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  • MP में 18 अक्टूबर तक आंधी-बारिश की संभावना, ग्वालियर-चंबल में रहेगा ज्यादा असर

    MP में 18 अक्टूबर तक आंधी-बारिश की संभावना, ग्वालियर-चंबल में रहेगा ज्यादा असर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद एक बार फिर बारिश का दौर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने गुरुवार से अगले चार दिन यानी 15 से 18 अक्टूबर तक प्रदेश के कई जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई है। ग्वालियर-चंबल संभाग में इसका ज्यादा असर देखने को मिल सकता है, जबकि उज्जैन, सागर और रीवा संभाग के कुछ जिलों में भी बारिश होने के आसार हैं। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

    मौसम केंद्र, भोपाल के अनुसार, उत्तरी हिस्से में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और नए चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से मौसम में बदलाव आएगा। गुरुवार को ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, नीमच और मंदसौर में बारिश की संभावना है। इसके बाद 16, 17 और 18 अक्टूबर को बारिश का दायरा बढ़ सकता है।

    अक्टूबर में फिर बारिश, रात में बढ़ रही ठंडक

    मध्य प्रदेश से मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है, लेकिन मौसमी सिस्टम सक्रिय होने के कारण बारिश का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। पिछले सप्ताह पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई थी। हालांकि, रविवार और सोमवार को प्रदेश में कहीं भी आंधी-बारिश रिकॉर्ड नहीं की गई।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड का मिला-जुला असर रहता है। इस साल भी मौसम का यही मिजाज दिखाई दे रहा है। महीने की शुरुआत में आसमान साफ होने के साथ धूप खिली, जबकि रात के समय ठंडक महसूस की जा रही है। इसी बीच, मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से कई जिलों में बारिश हो रही है।

    इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

    मानसून सीजन में सामान्य से 4% कम बारिश

    जून से सितंबर तक चले दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच से करीब 1.5 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम बारिश हुई।

    पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश के आंकड़ों में अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में औसतन 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य के मुकाबले करीब 12 प्रतिशत कम पानी बरसा।

    पूर्वी हिस्से के इन जिलों में भी कम हुई बारिश

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल मिलाकर बारिश का आंकड़ा औसत से 4 प्रतिशत अधिक रहा। इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य के मुकाबले 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 जिले पीछे

    प्रदेश के 25 जिलों में बारिश सामान्य या उससे अधिक दर्ज की गई। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    इसके विपरीत, 30 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रहा। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

    मानसून के दौरान जून में हुई कम बारिश की भरपाई बाद के महीनों में पूरी तरह नहीं हो सकी। अब अक्टूबर में सक्रिय हुए नए सिस्टम से प्रदेश के कुछ हिस्सों में फिर बारिश होने की संभावना है।

  • MP में फिर बदलेगा मौसम, 20 जिलों में तीन दिन आंधी-बारिश की संभावना, भोपाल-इंदौर में अलर्ट नहीं

    MP में फिर बदलेगा मौसम, 20 जिलों में तीन दिन आंधी-बारिश की संभावना, भोपाल-इंदौर में अलर्ट नहीं


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद अब एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। पश्चिमी विक्षोभ और नए चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से 15 से 17 अक्टूबर के बीच प्रदेश के 20 जिलों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश होने की संभावना है। हालांकि, भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में फिलहाल बारिश को लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    मौसम केंद्र, भोपाल के अनुसार, अगले तीन दिनों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का असर देखने को मिलेगा। 15 और 16 अक्टूबर को ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग में बारिश की संभावना है। इसके बाद 17 अक्टूबर को मौसम का प्रभाव रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग तक पहुंच सकता है।

    इन 20 जिलों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 17 अक्टूबर को प्रदेश के 20 जिलों में आंधी और बारिश का असर रह सकता है। इनमें ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट शामिल हैं।

    इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। वहीं, प्रदेश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में फिलहाल इस सिस्टम का खास असर होने की संभावना नहीं है।

    मानसून विदा, फिर भी क्यों हो रही बारिश?

    मध्य प्रदेश से मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी मौसम में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के रुझानों से पता चलता है कि अक्टूबर में गर्मी, बारिश और हल्की ठंड का मिला-जुला असर रहता है।

    इस साल भी मौसम का यही मिजाज दिखाई दे रहा है। दिन में धूप और गर्मी महसूस हो रही है, जबकि रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ रही है। इसी बीच, मौसमी सिस्टम सक्रिय होने पर कुछ इलाकों में बारिश की स्थिति बन रही है। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

    सामान्य से 4% कम हुई सीजन की बारिश

    जून से सितंबर तक चले मानसूनी सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच से करीब 4 प्रतिशत कम है। इस तरह प्रदेश में सामान्य के मुकाबले लगभग 1.5 इंच कम पानी बरसा।

    बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच अंतर भी रहा। पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसत से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके उलट पश्चिमी मध्य प्रदेश के इंदौर, उज्जैन और भोपाल समेत अन्य क्षेत्रों में सामान्य से करीब 12 प्रतिशत कम बारिश हुई।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी

    प्रदेश के 25 जिलों में बारिश सामान्य या उससे अधिक रही। इनमें भोपाल, ग्वालियर, गुना, छतरपुर और रीवा समेत कई जिले शामिल हैं। वहीं, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रायसेन, देवास और धार समेत 30 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।

    मानसून के शुरुआती दौर में कम बारिश का असर पूरे सीजन के आंकड़ों पर दिखाई दिया। जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। बाद के महीनों में हुई बारिश के बावजूद शुरुआती कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी।

  • MP में 15-16 अक्टूबर को करवट बदलेगा मौसम, 9 जिलों में बारिश की संभावना, भोपाल-इंदौर में रातें रहेंगी ठंडी

    MP में 15-16 अक्टूबर को करवट बदलेगा मौसम, 9 जिलों में बारिश की संभावना, भोपाल-इंदौर में रातें रहेंगी ठंडी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में 15 और 16 अक्टूबर को एक बार फिर मौसम बदलने की संभावना है। ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग के नौ जिलों में आंधी, गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इससे पहले 13 और 14 अक्टूबर को मौसम साफ रहने का अनुमान है। भोपाल-इंदौर सहित कई शहरों में रात के समय ठंडक रहेगी, जबकि दिन में धूप के कारण गर्मी महसूस होगी।

    मौसम केंद्र (IMD) के अनुसार, आगामी दिनों में प्रदेश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय हो रहे नए मौसम तंत्र का असर दिखाई दे सकता है। ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में बारिश की संभावना जताई गई है। उज्जैन और जबलपुर समेत अन्य शहरों में भी रात में ठंडक और दिन में गर्मी का मिला-जुला मौसम बना रह सकता है।

    पश्चिमी विक्षोभ और नए सिस्टम से बदलेगा मौसम

    मौसम विभाग के मुताबिक, सोमवार को पहले सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण का असर समाप्त हो गया। अब उत्तर भारत में एक पश्चिमी विक्षोभ और नए चक्रवाती सिस्टम के सक्रिय होने से मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम बदल सकता है। इसी के चलते 15 और 16 अक्टूबर को बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनने का अनुमान है।

    मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का दौर

    मध्य प्रदेश से मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है, लेकिन अलग-अलग मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से बारिश का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है। पिछले एक सप्ताह के दौरान पूर्वी हिस्से के कई जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई। हालांकि, रविवार और सोमवार को प्रदेश में कहीं भी आंधी-बारिश रिकॉर्ड नहीं हुई।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की मौसमी स्थितियां देखने को मिली हैं। इस साल भी इसी तरह का रुख बना हुआ है। अक्टूबर की शुरुआत में मौसम साफ होने के साथ धूप तेज रही, जबकि रात के तापमान में गिरावट से ठंडक महसूस हो रही है। इस बार प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

    सामान्य से 1.5 इंच कम बरसा पानी

    जून से सितंबर तक चले दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच का 95.9 प्रतिशत है। इस तरह प्रदेश में औसत के मुकाबले लगभग 1.5 इंच कम पानी गिरा।

    प्रदेश में कुल मिलाकर बारिश सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम रही। क्षेत्रवार आंकड़ों में पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम पानी बरसा।

    पूर्वी क्षेत्र के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक रहा। इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम वर्षा हुई।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के 25 जिलों में सामान्य बारिश का लक्ष्य पूरा हो गया। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    इसके विपरीत 30 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रहा। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

    इस तरह अक्टूबर में प्रदेश का मौसम धूप, रात की ठंडक और बीच-बीच में बारिश के बीच बदलता रहने का अनुमान है। अगले दिनों में मौसम प्रणालियों की सक्रियता के आधार पर बारिश की स्थिति में बदलाव हो सकता है।

  • मध्यप्रदेश के सभी सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए Zoho मेल अनिवार्य, 45 दिन लॉगिन नहीं करने पर बंद होगा ईमेल अकाउंट

    मध्यप्रदेश के सभी सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए Zoho मेल अनिवार्य, 45 दिन लॉगिन नहीं करने पर बंद होगा ईमेल अकाउंट

    मध्यप्रदेश: सरकार ने सरकारी डिजिटल संचार व्यवस्था में बदलाव करते हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए स्वदेशी ईमेल प्लेटफॉर्म जोहो का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी ईमेल व्यवस्था की सुरक्षा मजबूत करना, साइबर हमलों और अनधिकृत पहुंच के जोखिम को कम करना तथा विदेशी क्लाउड सेवाओं पर निर्भरता घटाना है। नई व्यवस्था के तहत सरकारी कर्मचारियों को आधिकारिक ईमेल संचार के लिए निर्धारित प्लेटफॉर्म का उपयोग करना होगा। यह कदम सरकारी डिजिटल संचार प्रणाली को अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाया गया है। इसके माध्यम से सरकारी डेटा की सुरक्षा और ईमेल सेवाओं के संचालन पर नियंत्रण मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

    इस व्यवस्था को लागू करने के संबंध में राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम और नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के बीच भोपाल में उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इसके बाद सरकारी ईमेल सेवाओं के उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए। नई व्यवस्था केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और एनआईसी से जुड़े राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के तहत सरकारी डिजिटल संचार को सुरक्षित बनाने के प्रयासों से संबंधित है। इसके अंतर्गत राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों को आधिकारिक ईमेल के लिए निर्धारित जोहो प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना होगा। सरकार की इस पहल में साइबर सुरक्षा के साथ-साथ डिजिटल सेवाओं को स्वदेशी तकनीकी ढांचे के माध्यम से संचालित करने पर भी ध्यान दिया गया है।

    नए नियमों के अनुसार, प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को अपनी आधिकारिक ईमेल आईडी का इस्तेमाल महीने में कम से कम एक बार करना होगा। यदि कोई यूजर लगातार 45 दिनों तक अपने ईमेल इनबॉक्स में लॉगिन नहीं करता है, तो सुरक्षा कारणों से उसका ईमेल खाता स्वतः निष्क्रिय हो जाएगा। इस प्रावधान का उद्देश्य लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं होने वाले ईमेल खातों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को कम करना है। सरकारी ईमेल खातों का नियमित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों को निर्धारित अंतराल पर लॉगिन करना होगा। ऐसे में अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी ईमेल आईडी सक्रिय रखने के लिए इस नियम का पालन करना आवश्यक होगा।

    सरकार प्रत्येक मेलबॉक्स आधारित ईमेल आईडी के रखरखाव के लिए प्रति यूजर सालाना 2,000 रुपये का सेवा शुल्क देगी। इस बदलाव के बावजूद सरकारी ईमेल पतों के आधिकारिक डोमेन में कोई परिवर्तन नहीं होगा। यानी कर्मचारियों की ईमेल आईडी के अंत में इस्तेमाल होने वाला सरकारी डोमेन पहले की तरह ही बना रहेगा। बदलाव मुख्य रूप से ईमेल सेवा के बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्वर संचालन में किया जाएगा। पहले जिन ईमेल सेवाओं का संचालन गूगल या माइक्रोसॉफ्ट के क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से होता था, उनकी जगह अब जोहो के क्लाउड प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। इससे मौजूदा ईमेल पहचान को बनाए रखते हुए तकनीकी व्यवस्था में बदलाव किया जा सकेगा।

    जोहो भारत की एक निजी आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनी है, जो विभिन्न डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस व्यवस्था में सरकारी डेटा को देश के भीतर सुरक्षित रखने और डिजिटल संचार की सुरक्षा बढ़ाने पर जोर दिया गया है। नई प्रणाली में एनआईसी की रणनीतिक भूमिका के साथ साइबर सुरक्षा मानकों, सुरक्षा ऑडिट और जीरो-ट्रस्ट आर्किटेक्चर जैसे प्रावधानों के पालन की बात कही गई है। हालांकि, पुराने ईमेल खातों और डेटा को नई व्यवस्था में स्थानांतरित करने तथा सभी विभागों में इसे पूरी तरह लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया के बारे में उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। नए नियमों के तहत ईमेल प्लेटफॉर्म का नियमित उपयोग, खातों की सक्रियता और सरकारी संचार की सुरक्षा प्रमुख बिंदु होंगे।

  • MP में 20 अक्टूबर से बढ़ेगी रात की ठंड, इंदौर में पारा 15.8 डिग्री पर पहुंचा, दिन में गर्मी बरकरार

    MP में 20 अक्टूबर से बढ़ेगी रात की ठंड, इंदौर में पारा 15.8 डिग्री पर पहुंचा, दिन में गर्मी बरकरार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। कहीं दिन में तेज धूप और गर्मी परेशान कर रही है, तो कहीं रात का तापमान गिरने से ठंडक महसूस होने लगी है। रविवार को ग्वालियर-चंबल और रीवा संभाग के कई इलाकों में मौसम बदला रहा। कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हुई, जबकि कई जगह बादल छाए रहे।

    मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, सोमवार से सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण का प्रभाव खत्म होने की संभावना है। इसके बाद रात के तापमान में गिरावट का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विभाग ने 20 अक्टूबर से रात में ठंड बढ़ने का अनुमान जताया है। हालांकि, अक्टूबर के दौरान दिन में गर्मी का असर बना रह सकता है।

    इंदौर सबसे ठंडा, भोपाल में 17.8 डिग्री रहा पारा

    रविवार-सोमवार की रात प्रदेश के कई शहरों में न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। इंदौर में रात का पारा 15.8 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके अलावा शाजापुर में 16.4 डिग्री, छिंदवाड़ा में 16.9 डिग्री, पचमढ़ी में 17.5 डिग्री और भोपाल में 17.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया।

    दूसरी ओर, दिन के तापमान में अभी खास गिरावट नहीं आई है। ग्वालियर और नर्मदापुरम में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। ऐसे में प्रदेश में फिलहाल दिन और रात के मौसम में अंतर देखने को मिल रहा है।

    रविवार को ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज और सतना में मौसम में बदलाव देखा गया। कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई, जबकि अन्य स्थानों पर बादलों की आवाजाही रही।

    पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती सिस्टम पर नजर

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके साथ ही चक्रवाती परिसंचरण भी सक्रिय है। आने वाले दिनों में यदि इन मौसम प्रणालियों का असर मध्य प्रदेश तक पहुंचता है, तो कुछ क्षेत्रों में बारिश हो सकती है।

    हालांकि, फिलहाल अगले चार दिनों तक प्रदेश में बारिश की संभावना नहीं जताई गई है। मौसम प्रणालियों की गतिविधियों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

    3 अक्टूबर को मानसून की विदाई, फिर भी हुई बारिश

    मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो गया था। इसके बावजूद सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण प्रदेश के कुछ हिस्सों में दोबारा बारिश का दौर देखने को मिला।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की स्थितियां देखने को मिली हैं। इस बार भी मौसम का यही मिला-जुला रूप सामने आ रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में आसमान साफ होने और तेज धूप निकलने के साथ दिन गर्म रहे, जबकि रात में अपेक्षाकृत ठंडक महसूस हुई। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

    सामान्य से 1.5 इंच कम हुई बारिश

    जून से सितंबर के मानसूनी सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच से करीब 1.5 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम बारिश हुई।

    क्षेत्रवार आंकड़ों में अंतर रहा। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम पानी गिरा। पूर्वी क्षेत्र के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक रहा।

    इन जिलों में सामान्य से कम बारिश

    प्रदेश के कई जिलों में मानसूनी बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। पूर्वी हिस्से में बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के 25 जिलों में बारिश सामान्य के आंकड़े तक पहुंच गई। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    इसके विपरीत, 30 जिलों में बारिश सामान्य से कम रही। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

    फिलहाल प्रदेश में मौसम का दोहरा मिजाज बना हुआ है। दिन में गर्मी से राहत मिलने के आसार कम हैं, जबकि आने वाले दिनों में रातें ठंडी होने की संभावना है।

  • MP में ग्वालियर-चंबल में 2 दिन बारिश की संभावना, 15 अक्टूबर से करवट बदलेगा मौसम

    MP में ग्वालियर-चंबल में 2 दिन बारिश की संभावना, 15 अक्टूबर से करवट बदलेगा मौसम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसमी सिस्टम सक्रिय रहने से बारिश का दौर पूरी तरह थमा नहीं है। प्रदेश के उत्तरी हिस्से में दो चक्रवाती परिसंचरण के असर से रविवार और सोमवार को ग्वालियर-चंबल संभाग के पांच जिलों में बारिश और तेज आंधी की संभावना है। वहीं, बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र बनने से 15 अक्टूबर के बाद प्रदेश में फिर बारिश का दौर शुरू हो सकता है। दूसरी ओर, रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ रही है। इंदौर में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश के प्रमुख शहरों में सबसे कम रहा।

    ग्वालियर-चंबल के पांच जिलों में बारिश के आसार

    मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, मध्य प्रदेश के ऊपरी हिस्से में दो चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से रविवार और सोमवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया और श्योपुर में बारिश होने का अनुमान है। इन इलाकों में तेज आंधी के साथ पानी गिरने की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में भी एक कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से 15 अक्टूबर के बाद मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में दोबारा बारिश हो सकती है। इससे पहले 13 और 14 अक्टूबर को मौसम साफ रहने का अनुमान है।

    इससे पहले शनिवार को सिंगरौली, रीवा, मऊगंज और सीधी जिलों में हल्की बारिश हुई। इन क्षेत्रों में बादल छाए रहे और कुछ स्थानों पर आंधी का असर भी देखने को मिला।

    इंदौर में सबसे ठंडी रात, भोपाल-पचमढ़ी में पारा 16.8 डिग्री

    बारिश और मौसमी बदलाव के बीच प्रदेश में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीती रात इंदौर में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस रहा। अमरकंटक में 16.6 डिग्री, भोपाल और पचमढ़ी में 16.8 डिग्री, शाजापुर में 17 डिग्री तथा कटनी के करौंदी में 17.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    रात में ठंडक बढ़ने के बावजूद दिन के समय तेज धूप और गर्मी का असर बना हुआ है। बड़वानी, ग्वालियर, राजगढ़, खजुराहो, धार और उज्जैन में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक दर्ज किया गया।

    मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में इसी तरह का मिला-जुला मौसम बना रह सकता है। दिन में धूप निकलेगी, जबकि रात के तापमान में गिरावट के कारण ठंडक महसूस होगी।

    3 अक्टूबर को लौट चुका है मानसून, फिर क्यों हो रही बारिश?

    मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है। इसके बावजूद चक्रवाती परिसंचरण और अन्य मौसमी सिस्टम सक्रिय होने के कारण कुछ जिलों में बारिश हो रही है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान गर्मी, बारिश और ठंड तीनों तरह के मौसम का रुझान देखा गया है। इस बार भी अक्टूबर की शुरुआत में दिन के समय धूप और गर्मी रही, जबकि रात में ठंडक बढ़ी है। साथ ही, कुछ जिलों में बारिश भी दर्ज की जा रही है।

    इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा। हालांकि, पूरे सीजन में हुई बारिश सामान्य औसत से कम रही।

    मानसून सीजन में सामान्य से 4% कम बारिश

    जून से सितंबर तक चले मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच बारिश हुई। यह सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच से करीब 1.5 इंच कम है। प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम दर्ज की गई।

    पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत के मुकाबले 12 प्रतिशत तक कम पानी गिरा।

    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक रहा। इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।

    वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी

    प्रदेश के 55 जिलों में से 25 में बारिश का सामान्य कोटा पूरा हो चुका है, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हुआ: भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर।

    कम बारिश वाले 30 जिले: नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर।

    कुल मिलाकर, मानसून की विदाई के बाद भी प्रदेश में स्थानीय मौसमी सिस्टम के कारण कहीं हल्की बारिश तो कहीं तेज धूप का दौर जारी है। फिलहाल उत्तरी मध्य प्रदेश में बारिश की संभावना है, जबकि 15 अक्टूबर के बाद बंगाल की खाड़ी से आने वाला नया सिस्टम मौसम में फिर बदलाव ला सकता है।

  • MP में आज रीवा संभाग के 4 जिलों में बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में निकलेगी धूप

    MP में आज रीवा संभाग के 4 जिलों में बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में निकलेगी धूप


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन के असर से मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। शनिवार को रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने का अनुमान है। वहीं, भोपाल और इंदौर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में धूप खिली रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिन तक प्रदेश में मौसम साफ रहने की संभावना है। इस बीच रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ने लगी है। पचमढ़ी में प्रदेश की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई।

    अमरकंटक में 37.5 मिमी बारिश, रात में बढ़ी ठंडक

    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में मौसमी सिस्टम का असर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में अमरकंटक में करीब डेढ़ इंच यानी 37.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद प्रदेश के कई इलाकों में रात के तापमान में गिरावट आई है।

    पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। अमरकंटक और इंदौर में न्यूनतम तापमान 17.9 डिग्री, छिंदवाड़ा में 18.1 डिग्री, कटनी के करौंदी में 18.8 डिग्री और शाजापुर में 19 डिग्री सेल्सियस रहा।

    रात में ठंडक बढ़ने के बावजूद दिन में गर्मी का असर बना हुआ है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और नर्मदापुरम संभाग में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। बड़वानी के तालुन में पारा 37 डिग्री तक पहुंच गया, जो प्रदेश में सबसे अधिक रहा।

    3 अक्टूबर को विदा हुआ मानसून, फिर भी क्यों हो रही बारिश?

    मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को पूरी तरह विदा हो गया था। इस बार प्रदेश में मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा। इसके बावजूद अक्टूबर में बारिश का दौर देखने को मिल रहा है। इसकी वजह चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन जैसे मौसमी सिस्टम का सक्रिय होना है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड तीनों तरह का मौसम देखने को मिलता है। इस बार भी मानसूनी सिस्टम की सक्रियता के चलते कुछ इलाकों में बारिश हुई है। हालांकि, शनिवार को पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश के आसार हैं, जबकि अगले तीन दिन प्रदेश में मौसम साफ रहने का अनुमान है।

    जून की कम बारिश से सीजन का आंकड़ा 4% नीचे

    इस साल जून से सितंबर तक चले मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में औसतन 35.8 इंच यानी 908.4 मिलीमीटर बारिश हुई। यह सामान्य औसत 37.3 इंच से करीब 4 प्रतिशत कम है।

    बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत तक कम पानी गिरा।

    कम बारिश की प्रमुख वजह जून में बारिश का कोटा पूरा नहीं होना रहा। इस महीने सामान्य के मुकाबले 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश से इसकी भरपाई की कोशिश हुई, लेकिन शुरुआती कमी के कारण पूरे सीजन का आंकड़ा सामान्य से नीचे ही रहा।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी

    प्रदेश के 55 जिलों में से 25 में मानसून सीजन की सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।

    इन 25 जिलों में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज हुई: भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर।

    कम बारिश वाले प्रमुख जिले: इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, देवास, रायसेन, सीहोर, विदिशा, नीमच, मंदसौर और धार।

    इस तरह मानसून की विदाई के बाद भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में स्थानीय मौसमी सिस्टम के कारण बारिश हो रही है। वहीं, रात के तापमान में गिरावट और दिन में तेज धूप के चलते मौसम में गर्मी और ठंडक का मिला-जुला असर बना हुआ है।

  • MP के 9 जिलों में आज बारिश की संभावना, 12 अक्टूबर से साफ होगा मौसम

    MP के 9 जिलों में आज बारिश की संभावना, 12 अक्टूबर से साफ होगा मौसम


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में अगले तीन दिन मौसम का उतार-चढ़ाव जारी रहने का अनुमान है। शुक्रवार को रीवा-शहडोल संभाग के 9 जिलों में बारिश का अलर्ट है, जबकि भोपाल-इंदौर समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश में धूप खिली रहेगी। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, 12 अक्टूबर से प्रदेश में बारिश का दौर थमने और आसमान साफ होने की संभावना है।

    साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ के असर से पूर्वी मध्य प्रदेश में पिछले चार दिनों से आंधी-बारिश हो रही है। इस बार मानसून सीजन में प्रदेश में सामान्य से 4% कम बारिश दर्ज की गई। जून से सितंबर के बीच 908.4 मिमी पानी गिरा, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिमी है।

    अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम?

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, मौजूदा मौसम प्रणाली के सक्रिय रहने से पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की संभावना बनी हुई है। शुक्रवार को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल और अनूपपुर में अगले 24 घंटे के दौरान बारिश हो सकती है।

    10 और 11 अक्टूबर को भी पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश होने का अनुमान है। वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने और धूप निकलने की संभावना है। 12 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम साफ हो सकता है। इस दिन कहीं भी बारिश होने का अनुमान नहीं है।

    बदलते मौसम का खेती पर असर

    मौसम में हो रहे बदलाव का असर खेती-किसानी पर भी पड़ सकता है। पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थानीय स्तर पर होने वाली बारिश से मिट्टी की ऊपरी परत में नमी बढ़ सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे प्रदेश में खेतों को समान रूप से नमी मिलेगी।

    दूसरी ओर, पश्चिमी मध्य प्रदेश में शुष्क मौसम रहने की संभावना को देखते हुए किसानों को बोवनी और सिंचाई से जुड़े फैसले स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर लेने होंगे। खेत में मौजूद नमी, मिट्टी की स्थिति और सिंचाई के साधनों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

    3 अक्टूबर को लौट चुका है मानसून

    मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है। इसके बावजूद साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ जैसी मौसम प्रणालियों के प्रभाव से बारिश हो रही है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की मौसमी स्थितियां देखने को मिली हैं। इस बार भी महीने की शुरुआत में कहीं तेज धूप रही, तो कहीं रात के तापमान में ठंडक महसूस हुई। कई जिलों में बारिश भी दर्ज की गई। प्रदेश में इस बार मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा।

    पूर्वी MP में 4% ज्यादा, पश्चिमी हिस्से में 12% कम बारिश

    इस मानसून सीजन में प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4% अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से 12% कम पानी गिरा। पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग शामिल हैं।

    हालांकि, पूर्वी क्षेत्र के कुछ जिलों में भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश दर्ज की गई।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9% से 51% तक कम बारिश हुई।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के 55 जिलों में से 25 जिलों में मानसून सीजन के दौरान बारिश का कोटा पूरा हो गया। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    30 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    प्रदेश के बाकी 30 जिलों में मानसून सीजन के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

    कुल मिलाकर, प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी पूर्वी जिलों में बारिश का सिलसिला जारी है, जबकि पश्चिमी हिस्से में मौसम शुष्क रहने के आसार हैं। 12 अक्टूबर से मौसम साफ होने पर दिन में धूप और रात में अपेक्षाकृत ठंडक का असर देखने को मिल सकता है।

  • मध्‍य प्रदेश के 12 जिलों में आज आंधी-बारिश का अलर्ट, चक्रवात और ट्रफ से बदला मौसम

    मध्‍य प्रदेश के 12 जिलों में आज आंधी-बारिश का अलर्ट, चक्रवात और ट्रफ से बदला मौसम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल गया है। चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ के सक्रिय होने से पूर्वी हिस्से में आंधी-बारिश का दौर जारी है। गुरुवार को जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के 12 जिलों में बारिश का अलर्ट है, जबकि 9 अक्टूबर के बाद सिस्टम कमजोर पड़ने लगेगा और 10 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम साफ होने की संभावना है।

    मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार गुरुवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में आंधी के साथ बारिश हो सकती है। पिछले 24 घंटे के दौरान भी प्रदेश के 10 से अधिक जिलों में बारिश दर्ज की गई है।

    9 अक्टूबर को भी इन जिलों में बारिश

    मौसम विभाग के मुताबिक शुक्रवार, 9 अक्टूबर को भी पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहेगा। पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल और अनूपपुर में बारिश की संभावना है। इसके बाद सक्रिय सिस्टम कमजोर पड़ने लगेगा।

    10 अक्टूबर से दोनों हिस्सों में मौसम रहेगा शुष्क

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक मौसम केंद्र के सात दिवसीय पूर्वानुमान में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 10 अक्टूबर से दिखाई देगा। इस तारीख से पूर्वी मध्य प्रदेश में भी ड्राय कंडीशन शुरू होने की संभावना है। यानी 10 से 12 अक्टूबर के दौरान पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से साफ रहने का अनुमान है।

    बारिश का असर खेती पर, लेकिन पूरे प्रदेश में समान नहीं होगी नमी

    मौसम के इस बदलाव का सबसे सीधा असर कृषि गतिविधियों पर पड़ सकता है। 9 अक्टूबर को पूर्वी हिस्से में होने वाली स्थानीय बारिश से मिट्टी की ऊपरी परत में नमी बढ़ सकती है, लेकिन इसे पूरे प्रदेश में एक समान नमी उपलब्ध कराने वाली बारिश नहीं माना जा सकता।

    खासकर पश्चिमी मध्य प्रदेश में लगातार शुष्क मौसम का पूर्वानुमान है। ऐसे में रबी की तैयारियों के दौरान किसानों के लिए अपने खेत की वास्तविक स्थिति, मिट्टी में मौजूद नमी, उपलब्ध सिंचाई सुविधा और पिछले दिनों हुई स्थानीय बारिश को ध्यान में रखना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। केवल प्रदेश में बारिश होने की सामान्य जानकारी के आधार पर बोवनी या सिंचाई का फैसला करना उचित नहीं होगा।

    3 अक्टूबर को विदा हो चुका है मानसून

    मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को ही लौट चुका है। हालांकि, चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ के सक्रिय होने के कारण इसके बाद भी कुछ इलाकों में बारिश का दौर बना हुआ है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों को देखें तो अक्टूबर में मौसम में बारिश, गर्मी और ठंड—तीनों तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। इस बार भी अक्टूबर की शुरुआत में यही स्थिति बनी हुई है। महीने की शुरुआत में कई जगह धूप खिली, जबकि रात के तापमान में गिरावट से ठंडक महसूस हुई और पूर्वी हिस्से में बारिश भी दर्ज की गई। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

    सामान्य से 4% कम हुई मानसून की बारिश

    जून से सितंबर तक चलने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश हुई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच के मुकाबले करीब 1.5 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से 4% कम बारिश दर्ज हुई।

    क्षेत्रवार देखें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4% ज्यादा बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% कम पानी गिरा।

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल मिलाकर बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4% अधिक रहा। हालांकि, इसी क्षेत्र के बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश हुई।

    पश्चिमी MP के 20 जिलों में कम बारिश

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9% से 51% तक कम बारिश दर्ज हुई।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के 25 जिलों में मानसून के दौरान बारिश का कोटा पूरा हो गया। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    वहीं 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

  • MP से मानसून की विदाई, फिर भी 3 दिन बारिश, जबलपुर-रीवा समेत 16 जिलों में आज अलर्ट

    MP से मानसून की विदाई, फिर भी 3 दिन बारिश, जबलपुर-रीवा समेत 16 जिलों में आज अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई हो चुकी है, लेकिन प्रदेश के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण अगले तीन दिन पूर्वी हिस्से में बारिश का दौर जारी रह सकता है। बुधवार को जबलपुर, रीवा, शहडोल समेत 16 जिलों में गरज-चमक, आंधी और बारिश का अनुमान है, जबकि भोपाल, इंदौर समेत पश्चिमी हिस्से में दिन में तेज धूप और रात में ठंडक बनी रहेगी।

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में पिछले दो दिन से मौसम बदला हुआ है। कई इलाकों में बादल छाए रहे और रिमझिम बारिश हुई। मंगलवार को रीवा, शहडोल और सागर संभाग में भी बारिश दर्ज की गई। मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, प्रदेश के ऊपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन की एक्टिविटी बनी हुई है, जिसके प्रभाव से बारिश की स्थिति बन रही है।

    आज इन 16 जिलों में बारिश का अनुमान
    अगले 24 घंटे के दौरान जबलपुर, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला और बालाघाट में गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है। 8 और 9 अक्टूबर को भी प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। इसके बाद 10 अक्टूबर को मौसम सिस्टम के कमजोर पड़ने की संभावना है।

    भोपाल-इंदौर में धूप, रात में बढ़ेगी ठंडक
    पश्चिमी मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज इसके उलट रहेगा। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग में दिन के समय तेज धूप खिलने की संभावना है। हालांकि, रात में ठंडक बनी रहेगी।

    प्रदेश में रात का तापमान भी लगातार नीचे जा रहा है। बीती रात इंदौर में न्यूनतम तापमान 17.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पचमढ़ी में 18 डिग्री, छिंदवाड़ा में 18.2 डिग्री, शाजापुर में 18.3 डिग्री और अमरकंटक-करौंदी में 18.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। वहीं, दिन में ग्वालियर का तापमान 37 डिग्री के पार बना हुआ है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 साल के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों का ट्रेंड देखने को मिलता है। इस बार भी मौसम का मिजाज इसी तरह रहने का अनुमान है। अक्टूबर की शुरुआत में मौसम साफ होने के साथ दिन में धूप तेज हुई है, जबकि रात में ठंडक बढ़ी है।

    100 दिन सक्रिय रहा मानसून
    मध्य प्रदेश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून 100 दिन सक्रिय रहा। 24 जून को मानसून ने प्रदेश में प्रवेश किया था और 3 अक्टूबर को पूरे प्रदेश से इसकी विदाई हो गई।

    मानसून सीजन के दौरान प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच के मुकाबले 1.5 इंच कम है। इस तरह प्रदेश में ओवरऑल सामान्य से 4 प्रतिशत कम बारिश हुई। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम पानी गिरा।

    पूर्वी हिस्से के इन जिलों में कम बारिश
    जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग को मिलाकर पूर्वी हिस्से में बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत ज्यादा रहा। हालांकि, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज हुई।

    पश्चिमी MP में 9 से 51% तक कम पानी
    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।

    25 जिलों में मानसून का कोटा पूरा
    प्रदेश के 25 जिलों में मानसून के दौरान बारिश का कोटा पूरा रहा। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और मैहर शामिल हैं। इसके अलावा आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में सामान्य बारिश हुई।

    30 जिलों में सामान्य से कम बारिश
    प्रदेश के बाकी 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

    मानसून की विदाई के बाद अब प्रदेश में मौसम दो अलग-अलग रंग दिखा रहा है। पूर्वी जिलों में साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से बारिश का दौर चल रहा है, जबकि पश्चिमी हिस्से में दिन गर्म और रातें ठंडी हो रही हैं। 10 अक्टूबर के बाद सिस्टम कमजोर पड़ने के साथ बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है।