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  • NEET पेपर लीक पर पीएम मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट ऐलान का JDU ने किया समर्थन, विपक्ष को दी सदन में चर्चा की नसीहत

    NEET पेपर लीक पर पीएम मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट ऐलान का JDU ने किया समर्थन, विपक्ष को दी सदन में चर्चा की नसीहत

    नई दिल्ली । नीट पेपर लीक मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा के बाद जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी ने प्रधानमंत्री के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इस कदम से दोषियों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का रास्ता मजबूत होगा। साथ ही यह भी उम्मीद जताई गई कि मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें कठोर सजा मिलेगी।

    जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने कहा कि नीट पेपर लीक केवल परीक्षा में शामिल छात्रों का मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे लाखों अभिभावकों की भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि पूरे देश में इस घटना को लेकर चिंता और नाराजगी का माहौल है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा यह संदेश देती है कि सरकार मामले को गंभीरता से लेकर त्वरित न्याय सुनिश्चित करना चाहती है।

    उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोषियों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द कानून के दायरे में लाया जाए। यदि न्यायिक प्रक्रिया तेज होगी तो इससे छात्रों और अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे संयम बनाए रखें और न्याय व्यवस्था पर भरोसा रखें, क्योंकि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की पूरी संभावना है।

    जेडीयू ने इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। नीरज कुमार ने कहा कि यदि इस विषय पर संसद के भीतर विस्तार से चर्चा होती तो पूरे मामले के अलग-अलग पहलुओं पर गंभीर विचार-विमर्श संभव होता। उनके अनुसार, केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि सभी दलों को मिलकर परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न राज्यों में अतीत में भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों से सबक लेते हुए राजनीतिक दलों को अपनी-अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उनका मानना है कि परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाले संगठित नेटवर्क और आधुनिक तकनीकों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर साझा रणनीति तैयार की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    नीट पेपर लीक को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। विभिन्न शहरों में छात्र निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा को सरकार की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है तथा इससे छात्रों और अभिभावकों का भरोसा किस हद तक बहाल हो पाता है। आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाली कानूनी कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक विमर्श को भी नई दिशा दे सकती हैं।

  • वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की सतर्कता से शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स 77,500 के नीचे बंद, लार्जकैप शेयरों में बढ़ी बिकवाली

    वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की सतर्कता से शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स 77,500 के नीचे बंद, लार्जकैप शेयरों में बढ़ी बिकवाली

    नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे आज अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सत्ता और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से जारी संदेशों में उनके स्वस्थ, दीर्घायु और सक्रिय सार्वजनिक जीवन की कामना की गई। जन्मदिन के मौके पर नेताओं के शुभकामना संदेशों ने लोकतांत्रिक परंपराओं और राजनीतिक शिष्टाचार की भावना को भी रेखांकित किया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि ईश्वर उन्हें स्वस्थ और लंबा जीवन प्रदान करें। प्रधानमंत्री के संदेश के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपने-अपने स्तर पर उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद, स्वस्थ और मंगलमय जीवन की कामना की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें बधाई संदेश भेजते हुए स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं व्यक्त कीं। सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं की ओर से आए इन संदेशों को राजनीतिक सौहार्द का सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।

    कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पार्टी नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संगठनात्मक क्षमता और सामाजिक न्याय, संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में पार्टी जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

    उत्तर प्रदेश कांग्रेस सहित पार्टी की विभिन्न प्रदेश इकाइयों ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके नेतृत्व को करोड़ों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक बताया। संदेशों में उनके सार्वजनिक जीवन के लंबे अनुभव, संगठन निर्माण में योगदान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का उल्लेख किया गया। साथ ही उनके स्वस्थ, यशस्वी और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की गई।

    समाजवादी पार्टी ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की कामना की। विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा भेजे गए शुभकामना संदेशों ने यह भी दर्शाया कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का निर्वहन भारतीय राजनीति की महत्वपूर्ण परंपरा का हिस्सा है।

    मल्लिकार्जुन खरगे भारतीय राजनीति के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने लंबे समय तक संगठन और संसदीय राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वर्तमान में वह कांग्रेस अध्यक्ष के साथ-साथ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। उनके राजनीतिक अनुभव और संसदीय कार्यशैली को राष्ट्रीय राजनीति में विशेष महत्व दिया जाता है।

    जन्मदिन के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया। कई स्थानों पर रक्तदान शिविर, पौधारोपण, जरूरतमंदों की सहायता और अन्य जनकल्याणकारी गतिविधियां आयोजित की गईं। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने संगठन को और मजबूत बनाने तथा जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का जन्मदिन आज, सत्ता और विपक्ष के नेताओं ने दी बधाई; दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का जन्मदिन आज, सत्ता और विपक्ष के नेताओं ने दी बधाई; दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना

    नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे आज अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सत्ता और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सफल सार्वजनिक जीवन की कामना की। विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से आए शुभकामना संदेशों ने लोकतांत्रिक परंपराओं और राजनीतिक शिष्टाचार की एक सकारात्मक तस्वीर भी प्रस्तुत की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा कि वह उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं और ईश्वर से उनके दीर्घायु तथा उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं। प्रधानमंत्री के संदेश के बाद विभिन्न दलों के नेताओं ने भी अपने-अपने संदेशों के माध्यम से उन्हें जन्मदिन की बधाई दी।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और मंगलमय जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनका अनुभव लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की।

    कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पार्टी नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक न्याय, संविधान तथा जनसेवा के प्रति समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित के मुद्दों को मजबूती से आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।

    उत्तर प्रदेश कांग्रेस सहित पार्टी की विभिन्न प्रदेश इकाइयों ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके नेतृत्व को कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक बताया। शुभकामना संदेशों में उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और संगठन को मजबूत बनाने में निभाई गई भूमिका का उल्लेख किया गया। साथ ही उनके स्वस्थ, सक्रिय और यशस्वी जीवन की कामना भी की गई।

    समाजवादी पार्टी ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की प्रार्थना की। विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से आए इन संदेशों को लोकतांत्रिक परंपरा और राजनीतिक सौहार्द का प्रतीक माना जा रहा है, जहां वैचारिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और शुभकामनाओं का आदान-प्रदान जारी रहता है।

    मल्लिकार्जुन खरगे भारतीय राजनीति के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वर्तमान में वह कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ-साथ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभा रहे हैं। संसदीय राजनीति, संगठन और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल किया जाता है।

    उनके जन्मदिन के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सेवा और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों का भी आयोजन किया। कई स्थानों पर रक्तदान शिविर, पौधारोपण, जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री वितरण और अन्य सामाजिक गतिविधियां आयोजित की गईं। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने संगठन को और मजबूत बनाने तथा जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

  • मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन पर राजनीतिक दलों ने जताया सम्मान, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं ने की दीर्घायु व उत्तम स्वास्थ्य की कामना

    मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन पर राजनीतिक दलों ने जताया सम्मान, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं ने की दीर्घायु व उत्तम स्वास्थ्य की कामना


    नई दिल्ली । 
    कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के 84वें जन्मदिन पर देशभर से उन्हें शुभकामनाएं मिलीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना की। राजनीतिक मतभेदों से इतर कई नेताओं ने सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे अनुभव और योगदान का उल्लेख करते हुए उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि ईश्वर उन्हें स्वस्थ और लंबा जीवन प्रदान करें। प्रधानमंत्री का यह संदेश सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना और अनेक लोगों ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं का सकारात्मक उदाहरण बताया।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उनके सुखद, स्वस्थ और मंगलमय जीवन की कामना करते हुए सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें बधाई देते हुए स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

    कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के जन्मदिन पर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें शुभकामनाएं दीं। पार्टी नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा जनसेवा के प्रति उनके समर्पण को याद किया। कई नेताओं ने कहा कि उनके नेतृत्व में पार्टी लगातार जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने का प्रयास कर रही है।

    उत्तर प्रदेश कांग्रेस सहित विभिन्न प्रदेश इकाइयों ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पार्टी की ओर से जारी संदेशों में उन्हें अनुभवी नेता, कुशल संगठनकर्ता और करोड़ों कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्रोत के रूप में बताया गया। साथ ही उनके स्वस्थ और सक्रिय जीवन की कामना भी की गई।

    सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। समाजवादी पार्टी ने भी अपने शुभकामना संदेश में मल्लिकार्जुन खरगे के स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की कामना की। विभिन्न दलों के नेताओं की ओर से आए इन संदेशों ने राजनीतिक शिष्टाचार और लोकतांत्रिक परंपराओं को भी रेखांकित किया।

    मल्लिकार्जुन खरगे भारतीय राजनीति के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने लंबे समय तक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। संगठन और संसदीय राजनीति दोनों में उनका अनुभव व्यापक माना जाता है। वर्तमान में वह कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ-साथ राज्यसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका भी निभा रहे हैं।

    उनके जन्मदिन के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी कार्यक्रम आयोजित किए। कई स्थानों पर सामाजिक सेवा गतिविधियां, पौधारोपण, रक्तदान शिविर और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके नेतृत्व में संगठन को और मजबूत बनाने का संकल्प भी दोहराया।

  • इनोवेशन और वैश्विक साझेदारी से भारतीय हस्तशिल्प को मिलेगा नया विस्तार, पीएम मोदी ने आर्थिक विकास में शिल्प कौशल की क्षमता पर जताया भरोसा

    इनोवेशन और वैश्विक साझेदारी से भारतीय हस्तशिल्प को मिलेगा नया विस्तार, पीएम मोदी ने आर्थिक विकास में शिल्प कौशल की क्षमता पर जताया भरोसा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत का पारंपरिक शिल्प कौशल केवल सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति का एक सशक्त आधार भी बन सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि नवाचार, आधुनिक सोच और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से भारतीय कारीगरों की प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाकर रोजगार, निर्यात और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है। उनका कहना था कि यदि पारंपरिक कौशल को आधुनिक अवसरों के साथ जोड़ा जाए तो यह ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    प्रधानमंत्री ने इस विषय पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के विचारों को साझा करते हुए ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल देश के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद विशिष्ट उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम बन रही है। इसके जरिए स्थानीय कारीगरों को बेहतर अवसर मिलने के साथ-साथ उनकी आजीविका मजबूत हो रही है और भारत की पारंपरिक विरासत को भी नई पहचान मिल रही है।

    वित्त मंत्री ने चेन्नई स्थित ‘वस्त्रकला’ का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग ने भारतीय कारीगरों को वैश्विक फैशन उद्योग से जोड़ने का नया रास्ता खोला है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के माध्यम से फ्रांस की उच्चस्तरीय फैशन परंपरा और भारत की सदियों पुरानी कढ़ाई कला का सफल समन्वय हुआ है। इससे भारतीय हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों के लिए उच्च मूल्य वाले कार्य अवसर भी विकसित हुए हैं।

    उन्होंने बताया कि पेरिस में आयोजित एक निवेशकों की बैठक के दौरान भी इस पहल का उल्लेख किया गया था, जिससे भारतीय शिल्प कौशल की वैश्विक स्वीकार्यता का संकेत मिलता है। भारत लौटने के बाद उन्होंने तिरुवल्लूर जिले के गुडापक्कम स्थित वस्त्रकला की कार्यशाला का दौरा किया और वहां कार्यरत कारीगरों से बातचीत की। इस दौरान उन्हें यह जानकर विशेष संतोष हुआ कि कंपनी ने अपनी कार्यशाला को शहर से गांव में स्थानांतरित करने का निर्णय इसलिए लिया ताकि पारंपरिक कौशल रखने वाले ग्रामीण परिवारों को उनके अपने क्षेत्र में बेहतर रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।

    वित्त मंत्री ने कहा कि सामान्यतः रोजगार की तलाश में ग्रामीण युवा शहरों की ओर पलायन करते हैं, लेकिन इस पहल ने विपरीत दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। गांवों में ही रोजगार उपलब्ध होने से स्थानीय प्रतिभा को अपने क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला है, जिससे सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इससे पारंपरिक शिल्प की निरंतरता भी बनी रहती है और नई पीढ़ी का इस कला से जुड़ाव भी मजबूत होता है।

    उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र लंबे समय से सूखे की चुनौतियों का सामना करता रहा है। ऐसे समय में जब खेती प्रभावित होती थी, तब ग्रामीण परिवार सूती और रेशमी वस्त्रों पर बारीक कढ़ाई कर अपनी आजीविका चलाते थे। यही परंपरा आज आधुनिक बाजारों तक पहुंचकर नए अवसरों का माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि धैर्य, अनुशासन और बारीकी जैसी विशेषताओं से परिपूर्ण भारतीय कारीगरों की यह कला देश की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ आर्थिक विकास की भी मजबूत आधारशिला बन सकती है।

  • रेलवे के हरित भविष्य की ओर ऐतिहासिक कदम, 17 जुलाई को हरियाणा से दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, पीएम मोदी ने साझा की तस्वीरें

    रेलवे के हरित भविष्य की ओर ऐतिहासिक कदम, 17 जुलाई को हरियाणा से दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, पीएम मोदी ने साझा की तस्वीरें


    नई दिल्ली ।
    भारतीय रेलवे हरित परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से संचालित ट्रेन हरियाणा के जींद से अपनी पहली यात्रा शुरू करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसके साथ ही भारतीय रेलवे स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाएगा। यह ट्रेन शुरुआती चरण में जींद और सोनीपत के बीच संचालित होगी और इसे भारतीय रेलवे की भविष्य की पर्यावरण-अनुकूल परिवहन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना की तस्वीरें साझा करते हुए इसे भारतीय रेलवे के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा से अपनी यात्रा शुरू करने जा रही है। इस घोषणा के बाद देशभर में इस परियोजना को लेकर उत्साह बढ़ गया है। रेलवे का मानना है कि हाइड्रोजन आधारित तकनीक भविष्य में परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    यह ट्रेन भारतीय रेलवे की ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल के तहत विकसित की गई है। इस योजना का उद्देश्य उन रेल मार्गों पर डीजल इंजनों का विकल्प तैयार करना है, जहां विद्युतीकरण करना कठिन या अत्यधिक खर्चीला है। रेलवे आने वाले समय में देशभर में 35 और हाइड्रोजन ट्रेनों को शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इन ट्रेनों के माध्यम से विरासत और ग्रामीण रेल मार्गों पर स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ परिचालन लागत में भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

    नई हाइड्रोजन ट्रेन को 10 कोच वाले डीईएमयू सेट के रूप में तैयार किया गया है। इसमें 682 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है, जबकि कुल लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है। नियमित परिचालन के दौरान इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। परीक्षण के दौरान ट्रेन ने इससे अधिक गति हासिल की थी, लेकिन सुरक्षा और परिचालन मानकों को ध्यान में रखते हुए शुरुआती चरण में नियंत्रित गति पर संचालन किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना फिलहाल पायलट आधार पर शुरू की जा रही है, जिसके अनुभव के आधार पर भविष्य में इसका विस्तार किया जाएगा।

    हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्वच्छ ऊर्जा तकनीक है। इसमें हाइड्रोजन गैस और वातावरण से प्राप्त ऑक्सीजन को फ्यूल सेल में रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से मिलाया जाता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है। यही बिजली ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटरों को संचालित करती है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार का धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। इसके स्थान पर केवल जलवाष्प और ऊष्मा निकलती है, जिससे यह तकनीक पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण-अनुकूल मानी जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनें भारतीय रेलवे को कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त देंगी। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां ओवरहेड बिजली लाइनें बिछाना व्यावहारिक नहीं है, वहां यह तकनीक प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है। कम समय में ईंधन भरने की सुविधा, स्वच्छ संचालन और बेहतर ऊर्जा दक्षता जैसी विशेषताएं इसे भविष्य के रेल परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम बना सकती हैं। भारतीय रेलवे की यह पहल देश में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ टिकाऊ विकास की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

  • भारत-यूके सीईटीए लागू होने के साथ आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती, पीएम मोदी बोले- किसानों, एमएसएमई और पेशेवरों के लिए खुलेंगे व्यापक अवसर

    भारत-यूके सीईटीए लागू होने के साथ आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती, पीएम मोदी बोले- किसानों, एमएसएमई और पेशेवरों के लिए खुलेंगे व्यापक अवसर

    नई दिल्ली । भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के लागू होने के साथ दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत-यूके साझेदारी का महत्वपूर्ण और भविष्य उन्मुख कदम बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और नवाचार को नई गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समझौता केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों, उद्योगों और पेशेवरों के लिए भी दीर्घकालिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सीईटीए और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट मिलकर भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच भरोसे पर आधारित संबंधों को और मजबूत बनाएंगे। उनके अनुसार इन समझौतों का उद्देश्य साझा विकास की सोच को वास्तविक परिणामों में बदलना है। इससे व्यापारिक सहयोग के साथ-साथ निवेश, अनुसंधान, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक विस्तार देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देशों की यह साझेदारी भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है और इससे आर्थिक सहयोग का दायरा लगातार बढ़ेगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप और उद्यमियों के लिए इस समझौते को लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों को यूनाइटेड किंगडम के बाजार में बेहतर पहुंच मिलने से निर्यात में वृद्धि होगी और घरेलू उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी। इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, नए निवेश आकर्षित होंगे और रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा। उनका मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात आधारित विकास मॉडल को भी नई दिशा देगा।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि तकनीकी सहयोग और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच साझेदारी पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी। भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाओं और अन्य पेशेवर क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे। सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट के लागू होने से सीमित अवधि के लिए यूनाइटेड किंगडम में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को विशेष लाभ मिलेगा। इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी भागीदारी बढ़ेगी।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस समझौते को भारत-यूके संबंधों का मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि सीईटीए के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को यूनाइटेड किंगडम में जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलेगा, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत होगी। उनके अनुसार कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री उत्पाद, रसायन, प्रोसेस्ड फूड सहित अनेक क्षेत्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही एमएसएमई, किसानों और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्यमों के लिए भी नए निर्यात अवसर तैयार होंगे।

    सरकार का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा। निवेश, तकनीकी आदान-प्रदान, नवाचार, कौशल विकास और पेशेवर सेवाओं में बढ़ता सहयोग दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी साझा समृद्धि, सतत विकास और वैश्विक आर्थिक सहयोग के नए मानक स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • ऑस्ट्रेलिया में ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम पर विवाद गहराया, आयोजकों ने कांग्रेस के आरोप खारिज किए, बयान वापस लेने की उठाई मांग

    ऑस्ट्रेलिया में ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम पर विवाद गहराया, आयोजकों ने कांग्रेस के आरोप खारिज किए, बयान वापस लेने की उठाई मांग

    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कार्यक्रम में शामिल लोगों को पैसे देकर बुलाए जाने के कांग्रेस के आरोपों पर आयोजकों ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा है कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले भारतीय मूल के लोगों को किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया गया था। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय की स्वैच्छिक भागीदारी का परिणाम था और इसे लेकर लगाए गए आरोप समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले हैं।

    यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि 9 जुलाई को आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों को पैसे देकर और चार्टर्ड विमानों के माध्यम से लाया गया था। इसके बाद कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इसी तरह के आरोप दोहराते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में लोगों को आर्थिक प्रोत्साहन देकर कार्यक्रम में शामिल कराया गया।

    इन आरोपों के बाद कार्यक्रम के आयोजकों ने विस्तृत प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा कि कार्यक्रम में भाग लेने वाले लोगों ने अपनी इच्छा से उपस्थिति दर्ज कराई थी। आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन के लिए किसी भी व्यक्ति को भुगतान नहीं किया गया और न ही भीड़ जुटाने के लिए किसी प्रकार की वित्तीय व्यवस्था की गई। उनका कहना है कि भारतीय समुदाय ने स्वयं इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और इसे राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है।

    आयोजकों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और संबंधित बयान वापस लेने की मांग भी की है। उनका कहना है कि इस तरह के आरोप केवल कार्यक्रम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के हजारों लोगों की गरिमा और योगदान पर भी सवाल खड़े करते हैं। आयोजकों का दावा है कि कार्यक्रम का खर्च न तो भारतीय जनता पार्टी ने उठाया, न भारत सरकार ने और न ही ऑस्ट्रेलिया सरकार ने।

    बताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 और 10 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थे। इसी दौरान मेलबर्न में आयोजित ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोगों ने भाग लिया। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में लगभग 30 हजार लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई थी, जिसे भारतीय समुदाय के बड़े आयोजनों में से एक माना गया।

    दूसरी ओर, कांग्रेस अपने आरोपों पर कायम है और सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो तथा अन्य दावों का हवाला देते हुए कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रही है। हालांकि आयोजकों ने इन दावों को तथ्यों से परे बताते हुए स्पष्ट किया है कि अब तक ऐसे आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि बिना ठोस साक्ष्यों के लगाए गए आरोपों से समुदाय की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। एक ओर कांग्रेस कार्यक्रम की पारदर्शिता पर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर आयोजक आरोपों को असत्य बताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे हैं। ऐसे में अब इस विवाद को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और आगे की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • प्रवासी भारतीयों को पीएम मोदी का भावनात्मक संदेश, 'जोड़ा साहिब' की 300 वर्ष पुरानी विरासत का किया उल्लेख, पटना साहिब दर्शन का दिया आग्रह

    प्रवासी भारतीयों को पीएम मोदी का भावनात्मक संदेश, 'जोड़ा साहिब' की 300 वर्ष पुरानी विरासत का किया उल्लेख, पटना साहिब दर्शन का दिया आग्रह


    नई दिल्ली ।
    न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की सांस्कृतिक विरासत, सिख परंपरा और आध्यात्मिक धरोहर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत केवल आर्थिक विकास की दिशा में ही आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण को भी समान महत्व दे रहा है। इसी क्रम में उन्होंने पवित्र ‘जोड़ा साहिब’ के इतिहास का उल्लेख करते हुए प्रवासी भारतीयों से आग्रह किया कि जब भी वे भारत आएं, श्री पटना साहिब जाकर उसके दर्शन अवश्य करें।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में श्री गुरु ग्रंथ साहिब, चारों साहिबजादों और माता गुजरी के साहस, त्याग और बलिदान को श्रद्धापूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने पूरी मानवता को सेवा, समानता, करुणा और साहस का संदेश दिया है। यही कारण है कि दुनिया के विभिन्न देशों में स्थित गुरुद्वारे आज भी मानव सेवा के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं, जहां जरूरतमंदों को बिना किसी भेदभाव के भोजन, सहायता और सम्मान मिलता है।

    उन्होंने कहा कि संकट के समय भारत ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को पूरे सम्मान के साथ सुरक्षित भारत लाने का कार्य किया। इसके अलावा जब श्री हरमंदिर साहिब में सेवा से जुड़े कुछ प्रशासनिक विषय सामने आए, तब सरकार ने उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने का प्रयास किया। उन्होंने इसे सरकार की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।

    प्रधानमंत्री ने श्री हेमकुंड साहिब का भी उल्लेख करते हुए कहा कि हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित इस पवित्र तीर्थ तक पहुंचना लंबे समय से श्रद्धालुओं के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए वहां तक रोपवे परियोजना विकसित की जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बन सके। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य धार्मिक स्थलों तक बेहतर संपर्क और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ‘वीर बाल दिवस’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चारों साहिबजादों और माता गुजरी के अद्वितीय बलिदान की स्मृति को सम्मान देने के लिए प्रत्येक वर्ष 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ मनाया जाता है। आज यह दिवस देशभर में नई पीढ़ी को साहस, राष्ट्रसेवा और मूल्यों के प्रति समर्पण की प्रेरणा दे रहा है। उन्होंने कहा कि अब देश के विभिन्न हिस्सों के बच्चे भी इस गौरवशाली इतिहास से परिचित हो रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने ‘जोड़ा साहिब’ से जुड़ा एक ऐतिहासिक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के परिवार के पूर्वज श्री गुरु गोविंद सिंह जी के सेवादार थे और उनके परिवार ने लगभग 300 वर्षों तक गुरु गोविंद सिंह तथा माता साहिब कौर जी के पवित्र ‘जोड़ा साहिब’ को सुरक्षित रखा। विभाजन के समय भी इस धरोहर को सुरक्षित दिल्ली लाया गया। बाद में इसे अधिक से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए श्री गुरु गोविंद सिंह जी के जन्मस्थान श्री पटना साहिब में स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनना उनके लिए सौभाग्य की बात रही। उन्होंने प्रवासी भारतीयों से अपील की कि भारत यात्रा के दौरान वे श्री पटना साहिब अवश्य जाएं और इस पवित्र धरोहर के दर्शन कर भारतीय सांस्कृतिक विरासत से अपना जुड़ाव और मजबूत करें।

  • पीएम मोदी के न्यूजीलैंड दौरे से भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नई उड़ान, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य; रक्षा, आतंकवाद और हिंद-प्रशांत सहयोग पर ऐतिहासिक सहमति

    पीएम मोदी के न्यूजीलैंड दौरे से भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नई उड़ान, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य; रक्षा, आतंकवाद और हिंद-प्रशांत सहयोग पर ऐतिहासिक सहमति


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे ने भारत और न्यूजीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का काम किया है। पिछले चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक पहुंचाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को दोगुना कर सात अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया। इसके साथ ही रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, शिक्षा, विज्ञान, कृषि और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने के लिए व्यापक रोडमैप पर सहमति बनी।

    दोनों नेताओं ने ‘भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी : रोडमैप टू 2030’ का समर्थन करते हुए नियमित उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद, विदेश मंत्रियों की वार्ता और वरिष्ठ अधिकारियों की वार्षिक बैठकें आयोजित करने पर सहमति जताई। संसदीय सहयोग बढ़ाने और दोनों देशों के सांसदों के बीच संवाद को भी नई गति देने का निर्णय लिया गया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने कहा कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के बीच मजबूत संबंध भविष्य की साझेदारी का आधार बनेंगे।

    रक्षा और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों ने सैन्य स्तर पर नियमित संपर्क बनाए रखने, नौसैनिक अभ्यासों को बढ़ाने और समुद्री सुरक्षा के लिए वार्षिक मैरीटाइम सिक्योरिटी डायलॉग शुरू करने का फैसला किया। समुद्री सहयोग, हाइड्रोग्राफी, लॉजिस्टिक सपोर्ट और सूचना साझाकरण को भी नई मजबूती देने पर सहमति बनी। साइबर सुरक्षा, आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ संयुक्त प्रयासों को तेज करने तथा संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया।

    आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने के लिए दोनों देशों ने मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। पर्यटन, डेयरी, कृषि, पशुपालन, बागवानी और वानिकी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने के साथ भारत और न्यूजीलैंड के बीच सीधी नॉन-स्टॉप उड़ानें शुरू करने के प्रयासों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। नाविकों के योग्यता प्रमाणपत्रों की पारस्परिक मान्यता तथा समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

    शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को दोनों देशों के संबंधों का प्रमुख स्तंभ बताते हुए छात्र आदान-प्रदान, संस्थागत साझेदारी और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया। आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग को मजबूत करने पर सहमति बनी। इस दौरान भारत की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय आपात प्रबंधन एजेंसी के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस में न्यूजीलैंड के शामिल होने का स्वागत किया।

    क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता के लिए न्यूजीलैंड ने अपना समर्थन दोहराया। दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित सभी प्रकार के आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए आतंकियों और उनके समर्थकों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थिति पर शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर भी बल दिया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 2030 रोडमैप के तहत तय सभी पहलों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी का पूरा लाभ दोनों देशों को मिल सके।