जैन दर्शन कराने लाई थी। दोनों ने श्री महाकालेश्वर मंदिर हरसिद्धि मंदिर और काल भैरव मंदिर में दर्शन किए थे।

    नाम सामने आते ही मारपीट

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक को घेरकर पहले पूछताछ की गई और असली नाम सामने आने के बाद मारपीट शुरू कर दी गई। वीडियो में युवक के सिर से खून बहता भी दिखाई दे रहा है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को अपने साथ ले गई।

    होटल में ठहरने को लेकर विवाद

    बजरंग दल के जिला संयोजक ऋषभ कुशवाह ने दावा किया कि युवक-युवती को कई होटलों में कमरा नहीं मिला था। बाद में वे नानाखेड़ा के एक होटल में रुके। आरोप है कि युवक ने होटल में हिंदू नाम दर्ज कराया था। पूछताछ के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।

    पुलिस जांच में जुटी

    नानाखेड़ा थाना प्रभारी नरेंद्र यादव के मुताबिक युवक और युवती मोहाली के रहने वाले हैं। युवती की उम्र 32 वर्ष बताई गई है और दोनों अलग-अलग समुदाय से हैं। युवती को युवक के दूसरे धर्म से होने की जानकारी थी और दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे। पुलिस आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। शिकायत मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    मंदिरों में प्रवेश को लेकर नई मांग

    इस घटना के बाद कुछ संगठनों ने श्री महाकालेश्वर मंदिर सहित शहर के प्रमुख मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है।

  • मुरैना में मक्का से भरा ट्रक पलटा: गाय को बचाने की कोशिश में हादसा, चालक और क्लीनर घायल

    मुरैना में मक्का से भरा ट्रक पलटा: गाय को बचाने की कोशिश में हादसा, चालक और क्लीनर घायल


    मुरैना । मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में मंगलवार तड़के एक बड़ा सड़क हादसा होते होते टल गया, जब मक्का से भरा ट्रक अचानक सड़क पर आई गाय को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में ट्रक चालक और क्लीनर घायल हो गए, जिन्हें तत्काल जिला अस्पताल मुरैना में भर्ती कराया गया।

    जानकारी के अनुसार ट्रक ग्वालियर से आगरा की ओर जा रहा था। आगरा मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर छोदा टोल प्लाजा के पास अचानक एक गाय सड़क पर आ गई। चालक ने उसे बचाने के लिए अचानक ब्रेक और मोड़ लेने की कोशिश की, लेकिन तेज रफ्तार और भारी लोड होने के कारण ट्रक का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क किनारे पलट गया।

    हादसे के बाद मौके पर अफरा तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। सिविल लाइंस थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस के अनुसार दोनों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है।

    ट्रक पलटने से सड़क पर मक्का बिखर गया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने क्रेन की मदद से ट्रक को हटवाया और मार्ग को सुचारु कराया। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि हादसा सड़क पर अचानक पशु के आ जाने से हुआ। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

  • एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की हकीकत: शाजापुर में 7 माह में सूख गए 151 पौधे, लाखों खर्च फिर भी नतीजा शून्य

    एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की हकीकत: शाजापुर में 7 माह में सूख गए 151 पौधे, लाखों खर्च फिर भी नतीजा शून्य


    शाजापुर । विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा शुरू किए गए एक पेड़ मां के नाम अभियान का उद्देश्य लोगों को अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना था। यह पहल धरती माता की रक्षा और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी लेकिन मध्यप्रदेश के शाजापुर में इस अभियान की जमीनी तस्वीर निराशाजनक नजर आई।

    जुलाई 2025 में प्रदेशभर में इस अभियान की शुरुआत बड़े स्तर पर की गई। शाजापुर के भैरव डूंगरी में जिला प्रशासन जनप्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों की मौजूदगी में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित हुआ। लगभग एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन हकीकत में सिर्फ 151 पौधे ही लगाए जा सके। इनमें क्षेत्रीय सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी विधायक अरुण भीमावद भाजपा पदाधिकारी सामाजिक संस्थाएं और स्थानीय नागरिक शामिल हुए थे।

    कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की गईं। स्थानीय लोगों के मुताबिक आयोजन पर लाखों रुपये खर्च किए गए। मंच बैनर प्रचार और व्यवस्थाओं में कोई कमी नहीं छोड़ी गई लेकिन पौधारोपण के बाद रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया।

    सात महीने बाद जब मीडिया ने मौके का निरीक्षण किया तो वहां एक भी पौधा जीवित नहीं मिला। जिन पौधों को बड़े उत्साह के साथ रोपा गया था वे अब सूखी लकड़ियों में तब्दील हो चुके हैं। स्थल पर न तो हरियाली दिखी और न ही किसी प्रकार की सुरक्षा या सिंचाई व्यवस्था। आरोप है कि पौधारोपण के बाद न प्रशासनिक अधिकारियों ने दोबारा निरीक्षण किया और न ही जनप्रतिनिधियों ने देखरेख की जिम्मेदारी निभाई।

    नगर पालिका अधिकारी भूपेंद्र कुमार दीक्षित ने पानी की समस्या को पौधों के सूखने का कारण बताया। उन्होंने कहा कि अब उस स्थान को अमृत 2 ट्री योजना के तहत लिया गया है और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के माध्यम से पौधों की देखभाल कराई जाएगी।

    हालांकि सवाल यह उठता है कि जब 151 पौधों की भी देखभाल नहीं हो सकी तो यदि लक्ष्य के अनुरूप एक लाख पौधे लगाए जाते तो उनका क्या हाल होता? यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण जैसे गंभीर विषय पर दिखावे की राजनीति पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

  • पॉवर गॉसिप: शिवालय में गुप्त पूजा से इंदौर नगर में फेरबदल तक, अफसरशाही के हलकों में हलचल

    पॉवर गॉसिप: शिवालय में गुप्त पूजा से इंदौर नगर में फेरबदल तक, अफसरशाही के हलकों में हलचल


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश  की प्रशासनिक और नगरीय सत्ता के गलियारों में इन दिनों चर्चा का एक नया माहौल बन रहा है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जहां पूरे प्रदेश में भोलेनाथ की भक्ति और साधना का दौर जारी है, वहीं सत्ता गलियारों में भी ‘गुप्त पूजा’ और अफसरशाही की हलचल सुर्खियों में है। सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश के एक बड़े अफसर ने शिवालय में गुप्त अनुष्ठान आयोजित किया है, जो महाशिवरात्रि के दिन संपन्न होगा। यह साधना आठ घंटे तक चलेगी और अफसर को उम्मीद है कि पूजा सिद्ध होने के बाद उनका डेढ़ साल से अटका हुआ नर्मदा क्षेत्र का प्रोजेक्ट पूरी तरह से पूरा हो जाएगा। प्रशासनिक हलकों में इसे महाशिवरात्रि के दिन शक्ति और करिश्मा दोनों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    इसी बीच आर्थिक राजधानी इंदौर में नगर निगम के प्रमुख पदों पर फेरबदल की चर्चा जोरों पर है। कुछ समय पहले गंदे पानी के मुद्दे के चलते नगर निगम के कई पदों में बदलाव हुए थे, लेकिन अब नए संकेत मिलने लगे हैं कि बजट सत्र समाप्त होते ही शीर्ष पदों पर नए चेहरों की ताजपोशी की जाएगी। अफसरशाही के इन फेरबदल के पीछे राजनीतिक और प्रशासनिक समीकरणों का गहरा प्रभाव माना जा रहा है। नगर निगम क्षेत्र में जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी और कर्मचारी इस बदलाव की संभावित दिशा पर निगाह लगाए हुए हैं।

    प्रदेश के प्रमुख नगर निगम क्षेत्र में तैनात कार्यपालिक मजिस्ट्रेट भी इन दिनों चर्चाओं में हैं। अफसरशाही में प्रोटोकॉल का पालन हर अधिकारी करता है, लेकिन इस मामले में साहब का अंदाज अलग बताया जा रहा है। अपने पद के प्रभाव को दिखाने के लिए उन्होंने निजी वाहन पर भी बड़े अक्षरों में ‘कार्यपालिक मजिस्ट्रेट’ लिखवाया है। इसके अलावा बच्चों के स्कूल, मेमसाहब की किटी पार्टी या अन्य सामाजिक आयोजनों में भी उनके पद और प्रभाव की झलक दिखाई देती है। प्रशासनिक हलकों में इसे अपने अधिकार और प्रतिष्ठा का प्रदर्शन माना जा रहा है।

    वहीं, पदोन्नति के लिए प्रयासरत कलेक्टर भी चर्चा में हैं। आम तौर पर पदोन्नति की चाह रखने वाले अधिकारी नए-नए नवाचार और काम के जरिए अपनी छवि मजबूत करते हैं, लेकिन महाराज के प्रभाव वाले जिले में पदस्थ कलेक्टर अपने काम को सीमित रखते हैं। वे उतना ही काम करते हैं जितना उन्हें स्पष्ट रूप से कहा जाए। माना जा रहा है कि कलेक्टर इस रणनीति के जरिए पदोन्नति के बाद कमिश्नर बनने की राह आसान करना चाहते हैं। प्रशासनिक और राजनीतिक समीकरणों के बीच यह रणनीति अफसरशाही की परंपराओं और महत्वाकांक्षा का एक दिलचस्प उदाहरण है।

    कुल मिलाकर महाशिवरात्रि की आध्यात्मिकता और अफसरशाही की रणनीति एक साथ चल रही है। गुप्त पूजा से लेकर नगर निगम में संभावित फेरबदल और पदोन्नति की चाल तक, प्रशासनिक गलियारों में हलचल और उत्सुकता लगातार बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना रोचक होगा कि कौन-सी साधना और कौन-सा रणनीतिक कदम प्रशासनिक समीकरण बदलता है।

  • महाशिवरात्रि पर सीएम डॉ. मोहन यादव का संदेश: भोलेनाथ की कृपा से प्रदेश में सुख-शांति और समृद्धि की कामना

    महाशिवरात्रि पर सीएम डॉ. मोहन यादव का संदेश: भोलेनाथ की कृपा से प्रदेश में सुख-शांति और समृद्धि की कामना


    भोपाल। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। भक्ति और आस्था के इस महापर्व पर मुख्यमंत्री ने भगवान भोलेनाथ से समस्त प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, त्याग और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देने वाला उत्सव है, जो समाज को आध्यात्मिक रूप से जोड़ता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में लिखा कि भगवान भोलेनाथ की भक्ति के महापर्व महाशिवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। देवाधिदेव महादेवजी से प्रार्थना है कि हम सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। उन्होंने कहा कि शिव की आराधना जीवन में संयम, धैर्य और समर्पण की भावना को मजबूत करती है। यह पर्व हमें बुराइयों से दूर रहकर सदाचार और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

    महाशिवरात्रि के अवसर पर राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में भक्ति का वातावरण छाया हुआ है। शिवालयों में तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। भक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। कई स्थानों पर रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया है। उपवास रखकर श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव से भोलेनाथ की आराधना में लीन हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस अवसर पर भोपाल के प्रसिद्ध बड़वाले महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। मंदिर परिसर में विशेष सजावट की गई है और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सुरक्षा और व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि भक्तगण सुगमता से दर्शन कर सकें। मुख्यमंत्री की उपस्थिति को लेकर मंदिर परिसर में अतिरिक्त उत्साह और ऊर्जा का माहौल है।

    प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी महाशिवरात्रि को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। उज्जैन, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर सहित अनेक शहरों के प्रमुख शिव मंदिरों में आकर्षक सजावट और भव्य अनुष्ठानों का आयोजन हो रहा है। धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सामाजिक समरसता और एकता का संदेश भी दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि भगवान शिव का जीवन हमें विपरीत परिस्थितियों में भी संतुलित और करुणामय बने रहने की प्रेरणा देता है। उनका त्याग, तप और लोककल्याण की भावना समाज के लिए आदर्श है। महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व हम सभी के जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता लेकर आए, यही कामना है। महाशिवरात्रि के इस शुभ अवसर पर पूरा मध्य प्रदेश शिवमय हो गया है और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण गूंज रहा है।

  • एमपी में ब्यारमा नदी से 33 गांवों तक पानी पहुंचेगा, मुख्यमंत्री ने 600 करोड़ की धुनय धाम परियोजना की दी मंजूरी

    एमपी में ब्यारमा नदी से 33 गांवों तक पानी पहुंचेगा, मुख्यमंत्री ने 600 करोड़ की धुनय धाम परियोजना की दी मंजूरी


    दमोह । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को दमोह जिले के नोहटा में ‘नोहलेश्वर महोत्सव 2026’ और किसान सम्मेलन में पहुंचे। उन्होंने जिले के विकास के लिए कई बड़े ऐलान किए और करोड़ों रुपए की परियोजनाओं की आधारशिला रखी।

    ब्यारमा नदी से 33 गांवों तक पहुंचेगा पानी

    सीएम ने घोषणा की कि दमोह के 33 गांवों के किसानों के लिए ब्यारमा नदी से पानी पहुंचाने हेतु 600 करोड़ रुपए की धुनय धाम सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना से हजारों किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा और क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

    मानस भवन अब ‘गीता भवन’ बनेगा


    मुख्यमंत्री ने दमोह के मानस भवन को गीता भवन के रूप में विकसित करने की भी घोषणा की। इसके कायाकल्प और निर्माण कार्यों के लिए 2 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है। सरकार की योजना है कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में ऐसे गीता भवन बनाए जाएं, जो सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र होंगे।
    नोहलेश्वर महोत्सव में सांस्कृतिक रंग
    नोहटा में मुख्यमंत्री का स्वागत जल संसाधन मंत्री धर्मेंद्र सिंह और पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने किया। सम्मेलन में हजारों किसान और ग्रामीण मौजूद थे। मुख्यमंत्री के संबोधन से पहले मशहूर गायिका शहनाज अख्तर ने भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया।

    पर्यटन और अन्य घोषणाएं

    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने दमोह के राजनगर, सीतानगर और सत्धरू डैम में पर्यटन विकास के लिए भी मंजूरी दी। उन्होंने लाडली बहनों को 1500 रुपए देने की योजना का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर तीखे आरोप लगाए। सीएम ने कहा कि कांग्रेस सरकार के पास पैसे नहीं होने का बहाना बनाती है और साधु-संतों पर गोलियां चलाने जैसे आरोपों को भी उन्होंने विपक्ष पर लगाए।

    बता दें कि‍ नोहटा से मुख्यमंत्री छतरपुर के लिए रवाना होंगे, जहां वे बागेश्वर धाम में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम और कन्या विवाह महोत्सव में भाग लेंगे। यह दौरा दमोह और आसपास के ग्रामीण इलाकों में विकास और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।

  • जनगणना 2027 से तय होगी विकास की नई दिशा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    जनगणना 2027 से तय होगी विकास की नई दिशा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


    भोपाल । भोपाल में आयोजित जनगणना 2027 के प्रथम चरण के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तय करने का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं, संसाधनों का वितरण और नीतिगत निर्णय जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होते हैं, इसलिए यह अभियान प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर राष्ट्र के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला कार्य है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला देश है और ऐसे में जनगणना का महत्व राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल जनगणना कराने के ऐतिहासिक निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक के उपयोग से आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। सम्मेलन में मुख्य सचिव अनुराग जैन, रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जनगणना के दौरान गांवों, मजरों टोलों और यहां तक कि बेचिराग गांवों का भी समुचित आंकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जैसी आधारभूत संरचनाओं की योजना जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनती है। इसलिए कलेक्टर और कमिश्नर समय सीमा में इस कार्य को पूर्ण करें और इसे उच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि जनगणना प्रशासन की दक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता की परीक्षा है। मैदानी अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की सफलता के केंद्र में हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, दलहन तिलहन उत्पादन वृद्धि और नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने के प्रयासों पर बल दिया। साथ ही खनिज, पंजीयन और आबकारी से जुड़े राजस्व लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना प्रशासनिक दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में हैं। इस बार तकनीक और जीआईएस प्रणाली के उपयोग से आंकड़े शीघ्र उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 1 लाख 27 हजार मजरे टोले हैं, जिनका सटीक विवरण भविष्य की योजना निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत रखने और आमजन में जनगणना के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

    जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना संवैधानिक दायित्व होने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार स्तंभ है। विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। इस बार पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी और नागरिकों को स्व गणना का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिससे वे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने की सराहना की।

    जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी। प्रथम चरण में 1 मई से 30 मई 2027 तक मकान सूचीकरण किया जाएगा, जिसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएं और परिसंपत्तियों का विवरण एकत्रित होगा। द्वितीय चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और प्रजननता से संबंधित जानकारी संकलित की जाएगी।

     भोपाल में आयोजित जनगणना 2027 के प्रथम चरण के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की रणनीति तय करने का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं, संसाधनों का वितरण और नीतिगत निर्णय जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होते हैं, इसलिए यह अभियान प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर राष्ट्र के भविष्य की दिशा निर्धारित करने वाला कार्य है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला देश है और ऐसे में जनगणना का महत्व राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा डिजिटल जनगणना कराने के ऐतिहासिक निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक के उपयोग से आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। सम्मेलन में मुख्य सचिव अनुराग जैन, रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि जनगणना के दौरान गांवों, मजरों टोलों और यहां तक कि बेचिराग गांवों का भी समुचित आंकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, अस्पताल, स्कूल जैसी आधारभूत संरचनाओं की योजना जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही बनती है। इसलिए कलेक्टर और कमिश्नर समय सीमा में इस कार्य को पूर्ण करें और इसे उच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रणनीति अपनाने पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि जनगणना प्रशासन की दक्षता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता की परीक्षा है। मैदानी अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की सफलता के केंद्र में हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, दलहन तिलहन उत्पादन वृद्धि और नरवाई जलाने की घटनाओं को शून्य करने के प्रयासों पर बल दिया। साथ ही खनिज, पंजीयन और आबकारी से जुड़े राजस्व लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि चुनाव और जनगणना प्रशासनिक दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में हैं। इस बार तकनीक और जीआईएस प्रणाली के उपयोग से आंकड़े शीघ्र उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 1 लाख 27 हजार मजरे टोले हैं, जिनका सटीक विवरण भविष्य की योजना निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत रखने और आमजन में जनगणना के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

    जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना संवैधानिक दायित्व होने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार स्तंभ है। विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। इस बार पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी और नागरिकों को स्व गणना का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा, जिससे वे मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जनगणना कार्य को उच्च प्राथमिकता देने की सराहना की।

    जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी। प्रथम चरण में 1 मई से 30 मई 2027 तक मकान सूचीकरण किया जाएगा, जिसमें मकानों की स्थिति, सुविधाएं और परिसंपत्तियों का विवरण एकत्रित होगा। द्वितीय चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, दिव्यांगता, मातृभाषा, साक्षरता, शैक्षणिक योग्यता, आर्थिक गतिविधि, प्रवास और प्रजननता से संबंधित जानकारी संकलित की जाएगी।

  • नागदा और शाहपुर में दर्दनाक सड़क हादसे, बुजुर्ग और युवक की मौत

    नागदा और शाहपुर में दर्दनाक सड़क हादसे, बुजुर्ग और युवक की मौत

    नागदा /मध्यप्रदेश के नागदा और बैतूल जिले से सड़क हादसों की दुखद खबरें सामने आई हैं, जिन्होंने एक बार फिर रफ्तार के खतरों को उजागर किया है। नागदा में हुई पहली घटना में देर रात एक बुजुर्ग बाइक सवार की जान चली गई। घटना नागदा के 17 नंबर हाईवे स्टेट पर हुई, जब तेज़ रफ्तार ट्रक ने बुजुर्ग की बाइक को टक्कर मार दी। बुजुर्ग घर लौट रहे थे और अचानक हुए इस हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और आरोपी ट्रक चालक की तलाश शुरू कर दी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और मंडी थाना क्षेत्र में मामला दर्ज किया गया।

    इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों और आम आदमी पार्टी के नेता चेतन परमार ने सड़क पर प्रदर्शन करते हुए हाईवे पर स्पीड ब्रेकर और डिवाइडर बनाने की मांग की। लोगों ने चक्का जाम किया, जिसे पुलिस ने समझा-बुझाकर लगभग डेढ़ घंटे बाद खोलवाया। लोग सड़क सुरक्षा के लिए प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

    दूसरी दर्दनाक घटना बैतूल जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुई। यहां गुरुवार की रात अधूरी पुलिया पर तूफान जीप और यात्री बस के बीच भीषण टक्कर हुई। चिचोली से पचमढ़ी जा रहे श्रद्धालुओं से भरी जीप को बस ने टक्कर मारी, और हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इसी बीच मरीज लेने आई तेज़ रफ्तार हाईवे पेट्रोलिंग एम्बुलेंस ने घटनास्थल पर खड़े श्रद्धालुओं को टक्कर मार दी। इस हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई।

    इस पूरे हादसे में दो एम्बुलेंस कर्मियों समेत कुल छह लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन और स्थानीय लोगों का कहना है कि रफ्तार और सड़क सुरक्षा पर गंभीर कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि ऐसे हादसों से आम जनता की जान बचाई जा सके।

    ये घटनाएं मध्यप्रदेश में सड़क सुरक्षा की अनदेखी को उजागर करती हैं। तेज़ रफ्तार वाहन, अधूरी पुलिया, और सुरक्षित इंतजामों की कमी ने न केवल परिवारों को अपूरणीय क्षति पहुंचाई बल्कि आम लोगों में भय और असुरक्षा की भावना भी पैदा कर दी है। हादसे के बाद लोगों की मांग है कि सड़कों पर स्पीड ब्रेकर और डिवाइडर की व्यवस्था की जाए, और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

    मध्यप्रदेश के नागदा और शाहपुर की ये घटनाएं सबको सचेत करती हैं कि सड़क पर रफ्तार को नियंत्रित करना अब जीवन बचाने का सबसे बड़ा उपाय है। सुरक्षा की अनदेखी महंगी पड़ रही है, और प्रशासन एवं जनता दोनों को मिलकर कदम उठाने होंगे।