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  • MP: बोत्सवाना से आई मादा चीता CCB2 कूनो से पहुंची गांधी सागर… आज CM करेंगे जंगल में रिलीज

    MP: बोत्सवाना से आई मादा चीता CCB2 कूनो से पहुंची गांधी सागर… आज CM करेंगे जंगल में रिलीज


    मंदसौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में ‘प्रोजेक्ट चीता’ (‘Project Cheetah’) के तहत एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है. बोत्सवाना से भारत लाई गई मादा चीता CCB2 (Female cheetah CCB2) अब कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से गांधीसागर अभयारण्य (Gandhi Sagar Sanctuary) पहुंच चुकी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) रविवार को उसे गांधीसागर के जंगलों में छोडेंगे. इसके बाद अभयारण्य में 2 नर और 2 मादा समेत कुल 4 चीते हो जाएंगे।

    दरअसल, मध्यप्रदेश में प्रोजेक्ट चीता के तहत चीतों के संरक्षण और पुनर्स्थापना का दायरा बढ़ाया जा रहा है. इसी क्रम में बोत्सवाना से भारत लाई गई मादा चीता CCB2 को कूनो नेशनल पार्क से गांधीसागर अभयारण्य में स्थानांतरित किया जा रहा है।


    बोत्सवाना से कूनो और अब गांधीसागर तक का सफर

    CCB2 को 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना के घांजी से भारत लाया गया था. इसके बाद उसे श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में रखा गया. क्वारंटीन अवधि पूरी करने के बाद मई 2026 में उसे कूनो के जंगल में विमुक्त किया गया।

    कूनो में रहने के दौरान CCB2 ने भारतीय परिस्थितियों को तेजी से अपनाया. उसने यहां के वन परिदृश्य और पर्यावरण के साथ खुद को ढाल लिया. अब उसे कूनो से गांधीसागर अभयारण्य में स्थानांतरित किया जा रहा है।


    गांधीसागर में अब 4 चीते होंगे

    CCB2 के पहुंचने के बाद गांधीसागर अभयारण्य में चीतों की संख्या बढ़कर चार हो जाएगी. इनमें दो नर और दो मादा चीते होंगे। गांधीसागर में पहले से मौजूद चीते प्रभाष, पावक और धीरा CCB2 के साथ रहेंगे. नई मादा चीते के आने से गांधीसागर में चीता संरक्षण और पुनर्स्थापना के प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।


    कूनो के बाद गांधीसागर में नया अध्याय

    CCB2 का सफर बोत्सवाना से भारत, फिर कूनो और अब गांधीसागर तक पहुंचा है. कूनो की परिस्थितियों में सफलतापूर्वक ढलने के बाद अब उसे एक अलग वन्य पारिस्थितिकी में स्थानांतरित किया जा रहा है।

    मध्यप्रदेश में कूनो और गांधीसागर को चीता संरक्षण एवं पुनर्स्थापना के महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है. CCB2 का गांधीसागर पहुंचना इसी अभियान के अगले चरण के तौर पर देखा जा रहा है।

  • MP: गुना में अधिकारियों पर भड़के केन्द्रीय मंत्री सिंधिया, बोले – कलेक्टर कहां है .. बुलाओ जल्दी

    MP: गुना में अधिकारियों पर भड़के केन्द्रीय मंत्री सिंधिया, बोले – कलेक्टर कहां है .. बुलाओ जल्दी


    गुना।
    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) का एक वीडियो इन दिनों चर्चा में है. वायरल वीडियो (Viral Video) में सिंधिया प्रशासनिक अधिकारियों से नाराजगी जताते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में वह कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल (Collector Kishore Kumar Kanyal) को फटकारते नजर आते हैं. इसके साथ ही महिला पुलिस अधीक्षक हितिका वासल (Hitika Vasal) से भी उनकी नाराजगी दिखाई दे रही है. यह पूरा मामला एक आदिवासी गांव का बताया जा रहा है, जहां सिंधिया बीजेपी के मंडल अध्यक्ष मोहन बारेला के घर उनके छोटे भाई ताराचंद की मृत्यु पर शोक संवेदना प्रकट करने पहुंचे थे।

    बताया गया कि सिंधिया जब मोहन बारेला के घर पहुंचे तो उन्होंने अपने छोटे भाई ताराचंद की मौत को लेकर अपनी बात रखी. मोहन बारेला ने सिंधिया को बताया कि उनके भाई की मौत सामान्य नहीं थी, बल्कि उनकी हत्या की गई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी शिकायत और मामले को गंभीरता से नहीं लिया. उनके मुताबिक, हत्या के मामले को सामान्य दुर्घटना की धाराओं में दर्ज कर लिया गया. उन्होंने सिंधिया से कहा कि उनके छोटे भाई की मौत के मामले में उन्हें अभी तक न्याय नहीं मिल पाया है।


    बीजेपी नेता ने बताई भाई की मौत की दूसरी कहानी

    मोहन बारेला की बात सुनने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया नाराज हो गए. उन्होंने तत्काल कलेक्टर और एसपी को तलब किया. वायरल वीडियो में सिंधिया अधिकारियों से इस मामले को लेकर सवाल करते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने कलेक्टर को फटकार लगाई और मामले का निराकरण करने के निर्देश दिए. सिंधिया के सामने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई इस बातचीत का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    वायरल वीडियो में केंद्रीय मंत्री का अधिकारियों के प्रति नाराजगी भरा रवैया दिखाई दे रहा है. वह कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल से मामले को लेकर जवाब मांगते नजर आते हैं. वहीं महिला एसपी हितिका वासल भी मौके पर मौजूद दिखाई देती हैं. मोहन बारेला की ओर से भाई की मौत के मामले में न्याय नहीं मिलने की बात कहे जाने के बाद सिंधिया ने अधिकारियों को मामले को गंभीरता से लेने और इसका निराकरण करने के निर्देश दिए।


    कलेक्टर और एसपी के सामने जताई नाराजगी

    ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हुई इस बातचीत का वीडियो अब वायरल हो रहा है. वीडियो में सिंधिया की नाराजगी और अधिकारियों को दिए गए निर्देश चर्चा का विषय बने हुए हैं. फिलहाल सामने आई जानकारी के मुताबिक, सिंधिया ने बीजेपी मंडल अध्यक्ष के भाई ताराचंद की मौत के मामले में अधिकारियों से कार्रवाई और मामले के निराकरण के निर्देश दिए हैं।

  • MP: शिवपुरी में 1.24 करोड़ के सरकारी भवन में पड़ी दरारें, महज 18 दिन पहले किया था उद्घाटन

    MP: शिवपुरी में 1.24 करोड़ के सरकारी भवन में पड़ी दरारें, महज 18 दिन पहले किया था उद्घाटन


    शिवपुरी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शिवपुरी जिले (Shivpuri district) के खनियाधाना (Khaniadhana) में विकास और निर्माण कार्यों की पोल खोलने वाली एक तस्वीर सामने आई है. जिस इमारत पर 1 करोड़ 24 लाख रुपया खर्च किया गया, वह उद्घाटन के महज 18 दिन के भीतर ही जर्जर हालत में पहुंच गई है। खनियाधाना से बामोरकलां में शिफ्ट होने वाली नवनिर्मित उप तहसील की इस बिल्डिंग (Newly constructed sub-tehsil building) में जगह-जगह गहरी दरारें उभर आई हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

    बीती 31 अगस्त को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पिछोर विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने बड़े ही उत्साह के साथ बामोरकलां नई उप तहसील भवन का लोकार्पण किया था. इस भवन के निर्माण को लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंच से तारीफ की थी।

    कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि निर्माण कार्य में घोर लापरवाही और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया . ठेकेदार को इस बात का अंदेशा था कि पोल जल्द खुल जाएगी, इसलिए उसने आनन-फानन में दीवारों पर आई दरारों पर पुताई और लीपापोती करवा दी और जनप्रतिनिधियों से फीता कटवा दिया. अब स्थिति यह है कि लोकार्पण के ठीक 18 दिन बाद ही पुताई की परतें उखड़ने लगी हैं और बिल्डिंग के भीतर व बाहर चौड़ी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं।

    इस पूरे मामले को लेकर जब खनियाधाना तहसीलदार निशिकांत जैन से बात की गई तो उनका कहना है कि पीयू के अधिकारी और ठेकेदार को बिल्डिंग में आई दरार और अन्य खामियों को लेकर अवगत करा दिया गया है. उनका कहना है कि उन्होंने अभी बिल्डिंग का पजेशन नहीं लिया गया है.


    किसानों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश

    खनियाधाना से बामोरकलां शिफ्ट होने वाली इस उप-तहसील भवन की बदहाली से स्थानीय ग्रामीणों और किसानों में गहरा रोष व्याप्त है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार के 1.24 करोड़ रुपये पानी में बहा दिए गए और अधिकारियों व ठेकेदार की सांठगांठ के कारण पहली ही बारिश और 18 दिनों में इमारत की नींव हिलने लगी है।

  • MP: उज्जैन में शिप्रा और महाकाल महालोक में एकसाथ जले 33.27 लाख दीये, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

    MP: उज्जैन में शिप्रा और महाकाल महालोक में एकसाथ जले 33.27 लाख दीये, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में गुरुवार शाम शिप्रा नदी (Shipra River) के घाटों से लेकर महाकाल महालोक (Mahakal Mahalok) तक ऐसा दीपोत्सव हुआ, जिसमें एक साथ लाखों दीये प्रज्ज्वलित किए गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के जन्मदिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में शिप्रा तट और महाकाल महालोक में कुल 33 लाख 27 हजार दीये एक साथ जलाए गए.

    आयोजकों के अनुसार, इतने बड़े स्तर पर एक साथ दीप प्रज्ज्वलित कर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया. यह आयोजन ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत के तौर पर किया गया. उज्जैन के रामघाट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह मौजूद रहे. सभी ने उज्जैनवासियों के साथ मिलकर दीप प्रज्ज्वलित किए।

    कार्यक्रम के लिए शाम 7 बजे का समय तय किया गया था. सायरन बजते ही शिप्रा नदी के अलग-अलग घाटों और महाकाल महालोक में एक साथ दीप प्रज्ज्वलन शुरू हुआ. इस दौरान 25 हजार से अधिक वॉलंटियर्स के साथ श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक भी शामिल हुए. कुछ ही देर में शिप्रा के घाटों पर दूर तक दीयों की कतारें दिखाई देने लगीं. रामघाट, दत्त अखाड़ा, केदारेश्वर घाट, सुनहरी घाट और भूखी माता घाट समेत अलग-अलग स्थान रोशनी से जगमगा उठे. महाकाल महालोक में भी दीप प्रज्ज्वलित किए गए. दीयों की रोशनी के बीच शिप्रा तट का नजारा काफी आकर्षक नजर आया. बड़ी संख्या में लोग इस सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन का हिस्सा बने. आयोजन में शामिल लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।


    रामघाट पर मुख्यमंत्री ने जलाया ‘आशीर्वाद का दीया’

    उज्जैन के रामघाट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया. उनके साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह भी मौजूद रहे. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और अन्य अतिथियों ने शिप्रा आरती में हिस्सा लिया. मां शिप्रा की आराधना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की गई. आयोजन से जुड़े लोगों के मुताबिक, दीप प्रज्ज्वलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों के दौरान राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र सेवा से जोड़कर देखा गया. इसी भाव के साथ उज्जैन में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया गया।

    उज्जैन में शिप्रा के विभिन्न घाटों और महाकाल महालोक में कुल 33 लाख 27 हजार दीये प्रज्ज्वलित किए गए. इस सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन को आयोजकों ने विश्व रिकॉर्ड बताया है. इससे पहले कार्यक्रम के लिए 25 लाख से ज्यादा दीये जलाने की तैयारी की गई थी, लेकिन अंतिम आयोजन में यह संख्या 33.27 लाख तक पहुंची. दीप प्रज्ज्वलन के दौरान बड़ी संख्या में वॉलंटियर्स की भूमिका रही. घाटों पर पहले से दीयों को व्यवस्थित किया गया था. सायरन बजने के बाद सभी ने एक साथ दीप जलाना शुरू किया, जिससे कुछ ही समय में पूरा आयोजन क्षेत्र रोशनी से भर गया।

    यह दीपोत्सव सिर्फ उज्जैन तक सीमित नहीं रहा. आयोजन के तहत मध्य प्रदेश के सभी जिलों और 845 आइकॉनिक प्लेस पर भी एक साथ दीये प्रज्ज्वलित किए गए. आयोजकों के अनुसार, पूरे प्रदेश में कुल 3 करोड़ 55 लाख दीये जलाए गए. इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में प्रदेशभर के अलग-अलग स्थानों को दीपों से सजाया गया. उज्जैन इसका मुख्य केंद्र रहा, जहां शिप्रा तट और महाकाल महालोक में एक साथ 33 लाख 27 हजार दीये जलाए गए।


    घाटों से महाकाल महालोक तक रोशनी

    शाम होते ही उज्जैन के प्रमुख घाटों का दृश्य बदल गया. रामघाट, दत्त अखाड़ा, केदारेश्वर घाट, सुनहरी घाट और भूखी माता घाट पर दीयों की कतारें नजर आईं. दूसरी तरफ महाकाल महालोक भी दीपों की रोशनी से जगमगा उठा. हजारों श्रद्धालुओं और नागरिकों की मौजूदगी में हुए इस आयोजन में एक साथ दीप प्रज्ज्वलित करने का दृश्य लोगों के लिए खास आकर्षण रहा. 25 हजार से अधिक वॉलंटियर्स ने इस आयोजन में हिस्सा लिया. उज्जैन में हुए इस दीपोत्सव के साथ आयोजकों के अनुसार विश्व रिकॉर्ड बनाया गया. वहीं पूरे मध्य प्रदेश में 845 आइकॉनिक प्लेस समेत अलग-अलग स्थानों पर 3.55 करोड़ दीये प्रज्ज्वलित किए गए. इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के जरिए प्रदेशभर में सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन किया गया।

  • MP: लाड़ली बहना योजना पर हर माह 1,900 करोड़ रुपये खर्च… HC ने सरकार को नोटिस भेज मांगा जवाब

    MP: लाड़ली बहना योजना पर हर माह 1,900 करोड़ रुपये खर्च… HC ने सरकार को नोटिस भेज मांगा जवाब


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) को लेकर अब हाईकोर्ट (High Court) में सवाल उठाए गए हैं. योजना की उपयोगिता, सरकारी खजाने पर पड़ रहे आर्थिक भार और महिलाओं को दी जा रही राशि के इस्तेमाल को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है. हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच (High Court Gwalior Bench) ने मामले में प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. ग्वालियर की सुधा दुबे की ओर से दायर इस जनहित याचिका में योजना से जुड़े कई सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने कोर्ट में पक्ष रखा. हाईकोर्ट ने सरकार से योजना के लाभार्थियों, उन्हें दी जा रही राशि और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी भी मांगी है।

    याचिकाकर्ता की ओर से योजना के तहत खर्च होने वाली सरकारी राशि के इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया है. वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा का कहना है कि महिलाओं के कल्याण के नाम पर खर्च हो रहे सरकारी पैसे का इस्तेमाल रोजगार और स्थायी आर्थिक अवसर पैदा करने में किया जा सकता था. उनका तर्क है कि अगर महिलाओं के हित में पैसा खर्च करना था तो इससे उद्योग-धंधे या रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते थे. उनका कहना है कि रोजगार के जरिए पैसा आर्थिक गतिविधियों में बना रह सकता है और महिलाओं को लंबे समय तक इसका फायदा मिल सकता है. अनिल मिश्रा ने सवाल उठाया कि सरकार इस पैसे से क्या फायदा हासिल कर रही है, यह स्पष्ट होना चाहिए. उनके मुताबिक, सीधे राशि देने की बजाय अगर महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाए तो उससे आर्थिक गतिविधियों का एक चक्र बन सकता है।

    सरकारी खजाने पर पड़ रहे बोझ को लेकर उठे सवाल

    वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने योजना के खर्च को लेकर दावा किया कि हर महीने करीब 1,900 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. उन्होंने सरकारी खजाने की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर कर्ज लेकर पैसा बांटा जाएगा तो बेरोजगारी और बढ़ सकती है. उनके मुताबिक, जनता के टैक्स से आने वाले पैसे का इस्तेमाल डेवलपमेंट, एजुकेशन और रोजगार जैसे क्षेत्रों में किया जाना चाहिए. वकील ने यह भी दावा किया कि मध्य प्रदेश पर करीब 3.08 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है. हालांकि यह आंकड़ा और इससे जुड़े आर्थिक प्रभाव याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई दलीलों का हिस्सा हैं. इन दावों पर राज्य सरकार का जवाब अभी सामने आना बाकी है।

    याचिकाकर्ता की ओर से लाड़ली बहना योजना के लागू होने के समय को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. अनिल मिश्रा ने कहा कि योजना मार्च 2023 में लागू की गई थी और उस समय चुनाव का माहौल था. उन्होंने योजना को चुनाव के समय तोहफे बांटने जैसी स्थिति बताते हुए इस पर सवाल उठाया. यह याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई दलील है. इस मामले में सरकार का पक्ष अभी आना बाकी है।

    मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से योजना से जुड़े आंकड़े और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा है. कोर्ट ने यह जानकारी भी मांगी है कि योजना के कितने लाभार्थी हैं और उनके लिए कितनी राशि का भुगतान किया जा रहा है. सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करना है. सरकारी वेबसाइट पर वर्तमान में करीब 1 करोड़ 25 लाख पात्र आवेदक दर्ज हैं. याचिकाकर्ता की ओर से इसी योजना के वित्तीय असर और इसके उद्देश्य को लेकर सवाल उठाए गए हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने कहा कि सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी किए हैं, ताकि सरकार इन सवालों पर अपना जवाब दे सके. अब सरकार को योजना से जुड़े आंकड़े और रिकॉर्ड अदालत के सामने रखने हैं।


    रोजगार और स्वरोजगार के जरिए महिलाओं को मजबूत किया जाए

    लाड़ली बहना योजना को लेकर हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बावजूद फिलहाल योजना को बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है. कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है और मामले की आगे की कार्रवाई सरकार के जवाब के बाद होगी. याचिकाकर्ता की मुख्य दलील है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सीधे भुगतान के बजाय रोजगार और स्वरोजगार के स्थायी अवसर पैदा करने पर सरकारी धन खर्च किया जाना चाहिए. अब इस मामले में सरकार के जवाब पर नजर रहेगी. सरकार को यह बताना होगा कि योजना का उद्देश्य क्या है, इसके तहत कितने लाभार्थी हैं, कितनी राशि वितरित की जा रही है और योजना से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड क्या हैं. इसके बाद हाईकोर्ट में मामले की आगे सुनवाई होगी।

  • ब्रिक्स बाजार में विदेशी मेहमानों को पसंद आई मप्र की बाग प्रिंट कला, कपड़ों पर खुद लगाए ठप्पे

    ब्रिक्स बाजार में विदेशी मेहमानों को पसंद आई मप्र की बाग प्रिंट कला, कपड़ों पर खुद लगाए ठप्पे


    नई दिल्ली।
    नई दिल्ली (New Delhi) स्थित भारत मंडपम (Bharat Mandapam) में आयोजित 18वां ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन. इस अवसर पर सजे ‘ब्रिक्स बाजार’ (‘BRICS Market’) में बाग प्रिंट (Bagh Print) कला आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी गई. प्राकृतिक रंगों और लकड़ी के बारीक नक्काशीदार ब्लॉक्स से तैयार होने वाली इस हस्तशिल्प कला का इंटरनेशनल मंच पर जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है. यहां पहुंचने वाले देश-विदेश के उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों को बाग प्रिंट की विशिष्ट छपाई तकनीक, प्राकृतिक रंगों के वैज्ञानिक उपयोग और लकड़ी के ब्लॉक्स से कपड़े पर छपाई की सदियों पुरानी प्रक्रिया से परिचित कराया जा रहा है।

    ब्रिक्स बाजार का अवलोकन करने पहुंचे सदस्य और आमंत्रित देशों के प्रतिनिधियों ने बाग प्रिंट स्टॉल पर पहुंचकर ब्लॉक प्रिंटिंग की प्रक्रिया को बेहद करीब से देखा. इस वैश्विक अवसर के लिए विशेष रूप से ‘BRICS’ लोगो वाले लकड़ी के ब्लॉक्स तैयार किए गए थे।

    मध्य प्रदेश के धार जिले की विश्व प्रसिद्ध इस कला को प्रतिनिधियों ने न सिर्फ सराहा, बल्कि स्वयं लकड़ी के नक्काशीदार ठप्पों को प्राकृतिक रंगों में डुबोकर कपड़ों पर प्रिंट भी किया. प्रतिनिधियों ने अपने हाथों से तैयार किए गए इन प्रिंटेड कपड़ों को यादगार स्मृति-चिह्न के रूप में अपने साथ ले गए।

    18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर मध्य प्रदेश के धार जिले के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित मास्टर क्राफ्ट्समैन मोहम्मद बिलाल खत्री की ओर से बाग प्रिंट का जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है.

    तमाम देशों से आए प्रतिनिधियों द्वारा इस पारंपरिक कला की बारीकियों को समझना और इसमें सहभागिता करना मध्य प्रदेश की समृद्ध शिल्प परंपरा के लिए एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि माना जा रहा है।

    ग्लोबल मंच पर 11 से अधिक देशों के कलाकारों का जमावड़ा
    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के उपलक्ष्य में आयोजित इस ब्रिक्स बाजार में भारत के अलावा ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, वियतनाम, ईरान, कजाकिस्तान, इंडोनेशिया, मलेशिया, बेलारूस और इथियोपिया सहित दर्जनों देशों के प्रसिद्ध कलाकार व शिल्पकार भाग ले रहे हैं, जहां मप्र की बाग प्रिंट अपनी अमिट छाप छोड़ रही है।

  • MP: सीहोर के इस गांव में पानी फिल्टर प्लांट से क्लोरीन गैस लीक… आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ, 6 लोग पहुंचे अस्पताल

    MP: सीहोर के इस गांव में पानी फिल्टर प्लांट से क्लोरीन गैस लीक… आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ, 6 लोग पहुंचे अस्पताल


    सीहोर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सीहोर जिले (Sehore district) में पानी साफ करने के लिए इस्तेमाल होने वाली क्लोरीन गैस (Chlorine Gas) जब अचानक हवा में फैल जाए तो क्या होगा? आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और फिर लोगों का अस्पताल की तरफ दौड़ना।

    मामला लसुड़िया खास गांव (Lasudiya Khas village) का है. यहां एक पानी फिल्टर प्लांट (Water filtration plant) है, जहां तालाब के पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन गैस का इस्तेमाल किया जा रहा था. सब कुछ सामान्य था, लेकिन इसी दौरान क्लोरीन गैस के टैंक में लीकेज हो गया।

    गैस टैंक से बाहर निकली तो आसपास मौजूद लोगों को इसका असर महसूस होने लगा. कुछ लोगों की आंखों में तेज जलन होने लगी, तो कुछ को सांस लेने में परेशानी हुई. देखते ही देखते इलाके में हड़कंप मच गया।

    गैस के संपर्क में आए लोगों को इलाज के लिए सीहोर जिला अस्पताल पहुंचाया गया. यहां डॉक्टरों ने प्रभावित लोगों का इलाज करना शुरू किया. अस्पताल पहुंचे लोगों की हालत को लेकर चिंता जरूर थी, लेकिन डॉक्टरों ने राहत की खबर दी. जिला अस्पताल के डॉक्टर हरिओम गुप्ता के मुताबिक, गैस से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को गंभीर परेशानी नहीं हुई है और सभी लोग खतरे से बाहर हैं।


    पानी साफ करने वाली गैस ने बढ़ाई चिंता

    क्लोरीन का इस्तेमाल आमतौर पर पानी को साफ करने के लिए किया जाता है. लसुड़िया खास के इस फिल्टर प्लांट में भी तालाब के पानी को साफ करने के लिए इसका उपयोग हो रहा था. लेकिन टैंक में लीकेज के बाद यही गैस लोगों के लिए परेशानी की वजह बन गई।

    घटना की सूचना के बाद प्लांट में स्थिति को कंट्रोल करने की कोशिशें शुरू की गईं. हालांकि, गैस लीक होने की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया।

    राहत की बात यही है कि आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जरूर हुई, लेकिन किसी की हालत गंभीर नहीं बताई गई है. सभी प्रभावित लोग खतरे से बाहर हैं. लोगों का सवाल है कि पानी को साफ करने के लिए इस्तेमाल हो रहा क्लोरीन गैस का टैंक आखिर लीक कैसे हुआ? और क्या प्लांट में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे?

  • MP: उज्जैन में प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी टस से मस नहीं हुई खड़े हनुमान जी प्रतिमा… श्रद्धालु मान रहे चमत्कार

    MP: उज्जैन में प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी टस से मस नहीं हुई खड़े हनुमान जी प्रतिमा… श्रद्धालु मान रहे चमत्कार


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण किया जा रहा है। इस कारण उज्जैन के प्रसिद्ध खड़े हनुमान जी (Standing Hanuman Ji) के मंदिर को हटाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन की टीमों ने मंदिर का ढांचा तोड़ दिया है लेकिन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा टस से मस होने का नाम नहीं ले रही है। प्रशासन की तमाम कोशिशें विफल रही हैं। इसको श्रद्धालु चमत्कार मान रहे हैं। विरोध में हिंदूवादी संगठनों और भक्तों ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ कर मूर्तिं को हटाने का विरोध किया। अब तकनीकी जांच की बात कही जा रही है।


    सिहस्थ के मद्देनजर चौड़ी की जा रही सड़क

    अधिकारियों ने बताया कि उज्जैन में सिहस्थ 2028 की तैयारियों के मद्देनजर सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इस चौड़ीकरण की हद में खड़े हनुमान जी के मंदिर का कुछ हिस्सा आ रहा है जिसे प्रसासन हटाने में लगा हुआ है। यह क्षेत्र कंठाल चौराहे से लेकर गोपाल मंदिर तक के मार्ग में है। मंदिर का ढांचा हटाने के बाद प्रशासन खड़े हनुमान जी की मूर्ति को बिना नुकसान पहुंचाए हटाना चाहता है।


    तमाम कोशिशें बेकार, टस से मस नहीं हुई प्रतिमा

    बताया जाता है कि बीते एक हफ्ते के भीतर प्रशासन की टीमों ने तीन बार हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने की कोशिशें की लेकिन मूर्ति टस से मस नहीं हुई। अब श्रद्धालु, संत और हिंदूवादी संगठन इसे चमत्कार मान रहे हैं। लोग प्रशासन से मूर्ति को नहीं हटाने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि मौजूदा वक्त में हनुमान जी की प्रतिमा दक्षिण दिशा की ओर है जबकि प्रशासन ने टंकी चौराहे पर मंदिर के लिए जो जगह दी है वहां प्रतिमा का मुख उत्तर दिशा की ओर होगा।


    जैसे पता चल कि प्रशासन आने वाला है, लग गया जमावड़ा

    श्रद्धालुओं का कहना है कि इससे मंदिर के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व पर असर पड़ सकता है। बताया जाता है कि मंगलवार को बाबा महाकाल की राजसी सवारी के बाद खबरें फैलीं कि प्रशासन की टीम एक बार फिर मूर्ति को हटाने के लिए पहुंच सकती है। इसके बाद लोगों का जमावड़ा लगने लगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता और महामंडलेश्वर शैलेशानंद मंदिर पहुंच गए।


    हनुमानजी से मत उलझो, मिट जाओगे…

    भारी भीड़ के बीच भक्तों ने मंदिर के सामने हनुमान चालीसा का पाठ किया। लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। नारेबाजी करते हुए लोगों ने हनुमान जी की प्रतिमा को किसी भी सूरत में नहीं हटाने देने की चेतावनी दी। हिंदूवादी नेता रूपेश ठाकुर ने सरकार विकास के नाम पर 60 मंदिर हटा चुकी है। मैं सरकार से दो-टूक कहना चाहता हूं कि अटल विहारी वाजपेयी ने कहा था श्री राम जी मत उलझो मिट जाओगे। आज हम कहते हैं हनुमानजी से मत उलझो, मिट जाओगे।


    बढ़ रहा आक्रोश, विरोध प्रदर्शन होगा तेज

    रूपेश ठाकुर ने आगे कहा कि महापौर और पार्षद को इस्तीफा दे देना चाहिए। विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों का कहना है कि उनका विरोध और तेज होगा। मौजूदा वक्त में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा टेंट में विराजमान है। वहीं प्रशासन दिन प्रति दिन बढ़ते लोगों के आक्रोश के कारण कोई मुसीबत मोल नहीं लेना चाहता है। प्रशासन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने की कोशिशें कर रहा है। इसके लिए बेहद सावधानी बरती जा रही है।


    पुरातत्व विभाग की टीम भी लौटी

    प्रशासन की ओर से तमाम कोशिशें की जा चुकी हैं लेकिन मूर्ति हिलने का नाम नहीं ले रही है। इतना ही नहीं एक बार पुरातत्व विभाग की टीम भी लौट चुकी है। आलम यह कि खड़े हनुमान जी के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। नगर निगम की ओर से प्रतिमा को शिफ्ट करने के प्रयास सफल नहीं होने की खबरें ट्रेंड कर रही हैं। अब खड़े हनुमान जी मंदिर का मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया। अब मूर्ति की तकनीकी जांच की बात सामने आ रही है।

  • MP के छिंदवाड़ा में भगवा झंडा हटाने पर भड़के हिंदू संगठन… प्रदर्शन के बाद खुद निगम आयुक्त ने लगाया

    MP के छिंदवाड़ा में भगवा झंडा हटाने पर भड़के हिंदू संगठन… प्रदर्शन के बाद खुद निगम आयुक्त ने लगाया


    छिंदवाड़ा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छिंदवाड़ा (Chhindwara) में मंगलवार दोपहर मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने लगे भगवा झंडे को हटाने को लेकर विवाद हो गया. नगर निगम के कर्मचारियों ने पोल से भगवा झंडा (Saffron flag) उतार दिया था. जब हिंदू संगठनों के सदस्यों को पता चला कि झंडा नीचे पर पड़ा है, तो वे मौके पर पहुंचे और विरोध करने लगे, जिसके बाद वहां जल्द ही भीड़ जमा हो गई. रामलीला समिति के अध्यक्ष अरविंद राजपूत (Arvind Rajput) ने आरोप लगाया कि कलेक्टर हरेंद्र नारायण (Collector Harendra Narayan) के निर्देश पर और नगर निगम आयुक्त सीपी राय के कहने पर भगवा झंडा हटाया गया. प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक नगर आयुक्त खुद मौके पर आकर झंडा दोबारा नहीं लगा देते।

    विरोध-प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर निगम कमिश्नर सीपी राय मौके पर पहुंचे. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बात की और खंभे पर दोबारा केसरिया झंडा लगा दिया. इसके बाद विरोध-प्रदर्शन खत्म हो गया और हालात सामान्य हो गए. जानकारी के मुताबिक, खंभे पर लगे भगवा झंडे की जगह तिरंगा लगाने की योजना थी, लेकिन जिस तरह से झंडा हटाया गया, उससे विरोध शुरू हो गया. इसके बाद फिलहाल भगवा झंडे को उसकी मूल जगह पर वापस लगा दिया गया. इस घटना के बाद कुछ समय के लिए मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने भीड़ जमा हो गई. प्रशासन ने झंडा हटाने के आरोपों को लेकर कोई अलग बयान जारी नहीं किया है।


    निगम कमिश्नर ने खुद लगाया झंडा

    कमिश्नर सीपी राय ने बताया कि मंगलवार दोपहर नगर निगम के कर्मचारियों ने मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने लगे एक खंभे से भगवा झंडा हटा दिया था. हिंदू संगठनों के सदस्यों को झंडा नीचे पड़ा देखकर इस घटना का पता चला. इसके बाद वे मौके पर पहुंचे और विरोध करने लगे. नगर निगम की एक टीम भी वहां पहुंची. जब झंडे को लेकर विवाद बढ़ने लगा, तो वे खुद मौके पर गए लोगों की बात सुनी, खुद झंडा लगाया और मामले को सुलझाया।

  • MP: सागर के बंड़ा में जहरीली शराब से 11 मौतों के बाद बड़ा एक्शन, 5 अधिकारी निलंबित

    MP: सागर के बंड़ा में जहरीली शराब से 11 मौतों के बाद बड़ा एक्शन, 5 अधिकारी निलंबित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर जिले (Sagar district) की बंडा तहसील में जहरीली शराब (Spurious liquor) पीने से हुई मौतों के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने सख्त रुख अपनाया है. रविवार सुबह ही मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया था कि घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. इसके बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 आबकारी और दो पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया, जबकि एक सीनियर अफसर को जिले से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है।

    घटना बंडा तहसील के गोगरा खुर्द, नौरोज और पाटन गांवों में सामने आई है. शुरुआती प्रशासनिक जानकारी के अनुसार जहरीली शराब पीने से 10 लोगों की मौत हुई है, जबकि स्थानीय बीजेपी विधायक ने मृतकों की संख्या 11 बताई है. कई अन्य लोगों के बीमार होने की भी जानकारी सामने आई है।


    3 अधिकारी सस्पेंड, 1 मुख्यालय अटैच

    मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माने जाने पर सागर की सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा वृत्त की आबकारी उप-निरीक्षक प्रोशनी उरेती को सस्पेंड कर दिया गया है. वहीं, मामले में समान रूप से जिम्मेदार माने जाने पर उपायुक्त और संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को जिले से हटाकर ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है. यानी जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में कुल 4 अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।

    पुलिस विभाग ने भी इस प्रकरण में बंडा थाना प्रभारी श्री राजेंद्र सिंह कुशवाहा और गुगरा चौकी प्रभारी एसआई श्री पूरन लाल लड़िया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार, 6 सितंबर की सुबह ही स्पष्ट रूप से कह दिया था कि इस घटना के लिए दोषी किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।


    CM मोहन यादव ने कहा- दोषी किसी भी कीमत पर नहीं बचेंगे

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना को बेहद संवेदनशील बताते हुए अधिकारियों को तत्काल जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के मुताबिक, नई दिल्ली प्रवास के दौरान जैसे ही उन्हें सागर की घटना की जानकारी मिली, उन्होंने सागर जिले के प्रभारी मंत्री और संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्र में तत्काल जांच के साथ-साथ पीड़ित परिवारों को राहत और बीमार लोगों के लिए समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।


    मौके पर पहुंचा सीनियर अफसरों का दल

    मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सागर संभाग के कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक समेत वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित इलाकों में पहुंचे. अधिकारी दल ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली. इसके साथ ही अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज और चिकित्सा व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्र में लगातार स्क्रीनिंग भी कराई जा रही है, ताकि शराब पीने के बाद बीमार हुए लोगों की पहचान कर उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध कराया जा सके।


    10 मौतों की प्रशासनिक पुष्टि, विधायक ने बताया आंकड़ा 11

    सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल के अनुसार, जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर बंडा तहसील के प्रभावित गांवों में अवैध जहरीली शराब पीने से 10 लोगों की मौत हुई है. हालांकि, स्थानीय बीजेपी विधायक वीरेंद्र लोधी ने मृतकों की संख्या 11 बताई है. उन्होंने बताया कि बंडा सिविल अस्पताल से करीब 25 लोगों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में भेजा गया है।

    कलेक्टर ने बताया कि बुखार और सिरदर्द जैसी शिकायत वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है. ऐसे तीन लोगों को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (BMCH) भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है. उनके मुताबिक, इन मरीजों की हालत गंभीर नहीं है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका को लेकर कलेक्टर ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है. शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है।


    ललितपुर से जहरीली शराब की सप्लाई का शक

    घटना की जांच में शराब के संभावित स्रोत को लेकर भी बड़ा खुलासा सामने आया है. शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि संदिग्ध शराब की सप्लाई उत्तर प्रदेश के ललितपुर से हुई थी।

    कलेक्टर प्रतिभा पाल के अनुसार, शुरुआती जांच में ललितपुर से इस तरह की जहरीली शराब की सप्लाई करने वाले एक गिरोह की जानकारी सामने आई है. चूंकि सागर का यह इलाका उत्तर प्रदेश की सीमा के नजदीक है, इसलिए इस एंगल की भी जांच की जा रही है. हालांकि, शराब की वास्तविक सप्लाई चेन और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है।


    प्रभावित इलाके की 7 शराब दुकानें सील

    घटना के बाद जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम भी उठाए हैं. प्रभावित क्षेत्र में सात शराब दुकानों को सील कर दिया गया है और शराब के सैंपल लेने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन ने अधिकारियों को अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।


    शराब पीने वालों से प्रशासन की अपील

    प्रशासन ने उन लोगों से तत्काल स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की है, जिन्होंने हाल के दिनों में शराब का सेवन किया था और अब उन्हें उल्टी, सिरदर्द, बुखार या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी महसूस हो रही है. अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचकर मेडिकल जांच कराएं।


    कांग्रेस ने न्यायिक जांच की मांग की

    घटना को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी राज्य सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। ग्वालियर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य में शराब माफिया बेखौफ होकर लोगों की जान ले रहे हैं।

    वहीं, बंडा के पूर्व कांग्रेस विधायक तरवर लोधी ने दावा किया कि बंडा विकासखंड के कई गांवों में शनिवार रात लोगों ने शराब पी थी, जिसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. उन्होंने बताया कि कई लोगों को बंडा के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां कुछ लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि अन्य को सागर रेफर किया गया।


    गुजरात की घटना के बाद MP में जहरीली शराब से मौतों ने बढ़ाई चिंता

    मध्य प्रदेश में यह घटना ऐसे समय हुई है, जब कुछ दिन पहले गुजरात के भावनगर जिले में जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की मौत की घटना सामने आई थी। सागर की घटना के बाद अब प्रशासन की नजर अवैध शराब के नेटवर्क और इसके संभावित सप्लाई स्रोत पर है. फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट, शराब के सैंपल और जांच के आधार पर यह स्पष्ट होने का इंतजार है कि मौतों की वास्तविक वजह क्या थी और जहरीली शराब की सप्लाई में कौन-कौन लोग शामिल थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहले ही साफ कर दिया है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।