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  • आरती के दौरान विवाद बढ़ा, किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ने उठाया कदम

    आरती के दौरान विवाद बढ़ा, किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ने उठाया कदम

    उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध गढ़कालिका मंदिर में रविवार दोपहर आरती के दौरान अचानक ऐसा विवाद खड़ा हो गया जिसने पूरे परिसर का माहौल तनावपूर्ण कर दिया। किन्नर अखाड़े की तेलंगाना शाखा की महामंडलेश्वर साध्वी काली नंद गिरी और मंदिर के पुजारियों व सुरक्षा कर्मियों के बीच हुए विवाद ने गंभीर रूप ले लिया।

    जानकारी के अनुसार, साध्वी काली नंद गिरी दोपहर 12 बजे की आरती में शामिल होने मंदिर पहुंची थीं। आरती के दौरान भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें किनारे हटने के लिए कहा गया, ताकि अन्य श्रद्धालुओं को दर्शन में सुविधा मिल सके। इसी बात को लेकर साध्वी आक्रोशित हो गईं और मामला धीरे-धीरे विवाद में बदल गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों और प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद साध्वी ने विरोध स्वरूप अपनी कार से पेट्रोल लाकर खुद पर डाल लिया और आत्मदाह का प्रयास किया। यह देखकर मंदिर परिसर में मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत स्थिति को नियंत्रित कर लिया और एक बड़ा हादसा टल गया।

    घटना के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षा कारणों से एक गेट को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया, जबकि दूसरे गेट से दर्शन व्यवस्था जारी रखी गई। इसी दौरान पुलिस को सूचना दी गई और जीवाजीगंज थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची।

    पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए साध्वी को समझाइश दी और उन्हें थाने ले जाया गया। अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

    मंदिर प्रशासन का कहना है कि आरती के दौरान भारी भीड़ थी और केवल व्यवस्था बनाए रखने के लिए साध्वी से थोड़ा किनारे होने का अनुरोध किया गया था। इसी साधारण व्यवस्था संबंधी बात को लेकर विवाद बढ़ गया।

    फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी है और यह पता लगाया जा रहा है कि विवाद किन परिस्थितियों में इतना गंभीर हुआ। प्रशासन ने कहा है कि जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

  • बिना NOC चल रहा था प्लांट? प्रदूषण और फायर सेफ्टी पर उठे सवाल

    बिना NOC चल रहा था प्लांट? प्रदूषण और फायर सेफ्टी पर उठे सवाल


    जबलपुर जबलपुर के गोसलपुर क्षेत्र में स्थित इको फ्यूल बायोमास प्लांट में शुक्रवार शाम लगी भीषण आग को 48 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो नुकसान का अंतिम पंचनामा तैयार हुआ है और न ही किसी की स्पष्ट जिम्मेदारी तय हो सकी है। यह हादसा अब केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता नजर आ रहा है।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्लांट के संचालन के लिए आवश्यक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और फायर सेफ्टी एनओसी तक मौजूद नहीं थी। इसके बावजूद प्लांट लंबे समय से संचालित हो रहा था, जिससे सुरक्षा मानकों की अनदेखी का बड़ा मामला उजागर हुआ है।

    घटना उस समय हुई जब गेहूं की नरवाई (फसल अवशेष) के बड़े-बड़े बंडल खुले मैदान में रखे थे। अचानक लगी आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। राहत की बात यह रही कि आग पास स्थित इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप और बीपीसीएल के गैस गोदाम तक नहीं पहुंची, वरना स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।

    प्रशासन की तत्परता के बावजूद घटना के 24 घंटे बाद तक नरवाई के ढेरों में धुआं और सुलगन जारी रही। दमकल दल लगातार कूलिंग में जुटे रहे, जबकि अधिकारी मौके पर निरीक्षण करते रहे।

    जानकारी के अनुसार, प्लांट का संचालन ग्राम पंचायत से सामान्य एनओसी लेकर शुरू किया गया था, जबकि बड़े औद्योगिक संचालन के लिए जरूरी अनुमति प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि पहले भी यहां आग लगने की छोटी घटनाएं हो चुकी थीं, लेकिन सुरक्षा उपायों में सुधार नहीं किया गया।

    करीब 2 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से बने इस प्लांट के लिए बैंक से ऋण भी लिया गया था और शासन से सब्सिडी मिलने की बात भी सामने आई है। ऐसे में बिना मानक सुरक्षा व्यवस्था के इतने संवेदनशील प्लांट का संचालन अब कई सवाल खड़े कर रहा है।

    सबसे गंभीर सवाल यह है कि इतने बड़े औद्योगिक यूनिट के पास स्थित पेट्रोल पंप और गैस गोदाम जैसे हाई-रिस्क क्षेत्र में भी किसी भी स्तर पर आपत्ति दर्ज नहीं की गई।

    फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है, लेकिन दो दिन बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर आग कैसे लगी और इसके लिए वास्तविक जिम्मेदार कौन है।

  • जबलपुर में बाराती बस पर 51 हजार का चालान, बिना परमिट दौड़ रही थी गाड़ी

    जबलपुर में बाराती बस पर 51 हजार का चालान, बिना परमिट दौड़ रही थी गाड़ी


    जबलपुर मध्य प्रदेश के जबलपुर में परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बाराती बस पर ₹51,500 का जुर्माना लगाया और उसे जब्त कर लिया। यह कार्रवाई आयुक्त उमेश जोगा के निर्देश पर उड़नदस्ता टीम द्वारा की गई।

    बिना परमिट चल रही थी बाराती बस
    जांच के दौरान सामने आया कि मंडला से जबलपुर जा रही राधिका ट्रैवल्स की बस (MP 13 P 1949) बिना वैध दस्तावेजों के संचालित हो रही थी। बस के पास-
    वैध परमिट नहीं था
    बीमा (Insurance) नहीं था
    प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) भी नहीं था
    इस गंभीर लापरवाही के बाद कार्रवाई की गई।

    बरगी के पास रोकी गई बस
    उड़नदस्ता प्रभारी के अनुसार बस को बरगी क्षेत्र के पास रोका गया। जब चालक से दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई भी वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद मौके पर ही बस को जब्त कर लिया गया।

    बस जब्त, यात्रियों को सुरक्षित भेजा गया
    कार्रवाई के बाद बस को आरटीओ परिसर में खड़ा कराया गया। साथ ही बस में सवार यात्रियों को किसी अन्य वाहन से उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाया गया।

    हादसे के बाद बढ़ी सख्ती
    हाल ही में मध्य प्रदेश में इंदौर से शिवपुरी जा रही एक बस में आग लगने की दर्दनाक घटना हुई थी, जिसमें एक 4 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद परिवहन विभाग ने राज्यभर में बसों की जांच तेज कर दी है।

    कई जिलों में चल रहा जांच अभियान
    परिवहन मंत्री और विभागीय निर्देशों के बाद जबलपुर, सिवनी और मंडला में बसों की सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि बिना फिटनेस और दस्तावेजों के चल रहे वाहनों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
     
    प्रशासन की चेतावनी
    परिवहन विभाग ने सभी वाहन संचालकों को चेतावनी दी है कि वे अपने सभी दस्तावेज—परमिट, बीमा और PUC—अद्यतन रखें। नियमों का उल्लंघन करने पर भविष्य में और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    जबलपुर में हुई यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि सड़क सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन अब बेहद सख्त हो गया है। बिना वैध दस्तावेजों के चलने वाले वाहनों पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।

  • ग्वालियर में सहायक कुल सचिव परीक्षा आज, 1277 अभ्यर्थी देंगे परीक्षा

    ग्वालियर में सहायक कुल सचिव परीक्षा आज, 1277 अभ्यर्थी देंगे परीक्षा


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग) द्वारा सहायक कुल सचिव परीक्षा-2025 का आयोजन आज रविवार को ग्वालियर में किया जा रहा है। इस परीक्षा में शहर के तीन केंद्रों पर कुल 1277 अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा एक ही सत्र में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक आयोजित की जा रही है।

    परीक्षा केंद्रों पर सख्त नियम लागू
    परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए इस बार बेहद सख्त नियम लागू किए गए हैं। अभ्यर्थियों के लिए कई वस्तुओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है-
    जूते और मोजे पहनकर प्रवेश नहीं मिलेगा
    मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर प्रतिबंध
    बेल्ट, क्लचर, बक्कल और हाथ के बैंड भी वर्जित
    केवल पारदर्शी पानी की बोतल ले जाने की अनुमति
    उम्मीदवारों को केवल चप्पल या सैंडल पहनकर ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जा रहा है।

    त्रिस्तरीय जांच और CCTV निगरानी
    परीक्षा की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अभ्यर्थियों की त्रिस्तरीय जांच की व्यवस्था की गई है।
    पहले चरण में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन
    सभी केंद्रों पर CCTV कैमरों से निगरानी
    कलेक्टर कार्यालय में डिजिटल कंट्रोल रूम की स्थापना
    यह कंट्रोल रूम सुबह 8 बजे से परीक्षा समाप्ति तक सक्रिय रहेगा।

    शिकायत के लिए कंट्रोल रूम सक्रिय
    परीक्षा से संबंधित किसी भी समस्या या शिकायत के लिए कंट्रोल रूम में संपर्क किया जा सकता है।
    दूरभाष: 0751-2446214
    मोबाइल: 9425135143
    निगरानी की जिम्मेदारी अधीक्षक आर.आई. भगत के निर्देशन में की जा रही है।

    ग्वालियर में आयोजित यह परीक्षा कड़े सुरक्षा इंतजामों और डिजिटल निगरानी के बीच संपन्न हो रही है। सख्त नियमों का उद्देश्य केवल एक ही है-निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित करना।

  • इंदौर में 2 करोड़ का फायर फाइटिंग रोबोट, आग बुझाने में करेगा मदद

    इंदौर में 2 करोड़ का फायर फाइटिंग रोबोट, आग बुझाने में करेगा मदद


    इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में अब आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो गया है। नगर निगम ने करीब ₹2 करोड़ की लागत से एक AI आधारित फायर फाइटिंग रोबोट तैनात किया है, जो उन जगहों पर जाकर आग बुझा सकता है, जहां इंसानों का जाना बेहद खतरनाक होता है। यह रोबोट जयपुर की रोबोटिक्स कंपनी द्वारा विकसित किया गया है और इसे विशेष रूप से औद्योगिक और उच्च जोखिम वाली आग की घटनाओं के लिए तैयार किया गया है।

    कैसे काम करता है यह रोबोट?
    यह फायर फाइटिंग रोबोट पूरी तरह रिमोट ऑपरेटेड है और इसे दूर से नियंत्रित किया जाता है। इसमें लगा कैमरा और डिस्प्ले सिस्टम ऑपरेटर को लाइव स्थिति दिखाता है, जिससे यह पता चलता है कि आगे क्या हो रहा है। यह एक तरह का क्रॉलर टैंक सिस्टम है, जो खराब रास्तों, मलबे और सीढ़ियों पर भी आसानी से चल सकता है।

    500°C की आग में भी काम करने की क्षमता
    इस रोबोट की सबसे बड़ी खासियत इसकी गर्मी सहने की क्षमता है। यह लगभग 500 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी काम कर सकता है।
    इसके अलावा इसमें-
    थर्मल इमेजिंग कैमरा
    AI आधारित ऑब्जेक्ट डिटेक्शन
    हाई प्रेशर वाटर और फोम सिस्टम
    मजबूत क्रॉलर ट्रैक
    जैसी आधुनिक तकनीकें लगी हैं, जो इसे बेहद प्रभावी बनाती हैं।

    8 से 10 घंटे तक लगातार काम
    यह रोबोट एक बार चार्ज होने पर लगभग 8 से 10 घंटे तक लगातार काम कर सकता है। इसकी बैटरी सिस्टम और कूलिंग तकनीक इसे लंबे समय तक सक्रिय रहने में मदद करती है। यह फायर टैंकर से जुड़कर पानी और फोम दोनों के जरिए आग पर काबू पा सकता है।
    इंदौर में इस रोबोट का इस्तेमाल कई बड़े हादसों में किया गया है, जिनमें शामिल हैं-
    नवदा पंथ प्लास्टिक फैक्ट्री आग
    परदेशीपुरा की आग
    सिटी फॉरेस्ट क्षेत्र की घटना
    पीथमपुर की बड़ी औद्योगिक आग
    इन सभी मामलों में इस रोबोट ने जोखिम भरे हालात में फायरफाइटिंग में अहम भूमिका निभाई।

    क्यों है यह तकनीक खास?
    यह रोबोट खास तौर पर उन जगहों के लिए बनाया गया है जहां-
    तेल और गैस प्लांट
    केमिकल और पेट्रोकेमिकल फैक्ट्री
    बड़े गोदाम और लॉजिस्टिक हब
    बिजली संयंत्र और ट्रांसफॉर्मर यूनिट
    जैसे हाई रिस्क क्षेत्र शामिल हैं।
    यह लगभग 500 किलो तक का भार भी संभाल सकता है और भारी मलबे में भी आसानी से मूव कर सकता है।

    अधिकारियों का बयान
    नगर निगम कमिश्नर के अनुसार, यह रोबोट फायर टैंकर से जुड़कर काम करता है और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में भी लंबे समय तक आग बुझाने में सक्षम है। इससे फायरफाइटर्स की जान का जोखिम काफी कम हो जाता है।

    इंदौर का यह फायर फाइटिंग रोबोट आधुनिक आपदा प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह तकनीक न सिर्फ आग बुझाने की क्षमता बढ़ाती है, बल्कि दमकलकर्मियों की सुरक्षा को भी नए स्तर पर ले जाती है।

  • भोपाल के कोलार रोड पर SUV में लगी आग, इलाके में मची अफरा-तफरी

    भोपाल के कोलार रोड पर SUV में लगी आग, इलाके में मची अफरा-तफरी


    नई दिल्ली। राजधानी भोपाल के कोलार रोड इलाके में शनिवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सड़क किनारे खड़ी एक SUV में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया और करीब 10 फीट ऊंची लपटें उठने लगीं। घटना दोपहर करीब 3:30 बजे की बताई जा रही है। कोलार रोड स्थित चूनाभट्टी रेस्ट हाउस के आगे गार्डन रेसिडेंस के गेट के पास SUV खड़ी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पहले वाहन से धुआं निकलता दिखाई दिया और कुछ ही सेकंड में आग ने विकराल रूप ले लिया।

    EV चार्जिंग स्टेशन और ट्रांसफार्मर के कारण बढ़ा खतरा
    जिस स्थान पर SUV में आग लगी, उसके पास ही इलेक्ट्रिक व्हीकल का चार्जिंग स्टेशन और रहवासी इलाका मौजूद है। वहीं नजदीक में ट्रांसफार्मर भी लगा हुआ था। ऐसे में लोगों को किसी बड़े ब्लास्ट या हादसे का डर सताने लगा।
     आग की लपटें बढ़ते देख आसपास मौजूद लोग तुरंत दूर हट गए। स्थानीय लोगों ने एहतियातन आसपास खड़े वाहनों को हटाया और सड़क के एक हिस्से को खाली कराया। घटना के चलते कुछ देर के लिए इलाके में यातायात भी प्रभावित रहा।

    दमकल पहुंची, लेकिन तब तक जल चुकी थी कार
    सूचना मिलते ही कोलार फायर स्टेशन से दमकल की टीम मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड कर्मियों ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक SUV लगभग पूरी तरह जल चुकी थी। प्रत्यक्षदर्शी राहुल सिंगाड़िया ने बताया कि आग इतनी तेज थी कि वाहन के टायर तक जल गए। मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    शॉर्ट सर्किट की आशंका
    फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन शुरुआती तौर पर तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। पुलिस और फायर विभाग मामले की जांच कर रहे हैं।

  • झाबुआ में कृषि जागरूकता अभियान शुरू, कलेक्टर ने किया रथ का शुभारंभ

    झाबुआ में कृषि जागरूकता अभियान शुरू, कलेक्टर ने किया रथ का शुभारंभ

    झाबुआ। जिले में किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, तकनीकी जानकारी और शासन की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई है। 16 मई को कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने कलेक्टर कार्यालय परिसर से 10 दिवसीय कृषि रथ को हरी झंडी दिखाकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए रवाना किया।

    यह कृषि रथ “किसान कल्याण वर्ष 2026” के अंतर्गत शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। यह रथ आने वाले 10 दिनों तक झाबुआ जिले के सभी विकासखंडों और गांवों का भ्रमण करेगा और किसानों को कृषि से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी देगा।

    गांव-गांव पहुंचेगी तकनीकी जानकारी
    इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को उन्नत खेती पद्धतियों से अवगत कराना है। रथ के माध्यम से किसानों को उर्वरक वितरण की नई ई-विकास प्रणाली और ई-टोकन व्यवस्था के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

    इसके साथ ही किसानों को एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, पराली प्रबंधन, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया जाएगा। कृषि रथ को इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें आधुनिक खेती से जुड़ी सभी जानकारियों को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

    विशेषज्ञ टीम करेगी किसानों का मार्गदर्शन
    इस रथ के साथ हर दिन कृषि विशेषज्ञों की एक विशेष टीम भी मौजूद रहेगी, जो सीधे गांवों में जाकर किसानों से संवाद करेगी। यह टीम खरीफ फसल की बुआई से पहले आवश्यक तैयारियों पर किसानों को मार्गदर्शन देगी और फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत कम करने के व्यावहारिक उपाय बताएगी। कृषि विशेषज्ञ मौके पर ही किसानों की समस्याओं का समाधान करेंगे और उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बेहतर खेती के तरीके सुझाएंगे। इससे किसानों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।

    किसानों से भागीदारी की अपील
    उप संचालक कृषि एन.एस. रावत ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि जब कृषि रथ उनके गांव पहुंचे तो वे विशेषज्ञों से अधिक से अधिक संवाद करें और इस अवसर का लाभ उठाएं। इस अवसर पर उप संचालक कृषि एन.एस. रावत, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगदीश मोर्य, सहायक संचालक उद्यानिकी बी.एस. चौहान सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम में किसानों के बीच उत्साह देखने को मिला और इस पहल को कृषि क्षेत्र के लिए उपयोगी बताया गया।

  • भोजशाला निर्णय के बाद बड़वानी में आतिशबाजी, माहौल हुआ उत्साहपूर्ण

    भोजशाला निर्णय के बाद बड़वानी में आतिशबाजी, माहौल हुआ उत्साहपूर्ण


    बड़वानी।
    धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में हाईकोर्ट द्वारा आए फैसले के बाद बड़वानी शहर सहित पूरे जिले में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला। फैसले में भोजशाला को मंदिर के रूप में मान्यता मिलने के बाद सकल हिंदू समाज के लोगों ने शुक्रवार देर रात बड़े पैमाने पर जश्न मनाया।

    शहर के पाटी नाका, मोटी माता चौक, रणजीत चौक सहित कई प्रमुख स्थानों पर लोग एकत्रित हुए और आतिशबाजी की गई। आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी से पूरा वातावरण जगमगा उठा। इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर खुशी का इजहार किया।

    जय श्रीराम के नारों से गूंजा शहर
    जश्न के दौरान पूरे शहर में “जय श्रीराम” और “भारत माता की जय” के जोरदार नारे लगाए गए। युवाओं की बड़ी संख्या चौराहों पर मौजूद रही, जहां उन्होंने उत्साहपूर्वक आतिशबाजी की और खुशी साझा की। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से माहौल पूरी तरह उत्सव जैसा बन गया। स्थानीय लोगों ने मां वाग्देवी और भारत माता की पूजा-अर्चना करते हुए महाआरती भी की। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर धार्मिक आस्था व्यक्त की और फैसले को ऐतिहासिक बताया।

    वर्षों के संघर्ष का परिणाम बताया फैसला
    समाज के लोगों ने कहा कि यह निर्णय लंबे समय से चल रहे संघर्ष और जनजागरण का परिणाम है। उनका कहना था कि वर्षों से विभिन्न स्तरों पर आंदोलन और प्रयास किए जा रहे थे, जिनका परिणाम अब सामने आया है। स्थानीय नागरिकों ने इस फैसले को केवल एक कानूनी निर्णय नहीं बल्कि आस्था और भावनाओं से जुड़ा ऐतिहासिक क्षण बताया। लोगों के अनुसार यह निर्णय समाज की एकजुटता और संघर्ष की जीत का प्रतीक है।

    देर रात तक बना रहा जश्न का माहौल
    शुक्रवार रात करीब 11:30 बजे से शुरू हुआ जश्न देर रात तक जारी रहा। शहर के कई हिस्सों में लोग समूहों में एकत्रित होकर खुशी मनाते रहे। पूरे बड़वानी में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला और चौराहों पर युवाओं की भारी भीड़ रही। प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति सामान्य रही और कहीं से किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

  • 242 पन्नों के फैसले का होगा कानूनी परीक्षण, मुस्लिम पक्ष ने जताई अपील की बात

    242 पन्नों के फैसले का होगा कानूनी परीक्षण, मुस्लिम पक्ष ने जताई अपील की बात

    इंदौर/धार। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा भोजशाला मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद अब यह कानूनी विवाद एक नए चरण में प्रवेश करता नजर आ रहा है। फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है। पक्षकारों का कहना है कि वे 242 पन्नों के विस्तृत फैसले का गहन अध्ययन करने के बाद इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।

    हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका को स्वीकार करते हुए भोजशाला परिसर में हिंदू पक्ष को पूजा का विशेष अधिकार प्रदान किया है। साथ ही, वर्ष 2003 में दिए गए उस आदेश को भी निरस्त कर दिया गया है, जिसमें मुस्लिम पक्ष को सीमित समय के लिए नमाज की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट को इस फैसले का प्रमुख आधार माना है।

    ASI की रिपोर्ट को मामले में निर्णायक माना गया है, जिसमें 98 दिनों के सर्वे और लगभग 2100 पन्नों की जांच रिपोर्ट शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, भोजशाला परिसर ऐतिहासिक रूप से मां वाग्देवी और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। कोर्ट ने इन्हीं तथ्यों के आधार पर परिसर को हिंदू धार्मिक स्वरूप से जुड़ा माना है।

    हिंदू पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अदालत ने स्पष्ट रूप से माना है कि भोजशाला का स्वरूप मंदिर जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद से अलग प्रकृति का है, क्योंकि यह रिट याचिका के रूप में सुना गया था।

    मुस्लिम पक्ष की ओर से कहा गया है कि वे इस निर्णय को स्वीकार नहीं करते और सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देंगे। उनका कहना है कि पूरे फैसले का कानूनी और तथ्यात्मक विश्लेषण करने के बाद ही अगला कदम तय किया जाएगा।

    इस बीच, हिंदू पक्ष ने इस फैसले को अपनी बड़ी जीत बताते हुए इसे ऐतिहासिक न्याय करार दिया है। वहीं, क्षेत्र में फिलहाल स्थिति शांत बनी हुई है, लेकिन कानूनी लड़ाई के अगले चरण को लेकर दोनों पक्षों में सक्रियता बढ़ गई है।

  • भोजशाला में हनुमान चालीसा पाठ, हाईकोर्ट फैसले के बाद बढ़ी श्रद्धा

    भोजशाला में हनुमान चालीसा पाठ, हाईकोर्ट फैसले के बाद बढ़ी श्रद्धा


    धार मध्य प्रदेश। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला परिसर को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के इंदौर बेंच के फैसले के बाद शनिवार सुबह परिसर में धार्मिक गतिविधियों का माहौल देखने को मिला। कोर्ट के निर्णय के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी भोजशाला पहुंचे और पूजा-अर्चना की।

    श्रद्धालुओं ने परिसर में स्थित मां वाग्देवी स्थल और यज्ञ कुंड के पास पहुंचकर विधिवत दर्शन किए और हनुमान चालीसा का पाठ किया। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और प्रशासन की निगरानी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

    हाईकोर्ट के फैसले का प्रभाव, पूजा के अधिकार को लेकर चर्चा
    हाईकोर्ट के आदेश में भोजशाला परिसर को ऐतिहासिक रूप से राजा भोज कालीन वाग्देवी मंदिर से संबंधित माना गया है। फैसले के बाद हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार मिलने के बाद परिसर में गतिविधियां बढ़ गई हैं।
    हिंदू पक्ष के वकील के अनुसार, कोर्ट ने वर्ष 2003 के ASI आदेश को आंशिक रूप से निरस्त किया है, जिसमें मुस्लिम समुदाय को तय समय पर नमाज की अनुमति दी गई थी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि परिसर संरक्षित स्मारक रहेगा और इसकी निगरानी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन ही होगी।

    श्रद्धालुओं में उत्साह, वर्षों बाद पूजा का अवसर मिलने का दावा
    पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें वर्षों बाद बिना किसी रोक-टोक के दर्शन और पूजा करने का अवसर मिला है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भोजशाला परिसर उनके लिए आस्था का केंद्र है और यह स्थान प्राचीन मंदिर का स्वरूप रखता है। भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों ने भी परिसर में पहुंचकर पुष्प अर्पित किए और धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया।

    कानूनी प्रक्रिया अभी जारी, सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना
    मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की संभावना भी बनी हुई है। मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना को देखते हुए हिंदू पक्ष ने पहले से ही कैविएट याचिकाएं दायर कर दी हैं, ताकि मामले में सुनवाई के दौरान उनका पक्ष भी सुना जा सके।

    भोजशाला मामला एक बार फिर धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक दावों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है। फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले के बाद परिसर में पूजा-अर्चना शुरू हो गई है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।