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  • MP: CM डॉ. यादव आज 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में ट्रांसफर करेंगे 1836 करोड़ रुपये

    MP: CM डॉ. यादव आज 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में ट्रांसफर करेंगे 1836 करोड़ रुपये


    भोपाल।
    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव आज रविवार को सीहोर जिले के आष्टा में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश की एक करोड़ 25 लाख से अधिक लाड़ली बहनों के खाते में 1836 करोड़ रूपये से अधिक की राशि अंतरित करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ यादव सीहोर जिले की 2,40,287 लाड़ली बहनों के खाते में 35 करोड़ 39 लाख 32 हजार 500 रूपये की लाड़ली बहना योजना की राशि अंतरित करेंगे।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ यादव 184 करोड़ 92 लाख रूपये लागत के विकास एवं निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी करेंगे। इन कार्यों में 115 करोड़ 32 लाख रूपये के कार्यों का लोकार्पण एवं 69 करोड़ 60 लाख रूपये के कार्यों का भूमिपूजन शामिल है।


    इन कार्यों का करेंगे लोकार्पण

    जनसंपर्क अधिकारी देवेन्द्र ओगारे ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव 115 करोड़ 32 लाख रुपये की लागत के विभिन्न कार्यों का लोकार्पण करेंगे, जिनमें नगर पालिका आष्टा के वार्ड-16 घनश्यामपुरा में आंगनवाड़ी भवन निर्माण कार्य (10.76 लाख रुपये), पार्वती नदी पर घाट निर्माण कार्य (97.31 लाख रुपये), नगर परिषद जावर में नेवज नदी रीज्यूवेशन कार्य (188.00 लाख रुपये) तथा वार्ड-03 में नेवज नदी पर पुलिया निर्माण कार्य (88.00 लाख रुपये) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त आष्टा में सान्दीपनि विद्यालय भवन निर्माण (6100.00 लाख रुपये) एवं जावर में सान्दीपनि विद्यालय भवन निर्माण (3954.00 लाख रुपये), सिद्दीगंज में उपतहसील कार्यालय भवन निर्माण (85.00 लाख रुपये) तथा आष्टा में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय भवन निर्माण (131.00 लाख रुपये) भी शामिल हैं। साथ ही ग्राम मेहतवाड़ा में नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र निर्माण (295.45 लाख रुपये) तथा आष्टा-शुजालपुर मार्ग से धनाना खड़ी अरनिया गाजी करमनखेड़ी मार्ग पर पुल निर्माण कार्य (582.50 लाख रुपये) का भी लोकार्पण किया जाएगा।


    इन कार्यों का करेंगे भूमिपूजन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव 69 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। इनमें आष्टा सिद्दीगंज से धर्मपुरी मार्ग निर्माण (200.78 लाख रुपये), हुसैनपुरखेड़ी से ओल्ड आष्टा बडला मार्ग निर्माण (160.11 लाख रुपये) तथा भंवरा से सिद्धेश्वर महादेव मंदिर तक मार्ग निर्माण (401.15 लाख रुपये) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सिद्दीगंज, कुरावर, मेहतवाड़ा, खड़ी, लोरासकला एवं धुराड़ाकला में शासकीय स्कूलों के निर्माण कार्य (894.51 लाख रुपये), मुख्यमंत्री पुलिस आवास योजना अंतर्गत 12 एनजीओ एवं 48 आरक्षक आवास निर्माण (1143.20 लाख रुपये), इछावर में महाविद्यालयीन बालक छात्रावास निर्माण (450.00 लाख रुपये) तथा पार्वती अर्द्धशहरी पुलिस थाना भवन निर्माण (192.13 लाख रुपये) शामिल हैं।

    साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत 96 निर्माण कार्य (1368.00 लाख रुपये) एवं 54 सामुदायिक भवन निर्माण (1320.00 लाख रुपये), नगर परिषद कोठरी में अमृत 2.0 अंतर्गत पेयजल योजना (114.00 लाख रुपये), आष्टा में पपनाश नदी से भोपाल नाका तक आरसीसी नाला निर्माण (240.39 लाख रुपये), सड़क चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य (410.39 लाख रुपये), वार्ड-14 में सब्जी मंडी विकास कार्य (26.25 लाख रुपये) तथा वार्ड-03 में पाण्डू शिला के पास सौंदर्यीकरण कार्य (39.19 लाख रुपये) का भूमिपूजन किया जाएगा।

  • MP: मोनालिसा केस में नया मोड़….. नगर परिषद ने रद्द किया पहले का जन्म प्रमाण पत्र

    MP: मोनालिसा केस में नया मोड़….. नगर परिषद ने रद्द किया पहले का जन्म प्रमाण पत्र


    खरगोन।
    महाकुंभ (Mahakumbh) से चर्चित हुई वायरल गर्ल मोनालिसा (Viral girl Monalisa) के मामले में मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खरगोन जिले (Khargone district) की महेश्वर नगर परिषद ने बड़ा कदम उठाते हुए किशोरी का पूर्व में जारी जन्म प्रमाण पत्र अब निरस्त कर दिया है। वहीं, मोनालिसा के नाबालिग साबित होने और उसके अपहरण का मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी है। उधर केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने फरमान की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई तक उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

    महेश्वर नगर परिषद के प्रभारी CMO प्रियंक पंड्या ने बताया कि किशोरी की मां ने 30 मई 2025 को शपथ पत्र प्रस्तुत कर उसकी जन्म तिथि 1 जनवरी 2008 बताई थी। इस आधार पर तहसीलदार राकेश ससत्या के आदेश पर 5 जून 2025 को नगर परिषद द्वारा इसी तिथि का जन्म प्रमाण पत्र जारी किया गया था।


    जांच रिपोर्ट के बाद नया जन्म प्रमाण पत्र जारी

    पंड्या ने आगे बताया कि अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, महेश्वर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर की रिपोर्ट में सामने आया है कि किशोरी का वास्तविक जन्म 30 दिसंबर 2009 को अस्पताल में हुआ था। इस आधार पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ने नया जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस तथ्य के सामने आने के बाद पूर्व में जारी जन्म प्रमाण पत्र को असत्य मानते हुए निरस्त कर दिया गया है।


    अधिकारी का हो गया तबादला

    इस बीच, प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल देखी गई है। महेश्वर के प्रभारी CMO प्रियंक पंड्या का शुक्रवार देर रात धार जिले के धामनोद में तबादला कर दिया गया।


    अगली सुनवाई तक फरमान की गिरफ्तारी पर रोक

    सूत्रों के मुताबिक, फरमान खान और किशोरी ने केरल हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अगली सुनवाई यानी 20 मई तक उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के निर्देश दे दिए हैं। इस संबंध में मध्य प्रदेश पुलिस को नोटिस प्राप्त हुआ है, और वह अपना जवाब तैयार कर रही है।

    खरगोन के पुलिस अधीक्षक रवींद्र वर्मा ने बताया कि पीड़िता को बरामद करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, जिला पुलिस राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी प्रेषित कर रही है।


    खरगोन सांसद ने की शीघ्र कार्रवाई की मांग

    इस बीच क्षेत्रीय सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने सोशल मीडिया के माध्यम से बयान जारी करते हुए आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के फरमान खान ने षड्यंत्रपूर्वक फर्जी दस्तावेज तैयार कर किशोरी से विवाह किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि संबंधित लड़की आदिवासी समुदाय से है और नाबालिग है। सांसद के अनुसार, आयोग ने डीजीपी और खरगोन जिला प्रशासन को मामले में संबंधित धाराएं जोड़कर शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

    इससे पहले महेश्वर के विधायक राजकुमार मेव ने भी पत्रकार वार्ता में कहा था कि लड़की के नाबालिग होने के पर्याप्त प्रमाण हैं और उसे बहला-फुसलाकर विवाह कराया गया है। उन्होंने लड़की को तत्काल वापस लाने और संबंधित आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

  • MP: सतना में अतिक्रमण हटाने गई टीम पर पथराव…, SDM और TI जान बचाकर भागे

    MP: सतना में अतिक्रमण हटाने गई टीम पर पथराव…, SDM और TI जान बचाकर भागे


    सतना।
    एमपी (MP) के सतना (Satna) के डॉली बाबा क्षेत्र (Dolly Baba Area) में शनिवार को हाई कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने गई टीम पर भारी पथराव हुआ। प्रशासन जैसे ही अवैध निर्माण ढहाने पहुंचाए स्थानीय लोगों और महिलाओं ने पुलिस पर हमला कर दिया जिससे एसडीएम और थाना प्रभारी को जान बचाकर भागना पड़ा। स्थिति काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। जमीन इंदौर की एक महिला की निजी संपत्ति थी जिस पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा था। विरोध के बावजूद प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिया। पुलिस ने मामले में तीन को हिरासत में लिया है।


    जान बचाने के लिए भागे एसडीएम

    पत्थरबाजी इतनी भीषण थी कि एसडीएम और थाना प्रभारी को जान बचाने के लिए भागना पड़ा। स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोलों का सहारा लेना पड़ा। प्रशासनिक अमला जैसे ही जेसीबी लेकर नौशाद कबाड़ी के अवैध निर्माण को ढहाने पहुंचा वहां महिलाओं ने महिला पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी। देखते ही देखते सैकड़ों लोग लामबंद हो गए और पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया।


    आंसू गैस के गोले दागे

    अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और एसडीएम समेत अन्य अधिकारी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते और बचाव करते नजर आए। इस हिंसक झड़प में एसडीएम राहुल सिलाड़िया और थाना प्रभारी रावेंद्र द्विवेदी बाल-बाल बच गए। पथराव में कई पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें भी आई हैं। बिगड़ते हालात को देखते हुए तत्काल रिजर्व पुलिस फोर्स को मौके पर बुलाया गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे, जिसके बाद उपद्रवी पीछे हटे।


    इंदौर के भू-स्वामी की जमीन पर था कब्जा

    एसडीएम राहुल सिलाड़िया ने बताया कि यह कार्रवाई माननीय हाई कोर्ट के 2023 के आदेश के पालन में की गई थी। यह जमीन इंदौर निवासी अनीता सिंह की निजी संपत्ति है। इस पर रामललन दहिया, ऊषा दहिया और नौशाद कबाड़ी ने लगभग 500 से 600 वर्गफीट के पक्के मकान और डेयरी बनाकर अवैध कब्जा कर रखा था।


    तीन आरोपी हिरासत में

    भारी विरोध और हमले के बावजूद प्रशासन ने कदम पीछे नहीं खींचे। अतिरिक्त बल की मौजूदगी में दोबारा कार्रवाई शुरू की गई और सभी अवैध निर्माणों को जमींदोज कर दिया गया। पुलिस ने पथराव के आरोप में दो पुरुषों और एक महिला को हिरासत में लिया है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अन्य हमलावरों की पहचान की जा रही है। एहतियात के तौर पर पूरे इलाके में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है।

  • MP: ग्वालियर में 9 साल की मासूम और 8वीं की छात्रा से दुष्कर्म….दोनों आरोपी गिरफ्तार

    MP: ग्वालियर में 9 साल की मासूम और 8वीं की छात्रा से दुष्कर्म….दोनों आरोपी गिरफ्तार


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में 2 नाबालिग बच्चियों से रेप करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने दोनों मामले में आरोपियों को पकड़ लिया है। इनमें से एक आरोपी नाबालिग (Accused Minor) है और पीड़ित छात्रा का सहपाठी भी है।

    ग्वालियर में 9 साल की बच्ची से रेप करने का मामला सामने आया है। यह घटना शाम बिजौली थाना क्षेत्र के सुपावली गांव में हुई। बच्ची अपने ताऊ को खेत पर खाना देने गई थी। खाना देने के बाद वह वहीं खेलने लगी। उसके ताऊ अपने काम में व्यस्त थे। इसी दौरान वहां से गुजर रहे रामवीर जाटव ने बच्ची को अकेला देखा।

    आरोपी बच्ची को बहला-फुसलाकर एक एकांत स्थान पर ले गया। आरोपी रामवीर जाटव ने वहां बच्ची के साथ रेप किया। जब बच्ची ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी बच्ची को धमकाकर मौके से फरार हो गया।

    घटना के बाद बालिका घर पहुंची और परिजनों को पूरी घटना बताई। परिजन तत्काल बालिका को लेकर बिजौली थाने पहुंचे और मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बालिका की शिकायत पर आरोपी रामवीर जाटव के खिलाफ दुष्कर्म सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया। बिजौली थाना सर्किल के सीएसपी मनीष यादव ने बताया कि बालिका से दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

    वहीं, दूसरी घटना ग्वालियर में एक आठवीं की छात्रा के साथ उसके ही साथ में पढ़ने वाले छात्र ने रेप किया है। घटना के समय छात्रा घर पर अकेली थी। आरोपी सहपाठी घर में दाखिल हुआ और विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। घटना का पता उस समय चला जब आरोपी घर से भाग रहा था तो छात्रा की मां वहां पहुंच गई।

    मां के पूछने पर छात्रा ने पूरी घटना बता दी। पहले परिवार बदनामी के डर से खामोश रहा, लेकिन परिवार ने मामले की शिकायत की। पुलिस ने तत्काल एक्शन लेते हुए आरोपी को पकड़ लिया। आरोपी भी नाबालिग है और उसे बाल सुधार गृह भेजा गया है।

  • MP में पिछले 14 महीनों में 149 तेंदुओं की मौत… आंकड़ों ने बढ़ाई वन्यजीव प्रेमियों की चिंता

    MP में पिछले 14 महीनों में 149 तेंदुओं की मौत… आंकड़ों ने बढ़ाई वन्यजीव प्रेमियों की चिंता


    भोपाल।
    भारत (India) में सबसे ज्यादा तेंदुए (Leopard) मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh.) में पाए जाते हैं और इसी वजह से इसे तेंदुओं का प्राकृतिक आवास (Leopards Natural habitat ) भी कहा जाता है। लेकिन हाल ही में सामने आए एक चिंताजनक आंकड़े (Worrying statistics) ने देश के वन्यजीव प्रेमियों को चिंता में डाल दिया है। दरअसल सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी से पता चला है कि बीते 14 महीनों में राज्य में कुल 149 तेंदुओं की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा जनवरी 2025 से लेकर मार्च 2026 तक का है।

    खास बात यह है कि इन मौतों के पीछे की सबसे बड़ी वजह तेंदुओं का शिकार होना नहीं है, बल्कि इन मौतों का बड़ा कारण सड़क हादसे रहे हैं। वहीं वन विभाग ने मौतों के इन आंकड़ों को सामान्य बताया है और उसका कहना है कि तेंदुओं के मामले में चार प्रतिशत की मृत्यु दर स्वीकार्य सीमा के भीतर है।


    31 प्रतिशत मौतों के पीछे सड़क हादसे वजह

    तेंदुओं की मौत की जानकारी पाने के लिए RTI कार्यकर्ता अजय दुबे ने आवेदन लगाया था। जिसके जवाब में उन्हें बताया गया कि जनवरी 2025 से इस साल मार्च तक के 14 महीनों में मध्य प्रदेश में 149 तेंदुओं की मौत हुई। इनमें से 31 प्रतिशत मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुईं। डेटा के अनुसार इनमें से भी 19 मौतें हाईवे पर हुईं। वहीं बुढ़ापा और बीमारी जैसे प्राकृतिक कारणों के कारण 24 प्रतिशत मौतें हुईं, जबकि 21 प्रतिशत मौतें वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष के कारण हुईं।


    8 तेंदुओं की जान करंट लगने की वजह से गई

    आंकड़ों के अनुसार शिकार और बदले की भावना के कारण लगभग 14 प्रतिशत तेंदुओं की जानें गईं। 8 लेपर्ड की मौत बिजली का झटका लगने से हुई, फिर चाहे वह जानबूझकर लगाया गया हो या गलती से लगा हो, जबकि दो जानवर फंदों में फंसकर मारे गए। इसके अलावा लगभग नौ प्रतिशत मामलों में, मौत का कारण पता नहीं चल पाया।


    तेंदुओं की लिए कब्रिस्तान बन रहा MP- RTI कार्यकर्ता

    इस RTI को लगाने वाले एक्टिविस्ट अजय दुबे मौतों के इन आंकड़ों को भयावह बता रहे हैं, उनका कहना है कि ये आंकड़े एक गंभीर सच्चाई है। उन्होंने कहा, ‘टाइगर स्टेट (MP) तेंदुओं के लिए एक कब्रिस्तान बन गया है। NTCA (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) के प्रोटोकॉल को लागू करने में सिस्टम की नाकामी और सुरक्षित रास्तों की कमी उन्हें खत्म कर रही है।’


    वन विभाग ने कहा- 4% का आंकड़ा सामान्य

    उधर वन विभाग इन मौतों को सामान्य बता रहा है। इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए वन विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य संरक्षक (वन्यजीव) एल.कृष्णमूर्ति ने कहा कि राज्य में तेंदुओं की मृत्यु दर को कम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि ‘तेंदुए आकार में छोटे होते हैं और आसानी से दिखाई नहीं देते, इसलिए वे पूरे राज्य में फैले हुए हैं। वे अक्सर इंसानी बस्तियों के करीब पाए जाते हैं।’

    आगे उन्होंने कहा कि ‘मौतों के आंकड़े को कम करने के लिए हम योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं और नई सड़कों पर जानवरों के लिए सुरक्षित निकलने के रास्ते बनाने (एनिमल पैसेज), चेतावनी के संकेतक लगाने और नियमित गश्त करने जैसे उपाय लागू कर रहे हैं।’ साथ ही उन्होंने आगे कहा, ‘हम सड़कों के पास पानी के स्रोत न बनाने की भी सलाह दे रहे हैं, क्योंकि जानवर अक्सर पानी की तलाश में सड़कों की ओर आ जाते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार बन जाते हैं।’


    बिग कैट फैमिली में 10 से 20 प्रतिशत मौतें सामान्य

    एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ‘करीब 4,000 तेंदुओं में से 149 की मौत होना केवल 4 प्रतिशत का नुकसान है, जबकि बिल्ली परिवार में सालाना 10 से 20 प्रतिशत तक की मृत्यु दर को स्वीकार्य माना जाता है।’ बता दें कि फरवरी 2024 में जारी आंकड़ों के अनुसार देश में तेंदुओं की सबसे ज्यादा संख्या मध्य प्रदेश में है। उस वक्त मध्य प्रदेश में 3,907 तेंदुए थे। इससे पहले साल 2018 में राज्य में 3,421 तेंदुए थे। मध्य प्रदेश के बाद महाराष्ट्र और कर्नाटक का नंबर आता है।

  • MP: रतलाम पहुंची थी बारात तभी उज्जैन पुलिस का फोन आया… दूल्हे पर दुष्कर्म का केस… मौका पाकर हुआ फरार

    MP: रतलाम पहुंची थी बारात तभी उज्जैन पुलिस का फोन आया… दूल्हे पर दुष्कर्म का केस… मौका पाकर हुआ फरार


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रतलाम जिले (Ratlam district) में उस दौरान हड़कंप मच गया जब उज्जैन जिले (Ujjain district) की बड़नगर पुलिस ने दुल्हन पक्ष से संपर्क कर बताया कि दूल्हे के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। जानकारी लगते ही दुल्हन पक्ष के परिवार में माहौल खराब हो गया। वधू पक्ष को पुलिस ने समझा बूझाकर शादी की रस्म को रोकने के लिए तैयार किया, इस दौरान मौका पाकर दूल्हा फरार हो गया, मिली जानकारी के अनुसार बुधवार रतलाम में बड़नगर के एक युवक की शादी हो रही थी, बड़नगर से बारात पहुंच चुकी थी।

    दूल्हा मंडप में आने ही वाला था कि तभी दुल्हन पक्ष के परिवार को इसका पता चल गया। परिवार को पता चला कि जिस लड़के से लड़की की शादी होने वाली है, उस पर तो नाबालिग ने रेप का केस दर्ज कराया है। बताया जा रहा है कि इस मामले का पटाक्षेप करने में एक स्थानीय पार्षद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।


    जब वह घर पर अकेली थी

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार पूरा मामला इस प्रकार है कि उज्जैन से करीब 60 किमी दूर बड़नगर थाना क्षेत्र के शिक्षक कॉलोनी में रहने वाले युवक अभिषेक सेन के द्वारा 15 वर्षीय नाबालिग से जनवरी के माह में उस वक्त दुष्कर्म किया गया जब वह घर पर अकेली थी। इस दौरान उसे डरा धमका कर इस घटना को किसी को भी बताने के लिए धमकाया गया था। जब पिछले दिनों अभिषेक की शादी की खबर नाबालिग तक पहुंची तो उसने इस शादी का विरोध किया। लेकिन अभिषेक ने उसे डराते हुए अपनी शादी को नहीं रोका और बारात लेकर रतलाम पहुंच गया।

    इसी बीच 6 अप्रैल को नाबालिग के द्वारा इस घटनाक्रम से दुखी होकर आत्महत्या करने की नीयत से एसिड पीकर जान देने का प्रयास किया गया तो यह मामला सामने आया। बालिका को उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया और उसका मेडिकल कराने पर स्पष्ट हुआ कि पीड़िता गर्भवती भी है।


    पुलिस ने फोन पर दुल्हन पक्ष को समझाया

    उज्जैन से करीब 60 किमी दूर बड़नगर की शिक्षक कॉलोनी में रहने वाले अभिषेक सेन की शादी रतलाम जिले की युवती से तय थी, पिछले दो दिन से शादी के कार्यक्रम चल रहे थे और बुधवार रात करीब 8 बजे दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर निकल चुका था। बारात लगने से पहले पुलिस ने तुरंत कार्रवाई कर फोन पर दुल्हन पक्ष को समझाया। वधु पक्ष को सूचना मिलते ही शादी वाले घर में हड़कंप मच गया। दोनों पक्षों की बातचीत के बाद शादी रोक दी गई। नाबालिग पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि आरोपी ने डरा-धमकाकर रेप किया। जिस दिन अभिषेक की शादी थी, उसी दिन पता चला कि पीड़िता प्रेग्नेंट है। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि 5 जनवरी को आरोपी उसके घर आया, जब वह अकेली थी। उसने धमकाकर दुष्कर्म किया और किसी को बताने से मना किया। आरोपी की शादी तय होने के बाद उसने आत्महत्या का प्रयास किया।


    POCSO एक्ट सहित दुष्कर्म का मामला दर्ज

    थाना प्रभारी अशोक पाटीदार के अनुसार, 15 वर्षीय नाबालिग की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ POCSO एक्ट सहित दुष्कर्म का मामला दर्ज किया। पुलिस ने बताया कि पीड़िता और आरोपी एक ही कॉलोनी में रहते हैं। दूल्हे की शादी के तीन दिन पहले पीड़िता ने 6 अप्रैल को एसिड पीकर आत्महत्या की कोशिश की थी।

    इलाज के दौरान 8 अप्रैल को उसके गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद उसने परिजन को पूरी बात बताई।बालिका की शिकायत पर पुलिस ने पास्को एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है फिलहाल आरोपी फरार है उसे जल्द ही हिरासत में लिया जाएगा।

  • MP: ओंकारेश्वर में संत की हत्या की आशंका… मौत के 5 दिन बाद समाधि से निकलवाया शव

    MP: ओंकारेश्वर में संत की हत्या की आशंका… मौत के 5 दिन बाद समाधि से निकलवाया शव


    खंडवा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ओंकारेश्वर (Omkareshwar) स्थित उदासीन अखाड़े (Udasin Akhara) से जुड़े संत ब्रजराज पुरी महाराज (Saint Brajraj Puri Maharaj) की हाल ही में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आश्रम से जुड़े लोगों ने उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक बताते हुए जल्दबाजी में उनके शव को समाधि दे दी थी, लेकिन बाद में संत समाज, हिंदू महासभा, परिजनों और अखाड़े के महंतों ने उनकी हत्या की आशंका जताते हुए शव को समाधि से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम कराने की मांग कई। जिसके बाद प्रशासन ने गुरुवार को संत की समाधि खोदकर पार्थिव देह बाहर निकाली और पोस्टमार्टम कराया।


    हार्ट अटैक या फांसी? मौत की वजह पर विरोधाभास

    4 अप्रैल को संत ब्रजराज पुरी महाराज के निधन के बाद आश्रम के लोगों ने हार्ट अटैक से मौत की जानकारी दी थी। वहीं, खाचरौद से पहुंचे उदासीन अखाड़े के महंत ओंकारदास उदासीन ने दावा किया कि उन्हें संत द्वारा फांसी लगाने की सूचना दी गई थी। इस विरोधाभासी जानकारी ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया। महंत ओंकारदास का कहना है कि उनके ओंकारेश्वर पहुंचने से पहले ही संत को दोपहर में जल्दबाजी में समाधि दे दी गई, जबकि परंपरा के अनुसार दूर-दराज से आने वाले संतों का इंतजार किया जाता है।


    अधिकारियों की मौजूदगी में निकाला गया शव, फिर हुआ पोस्टमार्टम

    मामले के तूल पकड़ने के बाद ओंकारेश्वर एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी की मौजूदगी में संत ब्रजराज पुरी महाराज की समाधि खोदी गई। प्रशासनिक निगरानी में पार्थिव देह को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद विधि-विधान के साथ संत की दोबारा समाधि दी गई। अब सभी की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई तय होगी।


    गायब आभूषण, मोबाइल और नकदी ने बढ़ाया शक

    महंत ओंकारदास उदासीन ने आरोप लगाया है कि संत के गले में पहनी सोने की चेन, रुद्राक्ष माला, मोबाइल फोन और नकदी मौके पर नहीं मिले। इसी वजह से हत्या या साजिश की आशंका और गहरा गई है। उन्होंने मांधाता थाने में आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और पोस्टमार्टम की मांग की थी।


    73 एकड़ जमीन विवाद बना जांच का बड़ा एंगल

    पूरे मामले में 73 एकड़ जमीन का विवाद भी सामने आया है। हिंदू महासभा और संत समाज के अनुसार, संत ब्रजराज पुरी महाराज ने पहले इस जमीन को लेकर विवाद का जिक्र किया था। आरोप है कि निरंजनी अखाड़े से जुड़ी इस जमीन को कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के जरिए दूसरे नाम पर दर्ज करा लिया गया था। संत समाज इस विवाद को भी मौत से जोड़कर देख रहा है।


    प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

    खंडवा डीआईजी मनोज कुमार राय पहले ही मामले की जांच के आदेश दे चुके हैं। वहीं हिंदू महासभा के आवेदन पर कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने भी पुलिस अधीक्षक को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। हालांकि मांधाता थाना पुलिस अब तक नजदीकी परिजनों से औपचारिक शिकायत नहीं मिलने का हवाला देकर कार्रवाई से बचती रही है।


    पहले से खुदवाया था समाधि का गड्ढा

    स्थानीय संत समाज के अनुसार, बाबा ब्रजराज पुरी महाराज ने करीब एक साल पहले अपनी कुटिया के सामने समाधि के लिए गड्ढा खुदवा दिया था और चेलों को निर्देश दिया था कि निधन के बाद उन्हें वहीं समाधि दी जाए। इसी कारण पहली बार भी उसी स्थान पर समाधि दी गई थी। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस हाई-प्रोफाइल संत मृत्यु प्रकरण की सबसे अहम कड़ी बन गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगा कि यह स्वाभाविक मौत थी, आत्महत्या थी या फिर किसी बड़ी साजिश का हिस्सा।

  • MP: टीईटी आदेश के खिलाफ प्रदेशभर में उबाल, नौकरी पर संकट का डर, सड़कों पर उतरे शिक्षक

    MP: टीईटी आदेश के खिलाफ प्रदेशभर में उबाल, नौकरी पर संकट का डर, सड़कों पर उतरे शिक्षक


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में टीईटी अनिवार्यता के नए आदेश के खिलाफ शिक्षकों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। बुधवार को बड़ी संख्या में शिक्षक संगठनों ने लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) मुख्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

    राजधानी ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में इस आदेश के विरोध में एक साथ आंदोलन हुआ। जिला कलेक्ट्रेट कार्यालयों में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों ने टीईटी आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई।


    डीपीआई आदेश बना विरोध की वजह

    हाल ही में डीपीआई द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें दो वर्ष के भीतर टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय सीमा में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने पर सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जा सकती है। यही प्रावधान अब शिक्षकों के आक्रोश की सबसे बड़ी वजह बन गया है।


    “सुप्रीम कोर्ट के नाम पर अन्याय”

    प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देकर सरकार ऐसा फैसला थोप रही है, जिससे हजारों पुराने शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के सदस्य उपेंद्र कौशल ने बताया कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में शिक्षक भोपाल पहुंचे और डीपीआई के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांग टीईटी परीक्षा को पूरी तरह रद्द करना है।


    पुराने शिक्षकों पर नई शर्त का विरोध

    शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने के बाद 2011 से टीईटी अनिवार्य किया गया, जबकि हजारों शिक्षक इससे पहले नियुक्त हो चुके थे। ऐसे में अब उन पर यह नियम लागू करना “रेट्रोस्पेक्टिव” निर्णय है, जो अन्यायपूर्ण और कानूनी रूप से भी कमजोर है।


    1.5 लाख शिक्षक प्रभावित

    संगठनों के मुताबिक इस आदेश का असर करीब 1.5 लाख शिक्षकों पर पड़ सकता है। इनमें लगभग 70 हजार ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी। इन शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय यह शर्त लागू नहीं थी, इसलिए अब इसे आधार बनाकर उनकी नौकरी पर संकट खड़ा करना उचित नहीं है।


    संयुक्त मोर्चा की चेतावनी

    प्रदर्शन के दौरान एक प्रतिनिधिमंडल ने डीपीआई अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। बाहर मौजूद शिक्षकों को आश्वासन दिया गया कि उनकी बात शासन तक पहुंचाई जाएगी। वहीं, शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे, जबकि 18 अप्रैल को प्रदेशव्यापी बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके भविष्य, सम्मान और वर्षों की सेवा का सवाल है और इसके लिए अब वे आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

  • MP: इंदौर में MYH के डॉक्टरों का कमाल….1 साल के बच्चे के गले में फंसी जिंदा मछली, सर्जरी कर बचाई जान

    MP: इंदौर में MYH के डॉक्टरों का कमाल….1 साल के बच्चे के गले में फंसी जिंदा मछली, सर्जरी कर बचाई जान


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore) के एमवाय अस्पताल (MY Hospital) में एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया, जहां खेलते-खेलते एक साल के मासूम (One Year old Innocent) की जिंदगी पर संकट आ गया। बच्चे के गले में जिंदा मछली फंस (Live Fish Stuck Child’s Throat) गई, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। डॉक्टरों की तत्परता और जटिल सर्जरी के बाद आखिरकार बच्चे की जान बचाई जा सकी।


    सफाई के दौरान मछलियों को बाहर निकालकर रखा

    परिजनों के अनुसार, घर में एक्वेरियम की सफाई के दौरान मछलियों को बाहर निकालकर रखा गया था। इसी दौरान पास में खेल रहे बच्चों में से एक ने मछली को हाथ में उठा लिया। यह देख एक वर्षीय बच्चा जोर-जोर से हंसने लगा। तभी हाथ में छटपटा रही मछली फिसलकर सीधे बच्चे के मुंह में चली गई और गले के अंदर जाकर फंस गई।


    बच्चे को होने लगी सांस लेने में तकलीफ

    घटना के बाद बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी। वह बेचैनी और घबराहट से जूझने लगा। उसके मुंह से खून भी निकलने लगा, जिससे परिजन घबरा गए और तुरंत उसे एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच में पाया कि मछली गले के पिछले हिस्से में फंसी हुई है और जिंदा होने के कारण लगातार हलचल कर रही है, जिससे अंदरूनी अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा था।


    सबसे बड़ी चुनौती, मछली जीवित

    ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. यामिनी गुप्ता के नेतृत्व में तुरंत आपातकालीन टीम गठित की गई और बिना देर किए सर्जरी का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मछली जीवित थी और उसके पंख व गलफड़े हिल रहे थे, जिससे स्वर-यंत्र और भोजन नली को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ था। करीब तीन इंच लंबी और डेढ़ इंच चौड़ी गोरामी मछली को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। सर्जरी सफल रही और उपचार के बाद बच्चे की सांस सामान्य हो गई। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।


    मामला बेहद दुर्लभ

    विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी कम उम्र में इस तरह का मामला बेहद दुर्लभ है और मध्य भारत में यह पहला मामला माना जा रहा है। समय पर इलाज मिलने से एक बड़ी अनहोनी टल गई। डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि छोटे बच्चों को हमेशा निगरानी में रखें और उन्हें छोटी या जीवित वस्तुओं से दूर रखें, क्योंकि इस तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

  • सर पास कर दो…. MP में 10वीं-12वीं की कॉपियों में किसी ने रखे 500 के नोट, तो किसी ने की ऑनलाइन पैसे भेजने की पेशकश

    सर पास कर दो…. MP में 10वीं-12वीं की कॉपियों में किसी ने रखे 500 के नोट, तो किसी ने की ऑनलाइन पैसे भेजने की पेशकश


    ग्वालियर।
    हाईस्कूल (High school.) और हायर सेकेंडरी (Higher Secondary.) की परीक्षा खत्म होने के बाद ग्वालियर में इन कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की कॉपियों को जांचने (Copies Checking) का काम हुआ। इस बारे में जानकारी देते हुए शिक्षकों ने बताया कि इस साल स्टू़डेंट्स की कॉपियों को जांचने के दौरान उन्हें 100 से ज्यादा अनोखी गुहारें (Unique requests) मिली, जिसे पढ़कर शिक्षक भी हैरान रह गए और उन्हें हंसी भी आई। इनमें से कुछ छात्र-छात्राओं ने अपने फोन नंबर कॉपियों में लिखकर पास करने के बदले शिक्षकों को ऑनलाइन रिश्वत भेजने की पेशकश की, तो वहीं कुछ ने माता-पिता की बीमारी की बात लिखते हुए पास करने की अपील की। कॉपी जांचने वाले शिक्षकों ने बताया कि कुछ छात्र-छात्राओं ने कॉपी के साथ 500 रुपए का नोट कॉपी में रखा और लिखा कि सर पास कर दीजिए, वहीं कुछ छात्रों ने कॉपी में इमोशनल शायरी लिख दी।

    कॉपियां जांचने वाले शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि करीब 100 कॉपियों में परीक्षार्थियों ने शिक्षकों के लिए अलग-अलग तरह की फरियादें लिखी हैं। इनमें छात्राओं की संख्या अधिक रही।


    छात्र ने लिखा- पास कर दीजिए, साली से शादी करवा दूंगा

    इस बारे में जानकारी देते हुए शिक्षकों ने बताया कि एक स्टूडेंट ने गजब का ऑफर देते हुए लिखा, ‘सर मुझे पास कर दो मेरी साली से आपकी शादी करवा दूंगा।’ वहीं एक अन्य छात्रा ने लिखा, ‘सर मैं फेल हो गई तो मेरी शादी टूट जाएगी, प्लीज पास कर दीजिए।’। एक अन्य छात्र ने लिखा, ‘सर गर्लफ्रेंड ने ब्रेकअप कर लिया तो पढ़ाई नहीं कर पाया। कृपा मुझे पास कर दीजिए।’


    छात्रा ने लिखा- फेल हो गई तो पति प्रताड़ित करेगा

    एक अन्य छात्रा ने लिखा, ‘सर शादी होने वाली है फेल हो गई तो पति प्रताड़ित करेगा, मुझे पास कर दीजिए।’ शिक्षकों के अनुसार करीब 23 से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने अपने माता-पिता को कैंसर या अन्य बीमारी होना बताया और लिखा कि बीमारी के चलते पढ़ाई नहीं हो पाई, आप पास कर दीजिए हमारी मां आपको दुआएं देंगी।

    QR कोड होने से कॉपियों की जानकारी मिलना मुश्किल
    उधर मूल्यांकन प्रभारी का कहना है कि कॉपियों पर QR कोड होने से छात्र-छात्राओं और अभिवावकों को कॉपियों वाले स्थान का पता ही नहीं लगता है, यही वजह है कि कमजोर और पढ़ाई न करने वाले छात्र-छात्राएं कॉपियों में इमोशनल संदेश लिखते हैं। इस बार 100 से ज्यादा छात्र-छात्राओं की कॉपी में गुजारिश, दलील, प्रपोज की पेशकश लिखी हुई थी, लेकिन शिक्षकों ने इस पर ध्यान देने की बजाय सिर्फ मूल्यांकन किया है।


    शिक्षकों को दिया गया करीब 67 लाख रुपए का मानदेय

    बोर्ड के संभागीय अधिकारी मारुति सोमकुंवर ने बताया कि इस बार जिले के 49 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं दोनों परीक्षाओं में शामिल हुए थे। कॉपियों की जांच पूरी हो चुकी है और रिजल्ट 12 अप्रैल तक घोषित किया जा सकता है। आपको बता दें कि वर्ष 2025 में 2 लाख 79 हजार 895 कॉपियां जांची गई थीं। उस समय शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को मानदेय के रूप में 69 लाख रुपए दिए गए थे। इस बार कॉपियां कुछ कम हैं, लेकिन मानदेय लगभग 67 लाख रुपए रहने का अनुमान है।


    12 अप्रैल तक घोषित हो सकता है हायर सेकेंड्री का रिजल्ट

    एमपी बोर्ड की हायर सेकेंडरी और हाईस्कूल परीक्षाओं का मूल्यांकन शासकीय कन्या विद्यालय, शिंदे की छावनी में एक दिन पहले पूरा हो चुका है। मूल्यांकन केंद्र पर कॉपियां जांचने का काम 22 फरवरी से शुरू हुआ, इस दौरान कुल 2 लाख 66 हजार 173 कॉपियों का मूल्यांकन किया गया। अब रिजल्ट की तैयारी चल रही है, जो 12 अप्रैल तक घोषित होने की संभावना है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष रिजल्ट 6 मई को जारी हुआ था।