एमपी में निगम-मंडलों की नियुक्तियों पर मंथन तेज: पूर्व मंत्री-विधायक रेस में इसी महीने हो सकता है फैसला

भोपाल। मध्य प्रदेश में निगम मंडल प्राधिकरण और आयोगों में लंबे समय से अटकी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि प्रदेश में जल्द ही इन नियुक्तियों का ऐलान किया जा सकता है। हाल ही में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के उस बयान के बाद उम्मीदों को और बल मिला है जिसमें उन्होंने निगम-मंडलों की सूची तैयार होने और शीघ्र नियुक्तियां किए जाने की बात कही थी। इसके बाद से ही सत्ता और संगठन से जुड़े कई नेता सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार इसी महीने निगम-मंडलों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष प्राधिकरण और विभिन्न आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियां की जा सकती हैं। इसे लेकर पार्टी के भीतर कवायद और लॉबिंग तेज हो गई है। कई ऐसे नेता जिन्हें हालिया चुनावों या राज्यसभा में मौका नहीं मिल पाया अब निगम-मंडलों के जरिए संगठन और सरकार में भूमिका की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

बताया जा रहा है कि पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य जिन्हें राज्यसभा में स्थान नहीं मिल सका निगम या प्राधिकरण में अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा पूर्व कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त विनोद गोटिया पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया और कांग्रेस से बीजेपी में आए पूर्व मंत्री रामनिवास रावत के नाम भी चर्चा में हैं। पार्टी संगठन इन नेताओं को समायोजित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। पूर्व मंत्रियों की सूची यहीं खत्म नहीं होती। सूत्रों के मुताबिक पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता कमल पटेल रामपाल सिंह इमरती देवी भी दावेदारी पेश कर रहे हैं। वहीं अंचल सोनकर संजय शुक्ला अलकेश आर्य और कलसिंह भाबर जैसे नेताओं के नाम भी संभावित सूची में बताए जा रहे हैं। संगठनात्मक संतुलन क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

पूर्व मंत्रियों के साथ-साथ मौजूदा और पूर्व विधायकों को भी निगम-मंडलों में जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। इस रेस में विधायक अजय बिश्नोई अर्चना चिटनीस शैलेंद्र जैन प्रदीप लारिया और पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह के नाम सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि जिन विधायकों को संगठन या सरकार में फिलहाल कोई बड़ा पद नहीं मिला है उन्हें निगम-मंडलों के जरिए संतुलित किया जा सकता है।गौरतलब है कि फरवरी 2024 में प्रदेश सरकार ने 46 निगम-मंडलों की राजनीतिक नियुक्तियां रद्द कर दी थीं। इसके बाद से ही नए सिरे से नियुक्तियों का इंतजार किया जा रहा था। अब जब पार्टी नेतृत्व की ओर से संकेत मिल चुके हैं तो माना जा रहा है कि जल्द ही तस्वीर साफ हो जाएगी। आने वाले दिनों में घोषित होने वाली यह सूची मध्य प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण भी तय कर सकती है।