Tag: Madhya Pradesh

  • प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में मध्य प्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य

    प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में मध्य प्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य


    भोपाल।
    हर जरूरतमंद परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराने के संकल्प को साकार करते हुए मध्य प्रदेश ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के क्रियान्वयन में देशभर में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में 10 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे आवास निर्माण एवं हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराने में देश के अग्रणी राज्यों में मध्य प्रदेश ने अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) अंतर्गत मध्य प्रदेश ने आवासों की ग्राउंडिंग में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश में 98.04 प्रतिशत आवासों की ग्राउंडिंग पूर्ण हो चुकी है। यह प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध कार्यप्रणाली का परिणाम है। वहीं 9 लाख से अधिक आवार्सी का निर्माण पूर्ण कर पात्र हितग्राहियों को सौंपा जा चुका है। योजना के माध्यम से हजारों परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार हुआ है, जिससे उनके जीवन स्तर, सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मान में सकारात्मक बदलाव आया है।

    उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, निम्न आय वर्ग एवं मध्यम आय वर्ग के शहरी परिवारों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। योजना अंतर्गत हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे मूलभूत सुविधाओं से युक्त पक्के घर में जीवन यापन कर सकें।

    गौरतलब है कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध निर्माण कार्यों के चलते प्रदेश लगातार राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। नगरीय विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक पात्र शहरी परिवार को आवास योजना का लाभ समय पर प्राप्त हो सके। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के माध्यम से प्रदेश में न केवल आवास निर्माण को गति मिली है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास, रोजगार सृजन एवं सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिला है। राज्य शासन द्वारा भविष्य में भी योजना के प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन हेतु निरंतर प्रयास किए जाते रहेंगे।

  • MP : मालवा-निमाड़ में भीषण गर्मी का कहर, 11 जिलों में लू का अलर्ट, रतलाम सबसे गर्म शहर

    MP : मालवा-निमाड़ में भीषण गर्मी का कहर, 11 जिलों में लू का अलर्ट, रतलाम सबसे गर्म शहर

    भोपाल । मध्य प्रदेश में एक बार फिर गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मालवा-निमाड़ क्षेत्र समेत इंदौर और उज्जैन संभाग के कई जिले अगले चार दिनों तक लू की चपेट में रहेंगे। मौसम विभाग ने 11 जिलों में हीट वेव का अलर्ट जारी किया है। वहीं राजधानी भोपाल में सुबह से बादल छाए रहने के बावजूद उमस और गर्मी बनी हुई है।

    मंगलवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने दोहरे रंग दिखाए। कहीं तेज लू चली तो कहीं आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हुई। निमाड़ क्षेत्र में तेज हवाओं के साथ बारिश दर्ज की गई, जबकि रतलाम में तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा।

    चक्रवात और टर्फ से बदला मौसम

    IMD के मुताबिक प्रदेश में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और टर्फ सिस्टम सक्रिय होने से कई जिलों में मौसम बदला। बालाघाट, सिवनी, दतिया, टीकमगढ़, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, सागर, छिंदवाड़ा और रायसेन में दिनभर तेज गर्मी रही, लेकिन शाम होते-होते कई जगहों पर बारिश और आंधी का असर देखने को मिला। निवाड़ी और बालाघाट में ओलावृष्टि भी हुई। भोपाल में दिन के समय बादल और धूप का मिला-जुला असर रहा, जबकि रात में कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई।

    रतलाम में लगातार तीसरे दिन रिकॉर्ड गर्मी

    मंगलवार को रतलाम लगातार तीसरे दिन प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा। यहां अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री दर्ज किया गया। इसके अलावा धार में 44.5 डिग्री, श्योपुर और शाजापुर में 44 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। खरगोन में 43.6 डिग्री, गुना में 43.3 डिग्री और सागर में 43.2 डिग्री तापमान रहा। वहीं प्रदेश के बड़े शहरों में उज्जैन सबसे गर्म रहा, जहां पारा 44.4 डिग्री तक पहुंच गया। इंदौर में 43.6 डिग्री, भोपाल में 42.6 डिग्री, जबलपुर में 42 डिग्री और ग्वालियर में 41.5 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।

    आज इन जिलों में लू का अलर्ट

    बुधवार को इंदौर, उज्जैन, रतलाम, राजगढ़, शाजापुर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, देवास, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में लू चलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार इन जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, मंदसौर, नर्मदापुरम, हरदा, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, भिंड, मुरैना, जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, रीवा, सतना, शहडोल और सागर समेत कई जिलों में तेज गर्मी का असर बना रहेगा।

    मई में 11 दिन तक बदला रहा मौसम
    प्रदेश में 30 अप्रैल से शुरू हुआ आंधी-बारिश का दौर 10 मई तक जारी रहा। कभी पश्चिमी विक्षोभ तो कभी चक्रवात और टर्फ सिस्टम के असर से प्रदेश में लगातार मौसम बदला। मई के 12 दिनों में से 11 दिन कहीं न कहीं बारिश, आंधी या ओलावृष्टि दर्ज की गई। हालांकि बुधवार के लिए मौसम विभाग ने बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया है।

  • मध्य प्रदेश में बाल विवाह रोकने के लिए बड़ा कदम: गांव स्तर तक तैनात होंगे अधिकारी

    मध्य प्रदेश में बाल विवाह रोकने के लिए बड़ा कदम: गांव स्तर तक तैनात होंगे अधिकारी



    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश सरकार ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को खत्म करने के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब राज्य में गांव स्तर तक बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी तैनात किए जाएंगे, जो मौके पर पहुंचकर तुरंत कार्रवाई कर सकेंगे।

    क्या है नई व्यवस्था?
    महिला एवं बाल विकास विभाग ने नई व्यवस्था के तहत पूरे राज्य में निगरानी प्रणाली को मजबूत किया है। इसके अनुसार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अलग-अलग अधिकारी नियुक्त होंगे। बाल विवाह की सूचना मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंचेंगे। जरूरत पड़ने पर विवाह को तुरंत रोकने की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह व्यवस्था बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत लागू की जा रही है।

    कौन होंगे जिम्मेदार अधिकारी?
    नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग स्तर पर अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है:

    ग्रामीण क्षेत्रों में 
    राजस्व निरीक्षक

    पटवारी

    महिला एवं बाल विकास पर्यवेक्षक

    शहरी क्षेत्रों में:
    नगर निगम के जोनल अधिकारी

    राजस्व और स्वास्थ्य अधिकारी

    नगरपालिका और नगर परिषद के अधिकारी

    इसके अलावा जिला कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और परियोजना अधिकारी पहले से ही इस कानून के तहत कार्रवाई के लिए अधिकृत हैं।

    अधिकारियों की शक्तियाँ
    नए प्रावधानों के तहत अधिकारी:

    बाल विवाह रोकने के लिए तत्काल मौके पर पहुंच सकेंगे

    विवाह को अवैध घोषित करने के लिए निषेधाज्ञा (injunction) जारी कर सकेंगे

    शामिल लोगों पर कानूनी कार्रवाई कर सकेंगे

    पुलिस की सहायता से विवाह रुकवा सकेंगे

    क्यों लिया गया यह फैसला?
    सरकारी आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में बाल विवाह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं:

    2020 से 2025 के बीच कुल 2,916 मामले दर्ज हुए

    वर्ष 2025 में अकेले 538 मामले सामने आए

    पिछले कुछ वर्षों में मामलों में लगभग 47% वृद्धि दर्ज की गई

    इन आंकड़ों ने सरकार को गांव स्तर तक निगरानी बढ़ाने के लिए मजबूर किया।

    उद्देश्य क्या है?
    सरकार का मुख्य उद्देश्य है:

    बाल विवाह जैसी कुप्रथा को खत्म करना

    ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाना

    समय पर हस्तक्षेप करके बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना

    मध्य प्रदेश में बाल विवाह रोकने के लिए लिया गया यह कदम एक मजबूत प्रशासनिक पहल है। गांव स्तर तक अधिकारियों की तैनाती से उम्मीद है कि अब इस सामाजिक बुराई पर तेजी से रोक लगेगी। यह व्यवस्था न केवल कानून को मजबूत बनाएगी, बल्कि समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ाएगी।

  • एमपी में थमेगा बारिश-आंधी का दौर, बढ़ेगी गर्मी, 12 मई से कई जिलों में लू चलने की चेतावनी

    एमपी में थमेगा बारिश-आंधी का दौर, बढ़ेगी गर्मी, 12 मई से कई जिलों में लू चलने की चेतावनी

    भोपाल। मध्यप्रदेश में अब मौसम का मिजाज बदलने वाला है। पिछले कई दिनों से जारी आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के बाद प्रदेश में तेज गर्मी की वापसी होने जा रही है। मौसम विभाग (IMD) ने 12 मई से कई जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। रविवार से ही तापमान में बढ़ोतरी महसूस होने लगेगी।

    भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत प्रदेश के अधिकांश शहरों में दिन के तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। रतलाम में शनिवार को अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    शनिवार को प्रदेश में ट्रफ लाइन और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय रहने के कारण कई इलाकों में बादल छाए रहे। शाम के समय भोपाल, बैतूल, सिवनी, पांढुर्णा, डिंडौरी, अनूपपुर, रायसेन, गुना, विदिशा, राजगढ़, सागर, जबलपुर, दमोह, बालाघाट, मंडला, उमरिया, शहडोल और छिंदवाड़ा में बारिश के साथ तेज आंधी चली।

    प्रदेश में 30 अप्रैल से लगातार मौसम बदला हुआ था। 9 मई तक कई जिलों में बारिश का दौर जारी रहा। इस दौरान कभी पश्चिमी विक्षोभ तो कभी ट्रफ और चक्रवातीय गतिविधियों का असर देखने को मिला, जिसके चलते मई के शुरुआती दिनों में गर्मी से राहत बनी रही। मौसम विभाग के अनुसार, 10 मई के बाद मौसम साफ होने लगेगा और तापमान तेजी से बढ़ेगा। 12 और 13 मई को प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों के कुछ जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। विभाग के अनुसार, गर्मी के दौरान पर्याप्त पानी पीते रहें, शरीर को हाइड्रेट रखें और दोपहर में लंबे समय तक धूप में निकलने से बचें। हल्के रंग और सूती कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।

  • इंदौर के द्वारकापुरी में रोड विवाद ने लिया हिंसक रूप, दो पक्षों में जमकर मारपीट

    इंदौर के द्वारकापुरी में रोड विवाद ने लिया हिंसक रूप, दो पक्षों में जमकर मारपीट


    नई दिल्ली। इंदौर के द्वारकापुरी क्षेत्र की गणेश मंदिर वाली गली में शुक्रवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब रोड चौड़ीकरण और अतिक्रमण को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। शुरुआत में हुई कहासुनी धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि मामला हिंसक झड़प में बदल गया।
    स्थानीय लोगों के अनुसार, विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक पक्ष ने सड़क चौड़ीकरण का समर्थन करते हुए दूसरे पक्ष से सहयोग की बात कही। हालांकि, दूसरे पक्ष ने इस पर सहमति नहीं जताई, जिसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद ने उग्र रूप ले लिया और लोग डंडे व पाइप लेकर एक-दूसरे पर टूट पड़े।
    घटना के वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दोनों पक्षों के लोग सड़क पर हंगामा करते हुए एक-दूसरे पर हमला कर रहे हैं। इस दौरान लात-घूंसे भी चले और कुछ लोगों के बीच झूमाझटकी की स्थिति भी बनी रही। बताया जा रहा है कि मारपीट के दौरान एक व्यक्ति का गला पकड़ने की कोशिश भी की गई। इस झड़प में दोनों पक्षों के लोग घायल हो गए।
    घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
    पुलिस के अनुसार, मामले में दोनों पक्षों की शिकायत पर क्रॉस एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें लक्की बिंजवा की शिकायत पर धीरज और गिरीश के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जबकि धीरज बिंजवा की शिकायत पर सुनील, लक्की और अभिषेक के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कुछ लोगों को राउंडअप भी किया गया है और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जा रही है।
    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विवाद की जड़ सड़क चौड़ीकरण और कथित अतिक्रमण से जुड़ी हुई है। एक पक्ष सड़क को चौड़ा करने के पक्ष में था, जबकि दूसरे पक्ष पर निर्माण कर अतिक्रमण करने के आरोप लगाए गए हैं। इसी मुद्दे पर दोनों के बीच तनाव बढ़ता गया और मामला मारपीट तक पहुंच गया।
    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि आगे किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।
  • मप्र में अब तक 9.09 लाख किसानों से 53.40 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन

    मप्र में अब तक 9.09 लाख किसानों से 53.40 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में अभी तक 9 लाख 9 हजार किसानों से 53 लाख 40 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जा रहा है। तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है।

    यह जानकारी गुरुवार को प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने दी। उन्होंने बताया कि अभी तक 14 लाख 81 हजार किसानों द्वारा गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए गए हैं। किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है।

    मंत्री राजपूत ने बताया कि किसानों को 9525.70 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं।

    उन्होंने बताया कि किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है।

    खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।

  • मध्य प्रदेश के तवा जलाशय में दिखे लुप्तप्राय इंडियन स्किमर पक्षी

    मध्य प्रदेश के तवा जलाशय में दिखे लुप्तप्राय इंडियन स्किमर पक्षी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के तवा जलाशय में लुप्तप्राय पक्षी इंडियन स्किमर (Rynchops albicollis) की मौजूदगी दर्ज की गई है। बोट गश्ती के दौरान वन विभाग के स्टाफ को कुल 8 इंडियन स्कीमर दिखाई पड़े, जिनकी तस्वीर मढ़ई रेंजर द्वारा ली गई है।

    जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व बाघों का उत्कृष्ट प्राकृतिक आवास (हैबिटेट) माना जाता है। इसी रिजर्व में स्थित तवा जलाशय में इंडियन स्कीमर की उपस्थिति से यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए एक आदर्श और सुरक्षित आवास के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

    उन्होंने बताया कि इंडियन स्किमर भारत के अत्यंत संकटग्रस्त नदी-आधारित पक्षियों में शामिल है, जिसकी संख्या लगातार घट रही है। यह पक्षी अपनी विशिष्ट लंबी निचली चोंच के लिए जाना जाता है, जिसके माध्यम से यह पानी की सतह को चीरते हुए मछलियों का शिकार करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रजाति केवल स्वच्छ जल, प्रचुर मछली संसाधन और निर्बाध रेतीले तटों वाले क्षेत्रों में ही अपना आवास बनाती है। इस लुप्तप्राय पक्षी की उपस्थिति से सतपुड़ा को विशिष्ट पहचान मिलेगी।

    तवा जलाशय के आवास में इंडियन स्किमर की उपस्थिति इस क्षेत्र के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। वन विभाग के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का संरक्षित क्षेत्र न केवल बाघों के संरक्षण में अग्रणी है, बल्कि यह अन्य संवेदनशील वन्यजीव प्रजातियों के लिए भी एक पूरी तरह से अनुकूल और सुरक्षित आवास प्रदान कर रहा है।

  • मप्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए एनएचएम और सनोफी इंडिया के बीच हुआ एमओयू

    मप्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए एनएचएम और सनोफी इंडिया के बीच हुआ एमओयू


    भोपाल।
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने मध्य प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से सनोफी इंडिया लिमिटेड के साथ मंगलवार को एक महत्वपूर्ण एमओयू किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य मधुमेह जैसे गैर-संचारी रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, उनकी शीघ्र पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करना और दुर्लभ रोगों से पीड़ित मरीजों को बेहतर सहयोग प्रदान करना है।

    एमओयू पर एनएचएम मध्य प्रदेश की मिशन डायरेक्टर डॉ. सलोनी सिडाना और सनोफी इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक अरोड़ा द्वारा हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, आयुक्त धनराजू एस सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी एवं संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    एनएचएम एमडी डॉ. सलोनी सिडाना ने इस अवसर पर कहा कि यह पहल विशेष रूप से दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से लोगों को उनके क्षेत्र में ही निःशुल्क जांच, उपचार और डॉक्टरों से टेली-परामर्श की सुविधा मिलेगी। साथ ही मधुमेह एवं अन्य गैर-संचारी रोगों के लिए जागरूकता, प्रारंभिक जोखिम पहचान और रेफरल सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि दुर्लभ रोगों के लिए शीघ्र पहचान, निःशुल्क जांच और बेहतर उपचार व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे मरीजों को समय पर उचित देखभाल मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल स्तर पर बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण और जीवनशैली से संबंधित सही जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे स्वयं स्वस्थ आदतें अपनाने के साथ अपने परिवार और समुदाय में भी जागरूकता फैला सकें।

    सनोफी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अरोड़ा ने भारत में बढ़ते एनसीडी के दृष्टिगत शीघ्र पहचान की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सनोफी स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त बनाने और मरीजों के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की साझेदारियों के प्रति प्रतिबद्ध है। यह साझेदारी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कई प्रमुख क्षेत्रों में कार्य करेगी।

    इस अवसर पर बताया कि एमओयू के तहत दुर्लभ रोगों के निदान और उपचार व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा, जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण, उन्नत तकनीकों के माध्यम से शीघ्र पहचान तथा चयनित बीमारियों की निःशुल्क जांच की सुविधा चिन्हित संस्थानों में उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही मधुमेह एवं अन्य एनसीडी के लिए प्रारंभिक जोखिम पहचान, जागरूकता अभियान और रेफरल सेवाओं को मजबूत किया जाएगा, जिसमें राज्यभर में तकनीकी सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत “किड्स एंड डायबिटीज इन स्कूल्स (KiDS)” जैसे अभियानों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को स्वस्थ जीवनशैली, पोषण और रोगों की रोकथाम के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ एवं सामुदायिक कार्यकर्ताओं के लिए क्षमता निर्माण के तहत संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।

    एमओयू के तहत सिंगरौली, बालाघाट और अनूपपुर जिलों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की तैनाती की जाएगी, जिससे दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकेंगी। इन यूनिट्स के माध्यम से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मुख कैंसर जैसी बीमारियों की निःशुल्क जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रत्येक यूनिट में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी तैनात रहेंगे तथा डॉक्टरों से टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। प्रारंभिक चरण में यह सेवा इन तीन जिलों में शुरू की जाएगी और आवश्यकता अनुसार अन्य जिलों में भी विस्तार किया जाएगा।

  • धार सड़क हादसे के बाद पसरा मातम: 16 मृतकों का हुआ अंतिम संस्कार, सरकार ने की आर्थिक मदद की घोषणा

    धार सड़क हादसे के बाद पसरा मातम: 16 मृतकों का हुआ अंतिम संस्कार, सरकार ने की आर्थिक मदद की घोषणा


    भोपाल। मध्यप्रदेश के धार जिला में हुए भीषण सड़क हादसे के बाद गुरुवार को 16 मृतकों का उनके-अपने गांवों में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इनमें 9 लोग नयापुरा, 5 सेमलीपुरा और 2 रामपुरा के निवासी थे। हादसे के बाद तीनों गांवों में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    यह दर्दनाक हादसा इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर चिकलिया फाटा के पास बुधवार रात हुआ। मजदूरों से भरा एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन टायर फटने के कारण अनियंत्रित हो गया और कई बार पलटते हुए डिवाइडर पार कर सामने से आ रही स्कॉर्पियो से टकरा गया। इस दुर्घटना में 6 बच्चों सहित 16 लोगों की मौत हो गई।

    पुलिस के अनुसार, पिकअप में करीब 46 मजदूर सवार थे और वाहन लगभग 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहा था। हादसे के बाद स्थानीय लोगों और राहगीरों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।

    इंदौर संभागायुक्त सुदाम खाड़े के मुताबिक, घायलों के इलाज के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। गंभीर रूप से घायल 7 लोगों को बेहतर उपचार के लिए इंदौर रेफर किया गया है, जबकि अन्य घायलों का इलाज जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में जारी है। धार के पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने बताया कि तेज रफ्तार और टायर फटने के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा, जिससे यह हादसा हुआ। गुरुवार सुबह सभी मृतकों का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिए गए।

    प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया दुख, सहायता राशि का ऐलान

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए की सहायता देने की घोषणा की।

    वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी घटना को हृदय विदारक बताते हुए मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए, गंभीर घायलों को 1-1 लाख रुपए और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी घायलों का नि:शुल्क इलाज कराने की बात कही गई है। प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत और उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • भोपाल में अतिथि शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, वादों पर अमल न होने से नाराजगी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    भोपाल में अतिथि शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, वादों पर अमल न होने से नाराजगी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी


    भोपाल। अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे हजारों अतिथि शिक्षकों ने बुधवार को राजधानी भोपाल में जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने सरकार पर चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया और लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। उन्होंने साफ कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

    प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने गुरुजियों की तर्ज पर नीति लागू करने, सीधी भर्ती में बोनस अंक देने और वार्षिक अनुबंध के जरिए भविष्य सुरक्षित करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे शिक्षकों में गहरा असंतोष है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अतिथि शिक्षकों को न्याय दिलाने की बात कही थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई निर्णय सामने नहीं आया है।

    सरकार पर वादों से मुकरने का आरोप

    संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी रामचंद्र नागर और प्रदेश अध्यक्ष के.सी. पवार ने कहा कि सरकार वार्षिक अनुबंध लागू करने के अपने वादे से पीछे हटती नजर आ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 30 अप्रैल के बाद कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो करीब सवा लाख अतिथि शिक्षकों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने यह भी मांग रखी कि सीधी भर्ती, प्रमोशन और ट्रांसफर से प्रभावित अनुभवी अतिथि शिक्षकों को रिक्त पदों पर प्राथमिकता के आधार पर समायोजित किया जाए।

    ई-अटेंडेंस और भुगतान में समस्याएं उठाईं

    प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने ई-अटेंडेंस प्रणाली में आ रही तकनीकी खामियों पर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई बार तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जिससे मानदेय कट जाता है। साथ ही कुछ मामलों में सितंबर महीने का भुगतान भी अभी तक लंबित है।

    भर्ती प्रक्रिया में अनुभव को लेकर उठे सवाल
    बी.एम. खान ने भर्ती प्रक्रिया में मौजूद विसंगतियों को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को उनके अनुभव का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। वर्तमान में स्कोर कार्ड में केवल 5 साल का अनुभव जोड़ा जा रहा है, जबकि इसे बढ़ाकर हर वर्ष 10 अंक (अधिकतम 100 अंक) किया जाना चाहिए। इसके अलावा 2008 और 2011 की पात्रता परीक्षाओं के अंक भी शामिल करने की मांग की गई। प्रांत अध्यक्ष तूफान शर्मा ने कहा कि अतिथि शिक्षक सभी आवश्यक योग्यताओं को पूरा करते हैं, इसलिए उनके अनुभव के आधार पर उन्हें न्याय मिलना चाहिए।

    मुख्य मांगें इस प्रकार हैं
    नियमितीकरण के लिए विशेष विभागीय पात्रता परीक्षा आयोजित कर कम से कम 30% पद अतिथि शिक्षकों के लिए आरक्षित किए जाएं।
    शिक्षक भर्ती में 50% पद अतिथि शिक्षकों के लिए तय हों, हर वर्ष 4 बोनस अंक (अधिकतम 20) दिए जाएं और पात्रता अंकों में 10% की छूट दी जाए।
    स्कोर कार्ड में हर वर्ष 10 अंक (अधिकतम 100) जोड़े जाएं और 50 दिन कार्य पूर्ण होने पर अनुभव अंक मिले, साथ ही 2011 संविदा परीक्षा के अंक भी जोड़े जाएं।
    12 महीने का वार्षिक अनुबंध लागू किया जाए और कार्यमुक्त होने पर समायोजन सुनिश्चित किया जाए।
    बीमा, पीएफ, स्वास्थ्य सुविधाएं और 13 आकस्मिक व 3 ऐच्छिक अवकाश प्रदान किए जाएं।
    ई-अटेंडेंस प्रणाली में सुधार कर काटे गए मानदेय का शीघ्र भुगतान किया जाए।
    तकनीकी समस्या होने पर ऑफलाइन उपस्थिति को मान्यता दी जाए।
    पुराने आश्वासनों को लागू करने की मांग तेज
    प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि अतिथि शिक्षकों को लेकर पहले कई घोषणाएं की गई थीं और इस मुद्दे को राजनीतिक समर्थन भी मिला था। लेकिन अब उन वादों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे शिक्षकों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।