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  • NDA सांसदों की बैठक में सोशल मीडिया पर खास जोर, PM मोदी ने युवाओं से कनेक्शन बढ़ाने और डिजिटल सक्रियता की दी सलाह

    NDA सांसदों की बैठक में सोशल मीडिया पर खास जोर, PM मोदी ने युवाओं से कनेक्शन बढ़ाने और डिजिटल सक्रियता की दी सलाह

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ NDA के नए लोकसभा सांसदों की बैठक में इस बार सोशल मीडिया की सक्रियता को खास महत्व दिया गया। बैठक के दौरान सांसदों को उनके पिछले 90 दिनों की सोशल मीडिया गतिविधियों का एक पेज का रिपोर्ट कार्ड सौंपा गया। इसमें अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर सांसदों की सक्रियता, पोस्ट की संख्या, लोगों तक पहुंच और प्रतिक्रियाओं से जुड़े आंकड़े शामिल थे। सांसदों से सोशल मीडिया के जरिए युवाओं के साथ अपना संपर्क और मजबूत करने को कहा गया।

    बैठक में प्रधानमंत्री ने NDA के भीतर पुराने और नए सांसदों के बीच समानता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन में कोई सांसद 20 साल पुराना हो या 20 दिन पुराना, सभी के लिए बराबर सम्मान है। बैठक में हाल के राजनीतिक बदलावों के बाद NDA के साथ आए कुछ सांसद भी शामिल हुए। इनमें टीएमसी से अलग होकर NCPI में शामिल हुए सांसद और शिवसेना यूबीटी से अलग होकर शिवसेना में आए सांसद भी मौजूद रहे।

    सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड को बैठक की प्रमुख बातों में माना जा रहा है। इसमें सांसदों के पिछले तीन महीनों के डिजिटल प्रदर्शन का आकलन किया गया। रिपोर्ट में एक्स पर सांसद द्वारा की गई पोस्ट की संख्या, उन पोस्ट पर आए इंप्रेशन और कमेंट जैसे आंकड़े दर्ज किए गए। इसी तरह फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सांसदों की गतिविधियों और उनकी पहुंच से जुड़े आंकड़े भी रिपोर्ट में शामिल किए गए।

    सांसदों को समझाया गया कि आज के दौर में जनता, खासकर युवाओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इसलिए केवल संसद और क्षेत्र में सक्रिय रहना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी नियमित और प्रभावी संवाद जरूरी है। सांसदों को अपनी सोशल मीडिया मौजूदगी को अधिक सक्रिय और जनता से जुड़ा बनाने का सुझाव दिया गया।

    90 दिनों के डेटा को आधार बनाकर तैयार किया गया यह रिपोर्ट कार्ड सांसदों की डिजिटल सक्रियता का तुलनात्मक आकलन करने में भी मदद कर सकता है। पोस्ट की संख्या और इंप्रेशन जैसे आंकड़े यह समझने में मदद करते हैं कि सांसद सोशल मीडिया पर कितने सक्रिय हैं और उनकी सामग्री कितने लोगों तक पहुंच रही है। इसके अलावा कमेंट और अन्य प्रतिक्रियाएं जनता की ऑनलाइन भागीदारी का संकेत देती हैं।

    बैठक में सांसदों के स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने सांसदों से अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने और नियमित जांच कराने की सलाह दी। खासतौर पर 40 वर्ष से अधिक उम्र के सांसदों को नियमित मेडिकल चेकअप कराने की बात कही गई। योग को लेकर भी उन्होंने सांसदों से सवाल किया और पूछा कि नियमित योग करने वाले कितने सांसद हैं।

    प्रधानमंत्री ने स्थिर सरकार के महत्व का भी उल्लेख किया। बातचीत के दौरान उन्होंने विदेशों में सरकारों के बार-बार बदलने का उदाहरण देते हुए राजनीतिक स्थिरता की जरूरत पर बात की। साथ ही सांसदों को भरोसा दिलाया कि यदि उन्हें अपने क्षेत्र से जुड़ी कोई समस्या या व्यक्तिगत स्तर पर कोई कठिनाई हो तो वे सीधे उनसे संपर्क कर सकते हैं।

    बैठक में पूर्वी भारत के विकास को लेकर भी प्रधानमंत्री ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में कोलकाता, ओडिशा और भुवनेश्वर का ऐसा कायाकल्प होगा जिसकी अभी कल्पना करना भी मुश्किल है। इस तरह बैठक में डिजिटल सक्रियता, स्वास्थ्य, राजनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय विकास जैसे कई मुद्दों पर सांसदों को दिशा देने की कोशिश की गई।

  • राम मंदिर ट्रस्ट से पुलिस कार्रवाई तक कई मुद्दों पर सरकार घिरी, संसद में चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन

    राम मंदिर ट्रस्ट से पुलिस कार्रवाई तक कई मुद्दों पर सरकार घिरी, संसद में चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को भी राजनीतिक माहौल गर्म रहा। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के बीच विपक्षी दलों ने कई मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में उपस्थित होकर जवाब देने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि जिन विषयों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उन पर संसद में खुली और विस्तृत चर्चा कराई जानी चाहिए ताकि सभी पक्षों के सामने स्थिति स्पष्ट हो सके।

    राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका आरोप था कि सरकार चर्चा से बच रही है, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद ही वह सर्वोच्च मंच है जहां सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को सदन में आकर अपना पक्ष रखना चाहिए ताकि उठाए गए मुद्दों पर सार्थक बहस हो सके।

    विपक्ष की ओर से राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ मामलों को भी उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनका विरोध किसी धार्मिक आस्था या भगवान राम के प्रति नहीं है, बल्कि मंदिर निर्माण के लिए मिले दान और उससे जुड़े विभिन्न मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग है। उनका कहना था कि यदि किसी भी प्रकार के सवाल उठते हैं तो उनका उत्तर सार्वजनिक रूप से दिया जाना चाहिए, जिससे किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे।

    संसद परिसर में कांग्रेस सांसदों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। पार्टी नेताओं ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखने और सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग दोहराई। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता और विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का स्पष्ट उत्तर दे। उन्होंने कथित पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने तथा निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष का विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक दायरे में है। उन्होंने कहा कि जिन घटनाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सके। विपक्षी दलों का कहना है कि संसद में चर्चा के माध्यम से ही लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास और अधिक मजबूत किया जा सकता है।

    वहीं सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों पर अलग-अलग स्तर पर जवाब दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। मानसून सत्र के दौरान विभिन्न राजनीतिक और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी इन विषयों को लेकर संसद में बहस और विरोध का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में दोनों पक्षों की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • पीएम मोदी का वीडियो हटने पर मेटा पर संसदीय समिति सख्त, मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन में बिना शर्त माफी का अल्टीमेटम

    पीएम मोदी का वीडियो हटने पर मेटा पर संसदीय समिति सख्त, मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन में बिना शर्त माफी का अल्टीमेटम

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक से कुछ समय के लिए हटाए जाने के मामले ने अब राजनीतिक और संसदीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। इस घटनाक्रम को लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति ने मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। समिति ने कंपनी से तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने और इस घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। समिति का कहना है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो कंपनी के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।

    समिति के अनुसार सोशल मीडिया मंचों की जिम्मेदारी है कि वे सार्वजनिक महत्व की सामग्री के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखें। प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद से जुड़े आधिकारिक या सार्वजनिक महत्व के वीडियो के अस्थायी रूप से हटने की घटना को गंभीरता से लिया गया है। इसी कारण कंपनी से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों का भी विवरण मांगा गया है।

    बताया गया है कि संसदीय समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि यह तकनीकी त्रुटि थी तो उसके कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं यदि किसी मानवीय निर्णय के कारण वीडियो हटाया गया था तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। समिति का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सामग्री के प्रबंधन में स्पष्ट मानकों और जवाबदेही का पालन आवश्यक है, ताकि उपयोगकर्ताओं का विश्वास बना रहे।

    हाल के वर्षों में सोशल मीडिया कंपनियों और भारतीय संस्थानों के बीच डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, सामग्री मॉडरेशन और सूचना प्रबंधन को लेकर कई बार चर्चा होती रही है। सरकार लगातार यह कहती रही है कि भारत में काम करने वाले सभी डिजिटल मंचों को देश के कानूनों और नियामकीय व्यवस्थाओं का पूरी तरह पालन करना चाहिए। इसी संदर्भ में यह मामला भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी भी सार्वजनिक महत्व की सामग्री को हटाने या सीमित करने से पहले निर्धारित प्रक्रियाओं और पारदर्शिता का पालन आवश्यक है। इससे गलतफहमियों की संभावना कम होती है और प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता भी बनी रहती है। डिजिटल मंचों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए जवाबदेही और तकनीकी दक्षता दोनों को समान महत्व दिया जा रहा है।

    अब सभी की नजर मेटा की अगली प्रतिक्रिया पर है। यदि कंपनी निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखती है और आवश्यक स्पष्टीकरण देती है तो मामले की दिशा अलग हो सकती है। वहीं यदि समिति को जवाब संतोषजनक नहीं लगता या निर्धारित समय में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती, तो संसदीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी, पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • पीएम मोदी का वीडियो हटने के विवाद पर महुआ मोइत्रा का बयान, मेटा और सरकार के बीच बढ़ा सियासी टकराव

    पीएम मोदी का वीडियो हटने के विवाद पर महुआ मोइत्रा का बयान, मेटा और सरकार के बीच बढ़ा सियासी टकराव

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो कुछ समय के लिए हटाए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। इस पूरे मामले में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग के समर्थन में बयान देते हुए कहा है कि उन्हें किसी भी प्रकार के सरकारी दबाव में नहीं आना चाहिए और न ही इस मुद्दे पर माफी मांगनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर और तेज हो गया है।

    महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में आरोप लगाया कि भारत सरकार अक्सर अपनी आलोचना से जुड़े कंटेंट को हटवाने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि किसी तकनीकी कारण से कुछ घंटों के लिए वीडियो हट जाना कोई ऐसा मामला नहीं है, जिससे बड़ा संकट पैदा हो जाए। उनका कहना था कि किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म को स्वतंत्र रूप से अपने नियमों के अनुसार काम करना चाहिए और दबाव में निर्णय नहीं लेने चाहिए।

    यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक से अस्थायी रूप से हट गया था। वीडियो में उन्होंने युवाओं से संवाद करते हुए पेपर लीक जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था। बाद में मेटा ने इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए खेद व्यक्त किया और वीडियो को दोबारा बहाल कर दिया। हालांकि केंद्र सरकार ने इस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब तलब किया।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए संसदीय समिति की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान सदस्यों ने सवाल उठाया कि यदि देश के प्रधानमंत्री का आधिकारिक वीडियो भी सुरक्षित नहीं रह सकता, तो आम नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर क्या भरोसा किया जा सकता है। समिति में डीपफेक तकनीक की रोकथाम और एल्गोरिदम की प्रभावशीलता पर भी चर्चा की गई।

    बैठक में उपस्थित मेटा अधिकारियों ने घटना पर खेद व्यक्त करते हुए समिति के सामने माफी मांगने की बात कही। कई सदस्यों ने केवल माफी को पर्याप्त नहीं बताते हुए जिम्मेदारी तय करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग भी रखी। उनका कहना था कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनी तकनीकी और निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना होगा ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एआई तकनीक से तैयार किए गए कथित मॉर्फ्ड फोटो और वीडियो प्रसारित किए जाने के मामले में भी जांच तेज हो गई है। इस संबंध में हैदराबाद पुलिस ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और मेटा इंडिया से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आवश्यक जानकारी मांगी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कथित रूप से भ्रामक सामग्री तैयार करने और प्रसारित करने में किन लोगों की भूमिका रही। केंद्र सरकार ने भी इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब मांगा है। ऐसे में तकनीकी प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल सुरक्षा को लेकर बहस एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर तेज होती दिखाई दे रही है।

  • भूमि पेडनेकर ने पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र नारों पर जताई आपत्ति, युवाओं से शालीन संवाद बनाए रखने की अपील

    भूमि पेडनेकर ने पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र नारों पर जताई आपत्ति, युवाओं से शालीन संवाद बनाए रखने की अपील

    नई दिल्ली । अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने हाल ही में छात्र आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगाए गए अभद्र नारों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सार्वजनिक संवाद में शालीनता बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना और किसी नीति या फैसले का विरोध करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का प्रयोग मर्यादित भाषा और सम्मानजनक व्यवहार के साथ किया जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब छात्र आंदोलन से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से चर्चा का विषय बने हुए हैं।

    भूमि पेडनेकर ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में कहा कि हाल के दिनों में सामने आए कुछ वीडियो देखकर उन्हें निराशा हुई। उनके अनुसार, किसी भी मुद्दे पर असहमति व्यक्त करना स्वाभाविक है, लेकिन देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि विचारों का मतभेद लोकतंत्र की ताकत है, परंतु संवाद की भाषा हमेशा संयमित और सम्मानजनक रहनी चाहिए।

    अभिनेत्री ने अपने संदेश में सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लोग अपने घर के बड़े-बुजुर्गों से सम्मानपूर्वक बातचीत करते हैं, उसी तरह सार्वजनिक जीवन में भी भाषा की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है। उनका मानना है कि कटु और अपमानजनक शब्द किसी भी समस्या का समाधान नहीं करते, बल्कि सामाजिक वातावरण को और अधिक तनावपूर्ण बना देते हैं।

    भूमि पेडनेकर ने विशेष रूप से युवाओं से संयम और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा हमेशा सभ्य संवाद, आपसी सम्मान और विचारों के आदान-प्रदान पर आधारित रही है। यदि नई पीढ़ी भी इसी परंपरा का पालन करेगी तो लोकतांत्रिक विमर्श और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि असहमति व्यक्त करते समय भी दूसरों के सम्मान का ध्यान रखना समाज के हित में है।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम और छात्र आंदोलन के दौरान कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इन वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा राजनीतिक नेताओं और सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए जाने के दावे किए गए, जिसके बाद इस विषय पर विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। इसी क्रम में भूमि पेडनेकर ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी राय व्यक्त की।

    इस मुद्दे पर इससे पहले अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत भी प्रतिक्रिया दे चुकी हैं। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि किसी भी आंदोलन में अभद्र व्यवहार स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध छात्रों के आंदोलन से नहीं, बल्कि प्रदर्शन के दौरान प्रयोग की गई आपत्तिजनक भाषा और आचरण से था।

    भूमि पेडनेकर के बयान के बाद यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ संवाद की मर्यादा भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर मतभेद स्वाभाविक हो सकते हैं, लेकिन सम्मानजनक भाषा और जिम्मेदार व्यवहार लोकतांत्रिक संस्कृति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सार्वजनिक जीवन में संयमित संवाद और परस्पर सम्मान को बनाए रखने की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

  • पीएम मोदी की अपील के बाद नाबालिग लड़की की मां ने जताया आभार, एफआईआर वापस लेने की लगाई गुहार

    पीएम मोदी की अपील के बाद नाबालिग लड़की की मां ने जताया आभार, एफआईआर वापस लेने की लगाई गुहार

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र नारेबाजी करने के आरोप में चर्चा में आई 15 वर्षीय नाबालिग लड़की की मां ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि उनकी बेटी को सुधार का अवसर देकर नया जीवन मिला है। उन्होंने कहा कि कठोर कार्रवाई की बजाय क्षमा और मार्गदर्शन का संदेश समाज के लिए सकारात्मक उदाहरण है। साथ ही उन्होंने बेटी के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की भी अपील की है।

    यह मामला उस समय चर्चा में आया जब एक प्रदर्शन के दौरान नाबालिग लड़की का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें वह प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाती दिखाई दी। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया शुरू की और इस संबंध में मामला दर्ज किया गया। बाद में यह मामला संबंधित थाने को स्थानांतरित कर दिया गया, जहां आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    इस घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश साझा करते हुए कहा कि प्रदर्शनों के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले कई बच्चे परिस्थितियों और बहकावे का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि गाली-गलौज या अपमानजनक भाषा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। समाज को ऐसे बच्चों को अपराधी की तरह देखने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास करना चाहिए ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

    प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद संबंधित नाबालिग लड़की ने भी सार्वजनिक रूप से हाथ जोड़कर माफी मांगी। उसने कहा कि वह अपने दोस्तों के साथ दिल्ली के कनॉट प्लेस घूमने गई थी और वहीं पास में चल रहे प्रदर्शन के दौरान दूसरों के प्रभाव में आकर आपत्तिजनक नारे लगाने लगी। लड़की ने स्वीकार किया कि उससे गंभीर गलती हुई और उसने इसे अपने जीवन की पहली तथा अंतिम भूल बताते हुए देशवासियों से क्षमा मांगी।

    लड़की की मां ने भावुक होकर कहा कि संयोग से जिस दिन प्रधानमंत्री ने क्षमा का संदेश दिया, उसी दिन उनकी बेटी का जन्मदिन भी था। उनके अनुसार यह उनकी बेटी के लिए सबसे बड़ा उपहार है, क्योंकि उसे अपनी गलती सुधारने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि परिवार अपनी भूल स्वीकार करता है और चाहता है कि गलत नाम और उम्र के साथ दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाए, ताकि उनकी बेटी सामान्य जीवन की ओर लौट सके और अपनी पढ़ाई तथा भविष्य पर ध्यान दे सके।

    मां ने इस पूरे घटनाक्रम के बाद सरकार से एक व्यापक नीति बनाने की भी मांग की। उनका कहना है कि कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए सख्त नियम बनाए जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि नाबालिगों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण हो और उन्हें राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल होने से भी रोका जाए, क्योंकि कम उम्र में बच्चे आसानी से दूसरों के प्रभाव में आ सकते हैं।

    इस बीच पूरे घटनाक्रम को लेकर सार्वजनिक स्तर पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री के सुधारवादी दृष्टिकोण की सराहना की है, जबकि कुछ ने कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। फिलहाल संबंधित एफआईआर और मामले की आगे की कार्रवाई पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार जारी है। यह प्रकरण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सोशल मीडिया की भूमिका, नाबालिगों की जिम्मेदारी और कानून के बीच संतुलन को लेकर भी नई चर्चा का विषय बन गया है।

  • विकसित भारत के संकल्प से जोड़ा नशा मुक्ति अभियान, युवाओं से नेतृत्व संभालने का पीएम मोदी का आह्वान

    विकसित भारत के संकल्प से जोड़ा नशा मुक्ति अभियान, युवाओं से नेतृत्व संभालने का पीएम मोदी का आह्वान

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत करते हुए देशभर के युवाओं से नशे के खिलाफ व्यापक जनभागीदारी का आह्वान किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत में ड्रग्स की आपूर्ति केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह देश के खिलाफ रची जा रही एक बड़ी साजिश का हिस्सा भी है। उन्होंने कहा कि दुश्मन देश भारतीय युवाओं को नशे के जाल में फंसाकर देश की ऊर्जा और क्षमता को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे समाज और सरकार को मिलकर विफल करना होगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश का युवा शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से सशक्त होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति केवल एक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित नहीं करती, बल्कि पूरे परिवार और समाज पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें।

    अभियान के तहत अगले 100 सप्ताह तक प्रत्येक रविवार देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें खेल, कला, संस्कृति, जनजागरूकता गतिविधियों और सामुदायिक अभियानों के माध्यम से नशा मुक्ति का संदेश लोगों तक पहुंचाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से चलने वाला राष्ट्रीय अभियान है, जिसका उद्देश्य नशे के खिलाफ जनचेतना को मजबूत करना है।

    कार्यक्रम की शुरुआत में देशभर के युवाओं ने एक साथ नशा मुक्त भारत की शपथ ली। यह आयोजन 28 हजार से अधिक स्थानों पर एक साथ आयोजित किया गया, जिसमें एक करोड़ से अधिक युवाओं ने भागीदारी की। कार्यक्रम में कई आध्यात्मिक गुरुओं ने भी वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की और युवाओं को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य जनप्रतिनिधि भी इस अभियान से जुड़े।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत के युवा स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विज्ञान, अंतरिक्ष और नवाचार जैसे क्षेत्रों में वैश्विक पहचान बना रहे हैं। ऐसे समय में यदि कोई युवा नशे की गिरफ्त में आता है तो उसका व्यक्तिगत भविष्य ही नहीं, बल्कि परिवार की उम्मीदें और राष्ट्र की प्रगति भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और जीवन के लक्ष्यों को कमजोर कर देता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सरकार नशे के अवैध कारोबार और तस्करी के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की जब्ती, तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने इसे सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि ड्रग्स माफिया और तस्करों के खिलाफ अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि नशे की लत से बाहर निकलने वाले लोगों का समाज को सम्मान करना चाहिए, क्योंकि उनका संघर्ष दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकता है। उन्होंने इस अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने पर बल देते हुए कहा कि स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, सामाजिक संस्थाएं, उद्योग जगत और आध्यात्मिक संगठन मिलकर युवाओं को जागरूक करें। उनके अनुसार, सामूहिक प्रयासों और जनसहभागिता के माध्यम से ही नशा मुक्त भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकता है।

  • SCO शिखर सम्मेलन में PM मोदी के पाकिस्तान दौरे पर सस्पेंस, इस्लामाबाद ने सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करने की तैयारी शुरू की

    SCO शिखर सम्मेलन में PM मोदी के पाकिस्तान दौरे पर सस्पेंस, इस्लामाबाद ने सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करने की तैयारी शुरू की

    नई दिल्ली । शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के आगामी शिखर सम्मेलन को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक गतिविधियां चर्चा में हैं। साल 2027 में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले SCO सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करने की बात कही गई है।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि SCO के नियमों और प्रोटोकॉल के तहत सम्मेलन में सभी सदस्य देशों को निमंत्रण भेजा जाएगा। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि संगठन के सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को सम्मेलन में आमंत्रित करना मेजबान देश की जिम्मेदारी है।

    इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी SCO सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान जाएंगे। हालांकि, भारत की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। प्रधानमंत्री की किसी भी विदेश यात्रा का फैसला समय, परिस्थितियों और कूटनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर लिया जाता है।

    SCO एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय संगठन है, जिसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान सहित कई अन्य देश सदस्य हैं। इस संगठन का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग, सुरक्षा, आर्थिक विकास और आपसी संबंधों को मजबूत करना है। हर साल सदस्य देशों के बीच अध्यक्षता बदलती रहती है और जिस देश के पास अध्यक्षता होती है, वही शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है।

    2027 में SCO की अध्यक्षता पाकिस्तान के पास रहने की संभावना है, जिसके तहत इस्लामाबाद में राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों की बैठक आयोजित की जाएगी। ऐसे सम्मेलनों में सदस्य देशों के शीर्ष नेता क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं।

    भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से चुनौतीपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद हैं, जिनमें सीमा सुरक्षा और आतंकवाद जैसे विषय प्रमुख हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के पाकिस्तान दौरे का फैसला केवल SCO की बैठक तक सीमित नहीं होगा, बल्कि व्यापक कूटनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

    इस बीच पाकिस्तान ने भारत और अन्य सदस्य देशों के साथ SCO प्रक्रिया के तहत सामान्य राजनयिक प्रोटोकॉल का पालन करने की बात कही है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच संभावित बैठक को लेकर भी सवाल किया गया था, जिस पर उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी प्रस्तावित मुलाकात की जानकारी नहीं है।

    SCO की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी। संगठन का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। समय के साथ इसका दायरा बढ़ा है और यह एशिया के प्रमुख बहुपक्षीय मंचों में शामिल हो गया है।

    अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि भारत इस सम्मेलन को लेकर क्या रुख अपनाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित भागीदारी को लेकर अंतिम फैसला आने वाले समय में भारत सरकार की कूटनीतिक रणनीति और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

  • पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून की तैयारी, 10 साल जेल और 50 लाख जुर्माने के प्रावधान पर सियासत तेज

    पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून की तैयारी, 10 साल जेल और 50 लाख जुर्माने के प्रावधान पर सियासत तेज

    नई दिल्ली । देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक, 2026 को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिल गई है। राज्यसभा में लंबी चर्चा के बाद विधेयक पारित किया गया। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून के रूप में लागू हो जाएगा।

    नए कानून में परीक्षा से जुड़े पेपर लीक और अन्य गंभीर अनियमितताओं पर सख्ती बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत दोषी पाए जाने वाले लोगों को 10 साल तक की सजा और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

    विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश जारी कर इसे परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री ने पेपर लीक जैसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संदेश दिया।

    हालांकि, प्रधानमंत्री के बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार और प्रधानमंत्री पर टिप्पणी करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था और कानून की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठाए।

    राज्यसभा में इस विधेयक पर करीब सात घंटे तक चर्चा हुई। चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल उठाए। कुछ दलों ने संशोधन प्रस्ताव भी पेश किए, जिन्हें सदन में मंजूरी नहीं मिली।

    केंद्रीय कार्मिक मामलों के मंत्री जितेंद्र सिंह ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार पेपर लीक जैसी घटनाओं को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि यह कानून परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

    राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को लेकर उठाए गए सवालों पर सरकार ने कहा कि देश में पेपर लीक के ज्यादातर मामले राज्य स्तरीय भर्ती और परीक्षा एजेंसियों से जुड़े रहे हैं। सरकार के अनुसार, परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल, सुरक्षा मानकों और निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।

    इस संशोधन विधेयक के जरिए वर्ष 2024 में बनाए गए कानून को और प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। इसमें पेपर लीक, परीक्षा में धोखाधड़ी और संगठित तरीके से गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान शामिल है। साथ ही मामलों की तेजी से जांच और सुनवाई के लिए विशेष व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया गया है।

    पेपर लीक की घटनाएं लंबे समय से छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच चिंता का कारण रही हैं। कई बार परीक्षाओं के रद्द होने और परिणामों में देरी से लाखों छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। ऐसे में सरकार का दावा है कि नया कानून परीक्षा प्रणाली में भरोसा बढ़ाने और भविष्य में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने में मदद करेगा।

    अब सभी की नजर राष्ट्रपति की मंजूरी पर है। इसके बाद यह कानून लागू होने के साथ ही परीक्षा संबंधी अपराधों पर कार्रवाई के लिए नया कानूनी ढांचा प्रभावी हो जाएगा।

  • बस्तर के विकास का नया रोडमैप लेकर पीएम मोदी से मिले सीएम साय, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग पर हुई बड़ी चर्चा

    बस्तर के विकास का नया रोडमैप लेकर पीएम मोदी से मिले सीएम साय, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग पर हुई बड़ी चर्चा

    नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राज्य के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर के कायाकल्प की योजना और राज्य में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की जानकारी प्रधानमंत्री के सामने रखी। उन्होंने बस्तर को विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के सामने राज्य की तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें राजनांदगांव में प्रस्तावित 10,500 करोड़ रुपये की गैस आधारित यूरिया परियोजना को जल्द मंजूरी देने का आग्रह प्रमुख रहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध करा दी गई है और राज्य स्तर की सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं। परियोजना शुरू होने से किसानों को उर्वरक की उपलब्धता में सुविधा मिलेगी और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

    इसके अलावा मुख्यमंत्री ने उन 461 गांवों को स्थायी बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए विशेष सहायता की मांग की, जहां सुरक्षा और भौगोलिक चुनौतियों के कारण अब तक ऑफ-ग्रिड बिजली व्यवस्था संचालित हो रही है। उन्होंने रायपुर या बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक पहल करने का अनुरोध किया।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर विजन के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाला बस्तर अब विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनसे लाखों लोगों को लाभ मिल रहा है। राशन, स्वास्थ्य बीमा, जनधन खाते, वन अधिकार और आवास जैसी योजनाओं का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

    शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है। इसके साथ ही दूरदराज के इलाकों में बेहतर शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर के बच्चों को बेहतर अवसर और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि विशेष स्वास्थ्य अभियान के तहत बड़ी संख्या में लोगों की जांच कर उन्हें चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि बस्तर में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है, जिससे लोगों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने बस्तर में बढ़ती कनेक्टिविटी का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सड़क, रेल और हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। रेल परियोजनाओं, एक्सप्रेस-वे और सिंचाई योजनाओं से क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    बस्तर की संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा, चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने युवाओं की भागीदारी और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।

    बैठक में छत्तीसगढ़ में बढ़ते निवेश और उद्योगों के विस्तार का मुद्दा भी प्रमुख रहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में नई औद्योगिक नीतियों के कारण बड़े निवेश प्रस्ताव आए हैं और कई क्षेत्रों में नई परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। एआई, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण और अन्य आधुनिक उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।

    मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण, डिजिटल सेवाओं और सुशासन से जुड़े कार्यों की जानकारी भी प्रधानमंत्री को दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों को आसान और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ विकास के नए लक्ष्य हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर में हो रहे बदलाव से क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है और आने वाले समय में यह विकास और अवसरों का केंद्र बनेगा।