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  • दुबई में AIM-2026 के मंच से सीएम मोहन यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश आने और रोजगार बढ़ाने का दिया निमंत्रण

    दुबई में AIM-2026 के मंच से सीएम मोहन यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश आने और रोजगार बढ़ाने का दिया निमंत्रण

    मध्यप्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 7 सितंबर को दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित एआईएम कांग्रेस-2026 में भाग लिया। Annual Investment Meeting के इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं और रोजगार के अवसरों को लेकर निवेशकों से संवाद किया। उन्होंने भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में शामिल होने के लिए निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया।

    एआईएम कांग्रेस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश और कारोबारी अवसरों के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। कार्यक्रम में 180 से अधिक देशों के करीब 20 हजार प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी दी गई। इसमें विभिन्न देशों की सरकारों के साथ बड़े निवेशक, कंपनियां और सोवरिन वेल्थ फंड्स निवेश से जुड़े अवसरों पर चर्चा कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने दुबई प्रवास के दौरान मध्यप्रदेश के स्थानीय उत्पादों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार के सामने रखा। बिजनेस बे स्थित ताज दुबई में आयोजित वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट और भौगोलिक संकेतक उत्पादों की प्रदर्शनी का उन्होंने उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी के जरिए राज्य की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की संभावनाएं सामने आईं।

    प्रदर्शनी में बैतूल का बेल मेटल क्राफ्ट, अशोकनगर की चंदेरी साड़ी, खरगोन के महेश्वर की महेश्वरी साड़ी, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, भोपाल की जरी-जरदोजी और ग्वालियर का कारपेट प्रदर्शित किया गया। इन उत्पादों के जरिए मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के साथ स्थानीय कारीगरों की उत्पादन क्षमता और निर्यात की संभावनाओं को भी सामने रखा गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद अहमद अल यामाही से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश, कृषि, पर्यटन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अरब देशों के निवेशकों को मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा, औषधि निर्माण, चिकित्सा उपकरण, वस्त्र, लॉजिस्टिक्स, उन्नत विनिर्माण और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़े अवसरों की जानकारी दी।

    बैठक के दौरान अरब व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल को मध्यप्रदेश आने और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में भाग लेने का निमंत्रण भी दिया गया। राज्य सरकार की कोशिश है कि अंतरराष्ट्रीय निवेश को मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास, स्थानीय कारोबार और रोजगार सृजन से जोड़ा जाए।

    दुबई यात्रा के दौरान कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश की संभावनाओं को महत्वपूर्ण बताया गया। संयुक्त अरब अमीरात खाद्य जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे बाजार में मध्यप्रदेश अपने कृषि उत्पादों और प्रसंस्कृत खाद्य सामग्री के लिए संभावित अवसर तलाश सकता है।

    आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार मध्यप्रदेश दाल उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है। राज्य अनाज उत्पादन में दूसरे स्थान पर है और देश के कुल अनाज उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 13.04 प्रतिशत बताई गई है। मक्का उत्पादन में मध्यप्रदेश पहले और गेहूं उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। गेहूं में राज्य की हिस्सेदारी 20.78 प्रतिशत बताई गई है।

    मध्यप्रदेश सोयाबीन उत्पादन के लिए भी देश में प्रमुख राज्य है और राज्य को ‘सोया प्रदेश’ के रूप में पहचान मिली है। दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कृषि उत्पादों की मांग को देखते हुए खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, भंडारण, ग्रेडिंग और लॉजिस्टिक्स में निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

    मुख्यमंत्री की इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य निवेश आकर्षित करने के साथ मध्यप्रदेश के उत्पादों और कारोबारी क्षमताओं को वैश्विक बाजार से जोड़ना है। सरकार को उम्मीद है कि नए निवेश से उद्योगों का विस्तार होगा, स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। इसके साथ ही किसानों और कारीगरों को भी बड़े बाजारों से जुड़ने का लाभ मिल सकता है।

  • मध्यप्रदेश के सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों पर सरकार सख्त, कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

    मध्यप्रदेश के सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों पर सरकार सख्त, कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

    मध्यप्रदेश। के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 11 तक पहुंच गई है। हालांकि, इस बढ़े हुए आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। घटना के बाद प्रशासन और सरकार की सक्रियता बढ़ गई है।

    बताया जा रहा है कि संदिग्ध शराब के सेवन के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ी थी। इसके बाद प्रभावित लोगों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना में कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि संदिग्ध शराब कहां से आई तथा इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जहरीली या अवैध शराब के कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन को मामले की तह तक जाकर जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

    उपमुख्यमंत्री एवं आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा ने घटना को लेकर अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने सागर के कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी हासिल की। स्थिति का जायजा लेने और जांच की निगरानी के लिए आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    घटना के बाद क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई तेज किए जाने की बात कही गई है। प्रशासन की ओर से संदिग्ध ठिकानों पर जांच और छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों का उद्देश्य अवैध शराब की आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क का पता लगाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है। मामले में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इस बीच घटना को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया ने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के कारण अवैध शराब का कारोबार बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार के सुशासन के दावों पर भी सवाल उठाए।

    कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में पहले भी शराब से जुड़े गंभीर हादसे सामने आ चुके हैं और इसके बावजूद अवैध शराब के नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाया है। पार्टी ने सरकार से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा पूरे नेटवर्क की जांच कराने की मांग की है।

    हालांकि, कांग्रेस के इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल प्रशासन का मुख्य फोकस घटना की वास्तविक वजह पता लगाने, संदिग्ध शराब की जांच कराने, प्रभावित लोगों को उपचार उपलब्ध कराने और जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने पर है। मौतों के अंतिम आंकड़े और हादसे की पूरी तस्वीर आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • मध्य प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा, एडीबी सहयोग से ओंकारेश्वर में 600 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजना की तैयारी

    मध्य प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा, एडीबी सहयोग से ओंकारेश्वर में 600 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजना की तैयारी

    मध्य प्रदेश: सरकार नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ ग्रीन एनर्जी को राज्य के आर्थिक और औद्योगिक विकास से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार का जोर सौर ऊर्जा समेत स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के विस्तार पर है। इसके साथ ही निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर तैयार करने को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

    इसी क्रम में रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड और एशियन डेवलपमेंट बैंक के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की तीन प्रमुख परियोजनाओं के लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजरी सर्विसेज उपलब्ध कराई जा रही हैं। खास बात यह है कि इन सलाहकारी सेवाओं के लिए एडीबी की ओर से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है।

    सरकार की योजना ऐसे व्यावसायिक मॉडल और लेनदेन ढांचे तैयार करने की है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश करना आसान हो और उनका संचालन लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बना रहे। इससे निजी और संस्थागत निवेशकों के लिए परियोजनाओं में भागीदारी की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है।

    ओंकारेश्वर में प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर परियोजना इस योजना का प्रमुख हिस्सा है। जलाशय की सतह पर सौर पैनल स्थापित कर बिजली उत्पादन करने वाली इस तकनीक के जरिए उपलब्ध जल क्षेत्र का उपयोग किया जाएगा। ओंकारेश्वर में 278 मेगावाट क्षमता के एक चरण के लिए परियोजना संबंधी समझौता किया गया है।

    इसके अलावा ओंकारेश्वर में लगभग 300 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने के लिए जरूरी जलाशय क्षेत्र और आधारभूत ढांचा उपलब्ध बताया गया है। इस तरह कुल मिलाकर करीब 600 मेगावाट क्षमता वाले फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट की दिशा में तैयारी की जा रही है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सर्वेक्षण, प्री फिजिबिलिटी और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट से संबंधित अध्ययन भी किए जा चुके हैं।

    नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की प्रकृति को देखते हुए सरकार अब बिजली भंडारण को भी परियोजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है। सौर ऊर्जा दिन के समय उपलब्ध रहती है, जबकि बिजली की मांग कई बार अलग-अलग समय पर बढ़ती है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणाली उत्पादन और मांग के बीच संतुलन बनाने में उपयोगी हो सकती है।

    ओंकारेश्वर की प्रस्तावित परियोजना में दो घंटे की को-लोकेटेड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम व्यवस्था का प्रावधान रखा गया है। इससे सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली को जरूरत के समय इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाने की योजना है। पीएम सूर्य सरोवर योजना के तहत ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान भी बताया गया है।

    राज्य सरकार का लक्ष्य केवल सौर बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना नहीं है। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को औद्योगिक निवेश, ग्रीन इन्वेस्टमेंट, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से जोड़ना चाहती है। इसके लिए परियोजनाओं को वित्तीय और तकनीकी रूप से व्यवहारिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

    मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा की उपलब्ध संभावनाओं, जलाशयों और विकसित हो रहे ऊर्जा ढांचे को देखते हुए सरकार आने वाले समय में इस क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावना तलाश रही है। एडीबी के साथ सहयोग और ओंकारेश्वर जैसी परियोजनाओं को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऊर्जा उत्पादन, भंडारण और निवेश को एक साथ आगे बढ़ाकर राज्य को ग्रीन और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने की कोशिश की जा रही है।

  • एमपी में बारिश के बीच NDRF-SDRF तैनात, अचानक बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

    एमपी में बारिश के बीच NDRF-SDRF तैनात, अचानक बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

    मध्य प्रदेश: में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन और राहत व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में इन दिनों बारिश दर्ज की जा रही है। पश्चिमी मध्य प्रदेश को छोड़कर कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई है। मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल की टीमों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में संभावित जलभराव, अचानक बाढ़ और अन्य आपदा जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए राहत एवं बचाव व्यवस्था पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी आकस्मिक स्थिति में प्रभावित लोगों तक राहत और सहायता तेजी से पहुंचाई जा सके।

    सरकार के अनुसार, पिछले एक महीने के दौरान आपदा प्रबंधन से जुड़ी राहत और बचाव टीमों ने 2,783 से अधिक लोगों को विभिन्न परिस्थितियों में सुरक्षित बाहर निकाला है। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई इलाकों में जलस्तर बढ़ने और आवागमन प्रभावित होने जैसी स्थितियां बनी हैं। ऐसे में राहत दलों को जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रखा गया है।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अब तक बारिश के कारण प्रदेश में जान-माल का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य में पुलिस और संबंधित टीमों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। उनका जोर इस बात पर रहा कि मौसम की स्थिति अचानक बदलने पर प्रशासन के पास तत्काल प्रतिक्रिया देने की क्षमता बनी रहे।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले दो से चार दिनों के दौरान किसी बड़ी परेशानी की आशंका नहीं बताई गई है। इसके बावजूद सरकार ने एहतियाती स्तर पर तैयारियों को मजबूत रखने का फैसला किया है। खासतौर पर निचले इलाकों, जलभराव वाले क्षेत्रों और ऐसे स्थानों पर निगरानी बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है, जहां अचानक पानी बढ़ने की संभावना रहती है।

    NDRF और SDRF की टीमें जरूरत के अनुसार राहत और बचाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रखने का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। प्रशासन की ओर से स्थानीय स्तर पर भी संसाधनों और राहत व्यवस्थाओं को तैयार रखने पर जोर दिया गया है।

    बारिश के दौरान नदी-नालों और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय है। जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में लोगों को समय पर चेतावनी देने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    सरकार का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बारिश के दौरान उत्पन्न होने वाली आकस्मिक परिस्थितियों को देखते हुए राहत दलों को सक्रिय रखा गया है। मुख्यमंत्री की समीक्षा के बाद प्रशासनिक मशीनरी को मौसम से जुड़े बदलावों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

    राज्य में मानसून के दौरान हर वर्ष अलग-अलग क्षेत्रों में अतिवृष्टि, जलभराव और अचानक बाढ़ जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं। ऐसे में पहले से की गई तैयारी नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाती है। इसी उद्देश्य से सरकार ने राहत एवं बचाव दलों की तैनाती, अधिकारियों के समन्वय और स्थानीय स्तर पर संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता बारिश के दौरान लोगों की सुरक्षा बनाए रखना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत पहुंचाना है।

  • देशभर में चीनी के दाम में तेज उछाल, उत्तर प्रदेश से महानगरों तक महंगी हुई रोजमर्रा की जरूरत

    देशभर में चीनी के दाम में तेज उछाल, उत्तर प्रदेश से महानगरों तक महंगी हुई रोजमर्रा की जरूरत

    नई दिल्ली ।देशभर में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। त्योहारों और शादियों के सीजन से पहले रोजमर्रा की इस जरूरी वस्तु के महंगे होने से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ने की आशंका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में करीब 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चीनी के दाम में 10 से 18 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    चीनी की कीमतों में सबसे अधिक वृद्धि ओडिशा में दर्ज की गई है। 21 अगस्त को यहां चीनी का भाव 64.72 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 17.80 रुपये अधिक है। इसके बाद मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में भी कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

    देश में चीनी की औसत कीमत फिलहाल करीब 58.23 रुपये प्रति किलोग्राम बताई जा रही है। हालांकि कई राज्यों में खुदरा बाजार का भाव राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है। असम, दिल्ली, गोवा, केरल, मध्य प्रदेश, मेघालय, पंजाब, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल समेत कई इलाकों में चीनी की कीमत 65 रुपये प्रति किलो या उससे अधिक के स्तर तक पहुंच गई है।

    मध्य प्रदेश में भी चीनी के दाम में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। पिछले महीने की समान तारीख की तुलना में राज्य में कीमत करीब 15.70 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ी है। पंजाब में भी लगभग 14.67 रुपये प्रति किलो की वृद्धि दर्ज की गई है। इन बढ़ती कीमतों का असर घरों के साथ-साथ मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य कारोबारों पर भी पड़ सकता है।

    उत्तर प्रदेश में स्थिति विशेष रूप से चर्चा में है। यहां चीनी मिलों से निकलने वाली चीनी का थोक भाव 5,400 से 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। थोक बाजार में तेजी का सीधा असर खुदरा कीमतों पर दिखाई दे रहा है और कई स्थानों पर उपभोक्ताओं को चीनी के लिए 65 से 68 रुपये प्रति किलो तक खर्च करना पड़ रहा है।

    दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी अच्छी गुणवत्ता वाली चीनी की खुदरा कीमत 65 से 70 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ महानगरों में एक महीने के भीतर ही चीनी के दाम में 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।

    बढ़ती कीमतों के पीछे बाजार में आपूर्ति और मांग से जुड़े कई कारक अहम माने जा रहे हैं। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ती है। ऐसे में यदि बाजार में उपलब्धता अपेक्षाकृत सीमित रहती है तो कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।

    सरकार भी चीनी बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि खुदरा बाजार में अलग-अलग शहरों और गुणवत्ता के आधार पर वास्तविक कीमत में अंतर हो सकता है।

    वर्तमान स्थिति में दिल्ली में चीनी का खुदरा भाव करीब 60 से 63 रुपये किलो, मुंबई में 65 से 70 रुपये, कोलकाता में 64 से 70 रुपये, पंजाब और ओडिशा में 64 से 65 रुपये, लखनऊ में 65 से 68 रुपये तथा पटना में 65 से 68 रुपये किलो के आसपास बताया गया है। आने वाले दिनों में त्योहारों की मांग और बाजार की आपूर्ति के आधार पर कीमतों में आगे बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों और माताओं को पोषण आहार उपलब्ध कराने बदली व्यवस्था, स्व-सहायता समूहों से तैयार हो रहा टेक होम राशन

    आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों और माताओं को पोषण आहार उपलब्ध कराने बदली व्यवस्था, स्व-सहायता समूहों से तैयार हो रहा टेक होम राशन

    मध्यप्रदेश: में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक पूरक पोषण आहार की पहुंच को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने टेक होम राशन व्यवस्था में बदलाव किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग ने अगस्त के पहले सप्ताह से नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत स्थानीय स्व-सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किया गया टेक होम राशन पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। सरकार का जोर पोषण व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने के साथ महिलाओं और बच्चों को नियमित पोषण सहायता उपलब्ध कराने पर है।

    पूरक पोषण कार्यक्रम के तहत पात्र हितग्राहियों को वर्ष में कम से कम 300 दिन पूरक पोषण सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों पर प्रतिदिन नाश्ता और गर्म पका भोजन दिया जा रहा है। वहीं छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती तथा धात्री माताओं के लिए मंगलवार को गर्म पका भोजन और शेष दिनों में टेक होम राशन उपलब्ध कराया जाता है। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों पर स्थानीय स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार टेक होम राशन का वितरण शुरू किया गया है।

    इस बदलाव से पोषण आहार की उपलब्धता को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने के साथ स्व-सहायता समूहों की भागीदारी भी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय समूहों के माध्यम से तैयार होने वाले राशन से आंगनवाड़ी सेवाओं से जुड़े हितग्राहियों को निर्धारित पोषण सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाया जा रहा है। छह से 60 माह के अति गंभीर कुपोषित बच्चों और छह से 72 माह के अति कम वजन वाले बच्चों के लिए अतिरिक्त पोषण आहार के रूप में भी स्थानीय स्तर पर तैयार टेक होम राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।

    बच्चों की पोषण स्थिति की नियमित निगरानी के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों पर उनका वजन और लंबाई या ऊंचाई मापी जाती है। इन आंकड़ों को पोषण ट्रैकर पर दर्ज किया जाता है, जिससे बच्चों की पोषण स्थिति पर नजर रखी जा सके। चिन्हित बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण परामर्श और आवश्यक देखभाल के साथ जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग तथा पोषण पुनर्वास केंद्रों से समन्वय कर रेफरल की कार्रवाई की जाती है।

    हर महीने आयोजित दस दिवसीय शारीरिक माप दिवसों में जन्म से छह वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच की जाती है। कुपोषण की स्थिति वाले चिन्हित बच्चों का आवश्यक कार्यक्रमों के तहत पंजीयन कर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाता है। मैदानी अमले द्वारा गृहभेंट के माध्यम से बच्चों की स्थिति का फॉलोअप करने के साथ परिवारों को पोषण और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी दिया जाता है।

    विशेष जनजातीय क्षेत्रों में भी बच्चों और माताओं तक पोषण सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान के अंतर्गत जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से 681 नवीन आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन शुरू किया गया है। सहरिया, बैगा और भारिया जैसे विशेष जनजातीय समूहों के क्षेत्रों में आंगनवाड़ी सेवाओं, पूरक पोषण आहार और बच्चों की वृद्धि तथा पोषण स्थिति की निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है।

    स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय से नियमित स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य जांच, रेफरल और फॉलोअप की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। नई टेक होम राशन व्यवस्था के जरिए पोषण सेवाओं को अधिक स्थानीय और सतत बनाने की कोशिश की गई है। अगस्त के पहले सप्ताह से शुरू हुई यह व्यवस्था बच्चों और माताओं तक पूरक पोषण आहार की पहुंच मजबूत करने के साथ स्व-सहायता समूहों की भूमिका बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

  • पत्नी की हत्या के बाद बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप, बेटे ने बचकर पुलिस को दी सूचना; बेटी की मौत

    पत्नी की हत्या के बाद बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप, बेटे ने बचकर पुलिस को दी सूचना; बेटी की मौत


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया इलाके में सोमवार देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। झलारिया गांव में रहने वाले 37 वर्षीय ड्राइवर सुनील चौहान पर अपनी पत्नी की हत्या करने और इसके बाद दोनों बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप है। घटना के बाद 10 वर्षीय बेटी माही की मौत हो गई जबकि 8 वर्षीय बेटा अजय किसी तरह तालाब से बाहर निकलने में सफल रहा। बाहर आने के बाद बच्चे ने वहां से गुजर रही पुलिस की एफआरवी टीम को पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर उसे हिरासत में ले लिया।

    पुलिस के अनुसार सुनील अपनी पत्नी अनीता बाई के साथ झलारिया गांव में किराए के मकान में रहता था। सोमवार रात किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। शुरुआती जांच में पुलिस को दंपती के बीच लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद की जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक पत्नी के अन्य लोगों से बातचीत करने को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। हालांकि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था इसकी पुष्टि विस्तृत जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

    पुलिस का कहना है कि विवाद के बाद आरोपी ने कथित तौर पर पत्नी पर चाकू से हमला किया और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद वह दोनों बच्चों को लेकर हिंगोनिया गांव के पास स्थित एक तालाब पर पहुंचा। आरोप है कि उसने दोनों बच्चों को तालाब में फेंक दिया। इस दौरान 8 वर्षीय अजय किसी तरह पानी से बाहर निकल आया और अपनी जान बचाई। इसके बाद उसने आसपास मौजूद लोगों और पुलिस टीम को घटना की जानकारी दी। बच्चे से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।

    जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम झलारिया गांव पहुंची लेकिन आरोपी वहां मौजूद नहीं था। पुलिस के मुताबिक वह रात में इलाके से निकलने की तैयारी में था। उसकी तलाश के लिए पुलिस टीम बनाई गई। इसी दौरान पुलिस को वह आसपास घूमता हुआ मिला और उसे हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पत्नी पर हमला करने और बच्चों को तालाब में ले जाने से जुड़ी जानकारी पुलिस को दी। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने महिला का शव बरामद किया।

    दूसरी ओर तालाब में बच्ची की तलाश के लिए एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। रात करीब ढाई बजे टीम ने मौके पर पहुंचकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कई घंटे तक चले तलाशी अभियान के बाद 10 वर्षीय माही का शव तालाब से बरामद किया गया। शुरुआती तौर पर बच्ची की मौत पानी में डूबने से होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

    महिला के शरीर पर भी चाकू के निशान मिलने की बात सामने आई है। पुलिस गला दबाने के आरोप की भी जांच कर रही है। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को सुरक्षित कर एफएसएल टीम की मदद से जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वारदात किस क्रम में हुई और घटना के पीछे आरोपी की वास्तविक मंशा क्या थी।

    पूरे घटनाक्रम के दौरान एसीपी खजराना थाना प्रभारी कनाड़िया सहित पुलिस टीम एफएसएल और एसडीआरएफ के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। मृतका और बच्ची के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी से पूछताछ के साथ घटनास्थल से जुड़े सभी साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है।

    बताया गया है कि सुनील पेशे से ड्राइवर था और कुछ समय पहले ही परिवार के साथ बापू गांधी नगर इलाके से झलारिया में किराए के मकान में रहने आया था। उसके माता पिता और परिवार के अन्य सदस्य लसूड़िया क्षेत्र के बापू गांधी नगर में रहते हैं। अनीता मूल रूप से देवास जिले के कांटाफोड़ की रहने वाली थी। सुनील का परिवार भी कांटाफोड़ से जुड़ा बताया गया है और करीब 17 से 18 वर्षों से इंदौर में रह रहा है। फिलहाल पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • शिक्षकों के लिए बड़ा अपडेट! MP में 12 अक्टूबर से TET, 150 सवालों का होगा पेपर; 21 अगस्त से भरें फॉर्म

    शिक्षकों के लिए बड़ा अपडेट! MP में 12 अक्टूबर से TET, 150 सवालों का होगा पेपर; 21 अगस्त से भरें फॉर्म


    भोपाल । मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा TET 2026 को लेकर लंबे समय से चल रही तैयारी अब अगले चरण में पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कर्मचारी चयन मंडल ESB ने प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर पढ़ा रहे संबंधित शिक्षकों के लिए परीक्षा की नियम पुस्तिका जारी कर दी है। इसके साथ ही परीक्षा की तारीख और आवेदन प्रक्रिया भी तय कर दी गई है। प्रदेश में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के इस परीक्षा में शामिल होने की संभावना है। परीक्षा का आयोजन 12 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा जबकि ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 21 अगस्त से शुरू की जाएगी।

    अभ्यर्थी 4 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन में किसी तरह की गलती होने पर संशोधन का अवसर भी दिया गया है। इसके लिए 21 अगस्त से 9 सितंबर तक का समय निर्धारित किया गया है। परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को प्रत्येक प्रश्नपत्र के लिए 1000 रुपये परीक्षा शुल्क देना होगा। इसके अलावा आवेदन के माध्यम के हिसाब से पोर्टल या कियोस्क शुल्क भी देना होगा। MP Online पोर्टल के जरिए आवेदन करने पर 60 रुपये और रजिस्टर्ड सिटीजन यूजर के माध्यम से आवेदन करने पर 20 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। आवेदन में संशोधन के लिए भी अलग शुल्क लगेगा। पहली बार संशोधन करने पर 20 रुपये और अंतिम चरण में संशोधन के लिए 40 रुपये शुल्क तय किया गया है।

    TET की फीस को लेकर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों से परीक्षा शुल्क लिए जाने का विरोध किया है। संगठन की ओर से आवेदन और परीक्षा शुल्क माफ करने के साथ ऑनलाइन परीक्षा की जगह ऑफलाइन परीक्षा कराने की मांग की गई है। इसके अलावा शिक्षकों को परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष अध्ययन अवकाश देने और ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाजनक परीक्षा केंद्र बनाए जाने की मांग भी उठाई गई है।

    प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा में कुल 150 प्रश्न पूछे जाएंगे और प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा। इस तरह परीक्षा कुल 150 अंकों की होगी। उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र हल करने के लिए 2 घंटे 30 मिनट का समय मिलेगा। खास बात यह है कि परीक्षा में नकारात्मक अंक यानी नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी। गलत उत्तर देने पर उम्मीदवार के प्राप्त अंकों में कटौती नहीं की जाएगी।

    परीक्षा में सफलता के लिए भी वर्ग के अनुसार न्यूनतम अंक निर्धारित किए गए हैं। अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे। वहीं अन्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक जरूरी होंगे। माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा में भी प्रत्येक प्रश्न एक अंक का रहेगा और नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी। परीक्षा की अवधि 2 घंटे 30 मिनट निर्धारित है।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर कार्यरत संबंधित शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा पास करना जरूरी किया गया है। नियमों के तहत पात्र शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। प्राथमिक स्तर के सरकारी स्कूलों में कार्यरत सहायक शिक्षक प्राथमिक शिक्षक सहायक अध्यापक संविदा शाला शिक्षक वर्ग 3 प्रयोगशाला सहायक प्राथमिक शिक्षक विज्ञान सहित संबंधित श्रेणियों के शिक्षक परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

    परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और अनुशासन को लेकर भी सख्त नियम लागू रहेंगे। मोबाइल फोन कैलकुलेटर स्मार्ट वॉच ब्लूटूथ डिवाइस ईयरफोन डिजिटल वॉच रिकॉर्डिंग उपकरण पेजर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान परीक्षा केंद्र में ले जाना प्रतिबंधित रहेगा। नकल अनुचित साधनों का इस्तेमाल फर्जी पहचान या किसी दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    दिव्यांग अभ्यर्थियों को नियमों के अनुसार अतिरिक्त समय और Scribe यानी लेखन सहायक की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए निर्धारित पात्रता और जरूरी शर्तों का पालन करना होगा। परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड कर्मचारी चयन मंडल की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकेगा। इसमें परीक्षा केंद्र तारीख और समय समेत जरूरी जानकारी उपलब्ध होगी। परीक्षा के बाद रिजल्ट और विषयवार मॉडल आंसर भी ऑनलाइन जारी किए जाएंगे।

    अभ्यर्थियों को प्रश्नों और उत्तरों को लेकर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी मिलेगा। प्राप्त आपत्तियों पर विषय विशेषज्ञों की समिति विचार करेगी। यदि किसी प्रश्न को निरस्त किया जाता है तो उसके अंकों की गणना नियम पुस्तिका में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। ऐसे में परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए आवेदन की तारीख से लेकर परीक्षा केंद्र के नियम और न्यूनतम उत्तीर्ण अंक तक सभी जानकारियों को ध्यान से समझना जरूरी होगा।

  • निवेश और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार, मध्य प्रदेश में 11 नए इंडस्ट्रियल पार्क का प्रस्ताव; ₹8,144 करोड़ होंगे खर्च

    निवेश और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार, मध्य प्रदेश में 11 नए इंडस्ट्रियल पार्क का प्रस्ताव; ₹8,144 करोड़ होंगे खर्च


    भोपाल । मध्य प्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मोहन सरकार ने एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया है। नई दिल्ली में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट NICDIT की तीसरी एपेक्स मॉनिटरिंग अथॉरिटी की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में औद्योगिक विस्तार का रोडमैप सामने रखा। केंद्र सरकार की भव्य यानी BHAVYA योजना के तहत मध्य प्रदेश में 11 नए आधुनिक औद्योगिक पार्क विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इन परियोजनाओं पर करीब 8144.35 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है और इसके जरिए 9 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा।

    सरकार का जोर केवल नए उद्योग लगाने तक सीमित नहीं है बल्कि मध्य प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में संतुलित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने पर भी है। प्रस्तावित औद्योगिक पार्कों को रणनीतिक रूप से अलग अलग शहरों और क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा ताकि रोजगार और निवेश के अवसर कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित न रहें। इन पार्कों में प्लग एंड प्ले मॉडल के तहत कंपनियों को पहले से तैयार बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका फायदा यह होगा कि निवेश करने वाली कंपनियों को जमीन और आधारभूत ढांचे से जुड़ी शुरुआती अड़चनों को कम करने में मदद मिलेगी और वे अपेक्षाकृत तेजी से उत्पादन या अपनी व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर सकेंगी।

    प्रस्तावित 11 औद्योगिक पार्क उज्जैन के अवंतिका इंडस्ट्रियल सेंटर धार के भेंसोला देवास और शाजापुर के पिपलरावांन पालीकालन रतलाम के पलसोड़ी सीहोर के आष्टा इंडस्ट्रियल क्लस्टर सागर के मसवासी ग्रांट गुना के चैनपुरा ग्वालियर के मोहना जबलपुर के धरमपुरा कटनी के सिमरा और रीवा के शिवसागर में विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। इन औद्योगिक क्षेत्रों के जरिए अलग अलग सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी है।

    धार के भेंसोला में प्रस्तावित पार्क को खास तौर पर टेक्सटाइल सेक्टर से जोड़कर विकसित किया जाएगा। यह क्षेत्र पहले से मौजूद पीएम मित्रा पार्क के विस्तार के रूप में काम करेगा। इसके अलावा दूसरे औद्योगिक पार्कों में फार्मा ऑटोमोबाइल रिन्यूएबल एनर्जी सेमीकंडक्टर और आईटी एवं आईटीईएस जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों को प्रोत्साहन देने की योजना है। इससे प्रदेश में पारंपरिक उद्योगों के साथ नए दौर की तकनीक आधारित इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    औद्योगिक विकास के साथ सरकार ने महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधाओं को भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी डे केयर सेंटर स्वास्थ्य सुविधाएं आधुनिक कैंटीन और विशेष हॉस्टल जैसी व्यवस्थाएं विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल तैयार करना है ताकि उद्योगों में उनकी भागीदारी बढ़ाई जा सके।

    नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मध्य प्रदेश के औद्योगिक विस्तार और निवेश को लेकर प्रस्तुत किए गए विजन पर चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय से इन परियोजनाओं को गति मिलेगी और आने वाले समय में मध्य प्रदेश में नए उद्योग निवेश और रोजगार के बड़े अवसर तैयार हो सकते हैं।

  • भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फहराया तिरंगा, परेड की सलामी के साथ दोहराया विकास का संकल्प

    भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फहराया तिरंगा, परेड की सलामी के साथ दोहराया विकास का संकल्प


    मध्य प्रदेश
    : में स्वतंत्रता दिवस का राज्य स्तरीय मुख्य समारोह भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित किया गया। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तिरंगा फहराया और इसके बाद परेड की सलामी ली। इस दौरान बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे और पूरे आयोजन के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ध्वजारोहण के बाद देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले अमर शहीदों को नमन किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प दोहराया।

    लाल परेड ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में स्वतंत्रता दिवस से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम हुए। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में ध्वजारोहण और परेड की सलामी समारोह के प्रमुख कार्यक्रम रहे। आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए विशेष इंतजाम किए गए थे।

    मुख्यमंत्री ने परेड की सलामी लेकर समारोह में शामिल दलों का अभिवादन स्वीकार किया। स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय आयोजन में परेड को विशेष महत्व दिया गया। अनुशासन और राष्ट्रीय भावना से जुड़े इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

    भोपाल में आयोजित इस समारोह के दौरान नागरिकों की मौजूदगी भी देखने को मिली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य के मुख्य समारोह में शामिल होने के लिए लोग लाल परेड ग्राउंड पहुंचे। कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर शहीदों के योगदान को याद किया और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले वीरों को नमन करते हुए उन्होंने प्रदेश के विकास की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया।

    विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प मुख्यमंत्री के संबोधन और कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य के विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

    लाल परेड ग्राउंड में आयोजित समारोह में तिरंगा फहराए जाने के बाद परेड की सलामी का कार्यक्रम हुआ। राज्य स्तरीय मुख्य समारोह होने के कारण यहां सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।

    स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भोपाल में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को याद किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के साथ स्वतंत्रता दिवस का यह महत्वपूर्ण अवसर साझा किया।

    समारोह में बड़ी संख्या में नागरिकों की मौजूदगी रही। आयोजन स्थल और आसपास सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने तिरंगा फहराने के बाद परेड की सलामी ली और अमर शहीदों को नमन करते हुए विकसित एवं आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प दोहराया।