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  • MP: .ग्वालियर में बारिश से सड़कों पर भरा घुटनों तक पानी… उसी में धरने पर बैठे विधायक

    MP: .ग्वालियर में बारिश से सड़कों पर भरा घुटनों तक पानी… उसी में धरने पर बैठे विधायक


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) के शंकरपुर में बारिश के बाद घुटनों तक पानी भर गया। जलभराव के विरोध में कांग्रेस विधायक साहब सिंह गुर्जर (Congress MLA Sahib Singh Gurjar) पानी से भरी सड़क पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने नगर निगम पर नालियों की सफाई और जल निकासी में लापरवाही का आरोप लगाते हुए स्थायी समाधान की मांग की।

    दरअसल, ग्वालियर शहर में झमाझम बारिश ने एक बार फिर नगर निगम के जल निकासी के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। बारिश के बाद वार्ड क्रमांक 64 के शंकरपुर इलाके में हालात ऐसे हो गए कि सड़कें घुटनों तक पानी में डूब गईं। जलभराव के कारण स्थानीय लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    बारिश के बीच जलभराव की समस्या का विरोध करने के लिए कांग्रेस के ग्रामीण विधायक साहब सिंह गुर्जर मौके पर पहुंचे। उन्होंने पानी से लबालब सड़क पर ही धरना शुरू कर दिया। विधायक के धरने में स्थानीय नागरिक भी शामिल हो गए और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    विधायक साहब सिंह गुर्जर ने मौके से फेसबुक लाइव किया और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि शंकरपुर में जलभराव की समस्या आज की नहीं है, बल्कि पिछले दो साल से लगातार बनी हुई है। इस समस्या को कई बार अधिकारियों के सामने उठाया गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया। विधायक का आरोप है कि इलाके में नालियों की पर्याप्त सफाई नहीं होने और जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश होते ही सड़कें पानी में डूब जाती हैं। स्थानीय लोगों को हर बार इसी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    बारिश के बीच विधायक के धरने के दौरान लोगों ने ‘नगर निगम होश में आओ’ के नारे लगाए। जलभराव के बीच किया गया यह विरोध प्रदर्शन अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बारिश के दौरान सड़क पर इतना पानी भर जाता है कि लोगों के लिए घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि हर साल बारिश से पहले जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति बारिश के बाद सामने आ जाती है।

    विधायक और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि शंकरपुर की जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि जब तक इलाके में बेहतर जल निकासी व्यवस्था नहीं बनाई जाती, तब तक हर बारिश में लोगों को इसी तरह परेशानी झेलनी पड़ेगी। बारिश थमी तो पानी भी धीरे-धीरे उतर गया, लेकिन शंकरपुर में जलभराव को लेकर नगर निगम की तैयारियों और दावों पर सवाल जरूर खड़े हो गए।

  • रक्षाबंधन पर सबसे पहले महाकाल को बांधी राखी, 2 फीट की विशेष राखी पहनाई, लड्डुओं का लगाया महाभोग

    रक्षाबंधन पर सबसे पहले महाकाल को बांधी राखी, 2 फीट की विशेष राखी पहनाई, लड्डुओं का लगाया महाभोग


    उज्जैन। रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत धार्मिक नगरी उज्जैन में भगवान महाकाल के दरबार से हुई। शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे हुई भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल को 2 फीट लंबी विशेष राखी अर्पित की। इसके साथ ही भगवान को सवा लाख शुद्ध देसी घी के लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। इसे देश में सबसे पहले भगवान को राखी अर्पित करने की परंपरा के रूप में देखा जाता है।

    भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल को रक्षासूत्र बांधकर देश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। मान्यता है कि सनातन परंपरा के प्रमुख पर्वों का शुभारंभ राजाधिराज महाकाल के आंगन से होता है।

    राखी बांधने के लिए पुजारी ओम गुरु और राजेश शर्मा के परिवार की महिलाएं रात करीब 2 बजे ही मंदिर पहुंच गई थीं। भस्म आरती में बाबा महाकाल को भस्म अर्पित किए जाने के बाद 2 फीट लंबी विशेष राखी भगवान के स्वरूप पर समर्पित की गई। पूरे सावन व्रत रखने वाली महिलाओं ने महाकाल का प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोला और बाद में भाइयों की कलाई पर राखी बांधी।

    सवा लाख लड्डुओं का लगाया भोग

    रक्षाबंधन और श्रावणी पूर्णिमा के मौके पर बाबा महाकाल को सवा लाख शुद्ध देसी घी के लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूरे सावन उपवास रखने वाले श्रद्धालु पूर्णिमा पर महाकाल के लड्डू प्रसाद को ग्रहण करने के बाद व्रत पूर्ण करते हैं। भक्तों में प्रसाद वितरण के लिए मंदिर समिति और पुजारियों की ओर से बड़े पैमाने पर लड्डू तैयार कराए गए।

    एक सप्ताह में तैयार हुई विशेष राखी

    पुजारी आकाश गुरु के मुताबिक, करीब 2 फीट लंबी यह विशेष राखी पुजारी परिवार की महिलाओं ने लगभग एक सप्ताह की मेहनत से तैयार की। राखी बनाते समय महिलाएं लगातार ‘जय महाकाल’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करती रहीं।

    राखी को रेशमी वस्त्र, रेशमी धागों, कांच वर्क और आभूषणों से सजाया गया। इसमें भगवान महाकाल के प्रिय त्रिनेत्र, ‘ॐ’, त्रिपुंड और रुद्राक्ष को शामिल किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख और गौ माता के प्रतीक चिन्ह भी राखी में लगाए गए।

  • MP: शक्कर की कीमतों पर कैलाश विजयवर्गीय का अजीब तर्क… बोले- खूब महंगी होनी चाहिए चीनी

    MP: शक्कर की कीमतों पर कैलाश विजयवर्गीय का अजीब तर्क… बोले- खूब महंगी होनी चाहिए चीनी


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के एक सीनियर मंत्री (Senior Minister) ने चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों की चिंता को खारिज करते हुए एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने तर्क दिया कि चीनी ‘बहुत महंगी’ (Sugar ‘Very Expensive’) होनी चाहिए और जोर देकर कहा कि 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को चीनी बिल्कुल नहीं मिलनी चाहिए।

    राज्य के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) ने बुधवार को त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों पर विपक्षी दलों की आलोचना के जवाब में ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि आजकल 90 प्रतिशत लोग मिठाइयां पसंद नहीं करते हैं, और उन्होंने खुद भी ऐसी चीज़ें खाना पूरी तरह बंद कर दिया है।

    पत्रकारों से बात करते हुए बीजेपी नेता ने दावा किया कि चीनी की कीमतें लगातार कम हो रही हैं. उन्होंने कहा, “वैसे भी, आजकल 90 प्रतिशत लोग मिठाइयां पसंद नहीं करते हैं. मैं आपको बता दूं, मैं बिल्कुल भी मिठाई नहीं खाता हूं.”

    मंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “मेरा कहना है कि (चीनी) बहुत महंगी होनी चाहिए. (चीनी) सिर्फ़ बच्चों के लिए सरकारी उचित मूल्य की दुकानों पर सस्ती दरों पर मिलनी चाहिए… बुजुर्गों को चीनी बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए.”

    उन्होंने कहा कि डॉक्टर, खासकर आयुर्वेदिक डॉक्टर, 40 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों के लिए चीनी का सेवन अच्छा नहीं मानते हैं. उन्होंने कहा, “अगर आप 40 साल से ज़्यादा उम्र के हैं, तो कभी-कभी गुड़ खा सकते हैं, लेकिन चीनी से पूरी तरह परहेज करें।


    ‘बीजेपी नेता गरीबों का मजाक उड़ा रहे हैं’

    राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सत्ताधारी बीजेपी पर निशाना साधने के लिए विजयवर्गीय के बयानों का सहारा लिया. उन्होंने कहा कि महंगाई कम करने के वादे के साथ सत्ता में आए बीजेपी नेता चीनी पर अपने “बेतुके” बयानों से गरीबों और मध्यम वर्ग का अपमान और मज़ाक उड़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, “देश बीजेपी नेताओं को देख रहा है. लोग आने वाले चुनावों में उनकी हंसी का मुंहतोड़ जवाब देंगे. तब देखेंगे कि उनकी मुस्कान बनी रहती है या वे आंसू बहाते हैं.”


    पेट्रोल में इथेनॉल और चीनी की कीमतें

    विपक्षी दल पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की मात्रा बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं. उनका आरोप है कि इस नीति से चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं और लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. सरकार ने इन दावों को खारिज कर दिया है और इसके बजाय कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इंडस्ट्री को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने के कारण बुधवार को लगातार दूसरे दिन खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में 1 रुपये प्रति किलोग्राम से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई।

    सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति देने के बाद मिल-गेट कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद, चीनी की खुदरा कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं. उपभोक्ता मामलों के विभाग (मूल्य निगरानी प्रभाग) द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त को चीनी का अखिल भारतीय औसत भाव 65.05 रुपये प्रति किलोग्राम था, जबकि मंगलवार को यह 63.97 रुपये प्रति किलोग्राम था।

  • MP: उज्जैन में UCC कानून का विरोध…. बुर्का-हिजाब पहन सड़क पर उतरीं मुस्लिम महिलाएं

    MP: उज्जैन में UCC कानून का विरोध…. बुर्का-हिजाब पहन सड़क पर उतरीं मुस्लिम महिलाएं


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में यूसीसी कानून (UCC Law) के विरोध में सैंकड़ों की संख्या में बुर्का और हिजाब पहन कर मुस्लिम महिलाएं (Muslim Women) सड़क पर उतर गई हैं। इन दौरान मुस्लिम महिलाएं हाथों में तख्तियां लेकर प्रशासन को ज्ञापन देने पहुंची। इन तख्तियों पर लिखा,काला कानून वापस लो,धर्म निरपेक्षता जिंदाबाद,शरीयत में छेड़छाड़ बर्दास्त नहीं कि जाएगी। इस दौरान महिलाओं ने सरकार को चेताया की मुस्लिम लॉ के तहत निकाह हमारा, फैसला हमारा,शरीयत में दखल मंजूर नही करेंगे। UGC को लेकर महिलाओं के समर्थन देने पर मुस्लिम महिलाओं ने कहा कि हम उनको बताना चाहते हैं कि ये स्पष्ठ नही है। कुछ बाते जानने की जरूरत है। इस दौरान तीन थानों के थाना प्रभारी सहित एसडीएम, सीएसपी ओर पुलिस के जवान तैनात रहे।

    उज्जैन के खाराकुआं स्थित जामा मस्जिद में रविवार सेकड़ों की संख्या में मुस्लिम महिलाए सड़कों पर उतरीं और मस्जिद के अंदर हिन्दुस्तान जिंदाबाद के बैनर लगाकर UGC द्वारा बनाए कानून को मानने से इंकार किया। उन्होंने आरोप लगाए की यह कानून तीन तलाक,विवाह सहित कई मामलों में स्पष्ठ नहीं है।इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं शामिल हुईं। मंच पर महिला प्रतिनिधि मौजूद थीं, जबकि सामने एकत्रित महिलाओं के हाथों में तख्तियां और तिरंगे झंडे देखे गए। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी समुदाय या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि विधेयक के उन प्रावधानों को लेकर है, जिन्हें वे अपने धार्मिक और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ा मानती हैं। डॉक्टर फौजिया अंजुम ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को केवल समानता के नाम पर विधेयक का समर्थन करने के बजाय उसके प्रावधानों को गहराई से समझना चाहिए।


    राष्ट्रपति को ज्ञापन में पुर्नविचार की मांग

    बताया जा रहा है कि 23 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपकर उज्जैन की मुस्लिम नुमाइंदा कमेटी ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक- 2026 को लेकर विधेयक के प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की है। कमेटी ने राष्ट्रपति से चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 को मौजूदा स्वरूप में वापस लेने या उस पर पुनर्विचार करना शामिल है। इसके अलावा, धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा, सभी प्रभावित समुदायों से व्यापक परामर्श और मुस्लिम या अन्य धर्म-निर्देशित समुदायों को कानून में अलग-अलग श्रेणियों में रखने के बजाय समान दृष्टिकोण अपनाने की मांग की गई है।

    प्रदर्शन में शामिल शाइस्ता परवीन शेख ने कहा कि महिलाएं संविधान और अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हुई हैं। प्रसासनिक अधिकारों ज्ञापन में संविधान के मौलिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों का हवाला दिया गया है। कमेटी ने अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल है, जबकि धार्मिक स्वतंत्रता मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।

    पार्षद नाजिया कुरैशी ने बताया कि यह प्रदर्शन मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और शरीयत से जुड़े मामलों को लेकर है। उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं द्वारा UCC के समर्थन की बात कही जा रही है।

  • MP: छिंदवाड़ा NICU अग्निकांड में 1 बच्ची की मौत, 2 झुलसे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार

    MP: छिंदवाड़ा NICU अग्निकांड में 1 बच्ची की मौत, 2 झुलसे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार


    छिंदवाड़ा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल (Chhindwara District Hospital) के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (Special Newborn Care Unit) में शनिवार तड़के वार्मर मशीन में अचानक आग लगने से बड़ा हादसा हो गया. इस दुखद घटना में झुलसे तीन नवजात शिशुओं में से एक बच्ची ने जबलपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना जताई है।

    मुख्यमंत्री ने मृतक बच्ची के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन अन्य दो नवजात बच्चों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी.

    आग लगने के तुरंत बाद ऑन-ड्यूटी स्टाफ ने मुस्तैदी दिखाते हुए अग्निशामक यंत्रों का उपयोग किया और ऑक्सीजन सप्लाई लाइन बंद कर बड़े हादसे को टाल दिया. यूनिट में मौजूद 33 नवजातों में से 30 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    वार्मर में रखे 3 बच्चे झुलस गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत एंबुलेंस और डॉक्टरों की निगरानी में जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया. इनमें से एक नवजात की हालत अत्यंत गंभीर थी, जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

    इस घटना को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल मरीजों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं. उन्होंने प्रदेश के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों का तुरंत फायर सेफ्टी ऑडिट कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    फिलहाल, छिंदवाड़ा जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने हादसे के तकनीकी कारणों की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर लिए गए हैं।

  • MP: बालाघाट के बैगा अंचल में मलेरिया और मीजल्स की वजह से हुई 19 बच्चों की मौत….

    MP: बालाघाट के बैगा अंचल में मलेरिया और मीजल्स की वजह से हुई 19 बच्चों की मौत….


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बालाघाट (Balaghat) के बैगा अंचल में 19 बच्चों की मौत ने पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है. शुरुआत में इन बच्चों की मौत के पीछे कुपोषण (Malnutrition) को वजह माना गया था, लेकिन ICMR और दूसरे प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों की जांच रिपोर्ट में मौतों की मुख्य वजह मलेरिया और मीजल्स (Malaria and Measles) यानी खसरा संक्रमण (Measles infection) सामने आया है. जांच में खसरा और मलेरिया संक्रमण को बच्चों की मौत की प्रमुख वजह बताया गया है. लेकिन इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद मामला खत्म नहीं हुआ है. इसके बजाय बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

    जिन बच्चों में खसरे का संक्रमण मिला, वे सभी नियमित टीकाकरण से छूटे हुए थे. यानी संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी टीकाकरण इन बच्चों तक नहीं पहुंच पाया था. बालाघाट में हुई 19 बच्चों की मौतें संक्रमण से जुड़ी बताई गई हैं, लेकिन आदिवासी इलाकों में बच्चों के सामने सिर्फ संक्रमण का खतरा नहीं है. इन इलाकों में कुपोषण भी बच्चों के स्वास्थ्य को लगातार कमजोर कर रहा है. एक तरफ मलेरिया और खसरे जैसे संक्रमण हैं और दूसरी तरफ कुपोषण की समस्या. इन दोनों के बीच आदिवासी बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

    एक तरफ बीमारी, दूसरी तरफ कुपोषण

    ग्रामीण मध्य प्रदेश में बच्चों की पोषण स्थिति को लेकर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं. आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण मध्य प्रदेश में अंडरवेट बच्चों का आंकड़ा 33 फीसदी से बढ़कर 42 फीसदी से ज्यादा हो गया है. इस स्थिति में सवाल यह है कि बच्चों को बीमारी से बचाने वाली वैक्सीन और कुपोषण से बचाने वाला पोषण दोनों की व्यवस्था में कमी कहां रह गई. बालाघाट में सामने आई 19 बच्चों की मौतों ने इन दोनों व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    एक ओर अगर बच्चे नियमित टीकाकरण से छूट रहे हैं तो दूसरी ओर उन्हें पर्याप्त पोषण भी नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में संक्रमण और कुपोषण दोनों बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन रहे हैं. केंद्र के मिशन पोषण 2.0 के तहत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के साथ 6 साल तक के बच्चों को साल में कम से कम 300 दिन पोषण आहार दिए जाने का प्रावधान है. लेकिन मध्य प्रदेश की करीब 97 हजार आंगनबाड़ियों में एक साल में जुलाई तक करीब 260 दिन ही नियमित पोषण आहार मिलने के आरोप लगाए गए हैं. यानी जिस व्यवस्था के तहत बच्चों और महिलाओं तक पूरे साल पोषण पहुंचाने की बात है, वहां नियमित सप्लाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    इसी बीच प्रदेश में पोषण आहार बनाने वाले रीवा, सागर, देवास, शिवपुरी और होशंगाबाद सहित जिलों के सभी 7 प्लांट बंद किए जा चुके हैं. पोषण आहार की व्यवस्था में हुए बदलाव ने भी सवाल खड़े किए हैं. जिस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों तक लगातार पोषण पहुंचाना था, वही व्यवस्था बदलाव के दौरान प्रभावित हुई. ऐसे में आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार की नियमितता को लेकर चिंता सामने आई है।


    सरकार ने माना, व्यवस्था बदलने के दौरान सप्लाई प्रभावित हुई

    महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री निर्मला भूरिया के मुताबिक पुरानी व्यवस्था में ग्रामीण एवं पंचायत विकास विभाग की ओर से पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा था. मंत्री के अनुसार यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं पाई गई, जिसके बाद इसमें बदलाव किया गया. नए टेंडर जारी होने तक स्थानीय स्तर पर विभाग स्वसहायता समूहों के जरिए बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध करा रहा है. हालांकि मंत्री ने यह भी माना कि व्यवस्था बदलने के दौरान कुछ दिनों तक पोषण आहार की सप्लाई प्रभावित हुई थी. इससे यह सवाल और अहम हो जाता है कि व्यवस्था बदलने के बीच बच्चों तक पोषण आहार की नियमित पहुंच कैसे सुनिश्चित की गई. खासकर उन इलाकों में जहां पहले से ही बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति चुनौतीपूर्ण है।


    बालाघाट में बच्चों की मौत पर सरकार गंभीर

    बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विभाग की सचिव को बालाघाट जाने के निर्देश दिए हैं. इसका उद्देश्य वहां के हालात पर नजर रखना और स्थिति की जानकारी लेना है. बालाघाट के बैगा अंचल में हुई 19 बच्चों की मौतों ने स्वास्थ्य, टीकाकरण और पोषण व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने रख दिए हैं. जांच में मलेरिया और खसरा संक्रमण मौतों की मुख्य वजह सामने आने के बाद अब नियमित टीकाकरण भी चर्चा के केंद्र में है. क्योंकि जिन बच्चों में खसरे का संक्रमण मिला, वे नियमित टीकाकरण से छूटे हुए थे. वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण मध्य प्रदेश में अंडरवेट बच्चों की संख्या बढ़ने का आंकड़ा भी सामने है।


    बालाघाट में बच्चों की मौत पर सरकार गंभीर

    मध्य प्रदेश की चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि देश की कमजोर जनजातीय आबादी का बड़ा हिस्सा इसी राज्य में रहता है. देश में 75 जनजातीय समूहों को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह घोषित किया गया है. मध्य प्रदेश में डिंडोरी, मंडला, बालाघाट, अनूपपुर, उमरिया, श्योपुर और छिंदवाड़ा के जनजातीय समुदाय इस श्रेणी में शामिल हैं. ऐसे में बालाघाट की 19 बच्चों की मौत केवल एक इलाके की घटना नहीं रह जाती, बल्कि यह सवाल उठाती है कि कमजोर जनजातीय इलाकों में बच्चों तक स्वास्थ्य और पोषण की सुविधाएं कितनी नियमित और प्रभावी तरीके से पहुंच रही हैं।

    बालाघाट में बच्चों की मौत की जांच में मलेरिया और खसरा संक्रमण सामने आया है. खसरे से संक्रमित बच्चों का नियमित टीकाकरण नहीं हुआ था. दूसरी ओर ग्रामीण मध्य प्रदेश में कुपोषण के आंकड़े बढ़े हैं और पोषण आहार की सप्लाई में भी व्यवधान की बात सरकार ने स्वीकार की है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आदिवासी बच्चों को एक साथ बीमारी और कुपोषण से कैसे बचाया जाए. टीकाकरण और पोषण दोनों की नियमित व्यवस्था बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. बालाघाट की घटना ने इस पूरी व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • MP: भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रपये की साइबर ठगी

    MP: भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रपये की साइबर ठगी


    कटनी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. राज्य के सबसे अमीर विधायकों में गिने जाने वाले और कटनी जिले (Katni district) के विजयराघवगढ़ (Vijayraghavgarh) से विधायक संजय पाठक (MLA Sanjay Pathak) की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रुपये की भारी-भरकम साइबर ठगी का मामला सामने आया है. शातिर साइबर ठगों ने कंपनी के सीनियर डायरेक्टर के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर अकाउंटेंट को चकमा दिया और बड़ी आसानी से पैसे ट्रांसफर करवा लिया।

    पूरी घटना बुधवार 12 अगस्त दोपहर करीब 2 बजे की है. विधायक संजय पाठक की कंपनी के सीनियर अकाउंटेंट शैलेश तिवारी के पास एक मैसेज आया. यह मैसेज कंपनी के ही एक सीनियर डायरेक्टर के मोबाइल नंबर से आया था, जिस पर उनकी फोटो भी लगी हुई थी. मैसेज में अकाउंटेंट को तुरंत किसी दूसरे बैंक खाते में डेढ़ करोड़ रुपये ट्रांसफर करने को कहा गया।

    चूंकि मैसेज सीधे सीनियर डायरेक्टर के नंबर और उनकी प्रोफाइल फोटो के साथ आया था, इसलिए अकाउंटेंट को किसी भी तरह का कोई शक नहीं हुआ. बिना देर किए अकाउंटेंट ने कंपनी के खाते से पैसे ट्रांसफर कर दिए. दो बार में ट्रांजेक्शन किए गए, जिसमें एक बार 1 करोड़ 16 लाख और दूसरी बार करीब 33 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए. इस तरह कुल मिलाकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये ठगों के खाते में चले गए।


    फ्लाइट से उतरते ही विधायक को मिली जानकारी

    दिलचस्प बात यह है कि जिस समय यह फ्रॉड हो रहा था, विधायक संजय पाठक फ्लाइट से यात्रा कर रहे थे. जैसे ही वह प्लेन से उतरे, उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक संजय पाठक ने तुरंत कटनी के पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा को पूरी घटना की जानकारी दी. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की. पुलिस ने कुछ राशि को होल्ड कराने के निर्देश दिए. कंपनी के अकाउंटेंट की शिकायत पर रंगनाथ नगर थाने में साइबर ठगी का मामला दर्ज कर लिया गया है।


    ‘बॉस स्कैम’ का शिकार हुई कंपनी

    कटनी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) कमल मौर्य ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि यह एक टिपिकल साइबर फ्रॉड है, जिसे ‘बॉस स्कैम’ कहा जाता है. इसमें ठग बड़े अधिकारियों की नकली प्रोफाइल बनाकर कर्मचारियों को झांसे में लेते हैं।

    एएसपी ने बताया कि साइबर ठगों ने मात्र दो-तीन घंटे के अंदर ही पूरी रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर साफ कर दिया. ठगी गई रकम को करीब 200 अलग-अलग जगहों पर डिस्ट्रीब्यूट किया गया, जिसे एटीएम और चेक के माध्यम से निकाला जा रहा है।

    पुलिस और साइबर सेल की टीम ने तुरंत ऐक्शन लेते हुए ठगों के खातों से अब तक करीब 23 लाख रुपये की राशि को होल्ड (फ्रीज) करवा लिया है. फिलहाल, साइबर सेल की टीम तकनीकी जांच में जुटी हुई है और ठगों के पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

  • MP: दीपके और उनके साथियों की इंदौर पुलिस में शिकायत, नाबालिगों को बरगलाने का आरोप…

    MP: दीपके और उनके साथियों की इंदौर पुलिस में शिकायत, नाबालिगों को बरगलाने का आरोप…


    इंदौर।
    अभिजीत दीपके (Abhijit Deepke) और सौरव दास (Sourav Das) समेत उनके अन्य साथियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खुद को सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर बताने वाले एक शख्स ने इंदौर पुलिस में इनकी भूमिकाओं की जांच की मांग उठाई है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party-CJP) के प्रदर्शन में नाबालिग लड़के-लड़कियों को बरगलाकर जमावड़ा कराने में इनकी कथित भूमिका साबित होती हो और पॉक्सो के तहत अपराध पाए जाएं तो FIR दर्ज किया जाना चाहिए।


    किसने दी शिकायत?

    मुंबई के निवासी फैजान अंसारी ने इंदौर पुलिस की अपराध निरोधक शाखा में दी गई अपनी शिकायत में दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP की अगुवाई में 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन में नाबालिगों की कथित मौजूदगी का दावा करते हुए अभिजीत दीपके और सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास समेत अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करने की मांग की है।


    अभिजीत दीपके, सौरभ दास और अन्य की भूमिकाओं की हो जांच

    मुंबई के निवासी फैजान अंसारी ने शिकायत में कहा कि जांच के जरिये इस बात का पता लगाया जाना चाहिए कि अभिजीत दीपके, सौरभ दास या समूह के अन्य सदस्य नाबालिगों को प्रदर्शन में लाने में कहीं शामिल तो नहीं थे। क्या ये लोग नाबालिगों को भड़काने में शामिल तो नहीं थे।


    इन सुबूतों को सुरक्षित किए जाने की भी मांग

    फैजान अंसारी ने इंदौर पुलिस क्राइम ब्रांच से विरोध प्रदर्शन के फोटो-वीडियो, मीडिया इंटरव्यू, सार्वजनिक बयान, प्रदर्शन स्थल और इसके आस-पास के सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया सामग्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को संरक्षित करके उनकी जांच का अनुरोध किया है।


    जांच में पॉक्सो का अपराध मिले हो तो करें FIR

    शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार का संज्ञेय अपराध सामने आता है तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।


    इंदौर पुलिस ने भी शुरू की जांच

    अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने बताया कि हमें अंसारी की शिकायत मिली है जो खुद को सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर बता रहे हैं। शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


    दिल्ली पुलिस की भी भूमिका हो जाएगी अहम

    गौरतलब है कि कथित नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी की अगुवाई में विरोध प्रदर्शन हुआ था। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च की कोशिश थी तब पुलिस के साथ उनकी झड़पें हुई थीं। इसमें कई आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुए थे। ऐसे में इस शिकायत के सामने आने से पूरे प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। यदि इंदौर पुलिस उक्त शिकायत पर आगे बढ़ती है तब जांच में दिल्ली पुलिस की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगी।

  • BJP अध्यक्ष नवीन की नई टीम में MP के इन 4 नेताओं को मिल सकती है जगह… सुगबुगाहट हुई तेज

    BJP अध्यक्ष नवीन की नई टीम में MP के इन 4 नेताओं को मिल सकती है जगह… सुगबुगाहट हुई तेज


    भोपाल।
    भाजपा (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Navin) की नई टीम के गठन की कवायद के बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से भी राष्ट्रीय संगठन में जगह पाने वाले संभावित चेहरों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खास बात यह है कि पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद विष्णुदत्त शर्मा (वीडी शर्मा) की हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से हुई मुलाकात के बाद उनके नाम को लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलें और तेज हुई हैं। भाजपा के सामने राष्ट्रीय टीम में नए चेहरों को जगह देने के साथ सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की चुनौती है। ऐसे में मध्यप्रदेश से ब्राह्मण, ओबीसी, दलित और आदिवासी वर्ग के चेहरों को प्रतिनिधित्व देने पर विचार हो सकता है। संभावित नामों में वीडी शर्मा, राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार, सांसद गजेंद्र पटेल और वरिष्ठ नेता लालसिंह आर्य की चर्चा है। हालांकि, अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा और इसमें जातीय समीकरण के अलावा संगठन में पकड़, चुनावी प्रबंधन, अनुभव और राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता अहम होगी।


    पीएम से मुलाकात के बाद चर्चा तेज

    पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा का नाम संभावित दावेदारों में सबसे प्रमुख माना जा रहा है। वे लंबे समय तक मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और संगठन को बूथ स्तर से लेकर चुनावी प्रबंधन तक संभालने का अनुभव रखते हैं। प्रदेश में भाजपा को लगातार मजबूत करने के दौर में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात ने भी उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाओं को हवा दी है। वीडी शर्मा के पक्ष में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व के साथ संगठनात्मक अनुभव भी जाता है। यदि भाजपा राष्ट्रीय टीम में अनुभवी और संगठन को समझने वाले नेताओं को बड़ी भूमिका देने की रणनीति अपनाती है, तो उनका नाम मजबूत दावेदारों में रह सकता है।


    कविता पाटीदार : महिला और ओबीसी का समीकरण

    राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार भी राष्ट्रीय संगठन के लिए संभावित चेहरों में हैं। प्रदेश भाजपा संगठन में महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुकी पाटीदार के पास संगठन के साथ संसदीय राजनीति का अनुभव भी है। उनके नाम के साथ महिला और ओबीसी दोनों समीकरण जुड़ते हैं। भाजपा के लिए महिला मतदाताओं की बढ़ती राजनीतिक भूमिका को देखते हुए राष्ट्रीय टीम में किसी महिला नेता को प्रमुख जिम्मेदारी देना महत्वपूर्ण संदेश हो सकता है। वहीं ओबीसी प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी उनका नाम पार्टी के सामाजिक विस्तार की रणनीति में फिट बैठता है।


    गजेंद्र पटेल : आदिवासी चेहरे पर दांव

    राष्ट्रीय संगठन में आदिवासी प्रतिनिधित्व बढ़ाने की रणनीति बनी तो सांसद गजेंद्र पटेल का नाम भी महत्वपूर्ण हो सकता है। मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में संगठनात्मक और राजनीतिक काम का अनुभव रखने वाले पटेल इस वर्ग के प्रतिनिधि चेहरे के रूप में देखे जा सकते हैं। भाजपा के लिए आदिवासी राजनीति केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश के साथ आसपास के राज्यों में भी आदिवासी मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय टीम में आदिवासी चेहरे को जगह देना पार्टी की व्यापक सामाजिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।


    लालसिंह आर्य : दलित प्रतिनिधित्व का विकल्प

    ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के वरिष्ठ नेता लालसिंह आर्य भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं। वे भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चे की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं। राष्ट्रीय संगठन में उन्हें जिम्मेदारी मिलती है तो इससे दलित प्रतिनिधित्व का संदेश जाएगा। भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में दलित वोट महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में राष्ट्रीय टीम में इस वर्ग के अनुभवी चेहरे को प्रमुख भूमिका देना राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों लिहाज से उपयोगी हो सकता है।

    दतिया की हार के बाद संगठनात्मक प्रदर्शन भी कसौटी
    प्रदेश में हालिया दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर भी मंथन का दौर है। ऐसे में राष्ट्रीय टीम के लिए प्रदेश से चेहरों के चयन में केंद्रीय नेतृत्व संगठनात्मक प्रदर्शन, चुनावी प्रबंधन और नेताओं की स्वीकार्यता को भी ध्यान में रख सकता है। दतिया के नतीजे ने प्रदेश संगठन के सामने 2028 की तैयारियों को लेकर भी चुनौती बढ़ाई है। ऐसे में राष्ट्रीय जिम्मेदारी पाने वाले नेताओं की उपयोगिता केवल सामाजिक समीकरण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव में संगठन को मजबूत करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।

  • MP: ग्वालियर में अवैध खनन को लेकर HC सख्त…. वेतन और बेटे की स्कूल फीस समेत अफसरों से पूछे तीखे सवाल

    MP: ग्वालियर में अवैध खनन को लेकर HC सख्त…. वेतन और बेटे की स्कूल फीस समेत अफसरों से पूछे तीखे सवाल


    ग्वालियर।
    ग्वालियर (Gwalior) के बिलौआ में अवैध खनन (Illegal mining) को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की ग्वालियर बेंच में सुनवाई हुई. इस दौरान अदालत ने अफसरों पर तीखे प्रहार किए. करीब ढाई घंटे तक कलेक्टर रुचिका चौहान (Collector Ruchika Chauhan) कोर्ट में रहीं, वहीं प्रभारी माइनिंग अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा की सैलरी और उनके बेटे के स्कूल की फीस को लेकर कोर्ट ने सीधा हिसाब मांगा गया।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में बिलौआ खदानों का ड्रोन वीडियो चलाया गया. जस्टिस ने वीडियो पॉज करवाकर कलेक्टर रुचिका चौहान से सीधे सवाल पूछे कि ”यह कौन सी जगह है? किसकी जमीन है? सर्वे नंबर क्या है? कितना क्षेत्र स्वीकृत है और कितनी खुदाई हो चुकी है?”


    जवाब न मिलने पर तल्खी

    जब तत्काल स्पष्ट जानकारी नहीं मिली तो कोर्ट ने 30 सितंबर तक का समय देते हुए कहा कि जितना समय चाहें ले लीजिए, लेकिन अगली सुनवाई पर एक-एक सवाल का स्पष्ट और सटीक जवाब देना होगा।


    10 साल का माल 1 साल में निकालने पर सवाल

    कोर्ट ने खनन की गति पर टिप्पणी करते हुए कहा, ”अगर 10 साल की लीज का माल 1 साल में ही निकाल लिया, तो बाकी 9 साल क्या करोगे?”


    51 हजार सैलरी, 9 लाख स्कूल फीस

    इसके बाद कोर्ट का रुख प्रभारी खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा की तरफ मुड़ा. कोर्ट ने माइनिंग अधिकारी से पूछा कि उनके बेटे की सिंधिया स्कूल में फीस कितनी है? जवाब मिला- ‘करीब 9 लाख रुपये साल.’ जब कोर्ट ने पूछा कि आपकी महीने की तनख्वाह कितनी है? तो उन्होंने बताया- ‘करीब 51 हजार रुपये महीना.’

    कोर्ट ने 51 हजार मासिक वेतन और 9 लाख सालाना फीस के अंतर पर सवाल उठाए, जिस पर माइनिंग अफसर ने सफाई दी कि बेटे की पढ़ाई का खर्च उनकी पत्नी के मामा उठाते हैं. इसको लेकर अदालत ने टिप्पणी की।

    वहीं, माइनिंग अफसर की ओर से लोकायुक्त के आदेश को ‘क्लीन चिट’ बताकर पेश करने की कोशिश की गई, लेकिन जज ने खुद आदेश पढ़ा और साफ किया कि FIR दर्ज होने के कारण लोकायुक्त ने केस बंद किया था, जिसे ‘दोषमुक्ति’ या ‘क्लीन चिट’ नहीं कहा जा सकता।

    दरअसल, इससे पहले हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने ग्वालियर के खनिज अधिकारी घनश्याम यादव को जिले में काम करने से रोक दिया था और उनके आचरण पर गंभीर टिप्पणी की थी. राज्य सरकार को निर्देश दिए कि ग्वालियर में तत्काल ईमानदार और सक्षम खनिज अधिकारी की पोस्टिंग की जाए, तब तक पूरे खनिज विभाग की जिम्मेदारी कलेक्टर संभालेंगे।

    इसके बाद सरकार ने भिंड में पदस्थ खनिज अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा को ग्वालियर भेजा तो उनकी नियुक्ति और पहले की पोस्टिंग को लेकर सवाल किए गए थे।


    AAG विवेक खेड़कर की खिंचाई

    सुनवाई के दौरान जब अपर महाधिवक्ता (AAG) विवेक खेड़कर ने माइनिंग अफसर का पक्ष रखने का प्रयास किया, तो अदालत ने उन पर भी कड़ा एतराज जताया. कोर्ट ने सख्त लहजे में टिप्पणी की कि अगर आप शासन का पक्ष छोड़कर अधिकारी का व्यक्तिगत बचाव करना चाहते हैं, तो फिर शासन का पक्ष छोड़ दीजिए। इस दौरान AAG कोर्ट में कई बार माफी मांगते और ‘सॉरी’ बोलते नजर आए. हाईकोर्ट ने मामले में विस्तृत अध्ययन और पूरी जानकारी के साथ 30 सितंबर को अगली रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।