मध्य प्रदेश में बिजली संकट गहराया, किसानों को 10 घंटे के वादे के बदले सिर्फ 2 घंटे आपूर्ति का आरोप

मध्य प्रदेश: में बिजली की मांग बढ़ने और उत्पादन प्रभावित होने के बीच बिजली आपूर्ति का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। प्रदेश में खेती और सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत बढ़ी है। इसी बीच कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि किसानों को निर्धारित समय के अनुसार बिजली नहीं मिल रही है। पार्टी का कहना है कि कई क्षेत्रों में किसानों को प्रतिदिन मुश्किल से दो घंटे बिजली मिल पा रही है, जबकि खेती और सिंचाई के लिए 10 घंटे बिजली देने का वादा किया गया था।

प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने पंजाब और उत्तर प्रदेश से बिजली मांगी है। बिजली उत्पादन पर असर पड़ने और बोवनी में देरी के कारण मांग बढ़ने की बात सामने आई है। ऐसे हालात में बिजली की उपलब्धता और नियमित आपूर्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। किसानों के साथ घरेलू उपभोक्ता भी बिजली कटौती से प्रभावित हो रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बिजली संकट को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि किसान गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। खेती के काम और सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। किसानों को जरूरत के मुताबिक बिजली उपलब्ध नहीं होने पर खेतों में सिंचाई का काम प्रभावित हो रहा है। इससे कृषि कार्यों को समय पर पूरा करने में भी परेशानी आ सकती है।

पटवारी ने यह भी कहा कि बिजली की समस्या केवल किसानों तक सीमित नहीं है। आम लोगों को भी अघोषित बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश के कई इलाकों में 10-10 घंटे तक बिजली गुल रहने की शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है। इस वजह से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के घरेलू उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।

बिजली की अनियमित आपूर्ति से ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के अलावा पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ने की बात कही गई है। बार-बार बिजली जाने से छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को भी कामकाज में परेशानी होती है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की नियमित उपलब्धता जरूरी है, लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने से दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

किसानों के लिए सिंचाई के समय बिजली उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है। यदि जरूरत के अनुसार बिजली नहीं मिलती, तो फसलों की बढ़वार और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इससे किसानों की आमदनी और आर्थिक स्थिति पर भी दबाव पड़ सकता है। खेती की बढ़ती लागत और अन्य चुनौतियों के बीच बिजली की कमी किसानों के लिए अतिरिक्त परेशानी बन सकती है।

कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया है कि किसानों को तय समय के मुताबिक बिजली क्यों नहीं मिल रही है और घरेलू उपभोक्ताओं को अघोषित कटौती से राहत कब मिलेगी। पार्टी ने नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। साथ ही, बिजली कटौती होने पर उसकी पूर्व सूचना देने और कटौती के कारणों की जानकारी सार्वजनिक करने की जरूरत पर जोर दिया है।

बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच बने अंतर को दूर करना सरकार के सामने चुनौती है। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने और घरेलू उपभोक्ताओं की परेशानी कम करने का मुद्दा अहम बना हुआ है। फिलहाल, बिजली संकट को लेकर कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा है और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।