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  • फाइलों में अटके 8 मेगा प्रोजेक्ट्स, 33 मौतें और 1800 करोड़ का अतिरिक्त बोझ: मध्य प्रदेश में अफसरशाही पर उठे गंभीर सवाल

    फाइलों में अटके 8 मेगा प्रोजेक्ट्स, 33 मौतें और 1800 करोड़ का अतिरिक्त बोझ: मध्य प्रदेश में अफसरशाही पर उठे गंभीर सवाल


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के चार प्रमुख शहरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में चल रहे जल आपूर्ति और सीवरेज से जुड़े 8 बड़े प्रोजेक्ट्स प्रशासनिक सुस्ती और अफसरशाही की देरी के चलते अधर में लटके हुए हैं। केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना के तहत शुरू हुए ये प्रोजेक्ट्स करीब साढ़े चार साल बाद भी पूरे नहीं हो सके हैं।

    देरी का सीधा असर न केवल विकास कार्यों पर पड़ा है, बल्कि इसका भारी वित्तीय बोझ भी सरकार पर पड़ा है। अब तक इन परियोजनाओं की लागत में करीब 1800 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस लापरवाही की कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है।

    इंदौर की त्रासदी: 33 मौतों ने खोली लापरवाही की पोल
    प्रशासनिक ढिलाई का सबसे दर्दनाक उदाहरण इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में सामने आया, जहां दूषित पानी पीने से जनवरी-फरवरी 2026 के बीच 33 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए। बताया जाता है कि क्षेत्र में 30 साल पुरानी नर्मदा पाइपलाइन को बदलने की मांग लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन संबंधित फाइलें महीनों तक अफसरों के पास अटकी रहीं।

    करीब 550 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के टेंडर जारी करने में भी आठ महीने की देरी हुई। जब तक काम शुरू हुआ, तब तक स्थिति बिगड़ चुकी थी और लोगों की जान जा चुकी थी।

    उज्जैन में प्रोजेक्ट ठप, फर्जी बैंक गारंटी का मामला
    उज्जैन में जल आपूर्ति और सीवरेज प्रोजेक्ट भी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। यहां एक कंपनी की बैंक गारंटी जांच में फर्जी पाई गई, जिसके बाद उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। इससे परियोजना पूरी तरह ठप हो गई और हजारों कनेक्शन व सीवरेज लाइन का काम अटक गया।

     डिजाइन और डीपीआर की खामियां बनी बड़ी वजह
    सूत्रों के अनुसार कई प्रोजेक्ट्स की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) समय पर तैयार नहीं हो सकी। डिजाइन और ड्रॉइंग में खामियों के चलते टेंडर और काम दोनों में देरी हुई। अब सरकार ने ऐसे सलाहकारों और ठेकेदारों की समीक्षा कर ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है।

     बढ़ता वित्तीय बोझ: हर शहर पर करोड़ों का अतिरिक्त दबाव
    देरी के कारण चारों शहरों में परियोजनाओं का बजट लगातार बढ़ रहा है-
    * इंदौर: ₹800 करोड़ से बढ़कर ₹1073 करोड़
    * भोपाल: ₹735 करोड़ में केवल 6% खर्च
    * ग्वालियर: ₹932 करोड़ की परियोजना में वित्तीय अंतर
    * जबलपुर: बढ़ी हुई लागत का बोझ नगर निगम पर

     समाधान की कोशिश: ग्रीन बॉन्ड का सहारा
    नगर निगम अब वित्तीय संकट से निपटने के लिए ग्रीन बॉन्ड और अन्य नगर निगम बॉन्ड जारी करने की योजना बना रहे हैं। इनका उपयोग जल, पर्यावरण और सीवरेज परियोजनाओं में किया जाएगा।

     प्रशासनिक सख्ती की तैयारी
    मुख्य सचिव स्तर पर हुई नाराजगी के बाद अब लापरवाह अफसरों और सलाहकारों पर कार्रवाई की तैयारी है। 13 जून को भोपाल में होने वाली बड़ी समीक्षा बैठक में सभी परियोजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाएगा और जिम्मेदारी तय की जाएगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर निगरानी और निर्णय लिए जाते, तो न केवल वित्तीय नुकसान रोका जा सकता था, बल्कि कई जिंदगियां भी बचाई जा सकती थीं।

  • TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का बड़ा आंदोलन: 18 जून को प्रदेशभर में सौंपेंगे ज्ञापन, 20 लाख शिक्षकों पर असर का दावा

    TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का बड़ा आंदोलन: 18 जून को प्रदेशभर में सौंपेंगे ज्ञापन, 20 लाख शिक्षकों पर असर का दावा


    मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश में टीईटी (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। मध्यप्रदेश शिक्षक संघ ने घोषणा की है कि 18 जून को प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टरों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

    संघ का कहना है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि यह प्राकृतिक न्याय और कानूनी निश्चितता के सिद्धांतों के भी विपरीत है। संगठन के पदाधिकारियों का तर्क है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय की नियमावली और चयन प्रक्रिया के तहत हुई थी, उन्हें बाद में बने मानकों के आधार पर प्रभावित करना उचित नहीं माना जा सकता।

    मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर और प्रदेश महामंत्री राकेश गुप्ता के अनुसार, 29 मई 2026 को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश सहित देशभर के लाखों शिक्षकों में असमंजस और चिंता का माहौल है। फैसले में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण होना आवश्यक माना गया है। इसके बाद से शिक्षक संगठनों में भविष्य को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं।

    संघ का कहना है कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने टीईटी को शिक्षक नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता घोषित किया था। इससे पहले विभिन्न राज्यों में नियुक्त हुए शिक्षकों ने उस समय लागू पात्रता और चयन प्रक्रिया के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी। ऐसे शिक्षक पिछले डेढ़ से दो दशकों से शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं और विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ सामाजिक जागरूकता तथा राष्ट्र निर्माण में भी योगदान दे रहे हैं।

    शिक्षक संघ का मानना है कि यदि नए नियमों को पूर्व प्रभाव से लागू किया गया तो इससे हजारों नहीं, बल्कि लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो सकता है। इसी कारण संगठन केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहा है।

    संघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की सेवाओं को वैध मानते हुए संसद के आगामी मानसून सत्र में आवश्यक विधायी संशोधन किया जाए। साथ ही एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना में भी आवश्यक बदलाव किए जाएं, ताकि पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को राहत मिल सके। संगठन का कहना है कि न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हुए भी नीति निर्माण और कानून संशोधन का अधिकार विधायिका के पास है और व्यापक जनहित को देखते हुए सरकार को सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।

    मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के अनुसार, इस मुद्दे से केवल प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। संगठन का दावा है कि मध्यप्रदेश के लगभग डेढ़ लाख और देशभर के 20 लाख से अधिक शिक्षक इस निर्णय के प्रभाव क्षेत्र में आ सकते हैं। ऐसे में 18 जून को होने वाला ज्ञापन अभियान शिक्षकों की मांगों को सरकार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

    अब सभी की नजर केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया पर टिकी है, क्योंकि इस मुद्दे का सीधा संबंध लाखों शिक्षकों के रोजगार, सेवा सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।

  • कांग्रेस में फिर दिखी अंदरूनी कलह! मंच पर दिग्विजय-हरीश चौधरी की कथित तकरार, राज्यसभा विवाद पर गरमाई सियासत

    कांग्रेस में फिर दिखी अंदरूनी कलह! मंच पर दिग्विजय-हरीश चौधरी की कथित तकरार, राज्यसभा विवाद पर गरमाई सियासत


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों राज्यसभा चुनाव को लेकर काफी गरमाई हुई है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद जहां पार्टी लगातार विरोध दर्ज करा रही है, वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के भीतर की कथित खींचतान भी चर्चा में आ गई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी के बीच कथित असहजता नजर आती है।

    वीडियो में दिखाई देता है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की ओर संकेत करते हुए कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया को अपनी बात रखने के लिए कहते हैं। इसी दौरान हरीश चौधरी उन्हें रोकते हुए कुछ कहते नजर आते हैं। इसके बाद दिग्विजय सिंह हाथ जोड़कर उनका अभिवादन करते हैं, धन्यवाद कहते हैं और फिर शांत होकर बैठ जाते हैं। हालांकि वीडियो में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं देती, लेकिन उनके हाव-भाव को लेकर राजनीतिक विश्लेषण शुरू हो गया है।

    इसके बाद जीतू पटवारी कई बार दिग्विजय सिंह से अपनी बात रखने का आग्रह करते दिखाई देते हैं, लेकिन दिग्विजय सिंह ‘हो गया’ कहकर मना कर देते हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक पर्यवेक्षक अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं। कुछ इसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद का संकेत मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे पार्टी की आंतरिक राजनीति और गुटबाजी से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

    इधर राज्यसभा चुनाव में भाजपा के तीन उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने के बावजूद पार्टी कार्यालय में जश्न का माहौल नहीं दिखाई दिया। प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद नवनिर्वाचित सांसद सीधे पार्टी नेतृत्व से मिलने पहुंचे, लेकिन प्रदेश कार्यालय में सामान्य चुनावी जीत की तरह न तो ढोल-नगाड़े बजे और न ही सार्वजनिक उत्सव देखने को मिला। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर भी चर्चाओं का दौर जारी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर चल रहा कानूनी विवाद इसका एक कारण हो सकता है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है और मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंच चुका है। ऐसे में भाजपा की ओर से संयमित रवैया अपनाए जाने की चर्चा हो रही है, हालांकि पार्टी ने इस विषय पर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है।

    इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने नामांकन निरस्त होने के मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के साथ अन्याय हुआ है और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही। दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि इस मामले में कई संस्थाओं की भूमिका सवालों के घेरे में है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी याचिका पर समय रहते सुनवाई नहीं होने से कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा। उनके इन आरोपों पर भाजपा ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल खड़ा करने वाला बयान बताया है। भाजपा नेताओं ने कहा है कि न्यायालय के संबंध में की गई ऐसी टिप्पणियां अनुचित हैं और मामले पर उचित संज्ञान लिया जाना चाहिए।

    राज्यसभा चुनाव का यह विवाद अब केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके राजनीतिक और संगठनात्मक प्रभाव भी सामने आने लगे हैं। आने वाले दिनों में न्यायालय की सुनवाई और राजनीतिक दलों की अगली रणनीति पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

  • MP: भिंड-मुरैना समेत 6 जिलों में आज ओलावृष्टि का अलर्ट, 17-18 जून तक प्रदेश में दस्तक दे सकता है मानसून

    MP: भिंड-मुरैना समेत 6 जिलों में आज ओलावृष्टि का अलर्ट, 17-18 जून तक प्रदेश में दस्तक दे सकता है मानसून


    भोपाल। मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की एंट्री अब 3 से 4 दिन की देरी से होने के संकेत हैं। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मानसून 17 से 18 जून के बीच प्रदेश के दक्षिणी जिलों में पहुंच सकता है। अनुकूल परिस्थितियां बनी रहीं तो अगले 10 से 15 दिनों के भीतर यह पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा।

    मानसून के आगमन से पहले प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां लगातार सक्रिय बनी हुई हैं। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के मुताबिक शुक्रवार को मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, बुरहानपुर, खंडवा, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना और दमोह जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अनुमान है। आंधी की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है।

    इन जिलों में बरकरार रहेगा गर्मी का असर
    मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी और खरगोन जिलों में आंधी या बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया है। ऐसे में इन क्षेत्रों में गर्मी का असर जारी रहने की संभावना है।

    ग्वालियर में आधा इंच बारिश, कई जिलों में बदला मौसम
    गुरुवार को प्रदेश में आंधी और बारिश के बीच गर्मी का प्रभाव भी बना रहा। ग्वालियर में करीब आधा इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं मंडला, सिवनी, दतिया समेत कई जिलों में शाम तक बारिश हुई। दूसरी ओर कई शहरों के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। प्रदेश के प्रमुख शहरों में ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। जबलपुर में 41.3 डिग्री, भोपाल और उज्जैन में 39.7 डिग्री तथा इंदौर में 38 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    खजुराहो और नौगांव रहे सबसे गर्म
    प्रदेश में सबसे अधिक तापमान खजुराहो और नौगांव में 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा दमोह में 42.8 डिग्री, सतना में 42.7 डिग्री, रीवा में 42.5 डिग्री, दतिया में 42.2 डिग्री, टीकमगढ़ और मंडला में 42 डिग्री, उमरिया में 41.6 डिग्री, छिंदवाड़ा में 41.4 डिग्री, मलाजखंड में 41.1 डिग्री, रायसेन और राजगढ़ में 41 डिग्री, गुना में 40.7 डिग्री, खंडवा में 40.5 डिग्री, सागर में 40.4 डिग्री तथा श्योपुर में 40 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    ब्रेक के बाद फिर सक्रिय हुआ मानसून
    मौसम विभाग के अनुसार एक दिन के विराम के बाद 11 जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में फिर से प्रगति की है। यदि मौसमीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहीं तो मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और 17 या 18 जून तक मध्य प्रदेश में प्रवेश कर सकता है।

    इन मौसम प्रणालियों का दिख रहा असर
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के पूर्वी हिस्से से एक टर्फ लाइन गुजर रही है। इसके साथ ही ऊपरी हवा में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन और एक अन्य ट्रफ सक्रिय है। इन्हीं मौसम प्रणालियों के प्रभाव से प्रदेश में मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है।

  • मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशियों ने भरा नामांकन

    मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशियों ने भरा नामांकन

    भोपाल। मध्यप्रदेश से राज्यसभा की रिक्त होने वाली तीन सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक निर्वाचन के तहत भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने शनिवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

    भाजपा प्रत्याशी रजनीश अग्रवाल और तरुण चुग ने निर्वाचन आयोग द्वारा शनिवार को नियुक्त रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा के समक्ष अपने-अपने नामांकन पत्र प्रस्तुत किए।

    नामांकन दाखिल करने के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खांडेलवाल, वरिष्ठ नेता एवं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह तथा गोविंद सिंह सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

    राज्यसभा की रिक्त सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नामांकन प्रक्रिया के दौरान भाजपा नेताओं ने उम्मीदवारों की जीत का विश्वास भी व्यक्त किया।

  • सीहोर में थाने के बाहर बच्चे के साथ बैठी महिला का मामला, पुलिस पर FIR दर्ज न करने के गंभीर आरोप

    सीहोर में थाने के बाहर बच्चे के साथ बैठी महिला का मामला, पुलिस पर FIR दर्ज न करने के गंभीर आरोप

     मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में एक महिला द्वारा न्याय की मांग को लेकर थाने के सामने अपने छोटे बच्चे के साथ सड़क पर बैठने का मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित महिला अपनी बेटी के साथ हुई कथित मारपीट की शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस थाने पहुंची थी, लेकिन आरोप है कि उसकी FIR दर्ज करने के बजाय उसे अलग-अलग थानों के बीच भटकाया जाता रहा। इस पूरी प्रक्रिया में महिला घंटों तक थाने के बाहर बैठी रही और अंततः वह थक-हारकर सड़क पर ही बैठ गई, जबकि उसके साथ छोटा बच्चा भी मौजूद था। यह स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब शाम से लेकर देर रात तक पीड़िता न्याय की उम्मीद में वहीं मौजूद रही।

    बताया जा रहा है कि घटना उस समय की है जब पीड़िता की बेटी जंगल में बकरी चराने गई थी और किसी विवाद के दौरान कुछ लोगों द्वारा उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप सामने आया। परिजनों का कहना है कि इस घटना में युवती गंभीर रूप से घायल हुई और उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मामले को अपने क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए तत्काल कार्रवाई करने के बजाय पीड़िता को एक थाने से दूसरे थाने भेजना शुरू कर दिया। इस व्यवहार से आहत होकर महिला थाने के बाहर बैठने को मजबूर हो गई।

    महिला का कहना है कि वह लगातार पुलिस से गुहार लगाती रही कि उसकी शिकायत दर्ज कर उचित जांच की जाए, लेकिन उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि कई बार उसे यह कहकर टाल दिया गया कि संबंधित थाना जाकर शिकायत दर्ज कराएं। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पीड़िता अपने छोटे बच्चे के साथ असहाय स्थिति में रही, जिससे उसकी परेशानी और बढ़ गई।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में महिला सुरक्षा और त्वरित न्याय व्यवस्था को लेकर लगातार बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आई यह घटना पुलिस की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की क्षमता पर सवाल खड़े करती है। कानून व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस को क्षेत्राधिकार के तकनीकी पहलू में उलझने के बजाय तुरंत प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए Zero FIR दर्ज करनी चाहिए, ताकि पीड़ित को राहत मिल सके और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

    घटना का एक वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा और तेज हो गई है। अब यह मामला प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है और लोगों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा है। फिलहाल देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए किस तरह की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाती है।

  • एमपी में भीषण गर्मी का दौर जारी, आज भी तीव्र लू की चेतावनी, 28 मई से तीन दिन बारिश की संभावना

    एमपी में भीषण गर्मी का दौर जारी, आज भी तीव्र लू की चेतावनी, 28 मई से तीन दिन बारिश की संभावना

    भोपाल। मध्यप्रदेश में नौतपा के शुरुआती दो दिनों में जहां कई इलाकों में आंधी और बारिश देखने को मिली, वहीं अब मौसम विभाग ने 28 मई से लगातार तीन दिन तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार यह प्री-मानसून गतिविधियों की शुरुआत मानी जा रही है। विभाग का अनुमान है कि प्रदेश में मानसून 10 से 16 जून के बीच दस्तक दे सकता है।

    बुधवार को निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा जिलों में तीव्र लू का रेड अलर्ट जारी किया गया है। टीकमगढ़ में रात के समय भी तापमान अधिक बना रहने की संभावना है। वहीं ग्वालियर और जबलपुर में भी तीव्र लू का असर रहने की चेतावनी दी गई है। राजधानी भोपाल में भी हीटवेव चलने के आसार हैं।

    मंगलवार को प्रदेश के 16 शहरों में अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया। छतरपुर जिले के खजुराहो और नौगांव सबसे गर्म रहे। खजुराहो में तापमान 46.4 डिग्री और नौगांव में 45.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

    इसके अलावा दतिया में 45.2 डिग्री, दमोह, सतना और टीकमगढ़ में 45 डिग्री, रीवा में 44.8 डिग्री, राजगढ़ में 44.6 डिग्री, श्योपुर में 44.4 डिग्री तथा गुना में 44.3 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। नरसिंहपुर में 44.2 डिग्री, जबकि सागर, मंडला, मुरैना और रायसेन में तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया।

    प्रदेश के पांच बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां पारा 44.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल में 43.2 डिग्री, जबलपुर में 43.9 डिग्री, उज्जैन में 42 डिग्री और इंदौर में 41.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    भोपाल में पिछले 14 वर्षों में सात बार नौतपा के दौरान बारिश दर्ज की गई है, जबकि दो बार केवल बूंदाबांदी हुई थी। इस बार भी नौतपा की शुरुआत में हल्की बारिश हो चुकी है। वर्ष 2018 और 2019 में सबसे अधिक गर्मी दर्ज की गई थी, जब औसत तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था।

    मौसम विभाग ने बुधवार के लिए छह जिलों—निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं 19 जिलों में तीव्र लू का ऑरेंज अलर्ट और 22 जिलों में लू का येलो अलर्ट घोषित किया गया है। इंदौर, धार, बड़वानी, झाबुआ, अलीराजपुर, हरदा, नर्मदापुरम और बैतूल में तेज गर्मी का असर रहने की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार 28 मई तक प्रदेश में गर्मी अपने चरम पर बनी रहेगी। हालांकि 29 मई से आंधी, बारिश और गरज-चमक के साथ मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • एमपी में सड़क सुरक्षा पर सख्ती, सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने 48 घंटे में गड्ढे भरने के दिए निर्देश

    एमपी में सड़क सुरक्षा पर सख्ती, सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने 48 घंटे में गड्ढे भरने के दिए निर्देश




    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश सहित देशभर में सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। कमेटी ने कहा है कि सड़कों पर बने गड्ढों, खुले नालों और जलभराव वाले खतरनाक स्थानों को गंभीरता से लिया जाए और ऐसी जगहों पर तत्काल सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

    निर्देशों के अनुसार, किसी भी गड्ढे या सड़क खामी की सूचना मिलने के बाद 48 घंटे के भीतर उसकी मरम्मत करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही खुले मैनहोल, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों में मजबूत बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टिव टेप और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करनी होगी, ताकि रात के समय दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

    कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार ही किए जाएं। लापरवाही बरतने वाले राज्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दो महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

    निर्देशों में यह भी कहा गया है कि जिला सड़क सुरक्षा समितियां नियमित ऑडिट करें और पिछले पांच वर्षों में गड्ढों और खराब सड़कों के कारण हुए हादसों का पूरा डेटा तैयार करें। इसमें मौतों और घायलों की जानकारी भी शामिल करने को कहा गया है।

    सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने अपने पत्र में कहा है कि खराब सड़कें, बिना रोशनी वाले जलभराव क्षेत्र और खुले नाले लगातार जानलेवा हादसों का कारण बन रहे हैं, जिन्हें तुरंत सुधारा जाना जरूरी है। इससे पहले भी वर्ष 2018 में सड़क सुरक्षा सुधार को लेकर इसी तरह के निर्देश जारी किए गए थे।

  • MP में गर्मी का कहर तेज, राजगढ़ 45 डिग्री के साथ सबसे गर्म, अगले 4 दिन और बढ़ेगा तापमान

    MP में गर्मी का कहर तेज, राजगढ़ 45 डिग्री के साथ सबसे गर्म, अगले 4 दिन और बढ़ेगा तापमान



    भोपाल । मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश का आधा हिस्सा इस समय हीटवेव की चपेट में है और कई जिलों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है। रविवार को राजगढ़ सबसे गर्म जिला रहा, जहां पारा 45 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं 11 जिलों में तापमान 43 डिग्री और 4 जिलों में 44 डिग्री सेल्सियस से अधिक रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री तक और बढ़ोतरी की संभावना जताई है। इसके चलते लोगों को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग के मुताबिक सोमवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, सागर, जबलपुर, छतरपुर, रीवा, मंदसौर, रतलाम, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर समेत कई जिलों में लू चलने का अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में तापमान 43 से 44 डिग्री सेल्सियस के पार रहने की संभावना है।

    वहीं राजधानी भोपाल, इंदौर और उज्जैन सहित कई जिलों में लू का अलर्ट नहीं होने के बावजूद तेज गर्मी लोगों को परेशान करेगी। मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, इंदौर, धार, देवास, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, बालाघाट, शहडोल और सिंगरौली समेत कई क्षेत्रों में दिनभर गर्म हवाएं और उमस बनी रहेगी।

    रविवार को प्रदेश के 16 शहरों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया। राजगढ़ के बाद रतलाम में 44.8 डिग्री, खंडवा में 44.5 डिग्री, नौगांव और खजुराहो में 44.4 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। इसके अलावा गुना, श्योपुर, रायसेन, नरसिंहपुर, दतिया, दमोह, खरगोन और टीकमगढ़ में भी पारा 43 डिग्री के पार पहुंचा। प्रदेश के बड़े शहरों की बात करें तो उज्जैन में 43 डिग्री, इंदौर में 42.8 डिग्री, भोपाल में 42.7 डिग्री, ग्वालियर में 42.6 डिग्री और जबलपुर में 42.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी बनी रहेगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि दोपहर के समय बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाएं।

  • एमपी, यूपी और राजस्थान में पारा 47°C तक पहुंचने की आशंका, कई राज्यों में हीटवेव और बारिश दोनों के अलर्ट

    एमपी, यूपी और राजस्थान में पारा 47°C तक पहुंचने की आशंका, कई राज्यों में हीटवेव और बारिश दोनों के अलर्ट


    नई दिल्ली। मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून सामान्य समय से पहले 26 मई के आसपास केरल पहुंच सकता है, लेकिन इसके बावजूद देश में मौसम का मिजाज चिंताजनक बना हुआ है। अमेरिकी एजेंसी NOAA की रिपोर्ट के अनुसार इस साल सुपर अल-नीनो की स्थिति बनने की संभावना है, जिससे मानसून कमजोर रह सकता है और देश के कई हिस्सों में सूखा व भीषण गर्मी बढ़ सकती है।

    अल-नीनो एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ने से मानसूनी हवाओं की दिशा प्रभावित होती है, जिससे भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में बारिश कम होने और तापमान बढ़ने की आशंका रहती है। इसी कारण इस बार बारिश सामान्य से कम और गर्मी अधिक रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    मौसम विभाग के मुताबिक इस बार मानसून केरल से 1 जून के बजाय 26 मई के आसपास प्रवेश कर सकता है, लेकिन इसके बाद अलग-अलग राज्यों में इसकी गति अलग-अलग रहेगी। अनुमान के अनुसार राजस्थान में 20 जून, मध्य प्रदेश में 12 जून, उत्तर प्रदेश में 18 जून और बिहार में 8 से 10 जून के बीच मानसून पहुंच सकता है।

    फिलहाल देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और लू का असर जारी है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड और विदर्भ में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है, जहां तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। कई इलाकों में रात के समय भी लू चलने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    मध्य प्रदेश के भोपाल में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जिससे सड़कों का डामर तक पिघलने की स्थिति बन गई। वहीं राजस्थान के फलौदी में 44.8 डिग्री और महाराष्ट्र के अमरावती में 45.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जिससे कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।

    इसके साथ ही मौसम विभाग ने अलग-अलग राज्यों में बारिश और आंधी-तूफान के अलर्ट भी जारी किए हैं। झारखंड में ऑरेंज अलर्ट, बिहार और हरियाणा के कुछ जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी है, जबकि जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।

    वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र में हीटवेव का असर अगले एक सप्ताह तक जारी रहने की आशंका है। कई राज्यों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।