चार सत्रों की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 362 अंक चढ़कर 76,500 के पार बंद

नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद शुक्रवार को राहत की सांस ली और बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। घरेलू बाजार में मेटल और कमोडिटी शेयरों में खरीदारी का असर प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया। हालांकि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार की तेजी सीमित रही।

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 362.57 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,515.43 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 24.25 अंक यानी 0.10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए 23,897.70 पर पहुंच गया। लगातार गिरावट के बाद प्रमुख सूचकांकों में आई यह तेजी निवेशकों के लिए कुछ राहत लेकर आई।

शुक्रवार के कारोबार में मेटल और कमोडिटी क्षेत्र बाजार की तेजी के प्रमुख आधार रहे। निफ्टी मेटल इंडेक्स में 1.07 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह दिन के प्रमुख प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहा। निफ्टी कमोडिटीज में भी 0.55 प्रतिशत की मजबूती देखने को मिली।

इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.49 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया डिफेंस में 0.39 प्रतिशत की बढ़त रही। निफ्टी मीडिया 0.30 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.28 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.21 प्रतिशत मजबूत होकर बंद हुए। निफ्टी पीएसई में भी मामूली 0.04 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

दूसरी ओर कई प्रमुख सेक्टरों में दबाव बना रहा। निफ्टी रियल्टी में 0.90 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी हेल्थकेयर 0.87 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 0.68 प्रतिशत कमजोर रहे। निफ्टी आईटी में 0.47 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो में 0.45 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स भी 0.43 प्रतिशत नीचे रहा।

व्यापक बाजार में कारोबार मिश्रित रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 156.15 अंक यानी 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 63,079.05 पर बंद हुआ। इसके विपरीत निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 44.70 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 20,095.45 पर पहुंच गया। इससे संकेत मिला कि छोटे शेयरों में चुनिंदा खरीदारी बनी रही, जबकि मिडकैप शेयरों में दबाव देखने को मिला।

बाजार के जानकारों के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका कम होने से भारतीय बाजार को समर्थन मिला। ब्याज दरों के रुख को लेकर बदलती उम्मीदों का असर वैश्विक बाजारों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर भी पड़ रहा है।

हालांकि बाजार में तेजी पूरी तरह मजबूत नहीं रही। ऊंचे स्तरों पर निवेशकों की मुनाफावसूली ने बढ़त को सीमित किया। इसके साथ ही मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे माहौल में विदेशी बाजारों के संकेतों और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर घरेलू निवेशकों की नजर बनी हुई है।

अमेरिका से आने वाले रोजगार संबंधी आंकड़े भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इसके बाद अगले सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर निवेशकों की विशेष नजर रहेगी। महंगाई के आंकड़े अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी ब्याज दर नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।

जानकारों का मानना है कि अगस्त में कोर महंगाई में मामूली नरमी की उम्मीद फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी की संभावना को कमजोर कर सकती है। इससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में स्थिरता आने और वैश्विक शेयर बाजारों पर दबाव कम होने की संभावना बन सकती है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम के साथ घरेलू निवेश धारणा बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।