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  • MP: पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं मैहर कलेक्टर…. प्रसूता को दी समझाइश

    MP: पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं मैहर कलेक्टर…. प्रसूता को दी समझाइश


    मैहर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मैहर की कलेक्टर (Maihar: Collector) IAS बिदिशा मुखर्जी (IAS Bidisha Mukherjee) इन दिनों अपने सख्त और संवेदनशील तेवरों के लिए चर्चा में हैं. हाल ही में जब वे मैहर के सिविल अस्पताल (Maihar Civil Hospital) का औचक जायजा लेने पहुंचीं, तो वहां का नजारा देख वह खुद को रोक नहीं पाईं और एक ‘सुपर वुमेन’ की तरह समाज की कुरीतियों पर दहाड़ती नजर आईं. पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं…

    अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को जब यह पता चला कि एक महिला ने अपने पांचवें बच्चे को जन्म दिया है, तो वे दंग रह गईं. उन्होंने महिला के पास जाकर बड़ी ही आत्मीयता, लेकिन दृढ़ता के साथ उसे समझाइश दी कि आज के महंगाई के दौर में इतने बच्चों का पालन-पोषण, उनकी अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना कितना चुनौतीपूर्ण है. कलेक्टर ने महिला से सीधे सवाल किया कि आखिर इतने बड़े परिवार का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा?


    अस्पताल में उनके इस तेवर ने वहां मौजूद कर्मचारियों और मरीजों के परिजनों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया. यह पूरा घटनाक्रम समाज की उस गहरी सोच पर प्रहार करता है जहां आज भी ‘पुत्र प्राप्ति’ या अन्य सामाजिक कारणों से लगातार बच्चे पैदा किए जाते हैं।


    महिला सशक्तिकरण का दिया उदाहरण

    कलेक्टर ने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि आज जमाना बदल गया है. उन्होंने उदाहरण दिया कि “आज मध्य प्रदेश में 31% कलेक्टर महिलाएं हैं, हमारी पूरी टीम महिलाओं की है. फिर यह भेदभाव क्यों?”


    ग्राउंड स्टाफ को फटकार

    उन्होंने केवल महिला को ही नहीं टोका, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के अमले और मैदानी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी कड़े सवाल दागे. कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आखिर परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता अभियान कहां है? उन्होंने साफ शब्दों में निर्देश दिए कि विभाग सिर्फ कागजों पर काम न करे, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों को छोटे परिवार के फायदों और मातृ स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करे।

    कलेक्टर ने अस्पताल में मिल रहे भोजन की क्वालिटी की भी जांच की और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए यह भी स्वीकार किया कि मैहर एक नया जिला है और यहां महिला रोग विशेषज्ञ, नेफ्रोलॉजिस्ट और ऑर्थोपेडिक सर्जन जैसे विशेषज्ञों की कमी एक बड़ी चुनौती है, जिसे दूर करने के लिए वे निरंतर प्रयास कर रही हैं।

  • MP में 100 साल पहले विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों की वापसी…. CM आज सूखपार में करेंगे रिलीज

    MP में 100 साल पहले विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों की वापसी…. CM आज सूखपार में करेंगे रिलीज


    बालाघाट।
    मध्य प्रदेश ( Madhya Pradesh) के वन्यजीव इतिहास (Wildlife History) में 28 अप्रैल का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है. ‘टाइगर’ और ‘चीता’ स्टेट के बाद अब मध्यप्रदेश ( Madhya Pradesh) अपनी धरती पर ‘जंगली भैंसों’ को दोबारा बसाने जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) बालाघाट के सूपखार क्षेत्र में 4 जंगली भैंसों को उनके नए प्राकृतिक आवास में छोड़कर इस अभियान का आगाज करेंगे.

    तकरीबन 100 साल पहले मध्यप्रदेश से विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति को वापस लाने के लिए असम सरकार के साथ एक खास समझौता हुआ है.

    इसके तहत पहले चरण में असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से 4 भैंसों (3 मादा, 1 नर) का दल कान्हा पहुंच रहा है. ‘फाउंडर पॉपुलेशन’ के रूप में कुल 50 जंगली भैंसों को लाने का लक्ष्य है, जिनमें से इस सीजन में 8 भैंसें लाई जाएंगी. काजीरंगा और कान्हा के विशेषज्ञ डॉक्टरों और अधिकारियों की टीम इस पूरे ‘ट्रांसलोकेशन’ की निगरानी कर रही है।


    MP-असम के बीच वाइल्ड लाइफ एक्सचेंज

    मुख्यमंत्री मोहन यादव और असम के सीएम हिमंता विश्व सरमा के बीच हुए समझौते के तहत दोनों राज्यों के बीच वन्यजीवों का आदान-प्रदान होगा।


    कान्हा ही क्यों बना पहली पसंद?

    भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून के अध्ययन के अनुसार, कान्हा टाइगर रिजर्व का सूपखार और टोपला क्षेत्र जंगली भैंसों के लिए देश में सबसे उपयुक्त स्थान है. यहां के बड़े घास के मैदान (Grasslands) और प्रचुर जल स्रोत इस प्रजाति के फलने-फूलने के लिए अनुकूल हैं.


    विलुप्ति की कगार से वापसी

    मध्यप्रदेश में आखिरी बार 1979 में सूपखार क्षेत्र में एक जंगली भैंसा देखा गया था. शिकार और आवास की कमी के कारण यह प्रजाति यहां खत्म हो गई थी. वर्तमान में इनकी मुख्य आबादी केवल असम में है. इस पहल से न केवल एक दुर्लभ प्रजाति बचेगी, बल्कि कान्हा का इकोसिस्टम भी सशक्त होगा.

  • MP: उज्जैन के इस गांव में दुल्हे ने पेश की मिसाल…. 50 लाख का दहेज लौटाया

    MP: उज्जैन के इस गांव में दुल्हे ने पेश की मिसाल…. 50 लाख का दहेज लौटाया


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन जिले (Ujjain district) में बड़नगर तहसील (Badnagar tehsil) के ग्राम बंगरेड (Bangred village) में आयोजित एक तिलक समारोह ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक संदेश दिया है. कई बार देखने को मिलता है कि दहेज के लालच में शादी टूट जाती है. लेकिन बंगरेड में एक परिवार ने दहेज न लेकर समाज के सामने मिसाल पेश की है. परिवार ने करीब 50 लाख रुपए का दहेज लौटा दिया, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।


    दूल्हे पक्ष ने दहेज लेने से किया इनकार

    क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह राजावत के पुत्र आदर्श दीप राजावत का विवाह इंदौर जिले के देपालपुर तहसील अंतर्गत तामलपुर निवासी किसान महेन्द्र सिंह पंवार की पुत्री बिंदिया कुमारी से आगामी नवंबर 2026 में तय हुआ है. जिसकी सगाई (तिलक) के दौरान दूल्हे पक्ष ने दहेज लेने से मना कर दिया।


    50 लाख का दहेज वधु पक्ष को किया वापस

    रविवार को बड़नगर तहसील के बंगरेड स्थित रिसोर्ट में तिलक समारोह कार्यक्रम हुआ. कार्यक्रम के दौरान जब वधु पक्ष द्वारा पारंपरिक रूप से 25 लाख रुपए नकद और 15 तोला सोना (कुल करीब 50 लाख रुपए) देने की प्रक्रिया शुरू की गई, तभी दूल्हे आदर्श दीप राजावत और उनके पिता जितेंद्र सिंह राजावत ने दहेज लेने से साफ इनकार कर दिया.


    लोगों ने बताया दहेज प्रथा के खिलाफ प्रेरणादायक पहल

    दूल्हे पक्ष ने बताया कि वे किसी भी प्रकार का दहेज स्वीकार नहीं करेंगे और केवल प्रतीकात्मक रूप में एक सोने की अंगूठी ही लेंगे. इसके बाद पूरे सम्मान के साथ नकद राशि और सोने के आभूषण वधु पक्ष को लौटा दिए गए. लोगों ने इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक बड़ी और प्रेरणादायक पहल बताया।

    जितेंद्र सिंह राजावत ने कहा, “समाज में दहेज जैसी कुरीतियां अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन यदि लोग आगे आकर पहल करें, तो बदलाव संभव है. कई गरीब परिवार बेटियों की शादी में दहेज के कारण परेशान होते हैं. इसलिए इस पहल से समाज में सकारात्मक सुधार की उम्मीद है।

    दूल्हे को चाहिए सुंदर दुल्हन और ससुर को बहु बिटिया
    उज्जैन में आधा करोड़ का दहेज लेने से मना करने वाले ससुर जीतेंद्र राजावत ने कहा कि “उन्हे एक बहु और उसके साथ आने वाले धन दौलत की जरुरत नहीं है. ईश्वर ने उन्हे बहुत कुछ दिया है. उन्हे तो घर में एक बिटिया चाहिए तो पुत्रवधु के रुप में मिल रही है.” तिलक समारोह के बाद रिंग सेरेमनी में वर पक्ष ने बहु पक्ष की ओर से सिर्फ एक गोल्ड रिंग स्वीकारा. यह शादी नवंबर महीने में होनी है और इससे पहले ससुर की ओर से सिर्फ मजबूत रिश्ते की डिमांड की गई है जिससे दो परिवार एक साथ जुड़ जाएं।

  • MP: मुरैना में भक्ति की अनोखी मिसाल… खड़ियाहार गांव की रेखा ने भगवान ठाकुर जी से रचाया विवाह

    MP: मुरैना में भक्ति की अनोखी मिसाल… खड़ियाहार गांव की रेखा ने भगवान ठाकुर जी से रचाया विवाह


    मुरैना।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुरैना (Morena) जिले के खड़ियाहार गांव (Khadiyahar village) में भक्ति की अनोखी मिसाल देखने को मिली. 42 साल की रेखा तोमर (Rekha Tomar) ने भगवान ठाकुर जी (Bhagwan Thakur ji) को अपना दूल्हा मानकर वैदिक रीति से विवाह रचा लिया. पूरे गांव में भजन-कीर्तन और राधे-राधे के जयकारे गूंजे. इस आयोजन को ग्रामीणों ने आस्था और समर्पण का दुर्लभ उदाहरण बताया।

    मुरैना जिले के एक छोटे से गांव खड़ियाहार में 42 वर्षीय रेखा तोमर ने भगवान श्री ठाकुर जी को अपना जीवनसाथी मानते हुए पूरे विधि-विधान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह रचा लिया. यह घटना सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उस आस्था की अभिव्यक्ति है, जिसमें व्यक्ति अपने जीवन को पूरी तरह ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देता है. गांव में हुए इस आयोजन ने हर किसी को चौंकाया भी और भावुक भी किया.

    इस अनोखे विवाह की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है. ग्रामीणों के मुताबिक, यह आयोजन पूरी तरह पारंपरिक हिंदू रीति से किया गया, जिसमें विवाह की हर रस्म को विधिवत निभाया गया. रेखा तोमर लंबे समय से ठाकुर जी की भक्ति में लीन थीं और उन्होंने पहले ही यह संकल्प लिया था कि वह अपना जीवन प्रभु को समर्पित करेंगी. यही संकल्प इस विवाह का आधार बना. भक्ति के इस रूप ने एक बार फिर यह साबित किया कि आस्था की कोई सीमा नहीं होती और यह व्यक्ति को अलग पहचान देती है.

    वैदिक रीति से संपन्न हुआ विवाह

    ग्राम खड़ियाहार के प्राचीन देवालय में यह विवाह संपन्न हुआ. मंदिर के पुजारी रामदुलारे बाबा ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी धार्मिक रस्में पूरी कराईं. लग्न पत्रिका का वाचन हुआ. पूजन और पैर पूजाई जैसी परंपराएं निभाई गईं. पूरा आयोजन एक पारंपरिक शादी की तरह ही आयोजित किया गया, जिसमें हर विधि का पालन किया गया.


    भाई ने किया कन्यादान, भावुक हुआ माहौल

    इस विवाह का सबसे भावुक पल तब आया, जब रेखा तोमर के भाई सुरेंद्र ने उनका कन्यादान किया. परिवार के लिए यह क्षण आस्था और भावना का संगम था. ग्रामीणों ने भी इस दृश्य को श्रद्धा के साथ देखा. यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी एक अलग अनुभव लेकर आया.


    भजन-कीर्तन से गूंजा पूरा गांव

    विवाह के दौरान पूरे गांव में भक्ति का माहौल रहा. भजन-कीर्तन और राधे-राधे के जयकारों से वातावरण गूंज उठा. बड़ी संख्या में ग्रामीण इस आयोजन में शामिल हुए. लोगों ने इसे आस्था और समर्पण की अनोखी मिसाल बताया. गांव के कई प्रमुख लोग भी कार्यक्रम में मौजूद रहे और उन्होंने इसे दुर्लभ आयोजन माना.


    कौन हैं रेखा तोमर

    रेखा तोमर, पिता लाखन सिंह, लंबे समय से धार्मिक प्रवृत्ति की रही हैं. ग्रामीणों के अनुसार, वह अधिकतर समय पूजा-पाठ और भजन में व्यतीत करती थीं. उनका यह निर्णय अचानक नहीं था, बल्कि वर्षों की भक्ति और साधना का परिणाम था. उन्होंने सामाजिक जीवन से अलग हटकर आध्यात्मिक जीवन को प्राथमिकता दी.


    ईश्वर को जीवनसाथी मानने की परंपरा नई नहीं

    धार्मिक मान्यताओं में ईश्वर को जीवनसाथी मानने की परंपरा नई नहीं है. इतिहास और भक्ति परंपरा में कई उदाहरण मिलते हैं, जहां भक्त ने ईश्वर को अपना सर्वस्व मान लिया. ऐसे आयोजन समाज में आस्था और विश्वास को मजबूत करते हैं. हालांकि, यह व्यक्तिगत आस्था का विषय होता है और हर व्यक्ति इसे अपने तरीके से समझता है।

  • MP: छतरपुर में पंचायत सचिव का कारनामा… 3 'जिंदा' लोगों के जारी कर दिए डेथ सर्टिफिकेट…

    MP: छतरपुर में पंचायत सचिव का कारनामा… 3 'जिंदा' लोगों के जारी कर दिए डेथ सर्टिफिकेट…


    छतरपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छतरपुर जिले (Chhatarpur district) में एक पंचायत सचिव को 3 जिंदा लोगों के नाम पर मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) जारी करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है. जहां स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सचिव ने शायद किसी दबाव में आकर ऐसा किया हो, वहीं अधिकारियों ने संकेत दिया कि यह गलती शायद कंप्यूटर चलाने की जानकारी न होने के कारण हुई हो।

    सचिव अमर सिंह के खिलाफ यह कार्रवाई 17 अप्रैल को रमाबाई रायकवार, गिरजा विश्वकर्मा और कल्लू अहिरवार की ओर से दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद की गई. इन लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया था और उनके मृत्यु प्रमाण पत्र गलत तरीके से बना दिए गए थे।


    पेंशन रुकी तो पता चला- ‘हम तो मर चुके हैं’

    अपनी शिकायत में रायकवार और विश्वकर्मा ने कहा कि उन्हें मृत घोषित किए जाने के बाद उनकी विधवा पेंशन रोक दी गई थी. अहिरवार ने दावा किया कि वह दलित कल्याण योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभों का फायदा नहीं उठा पा रहे थे, क्योंकि उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था।


    बदला या तकनीकी गलती?

    स्थानीय लोगों ने दावा किया कि इन तीनों लोगों ने चुनाव के दौरान चंद्रापुरा के सरपंच के खिलाफ काम किया था, और हो सकता है कि सरपंच ने बदला लेने के लिए सचिव पर दबाव डाला हो।


    CEO की कार्रवाई और सचिव का निलंबन

    जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) नमः शिवाय अरजरिया ने चंद्रापुरा ग्राम पंचायत के सचिव अमर सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया. हालांकि, अरजरिया ने कहा कि वह इस शिकायत पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते, क्योंकि अभी जांच चल रही है. उन्होंने कहा कि सचिव को कंप्यूटर चलाने की ज्यादा जानकारी नहीं थी और इसलिए शायद यह गलती हो गई हो।

    CEO ने कहा कि शुरुआती तौर पर यह पाया गया कि यह कृत्य ‘मध्य प्रदेश पंचायत सेवा (आचरण) नियम, 1996’ के तहत एक गंभीर कदाचार (गलत आचरण) है. निलंबन की अवधि के दौरान अमर सिंह को जनपद पंचायत गौरिहार कार्यालय से अटैच किया जाएगा और उन्हें जीवन-निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

  • MP: सिंधिया के स्वागत में ग्वालियर स्टेशन पर उमड़ी भीड़…. धक्का-मुक्की में 7 साल की बच्ची घायल

    MP: सिंधिया के स्वागत में ग्वालियर स्टेशन पर उमड़ी भीड़…. धक्का-मुक्की में 7 साल की बच्ची घायल


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर रेलवे स्टेशन (Gwalior Railway Station) पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के स्वागत के दौरान बड़ी संख्या में समर्थकों के पहुंचने से भीड़ की स्थिति बन गई. इस दौरान हुई धक्का-मुक्की में एक 7 साल की बच्ची के घायल होने की बात सामने आई है.

    दरअसल, बच्ची अपने परिवार के साथ यात्रा के लिए स्टेशन पहुंची थी, तभी वह भीड़ के बीच फंस गई. परिजनों ने बमुश्किल उसे बाहर निकाला. बच्ची के घायल होने की जानकारी उसके माता-पिता ने दी है।

    परिजनों ने आरोप लगाया है कि VVIP आगमन के दौरान पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं होने से आम यात्रियों को परेशानी हुई. साथ ही स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्य के चलते रास्ते संकरे होने की वजह से भी स्थिति और बिगड़ने की बात कही गई है. फिलहाल यह मामला चर्चा में है और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


    क्या है पूरा मामला?

    दरअसल केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शुक्रवार रात अंचल के चार दिवसीय दौरे पर ग्वालियर स्टेशन पहुंचे थे, जहां उनके समर्थक स्वागत करने उमड़ पड़े. इस दौरान बेकाबू हुए समर्थकों के बीच धक्का मुक्की शुरू हो गई और इस तरह कई लोग इस धक्का मुक्की का शिकार हुए, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी गोवा एक्सप्रेस से गोवा जाने के लिए स्टेशन पहुंचे सिकंदर कंपू निवासी कुशवाह परिवार को हुई, जहां उनकी 7 साल की मासूम इक्षिता भीड़ के पैरों के नीचे दब गई.

    मासूम चीख पुकार मचाने लगी, लेकिन तब तक भीड़ उसके पैरों को कुचलती हुई आगे बढ़ गई. बमुश्किल मासूम के परिजनों ने उसे भीड़ से बचाया. रोती बिलखती हुई मासूम इक्षिता को परिजनों ने जैसे तैसे शांत कराया.


    परिजनों का फूटा गुस्सा

    वहीं, परिजनों का मासूम बेटी के पैर में चोट आने पर गुस्सा फूट बैठा. परिजनों ने कहा कि “माना VVIP का आगमन है, इसका मतलब ये नही की जनता को परेशान किया जाएगा. उनके साथ धक्का मुक्की होगी, बच्चों को पैरों तले दबा दिया जाएगा. परिजनों ने स्टेशन पर इस अव्यवस्था के लिए RPF,स्थानीय पुलिस बल, स्टेशन प्रबंधन को जिम्मदार माना है.


    संकरे रास्ते ने बढ़ाई मुश्किल

    बता दें कि स्टेशन पर पुनर्विकास का काम चल रहा है. जिसके चलते वैकल्पिक रास्ते प्लेटफॉर्म से बाहर आने के लिए तैयार किए गए हैं जो काफी संकरे भी हैं. यही वजह है कि हर बार की तरह बड़ी संख्या में पहुंचे सिंधिया समर्थकों के बीच स्वागत की होड़ में आम लोग, यात्री परेशान होते हुए दिखे।

  • MP: ग्वालियर में महिला ने पति की सगी बहन को सौतन बताकर ले लिया तलाक… HC पहुंचा मामला

    MP: ग्वालियर में महिला ने पति की सगी बहन को सौतन बताकर ले लिया तलाक… HC पहुंचा मामला


    ग्वालियर।
    ग्वालियर (Gwalior) के कुटुंब न्यायालय (Family Court) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने पति की सगी बहन (Husband’s real Sister) को ही ‘दूसरी पत्नी’ बताकर कोर्ट से एकतरफा तलाक हासिल कर लिया. महिला ने फैमिली फोटो को सबूत के तौर पर पेश कर न्यायालय को गुमराह किया और तलाक की डिक्री ले ली।

    जब पति को इस फैसले की जानकारी मिली तो उसने दस्तावेज खंगाले और सच्चाई सामने आई. अब पति ने इस एकतरफा तलाक को ग्वालियर हाईकोर्ट (Gwalior High Court) में चुनौती दी है और आरोप लगाया है कि पत्नी ने धोखे से कोर्ट से फैसला लिया. मामले में अब हाईकोर्ट सुनवाई करेगा, जिससे पूरे घटनाक्रम पर बड़ा खुलासा हो सकता है।

    दरअसल, यह मामला ग्वालियर की रहने वाली एक 40 साल की महिला का है, साल 1998 में उसकी शादी हुई थी, पति एक मार्केटिंग कंपनी में अधिकारी है और काम के सिलसिले से अक्सर बाहर रहता था. इसी वजह से दोनों के बीच में विवाद बढ़ता गया और साल 2015 में महिला अलग रहने लगी।

    10 साल से अलग रह रही थी पत्नी
    करीब 10 साल से अलग रह रही महिला किसी भी स्थिति में पति से तलाक लेना चाहती थी. लेकिन पति तलाक देने के लिए तैयार नहीं था. ऐसे में साल 2021 में महिला ने कुटुंब न्यायालय में तलाक की अर्जी लगाई. जिसमें बताया गया कि पति ने दूसरी शादी कर ली है।


    परिवार के साथ था पति, उसी फोटो को बनाया आधार

    पत्नी ने पति से तलाक लेने के लिए कोर्ट में सबूत के तौर पर एक फोटो पेश किया, जिसमें उसका पति अपनी बहन और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ खड़ा था. पत्नी ने उस फोटो में मौजूद ननद यानी अपने पति की सगी बहन को उसकी दूसरी पत्नी बता दिया।


    पति को अप्रैल में हुई जानकारी

    ऐसे में कोर्ट ने उसे सबूत मानते हुए महिला को तलाक की डिक्री दे दी. पति को तलाक की जानकारी अप्रैल के पहले हफ्ते में मिली तो उसने सारा रिकार्ड देखा. तब उसे मालूम हुआ कि पत्नी ने उसकी सगी बहन को दूसरी पत्नी बताते हुए एक तरफा तलाक की डिक्री हासिल कर ली थी।

    ऐसे में अब पति ने ग्वालियर हाईकोर्ट में एक तरफा तलाक की डिक्री को चैलेंज किया है. जिसमें पत्नी द्वारा कोर्ट को गुमराह कर धोखे से फैसला लेने की जानकारी दी है. ऐसे में अब हाई कोर्ट पूरे मामले की सुनवाई करेगा।

  • MP: सिंधिया का बड़ा ऐलान…. शिवपुरी के कोलारस में बनेगा 2500 करोड़ का डिफेंस प्लांट

    MP: सिंधिया का बड़ा ऐलान…. शिवपुरी के कोलारस में बनेगा 2500 करोड़ का डिफेंस प्लांट


    शिवपुरी।
    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने कोलारस (Kollars) में 2,500 करोड़ के डिफेंस प्लांट (Defense Plant) की घोषणा की, जिससे 2,000 रोजगार मिलेंगे। साथ ही 19.68 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू कर क्षेत्रीय विकास, कनेक्टिविटी और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शनिवार को मध्य प्रदेश के शिवपुरी के कोलारस नगर के लिए बड़े औद्योगिक विकास की घोषणा की। उन्होंने 2,500 करोड़ रुपये के रक्षा निर्माण संयंत्र (डिफेंस प्लांट) की स्थापना के साथ-साथ क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का शुभारंभ किया। शिवपुरी-कोलारस दौरे के पहले दिन एक जनसभा को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा कि प्रस्तावित रक्षा संयंत्र अगले दो महीनों के भीतर स्थापित किया जाएगा।

    सिंधिया ने कहा कि कोलारस को 2,500 करोड़ रुपये का रक्षा प्लांट मिलेगा, जो क्षेत्र के औद्योगिक परिदृश्य को बदल देगा और लगभग दो दशकों से लंबित मांग को पूरा करेगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह संयंत्र कोलारस से लगभग 15 किलोमीटर दूर कोटा हाईवे और मुंबई-ग्वालियर हाईवे के जंक्शन पर स्थापित किया जाएगा, जिसे उन्होंने कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान बताया।

    2,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे
    उन्होंने कहा कि इस परियोजना से लगभग 2,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा। परियोजना के व्यापक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए सिंधिया ने कहा कि कोलारस, जो अब तक मुख्य रूप से कृषि, खासकर टमाटर उत्पादन के लिए जाना जाता था, अब देश के रक्षा निर्माण क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।

    उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा
    उन्होंने कहा कि कोलारस लंबे समय से अपनी कृषि क्षमता के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब यह देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में भी योगदान देगा। यहां निर्मित उपकरण हमारी सीमाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस निवेश से सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय व्यापारियों और उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। यह परियोजना गुणक प्रभाव (मल्टीप्लायर इफेक्ट) पैदा करेगी, जिससे आगे औद्योगिक विकास और आर्थिक विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।

    कनेक्टिविटी में सुधार और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा
    औद्योगिक घोषणा के अलावा, केंद्रीय मंत्री ने कोलारस में 19.68 करोड़ रुपये की विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। पीएम-जनमन योजना के तहत उन्होंने छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावासों का भूमिपूजन किया और जनपद पंचायत भवन का शिलान्यास किया। सिंधिया ने एक नए बस स्टैंड और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन भी किया, जिसका उद्देश्य कनेक्टिविटी में सुधार और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इसके अलावा, उन्होंने एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की आधारशिला भी रखी, जिससे क्षेत्र में स्वच्छता और शहरी ढांचे को मजबूती मिलेगी। संतुलित विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए सिंधिया ने कहा कि प्रयास किए जा रहे हैं ताकि क्षेत्र के हर हिस्से तक बुनियादी ढांचा, रोजगार और आवश्यक सेवाएं पहुंच सकें।

  • MP: उज्जैन में 8 करोड़ के बीमा घोटाले का खुलासा… पैसों के लिए मरे हुए लोगों को भी नहीं छोड़ा

    MP: उज्जैन में 8 करोड़ के बीमा घोटाले का खुलासा… पैसों के लिए मरे हुए लोगों को भी नहीं छोड़ा


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन जिले (Ujjain district) से एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां लोगों ने पैसे कमाने के लिए मृतकों को भी नहीं बख्शा. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (Economic Offences Cell) ने एक बड़े इंश्योरेंस घोटाले (Major Insurance Scams) का खुलासा किया है, जिसमें करीब 8 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई है. इस पूरे मामले में बीमा एजेंट से लेकर पंचायत स्तर तक के लोग शामिल पाए गए हैं. जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस से जुड़ा हुआ है. इस घोटाले में मृत लोगों और गंभीर बीमार व्यक्तियों के नाम पर बीमा पॉलिसी करवाई गई और बाद में फर्जी दस्तावेजों के जरिए क्लेम करने की कोशिश की गई.

    इस मामले में अब तक 21 नॉमिनी सहित कुल 40 लोगों को आरोपी बनाया गया है. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के एसपी समर वर्मा ने इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि यह स्कैम तब सामने आया जब बीमा कंपनी के पास लगातार ऐसे क्लेम आने लगे, जिनमें पॉलिसी लेने के कुछ समय बाद ही लोगों की मौत दिखाई गई थी. इस पर कंपनी को शक हुआ और उसने अपने स्तर पर जांच शुरू की.

    जांच के दौरान करीब 27 ऐसे मामले सामने आए, जिनमें बीमा पॉलिसी लेने के बाद जल्दी मौत दिखाई गई थी. इनमें से 8 मामले तो ऐसे निकले, जिनमें पहले से ही मृत लोगों के नाम पर पॉलिसी करवाई गई थी. यह मामला सामने आने के बाद बीमा कंपनी ने इसकी शिकायत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को दी. ईओडब्ल्यू ने जब इस पूरे मामले की जांच शुरू की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. जांच में पता चला कि आरोपियों ने पहले से मृत या गंभीर रूप से बीमार लोगों के नाम पर बीमा पॉलिसी जारी करवाई. इसके बाद उनके नाम पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए गए और बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया गया.


    मृत लोगों के नाम पर बनाई गई बीमा पॉलिसियां

    कुछ मामलों में तो यह भी सामने आया कि पहले से मृत लोगों को जीवित दिखाकर उनके नाम पर पॉलिसी करवाई गई और बाद में उनकी मौत दिखाकर क्लेम करने की कोशिश की गई. इस पूरे खेल में पंचायत स्तर के अधिकारी भी शामिल पाए गए. जांच में सामने आया कि ग्राम सरपंच, ग्राम सचिव और सहायक सचिव ने मिलकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए. इन दस्तावेजों के आधार पर बीमा कंपनी में क्लेम लगाया गया. इसके अलावा क्लेम को सही साबित करने के लिए झूठे साक्ष्य भी तैयार किए गए.

    ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले में 10 बीमा एजेंट शामिल थे. इनमें से कुछ एजेंटों ने एक से अधिक पॉलिसियां जारी करवाई थीं. इससे साफ है कि यह एक संगठित तरीके से किया गया अपराध था, जिसमें कई लोग मिलकर काम कर रहे थे. एसपी समर वर्मा ने बताया कि अब तक दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें ग्राम सरपंच, ग्राम सचिव और सहायक सचिव की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई है. इन लोगों ने पहले से मृत व्यक्तियों के नाम पर दोबारा मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए और उन्हें आधार बनाकर बीमा क्लेम करने की कोशिश की.

    इस मामले में अभी विस्तृत जांच जारी है. ईओडब्ल्यू दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच करवा रही है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि आगे की जांच में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं. यह मामला इस बात को भी उजागर करता है कि किस तरह कुछ लोग सरकारी सिस्टम और बीमा प्रक्रियाओं का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. संगठित तरीके से किए गए इस अपराध में कई स्तरों पर मिलीभगत सामने आई है, जो बेहद गंभीर चिंता का विषय है.


    जांच में 40 आरोपी, आगे और खुलासे की संभावना

    फिलहाल ईओडब्ल्यू ने सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इस तरह के मामलों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे. यह घोटाला न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि यह समाज की संवेदनाओं को भी ठेस पहुंचाने वाला मामला है, जहां लोगों ने पैसे के लिए मृतकों के नाम का भी दुरुपयोग किया. अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में आगे क्या खुलासे होते हैं और कितने लोग इस मामले में और सामने आते हैं.

  • MP: कान्हा में मृत मिला एक और बाघ शावक…. राज्य में इस साल अब तक 22 बाघों की मौत

    MP: कान्हा में मृत मिला एक और बाघ शावक…. राज्य में इस साल अब तक 22 बाघों की मौत


    मंडला।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के कान्हा रिजर्व (Kanha Reserve) के कोर एरिया में एक शावक (Tiger Cub.) मृत पाया गया, जिससे इस साल जनवरी से अब तक राज्य में बाघों (Tigers) की मौत की संख्या बढ़कर 22 हो गई है. यह रिजर्व मंडला और बालाघाट जिलों में फैला हुआ है.

    कान्हा टाइगर रिजर्व की डिप्टी डायरेक्टर अमिता बी ने बताया कि एक से डेढ़ साल के इस बच्चे का शव गुरुवार शाम को रिजर्व के मुख्य क्षेत्र के सरगी इलाके में मिला. शावक का पोस्टमॉर्टम शुक्रवार को किया गया और हम इसकी रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि मौत का सही कारण पता चल सके.

    अफसर ने आगे बताया कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि बच्चे को उसकी मां ने दूध नहीं पिलाया होगा, जिसके कारण भूख से उसकी मौत हो गई. इसी बाघिन का एक और बच्चा तीन दिन पहले मर गया था. उन्होंने कहा, “बाघिन ने चार बच्चों को जन्म दिया था, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है. हम बाघिन और बाकी बचे दो बच्चों पर कड़ी नजर रख रहे हैं.”

    राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में जहां 9 बाघ अभयारण्य हैं, इस साल अब तक बाघों की 22 मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें शावकों की मौतें भी शामिल हैं. अधिकारियों ने बताया कि 2026 की पहली मौत 7 जनवरी को बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य में दर्ज की गई थी.


    विशेषज्ञों की चिंता और जवाबदेही

    जाने-माने वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने राज्य में बाघों की बढ़ती मौतों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, “बाघों की मौतों के मामले में, जिनमें अप्राकृतिक मौतें भी शामिल हैं, मध्य प्रदेश पहले स्थान पर है, जो चिंता का विषय है.”

    दुबे ने आरोप लगाया कि निगरानी और गश्त की कमी के कारण ऐसी घटनाएं हो रही हैं और उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से जवाबदेही की मांग की. उन्होंने पन्ना बाघ अभयारण्य के एक हालिया मामले का जिक्र किया, जहां बाघ की मौत के लगभग 20 दिन बाद उसका सड़ा-गला शव मिला था.