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  • सीधी में पुलिस टीम पर हमला, चार गाड़ियों में आए बदमाश फायरिंग और मारपीट के बाद NDPS आरोपी को छुड़ाकर फरार

    सीधी में पुलिस टीम पर हमला, चार गाड़ियों में आए बदमाश फायरिंग और मारपीट के बाद NDPS आरोपी को छुड़ाकर फरार

    सीधी जिले: के रामपुर नैकिन थाना क्षेत्र में रीवा-सीधी सीमा पर स्थित छुहिया घाटी में मंगलवार दोपहर ओडिशा पुलिस की टीम पर हमला कर NDPS मामले के आरोपी को छुड़ाकर ले जाने की घटना सामने आई है। करीब दोपहर 1 बजे चार गाड़ियों में आए बदमाशों ने पुलिस टीम को घेर लिया और कथित तौर पर फायरिंग शुरू कर दी। बदमाशों ने पुलिसकर्मियों पर तीन बार गोलियां चलाईं और बेसबॉल बैट से भी हमला किया। वारदात के बाद आरोपी आदित्य मिश्रा को पुलिस के कब्जे से छुड़ाकर अपने साथ ले गए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आसपास के थानों की पुलिस को अलर्ट कर दिया गया।

    जानकारी के अनुसार, ओडिशा पुलिस की टीम NDPS मामले में गिरफ्तार आरोपी आदित्य मिश्रा को ओडिशा से रीवा जिला न्यायालय में पेशी के लिए लेकर आ रही थी। पुलिस टीम जब छुहिया घाटी से गुजर रही थी, तभी चार गाड़ियों में सवार बदमाशों ने पुलिस वाहन को घेर लिया। इसके बाद बदमाशों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि बदमाशों ने तीन बार फायरिंग की और पुलिसकर्मियों के साथ बेसबॉल बैट से मारपीट भी की। हमले के दौरान बदमाशों ने आरोपी आदित्य मिश्रा को पुलिस के कब्जे से छुड़ा लिया और उसे अपने साथ लेकर मौके से फरार हो गए।

    घटना के समय ओडिशा पुलिस की टीम में कुल आठ पुलिसकर्मी मौजूद थे। पुलिसकर्मी AK-47, पिस्टल सहित अन्य हथियारों से लैस बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद चार वाहनों में आए बदमाश आरोपी को छुड़ाकर मौके से निकलने में सफल रहे। पुलिस के अनुसार, हमले में फायरिंग और मारपीट की गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी गई है। आसपास के थानों की पुलिस को भी तत्काल रवाना किया गया, ताकि फरार आरोपियों और आरोपी आदित्य मिश्रा की तलाश की जा सके।

    मामले की सूचना मिलने के बाद सीधी पुलिस अधीक्षक संतोष कोरी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के थानों की पुलिस को रवाना किया गया था। ओडिशा पुलिस के अनुसार, बदमाशों ने पुलिस टीम पर तीन बार गोलियां चलाईं और इसके बाद आरोपी को जबरन छुड़ाकर अपने साथ ले गए। पुलिस टीम पर हमला होने के बावजूद फिलहाल किसी पुलिसकर्मी के घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है और हमले में शामिल लोगों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।

    घटना के बाद पुलिस ने फरार आरोपियों और छुड़ाए गए NDPS आरोपी आदित्य मिश्रा की तलाश शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि वारदात के बाद बदमाशों की गाड़ियां मैहर जिले की ओर रवाना हुई हैं। इसके आधार पर पुलिस आसपास के क्षेत्रों में वाहनों की तलाश कर रही है और संदिग्ध लोगों की पहचान में जुटी है। छुहिया घाटी और आसपास के इलाकों में पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी गई है। पुलिस टीम पर फायरिंग, मारपीट और आरोपी को छुड़ाकर ले जाने की इस घटना के बाद क्षेत्र में निगरानी बढ़ाते हुए फरार लोगों की तलाश की जा रही है।

  • मध्यप्रदेश के चार ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर अस्थायी सूची में जगह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी बधाई

    मध्यप्रदेश के चार ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर अस्थायी सूची में जगह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी बधाई


    मध्यप्रदेश: की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने से प्रदेशवासियों में खुशी और गर्व का माहौल है। राज्य के चार प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों उदयगिरि गुफाएं, बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला और चंबल घाटी के मंदिर समूह को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में स्थान मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की समृद्ध पुरासंपदा को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलना सभी के लिए हर्ष और गौरव का विषय है। इन स्थलों को अस्थायी सूची में जगह मिलने से प्रदेश की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों की पहचान विश्व स्तर पर पहुंची है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी विश्व पटल पर पहचान प्राप्त हो रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में स्थान मिला है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे मध्यप्रदेश की पुरासंपदा और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का अवसर मिला है।

    डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरें मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उदयगिरि गुफाएं, बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला और चंबल घाटी के मंदिर समूह को अस्थायी सूची में शामिल किया जाना राज्य की सांस्कृतिक संपदा के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से अपनी विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी मध्यप्रदेशवासियों को अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने और उनके महत्व को समझने के लिए साझा संकल्प को और मजबूत करना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने विरासत को विश्वभर तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संपदा को संरक्षित करने के साथ-साथ उसकी पहचान दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने के प्रयास किए जाने चाहिए। इसके लिए प्रदेशवासियों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के संकल्प को मजबूत करना होगा। यूनेस्को की अस्थायी सूची में इन चार स्थलों को स्थान मिलने के अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं और इसे मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों के लिए गौरव का विषय बताया।

  • राजस्थान के लोगों की आनुवंशिक जड़ें कितनी पुरानी? BHU की रिसर्च ने खोले राज, पाकिस्तान से ज्यादा उत्तर-मध्य भारत से मेल

    राजस्थान के लोगों की आनुवंशिक जड़ें कितनी पुरानी? BHU की रिसर्च ने खोले राज, पाकिस्तान से ज्यादा उत्तर-मध्य भारत से मेल


    भोपाल । राजस्थान की आबादी के आनुवंशिक इतिहास को लेकर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के जीन विज्ञानी प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे और उनकी टीम के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आई है। शोध के अनुसार राजस्थान की अध्ययनित आबादी के डीएनए पैटर्न पाकिस्तान की आबादी की तुलना में मध्य प्रदेश गुजरात और उत्तर-मध्य भारत की आबादियों से अधिक समान पाए गए। यह निष्कर्ष अलग-अलग आबादी समूहों में मौजूद आनुवंशिक संकेतों की तुलना पर आधारित है। अध्ययन में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि आनुवंशिक समानता का मतलब यह नहीं है कि किसी आबादी ने हाल के समय में किसी दूसरे राज्य से आकर वहां बसावट की है।

    शोधकर्ताओं ने करीब दो हजार असंबंधित और स्वस्थ लोगों के रक्त नमूनों का विश्लेषण किया। इनमें मीणा गुर्जर और राजस्थान की मिश्रित आबादी के लोग शामिल थे। वैज्ञानिकों ने डीएनए के 20 बहुरूपी ऑटोसोमल एसटीआर स्थानों का अध्ययन किया। इसके बाद इन आनुवंशिक आंकड़ों की तुलना पाकिस्तान के साथ ही भारत के अलग-अलग आबादी समूहों के उपलब्ध आंकड़ों से की गई। विभिन्न सांख्यिकीय तरीकों से किए गए विश्लेषण में राजस्थान के इन समूहों की आनुवंशिक समानता उत्तर और मध्य भारत की आबादियों के साथ अधिक दिखाई दी।

    इस अध्ययन की खास बात यह है कि इससे पहले हुए कुछ शोधों में राजस्थान और वर्तमान पाकिस्तान क्षेत्र की आबादियों के बीच आनुवंशिक संबंधों के संकेत मिले थे। वर्ष 2005 में हुए एक अध्ययन में 669 लोगों के नमूनों के आधार पर मातृवंशीय डीएनए और वाई क्रोमोसोम जैसे आनुवंशिक संकेतकों का विश्लेषण किया गया था। उस अध्ययन में सिंधु घाटी और आसपास की आबादियों के बीच लंबे समय तक हुए जीन प्रवाह के संकेत बताए गए थे। नए अध्ययन में राजस्थान की आनुवंशिक तस्वीर को केवल पश्चिमी दिशा से जोड़कर देखने के बजाय उत्तर और मध्य भारत की आबादियों के साथ संबंधों को भी महत्वपूर्ण बताया गया है।

    वैज्ञानिक दृष्टि से एमपी और गुजरात से आनुवंशिक समानता का अर्थ सीधा यह नहीं है कि राजस्थान के लोग इन राज्यों से आकर बसे हैं। डीएनए में मौजूद कुछ आनुवंशिक संकेत जब अलग-अलग आबादी समूहों में समान दिखाई देते हैं तो वैज्ञानिक उन आबादियों के बीच आनुवंशिक निकटता का अध्ययन करते हैं। इसके पीछे हजारों वर्षों में हुए आबादी के आवागमन मिश्रण और साझा पूर्वजों जैसी प्रक्रियाएं हो सकती हैं।

    अध्ययन में राजस्थान मध्य प्रदेश गुजरात और महाराष्ट्र में रहने वाली भील आबादी के आनुवंशिक आंकड़ों पर भी चर्चा की गई है। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले भील समूहों के बीच साझा पुरानी आनुवंशिक विरासत के संकेत मिलने की बात कही गई है। शोध के अनुसार गुजरात के भीलों में आसपास की आबादियों के साथ मिश्रण अपेक्षाकृत कम जबकि राजस्थान के भीलों में आसपास के जातीय और जनजातीय समूहों के साथ अधिक आनुवंशिक विविधता दिखाई देती है।

    प्रोफेसर चौबे के अनुसार राजस्थान की विभिन्न जातियों और जनजातियों के आनुवंशिक इतिहास में भी कई पीढ़ियों पीछे जाने पर साझा विरासत के संकेत दिखाई देते हैं। अध्ययन में करीब 52 हजार वर्ष पुराने मातृवंशीय डीएनए संकेतों का भी उल्लेख किया गया है। एम आर5 और यू2आई जैसे मातृवंशीय समूहों को दक्षिण एशिया में आधुनिक मानव के शुरुआती इतिहास से जोड़ा जाता है। इस तरह अध्ययन राजस्थान की आबादी को लंबे समय से चली आ रही स्थानीय आनुवंशिक निरंतरता और अलग-अलग दिशाओं से हुए आबादी के मिश्रण के व्यापक संदर्भ में देखने की बात करता है।

  • MP में 4 दिन बारिश का ब्रेक, तेज धूप के आसार, उज्जैन-ग्वालियर से मानसून की विदाई शुरू

    MP में 4 दिन बारिश का ब्रेक, तेज धूप के आसार, उज्जैन-ग्वालियर से मानसून की विदाई शुरू


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब कमजोर पड़ने लगा है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 4 दिन प्रदेश में कोई मानसूनी सिस्टम सक्रिय नहीं रहेगा, जिससे कई हिस्सों में तेज धूप निकलने का अनुमान है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर संभाग में इसका असर ज्यादा देखने को मिलेगा।

    इधर, बुधवार-गुरुवार से प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू होने के आसार हैं। राजस्थान और पंजाब के कई जिलों से मानसून लौट चुका है, जबकि इसकी वापसी की रेखा मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से तक पहुंच गई है। ऐसे में सबसे पहले उज्जैन और ग्वालियर संभाग से मानसून विदा होने के संकेत हैं।

    आज 4 जिलों में तेज धूप, बाकी जगह बादल-बूंदाबांदी

    मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में तेज धूप खिल सकती है। प्रदेश के बाकी हिस्सों में बादल छाए रहने और कहीं-कहीं बूंदाबांदी होने के आसार हैं।

    बुधवार से मौसम में और बदलाव देखने को मिलेगा। प्रदेश के करीब आधे हिस्से में तीखी धूप रहने का अनुमान है। 2 अक्टूबर तक अधिकांश हिस्सों में धूप खिलने की संभावना है। बारिश का दौर कमजोर पड़ने के साथ दिन के तापमान में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    मानसून की सामान्य अवधि खत्म होने में 2 दिन

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य अवधि 1 जून से 30 सितंबर तक रहती है। यानी प्रदेश में मानसून की सामान्य अवधि पूरी होने में अब दो दिन बाकी हैं। इसके बाद अलग-अलग हिस्सों से मानसून की वापसी का सिलसिला तेज होने लगेगा।

    राजस्थान और पंजाब के कई हिस्सों से मानसून की विदाई हो चुकी है। मानसून की वापसी की रेखा मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से तक पहुंचने के कारण अब प्रदेश में भी इसके लौटने के संकेत मिलने लगे हैं।

    पूर्वी MP में औसत से 4% ज्यादा बारिश

    इस मानसून सीजन में प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा औसत से 4% ज्यादा है। अधिकांश जिलों में सामान्य कोटे के आसपास या उससे अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    हालांकि, कुछ जिलों में अभी भी बारिश औसत से कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में 2% से 20% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी MP के 20 जिलों में बारिश कम

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश का आंकड़ा औसत से नीचे है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इसके चलते मानसून सीजन के अंत तक प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से नीचे रहने की संभावना बनी हुई है।

    इन जिलों में औसत से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, डिंडौरी, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    सामान्य बारिश का आंकड़ा छूना मुश्किल

    मानसून की विदाई का समय नजदीक आने के साथ अब प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 100% तक पहुंचने की संभावना कम नजर आ रही है। अगले कुछ दिनों में कोई बड़ा मानसूनी सिस्टम सक्रिय नहीं रहने के कारण बारिश की गतिविधियां सीमित रहने का अनुमान है। ऐसे में अब मौसम का रुख मानसून की वापसी और धूप बढ़ने की ओर रहने की संभावना है।

  • MP में अब तक 37.7 इंच हुई बारिश, एक सप्ताह में हो सकती है मानसून की विदाई, कल से खिलेगी तेज धूप

    MP में अब तक 37.7 इंच हुई बारिश, एक सप्ताह में हो सकती है मानसून की विदाई, कल से खिलेगी तेज धूप


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब विदाई की ओर बढ़ रहा है। रविवार तक प्रदेश में औसतन 37.7 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है, जो सामान्य बारिश के कोटे का 95.8% है। अब महज 0.2% बारिश होने पर प्रदेश सामान्य बारिश की कैटेगरी में आ जाएगा। मौसम विभाग के मुताबिक अगले चार दिन प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश की संभावना नहीं है और एक सप्ताह के भीतर दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई शुरू हो सकती है।

    मंगलवार से कई हिस्सों में तेज धूप

    मौसम केंद्र, भोपाल के अनुसार सोमवार से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कमजोर रहेंगी। मंगलवार से उज्जैन, इंदौर और ग्वालियर-चंबल संभाग में तेज धूप खिलने का अनुमान है। अगले तीन दिनों में प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्से में धूप का असर देखने को मिल सकता है।

    पिछले 48 घंटे से पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश करा रहा गहरा अवदाब अब कमजोर हो गया है। इसके असर से पूर्वी हिस्से में अति भारी और भारी बारिश का दौर चला था। बारिश के कारण कई नदियां उफान पर आ गईं और कई बांधों के गेट खोलने पड़े।

    रविवार से सिस्टम कमजोर पड़ना शुरू हुआ, जिसके बाद भारी बारिश का दौर थम गया। भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत कई जिलों में रविवार को धूप-छांव वाला मौसम रहा। अब सिस्टम की सक्रियता कम होने के साथ ही कई जिलों में तीखी धूप निकलने की संभावना है।

    सामान्य बारिश के आंकड़े तक पहुंचने से सिर्फ 0.2% दूर

    इस मानसूनी सीजन में प्रदेश में अब तक 37.7 इंच बारिश हो चुकी है। यह सामान्य बारिश के मुकाबले 95.8% है। यानी प्रदेश सामान्य बारिश की कैटेगरी से सिर्फ 0.2% दूर है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों में कहीं हल्की बारिश भी होती है तो प्रदेश सामान्य बारिश की श्रेणी में पहुंच सकता है।

    हालांकि, इस बार पूरे प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 100% तक पहुंचने की संभावना कम बताई जा रही है।

    पूर्वी MP में औसत से 4% ज्यादा पानी

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में इस बार बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा औसत से करीब 4% ज्यादा है। अधिकांश जिलों में सामान्य कोटे से अधिक पानी गिर चुका है।

    इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 2% से 20% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    पश्चिमी MP के 20 जिलों में कम बारिश

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश सामान्य से पीछे है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    इन जिलों में मानसून के दौरान हुई बारिश सामान्य कोटे की तुलना में कम रही है। वहीं प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश ने सामान्य आंकड़े को पार कर लिया है।

    इन जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, डिंडौरी, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    मानसून की सक्रियता अब लगातार कमजोर पड़ रही है। अगले कुछ दिनों में बारिश की गतिविधियों में और कमी आने तथा धूप का असर बढ़ने की संभावना है। इसी के साथ दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई का सिलसिला भी शुरू हो सकता है। हालांकि, प्रदेश के सामान्य बारिश के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अभी 0.2% बारिश की जरूरत है।

  • मानसून की विदाई से पहले MP में फिर तेज बारिश, आज 7 जिलों में अलर्ट

    मानसून की विदाई से पहले MP में फिर तेज बारिश, आज 7 जिलों में अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले बारिश का दौर तेज हो गया है। जबलपुर, सागर, शहडोल और रीवा संभाग में पिछले 72 घंटे से लगातार बारिश हो रही है, जिससे नदी-नाले उफान पर हैं और कई बांधों के गेट खोलकर पानी की निकासी करनी पड़ी है। रविवार को मुरैना, भिंड, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सतना और रीवा में तेज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम केंद्र के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 35.6 इंच बारिश हो चुकी है। यह सामान्य बारिश के कोटे का 95% से ज्यादा है। मानसून के बचे चार दिनों में भी बारिश जारी रहती है तो कुल बारिश का आंकड़ा और बढ़ सकता है। हालांकि अभी प्रदेश के 25 जिलों में ही सामान्य बारिश का कोटा पूरा हुआ है, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

    रविवार को 7 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट

    रविवार को मुरैना, भिंड, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सतना और रीवा में तेज बारिश का अलर्ट है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास और रतलाम में गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हो सकती है।

    वहीं नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना और दमोह में भी बारिश होने का अनुमान है।

    डिंडौरी-उमरिया में तीन दिन से मूसलाधार बारिश

    शनिवार को डिंडौरी और उमरिया में तेज बारिश का दौर जारी रहा। दोनों जिलों में पिछले तीन दिन से लगातार बारिश हो रही है। इससे नर्मदा समेत उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ गया है।

    डिंडौरी के जोगी टिकरिया पुल के डूबने से आवागमन प्रभावित हुआ। वहीं जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे-45 पर भी ट्रैफिक प्रभावित रहा।

    शहपुरा स्थित बिलगांव बांध के दो गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। दूसरी ओर उमरिया के संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जोहिला डैम के चार गेट दो-दो मीटर खोलकर पानी की निकासी की गई।

    बरगी बांध के 9 गेट खोले गए

    जबलपुर के बरगी बांध में लगातार बढ़ रही पानी की आवक को नियंत्रित करने के लिए शुक्रवार को पांच गेट खोले गए थे। इसके बावजूद बांध में पानी की आवक जारी रही। इसके बाद शनिवार को चार और गेट खोल दिए गए।

    इस तरह बरगी बांध से पानी की निकासी बढ़ानी पड़ी। लगातार बारिश के कारण पूर्वी मध्य प्रदेश में नदी-नालों के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है।

    मानसून की विदाई में अब सिर्फ 4 दिन

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, गहरे अवदाब के कारण मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में भारी बारिश का दौर बना हुआ है। इसका असर अगले 24 घंटे तक रहने की संभावना है। इसके बाद मौसम साफ होने की उम्मीद है।

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की अवधि 1 जून से 30 सितंबर तक मानी जाती है। यानी अब मानसून की विदाई में चार दिन बाकी हैं। राजस्थान के कई जिलों से मानसून पहले ही लौट चुका है।

    ऐसे में मानसून की विदाई से ठीक पहले हुई बारिश प्रदेश के कुल बारिश के आंकड़े को और ऊपर ले जा सकती है।

  • एमपी में फिर बदला मौसम, 18 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, निवाड़ी-टीकमगढ़ समेत 4 में ऑरेंज अलर्ट

    एमपी में फिर बदला मौसम, 18 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, निवाड़ी-टीकमगढ़ समेत 4 में ऑरेंज अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का दौर अभी थमा नहीं है। मौसम विभाग ने शनिवार को जबलपुर और रीवा समेत 18 जिलों में अति भारी या भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और सतना में ऑरेंज अलर्ट है। तेज बारिश की आशंका को देखते हुए सतना में नर्सरी से कक्षा 8वीं और मैहर में नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के स्कूल शनिवार को बंद रखने के आदेश दिए गए हैं।

    18 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट

    IMD (मौसम केंद्र) के मुताबिक, अगले 24 घंटे में भिंड, दतिया, पन्ना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, दमोह, कटनी, मैहर, उमरिया, शहडोल, जबलपुर, मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश हो सकती है।

    वहीं निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और सतना में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अगले 48 घंटे बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    सतना-मैहर में स्कूलों की छुट्टी

    मूसलधार बारिश की चेतावनी को देखते हुए सतना जिले में शनिवार को नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। इसी तरह मैहर जिले में नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के सभी स्कूल बंद रहेंगे।

    इन जिलों में बूंदाबांदी के आसार

    प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा और मंदसौर में बूंदाबांदी का अनुमान है।

    इसके अलावा शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, पांढुर्णा, अनूपपुर, सागर और पन्ना में भी बूंदाबांदी हो सकती है।

    अगले 48 घंटे अहम, निचले इलाकों में सावधानी

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार सितंबर के आखिरी सप्ताह में मध्य प्रदेश का मौसम फिर सक्रिय है। गहरे अवदाब की तीव्रता लगातार कम हो रही है, लेकिन इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और इससे जुड़ी नमी के कारण पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का दौर बना हुआ है।

    उन्होंने बताया कि अगले 48 घंटे खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन, किसान और आम लोगों को स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए। नदी-नालों, पुल-पुलियों और निचले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है।

    मानसून की विदाई में अब 5 दिन बाकी

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य समय 1 जून से 30 सितंबर तक रहता है। यानी मानसून की विदाई में अब पांच दिन बाकी हैं। आने वाले दिनों में प्रदेश से मानसून की वापसी शुरू होने की संभावना है। राजस्थान के कई जिलों से मानसून लौट चुका है।

    सामान्य से 2.2 इंच कम बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक 880.5 मिमी यानी 34.7 इंच बारिश दर्ज हुई है। यह सामान्य बारिश 937.9 मिमी यानी 36.9 इंच से 2.2 इंच कम है।

    प्रदेश में ओवरऑल सामान्य से 6% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में बारिश का आंकड़ा सामान्य के बराबर है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% कम पानी गिरा है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य के बराबर पहुंच गया है। हालांकि बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 4% से 21% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में इन आंकड़ों में काफी सुधार हुआ है। शुक्रवार को भी प्रदेश के पूर्वी हिस्से का आंकड़ा सामान्य के बराबर आ गया।

    पश्चिमी हिस्से में 8 से 50% तक कमी

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 8% से 50% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • MP में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव, आज 13 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

    MP में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव, आज 13 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय हो गया है। शुक्रवार को प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्से में तेज बारिश का दौर रहने की संभावना है। जबलपुर समेत 13 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 16 जिलों में भारी बारिश का अनुमान है। इन इलाकों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच से ज्यादा बारिश हो सकती है। सतना में अतिवृष्टि की आशंका को देखते हुए 25 और 26 सितंबर को नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के स्कूल बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। IMD के सतना पूर्वानुमान में भी 25 से 27 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी है।

    13 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

    दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के बीच सक्रिय हुए सिस्टम के चलते शुक्रवार को टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, दमोह, उमरिया, जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है।

    इनके अलावा भिंड, दतिया, निवाड़ी, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल और पांढुर्णा में भारी बारिश होने का अनुमान है।

    प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी मौसम बदला रहेगा। भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    सतना में 25-26 सितंबर को स्कूल बंद

    अतिवृष्टि की संभावना को देखते हुए सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने 25 और 26 सितंबर को नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किया है। यह आदेश शासकीय, अशासकीय, केंद्रीय, नवोदय और आईसीएसई समेत सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों पर लागू होगा। IMD के सतना पूर्वानुमान में 25, 26 और 27 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी दर्ज है।

    25-26 को ज्यादा असर, 27 को भी बारिश

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ अवदाब अब महत्वपूर्ण मौसमी सिस्टम के रूप में स्ट्रॉन्ग हो गया है। इसके कारण 25 और 26 सितंबर को प्रदेश में सिस्टम का असर ज्यादा रहने की संभावना है। 27 सितंबर को भी कई इलाकों में तेज बारिश हो सकती है। इसके बाद सिस्टम आगे बढ़ जाएगा।

    मानसून की विदाई में अब सिर्फ 6 दिन

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य पीरियड 1 जून से 30 सितंबर तक रहता है। यानी मानसून की विदाई में अब छह दिन बाकी हैं। इस बार भी सितंबर के आखिरी सप्ताह से प्रदेश में मानसून की वापसी शुरू होने की संभावना है। राजस्थान के कई जिलों से मानसून विदा हो चुका है।

    सामान्य से 2.4 इंच कम बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 873.4 मिमी यानी 34.4 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 935.1 मिमी यानी 36.8 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस हिसाब से प्रदेश में अब तक 2.4 इंच कम पानी गिरा है। ओवरऑल बारिश सामान्य से 7% कम है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश 2% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% कम हुई है। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश करीब 2% कम है।

    बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 23% तक कम बारिश हुई है। हालांकि, पिछले एक सप्ताह में बारिश के आंकड़े में काफी सुधार आया है। गुरुवार को भी यह आंकड़ा माइनस 2% था।

    पश्चिमी हिस्से के इन जिलों में ज्यादा कमी

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 8% से 50% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    23 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी

    प्रदेश के 23 जिलों में इस सीजन अब तक औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

  • MP में आज 10 जिलों में तेज बारिश की चेतावनी, पूर्वी हिस्से में अति भारी बारिश के आसार

    MP में आज 10 जिलों में तेज बारिश की चेतावनी, पूर्वी हिस्से में अति भारी बारिश के आसार


    भोपाल। मानसून की विदाई से पहले मध्य प्रदेश में एक बार फिर बारिश का सिस्टम सक्रिय हो गया है। गुरुवार को 10 जिलों में तेज बारिश का अनुमान है, जबकि 25 और 26 सितंबर को इसका असर और बढ़ने की संभावना है। इन दोनों दिनों में पूर्वी मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट है। प्रदेश में अब तक औसत 34.3 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे की 91.9% है।

    मौसम केंद्र (IMD) के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना अवदाब अब महत्वपूर्ण मौसमी सिस्टम के रूप में विकसित हो रहा है। अगले 24 घंटे के बाद इसके और मजबूत होने की संभावना है। इसके प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

    आज इन 10 जिलों में तेज बारिश

    गुरुवार को छतरपुर, पन्ना, सतना, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा में भारी बारिश होने का अनुमान है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, अनूपपुर, सागर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    25-26 सितंबर को बढ़ेगा बारिश का असर

    बंगाल की खाड़ी से बने सिस्टम के मजबूत होने के बाद 25 और 26 सितंबर को प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। खासकर पूर्वी हिस्से के अधिकांश जिलों में भारी से अति भारी बारिश हो सकती है। मानसून की विदाई से पहले सिस्टम का सक्रिय होना प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का एक और दौर ला सकता है।

    मानसून की विदाई में अब सिर्फ 6 दिन

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य समय 1 जून से 30 सितंबर तक रहता है। ऐसे में मानसून की औपचारिक विदाई में अब छह दिन बाकी हैं। इस बार भी सितंबर के आखिरी सप्ताह से मानसून की वापसी शुरू होने की संभावना है। राजस्थान के कई जिलों से मानसून लौट चुका है।

    बुधवार को कई जिलों में हुई तेज बारिश

    इससे पहले बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहा। राजधानी भोपाल में रुक-रुककर कभी तेज तो कभी हल्की बारिश हुई। नर्मदापुरम के इटारसी में करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई। खरगोन में भी करीब आधे घंटे हुई तेज बारिश के कारण अनाज मंडी में रखा लगभग 200 क्विंटल मक्का भीग गया। इसके अलावा खंडवा, टीकमगढ़ समेत कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई।

    सामान्य से 2.4 इंच कम बारिश

    IMD के मुताबिक प्रदेश में अब तक 870.5 मिमी यानी 34.3 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके मुकाबले अब तक सामान्य बारिश 36.7 इंच यानी 931.7 मिमी होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में सामान्य से 2.4 इंच कम बारिश हुई है। ओवरऑल बारिश का आंकड़ा सामान्य से 7% कम है। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 2% और पश्चिमी हिस्से में 11% कम बारिश हुई है।

    पूर्वी हिस्से में इन जिलों में कमी

    जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 2% तक कम है। वहीं बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 23% तक कम बारिश दर्ज हुई है। हालांकि पिछले एक सप्ताह में इन जिलों के आंकड़ों में सुधार आया है। बुधवार को पूर्वी हिस्से में बारिश की कमी का आंकड़ा माइनस 2% रहा।

    पश्चिमी हिस्से के इन जिलों में बारिश कम

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 8% से 50% तक कम बारिश हुई है। यहां दिए आंकड़ों में खंडवा का नाम स्रोत में दो बार दर्ज है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    प्रदेश के अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • बच्चों की कल्पनाओं को मिलेगा शब्दों का आकाश, भोपाल में 26 अक्टूबर को बाल साहित्यकार सम्मेलन

    बच्चों की कल्पनाओं को मिलेगा शब्दों का आकाश, भोपाल में 26 अक्टूबर को बाल साहित्यकार सम्मेलन


    भोपाल। बच्चों की दुनिया में एक छोटी-सी कहानी भी बड़ा सपना जगा सकती है, कविता की दो पंक्तियां उनके भीतर संवेदना का दीप जला सकती हैं और किसी बाल पात्र का साहस उन्हें जीवन की कठिनाइयों से लड़ना सिखा सकता है। इसी बाल मन की कल्पनाशीलता, जिज्ञासा और संवेदना को साहित्य से जोड़ने के उद्देश्य से भोपाल में 26 अक्टूबर को बाल साहित्यकार सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

    दरअसल, अर्चना प्रकाशन न्यास के तत्वावधान में होने वाले इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से बाल साहित्यकार और साहित्यप्रेमी शामिल होंगे। सम्मेलन के साथ बाल साहित्य पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी और मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सहभागिता इस आयोजन को साहित्य के साथ बाल अधिकार, संस्कार, रचनात्मकता और बाल मनोविज्ञान के व्यापक विमर्श से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    देशभर के बाल साहित्यकारों का होगा संगम

    भोपाल में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन बाल साहित्य को केंद्र में रखकर देश के विभिन्न क्षेत्रों के रचनाकारों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। अर्चना प्रकाशन न्यास की बैठक में सम्मेलन के आयोजन का निर्णय लिया गया। बैठक में मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक विकास दवे, अर्चना प्रकाशन न्यास के निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख कैलाश चन्द्र, मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा, साहित्यकार उमेश सिंह, नुसरत मेंहदी, बाल साहित्यकार महेश सक्सेना, गोपेश्वर बाजपेयी, गोकुल सोनी, मीनू पांडे, गीत धीर, मृदुल त्यागी, सुदर्शन व्यास, देविदयाल सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।

    सम्मेलन में प्रदेश के बाहर से आने वाले बाल साहित्यकारों की सहभागिता से मध्य प्रदेश के रचनाकारों को भी देश के अन्य क्षेत्रों में लिखे जा रहे बाल साहित्य से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इससे विचारों, अनुभवों और रचनात्मक प्रयोगों का आदान-प्रदान संभव होगा।

    बाल साहित्य को मनोरंजन तक सीमित करने की जरूरत नहीं

    इस बैठक के दौरान इस बात पर भी विमर्श हुआ कि बाल साहित्य बच्चों के मनोरंजन का माध्यम भर नहीं है। वह उनके व्यक्तित्व निर्माण, भाषा विकास, कल्पनाशक्ति, नैतिक बोध और सामाजिक संवेदनाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कहानी और कविता के माध्यम से बच्चे अपने आसपास की दुनिया को समझना शुरू करते हैं। प्रकृति, परिवार, मित्रता, देश, समाज, विज्ञान, इतिहास और मानवीय संबंधों के प्रति उनकी दृष्टि विकसित होती है।

    आज डिजिटल माध्यमों के विस्तार के बीच बच्चों के पढ़ने की आदत और उनके सामने उपलब्ध सामग्री का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे समय में गुणवत्तापूर्ण बाल साहित्य की आवश्यकता और बढ़ जाती है। सम्मेलन इस प्रश्न पर भी सार्थक विमर्श का अवसर दे सकता है कि आज के बच्चे के लिए कैसा साहित्य लिखा जाए, जो उसकी भाषा में हो, उसकी जिज्ञासाओं को समझे और उसे अपनी जड़ों से जोड़ते हुए भविष्य के प्रति तैयार करे।

    बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सहभागिता से जुड़ेगा संवेदनशील पक्ष

    मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सहभागिता इस आयोजन को एक व्यापक सामाजिक संदर्भ प्रदान करती है। बाल साहित्य में बच्चों के अधिकार, सुरक्षा, सम्मान, समान अवसर, शिक्षा, संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति जैसे विषयों को रचनात्मक ढंग से स्थान दिया जा सकता है। बच्चों के लिए लिखने वाले साहित्यकार यदि बाल मन की वास्तविक चुनौतियों को समझकर रचना करें तो साहित्य उनके लिए सिर्फ कल्पना की दुनिया नहीं रहेगा, बल्कि जीवन को समझने का माध्यम भी बनेगा।

    आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने कहा कि “बाल साहित्य बच्चे के मन तक पहुंचने का सबसे सहज और प्रभावी माध्यम है। एक अच्छी कहानी बच्चे को आनंद देने के साथ ही वह उसके भीतर संवेदना, जिज्ञासा, आत्मविश्वास और सही-गलत को समझने की दृष्टि भी विकसित करती है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग इस प्रकार के प्रयासों को इसलिए महत्वपूर्ण मानता है क्योंकि बच्चों के अधिकारों की बात कानून और संस्थागत व्यवस्था तक सीमित नहीं रह सकती। समाज में बच्चों के प्रति संवेदनशील वातावरण बनाने में साहित्य और संस्कृति की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।”

    उन्होंने कहा कि “मध्य प्रदेश में बाल साहित्यकारों और बाल अधिकारों से जुड़े संस्थानों के बीच संवाद बढ़ना प्रदेश के बच्चों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने की दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।”

    साहित्य अकादमी की सहभागिता से रचनाकारों को मिलेगा मंच

    मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी की सहभागिता सम्मेलन को प्रदेश की साहित्यिक गतिविधियों से जोड़ती है। साहित्य अकादमी के निदेशक विकास दावे कहते हैं, अकादमी लंबे समय से प्रदेश में साहित्यिक विमर्श और रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने से जुड़े कार्यों में सक्रिय रही है। बाल साहित्यकार सम्मेलन के माध्यम से प्रदेश के वरिष्ठ और नवोदित बाल साहित्यकारों के बीच संवाद का यहां एक सुखद अवसर बन सकता है।

    उन्‍होंने कहा, यह आयोजन नई पीढ़ी के लेखकों को बाल साहित्य की बदलती जरूरतों को समझने और अपनी रचनाओं को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने के लिए प्रेरित कर सकता है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब बच्चों के लिए साहित्य लिखने में भाषा की सरलता के साथ विषयों की आधुनिकता भी आवश्यक हो गई है, साहित्यिक संस्थाओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।

    मध्य प्रदेश को क्या मिलेगा

    इस संबंध में अर्चना प्रकाशन न्यास के निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि सम्मेलन का सबसे बड़ा संभावित लाभ यह होगा कि भोपाल बाल साहित्य के राष्ट्रीय संवाद के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत कर सकेगा। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले साहित्यकार अपने अनुभव और रचनात्मक दृष्टि लेकर आएंगे। इससे मध्य प्रदेश के बाल साहित्यकारों को राष्ट्रीय स्तर के रचनाकारों से संवाद का अवसर मिलेगा।

    उन्‍ळोंने बताया कि दूसरा महत्वपूर्ण लाभ प्रदेश के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण बाल साहित्य की उपलब्धता और उसके प्रति जागरूकता बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है। विद्यालयों, पुस्तकालयों, शिक्षकों, अभिभावकों और साहित्यकारों के बीच यदि बाल साहित्य को लेकर संवाद बढ़ता है तो बच्चों में पढ़ने की संस्कृति को भी बल मिल सकता है। इसके अलावा स्थानीय प्रतिभाओं को सामने लाने का है। मध्य प्रदेश के अनेक छोटे शहरों और कस्बों में बाल साहित्य लिखने वाले रचनाकार सक्रिय हैं। राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन से उन्हें व्यापक मंच मिल सकता है और उनके साहित्य को प्रदेश से बाहर पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

    बाल साहित्य प्रदर्शनी होगी आकर्षण का केंद्र

    सम्मेलन के अवसर पर बाल साहित्य पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। यह प्रदर्शनी बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और साहित्यप्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन सकती है। बाल पुस्तकों और साहित्यिक सामग्री के माध्यम से यह समझने का अवसर मिलेगा कि अलग-अलग समय में बच्चों के लिए साहित्य किस प्रकार विकसित हुआ है और आज के दौर में उसकी दिशा क्या होनी चाहिए।

    ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा

    सम्मेलन में भाग लेने के इच्छुक प्रतिभागियों के लिए पंजीयन लिंक जारी किया गया है। प्रतिभागी लिंक पर अपना विवरण भरकर सम्मेलन के लिए पंजीयन करा सकेंगे। आयोजकों की ओर से देश के विभिन्न क्षेत्रों के बाल साहित्यकारों से इसमें सहभागिता का आह्वान किया गया है।

    उल्‍लेखनीय है कि प्रदेश की राजधानी भोपाल में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब बच्चों की दुनिया तेजी से बदल रही है। मोबाइल स्क्रीन और डिजिटल सामग्री के बीच पुस्तक, कहानी और कविता के साथ बच्चे का रिश्ता बनाए रखना एक बड़ी सामाजिक आवश्यकता बन गया है। यह बाल साहित्यकारों, साहित्यिक संस्थाओं और बाल अधिकारों से जुड़े संगठनों का साझा संवाद बच्चों के लिए ऐसी रचनात्मक दुनिया तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, जहां कल्पना को उड़ान मिले, संवेदना को भाषा मिले और हर बच्चे को अपने सपनों को शब्द देने का अवसर मिले।