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  • मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 29 IAS अधिकारियों के तबादले, भोपाल-रीवा को मिले नए कमिश्नर

    मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 29 IAS अधिकारियों के तबादले, भोपाल-रीवा को मिले नए कमिश्नर


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत 29 आईएएस अधिकारियों के तबादले करते हुए कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां की हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा जारी आदेश में भोपाल और रीवा संभाग के आयुक्तों सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इस प्रशासनिक पुनर्संरचना को आगामी नीतिगत और प्रशासनिक चुनौतियों को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सरकार ने भोपाल संभाग के आयुक्त संजीव सिंह और रीवा संभाग के आयुक्त बाबू सिंह जामोद को उनके पदों से हटाकर मंत्रालय में नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। अब कर्मवीर शर्मा को भोपाल संभाग का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है, जबकि शैलेंद्र सिंह को रीवा संभाग की कमान सौंपी गई है। इन दोनों अधिकारियों की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री सचिवालय में भी बड़ा बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री के सचिव आलोक कुमार सिंह को उनके पद से हटाकर पंजीयन महानिरीक्षक एवं अधीक्षक मुद्रांक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक गलियारों में इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री सचिवालय को राज्य शासन की सबसे प्रभावशाली इकाइयों में गिना जाता है।

    इस फेरबदल में जबलपुर नगर निगम के अपर आयुक्त अरविंद कुमार शाह का नाम भी चर्चा में रहा। हाल ही में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के साथ विवाद के बाद उनका तबादला कर दिया गया है। हालांकि सरकार ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

    राज्य सरकार ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां भी सौंपी हैं। बाबू सिंह जामोद को नगरीय विकास एवं आवास विभाग का सचिव बनाया गया है। मुकेश चंद्र गुप्ता को जेल विभाग का प्रमुख सचिव, डॉ. ई. रमेश कुमार को राजस्व विभाग का प्रमुख सचिव तथा विवेक कुमार पोरवाल को खनिज साधन विभाग का प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है।

    इस सूची में एक और महत्वपूर्ण नाम अमन वीर सिंह का है। पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के पुत्र अमन वीर सिंह पर सरकार ने भरोसा जताते हुए उन्हें ओएसडी सह आयुक्त कोष एवं लेखा तथा पदेन अपर सचिव वित्त विभाग की जिम्मेदारी दी है। इससे पहले वे ऊर्जा विकास निगम में प्रबंध संचालक के रूप में कार्यरत थे।

    वित्त विभाग और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव किया गया है। अपर सचिव वित्त रोहित सिंह को मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम का प्रबंध संचालक बनाया गया है। उनके पास स्कूल शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। वहीं राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मुख्य कार्यपालन अधिकारी हर्षिका सिंह को बजट संचालक नियुक्त किया गया है।

    प्रशासनिक फेरबदल के दौरान शैलेंद्र सिंह की नियुक्ति भी चर्चा में रही। हाल ही में उनके ‘वॉश ऑन व्हील्स’ नवाचार को लेकर आईएएस एसोसिएशन के समूह में चर्चा और विवाद की स्थिति बनी थी। बाद में मुख्य सचिव ने उनके कार्यों की सराहना की थी। अब उन्हें नगरीय विकास विभाग के सचिव पद से हटाकर रीवा संभाग का आयुक्त बनाया गया है।

    इसके अलावा सरकार ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे हैं। मनु श्रीवास्तव को कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) का अतिरिक्त दायित्व दिया गया है। गुलशन बामरा को अनुसूचित जाति कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जबकि अनिरुद्ध मुखर्जी को पर्यावरण विभाग और एपको की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।

    राज्य सरकार का यह व्यापक प्रशासनिक फेरबदल आने वाले समय में शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे आगामी रणनीतिक बदलावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

  • एमपी में UCC का ड्राफ्ट तैयार: लिव-इन में जन्मे बच्चों को मिलेगा संपत्ति में अधिकार, मानसून सत्र में आ सकता है कानून

    एमपी में UCC का ड्राफ्ट तैयार: लिव-इन में जन्मे बच्चों को मिलेगा संपत्ति में अधिकार, मानसून सत्र में आ सकता है कानून


    भोपाल । मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस महत्वपूर्ण सामाजिक और कानूनी सुधार को लागू करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया बयान से संकेत मिले हैं कि आगामी मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक विधानसभा में पेश किया जा सकता है। इसके लिए गठित समिति ने प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और विभिन्न वर्गों से सुझाव लेने की प्रक्रिया जारी है।

    सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समिति ने यूसीसी का मसौदा तैयार किया है। समिति राज्यभर में जाकर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और नागरिक संगठनों से संवाद कर रही है। साथ ही सरकार ऑनलाइन माध्यम से भी लोगों की राय ले रही है ताकि कानून को व्यापक जनसमर्थन और सामाजिक स्वीकार्यता मिल सके।

    प्रस्तावित यूसीसी का ढांचा मुख्य रूप से विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर आधारित होगा। सरकार का उद्देश्य अलग-अलग समुदायों में लागू व्यक्तिगत कानूनों के कारण उत्पन्न होने वाली कानूनी जटिलताओं को समाप्त कर सभी नागरिकों के लिए एक समान व्यवस्था लागू करना है।

    ड्राफ्ट का सबसे चर्चित पहलू लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ा है। प्रस्ताव के अनुसार लिव-इन संबंधों को कानूनी पहचान देने के साथ उनका पंजीकरण या घोषणा अनिवार्य की जा सकती है। यदि ऐसे संबंध टूटते हैं तो महिला को भरण-पोषण और आर्थिक सहायता का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा इन संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को भी पूर्ण कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्हें माता-पिता की संपत्ति में वैधानिक उत्तराधिकार और अन्य कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे, जिससे उनके अधिकारों को लेकर किसी प्रकार का विवाद न रहे।

    यूसीसी का एक प्रमुख उद्देश्य लैंगिक समानता सुनिश्चित करना भी है। प्रस्तावित कानून के तहत महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में समान अधिकार दिए जाएंगे। तलाक की प्रक्रिया को भी एक समान कानूनी ढांचे में लाने की तैयारी है। किसी भी धर्म के व्यक्ति द्वारा लिया गया तलाक तभी मान्य होगा जब उसका विधिवत पंजीकरण किया जाएगा। तलाक के बाद भरण-पोषण और गुजारा भत्ते के नियम भी सभी समुदायों के लिए समान होंगे।

    सरकार का दावा है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित किए बिना नागरिकों के समान अधिकारों को मजबूत करेगा। संविधान के समानता संबंधी प्रावधानों और नीति निर्देशक तत्वों के अनुरूप इसे तैयार किया जा रहा है ताकि सभी नागरिकों को एक समान कानूनी संरक्षण मिल सके।

    हालांकि प्रस्तावित यूसीसी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता देने के प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह व्यवस्था भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों से मेल नहीं खाती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि आदिवासी समुदाय को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाता है तो इसे समान नागरिक संहिता कैसे कहा जा सकता है।

    इन तमाम बहसों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि सरकार यूसीसी को लेकर गंभीर है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो मानसून सत्र में यह विधेयक विधानसभा में पेश कर पारित कराया जा सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यूसीसी मध्य प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श का सबसे बड़ा विषय बनने जा रहा है।

  • आज का मौसम 18 जून 2026: एमपी में बारिश और आंधी के आसार, कई इलाकों में बदलेगा मौसम का मिजाज

    आज का मौसम 18 जून 2026: एमपी में बारिश और आंधी के आसार, कई इलाकों में बदलेगा मौसम का मिजाज


    मध्य प्रदेश । 18 जून 2026 को देशभर में मौसम का मिजाज अलग-अलग रंग दिखा सकता है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, जबकि मध्य भारत के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मानसून की रफ्तार बढ़ सकती है, जिससे कई राज्यों को गर्मी से राहत मिलने के आसार हैं।

    मध्य प्रदेश की बात करें तो राज्य के कई जिलों में बादल छाए रहने, गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग पहले ही संकेत दे चुका है कि 17-18 जून के आसपास मानसून राज्य के दक्षिणी हिस्सों में प्रवेश कर सकता है। ऐसे में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, नर्मदापुरम और आसपास के क्षेत्रों में मौसम का प्रभाव देखने को मिल सकता है।

    राजधानी भोपाल सहित कई शहरों में दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। कुछ क्षेत्रों में दोपहर या शाम के समय गरज-चमक के साथ बारिश होने के आसार हैं। वहीं जहां बारिश नहीं होगी, वहां उमस लोगों को परेशान कर सकती है। प्री-मानसून गतिविधियों के कारण तापमान में मामूली गिरावट भी दर्ज की जा सकती है।

    देश के अन्य हिस्सों में भी मौसम सक्रिय रहने की संभावना है। पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रह सकता है, जबकि कुछ इलाकों में तेज हवाओं और आंधी की चेतावनी भी जारी की गई है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। किसानों को भी मौसम संबंधी ताजा अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है, ताकि खेती-बाड़ी के कार्यों की उचित योजना बनाई जा सके।

    कुल मिलाकर 18 जून का दिन मध्य प्रदेश में बदलते मौसम का संकेत दे सकता है। कई क्षेत्रों में बारिश और तेज हवाओं से राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि कुछ इलाकों में गर्मी और उमस का असर बना रह सकता है।

  • बात खरी है: छात्र नेता की ट्रांसफर चुनौती, पुलिस की फजीहत और नरोत्तम को मिला ‘सनातनी’ आशीर्वाद

    बात खरी है: छात्र नेता की ट्रांसफर चुनौती, पुलिस की फजीहत और नरोत्तम को मिला ‘सनातनी’ आशीर्वाद


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति, प्रशासन और सामाजिक घटनाओं में इन दिनों ऐसे कई घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कहीं धार्मिक मंच से राजनीतिक संकेत निकाले जा रहे हैं, कहीं छात्र राजनीति के तेवर प्रशासन को चुनौती देते दिखाई दे रहे हैं, तो कहीं घरेलू विवाद में पुलिस खुद विवाद का हिस्सा बन गई है। इन घटनाओं ने प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक माहौल को चर्चा का विषय बना दिया है।

    राजधानी भोपाल में चल रही प्रसिद्ध कथावाचक पंडित देवकीनंदन ठाकुर की कथा में उस समय दिलचस्प माहौल बन गया, जब पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा कथा स्थल पर पहुंचे। व्यासपीठ से देवकीनंदन ठाकुर ने नरोत्तम मिश्रा की खुलकर प्रशंसा की और उन्हें सनातन धर्म का सेवक तथा भगवान का सच्चा भक्त बताया। इतना ही नहीं, उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह शिकायत भी कर दी कि डबरा में सुंदर नवग्रह मंदिर बनवाने के बावजूद नरोत्तम मिश्रा ने उनकी कथा नहीं करवाई। इस टिप्पणी के बाद कथा पंडाल में मौजूद लोगों के चेहरे खिल उठे और माहौल हंसी-मजाक से भर गया।

    राजनीतिक जानकार इस घटना को सिर्फ एक धार्मिक टिप्पणी नहीं मान रहे हैं। दतिया में संभावित उपचुनाव की चर्चाओं के बीच इसे नरोत्तम मिश्रा के लिए एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा के भीतर भी उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है और कथावाचक के मंच से मिली यह सार्वजनिक सराहना चर्चा का विषय बनी हुई है।

    उधर शिवपुरी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक नेता का बयान सुर्खियों में आ गया। अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं के बीच संगठन के विभाग संगठन मंत्री देशराज नरोलिया ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि वे चाहें तो कलेक्टर का ट्रांसफर करवा सकते हैं। दरअसल, प्रदर्शन के दौरान लंबे समय तक कलेक्टर के मौके पर नहीं पहुंचने से कार्यकर्ता नाराज थे। जब तहसीलदार बातचीत के लिए पहुंचे तो नाराजगी और बढ़ गई। इसके बाद दिया गया बयान प्रशासनिक गलियारों और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। लोगों ने इसे सत्ता और संगठन की ताकत दिखाने वाले बयान के रूप में देखा।

    इसी बीच बैतूल जिले के मुलताई से एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। पति-पत्नी के विवाद की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। पुलिस का उद्देश्य दोनों पक्षों को समझाकर विवाद समाप्त कराना था, लेकिन स्थिति उलट गई। बातचीत के दौरान माहौल इतना बिगड़ा कि कहासुनी हाथापाई में बदल गई। पुलिसकर्मियों और परिवार के सदस्यों के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट हो गई। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिसने पुलिस को बुलाया था, वही पत्नी बाद में अपने पति के बचाव में उतर आई। इस घटना में पुलिसकर्मी और पति दोनों घायल हुए। घटना के बाद लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि पति-पत्नी के झगड़े में तीसरे व्यक्ति का फंसना अक्सर भारी पड़ जाता है।

    राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री राज्यसभा जाने की कोशिशों में लगे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। बताया जा रहा है कि उनकी रणनीति विधानसभा सीट खाली कर अपने परिवार के सदस्य को राजनीतिक अवसर दिलाने की थी। हालांकि यह योजना साकार नहीं हो सकी। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चाओं का दौर जारी है।

    प्रदेश की ये घटनाएं बताती हैं कि राजनीति, प्रशासन और समाज में हर दिन ऐसे प्रसंग सामने आते हैं, जो कभी गंभीर संदेश देते हैं तो कभी लोगों को मुस्कुराने का मौका भी दे जाते हैं।

  • 2027 नगरीय निकाय चुनाव की तैयारी शुरू, महापौर-अध्यक्ष पदों के आरक्षण के लिए आयुक्त को मिली जिम्मेदारी

    2027 नगरीय निकाय चुनाव की तैयारी शुरू, महापौर-अध्यक्ष पदों के आरक्षण के लिए आयुक्त को मिली जिम्मेदारी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। विधानसभा चुनाव से लगभग एक वर्ष पहले होने वाले नगर निगम और नगरपालिका चुनावों को राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इनके परिणाम प्रदेश की राजनीतिक दिशा और जनता के मूड का संकेत देने वाले माने जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं को समय रहते पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, नगरीय निकायों में महापौर और अध्यक्ष पदों के आरक्षण निर्धारण की पूरी प्रक्रिया के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त को अधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह प्रक्रिया मध्य प्रदेश नगरपालिका (महापौर तथा अध्यक्ष के पद का आरक्षण) नियम, 1999 के प्रावधानों के तहत संचालित की जाएगी।

    सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब State Election Commission Madhya Pradesh ने भी आगामी नगरीय निकाय चुनावों के लिए मतदाता सूची को अद्यतन करने का कार्य शुरू कर दिया है। निर्वाचन आयोग द्वारा नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत एवं स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने तथा अन्य सुधार संबंधी प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगरीय निकाय चुनावों के नतीजे अक्सर विधानसभा चुनावों से पहले जनता के रुझान का संकेत देते हैं। यही कारण है कि सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों इन चुनावों को बेहद गंभीरता से लेते हैं। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले होने वाले निकाय चुनाव प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    पिछले चुनावों के अनुभव को देखते हुए सरकार इस बार किसी भी प्रकार की देरी या कानूनी विवाद से बचना चाहती है। गौरतलब है कि वर्ष 2019 में नगरीय निकाय चुनाव प्रस्तावित थे, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक कारणों से प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं हो सकी। इसके बाद वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण चुनावी गतिविधियां प्रभावित हुईं और चुनाव लगभग दो वर्षों तक टल गए। अंततः मई 2022 में नगरीय निकाय चुनाव संपन्न कराए गए थे।

    सरकार अब पिछली परिस्थितियों से सबक लेते हुए चुनाव से काफी पहले आरक्षण, मतदाता सूची और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करना चाहती है, ताकि किसी प्रकार की न्यायिक या प्रशासनिक बाधा उत्पन्न न हो।

    आरक्षण व्यवस्था की बात करें तो प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में कुल पदों में 50 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए निर्धारित रहेगा। अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षण संबंधित निकाय क्षेत्र की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर तय किया जाएगा। वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू रहेगा।

    आरक्षण की प्रक्रिया रोटेशन प्रणाली के आधार पर की जाएगी। इसके तहत पिछली बार आरक्षित रहे निकायों को छोड़कर नए निकायों को आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों में महापौर पदों की आरक्षण श्रेणी लॉटरी प्रणाली के माध्यम से तय की जाएगी। इन श्रेणियों में अनारक्षित, ओबीसी, एससी, एसटी और महिला आरक्षित वर्ग शामिल होंगे।

    सरकार की इस शुरुआती तैयारी को आगामी चुनावी रणनीति और प्रशासनिक सतर्कता के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में आरक्षण प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय सामने आने की संभावना है।

  • सीएम मोहन यादव का पूर्व पीएम पर तंज, बोले- अर्थशास्त्री भी नहीं समझ पाए जीरो बैलेंस खाते की ताकत; महू में बनेगा साइबर रिसर्च सेंटर

    सीएम मोहन यादव का पूर्व पीएम पर तंज, बोले- अर्थशास्त्री भी नहीं समझ पाए जीरो बैलेंस खाते की ताकत; महू में बनेगा साइबर रिसर्च सेंटर

    मध्यप्रदेश । भोपाल में आयोजित साइबर सिक्योरिटी और स्टेट डाटा सिक्योरिटी पर राज्य स्तरीय कंसल्टेटिव वर्कशॉप के दौरान मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने साइबर सुरक्षा को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh का नाम लिए बिना उन पर परोक्ष टिप्पणी भी की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में पहले ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं जिन्हें अर्थशास्त्र का बड़ा जानकार माना जाता था, लेकिन जीरो बैलेंस खाते की उपयोगिता और उसके व्यापक सामाजिक प्रभाव को वे भी नहीं समझ पाए थे। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों के बैंक खाते खुलवाकर वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी। साथ ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज डाटा सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पहले सीमाओं की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता मानी जाती थी, लेकिन डिजिटल युग में नागरिकों का डाटा और ऑनलाइन लेनदेन भी उतने ही संवेदनशील हो गए हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों द्वारा लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में ठगी जा रही है, जो बेहद गंभीर विषय है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महू में अत्याधुनिक स्टेट डाटा साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की। यह केंद्र राज्य सरकार और Military College of Telecommunication Engineering के सहयोग से विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में शोध और विशेषज्ञता विकसित करना समय की आवश्यकता है।

    उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा केवल चर्चा का विषय नहीं बल्कि जवाबदेही का मामला है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित विभागों को इसकी जिम्मेदारी उठानी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों के डाटा की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

    कार्यशाला में एडीजी इंटेलिजेंस साई मनोहर ने साइबर अपराधों से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले 14 वर्षों में साइबर अपराधों में 77 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में हर वर्ष हजारों साइबर शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि साइबर हेल्पलाइन की क्षमता बढ़ाए जाने के बाद अब तक जनता के 137 करोड़ रुपए साइबर ठगी से बचाए जा चुके हैं।

    उन्होंने बताया कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, बैंकिंग फ्रॉड और ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साइबर अपराधी खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या सेना का अधिकारी बताकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

    साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेंद्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। हालांकि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी सरकारी सेवा या डाटा सिस्टम पर साइबर हमला होता है तो उसका सीधा असर आम जनता और शासन की विश्वसनीयता पर पड़ता है।

    कार्यशाला में देशभर के साइबर विशेषज्ञों, रक्षा संस्थानों के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। उनके सुझावों के आधार पर राज्य में साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी।

  • उज्जैन में शुरू हुआ मध्यप्रदेश का पहला साइंस सेंटर: एक महीने तक फ्री एंट्री, विज्ञान और अंतरिक्ष की दुनिया से रूबरू हो रहे बच्चे

    उज्जैन में शुरू हुआ मध्यप्रदेश का पहला साइंस सेंटर: एक महीने तक फ्री एंट्री, विज्ञान और अंतरिक्ष की दुनिया से रूबरू हो रहे बच्चे


    मध्यप्रदेश । धार्मिक और खगोलीय नगरी के रूप में पहचान रखने वाले उज्जैन को अब विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी एक नई पहचान मिली है। शहर में मध्यप्रदेश का पहला अत्याधुनिक साइंस सेंटर शुरू हो गया है, जो बच्चों, युवाओं, शोधार्थियों और विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए ज्ञान और मनोरंजन का अनूठा केंद्र बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने अप्रैल माह में इस साइंस सेंटर का लोकार्पण किया था। अब इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया है और विशेष बात यह है कि पहले एक महीने तक यहां प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रखा गया है।

    उज्जैन की समृद्ध खगोलीय परंपरा को ध्यान में रखते हुए साइंस सेंटर में एक अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉमी गैलरी विकसित की गई है। इस गैलरी में ग्रहों, तारों, आकाशगंगाओं, ब्रह्मांड और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी जानकारियों को आधुनिक डिजिटल तकनीक और आकर्षक मॉडलों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यहां आने वाले लोग न केवल अंतरिक्ष के रहस्यों को समझ रहे हैं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक विरासत और तकनीकी उपलब्धियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।

    साइंस सेंटर की सबसे खास विशेषताओं में से एक इसकी साइंस फन गैलरी है। यहां लगाए गए इंटरएक्टिव मॉडल बच्चों को खेल-खेल में विज्ञान के सिद्धांत समझने का अवसर देते हैं। गुरुत्वाकर्षण, ऊर्जा, गति, प्रकाश, ध्वनि और संतुलन जैसे विषयों को प्रयोगात्मक तरीके से समझाया गया है। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और रुचि बढ़ रही है।

    सेंटर परिसर में विकसित साइंस पार्क भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। खुले वातावरण में स्थापित वैज्ञानिक उपकरण और मॉडल बच्चों को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से सीखने का अवसर देते हैं। यहां छात्र किताबों में पढ़े गए सिद्धांतों को वास्तविक रूप में देखकर समझ सकते हैं, जिससे उनकी अवधारणाएं और अधिक मजबूत होती हैं।

    साइंस सेंटर का आधुनिक प्लेनेटेरियम भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। अत्याधुनिक 3D-4K तकनीक से लैस यह प्लेनेटेरियम दर्शकों को अंतरिक्ष की रोमांचक यात्रा पर ले जाता है। यहां प्रदर्शित होने वाली फिल्में जैसे Voyager: The Never Ending Journey और Dawn of the Space Age अंतरिक्ष अनुसंधान, ग्रहों की दुनिया और मानव अंतरिक्ष अभियानों की रोचक जानकारी प्रदान करती हैं।

    साइंस सेंटर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है। एक महीने की निशुल्क अवधि के बाद भी यहां आने वाले लोगों के लिए प्रवेश शुल्क किफायती रखा गया है। प्लेनेटेरियम शो के लिए सामान्य नागरिकों से 50 रुपए शुल्क लिया जाएगा, जबकि विद्यार्थियों को रियायती दरों पर सुविधा उपलब्ध होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह साइंस सेंटर प्रदेश में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। आने वाले समय में यह केंद्र विज्ञान शिक्षा, शोध और जागरूकता का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

  • भोपाल की माही लामा का भारतीय बॉक्सिंग टीम में चयन, वर्ल्ड कप 2026 में करेंगी देश का प्रतिनिधित्व

    भोपाल की माही लामा का भारतीय बॉक्सिंग टीम में चयन, वर्ल्ड कप 2026 में करेंगी देश का प्रतिनिधित्व


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की युवा मुक्केबाज Mahi Lama ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए बॉक्सिंग वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है। माही अब चीन में आयोजित होने वाली इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। उनके चयन से न केवल भोपाल बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में खुशी का माहौल है।

    15 से 20 जून तक चीन में आयोजित होने वाले बॉक्सिंग वर्ल्ड कप में माही 60 किलोग्राम भार वर्ग में रिंग में उतरेंगी। भारतीय टीम शनिवार रात प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए चीन रवाना हो गई। माही का चयन उनके लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन और राष्ट्रीय स्तर पर हासिल उपलब्धियों के आधार पर हुआ है।

    माही वर्तमान में भोपाल स्थित राज्य बॉक्सिंग अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने कम समय में अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर बॉक्सिंग जगत में विशेष पहचान बनाई है। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में अपनी क्षमता का परिचय दिया है। इसी निरंतर प्रदर्शन का परिणाम है कि उन्हें भारतीय टीम में शामिल होने का मौका मिला है।

    चीन रवाना होने से पहले माही ने कहा कि उनका पूरा ध्यान वर्ल्ड कप में बेहतरीन प्रदर्शन करने पर है। उन्होंने बताया कि भारतीय टीम का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है और वह इस अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए देश के लिए पदक जीतने का प्रयास करेंगी। माही ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए सम्मान की बात है और वह अपनी तैयारी को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं।

    खेल विशेषज्ञों का मानना है कि माही का चयन प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है। उनका मानना है कि प्रतिभा, अनुशासन और लगातार मेहनत किसी भी खिलाड़ी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकती है। माही लामा की सफलता इस बात का उदाहरण है कि उचित प्रशिक्षण और समर्पण के साथ बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

    माही की इस उपलब्धि पर प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री Vishvas Kailash Sarang ने भी उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। मंत्री ने विश्वास जताया कि माही वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करेंगी और भारत के लिए नई उपलब्धियां हासिल करेंगी।

    मध्यप्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य की विभिन्न खेल अकादमियों से निकलने वाले खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। माही लामा का भारतीय टीम में चयन इसी दिशा में प्रदेश की एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    अब सभी की निगाहें चीन में होने वाले बॉक्सिंग वर्ल्ड कप पर टिकी हैं, जहां माही लामा अपने दमदार मुक्कों से भारत को गौरवान्वित करने की कोशिश करेंगी।

  • राज्यसभा नामांकन विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, ‘नारी सम्मान’ पर उठाए सवाल

    राज्यसभा नामांकन विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, ‘नारी सम्मान’ पर उठाए सवाल


    मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश के मंदसौर में राज्यसभा नामांकन विवाद को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उसके ‘नारी सम्मान’ के दावे को केवल नारा बताया और उस पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाया।

    जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित और जिला पंचायत अध्यक्ष दुर्गा पाटीदार ने कांग्रेस पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि कांग्रेस महिला सम्मान की बात तो करती है, लेकिन उसके व्यवहार में यह दिखाई नहीं देता।

    भाजपा नेताओं ने कहा कि राज्यसभा नामांकन विवाद के बाद कांग्रेस द्वारा मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने को महिला सम्मान का मुद्दा बनाया जा रहा है, जबकि वास्तविक मामला नामांकन पत्र में तथ्यों को छिपाने का है।

    प्रेस वार्ता में यह भी आरोप लगाया गया कि कांग्रेस नेतृत्व ने एक महिला कार्यकर्ता से जुड़े मामले में गंभीर शिकायतों को अनदेखा किया। भाजपा ने दावा किया कि संबंधित प्रकरण में कांग्रेस नेता कुंभम शिवकुमार रेड्डी पर गंभीर आरोप लगे थे और उस समय तत्कालीन तेलंगाना प्रभारी के रूप में मीनाक्षी नटराजन की भूमिका पर भी सवाल उठे थे।

    भाजपा का कहना है कि नामांकन पत्र में न्यायिक कार्यवाही और संबंधित तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया, जो कि नामांकन निरस्त होने का प्रमुख कारण बना। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि कांग्रेस ने आरोपी नेता को संरक्षण दिया और पीड़ित महिला की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया।

    भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से कई सवाल पूछते हुए कहा कि यदि न्यायिक कार्यवाही की जानकारी थी तो उसे शपथ पत्र में क्यों नहीं बताया गया और महिला शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

    प्रेस वार्ता में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी उल्लेख किया गया, जिसमें मीनाक्षी नटराजन की याचिका को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप की सीमाओं का हवाला देते हुए कहा था कि ऐसे मामलों में चुनाव परिणाम के बाद ही कानूनी चुनौती दी जा सकती है।

    भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस को महिला सम्मान के मुद्दे पर बयानबाजी करने से पहले अपने संगठनात्मक व्यवहार की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में महिलाओं से जुड़े मामलों में कई बार शिकायतों को अनदेखा किया जाता है।

    अंत में भाजपा ने कहा कि यह मामला केवल एक चुनावी विवाद नहीं है, बल्कि कांग्रेस की जवाबदेही और महिला सम्मान के प्रति उसके वास्तविक दृष्टिकोण पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • मंडी शुल्क वृद्धि पर बवाल: कांग्रेस का विरोध तेज, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग

    मंडी शुल्क वृद्धि पर बवाल: कांग्रेस का विरोध तेज, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में कृषि उपज मंडियों में मंडी शुल्क को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.50 प्रतिशत किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। इस फैसले को लेकर मंदसौर जिले के पिपलियामंडी में कांग्रेस नेताओं, किसानों और व्यापारियों ने मिलकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

    यह ज्ञापन ब्लॉक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा और जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष रामचंद्र करुण के नेतृत्व में मंडी सचिव जगदीशचंद्र भाभड़ को सौंपा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान और व्यापारी भी मौजूद रहे।

     किसानों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
    पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मंडी शुल्क में 0.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में यह अतिरिक्त शुल्क उन पर और आर्थिक दबाव बढ़ाएगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई कृषि उत्पादक राज्यों में मंडी शुल्क 1 प्रतिशत या उससे भी कम है। ऐसे में मध्य प्रदेश में बढ़ा हुआ शुल्क व्यापारियों को अन्य राज्यों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में पीछे कर सकता है।

     किसानों और व्यापारियों में नाराजगी
    किसान बंशीलाल पाटीदार ने इस फैसले को किसान विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि खेती पहले से ही घाटे का सौदा बनती जा रही है और इन परिस्थितियों में शुल्क वृद्धि किसानों की समस्याओं को और बढ़ाएगी। जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष रामचंद्र करुण ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह निर्णय किसान और व्यापारी वर्ग के हितों के खिलाफ है। उन्होंने इसे “शोषणकारी” कदम बताया और तत्काल वापस लेने की मांग की।

    आंदोलन की चेतावनी
    कांग्रेस नेता बाबूखा मेवाती ने मंडी शुल्क वृद्धि को अन्यायपूर्ण बताते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो कांग्रेस आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी।

     व्यापक समर्थन
    इस मौके पर कई स्थानीय नेता, किसान और व्यापारी उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में मंडी शुल्क वृद्धि का विरोध किया और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।

    किसानों और व्यापारियों का कहना है कि यदि यह बढ़ोतरी लागू रहती है तो इसका सीधा असर उनकी आमदनी और व्यापार पर पड़ेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।