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  • 20 साल पुराने पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में नया मोड़, सभी आरोपी बरी होने के बाद CBI पहुंचाएगी मामला हाई कोर्ट

    20 साल पुराने पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में नया मोड़, सभी आरोपी बरी होने के बाद CBI पहुंचाएगी मामला हाई कोर्ट

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े बहुचर्चित पवनराजे निंबालकर हत्याकांड ने एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। लगभग दो दशक पुराने इस मामले में मुंबई की सेशंस कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का निर्णय लिया है। इससे यह मामला एक बार फिर न्यायिक समीक्षा के दायरे में आने जा रहा है।

    यह मामला वर्ष 2006 में हुई उस सनसनीखेज घटना से जुड़ा है, जिसमें कांग्रेस से जुड़े नेता पवनराजे निंबालकर की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। हमले में उनके वाहन चालक की भी जान चली गई थी। उस समय इस घटना ने महाराष्ट्र की राजनीति में व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की थी और कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच बाद में केंद्रीय एजेंसी को सौंपी गई थी।

    जांच के दौरान एजेंसी ने कई वर्षों तक साक्ष्य जुटाने, गवाहों के बयान दर्ज करने और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने का काम किया। लंबी जांच प्रक्रिया के बाद आरोपपत्र दायर किया गया, जिसमें कई आरोपियों के नाम शामिल किए गए। मामले में एक आरोपी को सरकारी गवाह बनाए जाने की भी चर्चा रही, जिसे जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया था।

    इसके बाद अदालत में लंबे समय तक सुनवाई चली। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए तथा अनेक दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य न्यायालय के समक्ष रखे गए। कई वर्षों तक चले इस मुकदमे के बाद अदालत ने सभी पहलुओं पर विचार करते हुए फैसला सुनाया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसी आधार पर सभी नौ आरोपियों को बरी कर दिया गया।

    हालांकि, केंद्रीय जांच एजेंसी इस निष्कर्ष से सहमत नहीं है। एजेंसी का मानना है कि जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्य और गवाहियों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला पर्याप्त रूप से स्थापित किया गया था। एजेंसी का कहना है कि ट्रायल के दौरान प्रस्तुत सामग्री को ध्यान में रखते हुए आरोपों की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों का अलग मूल्यांकन आवश्यक है।

    इसी कारण एजेंसी ने अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का फैसला किया है। कानूनी प्रक्रिया के तहत अब विस्तृत अपील तैयार की जाएगी, जिसमें ट्रायल कोर्ट के निर्णय पर विभिन्न आधारों पर सवाल उठाए जा सकते हैं। इसके बाद उच्च न्यायालय यह तय करेगा कि मामले में पुनर्विचार की आवश्यकता है या नहीं।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आपराधिक मामलों में बरी होने के आदेश के खिलाफ अपील करना असामान्य नहीं है, विशेषकर तब जब जांच एजेंसी को लगता हो कि उपलब्ध साक्ष्यों का पर्याप्त मूल्यांकन नहीं हुआ है। ऐसे मामलों में उच्च न्यायालय ट्रायल रिकॉर्ड, साक्ष्यों और कानूनी तर्कों का पुनः परीक्षण कर सकता है।

    पवनराजे निंबालकर हत्याकांड लंबे समय से महाराष्ट्र के चर्चित राजनीतिक और आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। इस मामले में आए हालिया फैसले और उसके बाद अपील की तैयारी ने इसे फिर से सुर्खियों में ला दिया है। अब सभी की निगाहें उच्च न्यायालय की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि मामले में आगे किस दिशा में कानूनी प्रक्रिया बढ़ती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई न केवल इस मामले के भविष्य को प्रभावित करेगी, बल्कि लंबे समय से लंबित इस प्रकरण के कानूनी निष्कर्ष को भी नई दिशा दे सकती है। फिलहाल, ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुई नई न्यायिक प्रक्रिया पर राजनीतिक और कानूनी दोनों वर्गों की नजर बनी हुई है।

  • लोकसभा में बदले शिवसेना के समीकरण, 6 सांसदों ने किया अलग होने का दावा, एकनाथ शिंदे खेमे की ताकत बढ़ने के संकेत

    लोकसभा में बदले शिवसेना के समीकरण, 6 सांसदों ने किया अलग होने का दावा, एकनाथ शिंदे खेमे की ताकत बढ़ने के संकेत

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने संभावित राजनीतिक चुनौतियों और पार्टी के भीतर टूट की आशंकाओं के बीच लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर महत्वपूर्ण मांग उठाई है। पार्टी ने संसद में अपनी राजनीतिक पहचान और अधिकारों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से आग्रह किया है कि केवल शिवसेना (यूबीटी) को ही अधिकृत राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जाए और किसी अन्य गुट को इस नाम पर कोई विशेष दर्जा या सुविधा प्रदान न की जाए।

    पार्टी की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि कोई अलग धड़ा, बागी समूह या अन्य राजनीतिक गुट शिवसेना के नाम पर संसद में मान्यता प्राप्त करने का प्रयास करता है तो उसे तत्काल स्वीकृति न दी जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि ऐसे किसी भी मामले में निर्णय लेने से पहले शिवसेना (यूबीटी) को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए। इस पहल को पार्टी की ओर से संभावित राजनीतिक परिस्थितियों के प्रति सतर्कता और संगठनात्मक हितों की रक्षा के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पार्टी के कई सांसदों के दूसरे गुट के संपर्क में होने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ सांसद राजनीतिक रुख बदल सकते हैं, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए शिवसेना (यूबीटी) ने पहले से ही संसदीय स्तर पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास शुरू कर दिया है।

    राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कुछ सांसदों के एक अलग राजनीतिक धड़े के साथ संपर्क में होने की खबरों ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। इन चर्चाओं के बीच यह भी कहा जा रहा है कि संबंधित सांसद पहले एक स्वतंत्र समूह का गठन कर सकते हैं और उसके बाद किसी अन्य गुट के साथ विलय की प्रक्रिया अपना सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अटकलों ने राजनीतिक माहौल को गर्म जरूर कर दिया है।

    शिवसेना (यूबीटी) ने अपने पत्र में संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों का भी अप्रत्यक्ष रूप से उल्लेख किया है। पार्टी ने संकेत दिया है कि यदि परिस्थितियां ऐसी बनती हैं जिनसे दल-बदल संबंधी नियम प्रभावित होते हैं, तो वह उपलब्ध कानूनी और संवैधानिक विकल्पों का उपयोग करने पर विचार कर सकती है। इससे स्पष्ट है कि नेतृत्व संभावित राजनीतिक चुनौतियों के लिए कानूनी तैयारी भी बनाए हुए है।

    उधर, पार्टी संगठन के भीतर भी सक्रियता बढ़ गई है। बदलते राजनीतिक हालात को देखते हुए नेतृत्व ने विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार संवाद शुरू किया है। आगामी रणनीति तय करने और संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण बैठकों की रूपरेखा तैयार की गई है। इन बैठकों में वर्तमान राजनीतिक स्थिति, संभावित चुनौतियों और पार्टी की आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सांसदों के स्तर पर किसी प्रकार का बड़ा बदलाव होता है तो इसका प्रभाव केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति पर भी व्यापक असर पड़ सकता है। इससे राज्य में विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधनों के बीच शक्ति संतुलन पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है। फिलहाल सभी की नजरें आने वाले दिनों की राजनीतिक गतिविधियों और संभावित निर्णयों पर टिकी हुई हैं, जो राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।

  • उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने लोकसभा स्पीकर को लिखा अहम पत्र, सांसदों की संभावित टूट के बीच पार्टी की मान्यता बचाने की बड़ी कवायद

    उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने लोकसभा स्पीकर को लिखा अहम पत्र, सांसदों की संभावित टूट के बीच पार्टी की मान्यता बचाने की बड़ी कवायद

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने संभावित राजनीतिक चुनौतियों और पार्टी के भीतर टूट की आशंकाओं के बीच लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर महत्वपूर्ण मांग उठाई है। पार्टी ने संसद में अपनी राजनीतिक पहचान और अधिकारों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से आग्रह किया है कि केवल शिवसेना (यूबीटी) को ही अधिकृत राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जाए और किसी अन्य गुट को इस नाम पर कोई विशेष दर्जा या सुविधा प्रदान न की जाए।

    पार्टी की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि कोई अलग धड़ा, बागी समूह या अन्य राजनीतिक गुट शिवसेना के नाम पर संसद में मान्यता प्राप्त करने का प्रयास करता है तो उसे तत्काल स्वीकृति न दी जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि ऐसे किसी भी मामले में निर्णय लेने से पहले शिवसेना (यूबीटी) को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए। इस पहल को पार्टी की ओर से संभावित राजनीतिक परिस्थितियों के प्रति सतर्कता और संगठनात्मक हितों की रक्षा के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पार्टी के कई सांसदों के दूसरे गुट के संपर्क में होने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ सांसद राजनीतिक रुख बदल सकते हैं, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए शिवसेना (यूबीटी) ने पहले से ही संसदीय स्तर पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास शुरू कर दिया है।

    राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कुछ सांसदों के एक अलग राजनीतिक धड़े के साथ संपर्क में होने की खबरों ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। इन चर्चाओं के बीच यह भी कहा जा रहा है कि संबंधित सांसद पहले एक स्वतंत्र समूह का गठन कर सकते हैं और उसके बाद किसी अन्य गुट के साथ विलय की प्रक्रिया अपना सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अटकलों ने राजनीतिक माहौल को गर्म जरूर कर दिया है।

    शिवसेना (यूबीटी) ने अपने पत्र में संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों का भी अप्रत्यक्ष रूप से उल्लेख किया है। पार्टी ने संकेत दिया है कि यदि परिस्थितियां ऐसी बनती हैं जिनसे दल-बदल संबंधी नियम प्रभावित होते हैं, तो वह उपलब्ध कानूनी और संवैधानिक विकल्पों का उपयोग करने पर विचार कर सकती है। इससे स्पष्ट है कि नेतृत्व संभावित राजनीतिक चुनौतियों के लिए कानूनी तैयारी भी बनाए हुए है।

    उधर, पार्टी संगठन के भीतर भी सक्रियता बढ़ गई है। बदलते राजनीतिक हालात को देखते हुए नेतृत्व ने विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार संवाद शुरू किया है। आगामी रणनीति तय करने और संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण बैठकों की रूपरेखा तैयार की गई है। इन बैठकों में वर्तमान राजनीतिक स्थिति, संभावित चुनौतियों और पार्टी की आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सांसदों के स्तर पर किसी प्रकार का बड़ा बदलाव होता है तो इसका प्रभाव केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति पर भी व्यापक असर पड़ सकता है। इससे राज्य में विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधनों के बीच शक्ति संतुलन पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है। फिलहाल सभी की नजरें आने वाले दिनों की राजनीतिक गतिविधियों और संभावित निर्णयों पर टिकी हुई हैं, जो राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।

  • माथा टेका, पूजा की और फिर दिखाया असली चेहरा, मंदिर में अनोखे अंदाज में हुई चोरी ने सबको किया हैरान

    माथा टेका, पूजा की और फिर दिखाया असली चेहरा, मंदिर में अनोखे अंदाज में हुई चोरी ने सबको किया हैरान

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र से एक ऐसी हैरान करने वाली घटना सामने आई है जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अपराधी अब वारदात को अंजाम देने के लिए किस हद तक नई तरकीबें अपनाने लगे हैं। धार्मिक आस्था और श्रद्धा से जुड़े स्थान को निशाना बनाकर अंजाम दी गई इस घटना ने लोगों को चौंका दिया है। सबसे अधिक चर्चा इस बात की हो रही है कि आरोपी ने घटना को जिस तरीके से अंजाम दिया, उसने पूरी वारदात को बेहद असामान्य बना दिया। घटना के बाद अब यह मामला लोगों के बीच चर्चा और हैरानी दोनों का विषय बना हुआ है।

    बताया जा रहा है कि आरोपी किसी सामान्य श्रद्धालु की तरह मंदिर परिसर में पहुंचा था। उसके व्यवहार और गतिविधियों को देखकर किसी को भी उस पर संदेह नहीं हुआ। मंदिर में प्रवेश करने के बाद उसने बेहद शांत और श्रद्धापूर्ण अंदाज में पूजा-अर्चना की। उसने पूरे विश्वास के साथ ऐसा व्यवहार किया मानो वह केवल दर्शन के उद्देश्य से वहां आया हो। उसके इस आचरण ने आसपास मौजूद लोगों और मंदिर से जुड़े लोगों का भरोसा पूरी तरह जीत लिया।

    घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह बताया जा रहा है कि आरोपी ने वारदात को अंजाम देने से पहले पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की प्रक्रिया पूरी की। उसने देवी के सामने हाथ जोड़कर प्रार्थना की और कुछ समय तक वहीं रुका भी। इस दौरान किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं हुआ कि कुछ ही क्षणों बाद एक बड़ी चोरी की घटना सामने आने वाली है। आरोपी के व्यवहार ने इस पूरी घटना को और अधिक रहस्यमय और चर्चा का विषय बना दिया।

    मौका मिलते ही आरोपी ने अपनी असली योजना को अंजाम दिया। बड़ी फुर्ती और चालाकी के साथ उसने मंदिर में रखी मूल्यवान वस्तु को अपने कब्जे में लिया और बेहद तेजी से वहां से निकल गया। पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि किसी को तत्काल कुछ समझ ही नहीं आया। जब तक लोगों को मामले की जानकारी हुई, तब तक आरोपी वहां से जा चुका था।

    घटना के बाद जब सुरक्षा कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी गई तो पूरी कहानी सामने आई। रिकॉर्डिंग में आरोपी की गतिविधियां स्पष्ट रूप से दिखाई देने की बात कही जा रही है। हालांकि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरे को ढक रखा था, जिसके कारण उसकी पहचान करना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। अब जांच अधिकारी तकनीकी और अन्य माध्यमों से आरोपी तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले लोगों के प्रति विश्वास का माहौल होता है और अपराधी कई बार इसी भरोसे का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत की ओर भी संकेत करती हैं। फिलहाल इस घटना ने स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है और लोग आरोपी के इस अनोखे तरीके को लेकर लगातार चर्चा कर रहे हैं। जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल में जुटी हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस घटना से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं।

  • NEET घोटाले में कार्रवाई तेज: महाराष्ट्र के कोचिंग संचालक गिरफ्तार, अब तक 10 आरोपी पकड़े गए

    NEET घोटाले में कार्रवाई तेज: महाराष्ट्र के कोचिंग संचालक गिरफ्तार, अब तक 10 आरोपी पकड़े गए


    नई दिल्ली ।
      NEET पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के लातूर स्थित केमिस्ट्री कोचिंग सेंटर के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो की इस कार्रवाई के बाद मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 10 तक पहुंच गई है, जिससे पूरे प्रकरण में शामिल नेटवर्क की परतें धीरे-धीरे सामने आ रही हैं।

    जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर है, जो लातूर सहित कई जिलों में संचालित एक कोचिंग सेंटर का संचालन करता है। CBI की टीम ने हाल ही में उसके ठिकानों पर छापेमारी की थी, जहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन से NEET UG परीक्षा से जुड़ा कथित लीक पेपर मिलने की बात सामने आई है, जिसने मामले को और गंभीर बना दिया है।

    CBI के अनुसार, आरोपी एक संगठित गिरोह का हिस्सा था, जो परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी हासिल कर उसे आगे विभिन्न माध्यमों से छात्रों तक पहुंचाने में शामिल था। जांच एजेंसी का दावा है कि 23 अप्रैल को ही पेपर और आंसर की तक पहुंच बनाई गई थी, जिसे बाद में कई लोगों को साझा किया गया। इससे परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    छापेमारी से पहले आरोपी से लंबी पूछताछ भी की गई थी, जिसमें कई अहम जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है। जांच के दौरान यह भी संदेह जताया गया है कि कोचिंग सेंटर में छात्रों को विशेष रूप से लीक हुए प्रश्नों के आधार पर तैयार कराया गया था, जिससे परीक्षा परिणामों को प्रभावित किया जा सके।

    इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े घोटाले की ओर इशारा किया है, जिसमें कई स्तरों पर मिलीभगत होने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और पेपर लीक का यह सिलसिला कितने स्तरों तक फैला हुआ है।

    इस बीच शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है, जहां विपक्षी दलों ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और जिम्मेदारी पर सवाल उठाए हैं। वहीं सरकार की ओर से जांच एजेंसियों को पूरी स्वतंत्रता देने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

    NEET जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में इस तरह की घटनाएं छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का कारण बन गई हैं। लाखों उम्मीदवारों के भविष्य से जुड़े इस मामले में अब सभी की नजरें जांच के अगले कदम और आने वाले फैसलों पर टिकी हैं।

  • PM मोदी की अपील के बाद अमृता फडणवीस ने रद्द किया कान्स फिल्म फेस्टिवल दौरा, बोलीं- ‘राष्ट्र सर्वोपरि’

    PM मोदी की अपील के बाद अमृता फडणवीस ने रद्द किया कान्स फिल्म फेस्टिवल दौरा, बोलीं- ‘राष्ट्र सर्वोपरि’



    नई दिल्ली। अमृता फडणवीस ने फ्रांस में आयोजित हो रहे Cannes Film Festival में शामिल होने का अपना दौरा रद्द कर दिया है। उन्होंने यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद लिया, जिसमें पश्चिम एशिया संकट के बीच गैरजरूरी खर्च और विदेश यात्राएं कम करने की बात कही गई थी।

    अमृता फडणवीस ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि उन्हें कान्स फिल्म फेस्टिवल में महाराष्ट्र की संस्कृति और पारंपरिक पैठणी हथकरघा कला का प्रतिनिधित्व करने का सम्मान मिला था, लेकिन “राष्ट्र सर्वोपरि” की भावना को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यात्रा रद्द करने का निर्णय लिया।

    उन्होंने बताया कि इस खास अवसर के लिए येओला की पारंपरिक पैठणी साड़ी महीनों की मेहनत से तैयार की गई थी। बावजूद इसके, उन्होंने प्रधानमंत्री की अपील का सम्मान करते हुए विदेश यात्रा टाल दी।

    अमृता फडणवीस ने कहा कि यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि इससे कई कारीगरों और डिजाइनर्स की मेहनत जुड़ी थी, लेकिन देशहित सबसे ऊपर है। उन्होंने सभी कलाकारों और सहयोगियों का आभार भी जताया।

    इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी ईंधन बचत और सादगी के संदेश के तहत चार्टर्ड विमान छोड़कर इकोनॉमी फ्लाइट और बाइक से यात्रा करते नजर आए थे।

  • सात सीटों में से अधिकांश पर भाजपा की बढ़त, कुछ जगह मुकाबला रोमांचक…

    सात सीटों में से अधिकांश पर भाजपा की बढ़त, कुछ जगह मुकाबला रोमांचक…

    नई दिल्ली।देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा उपचुनावों की मतगणना जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, राजनीतिक माहौल लगातार बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। शुरुआती रुझानों ने कई जगहों पर स्पष्ट बढ़त और कुछ स्थानों पर कड़े मुकाबले की तस्वीर पेश की है। कुल मिलाकर सात विधानसभा सीटों पर हुए इन उपचुनावों ने सियासी हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है, जहां हर अपडेट के साथ समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।

    महाराष्ट्र की बारामती सीट इस पूरे चुनावी परिदृश्य का सबसे अहम केंद्र बनी हुई है। यहां से सुनेत्रा पवार आगे चल रही हैं और मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं। इस सीट पर मतदाताओं का रुझान शुरुआत से ही खास चर्चा में रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र राज्य की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली भूमिका निभाता आया है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार यहां मुकाबला एक तरफ झुकता हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे राजनीतिक विश्लेषक भी इसके संभावित परिणामों पर नजर बनाए हुए हैं।

    इसी राज्य की राहुरी सीट पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अक्षय कर्डिले ने बढ़त हासिल कर ली है। वे लगातार मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं और उनके निकटतम प्रतिद्वंदी पीछे चलते नजर आ रहे हैं। इस सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान दोनों प्रमुख दलों ने पूरी ताकत लगाई थी, लेकिन शुरुआती रुझानों में भाजपा का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है।

    कर्नाटक की दावणगेरे साउथ सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार ने बढ़त बना रखी है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार पीछे चल रहे हैं। वहीं इसी राज्य की बागलकोट सीट पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है, जहां कांग्रेस उम्मीदवार आगे चल रहे हैं और भाजपा उम्मीदवार दूसरे स्थान पर हैं। यह स्थिति कर्नाटक में चुनावी प्रतिस्पर्धा को और दिलचस्प बना रही है, क्योंकि दोनों दल अलग-अलग सीटों पर बढ़त और नुकसान का सामना कर रहे हैं।

    त्रिपुरा की धर्मनगर सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। यहां मतगणना के शुरुआती चरण से ही पार्टी को बढ़त मिलती दिख रही है। इसी तरह गुजरात की उमरेठ सीट पर भी भाजपा ने मजबूत पकड़ बनाई हुई है और उम्मीदवार ने बड़ी बढ़त दर्ज की है। नागालैंड की कोरिडांग सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार मामूली अंतर से आगे हैं, जिससे यहां मुकाबला अभी पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता।

    इन सभी सीटों के शुरुआती रुझानों से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि कई राज्यों में सत्तारूढ़ दल का प्रभाव अभी भी मजबूत बना हुआ है, जबकि कुछ स्थानों पर विपक्षी दलों ने भी कड़ा संघर्ष किया है। हालांकि अभी अंतिम परिणाम आना बाकी है, इसलिए कई सीटों पर स्थिति बदलने की संभावना भी बनी हुई है।

    कुल मिलाकर इन उपचुनावों ने राजनीतिक माहौल को और अधिक सक्रिय और रोचक बना दिया है। हर राउंड की गिनती के साथ बढ़त और हार का अंतर बदल रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि अंतिम नतीजे तक किसी भी तरह का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अब सभी की नजरें अंतिम परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।

  • Maharashtra: दागी MPs-MLAs के सामने खड़े नहीं होंगे अधिकारी… प्रोटोकॉल नियम में बदलाव

    Maharashtra: दागी MPs-MLAs के सामने खड़े नहीं होंगे अधिकारी… प्रोटोकॉल नियम में बदलाव


    मुंबई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) की देवेंद्र फडणवीस सरकार (Devendra Fadnavis government) ने एक नया सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी करते हुए प्रोटोकॉल नियमों (Protocol Rules) में अहम बदलाव किए हैं। नए नियमों के मुताबिक, राज्य के अधिकारियों को अब से वैसे माननीय विधायकों या सांसदों के लिए खड़े होकर उनका अभिवादन करने की जरूरत नहीं है, जिन्हें दोषी ठहराया गया है, या जिन्हें किसी जांच/सुनवाई के लिए बुलाया गया है, या जो चुनाव से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए किसी सरकारी दफ्तर में मौजूद हैं।

    राज्य सरकार ने इस संबंध में मंगलवार (28 अप्रैल) को एक सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी किया, जिसमें 20 नवंबर, 2025 के पिछले निर्देशों में संशोधन किया गया है। पहले के निर्देशों में अधिकारियों के लिए यह अनिवार्य था कि जब चुने हुए प्रतिनिधि किसी बैठक के लिए आएं और बैठक खत्म होने के बाद जाएं, तो वे खड़े होकर उनका अभिवादन करें।


    नए नियमों के मुख्य बिंदु:

    मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल द्वारा 28 अप्रैल, 2026 को हस्ताक्षरित इस आदेश के अनुसार, अधिकारियों को उन स्थितियों में माननीयों को विशेष प्रोटोकॉल (जैसे खड़ा होना या विशेष अभिवादन) देने की जरूरत नहीं है, जब उनके सामने कोई ऐसे जनप्रतिनिधि आते हों जो किसी आपराधिक या अन्य मामले में दोषी ठहराए गए हों, या अगर उन्हें किसी जांच/सुनवाई के लिए अपीलकर्ता या पक्षकार के तौर पर बुलाया गया है, या अगर वे चुनाव से जुड़ी प्रक्रियाओं (जैसे नामांकन पत्र दाखिल करना, जांच-पड़ताल या सुनवाई) के लिए किसी सरकारी दफ़्तर में मौजूद हैं।

    आम नागरिकों जैसा ही व्यवहार करें
    GR में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि ऐसे मामलों में, संबंधित अधिकारियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे कानून, नियमों और मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार, बिना किसी विशेष प्रोटोकॉल के चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ आम नागरिकों जैसा ही व्यवहार करें। इससे पहले नवंबर 2025 में, तत्कालीन मुख्य सचिव राजेश कुमार ने सरकारी अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे कि वे विधायकों या सांसदों के साथ सम्मानपूर्वक और सौहार्दपूर्ण ढंग से व्यवहार करें। संशोधित खंड में कहा गया था, “अधिकारियों को विधानसभा/संसद के सदस्यों के बैठक के लिए आने पर और बैठक खत्म होने के बाद उनके जाने पर खड़े होकर उनका अभिवादन करना चाहिए।”


    मूल दिशानिर्देशों में संशोधन क्यों?

    सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह बदलाव केवल दोषी ठहराए गए व्यक्तियों और उन लोगों के संबंध में किया गया है जो जांच का सामना कर रहे हैं। अधिकारी ने कहा, “यह जरूरी है कि सरकारी अधिकारी निष्पक्ष तरीके से व्यवहार करें। जांच के लिए बुलाए गए लोगों के लिए खड़े होने का स्वाभाविक मतलब यह होगा कि अधिकारी दूसरे पक्ष के प्रति जरूरत से ज्यादा विनम्रता दिखा रहा है, जिसका असर सुनवाई के नतीजे पर पड़ सकता है। नतीजतन, हमने मूल दिशानिर्देशों में संशोधन करने का फैसला किया है।”


    एक सावधानी भी

    हालांकि, नए प्रोटोकॉल में यह बात स्पष्ट तौर पर कही गई है कि जो विधायक या सांसद किसी अपराध में दोषी नहीं हैं या किसी सामान्य काम से आए हैं, उनके लिए पुराना प्रोटोकॉल लागू रहेगा। यानी अधिकारियों को उन्हें सम्मानपूर्वक खड़े होकर अभिवादन करना होगा। उनके पत्रों का जवाब भी दो महीने के भीतर देना अनिवार्य होगा।

  • अमरावती यौन शोषण मामले में मुख्य आरोपी के घर पर चला बुलडोजर, SIT कर रही जांच

    अमरावती यौन शोषण मामले में मुख्य आरोपी के घर पर चला बुलडोजर, SIT कर रही जांच


    नई दिल्ली
    /अमरावती। महाराष्ट्र के अमरावती जिले में लड़कियों को झांसा देकर यौन उत्पीड़न करने और आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने के मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। बुधवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अयान अहमद तनवीर अहमद (19) के घर पर बुलडोजर चलाया।

    परतवाड़ा निवासी अयान अहमद को इस मामले का मुख्य आरोपी बताया जा रहा है और वह एक राजनीतिक दल का कार्यकर्ता भी है। पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें अदालत ने 21 अप्रैल तक पुलिस रिमांड में भेज दिया है। मामले की जांच के लिए आईपीएस डॉ. शुभम कुमार के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है।

    जांच अब कई गंभीर पहलुओं पर केंद्रित है, जिनमें संगठित शोषण नेटवर्क, ब्लैकमेलिंग और जबरन धर्मांतरण के आरोप शामिल हैं। भाजपा सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने दावा किया है कि यह नेटवर्क अन्य शहरों तक फैला हो सकता है। वहीं प्रशासन ने कहा है कि सभी एंगल से जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

    मोबाइल से मिले आपत्तिजनक वीडियो और फोटो
    पुलिस जांच में सामने आया है कि इस मामले में 180 से अधिक लड़कियों के शोषण और 350 से ज्यादा आपत्तिजनक फोटो-वीडियो के प्रसार की आशंका है। आरोपियों ने कथित तौर पर ट्यूशन और कोचिंग सेंटरों के बाहर लड़कियों को निशाना बनाया। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं, जिनसे अब तक 18 वीडियो और 39 तस्वीरें बरामद की गई हैं। गिरफ्तार आरोपियों में उजेर इकबाल खान, तबरेज खान तसलीम खान और मोहम्मद साद मोहम्मद साबिर शामिल हैं। पुलिस ने पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

  • श्रीरामपुर में रामनवमी जुलूस बना निशाना मस्जिद के पास पथराव से बिगड़ा माहौल

    श्रीरामपुर में रामनवमी जुलूस बना निशाना मस्जिद के पास पथराव से बिगड़ा माहौल


    नई दिल्ली:  महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के श्रीरामपुर शहर में रामनवमी के पावन अवसर पर निकाले जा रहे जुलूस के दौरान उस समय अचानक तनाव फैल गया जब जुलूस पर पथराव की घटना सामने आई यह घटना गुरुवार शाम करीब चार बजे की बताई जा रही है जब श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ जुलूस में शामिल होकर भजन कीर्तन करते हुए आगे बढ़ रहे थे

    जानकारी के अनुसार जुलूस जब सय्यद बाबा चौक से होते हुए एक स्थानीय मस्जिद के पास पहुंचा तभी अचानक मस्जिद के पीछे की ओर से कुछ अज्ञात लोगों ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया इस अप्रत्याशित पथराव से जुलूस में अफरा तफरी मच गई और लोग इधर उधर भागने लगे इस घटना में तीन लोग घायल हो गए जिनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है घायल व्यक्ति को तुरंत श्रीरामपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसका उपचार जारी है

    घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों में आक्रोश फैल गया और कुछ समय के लिए माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया हालांकि स्थिति को बिगड़ने से पहले ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मोर्चा संभाल लिया पुलिस बल ने तुरंत मौके पर पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित किया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की इसके बाद स्थिति धीरे धीरे सामान्य हुई

    पुलिस ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए मस्जिद के मौलाना सहित 10 से 12 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी गई है अधिकारियों के अनुसार घटना की हर पहलू से जांच की जा रही है ताकि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके

    इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है जिनमें धारा 190 191(1) 191(2) 192 110 और 118(1) शामिल हैं इन धाराओं के तहत आरोपियों पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी

    घटना के बाद पूरे श्रीरामपुर शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है

    गौरतलब है कि श्रीरामपुर में हर वर्ष रामनवमी का त्योहार बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है इस अवसर पर शहर में विशाल जुलूस निकाला जाता है जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं और पूरे शहर में मेले जैसा माहौल रहता है हालांकि इस बार हुई इस घटना ने उत्सव के माहौल को कुछ समय के लिए प्रभावित जरूर किया लेकिन प्रशासन की तत्परता से हालात पर काबू पा लिया गया

    फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और शहर में शांति बनी हुई है पुलिस द्वारा लगातार गश्त की जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके प्रशासन का कहना है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी