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  • पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की अहम बैठक, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस, साइबर सुरक्षा और हिंद-प्रशांत सहयोग बढ़ाने का साझा संकल्प

    पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की अहम बैठक, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस, साइबर सुरक्षा और हिंद-प्रशांत सहयोग बढ़ाने का साझा संकल्प


    नई दिल्ली ।
    भारत और न्यूजीलैंड ने द्विपक्षीय संबंधों को नई रणनीतिक दिशा देते हुए आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और उभरती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के खिलाफ सहयोग को और मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय शांति, स्थिरता और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

    वार्ता के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों की स्पष्ट और कड़ी निंदा की। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद सहित किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधियों को वैश्विक शांति के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए ऐसे अपराधों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों नेताओं ने हाल के आतंकी हमलों की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे अपराधों के जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाना और उन्हें शीघ्र दंड दिलाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।

    संयुक्त बयान में आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को दोहराते हुए आतंकवादी संगठनों के वित्तीय नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों और ऑनलाइन गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि आतंकवाद और हिंसक कट्टरपंथ से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सूचना साझा करने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने और संस्थागत समन्वय को मजबूत करना आवश्यक है। इसी दिशा में आतंकवाद निरोधक संयुक्त कार्य समूह के गठन के लिए हुए समझौते का भी स्वागत किया गया, जिससे दोनों देशों की एजेंसियों के बीच नियमित संवाद और सूचना आदान-प्रदान को नई गति मिलेगी।

    बैठक में साइबर सुरक्षा और डिजिटल क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियां भी प्रमुख विषय रहीं। दोनों देशों ने साइबर अपराध, डिजिटल सुरक्षा, महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा और नई तकनीकों से उत्पन्न जोखिमों का संयुक्त रूप से सामना करने पर सहमति व्यक्त की। इसके साथ ही वित्तीय अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों के विरुद्ध कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने का निर्णय भी लिया गया। दोनों पक्षों ने नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने और संबंधित एजेंसियों के बीच औपचारिक सहयोग व्यवस्था को शीघ्र अंतिम रूप देने की दिशा में कार्य करने पर सहमति जताई।

    प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री लक्सन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि को साझा प्राथमिकता बताते हुए स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी क्षेत्रीय व्यवस्था के समर्थन को दोहराया। दोनों नेताओं ने कहा कि सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए तथा समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन वैश्विक व्यापार एवं सुरक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप किए जाने पर भी बल दिया।

    दोनों देशों ने क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए बहुपक्षीय मंचों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने आसियान की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करते हुए पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन, आसियान क्षेत्रीय मंच और अन्य क्षेत्रीय व्यवस्थाओं के माध्यम से सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यापक सहमति से भारत और न्यूजीलैंड के बीच सुरक्षा, कानून प्रवर्तन, साइबर सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी तथा दोनों देश बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर सकेंगे।

  • ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए बोले पीएम मोदी, न्यूजीलैंड की उपलब्धियों की खुलकर सराहना, कहा- ‘हमने आपसे बहुत कुछ सीखा’

    ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए बोले पीएम मोदी, न्यूजीलैंड की उपलब्धियों की खुलकर सराहना, कहा- ‘हमने आपसे बहुत कुछ सीखा’


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में आयोजित भारतीय समुदाय के विशेष कार्यक्रम में दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य की साझेदारी पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड का रिश्ता केवल कूटनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वास, मित्रता और साझा मूल्यों की मजबूत नींव पर आधारित है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड की कई उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने इस देश से बहुत कुछ सीखा है और आज भी सीखने की यह प्रक्रिया लगातार जारी है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता होने के बावजूद समय के साथ स्वयं को निरंतर बदलता और आधुनिक बनाता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी सीखने की क्षमता है। यही कारण है कि देश दुनिया के विभिन्न अनुभवों को अपनाते हुए अपनी विकास यात्रा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति उसके आकार से नहीं, बल्कि जनकल्याण की भावना और समाज के विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से तय होती है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड की लोकतांत्रिक परंपराओं और सामाजिक विकास की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह वही देश है जिसने दुनिया में सबसे पहले महिलाओं को मतदान का अधिकार देकर समानता और लोकतांत्रिक अधिकारों की नई मिसाल पेश की। आज न्यूजीलैंड के विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी उसकी सबसे बड़ी ताकतों में शामिल है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भी महिला सशक्तिकरण को विकास का प्रमुख आधार मानते हुए शिक्षा, उद्यमिता, नेतृत्व और आर्थिक भागीदारी के नए अवसर लगातार बढ़ा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में न्यूजीलैंड की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस देश ने कृषि और उससे जुड़े मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से यह साबित किया है कि ग्रामीण क्षेत्र किसी भी राष्ट्र की आर्थिक ताकत बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों पर आधारित कृषि व्यवस्था को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और वैश्विक बाजार से जोड़कर न्यूजीलैंड ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। भारत जैसे विशाल कृषि प्रधान देश के लिए यह अनुभव प्रेरणादायक है और इससे कई उपयोगी सीख प्राप्त की जा सकती है।

    उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड ने यह भी सिद्ध किया है कि सीमित घरेलू बाजार होने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण उत्पादों और नवाचार के बल पर वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बनाई जा सकती है। भारत भी स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने और कृषि आधारित उद्योगों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इस दिशा में दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

    प्रधानमंत्री ने भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों को भविष्य की साझा यात्रा बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों और पारस्परिक सम्मान की भावना लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने भारतीय समुदाय की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भारत और न्यूजीलैंड शिक्षा, कृषि, व्यापार, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे, जिससे दोनों देशों की साझेदारी और अधिक व्यापक तथा मजबूत बनेगी।

  • 40 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक न्यूजीलैंड दौरा, पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की मुलाकात से द्विपक्षीय संबंधों को मिली नई रफ्तार

    40 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक न्यूजीलैंड दौरा, पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की मुलाकात से द्विपक्षीय संबंधों को मिली नई रफ्तार


    नई दिल्ली ।
    चार दशक से अधिक समय बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा देने का अवसर प्रदान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय राजकीय दौरे पर न्यूजीलैंड पहुंचे, जहां उनका प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भारत और न्यूजीलैंड के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    ऑकलैंड पहुंचने पर दोनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो व्यापक रूप से चर्चा में रहे। स्वागत के दौरान दोनों नेताओं ने आत्मीयता के साथ एक-दूसरे का अभिवादन किया, जिससे दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों का स्पष्ट संदेश भी गया। इस अवसर पर न्यूजीलैंड के शीर्ष नेतृत्व ने भारत के साथ दीर्घकालिक सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

    प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए स्वागत संदेश पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने भी भारत और न्यूजीलैंड की मित्रता तथा प्रगति के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। राष्ट्रपति के इस संदेश का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जवाब दिया और कहा कि मित्र देशों की ओर से मिलने वाले ऐसे विचारपूर्ण संदेश हमेशा विशेष महत्व रखते हैं। इस संवाद को क्षेत्रीय सहयोग और आपसी विश्वास का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों के साथ संबंधों को लगातार मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। भारत की एक्ट ईस्ट नीति और समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की रणनीति के तहत न्यूजीलैंड का महत्व लगातार बढ़ा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, शिक्षा, कृषि, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी का दायरा बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

    दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति देने के लिए विभिन्न संभावनाओं पर विचार होने की उम्मीद है। निवेश बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, नवाचार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा प्रस्तावित है। इसके अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग और मुक्त तथा समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण पर भी दोनों नेताओं के बीच विस्तृत बातचीत होने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री मोदी अपने प्रवास के दौरान न्यूजीलैंड के उद्योग जगत, व्यापारिक समुदाय और खेल क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। साथ ही वहां रहने वाले भारतीय समुदाय को संबोधित कर भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच संबंधों को और मजबूत करने का संदेश देंगे। न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती भागीदारी दोनों देशों के सामाजिक और आर्थिक रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है।

    न्यूजीलैंड प्रधानमंत्री मोदी की तीन देशों की विदेश यात्रा का अंतिम पड़ाव है। इससे पहले वह इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर चुके हैं। लगातार तीन महत्वपूर्ण देशों की इस यात्रा को भारत की सक्रिय विदेश नीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऐतिहासिक यात्रा से भारत और न्यूजीलैंड के बीच सहयोग के नए अवसर खुलेंगे तथा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगी।

  • पीएम मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच कांग्रेस ने साझा की इंदिरा गांधी की ऐतिहासिक तस्वीरें, कूटनीति और प्रकृति संरक्षण की विरासत पर दिया जोर

    पीएम मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच कांग्रेस ने साझा की इंदिरा गांधी की ऐतिहासिक तस्वीरें, कूटनीति और प्रकृति संरक्षण की विरासत पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच राजनीतिक बयानबाजी का नया दौर देखने को मिला है। कांग्रेस ने इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के ऑस्ट्रेलिया दौरों की ऐतिहासिक तस्वीरें साझा करते हुए उनके पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीवों के प्रति लगाव और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में निभाई गई भूमिका को प्रमुखता से सामने रखा। इस कदम को वर्तमान विदेश दौरे के बीच राजनीतिक और वैचारिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने वर्ष 1968 और 1981 के ऑस्ट्रेलिया दौरों से जुड़ी दो तस्वीरें साझा कीं। एक तस्वीर में इंदिरा गांधी कंगारू को भोजन कराती हुई दिखाई देती हैं, जबकि दूसरी तस्वीर में वह सिडनी के तारोंगा जू में कोआला के साथ नजर आती हैं। इन तस्वीरों के माध्यम से कांग्रेस ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि इंदिरा गांधी विदेश यात्राओं के दौरान केवल कूटनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहती थीं, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण जैसे विषयों को भी महत्व देती थीं।

    कांग्रेस का कहना है कि इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण स्थान दिया। उन्होंने विभिन्न देशों के साथ जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण से जुड़े समझौतों को बढ़ावा दिया तथा वैश्विक स्तर पर प्रकृति संरक्षण के प्रयासों का समर्थन किया। उनके कार्यकाल में पर्यावरण से जुड़ी कई नीतियों और संरक्षण अभियानों को भी नई दिशा मिली, जिनका प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिला।

    इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऑस्ट्रेलिया दौरा भी कई महत्वपूर्ण समझौतों और कार्यक्रमों के कारण चर्चा में रहा। दौरे के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक, तकनीकी और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से कई नई पहलों पर सहमति व्यक्त की। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला जैसे भविष्य की तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

    प्रधानमंत्री ने मेलबर्न में भारतीय समुदाय को भी संबोधित किया, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय मौजूद रहे। इसके अलावा उन्होंने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड का दौरा किया और दोनों देशों के बीच खेल सहयोग को नई दिशा देने वाले कार्यक्रमों में भी भाग लिया। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और उच्च तकनीक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से जुड़े कई निर्णय भी इस यात्रा के दौरान सामने आए, जिन्हें द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विदेश यात्राओं के दौरान पूर्व और वर्तमान सरकारों की उपलब्धियों को लेकर राजनीतिक दल अक्सर अपनी-अपनी प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण को सामने रखते हैं। कांग्रेस द्वारा इंदिरा गांधी के पुराने ऑस्ट्रेलिया दौरों को याद करना भी इसी क्रम का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें उनके पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में योगदान को रेखांकित किया गया है।

    भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। रक्षा, व्यापार, शिक्षा, खेल, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ा है। ऐसे समय में वर्तमान कूटनीतिक उपलब्धियों के साथ-साथ ऐतिहासिक संदर्भों को भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े मुद्दे देश की आंतरिक राजनीति में भी लगातार महत्वपूर्ण स्थान बनाए हुए हैं।

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया ने खेल सहयोग को दी नई उड़ान, कबड्डी से ऑस्ट्रेलियन फुटबॉल तक साझा रोडमैप, खिलाड़ियों और खेल विज्ञान पर रहेगा विशेष फोकस

    भारत-ऑस्ट्रेलिया ने खेल सहयोग को दी नई उड़ान, कबड्डी से ऑस्ट्रेलियन फुटबॉल तक साझा रोडमैप, खिलाड़ियों और खेल विज्ञान पर रहेगा विशेष फोकस

    नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रेलिया ने खेल सहयोग को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से एक व्यापक स्पोर्ट्स रोडमैप पर सहमति बनाई है। इस पहल का लक्ष्य दोनों देशों के बीच खिलाड़ियों के विकास, खेल विज्ञान, प्रशिक्षण, निवेश और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में सहयोग को मजबूत करना है। इस रोडमैप के माध्यम से खेलों को केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित न रखते हुए शिक्षा, तकनीक, उद्योग और सांस्कृतिक साझेदारी के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।

    यह रोडमैप वर्ष 2023 में दोनों देशों के बीच हुए खेल सहयोग समझौते को आगे बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में 2030 राष्ट्रमंडल खेल, 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक और पैरालंपिक सहित बड़े वैश्विक आयोजनों को ध्यान में रखते हुए सहयोग के ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिनसे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। इसके तहत अनुभवों का आदान-प्रदान, संयुक्त प्रशिक्षण और खेल प्रबंधन में साझेदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।

    दोनों देशों ने खेल प्रशासन की अलग-अलग व्यवस्थाओं का सम्मान करते हुए संस्थागत सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। खेल संगठनों, विश्वविद्यालयों, राज्य सरकारों, निजी कंपनियों और सामुदायिक संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित कर नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। उपलब्ध संसाधनों और साझा प्राथमिकताओं के आधार पर विभिन्न कार्यक्रमों का चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वयन किया जाएगा, जिससे सहयोग का दायरा लगातार विस्तारित हो सके।

    रोडमैप में खिलाड़ियों और कोचों के क्षमता विकास को विशेष महत्व दिया गया है। भारत में हाई-परफॉर्मेंस प्रशिक्षण केंद्रों के विकास, पैरा खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाओं, प्रशिक्षकों के आदान-प्रदान और ‘ट्रेन द ट्रेनर’ मॉडल के माध्यम से आधुनिक प्रशिक्षण प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा। भारतीय खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया के उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने तथा ऑस्ट्रेलिया में योग और भारतीय खेल परंपराओं के प्रचार पर भी ध्यान दिया जाएगा।

    खेल विज्ञान और तकनीक इस साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार होंगे। दोनों देशों के विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान खिलाड़ियों के प्रदर्शन विश्लेषण, चोटों की रोकथाम, खेल पोषण, रिकवरी तकनीक, वियरेबल तकनीक और पैरा खेलों से जुड़े शोध पर मिलकर काम करेंगे। साथ ही डोपिंग रोधी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए संबंधित संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा तथा खेल नैतिकता और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

    इस साझेदारी के तहत खेल संस्कृति के विस्तार पर भी विशेष जोर दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया में कबड्डी और खो-खो जैसे भारतीय पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने की योजना है, जबकि भारत में ऑस्ट्रेलियन फुटबॉल लीग और बास्केटबॉल जैसे खेलों की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए प्रदर्शनी मुकाबलों और विशेष आयोजनों का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही भारत में नियमित रूप से बिग बैश लीग के मुकाबले आयोजित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे, जिससे दोनों देशों के खेल प्रेमियों को नए अनुभव मिल सकें।

    रोडमैप में खेल उद्योग, खेल उपकरण निर्माण, मीडिया, प्रसारण, आयोजन प्रबंधन और स्टार्टअप क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की भी योजना शामिल है। भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के बीच व्यावसायिक सहयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि खेल अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व और उच्च प्रदर्शन वाले खेलों में उनके अवसरों को बढ़ाने के लिए संयुक्त कार्यक्रमों और द्विपक्षीय प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यापक साझेदारी दोनों देशों के खेल संबंधों को नई दिशा देने के साथ भविष्य की अंतरराष्ट्रीय खेल तैयारियों को भी मजबूत आधार प्रदान करेगी।

  • मोदी दौरे ने फिर दिखाई भारतीय समुदाय की ताकत, ऑस्ट्रेलिया में व्यापार, निवेश और राजनीतिक प्रभाव को मिली नई पहचान

    मोदी दौरे ने फिर दिखाई भारतीय समुदाय की ताकत, ऑस्ट्रेलिया में व्यापार, निवेश और राजनीतिक प्रभाव को मिली नई पहचान


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को नई गति देने के साथ-साथ वहां रह रहे भारतीय समुदाय की बढ़ती भूमिका को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। पिछले कुछ वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती आबादी, उनकी आर्थिक भागीदारी और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय उपस्थिति ने दोनों देशों के संबंधों को मजबूत आधार प्रदान किया है। यही कारण है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली रणनीतिक वार्ताओं में भारतीय समुदाय को केवल प्रवासी समूह नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।

    ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवाओं, इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाओं, उद्यमिता और शोध जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय छात्र वहां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि हजारों पेशेवर विभिन्न उद्योगों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके साथ ही भारतीय उद्यमियों ने छोटे और मध्यम उद्योगों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था में निवेश और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    राजनीतिक दृष्टि से भी भारतीय समुदाय का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न राज्यों और स्थानीय निकायों में भारतीय मूल के प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ी है। चुनावों के दौरान प्रमुख राजनीतिक दल भारतीय समुदाय से संवाद को प्राथमिकता दे रहे हैं और उनकी सामाजिक तथा आर्थिक प्राथमिकताओं को अपने एजेंडे में स्थान दे रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय मूल के मतदाता अब वहां की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण समूह के रूप में उभर चुके हैं।

    भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट भी दोनों देशों को जोड़ने वाला सबसे मजबूत सांस्कृतिक माध्यम बना हुआ है। खेल के जरिए दोनों देशों के लोगों के बीच वर्षों से गहरा जुड़ाव बना है। क्रिकेट ने केवल खेल संबंधों को ही मजबूत नहीं किया, बल्कि पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और व्यावसायिक अवसरों को भी नई दिशा दी है। दोनों देशों के बीच खेल सहयोग लगातार बढ़ रहा है और इससे सामाजिक स्तर पर भी निकटता मजबूत हुई है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान व्यापार, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इससे यह संकेत मिला कि भारत और ऑस्ट्रेलिया केवल व्यापारिक साझेदार ही नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी के रूप में भी अपने संबंधों को नई ऊंचाई देना चाहते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय की सफलता केवल आर्थिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। यह समुदाय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक विश्वास, सामाजिक सहयोग और दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश, शिक्षा, नवाचार और रक्षा सहयोग के विस्तार के साथ भारतीय समुदाय की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने की संभावना है। इसी कारण भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों में भारतीय प्रवासी समुदाय को भविष्य की साझेदारी का एक मजबूत और भरोसेमंद स्तंभ माना जा रहा है।

  • तीन देशों के रणनीतिक दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंचे पीएम मोदी, द्विपक्षीय संबंधों और आर्थिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

    तीन देशों के रणनीतिक दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंचे पीएम मोदी, द्विपक्षीय संबंधों और आर्थिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की रणनीतिक विदेश यात्रा के अंतिम चरण में शुक्रवार को न्यूजीलैंड पहुंच गए। इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पूरी करने के बाद उनका यह दौरा भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग को और अधिक मजबूत बनाना है। भारत की बदलती वैश्विक भूमिका और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक महत्व के बीच यह दौरा विशेष महत्व रखता है।

    ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को लेकर सहमति बनी। नागरिक परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की दिशा में सकारात्मक पहल हुई। इन समझौतों को भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके बाद अब न्यूजीलैंड यात्रा पर भी दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नए स्तर तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।

    प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर ऑकलैंड पहुंचे हैं। यहां उनके विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के साथ उच्चस्तरीय बैठकों में भाग लेने का कार्यक्रम निर्धारित है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच व्यापार, निवेश, कृषि, शिक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग जैसे अनेक विषयों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संबंधों और आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री सरकारी कार्यक्रमों के अलावा व्यापार और खेल क्षेत्र से जुड़े आयोजनों में भी हिस्सा लेंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से उद्योग जगत, निवेशकों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा। भारतीय समुदाय के साथ उनका विशेष कार्यक्रम भी प्रस्तावित है, जिसमें दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को और मजबूत करने का संदेश दिया जाएगा। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय की भूमिका को भारत लगातार अपनी वैश्विक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार मानता रहा है।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक और रणनीतिक सहयोग लगातार बढ़ा है। दोनों देश मुक्त और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के पक्षधर रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की यह यात्रा भविष्य की साझेदारी के लिए नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापारिक अवसरों में विस्तार के साथ निवेश और तकनीकी सहयोग को भी नई गति मिलेगी।

    प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यह यात्रा भारत की सक्रिय विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। लगातार बढ़ते वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक बदलावों के बीच भारत अपने प्रमुख साझेदार देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इस यात्रा के समापन के बाद प्रधानमंत्री नई दिल्ली लौटेंगे। माना जा रहा है कि इस पूरे दौरे के परिणाम आने वाले वर्षों में भारत के व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान करेंगे।

  • पीएम मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा से पहले बड़ा व्यापारिक संकेत, 57% उत्पादों पर टैरिफ हटाने की घोषणा से मजबूत होंगे द्विपक्षीय संबंध

    पीएम मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा से पहले बड़ा व्यापारिक संकेत, 57% उत्पादों पर टैरिफ हटाने की घोषणा से मजबूत होंगे द्विपक्षीय संबंध

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित न्यूजीलैंड यात्रा से पहले दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के तहत अपने देश के 57 प्रतिशत निर्यातित उत्पादों पर पहले दिन से टैरिफ नहीं लगाने की घोषणा की है। इस फैसले को दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 और 11 जुलाई को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर न्यूजीलैंड पहुंचेंगे। लगभग चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक राजकीय यात्रा होगी। ऐसे समय में व्यापार समझौते को लेकर न्यूजीलैंड की ओर से आया यह संकेत दोनों देशों के बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को दर्शाता है। माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और कृषि सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने पर व्यापक चर्चा होगी।

    न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा है कि भारत के साथ होने वाला व्यापार समझौता उनके देश के निर्यातकों के लिए नए अवसर लेकर आएगा। उनका मानना है कि भारतीय बाजार तक आसान पहुंच मिलने से न्यूजीलैंड के उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए दीर्घकालिक लाभ का आधार बनेगा।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कई वर्षों से जारी रही है। इसकी शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद वार्ताएं ठहर गई थीं। बाद में दोनों देशों ने दोबारा बातचीत शुरू करने का निर्णय लिया और कई दौर की चर्चाओं के बाद समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई। अब दोनों सरकारें इसे व्यावहारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार का दायरा बढ़ेगा और निवेश के नए अवसर भी विकसित होंगे। कृषि उत्पाद, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं मजबूत होंगी। इसके साथ ही भारतीय कंपनियों को भी न्यूजीलैंड के बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।

    आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक व्यापार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ऐसे समझौते दोनों देशों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और नए बाजार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत और न्यूजीलैंड के बीच बढ़ते आर्थिक संबंध हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापक रणनीतिक सहयोग को भी नई गति दे सकते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी की आगामी यात्रा को केवल एक औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। यात्रा के दौरान होने वाली उच्चस्तरीय वार्ताओं से व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद है। ऐसे में टैरिफ में प्रस्तावित राहत का यह फैसला दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

  • बोरोबुदुर के बाद प्रम्बानन तक बढ़ा भारत का संरक्षण अभियान, इंडोनेशिया के साथ विरासत संरक्षण सहयोग हुआ और मजबूत

    बोरोबुदुर के बाद प्रम्बानन तक बढ़ा भारत का संरक्षण अभियान, इंडोनेशिया के साथ विरासत संरक्षण सहयोग हुआ और मजबूत

    नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को नई मजबूती देते हुए योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने संयुक्त रूप से इस परियोजना का शुभारंभ किया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संचालित यह परियोजना दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को और गहरा करने के साथ-साथ साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी इंडोनेशिया यात्रा के दौरान योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा किया। इस विशेष अवसर पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो स्वयं उनके साथ मंदिर परिसर पहुंचे। दोनों नेताओं ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की संरक्षण एवं पुनर्स्थापन परियोजना की प्रतीकात्मक पट्टिका का अनावरण कर इस सहयोग की औपचारिक शुरुआत की। इस मौके को भारत और इंडोनेशिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया।

    प्रम्बानन मंदिर परिसर का निर्माण नौवीं शताब्दी में हुआ था और इसे इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है। यह मंदिर भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पित है तथा हिंदू त्रिमूर्ति की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है। स्थापत्य कला, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक विरासत के कारण यह परिसर विश्वभर के शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

    यह संरक्षण परियोजना वर्ष 2025 में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच बनी सहमति का परिणाम है। उस समय भारत द्वारा प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन में तकनीकी सहयोग देने पर सहमति बनी थी। अब इस परियोजना की शुरुआत के साथ दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को व्यावहारिक रूप दिया गया है।

    भारत को ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इससे पहले भी दक्षिण-पूर्व एशिया के कई महत्वपूर्ण विरासत स्थलों के संरक्षण कार्य में योगदान दे चुका है। इंडोनेशिया के प्रसिद्ध बोरोबुदुर मंदिर परिसर का विस्तृत दस्तावेजीकरण भी भारतीय विशेषज्ञों द्वारा किया गया था। इसी अनुभव के आधार पर अब प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन में भी भारत अपनी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा।

    यह पहल केवल एक संरक्षण परियोजना नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक संबंधों और पारंपरिक मूल्यों के संरक्षण की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का भी प्रतीक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्राचीन धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन और शोध के नए अवसर भी विकसित होंगे।

    भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध समुद्री व्यापार, धर्म, कला और स्थापत्य परंपराओं के माध्यम से विकसित हुए हैं। प्रम्बानन मंदिर संरक्षण परियोजना इन ऐतिहासिक रिश्तों को आधुनिक सहयोग के साथ जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। इस पहल से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति को नई गति मिलने और साझा विरासत के संरक्षण में दीर्घकालिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • इंडोनेशिया में भारत की कूटनीतिक ताकत का बड़ा प्रदर्शन, 20 अहम समझौतों के साथ रक्षा, व्यापार और समुद्री सहयोग को मिली नई दिशा

    इंडोनेशिया में भारत की कूटनीतिक ताकत का बड़ा प्रदर्शन, 20 अहम समझौतों के साथ रक्षा, व्यापार और समुद्री सहयोग को मिली नई दिशा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इंडोनेशिया यात्रा भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हुई है। जकार्ता में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, कृषि, अंतरिक्ष, चुनाव प्रबंधन, निवेश और महत्वपूर्ण खनिजों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच अनेक महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिन्हें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।

    यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया गया और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उन्हें इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा’ से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री ने इस सम्मान को भारत के 140 करोड़ नागरिकों का सम्मान बताते हुए इंडोनेशिया की सरकार और वहां की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक संबंध समय के साथ और अधिक मजबूत हुए हैं तथा भविष्य में यह साझेदारी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।

    द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा सहयोग सबसे प्रमुख विषय रहा। दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण समझौता हुआ, जिसे भारत के रक्षा निर्यात और स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इसके साथ ही समुद्री सुरक्षा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग और सामरिक समन्वय को भी आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों से क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग और आपसी विश्वास को नई मजबूती मिलेगी।

    बैठक के दौरान चुनाव प्रबंधन और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रणाली में सहयोग, कृषि अनुसंधान, खाद्य सुरक्षा, अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीकी साझेदारी तथा क्रिटिकल मिनरल्स में निवेश जैसे विषयों पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। दोनों देशों ने विज्ञान, नवाचार और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इससे आर्थिक संबंधों के साथ-साथ तकनीकी साझेदारी के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

    इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया मिलकर दुनिया में मानवता को नई ऊर्जा प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत विस्तारवाद नहीं बल्कि विकासवाद की नीति में विश्वास रखता है। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों की समुद्री निकटता का उल्लेख करते हुए कहा कि भौगोलिक दूरी भले अधिक दिखाई देती हो, लेकिन समुद्र दोनों देशों के बीच सहयोग और विश्वास का मजबूत सेतु है। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों, शांति और साझा विकास को दोनों देशों की साझेदारी का आधार बताया।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और इंडोनेशिया का संबंध केवल सरकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों की जनता, संस्कृति, इतिहास और सभ्यताओं के बीच गहरे जुड़ाव पर आधारित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश वैश्विक चुनौतियों का समाधान सहयोग, संवाद और परस्पर सम्मान के माध्यम से तलाशने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी उल्लेख करते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास को रेखांकित किया।

    यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी जकार्ता में भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम के माध्यम से भारत की विकास यात्रा, वैश्विक भूमिका और प्रवासी भारतीयों के योगदान पर विशेष जोर दिए जाने की उम्मीद है। कुल मिलाकर यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, आर्थिक संबंधों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखी जा रही है।