हाइपरसोनिक वार की तैयारी? ईरान पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ विकल्प पर अमेरिका, मिडिल ईस्ट में बढ़ी टेंशन


नई दिल्ली। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (United States Central Command) ने व्हाइट हाउस में हुई एक अहम बैठक में राष्ट्रपति Donald Trump को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों की जानकारी दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कमांडर Brad Cooper ने एक “छोटा लेकिन बेहद शक्तिशाली हमला” करने की रणनीति प्रस्तुत की, जिसमें ईरान की बची हुई सैन्य क्षमता, नेतृत्व और महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है।

इस प्रस्ताव में अत्याधुनिक हथियारों के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा रहा है, जिनमें ‘डार्क ईगल’ हाइपरसोनिक मिसाइल शामिल है। यह मिसाइल करीब 3,200 किलोमीटर तक सटीक हमला करने में सक्षम मानी जाती है और ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को टारगेट कर सकती है।

इसके साथ ही अमेरिकी वायुसेना ने B-1B Lancer जैसे भारी बमवर्षक विमानों की तैनाती भी बढ़ा दी है, जो बड़ी मात्रा में हथियार और उन्नत मिसाइल सिस्टम ले जाने में सक्षम हैं।

बढ़ते तनाव के संकेत:
बीते 24 घंटों में घटनाक्रम तेजी से बदला है। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सख्त संदेश देते हुए कहा कि “तूफान आगे बढ़ रहा है, इसे कोई नहीं रोक पाएगा।” दूसरी ओर, ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है।

Mojtaba Khamenei ने चेतावनी दी कि अगर हमला हुआ तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी और हमलावरों को “समंदर में डुबो दिया जाएगा।”

इसी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया। कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो पिछले चार वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर है, हालांकि बाद में इसमें कुछ गिरावट आई।


जमीनी हालात और क्षेत्रीय असर:
दूसरी ओर, लेबनान में भी हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। दक्षिणी इलाकों में हुए हमलों में कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबर है। यह घटनाएं ऐसे समय में सामने आई हैं जब संघर्ष विराम लागू होने के बावजूद Hezbollah और इजरायल के बीच तनाव बना हुआ है।

ट्रम्प का बदला हुआ सुर:
हालांकि, इन सभी तैयारियों के बीच ट्रम्प ने यह भी कहा है कि वे दोबारा हमले शुरू करने के पक्ष में नहीं हैं और फिलहाल सीजफायर तोड़ने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि ईरान समझौते के लिए तैयार नजर आ रहा है।एक तरफ सैन्य तैयारियां और दूसरी ओर कूटनीतिक बयान—इन दोनों के बीच मिडिल ईस्ट की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।