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  • BRICS Summit 2026 में शामिल होने भारत आएंगे शी जिनपिंग, पीएम मोदी के निमंत्रण पर 12-13 सितंबर को होगा दौरा

    BRICS Summit 2026 में शामिल होने भारत आएंगे शी जिनपिंग, पीएम मोदी के निमंत्रण पर 12-13 सितंबर को होगा दौरा

    नई दिल्ली ।चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत दौरे पर आएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को उनके दौरे की जानकारी दी। शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को भारत में आयोजित होने वाले BRICS सम्मेलन में शामिल होंगे। करीब सात साल बाद उनका भारत दौरा होने जा रहा है।

    शी जिनपिंग का यह दौरा भारत और चीन के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2020 में गलवान की घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की यह पहली आमने-सामने की द्विपक्षीय मुलाकात होगी। इससे पहले दोनों नेता किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान एक ही मंच पर नजर आए थे। उस दौरान दोनों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया था, लेकिन उनके बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई थी।

    शी जिनपिंग इससे पहले वर्ष 2019 में भारत आए थे। तब उन्होंने तमिलनाडु के मामल्लपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत हुई थी। इससे पहले वर्ष 2016 में शी जिनपिंग गोवा में आयोजित BRICS सम्मेलन में शामिल होने भारत पहुंचे थे। सितंबर 2014 में उन्होंने पहली बार भारत का दौरा किया था। उस समय भी प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच कई अहम विषयों पर चर्चा हुई थी।

    शी जिनपिंग का आगामी दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन अपने संबंधों में आई दूरी को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक तनाव की स्थिति रही है। अब दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात से भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने को लेकर नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    नई दिल्ली में 11 से 13 सितंबर तक BRICS सम्मेलन आयोजित होगा। इस बैठक में कई देशों के प्रमुख नेता शामिल होंगे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के सम्मेलन में पहुंचने की पुष्टि हो चुकी है।

    BRICS बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया की स्थिति भी बैठक में चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकती है।

    सम्मेलन में विकासशील देशों की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बदलाव जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की उम्मीद है। ऐसे में शी जिनपिंग की भारत यात्रा और BRICS बैठक में उनकी भागीदारी दोनों देशों के बीच संबंधों से जुड़े घटनाक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

  • नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होगा ब्रिक्स सम्मेलन, पुतिन-मोदी मुलाकात में भारत-रूस सहयोग और वैश्विक हालात पर चर्चा संभव

    नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होगा ब्रिक्स सम्मेलन, पुतिन-मोदी मुलाकात में भारत-रूस सहयोग और वैश्विक हालात पर चर्चा संभव

    नई दिल्ली । रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के दौरान भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय संपर्क भी देखने को मिलेगा। पुतिन 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस मुलाकात में दोनों देशों के आपसी संबंधों और व्यापक अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

    रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा की पुष्टि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को की। उन्होंने कहा कि पुतिन कुछ ही दिनों में भारत की यात्रा शुरू करेंगे। पेसकोव के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच लंबे समय से करीबी और व्यावहारिक संबंध रहे हैं। दोनों नेता द्विपक्षीय एजेंडे से जुड़े संवेदनशील विषयों पर भी खुले और रचनात्मक तरीके से बातचीत करने में सक्षम हैं।

    रूस की ओर से पुतिन की इस यात्रा को भारत के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, तकनीक और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में लंबे समय से सहयोग रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर विचार किया जा सकता है।

    18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और उसने समूह के लिए लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर आधारित व्यापक प्राथमिकताएं तय की हैं। सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा।

    ब्रिक्स सहयोग को रूस मुख्य रूप से तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित मानता है। इनमें राजनीति और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वित्त तथा सांस्कृतिक और मानवीय सहयोग शामिल हैं। रूस समूह के विस्तार और अलग-अलग प्रारूपों में नए देशों की भागीदारी को भी समर्थन देता रहा है। ऐसे में सम्मेलन में ब्रिक्स के भविष्य और वैश्विक स्तर पर इसकी भूमिका से जुड़े मुद्दे भी अहम रह सकते हैं।

    पुतिन और मोदी की इससे पहले 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में मुलाकात हुई थी। दोनों नेता शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से इतर मिले थे। उस बातचीत के दौरान रूस और भारत के संबंधों को लगातार मजबूत बताते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।

    बिश्केक बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत का रुख भी स्पष्ट किया था। उन्होंने शत्रुता समाप्त करने और शांति की दिशा में प्रयासों को समर्थन देने की बात कही थी। भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए।

    इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि 2026 में संगठन की स्थापना के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भारत की अध्यक्षता के दौरान व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, शहरी विकास, स्टार्टअप और जलवायु कार्रवाई जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुतिन की मौजूदगी से सम्मेलन में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ ब्रिक्स के व्यापक एजेंडे को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

  • मुंबई में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम स्थल से दो संदिग्ध हिरासत में, फर्जी PMO आईडी और बंदूक मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

    मुंबई में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम स्थल से दो संदिग्ध हिरासत में, फर्जी PMO आईडी और बंदूक मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

    नई दिल्ली ।मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से पहले दो संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, दोनों की गतिविधियां संदिग्ध पाए जाने के बाद उन्हें पूछताछ के लिए पकड़ा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई क्राइम ब्रांच आगे की जांच में जुटी है।

    पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हिरासत में लिए गए दो लोगों में से एक ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO का अधिकारी बताया था। जांच के दौरान उसके पास से प्रधानमंत्री कार्यालय की फर्जी आईडी मिलने की बात सामने आई है। इस पहचान पत्र को लेकर पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इसे किस उद्देश्य से तैयार किया गया और इसका इस्तेमाल कहां-कहां किया गया।

    दूसरे संदिग्ध को लेकर भी पुलिस ने गंभीर जानकारी सामने आने की बात कही है। उसके पास से एक बंदूक बरामद होने की जानकारी है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि वह हथियार लेकर कार्यक्रम स्थल तक कैसे पहुंचा और उसके पास हथियार रखने का उद्देश्य क्या था।

    हिरासत में लिए गए दोनों युवकों के संबंध और कार्यक्रम स्थल पर उनकी मौजूदगी की वजह भी जांच का अहम हिस्सा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों किसी विशेष उद्देश्य से वहां पहुंचे थे या उनकी मौजूदगी के पीछे कोई अन्य कारण था। फर्जी पहचान पत्र और हथियार मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    मुंबई पुलिस के मुताबिक, दोनों संदिग्धों को नीता अंबानी कल्चरल सेंटर से हिरासत में लिया गया है। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम प्रस्तावित था। हिरासत में लिए गए लोगों में से एक की पहचान 24 वर्षीय रोहन पारेख के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, रोहन पारेख ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय का अधिकारी बताया था।

    पुलिस के मुताबिक, रोहन पारेख के साथ एक व्यक्ति बॉडीगार्ड के रूप में मौजूद था। उसके पास बंदूक मिली है। इस व्यक्ति की भूमिका और दोनों संदिग्धों के बीच संबंध को लेकर भी जांच की जा रही है। पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

    दोनों संदिग्धों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत मुंबई के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किए जाने की बात कही गई है। कोर्ट में पेशी के बाद जांच की दिशा और आगे की कार्रवाई से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार, 8 सितंबर को मुंबई के जियो वर्ल्ड सेंटर में ग्लोबल फिनटेक टेस्ट 2026 का शुभारंभ करने वाले हैं। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से पहले कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से ही विशेष सतर्कता बरती जा रही थी। इसी दौरान दो संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने से सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल भी सामने आए हैं।

    फिलहाल मुंबई क्राइम ब्रांच दोनों संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। जांच का मुख्य फोकस फर्जी PMO पहचान पत्र हासिल करने, हथियार के साथ कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने और दोनों की वास्तविक मंशा का पता लगाने पर है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • वडोदरा में पीएम मोदी का जेन-जी से संवाद, ‘धुरंधर’ के गाने पर रैंप वॉक और राहुल गांधी पर तीखा तंज

    वडोदरा में पीएम मोदी का जेन-जी से संवाद, ‘धुरंधर’ के गाने पर रैंप वॉक और राहुल गांधी पर तीखा तंज


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा में जेन-जी युवाओं के साथ करीब 25 मिनट तक संवाद किया। कार्यक्रम में करीब छह हजार युवाओं को शामिल किया गया था। इस दौरान प्रधानमंत्री ने युवाओं से झूठे दावों और भ्रामक बातों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग झूठ की गूंज के जरिए युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन उन्हें सच्चाई के साथ खड़ा रहना चाहिए। उनके इस बयान को राहुल गांधी और कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान पर तंज के तौर पर देखा गया।

    युवाओं के बीच पहुंचने के लिए कार्यक्रम स्थल पर खास तौर पर Y आकार का रैंप तैयार किया गया था। भाषण से पहले प्रधानमंत्री इसी रैंप पर चलते हुए युवाओं के बीच पहुंचे। मंच पर पहुंचते ही क्वीन का लोकप्रिय गीत ‘वी विल रॉक यू’ बजाया गया। इसके बाद फिल्म ‘धुरंधर’ का गीत ‘आरी आरी’ भी सुनाई दिया। कार्यक्रम के दौरान एक छात्र ने प्रधानमंत्री को तस्वीर भेंट की, जबकि युवाओं ने मोबाइल फोन से उनका वीडियो भी बनाया।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को तेजी से विकसित हो रहे भारत की जीवनरेखा बताया। उन्होंने कहा कि पहले यात्री और मालगाड़ियां एक ही ट्रैक पर चलती थीं, जिससे दोनों की गति प्रभावित होती थी। अब अलग ट्रैक की व्यवस्था से माल परिवहन को गति मिली है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर रोज करीब 430 मालगाड़ियां चल रही हैं।

    उन्होंने मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से डबल कंटेनर मालगाड़ी के संचालन का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे एक बार में 250 से अधिक ट्रकों के बराबर माल मुंबई से वडोदरा पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रकों से सामान पहुंचाने में करीब 30 घंटे लग सकते हैं, जबकि फ्रेट कॉरिडोर के जरिए यह दूरी करीब 10 घंटे में पूरी हो सकती है।

    फ्रेट कॉरिडोर के इतिहास का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस परियोजना पर 2004 में विचार शुरू हुआ था और 2006 में विशेष कंपनी बनाई गई थी। उनके अनुसार, 2014 तक फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक जाती रहीं। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद सरकार ने परियोजना को गति दी और करीब 2,000 किलोमीटर फ्रेट कॉरिडोर का काम पूरा किया।

    प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत को सुपरपावर बनाने के लिए पूरे इकोसिस्टम की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इसके लिए यूरेनियम और रेयर अर्थ मटेरियल की उपलब्धता बढ़ाने के साथ युवाओं की स्किल ट्रेनिंग और अपग्रेडेशन पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब केवल डिग्री नहीं, बल्कि कौशल पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

    जेन-जी से संवाद को लेकर प्रधानमंत्री पिछले कुछ समय से युवाओं के बीच सक्रिय नजर आए हैं। जुलाई में उन्होंने सेल्फी वीडियो के जरिए युवाओं से संवाद किया था। इसके बाद उन्होंने युवाओं के सुझावों पर प्रतिक्रिया दी और सोशल मीडिया के अनौपचारिक अंदाज में भी उनसे जुड़ने की कोशिश की। अगस्त में मंत्रियों को विश्वविद्यालयों में छात्रों के साथ समय बिताने और सरकारी स्कूलों का दौरा करने का निर्देश दिया गया था।

    देश की राजनीति में जेन-जी की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान 18 से 29 वर्ष आयु के मतदाताओं की हिस्सेदारी 22.78 प्रतिशत थी। ऐसे में भाजपा, कांग्रेस और आरएसएस तीनों ही युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। प्रधानमंत्री के वडोदरा कार्यक्रम में इसी व्यापक प्रयास की झलक दिखाई दी।

  • पीएम मोदी के जन्मदिन से भाजपा का सेवा संकल्प अभियान, एक महीने में 13 कार्यक्रमों के जरिए देशभर में जनसंपर्क की तैयारी

    पीएम मोदी के जन्मदिन से भाजपा का सेवा संकल्प अभियान, एक महीने में 13 कार्यक्रमों के जरिए देशभर में जनसंपर्क की तैयारी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से भारतीय जनता पार्टी देशभर में एक महीने का सेवा संकल्प अभियान शुरू करने जा रही है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाने की योजना है। पार्टी के अनुसार, इसके जरिए सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण, विकास और विकसित भारत से जुड़े संदेशों को जनता तक पहुंचाया जाएगा। अभियान को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से भी जोड़ा गया है।

    भाजपा सामान्य तौर पर प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर सेवा पखवाड़े का आयोजन करती रही है, लेकिन इस बार कार्यक्रम का विस्तार एक महीने तक किया गया है। नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। इस आधार पर अक्टूबर 2026 में उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। पार्टी इस अवसर को भी व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से रेखांकित करने की तैयारी कर रही है।

    अभियान के तहत करीब 13 प्रमुख कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इसकी शुरुआत 17 सितंबर को आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम से होगी। इसके माध्यम से देशभर में विभिन्न स्थानों और घरों में दीप प्रज्वलन किया जाएगा। बच्चों के लिए चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिनका विषय देश के भविष्य और सपनों से जुड़ा होगा।

    नमो सेवा गाथा के तहत नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों तक विभिन्न संदेश पहुंचाने की योजना है। वहीं कहानी बदलाव की कार्यक्रम में सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले लोगों की सफलता की कहानियां सामने रखी जाएंगी। इसका उद्देश्य कल्याणकारी योजनाओं के असर को सीधे लाभार्थियों के अनुभवों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना है।

    अभियान में आंगन का उत्सव भी शामिल किया गया है। इसके तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थी माताओं को सम्मानित करने के साथ पोषण तथा मातृ कल्याण से जुड़े विषयों पर संवाद की योजना है। भाजपा का लक्ष्य देशभर में करीब 14 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तक पहुंच बनाने का है।

    प्रधानमंत्री मोदी की जन्मभूमि गुजरात के वडनगर और उनकी संसदीय कर्मभूमि वाराणसी को भी अभियान में विशेष स्थान दिया गया है। जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा के जरिए दोनों स्थानों से जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गुजरात में वडनगर से वाराणसी और फिर वापस वडनगर तक बाइक यात्राओं की भी योजना है। इन यात्राओं के दौरान जनसंवाद के साथ सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियां होंगी।

    सेवा मेरा योगदान कार्यक्रम के तहत रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, पौधरोपण और डिजिटल साक्षरता जैसी गतिविधियां प्रस्तावित हैं। सेवा सेतु अभियान के जरिए ब्लॉक और विधानसभा स्तर पर शिविर लगाए जाएंगे, जहां लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सहायता दी जाएगी। संबंधित विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में पात्र लोगों के दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी कराने की योजना है।

    अभियान के दौरान 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती और 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष कार्यक्रम होंगे। अंतिम चरण में जनसेवा महाकुंभ आयोजित करने की योजना है, जिसमें जनप्रतिनिधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भागीदारी होगी।

    भाजपा इस अभियान को केवल सेवा गतिविधियों तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के साथ विपक्ष के राजनीतिक मुद्दों का जवाब देने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकती है। इस तरह अभियान को संगठनात्मक जनसंपर्क, लाभार्थी संपर्क और राजनीतिक संवाद के संयुक्त कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

  • जॉर्जिया मेलोनी ने बनाया इटली में नया रिकॉर्ड, पीएम मोदी ने सबसे लंबे कार्यकाल पर मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को सराहा

    जॉर्जिया मेलोनी ने बनाया इटली में नया रिकॉर्ड, पीएम मोदी ने सबसे लंबे कार्यकाल पर मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को सराहा

    नई दिल्ली । इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने देश के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मेलोनी शुक्रवार को लगातार 1413 दिन तक सरकार का नेतृत्व करने के साथ इटली गणराज्य बनने के बाद सबसे लंबे समय तक लगातार सत्ता में रहने वाली प्रधानमंत्री बन गई हैं। उनकी इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है और भारत तथा इटली के बीच संबंधों को मजबूत करने में उनकी भूमिका की सराहना की है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में जॉर्जिया मेलोनी को अपनी मित्र बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि इटली के लोगों के उनके नेतृत्व में भरोसे और विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि मेलोनी की मित्रता भारत और इटली के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण रही है।

    मोदी ने भारत और इटली के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए दोनों देशों के साथ मिलकर आगे भी काम करने की उम्मीद जताई। उन्होंने मेलोनी को आने वाले वर्षों के लिए सफलता की शुभकामनाएं भी दीं। प्रधानमंत्री के संदेश में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और व्यक्तिगत स्तर पर नेताओं के संबंधों को भी प्रमुखता मिली।

    मेलोनी सरकार ने शुक्रवार को लगातार सत्ता में रहने के 1413 दिन पूरे किए। इसके साथ ही उनकी सरकार ने इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। बर्लुस्कोनी की सरकार वर्ष 2001 से 2005 के बीच लगातार 1412 दिन तक सत्ता में रही थी। मेलोनी की सरकार ने एक दिन अधिक लगातार सत्ता में रहकर नया रिकॉर्ड कायम किया है।

    यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इटली का राजनीतिक इतिहास लंबे समय तक सरकारों की अस्थिरता से जुड़ा रहा है। देश में गठबंधन सरकारों के टूटने और राजनीतिक बदलाव के कारण सरकारों का औसत कार्यकाल करीब 13 महीने बताया जाता है। ऐसे राजनीतिक माहौल में मेलोनी की सरकार का लगातार इतने लंबे समय तक सत्ता में बने रहना उनके लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है।

    जॉर्जिया मेलोनी इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री भी हैं। उन्होंने तीन दक्षिणपंथी और कंजरवेटिव पार्टियों वाले गठबंधन के नेतृत्व में सरकार बनाई थी। गठबंधन की सरकार के सामने अलग-अलग राजनीतिक विचारों और प्राथमिकताओं के बीच तालमेल बनाए रखने की चुनौती रही है। इसके बावजूद सरकार का लगातार बने रहना मेलोनी के नेतृत्व की स्थिरता के रूप में देखा जा रहा है।

    मेलोनी खुद भी इस उपलब्धि को अपनी सरकार की महत्वपूर्ण सफलता के तौर पर पेश कर रही हैं। इसी सिलसिले में उनकी पार्टी की ओर से शुक्रवार शाम बारी शहर में एक बड़ी रैली आयोजित की जानी है। मेलोनी इस कार्यक्रम में शामिल होकर भाषण भी देंगी। माना जा रहा है कि रैली के दौरान वह सरकार के कार्यकाल और अब तक की उपलब्धियों को लेकर अपना पक्ष सामने रखेंगी।

    भारत और इटली के बीच संबंधों के लिहाज से भी मेलोनी का कार्यकाल महत्वपूर्ण रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और मेलोनी के बीच कई मौकों पर द्विपक्षीय सहयोग तथा रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने को लेकर बातचीत हुई है। मोदी के ताजा संदेश से संकेत मिलता है कि भारत दोनों देशों के बीच सहयोग को भविष्य में भी मजबूत बनाए रखने को महत्व देता है। मेलोनी की रिकॉर्ड उपलब्धि के बीच भारत की ओर से दी गई यह बधाई दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों में निरंतरता का संदेश देती है।

  • मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात पर अमेरिका बोला-भारत-ईरान के बीच कोई व्यापार समझौता नहीं….

    मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात पर अमेरिका बोला-भारत-ईरान के बीच कोई व्यापार समझौता नहीं….


    वॉशिंगटन
    । अमेरिका (America) के विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Foreign Minister Marco Rubio) ने बुधवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान (India and Iran) के बीच किसी व्यापार समझौते (Trade Agreement) को लेकर बातचीत हो रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश ईरान की सरकार से बातचीत करते हैं। रूबियो ने यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Iranian President Masoud Pezeshkian) के बीच बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर हुई मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में की। यह सवाल फॉक्स न्यूज रेडियो के ‘द ब्रायन किल्मीड शो’ में उनसे पूछा गया था।

    कार्यक्रम के दौरान प्रस्तोता ब्रायन किल्मीड ने कहा कि पीएम मोदी और पेजेशकियन की मुलाकात में ऐसा लगा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की तैयारी हो रही है। इसके जवाब में रूबियो ने कहा, ”खैर, मुझे नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच कोई व्यापार समझौता है। जाहिर तौर पर, सभी देश अपनी-अपनी विदेश नीति तय करते हैं और दुनिया के कई देश ईरान की सरकार से बातचीत करते हैं।”


    ईरान की मदद करने वाले देशों पर अमेरिका क्या करेगा कार्रवाई?

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, ”मेरा मतलब है कि हम भी ईरान की सरकार के कुछ लोगों के साथ मिले हैं। कुछ चर्चाओं के संदर्भ में हमारी उनसे बातचीत और संपर्क हुआ है।” रूबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी देश को ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद नहीं करनी चाहिए।

    उन्होंने कहा, ”किसी भी देश को ऐसे तंत्र बनाने में उनकी मदद नहीं करनी चाहिए, जिनके जरिए वे राजस्व जुटा सकें और फिर उसका इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने के साथ परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में कर सकें। और अगर देश ऐसा करने का फैसला करते हैं, तो हमें उन पर भी प्रतिबंध लगाना पड़ेगा।”


    पीएम मोदी से पेजेशकियन ने क्यों की मुलाकात?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ बैठक की थी। ईरान की अर्द्ध सरकारी एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी रिश्तों की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया और दोनों देशों के लिए अहम क्षेत्रों में ईरान और भारत के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया गया।

    पश्चिम एशिया संकट के बीच दोनों शीर्ष नेताओं में संवाद कायम रहा है। जून में, पीएम मोदी और पेजेशकियन के बीच फोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें ईरानी राष्ट्रपति ने भारतीय पीएम को पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं और आगे की राह के बारे में जानकारी दी थी। बातचीत के दौरान, पीएम मोदी ने संघर्ष खत्म करने के लिए बनी सहमति का स्वागत किया था और स्थायी शांति और स्थिरता के लिए लगातार कोशिशों की जरूरत को दोहराया।

  • मोदी आज भी विरोधियों पर भारी, पर राज्यों में हाफ रहा डबल इंजन… BJP अपने ही गढ़ में हुई कमजोर

    मोदी आज भी विरोधियों पर भारी, पर राज्यों में हाफ रहा डबल इंजन… BJP अपने ही गढ़ में हुई कमजोर


    नई दिल्ली।
    ‘डबल इंजन (‘Double Engine’)’ के जिस नारे को बीजेपी (BJP) अपनी सबसे बड़ी ढाल और जीत का पक्का फॉर्मूला मानती रही है, उसकी परतें अब उधड़ने लगी हैं. केंद्र की सत्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का चेहरा आज भी विरोधियों पर भारी पड़ता दिख रहा है, लेकिन राज्यों के धरातल पर पार्टी का दूसरा इंजन पूरी तरह हांफ रहा है. इंडिया टुडे और सी-वोटर का ताजा ‘मूड ऑफ द नेशन’ (MOTN) अगस्त 2026 सर्वे राजनीतिक विश्लेषकों की आंखें खोल देने वाले नतीजे लेकर आया है. आंकड़े चीख-चीखकर गवाही दे रहे हैं कि जिन राज्यों में 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का परचम फहराया था, वहां महज दो साल के भीतर पार्टी का जनाधार अप्रत्याशित रूप से खिसक चुका है।

    2024 के लोकसभा चुनाव में बहुमत से दूर रहने वाली भाजपा ने अपने आपको संभाला और फिर हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जबर्दस्त जीत हांसिल की. विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि का सहारा लेकर जिस ‘डबल इंजन’ को जनता ने समर्थन दिया, अब वही समर्थन कमजोर पड़ता दिख रहा है।

    आज देश में लोकसभा चुनाव की घोषणा हो जाए, तो सर्वे के आंकड़े एनडीए को 326 सीटें और 45.1 प्रतिशत वोट शेयर देते हैं, जबकि विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को 185 सीटें और 39.1 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है. केवल बीजेपी के आंकड़े देखें तो पार्टी 261 सीटों और 39.0 प्रतिशत वोट शेयर के साथ संसद की सबसे बड़ी ताकत बनी रहेगी और 2024 के 240 सीटों के मुकाबले 21 सीटें ज्यादा हासिल करेगी. लेकिन इस तस्वीर का दूसरा पहलू बेहद चौंकाने वाला और बीजेपी के सिपहसालारों की नींद उड़ाने वाला है. इसी साल जनवरी 2026 के सर्वे में बीजेपी अपने दम पर 287 सीटें जीतती दिख रही थी, जो अगस्त 2026 में घटकर 261 पर आ गई है. यानी बीते महज छह महीनों के भीतर बीजेपी की झोली से 26 सीटें खिसक चुकी हैं, जो यह साबित करता है कि राज्यों में जनता का मिजाज बहुत तेजी से बदल रहा है और डबल इंजन का पहिया थमने लगा है।
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    सबसे ज्यादा आंखें खोल देने वाले आंकड़े उन राज्यों से आए हैं जिन्हें बीजेपी का अभेद्य गढ़ और जीत की गारंटी माना जाता था. मध्यप्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने 29 की 29 सीटें जीतकर इतिहास रचा था और विपक्ष का पूरी तरह सफाया कर दिया था. मगर अगस्त 2026 का सर्वे बताता है कि मध्यप्रदेश में बीजेपी की झोली से सीधे 8 सीटें गायब हो चुकी हैं और पार्टी महज 21 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है. जनवरी 2026 के सर्वे में भी जहां पार्टी 26 सीटों पर थी, वहां छह महीने में ही 5 सीटें और कम हो गईं. पार्टी का वोट शेयर 2024 के 59.27 प्रतिशत से सीधा गिरकर 51.3 प्रतिशत पर आ गया है, जबकि बीते चुनाव में शून्य पर लटकी कांग्रेस अब 8 सीटें झटकती दिख रही है और उसका वोट शेयर 32.44 प्रतिशत से उछलकर 43.3 प्रतिशत तक जा पहुंचा है.

    ओडिशा का सच तो और भी ज्यादा कड़वा है. जिस ओडिशा में 2024 के चुनाव में बीजेपी ने 21 में से 20 सीटें जीतकर नवीन पटनायक के दशकों पुराने साम्राज्य को ढहा दिया था, वहीं अब बीजेपी की साख दांव पर लगी है. सर्वे के अनुसार ओडिशा में बीजेपी की सीटें घटकर सिर्फ 12 रह सकती हैं, यानी पार्टी को 8 सीटों का सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा है. जनवरी 2026 के 17 सीटों के अनुमान से तुलना करें तो भी छह महीने में पार्टी ने 5 सीटें गंवा दी हैं और उसका वोट शेयर 45.34 प्रतिशत से घटकर 43.0 प्रतिशत पर सिमट गया है.


    हिंदी पट्टी में सुलगता असंतोष और कमजोर पड़ते राज्य

    बीजेपी की राजनीति की रीढ़ मानी जाने वाली हिंदी पट्टी के अन्य राज्यों में भी हालात बेहद चिंताजनक हैं. उत्तर प्रदेश में 2024 के चुनाव में बीजेपी 33 सीटों पर अटक गई थी. अगस्त 2026 के सर्वे में पार्टी को 34 सीटें मिलती दिख रही हैं, जो भले ही 2024 से 1 सीट ज्यादा हो, लेकिन छह महीने पहले की तस्वीर से तुलना करने पर पैरों तले जमीन खिसक जाती है. जनवरी 2026 में उत्तर प्रदेश के भीतर बीजेपी 44 सीटें जीतती दिख रही थी, जो अगस्त आते-आते सीधे 10 सीटें घटकर 34 पर आ चुकी हैं और एनडीए का वोट शेयर 43.69 प्रतिशत से गिरकर 41.7 प्रतिशत हो गया है.

    छत्तीसगढ़ की बात करें तो 2024 में 11 में से 10 सीटें हासिल करने वाली बीजेपी अब सिर्फ 7 सीटों पर सिमटती दिख रही है, यानी 3 सीटों की सीधी चपत लग रही है, जबकि कांग्रेस 1 सीट से बढ़कर 4 सीटों पर कब्जा जमाती नजर आ रही है. उत्तराखंड में सभी 5 सीटों पर काबिज बीजेपी को 1 सीट का नुकसान होकर 4 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं राजस्थान में बीजेपी 16 सीटों पर दिखाई दे रही है, जो 2024 की 14 सीटों से 2 ज्यादा जरूर है, लेकिन जनवरी 2026 के 18 सीटों के आंकड़े से 2 सीटें कम हो चुकी है.


    पश्चिम बंगाल की लहर का छलावा

    देश भर में खिसकती जमीन के बीच पश्चिम बंगाल ही अकेला ऐसा राज्य बनकर उभरा है जहां बीजेपी के लिए चमत्कारिक आंकड़े सामने आए हैं. 2024 के चुनाव में जहां बीजेपी बंगाल की 42 सीटों में से सिर्फ 12 सीटें जीत पाई थी, वहीं अगस्त 2026 का सर्वे अनुमान लगा रहा है कि बीजेपी राज्य में 35 सीटें जीतकर तख्तापलट कर सकती है, यानी सीधे 23 सीटों का बंपर फायदा. बंगाल में बीजेपी का वोट शेयर 38.73 प्रतिशत से बढ़कर 46.2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन का आंकड़ा 30 सीटों से गिरकर महज 7 सीटों पर सिमट रहा है.

    लेकिन क्या बंगाल का यह उछाल बीजेपी को राहत दे सकता है? आंखें खोल देने वाली सचाई यह है कि केवल एक राज्य के दम पर पूरे देश की राजनीतिक गिरावट की भरपाई नहीं की जा सकती. अगर बंगाल में बीजेपी को 23 सीटों की बढ़त मिल भी जाता है, तो मध्यप्रदेश में 8 सीटें, ओडिशा में 8 सीटें, छत्तीसगढ़ में 3 सीटें और उत्तर प्रदेश में जनवरी के मुकाबले गंवाई गई 10 सीटें मिलकर उस पूरी बढ़त को डकार जाती हैं. मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य पार्टी का वैचारिक और संगठनात्मक आधार हैं. बंगाल में स्थानीय विरोध या सत्ता-विरोधी लहर के कारण अस्थायी फायदा मिल सकता है, लेकिन हिंदी भाषी राज्यों में पार्टी के प्रति गहराता जनाक्रोश संगठन के बुनियादी ढांचे के लिए एक बड़ा खतरा है।

    ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे के ये आंकड़े साफ तौर पर संकेत दे रहे हैं कि देश का मतदाता अब आंख मूंदकर ‘डबल इंजन’ के झांसे में आने को तैयार नहीं है. केंद्र में नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत प्रभाव आज भी कायम है और लोग राष्ट्रीय मुद्दों पर उन पर भरोसा कर रहे हैं, लेकिन राज्यों की बीजेपी सरकारों की नाकामी, स्थानीय बेरोजगारी, महंगाई और प्रशासनिक सुस्ती ने जनता का मोहभंग कर दिया है. एक ताकतवर इंजन पूरी ट्रेन को खींचने की कोशिश तो कर सकता है, लेकिन अगर राज्यों का दूसरा इंजन पूरी तरह खराब हो जाए, तो गाड़ी को पटरी से उतरने में वक्त नहीं लगता।

  • दिल्ली छात्र प्रदर्शन में पीएम मोदी की मां पर टिप्पणी का मामला, योगी आदित्यनाथ ने गलती स्वीकारने और माफी का किया जिक्र

    दिल्ली छात्र प्रदर्शन में पीएम मोदी की मां पर टिप्पणी का मामला, योगी आदित्यनाथ ने गलती स्वीकारने और माफी का किया जिक्र

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के लिए अभद्र शब्दों के इस्तेमाल से जुड़े मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिस बेटी ने प्रधानमंत्री की माता के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था, उसने बाद में अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांग ली।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रा और उसके माता-पिता ने बाद में स्वीकार किया कि उससे गलती हुई थी। उन्होंने बताया कि छात्रा ने इसके बाद माफी भी मांगी। मुख्यमंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब छात्र प्रदर्शन के दौरान की गई उक्त टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चा हो रही है।

    योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में युवाओं के भविष्य और उनके सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश के युवाओं को भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि आखिर कुछ लोग भारत के भविष्य को प्रभावित करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं।

    उन्होंने इस संदर्भ में अर्बन नक्सलियों का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके हाथों देश के भविष्य को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से जुड़े मुद्दों को व्यापक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि देश की युवा पीढ़ी को सही दिशा देना महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री की टिप्पणी में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई घटना के साथ राजनीतिक परिस्थितियों का भी संदर्भ दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को किसी भी प्रकार के भटकाव से बचाना आवश्यक है। उनके अनुसार, देश के भविष्य को लेकर युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और उनके बीच जिम्मेदारी तथा सकारात्मक सोच को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

    योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि एक जिम्मेदार विपक्षी नेता के रूप में उनसे बेहतर आचरण की अपेक्षा थी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से खुद को अलग कर लिया है।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने अमेठी और रायबरेली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों की जनता ने हमेशा राजनीतिक घटनाक्रमों को समझते हुए अपना फैसला दिया है। इन इलाकों का राजनीतिक महत्व लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में रहा है और चुनावी परिस्थितियों में यहां के मतदाताओं के फैसले पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी के मामले में मुख्यमंत्री ने छात्रा की ओर से बाद में माफी मांगे जाने को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि छात्रा और उसके माता-पिता ने गलती स्वीकार की और इसके बाद माफी मांगी गई।

    मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया में एक ओर छात्रा की ओर से की गई टिप्पणी का जिक्र रहा, वहीं दूसरी ओर उन्होंने युवाओं को राजनीतिक या वैचारिक प्रभाव से बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने देश के भविष्य के रूप में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए उनके सामने सही दिशा और जिम्मेदार सार्वजनिक व्यवहार की जरूरत बताई।

    इस पूरे घटनाक्रम में छात्र प्रदर्शन, प्रधानमंत्री की मां के खिलाफ की गई कथित अभद्र टिप्पणी, छात्रा की ओर से माफी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया प्रमुख बिंदु रहे। साथ ही मुख्यमंत्री ने विपक्षी राजनीति और राहुल गांधी के संदर्भ में भी अपनी बात रखी।

  • बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से हटे शहजाद पूनावाला, बोले पार्टी छोड़ रहा हूं लेकिन विचार और नेतृत्व का समर्थन जारी रहेगा

    बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से हटे शहजाद पूनावाला, बोले पार्टी छोड़ रहा हूं लेकिन विचार और नेतृत्व का समर्थन जारी रहेगा

    नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोमवार को पार्टी की सक्रिय प्राथमिक सदस्यता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देने का फैसला किया। पूनावाला ने अपने इस्तीफे की जानकारी साझा करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर गंभीर विचार-विमर्श के बाद उन्होंने अपने निर्णय पर कायम रहने का फैसला किया है।

    पूनावाला के अनुसार उनका इस्तीफा पार्टी के लिए भी भावनात्मक विषय रहा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उनके त्यागपत्र को तुरंत स्वीकार करने से इनकार किया और उनसे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। हालांकि, उन्होंने बताया कि विस्तृत विचार-विमर्श और गंभीर मनन के बाद उन्होंने बीजेपी की व्यवस्था से अलग होने का अंतिम निर्णय लिया।

    अपने इस्तीफे में पूनावाला ने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संगठन महामंत्री बीएल संतोष के प्रति सम्मान और कृतज्ञता जाहिर की। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में पार्टी ने उन्हें जो मंच और अवसर दिए, उनके लिए वह नेतृत्व के आभारी हैं।

    पूनावाला ने अपने फैसले के पीछे आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इन परिस्थितियों के कारण वह अब निजी क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। उनके मुताबिक यह फैसला किसी राजनीतिक असहमति के बजाय वर्तमान निजी परिस्थितियों और भविष्य की पेशेवर दिशा से जुड़ा है।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी की सक्रिय राजनीति से अलग होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के विचारों तथा कार्यों के प्रति उनका समर्थन बना रहेगा। उनका कहना है कि वह पार्टी की व्यवस्था छोड़ रहे हैं, लेकिन विचार और व्यक्तियों के प्रति उनका सम्मान कायम रहेगा। इस बयान के जरिए उन्होंने अपने इस्तीफे को राजनीतिक विचारधारा से अलग होने के रूप में पेश नहीं किया है।

    शहजाद पूनावाला का बीजेपी से जुड़ाव वर्ष 2017 के बाद हुआ था। इससे पहले उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। बीजेपी में शामिल होने के बाद वह पार्टी के प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में शामिल हो गए और विभिन्न टेलीविजन बहसों में बीजेपी का पक्ष रखते रहे।

    पिछले वर्षों में पूनावाला राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी की ओर से मुखरता से अपनी बात रखते रहे हैं। खासकर विपक्षी दलों पर हमले और केंद्र सरकार की नीतियों के बचाव में उनकी भूमिका लगातार दिखाई देती रही। राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर उनकी सक्रियता ने उन्हें बीजेपी के चर्चित मीडिया चेहरों में शामिल किया।

    अब उनके इस्तीफे के बाद बीजेपी के मीडिया और प्रवक्ता तंत्र में भी यह एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। हालांकि पूनावाला ने अपने बयान में पार्टी नेतृत्व के प्रति सम्मान और प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण के समर्थन की बात कही है। इसलिए उनके फैसले को तत्काल किसी राजनीतिक खेमे में जाने के संकेत के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

    पूनावाला ने अपने इस्तीफे के जरिए यह भी संकेत दिया है कि फिलहाल उनका अगला कदम निजी क्षेत्र में जाने का है। आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों को निर्णय का आधार बताते हुए उन्होंने राजनीति से दूरी बनाने का फैसला किया है। बीजेपी में करीब पांच वर्षों तक सक्रिय भूमिका निभाने के बाद उनका यह कदम पार्टी के राजनीतिक और मीडिया सर्किल में चर्चा का विषय बन गया है।